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  • दांत में फिलिंग कराने के बाद भी क्यों लौट आती है कैविटी, जानिए दोबारा सड़न होने के प्रमुख कारण और बचाव के तरीके

    दांत में फिलिंग कराने के बाद भी क्यों लौट आती है कैविटी, जानिए दोबारा सड़न होने के प्रमुख कारण और बचाव के तरीके

    नई दिल्ली । दांत में कैविटी होने पर खराब हिस्से को साफ करके फिलिंग करना सामान्य उपचार है। इससे दांत की क्षतिग्रस्त संरचना को बचाने में मदद मिलती है, लेकिन फिलिंग हो जाने का मतलब यह नहीं है कि भविष्य में उसी दांत में दोबारा सड़न नहीं हो सकती। कुछ लोगों में समय बीतने के बाद फिलिंग के आसपास फिर से कैविटी विकसित हो जाती है।

    फिलिंग के बाद दोबारा होने वाली सड़न को सेकेंडरी कैरीज या रिकरेंट कैरीज कहा जाता है। इसके पीछे एक से ज्यादा कारण हो सकते हैं। व्यक्ति का कैविटी का जोखिम, मुंह में बनने वाला प्लाक, दांतों की सफाई, मीठे खाद्य पदार्थों का सेवन और फिलिंग की स्थिति इसमें भूमिका निभा सकती है।

    यदि मुंह में प्लाक ज्यादा बनता है या ओरल हाइजीन ठीक नहीं रहती, तो फिलिंग के बाद भी दांतों में सड़न का खतरा बना रह सकता है। इसी तरह बार-बार मीठे खाद्य पदार्थ या पेय लेने और पहले से कई दांतों में कैविटी होने की स्थिति में भी जोखिम कम नहीं होता। इसलिए फिलिंग को कैविटी के खिलाफ स्थायी सुरक्षा नहीं माना जा सकता।

    फिलिंग और प्राकृतिक दांत के मिलने वाले हिस्से को रिस्टोरेशन मार्जिन कहा जाता है। यह जगह प्लाक जमा होने के लिए संवेदनशील हो सकती है, खासकर जब वहां सही तरीके से सफाई नहीं हो पाती। मुंह में मौजूद बैक्टीरिया भोजन से मिलने वाली शुगर का इस्तेमाल करके एसिड बनाते हैं। बार-बार होने वाली इस प्रक्रिया से दांतों के मिनरल्स को नुकसान पहुंच सकता है और फिलिंग के किनारे मौजूद इनेमल या डेंटिन में नई कैविटी विकसित हो सकती है।

    पुरानी फिलिंग की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। समय के साथ डेंटल फिलिंग में टूट-फूट या दूसरे प्रकार के डिफेक्ट हो सकते हैं। जिन दांतों पर चबाने का दबाव अधिक पड़ता है, वहां फिलिंग के टूटने का जोखिम हो सकता है। अगर फिलिंग का कोई हिस्सा टूट गया हो, किनारा खुला महसूस हो, उस जगह भोजन बार-बार फंसता हो या चबाते समय दर्द होता हो, तो दांत की जांच कराना जरूरी है।

    हर खराब फिलिंग को तुरंत पूरी तरह बदलना जरूरी नहीं होता। कुछ परिस्थितियों में केवल खराब हिस्से की रिपेयर भी की जा सकती है। इसका निर्णय दांत की स्थिति की जांच के बाद किया जाता है।

    मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थों का सेवन भी कैविटी के जोखिम से जुड़ा है। केवल कुल कितनी चीनी खाई गई, यह ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि दिन में कितनी बार दांत शुगर के संपर्क में आते हैं, यह भी मायने रखता है। चॉकलेट, टॉफी, कैंडी, बिस्किट, मीठे स्नैक्स और शुगरी ड्रिंक्स का बार-बार सेवन दांतों पर एसिड अटैक की घटनाएं बढ़ा सकता है। चिपचिपे खाद्य पदार्थ दांतों पर अधिक समय तक रह सकते हैं।

    ब्रशिंग की गलत आदतें भी समस्या बढ़ा सकती हैं। बहुत जल्दी ब्रश करना, दांतों की अंदरूनी सतहों और पीछे के दांतों की सफाई छोड़ देना, बहुत अधिक जोर लगाना या फ्लोराइड टूथपेस्ट का सही इस्तेमाल न करना सफाई को प्रभावित कर सकता है।

    इसलिए फिलिंग को कैविटी से स्थायी सुरक्षा कवच नहीं समझना चाहिए। सही तरीके से ब्रशिंग, दांतों की सफाई, शुगर के सेवन को नियंत्रित करना और नियमित डेंटल चेकअप दोबारा कैविटी के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

  • मध्य प्रदेश में फिर बढ़ी सियासी हलचल, CM मोहन यादव समेत कई बड़े भाजपा नेता दिल्ली में, समन्वय बैठक की चर्चाएं तेज

    मध्य प्रदेश में फिर बढ़ी सियासी हलचल, CM मोहन यादव समेत कई बड़े भाजपा नेता दिल्ली में, समन्वय बैठक की चर्चाएं तेज


    मध्य प्रदेश: में राजनीतिक हलचल के बीच भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के दिल्ली पहुंचने से चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के भी नई दिल्ली पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया के दिल्ली बुलाए जाने की बात कही जा रही है।

    कई वरिष्ठ नेताओं के एक ही समय पर दिल्ली में मौजूद होने से मध्य प्रदेश भाजपा के राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरणों को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं। कैबिनेट मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल और कैलाश विजयवर्गीय पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। इस तरह प्रदेश से जुड़े कई प्रमुख नेताओं की राजधानी में मौजूदगी को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

    दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय को लेकर बैठक होने की चर्चा भी है। हालांकि, इस संभावित बैठक को लेकर अभी आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा होगी या इसका निश्चित एजेंडा क्या होगा, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    इसी बीच भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश भाजपा के भीतर राजनीतिक चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया है। वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में मौजूदगी और अलग-अलग स्तर पर हो रही मुलाकातों को देखते हुए संगठन तथा आपसी समन्वय से जुड़े मुद्दों पर संभावनाएं जताई जा रही हैं।

    हालांकि, सभी नेताओं के दिल्ली पहुंचने की वजह एक जैसी हो, यह जरूरी नहीं है। बताया जा रहा है कि कुछ नेता ब्रिक्स सम्मेलन से जुड़े कार्यक्रमों के सिलसिले में भी राजधानी पहुंचे हैं। ऐसे में दिल्ली में मौजूद सभी नेताओं के दौरे को सीधे तौर पर मध्य प्रदेश की राजनीति से जोड़ना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसे प्रमुख नेताओं की एक साथ दिल्ली में मौजूदगी ने फिर भी राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। प्रदेश भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के राजधानी पहुंचने से संगठन और सरकार के बीच समन्वय से जुड़े संभावित विमर्श को लेकर चर्चा बढ़ी है।

    मध्य प्रदेश में भाजपा की राजनीति से जुड़े मामलों में वरिष्ठ नेताओं की बैठकों और मुलाकातों को लेकर अक्सर राजनीतिक कयास लगाए जाते रहे हैं। मौजूदा स्थिति में भी संभावित समन्वय बैठक की चर्चा के कारण कई तरह की अटकलें सामने आ रही हैं। हालांकि, बैठक के एजेंडे या उसमें होने वाली संभावित चर्चा को लेकर अभी कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    फिलहाल इतना स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश भाजपा के कई बड़े नेता एक साथ दिल्ली में हैं और इस वजह से प्रदेश की राजनीति में हलचल महसूस की जा रही है। ब्रिक्स सम्मेलन से जुड़े कार्यक्रमों के कारण कुछ नेताओं की दिल्ली यात्रा होने की बात भी सामने आई है। इसलिए मौजूदा घटनाक्रम को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी होगा।

  • अमेज़न इंडिया के विक्रेताओं का कुनबा 20 लाख पार, तीन साल में सबसे तेज बढ़ोतरी

    अमेज़न इंडिया के विक्रेताओं का कुनबा 20 लाख पार, तीन साल में सबसे तेज बढ़ोतरी


    भोपाल।
    त्योहारी खरीदारी का मौसम शुरू होने से पहले अमेज़न इंडिया ने अपने विक्रेता नेटवर्क को लेकर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। कंपनी ने बताया कि Amazon.in पर उसके विक्रेताओं की संख्या 20 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। पिछले तीन वर्षों में यह विक्रेता आधार में साल दर साल हुई सबसे तेज वृद्धि है। इस दौरान तीन लाख से अधिक नए विक्रेता अमेज़न के मंच से जुड़े हैं।

    अमेज़न के बढ़ते विक्रेता समुदाय में देश के अलग-अलग हिस्सों और विभिन्न स्तरों के कारोबारी शामिल हैं। इनमें टियर-3 कस्बों से कारोबार शुरू करने वाले पहली पीढ़ी के उद्यमियों से लेकर हजारों स्टॉक कीपिंग यूनिट संभालने वाले स्थापित ब्रांड तक शामिल हैं। आगामी त्योहारी मौसम को देखते हुए कंपनी विक्रेताओं के लिए बिक्री, विज्ञापन, कारोबार प्रबंधन और ग्राहकों तक बेहतर सेवा पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दे रही है।

    इसके लिए कंपनी तकनीक, विभिन्न डिजिटल टूल्स और अपने बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश कर रही है। अमेज़न इंडिया में सेलिंग पार्टनर सर्विसेज की निदेशक अरुणा दरयानानी ने कहा कि कंपनी की कोशिश Amazon.in को हर आकार के विक्रेता के लिए बिक्री का बेहतर मंच बनाने की है। उन्होंने कहा कि फीस में कमी, रोजमर्रा के काम को आसान बनाने वाले एआई टूल्स और आंकड़ों के आधार पर बेहतर निर्णय लेने में मदद करने वाली सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि 20 लाख विक्रेताओं तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि देशभर के उद्यमी Amazon.in पर भरोसा कर रहे हैं। आगामी त्योहारी मौसम को ध्यान में रखते हुए कंपनी ऐसे टूल्स, तकनीक और बुनियादी ढांचे में निवेश जारी रखेगी, जिससे विक्रेता अपने कारोबार को तैयार कर सकें और ग्राहकों को बेहतर सेवा दे सकें।

    फीस में कटौती से बिक्री की लागत हुई कम

    अमेज़न के विक्रेता आधार में विस्तार के पीछे कम सेलिंग फीस, एआई आधारित सुविधाएं, रचनात्मक विज्ञापन विकल्प और फुलफिलमेंट तथा डिलीवरी नेटवर्क में लगातार किया जा रहा निवेश प्रमुख वजहें हैं।

    कंपनी के अनुसार इस साल की शुरुआत में फीस में बदलाव के बाद 12.5 करोड़ से अधिक उत्पादों पर रेफरल फीस शून्य कर दी गई। इससे देशभर के उद्यमियों के लिए अमेज़न पर उत्पाद बेचने की लागत कम हुई है। इसके साथ ही कंपनी विक्रेताओं को एआई आधारित सुविधाएं और विभिन्न डिजिटल टूल्स उपलब्ध करा रही है।

    ये सुविधाएं उत्पादों की लिस्टिंग तैयार करने और उसे बेहतर बनाने, नए उत्पादों की संभावनाएं तलाशने, विज्ञापन के लिए क्रिएटिव तैयार करने, इन्वेंट्री की योजना बनाने और आंकड़ों के आधार पर कारोबारी निर्णय लेने में मदद करती हैं।

    सेलर असिस्टेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा

    Amazon.in पर सेलर असिस्टेंट का इस्तेमाल करने वाले विक्रेताओं की संख्या हर छह महीने में दोगुनी हो रही है। कंपनी के अनुसार इस एआई आधारित टूल के साथ विक्रेताओं की बातचीत साल दर साल 7.5 गुना बढ़ी है।

    एआई आधारित टूल्स का इस्तेमाल करने वाले अमेज़न विज्ञापनदाताओं की हिस्सेदारी में भी साल दर साल 77 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं 2026 की पहली तिमाही में छोटे और मध्यम कारोबारियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इन टूल्स की मदद से 62 प्रतिशत अधिक विज्ञापन क्रिएटिव तैयार किए।

    देशभर में हो रहे सेलर कनेक्ट और ऐड्स हाइव वर्कशॉप

    त्योहारी सीजन की तैयारियों के तहत अमेज़न अपने डिजिटल टूल्स और सुविधाओं को विक्रेताओं तक सीधे पहुंचाने के लिए कई शहरों में 20 से अधिक सेलर कनेक्ट और ऐड्स हाइव वर्कशॉप आयोजित कर रहा है। इनमें कैटलॉग ऑप्टिमाइजेशन, इन्वेंट्री प्लानिंग, फुलफिलमेंट और विज्ञापन से जुड़े टूल्स तथा रणनीतियों की जानकारी दी जा रही है।

    मध्य प्रदेश में भी अमेज़न 77 हजार से अधिक विक्रेताओं और 24 हजार से ज्यादा स्थानीय दुकानों के लिए Amazon.in पर बिक्री को आसान बनाने पर काम कर रहा है।

    24 घंटे उपलब्ध एआई साथी

    त्योहारी तैयारी में सेलर असिस्टेंट को कंपनी प्रमुख सुविधाओं में शामिल कर रही है। यह 24 घंटे उपलब्ध बातचीत वाला एआई आधारित साथी है, जो अंग्रेजी और हिंग्लिश दोनों में काम करता है। इसके माध्यम से विक्रेता एक ही जगह से लिस्टिंग तैयार करने, इन्वेंट्री की योजना बनाने, फीस का अनुमान लगाने, कारोबार से संबंधित जानकारी हासिल करने और आगे बढ़ने के सुझाव लेने जैसे काम कर सकते हैं।

    प्रोडक्ट अपॉर्च्युनिटी एक्सप्लोरर भी विक्रेताओं के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। यह अमेज़न के ग्राहक मांग से जुड़े आंकड़ों के आधार पर ऐसे उत्पादों की संभावनाएं पहचानने में मदद करता है, जिनकी मांग मौजूद है और जहां प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत कम हो सकती है। देश में 28 हजार से अधिक विक्रेता इस टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    दो लाख से ज्यादा विक्रेता एआई लिस्टिंग टूल्स से जुड़े

    अमेज़न के एआई आधारित लिस्टिंग टूल्स का इस्तेमाल दो लाख से अधिक विक्रेता कर रहे हैं। इन सुविधाओं के जरिए उत्पादों का कैटलॉग तैयार करना आसान होता है और ग्राहकों के लिए उत्पादों को खोज पाना भी सरल होता है।

    इन्वेंट्री और कीमत की योजना के लिए इस साल 69 हजार से अधिक विक्रेताओं ने सेल इवेंट प्लानर का इस्तेमाल किया। कंपनी के अनुसार जिन विक्रेताओं ने इसके एआई आधारित इन्वेंट्री सुझावों को अपनाया, उनके यहां स्टॉक खत्म होने की घटनाओं में 35 प्रतिशत की कमी आई। वहीं टूल द्वारा सुझाई गई डील कीमतें लागू करने वाले विक्रेताओं की बिक्री में 2.5 गुना तक बढ़ोतरी हुई।

    समृद्धि से बिक्री लक्ष्य पार करने की संभावना 2.8 गुना

    अमेज़न का निजी सुझाव देने वाला ग्रोथ रेकमेंडेशन इंजन ‘समृद्धि’ भी विक्रेताओं को कारोबार बढ़ाने के लिए जरूरी कदम पहचानने में मदद कर रहा है। कंपनी के अनुसार समृद्धि का इस्तेमाल करने वाले विक्रेताओं के बिक्री आयोजनों के दौरान अपने बिक्री लक्ष्य को लगातार पार करने की संभावना 2.8 गुना अधिक होती है। वहीं इसके सुझावों को अपनाने वाले विक्रेताओं की सालाना बिक्री में 174 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    एआई से विज्ञापन क्रिएटिव तैयार करना आसान

    अमेज़न ऐड्स भी सेल्फ-सर्विस समाधान और एआई आधारित टूल्स के जरिये विक्रेताओं के लिए विज्ञापन को आसान बना रहा है। क्रिएटिव एजेंट और क्रिएटिव स्टूडियो जैसे टूल्स की मदद से विक्रेता कम मेहनत और बिना अतिरिक्त खर्च के पेशेवर स्तर के क्रिएटिव तैयार कर सकते हैं। इनमें वीडियो विज्ञापन भी शामिल हैं।

    अमेज़न ऐड्स क्रिएटर प्रोग्राम ब्रांड्स को पांच लाख से अधिक क्रिएटर्स के नेटवर्क से जोड़ता है। इससे विक्रेताओं को अपने विज्ञापन अभियानों में क्रिएटर के माध्यम से प्रचार का विकल्प भी मिलता है।

    त्योहारी मौसम के लिए 1.6 लाख से ज्यादा मौसमी रोजगार

    अमेज़न इंडिया अपने देशव्यापी ऑपरेशंस नेटवर्क और मौसमी कर्मचारियों पर भी निवेश कर रहा है। आगामी त्योहारी मौसम से पहले कंपनी ने अपने देशभर के ऑपरेशंस नेटवर्क में 1.6 लाख से अधिक मौसमी काम के अवसर तैयार किए हैं। ये अवसर अमेज़न के ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स दोनों कारोबार को सहयोग देंगे।

    ये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर 400 शहरों में उपलब्ध होंगे। इनमें बड़े महानगरों के साथ वाराणसी, कोच्चि, जालंधर, गाजियाबाद, रांची, सेलम और गोरखपुर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहर भी शामिल हैं।

    त्योहारी मौसम के दौरान ये नए एसोसिएट ग्राहकों के ऑर्डर को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से उठाने, पैक करने, भेजने और पहुंचाने में मदद करेंगे। कंपनी के अनुसार इनमें से ज्यादातर लोग अमेज़न के साथ जुड़ चुके हैं और त्योहारी सीजन की तैयारियों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी शुरू कर चुके हैं।

    अमेज़न अपने देशव्यापी डिलीवरी नेटवर्क के माध्यम से भारत के हर पिन कोड तक सामान पहुंचाने का काम कर रहा है।

  • किसानों को घटिया बीज से बचाने की तैयारी, नए कानून में QR कोड, राष्ट्रीय रजिस्टर और 30 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव

    किसानों को घटिया बीज से बचाने की तैयारी, नए कानून में QR कोड, राष्ट्रीय रजिस्टर और 30 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रस्ताव


    नई दिल्ली ।
    किसानों को नकली और घटिया गुणवत्ता वाले बीजों से बचाने के लिए केंद्र सरकार नया बीज अधिनियम लाने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून के जरिए करीब 60 साल पुराने मौजूदा कानूनी ढांचे में बदलाव किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने और नकली बीजों के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई के लिए मजबूत व्यवस्था तैयार करना है।

    प्रस्तावित कानून में बीज से जुड़े उल्लंघनों को तीन श्रेणियों में बांटने की योजना है। मामूली उल्लंघन करने वालों के लिए पहली बार चेतावनी और दोबारा उल्लंघन पर जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। जानबूझकर किए गए उल्लंघनों में बीज के पैकेट पर QR कोड नहीं लगाना, जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराना और गलत ब्रांडिंग जैसे मामले शामिल किए जाने का प्रस्ताव है।

    ऐसे मामलों में आर्थिक दंड का प्रावधान भी रखा गया है। उपलब्ध प्रस्ताव के अनुसार, कुछ उल्लंघनों के लिए पहली बार 1 लाख रुपये और दूसरी बार 2 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं गंभीर अपराधों को तीसरी श्रेणी में रखा गया है। इसमें नकली बीज बेचना, बिना पंजीकरण कारोबार करना और जानबूझकर धोखाधड़ी जैसे मामले शामिल हैं। गंभीर उल्लंघनों के लिए 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल की सजा का प्रस्ताव है।

    प्रस्तावित कानून के तहत सभी बीज और रोपण सामग्री का राष्ट्रीय रजिस्टर में पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। बिना पंजीकरण वाले बीजों को अवैध माना जाएगा और उन्हें बाजार में बेचने की अनुमति नहीं होगी। प्रत्येक बीज पैकेट पर QR कोड लगाने का भी प्रस्ताव है। इसके जरिए किसान बीज की उत्पत्ति, निर्माता, प्रयोगशाला से मिली मंजूरी और आपूर्ति श्रृंखला में उसकी आवाजाही से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकेंगे।

    सरकार का तर्क है कि मौजूदा व्यवस्था में लगभग 70 प्रतिशत बीज कानून के दायरे से बाहर हैं। अलग-अलग राज्यों में बीजों से जुड़ी प्रक्रियाएं भी अलग हैं और मौजूदा कानून में दंड के प्रावधान पर्याप्त नहीं माने जा रहे हैं। इसी वजह से नकली और खराब गुणवत्ता वाले बीजों के खिलाफ अधिक प्रभावी कार्रवाई के लिए नए कानून की जरूरत बताई गई है।

    प्रस्तावित कानून में किसानों के पारंपरिक बीज अधिकार सुरक्षित रखने की बात कही गई है। किसान पारंपरिक और किसान किस्म के बीजों का इस्तेमाल, आदान-प्रदान और बिक्री पहले की तरह कर सकेंगे। ऐसे पारंपरिक बीजों का पंजीकरण अनिवार्य नहीं होगा। व्यक्तिगत उपयोग, गांव में वितरण या किसी कंपनी के लिए बीज तैयार करने वाले किसानों के लिए डिजिटल पंजीकरण भी जरूरी नहीं होगा।

    नए कानून में ट्रेसबिलिटी को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य बीज फेल होने की स्थिति में जिम्मेदारी तय करना है। सभी बीज किस्मों को एकीकृत राष्ट्रीय ऑनलाइन रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा। राज्य सरकारों को राज्य स्तरीय समितियों की सिफारिश के आधार पर नई बीज किस्में जारी करने का अधिकार देने का भी प्रस्ताव है।

    किसानों के नुकसान की स्थिति में प्रत्येक राज्य में सीड सिक्योरिटी फंड बनाने का प्रावधान प्रस्तावित है। बीज फेल होने पर सत्यापन समिति जांच करेगी और किसान को 15 दिनों के भीतर मुआवजा देने की व्यवस्था का प्रस्ताव है।

    मौजूदा बीज अधिनियम 1966 में बनाया गया था, जबकि बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था। सरकार ने प्रस्तावित नए कानून पर पिछले साल सुझाव मांगे थे और करीब 18,000 सुझाव प्राप्त हुए। 10 सितंबर को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने 20 किसान संगठनों के साथ परामर्श किया। सरकार के अनुसार, प्रस्तावित सीड बिल संसद के शीतकालीन सत्र में लाया जा सकता है।

  • मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और व्यापार पर फोकस, Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG सहयोग पर चर्चा की उम्मीद

    मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और व्यापार पर फोकस, Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG सहयोग पर चर्चा की उम्मीद

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में अहम बैठक हो रही है। दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत जारी है। बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद हैं। बातचीत का दायरा रक्षा सौदों के अलावा व्यापार, उद्योग, परमाणु ऊर्जा और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों तक रहने की संभावना है।

    मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन ने एक-दूसरे से गले मिलकर अभिवादन किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा शुरू हुई। रक्षा क्षेत्र में Su-57 फाइटर जेट, S-400 की बाकी खेप और एडवांस ब्रह्मोस-NG जैसे विषयों पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।

    रूस की ओर से भारत में Su-57 फाइटर जेट के उत्पादन और इससे जुड़ी जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश पर भी समझौते की उम्मीद है। Su-57 को एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट के तौर पर पेश किया गया है। इस विमान की क्षमताओं को लेकर भी बातचीत में चर्चा होने की संभावना है।

    भारत-रूस संबंधों में रक्षा सहयोग के अलावा आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। दोनों देशों के बीच उद्योग, रेलवे, स्टील और टनलिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा संभव है। इसके साथ भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में अधिक अवसर उपलब्ध कराने के विषय पर भी बातचीत हो सकती है।

    परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी बैठक के संभावित एजेंडे में शामिल है। इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों, कुशल कामगारों और उर्वरक से जुड़े क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर विचार किया जा सकता है। खनिजों की खोज और उनकी आपूर्ति के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने तथा नए संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू करने पर भी चर्चा संभव है।

    व्यापारिक संबंधों को लेकर भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत की संभावना है। भारत और रूस के बीच वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय कारोबार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर चर्चा हो सकती है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए अवसर तैयार करने पर विचार किया जा सकता है।

    राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार देर रात भारत की राजधानी दिल्ली पहुंचे थे। उनके आगमन पर एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति के बीच भारत मंडपम में बैठक हो रही है।

    बैठक में रक्षा सहयोग से जुड़े प्रस्तावों के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत पर नजर है। Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG जैसे रक्षा विषयों के अलावा उद्योग, रेलवे, स्टील, टनलिंग, परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक और कुशल कामगारों से जुड़े संभावित सहयोग पर भी चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है।

  • NATO के हाइब्रिड वॉरफेयर पेपर में भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों का 10 बार जिक्र, जनरल वीके सिंह ने उपलब्धि बताया

    NATO के हाइब्रिड वॉरफेयर पेपर में भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों का 10 बार जिक्र, जनरल वीके सिंह ने उपलब्धि बताया

    नई दिल्ली ।भारतीय सेना के दो पूर्व अधिकारियों लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) डीएस हुड्डा और लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) पवित्रन राजन के रणनीतिक अध्ययन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। NATO से जुड़े हाइब्रिड वॉरफेयर पर तैयार एक अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन में दोनों अधिकारियों के काम का कम से कम 10 बार उल्लेख किया गया है। पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने इसे भारतीय रणनीतिक सोच के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।

    डीएस हुड्डा नॉर्दर्न आर्मी के पूर्व कमांडर रह चुके हैं। हुड्डा और पवित्रन राजन ने मिलकर ‘बियॉन्ड द काइनेटिक: डीकंस्ट्रक्टिंग वॉरफेयर इन द सोशियो-टेक्निकल-कॉग्निटिव बैटल्सपेस’ नाम से एक पेपर तैयार किया था। यह पेपर जनवरी 2026 में नई दिल्ली स्थित काउंसिल फॉर स्ट्रैटेजिक एंड डिफेंस रिसर्च की ओर से प्रकाशित किया गया था।

    जनरल वीके सिंह ने दोनों अधिकारियों के काम को हाइब्रिड, कॉग्निटिव और तकनीकी क्षेत्रों में भारतीय रणनीतिक सोच की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि उनके काम को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलना महत्वपूर्ण है और दोनों पूर्व सैन्य अधिकारियों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।

    हुड्डा और राजन के अध्ययन का मुख्य विषय आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति है। उनके अनुसार युद्ध अब केवल आमने-सामने के सैन्य संघर्ष या भौतिक लक्ष्यों को नष्ट करने तक सीमित नहीं रह गया है। संघर्ष का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र ऐसा भी बन गया है, जिसे उन्होंने ‘सोशियो-टेक्निकल-कॉग्निटिव बैटल्सपेस’ यानी STCB के रूप में समझाया है।

    इस अवधारणा में सूचना, तकनीक और लोगों की सोच के बीच संबंध को महत्वपूर्ण माना गया है। दोनों अधिकारियों के अध्ययन के मुताबिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एल्गोरिदम के माध्यम से लोगों तक पहुंचने वाली सूचनाएं उनकी राय और निर्णयों को प्रभावित कर सकती हैं। इसका रणनीतिक प्रभाव युद्ध के पारंपरिक क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई के प्रभाव जैसा हो सकता है।

    पेपर में कॉग्निटिव वॉरफेयर को आधुनिक संघर्ष का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। इसमें कहा गया कि विरोधी सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म पर सूचना के प्रवाह को प्रभावित कर पहले से मौजूद सामाजिक विभाजन और सूचना की कमी का फायदा उठा सकते हैं। उद्देश्य केवल गलत सूचना फैलाना नहीं, बल्कि लोगों के घटनाओं को देखने और फैसले लेने के तरीके को प्रभावित करना भी हो सकता है।

    अध्ययन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई गई है। इसके अनुसार AI की मदद से गलत सूचना फैलाने वाले अभियान ज्यादा सटीक और बड़े स्तर पर चलाए जा सकते हैं। व्यक्तिगत या सामाजिक कमजोरियों को ध्यान में रखकर संदेश तैयार करना भी संभव हो सकता है।

    इस चुनौती से निपटने के लिए मीडिया साक्षरता, मजबूत संस्थानों, विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल और विदेशी नियंत्रण वाले डिजिटल तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जांच-पड़ताल के जरिए मजबूती बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया गया।

    NATO से जुड़े प्रकाशन में हुड्डा और राजन के पेपर का उल्लेख विशेष रूप से ‘AI एंड कॉग्निटिव वॉरफेयर’ अध्याय में किया गया। इस अध्याय में कॉग्निटिव वॉरफेयर और OODA लूप पर चर्चा की गई है। OODA का अर्थ ऑब्जर्व, ओरिएंट, डिसाइड और एक्ट है, जिसके जरिए सैन्य कमांडर किसी स्थिति को समझकर निर्णय लेते हैं और कार्रवाई करते हैं।

    प्रकाशन में रूस-यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में तकनीक, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, सोशल मीडिया और AI के इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई है। यूक्रेन द्वारा स्टारलिंक जैसी निजी सैटेलाइट कम्युनिकेशन व्यवस्था के इस्तेमाल और Clearview AI के जरिए रूसी सैनिकों की पहचान से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया गया है।

    पावर-ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की समीक्षा वाले हिस्से में भी कॉग्निटिव वॉरफेयर, गलत सूचना, मनोवैज्ञानिक ऑपरेशन और AI से पैदा होने वाली अव्यवस्था को जनता के भरोसे तथा निर्णय प्रक्रिया पर पड़ने वाले प्रभाव से जोड़ा गया है। दोनों अधिकारियों का जनवरी 2026 का पेपर इस प्रकाशन की संदर्भ सूची में भी औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।

  • बिना SIP और शेयर बाजार के पति-पत्नी बना सकते हैं एक लाख से ज्यादा, 10 रुपये से शुरू करें आसान गुल्लक चैलेंज

    बिना SIP और शेयर बाजार के पति-पत्नी बना सकते हैं एक लाख से ज्यादा, 10 रुपये से शुरू करें आसान गुल्लक चैलेंज

    नई दिल्ली । बड़ा फंड तैयार करने के लिए लोग अक्सर शेयर बाजार, फिक्स्ड डिपॉजिट या SIP जैसे विकल्पों पर विचार करते हैं। हालांकि, जो लोग बाजार से जुड़े जोखिम से बचना चाहते हैं और बिना किसी निवेश साधन के नियमित बचत करना चाहते हैं, उनके लिए गुल्लक में रोज थोड़ी रकम जमा करने का तरीका अपनाया जा सकता है। तारीख के हिसाब से बचत करने वाला यह फॉर्मूला बेहद आसान है और पति-पत्नी मिलकर इसे अपनाएं तो एक साल में एक लाख रुपये से ज्यादा की रकम जमा की जा सकती है।

    इस बचत चुनौती का नियम सीधा है। महीने की जिस तारीख को जितना अंक हो, उतने ही दस रुपये गुल्लक में जमा करने होते हैं। यानी हर दिन जमा होने वाली राशि तारीख के साथ बढ़ती जाती है। इससे शुरुआत में बचत की रकम छोटी रहती है और महीने के आखिर में धीरे-धीरे बढ़कर ज्यादा हो जाती है।

    उदाहरण के तौर पर महीने की 1 तारीख को 10 रुपये जमा करने होंगे। 5 तारीख को 50 रुपये, 10 तारीख को 100 रुपये, 15 तारीख को 150 रुपये, 20 तारीख को 200 रुपये और 25 तारीख को 250 रुपये गुल्लक में डालने होंगे। इसी क्रम को महीने की 30 तारीख तक जारी रखा जा सकता है, जब उस दिन 300 रुपये जमा होंगे।

    अगर महीने की 1 से 31 तारीख तक इसी नियम के अनुसार रोज बचत की जाए, तो एक व्यक्ति एक महीने में कुल 4,960 रुपये जमा कर सकता है। इस तरह लगातार 12 महीने तक यही तरीका अपनाने पर एक व्यक्ति के पास करीब 59,520 रुपये का फंड तैयार हो जाएगा।

    इस चुनौती की खास बात यह है कि इसे पति-पत्नी मिलकर भी पूरा कर सकते हैं। दोनों लोग अपने-अपने स्तर पर तारीख के हिसाब से समान रकम गुल्लक में जमा करें तो एक साल में दोनों की संयुक्त बचत करीब 1,19,040 रुपये तक पहुंच सकती है। इस तरह एक लाख रुपये का लक्ष्य पार किया जा सकता है।

    इस तरीके में किसी निवेश योजना में पैसा लगाने की जरूरत नहीं होती। बचत की रकम सीधे गुल्लक में जमा की जाती है, इसलिए इसका उद्देश्य नियमित तौर पर पैसे अलग रखना और बचत की आदत विकसित करना है। रोजाना छोटी रकम जमा करने से एक साथ बड़ी राशि बचाने का दबाव भी कम किया जा सकता है।

    हालांकि, इस तरीके को बाजार निवेश का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश साधनों में पैसे लगाने पर रिटर्न बाजार के प्रदर्शन से जुड़ा होता है और उसमें जोखिम भी रहता है। वहीं, गुल्लक में रखी रकम से निवेश रिटर्न नहीं मिलता। यह मूल रूप से बचत का तरीका है।

    इस चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए जरूरी है कि तय तारीख पर निर्धारित रकम अलग रखी जाए। महीने की शुरुआत में छोटी रकम से शुरू होने वाली बचत महीने के अंत तक बढ़ती जाती है। पति-पत्नी दोनों नियमितता बनाए रखें तो 12 महीने में संयुक्त रूप से करीब 1.19 लाख रुपये जमा किए जा सकते हैं।

  • Jhansi: बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही समस्या से जूझ रहा, जलभराव के कारण मरीज परेशान

    Jhansi: बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खुद ही समस्या से जूझ रहा, जलभराव के कारण मरीज परेशान


    झांसी। बड़ागांव का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) इन दिनों खुद जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। अस्पताल परिसर में करीब 20 दिन से पानी भरा है। इससे मरीजों और तीमारदारों को मुख्य गेट से ओपीडी और इमरजेंसी तक पहुंचने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। लंबे समय से पानी जमा होने के कारण मच्छरजनित और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

    अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, जलभराव की समस्या से जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। दो बार उच्च अधिकारियों और स्थानीय विधायक को भी इसकी जानकारी दी गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है। ऐसे में जहां मरीजों का इलाज होना चाहिए, उसी अस्पताल परिसर को अपनी समस्या के ‘इलाज’ का इंतजार है।

    हर साल होती है जलभराव की समस्या

    सीएचसी के सीएमएस डॉ. वैभव पुरोहित ने बताया कि अस्पताल परिसर नीची जगह पर है। आसपास का क्षेत्र ऊंचाई पर होने के कारण हर साल यहां जलभराव की स्थिति बनती है। समस्या से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया गया है। पिछले वर्ष भी स्थायी समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो सका।

    प्रसव पीड़ा में पानी से होकर अस्पताल पहुंची गर्भवती

    स्थानीय निवासी अनूपा जोशी ने बताया कि 8 सितंबर को उनकी बहू वंदना को प्रसव पीड़ा हुई। मध्यरात्रि करीब दो बजे वह उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचीं। परिसर में पानी भरा देखकर परेशानी हुई, लेकिन प्रसव पीड़ा अधिक होने के कारण मजबूरी में बहू को पानी से होकर अस्पताल तक ले जाना पड़ा।

    वहीं, वृद्ध मरीज अशोक निरंजन ने बताया कि उम्र अधिक होने के कारण उन्हें उपचार के लिए सीएचसी जाना पड़ता है। कई दिनों से परिसर में पानी भरा होने के कारण ओपीडी तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। डॉक्टर ने फॉलोअप जांच के लिए बुलाया था, लेकिन जलभराव के कारण अस्पताल जाने में डर लग रहा है। पानी में गिरने या चोट लगने की आशंका बनी रहती है।

    मोटर से पानी निकालने की कोशिश, नहीं मिल रही सफलता

    सीएमओ डॉ. शिशिर पुरी ने बताया कि सीएचसी के आसपास का क्षेत्र ऊंचाई पर होने के कारण परिसर में जलभराव होता है। मोटर लगाकर पानी की निकासी कराई जा रही है, लेकिन इसमें ज्यादा सफलता नहीं मिल रही है। उन्होंने बताया कि समस्या से बीडीओ को अवगत कराकर इसके स्थायी निदान के लिए कहा गया है।

  • यूपी में बारिश से खराब सड़कों पर सीएम योगी सख्त, बोले- तत्काल मोटरेबल बनाएं, बरसात बाद कराएं नवीनीकरण

    यूपी में बारिश से खराब सड़कों पर सीएम योगी सख्त, बोले- तत्काल मोटरेबल बनाएं, बरसात बाद कराएं नवीनीकरण

    लखनऊ। बारिश और बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि बरसात अभी जारी है, इसलिए खराब सड़कों की फिलहाल मरम्मत कर उन्हें आवागमन के योग्य बनाया जाए। बारिश का मौसम खत्म होने के बाद जरूरत के अनुसार इनका स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों का आवागमन होगा। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बारिश से नए क्षतिग्रस्त मार्गों का लगातार सर्वे कराने और पर्वों से पहले जरूरी मरम्मत व नवीनीकरण पूरा करने के निर्देश दिए।

    681 प्रमुख मार्गों पर विशेष फोकस
    आगामी पर्वों को देखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इन सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर गड्ढामुक्त और बेहतर स्थिति में रखने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि गड्ढामुक्ति अभियान केवल पैचवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जहां तत्काल मरम्मत की जरूरत है, वहां पहले सड़क को आवागमन योग्य बनाया जाए और बरसात खत्म होने के बाद उसकी स्थिति के अनुसार स्थायी मरम्मत या नवीनीकरण कराया जाए।

    4.36 लाख किमी सड़कों की समीक्षा
    बैठक में बताया गया कि प्रदेश में नौ विभागों के अधीन करीब 4.36 लाख किलोमीटर मार्ग हैं। मौजूदा गड्ढामुक्ति अभियान के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर सड़कों को बेहतर करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से अब तक करीब 5,751 किलोमीटर मार्गों पर काम पूरा हो चुका है।

    क्षतिग्रस्त सड़कों के सर्वे के बाद विभागवार लक्ष्य अंतिम रूप से तय किए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि अतिवृष्टि के अलावा एक्सप्रेसवे, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे की निर्माणाधीन परियोजनाओं के चलते भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनका विभागवार सर्वे कराया जा रहा है।

    स्कूल-अस्पताल और बाजारों की सड़कें पहले सुधरें
    मुख्यमंत्री ने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अधिक जन आवागमन वाले अन्य स्थानों की सड़कों को प्राथमिकता पर सुधारने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर मरम्मत कार्य तत्काल शुरू कराया जाए और सड़क को बिना देरी आवागमन योग्य बनाया जाए। साथ ही काम में तेजी के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

    30 हजार किमी सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य
    नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा की गई। विभाग के अनुसार करीब 30 हजार किलोमीटर सड़कों के नवीनीकरण और करीब 5 हजार किलोमीटर सड़कों की विशेष मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है। अब तक नवीनीकरण के तहत करीब 14 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत में करीब 700 किलोमीटर की प्रगति बताई गई है।

    कई विभागों की कार्ययोजना की समीक्षा
    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी कार्ययोजना की जानकारी ली। इसके अलावा मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की कार्ययोजनाओं की समीक्षा की गई। उन्होंने सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए।

    बैठक में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर, राज्य मंत्री लोक निर्माण विभाग ब्रजेश सिंह, राज्य मंत्री औद्योगिक विकास जसवंत सिंह सैनी, राज्य मंत्री जल शक्ति रामकेश निषाद और राज्य मंत्री ग्राम्य विकास विजय लक्ष्मी गौतम मौजूद रहे।

  • कुत्ता टहलाने के लिए स्टेडियम खाली कराने के मामले में रिंकू दुग्गा को झटका, सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने दिया आदेश

    कुत्ता टहलाने के लिए स्टेडियम खाली कराने के मामले में रिंकू दुग्गा को झटका, सीजेआई सूर्यकांत की बेंच ने दिया आदेश

    नई दिल्ली ।आईएएस अधिकारी रिंकू दुग्गा को त्यागराज स्टेडियम में कुत्ता टहलाने से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से दिए गए उनके अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को खारिज करते हुए सेवा में बहाली का रास्ता साफ किया गया था।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दिए जाने के बाद रिंकू दुग्गा को नोटिस जारी किया है। पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल हैं।

    सुप्रीम कोर्ट की ओर से 7 सितंबर को जारी आदेश में कहा गया कि मामले की अगली सुनवाई तक संबंधित अधिकारी की बहाली पर रोक रहेगी। इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होने की बात कही गई है।

    यह विवाद वर्ष 2022 का है। रिंकू दुग्गा 1994 बैच की एजीएमयूटी कैडर की आईएएस अधिकारी हैं। उन पर आरोप लगा था कि दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम को इस वजह से खाली करवाया गया, ताकि वह वहां अपने कुत्ते को टहला सकें और उस दौरान दूसरे लोगों को स्टेडियम में आने की अनुमति न हो।

    इस घटनाक्रम के दौरान उनके पति संजीव खैरवार भी उनके साथ मौजूद थे। संजीव खैरवार भी आईएएस अधिकारी हैं। स्टेडियम से जुड़ी तस्वीर और घटना की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया और इसे लेकर विवाद खड़ा हुआ।

    बाद में केंद्र सरकार ने रिंकू दुग्गा को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया। इस फैसले को उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण यानी सीएटी के समक्ष चुनौती दी। सीएटी ने उनके पक्ष में फैसला देते हुए सेवा बहाल करने का आदेश दिया था।

    इसके बाद मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा। हाई कोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 को सीएटी के फैसले को बरकरार रखा। अदालत ने केंद्र सरकार के उस आदेश को स्वीकार नहीं किया, जिसके तहत रिंकू दुग्गा को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी। इसके बाद उनकी सेवा में बहाली का रास्ता खुल गया था।

    केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने अब हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने मामले में रिंकू दुग्गा को नोटिस भी जारी किया है।

    इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी पेश हुईं। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल बहाली पर रोक लगाते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

    अब इस मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी। उस सुनवाई में केंद्र की चुनौती और रिंकू दुग्गा की सेवा से जुड़े विवाद पर आगे की कानूनी प्रक्रिया सामने आएगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले के आधार पर उनकी बहाली पर रोक लागू रहेगी, जिसने केंद्र के अनिवार्य सेवानिवृत्ति आदेश को खारिज किया था।