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  • भोपाल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर छात्रों ने दवा सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया, क्विज से जागरूकता रैली तक हुए आयोजन

    भोपाल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर छात्रों ने दवा सुरक्षा और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया, क्विज से जागरूकता रैली तक हुए आयोजन

    मध्य प्रदेश, 28 सितंबर। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विश्व फार्मासिस्ट दिवस 2026 के अवसर पर फार्मेसी विद्यार्थियों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सुरक्षित और जिम्मेदार दवा उपयोग का संदेश दिया। भोपाल स्थित एक विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता की।

    कार्यक्रम का आयोजन शारदा सभागार में किया गया। इस वर्ष विश्व फार्मासिस्ट दिवस की थीम “Empowering Pharmacists for Healthier Futures” रखी गई। आयोजन का मुख्य उद्देश्य दवाओं के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल, मरीजों को उचित परामर्श, दवा सुरक्षा तथा जनस्वास्थ्य जागरूकता में फार्मासिस्ट की भूमिका को सामने लाना रहा।

    कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने फार्मासिस्टों की भूमिका को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दवाओं के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने में फार्मासिस्टों की अहम भूमिका होती है।उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावहारिक अनुभव और आवश्यक कौशल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी जताई। उनका कहना था कि इन क्षमताओं के जरिए विद्यार्थी जिम्मेदार स्वास्थ्य पेशेवर बनकर समाज के विकास में योगदान दे सकते हैं।

    विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय सिंह ने कहा कि विश्व फार्मासिस्ट दिवस स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याण में फार्मासिस्टों के योगदान को पहचानने का अवसर देता है। उन्होंने शैक्षणिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को विद्यार्थियों के व्यावसायिक ज्ञान, संवाद कौशल, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी को विकसित करने वाला माध्यम बताया। कुलसचिव डॉ. साईटेश कुमार सिन्हा ने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी को फार्मेसी के प्रति उनके उत्साह, रचनात्मकता और प्रतिबद्धता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि फार्मेसी जागरूकता रैली जैसी गतिविधियों से विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक ज्ञान को समाज के प्रति जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का अवसर मिलता है।

    इस अवसर पर स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज की प्राचार्य डॉ. खुशी चौकसे ने विद्यार्थियों को अपने व्यावसायिक ज्ञान और संवाद कौशल को लगातार मजबूत करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने मरीजों और समाज के प्रति फार्मेसी पेशेवरों की जिम्मेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।विश्व फार्मासिस्ट दिवस के तहत विद्यार्थियों के लिए फार्मेसी क्विज, रंगोली प्रतियोगिता, फार्मेसी डांस एक्ट और फार्मेसी अवेयरनेस रैली का आयोजन किया गया। इन गतिविधियों में विद्यार्थियों ने अपनी ज्ञान क्षमता, रचनात्मकता, टीमवर्क और पेशेवर भावना का प्रदर्शन किया।

    जागरूकता रैली के जरिए लोगों को दवाओं के तर्कसंगत और जिम्मेदार उपयोग का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों की गतिविधियों का उद्देश्य फार्मेसी शिक्षा को जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए दवा इस्तेमाल के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा।कार्यक्रम में डीन एकेडमिक्स डॉ. वी. के. गुप्ता, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ. विनोद कुमार शर्मा, स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज की प्राचार्य डॉ. खुशी चौकसे सहित शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।

    कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की। साथ ही उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।आयोजन का संचालन स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज के शिक्षकों और विद्यार्थियों के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ जागरूकता और रचनात्मक कार्यक्रमों को जोड़कर फार्मासिस्टों की सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी भूमिका को रेखांकित किया गया।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, भोपाल से दिल्ली और पटना तक बढ़ा विरोध

    CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, भोपाल से दिल्ली और पटना तक बढ़ा विरोध

    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस और विपक्षी कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन सोमवार को कई राज्यों में देखने को मिला। मध्य प्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, झारखंड और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर उनके इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस ने बैरिकेडिंग कर भीड़ को रोकने की कोशिश की, जबकि पटना में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

    विरोध प्रदर्शन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोप रहे। विपक्षी दलों का कहना है कि निर्वाचन आयोग में महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर असहमति सामने आई है और मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग राज्यों में विरोध दर्ज कराया।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने बड़ी संख्या में बल तैनात किया और कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड के ऊपर से कूदकर आगे बढ़ने का प्रयास करते दिखाई दिए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

    मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर देश में चिंता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़कों पर उतर रही है। उन्होंने युवाओं, किसानों और नागरिकों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान की रक्षा के लिए राहुल गांधी के साथ खड़ी है।

    बिहार की राजधानी पटना में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। यहां वामपंथी दलों के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराया।

    पटना में बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के मेडिकल छात्रों का प्रदर्शन भी जारी था। छात्र अपनी अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान शहर में अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के कारण पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था संभालनी पड़ी।

    नई दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया और इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी।

    हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध जताया।

    इस तरह अलग-अलग राज्यों में हुए प्रदर्शनों के जरिए कांग्रेस और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से उठाया। वहीं, पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को संवेदनशील स्थानों तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए।

  • उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच शाही मस्जिद का हिस्सा हटाया जा रहा, कलेक्टर और शहर काजी ने अफवाहों से बचने की अपील की

    उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारी के बीच शाही मस्जिद का हिस्सा हटाया जा रहा, कलेक्टर और शहर काजी ने अफवाहों से बचने की अपील की

    मध्य प्रदेश 28 सितंबर। मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद का एक हिस्सा समुदाय द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है। उज्जैन प्रशासन के अनुसार, सिंहस्थ की व्यवस्थाओं के लिए मास्टर प्लान के तहत मार्गों के चौड़ीकरण का काम चल रहा है और इसमें सभी समुदायों की भागीदारी सामने आ रही है।

    सिंहस्थ-2028 के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए शहर में विभिन्न विकास और निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, इन कार्यों के तहत ऐसे मकान और धर्मस्थल जो प्रस्तावित मार्गों के बीच आ रहे हैं, उन्हें संबंधित लोग स्वयं हटाने के लिए आगे आ रहे हैं।

    इसी क्रम में छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद के एक हिस्से को भी समुदाय द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है। इस संबंध में उज्जैन कलेक्टर रोशन सिंह ने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है और बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। मास्टर प्लान के अनुसार मार्गों का चौड़ीकरण किया जा रहा है और इसमें अलग-अलग धर्म एवं समुदाय के लोग अपना सहयोग दे रहे हैं।

    कलेक्टर के अनुसार, जिन लोगों के मकान या धर्मस्थल विकास कार्यों के बीच आ रहे हैं, वे स्वयं आगे आकर उन्हें हटाने में सहयोग कर रहे हैं। इसी प्रक्रिया के तहत छत्री चौक पर शाही मस्जिद का हिस्सा भी समुदाय द्वारा स्वत: हटाया जा रहा है।

    प्रशासन ने इस मामले को लेकर लोगों से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी तरह की अफवाहों से बचना जरूरी है, ताकि विकास कार्यों के बीच शहर में किसी प्रकार की अनावश्यक स्थिति उत्पन्न न हो।

    उज्जैन शहर काजी खली कुर्रे रहमान ने भी लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मस्जिद से जुड़ा मामला रात में ही आपसी सहमति से सुलझ गया था। उनके अनुसार, ऐसी कोई स्थिति नहीं है जिसके कारण किसी व्यक्ति को मौके पर जाने की आवश्यकता हो।

    शहर काजी ने कहा कि जिस कार्य को पूरा करने का संकल्प लिया गया है, उसे पूरा किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों के कारण घर से बाहर निकलकर अनावश्यक रूप से मौके पर न जाएं।

    सिंहस्थ-2028 को लेकर उज्जैन में सड़क, मार्ग और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं से जुड़े काम लगातार आगे बढ़ाए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि इन विकास कार्यों में लोगों का सहयोग महत्वपूर्ण है। छत्री चौक पर शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने की प्रक्रिया भी इसी क्रम में बताई गई है।

    मामले को लेकर प्रशासन और शहर काजी दोनों ने लोगों से संयम बनाए रखने और किसी भी अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करने की अपील की है। साथ ही लोगों से कहा गया है कि वे अनावश्यक रूप से मौके पर पहुंचने के बजाय शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

  • भारत के IPO बाजार में तेजी, 3.86 लाख करोड़ रुपये की पाइपलाइन से कंपनियों के बढ़ते पूंजी जुटाने के रुझान का संकेत

    भारत के IPO बाजार में तेजी, 3.86 लाख करोड़ रुपये की पाइपलाइन से कंपनियों के बढ़ते पूंजी जुटाने के रुझान का संकेत

    नई दिल्ली, 28 सितंबर। भारत का प्राइमरी मार्केट अब कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने के एक नियमित और महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में मजबूत होता जा रहा है। देश में मेनबोर्ड आईपीओ की पाइपलाइन करीब 3.86 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह राशि 2026 में अब तक 84 मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए जुटाए गए 1.10 लाख करोड़ रुपये की तुलना में करीब साढ़े तीन गुना अधिक है।

    इस पाइपलाइन में करीब 130 कंपनियां ऐसी हैं जिन्हें बाजार नियामक से मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा लगभग 75 कंपनियों ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी डीआरएचपी दाखिल किया है और वे नियामकीय मंजूरी की प्रतीक्षा कर रही हैं।

    इतनी बड़ी पाइपलाइन से संकेत मिलता है कि कंपनियां सार्वजनिक बाजारों के माध्यम से पूंजी जुटाने में लगातार रुचि दिखा रही हैं। इससे भारतीय प्राइमरी मार्केट के आकार, गहराई और भविष्य में पूंजी उपलब्ध कराने की क्षमता का भी पता चलता है।

    संस्थागत निवेशकों, उच्च निवल मूल्य वाले निवेशकों और खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी ने भी इस बाजार के विस्तार में भूमिका निभाई है। इससे प्राइमरी मार्केट का इस्तेमाल केवल तत्काल फंड जुटाने के बजाय लंबे समय के पूंजी निर्माण के माध्यम के रूप में बढ़ रहा है।

    आंकड़ों के अनुसार, 2016 से 2026 के बीच मेनबोर्ड आईपीओ के जरिए कंपनियों ने कुल 8.36 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं। वर्ष 2016 में यह राशि 26,494 करोड़ रुपये थी, जो 2025 में बढ़कर 1.76 लाख करोड़ रुपये हो गई।

    मेनबोर्ड आईपीओ की संख्या में भी इसी अवधि में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। वर्ष 2016 में देश में 26 मेनबोर्ड आईपीओ आए थे। 2025 में इनकी संख्या बढ़कर 103 हो गई, जबकि 2026 में अब तक 84 मेनबोर्ड आईपीओ बाजार में आ चुके हैं।

    भारतीय पूंजी बाजार में घरेलू निवेश की भूमिका भी लगातार बढ़ी है। बाजार की मजबूती अब केवल विदेशी पूंजी पर निर्भर नहीं है। म्यूचुअल फंड उद्योग के विस्तार के साथ सार्वजनिक इक्विटी, निजी पूंजी और ऋण बाजार के बीच भी बेहतर जुड़ाव विकसित हुआ है।

    आगे की दिशा में यह महत्वपूर्ण होगा कि सार्वजनिक बाजार से जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल कारोबारी विस्तार, नई उत्पादन क्षमता, बुनियादी ढांचे और अन्य दीर्घकालिक उत्पादक निवेश में किस तरह किया जाता है।

    SME IPO बाजार में भी गतिविधियां तेज हुई हैं। वर्ष 2025 में 267 SME आईपीओ आए, जो उस वर्ष का सबसे बड़ा वार्षिक आंकड़ा रहा। वहीं 2026 में अब तक 156 SME इश्यू बाजार में आ चुके हैं।

    2016 से 2026 के बीच SME कंपनियों ने आईपीओ के माध्यम से कुल 39,849 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इसी अवधि में औसत SME इश्यू का आकार भी बढ़ा है। वर्ष 2016 में यह करीब 8 करोड़ रुपये था, जो 2026 में बढ़कर 45 करोड़ रुपये हो गया।

    पब्लिक मार्केट गतिविधियों में बढ़ोतरी का असर निवेश बैंकिंग क्षेत्र पर भी दिखाई दिया है। सितंबर 2016 में देश में 188 मर्चेंट बैंकर पंजीकृत थे। सितंबर 2026 तक यह संख्या बढ़कर 250 हो गई, जो करीब 33 प्रतिशत की वृद्धि है।

    भारतीय प्राइमरी मार्केट के अगले चरण में केवल आईपीओ की संख्या बढ़ना ही महत्वपूर्ण नहीं होगा। सूचीबद्ध होने वाली कंपनियों की गुणवत्ता, संस्थागत निवेशकों की भागीदारी, बेहतर खुलासे, पूंजी का व्यापक वितरण और कारोबार के अलग-अलग चरणों में कंपनियों को समर्थन देने की क्षमता भी बाजार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, शुरुआती कारोबार में चांदी 2.34 प्रतिशत और सोना 1.80 प्रतिशत तक टूटा

    सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, शुरुआती कारोबार में चांदी 2.34 प्रतिशत और सोना 1.80 प्रतिशत तक टूटा

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार, 28 सितंबर को गिरावट देखने को मिली। घरेलू वायदा बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान दोनों कीमती धातुओं के भाव में कमजोरी दर्ज की गई। कारोबार के शुरुआती दौर में सोना करीब 1.80 प्रतिशत और चांदी 2.34 प्रतिशत तक टूट गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट रही।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर 2026 का वायदा कॉन्ट्रैक्ट पिछले कारोबारी सत्र में 1,50,881 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 1,50,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। इसके बाद कीमत में और गिरावट दर्ज की गई।

    सुबह 9:50 बजे सोने का वायदा भाव 2,721 रुपये यानी 1.80 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,48,160 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था। कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने 1,47,667 रुपये प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर छुआ। वहीं, इसका उच्चतम स्तर 1,50,100 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया।

    सोने की तरह चांदी के भाव में भी गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर चांदी का 4 दिसंबर 2026 का वायदा कॉन्ट्रैक्ट पिछले कारोबारी सत्र में 2,34,696 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को यह 2,32,300 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला।

    सुबह 9:50 बजे चांदी 5,490 रुपये यानी 2.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,29,206 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी। कारोबार के दौरान चांदी का न्यूनतम भाव 2,28,035 रुपये प्रति किलोग्राम और उच्चतम भाव 2,32,300 रुपये प्रति किलोग्राम रहा।

    घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 2.09 प्रतिशत गिरकर 4,230 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। वहीं, चांदी की कीमत 3.67 प्रतिशत की गिरावट के साथ 62.43 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

    बाजार के जानकारों के मुताबिक, कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट के पीछे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका और डॉलर इंडेक्स में लगातार तेजी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। डॉलर इंडेक्स बढ़कर 100.83 पर पहुंच गया है। डॉलर में मजबूती का असर सोने और चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भी देखने को मिल रहा है।

    डॉलर इंडेक्स के जरिए दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को मापा जाता है। इसमें यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कनाडाई डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक शामिल हैं। इन मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती या कमजोरी को दर्शाने वाला यह सूचकांक वैश्विक बाजार में डॉलर की स्थिति का संकेत देता है।

    सोमवार के शुरुआती कारोबार में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में सोने तथा चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, दिए गए कारोबारी आंकड़े सुबह 9:50 बजे तक के हैं और पूरे दिन के अंतिम भाव इनमें शामिल नहीं हैं।

  • उज्जैन शाही मस्जिद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई, केवल तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर आश्वासनों के पालन की मांग

    उज्जैन शाही मस्जिद मामले में इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई, केवल तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर आश्वासनों के पालन की मांग

    मध्य प्रदेश: के उज्जैन में सिंहस्थ मेले की तैयारियों के तहत मास्टर प्लान के अनुसार सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी योजना के तहत सड़क की सीमा में बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने की कार्रवाई नगर निगम की ओर से की जा रही है। शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने का मामला भी इसी कार्रवाई से जुड़ा है। इस मामले में दायर रिट अपील पर सोमवार को इंदौर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई।

    मस्जिद के निर्माण से जुड़े विवाद में पहले 9 सितंबर को एक याचिका दायर की गई थी। मास्टर प्लान की सड़क का हवाला देते हुए उस याचिका को खारिज कर दिया गया था। इसके बाद एडवोकेट अशहर वारसी की ओर से अदालत के फैसले के खिलाफ रिट अपील दायर की गई। सोमवार को इसी अपील पर सुनवाई के दौरान मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने और नगर निगम की ओर से पहले दिए गए आश्वासनों के पालन का मुद्दा उठाया गया।

    सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि शाही मस्जिद का केवल तीन फीट हिस्सा ही हटाया जाए। बताया गया कि इस सीमित हिस्से को हटाने को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी थी। अपीलकर्ता की ओर से मांग रखी गई कि मस्जिद के बाकी हिस्से के संबंध में पहले हुई बातचीत और दिए गए आश्वासनों को ध्यान में रखा जाए।

    इसके साथ ही नगर निगम की ओर से पूर्व में दिए गए टीडीआर और एफएआर से संबंधित आश्वासनों का पूरी तरह पालन कराने की मांग भी अदालत के सामने रखी गई। अपीलकर्ता ने अदालत से इन आश्वासनों के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आदेश देने का अनुरोध किया। सुनवाई के दौरान मामला मुख्य रूप से मस्जिद के कितने हिस्से को हटाया जाना है और नगर निगम के पूर्व आश्वासनों का पालन किस तरह सुनिश्चित होगा, इन मुद्दों पर केंद्रित रहा।

    इसी सुनवाई के दौरान नई कमिटी की ओर से भी एक अलग याचिका दायर की गई थी। हालांकि, प्रशासन के साथ बातचीत होने के बाद कमिटी ने अपनी याचिका वापस ले ली। इस तरह नई कमिटी की ओर से दायर याचिका पर आगे कार्यवाही नहीं की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, याचिका वापस लेने का फैसला प्रशासन के साथ हुई बातचीत के बाद लिया गया।

    उज्जैन में सिंहस्थ मेले को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान की सड़क चौड़ीकरण योजना पर काम जारी है। इस योजना के तहत सड़क के विस्तार में बाधा बन रहे निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जा रही है। शाही मस्जिद का मामला भी इसी प्रक्रिया के दौरान सामने आया है और अब इससे संबंधित विवाद हाईकोर्ट में पहुंच चुका है।

    इससे पहले इसी मास्टर प्लान के तहत सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पैतृक घर का बाधक हिस्सा भी हटाया गया था। यह कार्रवाई रविवार को हुई थी। शाही मस्जिद मामले में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता ने तीन फीट हिस्सा हटाने और टीडीआर-एफएआर से जुड़े आश्वासनों के पालन की मांग रखी। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया अदालत में जारी है।

  • भोपाल में बिजली के पोल से करंट लगने पर भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की मौत, महिला भी झुलसी

    भोपाल में बिजली के पोल से करंट लगने पर भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की मौत, महिला भी झुलसी

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के एमपी नगर इलाके में रविवार रात बिजली के पोल में करंट उतरने से भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की मौत हो गई। हादसा रात करीब 9 बजे हुआ। दिव्यऋषि इलाके में शॉपिंग करने पहुंचे थे। सड़क पार करने के दौरान यह दुर्घटना हुई, जिसमें एक महिला भी करंट की चपेट में आ गई।

    प्रत्यक्षदर्शी हेड कॉन्स्टेबल जगदीश दांगी के मुताबिक, दिव्यऋषि सड़क के दूसरी तरफ जाने के लिए डिवाइडर पर चढ़े थे। सड़क पार करते समय उन्होंने सहारा लेने के लिए किनारे लगे बिजली के पोल को एक हाथ से पकड़ लिया। इसी दौरान पोल में करंट होने के कारण उन्हें जोरदार बिजली का झटका लगा।

    बताया गया कि दिव्यऋषि दूसरे हाथ से दीवार पकड़ने की कोशिश कर रहे थे, तभी यह हादसा हुआ। बिजली का झटका लगते ही वह मौके पर गिर पड़े। इसी दौरान वहां मौजूद एक महिला भी करंट की चपेट में आ गई। घटना के बाद आसपास मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों ने दोनों को संभालने और मदद पहुंचाने की कोशिश की।

    हादसे के समय मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने दिव्यऋषि को बचाने के लिए तत्काल प्रयास शुरू किए। उन्हें सीपीआर दिया गया, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

    घटना के बाद एमपी नगर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने दिव्यऋषि की मौत के संबंध में मर्ग कायम किया है। हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए बिजली के पोल, उससे जुड़े बिजली कनेक्शन और आसपास चल रहे निर्माण कार्य की स्थिति की जांच की जा रही है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, संबंधित पोल मेट्रो प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के दौरान लगाया गया था। पोल के पास बिजली का तार खुला होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पोल में करंट किस वजह से पहुंचा और वहां बिजली के तार खुले होने की स्थिति क्यों बनी हुई थी।

    जांच में यह भी देखा जा रहा है कि निर्माण कार्य के दौरान लगाए गए पोल और उससे जुड़े बिजली के कनेक्शन की स्थिति क्या थी। फिलहाल पुलिस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। दुर्घटना में घायल महिला की स्थिति के बारे में उपलब्ध जानकारी में कोई विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

    इस घटना में भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की जान चली गई। सड़क पार करने के लिए पोल का सहारा लेने के दौरान हुए इस हादसे ने बिजली के पोल में करंट आने और खुले तारों से जुड़े सुरक्षा संबंधी सवाल खड़े किए हैं। पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि दुर्घटना के लिए किन परिस्थितियों की भूमिका रही।

  • TRAI के नए रिचार्ज नियमों पर Jio, Airtel और Vi की अलग-अलग दलीलें, सस्ते वॉइस प्लान को लेकर जताई ये चिंताएं

    TRAI के नए रिचार्ज नियमों पर Jio, Airtel और Vi की अलग-अलग दलीलें, सस्ते वॉइस प्लान को लेकर जताई ये चिंताएं


    नई दिल्ली ।
    महंगे मोबाइल रिचार्ज से राहत देने के उद्देश्य से भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने टेलीकॉम कंज्यूमर प्रोटेक्शन रेगुलेशन 2026 जारी किया है। नए नियमों के तहत टेलीकॉम कंपनियों को बिना डेटा वाले कॉलिंग और SMS प्लान उपलब्ध कराने होंगे। इसके साथ ही 28 दिन के बजाय 30 दिन की वैलिडिटी वाले रिचार्ज भी पेश करने होंगे।

    इन नियमों का फायदा खास तौर पर उन ग्राहकों को मिलने की उम्मीद है जिन्हें मोबाइल इंटरनेट की जरूरत नहीं होती या जो अतिरिक्त सिम को केवल चालू रखने के लिए रिचार्ज करते हैं। हालांकि, टेलीकॉम कंपनियां इस व्यवस्था को लेकर पहले से अपनी चिंताएं जाहिर करती रही हैं।

    रिलायंस जियो ने स्टैंडअलोन वॉइस प्लान को लेकर तर्क दिया है कि कम कीमत और कम वैलिडिटी वाले ऐसे प्लान साइबर जालसाजों और स्पैम कॉल करने वालों के लिए प्रवेश की बाधा कम कर सकते हैं। कंपनी का कहना है कि इससे अनचाही व्यावसायिक कॉल और धोखाधड़ी वाले कॉल में बढ़ोतरी का खतरा हो सकता है।

    जियो ने यह भी कहा है कि उसका नेटवर्क मुख्य रूप से आधुनिक 4G और 5G तकनीक पर आधारित है। कंपनी के मुताबिक ऐसे नेटवर्क में केवल वॉइस सेवाओं वाले प्लान तकनीकी और व्यावसायिक रूप से अलग तरह की चुनौती पेश करते हैं। जियो का दावा है कि उसके करीब 80 प्रतिशत एंट्री-लेवल ग्राहक डेटा सेवाओं का भी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कंपनी के अनुसार केवल वॉइस वाले प्लान की मांग सीमित रह सकती है।

    वोडाफोन आइडिया यानी Vi ने अपनी चिंता को अलग तरीके से सामने रखा है। कंपनी का कहना है कि यदि किसी प्लान में डेटा पूरी तरह हटा दिया जाता है, तो स्मार्टफोन में चलने वाले बैकग्राउंड अपडेट, ऐप सिंक और नोटिफिकेशन जैसी गतिविधियां उपभोक्ता के लिए अतिरिक्त शुल्क का कारण बन सकती हैं। कंपनी ने इसे ‘बिल शॉक’ की स्थिति से जोड़ा है।

    Vi के मुताबिक, पे-एज-यू-गो व्यवस्था में ऐसे ग्राहक जिनको मोबाइल डेटा की तकनीकी जानकारी कम है, अनजाने में डेटा इस्तेमाल कर सकते हैं और बाद में उन्हें अपेक्षा से ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।

    एयरटेल ने इन प्लान को लेकर डिजिटल सेवाओं के विस्तार से जुड़ी चिंता जताई है। कंपनी के अनुसार भारत का डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा अब मोबाइल और इंटरनेट पर काफी हद तक निर्भर है। इसमें आधार आधारित सेवाएं, UPI और कई सरकारी कल्याणकारी सेवाएं शामिल हैं। एयरटेल का तर्क है कि केवल वॉइस प्लान को बढ़ावा मिलने से कुछ ग्राहक इंटरनेट आधारित सेवाओं से दूर हो सकते हैं।

    दूसरी ओर, इन दलीलों को लेकर यह सवाल भी उठाया गया है कि जिन ग्राहकों को इंटरनेट की जरूरत नहीं है, उनके लिए डेटा के बिना सस्ता रिचार्ज उपलब्ध कराने में क्या समस्या है। फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए बैकग्राउंड डेटा की समस्या भी नहीं होती। वहीं स्मार्टफोन में मोबाइल डेटा बंद करने का विकल्प पहले से मौजूद है।

    ऐसे प्लान उन ग्राहकों के लिए उपयोगी हो सकते हैं जिनके पास मुख्य सिम पर पहले से डेटा उपलब्ध है और दूसरी सिम को केवल कॉलिंग या सक्रिय रखने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। कंपनियों की ओर से दिए गए तर्कों के बीच यह भी चर्चा है कि सस्ते स्टैंडअलोन वॉइस प्लान से औसत प्रति ग्राहक राजस्व पर असर पड़ सकता है।

    TRAI के नए नियमों के बाद टेलीकॉम कंपनियों को ग्राहकों के लिए स्टैंडअलोन वॉइस और SMS वाउचर तथा 30 दिन की वैलिडिटी वाले विकल्प उपलब्ध कराने होंगे। इससे मोबाइल रिचार्ज में ग्राहकों के लिए डेटा के बिना अपनी जरूरत के मुताबिक प्लान चुनने का विकल्प बढ़ेगा।

  • भारत में जल्द बनेगी अंतरिक्ष कमान, तीनों सेनाओं की होगी संयुक्त व्यवस्था; थल सेना संभालेगी नेतृत्व

    भारत में जल्द बनेगी अंतरिक्ष कमान, तीनों सेनाओं की होगी संयुक्त व्यवस्था; थल सेना संभालेगी नेतृत्व


    नई दिल्ली । युद्ध के बदलते स्वरूप और अंतरिक्ष के बढ़ते रणनीतिक महत्व को देखते हुए भारत जल्द ही अंतरिक्ष कमान के गठन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित अंतरिक्ष कमान तीनों सेनाओं की संयुक्त कमान होगी और इसका नेतृत्व थल सेना के पास रहेगा। इस व्यवस्था को देश की रक्षा तैयारियों में महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

    अंतरिक्ष कमान के गठन को लेकर थल सेना, वायुसेना और नौसेना के बीच विमर्श की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अब जल्द ही अंतरिम अंतरिक्ष कमान के गठन की घोषणा की जा सकती है। इसके कामकाज और संरचना की समीक्षा के बाद आवश्यक बदलाव किए जाएंगे और आगे चलकर इसे स्थायी स्वरूप दिया जा सकता है।

    प्रस्तावित कमान के साथ बेंगलुरु स्थित रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी यानी डीएसए को भी जोड़ा जाएगा। कमान की जिम्मेदारी सेना के पास रहने की योजना है। इसके नेतृत्व के लिए लेफ्टिनेंट जनरल स्तर के अधिकारी को नियुक्त किया जा सकता है। इसके अलावा मेजर जनरल स्तर के पांच अधिकारी इसमें शामिल होंगे।

    संयुक्त व्यवस्था में वायुसेना और नौसेना की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। प्रस्तावित ढांचे में वायुसेना के मेजर जनरल के समकक्ष स्तर के तीन और नौसेना के दो अधिकारी शामिल किए जाने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष से जुड़े सैन्य संसाधनों और अभियानों में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।

    दुनिया के कई देश पहले ही अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी सैन्य क्षमताओं को संगठित कर चुके हैं। अमेरिका के पास अंतरिक्ष कमान के साथ अलग स्पेस फोर्स भी मौजूद है। चीन, रूस, फ्रांस, जर्मनी, जापान, इटली, ऑस्ट्रेलिया और ईरान समेत कई देशों ने भी अंतरिक्ष से जुड़े सैन्य ढांचे तैयार किए हैं। ब्रिटेन भी इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की प्रस्तावित कमान का एक प्रमुख उद्देश्य उपग्रहों के जरिए रियल टाइम निगरानी को मजबूत करना होगा। इसके माध्यम से पड़ोसी या संभावित दुश्मन देशों के इलाकों में होने वाली गतिविधियों और सीमाओं पर चल रही सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।

    इस कमान की भूमिका केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहेगी। सुरक्षित नौवहन और संचार व्यवस्था उपलब्ध कराने में भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा। युद्ध जैसी परिस्थितियों में सैन्य अभियानों के लिए आवश्यक सामग्री और संसाधनों की आवाजाही में भी अंतरिक्ष आधारित तकनीक से सहयोग मिलने की उम्मीद है।

    प्रस्तावित अंतरिक्ष कमान का एक अन्य महत्वपूर्ण कार्य दूसरे देशों के उपग्रहों से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखना होगा। आधुनिक युद्ध में उपग्रह संचार, निगरानी और खुफिया जानकारी का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। ऐसे में दुश्मन की अंतरिक्ष आधारित क्षमताओं पर निगरानी रक्षा रणनीति का अहम हिस्सा हो सकती है।

    इसके अलावा इस कमान को अंतरिक्ष आधारित सैन्य प्रणालियों और तकनीकों के जरिए दुश्मन के उपग्रहों, मिसाइल प्रणालियों और ड्रोन से जुड़ी क्षमताओं को निष्क्रिय करने की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। दुश्मन के खुफिया सिग्नल से जुड़ी गतिविधियों पर निगरानी और कार्रवाई भी इसके दायरे में आने की योजना है।

    फिलहाल इनसे जुड़े कई कार्य तीनों सेनाओं की अलग-अलग इकाइयों के स्तर पर किए जाते हैं। अंतरिक्ष कमान के गठन के बाद ऐसी क्षमताओं और संबंधित इकाइयों को एकीकृत ढांचे के तहत लाने की दिशा में काम किया जाएगा। इससे अंतरिक्ष आधारित सैन्य अभियानों में संयुक्त संचालन और समन्वय को एक नया ढांचा मिलने की संभावना है।

  • असम जाने की तैयारी में थे अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका की रिहाई के बाद दौरा रद्द; मुंबई में जेल भरो आंदोलन की चेतावनी

    असम जाने की तैयारी में थे अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका की रिहाई के बाद दौरा रद्द; मुंबई में जेल भरो आंदोलन की चेतावनी

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संस्थापक आशुतोष रांका और उनके साथियों की असम पुलिस हिरासत से रिहाई के बाद अभिजीत दीपके ने असम का अपना प्रस्तावित दौरा रद्द कर दिया है। दीपके ने पहले घोषणा की थी कि अगर रांका को रिहा नहीं किया गया तो वह सोमवार सुबह असम पहुंचेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें एयरपोर्ट से ही गिरफ्तार किया जा सकता है।

    रांका और उनके साथियों को रविवार को गुवाहाटी में पुलिस ने हिरासत में लिया था। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई की जानकारी सामने आने के बाद दीपके ने कहा कि वह असल में अगले दिन पुलिस थाने में उनके साथ प्रदर्शन में शामिल होने के लिए असम आने वाले थे।

    आशुतोष रांका ने रिहाई के बाद बताया कि पुलिस हिरासत का सिलसिला खत्म हो गया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह सोमवार को उसी स्थान से प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, जहां से पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर गई थी। दीपके की असम आने और प्रदर्शन में शामिल होने की बात पर रांका ने उन्हें जवाब देते हुए ‘सॉरी शक्तिमान’ भी कहा।

    रांका असम में स्कूलों की स्थिति से जुड़े मुद्दे को उठाने के लिए पहुंचे थे। उनका कहना था कि वह राज्य के स्कूलों की स्थिति लोगों के सामने लाना चाहते हैं। इसी दौरान उन्हें और उनके साथ आए 40 से अधिक कार्यकर्ताओं को एक बैठक से पहले हिरासत में लिया गया था।

    यह कार्रवाई गुवाहाटी के चौधरी टीला इलाके में विपक्षी दल असम जातीय परिषद के नेता कुंकी चौधरी के आवास पर होने वाली बैठक से पहले हुई। हिरासत में लिए गए लोगों को असम पुलिस की 10वीं बटालियन के मुख्यालय ले जाया गया था। बाद में सभी को रिहा कर दिया गया।

    रांका ने इस कार्रवाई पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को लेकर कई आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था कि वे अपने बच्चों के लिए बेहतर स्कूल और युवाओं के लिए रोजगार की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

    इसी बीच मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी को एक और झटका लगा। पार्टी की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन मुंबई पुलिस ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया।

    प्रदर्शन के लिए 26 सितंबर को आवेदन दिया गया था। पुलिस की ओर से जारी पत्र में कहा गया कि मौजूदा हाईकोर्ट आदेशों और महाराष्ट्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत शिवाजी पार्क में सार्वजनिक सभा की अनुमति देने का अधिकार पुलिस विभाग के पास नहीं है।

    इसके बाद अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी कि अगर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई तो गांधी जयंती के दिन यानी 2 अक्टूबर को मुंबई में जेल भरो आंदोलन किया जाएगा। इस तरह असम में रांका की हिरासत और रिहाई के बाद जहां दीपके का प्रस्तावित दौरा टल गया, वहीं मुंबई में उनका अगला आंदोलन चर्चा में आ गया है।