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  • बेटी रीति के बिग बॉस विवाद पर मनोज तिवारी का रिएक्शन, बोले- ‘बच्चों का बिग बॉस है

    बेटी रीति के बिग बॉस विवाद पर मनोज तिवारी का रिएक्शन, बोले- ‘बच्चों का बिग बॉस है


    नई दिल्ली। बिग बॉस 20 में मनोज तिवारी की बेटी रीति तिवारी अपने गेम और विवादों को लेकर लगातार चर्चा में हैं। काजी तौकीर के साथ तीखी बहस और उदिति सिंह को लेकर उनके कथित आपत्तिजनक व्यवहार पर सोशल मीडिया पर सवाल उठने के बाद अब मनोज तिवारी से भी बेटी के गेमप्ले को लेकर सवाल किए गए। हाल ही में एक कार्यक्रम से बाहर निकलते समय पत्रकारों ने उनसे रीति को लेकर सवाल किया, जिस पर उन्होंने कहा कि बिग बॉस एक गेम है और इसे उसी तरह लिया जाना चाहिए।

    मनोज तिवारी से पूछा- बेटी के लिए इस्तीफा दे दीजिए

    मनोज तिवारी हाल ही में ‘मोदी: द डिकेड दैट चेंज्ड इंडिया’ किताब के लॉन्च कार्यक्रम में पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद जब उनसे रीति के बिग बॉस गेम को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “बच्चों का बिग बॉस है, चलने दो।”

    इसके बाद उन्होंने उन चर्चाओं पर भी सफाई दी, जिनमें दावा किया जा रहा था कि उन्होंने अपनी बेटी को बिग बॉस में शामिल कराने के लिए सिफारिश की थी। मनोज तिवारी ने कहा कि उन्हें खुद जानकारी नहीं थी कि रीति शो में जा रही हैं।

    इसी दौरान एक रिपोर्टर ने उनसे कहा, “तो फिर आप उनके लिए इस्तीफा दे दीजिए।” इस सवाल पर मनोज तिवारी हैरान नजर आए और बोले, “आप क्या बोल रहे हैं, मुझे समझ नहीं आ रहा है।” वायरल वीडियो क्लिप में इसके बाद बातचीत अचानक खत्म हो जाती है।

    ‘बिग बॉस एक खेल है, उसका आनंद लीजिए’

    मनोज तिवारी ने बेटी के विवादों को लेकर कहा कि बिग बॉस को लेकर किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि शो में 24 घंटे कुछ न कुछ होता रहता है और इसे एक खेल की तरह देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद इस तरह का गेम खेल चुके हैं।

    मनोज तिवारी का कहना था कि “बिग बॉस एक खेल है… एक गेम है, उसका आनंद लीजिए।”

    रीति के गेम पर सलमान खान भी कर चुके हैं टिप्पणी

    रीति तिवारी हाल के एपिसोड में काजी तौकीर के साथ विवाद के बाद सुर्खियों में आई थीं। बहस के दौरान उन्होंने काजी पर तीखी टिप्पणियां की थीं और उनके पिता का जिक्र भी किया था। बाद में उन्होंने उस टिप्पणी के लिए माफी मांगी थी। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी रीति की आलोचना हुई।

    27 सितंबर के ‘वीकेंड का वार’ एपिसोड में सलमान खान ने भी रीति के व्यवहार और भाषा को लेकर उन्हें टोका। उन्होंने काजी को दी गई धमकी और उदिति सिंह को लेकर की गई टिप्पणियों पर रीति से सवाल किए।

    पहले भी बेटी के गेम पर बोल चुके हैं मनोज तिवारी

    इससे पहले मनोज तिवारी ने पैपराजी से बातचीत में रीति के बिग बॉस सफर को लेकर कहा था कि वह शो को ‘डर-डरकर’ देखते हैं और उम्मीद जताई थी कि सब ठीक रहे। रीति के शो में आने के बाद से उनके गेम और पिता के साथ रिश्ते को लेकर भी कई चर्चाएं सामने आई हैं।

  • अस्पताल के मलबे से निकाले गए थे मुज्तबा खामेनेई, दावा- तीन अस्पतालों पर हुई थी बमबारी

    अस्पताल के मलबे से निकाले गए थे मुज्तबा खामेनेई, दावा- तीन अस्पतालों पर हुई थी बमबारी


    तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई की स्थिति और ठिकाने को लेकर चल रही अटकलों के बीच एक नया दावा सामने आया है। ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली हमलों के दौरान तेहरान के एक अस्पताल पर बमबारी के बाद मुज्तबा खामेनेई को मलबे से बाहर निकाला गया था। दावा है कि घायल होने के बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन इसके बाद तेहरान के तीन अस्पतालों को निशाना बनाया गया। मुज्तबा तीसरे अस्पताल में मौजूद थे।

    यह दावा ईरान की ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ के सदस्य मोहसेन हैदरी ने कतर के टेलीविजन नेटवर्क ‘अल अरबी’ को दिए एक साक्षात्कार में किया। हैदरी के अनुसार, मुज्तबा खामेनेई पहले हुए हमले में घायल हुए थे और उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। इसके बाद तीन अस्पतालों पर हमले हुए और तीसरे अस्पताल के मलबे से मुज्तबा को निकाला गया।

    तीन अस्पतालों पर बमबारी का दावा

    मोहसेन हैदरी ने कहा कि मुज्तबा के घायल होने और अस्पताल पहुंचाए जाने के बावजूद तेहरान के तीन अस्पतालों पर बमबारी की गई। उनके मुताबिक, मुज्तबा तीसरे अस्पताल में थे और हमले के बाद उन्हें मलबे से बाहर निकाला गया।

    रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद 56 वर्षीय मुज्तबा खामेनेई को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। तब से वह सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं और उनके बारे में भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। हालांकि, मलबे से निकाले जाने संबंधी यह दावा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है।

    सुप्रीम लीडर चुने जाने की प्रक्रिया पर भी खुलासा

    हैदरी ने मुज्तबा खामेनेई को 8 मार्च को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुने जाने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी। उनके अनुसार, मुज्तबा को कथित तौर पर तब तक यह जानकारी नहीं थी कि उन्हें सर्वोच्च नेता चुना जा चुका है, जब तक कि ईरानी सरकारी टेलीविजन पर इसकी घोषणा नहीं हुई।

    सर्वोच्च नेता के चयन की जिम्मेदारी निभाने वाली ‘असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स’ भी इन हमलों की चपेट में आई थी। ‘न्यूयॉर्क पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, क़ोम स्थित इसके सचिवालय पर बमबारी में आठ लोगों की मौत हुई और उत्तराधिकारी के चयन से संबंधित रिपोर्ट तथा सिफारिशें नष्ट हो गईं।

    हैदरी के मुताबिक, इसके बाद असेंबली के सदस्यों ने अपने वोट कागज पर लिखे और उन्हें एक गुप्त स्थान पर बैठक के लिए बुलाया गया। उन्होंने दावा किया कि मुज्तबा खामेनेई का नाम प्रस्तावित करने वाले वह पहले सदस्य थे।

    59 में से 50 वोट मिलने का दावा

    हैदरी के अनुसार, चयन प्रक्रिया में मुज्तबा खामेनेई को 59 में से 50 वोट मिले। आठ सदस्यों ने अयातुल्ला अलीरेजा अराफी के पक्ष में मतदान किया, जबकि एक सदस्य ने मतदान नहीं किया।

    हैदरी ने मुज्तबा को ‘परछाई में रहने वाला व्यक्ति’ बताया। उनके अनुसार, सर्वोच्च नेता बनने से पहले मुज्तबा ने ईरानी सरकार में कोई औपचारिक राजनीतिक पद नहीं संभाला था। हालांकि, विभिन्न रिपोर्टों में उन्हें अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के सलाहकार के तौर पर काम करने वाला बताया गया है।

    स्वास्थ्य को लेकर पहले भी सामने आई थीं अलग-अलग रिपोर्टें

    मुज्तबा खामेनेई की हालत को लेकर पहले भी अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, 28 फरवरी के हमले में उनके पिता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी और मुज्तबा भी घायल हुए थे। इसके बाद उनकी स्थिति को लेकर अटकलें लगती रहीं।

    अमेरिकी खुफिया आकलनों में उनके गंभीर रूप से घायल होने की खबरें सामने आने का दावा किया गया था। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि मुज्तबा खामेनेई जीवित हैं, हालांकि उन्हें गंभीर चोटें आई हैं। अस्पताल के मलबे से निकाले जाने का नया दावा भी उनकी स्थिति और लंबे समय से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने को लेकर जारी सवालों के बीच आया है।

  • द्वितीया तिथि का श्राद्ध आज, जानें तर्पण-पिंडदान का शुभ समय और विधि

    द्वितीया तिथि का श्राद्ध आज, जानें तर्पण-पिंडदान का शुभ समय और विधि

    नई दिल्ली। पितृपक्ष के दौरान सोमवार, 28 सितंबर को द्वितीया तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार जिन पितरों का निधन किसी भी महीने के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को हुआ हो, उनका श्राद्ध इस दिन करने की परंपरा है। पितरों की आत्मा की शांति और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार चावल, दूध, शहद, घी और काले तिल से तैयार पिंड पितरों को अर्पित करने से उन्हें शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है।

    28 सितंबर को ही होगा द्वितीया श्राद्ध

    आश्विन कृष्ण द्वितीया तिथि की शुरुआत 27 सितंबर की रात 8 बजकर 58 मिनट पर हुई और यह 28 सितंबर की शाम 7 बजकर 13 मिनट तक रहेगी। उदिया तिथि के अनुसार द्वितीया तिथि का श्राद्ध 28 सितंबर, सोमवार को किया जाएगा।

    श्राद्ध और तर्पण का श्रेष्ठ समय

    शास्त्रों में पितरों के श्राद्ध और तर्पण के लिए कुतुप वेला को विशेष रूप से शुभ माना गया है। यह समय दोपहर के आसपास आता है। 28 सितंबर को कुतुप काल सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।

    हालांकि, कुतुप वेला का समय अलग-अलग शहरों में थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार श्राद्ध का समय निर्धारित करना उचित माना जाता है।

    कैसे करें द्वितीया तिथि का श्राद्ध?

    द्वितीया तिथि के श्राद्ध में आटा, चावल या जौ से गोल पिंड तैयार कर पितरों को अर्पित करने की परंपरा है। पिंडदान के बाद जल में काले तिल मिलाकर पितरों का तर्पण किया जाता है।

    तर्पण करते समय हाथ में कुश रखना भी धार्मिक विधि का हिस्सा माना जाता है। कुश एक प्रकार की पवित्र घास है, जिसकी अंगूठी बनाकर दाएं हाथ की अनामिका उंगली में धारण किया जाता है।

    श्राद्ध कर्म पूरा होने के बाद जरूरतमंद ब्राह्मणों को भोजन कराने और उन्हें दान-दक्षिणा देने की परंपरा है। अंत में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।

    पंचबलि का भी है विशेष महत्व

    श्राद्ध के दौरान गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों के लिए भोजन का एक हिस्सा अलग निकालकर रखने की परंपरा है। इसे पंचबलि कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इन जीवों के माध्यम से पितरों तक भोजन पहुंचता है और वे प्रसन्न होते हैं।

    मान्यता के अनुसार पंचबलि और विधि-विधान से श्राद्ध करने से पितरों को शांति मिलती है तथा पितृ दोष से मुक्ति की कामना की जाती है।

  • हूती विद्रोहियों के हमलों से खतरा बढ़ा … रियाद के स्कूलों को एक हफ्ते के लिए किया ऑनलाइन

    हूती विद्रोहियों के हमलों से खतरा बढ़ा … रियाद के स्कूलों को एक हफ्ते के लिए किया ऑनलाइन


    रियाद।
    सऊदी अरब (Saudi Arabia) से एक बड़ी खबर समाने आई है। राजधानी रियाद (Riyadh) के स्कूलों को एक हफ्ते के ऑनलाइन क्लास कर (Online Class) दिया गया है। यानी बच्चे और शिक्षक घर से ही क्लास लेंगे और ऑनलाइन ही पढ़ाई होगी। बताया जा रहा है कि यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) के ड्रोन और मिसाइल हमलों का खतरा बढ़ने के बीच रविवार को अभिभावकों को अचानक यह जानकारी मिली। हालांकि अधिकारियों ने फैसले की कोई वजह नहीं बताई, लेकिन यह कदम सऊदी अरब पर तेज होते हमलों के बीच उठाया गया है।

    एजेंसी के मुताबिक, रियाद भर के स्कूलों से अभिभावकों को ईमेल आए हैं। दो अलग-अलग संदेशों में लिखा था कि हमें अभी सऊदी अधिकारियों ने बताया है कि स्कूल पूरे हफ्ते बंद रहेंगे। बच्चे अब मदरसती ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से पढ़ेंगे। शिक्षकों और स्टाफ को भी घर से काम करने को कहा गया है। शिक्षा मंत्रालय ने फिलहाल कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया।


    अभिभावक नाराज और परेशान

    कई माता-पिता ने कहा कि फैसला बहुत अचानक आया। एक अभिभावक ने नाम न बताते हुए कहा कि जब पूरा स्कूल एक हफ्ते के लिए बंद हो रहा है, तो परिवारों को साफ वजह बतानी चाहिए। रियाद में रहने वाले एक लेबनानी नागरिक ने कहा कि यह लास्ट-मिनट फैसला है। हमें कुछ समझ नहीं आ रहा कि क्या हो रहा है।


    एक दिन पहले हमले रोके गए

    स्कूल बंद करने का फैसला शनिवार के हमलों के अगले दिन आया। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा कि उसने यमन से दागे गए दो ड्रोन और दो बैलिस्टिक मिसाइलें रोक लीं। ड्रोन रियाद की तरफ जा रहे थे और मिसाइलें दक्षिण-पश्चिम के शहर खमीस मुशैत की तरफ, जहां एक बड़ा एयरबेस है। सऊदी सिविल डिफेंस ने खमीस मुशैत और पास के शहर आभा के लिए रात भर अलर्ट जारी किया। रियाद के लिए कोई अलर्ट नहीं था। गठबंधन ने कहा कि सेना यमन से आने वाले खतरे पर लगातार नजर रख रही है।


    जुलाई से फिर शुरू हुई लड़ाई

    ये हमले जुलाई से चले आ रहे तनाव का हिस्सा हैं। उससे पहले सऊदी अरब और हूतियों के बीच करीब चार साल की शांति चल रही थी। जुलाई में शांति टूट गई और यमन फिर मध्य पूर्व की बड़ी लड़ाई में शामिल हो गया। हूती यमन के सबसे ज्यादा आबादी वाले इलाकों, खासकर उत्तर और राजधानी सना पर नियंत्रण रखते हैं। जैसे-जैसे इलाके में लड़ाई बढ़ी, उन्होंने हमले यमन की सीमा से बाहर निकालकर सऊदी शहरों, तेल सुविधाओं और जहाजों तक पहुंचा दिए।

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पहले भी हूती हमलों की निंदा की है। परिषद ने कहा कि इन हमलों में महिलाएं और बच्चे समेत आम नागरिक घायल हुए हैं। इस महीने की शुरुआत में खमीस मुशैत, आभा और ताइफ पर हमलों में 13 नागरिक घायल हुए थे। घर और गाड़ियां भी क्षतिग्रस्त हुईं। यमन के अंदर 1 लाख 20 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।

    सऊदी अरब दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा केंद्र है। उसके इलाके या समुद्री रास्ते पर रुकावट सिर्फ देश तक नहीं रहती, पूरी दुनिया पर असर डालती है। हूती अभियान में सऊदी शहर, ऊर्जा सुविधाएं और लाल सागर में चलने वाले जहाज शामिल हैं। जुलाई में समूह ने रियाद के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा की थी। उसके बाद प्रमुख समुद्री मार्गों पर हमले तेज हो गए। पवित्र शहर मक्का को निशाना बनाने का दावा भी किया गया।

    लाल सागर खाड़ी के तेल निर्यातकों के लिए दूसरा बड़ा रास्ता है। होर्मुज स्ट्रेट पहले से प्रभावित है। लाल सागर में और रुकावट आने से तेल सप्लाई पर दबाव और बढ़ सकता है। यही वजह है कि राजधानी रियाद में स्कूलों को अस्थायी रूप से घर से पढ़ाई पर शिफ्ट किया गया है।

  • अमेरिका ने बढ़ाई भारतीय प्रोफेशनल की चिंता… पूरी तरह खत्म हो सकता है H-1B वीजा….

    अमेरिका ने बढ़ाई भारतीय प्रोफेशनल की चिंता… पूरी तरह खत्म हो सकता है H-1B वीजा….


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय आईटी पेशेवरों (Indian IT professionals) के लिए एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आ रही है। खबर है कि ट्रंप प्रशासन (Trump administration) H-1B वीजा को लेकर बड़ी तैयारी कर रहा है। इसके तहत अब नियमों को और सख्त बनाया जाएगा। वहीं कहा जा रहा है कि H-1B वीजा को हमेशा के लिए खत्म भी किया जा सकता है। यही नहीं अमेरिका की ओर से हथकड़ी वाली चेतावनी भी आई है।

    अमेरिकी श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने हाल ही में इसके संकेत दिए हैं। एक पोस्टकास्ट में उन्होंने चेतावनी दी है कि अगले 365 दिनों में H-1B वीजा व्यवस्था का रूप पूरी तरह बदल जाएगा और धोखाधड़ी करने वाले एम्प्लॉयर्स के खिलाफ कड़ा कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।


    भारतीय टेक प्रोफेशनल्स को झटका

    H-1B वीजा प्रोग्राम पर किसी भी तरह की आंच का सीधा असर भारतीय नागरिकों पर पड़ता है। अमेरिकी आईटी कंपनियों, टेक सेक्टर और कॉरपोरेट जगत में काम करने वाले कुल H-1B वीजा धारकों में 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी अकेले भारतीय पेशेवरों की होती है। अगर अमेरिका इस प्रोग्राम को पूरी तरह बंद करता है तो हजारों भारतीय टेक प्रोफेशनल्स, अमेरिका में पढ़ रहे भारतीय छात्रों और वहां जाने की तैयारी कर रहे युवाओं के करियर को बहुत बड़ा झटका लगेगा। वहीं पहले से अमेरिका में मौजूद भारतीयों के लिए वीजा रिन्यूअल और ग्रीन कार्ड की राह में नई रुकावटें खड़ी हो सकती हैं।


    365 दिनों में बदल जाएगा पूरा नियम

    अमेरिकी कमेंटेटर और यूट्यूबर बेनी जॉनसन को दिए एक इंटरव्यू में इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने अमेरिका की रणनीति को लेकर स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि जांच अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वीजा के नाम पर धांधली और शेल कंपनियों के जरिए फर्जीवाड़े में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर गिरफ्तारी की तैयारी है। डी’एस्पोसिटो ने कहा, “मुझे लगता है कि विदेशी श्रम वीजा प्रोग्राम आज से 365 दिनों के भीतर पूरी तरह से अलग नजर आएगा।” उन्होंने बताया कि अमेरिकी सरकार H-1B वीजा प्रोग्राम से जुड़ी धोखाधड़ी, कर्मचारियों के शोषण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोपों की जांच कर रहा है।


    दिग्गज कंपनियां निशाने पर

    जांच एजेंसियों ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितता बरतने वाली दिग्गज कंपनियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। इससे पहले आपराधिक जांच की वजह से टेक क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों कॉग्निजेंट और क्लाउडेरा से जुड़े H-1B वीजा आवेदनों को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार, जांच अधिकारियों ने दर्जनों समन जारी किए हैं और कई ठिकानों पर सर्च वारंट जारी कर छापेमारी की है।


    क्या है प्रोजेक्ट फायरवॉल?

    अमेरिका में विदेशी पेशेवरों के बजाय अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों को प्राथमिकता देने के लिए कई नए नियम लागू किए जा रहे हैं। सितंबर 2025 में अमेरिकी सरकार प्रोजेक्ट फायरवॉल ले कर आई थी। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य हाइली स्किल्ड अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन, अधिकारों और नौकरी के अवसरों की रक्षा करना है, ताकि एंप्लॉयर्स विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने के बजाय पहले योग्य अमेरिकियों को काम पर रखें।

    इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने श्रम, होमलैंड सिक्योरिटी और विदेश विभाग को निर्देश दिया है कि किसी भी कंपनी के H-1B आवेदन की समीक्षा करते समय यह जरूर जांचा जाए कि उस कंपनी ने हाल ही में उसी पद पर काम कर रहे अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी तो नहीं की है। इसके साथ ही अमेरिका ने H-1B वीजा श्रेणी के तहत कुछ विशेष वीजा धारकों के अमेरिका में प्रवेश पर लगी पाबंदी को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है।


    क्या है H-1B वीजा और इसका कोटा?

    H-1B वीजा एक नॉन-इमीग्रेंट वीजा है, जिसके जरिए अमेरिकी कंपनियां आईटी और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले विदेशी कुशल कर्मचारियों को अपने यहां नौकरी देती हैं। अमेरिकी कानून के तहत हर वित्त वर्ष में केवल 65,000 नए H-1B वीजा जारी किए जाते हैं। वहीं अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों से मास्टर या पीएचडी की डिग्री हासिल करने वाले विदेशी छात्रों के लिए 20,000 अतिरिक्त कोटा तय होता है।

  • त्योहारी सीजन से पहले महंगे होंगे एसी-टीवी और फ्रिज…. 1 अक्तूबर से दाम बढ़ाने की तैयारी

    त्योहारी सीजन से पहले महंगे होंगे एसी-टीवी और फ्रिज…. 1 अक्तूबर से दाम बढ़ाने की तैयारी


    नई दिल्ली।
    त्योहारी सीजन (Festive season) से ठीक पहले आम लोगों की जेब पर महंगाई की मार पड़ने वाली है। एसी, एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन और फ्रिज समेत कई इलेक्ट्रॉनिक सामान (Electronic products) एक अक्तूबर से महंगे (Costlier) होने वाले हैं। कंपनियां कीमतों में 3 से 8 फीसदी तक बढ़ोतरी की तैयारी में हैं।


    एसी के दाम 5 से 8 फीसदी तक बढ़ने की संभावना

    एसी के दाम करीब पांच से आठ फीसदी, जबकि कुछ कंपनियां टीवी, वॉशिंग मशीन और फ्रिज के दाम तीन से चार फीसदी बढ़ा सकती हैं। यह इस साल तीसरी बढ़ोतरी होगी। हालांकि, कुछ कंपनियां अभी बाजार की स्थिति का आकलन कर रही हैं।


    महंगाई बढ़ने के 3 कारण

    – एल्युमिनियम, तांबा, स्टील और प्लास्टिक के दाम बढ़े।
    – माल एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की लागत बढ़ी।
    – डॉलर मजबूत होने से आयातित सामान की लागत बढ़ी है।


    कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाया कंपनियों का खर्च

    – ब्लू स्टार ने कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण एसी और डीप फ्रीजर के दाम पहले ही पांच से आठ फीसदी बढ़ाए जा चुके हैं। हायर इंडिया के चेयरमैन एन.एस. सतीश बताते हैं कि तांबे का दाम पिछले साल के 8 से 9 हजार डॉलर प्रति टन से बढ़कर करीब 14,500 डॉलर हो गया है। एक एसी में 3 से 4 किलो तांबा लगता है। दाम बढ़ना स्वाभाविक है।

  • नेपाल में भारी बारिश ने मचाई तबाही…बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में 21 लोगों की मौत

    नेपाल में भारी बारिश ने मचाई तबाही…बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में 21 लोगों की मौत


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में पिछले कुछ दिनों से जारी भारी बारिश (Heavy rain) ने तबाही मचाई है। बाढ़ (Floods), भूस्खलन (Landslides) और अन्य बारिश संबंधी घटनाओं में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी।


    पिछले महीने की विनाशकारी बाढ़ में भी हजारों लोग प्रभावित

    लगातार हो रही बारिश से देश के कई हिस्सों में नई बाढ़ आ गई। इससे कई घर बह गए और सड़क यातायात बाधित हुआ। नेपाल अभी भी पिछले महीने अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से उबर रहा है। उस बाढ़ में कम से कम 1,453 लोग मारे गए थे, जबकि 5,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं।

    बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने से कितने लोग प्रभावित?
    शनिवार रात पाल्पा जिले के माथागढी ग्रामीण नगर पालिका में भूस्खलन से एक घर दब गया। इसमें पांच लोगों की जान चली गई, जिनके शव रविवार सुबह बरामद किए गए। पिछले चार दिनों में बाढ़, भूस्खलन और बिजली गिरने जैसी घटनाओं में 16 अन्य लोग मारे गए, जिससे कुल मृतकों की संख्या 21 हो गई। देश में पिछले पांच दिनों में मानसून से संबंधित 439 घटनाएं दर्ज की गईं। सुरक्षा कर्मियों ने बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित 1,284 लोगों को बचाया।


    नदियों का जलस्तर क्यों बढ़ा और क्या हुआ?

    लुम्बिनी प्रांत के रुपन्देही जिले में तिनाऊ नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया। शनिवार रात बुटवल में नदी किनारे के छह घर बाढ़ के पानी में बह गए। काठमांडू पोस्ट ने यह रिपोर्ट दी। लगातार बारिश के कारण तिनाऊ और आसपास की धाराएं उफान पर थीं। लगभग 200 घर खतरे में थे, जिससे सुरक्षा कर्मियों ने रात भर में करीब 1,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।


    अन्य जिलों में क्या स्थिति रही?

    चितवन जिले में रविवार सुबह नारायणी नदी और रियू धारा भी खतरे के निशान से ऊपर बहने लगीं। देवघाट में नारायणी नदी 9.23 मीटर पर पहुंच गई, जो उसके खतरे के स्तर 9 मीटर से अधिक है। रियू नदी 3.92 मीटर पर पहुंच गई, जबकि उसका खतरे का निशान 3.8 मीटर है। भारी बारिश से चितवन में कई जगहों पर भूस्खलन और कीचड़ धंसने की घटनाएं हुईं, जिससे सड़कें अवरुद्ध हो गईं। करनाली प्रांत में भी भूस्खलन के कारण राजमार्गों पर यातायात बाधित हुआ। शनिवार को नारायणी और सप्तकोशी नदियों की बाढ़ से नवलपरासी पश्चिम और सप्तरी जिलों में 389 घर जलमग्न हो गए। इससे सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। अधिकारियों ने बाढ़ और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने का आग्रह किया है।


    मनांग में हिमस्खलन, दो की मौत, 10 लापता

    मनांग जिले में रविवार को हिमस्खलन की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई और 10 अन्य लापता हो गए। पुलिस ने बताया कि 7,126 मीटर ऊंचे हिमलूंग हिमाल शिखर के बेस कैंप पर एक टेंट दब गया। इसमें नौ पर्वतारोही और 13 सहायक कर्मचारी शरण लिए हुए थे। उप पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र थापा के अनुसार, शुरुआत में 12 लोग लापता हुए थे, जिनमें से दो के शव मिले और 10 अभी भी लापता हैं। सभी लापता व्यक्ति नेपाली नागरिक हैं। बचाव अभियान के लिए एक हेलीकॉप्टर भेजा गया है। लापता लोग हिमालयन हॉलिडेज नेपाल और इमेजिन नेपाल ट्रेक्स से संबंधित हैं। नेपाल के पहाड़ी जिलों में लगातार बारिश और बर्फबारी के कारण यह घटना हुई। पर्यटन विभाग के महानिदेशक राम कृष्ण लामिछाने ने स्थिति पर नजर रखने की बात कही।

  • जयंती विशेष: अभिनय से शुरुआत…. 5 वर्ष की उम्र में रंगमंच पर आईं थीं लता मंगेशकर

    जयंती विशेष: अभिनय से शुरुआत…. 5 वर्ष की उम्र में रंगमंच पर आईं थीं लता मंगेशकर


    मुम्बई।
    स्वर कोकिला लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) अगर आज हमारे बीच होतीं तो अपना 97वां जन्मदिन (Birth Anniversary) मना रही होतीं। भले ही सशरीर वे आज इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी सुरीली आवाज (Melodious voice) आज भी हमारे मन को तर करती है। उनके गाए गीतों के सहारे प्रशंसक हर पल उन्हें अपने करीब महसूस करते हैं। दिवंगत लता मंगेशकर की आवाज ही उनकी पहचान बन गई और यह सदा बनी रहेगी। सुरीला कंठ उन्हें कुदरती रूप से उपहार में मिला था। लेकिन, हैरानी की बात है कि उन्होंने शुरुआत अभिनय से की थी।

    लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर के मराठी परिवार में पंडित दीनदयाल मंगेशकर के घर हुआ था। लता जी की मां का नाम श्रीमती माई था। जन्म के समय लता जी का नाम हेमा रखा गया था, लेकिन कुछ समय बाद उनके पिता ने थिएटर के कैरेक्टर लतिका के नाम पर उनका नाम लता रख दिया। लता जी के पिता ने अपने गांव मंगेशी के नाम पर अपना उपनाम मंगेशकर रखा था। इनके पिता रंगमंच के कलाकार और गायक थे। संगीत लता दीदी को विरासत में मिला। अभिनय में भी उनकी दिलचस्पी थी और लता ने पांच साल की छोटी उम्र में पहली बार एक नाटक में अभिनय किया।


    फिल्मों में साइड रोल किए

    लता मंगेशकर के ऊपर बहुत कम उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारियां आ गई थीं। दरअसल, लता जी जब सिर्फ 13 वर्ष की थीं, तभी उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर का निधन हो गया था। इसके बाद उनके ऊपर परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। 14 वर्ष की उम्र में लता फिल्मों में हीरो या हीरोइन की बहन का रोल अदा किया करती थीं पर साथ ही उन्होंने संगीत की शिक्षा भी जारी रखी। फिर, गायिकी का सफर जो शुरू हुआ तो वे एक बड़ी शख्सियत बनकर उभरीं और इतनी बड़ी कि युगों-युगों तक जमाना उन्हें याद करेगा।


    लता मंगेशकर

    गायिकी के सफर की बात करें तो लता मंगेशकर ने सिर्फ 13 साल की उम्र में ही फिल्म ‘पहिली मंगलागौर’ से डेब्यू किया था। लता मंगेशकर की पहली कमाई 25 रुपये थी। उन्होंने 1942 में मराठी फिल्म ‘किती हसाल’ के लिए गाना गाया था। लता मंगेशकर को पहचान फिल्म महल के गाने ‘आएगा आने वाला’ से मिली थी। लता मंगेशकर ने दुनियाभर की 36 भाषाओं में 50 हजार से ज्यादा गाना गाए।

    ‘पिता होते तो न बन पाती सिंगर’
    18 साल की उम्र में मास्टर गुलाम हैदर ने फिल्म ‘मजबूर’ के गीत ‘अंग्रेजी छोरा चला गया’ में लता जी को मुकेश के साथ गाने का मौका दिया। अपनी गायिकी के लिए लता मंगेशकर ने कई विश्व रिकॉर्ड बनाए। लेकिन, वह पिता के सामने गाना गाते वक्त हमेशा डरा करती थीं। एक बातचीत के दौरान खुद लता जी न इस बात का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था, ‘पिताजी जिंदा होते तो मैं शायद सिंगर नहीं होती।’ लता जी के पिता दीनानाथ मंगेशकर को लंबे समय तक मालूम ही नहीं था कि उनकी बेटी गा सकती हैं। पिता जी को जब बेटी के हुनर का पता चला और जब वह लता जी से गाना गाने को कहते तो वह अक्सर झिझककर किचन में मां के पास भाग जाया करतीं।


    महज एक दिन स्कूल गई थीं स्वर कोकिला

    क्या आप मानेंगे कि लता महज एक दिन के लिए स्कूल गई थी? यह सच है। इसकी वजह यह रही कि जब वह पहले दिन अपनी छोटी बहन आशा भोसले को स्कूल लेकर गई तो अध्यापक ने आशा भोंसले को यह कहकर स्कूल से निकाल दिया कि उन्हें भी स्कूल की फीस देनी होगी। बाद में लता ने निश्चय किया कि वह कभी स्कूल नहीं जाएंगी। हालांकि बाद में उन्हें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी सहित छह विश्वविद्यालयों में मानक उपाधि से नवाजा गया। बता दें कि लता मंगेशकर पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी बहन थीं। उनके बाद उनकी तीन बहनें मीना मंगेशकर, आशा भोसले, उषा मंगेशकर और भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने भी आजीविका के रूप में संगीत को ही चुना।


    लाजवाब हलवा बनाती थीं लता दीदी

    लता मंगेशकर के सिंगिंग के हुनर से तो दुनिया वाकिफ रही। लेकिन, इसके अलावा लता दीदी को कुकिंग का भी काफी शौक था। रिपोर्ट्स के मुताबिक लता मंगेशकर को मेहमान नवाजी का काफी शौक था। उनके हाथों का बना चिकन जिसने खाया, वह उसे भुला नहीं पाया। चिकन के अलावा स्वर कोकिला सूजी का हलवा भी बहुत अच्छा बनाती थीं। लता मंगेशकर को सी फूड भी काफी पसंद था। खासकर गोवा की फिश और समुद्री झींगे उनकी पसंदीदा डिश थी।


    गिनीज बुक में दर्ज हुआ नाम

    वर्ष 1974 में लंदन के सुप्रसिद्ध रॉयल अल्बर्ट हॉल में लता मंगेशकर को पहली भारतीय गायिका के रूप में गाने का अवसर प्राप्त हुआ। सन 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का ‘गिनीज बुक रिकॉर्ड’ उनके नाम पर दर्ज किया गया था।


    इस वजह से रहना पड़ा था मौन

    लता मंगेशकर की जिंदगी में एक पल ऐसा भी आया, जब उन्हें कुछ वक्त ब्रेक लेना पड़ा। साथ ही मौन भी रहना पड़ा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 60 के दशक में लता को वोकल कॉर्ड्स में कुछ समस्या हुई। इस तकलीफ के चलते वे गा नहीं पा रही थीं। तब, मशहूर शास्त्रीय गायक उस्ताद अमीर खान की सलाह पर उन्होंने कुछ समय के लिए सिंगिंग से ब्रेक लिया। महीनों ब्रेक पर रहने के दौरान उन्होंने मौन व्रत रखा। उनका यह मौन वर्त हेमंत कुमार ने तुड़वाया था। दरअसल, हेमंत को फिल्म ‘बीस साल बाद’ के लिए लता की आवाज चाहिए थी। उन्होंने लता मंगेशकर को राजी किया और ‘कहीं दीप जले, कहीं दिल’ गाना गाने को कहा। यह गाना सुपरहिट हुआ। लता दीदी को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था।

  • बैंक कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल स्थगित, नागरिकों ने ली राहत की सांस

    बैंक कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल स्थगित, नागरिकों ने ली राहत की सांस


    नई दिल्ली।
    इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (Indian Banks’ Association- IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (United Forum of Bank Unions- UFBU) के बीच रविवार को हुई बैठक के बाद प्रस्तावित बैंक हड़ताल टाल दी गई है. बैठक में बैंक सुधार, स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI स्कीम में बदलाव समेत अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

    रविवार रात लगभग 9:30 बजे इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) की बैंक हड़ताल को लेकर बैठक हुई. इस बैठक में बैंक यूनियन की मांगों समेत अन्य अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच कुछ फैसलों को लेकर सहमति बनी है।

    शनिवार को छुट्टी घोषित किए जाने के मु्द्दे पर इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) की एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया जाएगा. यह कमेटी सभी संभावित विकल्पों पर विचार करेगी और हितधारकों के साथ चर्चा कर कोई समाधान निकालेगी, जिससे किसी को भी कोई असुविधा न हो. कमेटी एक ऐसा हल निकालने की कोशिश करेगी जो बैंक यूनियन और ग्राहक, दोनों को स्वीकार्य हों।

    वहीं, स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए PLI(प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन) स्कीम को लेकर यूनियनों और एसोसिएशनों की आपत्तियों और सुझावों के मद्देनजर इसमें बदलाव का प्रस्ताव सरकार को भेजे जाने पर IBA के साथ चर्चा शुरू की जाएगी. इसके अलावा, 8 मार्च 2024 की बैठक के कार्यवृत्त(मिनट्स) में दर्ज बाकी मुद्दों के समाधान के लिए भी दोनों पक्षों के बीच बातचीत होगी।

    इन सभी फैसलों को देखते हुए यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस (UFBU) ने प्रस्तावित आंदोलन और हड़ताल के कार्यक्रमों पर टालने पर सहमति जताई, जिसके बाद बैंकों की प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल टल गई है।

  • तिलक लगवाने को लेकर मलयाली सुपर ममूटी पर भड़के कट्टरपंथी, हरिश्री यूसुफ ने किया बचाव

    तिलक लगवाने को लेकर मलयाली सुपर ममूटी पर भड़के कट्टरपंथी, हरिश्री यूसुफ ने किया बचाव


    नई दिल्ली।
    मलयालम सुपरस्टार ममूटी (Malayalam superstar Mammootty) को गुजरात में एक स्वागत समारोह के दौरान माथे पर पारंपरिक तिलक लगवाने के बाद ऑनलाइन आलोचना का सामना करना पड़ा. वे वहां 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट एक्टर’ की ट्रॉफी लेने पहुंचे थे. अब्बास नाम के एक सोशल मीडिया यूज़र ने इस हरकत को धार्मिक अपराध बताया, जिसके बाद एक्टर-कॉमेडियन हरिश्री यूसुफ ने इस आलोचना का जवाब दिया और दिग्गज स्टार का बचाव किया।

    धार्मिक भेदभाव से ऊपर उठने की जरूरत पर जोर देते हुए, यूसुफ ने इस संकीर्ण सोच वाली प्रतिक्रिया की निंदा की और भारत में सांस्कृतिक मेहमाननवाजी के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को उजागर किया।

    तिलक लगवाने के लिए ममूटी को निशाना बनाने वाले आलोचक की आलोचना करते हुए, यूसुफ ने कमेंट करने वाले को ‘कुएं का मेंढक’ कहा क्योंकि उसने स्वागत के एक पारंपरिक तरीके को सांप्रदायिक मुद्दा बना दिया।

    हरिश्री यूसुफ ने जमकर सुनाया

    यूसुफ ने एक वीडियो संदेश में कहा, ‘ममूटी एक कलाकार हैं. मैं भी एक छोटा-मोटा कलाकार हूं. हम कलाकारों की सोच संकीर्ण नहीं होती. हम थोड़ा व्यापक सोचते हैं.’ ‘इस व्यक्ति को लगा कि यह बहुत बड़ा अपराध है… आप जैसे लोग, जिनके दिमाग में सिर्फ ‘धर्म’ होता है, वे ही ऐसा सोचेंगे।

    यह बताते हुए कि बड़े कार्यक्रमों और होटलों में मेहमानों का तिलक लगाकर स्वागत करना एक आम बात है, कॉमेडियन ने मशहूर हस्तियों का अपमान करने के लिए आस्था का सहारा लेने की प्रथा पर सवाल उठाया. उन्होंने सिनेमा और समाज में ममूटी के बड़े योगदान का जिक्र किया, जिसमें बच्चों की मुफ्त हार्ट सर्जरी के लिए फंडिंग करना और केरल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना शामिल है।

    यूसुफ ने कहा, ‘आपने उस व्यक्ति का अपमान किया है जिसका दुनिया भर के मलयाली लोग सम्मान और प्रशंसा करते हैं… जरा देखिए कि वह व्यक्ति हमारे समाज के लिए कितने अच्छे काम करता है।

    आस्था के अलग-अलग कामों — जैसे तिलक लगाना, क्रॉस का निशान बनाना या प्रार्थना में सिर झुकाना — के बीच समानता बताते हुए यूसुफ ने कहा कि भक्ति के सभी रूप एक ही ईश्वर के प्रति होते हैं. सांप्रदायिक सोच की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी दकियानूसी सोच भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश के बजाय ‘तालिबान’ शासन में ही हो सकती है।

    उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, ‘धर्म जरूरी है, लेकिन धर्म का मकसद क्या है? इसका मकसद इंसानों का आपस में लड़ना नहीं है. धर्म का मकसद इंसानों को बेहतर बनाना है.’ साथ ही, उन्होंने सोशल मीडिया यूजर्स से सांप्रदायिक तनाव न बढ़ाने की अपील की।

    हरिश्री यूसुफ मलयालम सिनेमा और स्टेज परफॉर्मेंस की जानी-मानी हस्ती हैं. उन्होंने ‘म्यो’ (Meow), ‘इनी उथारम’ (Ini Utharam) और ‘अमर अकबर एंथनी’ (Amar Akbar Anthony) जैसी फिल्मों में अहम भूमिकाएं निभाई हैं।


    ममूटी को मिला नेशनल अवॉर्ड

    72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में ममूटी ने बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड जीता. उन्होंने यह सम्मान हिंदी फिल्म एक्टर कार्तिक आर्यन के साथ शेयर किया. ममूटी को यह सम्मान मलयालम ड्रामा ‘ब्रमायुगम’ (Bramayugam) में शानदार एक्टिंग के लिए मिला, जबकि आर्यन ने स्पोर्ट्स ड्रामा ‘चंदू चैंपियन’ (Chandu Champion) में पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट का किरदार निभाकर अपना पहला नेशनल अवॉर्ड हासिल किया. यह ममूटी का बेस्ट एक्टर के तौर पर चौथा नेशनल फिल्म अवॉर्ड था, जिसने भारतीय सिनेमा के सबसे मशहूर दिग्गजों में से एक के तौर पर उनकी पहचान को और मज़बूत किया।