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  • साल 2025 की सबसे बड़ी फ्लॉप बॉलीवुड फिल्में: बजट और कमाई में साबित हुई 'निकाल पाईं'

    साल 2025 की सबसे बड़ी फ्लॉप बॉलीवुड फिल्में: बजट और कमाई में साबित हुई 'निकाल पाईं'


    नई दिल्ली। साल 2025 बॉलीवुड के लिए बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। जहां इस साल कई फिल्में ब्लॉकबस्टर हिट रही, वहीं कुछ ऐसी फिल्में भी रिलीज हुईं जिन्हें न केवल बॉक्स ऑफिस पर करारी हार मिली, बल्कि दर्शकों और क्रिटिक्स ने सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना की।इस साल हिट फिल्मों की बात करें तो धुरंधर, छावा, सैयारा और महावतार नरसिम्हा जैसी फिल्मों ने प्रोड्यूसर्स को शानदार मुनाफा दिया। लेकिन वहीं, कुछ बड़ी बजट वाली फिल्में दर्शकों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाईं और इन्हें साल की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्मों में गिना गया।

    बागी 4
    टाइगर श्रॉफ की यह एक्शन फ्रेंचाइजी फिल्म 120 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी, लेकिन वर्ल्डवाइड कमाई केवल 66 करोड़ तक ही पहुंच पाई। क्रिटिक्स ने फिल्म को 1-2 स्टार दिए और दर्शकों ने कहानी और VFX दोनों की आलोचना की। इस फ्रेंचाइजी की यह अब तक की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्म साबित हुई।

    इमरजेंसी
    कंगना रनौत की पॉलिटिकल ड्रामा फिल्म इमरजेंसी भी इस साल की बड़ी फ्लॉप रही। लगभग 50 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने केवल 22 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया। कई लोगों ने इसे कमजोर स्क्रीनप्ले वाली फिल्म बताया, तो कई ने इसे प्रोपेगेंडा फिल्म करार दिया।

    सिकंदर
    सलमान खान की फिल्म सिकंदर ईद पर रिलीज़ हुई, जो आमतौर पर हिट मानी जाती है। लेकिन इस बार यह फिल्म 200 करोड़ के बजट के बावजूद केवल 182 करोड़ की कमाई कर पाई। निर्देशक ए.आर. मुरुगदास ने फिल्म की जिम्मेदारी सलमान पर डाली, जबकि सलमान ने भी शो में इसपर तंज कसा।

    वॉर 2
    ऋतिक रोशन और जूनियर एनटीआर की इस एक्शन फिल्म का बजट 400 करोड़ था, लेकिन वर्ल्डवाइड कमाई केवल 360-370 करोड़ रही। बजट भी पूरी तरह से रिकवर नहीं हो पाया। इस फिल्म को एक्शन और स्टार कास्ट के बावजूद दर्शकों ने पसंद नहीं किया।

    इस साल की इन फ्लॉप फिल्मों ने यह साफ कर दिया कि बड़े बजट और स्टार कास्ट हमेशा बॉक्स ऑफिस हिट की गारंटी नहीं होती। क्रिटिक्स और दर्शकों की राय, कहानी और तकनीकी पहलू किसी फिल्म की सफलता में अहम भूमिका निभाते हैं।इस साल की फ्लॉप फिल्मों की लिस्ट बताती है कि दर्शक अब कहानी, स्क्रीनप्ले और नए विषयों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। जबकि हिट फिल्में अपने कंटेंट और मार्केटिंग के दम पर सफल हुईं, फ्लॉप फिल्मों ने प्रोड्यूसर्स और निर्माताओं को सतर्क किया है।

  • रतलाम में फर्जी पहचान से महिला को झूठे प्रेम जाल में फंसाने का मामला, पुलिस जांच जारी

    रतलाम में फर्जी पहचान से महिला को झूठे प्रेम जाल में फंसाने का मामला, पुलिस जांच जारी


    रतलाम। मध्य प्रदेश के रतलाम में एक सनसनीखेज मामला सामने आया हैजिसमें एक व्यक्ति ने अपनी असली पहचान छुपाकर एक शादीशुदा महिला को प्रेम जाल में फंसाया और उसकी जिंदगी को प्रभावित किया। पुलिस ने महिला की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी जैसी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

    पीड़िता के अनुसारआरोपी ने खुद को अलग नाम से पेश किया और शादी का झांसा देकर करीब पांच साल तक महिला के साथ लगातार शारीरिक उत्पीड़न किया। घटना की शुरुआत 2020 में हुईजब महिला की मुलाकात रतलाम के राम मंदिर क्षेत्र में आरोपी से हुई। उस समय आरोपी ने खुद को सोनू बताकर महिला को भरोसा दिलाया कि वह भी उसी धर्म का है। महिला की मौजूदा शादी थीलेकिन आरोपी ने धीरे-धीरे उसके विश्वास को तोड़ा और उसे अपने प्रेम जाल में फंसाया।2023 में आरोपी ने महिला को अपने संपर्क में लिया और उसे अपने पति से तलाक लेने के लिए उकसाया। महिला ने उसकी बातों में आकर जुलाई 2023 में अपना घर छोड़ दिया और अपने पिता के पास रहने लगी। कुछ ही समय बाददोनों नयागांव में किराए के कमरे में रहने लगे और पति-पत्नी की तरह व्यवहार करने लगे। इस दौरान आरोपी ने लगातार महिला का शारीरिक उत्पीड़न किया।

    कुछ समय बाद महिला को पता चला कि जिसे वह सोनू समझ रही थीअसल में उसका नाम इमरान था। इसके बावजूद महिला ने शादी की उम्मीद में उसका साथ रखा। नवंबर 2024 में महिला का पति से आधिकारिक तलाक हो गयालेकिन आरोपी ने शादी करने से इनकार कर दिया। दिसंबर 2025 में जब महिला ने शादी का दबाव डालातो आरोपी ने उस पर हिंसा की और जान से मारने की धमकी दी।पीड़िता ने आखिरकार पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि आरोपी ने उसे कई जगहों पर पत्नी के रूप में पेश किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जांच में पता चला कि आरोपी पहले ड्रग तस्करी के मामले में जेल जा चुका है। पुलिस अब उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है।

    इस मामले ने महिलाओं की सुरक्षा और समाज में जागरूकता पर भी सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले हमें चेतावनी देते हैं कि व्यक्तिगत पहचान की पुष्टि और भरोसेमंद रिश्तों में सावधानी बहुत जरूरी है। पुलिस और कानून व्यवस्था लगातार ऐसे अपराधों पर नज़र रखती हैंलेकिन पीड़ितों की सुरक्षा और कानूनी मदद सुनिश्चित करना सबसे अहम है।इस घटना ने रतलाम और मध्य प्रदेश में लोगों को व्यक्तिगत सुरक्षारिश्तों में सतर्कता और धोखाधड़ी से बचाव के महत्व के प्रति जागरूक किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी जल्द ही पकड़ा जाएगा और कानून के तहत सजा भुगतने के लिए तैयार होगा।

  • भारत में इस साल कूनो में 12 चीता शावक पैदा हुए, 3 की मौत

    भारत में इस साल कूनो में 12 चीता शावक पैदा हुए, 3 की मौत

    भोपाल। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क (KNP) में चीतों के पुनर्वास से जुड़ा महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट साल 2025 में तेजी से आगे बढ़ा। इस साल पार्क में 12 शावकों का जन्म हुआ। हालांकि दुख की बात ये है कि इनमें से तीन शावक अलग-अलग कारणों से जीवित नहीं रह सके। इसके बावजूद भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 30 हो गई है।

    इस साल कुल 6 चीतों की हुई मौत

    देश में चीतों के बारे में यह जानकारी प्रोजेक्ट चीता के फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने दी।उन्होंने बताया कि साल 2025 में कुल छह चीतों की मौत हुई, जिनमें तीन शावक शामिल हैं। इसके अलावा नामीबिया से लाए गए एक वयस्क चीते और दो उप-वयस्क चीतों की भी मौत दर्ज की गई। इस साल तीन मादा चीतों ने इन 12 शावकों को जन्म दिया था। अधिकारियों के अनुसार, शावकों की मौत के पीछे अलग-अलग प्राकृतिक और स्वास्थ्य संबंधी कारण रहे।
    7 दशक पहले भारत से विलुप्त हो चुका है चीता

    आपको जानकर हैरानी होगी कि चीता करीब सात दशक पहले भारत से विलुप्त हो चुका था। इसे दोबारा देश में बसाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत की। इसके तहत सितंबर 2022 में नामीबिया से आठ चीतों को भारत लाया गया, जबकि फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया था।
    चीतों को जल्द मिलेगा तीसरा ठिकाना

    फिलहाल भारत में कुल 30 चीतों में से 27 कूनो नेशनल पार्क में मौजूद हैं, जबकि तीन चीतों को मंदसौर जिले के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में ट्रांसफर किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, अब चीतों को भारत में तीसरा ठिकाना भी मिलने वाला है। मध्य प्रदेश के सागर जिले स्थित नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य को चीतों के नए घर के तौर पर तैयार किया जा रहा है।

    अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल भारत में मौजूद 30 चीतों में से 19 का जन्म भारत में ही हुआ है, जो इस परियोजना की बड़ी सफलता मानी जा रही है। बीते तीन वर्षों में देश ने 20 चीतों के आयात के बाद अपनी कुल चीता आबादी में 10 की शुद्ध बढ़ोतरी दर्ज की है।
    8 और चीतों को भारत लाने की तैयारी

    अधिकारियों के अनुसार, बोत्सवाना से आठ और चीतों को भारत लाने की तैयारी चल रही है। ये चीते वहां पहले ही पकड़े जा चुके हैं और फरवरी तक कूनो नेशनल पार्क पहुंच सकते हैं। प्रोजेक्ट चीता को भारत में वन्यजीव संरक्षण के इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

  • 'सूअर के मल से उगा मक्का खा रहे बांग्लादेशी'

    'सूअर के मल से उगा मक्का खा रहे बांग्लादेशी'


    ढाका । अमेरिका से बांग्लादेश में मक्का (कॉर्न) के आयात ने सोशल मीडिया पर एक अनोखा विवाद खड़ा कर दिया है। अमेरिकी दूतावास की एक पोस्ट के बाद लोग व्यंग्य कर रहे हैं कि यह मक्का ‘सूअर के मल की अच्छाई’ से भरपूर है, क्योंकि अमेरिका में मक्का की खेती में सूअर के मल (पिग मैन्योर) को आमतौर पर खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। बांग्लादेश एक मुस्लिम-बहुल देश है, जहां इस्लामी शरीअत के तहत सूअर और उससे जुड़े उत्पाद हराम (निषिद्ध) माने जाते हैं। ऐसे में पिग मैन्योर के उपयोग का मुद्दा धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं से जुड़ गया।

    क्या था अमेरिकी दूतावास का पोस्ट?
    अमेरिकी दूतावास ने अपने पोस्ट में लिखा था कि इस महीने अमेरिकी मकई बांग्लादेश पहुंचने वाली है। पोस्ट में मकई को पौष्टिक बताते हुए कहा गया कि इसका उपयोग कॉर्नब्रेड, ब्रेकफास्ट सीरियल्स जैसे खाद्य पदार्थों के साथ-साथ पशुओं के चारे में भी होता है, जिससे मांस, डेयरी और अंडों की आपूर्ति सुनिश्चित होती है। हालांकि, पोस्ट में सीधे तौर पर सूअर के मल का जिक्र नहीं था, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स ने अमेरिकी खेती पद्धतियों का हवाला देते हुए इस बिंदु को उछाल दिया।

    पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर टिप्पणियों की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने व्यंग्यात्मक और आलोचनात्मक लहजे में प्रतिक्रियाएं दीं। एक पत्रकार ने कटाक्ष करते हुए लिखा- डॉन (ट्रंप) की चापलूसी के बदले बांग्लादेश को सूअर के मल से उगा अमेरिकी मकई मिला। अन्य यूजर ने इसे सांस्कृतिक असंवेदनशीलता बताते हुए कहा कि यह बांग्लादेश जैसे देश के लिए अपमानजनक है। अब तक अमेरिकी दूतावास की ओर से इस आलोचना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
    पहले भी उठ चुका है ‘पॉर्क’ का मुद्दा

    यह पहली बार नहीं है जब बांग्लादेश में पोर्क से जुड़ा विवाद सामने आया हो। कुछ साल पहले मछली और पशु आहार के लिए आयात किए जा रहे मीट एंड बोन मील (MBM) में पोर्क (सूअर के मांस) के अंश पाए गए थे। इसके बाद बांग्लादेश सरकार ने MBM के आयात और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था।
    अमेरिकी मकई और पिग मैन्योर

    मकई की अधिक पैदावार के लिए भारी मात्रा में उर्वरक की आवश्यकता होती है और अमेरिका में सुअर के मल का उपयोग आम है। इस साल अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर मकई उत्पादन हुआ है, जिसके चलते वह बांग्लादेश और भारत जैसे बाजारों में निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अधिक उत्पादन के कारण अमेरिकी किसान सड़कों के किनारे मकई फेंकने को मजबूर हुए।
    भारत की हिचक और व्यापार वार्ता

    भारत ने अमेरिकी दबाव के बावजूद बड़े पैमाने पर अमेरिकी मकई और सोयाबीन आयात से परहेज किया है। भारत का तर्क है कि इससे छोटे किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। हालांकि, रायटर्स के अनुसार, भारत एथेनॉल उत्पादन के लिए सीमित मात्रा में आयात की अनुमति दे सकता है। माना जा रहा है कि इसी मुद्दे पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत अटकी हुई है।
    अमेरिका-बांग्लादेश व्यापार तनाव

    बांग्लादेश का अमेरिका के साथ लगभग 6 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव भी देखने को मिला।

    इस वर्ष अमेरिका ने बांग्लादेश पर 37% टैरिफ लगाया था, जिससे उसके कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट निर्यात को बड़ा झटका लगा। बांग्लादेश के कुल निर्यात में कपड़ा क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 80% है।

    बाद में बांग्लादेश के अंतरिम प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर अमेरिका से आयात बढ़ाने का वादा किया, जिसके बाद टैरिफ घटाकर 20% कर दिया गया। इस वादे में अमेरिकी गेहूं, मकई और सोयाबीन शामिल थे। हाल ही में बांग्लादेश सरकार ने सरकार-से-सरकार समझौते के तहत करीब 2.20 लाख मीट्रिक टन अमेरिकी गेहूं खरीदने की मंजूरी भी दी है।
    बांग्लादेश के लिए धार्मिक और स्वास्थ्य पहलू

    बांग्लादेश में 90% से अधिक आबादी मुस्लिम है, जहां सूअर का मांस खाना इस्लामी नियमों के खिलाफ है। हालांकि, मक्का में खाद के रूप में सूअर के गोबर का उपयोग वैज्ञानिक रूप से सामान्य है और इसमें कोई सूअर का मांस अवशेष नहीं रहता। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा सांस्कृतिक और धार्मिक भावनाओं से जुड़कर वायरल हो गया।

  • चार बच्चों को बाइक पर कहां लो गया सचिन, वीडियो वायरल, सीमा हैदर ने पूछा….

    चार बच्चों को बाइक पर कहां लो गया सचिन, वीडियो वायरल, सीमा हैदर ने पूछा….

    नोयडा। पाकिस्तान से भारत आए सीमा हैदर को कई साल हो गए, लेकिन अब भी समय-समय पर सुर्खियों में बनी रहती हैं। उसके पति सचिन और सीमा, दोनों ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक्टिव हैं और फैंस के लिए वीडियोज, रील्स बनाते रहते हैं। हाल ही में सीमा हैदर ने एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें सचिन अपने चार बच्चों को बाइक पर बैठाए हुए नजर आ रहा है। वह सीमा और अपने चार बच्चों को बाइक पर बैठाता है फिर उसे स्टार्ट करके बच्चों की यूनिफॉर्म लेने के लिए निकल पड़ता है।

    वीडियो डालकर सीमा ने पूछा है कि आखिर सचिन चार बच्चों को लेकर कहां जा रहा है। वीडियो में सचिन चार बच्चों के बाइक पर दिखाई दे रहा है। एक बच्चा आगे बैठा है, जबकि तीन सचिन के पीछे बैठे हुए हैं। वहीं , पीछे मुड़कर सचिन सीमा और बाकियों से बाय-बाय भी कहता है। सचिन चारों बच्चों को बाइक पर बैठाकर स्कूल की ड्रेस दिलाने ले जा रहा है।

    वीडियो में सचिन कहता है, ”दोस्तों आज बच्चों को यूनिफॉर्म दिलाने के लिए जा रहे हैं, क्योंकि बच्चे पहले गए थे ट्यूशन, जिसकी वजह लेट हो गए। बच्चों को क्या दिलाकर लाते हैं, यह बच्चे ही बोलेंगे। इस पर बच्चे कहते हैं कि यूनिफॉर्म। इतना कहकर सचिन बाइक स्टार्ट करके बच्चों को यूनिफॉर्म दिलाने निकल पड़ता है।

    इंस्टाग्राम पर सचिन और बच्चों का यह वीडियो काफी वायरल हो रहा है। सीमा हैदर ने लिखा है कि सारे बच्चे लेकर सचिन कहां जा रहा है। लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं। मालूम हो कि सीमा हैदर इस समय प्रेग्नेंट हैं और जल्द ही छठे बच्चे की मां बनने वाली हैं। पिछले दिनों सीमा डॉक्टर के यहां से चेकअप भी करवाने गई थीं।

    कुछ साल पहले पब्जी गेम खेलते हुए सचिन मीणा और सीमा हैदर को प्यार हो गया था। सीमा पाकिस्तान में रहती थी, लेकिन सचिन के प्यार में उसने अपने पति को छोड़ दिया और नेपाल के रास्ते भारत चली आई। नेपाल में दोनों ने शादी भी की। सचिन सीमा के साथ ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा गांव में रहता है। यहां सीमा हैदर ने एक और बच्चे को जन्म दिया, जिसके बाद कुल पांच बच्चे हैं। चार बच्चे वह पाकिस्तान से लाई। अब फिर से सीमा हैदर प्रेग्नेंट है, जिसके बाद माना जा रहा है कि जल्द ही सचिन और सीमा के परिवार में खुशखबरी आ सकती है।

  • हाफिज सईद के साथी ने भी माना, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिया गहरा जख्म

    हाफिज सईद के साथी ने भी माना, ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दिया गहरा जख्म

    इस्‍लामाबाद । जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने बीते मई महीने में ऑपरेशन सिंदूर के जरिए आतंकियों को करारा सबक सिखाया। भारत ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान भारत ने ना सिर्फ उनके ठिकानों को समतल कर दिया, बल्कि सौ से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। आतंकी इस ऑपरेशन की मार से अब तक उबर नहीं पाए हैं। हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के टॉप लीडर और हाफिज सईद के करीबी ने माना है कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकियों को कितना गहरा जख्म दिया।

    पहलगाम आतंकी हमले के मास्टरमाइंड सैफुल्लाह कसूरी ने ऑपरेशन सिंदूर से मिले दर्द को खुद कबूला है। तिलमिलाए कसूरी ने इस दौरान भारत के खिलाफ जमकर जहर भी उगला है। कसूरी ने कहा है कि भारत ने आतंकी कैंपों को निशाना बनाकर गलती की है। वहीं उसने ऐलान किया है कि लश्कर “कश्मीर मिशन से कभी पीछे नहीं हटेगा।”

    इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक सैफुल्लाह कसूरी ने हजारों लोगों की भीड़ के सामने एक सार्वजनिक सभा में कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाकर बहुत बड़ी गलती की।” उसने आगे कहा, “…जो पाबंदियां लगाते हैं, जो रुकावट पैदा करते हैं, वो सुनो, जो हमें आतंकवादी कहते हैं, सुनो। पूरी दुनिया को पलटा जा सकता है, सिस्टम बदला जा सकता है। हम अपने कश्मीर मिशन से कभी पीछे नहीं हटेंगे।”

    गौरतलब है कि बीते 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों को बेरहमी से मार दिया था। इस दौरान आतंकियों ने लोगों से उनका धर्म पूछकर गोलियां बरसाई थीं। इसके बाद भारत ने पाक और पाक अधिकृत कश्मीर में ऑपरेशन सिंदूर के तहत कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। भारतीय सशस्त्र बलों ने इस कार्रवाई के दौरान करीब 150 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया।

  • सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव, बीच में आया पाकिस्तान?

    सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव, बीच में आया पाकिस्तान?


    इस्लामाबाद । यमन में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के संबंधों में आई दरार ने पूरे मध्य पूर्व को हिला दिया है। सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हवाई हमले किए, जिसमें यूएई से आई हथियारों की खेप को निशाना बनाया गया। रियाद का आरोप है कि ये हथियार यूएई समर्थित अलगाववादी संगठन सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (एसटीसी) के लिए थे, जो सऊदी की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। इस बीच पाकिस्तान भी खुलकर सामने आ गया है।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत कर यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर मुकल्ला पर हालिया सऊदी हवाई हमले के बाद सऊदी अरब के प्रति पूर्ण एकजुटता व्यक्त की। यह जानकारी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में दी गई।

    बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और कूटनीति पर जोर दिया। बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से चले आ रहे भाईचारे वाले संबंधों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में कहा गया कि हाल के महीनों में द्विपक्षीय रिश्ते नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं।

    प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने फोन कॉल के लिए शहबाज़ शरीफ का आभार जताया और पाकिस्तान के साथ आपसी हित के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की सऊदी अरब की इच्छा दोहराई। उन्होंने अगले वर्ष पाकिस्तान की आधिकारिक यात्रा करने का भी इरादा व्यक्त किया।

    यमन में बढ़ता तनाव

    गौरतलब है कि सऊदी अरब ने मंगलवार को मुकल्ला पर हवाई हमला किया था। यह हमला संयुक्त अरब अमीरात से कथित रूप से हथियारों की एक खेप के पहुंचने के बाद किया गया, जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह यमन के अलगाववादी बलों के लिए थी। यह घटनाक्रम यूएई समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल की प्रगति से जुड़े बढ़ते तनाव के बीच सामने आया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस टकराव से यमन के एक दशक से जारी संघर्ष में एक नया मोर्चा खुलने की आशंका पैदा हो गई है, जहां ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने वाली ताकतें आपस में भी भिड़ सकती हैं। यमन पहले ही अरब दुनिया का सबसे गरीब देश माना जाता है और वहां मानवीय संकट बेहद गंभीर है।
    पाकिस्तान के लिए कठिन कूटनीतिक चुनौती

    पाकिस्तान के लिए यह स्थिति कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि उसके संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब- दोनों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। इस सप्ताह रियाद और अबू धाबी के बीच बढ़े तनाव ने इस्लामाबाद के सामने कठिन संतुलन बनाने की चुनौती खड़ी कर दी है।

    इसी क्रम में शहबाज शरीफ ने क्राउन प्रिंस से बात करने से एक दिन पहले यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नाहयान से मुलाकात की थी। यह बैठक पंजाब के रहीम यार ख़ान में हुई, जहां यूएई राष्ट्रपति इस्लामाबाद की आधिकारिक यात्रा के बाद ठहरे हुए थे। अधिकारियों के अनुसार, इस मुलाकात का मकसद क्षेत्रीय तनाव को कम करना था।
    रक्षा, निवेश और तेल आपूर्ति

    गौरतलब है कि इस्लामाबाद और रियाद ने सितंबर में एक आपसी रक्षा समझौता किया था, जिसके तहत किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। सऊदी अरब लंबे समय से पाकिस्तान का प्रमुख आर्थिक और सुरक्षा साझेदार रहा है। हाल के वर्षों में उसने पाकिस्तान को अरबों डॉलर के ऋण दिए हैं, जिससे देश को विदेशी कर्ज के संकट और संभावित डिफॉल्ट से बचाने में मदद मिली। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात ने भी पाकिस्तान को वित्तीय सहायता दी है। वर्ष 2024 में पाकिस्तान ने कहा था कि यूएई ने देश में 10 अरब डॉलर तक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।
    विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

    इस बीच, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी बुधवार को एक बयान जारी कर यमन में दोबारा भड़की हिंसा पर चिंता जताई। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि यमन के किसी भी पक्ष द्वारा उठाए गए एकतरफा कदम संघर्ष को और भड़का सकते हैं तथा पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर सकते हैं। बयान में पाकिस्तान ने सऊदी अरब की सुरक्षा, यमन की एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति समर्थन दोहराया और संकट को कम करने तथा देश में शांति व स्थिरता बहाल करने के लिए किए जा रहे क्षेत्रीय प्रयासों का स्वागत किया। तेल आपूर्ति के लिहाज से भी सऊदी अरब पाकिस्तान का एक प्रमुख साझेदार है। ऊर्जा जरूरतों के साथ-साथ आर्थिक सहयोग के चलते रियाद और इस्लामाबाद के रिश्ते रणनीतिक रूप से बेहद अहम बने हुए हैं।

  • ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन

    ऑस्ट्रेलिया के बाद फ्रांस में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टा-यूट्यूब होगा बैन


    नई दिल्‍ली। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।

    ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह दुनिया का पहला देश है जिसने ऐसा कदम उठाया। अब खबर है कि फ्रांस भी इसी तरह का कानून लाने की तैयारी कर रहा है। न्यूज एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस सरकार ने एक मसौदा कानून तैयार किया है। इस मसौदे के तहत, बच्चों को अत्यधिक स्क्रीन टाइम से बचाने के लिए नया प्रयास किया जाएगा और सितंबर 2026 तक 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पहुंच पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है।
    बताया जा रहा है कि इस पहल को राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि संसद को जनवरी में इस प्रस्ताव पर बहस शुरू कर देनी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया ने इस महीने विश्व में पहली बार 16 साल से कम उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू किया है।

    फ्रांसीसी मसौदे में कहा गया है कि कई अध्ययन और रिपोर्टें अब किशोरों द्वारा डिजिटल स्क्रीन के अत्यधिक उपयोग से होने वाले विभिन्न जोखिमों की पुष्टि करती हैं। सरकार ने कहा कि जिन बच्चों को ऑनलाइन सेवाओं तक बेरोकटोक पहुंच मिली हुई है, वे ‘अनुचित सामग्री’ के संपर्क में आ रहे हैं, साइबर उत्पीड़न का शिकार हो सकते हैं या उनकी नींद के पैटर्न में बदलाव आ सकता है।

    रिपोर्ट के अनुसार, इस मसौदा कानून में दो मुख्य अनुच्छेद हैं। पहला अनुच्छेद 15 वर्ष से कम आयु के नाबालिग को ऑनलाइन सोशल मीडिया सेवा प्रदान करने को गैरकानूनी बनाता है। दूसरा अनुच्छेद माध्यमिक विद्यालयों में मोबाइल फोन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान करता है।

  • नास्त्रेदमस ने कौन-कौन सी की हैं भविष्यवाणियां, साल 2026 डराने वाला होगा !

    नास्त्रेदमस ने कौन-कौन सी की हैं भविष्यवाणियां, साल 2026 डराने वाला होगा !


    नई दिल्‍ली। नया साल 2026 दस्तक दे चुका है। साल 2025 खत्म हो गया और नया साल आ चुका है । हर साल की तरह इस बार भी अगले साल की भविष्यवाणियों को लेकर काफी हलचल है। नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां काफी सटीक रही हैं और लोग उन्हें जानना चाहते हैं। अगले साल 2026 के लिए नास्त्रेदमस ने कई डराने व हैरान करने वाली भविष्यवाणियां की हैं। इसमें युद्ध, बिजली गिरने से महान व्यक्ति की मौत समेत अन्य बातें शामिल हैं।

    सात महीने बड़ा युद्ध
    नास्त्रेदमस ने अगले साल के लिए जो भविष्यवाणी की है, उसमें सात महीने तक चलने वाले युद्ध की भी आशंका जताई है। इसकी वजह से बड़ी संख्या में लोगों की मौत होगी। इस भविष्यवाणी को यूरोप और उसके बाहर चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव से जोड़ा जा रहा है। हालांकि मूल टेक्स्ट में आधुनिक दुनिया या किसी खास टाइमलाइन का कोई सीधा जिक्र नहीं है।
    पर्यावरण और सामाजिक उथल-पुथल

    नास्त्रेदमस ने अगले साल के लिए पर्यावरण और सामाजिक उथल-पुथल का भी जिक्र किया है। दावा किया जा रहा है कि भीषण सूखा और मौसम की अन्य चरम घटनाएं हो सकती हैं। हालांकि, भाषा सामान्य है, लेकिन 21वीं सदी के व्याख्याकारों ने इसे 2026 और उसके बाद पर्यावरण में बढ़ती अस्थिरता के लिए एक संभावित चेतावनी के रूप में फिर से पेश किया है।
    तकनीकी और सांस्कृतिक बदलाव

    संघर्ष और जलवायु के अलावा, कुछ आधुनिक व्याख्याएं नास्त्रेदमस की अस्पष्ट पंक्तियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उदय और सामाजिक विखंडन से जोड़ने की भी कोशिश करती हैं। हालांकि, ये कनेक्शन पाठ्य के बजाय रचनात्मक हैं।
    ‘बिजली गिरने से मारा जाएगा महान आदमी’

    ब्रिटेन की इंटरनेशनल बिजनेस टाइम्स के अनुसार, नास्त्रेदमस ने एक डराने वाली भविष्यवाणी की है, उसमें आसमान से अचानक बिजली के हमले में एक महान व्यक्ति के मारे जाने को लेकर है। सेंचुरी I के 26वें छंद में कहा गया है कि ‘एक महान आदमी दिन में बिजली गिरने से मारा जाएगा’। आज के समय में यह महान आदमी दुनिया का बड़ा नेता या ग्लोबल सेलिब्रिटी तक कोई भी हो सकता है।

  • 5 राज्यों के चुनावों की तैयारी.. इसी माह BJP अध्यक्ष पद संभाल सकतें हैं नितिन नबीन

    5 राज्यों के चुनावों की तैयारी.. इसी माह BJP अध्यक्ष पद संभाल सकतें हैं नितिन नबीन


    नई दिल्ली।
    भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) के कार्यकारी अध्यक्ष (Working President) नितिन नवीन (Nitin Naveen) जनवरी के मध्य में अध्यक्ष पद संभाल सकते हैं। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। फिलहाल, यह जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा (Jagat Prakash Nadda) संभाल रहे हैं। वह साल 2020 से अध्यक्ष पद पर हैं। खास बात है कि नवीन को भाजपा की कप्तानी ऐसे समय पर मिल रही है, जब पार्टी पश्चिम बंगाल (West Bengal) समेत कई राज्यों में विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही है।

    एक रिपोर्ट में भाजपा सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव की जरूरत पूरी हो गई हैं। ऐसे में नवीन का मध्य जनवरी तक पार्टी के शीर्ष पद पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। वह इस पद पर 2029 लोकसभा चुनाव तक रहेंगे। भाजपा के एक नेता ने कहा, ‘हमने 18 लाख पोलिंग बूथों में से 17 लाख से ज्यादा पर देश की 1050 जिलों में से 950 से ज्यादा में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 30 में पार्टी के संविधान के अनुसार संगठन चुनाव करा लिए हैं। आगे की प्रक्रिया भी पूरी तरह की जाएगी।’

    उन्होंने कहा, ‘चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में करीब 3 से 4 दिन लगने की संभावनाएं हैं। इसके बाद राष्ट्रीय परिषद की तरफ से इसे मंजूरी दी जाएगी।’ पार्टी के अन्य सूत्र ने अखबार को बताया, ‘चूंकि इस प्रक्रिया की घोषणा मकर संक्रांति के आसपास हो सकती है, तो ऐसे में 20 जनवरी तक नए अध्यक्ष के ऐलान के आसार हैं।’

    चुनाव कर रहे हैं इंतजार
    वर्ष 2025 के अंत में बिहार के विधायक नितिन नवीन को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया जाना पार्टी में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत माना जा रहा है। उनके ऊपर साल 2026 में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी होगी। माना जा रहा है कि बंगाल चुनाव सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।