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  • 6 अप्रैल से 15 अप्रैल तक शुक्र का गोचर इन राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण, समझदारी से लें फैसले

    6 अप्रैल से 15 अप्रैल तक शुक्र का गोचर इन राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण, समझदारी से लें फैसले


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र को सुख, प्रेम, सुविधा और धन का कारक माना जाता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक 6 अप्रैल 2026 को शुक्र देव अश्विनी नक्षत्र से निकलकर भरणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। भरणी नक्षत्र के स्वामी स्वयं शुक्र देव हैं, लेकिन इसका स्वभाव उग्र माना गया है।

    शुक्र देव भरणी नक्षत्र में 15 अप्रैल तक रहेंगे और 16 अप्रैल को कृतिका नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। हालांकि शुक्र अपनी ही राशि के नक्षत्र में हैं, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह अवधि आर्थिक और व्यक्तिगत मोर्चे पर चुनौतियां लेकर आ सकती है।

    प्रभावित राशियां और उपाय

    वृषभ राशि 


    वृषभ राशि के स्वामी स्वयं शुक्र हैं, लेकिन भरणी नक्षत्र में गोचर के दौरान अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं। इस समय सुख-सुविधा की वस्तुओं पर धन खर्च करना पड़ सकता है और बजट बिगड़ सकता है। निवेश या बड़े वित्तीय फैसलों में 15 अप्रैल तक रुकना बेहतर रहेगा।

    कन्या राशि
    कन्या राशि वालों के लिए यह गोचर मिला-जुला रहेगा। कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ वैचारिक मतभेद और सुख-सुविधाओं में अचानक कमी के कारण मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इस दौरान अपनी सेहत और खान-पान का विशेष ध्यान रखें। जीवनसाथी के साथ बातचीत में मधुरता बनाए रखें।

    वृश्चिक राशि

    वृश्चिक राशि वालों के लिए शत्रुओं का प्रभाव बढ़ सकता है। गुप्त शत्रु सक्रिय हो सकते हैं और सामाजिक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकते हैं। प्रेम संबंधों में गलतफहमियां आ सकती हैं। किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और विवादों से दूरी बनाकर रखें।

    मीन राशि

    मीन राशि वालों के लिए धन के मामलों में उतार-चढ़ाव संभव है। उधार देना या बड़ा कर्ज लेना हानिकारक हो सकता है। धन के अटकने के योग बन रहे हैं, जिससे भविष्य की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं। आर्थिक निर्णय लेने से पहले परिवार के बुजुर्गों की सलाह अवश्य लें।
  • क्रूड के रेट आसमान पर… भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने अब तक नहीं बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम

    क्रूड के रेट आसमान पर… भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने अब तक नहीं बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम


    नई दिल्ली।
    सरकारी ऑयल कंपनियों (Government Oil Companies) ने आज रविवार को एक बार फिर से पेट्रोल-डीजल की कीमतों (Petrol Diesel Price ) में कोई बदलाव नहीं किया है। तेल कंपनियों (Oil Companies) ने पुरानी कीमतों को बरकरार रखा है। बता दें, 1 अप्रैल को Shell India ने पेट्रोल के रेट में 7.41 रुपये और डीजल के रेट में 25 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया है।


    वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के रेट

    मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों में पर देखने को मिल रहा है। ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावित हुई है। इसी रास्ते से दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। लेकिन अब यह बाधित होने के बाद कच्चे तेल के रेट में जोरदार इजाफा देखने को मिल रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का रेट 109 डॉलर प्रति बैरल को क्रॉस तक पहुंच गया। युद्ध शुरू होने से पहले रेट 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब था।


    आज पेट्रोल का क्या है रेट?

    – नई दिल्ली में – 94.72
    – कोलकाता – 104.21
    – चेन्नई – 100.75
    – अहमदाबाद – 94.49
    – बेंगलुरू – 102.92
    – हैदराबाद – 107.46
    – जयपुर – 104.72
    – लखनऊ – 94.69
    – पुणे – 104.04
    – चंडीगढ़ – 94.30
    – इंदौर – 106.48
    – पटना – 105.58
    – सूरत – 95
    – नाशिक – 95.50


    आज डीजल का क्या है रेट?

    – दिल्ली – 87.62
    – मुंबई – 92.15
    – चेन्नई – 92.34
    – अहमदाबाद – 90.17
    – बेंगलुरू – 89.02
    – हैदराबाद – 95.70
    – जयपुर – 90.21
    – लखनऊ – 87.80
    – चंडीगढ़ – 82.45
    – इंदौर – 91.88
    – पटना – 93.80
    – सूरत – 89
    – नाशिक – 89.50


    प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में हुआ था इजाफा

    1 अप्रैल को इंडियन ऑयल ने XP100 पेट्रोल के रेट में 11 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया था। जिसके बाद इसका रेट 149 रुपये से बढ़कर 160 रुपये प्रति लीटर के स्तर को क्रॉस कर गया था। प्रीमियम डीजल वैरिएंट एक्सट्रा ग्रीन की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिला है। यह अब 91.49 रुपये से बढ़कर 92.99 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है।


    नायरा के बाद Shell India ने भी बढ़ाया रेट

    प्राइवेट कंपनियों ने तेल की कीमतों में इजाफा शुरू कर दिया है। नयारा के बाद Shell India ने भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा किया है। पेट्रोल के रेट में कंपनी ने 7.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 25.01 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है।

  • पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ नजर आ रहे ये नेता… बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल!

    पश्चिम एशिया संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ नजर आ रहे ये नेता… बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किल!


    नई दिल्ली।
    कांग्रेस (Congress) के कुछ नेताओं ने पश्चिम एशिया (West Asia) संकट से निपटने के तरीके पर सरकार के साथ खड़े नजर आकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले भी कई मौकों पर कांग्रेस को असहज स्थिति में डाल चुके पार्टी सांसद शशि थरूर (MP Shashi Tharoor) के अलावा मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व सीएम कमलनाथ (Former CM Kamal Nath) और पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा (Anand Sharma) और मनीष तिवारी (Manish Tewari) ने पिछले कुछ दिनों में पार्टी के आधिकारिक रुख से अलग राय जताई है।


    नेताओं की बयानबाजी से कांग्रेस की हुई किरकिरी

    इन प्रमुख नेताओं की बयानबाजी ने कांग्रेस की काफी किरकिरी कराई है। खासकर ऐसे समय जब पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण देश में ऊर्जा संकट उत्पन्न होने को लेकर लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साध रहे हैं। राहुल ने हाल ही में कहा था कि आने वाले समय में ईंधन एक बड़ी समस्या बनने वाला है, क्योंकि ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो चुकी है। यह स्थिति गलत विदेश नीति के कारण पैदा हुई है।


    आनंद शर्मा, कमलनाथ के बाद सरकार के साथ मनीष तिवारी

    कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने पश्चिम एशिया में जारी जंग पर एक टीवी चैनल पर कहा, सरकार संभवतः सही काम कर रही है। अभी दो दिन पहले कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं आनंद शर्मा और कमलनाथ ने भी मौजूदा स्थिति को संभालने के केंद्र के तरीके की सराहना की थी। आनंद शर्मा ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि भारत का कूटनीतिक तरीका समझदारी भरा रहा है। इससे संभावित मुश्किलों से बचा गया है।

    एलपीजी की कोई कमी नहीं है- कमलनाथ
    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने छिंदवाड़ा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, एलपीजी की कोई कमी नहीं है। बस ये माहौल बनाया जा रहा है कि कमी है। कुछ लोगों राजनीतिक फायदे के लिए जानबूझकर डर फैला रहे हैं। शशि थरूर ने पिछले महीने एक लेख में पश्चिम एशिया संकट पर भारत सरकार के संयमित रुख का समर्थन करते हुए इसे जिम्मेदारी भरा बताया है। उनके मुताबिक, इस मामले में चुप्पी कायरता नहीं है। हमें समझना होगा कि हमारे राष्ट्रीय हित इस इलाके से जुड़े हैं।

  • 23 साल का स्पीड स्टार: अशोक शर्मा ने तोड़ा सीजन का रिकॉर्ड, बनी नई सनसनी

    23 साल का स्पीड स्टार: अशोक शर्मा ने तोड़ा सीजन का रिकॉर्ड, बनी नई सनसनी


    नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में एक नया नाम तेजी से सुर्खियों में छा गया है और वह नाम है अशोक शर्मा। गुजरात टाइटन्स के इस युवा तेज गेंदबाज ने अपनी रफ्तार और आक्रामक गेंदबाजी से क्रिकेट जगत को चौंका दिया है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में उन्होंने 154.2 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंककर न सिर्फ दर्शकों को रोमांचित किया बल्कि पूरे सीजन की सबसे तेज गेंद डालने का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।

    राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ इस मुकाबले में अशोक शर्मा शुरुआत से ही अलग लय में नजर आए। उनकी गेंदों में लगातार 145 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा की रफ्तार देखने को मिली। बल्लेबाजों के लिए उनकी गेंदों का सामना करना आसान नहीं था। लेकिन असली रोमांच पारी के 16वें ओवर में देखने को मिला जब उन्होंने ओवर की आखिरी गेंद 154.2 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से फेंकी। यह गेंद इतनी तेज और सटीक थी कि बल्लेबाज ध्रुव जुरेल किसी तरह खुद को बचा सके।

    इस प्रदर्शन के साथ ही अशोक शर्मा ने खुद को उन चुनिंदा भारतीय तेज गेंदबाजों की सूची में शामिल कर लिया है जो 154 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार छू चुके हैं। इससे पहले यह उपलब्धि उमरान मलिक और मयंक यादव जैसे गेंदबाज हासिल कर चुके हैं। खास बात यह है कि उमरान मलिक के नाम अब भी आईपीएल इतिहास की सबसे तेज गेंद का रिकॉर्ड दर्ज है।

    अशोक शर्मा की कहानी भी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। 23 वर्षीय यह तेज गेंदबाज राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं और घरेलू क्रिकेट में अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। करियर के शुरुआती दौर में उनकी गेंदबाजी में सटीकता की कमी थी लेकिन उन्होंने पिछले दो वर्षों में खुद पर कड़ी मेहनत की और अपनी कमजोरियों को ताकत में बदल दिया। इसका परिणाम सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2025-26 में देखने को मिला जहां उन्होंने 10 मैचों में 22 विकेट लेकर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा।

    अगर उनके घरेलू क्रिकेट रिकॉर्ड पर नजर डालें तो उन्होंने अब तक 4 फर्स्ट क्लास मैचों में 14 विकेट, 7 लिस्ट ए मुकाबलों में 13 विकेट और 12 टी20 मैचों में 24 विकेट हासिल किए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि वह सिर्फ तेज ही नहीं बल्कि असरदार गेंदबाज भी हैं।

    आईपीएल में उनका सफर भी दिलचस्प रहा है। वह पहले कोलकाता नाइट राइडर्स और राजस्थान रॉयल्स के स्क्वॉड का हिस्सा रह चुके थे लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिल पाया। आखिरकार गुजरात टाइटन्स ने उन पर भरोसा जताया और 90 लाख रुपये में टीम में शामिल किया। यह फैसला अब पूरी तरह सही साबित होता नजर आ रहा है।

    अशोक शर्मा की यह तेज गेंदबाजी न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता की कहानी है बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है। जिस तरह से वह लगातार अपनी रफ्तार और नियंत्रण में सुधार कर रहे हैं उससे साफ है कि आने वाले समय में वह भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

  • 1967 से आज तक अटूट यात्रा कृषि दर्शन की अनोखी कहानी

    1967 से आज तक अटूट यात्रा कृषि दर्शन की अनोखी कहानी


    नई दिल्ली । भारत में टेलीविजन प्रसारण की शुरुआत दूरदर्शन के साथ साल 1959 में हुई थी और तभी से यह माध्यम देश के हर वर्ग तक जानकारी मनोरंजन और शिक्षा पहुंचाने का सशक्त जरिया बन गया। समय के साथ दूरदर्शन पर कई लोकप्रिय कार्यक्रम प्रसारित हुए जिनमें रामायण हम लोग और आपबीती जैसे शो शामिल हैं लेकिन इन सबके बीच एक ऐसा कार्यक्रम भी रहा जिसने न सिर्फ इतिहास बनाया बल्कि आज तक अपनी उपयोगिता और प्रासंगिकता को बनाए रखा है। इस शो का नाम है कृषि दर्शन जिसे भारत का सबसे लंबा चलने वाला टेलीविजन शो माना जाता है।

    कृषि दर्शन की शुरुआत 26 जनवरी 1967 को हुई थी जो कि गणतंत्र दिवस का खास दिन था। इस शो को खासतौर पर किसानों के लिए डिजाइन किया गया था ताकि उन्हें खेती से जुड़ी नई तकनीकों उन्नत बीजों और आधुनिक तरीकों की जानकारी दी जा सके। शुरुआत में यह कार्यक्रम केवल दिल्ली के आसपास के लगभग 80 गांवों में ही प्रसारित किया जाता था। उस समय इसका उद्देश्य साफ था किसानों को सशक्त बनाना और उन्हें वैज्ञानिक खेती की ओर प्रेरित करना।

    समय के साथ इस शो की लोकप्रियता बढ़ती गई और यह सीमित क्षेत्र से निकलकर पूरे देश तक पहुंच गया। आज कृषि दर्शन न केवल टीवी पर बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी उपलब्ध है जिससे किसान कहीं भी कभी भी इसे देख सकते हैं। यह शो पहले डीडी नेशनल पर प्रसारित होता था लेकिन साल 2015 में इसे डीडी किसान चैनल पर स्थानांतरित कर दिया गया जिससे इसका फोकस और अधिक स्पष्ट रूप से कृषि पर केंद्रित हो गया।

    इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि यह केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का काम किया। खेती से जुड़ी समस्याओं के समाधान नई तकनीकों का प्रदर्शन और विशेषज्ञों की सलाह इस शो की पहचान बन गई। यही वजह है कि दशकों बाद भी इसकी उपयोगिता कम नहीं हुई बल्कि और अधिक मजबूत हुई है।

    कृषि दर्शन को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR के सहयोग से शुरू किया गया था। यह पहल भारत सरकार की उस सोच का हिस्सा थी जिसमें कृषि को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। विकिपीडिया के अनुसार इस शो के अब तक 62 सीजन पूरे हो चुके हैं और 16780 से अधिक एपिसोड प्रसारित किए जा चुके हैं जो इसे अपने आप में एक रिकॉर्ड बनाता है।

    आज जब मनोरंजन के अनगिनत विकल्प मौजूद हैं तब भी कृषि दर्शन अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। यह सिर्फ एक टीवी शो नहीं बल्कि किसानों के लिए ज्ञान का एक भरोसेमंद स्रोत है जिसने पीढ़ियों को जोड़ा है और देश के कृषि विकास में अहम भूमिका निभाई है।

  • कूटनीतिक सफलता…. ईरान युद्ध के बीच होर्मुज से अब तक निकले तेल-गैस से भरे भारत के 9 जहाज

    कूटनीतिक सफलता…. ईरान युद्ध के बीच होर्मुज से अब तक निकले तेल-गैस से भरे भारत के 9 जहाज


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष (West Asia Crisis) के बीच ईरान (Iran) ने समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लगभग बंद कर दिया है। इससे खाड़ी देशों से गैस और तेल की आपूर्ति बाधित हो गई है। इसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market) में तेल की कीमतों में आग लगी है। लेकिन, भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है, जिन्होंने इस जोखिम भरे रास्ते से तेल और गैस से भरे सबसे अधिक जहाज सुरक्षित निकाले हैं। होर्मुज फारस और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा समुद्री मार्ग है। ओमान और ईरान के बीच स्थित होर्मुज जलमार्ग एक जगह मात्र 33 किलोमीटर चौड़ा है। यह फारस की खाड़ी को शेष दुनिया से जोड़ता है।

    इस रास्ते से दुनिया का लगभग 20 फीसदी कच्चे तेल का नौवहन होता है। 28 फरवरी को अमेरिका-इस्राइल की ओर से हमला किए जाने के बाद ईरान ने इस मार्ग की नाकेबंदी कर दी है। कुछ तेल टैंकरों को ईरान ने निशाना भी बनाया है। लेकिन ईरान से अपने ऐतिहासिक संबंधों और मजबूत कूटनीति के जरिये भारत होर्मुज के रास्ते अब तक तेल और गैस से भरे 9 जहाज सुरक्षित निकाल लाने में सफल रहा है। इनमें से 8 जहाज भारतीय तट पर पहुंच गए हैं, जबकि एक पहुंचने वाला है।


    सबसे पहले जहाज पार कराया था

    पश्चिम एशिया में संघर्ष के बीच भारत ने सबसे पहले घरेलू लिक्विफाइड पेट्रोलिमय गैस (एलपीजी) से भरे दो जहाजों को होर्मुज पार कराया था। शिवालिक और नंदा देवी नामक इन दोनों टैंकरों को ईरान की नौसेना ने ही अपनी सुरक्षा में होर्मुज को पार कराा था। हालांकि, भारत ने भी अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में पोत तैनात कर रखे हैं। शिवालिक और एमटी नंदा देवी 92,712 टन एलपीजी लेकर आए थे। शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह और नंदा देवी उसके अगले दिन 17 मार्च को गुजरात के ही कांडला बंदरगाह पहुंचा था।


    जग लाडकी से जगत वसंत तक, भारत पहुंचे कई जहाज

    जग लाडकी संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चा तेल लेकर 18 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह पहुंचा था। इसके बाद पाइन गैस और जग वसंत 92,612 टन एलपीजी लेकर 26 और 28 मार्च को भारत पहुंचे थे। 94,000 टन एलपीजी लेकर बीडब्ल्यू टीवाईआर और बीडब्ल्यू ईएलएम भी आए हैं। बीडब्ल्यू टीवाई 31 मार्च को मुंबई और बीडब्ल्यू ईएलएम 1 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि लगभग 44,000 टन एलपीजी लेकर सी बर्ड 2 अप्रैल को मंगलोर बंदरगाह पहुंचा था। यह ईरान से एलपीजी लेकर आया है। सात साल में पहली बार भारत ने ईरान से गैस खरीदा है।


    ईरान के साथ भुगतान की समस्या नहीं कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित

    केंद्र सरकार ने शनिवार को कहा कि ईरान से कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान संबंधी कोई समस्या नहीं है और रिफाइनरियां तेहरान के साथ दुनियाभर के विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं से तेल हासिल कर रही हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन खबरों को खारिज किया, जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी कच्चा तेल ले जा रहा एक तेल टैंकर अपने पहले से संकेतित गंतव्य भारत के बजाय चीन की ओर मुड़ गया है।

    मंत्रालय ने कहा कि ये दावे उद्योग के उस सामान्य अभ्यास की अनदेखी करते हैं, जहां परिचालन लचीलेपन के आधार पर यात्रा के दौरान कार्गो अपना गंतव्य बदल सकते हैं। यदि यह खेप भारत आती, तो लगभग सात वर्षों में ऐसी पहली खेप होती। मंत्रालय ने इन दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया कि भुगतान बाधाओं के कारण कार्गो को गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन की ओर मोड़ा गया था। मंत्रालय ने कहा कि ईरानी कच्चे तेल के आयात के लिए भुगतान की कोई बाधा नहीं है।

    मंत्रालय ने स्पष्ट किया, भारत 40 से अधिक देशों से कच्चे तेल का आयात करता है, और कंपनियों के पास विभिन्न स्रोतों और भौगोलिक क्षेत्रों से तेल प्राप्त करने का पूर्ण लचीलापन है। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने ईरान सहित अपनी कच्चे तेल की आवश्यकताओं को सुरक्षित कर लिया है। जहाजों पर नजर रखने वाली फर्म केपलर ने शुक्रवार को कहा था कि 2002 में निर्मित और 2025 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित टैंकर पिंग शुन अब गुजरात के वाडिनार के बजाय चीन के डोंगयिंग को अपना गंतव्य बता रहा है।

  • RR कप्तान का बड़ा बयान! रियान पराग बोले- ध्रुव जुरैल की टैलेंट के साथ नहीं हुआ इंसाफ

    RR कप्तान का बड़ा बयान! रियान पराग बोले- ध्रुव जुरैल की टैलेंट के साथ नहीं हुआ इंसाफ


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में शनिवार को शाम का मुकाबला नरेंद्र मोदी स्टेडियम में गुजरात टाइटंस (जीटी) और राजस्थान रॉयल्स (आरआर) के बीच खेला गया। आरआर ने जीटी पर 6 रन से जीत दर्ज की। जीत के बाद आरआर के कप्तान रियान पराग ने विकेटकीपर बल्लेबाज ध्रुव जुरैल की जमकर तारीफ की।

    रियान पराग ने मैच के बाद जुरैल की बल्लेबाजी पर कहा, “मुझे लगता है कि हमने उसकी प्रतिभा के साथ अब तक न्याय नहीं किया है। उसने मुश्किल काम किया है। उसने छह और सात नंबर बैटिंग की है। अब जब हमारे पास मौका है तो मैं सबसे पहले कहने वाला था कि उसे नंबर तीन पर बैटिंग करनी चाहिए और उसने हमें दिखा दिया कि वह क्या कर सकता है। यह उसके लिए शुरुआत है। उम्मीद है वह आगे चलकर 700, 800 रन बनाएगा और हमें चैंपियनशिप जिताएगा।”

    पिछले सीजन तक निचले क्रम में बल्लेबाजी करने वाली ध्रुव जुरैल को आईपीएल 2026 में तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिए भेजा जा रहा है। सीएसके के खिलाफ सीजन के पहले मैच में 9 गेंदों पर 18 रन बनाने वाले जुरैल ने जीटी के खिलाफ अपने आईपीएल करियर की श्रेष्ठ पारी खेली। जुरैल ने 42 गेंदों पर 5 चौकों और 5 छक्कों की मदद से 75 रन बनाए।

    जुरैल की पारी की वजह से ही टॉस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरआर 6 विकेट पर 210 रन बना सकी।

    211 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जीटी 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 204 रन बना सकी और 6 रन से मैच हार गई। आरआर ने आखिरी 2 ओवरों में बेहतरीन गेंदबाजी की और मैच अपनी तरफ मोड़ लिया। जीटी को आखिरी दो ओवरों में जीत के लिए मात्र 15 रन चाहिए थे। 19वां ओवर फेंकने वाले जोफ्रा आर्चर और 20वां ओवर फेंकने वाले तुषार देशपांडे ने मात्र 4-4 रन दिए और जीटी को 204 रन पर रोक दिया। आरआर के लिए 4 ओवर में 41 रन देकर 4 विकेट लिए रवि बिश्नोई प्लेयर ऑफ द मैच रहे।

  • पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस BJP में शामिल…. बोले- PM मोदी ने सौंपी 2036 ओलंपिक की जिम्मेदारी

    पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस BJP में शामिल…. बोले- PM मोदी ने सौंपी 2036 ओलंपिक की जिम्मेदारी


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में इसी महीने होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) से पहले सियासत में और ज्यादा गर्माहट बढ़ गई है। ऐसे में अब भारत के पूर्व टेनिस स्टार लिएंडर पेस (Former Indian Tennis star Leander Paes) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने मुझे युवाओं और खेल के लिए काम करने का एक स्पष्ट दृष्टिकोण दिया। उन्होंने मुझे 2036 ओलंपिक गेम्स के लिए भारत की दावेदारी से जुड़ी जिम्मेदारी दी है। मुझे इस देश में ओलंपिक लाने के लिए एक टीम के साथ कड़ी मेहनत करनी है। पेस ने यह बात शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के बाद पहली बार मीडिया से बातचीत के दौरान कही।

    उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने उन्हें युवाओं और खेलों के लिए काम करने का साफ विजन दिया है। अब उनका लक्ष्य है कि एक मजबूत टीम के साथ मिलकर भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी दिलाई जाए। पेस ने कहा कि अगर भारत ओलंपिक की मेजबानी करता है, तो इससे देश की पहचान दुनिया में और मजबूत होगी और खेलों को बढ़ावा मिलेगा।


    राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी में भी योगदान की चार- पेस

    पेस ने आगे कहा कि वह 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी में भी योगदान देना चाहते हैं, खासकर अहमदाबाद में होने वाले संभावित आयोजन के लिए। इसके साथ ही उन्होंने अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल में खेल सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया।


    खुद को बताया बंगाली बॉय

    इस दौरान खुद को बंगाली बॉय बताते हुए पेस ने कहा कि पश्चिम बंगाल में इंडोर टेनिस स्टेडियम और अच्छी खेल सुविधाओं की कमी है। उनका सपना है कि आने वाले 20 वर्षों में वे देश के 25 करोड़ बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं और उन्हें खेलों से जोड़ें।


    पेस ने इन देशों का दिया उदाहारण

    पेस यह भी कहा कि भारत को खेलों में आगे बढ़ने के लिए मजबूत स्पोर्ट्स कल्चर अपनाना होगा। पेस ने उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका, चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिसा और ब्रिटेन जैसे देश, जो आर्थिक रूप से मजबूत हैं, वही ओलंपिक में भी सबसे ज्यादा पदक जीतते हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत को भी खेलों के बुनियादी ढांचे, ट्रेनिंग और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार करने में निवेश करना होगा। पेस के मुताबिक, खेल और खेल शिक्षा भारत को एक नई ताकत बना सकते हैं और युवा खिलाड़ियों का विकास देश के ओलंपिक सपने को पूरा करने में सबसे अहम भूमिका निभाएगा।

  • सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री विवाद पर SC की 9 जजों की पीठ करेगी सुनवाई… अन्य धर्मों पर भी होगा असर….

    सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री विवाद पर SC की 9 जजों की पीठ करेगी सुनवाई… अन्य धर्मों पर भी होगा असर….


    नई दिल्ली।
    सबरीमाला मंदिर (Sabarimala Temple) में महिलाओं के प्रवेश (Women’s entry) से शुरू हुआ विवाद अब एक ऐतिहासिक संवैधानिक मोड़ पर खड़ा है। 7 अप्रैल 2026 से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली 9 जजों की संविधान पीठ उन व्यापक कानूनी सवालों पर सुनवाई शुरू करने जा रही है। यह न केवल हिंदू धर्म, बल्कि मुस्लिम, पारसी और दाऊदी बोहरा समुदायों की धार्मिक प्रथाओं को भी प्रभावित करेंगे।

    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की यह पीठ केवल सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर विचार नहीं कर रही है। अदालत के सामने असल चुनौती यह तय करना है कि क्या व्यक्तिगत मौलिक अधिकार किसी समुदाय के धार्मिक अधिकारों से ऊपर हैं। इस फैसले का असर मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, पारसी महिलाओं के अधिकारों और दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित प्रथाओं पर भी पड़ेगा।

    2018 में तत्कालीन सीजेआई दीपक मिश्रा की बेंच ने 4:1 के बहुमत से सबरीमाला में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी थी। कोर्ट ने कहा था कि भक्ति को लैंगिक भेदभाव का शिकार नहीं बनाया जा सकता। एकमात्र महिला जज, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने तब असहमति जताते हुए कहा था कि धार्मिक प्रथाओं की तर्कसंगतता की जांच करना अदालतों का काम नहीं है। नवंबर 2019 में पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि यह मुद्दा बहुत व्यापक है और इसे बड़ी बेंच (9 जजों) को भेज दिया गया।


    सुप्रीम कोर्ट के सामने कई सवाल

    संविधान पीठ कुछ मुद्दों पर स्पष्टता लाने की कोशिश कर सकती है। धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का दायरा और सीमा क्या है? अनुच्छेद 25 (व्यक्तिगत अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संप्रदाय के अधिकार) के बीच तालमेल कैसे बैठेगा? क्या धार्मिक संप्रदाय के अधिकार संविधान के ‘भाग-III’ (मौलिक अधिकार) के अधीन हैं? अनुच्छेद 25 और 26 में प्रयुक्त ‘नैतिकता’ शब्द का अर्थ क्या है? क्या इसमें संवैधानिक नैतिकता शामिल है? क्या अदालतें यह तय कर सकती हैं कि कोई धार्मिक प्रथा उस धर्म का अनिवार्य हिस्सा है या नहीं? अनुच्छेद 25(2)(b) में हिंदुओं के वर्गों का वास्तविक अर्थ क्या है? क्या कोई व्यक्ति जो उस विशेष धार्मिक संप्रदाय का हिस्सा नहीं है, उसकी प्रथाओं को कोर्ट में चुनौती दे सकता है?


    अन्य धर्मों पर भी होगा असर

    यह सुनवाई इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें कई अन्य विवादों को जोड़ दिया गया है। मुस्लिम महिलाओं के मस्जिदों में प्रवेश का अधिकार। दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित ‘बहिष्कार’ और अन्य प्रथाओं की वैधता। गैर-पारसी से शादी करने वाली पारसी महिलाओं के ‘अग्नि मंदिर’ में प्रवेश का अधिकार। आपको बता दें कि अखिल भारतीय मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और कई जैन संगठनों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है, क्योंकि कोर्ट का फैसला उनके व्यक्तिगत कानूनों को प्रभावित कर सकता है।


    नई बेंच का गठन

    CJI सूर्य कांत के नेतृत्व वाली इस बेंच में विविधता का ध्यान रखा गया है। इसमें जस्टिस बीवी नागरत्ना सहित देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों से आए अनुभवी जज शामिल हैं। 7 अप्रैल से होने वाली यह दैनिक सुनवाई भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक व्याख्याओं में से एक साबित होगी। अदालत के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म मानने की आजादी देता है, लेकिन साथ ही यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कोई भी प्रथा जो महिलाओं की गरिमा के खिलाफ है, वह धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं हो सकती। धार्मिक संस्थाओं का तर्क है कि धर्म की अपनी आंतरिक स्वायत्तता होती है और अदालतों को सदियों पुरानी परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

  • साउथेम्प्टन का शानदार खेल! आर्सेनल को हराकर FA कप के सेमीफाइनल में बनाई जगह

    साउथेम्प्टन का शानदार खेल! आर्सेनल को हराकर FA कप के सेमीफाइनल में बनाई जगह


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के प्रतिष्ठित एफए कप का रोमांच चरम पर है। टूर्नामेंट में बड़े उलटफेर देखने को मिल रहे हैं। सबसे बड़े उलटफेर का शिकार आर्सेनल हुए है। आर्सेनल जैसी दिग्गज टीम को साउथेम्प्टन ने हराते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली। सेंट मैरी स्टेडियम में खेले गए एफए कप क्वार्टर फाइनल में साउथेम्प्टन ने आर्सेनल को 2-1 से हराया।

    मैच की शुरुआत में साउथेम्प्टन ने आक्रामक खेल दिखाया और हाफ टाइम से पहले रॉस स्टीवर्ट ने पहला गोल दागकर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद लियो सेनेजा ने भी बेहतरीन मौके बनाए, लेकिन उन्हें गोल में तब्दील करने में देर कर दी। दूसरे हाफ में साउथेम्प्टन का दबदबा जारी रहा, हालांकि आर्सेनल ने वापसी करते हुए सब्स्टीट्यूट विक्टर ग्योकेरेस के गोल से बराबरी हासिल कर ली।

    जब मैच ड्रॉ की ओर बढ़ता दिख रहा था, तभी सब्स्टीट्यूट शिया चार्ल्स ने मैच खत्म होने से पांच मिनट पहले शानदार गोल कर साउथेम्प्टन को ऐतिहासिक जीत दिला दी।

    दूसरी ओर, मैनचेस्टर सिटी ने अपना दबदबा कायम रखते हुए लिवरपूल को 4-0 से हराकर लगातार आठवीं बार सेमीफाइनल में जगह बनाई। इस मैच के हीरो रहे एर्लिंग हालैंड, जिन्होंने शानदार हैट्रिक लगाई। उनके साथ एंटोनी सेमेन्यो ने भी गोल कर टीम की जीत को और मजबूत किया।

    इस जीत के साथ मैनचेस्टर सिटी ने एफए कप में घरेलू मैदान पर लगातार 18वीं जीत दर्ज की और पुराने रिकॉर्ड्स को पीछे छोड़ दिया। कोच पेप गार्डियोला के नेतृत्व में टीम लगातार बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है और अब तक कई बड़े खिताब अपने नाम कर चुकी है।

    वहीं, चेल्सी ने भी शानदार खेल दिखाते हुए सेमीफाइनल में जगह पक्की की। स्टैमफोर्ड ब्रिज में खेले गए मुकाबले में उन्होंने पोर्ट वेले को 7-0 से हराया और क्लीन शीट भी बनाए रखी।

    कुल मिलाकर, इस बार का एफए कप का सेमीफाइनल बेहद रोमांचक होने वाला है, जहां बड़े क्लब्स के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिलेगी।