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  • 2026 में ना शाहरुख ना सलमान, इस एक्टर की फिल्म सबसे महंगी मूवी

    2026 में ना शाहरुख ना सलमान, इस एक्टर की फिल्म सबसे महंगी मूवी

    मुंबई। आज हम आपको बताएंगे साल 2026 की सबसे महंगी फिल्मों के बारे में। इस लिस्ट में कई बड़े स्टार्स की फिल्में शामिल हैं। लेकिन जानें किस हीरो की है सबसे महंगी मूवी।
    बॉलीवुड फिल्में

    साल 2026 में कई बड़े बजट की फिल्में रिलीज होने वाली हैं। इस लिस्ट में शाहरुख खान, आलिया भट्ट, रणबीर कपूर समेत कई एक्टर्स की मूवीज शामिल हैं। चलिए जानते हैं किसकी सबसे महंगी फिल्म है।
    रामायण

    रणबीर कपूर, सई पल्लवी की फिल्म रामायण इसी साल रिलीज होने वाली है। यह फिल्म 4000 करोड़ रुपये में बनी है। नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित इस फिल्म को देखने के लिए फैंस काफी एक्साइटेड हैं।

    अल्फा

    आलिया भट्ट और शरवरी वाघ की फिल्म अल्फा जो यश राज फिल्म्स की स्पाई यूनिवर्स में से एक फिल्म है। इसका बजट रिपोर्ट्स के मुताबिक 400 करोड़ है।
    किंग

    शाहरुख खान की फिल्म किंग जिसमें उनके साथ दीपिका पादुकोण, बेटी सुहाना खान और अभिषेक बच्चन हैं। इस फिल्म का बजट 350 करोड़ बताया जा रहा है।
    दृश्यम 3

    अजय देवगन की फिल्म दृश्यम 3 जिसका सबको बेसब्री से इंतजार है।

    इस मूवी का बजट भी 300 करोड़ है।
    स्पिरिट

    संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म स्पिरिट जिसमें प्रभास और तृप्ति डिमरी लीड रोल में हैं। इस फिल्म का बजट 300 करोड़ है।
    धुरंधर 2

    रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, आर माधवन, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन की फिल्म धुरंधर 2 का बजट 250 करोड़ बताया जा रहा है।
    लव एंड वॉर

    संजय लीला भंसाली की फिल्म लव एंड वॉर जिसमें रणबीर कपूर, आलिया भट्ट और विकी कौशल हैं। इस फिल्म का बजट 200 करोड़ बताया जा रहा है।
    बैटल ऑफ गलवान

    कोई मोई वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक सलमान खान की फिल्म बैटल ऑफ गलवान का बजट 200 करोड़ है।

  • त्रिवेणी तट पर पौष पूर्णिमा स्नान के साथ माघ मेला शुरू… करोड़ों श्रद्धालु लेंगे पुण्य लाभ

    त्रिवेणी तट पर पौष पूर्णिमा स्नान के साथ माघ मेला शुरू… करोड़ों श्रद्धालु लेंगे पुण्य लाभ


    प्रयागराज।
    पौष पूर्णिमा (Paush Purnima) पर पुण्य की डुबकी के साथ ही प्रयागराज (Prayagraj) के त्रिवेणी तट (Triveni Ghat) पर डेढ़ माह तक चलने वाले माघ मेला 2026 (Magh Mela 2026) का शनिवार को शुभारंभ हो गया है। प्रदेश सरकार और मेला प्रशासन का मानना है कि महाकुंभ 2025 के बाद के इस पहले माघ मेला में श्रद्धालुओं की संख्या 2024 और इससे पूर्व आयोजित माघ मेला की तुलना में ज्यादा हो सकती है। अनुमान है कि पूरे मेला अवधि के दौरान 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालु आएंगे। इसलिए तैयारियां भी उसी अनुरूप की जा रही हैं। मेला क्षेत्र का विस्तार कर गंगा पर बनने वाले पांटुन पुलों की संख्या में इजाफा किया गया है।

    मेला प्रशासन का अनुमान है कि शनिवार को पहले स्नान पर्व पर 25 से 30 लाख श्रद्धालु पावन त्रिवेणी में पुण्य की डुबकी लगाएंगे। प्रथम स्नान पर्व की पूर्ण संध्या पर मीडिया से मुखातिब हुईं मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार और जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने मेला की तैयारियों की जानकारी दी।


    आज शाम 04:03 बजे तक रहेगी पूर्णिमा तिथि

    पौष पूर्णिमा शुक्रवार शाम छह बजकर 12 मिनट से लग गई है। जो शनिवार को शाम चार बजकर तीन मिनट तक रहेगी। तीर्थ पुरोहित राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि स्नान का यही समय रहेगा। उदयातिथि के कारण शनिवार को पूरे दिन स्नान का महत्व है।


    स्नान पर्व पर 30 एंबुलेंस रहेंगी तैयार

    माघ मेला के पहले स्नान पर्व पौष पूर्णिमा पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आकस्मिक स्थिति के लिए मेला में 20 एंबुलेंस-108 और 10 एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस की तैनाती की गई है। संगम नोज पर एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस उपलब्ध रहेंगी। मेला क्षेत्र में 20-20 बेड के दो बड़े अस्पताल और सभी सेक्टर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दवाएं और एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है।

    एलोपैथिक के अलावा चार आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीजों का उपचार किया जाएगा। सीएमओ डॉ. एके तिवारी के अनुसार सभी अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टॉफ की तैनाती की गई है। मेला क्षेत्र के अलावा एसआरएन, बेली और कॉल्विन अस्पताल में मरीजों के लिए बेड आरक्षित किए गए हैं। ट्रामा सेंटर में डॉक्टर और फार्मासिस्ट की अतिरिक्त तैनाती की गई है।

  • RSS को लेकर फैलाई जा रही गलत धारणाएं…. यह पैरा-मिलिट्री नहीं : मोहन भागवत

    RSS को लेकर फैलाई जा रही गलत धारणाएं…. यह पैरा-मिलिट्री नहीं : मोहन भागवत


    भोपाल।
    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh- RSS) के प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने बड़ा बयान देते हुए कहा- संघ कोई पैरा-मिलिट्री संगठन (Paramilitary) नहीं है। उन्होंने कहा कि संघ को लेकर लोगों के मन में गलत धारणाएं फैलाई जा रही हैं, जबकि RSS का असली मकसद समाज को जोड़ना और उसे मजबूत बनाना है। भागवत ने जोर देते हुए कहा कि ऐसे लोग संघ को ठीक से समझते नहीं हैं। जानिए उन्होंने और क्या कुछ कहा?


    ये लगो संघ को ठीक से नहीं समझते

    भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक एक जैसी वर्दी पहनते हैं, मार्च करते हैं और लाठी का अभ्यास भी करते हैं। लेकिन सिर्फ इन बातों के आधार पर यह मान लेना कि RSS कोई पैरा-मिलिट्री संगठन है, गलत है। उन्होंने कहा, “अगर कोई ऐसा सोचता है तो वह संघ को ठीक से नहीं समझता। RSS एक अलग तरह का संगठन है।”


    इंटरनेट या विकिपीडिया पर हर बात सही नहीं

    भागवत ने कहा कि आजकल लोग किसी भी विषय को गहराई से समझने की कोशिश नहीं करते। वे जल्दी-जल्दी जानकारी के लिए इंटरनेट या विकिपीडिया जैसे स्रोतों पर निर्भर हो जाते हैं, जहां हर बात सही हो, यह जरूरी नहीं। उन्होंने कहा कि जो लोग सही और भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी लेते हैं, वे संघ की भूमिका और उद्देश्य को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।


    RSS को लेकर गलत कहानी बनाई जा रही

    उन्होंने यह भी कहा कि RSS को लेकर जानबूझकर एक गलत कहानी बनाई जा रही है। इसी वजह से संघ को अपने काम और सोच के बारे में लोगों को बार-बार समझाना पड़ रहा है। इतिहास की बात करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि भारत पर हमला करने वाले अंग्रेज पहले लोग नहीं थे। उनसे पहले भी कई बार बाहर से आए लोगों ने भारत को हराया। उन्होंने कहा कि ये लोग न तो भारत से ज्यादा अमीर थे और न ही ज्यादा अच्छे या गुणवान, फिर भी उन्होंने हमें हराया। ऐसा सात बार हुआ और अंग्रेज आठवें आक्रमणकारी थे।

    अपने फायदे में सोचने पर देश कमजोर होगा
    भागवत ने सवाल उठाया कि अगर ऐसा बार-बार हुआ है तो आजादी की असली सुरक्षा क्या है। उन्होंने कहा कि इसका जवाब समाज को खुद तलाशना होगा। जब लोग सिर्फ अपने फायदे के बारे में सोचेंगे, तब देश कमजोर होगा। लेकिन अगर समाज एकजुट रहेगा और अच्छे मूल्यों को अपनाएगा, तो देश मजबूत बनेगा।

  • भाषा विवाद पर CM फडणवीस बोले – महाराष्ट्र में केवल मराठी अनिवार्य, अन्य भाषाओं का भी स्वागत….

    भाषा विवाद पर CM फडणवीस बोले – महाराष्ट्र में केवल मराठी अनिवार्य, अन्य भाषाओं का भी स्वागत….


    मुम्बई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने एक बार फिर से भाषा विवाद (Language dispute) पर अपना रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में केवल मराठी भाषा ही अनिवार्य (Marathi language Compulsory) है, इसके अलावा दूसरी भाषाओं का स्वागत है, लेकिन कोई अनिवार्य नहीं है। गौरतलब है कि पिछले साल भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य में पहली कक्षा से हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में शुरू करने के अपने फैसले को तीव्र विरोध प्रदर्शनों के बाद रद्द कर दिया और इस मुद्दे की जांच के लिए एक समिति का गठन किया।

    सतारा में 99वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए फडणवीस ने कहा कि राज्य में भाषा की अनिवार्यता का मुद्दा व्यापक रूप से बहस का विषय बना हुआ है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के तौर पर मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है। कोई अन्य भाषा अनिवार्य नहीं है। हालांकि, तीन-भाषा प्रणाली को लेकर मतभेद थे। छात्रों को अपनी पसंद की कोई भी भारतीय भाषा सीखने की स्वतंत्रता है। सवाल सिर्फ यह था कि तीसरी भाषा किस कक्षा से शुरू की जानी चाहिए।’’

    विवाद का जिक्र करते हुए फडणवीस ने कहा कि महाविकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान तैयार की गई एक रिपोर्ट में पहली कक्षा से ही हिंदी को अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई थी और उनकी सरकार ने शुरू में इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था। उन्होंने कहा, लेकिन पहली कक्षा से ही (हिंदी) भाषा को अनिवार्य बनाने को लेकर व्यापक बहस और विरोध हुआ, इसलिए नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हालांकि, मैं यह दोहराना चाहूंगा कि महाराष्ट्र में केवल मराठी ही अनिवार्य है, कोई अन्य भाषा नहीं।’’

    उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह भी कहना चाहूंगा कि हम अंग्रेजी, फ्रेंच और स्पेनिश जैसी भाषाओं का खुले दिल से स्वागत करते हैं… इन भाषाओं के प्रति हमारा रुख सकारात्मक है क्योंकि ये अंतरराष्ट्रीय भाषाएं हैं। लेकिन भारतीय भाषाओं का विरोध करते हुए अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का स्वागत करना अनुचित है। मेरा मानना ​​है कि हमारी भारतीय भाषाओं को भी वही सम्मान मिलना चाहिए, और यही हमारा रुख है।’’

  • Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट

    Canada में लाखों भारतीयों पर मंडरा रहा खतरा… खत्म होने वाले हैं अस्थाई वर्क और स्टडी परमिट


    ओटावा।
    कनाडा (Canada) में आने वाले महीनों में बिना वैध दस्तावेजों (Without valid Documents) के रह रहे प्रवासियों (Migrants.) की संख्या में तेज बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है। इसका मुख्य कारण लाखों अस्थायी वर्क परमिट और स्टडी परमिट (Temporary Work Permits and Study Permits) का समाप्त होना है, जबकि नई वीजा श्रेणियों और स्थायी निवास के रास्ते लगातार सख्त होते जा रहे हैं। ऐसे में कनाडा में रह रहे लाखों अस्थायी निवासियों, विशेष रूप से भारतीयों के लिए एक बड़ा संकट मंडरा रहा है।

    मिसिसॉगा (कनाडा) स्थित इमिग्रेशन कंसल्टेंट कंवर सेराह के अनुसार, 2026 के मध्य तक कम से कम 10 लाख भारतीय अपनी कानूनी स्थिति खोने के जोखिम में हैं। यह अनुमान इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) के आंकड़ों पर आधारित है, जिसमें दिखाया गया है कि 2025 के अंत तक लगभग 10.53 लाख वर्क परमिट समाप्त हो चुके हैं, जबकि 2026 में आगे 9.27 लाख वर्क परमिट की समाप्ति होने वाली है। ये आंकड़े सेराह ने शेयर किए हैं। सेराह ने चेतावनी दी है कि कनाडा में कुल मिलाकर 20 लाख लोग अवैध रूप से रहने वाले हो सकते हैं, जिनमें से आधे भारतीय होंगे। उन्होंने इसे “बहुत रूढ़िवादी अनुमान” बताया और कहा कि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त हो रहे हैं, साथ ही कई शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    वैध दर्जा समाप्त होने का खतरा

    वर्क परमिट की अवधि समाप्त होते ही संबंधित व्यक्ति का कनाडा में वैध दर्जा भी खत्म हो जाता है, जब तक कि वह नया वीजा हासिल न कर ले या स्थायी निवास की ओर ट्रांजिशन न कर पाए। हालांकि, कनाडा सरकार ने हाल के समय में अस्थायी श्रमिकों और अंतरराष्ट्रीय छात्रों से जुड़ी नीतियों को सख्त किया है। साथ ही शरण आवेदनों को नियंत्रित करने के लिए भी नए उपाय लागू किए गए हैं, जिससे वैध रास्ते और सीमित हो गए हैं।


    2026 में ‘बॉटलनेक’ की चेतावनी

    कंवर सेराह ने चेतावनी दी कि कनाडा ने पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में लोगों को आउट ऑफ स्टेटस होते नहीं देखा है। उनके अनुसार, 2026 की पहली तिमाही में ही करीब 3,15,000 परमिट समाप्त होने वाले हैं, जिससे इमिग्रेशन सिस्टम में गंभीर बॉटलनेक पैदा होगा। तुलना करें तो 2025 की आख़िरी तिमाही में यह संख्या लगभग 2,91,000 थी।

    आवास संकट, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण सरकार ने टेम्परेरी रेजिडेंट्स की संख्या घटाने का लक्ष्य रखा है। 2026-2028 इमिग्रेशन लेवल्स प्लान में टेम्परेरी रेजिडेंट्स को 2026 में 3.85 लाख तक सीमित किया गया है, जो 2025 से 43% कम है। इंटरनेशनल स्टूडेंट परमिट भी आधे से कम हो गए हैं।

    सेराह का अनुमान है कि मध्य-2026 तक कनाडा में कम से कम 20 लाख लोग बिना वैध कानूनी दर्जे के रह रहे हो सकते हैं। इसमें से करीब 50 प्रतिशत भारतीय नागरिक हो सकते हैं। उन्होंने इसे बहुत ही सतर्क अनुमान बताया, क्योंकि हजारों स्टडी परमिट भी समाप्त होंगे और बड़ी संख्या में शरण आवेदन खारिज होने की संभावना है।


    ग्रेटर टोरंटो एरिया में सामाजिक असर

    बिना दस्तावेजों वाले प्रवासियों की बढ़ती संख्या का असर अब ग्रेटर टोरंटो एरिया के कुछ हिस्सों में दिखने लगा है। खासकर ब्रैंपटन और कैलेडन जैसे इलाकों में जंगलनुमा क्षेत्रों में टेंट कॉलोनियां उभर आई हैं, जहां कथित तौर पर बिना वैध दर्जे के लोग रह रहे हैं।

    ब्रैम्पटन-आधारित पत्रकार निति चोपड़ा, जिन्होंने ऐसी ही एक टेंट सिटी को डॉक्यूमेंट किया, उनका कहना है कि अनौपचारिक सूचनाओं के अनुसार कई भारतीय मूल के आउट-ऑफ-स्टेटस प्रवासी कैश पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ फ्लाई-बाय-नाइट ऑपरेटर सुविधा के लिए शादियों की व्यवस्था करने वाले दफ्तर खोल रहे हैं।


    विरोध प्रदर्शन और मांगें

    इस बीच, श्रमिक अधिकारों की वकालत करने वाला समूह नौजवान सपोर्ट नेटवर्क जनवरी में विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है। नेटवर्क के टोरंटो-आधारित कार्यकर्ता बिक्रमजीत सिंह ने कहा कि संगठन इस मुद्दे पर मोमेंटम बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि बिना वैध रास्तों में फंसे प्रवासी श्रमिकों की स्थिति को उजागर किया जा सके।

    नेटवर्क का अभियान नारा- काम करने के लिए काफी अच्छा, रहने के लिए काफी अच्छा – इस मांग को दर्शाता है कि जो लोग कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें देश में कानूनी रूप से बने रहने का अवसर भी मिलना चाहिए।


    सरकार के सामने बड़ी चुनौती

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नीतिगत स्तर पर जल्द समाधान नहीं खोजा गया, तो बढ़ती अवैध आबादी न सिर्फ मानवीय संकट पैदा करेगी, बल्कि श्रम बाज़ार, आवास और सामाजिक सेवाओं पर भी दबाव बढ़ाएगी। कनाडा सरकार के लिए आने वाला समय इमिग्रेशन सिस्टम को संतुलित रखने की एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।

  • इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें, 30 साल पुरानी घटना ने फिर पकड़ी तूल

    इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें, 30 साल पुरानी घटना ने फिर पकड़ी तूल


    इंदौर । इंदौर के भागीरथीपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 15 लोगों की जान चली गई हैजिसके बाद स्थानीय प्रशासन और पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस घटना के बाद 30 साल पुरानी एक भयानक घटना की यादें ताजा हो गई हैंजब सुभाष चौक इलाके में पानी की टंकी में सड़ी लाश का पानी सप्लाई होने से लोग बीमार हो गए थे।

    पानी में सड़ी लाश मिलने की घटना ने उस समय पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया था। टंकी में पड़ा कंकाल पानी में मिलकर पूरे इलाके में सप्लाई हो रहा थाजिससे लोग दस्तउल्टी और बुखार जैसी समस्याओं से जूझने लगे थे। हालांकिइस घटना में किसी की मौत नहीं हुई थीलेकिन लोगों में गहरे डर का माहौल बन गया था।

    अब 30 साल बादभागीरथीपुरा इलाके में फिर से दूषित पानी ने लोगों की जान ली है। कांग्रेस पार्टी ने इसे लेकर प्रदेश सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया है कि पानी की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इस घटना ने इंदौर में पानी के सिस्टम की गुणवत्ता और प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है।

    इंदौर नगर निगम के अधिकारियों ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी हैलेकिन स्थानीय लोग और नेताओं ने प्रशासन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इन मौतों के बादसियासी माहौल भी गर्मा गया है और सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग की जा रही है।यह घटना इंदौर में पानी की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े करती हैऔर यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताती है कि जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पानी मिल सके।

  • हिमाचल के ब्लास्ट मामले में पंजाब पुलिस को पाकिस्तान की ISI का हाथ होने की आशंका

    हिमाचल के ब्लास्ट मामले में पंजाब पुलिस को पाकिस्तान की ISI का हाथ होने की आशंका


    चंडीगढ़।
    हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के सोलन जिले (Solan district) में नलागढ़ पुलिस स्टेशन (Nalagarh Police Station) के पास नए साल के पहले दिन (1 जनवरी) सुबह करीब 9:40 बजे हुए जोरदार विस्फोट ने इलाके में दहशत फैला दी। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि पुलिस स्टेशन के स्टोर रूम की खिड़कियां टूट गईं, पास की इमारतों के शीशे चटक गए और करीब 2.5 फुट गहरा गड्ढा बन गया। आवाज 400-500 मीटर दूर तक सुनाई दी। अच्छी बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।

    विस्फोट के एक दिन बाद गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक कथित प्रेस नोट सामने आया, जिसमें प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और पंजाब सॉवरेन्टी अलायंस (PSA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। प्रेस नोट में कहा गया कि यह आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) हमला था, जिसकी योजना और अंजाम देने का काम अमेरिका में रहने वाले गोपी नवांशहरीया और कबाल सिंह ने किया। दोनों संगठनों ने दावा किया कि हमला इसलिए किया गया क्योंकि- हिमाचल प्रदेश में सिंथेटिक ड्रग्स बनाए जा रहे हैं और उन्हें पंजाब भेजा जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन नहीं चेता तो अगली बार पुलिस वाहनों और मुख्यालयों में आईईडी प्लांट किए जाएंगे।

    हालांकि, पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इन काल्पनिक दावों को ढोंग करार देते हुए खारिज कर दिया। अधिकारी ने कहा- ये तत्व पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के इशारे पर क्षेत्र को अस्थिर करने के लिए काम कर रहे हैं। इसमें कोई विचारधारा नहीं है, सिर्फ पैसे के लिए युवाओं को भर्ती किया जाता है। पंजाब पुलिस का मानना है कि यह विस्फोट दिल्ली के उत्तर-पश्चिम और जम्मू-कश्मीर के दक्षिण में स्थित इस क्षेत्र में अशांति पैदा करने की पाकिस्तानी रणनीति का हिस्सा है।

    गोपी नवांशहरीया नवंबर 2024 से पंजाब में पुलिस ठिकानों पर कई हमलों की जिम्मेदारी ले चुका है। BKI और PSA पहले भी पंजाब में हुए इसी तरह के विस्फोटों की जिम्मेदारी लेते रहे हैं, जो ISI के निर्देश पर किए गए थे। हिमाचल पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। फोरेंसिक टीम ने मौके से सैंपल इकट्ठा किए हैं और सीसीटीवी फुटेज की जांच के लिए टीमें गठित की गई हैं।

    नलागढ़ पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धारा 324(4) (उपद्रव), 125 (जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। हिमाचल पुलिस पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है। नलागढ़-बद्दी क्षेत्र फार्मास्यूटिकल हब है, जहां कई दवा फैक्टरियां हैं। पुलिस क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और आगे किसी घटना की आशंका से सतर्क है। जांच जारी है और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

  • जावेद अख्तर ने अपने फेंक वीडियो पर जताई नाराजगी… दी कानूनी कार्रवाई की धमकी

    जावेद अख्तर ने अपने फेंक वीडियो पर जताई नाराजगी… दी कानूनी कार्रवाई की धमकी


    मुम्बई।
    मशहूर गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर (Javed Akhtar) ने अपने खिलाफ फैलाए जा रहे एक फर्जी ‘डीपफेक’ वीडियो (Fake ‘deepfake’ videos) पर कड़ी नाराजगी जताई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक AI जेनरेटेड एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें उन्हें सिर पर टोपी पहने दिखाया गया है और दावा किया गया है कि वे अब आस्तिक हो गए हैं। जावेद अख्तर ने शुक्रवार को एक्स पर इस फर्जी वीडियो को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले में कानूनी कार्रवाई और साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

    वीडियो में दावा किया गया था कि जावेद अख्तर ने आखिरकार “खुदा की राह” अपना ली है। इस पर उन्होंने लिखा, “यह पूरी तरह बकवास है।” उन्होंने कहा कि वे इस फर्जी खबर को बनाने और फैलाने वालों को कोर्ट में घसीटेंगे क्योंकि इससे उनकी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है।

    आपको बता दें कि हाल ही में दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में जावेद अख्तर और इस्लामिक स्कॉलर मुफ्ती शमाइल नदवी के बीच ‘क्या ईश्वर का अस्तित्व है?’ विषय पर एक गंभीर बहस हुई थी। माना जा रहा है कि इसी चर्चा के बाद उनके विचारों को तोड़-मरोड़कर पेश करने के लिए यह डीपफेक वीडियो बनाया गया।

    जावेद अख्तर अकेले ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो तकनीक के इस गलत इस्तेमाल से परेशान हैं। हाल के दिनों में कई अन्य सितारों ने भी अपनी आवाज उठाई है। कुछ दिनों पहले, भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी उन AI जेनरेटेड तस्वीरों की आलोचना की थी जिनमें उन्हें संसद के बाहर साड़ी के बजाय पेंट-सूट में दिखाया गया था। उन्होंने इसे अपनी निजता का उल्लंघन बताते हुए कहा कि यह तय करना उनका अधिकार है कि वे क्या पहनना चाहती हैं।

    वहीं, दिसंबर 2025 में दक्षिण भारतीय अभिनेत्री श्रीलीला और निवेथा थॉमस ने भी अपनी फर्जी तस्वीरों के खिलाफ चेतावनी जारी की थी। निवेथा ने इसे ‘डिजिटल प्रतिरूपण’ करार देते हुए कानूनी कार्रवाई की बात कही थी।


    भारत में डीपफेक के खिलाफ क्या हैं नियम?

    भारत सरकार ने 2025 के अंत तक डीपफेक और AI जेनरेटेड कंटेंट के लिए कड़े दिशानिर्देश लागू किए हैं। आईटी नियम 2021 (संशोधित) के तहत प्लेटफॉर्म्स को शिकायत मिलने के 36 घंटे के भीतर ऐसी भ्रामक सामग्री हटानी होती है। सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि सभी AI-जनित फोटो या वीडियो पर कम से कम 10% हिस्से में यह स्पष्ट लिखा होना चाहिए कि यह ‘सिंथेटिक’ या ‘AI जेनरेटेड’ है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मानहानि और जालसाजी के लिए जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

  • बांग्लादेशी क्रिकेटर पर सियासी वबाल… विपक्षी नेता और पूर्व क्रिकेटरों ने किया शाहरूख का समर्थन

    बांग्लादेशी क्रिकेटर पर सियासी वबाल… विपक्षी नेता और पूर्व क्रिकेटरों ने किया शाहरूख का समर्थन


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) में चुनावी सरगर्मी (Election activity) के बीच अब राजनीति का नया मैदान खेल बनता नजर आ रहा है. इस बार निशाने पर हैं फिल्म अभिनेता और आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स (IPL team Kolkata Knight Riders- KKR) के मालिक शाहरुख खान (Shahrukh Khan). वजह बनी है आईपीएल के आगामी सीजन के लिए केकेआर द्वारा बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान (Mustafizur Rahman) को टीम में शामिल किया जाना. इस फैसले को लेकर भाजपा नेता संगीत सोम, कुछ धार्मिक नेताओं और सोशल मीडिया पर सक्रिय समूहों ने तीखा विरोध शुरू कर दिया है।

    भाजपा नेताओं का कहना है कि जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार और हत्याओं की खबरें सामने आ रही हैं, तब ऐसे देश के खिलाड़ियों को आईपीएल में शामिल करना गलत है. संगीत सोम ने आरोप लगाया कि बांग्लादेश की सरकार, वहां के खिलाड़ी और सेलिब्रिटी हिंदुओं के पक्ष में आवाज नहीं उठा रहे, ऐसे में भारतीय लीग में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को क्यों जगह दी जा रही है. उन्होंने सीधे तौर पर इस फैसले के लिए शाहरुख खान को जिम्मेदार ठहराया।

    इस मुद्दे को बंगाल की सियासत से जोड़ते हुए भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. भाजपा नेताओं का कहना है कि शाहरुख खान को सिर्फ मजहब के आधार पर तरजीह दी जा रही है. आरोप लगाए गए कि राज्य सरकार उनके कार्यक्रमों में सहयोग करती है, ईडन गार्डन्स से जुड़े ठेके कथित तौर पर मुस्लिम ठेकेदारों को दिए जाते हैं और शाहरुख को बंगाल का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया. भाजपा का दावा है कि यह सब तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा है।


    शाहरुख के समर्थन में आए विपक्षी नेता और पूर्व क्रिकेटर

    लेकिन टीएमसी से लेकर कांग्रेस तक और आम आदमी पार्टी से लेकर समाजवादी पार्टी तक सवाल उठा रही है कि हिंदुओं की हत्या पर अगर बांग्लादेश का विरोध करना है तो बांग्लादेशी खिलाड़ी को खिलाने पर भारत सरकार क्यों चुप है? बीसीसीआई उन खिलाड़ियों की नीलामी क्यों करवाती है? विदेश मंत्री ढाका क्यों जाते हैं? शेख हसीना भारत में क्यों रहती हैं? से तमाम सवाल विपक्ष उठा रहा है और कह रहा है कि ऐसे में सिर्फ शाहरुख खान को निशाना बनाना राजनीति से प्रेरित है।


    फिर शेख हसीना को भारत में रखना कैसे ठीक: संजय सिंह

    आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने शाहरुख खान को निशाना बनाए जाने पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह दरिंदगी की पराकाष्ठा है. हिंदुओं को टारगेट करके जो मारा जा रहा है, उस पर भारत सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए. लेकिन प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर खामोश हैं. क्रिकेट खिलाड़ी को टीम रखने पर शाहरुख खान को गद्दार करार दिया जा रहा है तो शेख हसीना को भारत में रखने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को क्या संज्ञा दी जाएगी?

    आम आदमी पार्टी नेता ने आगे कहा कि पहलगाम में धर्म पूछकर लोगों को मारा गया, उसके बाद पूरे देश ने कहा पाकिस्तान संग क्रिकेट नहीं खेलना चाहिए. जय शाह ने पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेला. इसको क्या कहेंगे? क्या इनको गद्दार की संज्ञा में लाया जाएगा? अभी बेगम खालिदा जिया की मौत पर दुख प्रकट करने के लिए विदेश मंत्री जयशंकर बांग्लादेश गए. ऐसे में हमें सलेक्टिव नहीं होना चाहिए. हमें दो तरह की बातें नहीं करनी चाहिए.

    उन्होंने कहा कि सरकार की नीति क्या है, ये स्पष्ट होना चाहिए. कोई भी कुछ भी बोल देता है. इस तरह से शाहरुख को आरोपी बनाना ठीक नहीं. आईपीएल में पाकिस्तान के खिलाड़ियों को नहीं लिया जाता, इसी तरह बांग्लादेश को भी बैन करिए फिर.


    भाजपा सांसद खुद संगीत सोम का बयान गलत बता चुके: सपा

    वहीं समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अमीक जामेई ने भी शाहरुख खान का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश आज भारी कट्टरता के रास्ते पर चल रहा है. मोहम्मद युनूस जैसा आदमी वहां का केयरटेकर बना हुआ है, खुद पीएम मोदी ने उसका समर्थन किया था. ये संगीत सोम जो सरधना से विधायक थे, बुरी तरह हारे. अब इन्हें कवरेज नहीं मिलती इसलिए सु्र्खियों के लिए ये ऐसे बयान देते हैं. खुद भाजपा के वरिष्ठ सांसद इनके बयान को गलत बता चुके हैं.


    सिर्फ शाहरुख को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है: अतुल वासन

    पूर्व भारतीय क्रिकेटर अतुल वासन से जब सवाल पूछा गया कि क्रिकेट आयोजन कराने वाले बोर्ड पर कोई सवाल नहीं उठाता है. इसके जवाब में वासन ने कहा कि इसके लिए टाइमलाइन समझने की जरूरत है. शाहरुख खान ने इस बांग्लादेशी प्लेयर को नहीं चुना. एक क्रिकेट मैनेजमेंट कमेटी है जो चयन करती है. साथ ही बीसीसीआई ने बांग्लादेशी क्रिकेटरों का नाम रखा था निलामी में, वहां से शाहरुख की टीम ने अपनी जरूरत के हिसाब से इस खिलाड़ी को उठाया. मुझे लगता है कि शाहरुख का नाम एकदम से लेना ठीक नहीं है. उन्हें इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए क्योंकि उनकी टीम ने इस खिलाड़ी को अपने हिसाब से लिया है.

    उन्होंने कहा कि शाहरुख खान भी एक देशभक्त हैं और मुझे लगता है कि जिस तरह से बांग्लादेश का विरोध हो रहा है तो वह बांग्लादेशी खिलाड़ी को अपनी टीम में नहीं रखेंगे. पाकिस्तान से इस मामले की तुलना करना ठीक नहीं है क्योंकि पाकिस्तान का इतिहास बांग्लादेश से अलग रहा है. भारत सरकार भी अभी वेट एंड वॉच की स्थिति में नजर आ रही है. ऐसे में एक आदमी (शाहरुख) को निशाना बनाना बिल्कुल ठीक नहीं है. क्रिकेट को राजनीति के लिए इस्तेमाल करना गलत है. केकेआर के और भी मालिक हैं शाहरुख के अलावा. इनमें जुही चावला भी है, तो उन्हें कोई क्यों निशाना नहीं बनाता? और मान लिजिए कि बांग्लादेशी खिलाड़ी को निकाल भी दिया जाता है तो इससे क्या कुछ बदल जाएगा?

    पहले भी अलग-अलग टीम से खेलते रहे हैं रहमान
    वैसे, मुस्तफिजुर रहमान पिछले कई सीजन से अलग अलग टीमों के लिए आईपीएल खेल रहे हैं. लेकिन इस बार विवाद के पीछे चुनावी सियासत बड़ी वजह नजर आ रही है. हालांकि इन तमाम सियासी जुगालियों पर भारत सरकार या बीसीसीआई की ओर से न तो कोई सवाल उठाया गया है और न आपत्ति जताई गई है. लेकिन आईपीएल से पहले शाहरुख और उनकी टीम को लेकर सियासत खूब हो रही है।

    दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेशी खिलाड़ियों के खेलने पर आपत्ति कुछ मुस्लिम संगठनों की ओर से भी जताई गई है. ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के प्रमुख उमर अहमद इलियासी ने कहा कि बांग्लादेशी क्रिकेटरों को वहां हो रहे अत्याचारों पर खुद आवाज उठानी चाहिए. वहीं, कुछ धर्मगुरुओं ने शाहरुख खान से माफी और बयान देने की मांग तक कर डाली।

  • घटती आबादी से जूझ रहे चीन में कंडोम और गर्भनिरोधक हुए महंगे, सरकार ने लगाया भारी टैक्स

    घटती आबादी से जूझ रहे चीन में कंडोम और गर्भनिरोधक हुए महंगे, सरकार ने लगाया भारी टैक्स


    बीजिंग।
    घटती आबादी (Declining Population) से परेशान चीन (China) ने कंडोम और अन्य गर्भ निरोधकों (Condoms and Other Contraceptives) को लेकर बड़ा फैसला किया है। चीन कि शी जिनपिंग सरकार (Xi Jinping government.) ने पुरानी नीति को खत्म करके अब गर्भनिरोधकों पर 13 फीसदी का सेल्स टैक्स लगाने का फैसला किया है। यह फैसला 1 जनवरी 2026 से ही लागू हो गया है और इसके बाद कंडोम और गर्भनिरोधकों की कीमत में इजाफा हो गया है। बता दें कि 1994 से ही इन प्रोडक्ट्स को टैक्स से छूट दी गई थी। बढ़ती आबादी को देखते हुए चीन ने वन चाइ्ल्ड पॉलिसी लागू की थी। हालांकि 30 सालों में ही चीन की डेमोग्राफी में बड़ा बदलाव आ गया और तेजी से गिरती हुई जन्मदर चिंता की वजह बन गई।

    दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन लाख कोशिश करने के बाद भी जन्म दर बढ़ा नहीं पा रहा है। 2024 में लगातार तीसरे साल चीन की जनसंख्या कम हो गई। ऐसे में एक्सपर्ट्स ने चीन को चेतावनी दी है। 2024 में चीन में 95.4 लाख बच्चों का जन्म हुआ जो कि 2016 की तुलना में आधा था।


    क्यों टेंशन में है चीन?

    चीन इस समय दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ ही बड़ा बाजार भी है। वहीं घटती आबादी और बुजुर्गों की बढ़ती संख्या उत्पादकता को प्रभावित करेगी और सरकार पर बोझ बढ़ेगा। आने वाले समय में चीन की अर्थव्यवस्था बुरी तरह डगमगाने का खतरा है। जानकारों का कहना है कि चीन अमीर होने से पहले ही बूढ़ा हो जाएगा। 2024 में ही चीन में 60 साल से ज्यादा की उम्र वाले लोगों की जनसंख्या 31 करोड़ को पार कर गई।


    कभी बढ़ती आबादी से परेशान था चीन

    एक समय था जब चीन अपनी बढ़ती आबादी को लेकर टेंशन में था। 1970 में चीन की आबादी 1 अरब के करीब पहुंच गई थी। उस समय चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी लागू की गई थी। कई बार जबरन नसबंदी या फिर गर्भपात भी करवाया जाता था। यह सब कई दशकों तक चलता रहा और पहली बार 2016 में दो बच्चों को अनुमति दी गई। इसके बाद 2021 में तीन बच्चे पैदा करने की अनुमति दे दी गई।


    बढ़ती महंगाई की वजह से भी बढ़ रही आबादी

    चीन में बढ़ती आबादी की वजह से भी लोग ज्यादा बच्चे नहीं पैदा करना चाहते हैं। हालांकि चीन की सरकार अब शादी और बच्चे पैदा करने को काफी तवज्जो दे रही है। ऐसे में कई कॉलेज में लव एजुकेशन का कोर्स भी चलाया जा रहा है।

    एक तरफ सरकार गर्भनिरोधकों पर टैक्स लगा रही है तो दूसरी तरफ बच्चे पैदा करने पर नकद लाभ की योजना भी चलाई जा रही है। सरकार की नीति के मुताबिक 1 जनवरी 2025 के बाद हर बच्चे पर सरकार की तरफ से 3600 युआन की वार्षिक सब्सिडी दी जाती है जो कि लगभग 45 हजार रुपये के करीब होता है। वहीं तीन साल के बाद यह सब्सिडी बढ़ाकर 10800 युआन कर दिया जाएगा। चाइल्ड केयर सब्सिडी को टैक्स फ्री कर दिया गया है। इसके अलावा चीन की सरकार ने फ्री पब्लिक प्री स्कूल स्कीम भी शुरू की है।


    क्या कहते हैं संयुक्त राष्ट्र के आंकड़े

    संयुक्त राष्ट्र के आकड़ों की मानें तो 1.4 अरब लोगों की आबादी में 60 साल से ज्यादा के लोगों की संख्या 20 फीसदी से ज्यादा है। सन 2100 तक आधी आबादी ब ुजुर्ग हो सकती है। चीन में जनसंख्या को बढ़ाने के लिए जो भी योजनाएं चलाई जा रही हैं वे नाकाफी साबित हो सकती हैं। जानकारों का यह भी कहना है कि गर्भनिरोधक को महंगा करने से हो सकता है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र जोखिम उठाने लगे। ऐसे में यह नई नीति खतरनाक साबित होगी। कई जानकारों का कहना है कि कंडोम पर टैक्स लगा देने पर जन्मदर पर कोई प्रभावन नहीं पड़ने वाला है।