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  • सावन 2026 में चमकेगी इन 5 राशियों की किस्मत, भोलेनाथ की कृपा से मिलेंगे सफलता और धन के योग

    सावन 2026 में चमकेगी इन 5 राशियों की किस्मत, भोलेनाथ की कृपा से मिलेंगे सफलता और धन के योग


    नई दिल्ली। भगवान शिव को समर्पित सावन का पवित्र महीना आध्यात्मिक ऊर्जा और शुभ संयोगों से भरपूर माना जाता है। इस वर्ष सावन 2026 केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान कई प्रमुख ग्रह अपनी विशेष स्थिति में रहेंगे जिनका प्रभाव सभी बारह राशियों पर पड़ेगा। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार शनि की वक्री चाल देवगुरु बृहस्पति का शुभ प्रभाव और बुध के उदय जैसे योग कुछ राशियों के लिए विशेष लाभ लेकर आए हैं। माना जा रहा है कि इस पूरे सावन में पांच राशियों के जातकों पर भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा बनी रहेगी और उनके जीवन में सुख समृद्धि तथा सफलता के नए द्वार खुल सकते हैं।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह सावन नई शुरुआत का संकेत दे रहा है। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना बनेगी। नौकरी करने वाले लोगों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और कार्यक्षेत्र में उनकी नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी। व्यवसाय करने वालों को भी नए अवसर मिल सकते हैं जिससे आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हो सकती है। भगवान शिव की आराधना करने से आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में भी वृद्धि होने के संकेत हैं।

    कर्क राशि के लोगों के लिए यह महीना राहत और प्रगति दोनों लेकर आ सकता है। यदि पिछले कुछ समय से आर्थिक या पारिवारिक परेशानियां चल रही थीं तो उनमें सुधार के योग बन रहे हैं। व्यापार से जुड़े लोगों को विस्तार के नए अवसर मिल सकते हैं और परिवार में सुख शांति का वातावरण बना रहेगा। धन संबंधी मामलों में सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना भी दिखाई दे रही है।

    सिंह राशि के जातकों के लिए सावन आत्मविश्वास और उपलब्धियों का महीना साबित हो सकता है। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। यदि कोई नया प्रोजेक्ट या व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रहे हैं तो समय अनुकूल माना जा रहा है। मेहनत का उचित फल मिलने से सम्मान और प्रतिष्ठा में भी वृद्धि हो सकती है।

    धनु राशि वालों के लिए यह महीना भाग्य के नए द्वार खोलने वाला माना जा रहा है। अचानक धन लाभ के अवसर बन सकते हैं और लंबे समय से रुके हुए आर्थिक कार्य पूरे हो सकते हैं। नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को अच्छी सफलता मिलने के संकेत हैं। परिवार में कोई शुभ समाचार मिलने से खुशी का माहौल रहेगा और मानसिक संतोष भी प्राप्त होगा।

    मीन राशि के जातकों के लिए भी सावन शुभ परिणाम देने वाला माना गया है। व्यापार में नए साझेदार मिलने से लाभ के अवसर बढ़ सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ पारिवारिक जीवन में प्रेम और सामंजस्य बना रहेगा। यदि किसी नए निवेश या विस्तार की योजना है तो सोच समझकर आगे बढ़ने पर अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। भगवान शिव की पूजा और नियमित जलाभिषेक करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा अर्चना रुद्राभिषेक महामृत्युंजय मंत्र का जाप और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। हालांकि ज्योतिषीय भविष्यवाणियां सामान्य मान्यताओं पर आधारित होती हैं और इन्हें निश्चित परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। जीवन में सफलता के लिए कर्म पर विश्वास और सकारात्मक सोच सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि श्रद्धा और विश्वास के साथ महादेव की आराधना की जाए तो सावन का यह पावन महीना आध्यात्मिक और मानसिक रूप से भी जीवन में नई ऊर्जा भर सकता है।

  • फुटबॉल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय हुआ खत्म, फ्रेंको बारेसी के निधन पर दुनिया भर में शोक

    फुटबॉल इतिहास का स्वर्णिम अध्याय हुआ खत्म, फ्रेंको बारेसी के निधन पर दुनिया भर में शोक


    नई दिल्ली। विश्व फुटबॉल के इतिहास में जब भी महान डिफेंडरों का नाम लिया जाएगा तब फ्रेंको बारेसी का नाम हमेशा सबसे सम्मान के साथ लिया जाएगा। इटली के पूर्व कप्तान और एसी मिलान की पहचान बन चुके फ्रेंको बारेसी का 66 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों खिलाड़ियों और खेल विशेषज्ञों में शोक की लहर दौड़ गई। एसी मिलान ने आधिकारिक बयान जारी कर अपने सबसे महान खिलाड़ियों में शामिल बारेसी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी और कहा कि क्लब ने सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि अपनी आत्मा को खो दिया है।

    फ्रेंको बारेसी का पूरा करियर समर्पण अनुशासन और वफादारी का प्रतीक रहा। ऐसे दौर में जब खिलाड़ी बेहतर अनुबंध और बड़ी रकम के लिए क्लब बदलते रहते हैं तब बारेसी ने अपने पूरे पेशेवर करियर में केवल एसी मिलान की जर्सी पहनी। उन्होंने 1974 में क्लब की युवा अकादमी से सफर शुरू किया और 1978 में सीनियर टीम में पदार्पण किया। इसके बाद लगभग दो दशकों तक उन्होंने एसी मिलान की रक्षा पंक्ति को मजबूती प्रदान की और क्लब को कई ऐतिहासिक सफलताएं दिलाईं।

    महज 22 वर्ष की उम्र में उन्हें टीम का कप्तान बना दिया गया था। कप्तान के रूप में उन्होंने अपने नेतृत्व कौशल से पूरी टीम को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। एसी मिलान के लिए उन्होंने 719 मुकाबले खेले जो लंबे समय तक क्लब का रिकॉर्ड रहा। उनके सम्मान में क्लब ने उनकी प्रतिष्ठित नंबर 6 जर्सी को हमेशा के लिए रिटायर कर दिया जो किसी भी खिलाड़ी के लिए सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है।

    फ्रेंको बारेसी ने डिफेंडर की भूमिका को नई पहचान दी। उनकी बेहतरीन पोजिशनिंग खेल को पढ़ने की क्षमता और शांत स्वभाव उन्हें दुनिया के बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता था। पाओलो माल्डिनी माउरो टैसोटी और एलेसांद्रो कोस्टाकुर्ता के साथ उन्होंने ऐसी रक्षापंक्ति बनाई जिसे फुटबॉल इतिहास की सबसे मजबूत डिफेंस लाइन में गिना जाता है। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत एसी मिलान ने छह सीरी ए खिताब और तीन यूरोपीय कप जीतकर यूरोपीय फुटबॉल में अपना दबदबा कायम किया।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनका योगदान बेहद यादगार रहा। वे 1982 में विश्व कप जीतने वाली इटली की टीम का हिस्सा थे। बाद में उन्होंने राष्ट्रीय टीम की कप्तानी भी संभाली और 1994 फीफा विश्व कप में इटली को फाइनल तक पहुंचाया। हालांकि ब्राजील के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में हार के कारण उनका दूसरा विश्व कप जीतने का सपना अधूरा रह गया लेकिन उनके प्रदर्शन की आज भी मिसाल दी जाती है।

    पिछले वर्ष उनके फेफड़े में गांठ मिलने के बाद सर्जरी हुई थी लेकिन इसके बावजूद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी नहीं बनाई। वे लगातार एसी मिलान के मुकाबलों में दिखाई देते रहे और खेल से जुड़े आयोजनों में सक्रिय भागीदारी निभाते रहे। हाल ही में आयोजित विंटर ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में भी उन्होंने मशाल लेकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी।

    फ्रेंको बारेसी सिर्फ एक महान फुटबॉलर नहीं बल्कि अनुशासन समर्पण और खेल भावना की जीवंत मिसाल थे। उन्होंने यह साबित किया कि महान खिलाड़ी केवल ट्रॉफियों से नहीं बल्कि अपने चरित्र और मूल्यों से भी पहचाने जाते हैं। उनका जाना फुटबॉल जगत के लिए अपूरणीय क्षति है लेकिन उनकी उपलब्धियां और प्रेरणादायक विरासत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेंगी।

  • जंग का असर: इंडिगो बंद करेगी वाइड-बॉडी उड़ानें, 25 अक्टूबर से बड़ा बदलाव

    जंग का असर: इंडिगो बंद करेगी वाइड-बॉडी उड़ानें, 25 अक्टूबर से बड़ा बदलाव


    नई दिल्ली। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती परिचालन लागत के बीच देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन इंडिगो ने अपने वाइड-बॉडी विमान संचालन को बंद करने का फैसला किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि 25 अक्टूबर 2026 से वाइड-बॉडी ऑपरेशन समाप्त कर दिए जाएंगे। इसी के साथ नॉर्स अटलांटिक एयरवेज के साथ किया गया डैम्प लीज समझौता भी उसी महीने खत्म हो जाएगा।

    इंडिगो ने बताया कि फिलहाल मुंबई-एम्स्टर्डम मार्ग पर डैम्प लीज पर लिए गए बोइंग 787-9 विमान की जगह एयरबस A321XLR विमान से उड़ानें संचालित की जाएंगी। वहीं, लंदन हीथ्रो के लिए एयरलाइन की सेवाएं अस्थायी रूप से बंद रहेंगी। कंपनी का कहना है कि यह सेवा तब दोबारा शुरू होगी, जब उसके ऑर्डर किए गए एयरबस A350-900 विमान बेड़े में शामिल हो जाएंगे।

    2025 में हुआ था समझौता
    इंडिगो ने वर्ष 2025 की शुरुआत में नॉर्स अटलांटिक एयरवेज के साथ छह बोइंग 787-9 विमानों के लिए डैम्प लीज एग्रीमेंट किया था, ताकि लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार किया जा सके।

    क्यों लिया गया फैसला?
    एयरलाइन के अनुसार, समझौते के बाद वैश्विक हालात तेजी से बदले हैं। एयरस्पेस पर प्रतिबंध, ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतें और विदेशी मुद्रा विनिमय दरों के दबाव ने परिचालन लागत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी कर दी है। इन परिस्थितियों का असर उड़ानों की क्षमता, समयबद्धता, कनेक्टिविटी और प्रतिस्पर्धात्मकता पर पड़ा है। इसी वजह से कंपनी ने पूरे कार्यक्रम की समीक्षा कर रणनीति में बदलाव का निर्णय लिया है।

    ‘संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी’
    इंडिगो के प्लानिंग एवं रेवेन्यू मैनेजमेंट के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अभिजीत दासगुप्ता ने कहा कि वैश्विक विमानन उद्योग लगातार भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। ऐसे माहौल में अल्पकालिक संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करना और दीर्घकालिक रणनीति को संतुलित रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन भविष्य में भी मिड और लॉन्ग-हॉल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    यात्रियों को दिए जाएंगे विकल्प
    इंडिगो ने स्पष्ट किया है कि इस फैसले से प्रभावित यात्रियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया जाएगा। उन्हें वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था या लागू नियमों के तहत रिफंड का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि यात्रियों को किसी तरह की असुविधा न हो।

  • नीरज चोपड़ा का सिल्वर, यशवीर सिंह का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज; सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत की पदकों की झड़ी

    नीरज चोपड़ा का सिल्वर, यशवीर सिंह का ऐतिहासिक ब्रॉन्ज; सीडब्ल्यूजी 2026 में भारत की पदकों की झड़ी


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स ने एक बार फिर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया। मेंस जैवलिन थ्रो स्पर्धा में भारत के दो खिलाड़ियों ने एक साथ पोडियम पर जगह बनाकर देश का गौरव बढ़ाया। ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर के शानदार थ्रो के साथ रजत पदक अपने नाम किया जबकि युवा खिलाड़ी यशवीर सिंह ने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीत लिया। एक ही स्पर्धा में दो भारतीय खिलाड़ियों का पदक जीतना भारतीय एथलेटिक्स के लगातार मजबूत होते प्रदर्शन का बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    प्रतियोगिता की शुरुआत नीरज चोपड़ा ने 80.97 मीटर के थ्रो से की लेकिन दूसरे प्रयास में उन्होंने 85.83 मीटर की दूरी तय कर मुकाबले में मजबूत दावेदारी पेश कर दी। इसके बाद भी उन्होंने लगातार स्थिर प्रदर्शन करते हुए 81.29 मीटर और 80.73 मीटर के थ्रो किए। हालांकि श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिराज ने 89.75 मीटर का शानदार थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया और नीरज को रजत पदक से संतोष करना पड़ा। इसके बावजूद नीरज का यह प्रदर्शन उनके मौजूदा सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा जिसने आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए उनके आत्मविश्वास को नई मजबूती दी।

    दूसरी ओर यशवीर सिंह ने शानदार संघर्ष का परिचय दिया। शुरुआती प्रयासों में वह पदक की दौड़ से कुछ पीछे दिखाई दे रहे थे लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में 78.55 मीटर और तीसरे प्रयास में 81.33 मीटर का थ्रो करने के बाद उन्होंने अंतिम प्रयास में 85.41 मीटर की दूरी तय कर मुकाबले का रुख बदल दिया। यह उनके करियर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा और इसी के दम पर उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। यशवीर का यह प्रदर्शन भारतीय जैवलिन थ्रो की नई पीढ़ी की क्षमता को भी साबित करता है।

    भारत के एक अन्य खिलाड़ी रोहित यादव भी फाइनल में उतरे और उन्होंने 81.56 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करते हुए सातवां स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक नहीं जीत सके लेकिन उनका प्रदर्शन भी संतोषजनक माना गया।

    इन दो पदकों के साथ भारत का कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कुल पदकों का आंकड़ा 23 तक पहुंच गया है। देश के खाते में अब 5 स्वर्ण 12 रजत और 6 कांस्य पदक दर्ज हो चुके हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में भारत ने अब तक 11 पदक जीत लिए हैं जबकि वेटलिफ्टिंग में 8 पदक जूडो में 3 पदक और पैरा पावरलिफ्टिंग में 1 कांस्य पदक हासिल हुआ है।

    पदक तालिका में भारत फिलहाल दसवें स्थान पर बना हुआ है जबकि ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर कायम है। इंग्लैंड दूसरे और कनाडा तीसरे स्थान पर है। भारतीय खिलाड़ियों का लगातार बेहतर प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि आने वाले मुकाबलों में पदकों की संख्या और बढ़ सकती है। नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह की यह उपलब्धि न केवल भारतीय खेल इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ती है बल्कि युवा खिलाड़ियों को भी बड़े मंच पर बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा देती है।

  • अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी

    अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले किए जा सकते हैं। व्हाइट हाउस का आरोप है कि तेहरान ने युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां जारी रखीं।

    व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोले और पिछले महीने हुए सीजफायर समझौते का सम्मान करे। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते पर हस्ताक्षर के बावजूद ईरान ने उस पर अमल नहीं किया, व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया और अमेरिकी सैनिकों की जान ली। उनके अनुसार, ऐसे कदम आतंकवादी गतिविधियों जैसे हैं और अमेरिका इसका जवाब देगा।

    हालांकि बीती रात ईरान पर कोई अमेरिकी हमला नहीं हुआ, लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो और तेल टैंकरों को निशाना बनाया। वहीं कुवैत ने भी अपने हवाई क्षेत्र में घुसे ड्रोन को मार गिराने की जानकारी दी।

    ‘ईरान को कीमत चुकानी होगी’
    कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ऐसी गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं करेंगे। उनका कहना था कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों के अनुसार बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तब तक उसे अपने कदमों की कीमत चुकानी पड़ेगी।

    ट्रंप बोले- जोरदार कार्रवाई करेंगे
    मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ईरान पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर “बहुत जोरदार हमला” करेगा और अंततः ईरान को पीछे हटना पड़ेगा। ट्रंप ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल जीत हासिल करना है।

    भारत-पाकिस्तान का भी किया जिक्र
    बातचीत के दौरान ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष रुकवाने में भूमिका निभाई और टैरिफ का हवाला देकर संभावित परमाणु टकराव टालने की बात कही। हालांकि भारत सरकार पहले भी ट्रंप के इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुकी है।

  • शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा क्यों है जानिए इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्य और लाभ

    शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करने की परंपरा क्यों है जानिए इसके पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्य और लाभ


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता भगवान शनि को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु विशेष रूप से शनि मंदिरों में जाकर सरसों का तेल अर्पित करते हैं और शनि देव की पूजा आराधना करते हैं। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शनि पूजा व्यक्ति के जीवन में आने वाली अनेक कठिनाइयों को कम करने में सहायक होती है। यही कारण है कि देशभर के शनि मंदिरों में शनिवार के दिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव कर्मों के आधार पर फल देने वाले देवता हैं। वे किसी के साथ पक्षपात नहीं करते बल्कि अच्छे कर्म करने वालों को सफलता सम्मान और उन्नति प्रदान करते हैं जबकि बुरे कर्म करने वालों को उनके कर्मों के अनुसार दंड भी देते हैं। इसलिए शनि देव की पूजा का सबसे बड़ा संदेश यह माना जाता है कि व्यक्ति सदैव सत्य ईमानदारी और अच्छे आचरण का पालन करे।

    शनि देव को सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा के पीछे कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार जब भगवान हनुमान ने शनि देव को रावण की कैद से मुक्त कराया था तब युद्ध के दौरान शनि देव को गंभीर चोटें आई थीं। उस समय उनके शरीर पर तेल लगाया गया जिससे उन्हें आराम मिला। तभी से शनि देव को तेल अर्पित करने की परंपरा शुरू हुई और माना जाने लगा कि तेल चढ़ाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं तथा अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं।

    एक अन्य मान्यता यह भी है कि सरसों का तेल नकारात्मक ऊर्जा और अशुभ प्रभावों को दूर करने का प्रतीक माना जाता है। शनिवार के दिन श्रद्धालु शनि देव की प्रतिमा पर सरसों का तेल अर्पित करते हैं दीपक जलाते हैं काले तिल उड़द और नीले या काले वस्त्र अर्पित करते हैं। इसके साथ ही शनि स्तोत्र शनि चालीसा और शनि मंत्रों का जाप करने से भी विशेष पुण्य फल प्राप्त होने की मान्यता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती ढैया या प्रतिकूल दशा चल रही हो वे शनिवार के दिन विधि विधान से शनि पूजा करें तो मानसिक तनाव आर्थिक कठिनाइयों और जीवन की बाधाओं में कमी आ सकती है। हालांकि केवल तेल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि अपने व्यवहार और कर्मों में भी सुधार करना आवश्यक बताया गया है क्योंकि शनि देव सबसे अधिक कर्म और न्याय को महत्व देते हैं।

    शनिवार के दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना काले तिल दान करना गरीबों की सहायता करना गौ सेवा करना और पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। इन कार्यों को शनि कृपा प्राप्त करने का प्रभावी माध्यम माना गया है। साथ ही किसी का अपमान न करना झूठ छल कपट और अन्याय से दूर रहना भी शनि पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

    धार्मिक विद्वानों का मानना है कि शनि देव को तेल अर्पित करने का वास्तविक उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं बल्कि जीवन में संयम धैर्य अनुशासन और अच्छे कर्मों को अपनाना है। जब व्यक्ति श्रद्धा के साथ पूजा के साथ-साथ अपने आचरण को भी बेहतर बनाता है तभी शनि देव की वास्तविक कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख शांति समृद्धि तथा सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत का कमाल, राष्ट्रपति ने स्वर्ण विजेताओं अस्मिता डे और हर्ष सिंह को सराहा

    कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में भारत का कमाल, राष्ट्रपति ने स्वर्ण विजेताओं अस्मिता डे और हर्ष सिंह को सराहा


    नई दिल्ली। ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जूडो में नया इतिहास रच दिया है। भारतीय खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर पूरे देश में खुशी की लहर है। महिलाओं की 48 किलोग्राम स्पर्धा में अस्मिता डे और पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा में हर्ष सिंह ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया। इन दोनों खिलाड़ियों की ऐतिहासिक सफलता पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनकी मेहनत समर्पण और उत्कृष्ट प्रदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संदेश में कहा कि अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला जूडो खिलाड़ी बनकर इतिहास रचा है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की जीत नहीं बल्कि पूरे देश के खेल जगत के लिए गर्व का विषय है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि अस्मिता आगे भी इसी तरह शानदार प्रदर्शन करती रहेंगी और भारत का नाम दुनिया भर में ऊंचा करेंगी।

    अस्मिता डे ने महिलाओं की 48 किलोग्राम जूडो स्पर्धा के फाइनल मुकाबले में कनाडा की हेइडी क्वैच को हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह जीत इसलिए भी विशेष रही क्योंकि पहली बार किसी भारतीय महिला जूडो खिलाड़ी ने कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल किया है। उनकी तकनीक आत्मविश्वास और संयम ने पूरे मुकाबले में दर्शकों का दिल जीत लिया।

    अस्मिता की ऐतिहासिक जीत के कुछ ही समय बाद हर्ष सिंह ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कैट्ज को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके साथ ही हर्ष सिंह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए। उनकी इस उपलब्धि ने भारतीय जूडो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने हर्ष सिंह को भी बधाई देते हुए कहा कि उनका धैर्य अनुशासन और खेल कौशल भारत के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने आशा जताई कि हर्ष भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए ऐसे ही गौरवशाली प्रदर्शन करते रहेंगे।

    भारत के लिए जूडो में यह दिन इसलिए भी यादगार रहा क्योंकि यामिनी मौर्य ने महिलाओं की 57 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश की पदक संख्या में महत्वपूर्ण योगदान दिया। फाइनल मुकाबले में उन्हें इंग्लैंड की एसेलिया टोपराक के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा लेकिन उनका प्रदर्शन पूरे टूर्नामेंट में सराहनीय रहा।

    जूडो में दो स्वर्ण और एक रजत पदक भारत के लिए इस बात का संकेत है कि देश अब इस खेल में भी लगातार मजबूत होता जा रहा है। खिलाड़ियों की मेहनत आधुनिक प्रशिक्षण और बेहतर खेल सुविधाओं का सकारात्मक परिणाम अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने लगा है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह खिलाड़ियों को अवसर और संसाधन मिलते रहे तो आने वाले वर्षों में भारत जूडो सहित कई अन्य खेलों में भी विश्व स्तर पर बड़ी ताकत बन सकता है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन देश के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है। अस्मिता डे हर्ष सिंह और यामिनी मौर्य ने यह साबित कर दिया कि समर्पण कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी सफलता पूरे देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनकर लंबे समय तक याद की जाएगी।

  • जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू, पूरे इलाके की घेराबंदी

    जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू, पूरे इलाके की घेराबंदी


    श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेरकर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। केल्लाम क्षेत्र में शुक्रवार रात हुए इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। एक श्रमिक ने घटनास्थल के बाद अस्पताल में दम तोड़ा, जबकि दूसरे घायल मजदूर की शनिवार को उपचार के दौरान मौत हो गई।

    बताया गया कि शुक्रवार रात करीब 8:30 बजे आतंकियों ने केल्लाम इलाके में मजदूरों को निशाना बनाकर गोलीबारी की। हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर खुफिया सूचनाओं के आधार पर बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।

    मृतकों की पहचान छत्तीसगढ़ निवासी 24 वर्षीय दीपक रात्रे और 28 वर्षीय भोपिंदर के रूप में हुई है। दीपक की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल भोपिंदर को इलाज के लिए शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। चिकित्सकों के अनुसार, उनके सीने के दाहिने हिस्से में गोली लगी थी।

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे कायराना हरकत बताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार हर संभव सहायता उपलब्ध कराएगी।

    वहीं, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी घटना की निंदा करते हुए पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने सुरक्षा बलों को अभियान और तेज करने तथा हमले में शामिल आतंकियों के खिलाफ शीघ्र और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

  • अगस्त के पहले सप्ताह में 3 राशियों को रहना होगा सतर्क! चंद्रमा के अशुभ योग बढ़ा सकते हैं मुश्किलें

    अगस्त के पहले सप्ताह में 3 राशियों को रहना होगा सतर्क! चंद्रमा के अशुभ योग बढ़ा सकते हैं मुश्किलें


    नई दिल्ली। अगस्त 2026 का पहला सप्ताह ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान चंद्रमा की चाल में होने वाले बदलाव से विष योग और ग्रहण प्रभाव जैसी अशुभ स्थितियां बनने की संभावना है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इन योगों का असर सभी राशियों पर पड़ेगा, लेकिन मिथुन, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    क्या है विष योग और ग्रहण प्रभाव?
    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब चंद्रमा का संबंध शनि जैसे क्रूर ग्रह से बनता है, तब विष योग का निर्माण होता है। इसे मानसिक तनाव, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और कार्यों में बाधा का कारण माना जाता है। वहीं, राहु या केतु के प्रभाव में चंद्रमा आने पर निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है और आर्थिक व पारिवारिक चुनौतियां बढ़ने की आशंका रहती है।

    इन 3 राशियों को रहना होगा सतर्क

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के लोगों के लिए अगस्त का पहला सप्ताह मानसिक तनाव और चिड़चिड़ेपन वाला हो सकता है। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखना जरूरी होगा। कारोबार में जोखिम भरे फैसलों से बचें। स्वास्थ्य के लिहाज से सिरदर्द या पेट संबंधी समस्याएं परेशान कर सकती हैं।

    वृश्चिक राशि
    वृश्चिक राशि के जातकों के खर्च अचानक बढ़ सकते हैं। परिवार में किसी बात को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है, इसलिए वाणी पर संयम रखें। कानूनी मामलों में देरी संभव है। वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    मीन राशि
    मीन राशि वालों के लिए इस दौरान कार्यों में रुकावट और मानसिक दबाव बढ़ सकता है। विरोधी सक्रिय रह सकते हैं, इसलिए सतर्क रहें। आर्थिक मामलों में किसी पर भी बिना जांच-पड़ताल भरोसा न करें और निवेश सोच-समझकर करें।

    अशुभ प्रभाव कम करने के उपाय
    – प्रतिदिन भगवान शिव का जलाभिषेक कर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें।
    – शनिवार को काली उड़द, सरसों का तेल या काले वस्त्र का दान करें।
    – बड़े आर्थिक फैसले या संपत्ति से जुड़े सौदे जल्दबाजी में न लें।
    – महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले परिवार के वरिष्ठ सदस्यों की सलाह लेना लाभकारी माना गया है।

  • वास्तु शास्त्र के आसान टिप्स, जो आपके घर में ला सकते हैं सुख, शांति और समृद्धि

    वास्तु शास्त्र के आसान टिप्स, जो आपके घर में ला सकते हैं सुख, शांति और समृद्धि


    नई दिल्ली । हर व्यक्ति चाहता है कि उसके घर में हमेशा सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे। भारतीय परंपरा में वास्तु शास्त्र को घर के निर्माण और व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। मान्यता है कि यदि घर में दिशाओं और ऊर्जा के संतुलन का ध्यान रखा जाए तो परिवार के सदस्यों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा आर्थिक और सामाजिक जीवन में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। हालांकि वास्तु को आस्था और परंपरा का विषय माना जाता है इसलिए इसे व्यक्तिगत विश्वास के अनुसार अपनाया जा सकता है।

    घर का मुख्य द्वार सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यहीं से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। मुख्य दरवाजे के आसपास हमेशा साफ सफाई बनाए रखें और अनावश्यक सामान जमा न होने दें। प्रवेश द्वार पर पर्याप्त रोशनी रहने से घर आकर्षक दिखाई देता है और स्वागत का सकारात्मक वातावरण बनता है।

    पूजा घर को घर के शांत और स्वच्छ हिस्से में रखना बेहतर माना जाता है। पूजा स्थल पर नियमित सफाई और दीपक या धूप जलाने से आध्यात्मिक वातावरण बना रहता है। पूजा स्थान के आसपास जूते चप्पल या गंदगी रखने से बचना चाहिए ताकि स्थान की पवित्रता बनी रहे।

    रसोई को परिवार की समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। रसोई हमेशा साफ और व्यवस्थित होनी चाहिए। भोजन बनाने के स्थान पर स्वच्छता बनाए रखना स्वास्थ्य की दृष्टि से भी आवश्यक है। गैस चूल्हा और पानी की व्यवस्था अलग अलग रखने की सलाह दी जाती है ताकि कार्य आसान और सुरक्षित बना रहे।

    शयनकक्ष ऐसा होना चाहिए जहां पर्याप्त हवा और प्राकृतिक रोशनी आती हो। कमरे में अनावश्यक सामान जमा करने से बचें क्योंकि इससे अव्यवस्था बढ़ती है और मानसिक तनाव भी महसूस हो सकता है। अच्छी नींद के लिए शांत वातावरण और नियमित सफाई बेहद जरूरी मानी जाती है।

    घर में पौधे लगाने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। हरे भरे पौधे वातावरण को ताजगी देने के साथ घर की सुंदरता भी बढ़ाते हैं। तुलसी जैसे पौधों को धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी शुभ माना जाता है। सूखे या मुरझाए पौधों को लंबे समय तक घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि वे घर की सुंदरता कम कर देते हैं।

    घर में टूटी हुई वस्तुएं खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान या लंबे समय से बेकार पड़े सामान को समय समय पर हटाते रहना चाहिए। इससे घर व्यवस्थित रहता है और जगह का बेहतर उपयोग हो पाता है। साफ और खुला वातावरण मानसिक सुकून देने में भी मदद करता है।

    वास्तु के अनुसार घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का आना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। खिड़कियां नियमित रूप से खोलने से घर में ताजगी बनी रहती है और बंद वातावरण की समस्या नहीं होती। इसके साथ ही रोजाना सफाई और स्वच्छता पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है।

    ध्यान रहे कि केवल वास्तु नियम अपनाने से जीवन की सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। सफलता के लिए मेहनत सकारात्मक सोच अनुशासित जीवनशैली और परिवार के बीच आपसी प्रेम और सम्मान सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। यदि इन मूल्यों के साथ घर की स्वच्छता और व्यवस्थित व्यवस्था पर ध्यान दिया जाए तो घर का वातावरण स्वाभाविक रूप से सुखद और सकारात्मक बन सकता है।