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  • चामुंडा मंदिर में गुप्त दानदाता ने दिए 3 किलो सोना और 6 क्विंटल चांदी, गर्भगृह का बदलेगा स्वरूप

    चामुंडा मंदिर में गुप्त दानदाता ने दिए 3 किलो सोना और 6 क्विंटल चांदी, गर्भगृह का बदलेगा स्वरूप


    नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित प्रसिद्ध श्री चामुंडा नंदकेश्वर धाम के नवीनीकरण का काम तेजी से चल रहा है। करीब 400 साल पुराने इस धार्मिक स्थल को नए स्वरूप में सजाने के लिए एक गुमनाम दानदाता ने बड़ी मात्रा में सोना और चांदी देने का निर्णय लिया है। पंजाब से जुड़े इस दानदाता की ओर से देवी चामुंडा के सिंहासन के लिए 3 किलो सोना और गर्भगृह की सजावट के लिए 6 क्विंटल चांदी देने की बात सामने आई है।

    मंदिर प्रशासन के मुताबिक, दानदाता ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने का अनुरोध किया है। पहले से मंदिर में मौजूद करीब 2.85 क्विंटल चांदी को भी नए दान के साथ मिलाकर गर्भगृह की सजावट में इस्तेमाल किया जाएगा। इस तरह मंदिर के गर्भगृह को सजाने के लिए उपलब्ध चांदी की कुल मात्रा काफी अधिक हो जाएगी।

    श्री चामुंडा नंदकेश्वर धाम देवी चामुंडा को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी ने चंड और मुंड नाम के राक्षसों का वध किया था। इसी प्रसंग से देवी के चामुंडा स्वरूप का संबंध बताया जाता है। मंदिर परिसर में देवी के मुख्य मंदिर के साथ भगवान शिव का स्वयंभू शिवलिंग भी स्थित है। इसी वजह से यह स्थान चामुंडा नंदकेश्वर धाम के नाम से भी जाना जाता है।

    नवीनीकरण के तहत गर्भगृह में विशेष मार्बल लगाया जा रहा है। इसके लिए वियतनाम से मार्बल मंगाया जा रहा है, जबकि मंदिर के अन्य हिस्सों में राजस्थान के मकराना का मार्बल इस्तेमाल किया जा रहा है। मंदिर में पत्थर और मार्बल से जुड़े काम को तेजी से पूरा किया जा रहा है। उम्मीद है कि नवीनीकरण का यह चरण इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा।

    मंदिर के नंदकेश्वर हिस्से को सुंदर बनाने का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। यहां एक स्वयंभू शिवलिंग स्थित है, जिसके ऊपर एक बड़ा पत्थर मौजूद है। इसके अलावा यज्ञशाला का काम भी पूरा हो चुका है। मंदिर परिसर में किए जा रहे कई अन्य कार्यों में भी दानदाताओं का सहयोग लिया जा रहा है। इनमें से कुछ दानदाताओं ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की इच्छा जताई है।

    चामुंडा धाम धार्मिक आस्था के साथ अपनी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। विवाह के बाद नए शादीशुदा जोड़े यहां दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पूरे वर्ष मंदिर में आते हैं। मंदिर बानेर नदी के किनारे स्थित है और हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    मंदिर से जुड़ी स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, कई सदियों पहले एक स्थानीय राजा और पुजारी ने देवी से प्रार्थना की थी कि उनका पवित्र स्थान पहाड़ी की दुर्गम चोटी से हटाकर ऐसी जगह स्थापित किया जाए, जहां श्रद्धालुओं के लिए पहुंचना आसान हो। मान्यता है कि देवी ने पुजारी के सपने में आकर बानेर नदी के किनारे एक स्थान पर खुदाई करने को कहा था।

    कहा जाता है कि खुदाई के दौरान वहां पत्थर की एक प्राचीन मूर्ति मिली। शुरुआत में लोगों ने उसे सामान्य चट्टान समझा और कई लोगों ने उसे उठाने का प्रयास किया, लेकिन वे सफल नहीं हुए। बाद में पुजारी ने स्नान कर श्रद्धापूर्वक वहां पहुंचकर मूर्ति को आसानी से उठा लिया और उसे वर्तमान स्थान पर स्थापित किया। इसी घटना को मंदिर की स्थापना से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताओं में गिना जाता है।

  • पितृ पक्ष 2026 में इन 10 कामों से रहें दूर, 27 सितंबर से शुरू श्राद्ध पक्ष में रखें इन बातों का ध्यान

    पितृ पक्ष 2026 में इन 10 कामों से रहें दूर, 27 सितंबर से शुरू श्राद्ध पक्ष में रखें इन बातों का ध्यान


    नई दिल्ली । पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत 27 सितंबर से हो रही है और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा। यह अवधि हिंदू परंपरा में पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दौरान कई परिवार खानपान और दैनिक जीवन से जुड़े कुछ नियमों का पालन करते हैं। हालांकि, इन नियमों में परिवार और क्षेत्र के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए किसी एक परंपरा को सभी के लिए अनिवार्य नहीं माना जाता।

    पितृ पक्ष के दौरान आम तौर पर सादगी, सात्विक भोजन, संयम और शांत वातावरण को महत्व दिया जाता है। कई परिवार इस अवधि में मांसाहार, शराब और अन्य नशीले पदार्थों से दूरी रखते हैं। भोजन बनाते समय स्वच्छता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखने की परंपरा भी है।

    कई परिवारों में पितृ पक्ष के दौरान बाल और नाखून काटने से बचने की मान्यता है। कुछ लोग पूरे श्राद्ध पक्ष में इसका पालन करते हैं, जबकि अन्य परिवारों में ऐसा नियम नहीं होता। इसलिए इस मामले में अपनी पारिवारिक परंपरा को प्राथमिकता दी जा सकती है।

    इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य बड़े मांगलिक कार्यक्रमों को टालने की परंपरा भी कई परिवारों में है। पितृ पक्ष को मुख्य रूप से पूर्वजों के स्मरण और श्राद्ध कर्म के लिए समर्पित समय माना जाता है, इसलिए बड़े शुभ कार्यों की शुरुआत इसके बाद करने की मान्यता है।

    श्राद्ध पक्ष में घर का माहौल शांत रखने पर भी जोर दिया जाता है। अनावश्यक विवाद, गुस्सा और कलह से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही बुजुर्गों, जरूरतमंदों और अन्य लोगों का अपमान न करने की परंपरा बताई जाती है। अपनी क्षमता के अनुसार भोजन, वस्त्र या जरूरी सामान का दान और सेवा करना भी इस अवधि से जोड़ा जाता है।

    पितृ पक्ष में झूठ, छल-कपट और गलत तरीके से धन कमाने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इस दौरान व्यक्ति को अपने व्यवहार में संयम रखना चाहिए और अच्छे कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।

    श्राद्ध के लिए तैयार किए गए भोजन की बर्बादी से भी बचना चाहिए। जरूरत के अनुसार भोजन तैयार करने और जरूरतमंदों को भोजन कराने की परंपरा कई जगहों पर है। अन्न का सम्मान करने और उसे व्यर्थ न गंवाने पर जोर दिया जाता है।

    श्राद्ध की तिथि तय करते समय संबंधित हिंदू तिथि को महत्व दिया जाता है। सामान्य अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख के बजाय जिस तिथि को व्यक्ति का निधन हुआ था, उसके अनुसार श्राद्ध करने की परंपरा है। तिथि को लेकर भ्रम होने पर स्थानीय पंचांग की सहायता ली जा सकती है।

    पितृ पक्ष 2026 में 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों का श्राद्ध एक ही दिन होगा। तिथि क्षय के कारण दोनों श्राद्ध एक साथ पड़ रहे हैं। वहीं 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या होगी। जिन पितरों की निर्धारित श्राद्ध तिथि ज्ञात नहीं है या किसी कारण से उस दिन श्राद्ध नहीं हो पाया, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा है।

    पितृ पक्ष की प्रमुख तिथियों में 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध, 27 सितंबर को प्रतिपदा, 28 को द्वितीया, 29 को तृतीया, 30 को चतुर्थी-पंचमी, 1 अक्टूबर को षष्ठी, 2 को सप्तमी, 3 को अष्टमी, 4 को नवमी, 5 को दशमी, 6 को एकादशी, 7 को द्वादशी, 8 को त्रयोदशी, 9 को चतुर्दशी और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या शामिल है।

  • 90 के दशक का ‘चंद्रकांता’ शो, जिसे देखने सुनसान हो जाती थीं सड़कें, इरफान खान भी थे अहम किरदारों में

    90 के दशक का ‘चंद्रकांता’ शो, जिसे देखने सुनसान हो जाती थीं सड़कें, इरफान खान भी थे अहम किरदारों में


    नई दिल्ली । 90 के दशक का दौर भारतीय टेलीविजन के लिए बेहद खास था। उस समय मनोरंजन के साधन सीमित थे और कुछ टीवी कार्यक्रम ऐसे थे, जिनका प्रसारण शुरू होते ही लोगों की दिनचर्या तक बदल जाती थी। इन्हीं लोकप्रिय धारावाहिकों में ‘चंद्रकांता’ का नाम भी शामिल है। यह शो रविवार की सुबह प्रसारित होता था और इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग अपने जरूरी काम तक टाल देते थे। कहा जाता है कि इसके प्रसारण के दौरान कई जगहों पर सड़कें तक सुनसान नजर आती थीं।

    ‘चंद्रकांता’ का प्रसारण 1994 से 1996 के बीच रविवार सुबह 9 बजे हुआ करता था। अपने दौर में इस धारावाहिक ने दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई। इसकी कहानी, रहस्य, रोमांच और काल्पनिक दुनिया ने लोगों को टेलीविजन से जोड़े रखा। उस समय घरों में परिवार के लोग एक साथ बैठकर इस शो को देखा करते थे।

    इस धारावाहिक की कहानी देवकी नंदन खत्री के प्रसिद्ध उपन्यास ‘चंद्रकांता’ पर आधारित थी। उपन्यास की काल्पनिक दुनिया को टेलीविजन पर प्रस्तुत करना उस समय एक बड़ी चुनौती थी। शो में अय्यारी और तिलिस्म जैसे तत्वों को प्रमुखता दी गई थी। अय्यारी में भेष बदलने और चालाकी से परिस्थितियों को प्रभावित करने की कला दिखाई जाती थी, जबकि तिलिस्म रहस्यमय और जादुई दुनिया से जुड़ा था।

    शो के कई किरदार दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए। चंद्रकांता, वीरेंद्र सिंह और क्रूर सिंह के साथ बद्रीनाथ और सोमनाथ जैसे किरदारों ने भी अपनी अलग पहचान बनाई। खास बात यह रही कि बाद में हिंदी सिनेमा के चर्चित अभिनेता इरफान खान भी इस धारावाहिक का हिस्सा रहे। उन्होंने बद्रीनाथ और सोमनाथ नाम के जुड़वां भाइयों की भूमिकाएं निभाईं। यह उनके शुरुआती टेलीविजन कामों में से एक था और इसने उनके अभिनय सफर में महत्वपूर्ण स्थान बनाया।

    ‘चंद्रकांता’ को उस समय की तकनीकी सीमाओं के बावजूद इसके दृश्य प्रभावों और काल्पनिक प्रस्तुति के लिए भी याद किया जाता है। अय्यारी, तिलिस्म और रहस्यमय घटनाओं को पर्दे पर दिखाने का तरीका दर्शकों के लिए नया अनुभव था। धारावाहिक की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि इसके किरदार और संवाद लंबे समय तक लोगों के बीच चर्चा में बने रहे।

    हालांकि, शो का सफर पूरी तरह आसान नहीं रहा। प्रसारण को लेकर दूरदर्शन के साथ विवाद और कानूनी लड़ाई की स्थिति बनी। इसी विवाद के चलते धारावाहिक को एक समय बीच में ही बंद करना पड़ा। अचानक प्रसारण रुकने से इसके प्रशंसकों में निराशा फैल गई। बाद में शो को दोबारा शुरू किया गया, लेकिन पहले जैसी लोकप्रियता कायम नहीं रह सकी।

    आज भी ‘चंद्रकांता’ को 90 के दशक के उन धारावाहिकों में याद किया जाता है, जिन्होंने भारतीय टेलीविजन दर्शकों के बीच फैंटेसी और रहस्य आधारित कहानियों के लिए मजबूत जगह बनाई। इसके साथ जुड़ी दर्शकों की यादें, लोकप्रिय किरदार और इरफान खान की मौजूदगी इसे उस दौर के चर्चित टीवी शो में शामिल करती है।

  • एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, कबड्डी में दो गोल्ड समेत एक दिन में जीते 7 पदक

    एशियन गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन, कबड्डी में दो गोल्ड समेत एक दिन में जीते 7 पदक


    नई दिल्ली । एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। 26 सितंबर का दिन भारत के लिए खास रहा, जब खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल सात पदक अपने नाम किए। इनमें दो स्वर्ण, चार रजत और एक कांस्य पदक शामिल रहे। इस प्रदर्शन के साथ भारत की कुल पदक संख्या बढ़कर 30 हो गई। शनिवार का सबसे बड़ा आकर्षण कबड्डी रहा, जहां भारतीय पुरुष और महिला दोनों टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया।

    पुरुष कबड्डी टीम ने फाइनल में ईरान को 40-34 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। मुकाबला शुरुआत से ही कड़ा रहा और ईरानी टीम ने भारतीय खिलाड़ियों को लगातार चुनौती दी। हालांकि, निर्णायक समय में भारतीय टीम ने बेहतर खेल दिखाया और मुकाबले को अपने पक्ष में कर लिया। इस जीत के साथ भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने एशियाई खेलों में एक और स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

    महिला कबड्डी टीम ने भी फाइनल में ईरान को 37-34 से मात दी। भारतीय महिलाओं ने पूरे मुकाबले में संयम बनाए रखा और करीबी मुकाबले में जीत हासिल कर अपना खिताब बरकरार रखा। महिला टीम की इस सफलता से भारत को दिन का दूसरा स्वर्ण पदक मिला।

    एथलेटिक्स में तेजिंदरपाल सिंह तूर ने शॉटपुट में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। उनके प्रदर्शन से भारत को एथलेटिक्स में महत्वपूर्ण पदक मिला। पुरुषों की मैराथन में सावन बारवाल ने नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए रजत पदक हासिल किया। उनकी यह उपलब्धि लंबी दूरी की दौड़ में भारत के लिए महत्वपूर्ण रही।

    शूटिंग में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। महिलाओं की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम स्पर्धा में तिलोत्तमा सेन, विदर्सा के. विनोद और आशी चौकसी की तिकड़ी ने रजत पदक जीता। भारतीय टीम ने कुल 1,763 अंक हासिल किए और स्वर्ण जीतने वाली चीन की टीम से 10 अंक पीछे रही। चीन ने 1,773 अंक बनाए।

    400 मीटर दौड़ में प्राची चौधरी ने 53.21 सेकंड का समय निकालकर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और कांस्य पदक जीता। उन्होंने फाइनल में बेहतर रणनीति के साथ दौड़ पूरी की और कई ऊंची रैंकिंग वाली प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए पोडियम पर जगह बनाई।

    स्क्वैश में जोशना चिनप्पा और वेलवन सेंथिलकुमार की भारतीय जोड़ी ने मिश्रित युगल सेमीफाइनल में हांगकांग की ली का यी और तांग मिंग होंग की जोड़ी को कड़ी चुनौती दी। भारतीय जोड़ी को 1-2 से हार मिली, लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचने के कारण उन्होंने कांस्य पदक पक्का कर लिया।

    हॉकी में भी भारतीय पुरुष टीम ने जापान को 2-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। अभिषेक ने शुरुआती दौर में गोल कर भारत को बढ़त दिलाई, जबकि कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर टीम की जीत सुनिश्चित की। इस तरह 26 सितंबर को कबड्डी के दो स्वर्ण समेत सात पदकों के साथ भारत की पदक तालिका और मजबूत हुई।

  • रीति तिवारी की मां पर एक्स स्टेपफादर एकम बावा के गंभीर आरोप, बोले- रिश्ते के दौरान बहुत टॉर्चर हुआ

    रीति तिवारी की मां पर एक्स स्टेपफादर एकम बावा के गंभीर आरोप, बोले- रिश्ते के दौरान बहुत टॉर्चर हुआ

    रीति तिवारी की निजी जिंदगी और पारिवारिक रिश्तों को लेकर चल रही चर्चा के बीच उनके एक्स स्टेपफादर और सिंगर एकम बावा ने कई गंभीर दावे किए हैं। एकम ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए रीति तिवारी और उनकी मां रानी तिवारी पर आरोप लगाए। उनका कहना है कि रानी और रीति के साथ रहने के दौरान उन्हें काफी परेशानी और कथित तौर पर टॉर्चर का सामना करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि वह आने वाले दिनों में इस रिश्ते से जुड़े कई और घटनाक्रम सामने रखेंगे।

    एकम बावा ने अपने एक नए वीडियो में रानी तिवारी के साथ हुई कथित बहस का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि रात करीब 9 से 10 बजे के बीच किसी बात को लेकर उनकी और रानी की नोकझोंक हो गई थी। एकम के मुताबिक, इसी दौरान रीति उनके कमरे में आईं और अलमारी में रखे उनके कपड़ों को हैंगर से उतारकर जमीन पर फेंक दिया। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद रीति ने उनसे वहां से निकल जाने के लिए कहा।

    सिंगर ने आगे दावा किया कि उस दौरान रीति और उनकी मां रानी ने उनसे कहा कि वह जो करना चाहते हैं, कर सकते हैं। एकम के अनुसार, उन्होंने दोनों से यह समझने की कोशिश की कि आखिर उनसे इस परिस्थिति में क्या उम्मीद की जा रही है। उनका आरोप है कि रानी और रीति के साथ रहने के दौरान उन्हें मानसिक रूप से काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    एकम बावा ने यह भी कहा कि वह अब इन घटनाओं को एक-एक करके सामने रखेंगे। उनके मुताबिक, जब तक रीति तिवारी बिग बॉस 20 के घर में रहेंगी, तब तक वह रोज उनके और परिवार के बीच हुए कथित घटनाक्रम से जुड़ी कोई नई बात साझा करने की योजना बना रहे हैं। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए इन आरोपों पर रीति तिवारी और रानी तिवारी की ओर से कोई जवाब इस जानकारी में सामने नहीं आया है।

    एकम ने इससे पहले भी रानी तिवारी के साथ अपने रिश्ते को लेकर कई बातें साझा की थीं। उनके दावे के मुताबिक, वह वर्ष 2020 से 2025 तक रानी तिवारी और रीति के साथ एक ही फ्लैट में रहे। उन्होंने बताया कि रीति को उनकी मां और उनके रिश्ते के बारे में जानकारी थी।

    अपने पिछले दावों में एकम ने कहा था कि वर्ष 2020 से 2022 तक वह और रानी तिवारी लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। इसके बाद 18 फरवरी 2022 को दोनों ने शादी कर ली। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में रानी और रीति के साथ अपनी तस्वीरें भी साझा की थीं।

    अब एकम के ताजा वीडियो के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। उनके आरोपों में पुराने रिश्ते के दौरान हुए कथित विवादों और उनके अनुभवों का जिक्र है। फिलहाल सामने आई जानकारी में एकम बावा के दावों का पक्ष मौजूद है, जबकि रीति तिवारी और रानी तिवारी की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया की जानकारी नहीं है। ऐसे में मामले से जुड़े दावों की पुष्टि संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही हो सकेगी।

  • प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद परिवार का दावा, दो साल से नहीं हुई मुलाकात और फोन पर भी संपर्क बंद था

    प्रेमानंद महाराज के शिष्य की मौत के बाद परिवार का दावा, दो साल से नहीं हुई मुलाकात और फोन पर भी संपर्क बंद था


    नई दिल्ली । वृंदावन में प्रसिद्ध कथावाचक प्रेमानंद महाराज के शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 10 बजे बाराह घाट मार्ग स्थित गुरु कृपा कुंज आश्रम की छत से गिरने के बाद दीपक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें तत्काल एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मौत की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

    दीपक के बहनोई सोनू पटेल ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार के लोग आनन-फानन में आश्रम पहुंचे थे। परिवार को शुरुआत में यह बताया गया कि दीपक गिर गए हैं और अस्पताल में उनका ऑपरेशन होना है। परिजन जब आश्रम पहुंचे तो उन्हें बाहर बैठने के लिए कहा गया। सोनू के मुताबिक, परिवार के सदस्य कई घंटे तक बाहर इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें घटना से जुड़ी पूरी जानकारी तत्काल नहीं दी गई।

    परिजनों के अनुसार, दीपक लोधी वर्ष 2024 से आश्रम से जुड़े हुए थे। सोनू पटेल का दावा है कि गुरु दक्षिणा लेने के बाद से दीपक की परिवार से मुलाकात नहीं हो पाई थी। परिवार का कहना है कि जब भी कोई सदस्य उनसे मिलने के लिए पहुंचता था, तो उसे काफी देर तक इंतजार करना पड़ता था। इस वजह से परिजनों का दीपक से संपर्क बेहद सीमित हो गया था।

    सोनू पटेल ने यह भी बताया कि दीपक पिछले करीब दो वर्षों से अपने पास मोबाइल फोन नहीं रखते थे। ऐसे में परिवार के लोग उनसे फोन पर भी बातचीत नहीं कर पाते थे। परिजनों के मुताबिक, लंबे समय से उनका दीपक से सीधा संपर्क नहीं था। मौत की खबर मिलने के बाद परिवार ने कई सवाल उठाए हैं और घटना की पूरी जानकारी सामने आने की मांग की है।

    उधर, घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन मौत की परिस्थितियों को लेकर जांच अभी जारी है। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आवश्यक जानकारी जुटाई। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए हैं।

    दीपक के शरीर पर चोट के निशान मिलने की बात भी सामने आई है। ये चोटें छत से गिरने के कारण आईं या इससे पहले लगी थीं, इसका स्पष्ट पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि दीपक की मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटना के पीछे आत्महत्या के अलावा कोई अन्य कारण तो नहीं है।

    फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच से मिलने वाले साक्ष्यों का इंतजार है। पुलिस घटनास्थल, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मौत की परिस्थितियों को समझने की कोशिश कर रही है। वहीं, दीपक के परिजन घटना को लेकर कई सवालों के जवाब चाहते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह और घटनाक्रम की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • पितृ पक्ष में आज प्रतिपदा श्राद्ध, जानें तर्पण-पिंडदान का शुभ मुहूर्त और विधि

    पितृ पक्ष में आज प्रतिपदा श्राद्ध, जानें तर्पण-पिंडदान का शुभ मुहूर्त और विधि

    नई दिल्ली । पितृपक्ष में तिथिनुसार पितरों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, उसी तिथि के अनुसार पितृपक्ष में उसका श्राद्ध किया जाता है। वर्ष 2026 में 27 सितंबर को प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। प्रतिपदा श्राद्ध उन पितरों के लिए किया जाता है, जिनका निधन हिंदू पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि को हुआ हो।

    हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 26 सितंबर की रात 10 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 27 सितंबर की रात 8 बजकर 58 मिनट तक रहेगी। इसी वजह से प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध 27 सितंबर, रविवार को किया जाएगा। इस दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है।

    पितरों के श्राद्ध और तर्पण के लिए कुतुप मुहूर्त को विशेष महत्व दिया जाता है। सामान्य तौर पर 27 सितंबर को कुतुप मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 53 मिनट तक बताया गया है। हालांकि अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और स्थानीय समय के अंतर के कारण मुहूर्त में कुछ बदलाव हो सकता है। इसलिए श्राद्ध कर्म करने वाले लोगों को अपने स्थान के अनुसार पंचांग से समय की पुष्टि करनी चाहिए।

    श्राद्ध कर्म की परंपरा में सबसे पहले दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठने का विधान बताया गया है। इसके बाद पितरों को चावल, जौ, काले तिल, घी और शहद से तैयार किया गया पिंड अर्पित किया जाता है। पिंड अर्पित करने की इस प्रक्रिया को पिंडदान कहा जाता है। इसके बाद कुशा से बनी अंगूठी अनामिका उंगली में धारण कर पितरों को जल अर्पित किया जाता है। इस प्रक्रिया को तर्पण कहा जाता है। तर्पण के बाद पितरों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है।

    श्राद्ध कर्म में भोजन और दान की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान-दक्षिणा देने की परंपरा है। इसके अलावा गाय, कुत्ते, कौए और चींटियों जैसे जीवों को भी भोजन अर्पित किया जाता है। इसे पंचबली या पंचग्रास कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस परंपरा को पितरों के प्रति श्रद्धा और सम्मान से जोड़कर देखा जाता है।

    पितरों का श्राद्ध कौन कर सकता है, इसे लेकर भी अलग-अलग पारिवारिक और धार्मिक परंपराएं हैं। सामान्य मान्यता के अनुसार पुत्र, पौत्र या परिवार का कोई पुरुष सदस्य श्राद्ध और तर्पण कर सकता है। हालांकि वर्तमान समय में कई परिवारों में महिलाएं भी पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म करती हैं। श्राद्ध की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

  • रामायण इवेंट में चार घंटे की देरी से नाराज मीडिया ने किया वॉकआउट, देर रात जारी हुए फिल्म के दो नए पोस्टर

    रामायण इवेंट में चार घंटे की देरी से नाराज मीडिया ने किया वॉकआउट, देर रात जारी हुए फिल्म के दो नए पोस्टर

    नई दिल्ली । मुंबई में रणबीर कपूर स्टारर फिल्म ‘रामायण’ के प्रमोशनल इवेंट में उस समय अव्यवस्था की स्थिति बन गई, जब तय समय से करीब चार घंटे की देरी के बाद मीडियाकर्मियों ने कार्यक्रम से दूरी बना ली। दोपहर 1:30 बजे शुरू होने वाली प्रेस मीट के लिए लंबे समय तक कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। लगातार इंतजार के बीच मौजूद पत्रकारों में नाराजगी बढ़ती गई। बाद में कार्यक्रम में देरी की वजह इंटरनेशनल कंटेंट क्रिएटर मिस्टरबीस्ट की प्राइवेट फ्लाइट छूटना बताई गई।

    कार्यक्रम में देरी के साथ ही आयोजन की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे। बताया गया कि मीडियाकर्मियों द्वारा स्थिति को लेकर जानकारी मांगे जाने के बावजूद काफी देर तक उन्हें कोई स्पष्ट अपडेट नहीं दिया गया। इसके बाद पब्लिसिटी टीम के रवैये को लेकर भी असंतोष सामने आया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब कथित तौर पर इंतजार नहीं कर पाने वाले लोगों को कार्यक्रम से जाने की बात कही गई।

    मीडियाकर्मियों के कार्यक्रम से चले जाने की जानकारी रणबीर कपूर तक पहुंचने के बाद उनके कथित बयान ने भी नाराजगी को बढ़ा दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में पत्रकार इवेंट से बाहर हो गए। परिणामस्वरूप करीब एक घंटे के लिए निर्धारित प्रेस सेशन को केवल दस मिनट में ही समाप्त करना पड़ा। इस दौरान फिल्म से जुड़ी कोई बड़ी घोषणा नहीं हो सकी।

    दस मिनट के इस छोटे से कार्यक्रम में रणबीर कपूर ने प्रतीकात्मक रूप से शिव धनुष उठाया और प्रार्थना की। इसके बाद देर से पहुंचे मिस्टरबीस्ट से उन्होंने संक्षिप्त बातचीत भी की। मंच पर फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा, निर्देशक नितेश तिवारी, अभिनेत्री साई पल्लवी और अभिनेता रवि दुबे भी मौजूद थे। हालांकि कार्यक्रम का समय कम हो जाने के कारण निर्धारित गतिविधियां पूरी तरह नहीं हो सकीं और किसी बड़े ऐलान की जानकारी सामने नहीं आई।

    इवेंट में हुए घटनाक्रम के बाद देर रात फिल्म से जुड़े दो नए पोस्टर जारी किए गए। इनमें एक पोस्टर में यश को रावण के किरदार में दिखाया गया है, जबकि दूसरे पोस्टर में राम, लक्ष्मण और सीता को वनवास की ओर जाते हुए दर्शाया गया है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी चर्चा है।

    महर्षि वाल्मीकि के महाकाव्य पर आधारित इस सिनेमाई प्रोजेक्ट में रणबीर कपूर भगवान राम और साई पल्लवी माता सीता की भूमिका निभा रही हैं। यश रावण के किरदार में नजर आएंगे। फिल्म में सनी देओल भगवान हनुमान, रवि दुबे लक्ष्मण, लारा दत्ता कैकेयी, रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा, काजल अग्रवाल मंदोदरी और अरुण गोविल राजा दशरथ की भूमिका में दिखाई देंगे।

    यह फिल्म दो भागों में बनाई जा रही है। इसका पहला भाग दिवाली 2026 के दौरान सिनेमाघरों में रिलीज किए जाने की योजना है, जबकि दूसरा हिस्सा 2027 में बड़े पर्दे पर आएगा। फिल्म का निर्माण प्राइम फोकस स्टूडियोज और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स मिलकर कर रहे हैं।

  • इंदौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप, BJP नेत्री और पति की सड़क पर पिटाई, दोनों पक्षों ने कराया केस

    इंदौर में मामूली विवाद ने लिया हिंसक रूप, BJP नेत्री और पति की सड़क पर पिटाई, दोनों पक्षों ने कराया केस


    इंदौर  । इंदौर के नंदबाग इलाके में शनिवार देर रात पड़ोसियों के बीच हुआ विवाद मारपीट में बदल गया। इस घटना में वार्ड 16 बूथ की बीजेपी अध्यक्ष रिंकू उर्फ दीक्षा और उनके पति के साथ मारपीट किए जाने की बात सामने आई है। विवाद के बाद दोनों पक्षों के लोग बाणगंगा थाने पहुंचे जहां पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। पुलिस ने घटना के बाद संबंधित लोगों का मेडिकल परीक्षण भी कराया है।
    बाणगंगा पुलिस के मुताबिक नंदबाग इलाके में रहने वाले पड़ोसियों के बीच किसी बात को लेकर पहले कहासुनी हुई थी। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। आरोप है कि विजय राहुल शर्मा और उनके साथ मौजूद अन्य लोगों ने बीजेपी नेत्री दीक्षा और उनके पति के साथ मारपीट की। बताया गया है कि इस दौरान दोनों को सड़क पर पटककर भी पीटा गया।

    घटना के बाद मौके पर काफी देर तक विवाद की स्थिति बनी रही। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें दोनों पक्षों के बीच मारपीट होती दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि विवाद के दौरान दोनों पक्ष एक दूसरे के वीडियो बनाते रहे। इसके बाद मामला शांत होने पर दोनों पक्ष अपने अपने लोगों के साथ थाने पहुंचे।

    पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत को दर्ज करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायतों में दोनों तरफ से मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर संबंधित लोगों का मेडिकल कराया है ताकि चोटों की स्थिति का भी पता लगाया जा सके। अधिकारियों के मुताबिक जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं स्थानीय रहवासियों की ओर से बीजेपी नेत्री को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। कुछ रहवासियों का कहना है कि दीक्षा स्थानीय पार्षद का नाम लेकर आए दिन उनके साथ बदसलूकी करती हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस दोनों पक्षों की शिकायतों और आरोपों की जांच कर रही है।

    घटना के बाद सोशल मीडिया पर मारपीट से जुड़े वीडियो वायरल हो रहे हैं। वीडियो और शिकायतों के आधार पर पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। फिलहाल मामला दोनों पक्षों की शिकायत और एफआईआर के बाद जांच के चरण में है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • ज्ञानेश कुमार को हटाना इतना आसान नहीं! नोटिस से राष्ट्रपति के आदेश तक, जानिए CEC को हटाने का पूरा प्रोसेस

    ज्ञानेश कुमार को हटाना इतना आसान नहीं! नोटिस से राष्ट्रपति के आदेश तक, जानिए CEC को हटाने का पूरा प्रोसेस

    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच उन्हें पद से हटाने की मांग भी चर्चा में है। मौजूदा समय में ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त हैं और उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें CEC के रूप में पदभार संभाला था।

    CEC को पद से हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी अधिकारियों से अलग और काफी कठिन है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाया जाता है। 2023 के संबंधित कानून में भी यही प्रावधान दोहराया गया है।

    सबसे पहले संसद में देना होता है नोटिस

    CEC को हटाने की प्रक्रिया संसद में प्रस्ताव के नोटिस से शुरू होती है। लोकसभा में दिए जाने वाले नोटिस पर कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में दिए जाने वाले नोटिस पर कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति के पास यह अधिकार होता है कि वे उपलब्ध सामग्री पर विचार करने के बाद प्रस्ताव को स्वीकार करें या खारिज कर दें।

    अगर दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिया जाता है तो दोनों सदनों में प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद ही जांच समिति गठित की जाती है। यदि नोटिस अलग-अलग दिनों में आता है तो संबंधित प्रक्रिया पहले उस सदन में आगे बढ़ती है जहां प्रस्ताव पहले स्वीकार किया गया हो।

    तीन सदस्यीय समिति करती है आरोपों की जांच

    प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई जाती है। Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत समिति में—

    • सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या किसी अन्य न्यायाधीश में से एक सदस्य,
    • किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश में से एक सदस्य,
    • एक प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ

    शामिल होते हैं। दोनों सदनों में एक ही दिन नोटिस दिए जाने की स्थिति में समिति लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति संयुक्त रूप से गठित करते हैं।

    रिपोर्ट के बाद संसद में होता है मतदान

    समिति आरोपों की जांच करती है और अपनी रिपोर्ट देती है। यदि समिति आरोपों को साबित मानती है, तो मामला संसद के सामने आगे बढ़ता है। इसके बाद दोनों सदनों में प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान होता है।

    CEC को हटाने के लिए प्रस्ताव को लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में विशेष बहुमत से पारित होना जरूरी है। संविधान में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने के लिए प्रत्येक सदन में कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। CEC के लिए भी अनुच्छेद 324(5) के तहत यही संवैधानिक मानक लागू होता है।

    अंत में राष्ट्रपति लेते हैं अंतिम फैसला

    दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद संसद राष्ट्रपति को हटाने के लिए अपना अभिभाषण प्रस्तुत करती है। इसके बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं। यानी केवल संसद में नोटिस देने या बहस शुरू होने से CEC को पद से नहीं हटाया जा सकता; पूरी संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है।

    CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों में बड़ा अंतर

    मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की हटाने की प्रक्रिया अलग है। संविधान के अनुसार CEC को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश पर हटा सकते हैं।

    इसलिए CEC के खिलाफ महज राजनीतिक मांग या संसद में नोटिस दिए जाने से तत्काल पद से हटाने की कार्रवाई नहीं होती। प्रस्ताव, उसकी स्वीकार्यता, जांच समिति, दोनों सदनों में विशेष बहुमत और अंत में राष्ट्रपति के आदेश—इन सभी चरणों से गुजरना पड़ता है।