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  • लोकसभा में किसानों की आय पर बड़ा खुलासा सरकार ने बताए आंकड़े और योजनाओं से बदली तस्वीर

    लोकसभा में किसानों की आय पर बड़ा खुलासा सरकार ने बताए आंकड़े और योजनाओं से बदली तस्वीर


    नई दिल्ली :भारत की संसद के निचले सदन लोकसभा में किसानों की आय को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया जिसमें यह पूछा गया कि क्या सरकार अपने उस लक्ष्य में सफल रही है जिसमें किसानों की आय को दोगुना करने की बात कही गई थी इस पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विस्तार से जवाब दिया और सरकार की नीतियों और योजनाओं के प्रभाव को सामने रखा

    सरकार की ओर से बताया गया कि कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिनका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना लागत कम करना और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है सरकार ने यह भी बताया कि कृषि बजट में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है वर्ष 2013 14 में यह बजट 21 हजार करोड़ रुपये के आसपास था जो अब बढ़कर वर्ष 2025 26 में एक लाख 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है

    सरकार ने यह भी दावा किया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने हजारों किसानों की सफल कहानियों का संकलन तैयार किया है जिसमें लगभग 75 हजार किसानों की आय विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दोगुनी या उससे अधिक होने का उल्लेख किया गया है ये कहानियां कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं के संयुक्त प्रभाव को दर्शाती हैं

    राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के सर्वेक्षण के अनुसार किसान परिवारों की औसत मासिक आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है वर्ष 2012 13 में यह आय लगभग 6426 रुपये थी जो वर्ष 2018 19 में बढ़कर 10218 रुपये हो गई इस आंकड़े से यह संकेत मिलता है कि किसानों की आय में लगातार सुधार हुआ है हालांकि यह वृद्धि सभी किसानों के लिए समान नहीं है

    इसके अलावा उपभोग व्यय के आंकड़े भी इस बात को दर्शाते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक उपभोग व्यय 1430 रुपये से बढ़कर 4122 रुपये हो गया है जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 2630 रुपये से बढ़कर 6996 रुपये तक पहुंच गया है यह वृद्धि आर्थिक विकास और जीवन स्तर में सुधार को दर्शाती है

    सरकार ने किसानों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं भी लागू की हैं जिनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना जैसी प्रमुख योजनाएं शामिल हैं इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता बीमा सुरक्षा और पेंशन सुविधा दी जा रही है

    कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार किसानों की आत्महत्या से संबंधित आंकड़ों को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के माध्यम से संकलित करती है और इन आंकड़ों को नियमित रूप से प्रकाशित किया जाता है राज्यों द्वारा प्रभावित परिवारों को राहत राशि भी प्रदान की जाती है

    सरकार का कहना है कि फसल विविधीकरण ड्रोन तकनीक प्राकृतिक खेती और कृषि स्टार्टअप जैसे कार्यक्रमों से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं बन रही हैं और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिल रही है

     सरकार का दावा है कि विभिन्न योजनाओं बजट वृद्धि और तकनीकी सुधार के माध्यम से किसानों की आय में सुधार हुआ है हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी भी इस दिशा में और प्रयासों की आवश्यकता है ताकि सभी किसानों को समान रूप से लाभ मिल सके

  • गिरधारी यादव मामले में नया मोड़ जेडीयू के कदम पर आरजेडी ने दिया बया

    गिरधारी यादव मामले में नया मोड़ जेडीयू के कदम पर आरजेडी ने दिया बया


    नई दिल्ली:जेडीयू सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर उठाए गए कदम के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। जेडीयू की ओर से लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उनकी सदस्यता रद्द करने की मांग की गई है। पार्टी का आरोप है कि गिरधारी यादव के बेटे ने 2025 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और इस दौरान खुद गिरधारी यादव ने भी प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसी आधार पर जेडीयू ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का रुख अपनाया है।

    इस पूरे मामले पर आरजेडी की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। आरजेडी सांसद मीसा भारती ने जेडीयू के इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी का बेटा चुनाव लड़ता है तो वह एक वयस्क व्यक्ति है और उसे अपने फैसले लेने का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में हर नागरिक को चुनाव लड़ने और अपनी राजनीतिक राह चुनने की आजादी है। मीसा भारती ने यह भी कहा कि किसी परिवार के भीतर अलग अलग लोग अलग दलों से जुड़ सकते हैं और यह पूरी तरह से व्यक्तिगत अधिकार का मामला है।

    उन्होंने आगे कहा कि चुनाव लड़ना किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इसे किसी भी प्रकार से गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को वोट डालने और अपनी राजनीतिक पसंद रखने की स्वतंत्रता है। ऐसे में यदि किसी के परिवार का सदस्य किसी अन्य पार्टी से चुनाव लड़ता है तो इसे आधार बनाकर कार्रवाई करना उचित नहीं है।

    मीसा भारती ने यह भी कहा कि कई अन्य नेता भी आरजेडी के लिए चुनाव प्रचार में शामिल रहे हैं और यदि आवश्यकता पड़ी तो पार्टी इसकी सूची भी सार्वजनिक कर सकती है। उनके इस बयान से यह साफ संकेत मिलता है कि आरजेडी इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देख रही है और इसे पूरी तरह खारिज नहीं कर रही है।

    उधर जेडीयू की ओर से यह मामला लोकसभा अध्यक्ष के पास भेजा गया है और अब इस पर आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। पार्टी का कहना है कि एक सांसद के तौर पर गिरधारी यादव का कर्तव्य है कि वे पार्टी के सिद्धांतों और अनुशासन का पालन करें। यदि उन पर लगे आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    वहीं गिरधारी यादव ने भी इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि वे अपना पक्ष रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि वे इस आरोप का जवाब विधिवत तरीके से देंगे।

    इस तरह गिरधारी यादव के खिलाफ जेडीयू के कदम और आरजेडी की प्रतिक्रिया के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष का फैसला और दोनों दलों की अगली रणनीति इस मामले को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकती है।
  • भोपाल में भीषण सड़क हादसा तीन युवकों की मौत भूसे से भरी ट्रॉली से टकराई तेज रफ्तार कार

    भोपाल में भीषण सड़क हादसा तीन युवकों की मौत भूसे से भरी ट्रॉली से टकराई तेज रफ्तार कार

    भोपाल । भोपाल में मंगलवार-बुधवार की देर रात एक भीषण सड़क हादसा हुआ जिसमें तीन युवकों की मौत हो गई और एक गंभीर रूप से घायल है यह दुखद घटना ईंटखेड़ी थाना क्षेत्र के बैरसिया रोड पर हुई जहां चार दोस्त रात में चाय पीने के लिए निकले थे

    बताया जा रहा है कि चारों दोस्त अपनी बलेनो कार में थे और अचानक भूसे से भरी ट्रॉली उनकी कार के सामने आ गई तेज रफ्तार और अंधेरे की वजह से कार ने ट्रॉली से जोरदार टक्कर मार दी इस टक्कर में कार के परखच्चे उड़ गए और तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हुआ

    घायल युवक को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है पुलिस ने हादसे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है

    पुलिस ने बताया कि दुर्घटना के समय ट्रॉली का ड्राइवर मौके से फरार हो गया है और उसकी तलाश की जा रही है वहीं मृतकों की पहचान अभी नहीं हो पाई है इस घटना ने सड़क सुरक्षा के सवाल भी उठाए हैं क्योंकि अंधेरे और तेज रफ्तार के कारण यह हादसा इतना भयंकर हुआस्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि इस सड़क पर रात के समय दुर्घटनाओं की संभावना अधिक रहती है और पर्याप्त चेतावनी संकेत नहीं होने से हादसे की गंभीरता और बढ़ जाती है

    कुल मिलाकर भोपाल के बैरसिया रोड पर हुए इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन की आवश्यकता को उजागर किया है पुलिस मामले की जांच कर रही है और ट्रॉली चालक की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी ताकि ऐसे हादसे दोबारा न हों

  • मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की रणनीति-नागरिकों की सुरक्षा से लेकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता तक तैयारी

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की रणनीति-नागरिकों की सुरक्षा से लेकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता तक तैयारी

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच भारत सरकार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, गैस और ईंधन की उपलब्धता, ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर पूरी तरह सतर्क है और हर जरूरी कदम उठा रही है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में बताया कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा है। अब तक 3.75 लाख से ज्यादा भारतीयों को संघर्ष वाले क्षेत्रों से सुरक्षित वापस लाया जा चुका है, जिनमें ईरान से 700 से अधिक मेडिकल छात्र भी शामिल हैं। प्रभावित परिवारों को हर जरूरी मदद और इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उन्होंने पश्चिम एशिया के कई देशों के नेताओं से दो बार बातचीत की है। भारत लगातार खाड़ी देशों, ईरान, इजरायल और अमेरिका के संपर्क में है ताकि क्षेत्र में शांति बहाल हो सके और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोला जा सके।

    भारत ने साफ तौर पर नागरिकों, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा/परिवहन सिस्टम पर हमलों का विरोध किया है और सभी पक्षों से शांतिपूर्ण समाधान की अपील की है। सरकार ने बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। घरेलू एलपीजी उत्पादन भी बढ़ाया गया है और पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है। कुछ जगहों पर अफवाहों के कारण घबराहट में खरीदारी हुई, लेकिन सरकार ने इन अफवाहों को गलत बताया है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि कच्चा तेल और एलपीजी लेकर आने वाले जहाज लगातार भारत पहुंच रहे हैं और सप्लाई बनाए रखने के लिए बैकअप प्लान भी तैयार किए गए हैं।

    ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए भारत ने अपने तेल और गैस आयात के स्रोत 27 से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिए हैं। इसके अलावा, 53 लाख टन से ज्यादा का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाया गया है, जिसे 65 लाख टन तक बढ़ाने की योजना है। पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) और घरेलू एलपीजी उत्पादन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

    विदेशी जहाजों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने 70,000 करोड़ रुपए का ‘मेड इन इंडिया’ शिपबिल्डिंग मिशन शुरू किया है। इसके तहत जहाज निर्माण, मरम्मत और रीसाइक्लिंग क्षमता बढ़ाई जा रही है। रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया कि उर्वरकों (खाद) की पर्याप्त उपलब्धता है और किसानों पर इस संकट का बोझ नहीं पड़ने दिया जाएगा। राज्यों से कहा गया है कि गरीबों और मजदूरों को सरकारी योजनाओं का लाभ लगातार मिलता रहे और जमाखोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

    सरकार ने रेस्तरां, ढाबों, कैंटीन और प्रवासी मजदूरों के लिए गैस सप्लाई को प्राथमिकता दी है। पहले 20 प्रतिशत कमर्शियल एलपीजी सप्लाई बहाल की गई और अब इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक कर दिया गया है।

    घरेलू पीएनजी और सीएनजी सप्लाई 100 प्रतिशत जारी है, जबकि औद्योगिक और कमर्शियल सेक्टर को लगभग 80 प्रतिशत गैस दी जा रही है। एक ही दिन में 7,500 से ज्यादा पीएनजी कनेक्शन जारी किए गए हैं।

    इसके साथ ही सरकान ने कहा है कि जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। अब तक करीब 3,400 छापे मारे गए, 1,000 सिलेंडर जब्त किए गए, 642 एफआईआर दर्ज हुईं और 155 लोगों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही, ऑयल कंपनियों ने 1,500 से ज्यादा औचक निरीक्षण किए हैं।

    समुद्री सुरक्षा की बात करें तो पर्शियन गल्फ में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। कोई भी भारतीय जहाज प्रभावित नहीं हुआ है। ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ नाम के दो एलपीजी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य पार करके भारत की ओर आ रहे हैं।

    नौवहन महानिदेशालय 20 भारतीय जहाजों और करीब 540 नाविकों की निगरानी कर रहा है। चौबीसों घंटे कंट्रोल रूम काम कर रहा है, और अब तक 585 से ज्यादा नाविकों को वापस लाया जा चुका है।

    विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास भी 24 घंटे हेल्पलाइन चला रहे हैं और लोगों की मदद कर रहे हैं। 28 फरवरी से अब तक करीब 4.02 लाख लोग भारत लौट चुके हैं।

    यूएई, सऊदी अरब, ओमान और कतर से फ्लाइट्स जारी हैं, जबकि कुवैत, बहरीन, ईरान और इजरायल में फंसे भारतीयों को सऊदी अरब, आर्मेनिया, अजरबैजान और जॉर्डन के रास्ते वापस लाया जा रहा है।

  • शेयर बाजार में रौनक बरकरार, सेंसेक्स में जोरदार बढ़त के साथ शुरुआत

    शेयर बाजार में रौनक बरकरार, सेंसेक्स में जोरदार बढ़त के साथ शुरुआत


    नई दिल्ली ग्लोबल मार्केट से मिले पॉजिटिव स्टोर और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता की खबरों ने भारतीय शेयर बाजार को जगह दी है। रविवार को लगातार दूसरे समुद्र तट के बाजार में तेजी के साथ खुला और शुरुआती कारोबार में ही किसी का भरोसेमंद सावा नजर आया। एनएसई स्ट्रेंथ 74,068.45 के पिछले बंद स्तर से 583.56 ए.एम.के. 74,652.01 के स्तर पर खुला, जबकि एन ए.एस. ए. 152 ए.के. 152 ए.सी. की बढ़त के साथ 23,064.40 के स्तर पर पहुंच गया। खुलते ही बाजार में खरीदारी का संतुलन बना रहा, जिससे कुछ ही देर में तेजी और तेजी से हो गई और बाजार 886 के कारोबार में 74,954.75 तक पहुंच गया, जबकि 23,216.75 के स्तर पर कारोबार हुआ।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी जबरदस्त उछाल

    बाजार में तेजी सिर्फ बड़े स्टॉक तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिड और स्मॉलकैप स्टॉक में भी स्टॉक शॉप देखने को मिली। 2.04 प्रतिशत और मैक्सिकन स्मॉलकैप में 2.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो व्यापक बाजार में रेस्तरां का संकेत है। सेक्टर प्रदर्शन की बात करें तो रियल्टी सेक्टर सबसे आगे चल रहा है और 3.55 फीसदी का उछाल आया है। इसके अलावा मेटल, मीडिया, ऑटो और पीएससी बैंक सेक्टर में भी 2 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। कंपनी और फार्मास्युटिकल सेक्टर में भी करीब 1 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली, जिससे बाजार में लगातार तेजी बनी रही।

    इन स्टॉक में रही सबसे ज्यादा तेजी

    मर्चेंडाइज50 के प्रमुख स्टॉक में श्रीराम फाइनेंस, ट्रेंट, अदाणी इंटरप्राइजेज, ग्रासिम, अदाणी पोर्ट्स और अल्ट्राटेक के स्टॉक में सबसे ज्यादा उछाल दर्ज किया गया है। इन दिग्गज स्टॉकहोम ने मार्केट को नई पेट्रोलियम तक पहुंचाया, अहम भूमिका निभाई। दूसरी ओर, मुद्रा बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के स्वामित्व में गिरावट के साथ 93.95 पर खुला, जबकि पिछले दिन यह 93.87 पर बंद हुआ था। हालांकि रुपये की इस गिरावट का बाजार पर ज्यादा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा और निवेशकों का रुख सकारात्मक बना हुआ है।

    तेल की उपज में गिरावट से बाजार में मिला सहारा

    पिछले कुछ दिनों से अमेरिका-ईरान में तनाव के कारण कच्चे तेल की भारी मात्रा में निकासी देखने को मिल रही थी, जिससे असमानता और आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। लेकिन अब सीजफायर की उम्मीदों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड करीब 7 प्रतिशत जनरेट 97.18 डॉलर प्रति शेयर और डब्लूटीआई क्रूड 6 प्रतिशत से ज्यादा जनरेट 86.72 डॉलर पर है। तेल की कमी से भारत जैसे देश के लिए राहत भरी खबर है और बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला है। विशेषज्ञ का मानना ​​है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा में अर्थशास्त्रीय संस्थानों और संस्थाओं के प्रदर्शन पर प्रतिबंध रहेगा। हालांकि वर्तमान में तेजी से उत्साह बढ़ता जा रहा है, लेकिन अगर मेडिकल एहम रेजिस्टेंस ग्रुप को पार नहीं मिल पाता है, तो सामान्य स्तर पर उत्साहवसूली देखी जा सकती है। ऐसे में निवेशकों को साथ लेकर सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी गई है।

  • बिजली बिल वसूली के दौरान शहडोल में MPEB कर्मचारियों पर हमला मामला

    बिजली बिल वसूली के दौरान शहडोल में MPEB कर्मचारियों पर हमला मामला


    शहडोल । मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में बिजली बिल वसूली के लिए गई MPEB यानी मध्य प्रदेश विद्युत बोर्ड की टीम पर हमला होने का मामला सामने आया है घटना ने प्रशासन और जनता दोनों को सकते में डाल दिया है जिले के अमलाई थाना क्षेत्र के गिरवा गांव में जूनियर इंजीनियर विकास गोंडुड़े अपनी टीम के साथ बकाया बिजली बिल वसूलने के लिए पहुंचे थे

    बताया जा रहा है कि इसी दौरान ग्राम गिरवा के पास कार सवार पवन यादव और नितिन रजक ने रास्ता रोक लिया और लाठी डंडों से लैस होकर कर्मचारियों को धमकाने लगे आरोप है कि उन्होंने गाली गलौज के साथ साथ कर्मचारियों को जान से मारने की धमकी भी दी इस दौरान विभागीय गाड़ी सड़क किनारे खड़ी थी जिसे उन्होंने तेज रफ्तार कार से कुचलने का प्रयास भी किया

    घटना के समय वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने पूरी कार्रवाई को वीडियो में कैद कर लिया और यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है वीडियो में दिख रहा है कि कैसे लाठी डंडों से लैस युवकों ने कर्मचारियों को घेरे में ले लिया और धमकाया

    मामले की जानकारी मिलते ही अमलाई पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया है वहीं दूसरी ओर कार चालक की शिकायत पर विभागीय कर्मचारियों पर भी मामला दर्ज हुआ है फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और घटनास्थल पर जांच कर सबूत जुटा रही है

    स्थानीय लोग इस घटना से सहमति नहीं जता रहे हैं उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारियों पर इस तरह का हमला चिंता का विषय है और ऐसे हालात में विद्युत विभाग के कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन सुरक्षित तरीके से नहीं कर पाएंगे इस घटना ने शहडोल में बिजली वसूली की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं

    कुल मिलाकर शहडोल में MPEB टीम पर हमला न केवल गंभीर हिंसा का मामला है बल्कि यह यह दर्शाता है कि कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों पर सख्त कार्रवाई करना क्यों जरूरी है पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस घटना में कौन कौन दोषी हैं और क्या कानूनी कार्रवाई की जाएगी

  • वंदे मातरम मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कोई दंड नहीं केवल सलाह…

    वंदे मातरम मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कोई दंड नहीं केवल सलाह…

    नई दिल्ली: देश के सर्वोच्च न्यायालय ने वंदे मातरम के गायन को अनिवार्य किए जाने से जुड़े एक सर्कुलर के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने साफ किया कि इस मामले में अभी हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता क्योंकि याचिका समय से पहले यानी प्री मेच्योर है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार के सर्कुलर में वंदे मातरम के गायन को लेकर केवल एक सुझाव या एडवाइजरी दी गई है न कि कोई बाध्यकारी आदेश या दंड का प्रावधान।

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने याचिकाकर्ता से सवाल किया कि क्या 28 जनवरी को जारी सरकारी अधिसूचना में कहीं यह उल्लेख है कि यदि कोई व्यक्ति वंदे मातरम नहीं गाता है तो उसे किसी तरह की सजा दी जाएगी या उसके खिलाफ कोई कार्रवाई होगी। इस पर अदालत ने यह समझने की कोशिश की कि याचिकाकर्ता की आशंका किस आधार पर है।

    याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने दलील दी कि भले ही सरकार ने सीधे तौर पर दंड का प्रावधान न किया हो, लेकिन इस तरह की एडवाइजरी के कारण सामाजिक दबाव उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को गाने या सम्मान करने के लिए मजबूर किया जाना उसके अधिकारों के खिलाफ हो सकता है और इस तरह की स्थिति में अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बन सकता है।

    इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या राष्ट्रगीत के सम्मान के लिए किसी एडवाइजरी की आवश्यकता होती है। वहीं अदालत ने इस मामले में स्पष्ट किया कि सर्कुलर में “may” यानी “सकते हैं” जैसे शब्द का उपयोग किया गया है, जो किसी भी प्रकार के अनिवार्य आदेश या दंड को इंगित नहीं करता।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी में यह भी सामने आया कि इस सर्कुलर में न तो किसी प्रकार की सजा का प्रावधान है और न ही किसी व्यक्ति को इसे गाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि अगर भविष्य में इस एडवाइजरी के आधार पर किसी व्यक्ति के साथ भेदभाव किया जाता है या उसके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई होती है, तो उस स्थिति में वह व्यक्ति न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।

    सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह भी सलाह दी कि अभी उनके द्वारा उठाई गई आशंकाएं अस्पष्ट हैं और किसी ठोस आधार पर नहीं हैं। अदालत ने कहा कि यदि वास्तव में किसी के साथ अन्याय या भेदभाव होता है तभी वह कोर्ट में आए। यह कोई धमकी नहीं बल्कि एक स्पष्ट सलाह है।

    इस प्रकार सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में फिलहाल हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि वंदे मातरम को लेकर जारी सर्कुलर में किसी प्रकार का दंडात्मक प्रावधान नहीं है और यह केवल एक सलाह के रूप में देखा जाना चाहिए।

  • 81 प्रतिशत छूट वाला टेंडर बना बहस का मुद्दा एक्सपर्ट बोले इतनी कम कीमत पर जांच संभव नहीं

    81 प्रतिशत छूट वाला टेंडर बना बहस का मुद्दा एक्सपर्ट बोले इतनी कम कीमत पर जांच संभव नहीं

    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश में सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी जांच को लेकर जारी एक बड़े टेंडर ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर बहस छेड़ दी है राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन यानी National Health Mission द्वारा जारी इस टेंडर में भोपाल की साइंस हाउस मेडिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को ठेका दिया गया है जिसने सेंट्रल गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम यानी केंद्रीय सरकार स्वास्थ्य योजना की दरों से 81 दशमलव 2 प्रतिशत कम कीमत पर बोली लगाकर बाजी मार ली

    इसका सीधा अर्थ यह है कि जिस जांच की कीमत सामान्य रूप से 100 रुपए मानी जाती है वह अब लगभग 18 रुपए में की जाएगी यही बिंदु पूरे विवाद का केंद्र बन गया है क्योंकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पैथोलॉजिस्ट्स का कहना है कि इतनी कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण जांच कर पाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है

    प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 से सरकारी अस्पतालों की पैथोलॉजी सेवाओं को निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित करना शुरू किया था इसी क्रम में 12 फरवरी 2026 को नया टेंडर जारी किया गया जो हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित है इस मॉडल में छोटे स्वास्थ्य केंद्रों से सैंपल लेकर जिला स्तरीय प्रयोगशालाओं में जांच की जाती है जिससे लागत और समय दोनों में कमी लाने का प्रयास किया जाता है

    टेंडर प्रक्रिया के अनुसार CGHS की दरों को आधार मूल्य माना गया और जो कंपनी सबसे अधिक छूट देगी उसे ठेका दिया जाना तय था 9 मार्च 2026 को टेंडर खुलने पर साइंस हाउस ने 81 प्रतिशत से अधिक छूट देकर पहला स्थान हासिल किया और उसे लगभग 36 करोड़ रुपए सालाना यानी पांच साल में करीब 180 करोड़ रुपए का ठेका मिल गया

    हालांकि इस निर्णय के बाद विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई है पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी डॉ पद्माकर त्रिपाठी का कहना है कि CGHS की दरें पहले से ही बाजार मूल्य से काफी कम होती हैं ऐसे में यदि कोई कंपनी इन दरों से भी 80 प्रतिशत से अधिक छूट देती है तो यह सवाल खड़े करता है कि जांच की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाएगी

    वे उदाहरण देते हुए बताते हैं कि कम्प्लीट ब्लड काउंट जैसी सामान्य जांच बाजार में 300 से 400 रुपए तक होती है जबकि CGHS दर लगभग 270 रुपए है इतनी दर पर 81 प्रतिशत छूट के बाद जांच की लागत करीब 50 रुपए रह जाती है जबकि केवल रिएजेंट की लागत ही लगभग 70 रुपए होती है इसके अलावा मशीनों का रखरखाव बिजली और स्टाफ का खर्च अलग होता है ऐसे में इतनी कम कीमत पर सटीक और विश्वसनीय जांच संभव नहीं मानी जा रही

    दूसरी ओर कंपनी के सीईओ पुनीत दुबे ने इस छूट को पूरी तरह व्यावहारिक बताया है उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में डायग्नोस्टिक्स सेक्टर में तकनीकी विकास के कारण उपकरण और रिएजेंट की लागत में काफी कमी आई है अब कई चीजें देश में ही कम कीमत पर उपलब्ध हैं जिससे इस तरह की दरें संभव हो पाई हैं

    NHM की एमडी डॉ सलोनी सडाना ने भी टेंडर प्रक्रिया का बचाव करते हुए कहा है कि सभी नियमों का पालन किया गया है और तकनीकी बिड में शामिल कई कंपनियों ने 60 प्रतिशत से अधिक छूट की पेशकश की थी ऐसे में सबसे कम दर देने वाली कंपनी को चयनित किया गया है

    इस बीच कंपनी का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है सितंबर 2025 में आयकर विभाग ने कंपनी से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी वहीं कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने भी कंपनी पर अनावश्यक जांचों के जरिए भारी भुगतान लेने के आरोप लगाए थे हालांकि कंपनी ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है

    कुल मिलाकर यह मामला अब सिर्फ एक टेंडर तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या जांच की गुणवत्ता को लेकर उठ रही चिंताओं का समाधान हो पाता है या नहीं

  • मिडिल ईस्ट तनाव कम होते ही सोना-चांदी में तेजी, गोल्ड 3% और सिल्वर 5% उछला

    मिडिल ईस्ट तनाव कम होते ही सोना-चांदी में तेजी, गोल्ड 3% और सिल्वर 5% उछला

     
    नई दिल्ली पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों के बीच बुधवार को कीमती धातुओं के बाजार में जबरदस्त तेजी से देखने को मिली। कमजोर डॉलर और महंगाई को लेकर महंगाई के चलते निवेशकों ने एक बार फिर सुरक्षित निवेश के विकल्प के तौर पर सोना और चांदी की ओर रुख किया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के असर से घरेलू बाजार में भी शुरुआत से ही खरीदारी का माहौल बना रहा और दोनों धातुओं ने मजबूत उछाल दर्ज किया।

    एमसीएक्स पर चमका सोना-चांदी का भाव
    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर अप्रैल डिलीवरी वाला सोना करीब 3 प्रतिशत उछलकर 1,43,079 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला और कुछ ही समय में यह बढ़कर 1,44,410 रुपये तक पहुंच गया। वहीं मई वाली चांदी भी 5 प्रतिशत तक की तेजी के साथ 2,36,232 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती नजर आई। पिछले ट्रेजरी सत्र में दोनों धातुओं में हल्की गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन बुधवार को बाजार का रुख पूरी तरह बदल गया। दिन के दौरान सोना और चांदी दोनों ने अपने-अपने उच्च स्तर भी छुए, जिससे जनजातियों में उत्साह साफ नजर आया।

    डॉलर की कमजोरी और महंगाई की चिंता बनी वजह
    विशेषज्ञों का मानना ​​है कि डॉलर में कमजोरी और वैश्विक महंगाई को लेकर आपसी चिंता इस तेजी की मुख्य वजह है। इसके अलावा, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता कम होने से भी जनजातियों का भरोसा बढ़ता है। जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम होती है, तो सोना और चांदी जैसे नॉन-इंटरेस्ट एसेट ज्यादा आकर्षक बन जाते हैं। इसी के चलते बाजार में इनकी मांग बढ़ेगी है और कीमतों में तेजी से देखने को मिली है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूत रुख
    वैश्विक स्तर पर हाजिर सोने की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई और यह 4,568 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। वहीं अमेरिकी वायदा बाजार में सोने के दाम करीब 3.8 प्रतिशत तक बढ़ा। चांदी भी पीछे नहीं रही और इसकी कीमतों में करीब 3.8 प्रतिशत की तेजी से दर्ज की गई। हालांकि यह ध्यान देने वाली बात है कि सोना अभी भी अपने बचे उच्च स्तर से नीचे कारोबार कर रहा है, जबकि चांदी में पहले भारी गिरावट के बाद अब रिकवरी देखने को मिल रही है।

    आगे क्या रहेगा रुख, जींस की नजर हालात पर
    विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बावजूद बाजार में अनिश्चितता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और वैश्विक आर्थिक संकेत भी जींस की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। जींस को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार के ट्रेंड और वैश्विक घटनाओं पर नजर रखते हुए ही निवेश के फैसले लें।

  • जियोपॉलिटिकल संकट का असर कम, भारत की अर्थव्यवस्था 7% से ऊपर बढ़ेगी

    जियोपॉलिटिकल संकट का असर कम, भारत की अर्थव्यवस्था 7% से ऊपर बढ़ेगी



    नई दिल्ली मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक अस्मिताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था के साथ आगे बढ़ती नजर आ रही है। एसएंडपी ग्लोबल की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह शिक्षक-शिक्षिकाएं दुनिया भर में शांतिप्रिय स्मारक बनाए रखने में सक्षम हैं। रिपोर्ट में भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती जनसंख्या वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बताया गया है, जहां घरेलू मांग और निवेश प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

    घरेलू मांग और निवेश बनाने की ताकत का आधार
    रिपोर्ट के अनुसार, भारत के आर्थिक संस्थानों के पीछे सबसे बड़ा कारण मजबूत घरेलू आवास और धीरे-धीरे बढ़ता निजी निवेश है। आर्टिस्ट भी स्थिर हो गया है, जिससे बाहरी झटकों का प्रभाव क्षेत्र सीमित हो रहा है। वैश्विक स्तर पर भले ही युद्ध, व्यापार तनाव और सम्राट चेन की बनी हुई हो, लेकिन भारत की उद्योग जगत में जोखिमों को काफी हद तक बढ़ावा मिल रहा है। आईटी और डिजिटल सेक्टर सहित सर्विस सेक्टर पर भारत का विकास को सहारा दिया जा रहा है।

    एशिया-पैसिफिक में भारत की जनसंख्या
    रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया-पैसिफिक क्षेत्र की अर्थव्यवस्था भी बेहतर स्थिति में है और इसमें भारत अहम भूमिका निभा रहा है। चीन को इस क्षेत्र की विकास दर 2026 में लगभग 4.5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसके अलावा चीन में उद्योगों की हिस्सेदारी लगभग 4.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसका कारण वहां की फ़्रैंचुअल मांग, प्रॉपर्टी सेक्टर के पहलू और वैश्विक चुनौतियां हैं। ऐसे में क्षेत्रीय संतुलन में भारत की भूमिका और महत्वपूर्ण है।

    तेल की सीमा का प्रभाव, लेकिन जोखिम नियंत्रण
    रिपोर्ट में कच्चे तेल की आबादी वाले क्षेत्र को वैश्विक उद्योग के लिए एक बड़ी चिंता बताई गई है। हालाँकि भारत के मामले में मजबूत सेवा संयुक्त और विविध स्रोत इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। इसके अलावा, भारतीय रिज़र्व बैंक से उम्मीद की जाती है कि वह संस्थागत नीति अपनाते हुए ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखेगा, जिससे विकास को स्थिरता और स्थिर नियंत्रण में बने रहने का समर्थन मिलेगा।

    वर्गीकरण, प्रौद्योगिकी सेक्टर होस्टिंग
    रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में भारत में फसल दर करीब 4.3 प्रतिशत रहने की संभावना है, जिसे एक तिमाही स्तर माना जाता है। वहीं एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में आर्टिफिशियल सोसाइटी और सेमीकंडक्टर जैसे टेक्नोलॉजी सेक्टर तेजी से उभर रहे हैं, जिससे व्यापार और आर्थिक वर्गीकरण को नई ताकत मिल रही है। भारत में भी इस प्रवृत्ति का लाभ उठाने की स्थिति है, जिससे आने वाले वर्षों में विकास की गति और मजबूती हो सकती है।