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  • यूएनएससी के शुरुआती पोल में रेबेका ग्रिनस्पैन आगे, महिला महासचिव की मांग के बीच तेज हुई चुनावी प्रक्रिया

    यूएनएससी के शुरुआती पोल में रेबेका ग्रिनस्पैन आगे, महिला महासचिव की मांग के बीच तेज हुई चुनावी प्रक्रिया

    नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के चुनाव की शुरुआती प्रक्रिया में संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास सम्मेलन (यूएनसीटीएडी) की महासचिव रेबेका ग्रिनस्पैन ने बढ़त हासिल कर ली है। सुरक्षा परिषद के पहले अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल में ग्रिनस्पैन सबसे आगे रहीं, जबकि गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट दूसरे स्थान पर रहीं। यह चुनाव ऐसे समय में हो रहा है जब संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली बार किसी महिला को महासचिव बनाने की मांग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी पकड़ रही है।

    राजनयिक सूत्रों के अनुसार, 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में हुए अनौपचारिक मतदान में रेबेका ग्रिनस्पैन को 10 सकारात्मक वोट, एक नकारात्मक वोट और चार तटस्थ वोट मिले। ग्रिनस्पैन कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति रह चुकी हैं और वर्तमान में यूएनसीटीएडी की महासचिव के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने अनुभव और अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों के आधार पर शुरुआती चरण में मजबूत स्थिति बनाई है।

    गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट सात उम्मीदवारों में दूसरे स्थान पर रहीं। उन्हें नौ सकारात्मक वोट, दो नकारात्मक वोट और चार तटस्थ वोट मिले। हालांकि सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जेनॉन मुकोंगो ने आधिकारिक तौर पर मतदान के परिणाम सार्वजनिक नहीं किए, लेकिन राजनयिक सूत्रों के जरिए वोटों की जानकारी सामने आई।

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव के चुनाव की प्रक्रिया में सुरक्षा परिषद पहले एक उम्मीदवार का चयन करती है, जिसे बाद में महासभा के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है। परंपरा के अनुसार महासभा आमतौर पर सुरक्षा परिषद की सिफारिश को स्वीकार कर लेती है। उम्मीदवारों की स्वीकार्यता और स्थायी सदस्यों की सहमति जांचने के लिए सुरक्षा परिषद में कई दौर के अनौपचारिक स्ट्रॉ पोल आयोजित किए जाते हैं।

    इस प्रक्रिया में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे पांच स्थायी सदस्यों की भूमिका बेहद अहम होती है। किसी उम्मीदवार को अंतिम समर्थन हासिल करने के लिए यह जरूरी होता है कि स्थायी सदस्य उसके खिलाफ वीटो का इस्तेमाल करने की स्थिति में न हों। अंतिम दौर के मतदान में स्थायी सदस्यों के रुख को अलग-अलग रंगों वाले बैलेट के जरिए समझा जाता है।

    इस दौड़ में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी तीसरे स्थान पर रहे। अर्जेंटीना से आने वाले ग्रॉसी को दो नकारात्मक वोट मिले। उन्होंने यूक्रेन के जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र को लेकर रूस की आलोचना की थी और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका से अलग रुख भी अपनाया था। इसके अलावा चिली की पूर्व राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट भी प्रमुख उम्मीदवारों में शामिल हैं। उन्हें पांच नकारात्मक वोट मिले।

    सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी सैल और संयुक्त राष्ट्र महासभा की पूर्व अध्यक्ष मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा भी इस दौड़ में शामिल हैं। एस्पिनोसा को केवल दो नकारात्मक वोट मिले, जबकि कई देशों ने उनके पक्ष में कोई स्पष्ट राय नहीं दी, जिससे उनके पास आगे समर्थन जुटाने का अवसर बना हुआ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रेबेका ग्रिनस्पैन, कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट और एस्पिनोसा को महिला महासचिव की मांग और लैटिन अमेरिकी क्षेत्र के प्रतिनिधित्व के मुद्दे से फायदा मिल सकता है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के करीब 80 वर्षों के इतिहास में अब तक कोई महिला महासचिव नहीं बनी है। इसके अलावा 1991 में जेवियर पेरेज दे कुएलार के कार्यकाल के बाद से लैटिन अमेरिका को इस शीर्ष पद का प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।

    यूएन के पूर्व अवर महासचिव और युगांडा के पूर्व विदेश मंत्री ओलारा ओतुनु भी उम्मीदवारों में शामिल हैं, लेकिन शुरुआती पोल में उन्हें सबसे कम समर्थन मिला। आने वाले दौर के मतदान यह तय करेंगे कि कौन सा उम्मीदवार स्थायी सदस्यों की सहमति हासिल कर अंतिम दौड़ में आगे बढ़ता है।

  • भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग

    भोपाल में पानी पर बड़ा विवाद, गैस पीड़ित संगठनों का दावा- 63 में से 43 नमूने दूषित, कार्रवाई की मांग


    भोपाल । भोपाल में यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी पीड़ितों के चार संगठनों ने शहर में पेयजल आपूर्ति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठनों का दावा है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के आसपास के कई इलाकों में लोगों को सीवेज से दूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है। इसके चलते जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। संगठनों ने अपनी ओर से कराई गई पानी की जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक करते हुए कहा कि जांचे गए करीब 70 प्रतिशत नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म यानी मल से जुड़े बैक्टीरिया पाए गए हैं।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान के अनुसार इस महीने 30 बस्तियों से 63 पानी के नमूने एकत्र कर उनकी जांच कराई गई। इनमें से 43 नमूनों में फीकल कोलीफॉर्म की पुष्टि हुई। उनका दावा है कि 30 में से 19 क्षेत्रों में लोगों तक दूषित पेयजल पहुंच रहा है। रिपोर्ट के अनुसार बड़ा तालाब से सप्लाई होने वाले पानी के लगभग 90 प्रतिशत नमूने तथा कोलार डैम से आने वाले पानी के करीब 25 प्रतिशत नमूने भी जांच में प्रभावित पाए गए।

    संगठनों का आरोप है कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से सटे इलाकों के निवासी लंबे समय से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि इसके कारण दस्त, उल्टी, टाइफाइड और अन्य जलजनित बीमारियों के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। कई परिवार एक साथ बीमार पड़ रहे हैं और निजी क्लीनिकों में भी टाइफाइड के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात सामने आ रही है।

    भोपाल गैस पीड़ित महिला स्टेशनरी कर्मचारी संघ की अध्यक्ष रशीदा बी ने कहा कि वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि यूनियन कार्बाइड परिसर का भूजल जहरीले रसायनों और भारी धातुओं से प्रदूषित हो चुका है। इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए थे।

    वहीं भोपाल गैस पीड़ित निराश्रित पेंशनभोगी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष बालकृष्ण नामदेव ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में भी पेयजल में मल मिलने की शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल नगर निगम को सीवर लाइन और बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए थे। नगर निगम ने निर्धारित समय में काम पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनका दावा है कि वर्षों बाद भी स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

    भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन की रचना धींगरा ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में सीवर और ड्रेनेज परियोजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करने तथा पेयजल की गुणवत्ता की स्वतंत्र और नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की भी मांग की।

    हालांकि इस मामले में नगर निगम या संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में संगठनों के दावों की पुष्टि संबंधित एजेंसियों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

  • जैकी भगनानी ने भांजी दिवियाना के जन्मदिन पर लिखा भावुक संदेश, बोले- जिंदगी के हर कदम पर हमेशा साथ खड़ा रहूंगा

    जैकी भगनानी ने भांजी दिवियाना के जन्मदिन पर लिखा भावुक संदेश, बोले- जिंदगी के हर कदम पर हमेशा साथ खड़ा रहूंगा


    नई दिल्ली ।
    अभिनेता से निर्माता बने जैकी भगनानी ने अपनी भांजी दिवियाना के जन्मदिन के मौके पर एक भावुक और खास संदेश साझा किया है। जैकी ने सोशल मीडिया पर दिवियाना के साथ बिताए खूबसूरत पलों का वीडियो कोलाज पोस्ट करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि जीवन में दिवियाना जो भी कदम उठाएगी, वह हर समय उसके साथ खड़े रहेंगे और उसका हाथ थामे रहेंगे।

    जैकी भगनानी द्वारा साझा किए गए वीडियो में दिवियाना के बचपन से लेकर अब तक के कई यादगार पल शामिल थे। तस्वीरों और छोटी-छोटी वीडियो क्लिप्स में दिवियाना को परिवार के साथ हंसते, खेलते और खुशहाल पलों को जीते हुए देखा गया। इस खास वीडियो के जरिए जैकी ने अपने और दिवियाना के बीच के मजबूत पारिवारिक रिश्ते को जाहिर किया।

    दिवियाना जैकी भगनानी की बहन दीपशिखा देशमुख की बेटी हैं। दीपशिखा देशमुख की शादी अभिनेता रितेश देशमुख के भाई धीरज देशमुख से हुई है। फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखने वाली दिवियाना अक्सर पारिवारिक आयोजनों और खास मौकों पर नजर आती हैं। जैकी ने अपने संदेश के जरिए परिवार के बीच मौजूद प्यार और अपनापन दिखाया।

    अपने पोस्ट में जैकी ने दिवियाना को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए लिखा कि वह जीवन में जो भी रास्ता चुनेगी, वह हर परिस्थिति में उसका साथ देंगे। उन्होंने कहा कि उसकी खुशियों को मनाना और उसे एक बेहतर इंसान बनते देखना उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशियों में से एक है।

    जैकी ने अपने संदेश में यह भी कहा कि दिवियाना को कभी अकेले आगे नहीं बढ़ना पड़ेगा, क्योंकि उसके मामा हमेशा उसके साथ मौजूद रहेंगे। उन्होंने अपने प्यार और आशीर्वाद के साथ दिवियाना के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। जैकी का यह संदेश सोशल मीडिया पर परिवार और प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बना।

    जैकी भगनानी फिल्म जगत में अभिनेता और निर्माता दोनों भूमिकाओं के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने साल 2009 में फिल्म ‘कल किसने देखा’ से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह ‘फालतू’, ‘अजब गजब लव’, ‘रंगरेज’, ‘यंगिस्तान’ और ‘वेलकम टू कराची’ जैसी फिल्मों में नजर आए।

    अभिनय के अलावा जैकी ने निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने अपनी बहन दीपशिखा देशमुख के साथ मिलकर कई फिल्मों का निर्माण किया। साल 2016 में आई फिल्म ‘सरबजीत’ उनके प्रोडक्शन सफर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी।

    अभिनेता के तौर पर जैकी भगनानी आखिरी बार साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘मित्रों’ में दिखाई दिए थे। इसके बाद उन्होंने फिल्म निर्माण और मनोरंजन क्षेत्र से जुड़े अन्य कामों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया। वर्तमान में भी वह फिल्म इंडस्ट्री में निर्माता के रूप में सक्रिय हैं और नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं।

    दिवियाना के जन्मदिन पर जैकी का यह संदेश परिवार के प्रति उनके लगाव और जिम्मेदारी को दर्शाता है। सोशल मीडिया पर साझा की गई इस पोस्ट के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि जीवन में सफलता के साथ-साथ रिश्तों को मजबूत बनाए रखना भी बेहद जरूरी है।

  • अमेरिका की नई रणनीति में भारत अहम केंद्र, चीन के सूचना अभियान का मुकाबला करने के लिए सोशल मीडिया डिप्लोमेसी पर बढ़ेगा जोर

    अमेरिका की नई रणनीति में भारत अहम केंद्र, चीन के सूचना अभियान का मुकाबला करने के लिए सोशल मीडिया डिप्लोमेसी पर बढ़ेगा जोर

    नई दिल्ली । अमेरिका ने चीन के बढ़ते सूचना प्रभाव और डिजिटल अभियानों का मुकाबला करने के लिए अपनी पब्लिक डिप्लोमेसी रणनीति में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। इस नई रणनीति में भारत को एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखा जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वाशिंगटन अब पारंपरिक मीडिया माध्यमों के साथ-साथ सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी नागरिकों तक अपनी पहुंच मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

    अमेरिकी एजेंसी फॉर ग्लोबल मीडिया (यूएसएजीएम) का नेतृत्व करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नामित सारा रोजर्स ने सीनेट फॉरेन रिलेशंस कमेटी के सामने अपनी रणनीति को लेकर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एशिया अमेरिका की प्राथमिकताओं में प्रमुख क्षेत्र होगा, क्योंकि चीन समेत कई देशों द्वारा चलाए जा रहे सूचना अभियानों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।

    रोजर्स ने कहा कि अमेरिका को बदलते मीडिया इस्तेमाल के तरीकों के अनुसार अपनी अंतरराष्ट्रीय संचार नीति को आधुनिक बनाना होगा। उन्होंने संकेत दिया कि अब केवल रेडियो और टेलीविजन प्रसारण पर निर्भर रहने के बजाय सोशल मीडिया, छोटे वीडियो, पॉडकास्ट और डिजिटल कम्युनिटी के माध्यम से लोगों से सीधा संवाद स्थापित करने की जरूरत है।

    उन्होंने भारत और जापान जैसे देशों का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इन देशों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लोगों के बीच संवाद का एक बड़ा माध्यम बन चुके हैं। इसी वजह से अमेरिका अपनी डिजिटल रणनीति के तहत इन क्षेत्रों में अधिक सक्रिय भागीदारी बढ़ाने की योजना बना रहा है।

    अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि सूचना का क्षेत्र अब वैश्विक प्रतिस्पर्धा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। चीन लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि मजबूत करने और अपने विचारों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल करता रहा है। ऐसे में अमेरिका भी अपनी पहुंच और प्रभाव को बढ़ाने के लिए नई तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लेना चाहता है।

    रोजर्स ने कहा कि यूएसएजीएम की प्राथमिकताओं में एजेंसी को अधिक प्रभावी बनाना, नेतृत्व को मजबूत करना और उसकी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाना शामिल होगा। इसके अलावा उन्होंने रिसर्च क्षमता को बेहतर करने पर भी जोर दिया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि अमेरिकी संदेश कितने लोगों तक पहुंच रहे हैं और उनका प्रभाव कितना है।

    नई रणनीति के तहत अमेरिका उन देशों और क्षेत्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहता है जहां स्वतंत्र जानकारी तक लोगों की पहुंच सीमित है। एशिया के अलावा मध्य पूर्व, ईरान, अफगानिस्तान और क्यूबा जैसे क्षेत्रों को भी अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय प्रसारण रणनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत का महत्व अमेरिका के लिए केवल आर्थिक और रक्षा संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब सूचना और डिजिटल प्रभाव के क्षेत्र में भी बढ़ रहा है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी मजबूत होने के साथ ही डिजिटल संवाद और सार्वजनिक कूटनीति के नए रास्ते तलाशे जा रहे हैं।

    यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा व्यापार, तकनीक और सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक सूचना व्यवस्था के क्षेत्र में भी बढ़ रही है। अमेरिका की नई रणनीति का उद्देश्य डिजिटल माध्यमों के जरिए अपनी पहुंच को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने प्रभाव को बनाए रखना है।

  • मकोका आरोपों पर सुकेश की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का निर्देश

    मकोका आरोपों पर सुकेश की याचिका पर हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस को अपना पक्ष रखने का निर्देश

    नई दिल्ली । 200 करोड़ रुपए की वसूली और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में आरोपी सुकेश चंद्रशेखर ने महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के तहत लगाए गए आरोपों को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। सुकेश ने निचली अदालत के उस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की है, जिसमें उसके खिलाफ मकोका के तहत आरोप तय किए गए थे। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तारीख तय की है।

    सुकेश चंद्रशेखर की याचिका में कहा गया है कि उसके खिलाफ लगाए गए मकोका के आरोपों पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता का पक्ष है कि इस कानून के तहत कार्रवाई को लेकर नए सिरे से समीक्षा की आवश्यकता है। अब इस मामले में दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद हाईकोर्ट आगे की सुनवाई करेगा और तय करेगा कि मकोका आरोपों को लेकर आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

    यह पूरा मामला करीब 200 करोड़ रुपए की कथित वसूली और धोखाधड़ी से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार, सुकेश चंद्रशेखर पर आरोप है कि उसने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर एक कारोबारी परिवार से बड़ी रकम हासिल की। आरोप है कि उसने प्रभावशाली लोगों से संपर्क होने और कानूनी मामलों को सुलझाने का भरोसा दिलाकर पैसे की मांग की थी।

    मामला उस समय सामने आया जब फोर्टिस के पूर्व प्रमोटर शिविंदर सिंह की पत्नी अदिति सिंह ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, एक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और खुद को केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश किया। उसने उनके पति से जुड़े कानूनी मामलों में मदद दिलाने का दावा किया और इसके बदले बड़ी रकम की मांग की गई। इसके बाद पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की।

    जांच में एजेंसियों ने आरोप लगाया कि इस कथित साजिश में कई लोग शामिल थे और सरकारी अधिकारियों की पहचान का गलत इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान करीब 217 करोड़ रुपए तक की रकम अलग-अलग माध्यमों से हासिल किए जाने का दावा किया गया। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की।

    जांच आगे बढ़ने के बाद सुकेश चंद्रशेखर की भूमिका सामने आने पर उसे गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप था कि वह जेल के अंदर रहते हुए भी अपनी गतिविधियों को संचालित कर रहा था। जांच एजेंसियों ने उसके पास से मोबाइल फोन मिलने का भी दावा किया था। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई की।

    महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून यानी मकोका का इस्तेमाल संगठित अपराध से जुड़े मामलों में किया जाता है। इस कानून के तहत कार्रवाई के लिए पुलिस को यह दिखाना होता है कि अपराध किसी संगठित गिरोह या लगातार आपराधिक गतिविधियों से जुड़ा हुआ है। दिल्ली पुलिस का आरोप रहा है कि सुकेश ने अकेले नहीं बल्कि एक समूह के साथ मिलकर कथित अपराध को अंजाम दिया।

    अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई इस बात पर केंद्रित होगी कि सुकेश के खिलाफ मकोका के तहत लगाए गए आरोप कानूनी रूप से सही हैं या नहीं। दिल्ली पुलिस के जवाब के बाद मामले में आगे की दिशा तय होगी। इस मामले में लंबे समय से चल रही कानूनी प्रक्रिया के बीच हाईकोर्ट की अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन

    खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा में रिकॉर्ड बारिश, गांवों में जलभराव, SDRF ने 10 घंटे चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की गई, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। सबसे ज्यादा बारिश खरगोन जिले के गोगावां में 7.6 इंच रिकॉर्ड की गई। इसके अलावा बुरहानपुर शहर में 7 इंच और बैतूल के भीमपुर में 6.6 इंच बारिश हुई। लगातार हो रही बारिश से कई नदियां और नाले उफान पर हैं, जबकि घरों, खेतों और सड़कों पर पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

    मौसम विभाग के अनुसार बड़वानी के वरला, आलीराजपुर के उदयगढ़ और बुरहानपुर के खकनार में 5.3 इंच, खंडवा शहर में 5.1 इंच तथा खरगोन के बड़वाह में 4.4 इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं झाबुआ के रानापुर में 4 इंच, खरगोन के सेगांव में 4.3 इंच और खरगोन शहर में 4.2 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रदेश के 33 शहरों और कस्बों में भारी से अति भारी वर्षा दर्ज होने से कई इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई।

    बड़वानी जिले के सेंधवा ब्लॉक में 24 घंटे के दौरान साढ़े चार इंच से अधिक बारिश हुई। तेज बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए और धनोरा गांव में नाले का पानी 10 से 15 घरों में घुस गया। कई मकानों में करीब दो फीट तक पानी भर गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। लगातार बारिश के कारण खेतों में खड़ी मक्का की फसल भी गिर गई। सेंधवा ब्लॉक का सबसे बड़ा तालाब ओवरफ्लो हो गया, जबकि वरला और बलवाड़ी क्षेत्र में भी जलभराव की स्थिति बनी रही।

    खंडवा जिले में भी लगातार बारिश से हालात गंभीर बने रहे। यहां 24 घंटे के दौरान 128 मिलीमीटर यानी पांच इंच से अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव के साथ कपास और मक्का की फसलों को नुकसान पहुंचा है। आबना और सुक्ता नदी में तेज बहाव के कारण हांड़ी-कुंडी गांव के पास बने टापू पर चार लोग फंस गए। सूचना मिलने पर खंडवा और इंदौर की एसडीआरएफ टीम ने करीब साढ़े दस घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान ड्रोन के माध्यम से फंसे लोगों तक लाइफ जैकेट भी पहुंचाई गई।

    लगातार बारिश के चलते कई जिलों में निचले इलाकों में जलभराव, ग्रामीण सड़कों पर पानी भरने और खेतों में फसल नुकसान की खबरें सामने आई हैं। प्रशासन संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए हुए है और लोगों से नदी-नालों के आसपास नहीं जाने तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की गई है।

    मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। ऐसे में प्रशासन ने जिलों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन दलों को तैयार रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

  • बस्तर के विकास का नया रोडमैप लेकर पीएम मोदी से मिले सीएम साय, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग पर हुई बड़ी चर्चा

    बस्तर के विकास का नया रोडमैप लेकर पीएम मोदी से मिले सीएम साय, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग पर हुई बड़ी चर्चा

    नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर के कायाकल्प की योजना और राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की जानकारी प्रधानमंत्री के सामने रखी। उन्होंने बस्तर को विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के सामने राज्य की तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें राजनांदगांव में प्रस्तावित 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को जल्द मंजूरी देने का आग्रह प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई है और राज्य स्तर की सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। परियोजना शुरू होने से किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में सुविधा मिलेगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने उन 461 गांवों को स्थायी बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए विशेष सहायता की मांग की, जहां सुरक्षा और भौगोलिक चुनौतियों के कारण अब तक ऑफ-ग्रिड बिजली व्यवस्था संचालित हो रही है। उन्होंने रायपुर या बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर विजन के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला बस्तर अब विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनसे लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है। राशन, स्वास्थ्य बीमा, जनधन खाते, वन अधिकार और आवास जैसी योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

    शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। इसके साथ ही दूरदराज के इलाकों में बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के बच्चों को बेहतर अवसर और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि विशेष स्वास्थ्य अभियान के तहत बड़ी संख्या में लोगों की जांच कर उन्हें चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि बस्तर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे लोगों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने बस्तर में बढ़ती कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। रेल परियोजनाओं, एक्सप्रेस-वे और सिंचाई योजनाओं से क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    बस्तर की संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं की भागीदारी और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।

    बैठक में छत्तीसगढ़ में बढ़ते निवेश और उद्योगों के विस्तार का मुद्दा भी प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नई औद्योगिक नीतियों के कारण बड़े निवेश प्रस्ताव आए हैं और कई क्षेत्रों में नई परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। एआई, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण और अन्य आधुनिक उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण, डिजिटल सेवाओं और सुशासन से जुड़े कार्यों की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों को आसान और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ विकास के नए लक्ष्य हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर में हो रहे बदलाव से क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है और आने वाले समय में यह विकास और अवसरों का केंद्र बनेगा।

  • NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान

    NEET आंदोलन के समर्थन के बाद बढ़ा सियासी विवाद, कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप- पुलिस ने 10 बार बदलवाया बयान


    इंदौर इंदौर में NEET परीक्षा से जुड़े छात्र आंदोलन के समर्थन को लेकर कांग्रेस और पुलिस प्रशासन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे से गुरुवार को पंढरीनाथ थाने में करीब पांच घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान उन्हें लंबे समय तक थाने में बैठाए रखने की खबर फैलते ही पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा सहित कई कांग्रेस नेता और समर्थक थाने पहुंच गए। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जमा होने से थाने के बाहर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। बाद में पुलिस ने चौकसे को जाने की अनुमति दे दी।

    थाने से बाहर आने के बाद चिंटू चौकसे ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस ने टंट्या भील चौराहे पर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया था और इसी वजह से उन्हें बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि थाने पहुंचने के बाद पुलिस ने कई घंटे तक उन्हें बैठाए रखा और बयान में बार-बार संशोधन कराया। उनके अनुसार वहां मौजूद पुलिसकर्मी केवल वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का पालन कर रहे थे और पूरा घटनाक्रम पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर हुआ।

    चौकसे ने दावा किया कि उनके बयान में लगभग दस बार संशोधन कराया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार बयान की भाषा और उसमें लिखी गई बातों को बदलने का दबाव बनाया गया। उनके मुताबिक यह केवल एक व्यक्ति को परेशान करने का मामला नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि जो भी जनता की आवाज उठाता है या छात्र, किसान और आम लोगों के आंदोलनों का समर्थन करता है, उसे प्रशासनिक दबाव के जरिए चुप कराने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी के आह्वान पर कांग्रेस देशभर में छात्रों के समर्थन में खड़ी है और इंदौर में भी पार्टी ने NEET अभ्यर्थियों के आंदोलन को समर्थन दिया था। उनका आरोप है कि जैसे ही प्रशासन को कांग्रेस की सक्रिय भूमिका की जानकारी मिली, छह महीने पुराने मामले में उन्हें नोटिस भेज दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यह कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।

    चौकसे ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि पहले कांग्रेस कार्यालय पर हमला हुआ, पत्थरबाजी हुई और कांग्रेस कार्यकर्ता घायल हुए, लेकिन पुलिस ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की जबकि भाजपा से जुड़े लोगों के खिलाफ अज्ञात आरोपियों के रूप में मामला दर्ज किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के माध्यम से विपक्षी नेताओं को परेशान कर रही है और आंदोलनों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

    कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। चिंटू चौकसे ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में आने वाले दिनों में इंदौर पुलिस के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उनका कहना है कि पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाएगी और राजनीतिक विरोध की आवाज को दबाने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब दिया जाएगा।

    हालांकि इस मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में कांग्रेस के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • दिल की धड़कनों का बिगड़ा संतुलन पड़ सकता है भारी जानिए Atrial Fibrillation के लक्षण कारण और बचाव के आसान उपाय

    दिल की धड़कनों का बिगड़ा संतुलन पड़ सकता है भारी जानिए Atrial Fibrillation के लक्षण कारण और बचाव के आसान उपाय


    नई दिल्ली। दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और इसकी नियमित धड़कन पूरे शरीर में रक्त संचार को सुचारु बनाए रखती है। लेकिन जब दिल की धड़कन सामान्य लय खो देती है और बहुत तेज या अनियमित होने लगती है तो यह Atrial Fibrillation यानी एट्रियल फिब्रिलेशन का संकेत हो सकता है। यह ऐसी बीमारी है जिसके बारे में आज भी बड़ी संख्या में लोग जानकारी नहीं रखते जबकि यह स्ट्रोक हार्ट फेलियर और कई गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है।

    Atrial Fibrillation में दिल के ऊपरी कक्ष यानी एट्रिया सामान्य तरीके से सिकुड़ने की बजाय बहुत तेजी और अनियमित रूप से कंपन करने लगते हैं। इसके कारण दिल पूरे शरीर में रक्त को प्रभावी ढंग से पंप नहीं कर पाता। जब रक्त का प्रवाह धीमा होता है तो दिल के भीतर थक्का बनने की आशंका बढ़ जाती है। यही थक्का मस्तिष्क तक पहुंचकर स्ट्रोक का कारण बन सकता है जो कई बार जानलेवा भी साबित होता है।

    इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। मरीज को दिल की धड़कन तेज महसूस होना सीने में घबराहट सांस फूलना चक्कर आना कमजोरी जल्दी थक जाना या सीने में असहजता महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते और बीमारी का पता नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान चलता है। यही कारण है कि इसे खामोश बीमारी भी कहा जाता है।

    बढ़ती उम्र उच्च रक्तचाप मधुमेह मोटापा थायरॉयड की समस्या धूम्रपान अत्यधिक शराब का सेवन तनाव और पहले से मौजूद हृदय रोग Atrial Fibrillation के प्रमुख जोखिम कारक माने जाते हैं। इसके अलावा शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खानपान भी इस बीमारी की संभावना बढ़ा सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही इलाज से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टर ईसीजी इकोकार्डियोग्राफी या अन्य जांचों के माध्यम से इसकी पुष्टि करते हैं। उपचार के दौरान मरीज की स्थिति के अनुसार दवाएं दी जाती हैं ताकि दिल की धड़कन नियंत्रित रहे और रक्त का थक्का बनने का खतरा कम हो सके। कुछ मामलों में विशेष चिकित्सीय प्रक्रियाओं की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

    स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित व्यायाम करें संतुलित और पौष्टिक भोजन लें नमक और तैलीय भोजन का सेवन सीमित रखें धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखें पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने के लिए योग या ध्यान का सहारा लें। यदि पहले से ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी समस्या है तो उसका नियमित उपचार कराना भी बेहद जरूरी है।

    यदि आपको बार बार दिल की धड़कन अनियमित महसूस होती है सांस लेने में परेशानी होती है या अचानक कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्या होती है तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा न करें। समय पर हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर जांच कराना भविष्य में होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है। जागरूकता और समय पर उपचार ही इस खामोश लेकिन गंभीर बीमारी से सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • बांग्लादेशी घुसपैठ पर संसदीय समिति सख्त, सीमाओं पर संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने की दी सिफारिश।

    बांग्लादेशी घुसपैठ पर संसदीय समिति सख्त, सीमाओं पर संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने की दी सिफारिश।

    नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों और सीमा प्रबंधन को लेकर संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने एक महत्वपूर्ण समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की है। वरिष्ठ सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ आज भी भारत की आंतरिक सुरक्षा और जनसांख्यिकी के लिए एक अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। समिति ने इस संवेदनशील समस्या से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच एक समर्पित ‘संयुक्त कार्य समूह’ या स्थायी द्विपक्षीय तंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया है, ताकि सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

    रिपोर्ट में उजागर किया गया है कि वर्तमान समय में लगभग 2,369 संदिग्ध प्रवासियों की राष्ट्रीयता की पुष्टि का मामला बांग्लादेश सरकार के पास लंबित पड़ा हुआ है। स्थायी समिति का मानना है कि दोनों देशों के बीच एक औपचारिक और जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा बनने से पहचान सत्यापन की यह प्रक्रिया त्वरित गति से पूरी की जा सकेगी। इसके साथ ही, समिति ने यह मानवीय और कानूनी हिदायत भी दी है कि जांच और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया के दौरान पूरी सतर्कता बरती जाए ताकि किसी भी भारतीय नागरिक को गलती से सीमा पार न भेजा जाए और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।

    सीमा सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों देशों के बीच फैली 4,096 किलोमीटर लंबी कुल सीमा में से लगभग 3,231 किलोमीटर हिस्से में ही सुरक्षा बाड़ लगाई जा सकी है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, नदी क्षेत्रों और विवादित भूखंडों के कारण अभी भी करीब 864 किलोमीटर की सीमा बिना बाड़ के खुली हुई है, जिसका फायदा अवैध गतिविधियों के लिए उठाया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार इस घुसपैठ का सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव सीमावर्ती राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और असम पर पड़ रहा है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को लगातार सतर्क रहना पड़ता है।

    सुरक्षा चिंताओं के अलावा समिति ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक नियमों के दुरुपयोग पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) के तहत मिलने वाली रियायतों का गलत फायदा उठाकर तीसरे देशों की सामग्री, विशेष रूप से चीनी कपड़ों और उत्पादों को बांग्लादेश के रास्ते भारतीय बाजारों में खपाया जा रहा है। इससे घरेलू उद्योगों और निष्पक्ष व्यापार प्रतिस्पर्धा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। समिति ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को व्यापारिक नियमों को और अधिक कड़ा करने और उच्च स्तर पर इस मुद्दे को उठाने का परामर्श दिया है।

    संसदीय समिति ने सुरक्षा और व्यापारिक कड़ाई के साथ-साथ कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को पुनः पटरी पर लाने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। स्थिति सामान्य होते ही वीजा सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से सुचारू करने, वार्षिक संयुक्त साहित्य महोत्सवों के आयोजन और युवाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से जन-सामान्य के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसके अतिरिक्त, समिति ने वैश्विक पटल पर भारत की वैज्ञानिक और कूटनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए ‘ध्रुवीय राजदूत’ की नियुक्ति और अंटार्कटिका में अनुसंधान केंद्रों के निर्माण में तेजी लाने का सुझाव भी दिया है।