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  • सरकारी स्कूल में नहीं मिला एक भी छात्र, मिड-डे मील भी बंद; निरीक्षण में लापरवाही पर शिक्षकों को फटकार

    सरकारी स्कूल में नहीं मिला एक भी छात्र, मिड-डे मील भी बंद; निरीक्षण में लापरवाही पर शिक्षकों को फटकार


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर बैराड़ तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैश ने मंगलवार को पोहरी विकासखंड के सड़ और ककरई गांव के शासकीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सड़ प्राथमिक विद्यालय की स्थिति बेहद चिंताजनक मिली। यहां रिकॉर्ड में 33 छात्र दर्ज थे, लेकिन स्कूल में एक भी छात्र उपस्थित नहीं मिला। इतना ही नहीं, विद्यार्थियों के लिए बनने वाला मध्यान्ह भोजन भी तैयार नहीं किया गया था।

    निरीक्षण के समय विद्यालय में केवल एक शिक्षक मौजूद थे। छात्रों की शून्य उपस्थिति और मिड-डे मील जैसी महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही देखकर तहसीलदार ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित शिक्षक को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था में तत्काल सुधार किया जाए।

    दरअसल, जिला कलेक्टर अर्पित वर्मा ने हाल ही में सभी एसडीएम और तहसीलदारों को ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। इसी अभियान के तहत मंगलवार सुबह करीब 11 बजे तहसीलदार द्रगपाल सिंह बैश ने सड़ और ककरई गांव के स्कूलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण का उद्देश्य शिक्षा और पोषण योजनाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था।

    सड़ प्राथमिक विद्यालय में मिली अव्यवस्थाओं के बाद तहसीलदार ककरई गांव पहुंचे, जहां प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय एक ही भवन में संचालित हो रहे हैं। यहां चार शिक्षक उपस्थित मिले, लेकिन छात्रों की संख्या अपेक्षा से काफी कम थी। कम उपस्थिति को लेकर तहसीलदार ने शिक्षकों से जवाब-तलब किया और बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए घर-घर संपर्क अभियान चलाने तथा अभिभावकों को जागरूक करने के निर्देश दिए।

    तहसीलदार ने शिक्षकों से कहा कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड पूरा करना नहीं, बल्कि बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और पोषण पहुंचाना है। यदि विद्यालयों में छात्र ही नहीं आएंगे तो शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि निरीक्षण का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा और लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में लगातार सामने आ रही कम उपस्थिति और मिड-डे मील जैसी योजनाओं के सही क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन अब सख्त नजर आ रहा है। जिला प्रशासन का मानना है कि नियमित निरीक्षण से न केवल व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों की उपस्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आएगा।

  • टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    टाटा स्टील समेत चुनिंदा शेयरों पर विशेषज्ञों की नजर, निवेशकों को खरीद स्तर और लक्ष्य पर मिली अहम सलाह

    नई दिल्ली । पहली तिमाही के कारोबारी माहौल और बदलते वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार में निवेशकों की नजर प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन और भविष्य की संभावनाओं पर बनी हुई है। इसी क्रम में बाजार विशेषज्ञों ने कई चर्चित शेयरों पर अपनी रणनीति साझा की है। उनके अनुसार, मेटल, बैंकिंग, ज्वेलरी और उपभोक्ता क्षेत्र के कुछ शेयर आने वाले समय में निवेशकों के लिए अवसर प्रदान कर सकते हैं, हालांकि निवेश से पहले जोखिम प्रबंधन और उचित स्तरों का ध्यान रखना आवश्यक होगा।

    विशेषज्ञों के अनुसार मेटल सेक्टर फिलहाल सकारात्मक संकेत दे रहा है। वैश्विक बाजार में धातुओं की कीमतों में सुधार और मांग में संभावित मजबूती का लाभ भारतीय कंपनियों को मिल सकता है। इसी वजह से टाटा स्टील को इस समय प्रमुख पसंद के रूप में देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लगभग 183 रुपये के आसपास यह शेयर निवेश के लिए उपयुक्त स्तर पर माना जा सकता है। यदि किसी कारणवश इसमें और गिरावट आती है तथा यह 170 से 172 रुपये के दायरे में पहुंचता है, तो इसे चरणबद्ध तरीके से पोर्टफोलियो में जोड़ने का अवसर माना जा सकता है।

    विश्लेषकों का कहना है कि अल्पावधि में टाटा स्टील के लिए 215 से 220 रुपये का लक्ष्य संभावित माना जा रहा है। वहीं, यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और मेटल सेक्टर में मजबूती जारी रहती है, तो दीर्घावधि में यह शेयर 270 रुपये तक पहुंचने की क्षमता रख सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि शेयर 170 रुपये के नीचे साप्ताहिक आधार पर बंद होता है, तो निवेशकों को अपनी रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर जोखिम सीमित करने के लिए स्टॉप लॉस का पालन करना चाहिए।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश केवल संभावित रिटर्न को देखकर नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि जोखिम और पूंजी संरक्षण को भी समान महत्व देना चाहिए। किसी भी शेयर में एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करना अधिक संतुलित रणनीति मानी जाती है। इससे बाजार में उतार-चढ़ाव का प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है और औसत खरीद मूल्य भी बेहतर बन सकता है।

    विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि पहली तिमाही के वित्तीय नतीजे आने के साथ विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। ऐसे में निवेशकों को केवल शेयर की कीमत पर नहीं बल्कि कंपनी की आय, लाभप्रदता, कर्ज की स्थिति, भविष्य की विकास योजनाओं और उद्योग की संभावनाओं का भी मूल्यांकन करना चाहिए। मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियां लंबी अवधि में बेहतर प्रदर्शन करने की संभावना रखती हैं।

    बाजार में फिलहाल वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कमोडिटी कीमतों, ब्याज दरों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का भी असर दिखाई दे रहा है। ऐसे माहौल में निवेशकों को भावनात्मक निर्णय लेने से बचना चाहिए और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत कंपनियों में अनुशासित निवेश और तय जोखिम सीमा के साथ बनाई गई रणनीति ही अस्थिर बाजार में बेहतर परिणाम देने की संभावना रखती है। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता का आकलन अवश्य करें तथा आवश्यकता होने पर वित्तीय सलाहकार की राय भी लें।

  • Meesho पर संस्थागत निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लगातार दो तिमाहियों से FII-DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी, मजबूत संकेतों पर बाजार की नजर

    Meesho पर संस्थागत निवेशकों का बढ़ा भरोसा, लगातार दो तिमाहियों से FII-DII ने बढ़ाई हिस्सेदारी, मजबूत संकेतों पर बाजार की नजर

    नई दिल्ली । ई-कॉमर्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Meesho लिमिटेड में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। कंपनी के ताजा शेयरहोल्डिंग आंकड़ों के अनुसार पिछले दो तिमाहियों के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) दोनों ने अपनी हिस्सेदारी में बढ़ोतरी की है। बाजार विशेषज्ञ इसे कंपनी के बेहतर परिचालन प्रदर्शन, मजबूत वित्तीय संकेतकों और भविष्य की विकास संभावनाओं के प्रति बढ़ते विश्वास का संकेत मान रहे हैं।

    जून 2026 तिमाही के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई है। इससे पहले मार्च 2026 में यह 4.2 प्रतिशत थी। लगातार दूसरी तिमाही में विदेशी निवेशकों द्वारा हिस्सेदारी बढ़ाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाओं को लेकर वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। शेयर बाजार में FII की लगातार खरीदारी को अक्सर सकारात्मक निवेश संकेत माना जाता है।

    घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी कंपनी में अपना निवेश उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया है। दिसंबर 2025 में DII की हिस्सेदारी 5.3 प्रतिशत थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर 5.6 प्रतिशत हुई और जून 2026 में तेज उछाल के साथ 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियों और अन्य घरेलू संस्थानों ने Meesho में निवेश बढ़ाने का फैसला किया है। इससे कंपनी के प्रति घरेलू निवेशकों का बढ़ता विश्वास भी स्पष्ट होता है।

    संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ कंपनी की प्रमोटर और सार्वजनिक हिस्सेदारी में मामूली कमी दर्ज की गई है। प्रमोटर हिस्सेदारी 16.6 प्रतिशत से घटकर 16.4 प्रतिशत रह गई, जबकि सार्वजनिक हिस्सेदारी 73.7 प्रतिशत से घटकर 69.3 प्रतिशत पर आ गई। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के शेयरों का बड़ा हिस्सा अब संस्थागत निवेशकों के पास जा रहा है, जिसे बाजार स्थिर निवेश का सकारात्मक संकेत मानता है।

    कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में योगदान मार्जिन 170 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 4 प्रतिशत तक पहुंच गया। कंपनी का कहना है कि लॉजिस्टिक्स और डिलीवरी लागत में कमी, प्रीपेड ऑर्डर बढ़ने तथा डिलीवरी विफल होने की घटनाओं में कमी आने से परिचालन खर्च नियंत्रित हुआ है। इससे कंपनी की लाभप्रदता में सुधार हुआ है और भविष्य में बेहतर नकदी प्रवाह की संभावना भी मजबूत हुई है।

    Meesho का विज्ञापन कारोबार भी तेजी से विस्तार कर रहा है। कंपनी के विज्ञापन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय विक्रेताओं की संख्या में पिछले एक वर्ष के दौरान उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही विज्ञापन पर खर्च करने वाले कारोबारियों की संख्या और बजट दोनों में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कंपनी द्वारा AI आधारित वॉयस शॉपिंग असिस्टेंट का उपयोग ग्रामीण और नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने में किया जा रहा है, जिससे ग्राहक अधिग्रहण लागत कम होने और कारोबार के विस्तार में मदद मिल रही है।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत परिचालन प्रदर्शन, लागत नियंत्रण, विज्ञापन कारोबार का विस्तार और तकनीक आधारित रणनीति Meesho की दीर्घकालिक विकास क्षमता को मजबूत बना रहे हैं। यही कारण है कि संस्थागत निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के वित्तीय नतीजों और कारोबार की प्रगति पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

  • दुष्कर्म मामले में आरोपी पक्ष का पलटवार, सीसीटीवी और डीएनए जांच की मांग; पुलिस बोली- शैक्षणिक रिकॉर्ड में बालिग

    दुष्कर्म मामले में आरोपी पक्ष का पलटवार, सीसीटीवी और डीएनए जांच की मांग; पुलिस बोली- शैक्षणिक रिकॉर्ड में बालिग


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के बैराड़ थाना क्षेत्र में दर्ज दुष्कर्म प्रकरण में मंगलवार को नया मोड़ सामने आया, जब आरोपी के पिता ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे को पारिवारिक रंजिश के चलते झूठे मामले में फंसाया गया है। वहीं पुलिस ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध शैक्षणिक दस्तावेजों के अनुसार आरोपी बालिग है और मामले की जांच कानून के अनुसार की जा रही है।

    आरोपी के पिता अपने समर्थकों के साथ एसपी कार्यालय पहुंचे और एक लिखित आवेदन सौंपा। आवेदन में उन्होंने बताया कि 14 जुलाई 2026 को उनके पुत्र विशाल के खिलाफ दुष्कर्म समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता महिला और उसके मायके पक्ष से उनके परिवार की पुरानी रंजिश चली आ रही है, जिसके कारण उनके बेटे को साजिश के तहत झूठे प्रकरण में फंसाया गया है।

    पिता ने दावा किया कि जिस समय कथित घटना हुई, उस समय उनका बेटा घटनास्थल पर मौजूद ही नहीं था। उनके अनुसार, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्य इस बात की पुष्टि कर सकते हैं। उन्होंने पुलिस से मांग की कि मामले की जांच केवल आरोपों के आधार पर नहीं बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर की जाए। इसके लिए उन्होंने डीएनए जांच कराने और सीसीटीवी फुटेज की जांच की भी मांग की। उन्होंने बताया कि संबंधित सीसीटीवी फुटेज पेन ड्राइव के माध्यम से पुलिस को उपलब्ध कराया गया है।

    आवेदन में पिता ने यह भी कहा कि उनका बेटा नाबालिग है और वर्तमान में पोहरी उप जेल में बंद है। उन्होंने मांग की कि यदि उसकी उम्र नाबालिग साबित होती है तो उसे तत्काल किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किशोर बंदी गृह में स्थानांतरित किया जाए, ताकि उसकी मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

    वहीं बैराड़ थाना प्रभारी सुरेश शर्मा ने आरोपी पक्ष के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस ने उपलब्ध शैक्षणिक अंकसूची और दस्तावेजों के आधार पर आरोपी को बालिग माना है। उन्होंने बताया कि पीड़िता की शिकायत और प्रारंभिक तथ्यों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। साथ ही आरोपी पक्ष द्वारा प्रस्तुत सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की भी निष्पक्ष तरीके से जांच की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    गौरतलब है कि बैराड़ थाना क्षेत्र की 19 वर्षीय विवाहिता ने 14 जुलाई को विशाल रावत के खिलाफ दुष्कर्म, ब्लैकमेल और मारपीट सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी। महिला का आरोप है कि आरोपी पिछले दो वर्षों से उस पर शादी का दबाव बना रहा था। उसने मार्च 2026 में घर में घुसकर दुष्कर्म किया और आपत्तिजनक तस्वीरें लेकर लंबे समय तक ब्लैकमेल करता रहा। महिला की अप्रैल 2026 में शादी हो चुकी है। उसका आरोप है कि 12 जुलाई को मायके आने के दौरान आरोपी ने रास्ते में रोककर मारपीट की और दोबारा दुष्कर्म किया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पक्षों से मिले साक्ष्यों का परीक्षण कर रही है।

  • जबरदस्त सब्सक्रिप्शन के बावजूद SBI फंड्स मैनेजमेंट IPO की फीकी शुरुआत, निवेशकों को प्रति शेयर 39.30 रुपये का लिस्टिंग लाभ

    जबरदस्त सब्सक्रिप्शन के बावजूद SBI फंड्स मैनेजमेंट IPO की फीकी शुरुआत, निवेशकों को प्रति शेयर 39.30 रुपये का लिस्टिंग लाभ


    नई दिल्ली ।
    एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट लिमिटेड के शेयर मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार में 6.85 प्रतिशत प्रीमियम के साथ सूचीबद्ध हुए। कंपनी का शेयर 574 रुपये के इश्यू प्राइस के मुकाबले 613.30 रुपये पर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर कारोबार के लिए खुला। लिस्टिंग के साथ निवेशकों को प्रति शेयर 39.30 रुपये का लाभ मिला। हालांकि, बाजार में पहले से चल रहे ग्रे मार्केट प्रीमियम के अनुमान की तुलना में यह शुरुआत अपेक्षाकृत कमजोर मानी गई।

    आईपीओ में जिन निवेशकों को शेयर आवंटित हुए थे, उन्हें पहले ही दिन सकारात्मक रिटर्न मिला। प्रति शेयर 39.30 रुपये के लिस्टिंग लाभ के आधार पर एक लॉट पर निवेशकों को लगभग 1,021.80 रुपये का फायदा हुआ। हालांकि, बाजार के कई जानकारों को इससे अधिक प्रीमियम की उम्मीद थी, क्योंकि ग्रे मार्केट में शेयर का प्रीमियम काफी ऊंचे स्तर पर चल रहा था।

    एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ 14 जुलाई से 16 जुलाई के बीच निवेशकों के लिए खुला था। इस सार्वजनिक निर्गम को सभी श्रेणियों के निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली और कुल मिलाकर यह 41.62 गुना सब्सक्राइब हुआ। सबसे अधिक रुचि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स ने दिखाई, जिनका हिस्सा 140.11 गुना भरा। इसके अलावा नॉन-इंस्टीट्यूशनल निवेशकों का कोटा 22.50 गुना, रिटेल निवेशकों का हिस्सा 3.52 गुना, कर्मचारियों का कोटा 4.62 गुना तथा शेयरधारकों का आरक्षित हिस्सा 9.45 गुना सब्सक्राइब हुआ।

    कंपनी ने इस आईपीओ के लिए 545 रुपये से 574 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था। कुल 9,812.91 करोड़ रुपये का यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल के रूप में लाया गया। इसका मतलब है कि इस निर्गम के तहत कोई नया शेयर जारी नहीं किया गया। मौजूदा प्रमोटर और शेयरधारकों ने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा निवेशकों को बेचा। इसलिए इस आईपीओ से प्राप्त राशि कंपनी के विस्तार या परिचालन में नहीं जाएगी, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को प्राप्त होगी।

    लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट के शेयरों का प्रीमियम लगभग 104 रुपये तक पहुंच गया था। इसके आधार पर बाजार में अनुमान लगाया जा रहा था कि शेयर करीब 678 रुपये के स्तर पर सूचीबद्ध हो सकता है, जो इश्यू प्राइस से लगभग 18 प्रतिशत अधिक होता। हालांकि वास्तविक लिस्टिंग 613.30 रुपये पर हुई, जिससे स्पष्ट हुआ कि ग्रे मार्केट के संकेत इस बार वास्तविक बाजार प्रदर्शन से मेल नहीं खा सके।

    बाजार विशेषज्ञ लंबे समय से यह सलाह देते रहे हैं कि ग्रे मार्केट प्रीमियम को केवल संभावित संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह किसी भी शेयर की वास्तविक लिस्टिंग का निश्चित पैमाना नहीं होता। शेयर की सूचीबद्धता कई कारकों पर निर्भर करती है, जिनमें बाजार की स्थिति, निवेशकों की मांग और लिस्टिंग के दिन का समग्र निवेश माहौल शामिल होता है।

    एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट की लिस्टिंग ने यह जरूर दिखाया कि मजबूत सब्सक्रिप्शन के बावजूद हर आईपीओ ग्रे मार्केट के अनुमान के अनुरूप प्रदर्शन नहीं करता। फिर भी निवेशकों को पहले दिन सकारात्मक रिटर्न मिला और अब बाजार की नजर कंपनी के आगामी कारोबारी प्रदर्शन तथा शेयर की आगे की चाल पर बनी रहेगी।

  • घरेलू एविएशन सेक्टर में सुस्ती, जून में यात्री घटे, IndiGo रही सबसे मजबूत, DGCA रिपोर्ट में सामने आए नए आंकड़े

    घरेलू एविएशन सेक्टर में सुस्ती, जून में यात्री घटे, IndiGo रही सबसे मजबूत, DGCA रिपोर्ट में सामने आए नए आंकड़े

    नई दिल्ली । देश के घरेलू विमानन क्षेत्र में जून 2026 के दौरान यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जून में घरेलू एयरलाइंस ने लगभग 1.35 करोड़ यात्रियों को सेवाएं दीं, जबकि मई में यह आंकड़ा 1.53 करोड़ था। इस प्रकार एक महीने के भीतर यात्री संख्या में करीब 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। हालांकि पिछले वर्ष जून के मुकाबले यह गिरावट बेहद सीमित रही, जिससे संकेत मिलता है कि घरेलू विमानन बाजार अभी भी स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है।

    विमानन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि जून, जुलाई और अगस्त का समय आमतौर पर घरेलू एयरलाइंस के लिए अपेक्षाकृत धीमा रहता है। गर्मी की छुट्टियां समाप्त होने और व्यावसायिक यात्राओं में कमी आने के कारण इस अवधि में यात्रियों की संख्या स्वाभाविक रूप से घटती है। इसके बावजूद एयरलाइंस परिचालन क्षमता और सेवा गुणवत्ता बनाए रखने पर लगातार ध्यान दे रही हैं।

    जून के आंकड़ों में सबसे बड़ी बढ़त देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo को मिली है। कंपनी की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 66.3 प्रतिशत पहुंच गई, जो मई में 64.9 प्रतिशत थी। इससे स्पष्ट है कि प्रतिस्पर्धी माहौल के बावजूद कंपनी ने यात्रियों का भरोसा बनाए रखा और अपने नेटवर्क का प्रभावी संचालन जारी रखा। दूसरी ओर एयर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी घटकर 23.9 प्रतिशत रह गई, जो पिछले महीने 25.6 प्रतिशत थी। अकासा एयर ने भी बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपनी हिस्सेदारी 6.4 प्रतिशत तक पहुंचा दी, जबकि स्पाइसजेट की हिस्सेदारी घटकर 1.9 प्रतिशत रह गई।

    DGCA की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच घरेलू एयरलाइंस से यात्रा करने वाले यात्रियों की कुल संख्या 864.04 लाख रही। पिछले वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 851.74 लाख था। इस प्रकार वार्षिक आधार पर 1.44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो यह दर्शाती है कि लंबी अवधि में घरेलू विमानन क्षेत्र में मांग बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ईंधन की कीमतों में वृद्धि के कारण कुछ एयरलाइंस ने अस्थायी रूप से अपने नेटवर्क में कटौती की थी, जिसका असर जून के परिचालन पर भी दिखाई दिया।

    समय पर उड़ानों के संचालन के मामले में भी IndiGo सबसे आगे रही। जून में कंपनी का ऑन-टाइम परफॉर्मेंस (OTP) 89.4 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद एयर इंडिया समूह 85.9 प्रतिशत, अकासा एयर 82.7 प्रतिशत, अलायंस एयर 74.7 प्रतिशत और स्पाइसजेट 33.5 प्रतिशत के साथ क्रमशः अगले स्थानों पर रहे। यह मूल्यांकन देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया।

    रिपोर्ट में यात्रियों को हुई असुविधाओं से जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं। जून के दौरान कुल उड़ान रद्द होने की दर 0.63 प्रतिशत रही। उड़ानें रद्द होने से प्रभावित 43,968 यात्रियों के मुआवजे और आवश्यक सुविधाओं पर एयरलाइंस ने लगभग 61.98 लाख रुपये खर्च किए। वहीं, उड़ानों में देरी से प्रभावित 1.10 लाख से अधिक यात्रियों की सहायता के लिए लगभग 2.85 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा 1,847 यात्रियों को विभिन्न कारणों से बोर्डिंग नहीं मिल सकी, जिनके मुआवजे और सुविधाओं पर एयरलाइंस ने 64.84 लाख रुपये व्यय किए। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि यात्री सुविधा और परिचालन गुणवत्ता को लेकर विमानन कंपनियों पर लगातार निगरानी बनी हुई है।

  • सोना फिर हुआ महंगा, 24 कैरेट 1.46 लाख रुपये के पार; खरीदारी से पहले जानें 22K, 18K और चांदी के ताजा भाव

    सोना फिर हुआ महंगा, 24 कैरेट 1.46 लाख रुपये के पार; खरीदारी से पहले जानें 22K, 18K और चांदी के ताजा भाव

    नई दिल्ली । घरेलू सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोने की कीमतों में मजबूती देखने को मिली, जबकि चांदी के दाम स्थिर बने रहे। ताजा कारोबार में 24 कैरेट सोना प्रति 10 ग्राम 480 रुपये की बढ़त के साथ 1,46,135 रुपये पर पहुंच गया। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव लगभग 440 रुपये बढ़कर 1,33,960 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। दूसरी ओर चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 2,36,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती रही। लगातार बदलते भावों के बीच ज्वेलरी खरीदने और निवेश की योजना बना रहे लोगों के लिए बाजार की चाल पर नजर रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    देश के प्रमुख शहरों में सोने के दाम लगभग समान स्तर पर बने रहे। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, लखनऊ, जयपुर, गुरुग्राम, चंडीगढ़, पुणे और नागपुर सहित अधिकांश शहरों में 24 कैरेट सोना 1,46,135 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता रहा। कुछ शहरों जैसे इंदौर, अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा में यह मामूली अंतर के साथ 1,46,035 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। 22 कैरेट सोने की कीमत अधिकांश शहरों में 1,33,960 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 18 कैरेट सोने के दाम भी अंतरराष्ट्रीय रुझानों के अनुरूप बढ़त के साथ कारोबार करते रहे, हालांकि इनमें स्थानीय बाजार और ज्वेलर्स के अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

    चांदी के बाजार में आज स्थिरता देखने को मिली। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, लखनऊ, अहमदाबाद, पुणे, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख शहरों में चांदी का भाव 2,36,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर बना रहा। विशेषज्ञों का कहना है कि औद्योगिक मांग और वैश्विक कमोडिटी बाजार की स्थिति के आधार पर आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार सोने और चांदी की कीमतों पर कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों का प्रभाव पड़ता है। वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं की मांग, अमेरिकी डॉलर की मजबूती या कमजोरी, प्रमुख केंद्रीय बैंकों की ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां, अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां और रुपये की विनिमय दर जैसे कारक कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा त्योहारी सीजन, शादी-ब्याह की मांग और निवेशकों की खरीदारी भी घरेलू बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल प्रति ग्राम या प्रति 10 ग्राम कीमत देखकर आभूषण खरीदने का निर्णय नहीं लेना चाहिए। खरीदारी के समय मेकिंग चार्ज, वस्तु एवं सेवा कर (GST), हॉलमार्क प्रमाणन और शुद्धता की जांच करना भी उतना ही आवश्यक है। निवेश के उद्देश्य से सोना खरीदने वाले लोगों को अलग-अलग विक्रेताओं के दामों की तुलना करने और बाजार की मौजूदा स्थिति का आकलन करने के बाद ही निर्णय लेना चाहिए।

    बाजार जानकारों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की धारणा में बदलाव के कारण आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों और उपभोक्ताओं के लिए यह जरूरी होगा कि वे नियमित रूप से बाजार के रुझानों पर नजर रखें और अपनी आवश्यकता तथा वित्तीय योजना के अनुसार ही खरीदारी का निर्णय लें।

  • डिजिटल भुगतान में आने वाली बड़ी क्रांति, बिना इंटरनेट के UPI पेमेंट की तैयारी, खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी मिलेगा निर्बाध भुगतान

    डिजिटल भुगतान में आने वाली बड़ी क्रांति, बिना इंटरनेट के UPI पेमेंट की तैयारी, खराब नेटवर्क वाले क्षेत्रों में भी मिलेगा निर्बाध भुगतान

    नई दिल्ली । भारत की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को और अधिक सुलभ एवं विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ऐसी नई तकनीक विकसित कर रहा है, जिसकी मदद से इंटरनेट उपलब्ध न होने पर भी UPI के माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा। यह सुविधा विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी होगी, जहां नेटवर्क की समस्या के कारण डिजिटल लेनदेन प्रभावित होता है। प्रस्तावित तकनीक के लागू होने के बाद फ्लाइट, अंडरग्राउंड मेट्रो, दूरदराज के क्षेत्रों और कमजोर नेटवर्क वाले स्थानों पर भी UPI भुगतान करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

    नई व्यवस्था नियर फील्ड कम्युनिकेशन (NFC) तकनीक पर आधारित होगी। इस प्रणाली में उपयोगकर्ता को QR कोड स्कैन करने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि स्मार्टफोन में NFC की सुविधा उपलब्ध है, तो केवल उसे भुगतान मशीन के पास टैप करने से लेनदेन पूरा किया जा सकेगा। इस प्रक्रिया के दौरान न तो ग्राहक के मोबाइल में सक्रिय इंटरनेट कनेक्शन आवश्यक होगा और न ही व्यापारी के भुगतान टर्मिनल को इंटरनेट से जुड़े रहने की जरूरत होगी। इससे भुगतान प्रक्रिया अधिक तेज, सरल और सुविधाजनक बनने की उम्मीद है।

    इस सुविधा के शुरुआती चरण में एक बार में अधिकतम 2,000 रुपये तक का भुगतान किया जा सकेगा। इसके लिए उपयोगकर्ताओं को इंटरनेट उपलब्ध होने के दौरान पहले अपने UPI Lite वॉलेट में राशि जोड़नी होगी। बाद में उसी बैलेंस का उपयोग ऑफलाइन भुगतान के लिए किया जा सकेगा। सीमित राशि वाले इन लेनदेन में बार-बार UPI पिन दर्ज करने की आवश्यकता भी कम हो सकती है, जिससे छोटी खरीदारी पहले से अधिक तेज गति से पूरी की जा सकेगी।

    इस नई तकनीक का सबसे बड़ा लाभ उन स्थानों पर मिलेगा, जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं होती। हवाई यात्रा के दौरान विमान में इंटरनेट की सीमित उपलब्धता या अंडरग्राउंड मेट्रो में नेटवर्क बाधित होने जैसी परिस्थितियों में भी यात्री आसानी से डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। इसी तरह ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में, जहां मोबाइल नेटवर्क अक्सर कमजोर रहता है, वहां भी यह सुविधा डिजिटल भुगतान को अधिक भरोसेमंद बना सकती है।

    हालांकि इस तकनीक का लाभ उठाने के लिए केवल ग्राहकों के स्मार्टफोन में NFC सुविधा होना पर्याप्त नहीं होगा। व्यापारियों के पॉइंट ऑफ सेल (POS) टर्मिनलों को भी नए मानकों के अनुसार प्रमाणित किया जाएगा। इसके बाद बैंक और विभिन्न UPI एप्लीकेशन अपने प्लेटफॉर्म पर इस सुविधा को चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराएंगे। इससे पूरे डिजिटल भुगतान नेटवर्क को नए तकनीकी मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

    फिलहाल यह सुविधा विकास और परीक्षण के चरण में है तथा आम उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसकी आधिकारिक लॉन्च तिथि की भी अभी घोषणा नहीं हुई है। हालांकि तकनीक पर तेजी से काम जारी है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सुविधा शुरू होने के बाद भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली और अधिक मजबूत होगी तथा नेटवर्क संबंधी समस्याओं के कारण होने वाले भुगतान विफल होने की घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। इससे डिजिटल लेनदेन का दायरा और बढ़ेगा तथा उपयोगकर्ताओं को हर परिस्थिति में सुरक्षित और सहज भुगतान का नया विकल्प मिलेगा।

  • सीहोर पुलिस की बड़ी कामयाबी, वाहन चोर गिरफ्तार; दो घरों की चोरी का खुलासा, लाखों के गहने बरामद

    सीहोर पुलिस की बड़ी कामयाबी, वाहन चोर गिरफ्तार; दो घरों की चोरी का खुलासा, लाखों के गहने बरामद


    सीहोर । सीहोर जिले की भैरूंदा थाना पुलिस को अपराध नियंत्रण अभियान के तहत बड़ी सफलता हाथ लगी है। वाहन चोरी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दो घरों में हुई नकबजनी और दो मोटरसाइकिल चोरी की वारदातों का भी खुलासा कर दिया। आरोपी की निशानदेही पर करीब एक लाख रुपए कीमत के चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। इस कार्रवाई से थाना क्षेत्र में दर्ज कुल चार मामलों की गुत्थी सुलझ गई है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद उपजेल भेज दिया है, जबकि उससे जुड़े अन्य मामलों की भी जांच जारी है।

    पुलिस के अनुसार, 21 और 24 मार्च को भैरूंदा निवासी अंकित तिवारी और कामिल खान ने अपने घरों में चोरी होने की शिकायत दर्ज कराई थी। दोनों मामलों में अज्ञात बदमाश रात के समय मकानों के ताले तोड़कर अंदर घुसे और अलमारियों में रखी नकदी तथा कीमती गहने लेकर फरार हो गए थे। लगातार हो रही चोरी की घटनाओं को देखते हुए पुलिस ने गंभीरता से जांच शुरू की और आरोपियों तक पहुंचने के लिए विशेष टीम का गठन किया।

    एसडीओपी रोशन कुमार जैन के मार्गदर्शन और थाना प्रभारी निरीक्षक घनश्याम दांगी के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम लगातार संदिग्धों पर नजर बनाए हुए थी। इसी दौरान मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर भैरूंदा निवासी मुहास उर्फ मुहाज खान को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पहले वाहन चोरी और बाद में घरों में चोरी की वारदातों को अंजाम देने की बात स्वीकार कर ली।

    आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने करीब एक लाख रुपए मूल्य के चांदी के आभूषण बरामद किए। जब्त सामान में चांदी का हार, बच्चों के दो कड़े, दो पायजेब, दो चांदी की पट्टियां और चार बिछिया शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि चोरी गया अन्य सामान और आरोपी के संभावित साथियों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

    पूछताछ के दौरान आरोपी ने यह भी कबूल किया कि उसने गुड़ बाजार और कॉलोनी क्षेत्र से दो मोटरसाइकिलें भी चोरी की थीं। इस खुलासे के बाद पुलिस ने वाहन चोरी के दोनों मामलों को भी सुलझा लिया। एक ही आरोपी की गिरफ्तारी से चोरी और वाहन चोरी से जुड़े कुल चार मामलों का पर्दाफाश होना पुलिस के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

    पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे चारों मामलों में न्यायिक अभिरक्षा में उपजेल भेज दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि उसने अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है या नहीं। पुलिस का मानना है कि आगे की पूछताछ में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

  • एक्वाकल्चर और तंबाकू किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार, उचित दाम और निर्यात बढ़ाने पर केंद्र का जोर: पीयूष गोयल

    एक्वाकल्चर और तंबाकू किसानों को मिलेगा बेहतर बाजार, उचित दाम और निर्यात बढ़ाने पर केंद्र का जोर: पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने एक्वाकल्चर और तंबाकू क्षेत्र से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने तथा निर्यात क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना, बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि तटीय क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

    पीयूष गोयल ने आंध्र प्रदेश के एक्वाकल्चर और तंबाकू उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद कहा कि विभिन्न पक्षों के साथ व्यापक चर्चा के दौरान क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार किया गया। उन्होंने बताया कि सरकार ऐसे समाधान तलाश रही है, जिनसे उत्पादन क्षमता बढ़े, निर्यात को प्रोत्साहन मिले और किसानों को बाजार में बेहतर अवसर प्राप्त हों। उनका कहना था कि एक्वाकल्चर भारत की निर्यात अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश देश के प्रमुख एक्वाकल्चर उत्पादक राज्यों में शामिल है और भारतीय सीफूड निर्यात में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में इस क्षेत्र को मजबूत करना केवल राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और निर्यात वृद्धि के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार और उद्योग जगत के बीच समन्वय से इस क्षेत्र में नए निवेश और रोजगार के अवसर भी विकसित होंगे।

    बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों, उत्पादन लागत, निर्यात संभावनाओं और उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि नीतिगत सहयोग और समयबद्ध निर्णयों से किसानों को सीधा लाभ पहुंचाया जा सकता है।

    इसी क्रम में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने भी केंद्र सरकार से एक्वाकल्चर और तंबाकू किसानों के हितों की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने बढ़ती उत्पादन लागत और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का उल्लेख करते हुए किसानों को राहत देने के उद्देश्य से आवश्यक नीतिगत कदम उठाने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने संबंधित केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर एक्वाकल्चर उद्योग से जुड़ी प्रमुख आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने की मांग की।

    मुख्यमंत्री ने झींगा चारा तैयार करने वाली इकाइयों के लिए जेनेटिकली मॉडिफाइड सोयाबीन मील के आयात की अनुमति देने, घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए फिश मील के निर्यात को विनियमित करने, तंबाकू निर्यात को प्रोत्साहन देने, एक्वाकल्चर से जुड़े प्रमुख इनपुट पर जीएसटी में राहत प्रदान करने तथा अमरावती में राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की स्थापना जैसे सुझाव भी रखे हैं। उनका मानना है कि इन कदमों से किसानों की लागत कम होगी और उत्पादन क्षमता में सुधार आएगा।

    केंद्र सरकार का कहना है कि किसानों की आय बढ़ाने और निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए राज्यों के साथ समन्वय बनाकर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। सरकार का फोकस ऐसी नीतियों पर है, जिनसे कृषि और मत्स्य क्षेत्र दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिले। आने वाले समय में इन प्रस्तावों पर विचार के बाद संबंधित क्षेत्रों के लिए नए निर्णय लिए जाने की संभावना जताई जा रही है।