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  • इंदौर में दूषित पानी से 15वीं मौत, पेयजल लाइन में सीवेज मिलने की पुष्टि; NHRC ने मांगी रिपोर्ट

    इंदौर में दूषित पानी से 15वीं मौत, पेयजल लाइन में सीवेज मिलने की पुष्टि; NHRC ने मांगी रिपोर्ट


    इंदौर /मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैली बीमारी ने एक और जान ले ली है। गुरुवार को 68 वर्षीय गीताबाई की मौत के साथ ही इस जल त्रासदी में मृतकों की संख्या 15 हो गई। अब तक 16 बच्चों सहित 201 लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं।एमजीएम मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि सभी मौतें और बीमारियां दूषित पानी पीने के कारण हुई हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी CMHO डॉ. माधव हसानी ने बताया कि जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पानी में बैक्टीरियल संक्रमण था। मरीजों में डायरिया, उल्टी और तेज बुखार जैसे लक्षण पाए गए, जो पानी से फैलने वाली बीमारियों के संकेत हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट और कल्चर टेस्ट का इंतजार किया जा रहा है, जिससे संक्रमण के सटीक कारणों का पता चलेगा।

    राज्य के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि भागीरथपुरा में पेयजल लाइन में सीवेज का पानी मिला। पाइपलाइन पुलिस चौकी के पास से गुजर रही है, जहां से लीकेज की आशंका सबसे अधिक है। शौचालय के नीचे से गुजर रही जल आपूर्ति लाइन में सीवेज के मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन ने मरम्मत कार्य शुरू कर दिया है और प्रभावित इलाके में टैंकरों से साफ पानी सप्लाई किया जा रहा है।राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग NHRC ने इस गंभीर जनस्वास्थ्य संकट पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट में मौतों के कारण, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और पीड़ितों को दी गई सहायता का ब्यौरा मांगा गया है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आज दोपहर 12 बजे के बाद सुनवाई होने की संभावना है। जबलपुर स्थित हाईकोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ऑनलाइन सुनवाई करेगी। कोर्ट ने राज्य सरकार से अब तक की कार्रवाई और स्थिति पर स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा है।स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रेनेज के पानी में शिगेला, साल्मोनेला, हैजा कोलेरा और ई. कोलाई जैसे घातक बैक्टीरिया पाए जा सकते हैं। यदि यह पानी पेयजल लाइन में मिल जाए, तो यह अत्यंत विषैला हो जाता है और जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी है।

    इंदौर की यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर चिंता पैदा करती है। पाइपलाइन लीकेज की मरम्मत, संक्रमित क्षेत्र में पानी की सप्लाई और लोगों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाए गए हैं। अब इस त्रासदी की आगे की कार्रवाई NHRC रिपोर्ट और अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगी।भागीरथपुरा जल संकट ने यह साबित कर दिया है कि शहरी जल आपूर्ति व्यवस्था में निगरानी और नियमित निरीक्षण न होने पर छोटे-छोटे लीकेज भी बड़े जनस्वास्थ्य संकट में बदल सकते हैं। प्रशासन और सरकार दोनों के लिए यह चेतावनी है कि शहरों में जल सुरक्षा और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

  • इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला

    इंदौर में दूषित पानी से 15 मौतें राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर बोला हमला


    इंदौर । इंदौर में गंदा पानी पीने से हुए मौतों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के सेवन से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 338 नए मरीजों में से 32 की हालत गंभीर है। गंदे पानी की लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया। इस पर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर में आम आदमी को पानी नहीं बल्कि जहर दिया गया है। उनका कहना है कि प्रशासन की लापरवाही के चलते यह हादसा हुआ है और अब भी कार्रवाई नहीं हो रही है।

    राहुल गांधी ने ट्विटर पर इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि “इंदौर में पानी नहीं जहर बंटा और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में था। घर-घर मातम है गरीब बेबस हैं लेकिन भाजपा के नेता घमंड में चूर हैं। जिनके घरों में चूल्हा बुझा है उन्हें सांत्वना मिलनी चाहिए थी लेकिन सरकार ने घमंड परोस दिया।” उन्होंने यह भी पूछा कि गंदा पानी प्रशासन ने क्यों नहीं रोका और सीवर पानी पीने का कारण क्या था। राहुल गांधी ने भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “क्यों नहीं कार्रवाई की गई।

    इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बयान दिया था जिसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नगर निगम के बाहर प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने दूषित पानी की आपूर्ति पर सरकार से जवाबदेही की मांग की। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया।

    राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकार प्रशासन और नेतृत्व इस घटना के लिए पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने मध्य प्रदेश को कुप्रशासन का एपिसेंटर बताया और कहा कि यहां लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिनमें गरीबों की जान जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर हमेशा की तरह खामोश रहते हैं जब गरीब मरते हैं। इस घटना के बाद से जनता में गुस्सा और प्रशासन के खिलाफ आक्रोश फैल गया है और इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और प्रदर्शनों का दौर जारी है।

  • भारत और न्यूजीलैंड के बीच जनवरी 2026 में तीन मैचों की रोमांचक वनडे सीरीज होगी। रोहित शर्मा और विराट कोहली से टीम को बड़ी पारियों की उम्मीद है।

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच जनवरी 2026 में तीन मैचों की रोमांचक वनडे सीरीज होगी। रोहित शर्मा और विराट कोहली से टीम को बड़ी पारियों की उम्मीद है।


    नई दिल्ली । भारत और न्यूजीलैंड के बीच जनवरी 2026 में तीन मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी। यह सीरीज टी20 वर्ल्ड कप 2026 और वनडे वर्ल्ड कप 2027 की तैयारियों के लिहाज से टीम इंडिया के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। मुकाबले वडोदरा, राजकोट और इंदौर में आयोजित होंगे और तीनों मैच डे-नाइट होंगे।सीरीज की शुरुआत 11 जनवरी 2026 को वडोदरा में होगी। दूसरा मैच 14 जनवरी को राजकोट और तीसरा तथा अंतिम मुकाबला 18 जनवरी को इंदौर में खेला जाएगा। मुकाबलों में टॉस दोपहर 1 बजे होगा और मैच 1:30 बजे से शुरू होंगे।

    टीम चयन और सस्पेंस

    भारतीय टीम के चयन को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। चयनकर्ता श्रेयस अय्यर की फिटनेस रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। यदि अय्यर फिट नहीं होते हैं, तो ऋतुराज गायकवाड़ को टीम में मौका मिल सकता है। इसके अलावा, हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह को वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत आराम दिए जाने की चर्चा है। वहीं ऋषभ पंत की वापसी पर भी संशय है।विजय हजारे ट्रॉफी में शानदार प्रदर्शन कर रहे सरफराज खान और ईशान किशन भी चयनकर्ताओं की नजर में हैं।

    रोहित और विराट पर नजर
    टीम के दो सीनियर बल्लेबाज रोहित शर्मा और विराट कोहली शानदार फॉर्म में हैं। दोनों से इस सीरीज में बड़ी पारियों की उम्मीद है। उनके अनुभव से युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन मिलेगा। यह सीरीज वनडे वर्ल्ड कप 2027 की तैयारी की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    भारत बनाम न्यूजीलैंड का रिकॉर्ड

    वनडे क्रिकेट में भारत का न्यूजीलैंड के खिलाफ रिकॉर्ड मजबूत रहा है। अब तक 120 वनडे मुकाबलों में भारत ने 62 जीते हैं, जबकि न्यूजीलैंड को 52 में सफलता मिली है। सात मैच बेनतीजा रहे हैं और एक मुकाबला टाई रहा है।

    लाइव प्रसारण
    भारत-न्यूजीलैंड वनडे सीरीज का लाइव प्रसारण स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर किया जाएगा। मोबाइल और ऑनलाइन दर्शक JioHotstar के जरिए लाइव स्ट्रीमिंग देख सकते हैं।

    संभावित प्लेइंग-11

    भारत: शुभमन गिल कप्तान, रोहित शर्मा, विराट कोहली, यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, ऋतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा, ऋषभ पंत, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मोहम्मद शमी।न्यूजीलैंड: माइकल ब्रेसवेल कप्तान, डेवोन कॉनवे, डेरिल मिचेल, टॉम लैथम, ग्लेन फिलिप्स, जेम्स नीशम, काइल जैमीसन, ट्रेंट बोल्ट, मिच हे, विल यंग, निकोल्स।इस सीरीज से टीम इंडिया को नई प्रतिभाओं की परख करने का मौका मिलेगा और खिलाड़ियों की फॉर्म पर भी नजर रखी जाएगी। वहीं, न्यूजीलैंड के खिलाफ प्रतिस्पर्धा और रोमांचक मुकाबले फैंस के लिए उत्साह बढ़ाने वाले होंगे।
  • उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान नस्लीय भेदभाव पर छलका दर्द-SCG टेस्ट होगा आखिरी मैच

    उस्मान ख्वाजा ने किया संन्यास का ऐलान नस्लीय भेदभाव पर छलका दर्द-SCG टेस्ट होगा आखिरी मैच


    नई दिल्ली । ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के अनुभवी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। सिडनी क्रिकेट ग्राउंड SCG में खेला जाने वाला एशेज सीरीज का टेस्ट मैच उनके करियर का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होगा। इस भावुक मौके पर ख्वाजा ने न सिर्फ अपने संन्यास की घोषणा की बल्कि अपने लंबे करियर के दौरान झेले नस्लीय भेदभाव मीडिया की आलोचना और टीम मैनेजमेंट के दोहरे मानदंडों पर भी खुलकर अपनी बात रखी।प्रेस कॉन्फ्रेंस में ख्वाजा ने कहा कि उन्हें पूरे करियर में कई बार उनके पाकिस्तानी मूल और मुस्लिम पहचान के कारण अलग नजर से देखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि चोटिल होने की स्थिति में भी उनकी सच्चाई जाने बिना उन पर सवाल खड़े किए गए और उन्हें अक्सर आलसी स्वार्थी या टीम के लिए पूरी तरह समर्पित न होने वाला खिलाड़ी बताया गया।

    ख्वाजा ने कहा जब मैं चोटिल होता था तो लोग बिना पूरी जानकारी के मुझ पर उंगलियां उठाते थे। मुझे ऐसा महसूस कराया गया कि मैं टीम के लिए उतना प्रतिबद्ध नहीं हूं जितना बाकी खिलाड़ी। उन्होंने यह भी कहा कि यह नजरिया सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं था बल्कि उनकी पहचान से भी जुड़ा हुआ था।उन्होंने हाल ही में पर्थ टेस्ट से पहले गोल्फ खेलने और एक वैकल्पिक ट्रेनिंग सेशन में शामिल न होने पर हुई आलोचना का भी जिक्र किया। ख्वाजा के मुताबिक कई खिलाड़ी मैच से पहले गोल्फ खेलते हैं या शराब पीते हैं लेकिन उन्हें ऑस्ट्रेलियन लैरिकिन्स कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। वहीं जब उन्होंने ऐसा किया तो इसे बड़ा मुद्दा बनाया गया और उनकी पेशेवर प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े किए गए।

    ख्वाजा ने साफ शब्दों में कहा कि यह दोहरा मापदंड उन्हें हमेशा खलता रहा। उन्होंने कहा कि अगर वही काम कोई और करता तो उसे मजाक या सामान्य व्यवहार मान लिया जाता लेकिन उनके मामले में इसे चरित्र से जोड़ दिया गया।संन्यास की घोषणा के दौरान ख्वाजा के साथ उनकी पत्नी रेचल बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि वे काफी समय से इस फैसले पर विचार कर रहे थे। पत्नी से लंबी बातचीत के बाद उन्हें महसूस हुआ कि अब सही समय आ गया है। ख्वाजा ने कहा कि उन्हें संतोष है कि वे अपने करियर को SCG जैसे ऐतिहासिक मैदान पर अपनी शर्तों पर खत्म कर पा रहे हैं।

    उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एशेज सीरीज की शुरुआत में एडिलेड टेस्ट की प्लेइंग इलेवन से बाहर रहना उनके लिए एक बड़ा संकेत था। हालांकि बाद में जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने अहम पारियां खेलीं और टीम के लिए योगदान दिया। ख्वाजा ने साफ किया कि वे जबरदस्ती टीम में बने रहने के पक्ष में नहीं थे और अगर जरूरत पड़ी होती तो वे उसी समय संन्यास लेने के लिए तैयार थे।अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी ख्वाजा क्रिकेट से पूरी तरह दूरी नहीं बनाएंगे। वे आगे भी ब्रिस्बेन हीट के लिए बिग बैश लीग और क्वींसलैंड के लिए शेफील्ड शील्ड में खेलते नजर आएंगे। उनका मानना है कि क्रिकेट अभी भी उनके जीवन का अहम हिस्सा है।

    इस मौके पर क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के CEO टॉड ग्रीनबर्ग ने कहा कि उस्मान ख्वाजा ने मैदान के अंदर और बाहर ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट को बहुत कुछ दिया है। उनका योगदान सिर्फ रन बनाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने विविधता समावेशिता और साहस की मिसाल भी पेश की है।कुल मिलाकर उस्मान ख्वाजा का संन्यास सिर्फ एक खिलाड़ी का विदाई नहीं है बल्कि यह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट में मौजूद उन मुद्दों की ओर भी इशारा करता है जिन पर अब खुलकर चर्चा होने लगी है।

  • रोहित–विराट के बाद संकट में वनडे क्रिकेट, अश्विन–इरफान ने ICC और BCCI को चेताया

    रोहित–विराट के बाद संकट में वनडे क्रिकेट, अश्विन–इरफान ने ICC और BCCI को चेताया


    नई दिल्ली । वनडे क्रिकेट का भविष्य एक बार फिर गंभीर चर्चा के केंद्र में आ गया है। भारत के दो सबसे बड़े सितारे रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे खिलाड़ियों के संभावित संन्यास को देखते हुए पूर्व क्रिकेटरों ने चेतावनी दी है कि अगर समय रहते बड़े फैसले नहीं लिए गए तो यह फॉर्मेट आने वाले वर्षों में अपनी प्रासंगिकता खो सकता है। खासतौर पर 2027 वनडे विश्व कप के बाद वनडे क्रिकेट का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

    पूर्व भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और पूर्व ऑलराउंडर इरफान पठान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ICC और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड BCCI को साफ शब्दों में आगाह किया है कि मौजूदा ढांचे के साथ वनडे क्रिकेट को बचाना मुश्किल होगा। दोनों का मानना है कि द्विपक्षीय सीरीज की घटती अहमियत और टूर्नामेंट्स की अधिकता ने इस फॉर्मेट की चमक फीकी कर दी है।कोविड-19 महामारी के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैलेंडर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पहले जहां पांच मैचों की वनडे सीरीज आम बात हुआ करती थीं, वहीं अब ज्यादातर टीमें केवल तीन मैचों की औपचारिक सीरीज खेलती नजर आती हैं। कई देशों के लिए वनडे क्रिकेट अब सिर्फ विश्व कप तक सीमित होता जा रहा है, जबकि टी20 क्रिकेट और फ्रेंचाइज़ी लीग्स ने दर्शकों का बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींच लिया है।

    अश्विन ने हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल ऐश की बात में इस मुद्दे पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अगर रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे बड़े नाम वनडे क्रिकेट से हटते हैं तो दर्शकों की दिलचस्पी और तेजी से कम हो सकती है। अश्विन ने घरेलू क्रिकेट का उदाहरण देते हुए बताया कि विजय हजारे ट्रॉफी को आमतौर पर सीमित दर्शक ही देखते हैं, लेकिन जब रोहित और विराट इस टूर्नामेंट में खेले, तो स्टेडियमों में भारी भीड़ देखने को मिली।उनके मुताबिक, यह साफ संकेत है कि मौजूदा दौर में वनडे क्रिकेट काफी हद तक स्टार खिलाड़ियों पर निर्भर है। अगर बड़े चेहरे नहीं होंगे, तो दर्शकों को आकर्षित करना और भी मुश्किल हो जाएगा। अश्विन ने ICC के मौजूदा टूर्नामेंट मॉडल पर भी सवाल उठाए। उनका मानना है कि साल भर में लगातार अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट कराने से फैंस में थकान पैदा हो रही है और हर इवेंट की अहमियत कम होती जा रही है।

    अश्विन ने सुझाव दिया कि ICC को फुटबॉल की तर्ज पर वनडे विश्व कप को चार साल में सिर्फ एक बार आयोजित करना चाहिए ताकि इस टूर्नामेंट की प्रतिष्ठा और रोमांच बना रहे। उनका कहना है कि जब कोई इवेंट दुर्लभ होता है तो उसकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाती है।वहीं इरफान पठान ने भी वनडे क्रिकेट के गिरते ग्राफ पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय सीरीज अब दर्शकों को रोमांचित नहीं कर पा रही हैं। इरफान के अनुसार, अगर वनडे क्रिकेट को फिर से लोकप्रिय बनाना है, तो ट्राई सीरीज और क्वाड्रेंगुलर सीरीज जैसे फॉर्मेट्स को दोबारा शुरू करना होगा।

    इरफान का मानना है कि जब एक ही सीरीज में तीन या चार टीमें हिस्सा लेती हैं तो मुकाबलों की प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और हर मैच का महत्व भी ज्यादा होता है। इससे दर्शकों की रुचि बनी रहती है और खिलाड़ियों को भी अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने का मौका मिलता है।कुल मिलाकर अश्विन और इरफान दोनों इस बात पर सहमत हैं कि अगर ICC और BCCI ने समय रहते ठोस और साहसिक फैसले नहीं लिए तो वनडे क्रिकेट धीरे-धीरे हाशिए पर चला जाएगा। 50 ओवर का यह पारंपरिक फॉर्मेट कभी क्रिकेट की पहचान हुआ करता था, लेकिन बदलते दौर में इसे बचाने के लिए बड़े और दूरदर्शी बदलाव अब जरूरी हो गए हैं।

  • राहुल गांधी की राम से तुलना पर सियासी बवाल, नाना पाटोले के बयान को संजय निरुपम ने बताया हास्यास्पद

    राहुल गांधी की राम से तुलना पर सियासी बवाल, नाना पाटोले के बयान को संजय निरुपम ने बताया हास्यास्पद

    नई दिल्ली।कांग्रेस नेता नाना पाटोले द्वारा राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से किए जाने पर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। इस बयान पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। गुरुवार को उन्होंने इसे न केवल हास्यास्पद बयान बताया बल्कि कांग्रेस पार्टी के राम के प्रति रुख पर भी गंभीर सवाल खड़े किए।

    संजय निरुपम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास भगवान राम और राम मंदिर के विरोध से जुड़ा रहा है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर कांग्रेस ने हमेशा बाधाएं खड़ी कीं और कई बार भगवान राम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाए। ऐसे में राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से करना पूरी तरह अनुचित और हास्यास्पद है।उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस नेताओं को भगवान राम के नाम का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं करना चाहिए। निरुपम के अनुसार कांग्रेस पार्टी के आचरण और उसके नेताओं की गतिविधियों को देखते हुए उनकी तुलना भगवान राम से नहीं बल्कि रावण से की जानी चाहिए। उन्होंने कहा राम के नाम को बदनाम मत कीजिए। जिन लोगों का आचरण राम के आदर्शों से मेल नहीं खाता वे ऐसी तुलना करने के अधिकारी नहीं हैं।

    दरअसल यह विवाद तब शुरू हुआ जब बुधवार को कांग्रेस नेता नाना पाटोले से राहुल गांधी के राम मंदिर न जाने को लेकर सवाल किया गया। इसके जवाब में पाटोले ने कहा था कि कांग्रेस भगवान राम का काम कर रही है और राहुल गांधी शोषितों पीड़ितों और वंचितों के लिए वही कार्य कर रहे हैं जो भगवान राम ने किया था। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी देशभर में न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं और जब वे अयोध्या जाएंगे तो राम मंदिर में प्रार्थना करेंगे।नाना पाटोले ने यह भी दावा किया कि जब रामलला के मंदिर के ताले बंद थे तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने उन्हें खुलवाने का आदेश दिया था। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया।

    गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नाना पाटोले राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से जोड़कर विवादों में आए हों। इससे पहले अक्टूबर 2022 में भारत जोड़ो यात्रा के दौरान भी उन्होंने राहुल गांधी और भगवान राम के नाम को जोड़ते हुए बयान दिया था जिस पर भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया था।उस समय पाटोले ने सफाई देते हुए कहा था कि कांग्रेस राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से नहीं करती बल्कि यह केवल एक संयोग है कि दोनों के नामआर अक्षर से शुरू होते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि भगवान राम शंकराचार्य और राहुल गांधी की यात्राओं में समानता बताना तुलना नहीं है।

    हालांकि भाजपा नेताओं ने उनके इस तर्क को खारिज करते हुए इसे हिंदू भावनाओं का अपमान बताया था। भाजपा नेता सीआर केशवन ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए नाना पाटोले से सवाल किया था कि राहुल गांधी अब तक अयोध्या राम मंदिर क्यों नहीं गए।अब एक बार फिर इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है और राहुल गांधी कांग्रेस तथा राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर सियासी टकराव तेज हो गया है।

     

  • सरकारी निर्देश के बाद बदली गई ‘धुरंधर’ की डिजिटल कॉपी, 1 जनवरी से थिएटर्स में चलेगा नया वर्जन

    सरकारी निर्देश के बाद बदली गई ‘धुरंधर’ की डिजिटल कॉपी, 1 जनवरी से थिएटर्स में चलेगा नया वर्जन


    नई दिल्ली। फिल्मधुरंधर को लेकर एक अहम अपडेट सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, 31 दिसंबर को देशभर के थिएटर मालिकों को डिस्ट्रीब्यूटर्स की ओर से एक ईमेल भेजा गया, जिसमें बताया गया कि फिल्म की डिजिटल कॉपी DCP को बदल दिया गया है। इस नई कॉपी में फिल्म के कुछ हिस्सों में बदलाव किए गए हैं जिन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश के अनुसार लागू किया गया है।ईमेल में साफ तौर पर थिएटर संचालकों को निर्देश दिए गए कि वे फिल्म की पुरानी डिजिटल कॉपी हटाकर नई DCP डाउनलोड करें। साथ ही यह भी कहा गया कि 1 जनवरी 2026 से केवल बदला हुआ वर्जन ही सिनेमाघरों में चलाया जाए। सूत्रों के अनुसार, नए वर्जन में फिल्म के दो शब्दों को म्यूट किया गया है और एक डायलॉग में आंशिक बदलाव किया गया है।

    इंडिया टुडे को मिली जानकारी के मुताबिक, फिल्म मेंबलोच शब्द को एक या दो जगह म्यूट किया गया है। बताया जा रहा है कि यह फैसला तब लिया गया, जब पिछले हफ्ते बलोच समुदाय के कुछ लोगों ने गुजरात हाई कोर्ट में याचिका दायर कर फिल्म के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म में उनके समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक और नफरत फैलाने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया है।सूत्रों के अनुसार, बलोच समुदाय की आपत्ति खासतौर पर फिल्म के एक डायलॉग को लेकर थी, जिसे अभिनेता संजय दत्त बोलते नजर आते हैं। डायलॉग में समुदाय का जिक्र कथित तौर पर नकारात्मक संदर्भ में किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में इसी डायलॉग को सबूत के तौर पर पेश करते हुए कहा कि यह बयान आपत्तिजनक है और इससे समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचती है।

    इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा और अंततः सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निर्देश पर फिल्म के कंटेंट में यह बदलाव किया गया। हालांकि फिल्म की कहानी, मुख्य प्लॉट या किरदारों में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि सिर्फ विवादित शब्दों और डायलॉग को एडिट किया गया है।गौरतलब है किधुरंधर 5 दिसंबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म में रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर. माधवन मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। वहीं राकेश बेदी, सारा अर्जुन, गौरव गेरा, सौम्या टंडन और दानिश पंडोर ने सपोर्टिंग रोल निभाए हैं।

    फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है और दर्शकों के बीच इसकी जबरदस्त चर्चा रही है। अब कंटेंट में किए गए इन बदलावों के बाद फिल्म नए साल से एक संशोधित वर्जन के साथ सिनेमाघरों में दिखाई जाएगी।इसके अलावा, मेकर्स पहले ही फिल्म के दूसरे पार्ट का ऐलान कर चुके हैं, जो 19 मार्च को रिलीज होने वाला है। ऐसे मेंधुरंधर को लेकर दर्शकों की उत्सुकता आने वाले समय में और बढ़ने की उम्मीद है।

  • बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ती ‘धुरंधर’: अक्षय खन्ना की एंट्री ने बदली फिल्म की किस्मत, कास्टिंग की पूरी कहानी आई सामने

    बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़ती ‘धुरंधर’: अक्षय खन्ना की एंट्री ने बदली फिल्म की किस्मत, कास्टिंग की पूरी कहानी आई सामने


    नई दिल्ली।आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म धुरंधर को रिलीज हुए लगभग एक महीना हो चुका है लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसकी रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही। फिल्म लगातार कमाई के नए रिकॉर्ड बना रही है और दर्शकों की पसंद बनी हुई है। जहां एक ओर फिल्म की कहानी और निर्देशन की तारीफ हो रही है, वहीं दूसरी ओर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है अभिनेता अक्षय खन्ना की, जिनका किरदार रहमान डकैत सोशल मीडिया पर छाया हुआ है।

    फैंस न सिर्फ अक्षय खन्ना की दमदार एक्टिंग की तारीफ कर रहे हैं बल्कि कई लोग इसे उनके करियर के बेहतरीन रोल्स में से एक बता रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिस रोल ने अक्षय को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया, उसके लिए शुरुआत में उन्हें कास्ट करने का कोई प्लान ही नहीं था।फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इस पूरी कहानी से पर्दा उठाया। उन्होंने बताया कि धुरंधर की कास्टिंग आसान नहीं थी और इस फिल्म के लिए उन्हें असाधारण मेहनत करनी पड़ी। मुकेश के मुताबिक फिल्म में दिखाई देने वाला हर एक किरदार बहुत सोच-समझकर चुना गया है, ताकि कहानी में सच्चाई और गहराई बनी रहे।

    मुकेश छाबरा ने बताया कि जब उन्होंने पहली बार फिल्म की स्क्रिप्ट सुनी, तो उन्हें अहसास हुआ कि यह प्रोजेक्ट साधारण नहीं है। आमतौर पर वह किसी फिल्म की कास्टिंग तीन महीने में पूरी कर लेते हैं, लेकिन धुरंधर उनके लिए एक लंबा और चुनौतीपूर्ण सफर साबित हुई। पहले से ही फिल्म में रणवीर सिंह जैसे बड़े स्टार की कास्टिंग हो चुकी थी, ऐसे में बाकी किरदारों के लिए सही कलाकार ढूंढना और भी मुश्किल हो गया।कास्टिंग डायरेक्टर के अनुसार, चाहे वह छोटा रोल हो या बड़ा, हर कलाकार को भाषा, लुक और किरदार की सच्चाई को ध्यान में रखकर चुना गया। अक्षय खन्ना, आर. माधवन, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और अन्य कलाकारों की कास्टिंग इसी सोच का नतीजा है।

    अक्षय खन्ना को लेकर मुकेश छाबरा ने बताया कि उन्हें शुरू से लगता था कि रहमान डकैत के रोल के लिए अक्षय बिल्कुल परफेक्ट हैं। हालांकि जब उन्होंने यह आइडिया निर्देशक आदित्य धर के सामने रखा, तो वह हैरान रह गए। आदित्य को यकीन नहीं हो रहा था और उन्होंने मजाक में कहा कि मुकेश शायद पागल हो गए हैं। लेकिन मुकेश अपने फैसले पर अड़े रहे।इसके बाद उन्होंने खुद अक्षय खन्ना से संपर्क किया। शुरुआत में अक्षय ने भी हैरानी जताई, लेकिन मुकेश ने उन्हें पूरी स्क्रिप्ट सुनने के लिए राजी कर लिया। अक्षय बिना किसी टीम के आदित्य धर के ऑफिस पहुंचे और करीब चार घंटे तक पूरी स्क्रिप्ट ध्यान से सुनी। स्क्रिप्ट खत्म होने के बाद अक्षय का रिएक्शन बेहद पॉजिटिव था और उन्होंने फिल्म को लेकर उत्साह दिखाया।

    हालांकि अंतिम फैसला लेने में अक्षय ने थोड़ा वक्त लिया, लेकिन एक बार स्क्रिप्ट को दोबारा पढ़ने के बाद उन्होंने फिल्म करने के लिए हां कह दी। मुकेश छाबरा के मुताबिक, इसके बाद चीजें बहुत तेजी से आगे बढ़ीं।आज नतीजा सबके सामने है। धुरंधर में अक्षय खन्ना का किरदार दर्शकों को इतना पसंद आया कि वह फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी बन गए हैं। सोशल मीडिया पर सिर्फ उन्हीं की चर्चा है। अब जब फिल्म जबरदस्त सफलता हासिल कर चुकी है, तो दर्शकों को इसके दूसरे पार्ट का बेसब्री से इंतजार है, जो 19 मार्च 2026 को रिलीज होने वाला है।

  • स्टेन स्वामी का मेमोरियल पर दिए बयान पर फ‍िर चर्चा में आए जस्‍ट‍िस स्‍वाम‍िनाथन ?

    स्टेन स्वामी का मेमोरियल पर दिए बयान पर फ‍िर चर्चा में आए जस्‍ट‍िस स्‍वाम‍िनाथन ?

    चैन्‍नई। तमिलनाडु में मंदिर में दीप जलाने के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और केंद्र में विपक्षी पार्टियों के निशाने पर आए जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन ने एक और अहम फैसला सुनाया है। मद्रास हाई कोर्ट में जस्टिस स्वामीनाथन ने 1755 में अंग्रेजों के खिलाफ लड़े नथम कनवाई युद्ध की याद में स्मारक स्तूप बनाने का रास्ता साफ कर दिया है।
    यह फैसला 18वीं सदी में गुलामी के दौर में भारतीयों के प्रतिरोध की एक प्रेरक इतिहास को उदाहरण बनाता है।

    जस्टिस जी. आर. स्वामीनाथन की तरफ से यह फैसला नथम के तहसीलदार द्वारा इस स्मारक को अनुमति न दिए जाने के बाद आया है। तहसीलदार द्वारा अनुमति न मिलने के बाद एक याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में रिट दायर की थी। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वामीनाथन ने इस बात पर चिंता जताई कि आज की पीढ़ी को भारत के औपनिवेशिक शासन का इतिहास पता नहीं है, न ही उन्हें इस गुलामी से मुक्त कराने के लिए लड़ी गई लड़ाइयों के बारे में ही जानकारी है।

    जस्टिस ने कहा, “राज्य में अगर स्टैन स्वामी की याद में पत्थर का स्तंभ लगाया जा सकता है, उसके लिए अनुमति कि आवश्यकता नहीं पड़ी, तो निश्चित रूप से नथन कनवाई युद्ध की स्मृति में स्तूप स्थापित करने किए भी किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।”

    गौरतलब है कि अदालत ने जिन स्टेन स्वामी का जिक्र हुआ है वह जेसुइट पादरी और आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता थे। इनका नाम भीमा कोरेगांव में भड़की हिंसा से भी जोड़ा जाता है, 2021 में इनकी मौत के बाद मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी याद में एक स्मृति स्तंभ बनाने की अनुमति दी थी।
    क्या हुआ था नथम कनवाई युद्ध में?

    इस स्मारक को बनाने के लिए याचिका लेकर आए वकील ने तथ्य रखा कि वर्ष 1755 में नथम कनवाई इलाके में मेलूर कल्लर समुदाय और ब्रिटिश सेना के बीच में एक भीषण युद्ध हुआ था। इस युद्ध में कल्लर समुदाय विजयी रहा था। याचिकाकर्ता के मुताबिक यह युद्ध कोइलकुड़ी के तिरुमोगुर मंदिर की वजह से हुआ था। इस मंदिर से ब्रिटिश सैनिकों ने कर्नल अलेक्जेंडर हेरॉन के नेतृत्व में पीतल की मूर्तियां और अन्य कीमती सामान लूट लिया था। इसके बाद जुटे कल्लर समुदाय ने युद्ध के जरिए इन मूर्तियों को वापस पा लिया।

  • इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…

    इंदौर की घटना पर भड़के ओवैसी? कहा-चले हैं विश्वगुरु बनने, चुल्लू भर पानी में डूब मरें ये लोग…


    हैदराबाद। भाजपा शासित मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले और देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा जीतने वाले इंदौर में दूषित पानी पीने के कारण उल्टी-दस्त के प्रकोप से अब तक 13 मौत का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस आंकड़े पर स्थानीय लोगों, सरकार और अधिकारियों के बीच विरोधाभास बना हुआ है।
    इस बीच, हैदराबाद से सांसद और AIMIM की चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने इस हादसे के लिए भाजपा को न सिर्फ जिम्मेदार ठहराया है बल्कि उसकी नीतियों की भी आलोचना की है। ओवैसी ने दो टूक कहा कि ये लोग आम लोगों के घरों पर बुलडोजर तो चलवा सकते हैं लेकिन उन्हें साफ पानी पीने जैसी मूलभूत सुविधा भी नहीं दे सकते हैं।

    हैदराबाद में पत्रकारों से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, “…उन्हें (बीजेपी) सिर्फ मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन की परवाह है… वे साफ पीने के पानी जैसी ज़रूरी चीज़ें भी नहीं दे सकते और खुद को विश्वगुरु कहते हैं।”

    उन्होंने कहा, “उन्हें सिर्फ बुलडोजर की फिक्र है। किसी मुसलमनान पर इल्जाम लगा तो उसको लाकर पीटते हैं और घर तोड़ देते हैं। इनकी सरकार ऐसी ही है कि देश में इंसानों को बुनियादी सुविधाएं भी मुहैया नहीं करा सकते। हम 2026 में आ गए हैं और ये लोग विश्वगुरू बनने का दावा करते हैं लेकिन साफ पानी भी नहीं दे सकते हैं। लोग गंदा पानी पीकर मर रहे हैं तो इन लोगों (बीजेपी के लोगों) को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।”

    13 लोगों के मरने का दावा
    बता दें कि इंदौर में स्थानीय नागरिकों ने दूषित जल के प्रकोप के दौरान पिछले आठ दिन में छह माह के बच्चे समेत 13 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है, जबकि प्रशासन ने डायरिया से केवल चार लोगों की मौत की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक पहली नजर में लीकेज के कारण पेयजल की पाइपलाइन में ड्रेनेज का गंदा पानी मिलने के कारण भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप फैला। भागीरथपुरा, राज्य के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र ‘इंदौर-1’ में आता है।
    अधिकारियों के मुताबिक चार लोगों की मौत

    विजयवर्गीय ने संवाददाताओं को बताया कि उल्टी-दस्त के प्रकोप से भागीरथपुरा में 1,400 से 1,500 लोग प्रभावित हुए जिनमें से लगभग 200 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं।

    उन्होंने कहा कि इन मरीजों की हालत खतरे से बाहर है और स्वस्थ होने पर लोगों को अस्पताल से लगातार छुट्टी दी जा रही है।विजयवर्गीय ने उल्टी-दस्त के प्रकोप से मरे लोगों के आंकड़े को लेकर जारी विरोधाभास पर कहा,‘‘मुझे प्रशासन के अधिकारियों ने इस प्रकोप से चार लोगों की मौत की जानकारी दी है, पर यहां (भागीरथपुरा में) आठ-नौ लोगों की मौत की सूचना है। हम इस सूचना की तसदीक कर लेंगे और इसके सही पाए जाने पर संबंधित मृतकों के परिवारों के मुख्यमंत्री मोहन यादव की घोषणा के अनुसार सहायता राशि प्रदान की जाएगी।’’
    अतिरिक्त मुख्य सचिव का दौरा

    इस बीच, राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे ने स्थानीय अफसरों के साथ भागीरथपुरा क्षेत्र का दौरा करके हालात का जायजा लिया। अधिकारियों ने बताया कि पेयजल की आपूर्ति की पाइपलाइन के लीकेज को दुरुस्त करने के बाद भागीरथपुरा में बृहस्पतिवार को जलप्रदाय किया गया और घरों से पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए।