Blog

  • भोपाल के DB मॉल के सामने खंभे में दौड़ रहा था करंट, छूने से BJP युवा मोर्चा नेता की मौत

    भोपाल के DB मॉल के सामने खंभे में दौड़ रहा था करंट, छूने से BJP युवा मोर्चा नेता की मौत


    भोपाल। राजधानी भोपाल के एमपी नगर में रविवार रात दर्दनाक हादसे में भाजपा युवा मोर्चा के जिला महामंत्री दिव्यऋषि तिवारी की करंट लगने से मौत हो गई। वे परिवार के साथ डीबी मॉल में खरीदारी करने पहुंचे थे। सड़क पार करते समय उन्होंने स्ट्रीट लाइट के खंभे को पकड़ लिया, जिसमें करंट दौड़ रहा था। हादसे में उनकी पत्नी भी करंट की चपेट में आईं, लेकिन उन्होंने खुद को बिजली के संपर्क से अलग कर लिया।

    सड़क पार करते समय खंभे को पकड़ा, लगा जोरदार झटका

    जानकारी के मुताबिक, दिव्यऋषि तिवारी रविवार रात परिवार के साथ डीबी मॉल में खरीदारी करने आए थे। परिवार का वाहन सड़क की दूसरी तरफ खड़ा था। खरीदारी के बाद परिवार के सदस्य सड़क पार कर रहे थे। इसी दौरान दिव्यऋषि ने सड़क किनारे लगे स्ट्रीट लाइट के खंभे को पकड़ लिया।

    खंभे में पहले से करंट दौड़ रहा था। जैसे ही उन्होंने उसे हाथ लगाया, उन्हें जोरदार बिजली का झटका लगा। बताया जा रहा है कि खंभे से एक तार निकला हुआ था और इसी तार के कारण खंभे में करंट आने की बात सामने आई है।

    हादसे के दौरान उनकी पत्नी भी बिजली की चपेट में आ गईं। हालांकि, उन्होंने किसी तरह खुद को करंट के संपर्क से अलग कर लिया। दिव्यऋषि को ज्यादा करंट लगने से उनकी हालत गंभीर हो गई।

    ट्रैफिक पुलिस ने मौके पर दिया CPR

    हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मी तुरंत मदद के लिए पहुंचे। ट्रैफिक हेड कांस्टेबल जगदीश दांगी के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने दिव्यऋषि तिवारी को मौके पर ही CPR देने की कोशिश की।

    इसके बाद उन्हें तत्काल नर्मदा अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें AIIMS ले जाने की सलाह दी। पुलिसकर्मी उन्हें लेकर AIIMS पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद दिव्यऋषि तिवारी को मृत घोषित कर दिया।

    घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम पसर गया। परिवार के साथ शॉपिंग के लिए निकले दिव्यऋषि की अचानक मौत से परिजन सदमे में हैं।

    खंभे से निकला तार अलग कराया गया

    ट्रैफिक हेड कांस्टेबल जगदीश दांगी ने बताया कि परिवार ने वाहन सड़क की दूसरी तरफ खड़ा किया था। सड़क पार करते समय खंभे से निकले तार के कारण पति-पत्नी करंट की चपेट में आए। पत्नी खुद को बिजली के संपर्क से अलग करने में कामयाब रहीं, लेकिन दिव्यऋषि को ज्यादा करंट लगा।

    पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जानकारी में यह खंभा मेट्रो या PWD से जुड़ा बताया जा रहा है। हादसे के बाद पुलिस ने मौके पर कार्रवाई करते हुए खंभे से निकले तार को अलग करवा दिया, ताकि वहां दोबारा किसी व्यक्ति के करंट की चपेट में आने का खतरा न रहे।

    खुले तार और स्ट्रीट लाइट के खंभों की सुरक्षा पर सवाल

    हादसे के बाद सड़क किनारे लगे स्ट्रीट लाइट के खंभों और खुले तारों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों ने हादसे के लिए प्रशासनिक लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    घटना ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि सार्वजनिक स्थानों पर लगे बिजली और स्ट्रीट लाइट के खंभों की नियमित जांच और मेंटेनेंस किस तरह किया जा रहा है। खासकर ऐसे स्थानों पर, जहां बड़ी संख्या में लोग रोजाना आते-जाते हैं, खुले तार या करंट का रिसाव गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

    जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि खंभे में करंट कैसे पहुंचा और उससे निकले खुले तार की स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार था।

    पुलिस घटनास्थल से जुड़े तथ्यों के साथ वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्था की भी पड़ताल कर रही है। खंभा किस विभाग के अधीन है और बिजली का संपर्क वहां तक कैसे पहुंचा, इन बिंदुओं की भी जांच की जा रही है।

    जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि हादसे के पीछे किस स्तर पर लापरवाही हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटा रही है।

  • आज का राशिफल 28 सितंबर 2026, सितारों के बदलते संकेत से इन राशियों की खुलेगी राह, जानें मेष से मीन तक भविष्यफल

    आज का राशिफल 28 सितंबर 2026, सितारों के बदलते संकेत से इन राशियों की खुलेगी राह, जानें मेष से मीन तक भविष्यफल


    नई दिल्ली । 28 सितंबर 2026 का दिन कई राशियों के लिए नई उम्मीदें और महत्वपूर्ण अवसर लेकर आ सकता है। ग्रहों की स्थिति के प्रभाव से कुछ लोगों को कार्यक्षेत्र में सफलता मिलने के संकेत हैं तो कुछ राशि वालों को अपने खर्च और फैसलों को लेकर सावधानी बरतनी होगी। नौकरी करने वाले लोगों के लिए दिन महत्वपूर्ण रह सकता है। कामकाज में नई जिम्मेदारी मिलने के साथ वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है। कारोबार करने वाले जातकों को किसी पुराने संपर्क से लाभ मिलने की संभावना है। वहीं परिवार में किसी सदस्य के साथ चल रही नाराजगी दूर हो सकती है और घर का माहौल बेहतर बनेगा।

    मेष राशि वालों के लिए दिन मेहनत के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है। कार्यक्षेत्र में आपकी सक्रियता नजर आएगी और किसी महत्वपूर्ण काम की जिम्मेदारी मिल सकती है। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा। वृषभ राशि के जातकों को धन से जुड़े मामलों में राहत मिल सकती है। रुका हुआ भुगतान मिलने की संभावना है और कारोबार में नए अवसर सामने आ सकते हैं। मिथुन राशि वालों के लिए आज बातचीत के जरिए कई काम आसान हो सकते हैं। नौकरी में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा और परिवार से जुड़ा कोई जरूरी निर्णय लेना पड़ सकता है।

    कर्क राशि वालों के लिए दिन सामान्य से बेहतर रह सकता है। काम के दबाव के बावजूद आप महत्वपूर्ण कार्य समय पर पूरा करने में सफल हो सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। सिंह राशि वालों को अपने आत्मविश्वास का लाभ मिलेगा। नौकरी और कारोबार में नई योजना पर काम शुरू हो सकता है। हालांकि किसी भी निवेश से पहले पूरी जानकारी लेना बेहतर रहेगा। कन्या राशि वालों के लिए आज का दिन आर्थिक दृष्टि से उपयोगी रह सकता है। पुरानी योजना से फायदा मिल सकता है और कामकाज में आपकी मेहनत का परिणाम सामने आएगा।

    तुला राशि वालों को रिश्तों और काम के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। किसी करीबी व्यक्ति से महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। वृश्चिक राशि के जातकों को करियर में आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। लंबे समय से अटका काम पूरा होने से मन प्रसन्न रहेगा। धनु राशि वालों के लिए यात्रा या काम से जुड़ी कोई नई जानकारी मिल सकती है। नए लोगों से संपर्क भविष्य में उपयोगी साबित हो सकता है।

    मकर राशि वालों को आज अपने खर्च पर नियंत्रण रखना चाहिए। अनावश्यक खरीदारी से बजट प्रभावित हो सकता है। कुंभ राशि वालों के लिए दिन नई शुरुआत का संकेत दे रहा है। नौकरी बदलने या नई जिम्मेदारी से जुड़ा विचार आगे बढ़ सकता है। मीन राशि वालों को परिवार का सहयोग मिलेगा और मानसिक रूप से सकारात्मक महसूस कर सकते हैं। किसी पुराने मित्र से मुलाकात या बातचीत दिन को खास बना सकती है। कुल मिलाकर 28 सितंबर का दिन कई राशियों के लिए नए अवसरों और बदलाव के संकेत लेकर आया है। महत्वपूर्ण फैसले लेते समय अपनी परिस्थितियों को ध्यान में रखना और जल्दबाजी से बचना सभी राशि वालों के लिए उपयोगी रहेगा।

  • बेटी के जन्मदिन पर पत्नी को बुलाया नहीं आई तो बढ़ा तनाव बच्ची से मिलने की कोशिश भी नाकाम रही युवक की मौत

    बेटी के जन्मदिन पर पत्नी को बुलाया नहीं आई तो बढ़ा तनाव बच्ची से मिलने की कोशिश भी नाकाम रही युवक की मौत


    भोपाल । भोपाल के हबीबगंज थाना क्षेत्र में एक युवक की मौत के मामले ने परिवार और रिश्तों से जुड़े विवाद को सामने ला दिया है। 25 वर्षीय सावन पचौरी पिछले काफी समय से पारिवारिक तनाव से गुजर रहा था। परिजनों के मुताबिक उसकी पत्नी करीब दो साल से अलग रह रही थी। दोनों ने लगभग तीन साल पहले प्रेम विवाह किया था लेकिन बेटी के जन्म के बाद उनके बीच विवाद बढ़ता गया और पत्नी अलग रहने लगी। सावन अपनी छोटी बेटी से मिलना चाहता था और परिवार के अनुसार बच्ची से दूरी उसके लिए लगातार परेशानी का कारण बनी हुई थी।

    मामले के मुताबिक 22 सितंबर को सावन की बेटी का दूसरा जन्मदिन था। वह चाहता था कि बेटी का जन्मदिन परिवार के साथ मनाया जाए। इसी उम्मीद में उसने पत्नी से घर आने के लिए संपर्क किया था। परिजनों के अनुसार सावन ने पत्नी से केवल एक दिन के लिए घर आने और बच्ची का जन्मदिन मनाने के बाद वापस जाने की बात कही थी। हालांकि पत्नी घर नहीं आई। परिजनों का कहना है कि इस घटना के बाद सावन काफी परेशान रहने लगा था।

    बताया गया कि इसके बाद सावन अपनी बच्ची से मिलने की कोशिश कर रहा था लेकिन करीब दो दिन पहले उसे बच्ची से मिलने का मौका नहीं मिला। परिवार के अनुसार इस बात से उसका तनाव और बढ़ गया था। शुक्रवार शाम उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों को जब स्थिति की जानकारी हुई तो वे उसे तत्काल हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए इलाज शुरू किया लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हो सका।

    रविवार को इलाज के दौरान सावन की मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस प्रारंभिक स्तर पर पारिवारिक विवाद और बच्ची से नहीं मिल पाने के कारण बने तनाव के पहलू की जांच कर रही है। साथ ही परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पत्नी से जुड़े घटनाक्रम को भी जांच में शामिल किया गया है।

    सावन 12 नंबर मल्टी के फ्लैट में परिवार के साथ रहता था और प्लास्टिक इंजीनियरिंग से जुड़े काम करता था। उसकी मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। रविवार को परिजनों की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस पारिवारिक विवाद से जुड़े सभी पहलुओं को समझने का प्रयास कर रही है।

  • अभिजीत दीपके के मेंटर कौन? वीडियो कॉल में सामने आया आजिंक्य शिंदे का नाम, जंतर-मंतर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

    अभिजीत दीपके के मेंटर कौन? वीडियो कॉल में सामने आया आजिंक्य शिंदे का नाम, जंतर-मंतर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके के राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों में किसकी अहम भूमिका रहती है, इसे लेकर एक वीडियो कॉल के दौरान जानकारी सामने आई है। बातचीत में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आजिंक्य शिंदे का नाम दीपके के मेंटर के तौर पर लिया। दीपके ने भी रांका की बात पर सहमति जताई।

    वीडियो कॉल में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और आजिंक्य शिंदे संगठन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते नजर आए। इसी दौरान रांका ने बताया कि आजिंक्य शिंदे, सीजेपी के गठन से पहले से ही दीपके के मेंटर रहे हैं और अब संगठन के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

    बातचीत में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया गया। आशुतोष रांका ने बताया कि इस आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से चलाने में आजिंक्य शिंदे की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके मुताबिक मंच पर दूसरे लोग नजर आते थे, लेकिन आंदोलन के पीछे की व्यवस्थाओं को संभालने और उसे आगे बढ़ाने का काम शिंदे कर रहे थे।

    अभिजीत दीपके ने भी इस बात का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वॉलेंटियर्स की टीम तैयार करने, भीड़ को व्यवस्थित करने और प्रदर्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने जैसी कई जिम्मेदारियां आजिंक्य शिंदे ने निभाई थीं।

    दीपके ने बातचीत के दौरान कहा कि आंदोलन के समय वह मुख्य रूप से आजिंक्य शिंदे, सौरभ दास और आशुतोष रांका को ही जानते थे। उन्होंने यह भी बताया कि मंच पर मौजूद लोग अपनी भूमिका निभा रहे थे, जबकि आंदोलन की वास्तविक व्यवस्थाओं और संगठनात्मक काम में शिंदे की बड़ी भागीदारी थी।

    दीपके के मुताबिक जंतर-मंतर पहुंचने के बाद वॉलेंटियर्स की एक बड़ी टीम तैयार हुई। बाद में यही टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी। दीपके ने इस टीम को तैयार करने में आजिंक्य शिंदे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

    बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि आजिंक्य शिंदे दीपके को सोने तक नहीं देते। इससे संगठन के भीतर शिंदे की सक्रियता और दीपके के साथ उनके लगातार संपर्क का संकेत मिलता है।

    आजिंक्य शिंदे इससे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। महाराष्ट्र में उन्होंने पार्टी की युवा इकाई में जिम्मेदारी संभाली थी और गोवा के सह प्रभारी के तौर पर भी काम किया था। सीजेपी के गठन के बाद उन्हें संगठन में राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    संगठन में उनकी भूमिका मुख्य रूप से विस्तार, टीम निर्माण और रणनीतिक काम से जुड़ी बताई गई है। वीडियो कॉल में सामने आई बातचीत के अनुसार, वह अभिजीत दीपके के साथ सलाह-मशविरा भी करते हैं और संगठन की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में सक्रिय रहते हैं।

    आजिंक्य शिंदे की कार्यशैली अपेक्षाकृत पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाली बताई गई है। यही वजह है कि संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बावजूद सार्वजनिक स्तर पर उनकी पहचान अभिजीत दीपके और दूसरे प्रमुख चेहरों की तुलना में कम दिखाई देती है। वीडियो कॉल में हुई बातचीत ने सीजेपी के भीतर उनकी भूमिका और दीपके के साथ उनके संबंधों को लेकर नई जानकारी सामने रखी है।भिजीत दीपके के मेंटर कौन? वीडियो कॉल में सामने आया आजिंक्य शिंदे का नाम, जंतर-मंतर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

    संक्षिप्त सार: वीडियो कॉल में आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके ने आजिंक्य शिंदे को दीपके का मेंटर बताया और जंतर-मंतर आंदोलन में उनकी भूमिका का जिक्र किया।

    Keywords: Abhijeet, Ajinkya, CJP, Protest, Mentor

    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके के राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों में किसकी अहम भूमिका रहती है, इसे लेकर एक वीडियो कॉल के दौरान जानकारी सामने आई है। बातचीत में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आजिंक्य शिंदे का नाम दीपके के मेंटर के तौर पर लिया। दीपके ने भी रांका की बात पर सहमति जताई।

    वीडियो कॉल में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और आजिंक्य शिंदे संगठन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते नजर आए। इसी दौरान रांका ने बताया कि आजिंक्य शिंदे, सीजेपी के गठन से पहले से ही दीपके के मेंटर रहे हैं और अब संगठन के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

    बातचीत में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया गया। आशुतोष रांका ने बताया कि इस आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से चलाने में आजिंक्य शिंदे की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके मुताबिक मंच पर दूसरे लोग नजर आते थे, लेकिन आंदोलन के पीछे की व्यवस्थाओं को संभालने और उसे आगे बढ़ाने का काम शिंदे कर रहे थे।

    अभिजीत दीपके ने भी इस बात का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वॉलेंटियर्स की टीम तैयार करने, भीड़ को व्यवस्थित करने और प्रदर्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने जैसी कई जिम्मेदारियां आजिंक्य शिंदे ने निभाई थीं।

    दीपके ने बातचीत के दौरान कहा कि आंदोलन के समय वह मुख्य रूप से आजिंक्य शिंदे, सौरभ दास और आशुतोष रांका को ही जानते थे। उन्होंने यह भी बताया कि मंच पर मौजूद लोग अपनी भूमिका निभा रहे थे, जबकि आंदोलन की वास्तविक व्यवस्थाओं और संगठनात्मक काम में शिंदे की बड़ी भागीदारी थी।

    दीपके के मुताबिक जंतर-मंतर पहुंचने के बाद वॉलेंटियर्स की एक बड़ी टीम तैयार हुई। बाद में यही टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी। दीपके ने इस टीम को तैयार करने में आजिंक्य शिंदे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

    बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि आजिंक्य शिंदे दीपके को सोने तक नहीं देते। इससे संगठन के भीतर शिंदे की सक्रियता और दीपके के साथ उनके लगातार संपर्क का संकेत मिलता है।

    आजिंक्य शिंदे इससे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। महाराष्ट्र में उन्होंने पार्टी की युवा इकाई में जिम्मेदारी संभाली थी और गोवा के सह प्रभारी के तौर पर भी काम किया था। सीजेपी के गठन के बाद उन्हें संगठन में राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    संगठन में उनकी भूमिका मुख्य रूप से विस्तार, टीम निर्माण और रणनीतिक काम से जुड़ी बताई गई है। वीडियो कॉल में सामने आई बातचीत के अनुसार, वह अभिजीत दीपके के साथ सलाह-मशविरा भी करते हैं और संगठन की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में सक्रिय रहते हैं।

    आजिंक्य शिंदे की कार्यशैली अपेक्षाकृत पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाली बताई गई है। यही वजह है कि संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बावजूद सार्वजनिक स्तर पर उनकी पहचान अभिजीत दीपके और दूसरे प्रमुख चेहरों की तुलना में कम दिखाई देती है। वीडियो कॉल में हुई बातचीत ने सीजेपी के भीतर उनकी भूमिका और दीपके के साथ उनके संबंधों को लेकर नई जानकारी सामने रखी है।भिजीत दीपके के मेंटर कौन? वीडियो कॉल में सामने आया आजिंक्य शिंदे का नाम, जंतर-मंतर आंदोलन में निभाई अहम भूमिका

    संक्षिप्त सार: वीडियो कॉल में आशुतोष रांका और अभिजीत दीपके ने आजिंक्य शिंदे को दीपके का मेंटर बताया और जंतर-मंतर आंदोलन में उनकी भूमिका का जिक्र किया।

    Keywords: Abhijeet, Ajinkya, CJP, Protest, Mentor

    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके के राजनीतिक और संगठनात्मक फैसलों में किसकी अहम भूमिका रहती है, इसे लेकर एक वीडियो कॉल के दौरान जानकारी सामने आई है। बातचीत में सीजेपी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आजिंक्य शिंदे का नाम दीपके के मेंटर के तौर पर लिया। दीपके ने भी रांका की बात पर सहमति जताई।

    वीडियो कॉल में अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और आजिंक्य शिंदे संगठन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते नजर आए। इसी दौरान रांका ने बताया कि आजिंक्य शिंदे, सीजेपी के गठन से पहले से ही दीपके के मेंटर रहे हैं और अब संगठन के साथ भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

    बातचीत में जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन का भी उल्लेख किया गया। आशुतोष रांका ने बताया कि इस आंदोलन को व्यवस्थित तरीके से चलाने में आजिंक्य शिंदे की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उनके मुताबिक मंच पर दूसरे लोग नजर आते थे, लेकिन आंदोलन के पीछे की व्यवस्थाओं को संभालने और उसे आगे बढ़ाने का काम शिंदे कर रहे थे।

    अभिजीत दीपके ने भी इस बात का समर्थन किया। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान वॉलेंटियर्स की टीम तैयार करने, भीड़ को व्यवस्थित करने और प्रदर्शन से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने जैसी कई जिम्मेदारियां आजिंक्य शिंदे ने निभाई थीं।

    दीपके ने बातचीत के दौरान कहा कि आंदोलन के समय वह मुख्य रूप से आजिंक्य शिंदे, सौरभ दास और आशुतोष रांका को ही जानते थे। उन्होंने यह भी बताया कि मंच पर मौजूद लोग अपनी भूमिका निभा रहे थे, जबकि आंदोलन की वास्तविक व्यवस्थाओं और संगठनात्मक काम में शिंदे की बड़ी भागीदारी थी।

    दीपके के मुताबिक जंतर-मंतर पहुंचने के बाद वॉलेंटियर्स की एक बड़ी टीम तैयार हुई। बाद में यही टीम देश के अलग-अलग हिस्सों में संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ी। दीपके ने इस टीम को तैयार करने में आजिंक्य शिंदे की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

    बातचीत के दौरान आशुतोष रांका ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि आजिंक्य शिंदे दीपके को सोने तक नहीं देते। इससे संगठन के भीतर शिंदे की सक्रियता और दीपके के साथ उनके लगातार संपर्क का संकेत मिलता है।

    आजिंक्य शिंदे इससे पहले आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं। महाराष्ट्र में उन्होंने पार्टी की युवा इकाई में जिम्मेदारी संभाली थी और गोवा के सह प्रभारी के तौर पर भी काम किया था। सीजेपी के गठन के बाद उन्हें संगठन में राष्ट्रीय संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।

    संगठन में उनकी भूमिका मुख्य रूप से विस्तार, टीम निर्माण और रणनीतिक काम से जुड़ी बताई गई है। वीडियो कॉल में सामने आई बातचीत के अनुसार, वह अभिजीत दीपके के साथ सलाह-मशविरा भी करते हैं और संगठन की योजनाओं को जमीन पर लागू करने में सक्रिय रहते हैं।

    आजिंक्य शिंदे की कार्यशैली अपेक्षाकृत पर्दे के पीछे रहकर काम करने वाली बताई गई है। यही वजह है कि संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होने के बावजूद सार्वजनिक स्तर पर उनकी पहचान अभिजीत दीपके और दूसरे प्रमुख चेहरों की तुलना में कम दिखाई देती है। वीडियो कॉल में हुई बातचीत ने सीजेपी के भीतर उनकी भूमिका और दीपके के साथ उनके संबंधों को लेकर नई जानकारी सामने रखी है।

  • राजनाथ सिंह बोले- चिप से जहाज और स्क्रू से हथियार तक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी

    राजनाथ सिंह बोले- चिप से जहाज और स्क्रू से हथियार तक, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी

    नई दिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि बदलते वैश्विक सुरक्षा माहौल में भारत को अपनी रक्षा विनिर्माण क्षमता मजबूत करने के साथ-साथ महत्वपूर्ण तकनीकों पर अधिक नियंत्रण हासिल करना होगा। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को रणनीतिक स्वायत्तता से जोड़ते हुए कहा कि देश में जिस चीज का निर्माण संभव है, उसे घरेलू स्तर पर तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है।

    राजधानी में आयोजित रक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत की सोच स्पष्ट है कि जो वस्तु देश में बनाई जा सकती है, उसके लिए आयात पर निर्भरता कम की जाए। उन्होंने कहा कि चिप से लेकर जहाजों तक और छोटे स्क्रू से लेकर पूरी हथियार प्रणालियों तक घरेलू उत्पादन की क्षमता विकसित करना भारत को रणनीतिक रूप से अधिक सक्षम बनाएगा।

    रक्षा मंत्री ने स्वदेशी डिजाइन, नवाचार और देश की जरूरतों के अनुरूप तकनीक विकसित करने को भविष्य की रक्षा तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, रक्षा आपूर्ति श्रृंखला के अहम हिस्सों का निर्माण देश में करने और उन पर नियंत्रण रखने से राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी तथा विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटेगी।

    सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता केवल मौजूदा जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। लंबी अवधि की तैयारियों के लिए महत्वपूर्ण तकनीकों में विशेषज्ञता हासिल करना और पूरे विनिर्माण तंत्र को मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में सरकार ने घरेलू रक्षा उद्योग को गति देने के लिए कई संरचनात्मक और परिवर्तनकारी सुधार किए हैं।

    रक्षा मंत्री ने युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह दूरसंचार तकनीक 2जी से 5जी तक पहुंची, उसी तरह युद्ध भी तकनीक के नए चरण में प्रवेश कर चुका है। आधुनिक संघर्षों में तकनीकी क्षमता सैन्य अभियानों और उनके परिणामों को तेजी से प्रभावित कर रही है।

    उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक, रोबोटिक्स, स्वायत्त प्रणालियां और साइबर सुरक्षा अब आधुनिक युद्ध का अभिन्न हिस्सा बन रही हैं। भारत इन क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ रक्षा नवाचार के लिए जरूरी नीतिगत ढांचे को भी मजबूत कर रहा है।

    सिंह के अनुसार, भारत संपर्क आधारित और गैर-संपर्क युद्ध के साथ-साथ काइनेटिक और नॉन-काइनेटिक सैन्य अभियानों से निपटने की क्षमता बढ़ा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधनों में विविधता लाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि रणनीतिक जरूरतों के समय निर्भरता कम रहे।

    उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धक्षेत्र कई क्षेत्रों में फैले होंगे और उनमें तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ेगी। अत्याधुनिक तकनीकों में बढ़त हासिल करने वाले देशों के पास बदलती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए अधिक सक्षम साधन होंगे।

    रक्षा मंत्री ने देश के युवाओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि युवा भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और स्वायत्त प्रणालियों जैसी तकनीकों पर काम कर रहे हैं। उनके मुताबिक युवा केवल भविष्य की नौकरियों के लिए तैयारी नहीं कर रहे, बल्कि देश की भविष्य की रक्षा जरूरतों के लिए तकनीक विकसित करने में भी योगदान दे रहे हैं।

  • भारत समुद्री बीमा पूल ने कारोबारियों को दिया युद्ध-जोखिम कवरेज, अब तक 3000 से अधिक पॉलिसी जारी

    भारत समुद्री बीमा पूल ने कारोबारियों को दिया युद्ध-जोखिम कवरेज, अब तक 3000 से अधिक पॉलिसी जारी

    नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण समुद्री कारोबार से जुड़े जोखिम बढ़ने के बीच भारत समुद्री बीमा पूल ने भारतीय समुद्री क्षेत्र के लिए युद्ध-जोखिम बीमा की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की है। इसके तहत अब तक 3000 से अधिक माल युद्ध-जोखिम बीमा पॉलिसी जारी की जा चुकी हैं। पश्चिम एशिया में टकराव के बाद युद्ध-जोखिम बीमा प्रीमियम में करीब 35 से 40 प्रतिशत की गिरावट आने की जानकारी भी सामने आई है।

    उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 7 सितंबर 2026 तक भारत समुद्री बीमा पूल ने 3000 माल युद्ध-जोखिम पॉलिसी जारी की थीं। इसके अलावा 92 जलपोत ढांचा युद्ध-जोखिम पॉलिसी और तीन संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति यानी पीएंडआई बीमा पॉलिसी भी जारी की गई हैं। इन प्रावधानों का उद्देश्य समुद्री व्यापार से जुड़े भारतीय पक्षकारों को बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच बीमा सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

    भारत समुद्री बीमा पूल भारतीय ध्वज वाले जहाजों के साथ-साथ उन जहाजों से जुड़े जोखिमों के लिए समुद्री बीमा उपलब्ध कराता है, जिनका स्वामित्व, प्रबंधन या नियंत्रण भारतीय संस्थाओं के पास है। इसके दायरे में भारत से आने या भारत से शुरू होने वाले माल को ले जाने वाले पोत भी शामिल हैं।

    इस पूल की शुरुआत मई 2026 में 13,906.50 करोड़ रुपये यानी 1.5 अरब अमेरिकी डॉलर तक के कवरेज के साथ की गई थी। इसके जरिए जहाज के ढांचे, माल, संरक्षण एवं क्षतिपूर्ति और युद्ध से जुड़े जोखिमों के लिए घरेलू स्तर पर बीमा कवरेज उपलब्ध कराया जाता है। इसका एक उद्देश्य विदेशी बीमाकर्ताओं पर निर्भरता कम करना और वैश्विक व्यवधानों के दौरान भारतीय समुद्री कारोबार को निरंतर बीमा सुरक्षा देना है।

    इस व्यवस्था के तहत बीमा पॉलिसियां घरेलू बीमा कंपनियों द्वारा जारी की जाती हैं। जोखिमों का पुनर्बीमाकरण सदस्यों की प्रतिबद्धताओं के आधार पर सामूहिक रूप से किया जाता है। 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक के दावों का निपटान आरक्षित निधियों के माध्यम से किया जाता है, जबकि इससे बड़े दावों के लिए संप्रभु गारंटी का प्रावधान रखा गया है।

    भारत समुद्री बीमा पूल के माध्यम से तटीय जहाजों के लिए युद्ध-जोखिम और पीएंडआई पॉलिसियां भी जारी की गई हैं। इसका उद्देश्य समुद्री कारोबार से जुड़े जोखिमों को कम करने के साथ बीमा लागत को नियंत्रित रखना और देश की समुद्री वित्तीय क्षमता को मजबूत करना है।

    बीमा कवरेज के तहत जहाज के मुख्य ढांचे, उसे चलाने वाली मशीनरी और उसमें लगे उपकरणों को होने वाले नुकसान से सुरक्षा मिलती है। इससे भारतीय व्यापारिक जहाजों में लगी पूंजी को बीमा सुरक्षा मिलती है और इस तरह के जोखिमों के लिए घरेलू बीमा व्यवस्था मजबूत होती है।

    इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से भेजे जाने वाले माल को नुकसान या खराब होने के जोखिम से भी सुरक्षा मिलती है। विशेष रूप से ऐसे समुद्री रास्तों पर यह कवरेज महत्वपूर्ण है, जहां जोखिम सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक रहता है। इससे भारतीय निर्यातकों और आयातकों को अपने माल की सुरक्षा के लिहाज से सहायता मिलती है।

    युद्ध-जोखिम बीमा में सशस्त्र संघर्ष, समुद्री डकैती, आतंकवाद और दुश्मन के जहाज द्वारा कब्जे जैसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को भी शामिल किया गया है। लाल सागर, होर्मुज जलडमरूमध्य और अन्य संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों से गुजरने वाले भारतीय व्यापारिक मार्गों के लिए इस तरह की सुरक्षा महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    भारत समुद्री बीमा पूल को देश की समुद्री वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था के तौर पर देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य समुद्री कारोबार से जुड़े पक्षकारों को भरोसेमंद संचालन, प्रतिस्पर्धी बीमा दरों और दावों के निपटान की विश्वसनीय व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

  • अगले हफ्ते कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव और आर्थिक आंकड़े तय करेंगे शेयर बाजार की दिशा

    अगले हफ्ते कच्चा तेल, अमेरिका-ईरान तनाव और आर्थिक आंकड़े तय करेंगे शेयर बाजार की दिशा

    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला कारोबारी सप्ताह कई महत्वपूर्ण घटनाक्रमों और आर्थिक आंकड़ों के लिहाज से अहम रहने वाला है। बाजार की दिशा पर कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और देश के प्रमुख आर्थिक आंकड़ों का असर देखने को मिल सकता है। इसके अलावा ऑटो बिक्री, जीएसटी संग्रह, पीएमआई, औद्योगिक उत्पादन, राजकोषीय घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार से जुड़े आंकड़े भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

    मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों पर बाजार की नजर बनी हुई है। कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ा कोई नया घटनाक्रम बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकता है। यदि क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं तो कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के साथ भारतीय शेयर बाजार पर भी उसका असर दिखाई दे सकता है।

    घरेलू मोर्चे पर अगले सप्ताह कई महत्वपूर्ण आंकड़े जारी होने हैं। इनमें ऑटो बिक्री के आंकड़े, जीएसटी से जुड़े आंकड़े, औद्योगिक और विनिर्माण उत्पादन, पीएमआई, राजकोषीय घाटा तथा विदेशी मुद्रा भंडार शामिल हैं। इन आंकड़ों से अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और कारोबारी गतिविधियों को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

    अगले कारोबारी सप्ताह में गांधी जयंती के कारण बाजार में केवल चार सत्रों में कारोबार होगा। छुट्टी के चलते सप्ताह सामान्य कारोबारी सप्ताह की तुलना में छोटा रहेगा। ऐसे में उपलब्ध कारोबारी सत्रों के दौरान वैश्विक घटनाक्रम और घरेलू आंकड़ों पर निवेशकों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है।

    पिछले कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार दबाव में रहा। सेंसेक्स 399.22 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,895.74 अंक पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 205.90 अंक यानी 0.88 प्रतिशत कमजोर होकर 23,140.50 अंक पर रहा।

    21 से 25 सितंबर के दौरान बड़े शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में भी गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,285.25 अंक यानी 2.07 प्रतिशत गिरकर 60,906 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 160.45 अंक यानी 0.81 प्रतिशत की कमजोरी रही और यह 19,715.25 अंक पर बंद हुआ।

    क्षेत्रीय प्रदर्शन की बात करें तो पिछले सप्ताह कुछ सेक्टरों में बढ़त रही। निफ्टी रियल्टी में 2.98 प्रतिशत, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1.14 प्रतिशत, फार्मा में 1.10 प्रतिशत, एफएमसीजी में 1.04 प्रतिशत, इंडिया डिफेंस में 0.53 प्रतिशत और हेल्थकेयर में 0.39 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।

    दूसरी ओर आईटी क्षेत्र में 2.40 प्रतिशत की गिरावट रही। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.63 प्रतिशत, सर्विसेज 1.53 प्रतिशत, प्राइवेट बैंक 1.49 प्रतिशत, इंफ्रा 1.26 प्रतिशत और एनर्जी 0.88 प्रतिशत कमजोर रहे।

    अब अगले सप्ताह बाजार की नजर वैश्विक तनाव, कच्चे तेल और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। इन घटनाक्रमों के साथ चार कारोबारी सत्रों में होने वाली गतिविधियां शेयर बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।

  • उज्जैन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नया कदम, CM मोहन यादव ने महाकाल लोक थाने का किया लोकार्पण

    उज्जैन में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए नया कदम, CM मोहन यादव ने महाकाल लोक थाने का किया लोकार्पण

    उज्जैन: में श्रद्धालुओं और शहरवासियों के लिए सार्वजनिक परिवहन की सुविधा को बढ़ाने की दिशा में नई शुरुआत हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को महाकाल लोक स्थित अन्नक्षेत्र पार्किंग परिसर से पीएम ई-बस सेवा और उज्जैन दर्शन सेवा का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने शक्ति पथ से बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम के दौरान वेदपाठी बटुकों ने वैदिक मंत्रों का वाचन किया और डमरू वादन भी हुआ।

    उज्जैन में शुरू की गई यह सेवा श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को शहर के प्रमुख धार्मिक एवं दर्शनीय स्थलों तक पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित की जाएगी। पहले चरण में धार्मिक पर्यटन के लिए 10 इलेक्ट्रिक बसों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इन बसों के जरिए यात्रियों को एक ही निर्धारित मार्ग पर उज्जैन के कई प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन में सार्वजनिक परिवहन की जरूरत को पूरा करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि करीब 21 साल पहले राज्य परिवहन निगम की बसें संचालित होती थीं, लेकिन बाद में सार्वजनिक बस सेवा बंद हो गई थी। अब इस कमी को दूर करने के लिए परिवहन व्यवस्था को दोबारा विस्तार दिया जा रहा है।

    नई व्यवस्था के तहत शहर के भीतर नगरीय बस सेवाओं के साथ दूसरे शहरों और राज्यों तक बस कनेक्टिविटी बढ़ाने की योजना भी बताई गई है। उज्जैन में धार्मिक पर्यटन को ध्यान में रखते हुए 10 बसों से शुरुआत की गई है। आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था के विस्तार के साथ यात्रियों को अन्य मार्गों पर भी सुविधा मिल सकती है। प्रदेश में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा और पीएम ई-बस सेवा के जरिए आधुनिक सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को बढ़ाया जा रहा है।

    उज्जैन दर्शन सेवा का निर्धारित मार्ग मेघदूत वन पार्किंग से शुरू होगा। यहां से बस महाकाल लोक पहुंचेगी। इसके बाद यात्रियों को हरसिद्धि मंदिर, क्षिप्रा नदी, ऋणमुक्तेश्वर महादेव, भर्तृहरि गुफा, गढ़ कालिका माता मंदिर, काल भैरव मंदिर और सिद्धवट मंदिर तक ले जाया जाएगा।

    इसके बाद मार्ग में अंगारेश्वर मंदिर, मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, भूखी माता मंदिर, चिंतामण गणेश मंदिर, अष्ट विनायक मंदिर, शनि नवग्रह मंदिर, इस्कॉन मंदिर, बस स्टैंड और उज्जैन रेलवे स्टेशन शामिल होंगे। यात्रा पूरी होने के बाद बस दोबारा मेघदूत वन पार्किंग पहुंचकर निर्धारित चक्र पूरा करेगी।

    उज्जैन दर्शन सेवा के लिए यात्रियों को 200 रुपये शुल्क देना होगा। भुगतान के लिए यूपीआई की सुविधा उपलब्ध रहेगी। बसों को इलेक्ट्रिक तकनीक पर आधारित रखा गया है, जिससे इनके संचालन के दौरान सीधे तौर पर ईंधन आधारित उत्सर्जन नहीं होगा। इससे धार्मिक और पर्यटन क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन को पर्यावरण-अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है।

    उज्जैन में पहले चरण में 10 ई-बसों से सेवा शुरू की गई है। शहर के लिए कुल 100 इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था की जा रही है और इनके लिए मक्सी रोड स्थित पुराने डिपो में चार्जिंग से जुड़ा बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में बसों की संख्या बढ़ने के साथ शहर के अन्य निर्धारित मार्गों पर भी ई-बस सेवा का विस्तार किया जाना है।

    इस नई सेवा से उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को एक ही बस रूट के जरिए कई प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने का विकल्प मिलेगा। वहीं स्थानीय नागरिकों के लिए भी शहर में सार्वजनिक परिवहन का एक आधुनिक माध्यम उपलब्ध होगा। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से धार्मिक पर्यटन और शहरी परिवहन व्यवस्था को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।

  • भिखारी बनकर घर की रेकी, डॉक्टर के घर दीवार लांघकर घुसा चोर और दिनदहाड़े मूर्ति लेकर हुआ फरार

    भिखारी बनकर घर की रेकी, डॉक्टर के घर दीवार लांघकर घुसा चोर और दिनदहाड़े मूर्ति लेकर हुआ फरार

    मध्य प्रदेश: के शहडोल जिले में दिनदहाड़े चोरी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बुढ़ार थाना क्षेत्र की आदर्श कॉलोनी में एक व्यक्ति कथित तौर पर भिखारी और मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति का भेष बनाकर कई दिनों तक इलाके में घूमता रहा। इसी दौरान उसने एक डॉक्टर के घर की रेकी की और मौका मिलते ही घर में घुसकर वहां रखी एक मूर्ति चोरी कर ली। चोरी की पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई।

    आदर्श कॉलोनी निवासी डॉक्टर ए.के. लाला अपने घर में ही क्लिनिक संचालित करते हैं। बताया गया कि घटना के समय डॉक्टर क्लिनिक खोलकर किसी काम से बाहर गए हुए थे। घर के मुख्य गेट पर ताला लगा था और उस समय घर पर कोई मौजूद नहीं था। इसी दौरान आरोपी डॉक्टर के घर के आसपास पहुंचा और मौका देखकर अंदर दाखिल हो गया।

    सीसीटीवी फुटेज में व्यक्ति पहले घर के आसपास घूमता हुआ दिखाई दे रहा है। वह कुछ देर तक आसपास की स्थिति पर नजर रखता है और यह देखता है कि वहां कोई मौजूद है या नहीं। जब उसे आसपास कोई व्यक्ति दिखाई नहीं दिया तो उसने घर में प्रवेश करने का फैसला किया।

    आरोपी ने गेट और दीवार को पार कर घर के अंदर प्रवेश किया। अंदर पहुंचने के बाद उसने घर में सामान तलाशने की कोशिश की। हालांकि, उसे कोई खास कीमती वस्तु हाथ नहीं लगी। इसके बाद उसने घर में रखी एक मूर्ति उठा ली और जिस रास्ते से अंदर आया था, उसी रास्ते से बाहर निकलकर फरार हो गया।

    घटना की खास बात यह है कि आरोपी की पूरी गतिविधि कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में उसके घर के आसपास घूमने से लेकर अंदर प्रवेश करने और मूर्ति लेकर बाहर निकलने तक की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। इससे यह भी सामने आया कि उसने घर में प्रवेश करने से पहले आसपास की स्थिति का जायजा लिया था।

    डॉक्टर ए.के. लाला के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति पिछले कुछ दिनों से इलाके में भिखारी के रूप में घूम रहा था। स्थानीय लोग उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ समझकर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे। इसी वजह से उसके लगातार इलाके में घूमने पर किसी को विशेष संदेह नहीं हुआ। डॉक्टर का कहना है कि आरोपी को जब मौका मिला तो उसने घर में प्रवेश कर मूर्ति चोरी कर ली।

    डॉक्टर ने यह भी कहा कि अगर घर में कोई कीमती सामान रखा होता तो आरोपी उसे भी अपने साथ ले जा सकता था। घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज सामने आने से अब आरोपी की पहचान और उसकी गतिविधियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

    वहीं, बुढ़ार थाना प्रभारी रजनीश तिवारी ने बताया कि घटना को लेकर थाने में फिलहाल कोई सूचना या शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद आरोपी की पहचान और घटना की वास्तविकता की जांच की जा रही है।

    फिलहाल दिनदहाड़े हुई इस चोरी ने इलाके में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। भिखारी के रूप में संदिग्ध व्यक्ति के कई दिनों तक क्षेत्र में घूमने और फिर मौका पाकर बंद घर में प्रवेश करने की घटना से लोगों में भी सतर्कता बढ़ गई है। पुलिस के स्तर पर आरोपी की पहचान और आगे की कार्रवाई के बाद ही घटना से जुड़ी पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद, संरक्षित जंगलों में सड़कों के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल

    भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट पर विवाद, संरक्षित जंगलों में सड़कों के प्रस्ताव को लेकर उठे सवाल

    भोपाल: के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शहर के व्यवस्थित विकास के उद्देश्य से तैयार किए गए इस प्रारूप में संरक्षित वन क्षेत्रों से होकर कई सड़कों के निर्माण का प्रावधान किए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि इन प्रावधानों से जंगलों और बाघों के आवास क्षेत्र पर असर पड़ सकता है।

    ड्राफ्ट में भोपाल के संरक्षित वन क्षेत्र के भीतर एक दर्जन से अधिक सड़कों का प्रस्ताव बताया गया है। इनमें 18 मीटर, 24 मीटर और 60 मीटर चौड़ी सड़कों के प्रावधान शामिल हैं। जिन क्षेत्रों में इन सड़कों का प्रस्ताव किया गया है, वहां बाघों की आवाजाही और प्रजनन गतिविधियां होने की बात कही गई है। इन वन क्षेत्रों को संरक्षित दर्जा भी प्राप्त है।

    मामले में कालियाखेड़ा, करवा चौथ, मंडोर और मंदोरी सहित कुछ वन क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है। इन इलाकों में बाघों की मौजूदगी और आवाजाही लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। साथ ही, इन क्षेत्रों की जमीन को बेहद मूल्यवान माना जाता है। आरोप लगाया गया है कि ऐसी जमीनों पर प्रभावशाली लोगों के हित जुड़े हुए हैं।

    कांग्रेस का कहना है कि इससे पहले प्रस्तावित मास्टर प्लान 2031 में भी जंगलों के बीच सड़क नेटवर्क विकसित करने के प्रावधान किए गए थे। उस समय दावे और आपत्तियां आमंत्रित किए जाने पर बड़ी संख्या में लोगों ने इन प्रावधानों का विरोध किया था। दावा है कि उस प्रक्रिया के दौरान 1500 से अधिक आपत्तियां दर्ज हुई थीं।

    कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने मास्टर प्लान के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कई स्तर पर गड़बड़ियां की गई हैं। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए जंगलों को नुकसान पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि पहले इस मामले में आपत्ति दर्ज कराई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे।

    दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी बृज गोपाल लोया ने इन आरोपों पर अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान शहर के विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसके लिए विभिन्न प्रावधानों और संबंधित दिशा-निर्देशों का अध्ययन किया गया है।

    उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर के जंगलों को किसी भी स्थिति में बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उनके अनुसार, विकास के साथ वन संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाएगा और दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।

    मास्टर प्लान 2047 का उद्देश्य आने वाले वर्षों में भोपाल के विस्तार और बुनियादी ढांचे को दिशा देना है, लेकिन संरक्षित वन क्षेत्रों से प्रस्तावित सड़कें अब इसके पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर बहस का प्रमुख विषय बन गई हैं। एक ओर शहर के विकास और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने की जरूरत बताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर वन क्षेत्र, बाघों के आवास और जैव विविधता के संरक्षण को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।

    अब इस ड्राफ्ट पर आने वाली आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसी दौरान यह स्पष्ट होगा कि संरक्षित वन क्षेत्रों से संबंधित प्रस्तावों में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं। फिलहाल मास्टर प्लान 2047 को लेकर राजनीतिक पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो चुके हैं और जंगलों के संरक्षण तथा शहरी विकास के बीच संतुलन का मुद्दा केंद्र में आ गया है।