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  • शहजाद पूनावाला के एक कमेंट से भड़कीं प्रियंका टीवी की नागिन ने खोया आपा बोलीं यहां भी थप्पड़ खाएगा

    शहजाद पूनावाला के एक कमेंट से भड़कीं प्रियंका टीवी की नागिन ने खोया आपा बोलीं यहां भी थप्पड़ खाएगा


    नई दिल्ली। रियलिटी शो राइज एंड फॉल 2 इन दिनों अपने कंटेस्टेंट्स के बीच होने वाले विवादों को लेकर चर्चा में बना हुआ है। शो के लेटेस्ट एपिसोड में प्रियंका चाहर चौधरी और शहजाद पूनावाला के बीच तीखी बहस देखने को मिली। दोनों के बीच बातचीत इतनी बढ़ गई कि मामला व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गया। बहस के दौरान शहजाद ने प्रियंका को गोल्ड डिगर कहा जिसके बाद एक्ट्रेस काफी नाराज हो गईं। प्रियंका ने भी शहजाद पर पलटवार किया और गुस्से में उन्हें थप्पड़ मारने तक की बात कह दी।

    दरअसल विवाद की शुरुआत प्रियंका की एक टिप्पणी से हुई थी। उन्होंने शहजाद को मैनचाइल्ड कहा था। इसका मतलब ऐसे व्यक्ति से है जो उम्र में बड़ा होने के बावजूद बचकानी हरकतें करता है। प्रियंका की इस बात पर शहजाद ने जवाब देते हुए उन्हें गोल्ड डिगर कह दिया। इसके साथ ही उन्होंने प्रियंका पर विक्टिम कार्ड खेलने का आरोप भी लगाया। शहजाद की यह टिप्पणी प्रियंका को काफी बुरी लगी और इसके बाद उनके तेवर बदल गए।

    प्रियंका ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए शहजाद को कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें शहजाद के बारे में कई लोगों से ऐसी बातें सुनने को मिली हैं जिनका जिक्र उन्होंने बहस के दौरान किया। इसी दौरान प्रियंका ने गुस्से में कहा कि शहजाद यहां भी उनसे थप्पड़ खाएंगे। उनकी यह बात शो में मौजूद लोगों के साथ साथ दर्शकों के बीच भी चर्चा का विषय बन गई।

    विवाद के बाद प्रियंका काफी भावुक भी नजर आईं। उन्होंने बताया कि शहजाद की कही बात उनके मन में रह गई थी। प्रियंका ने अपनी जिंदगी और परिवार से जुड़ी जिम्मेदारियों का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने परिवार के खर्च में योगदान देती हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने छह भाई बहनों की पढ़ाई में मदद की है और उनकी शादियों में भी जिम्मेदारी निभाई है। प्रियंका के मुताबिक उन्होंने अपने परिवार के लिए घर तक बनवाए हैं। ऐसे में बिना उनकी परिस्थितियों को समझे उन्हें गोल्ड डिगर कहना उन्हें बेहद अपमानजनक लगा।

    प्रियंका ने अपनी बात रखते हुए यह भी बताया कि वह अपने परिवार के लिए लगातार मेहनत करती रही हैं। उनके लिए आर्थिक जिम्मेदारियां और परिवार की जरूरतें हमेशा महत्वपूर्ण रही हैं। इसी वजह से शहजाद की टिप्पणी ने उन्हें भावुक कर दिया। बहस के बाद उन्होंने अपने गुस्से को खुलकर जाहिर किया और कैमरे के सामने शहजाद को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी।

    इस पूरे घटनाक्रम के दौरान शो का माहौल काफी गर्म हो गया। प्रियंका ने बातचीत के दौरान शहजाद की एनर्जी को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने स्वरा भास्कर से बात करते हुए कहा कि रात में सोते समय भी उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था जैसे शहजाद की एनर्जी आसपास मौजूद हो। उनकी इस टिप्पणी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बहस का असर उन पर काफी देर तक रहा।

    राइज एंड फॉल 2 में कंटेस्टेंट्स के बीच समीकरण लगातार बदलते दिखाई दे रहे हैं। कभी साथ नजर आने वाले प्रतिभागियों के बीच भी रणनीति और मतभेद को लेकर टकराव देखने को मिल रहा है। प्रियंका और शहजाद का यह विवाद भी इसी माहौल का हिस्सा है। गोल्ड डिगर वाली टिप्पणी के बाद प्रियंका का भावुक होना और फिर थप्पड़ मारने की बात कहना अब शो के सबसे चर्चित पलों में शामिल हो गया है। आने वाले एपिसोड में दोनों के बीच यह विवाद आगे किस तरह बढ़ता है यह देखने वाली बात होगी।

  • एंटीलिया बम केस में सचिन वाजे की जमानत के खिलाफ NIA की अपील पर दो बेंचों ने सुनवाई से खुद को अलग किया

    एंटीलिया बम केस में सचिन वाजे की जमानत के खिलाफ NIA की अपील पर दो बेंचों ने सुनवाई से खुद को अलग किया


    नई दिल्ली । उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास एंटीलिया से जुड़े बम धमकी मामले में सचिन वाजे की जमानत के बाद कानूनी प्रक्रिया में नया मोड़ आया है। बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को विशेष मुंबई अदालत से जमानत मिल चुकी है। इस फैसले को चुनौती देते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन अपील पर सुनवाई को लेकर लगातार अड़चन सामने आई।

    बुधवार को हाईकोर्ट की एक बेंच ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इससे पहले मंगलवार को भी एक अन्य बेंच ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। बुधवार की कार्यवाही के दौरान जजों के सवाल पर NIA ने बताया कि वाजे को उस समय तक जेल से रिहा नहीं किया गया था।

    बुधवार को मामला जस्टिस भारती एच. डांगरे और जस्टिस आशीष एस. चव्हाण की बेंच के सामने आया। बेंच ने बताया कि वाजे की ओर से दायर कुछ अलग कार्यवाहियों में जस्टिस डांगरे पहले ही खुद को मामले से अलग कर चुकी हैं। इसके बाद बेंच के दूसरे सदस्य जस्टिस आशीष एस. चव्हाण ने भी मामले की सुनवाई करने में असमर्थता जताई।

    जस्टिस चव्हाण ने बताया कि वह एक अलग लेकिन संबंधित मामले में सीबीआई की ओर से पेश हो चुके हैं। इसके बाद बेंच ने निर्देश दिया कि NIA की अपील को उसके सामने सूचीबद्ध नहीं किया जाए। इस तरह बुधवार को भी मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। इससे एक दिन पहले मंगलवार को जस्टिस सारंग वी. कोतवाल ने भी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

    लगातार दो बेंचों से सुनवाई नहीं होने के बाद NIA ने बुधवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी के सामने मामला उठाया। NIA की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि तीन अन्य डिवीजन बेंच भी इस मामले की सुनवाई करने की स्थिति में नहीं हो सकती हैं।

    अनिल सिंह ने यह भी कहा कि अगर इस बीच सचिन वाजे को रिहा कर दिया जाता है तो इससे आगे की कार्यवाही प्रभावित हो सकती है। इसके बाद मामले को जस्टिस गिरिश एस. कुलकर्णी की अगुवाई वाली बेंच को सौंप दिया गया।

    विशेष अदालत के जमानत आदेश के तुरंत बाद मंगलवार को ही NIA ने हाईकोर्ट का रुख किया था। ASG अनिल सिंह ने जस्टिस सारंग वी. कोतवाल की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच के सामने विशेष अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी। हालांकि जस्टिस कोतवाल ने मामले से खुद को अलग कर लिया।

    जस्टिस कोतवाल ने कहा था कि वह उन पक्षों से जुड़े मामलों की सुनवाई नहीं करते, जिनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज मोहते पेश हुए हैं। मनोज मोहते पहले सचिन वाजे की ओर से पेश हो चुके हैं। इसके बाद मामले को बुधवार को जस्टिस भारती एच. डांगरे की अगुवाई वाली वैकल्पिक बेंच के सामने सूचीबद्ध किया गया था।

    सचिन वाजे को जमानत देते समय विशेष अदालत ने कहा था कि प्रथम दृष्टया उनका कृत्य गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA की धारा 15 में दी गई आतंकवादी कृत्य की परिभाषा को पूरा करता हुआ नहीं दिखता।

    विशेष अदालत ने यह भी कहा था कि NIA ऐसे बयान दर्ज करने में विफल रही, जिनसे यह साबित हो सके कि मुंबई स्थित घर के बाहर विस्फोटकों से भरी SUV मिलने के बाद अंबानी परिवार आतंकित हुआ था।

    यह मामला 25 फरवरी 2021 का है। उस दिन दक्षिण मुंबई में उद्योगपति मुकेश अंबानी के आवास एंटीलिया के पास खड़ी एक कार में धमकी भरा नोट मिला था। मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की भूमिका सामने आई और उनके खिलाफ कार्रवाई हुई।

    अब विशेष अदालत से मिली जमानत को चुनौती देने वाली NIA की अपील की सुनवाई नए सिरे से आगे बढ़ेगी। लगातार बेंचों के मामले से अलग होने के बाद इसे जस्टिस गिरिश एस. कुलकर्णी की अगुवाई वाली बेंच को सौंपा गया है।

  • थलपति विजय की TVK ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से बनाई दूरी, SIR के विरोध पर कायम पार्टी

    थलपति विजय की TVK ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से बनाई दूरी, SIR के विरोध पर कायम पार्टी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु की सत्ताधारी तमिळगा वेत्री कड़गम यानी TVK ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से खुद को अलग कर लिया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठा रहे हैं। हालांकि थलपति विजय की पार्टी ने इस मांग का समर्थन नहीं किया है।

    TVK की ओर से कहा गया है कि किसी एक व्यक्ति को पद से हटाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। पार्टी ने इसे मुद्दे से ध्यान भटकाने वाली रणनीति बताया है। हालांकि इसके साथ ही TVK ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का विरोध जारी रखने की बात भी स्पष्ट की है।

    यह विवाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR प्रक्रिया को लेकर सामने आई आपत्तियों के बाद तेज हुआ। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने पिछले 10 महीनों में SIR की प्रक्रिया को लेकर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए और उनके खिलाफ इस्तीफे के साथ कानूनी कार्रवाई की मांग भी सामने आई।

    TVK के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री ए राजमोहन ने पार्टी का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि CEC को पद से हटाना किसी समस्या का समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, किसी एक व्यक्ति को हटाने से व्यवस्था में बदलाव नहीं आएगा और पार्टी किसी भटकाने वाली रणनीति का हिस्सा नहीं बनेगी।

    हालांकि राजमोहन ने यह भी कहा कि TVK SIR का विरोध करती रहेगी। उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष विजय ने सत्ता में आने से पहले ही SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की थी। राजमोहन के मुताबिक, SIR के दौरान चुनिंदा मतदाताओं के नाम हटाए गए और अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत और बड़ी होती।

    विजय और कांग्रेस के बीच पहले भी मतभेद सामने आ चुके हैं। इससे पहले TVK के नेताओं और मंत्रियों की ओर से वर्ष 2029 के लिए विजय को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताए जाने के बाद विवाद पैदा हुआ था। उस समय कांग्रेस के मंत्रियों की ओर से कैबिनेट से इस्तीफा देने की धमकी तक सामने आई थी।

    फिलहाल तमिलनाडु में कांग्रेस के पांच विधायक हैं, जिनके समर्थन से TVK ने सरकार बनाई थी। इनमें से दो विधायकों को विजय ने मंत्री भी बनाया है। ऐसे में CEC के इस्तीफे के मुद्दे पर TVK का कांग्रेस से अलग रुख गठबंधन के भीतर मतभेदों को सामने लाता है।

    दूसरी ओर, डीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया है। डीएमके ने कहा है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव आता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।

    डीएमके प्रवक्ता टी के एस एलंगोवन ने कहा कि जब भी विपक्षी दल किसी मुद्दे पर बीजेपी का विरोध करेंगे, उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमके इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है, लेकिन संसद में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाया जाता है तो पार्टी उसका समर्थन करेगी।

    इससे पहले 23 सितंबर को स्टालिन ने बयान जारी कर कहा था कि मुख्य चुनाव आयुक्त को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इस तरह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस और डीएमके की मांग के बीच TVK ने अलग रुख अपनाया है। पार्टी ने SIR के विरोध को बरकरार रखते हुए CEC को हटाने की मांग को व्यवस्था में बदलाव का समाधान मानने से इनकार किया है।

  • SC जज संदीप मेहता के आरोपों पर पूर्व जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का पलटवार, बोले- जजों को अपनी सीमाएं पता होनी चाहिए

    SC जज संदीप मेहता के आरोपों पर पूर्व जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा का पलटवार, बोले- जजों को अपनी सीमाएं पता होनी चाहिए

    नई दिल्ली । राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के जज संदीप मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों पर जवाब दिया है। शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इनके पीछे पेशेवर ईर्ष्या की संभावना हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जस्टिस मेहता को हाईकोर्ट के मामलों में दखल देने का अधिकार नहीं था।

    जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा हाल ही में राजस्थान हाईकोर्ट के जज पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें जस्टिस संदीप मेहता से जिरह करने का मौका दिया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान में वकीलों को उनके खिलाफ प्रदर्शन के लिए उकसाया गया।

    जस्टिस मेहता ने अगस्त में भारत के मुख्य न्यायाधीश को कई पत्र भेजे थे। इन पत्रों में उन्होंने जस्टिस शर्मा पर शक्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी दावा किया था कि उन्हें जस्टिस शर्मा के खिलाफ कई शिकायतें मिली हैं, जिनसे उनकी ईमानदारी को लेकर सवाल उठते हैं।

    इन शिकायतों के आधार पर जस्टिस मेहता ने कार्यवाहक चीफ जस्टिस को किसी दूसरे हाईकोर्ट में स्थानांतरित करने और राजस्थान हाईकोर्ट में नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति की मांग की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जज संजय के. अग्रवाल को राजस्थान हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाने की सिफारिश की। यह सिफारिश उस समय हुई जब वकीलों के विरोध के बीच जस्टिस शर्मा छुट्टी पर चले गए थे।

    जस्टिस शर्मा ने प्रभावशाली मुकदमेदारों को फायदा पहुंचाने, रोस्टर में हेरफेर करने, जांच में दखल देने और किसी खास पक्ष को फायदा पहुंचाने के लिए न्यायिक अधिकारियों के तबादले के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि काम करने के तरीके में अंतर होने का मतलब यह नहीं है कि कोई गलत है। उन्होंने कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर अपने प्रशासनिक रिकॉर्ड का भी बचाव किया और लंबित पदोन्नतियों, तबादलों तथा बढ़ी हुई फंडिंग का जिक्र किया।

    शर्मा ने कहा कि अगर कोई शिकायत थी तो वह सबसे पहले चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के पास क्यों नहीं गई। उन्होंने बताया कि उन्होंने जस्टिस मेहता के चार पत्रों के जवाब दिए हैं और खुद सीजेआई को पत्र लिखकर सवाल उठाया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट का कोई जज हाईकोर्ट के कामकाज में दखल दे सकता है।

    जस्टिस शर्मा ने कहा कि जजों को अपनी सीमाएं पता होनी चाहिए। उनके मुताबिक, जजों को यह समझना चाहिए कि उन्हें कहां बोलना है और कहां नहीं। उन्होंने कहा कि जज अपने फैसलों के जरिए बोलते हैं और उनके फैसलों की न्यायिक समीक्षा होती है। उन्होंने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि करीब साढ़े नौ साल के छोटे से कार्यकाल में उन्होंने 88 हजार से अधिक मामलों का फैसला किया। उनके मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जांचे गए उनके कई फैसले बरकरार रखे गए।

    जब जस्टिस मेहता की ओर से लगाए गए आरोपों की वजह के बारे में पूछा गया तो शर्मा ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने इसकी वजह साधारण पेशेवर जलन होने की संभावना जताई। उन्होंने बताया कि वर्ष 2011 में दोनों को सीनियर एडवोकेट बनाया गया था। शर्मा के मुताबिक, उन्होंने इसके लिए आवेदन नहीं किया था, जबकि जस्टिस मेहता ने आवेदन किया था।

    शर्मा ने कहा कि वह पहली पीढ़ी के वकील हैं, जबकि जस्टिस मेहता न्यायिक परिवार से आते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोनों के सीनियर एडवोकेट बनने के बाद पदोन्नति के समय जस्टिस मेहता ने यह सुनिश्चित किया कि वह चीफ जस्टिस न बनें।

    दोनों के कभी साथ काम नहीं करने की बात कहते हुए शर्मा ने बताया कि वकालत के दौरान जस्टिस मेहता जोधपुर और वह जयपुर में थे। जज बनने के बाद भी दोनों अलग-अलग जगहों पर रहे। उनके मुताबिक, जस्टिस मेहता मुख्य रूप से आपराधिक मामलों से जुड़े रहे, जबकि वह संवैधानिक मामलों के वकील रहे हैं।

    बूंदी के एक मुकदमेदार रघुबीर सिंह अत्री से मुलाकात पर सफाई देते हुए शर्मा ने कहा कि अत्री उनके साले नहीं, बल्कि पारिवारिक रिश्ते में भाई-बहन के संबंध में हैं। उन्होंने बताया कि अत्री छुट्टियों में आए थे और वह उन्हें मंदिर ले गए थे। उन्होंने कहा कि बाद में इस मुलाकात को मुकदमे को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर पेश किया गया।

    करीब 800 तबादलों के सवाल पर शर्मा ने कहा कि अत्री के मामले से इन्हें जोड़ना बिल्कुल बेतुका है। उन्होंने बताया कि सामान्य तौर पर तबादले रजिस्ट्रार जनरल करते हैं और इसमें अधिकारी के किसी स्थान पर बिताए गए समय समेत कई बातों को देखा जाता है। रोस्टर में हेरफेर के आरोप पर उन्होंने कहा कि मामलों के आवंटन का अधिकार चीफ जस्टिस के पास होता है।

    उदयपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी मामले पर शर्मा ने कहा कि तीन जजों के खुद को मामले से अलग करने के बाद उन्होंने इसकी सुनवाई की थी। उन्होंने बताया कि एडवोकेट जनरल ने उनसे अपील की सुनवाई करने का अनुरोध किया था। वकीलों के विरोध पर उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों का आधार नहीं है तो जजों को उन्हें खुश करने की जरूरत नहीं है।

  • अभिजीत दीपके मुंबई की सड़क पर चेहरे पर नकाब लगाकर निकले, बोले- कई महीनों बाद अकेले चलने का मिला मौका

    अभिजीत दीपके मुंबई की सड़क पर चेहरे पर नकाब लगाकर निकले, बोले- कई महीनों बाद अकेले चलने का मिला मौका


    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके इन दिनों मुंबई में हैं, जहां वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। इसी दौरान उनका एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह चेहरे पर रुमाल से नकाब बांधकर सड़क पर पैदल चलते नजर आए। उन्होंने इस दौरान बताया कि कई महीनों बाद उन्हें इस तरह अकेले सड़क पर चलने का मौका मिला है।

    दरअसल, सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने के बाद अभिजीत दीपके काफी चर्चित हो चुके हैं। उनके समर्थकों और आलोचकों की बड़ी संख्या है। ऐसे में आम लोगों की तरह सार्वजनिक जगहों पर अकेले घूमना उनके लिए आसान नहीं रहता। मुंबई में जब ट्रैफिक जाम के कारण उनकी गाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रही थी, तब उन्होंने कार से उतरकर पैदल चलने का फैसला किया।

    दीपके ने इस दौरान अपने चेहरे को रुमाल से ढक लिया था। उनके साथ मौजूद एक व्यक्ति ने इस पल को कैमरे में रिकॉर्ड किया और उनसे सड़क पर अकेले चलने के अनुभव के बारे में पूछा। इस पर दीपके ने खुशी जताते हुए कहा कि कई महीनों बाद वह इस तरह सड़क पर अकेले चल रहे हैं। उन्होंने ट्रैफिक रुकने की स्थिति को ही उनके लिए पैदल चलने का मौका बनने वाला कारण बताया।

    दीपके ने कहा कि सड़क पर कोई उनके साथ नहीं है और इस तरह अकेले चलना उन्हें अच्छा लग रहा है। उन्होंने इसे अच्छा अनुभव बताया। चेहरे पर नकाब लगाने की वजह से वह कुछ समय के लिए आम लोगों की तरह सड़क पर पैदल चल सके।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अभिजीत दीपके और उनके संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया है। आंदोलन की शुरुआत 2 अक्टूबर से मुंबई में करने की घोषणा की गई है। संगठन की ओर से मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की योजना बताई गई थी। हालांकि, मुंबई पुलिस ने वहां प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी है। पुलिस ने शिवाजी पार्क के इस्तेमाल से जुड़े नियमों और अन्य प्रशासनिक कारणों का हवाला दिया है।

    दीपके ने अनुमति नहीं मिलने के बावजूद आंदोलन जारी रखने की बात कही थी। उन्होंने कहा था कि अगर प्रदर्शन के अधिकार से रोका गया तो जेल भरो आंदोलन किया जाएगा। संगठन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की जा रही है। यह मांग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों को लेकर उठाई गई है।

    चुनाव आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि संस्थागत विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है तथा आयोग के फैसले कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हैं। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग दावे और प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

    अभिजीत दीपके इससे पहले भी आंदोलनों को लेकर चर्चा में रहे हैं। अब 2 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले उनका मुंबई की सड़क पर नकाब लगाकर अकेले पैदल चलना भी चर्चा का विषय बन गया है। उनके मुताबिक, ट्रैफिक जाम की वजह से मिला यह मौका उन्हें कई महीनों बाद सामान्य तरीके से सड़क पर चलने का अनुभव दे गया।

  • जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने भाजपा से दिया इस्तीफा, कांग्रेस में जाने और 2027 चुनाव लड़ने की अटकलें तेज

    जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने भाजपा से दिया इस्तीफा, कांग्रेस में जाने और 2027 चुनाव लड़ने की अटकलें तेज


    नई दिल्ली । मशहूर गायक जुबिन नौटियाल के पिता रामशरण नौटियाल ने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। रामशरण नौटियाल देहरादून जिले की विकासनगर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं और जिला पंचायत अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उनके इस्तीफे के बाद उत्तराखंड की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    रामशरण नौटियाल वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर चकराता विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं। उस चुनाव में उन्हें 27,417 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस के प्रीतम सिंह को 36,853 मत प्राप्त हुए थे। इसके बाद भी रामशरण नौटियाल क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे। अब पार्टी से उनके अलग होने के फैसले ने चकराता और विकासनगर क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं को बढ़ा दिया है।

    रामशरण नौटियाल के इस्तीफे के बाद उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें भी सामने आई हैं। यह चर्चा है कि वह विकासनगर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने की दावेदारी कर सकते हैं। उनके कांग्रेस के कुछ नेताओं के संपर्क में होने की बातें भी सामने आई हैं, लेकिन इस संबंध में उनकी ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    इस्तीफे को लेकर भाजपा की ओर से भी अलग प्रतिक्रिया सामने आई है। रामशरण नौटियाल ने अपने निजी सहायक राज के माध्यम से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष को इस्तीफा भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने उनके इस्तीफे की जानकारी होने से इनकार किया है। इस वजह से इस्तीफे की प्रक्रिया और उसके औपचारिक रूप से स्वीकार होने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    रामशरण नौटियाल पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रमों को लेकर नाराज बताए जा रहे थे। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा के एक कैबिनेट मंत्री की ओर से कथित तौर पर मधु चौहान को अगला दावेदार बताए जाने के बाद रामशरण नौटियाल की पार्टी से दूरी की चर्चा शुरू हुई थी।

    इसके अलावा देहरादून में भाजपा की दावेदार मानी जा रही मधु चौहान ने भी हाल में अपनी ही सरकार के एक मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोला था। इस पूरे घटनाक्रम में रामशरण नौटियाल की ओर से कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई थी। उनका कहना था कि इस मामले में पार्टी की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से वह नाराज चल रहे थे और अब उनका इस्तीफा सामने आया है।

    रामशरण नौटियाल वर्ष 2023 में भी अपनी ही पार्टी के स्थानीय नेताओं को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने चकराता और कालसी ब्लॉक में कथित भ्रष्टाचार तथा जौनसार-बावर क्षेत्र में लकड़ी की कथित तस्करी को लेकर आरोप लगाए थे। ये आरोप उस समय उनके द्वारा लगाए गए थे और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

    अब 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले रामशरण नौटियाल के भाजपा से अलग होने के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम पर नजर बनी हुई है। कांग्रेस में शामिल होने और विकासनगर से चुनाव लड़ने की चर्चाएं जरूर हैं, लेकिन अंतिम फैसला और आधिकारिक घोषणा अभी सामने नहीं आई है।

  • कृष्णा-कश्मीरा संग सुनीता आहूजा का फैमिली मोमेंट गोविंदा का नाम आते ही सबने किया सवाल को इग्नोर

    कृष्णा-कश्मीरा संग सुनीता आहूजा का फैमिली मोमेंट गोविंदा का नाम आते ही सबने किया सवाल को इग्नोर


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के चर्चित परिवारों में शामिल गोविंदा और सुनीता आहूजा का रिश्ता एक बार फिर सुर्खियों में है। लंबे समय से दोनों के बीच रिश्तों को लेकर तरह तरह की चर्चाएं सामने आती रही हैं। इसी बीच सुनीता आहूजा अपने बेटे यशवर्धन के साथ एक पार्टी में पहुंचीं जहां उनकी मुलाकात कृष्णा अभिषेक और कश्मीरा शाह से हुई। पार्टी में दोनों परिवारों के सदस्यों ने एक साथ वक्त बिताया और कैमरे के सामने तस्वीरें भी खिंचवाईं। इस दौरान सुनीता और कश्मीरा के बीच जिस तरह की गर्मजोशी दिखाई दी उसने लोगों का ध्यान खींच लिया।

    पार्टी में पहुंचते ही कश्मीरा शाह ने अपनी सास सुनीता आहूजा का गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों एक दूसरे से गले मिलीं और कश्मीरा ने सुनीता के प्रति अपना प्यार भी जाहिर किया। सुनीता भी अपनी बहू के साथ काफी सहज और खुश नजर आईं। दोनों की बॉन्डिंग देखकर ऐसा लगा जैसे परिवार के पुराने मतभेद अब पीछे छूट चुके हैं। कृष्णा अभिषेक भी इस दौरान परिवार के साथ नजर आए और सभी ने पैपराजी के सामने मिलकर पोज दिए।

    हालांकि इस मुलाकात के दौरान एक सवाल ऐसा भी आया जिसने सबका ध्यान खींच लिया। पैपराजी ने सुनीता आहूजा से पूछा कि मामा यानी गोविंदा कहां हैं। लेकिन इस सवाल पर सुनीता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। वहां मौजूद किसी भी व्यक्ति ने गोविंदा को लेकर बात नहीं की और सवाल को नजरअंदाज कर दिया गया। यही वजह है कि पार्टी की तस्वीरों और वीडियो के साथ गोविंदा का नाम भी सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया।

    सुनीता और कश्मीरा के रिश्ते की कहानी भी काफी दिलचस्प रही है। एक समय दोनों के बीच अनबन की खबरें सामने आती थीं और दोनों परिवारों के बीच दूरी की चर्चाएं लंबे समय तक बनी रहीं। हालांकि बाद में परिस्थितियां बदलीं और दोनों के रिश्ते में सुधार देखने को मिला। खास तौर पर एक कुकिंग शो के दौरान कश्मीरा ने सुनीता से पुरानी बातों को लेकर माफी मांगी थी। सुनीता ने भी उन्हें खुले दिल से माफ कर दिया था। इसके बाद दोनों के बीच रिश्ते काफी सहज नजर आने लगे।

    कश्मीरा कई मौकों पर सुनीता के प्रति अपना समर्थन जाहिर कर चुकी हैं। सार्वजनिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया से जुड़े उनके कुछ बयानों के कारण भी यह रिश्ता चर्चा में रहा है। सास और बहू के बीच अब दिखाई देने वाली नजदीकी फैंस के लिए भी खास है क्योंकि कभी दोनों के बीच मतभेदों की खबरें खूब सुर्खियों में रहती थीं। अब एक ही जगह पर दोनों का हंसते हुए नजर आना रिश्तों में आए बदलाव की तस्वीर दिखाता है।

    दूसरी तरफ गोविंदा और सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर मीडिया में लगातार चर्चाएं चलती रही हैं। गोविंदा की निजी जिंदगी और कथित नजदीकियों को लेकर सामने आने वाली खबरों ने भी इस परिवार को सुर्खियों में रखा है। हालांकि इन मामलों से जुड़े कई दावे सार्वजनिक चर्चाओं और रिपोर्टों पर आधारित हैं और हर दावे की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

    फिलहाल पार्टी का यह वीडियो और तस्वीरें इसलिए खास बन गए हैं क्योंकि इसमें सुनीता आहूजा कृष्णा अभिषेक और कश्मीरा शाह एक साथ नजर आ रहे हैं। जहां एक तरफ सास बहू की शानदार बॉन्डिंग देखने को मिली वहीं मामा यानी गोविंदा के सवाल पर मिली खामोशी ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर गोविंदा परिवार के रिश्तों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • स्त्री 3 पर बड़ा अपडेट, दिनेश विजान ने रिलीज से पहले शूटिंग और कहानी को लेकर बताया पूरा प्लान

    स्त्री 3 पर बड़ा अपडेट, दिनेश विजान ने रिलीज से पहले शूटिंग और कहानी को लेकर बताया पूरा प्लान


    नई दिल्ली । स्त्री फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म स्त्री 3 को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव की इस चर्चित हॉरर कॉमेडी फ्रेंचाइजी की अगली फिल्म के लिए दर्शकों को अभी लंबा इंतजार करना होगा। फिल्म के प्रोड्यूसर दिनेश विजान ने बताया है कि स्त्री 3 साल 2028 में रिलीज होगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि फिल्म की कहानी लिखने का काम पूरा हो चुका है।

    दिनेश विजान ने बताया कि अमर कौशिक ने स्त्री 3 की राइटिंग पूरी कर ली है। उनके मुताबिक, फिल्म में वह सभी चीजें देखने को मिलेंगी जो दर्शकों को पिछली फिल्म में पसंद आई थीं। हालांकि, उन्होंने कहानी से जुड़ी ज्यादा जानकारी साझा करने से इनकार किया, क्योंकि अमर कौशिक को लगता है कि वह फिल्म से जुड़े ज्यादा स्पॉइलर दे देते हैं। इसके बावजूद उन्होंने संकेत दिया कि फिल्म की शुरुआत और अंत दर्शकों को हैरान कर सकता है।

    उन्होंने कहा कि स्त्री 3 साल 2028 में आएगी। उनके मुताबिक, फिल्म को स्वतंत्रता दिवस या क्रिसमस के मौके पर रिलीज किया जा सकता है और यह दर्शकों के लिए एक खास तोहफा हो सकती है। हालांकि, अभी रिलीज की कोई निश्चित तारीख सामने नहीं आई है।

    स्त्री 3 से पहले अमर कौशिक एक अन्य महत्वाकांक्षी फिल्म महावतार का निर्देशन करेंगे। इस फिल्म में विकी कौशल मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। महावतार की कहानी भगवान परशुराम से जुड़ी होगी। दिनेश विजान ने बताया कि अमर कौशिक जनवरी के आखिर में महावतार का निर्देशन शुरू करेंगे और जून तक इसका डायरेक्शन पूरा करने की योजना है।

    इसके बाद अगले साल के अंत तक स्त्री 3 की शूटिंग शुरू होने की बात कही गई है। इस तरह फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले महावतार का काम पूरा किया जाएगा। स्त्री फ्रेंचाइजी से अमर कौशिक लंबे समय से जुड़े हुए हैं और वह इसके निर्देशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।

    स्त्री फ्रेंचाइजी की पहली फिल्म साल 2018 में रिलीज हुई थी। इसमें राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर, पंकज त्रिपाठी, अभिषेक बनर्जी और अपारशक्ति खुराना जैसे कलाकार नजर आए थे। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और भारत में करीब 129.90 करोड़ रुपये की कमाई की थी।

    इसके बाद स्त्री 2 साल 2024 में रिलीज हुई। फिल्म 15 अगस्त को सिनेमाघरों में आई थी। इसमें राजकुमार राव, श्रद्धा कपूर, अपारशक्ति खुराना और अभिषेक बनर्जी के साथ अक्षय कुमार और मुश्ताक खान भी नजर आए। स्त्री 2 ने भारत में करीब 627.02 करोड़ रुपये की कमाई की थी और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में शामिल रही।

    स्त्री के बाद इस हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स का विस्तार हुआ। भेड़िया 2022 में, मुंज्या और स्त्री 2 साल 2024 में, जबकि थामा 2025 में रिलीज हुई। अब इस यूनिवर्स की अगली बड़ी कड़ी स्त्री 3 होगी।

  • सलमान खान से 9 साल छोटी सोनाली कुलकर्णी ने निभाया उनकी मां का किरदार, बताया क्यों पहले रोल ठुकराना चाहती थीं

    सलमान खान से 9 साल छोटी सोनाली कुलकर्णी ने निभाया उनकी मां का किरदार, बताया क्यों पहले रोल ठुकराना चाहती थीं

    नई दिल्ली । साल 2019 में रिलीज हुई फिल्म भारत में सलमान खान की मां का किरदार निभाने वाली सोनाली कुलकर्णी उम्र में उनसे 9 साल छोटी हैं। पर्दे पर मां की भूमिका निभाने को लेकर सोनाली ने बताया कि शुरुआत में वह इस रोल को स्वीकार करने को लेकर झिझक रही थीं। उन्हें लगा था कि किरदार उनकी उम्र और व्यक्तित्व के लिहाज से उपयुक्त नहीं है।

    सोनाली ने बताया कि जब उन्हें भारत में यह भूमिका ऑफर की गई थी, तब उन्हें लगा कि यह रोल उन्हें सही तरीके से सूट नहीं कर रहा है। उन्होंने इस भूमिका के लिए उपयुक्त लगने वाले कुछ कलाकारों के नाम भी सुझाए थे। उन्होंने फिल्म के निर्देशक अली अब्बास जफर और कास्टिंग निर्देशक मुकेश छाबड़ा से सवाल किया था कि आखिर उन्हें यह भूमिका क्यों ऑफर की जा रही है।

    हालांकि, सोनाली ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें किसी खास तरह के किरदार को निभाने से डर नहीं लगता। उन्होंने अपने पुराने काम का उदाहरण देते हुए बताया कि उनकी पहली फिल्म चेलुवी में उन्होंने ऐसी लड़की की भूमिका निभाई थी, जो फूलों वाला पेड़ बन सकती थी। वहीं दायरा में उन्होंने एक लड़के का किरदार निभाया था। उनके मुताबिक, किसी किरदार को सिर्फ इसलिए अलग नजर से नहीं देखना चाहिए क्योंकि उसमें किसी की मां की भूमिका निभानी है।

    सोनाली ने कहा कि किसी महिला का मां होना उसके दूसरे रिश्तों और पहचान को खत्म नहीं करता। उनके मुताबिक, एक मां किसी की दोस्त, भाभी या पत्नी भी हो सकती है। उन्होंने मिशन कश्मीर का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भी लोग उन्हें उस फिल्म में संजय दत्त के किरदार की पत्नी के रूप में जानते हैं, न कि ऋतिक रोशन की सरोगेट मां के रूप में।

    भारत के मामले में उनकी झिझक की एक वजह यह भी थी कि किरदार के अनुसार उम्र का असर दिखना जरूरी था। हालांकि, जब उन्होंने फिल्म की कहानी सुनी तो उन्हें समझ आया कि इसमें सलमान खान के बचपन के फ्लैशबैक पर काफी जोर दिया गया है। इसी वजह से उन्हें लगा कि किरदार को निभाने का अवसर अलग तरह से काम कर सकता है।

    सोनाली ने यह भी बताया कि उन्होंने सलमान खान के साथ पहले कभी काम नहीं किया था। उनकी सलमान से सिर्फ एक बार मुलाकात हुई थी, जब वह अपनी फिल्म के म्यूजिक लॉन्च कार्यक्रम में उनसे मिली थीं। इसलिए उन्हें लगा कि भारत में उनकी मां की भूमिका निभाना सलमान के साथ जुड़ने का अच्छा अवसर हो सकता है। इसी सोच के बाद उन्होंने भूमिका स्वीकार कर ली।

    फिल्म में सलमान खान के साथ कटरीना कैफ भी नजर आई थीं। सोनाली ने कटरीना के साथ काम करने के अनुभव की भी तारीफ की। उन्होंने बताया कि उन्होंने कटरीना को डांस नंबरों के लिए काफी गंभीरता और मेहनत के साथ रिहर्सल करते देखा था और उनके साथ काम करना अच्छा अनुभव रहा।

    भारत में सुनील ग्रोवर, दिशा पाटनी और जैकी श्रॉफ ने भी अहम भूमिकाएं निभाईं। फिल्म का बजट 165 करोड़ रुपये बताया गया था, जबकि दुनियाभर में इसकी कमाई 321 करोड़ रुपये रही थी।

  • KBC 18 में बिग बी के साथ हुआ हादसा पैर फिसलने से चोटिल हुआ घुटना अमिताभ ने फैंस को दिया बड़ा अपडेट

    KBC 18 में बिग बी के साथ हुआ हादसा पैर फिसलने से चोटिल हुआ घुटना अमिताभ ने फैंस को दिया बड़ा अपडेट


    नई दिल्ली। कौन बनेगा करोड़पति सीजन 18 का लेटेस्ट एपिसोड अमिताभ बच्चन के लिए कुछ अलग रहा। हर बार की तरह इस बार भी दर्शक अपने पसंदीदा होस्ट को मंच के बीचोंबीच खड़े होकर शो की शुरुआत करते देखने का इंतजार कर रहे थे लेकिन अमिताभ बच्चन इस बार बैठे हुए नजर आए। इसकी वजह उन्होंने खुद दर्शकों को बताई। बिग बी ने जानकारी दी कि शूटिंग के दौरान उनका पैर फिसल गया था और वह गिर गए थे। इस हादसे में उनके घुटने में चोट लग गई जिसके कारण उन्हें खड़े होने में थोड़ी परेशानी हो रही थी।

    अमिताभ बच्चन ने KBC 18 के एपिसोड की शुरुआत में अपनी चोट के बारे में बात करते हुए दर्शकों को पूरी स्थिति बताई। उन्होंने कहा कि आमतौर पर वह स्टेज के बीच में खड़े होकर अपना मोनोलॉग बोलते हैं लेकिन इस बार घुटने में चोट होने के कारण वह ऐसा नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान उनका पैर अचानक फिसला और वह गिर गए। इसके बाद घुटने में चोट लग गई। हालांकि बिग बी ने यह भी साफ किया कि चोट गंभीर नहीं है और फैंस को ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है।

    अमिताभ बच्चन ने बताया कि वह चाहें तो खड़े होकर अपना मोनोलॉग बोल सकते थे लेकिन लंबे समय तक खड़े रहने में उन्हें परेशानी महसूस हो रही थी। इसी वजह से उन्होंने बैठे हुए ही शो की शुरुआत करने का फैसला किया। उनके इस अंदाज को देखकर दर्शकों को उनकी चोट की गंभीरता को लेकर चिंता हुई लेकिन अमिताभ की बातों से यह संकेत मिला कि वह काम जारी रखने की स्थिति में हैं।

    अमिताभ बच्चन लंबे समय से KBC के मंच का प्रमुख चेहरा बने हुए हैं और शो में उनकी खास शैली दर्शकों को लगातार पसंद आती रही है। ऐसे में शूटिंग के दौरान उनके चोटिल होने की खबर सामने आते ही उनके प्रशंसकों की नजर उनकी सेहत पर टिक गई। हालांकि खुद अमिताभ ने अपनी स्थिति के बारे में जानकारी देकर फैंस को राहत दी। चोट के बावजूद उन्होंने एपिसोड की शूटिंग जारी रखी और दर्शकों से बातचीत भी की।

    बिग बी का काम केवल KBC 18 तक सीमित नहीं है। वह आने वाले समय में कई बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा भी हैं। नाग अश्विन की फिल्म काल्कि 2898 एडी के अगले भाग में वह अश्वत्थामा के किरदार में फिर नजर आने वाले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म की शूटिंग अक्टूबर 2026 से आगे बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा सेक्शन 84 भी उनके आगामी प्रोजेक्ट्स में शामिल है। यह रिभु दासगुप्ता की कोर्टरूम ड्रामा फिल्म बताई जा रही है।

    अमिताभ बच्चन के साथ शूटिंग के दौरान चोट लगने का यह पहला मामला नहीं है। मार्च 2023 में हैदराबाद में कल्कि 2898 एडी की शूटिंग के दौरान एक एक्शन सीन करते समय उनके दाहिने पसली वाले हिस्से में चोट लगी थी। उस समय उन्हें मांसपेशियों में खिंचाव की शिकायत हुई थी और चलने फिरने के साथ सांस लेने में भी दर्द महसूस हो रहा था। इसके बाद शूटिंग रोककर उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने दोबारा काम शुरू किया था।

    फिलहाल KBC 18 के सेट पर लगी घुटने की चोट को लेकर अमिताभ बच्चन ने खुद स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने अपने अंदाज में फैंस को भरोसा दिलाया कि चोट गंभीर नहीं है। शो के दौरान उनका बैठे हुए नजर आना जरूर दर्शकों के लिए अलग अनुभव रहा लेकिन अमिताभ की मौजूदगी ने यह साफ कर दिया कि चोट के बावजूद उनका काम और KBC के प्रति उनका जुड़ाव जारी है।