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  • बहनों की शक्ति और आशीर्वाद से आगे बढ़ रहा मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    बहनों की शक्ति और आशीर्वाद से आगे बढ़ रहा मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में महिला सशक्तिकरण का कार्य सरकार और सामाजिक दोनों स्तर पर हो रहा है। बहनों की शक्ति और आशीर्वाद से प्रदेश आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को झाबुआ जिले के थांदला में आयोजित स्व-सहायता समूहों के क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बहनें स्व-सहायता समूहों को नई ताकत दे रही हैं। कृषि, पशुपालन, बैंक, उद्यम सखियां भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बहनों की सार्थक भूमिका से प्रत्येक परिवार में समृद्धि आ रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश में नगरीय निकायों और पंचायतों में 50 प्रतिशत स्थान बहनों के लिए आरक्षित है। सरकारी सेवाओं में बहनों के लिए 35 प्रतिशत स्थान आरक्षित रखे गए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा और राज्यसभा में बहनों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृ्त्व में मध्य प्रदेश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जब लगातार तीन बार पड़ौसी राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब झाबुआ के आसपास जनजातीय अंचल में विकास के अद्भुत कार्य हुए। पूरी दुनिया गुजरात की शक्ति से परिचित हुई।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके मन में बहनों के लिए विशेष सम्मान है। उनके माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी बहनें के सशक्तिकरण के लिए 300 करोड़ रुपये के ऋण दिए गए हैं। स्व-सहायता समूहों से बहनों की समृद्धि का मार्ग खुल रहा है। यह आत्मनिर्भरता और समाजिक सशक्तिकरण का एक बड़ा आंदोलन बन रहा है। सहयोग और सहभागिता से समृद्ध होकर बहनें नए रिकॉर्ड बना रही हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हमारी बहनें 10 हजार रुपये प्रति महीना तक आय अर्जित कर रही हैं। प्रदेश की लाड़ली बहनें, उद्यमी बहनें, कृषि सखी सभी आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश में स्व-सहायता समूहों के द्वारा 196 दीदी कैफे संचालित किए जा रहे हैं। झाबुआ में भी बहनें चार कैफे चला रही हैं। प्रदेश में 85 आजीविका पुस्तकालयों का संचालन स्व-सहायता समूहों की बहनों के हाथों में है। गैर कृषि आधारित 150 से अधिक कार्य बहनें कर रही हैं। यह आयोजन महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट प्रमाण है। होलकर साम्राज्य की रानी लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर ने भील पल्टन बनाकर जनजातीय समुदाय पर विश्वास जताया था। रानी दुर्गावती, वीरांगना अवंतीबाई, रानी पद्मावती, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जैसी बहनों ने सुशासन और त्याग के बल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया।

    रोजगार दिलवाना प्राथमिकता

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार दिलवाने के लिये निरन्तर नई पहल कर रही है। मध्य प्रदेश में ग्वालियर अंचल में संचार क्षेत्र में नई इकाई की स्थापना की जाएगी। इससे 14 हजार नये रोजगार के अवसर सृजित होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने गत 17 सितम्बर को धार जिले में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का शिलान्यास किया। पीएम मित्र पार्क से 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। कपास उत्पादक किसान इस पार्क से बड़ी संख्या में लाभान्वित होंगे।

    उन्होंने कहा कि जनजातीय बहुल क्षेत्र में जो पट्टे दिए गए हैं, उनकी नि:शुल्क रजिस्ट्री भी करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई मिशनरी धर्मान्तरण नहीं कर सकेगी। स्थानीय निवासी ज्यादा से ज्यादा गौशाला खोलें, दूध का उत्पादन बढाएं। ऐसे कार्यों के लिए सरकार पूरी सहायता कर रही है।प्रदेश में उद्योग और एमएसएमई के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। अब झाबुआ, धार, आलीराजपुर के लोगों को रोजगार के लिए पलायन करने की जरूरत नहीं होगी। अपने घर में ही काम मिलेगा। बड़े-बड़े कारखाने यहां आएंगे।

    स्व-सहायता समूहों को राशि वितरित

    मुख्यमंत्री ने राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों के सशक्तिकरण के लिए 300 करोड़ रुपये के ऋण का वितरण किया। इसमें झाबुआ जिले के 215 स्व-सहायता समूहों के लिए 10.8 करोड़ का ऋण भी शामिल है। मुख्यमंत्री ने झाबुआ जिले को 174.64 करोड़ रुपये के 29 विकास कार्यों के भूमि-पूजन और 109.17 करोड़ रुपये के 28 विकास एवं आधारभूत संरचना कार्यों के लोकार्पण की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया और मेधावी विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने “आजीविका मेला” प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    प्राकृतिक खेती के लिए अनुकूल झाबुआ

    मुख्यमंत्री ने कहा कि झाबुआ क्षेत्र प्राकृतिक खेती के लिए वरदान है। उन्होंने प्राकृतिक खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों से संवाद किया। उन्होंने प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं एवं प्रयासों पर चर्चा भी की। महिला कृषक बहनों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से पिछले दो-तीन साल में जीवन में बड़ा बदलाव आया है। राज्य सरकार कृषि कल्याण वर्ष मना रही है। इसमें बहनों की बड़ी भूमिका है। हमारी बहनें ट्रैक्टर से लेकर ड्रोन तक चला रही हैं। ड्रोन दीदीयां खेतों में कीटनाशकों क छिड़काव कर रही हैं।

    समान नागरिक संहिता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सभी धर्मों के लोगों के सम्मान के लिए एक समान कानून लागू करने का निर्णय लिया है। इसमें जनजातीय समुदाय को मुक्त रखा गया है। यूसीसी बिल विधानसभा से पास हो चुका है।

    दुराचार करने वालों को फांसी

    मुख्यमंत्री ने कहा कि झाबुआ और धार में धर्मांतरण करने वालों को कानून के अनुसार सजा दिलवाई जाएगी। महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए महिला सुरक्षा डेस्क और प्रत्येक जिले में महिला थाने बनाए जा रहे हैं। महिलाओं के साथ दुराचार करने वालों को फांसी की सजा मिलेगी। केंद्र सरकार के सहयोग और नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त करने के दृढ़ संकल्प के कारण प्रदेश के बालाघाट, मंडला, डिंडौरी अंचल से नक्सलवाद को पूर्णत: समाप्त कर दिया गया है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स में चमके हर्ष सिंह, पुरुष जूडो में भारत को दिलाया पहला स्वर्ण

    कॉमनवेल्थ गेम्स में चमके हर्ष सिंह, पुरुष जूडो में भारत को दिलाया पहला स्वर्ण


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पुरुषों के 60 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीत लिया। फाइनल में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी जुडोका और ओलंपियन जोशुआ कात्ज़ को पराजित कर राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में पुरुष जूडो में भारत का पहला स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    23 वर्षीय हर्ष सिंह दिल्ली के रहने वाले हैं और अंतरराष्ट्रीय जूडो महासंघ (IJF) के सर्किट में भारत के उभरते खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। राष्ट्रमंडल खेलों से पहले वह कई ग्रैंड स्लैम और ग्रैंड प्रिक्स प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रतिस्पर्धा से मिले अनुभव का लाभ उन्हें ग्लासगो में देखने को मिला।

    41 सेकेंड में पलटा मुकाबला

    फाइनल मुकाबले में हर्ष का सामना ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ कात्ज़ से हुआ, जिन्हें इस स्पर्धा का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। चार मिनट तक चले मुकाबले में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर रही और अंतिम क्षणों तक कोई निर्णायक बढ़त नहीं बन सकी।

    मैच समाप्त होने से 41 सेकेंड पहले हर्ष ने प्रतिद्वंद्वी की एक छोटी सी चूक का फायदा उठाते हुए ‘वाजा-अरी’ (Waza-ari) स्कोर किया। इसके बाद उन्होंने शेष समय तक बढ़त बरकरार रखते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया और स्वर्ण पदक जीत लिया।

    अनुभवी प्रतिद्वंद्वी को दी मात

    जोशुआ कात्ज़ ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी जुडोका हैं। वह कई बार ओशिनिया चैंपियन रह चुके हैं और 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीत चुके हैं। उनके परिवार का भी जूडो से गहरा संबंध रहा है और उनके पिता ऑस्ट्रेलिया की ओलंपिक जूडो टीम के राष्ट्रीय कोच रह चुके हैं।

    भारतीय जूडो के लिए ऐतिहासिक दिन

    हर्ष सिंह की इस उपलब्धि ने भारतीय जूडो के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। इससे पहले महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में अस्मिता डे ने स्वर्ण पदक जीतकर भारत को पहली सफलता दिलाई थी। इसके बाद हर्ष ने पुरुष वर्ग में स्वर्ण जीतकर एक ही दिन में भारत को जूडो में दो स्वर्ण पदक दिलाने का इतिहास रच दिया।

    कम उम्र में पहली बार राष्ट्रमंडल खेलों में उतरकर स्वर्ण पदक जीतने वाले हर्ष सिंह की यह सफलता भारतीय जूडो के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और इससे आने वाले खिलाड़ियों को भी नई प्रेरणा मिलेगी।

  • कुलगाम में आतंकियों ने दो गैर-स्थानीय मजदूरों को मारी गोली, एक की मौत, दूसरा गंभीर

    कुलगाम में आतंकियों ने दो गैर-स्थानीय मजदूरों को मारी गोली, एक की मौत, दूसरा गंभीर


    श्रीनगर।
    दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने एक बार फिर गैर-स्थानीय मजदूरों को निशाना बनाया। केलम क्षेत्र में गुरुवार शाम आतंकियों की गोलीबारी में दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां एक मजदूर ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे की हालत गंभीर बनी हुई है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, केलम इलाके में काम कर रहे दो गैर-स्थानीय मजदूरों पर अज्ञात आतंकियों ने अचानक गोलीबारी कर दी। घटना के बाद दोनों घायल मजदूरों को अस्पताल ले जाया गया। चिकित्सकों ने एक मजदूर को मृत घोषित कर दिया, जबकि दूसरे का उपचार जीएमसी अनंतनाग में जारी है।

    घटना के तुरंत बाद पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर संयुक्त तलाशी अभियान शुरू कर दिया। हमलावर आतंकियों की तलाश के लिए इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

    हाल के वर्षों में गैर-स्थानीय लोगों पर प्रमुख आतंकी हमले

    • 31 जुलाई 2026, केलम (कुलगाम): दो गैर-स्थानीय मजदूरों पर गोलीबारी, एक की मौत और एक गंभीर रूप से घायल।
    • 22 अप्रैल 2025, बैसरन (पहलगाम): पर्यटकों और गैर-स्थानीय लोगों पर आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत।
    • 20 अक्टूबर 2024, गगनगीर (गांदरबल): जेड-मोड़ सुरंग परियोजना शिविर पर हमले में छह गैर-स्थानीय मजदूर और एक चिकित्सक की हत्या।
    • 17 अप्रैल 2024, बिजबिहाड़ा (अनंतनाग): बिहार निवासी गैर-स्थानीय विक्रेता राजा शाह की गोली मारकर हत्या।
    • 7-8 फरवरी 2024, हब्बा कदल (श्रीनगर): पंजाब के दो गैर-स्थानीय मजदूरों अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

    सुरक्षा एजेंसियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उन्हें जल्द पकड़ने के लिए व्यापक अभियान जारी है।

  • भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत के संकेत? सितंबर में BRICS समिट के लिए शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा पर टिकी दुनिया की नजर

    भारत-चीन रिश्तों में नई शुरुआत के संकेत? सितंबर में BRICS समिट के लिए शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा पर टिकी दुनिया की नजर

    नई दिल्ली । सितंबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन को लेकर भारत और चीन के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के इस सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह दौरा तय होता है तो वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए सैन्य संघर्ष के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी। इस संभावित दौरे को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक अवसर के रूप में देखा जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में शी जिनपिंग की मौजूदगी की संभावना है। उनकी यात्रा ऐसे समय में प्रस्तावित है जब भारत और चीन पिछले कुछ वर्षों से सीमा पर बने तनाव को कम करने और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के संबंधों में आई तल्खी के कारण कई दौर की सैन्य और राजनयिक वार्ताएं हुईं, जिसके बाद अब धीरे-धीरे सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिशें जारी हैं।

    शी जिनपिंग की पिछली भारत यात्रा अक्टूबर 2019 में हुई थी, जब दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता आयोजित की गई थी। इसके कुछ महीनों बाद जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को दशकों के सबसे कठिन दौर में पहुंचा दिया। इसके बाद सीमा पर लंबे समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा और दोनों देशों ने कई स्तरों पर बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

    प्रस्तावित यात्रा से पहले दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनयिक संपर्क बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के चीन दौरे की चर्चा है, जहां सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। हालांकि उनकी यात्रा की आधिकारिक तारीखों की पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके अलावा भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए गठित कार्य तंत्र (WMCC) की बैठक भी आने वाले समय में आयोजित होने की उम्मीद है। इसके बाद दोनों देशों के विशेष प्रतिनिधियों के बीच सीमा विवाद पर आगे की वार्ता हो सकती है।

    यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं तो ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना पर भी नजर रहेगी। ऐसी बैठक में सीमा प्रबंधन, क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार, निवेश, आर्थिक सहयोग और आपसी विश्वास बहाली जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत बने हुए हैं, लेकिन सीमा विवाद के कारण राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर कई चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं।

    यह संभावित यात्रा ऐसे समय में सामने आ रही है जब वैश्विक स्तर पर कई भू-राजनीतिक चुनौतियां उभर रही हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, वैश्विक व्यापार पर दबाव और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच बदलते समीकरणों के बीच भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच संवाद को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं होगा, बल्कि यह वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच रणनीतिक समन्वय को भी नई दिशा देने का अवसर बन सकता है।

  • पाकिस्तान में 'कॉकरोच पार्टी' की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल, गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान ने छेड़ी नई बहस

    पाकिस्तान में 'कॉकरोच पार्टी' की एंट्री से बढ़ी सियासी हलचल, गृह मंत्री मोहसिन नकवी के बयान ने छेड़ी नई बहस

    नई दिल्ली । पाकिस्तान में आर्थिक चुनौतियों, महंगाई और राजनीतिक असंतोष के बीच सोशल मीडिया पर उभर रहे एक नए ऑनलाइन अभियान ‘कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान’ को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में इस अभियान को सोशल मीडिया पर व्यापक ध्यान मिला है। इसी बीच पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी का एक बयान भी चर्चा का विषय बन गया है, जिसमें उन्होंने युवाओं की बढ़ती नाराजगी और सामाजिक असंतोष को लेकर चिंता व्यक्त की।

    रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान इस समय आर्थिक दबाव, महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन परिस्थितियों के बीच सोशल मीडिया पर सक्रिय एक समूह ‘कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान’ के नाम से विभिन्न मुद्दों को उठाते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहा है। यह अभियान विशेष रूप से युवाओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसके समर्थकों की संख्या लगातार बढ़ने का दावा किया जा रहा है।

    गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि यदि युवाओं की अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया गया और उनकी नाराजगी लगातार बढ़ती रही, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उनके बयान को कई राजनीतिक विश्लेषक देश में बढ़ते जनअसंतोष की स्वीकारोक्ति के रूप में देख रहे हैं। हालांकि सरकार की ओर से इस बयान का विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    बताया जा रहा है कि ‘कॉकरोच पार्टी पाकिस्तान’ स्वयं को भ्रष्टाचार, परिवारवाद और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी के खिलाफ अभियान चलाने वाला समूह बताती है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेशों में रोजगार, शिक्षा, आर्थिक सुधार, ऊर्जा संकट, जवाबदेही और प्रशासनिक सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है। समूह ने कथित तौर पर एक घोषणापत्र भी जारी किया है और संगठनात्मक ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाने का दावा किया है।

    कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि इस अभियान ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से जुड़े मानवाधिकार और प्रशासनिक मुद्दों को भी उठाया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं पाकिस्तान सरकार की ओर से भी इस संबंध में कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

    राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में आर्थिक संकट और लगातार बढ़ती महंगाई के कारण युवाओं में असंतोष बढ़ा है, जिसका असर सोशल मीडिया अभियानों में भी दिखाई दे रहा है। हालांकि किसी भी नए राजनीतिक या सामाजिक अभियान की वास्तविक लोकप्रियता और उसके प्रभाव का आकलन केवल सोशल मीडिया गतिविधियों के आधार पर करना उचित नहीं माना जाता। ऐसे अभियानों का वास्तविक प्रभाव समय के साथ ही स्पष्ट हो पाता है।

    फिलहाल पाकिस्तान की राजनीति में इस नए ऑनलाइन अभियान और गृह मंत्री के बयान को लेकर बहस जारी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह अभियान केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहता है या फिर इसका असर देश की राजनीतिक गतिविधियों और जनचर्चा पर भी व्यापक रूप से दिखाई देता है।

  • पीओजेके में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तान की कार्रवाई पर भारत का तीखा हमला, अंतरराष्ट्रीय जांच और जवाबदेही की उठाई मांग

    पीओजेके में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तान की कार्रवाई पर भारत का तीखा हमला, अंतरराष्ट्रीय जांच और जवाबदेही की उठाई मांग

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित कार्रवाई को लेकर भारत ने शुक्रवार को पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान की कार्रवाई को निंदनीय बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की अपील की है। भारत ने कहा कि पीओजेके में नागरिकों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है और इससे वहां की स्थिति लगातार बिगड़ती दिखाई दे रही है।

    विदेश मंत्रालय के नियमित साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान लगातार पीओजेके में शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ कठोर कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में 40 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। भारत का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के प्रति पाकिस्तान प्रशासन का रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों के विपरीत है।

    भारत ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने प्रदर्शनकारियों को देश का “दुश्मन” बताया था। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस तरह की टिप्पणी यह दर्शाती है कि पाकिस्तान अपने ही नागरिकों की लोकतांत्रिक आवाज को दबाने का प्रयास कर रहा है। भारत ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध करने वालों को इस प्रकार निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।

    प्रेस ब्रीफिंग के दौरान भारत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के राजनीतिक मामलों के विशेष सहायक राणा सनाउल्लाह की हालिया टिप्पणियों का भी जिक्र किया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान के वरिष्ठ नेताओं ने स्वयं स्वीकार किया है कि अतीत में जिन उग्रवादी समूहों को समर्थन दिया गया था, वे अब पाकिस्तान के लिए ही चुनौती बन गए हैं। भारत ने इसे आतंकवाद को बढ़ावा देने की नीति का परिणाम बताया।

    विदेश मंत्रालय ने कहा कि पीओजेके में हाल के घटनाक्रमों ने वहां के लोगों में असंतोष को और बढ़ा दिया है। भारत के अनुसार, वहां के नागरिक स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं और कई स्थानीय संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से हस्तक्षेप की अपील भी की है। भारत ने वैश्विक समुदाय से आग्रह किया कि वह इन आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघनों पर पाकिस्तान से जवाब मांगे।

    रिपोर्टों के अनुसार, पीओजेके के विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आई हैं। सोशल मीडिया पर साझा किए गए कई वीडियो में कथित रूप से प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग और अफरा-तफरी के दृश्य दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    भारत ने दोहराया कि पीओजेके भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां रहने वाले लोगों के अधिकारों तथा सुरक्षा को लेकर वह लगातार अपनी चिंता व्यक्त करता रहेगा। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। भारत का मानना है कि पारदर्शी जांच और जवाबदेही से ही क्षेत्र में विश्वास बहाल करने और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में सार्थक कदम उठाए जा सकते हैं।

  • यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती रिजल्ट घोषित, 76,184 अभ्यर्थी सफल, सामान्य का कट-ऑफ OBC से ज्यादा

    यूपी पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती रिजल्ट घोषित, 76,184 अभ्यर्थी सफल, सामान्य का कट-ऑफ OBC से ज्यादा


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा का बहुप्रतीक्षित परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिया गया। 32,679 रिक्त पदों के लिए आयोजित लिखित परीक्षा में 76,184 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने विभिन्न वर्गों की कट-ऑफ सूची भी जारी कर दी है। अब सफल अभ्यर्थियों को दस्तावेज सत्यापन (DV), शारीरिक मानक परीक्षण (PST) और शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) से गुजरना होगा।

    जनरल की कट-ऑफ सबसे ज्यादा
    भर्ती बोर्ड के अनुसार, सामान्य वर्ग की कट-ऑफ 258.03 अंक रही, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 251.63 अंक निर्धारित की गई। इस तरह सामान्य वर्ग की कट-ऑफ ओबीसी से करीब 7 अंक अधिक रही। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की कट-ऑफ ओबीसी से कम रही। वहीं अनुसूचित जाति (SC) की कट-ऑफ 239.34 और अनुसूचित जनजाति (ST) की 210.10 अंक रही।

    17 अगस्त से होगा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन
    भर्ती बोर्ड ने बताया कि सफल अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन (DV) और फिजिकल स्टैंडर्ड टेस्ट (PST) 17 अगस्त से शुरू होगा। इसके बाद सितंबर में शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) आयोजित की जाएगी। इन चरणों की विस्तृत जानकारी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अंतिम चयन सूची प्रकाशित होगी।

    फिजिकल टेस्ट में दौड़ होगी अनिवार्य
    शारीरिक दक्षता परीक्षा में पुरुष अभ्यर्थियों को 4.8 किलोमीटर की दौड़ 25 मिनट में पूरी करनी होगी। वहीं महिला अभ्यर्थियों को 2.4 किलोमीटर की दौड़ 14 मिनट के भीतर पूरी करनी होगी।

    करीब 29 लाख ने किया था आवेदन
    इस भर्ती प्रक्रिया के लिए 28,86,797 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें 19,62,560 पुरुष और 9,24,237 महिला उम्मीदवार शामिल थीं। लिखित परीक्षा 8, 9 और 10 जून को प्रदेश के सभी 75 जिलों में बनाए गए 1,183 परीक्षा केंद्रों पर छह पालियों में आयोजित की गई थी।

    6.94 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में नहीं पहुंचे
    भर्ती बोर्ड के अनुसार, कुल 21,92,236 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जबकि करीब 6.94 लाख उम्मीदवार अनुपस्थित रहे। परीक्षा 300 अंकों की थी, जिसमें 150 प्रश्न पूछे गए थे और प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का था। इस बार परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग नहीं रखी गई थी।

    फर्जीवाड़े पर सख्ती
    परीक्षा के दौरान नकल और फर्जीवाड़े पर कड़ी निगरानी रखी गई। ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक सत्यापन और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के जरिए अनियमितताओं पर नजर रखी गई। इस दौरान 12 मुकदमे दर्ज किए गए और 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

  • भारत में जुट सकते हैं दुनिया के बड़े नेता, BRICS समिट में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की संभावित मौजूदगी पर टिकी नजर

    भारत में जुट सकते हैं दुनिया के बड़े नेता, BRICS समिट में शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की संभावित मौजूदगी पर टिकी नजर

    नई दिल्ली । भारत सितंबर 2026 में होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेजबानी की तैयारी में जुटा है। इस सम्मेलन को लेकर सबसे अधिक चर्चा चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा को लेकर हो रही है। यदि उनका दौरा तय होता है, तो यह कोविड-19 महामारी और वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुए सीमा विवाद के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है, यह सम्मेलन भारत की कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भी शामिल होने की संभावना है। रूस की ओर से पहले ही संकेत दिए जा चुके हैं कि राष्ट्रपति पुतिन भारत यात्रा कर सकते हैं। वहीं ब्रिक्स के नए सदस्य देशों में शामिल ईरान भी सम्मेलन में भाग लेने की तैयारी कर रहा है। हालांकि ईरान की ओर से किस स्तर का प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। यदि सभी प्रमुख नेता सम्मेलन में शामिल होते हैं तो यह हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण बहुपक्षीय बैठकों में से एक होगी।

    ब्रिक्स सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले महीने किर्गिस्तान में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में भाग लेने की संभावना भी जताई जा रही है। इस दौरान उनकी रूस, चीन और ईरान सहित कई सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात हो सकती है। यह बैठक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद एससीओ देशों की पहली शीर्ष स्तरीय बैठक मानी जा रही है, इसलिए क्षेत्रीय सुरक्षा, पश्चिम एशिया की स्थिति, ऊर्जा सहयोग, व्यापार और बहुपक्षीय साझेदारी जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शी जिनपिंग नई दिल्ली आते हैं तो यह भारत और चीन के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत होगा। पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवाद और तनाव के कारण दोनों देशों के रिश्तों में दूरी आई थी, लेकिन हाल के महीनों में संवाद बढ़ाने के प्रयास भी तेज हुए हैं। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की संभावित मुलाकात द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने की दृष्टि से अहम मानी जा रही है। सीमा प्रबंधन, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर भी चर्चा की संभावना जताई जा रही है।

    इस बीच पाकिस्तान की ओर से भी संकेत मिले हैं कि वर्ष 2027 में इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले एससीओ शिखर सम्मेलन के लिए भारत सहित सभी सदस्य देशों को औपचारिक निमंत्रण भेजा जाएगा। पाकिस्तान सितंबर 2026 से एससीओ की अध्यक्षता संभालेगा और मेजबान देश होने के नाते सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को आमंत्रित करना उसकी जिम्मेदारी होगी। इस घटनाक्रम को भी क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नई दिल्ली में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर अब दुनिया की नजरें टिकी हैं। यदि चीन, रूस, भारत और अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेता एक मंच पर आते हैं, तो वैश्विक आर्थिक सहयोग, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, व्यापार, निवेश, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे कई अहम मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की उम्मीद है। ऐसे में यह सम्मेलन केवल सदस्य देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक परिदृश्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

  • भारतीय रेलवे की बड़ी डिजिटल पहल, अब टिकट बुकिंग के साथ ही ऑनलाइन बुक होगा अतिरिक्त सामान, पार्सल काउंटर के चक्कर खत्म

    भारतीय रेलवे की बड़ी डिजिटल पहल, अब टिकट बुकिंग के साथ ही ऑनलाइन बुक होगा अतिरिक्त सामान, पार्सल काउंटर के चक्कर खत्म

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को और बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल करते हुए अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग की नई सेवा शुरू कर दी है। अब ट्रेन का कन्फर्म टिकट बुक कराने वाले यात्री उसी समय निर्धारित मुफ्त सीमा से अधिक सामान ले जाने के लिए ऑनलाइन बुकिंग और भुगतान भी कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों को पार्सल कार्यालय की लंबी कतारों और अतिरिक्त कागजी प्रक्रिया से राहत देना है, जिससे पूरी प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।

    अब तक रेलवे में मुफ्त सीमा से अधिक सामान लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों को स्टेशन के पार्सल कार्यालय में जाकर अलग से बुकिंग करानी पड़ती थी। इसके लिए अतिरिक्त समय और औपचारिकताओं का सामना करना पड़ता था। नई ऑनलाइन सुविधा लागू होने के बाद यह पूरी प्रक्रिया टिकट बुकिंग के साथ ही पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों का समय बचेगा और यात्रा से पहले होने वाली असुविधा भी काफी हद तक कम होगी।

    रेलवे ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा केवल कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी। साथ ही इसका लाभ केवल उन श्रेणियों में मिलेगा, जहां मुफ्त सीमा से अधिक सामान निर्धारित शुल्क देकर ले जाने की अनुमति है। एसी फर्स्ट क्लास, एसी टू-टियर, फर्स्ट क्लास, स्लीपर क्लास और सेकेंड क्लास के यात्री इस सुविधा का उपयोग कर सकेंगे। वहीं एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, क्योंकि इन श्रेणियों में मुफ्त सामान की सीमा और अधिकतम अनुमत सीमा समान निर्धारित है।

    रेलवे के मौजूदा नियमों के अनुसार एसी फर्स्ट क्लास के यात्री बिना अतिरिक्त शुल्क के 70 किलोग्राम तक सामान ले जा सकते हैं, जबकि निर्धारित शुल्क देकर अधिकतम 150 किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति है। एसी टू-टियर और फर्स्ट क्लास में 50 किलोग्राम तक मुफ्त तथा अधिकतम 100 किलोग्राम तक सामान ले जाया जा सकता है। स्लीपर क्लास में यात्रियों को 40 किलोग्राम तक मुफ्त सामान ले जाने की अनुमति है और अतिरिक्त शुल्क देकर यह सीमा 80 किलोग्राम तक बढ़ाई जा सकती है। सेकेंड क्लास में 35 किलोग्राम तक सामान मुफ्त है, जबकि अधिकतम 70 किलोग्राम तक सामान ले जाने की अनुमति दी गई है।

    दूसरी ओर, एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार के यात्रियों के लिए 40 किलोग्राम की सीमा ही मुफ्त और अधिकतम अनुमत सीमा दोनों है। इसी कारण इन श्रेणियों में अतिरिक्त सामान की ऑनलाइन बुकिंग का विकल्प उपलब्ध नहीं कराया गया है। रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुफ्त सीमा से अधिक लेकिन अधिकतम अनुमत सीमा के भीतर सामान ले जाने पर यात्रियों को निर्धारित अतिरिक्त शुल्क देना अनिवार्य होगा।

    रेलवे ने सामान के आकार को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सामान्य श्रेणियों में यात्री 100 सेंटीमीटर × 60 सेंटीमीटर × 25 सेंटीमीटर तक के ट्रंक, सूटकेस या बक्से अपने साथ ले जा सकते हैं। वहीं एसी थ्री-टियर और एसी चेयर कार में सामान का अधिकतम आकार 55 सेंटीमीटर × 45 सेंटीमीटर × 22.5 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है।

    रेलवे का मानना है कि यह नई डिजिटल सुविधा यात्रियों के लिए यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था से न केवल स्टेशन पर भीड़ कम होगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और समयबद्ध भी बनेगी। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ भारतीय रेलवे यात्रियों को आधुनिक और बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार नए कदम उठा रहा है।

  • दिल्ली दंगा केस: IB अधिकारी की हत्या के दोषी ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, कोर्ट ने बताया गंभीर अपराध

    दिल्ली दंगा केस: IB अधिकारी की हत्या के दोषी ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, कोर्ट ने बताया गंभीर अपराध

    नई दिल्ली। वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान खुफिया ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने शुक्रवार को पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि इस अपराध ने पूरे समाज को झकझोर दिया था।

    इस मामले में अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन, नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को हत्या, अपहरण, दंगा और सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का दोषी करार दिया था। वहीं, मुकदमे में शामिल 11 आरोपियों में से छह को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया।

    कोर्ट ने क्या कहा
    अदालत ने अपने फैसले में कहा कि ताहिर हुसैन उस हिंसक भीड़ का हिस्सा थे, जो हथियारों से लैस होकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा, आगजनी और लूटपाट के इरादे से एकत्रित हुई थी। कोर्ट के अनुसार, इसी भीड़ ने लगातार और बेरहमी से हमला कर आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की।

    पुलिस ने फांसी की मांग की थी
    सजा पर बहस के दौरान दिल्ली पुलिस ने अदालत से दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी। अभियोजन पक्ष का कहना था कि अंकित शर्मा की मौत के बाद भी उन पर हमला जारी रखा गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि हत्या बेहद क्रूर और पूर्व नियोजित थी। इसलिए यह मामला फांसी की सजा के योग्य है।

    बचाव पक्ष की दलील
    ताहिर हुसैन के वकील ने अदालत में दलील दी कि हर हत्या का मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ की श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दोषी की व्यक्तिगत भूमिका स्पष्ट रूप से अलग-अलग स्थापित नहीं की गई है, इसलिए मृत्युदंड उचित नहीं होगा।

    नाले में मिला था अंकित शर्मा का शव
    दिल्ली में 23 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर शुरू हुई हिंसा के बीच 25 फरवरी को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। अगले दिन उनका शव चांदबाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले से बरामद किया गया। अंकित शर्मा के पिता रविंदर कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में मामला दर्ज हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन AAP पार्षद ताहिर हुसैन और उनके साथियों ने हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया।

    2020 के दिल्ली दंगों में 53 लोगों की हुई थी मौत
    23 से 26 फरवरी 2020 के बीच नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन के दौरान उत्तर-पूर्वी दिल्ली में व्यापक हिंसा हुई थी। इस दौरान 53 लोगों की मौत हुई, जबकि 250 से अधिक लोग घायल हुए थे। मृतकों में 38 मुस्लिम और 15 हिंदू शामिल थे। हिंसा में करीब 800 दुकानों और 500 से अधिक मकानों को भी आग के हवाले कर दिया गया था।