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  • लक्ष्मी पंचमी 2026: आज करें लक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर में आएगी धन धान्य और समृद्धि

    लक्ष्मी पंचमी 2026: आज करें लक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर में आएगी धन धान्य और समृद्धि


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्र का पावन पर्व देशभर में भक्ति और आस्था के रंग में रंगा हुआ है। इस दौरान आने वाला एक विशेष दिन है लक्ष्मी पंचमी, जिसे इस साल 23 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए पूजन और लक्ष्मी चालीसा के पाठ से घर में धन धान्य, सुख समृद्धि और वैभव का वास होता है।

    लक्ष्मी पंचमी का यह पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ता है। इस दिन मां स्कंदमाता के साथ साथ मां लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी, जो समृद्धि, धन और सुख समृद्धि की देवी हैं, इस दिन अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। देवी की कृपा से व्यक्ति न केवल भौतिक संपन्नता पाता है, बल्कि ज्ञान, बुद्धि और विवेक की भी प्राप्ति होती है।

    इस अवसर पर व्रतियों और श्रद्धालुओं की परंपरा होती है कि वे सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा अर्चना करें। घर में या मंदिर में कमल पुष्प, फल और मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। साथ ही, लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लक्ष्मी चालीसा के पाठ से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और घर में धन संपत्ति और सुख समृद्धि बनी रहती है।

    लक्ष्मी चालीसा का पाठ भक्तों के हृदय में विश्वास और भक्ति का संचार करता है। इसमें माता लक्ष्मी के गुणों और उनके दिव्य रूप का वर्णन है। चालीसा के माध्यम से यह विश्वास प्रकट होता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इसका पाठ करता है, उसे सभी प्रकार की विपत्तियों और दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही पुत्र, धन और संतान संपत्ति की प्राप्ति भी होती है।

    धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने वाले को माता लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है। वे अपने भक्तों के घर में सुख शांति, स्वास्थ्य, वैभव और समृद्धि का वास करती हैं। इसके साथ ही, यह पाठ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है। भक्त चालीसा का ध्यानपूर्वक पाठ करें और इसे दूसरों को सुनाने की परंपरा अपनाएं, जिससे शुभ प्रभाव और भी बढ़ जाता है।

    लक्ष्मी पंचमी और लक्ष्मी चालीसा का यह पर्व केवल पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि यह भक्ति, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक भी है। इस दिन घर और मंदिरों में भक्तगण एकत्र होते हैं, भजन कीर्तन करते हैं, और मां लक्ष्मी की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन किए गए उपाय और पाठ से वर्षभर सुख समृद्धि बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    इसलिए आज के दिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना न केवल धन वैभव और सुख की प्राप्ति का साधन है, बल्कि यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ भी प्रदान करता है। भक्तगण इस दिन माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए पूरे श्रद्धा भाव से पाठ करें और अपने परिवार के लिए समृद्धि और सुख की कामना करें।

  • कॉर्पोरेट सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, संसद में आया नया संशोधन बिल

    कॉर्पोरेट सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, संसद में आया नया संशोधन बिल

    नई दिल्ली। वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को लोकसभा में कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश कर दिया। इस विधेयक का उद्देश्य Companies Act 2013 और Limited Liability Partnership Act 2008 में जरूरी बदलाव करना है। सरकार का कहना है कि इन संशोधनों से कॉर्पोरेट क्षेत्र में पारदर्शिता, सुगमता और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। विधेयक पेश करते हुए वित्त मंत्री ने इसे आगे की विस्तृत जांच के लिए संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने का प्रस्ताव रखा, जिसे लोकसभा ने मंजूरी दे दी। उन्होंने बताया कि यह विधेयक दो वर्षों के गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है और इसमें कंपनी विधि समिति की सिफारिशों को शामिल किया गया है।

    कॉर्पोरेट गवर्नेंस और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

    वित्त मंत्री ने कहा कि कंपनी अधिनियम निगमन, कॉर्पोरेट प्रशासन, प्रकटीकरण और विघटन से जुड़े नियमों को नियंत्रित करता है, जबकि एलएलपी अधिनियम व्यवसायों को अधिक लचीला ढांचा प्रदान करता है। इस संशोधन के जरिए दोनों कानूनों को और अधिक सरल और प्रभावी बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि कंपनी विधि समिति में उद्योग संगठनों, पेशेवर संस्थानों, कानूनी और लेखा विशेषज्ञों को शामिल किया गया था, जिनकी सिफारिशों के आधार पर विधेयक तैयार हुआ है। रिपोर्ट को सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए भी जारी किया गया था, जिसके बाद प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखकर अंतिम मसौदा तैयार किया गया।

    विपक्ष का विरोध, सीएसआर प्रावधानों पर उठे सवाल

    हालांकि, विधेयक पेश किए जाने से पहले विपक्ष ने इसका विरोध किया। कांग्रेस सांसद Manish Tewari, टीएमसी के Saugata Roy और डीएमके की T. Sumathy ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधन कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी सीएसआर प्रावधानों को कमजोर कर सकता है। इन आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य नियमों को आसान बनाना और निवेश को आकर्षित करना है, न कि किसी प्रावधान को कमजोर करना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इससे कॉर्पोरेट गवर्नेंस और मजबूत होगा।

    आईबीसी संशोधन की भी तैयारी, समाधान प्रक्रिया होगी तेज

    सरकार कॉर्पोरेट क्षेत्र में सुधार के लिए अन्य कदम भी उठा रही है। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दिवालियापन और दिवालिया संहिता में संशोधन को मंजूरी दी है, जिससे चालू सत्र में नया विधेयक पेश करने का रास्ता साफ हो गया है। यह प्रस्ताव Insolvency and Bankruptcy Code में सुधार से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य कॉर्पोरेट समाधान प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाना है। यह संशोधन Baijayant Panda की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित है, जिसने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।

  • उज्ज्वला योजना का असर! देशभर में LPG कनेक्शन का विस्तार, सप्लाई भी हुई बेहतर

    उज्ज्वला योजना का असर! देशभर में LPG कनेक्शन का विस्तार, सप्लाई भी हुई बेहतर


    नई दिल्ली। देश में स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने वाली Pradhan Mantri Ujjwala Yojana ने एलपीजी पहुंच के मामले में बड़ा बदलाव किया है। सरकार के मुताबिक, इस योजना के लागू होने के बाद अब देश में लगभग हर घर तक एलपीजी कनेक्शन पहुंच चुका है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 1 मार्च 2026 तक देशभर में करीब 10.56 करोड़ पीएमयूवाई कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। इनमें महाराष्ट्र में 52.60 लाख और गुजरात में 43.92 लाख कनेक्शन शामिल हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि योजना ने खासतौर पर गरीब और ग्रामीण परिवारों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

    सरकार का लक्ष्य, हर जरूरतमंद तक एलपीजी कनेक्शन

    सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 25 लाख अतिरिक्त एलपीजी कनेक्शन देने की मंजूरी भी दी है, ताकि लंबित आवेदनों को जल्द पूरा किया जा सके। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री Suresh Gopi ने राज्यसभा में बताया कि 1 मार्च 2026 तक महाराष्ट्र में करीब 0.48 लाख और गुजरात में लगभग 0.87 लाख नए कनेक्शन दिए जा चुके हैं। योजना की शुरुआत से पहले देश में एलपीजी कवरेज करीब 62 प्रतिशत थी, जो अब काफी बढ़कर लगभग सार्वभौमिक स्तर पर पहुंच गई है। इससे ग्रामीण और गरीब परिवारों को धुएं से मुक्ति मिली है और स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ा है।

    उपयोग बढ़ा, वितरण नेटवर्क हुआ मजबूत

    पीएमयूवाई के विस्तार के साथ ही एलपीजी के उपयोग में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जहां 2021-22 में एक लाभार्थी परिवार औसतन 3.68 सिलेंडर सालाना इस्तेमाल करता था, वहीं 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 4.80 सिलेंडर हो गया है। यह दर्शाता है कि लोग अब पारंपरिक ईंधनों की बजाय एलपीजी को तेजी से अपना रहे हैं। साथ ही, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने सप्लाई व्यवस्था को भी मजबूत किया है। देश में अब कुल 25,605 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर काम कर रहे हैं, जिनमें से 17,677 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इनकी सप्लाई के लिए 214 बॉटलिंग प्लांट सक्रिय हैं, जिससे दूरदराज के इलाकों तक भी समय पर सिलेंडर पहुंच रहा है।

    ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस, सब्सिडी से मिल रही राहत

    सरकार ने ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में एलपीजी की पहुंच बढ़ाने के लिए पिछले 10 वर्षों में बड़े पैमाने पर काम किया है। अप्रैल 2016 से फरवरी 2026 के बीच 8,037 नए डिस्ट्रीब्यूटर शुरू किए गए, जिनमें से 93 प्रतिशत यानी 7,444 ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इसके अलावा, सरकार उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत देने के लिए सब्सिडी भी प्रदान कर रही है। वित्त वर्ष 2025-26 में 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर 300 रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है, जो अधिकतम 9 रिफिल तक लागू है। साथ ही ‘सक्षम’ पहल के तहत ऊर्जा बचत और टिकाऊ विकास को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

  • ऊर्जा और कृषि पर सरकार का फोकस, Narendra Modi बोले—भारत आत्मनिर्भरता की राह पर


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी तैयारी मजबूत कर ली है। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने संसद में स्पष्ट किया कि देश के पास उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आयात के स्रोतों को भी विविध बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में किसानों को किसी भी संकट से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया कि खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता पूरी तरह सुनिश्चित की गई है, जिससे खेती पर किसी तरह का नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ के तहत देश में ही उर्वरकों के उत्पादन को बढ़ावा दिया गया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है और किसानों को समय पर खाद मिल रही है।

    किसानों को राहत, सौर पंप और योजनाओं से मजबूती

    प्रधानमंत्री ने बताया कि सरकार ने किसानों की लागत घटाने और उन्हें ऊर्जा के वैकल्पिक साधन देने के लिए बड़े स्तर पर काम किया है। डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए अब तक 22 लाख से ज्यादा सौर पंप किसानों को दिए जा चुके हैं। इससे न सिर्फ किसानों का खर्च कम हुआ है, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहले से ही उर्वरकों की जरूरत का आकलन कर लिया है और पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा है, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का असर किसानों तक न पहुंचे। यह कदम देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

    इथेनॉल मिश्रण से घटा तेल आयात, ऊर्जा सुरक्षा को बल

    ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत को बड़ी सफलता इथेनॉल मिश्रण से मिल रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग के कारण देश हर साल लगभग 4.5 करोड़ बैरल तेल के आयात को कम करने में सफल हो रहा है। यह न सिर्फ विदेशी मुद्रा की बचत कर रहा है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में उतार चढ़ाव से भी देश को बचा रहा है। सरकार वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में केंद्र ने राज्यों को 15,000 ई बसें भी उपलब्ध कराई हैं, जिससे स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन को बढ़ावा मिल रहा है।

    ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र के लिए रणनीति, अर्थव्यवस्था मजबूत

    प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा किसी भी अर्थव्यवस्था की रीढ़ होती है और पश्चिम एशिया वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में सरकार ने संभावित व्यवधानों से निपटने के लिए व्यापक रणनीति बनाई है। हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की बैठक में उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों, बिजली संयंत्रों में पर्याप्त कोयला भंडार और जरूरी आयात के स्रोतों में विविधता लाने पर चर्चा की गई। रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स जैसे क्षेत्रों के लिए भी नई रणनीतियां तैयार की जा रही हैं। साथ ही भारतीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए नए निर्यात बाजार विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था किसी भी वैश्विक संकट में मजबूत बनी रहे।

  • ईरान का दावा या सच्चाई? अमेरिका ने F-15 को मार गिराने की खबर को बताया फर.

    ईरान का दावा या सच्चाई? अमेरिका ने F-15 को मार गिराने की खबर को बताया फर.

    नई दिल्ली:ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया जब ईरानी मीडिया ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा ने एक अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया है, यह रिपोर्ट सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई, लेकिन अमेरिका ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे झूठ और अफवाह करार दिया

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट किया कि ईरान की ओर से फैलाए जा रहे दावे पूरी तरह निराधार हैं, उन्होंने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान अमेरिकी सेना ने हजारों उड़ानें भरी हैं और इस दौरान किसी भी अमेरिकी F-15 विमान को नुकसान नहीं पहुंचा है, यह बयान ईरान के दावे के सीधे जवाब के रूप में आया

    ईरानी मीडिया में छपी रिपोर्ट में कहा गया था कि दक्षिणी तट के पास एक संदिग्ध या अनधिकृत विमान को ईरानी एयर डिफेंस ने निशाना बनाया, और दावा किया गया कि यह विमान अमेरिकी F-15 था, हालांकि इस दावे को किसी स्वतंत्र स्रोत या अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने पुष्टि नहीं की है

    अमेरिका ने अपने बयान में न केवल इस दावे को खारिज किया बल्कि यह भी संकेत दिया कि ईरान की ओर से इस तरह की जानकारी फैलाना एक प्रोपेगेंडा का हिस्सा हो सकता है, सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दावे अक्सर रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालने के लिए किए जाते हैं, खासकर तब जब क्षेत्र में तनाव चरम पर हो

    वहीं, F-15 जैसे फाइटर जेट दुनिया के सबसे उन्नत और शक्तिशाली लड़ाकू विमानों में से एक माने जाते हैं, जिन्हें अमेरिका की वायु शक्ति का अहम हिस्सा माना जाता है, ऐसे में किसी भी विमान को गिराने का दावा बहुत गंभीर माना जाता है और इसकी पुष्टि बिना ठोस सबूत के नहीं की जा सकती

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह साबित किया कि पश्चिम एशिया में स्थिति कितनी संवेदनशील बनी हुई है और छोटी सी खबर भी बड़े अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप ले सकती है, फिलहाल अमेरिका ने अपने आधिकारिक बयान के जरिए स्थिति को स्पष्ट कर दिया है और ईरान के दावे को पूरी तरह गलत बताया है

     यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि सूचना युद्ध और वास्तविक सैन्य कार्रवाई के बीच अंतर समझना कितना जरूरी है, और जब तक आधिकारिक और स्वतंत्र पुष्टि न हो, तब तक ऐसे दावों को सावधानी से ही देखा जाना चाहिए

  • एविएशन सेक्टर पर दबाव, IndiGo के भविष्य को लेकर Goldman Sachs की चेतावनी

    एविएशन सेक्टर पर दबाव, IndiGo के भविष्य को लेकर Goldman Sachs की चेतावनी


    नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन InterGlobe Aviation को लेकर वैश्विक ब्रोकरेज Goldman Sachs ने सतर्क रुख अपनाया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार चढ़ाव के बीच कंपनी के मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है। विश्लेषकों ने इंडिगो के टारगेट प्राइस को 13.33 प्रतिशत घटाकर 5,200 रुपए कर दिया है, जो पहले 6,000 रुपए था। हालांकि, इसके बावजूद ब्रोकरेज ने स्टॉक पर अपनी बाय रेटिंग बरकरार रखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक हालात और यात्रा क्षेत्र में अनिश्चितता के चलते कंपनी के आय के अनुमान कमजोर हो गए हैं और निकट भविष्य में प्रदर्शन दबाव में रह सकता है।

    वित्त वर्ष 27 में मुनाफे की उम्मीद नहीं, आय पर संकट

    विश्लेषकों ने साफ कहा है कि लगातार बदलती कच्चे तेल की कीमतें एयरलाइन सेक्टर के लिए सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई हैं। इसी वजह से IndiGo के लिए वित्त वर्ष 2027 में मुनाफा होने की संभावना बेहद कम है। कंपनी के शेयर में उतार चढ़ाव जारी रहने की भी चेतावनी दी गई है। जून तिमाही के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ान क्षमता के अनुमान, खासकर मिडिल ईस्ट रूट्स पर, घटा दिए गए हैं। खाड़ी देशों में बार बार हवाई क्षेत्र बंद होने से उड़ानों पर असर पड़ा है, जिससे यात्रियों की संख्या और राजस्व दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    जेट ईंधन महंगा, लागत बढ़ने से दबाव

    एयरलाइन उद्योग में जेट ईंधन सबसे बड़ा खर्च होता है और मौजूदा हालात में इसकी कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। ईरान से जुड़े संघर्ष के बाद आपूर्ति संबंधी जोखिम और निर्यात प्रतिबंधों के कारण प्रोसेस्ड ईंधन की कीमतें कच्चे तेल से भी ज्यादा तेजी से बढ़ी हैं। इसका सीधा असर इंडिगो की लागत पर पड़ रहा है। यही वजह है कि गोल्डमैन सैक्स ने कंपनी के परिचालन आय यानी ईबीआईटीडीआर के अनुमानों में भी भारी कटौती की है। वित्त वर्ष 2026 के लिए यह अनुमान घटाकर 13,700 करोड़ रुपए और 2027 के लिए 15,900 करोड़ रुपए कर दिया गया है, जो पहले क्रमशः 18,300 करोड़ और 25,800 करोड़ रुपए था। प्रति शेयर आय के अनुमान में भी तेज गिरावट दर्ज की गई है।

    शेयर में गिरावट, निवेशकों की नजर भविष्य पर

    बाजार में भी इस रिपोर्ट का असर साफ दिखाई दिया। इंडिगो का शेयर दोपहर कारोबार में करीब 5.75 प्रतिशत गिरकर 3,910 रुपए पर आ गया। बीते एक महीने में यह शेयर लगभग 20 प्रतिशत तक टूट चुका है। हालांकि, ब्रोकरेज का मानना है कि लंबी अवधि में कंपनी की मजबूती उसके लागत नियंत्रण और बैलेंस शीट प्रबंधन पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे बड़ा फोकस आय में स्थिरता और वैश्विक हालात में सुधार पर रहेगा।

  • मां स्कंदमाता के दिव्य रूप के दर्शन से भक्तों में उमड़ी भक्ति और आस्था की लहर

    मां स्कंदमाता के दिव्य रूप के दर्शन से भक्तों में उमड़ी भक्ति और आस्था की लहर


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्र का पावन पर्व देशभर में भक्ति और आस्था के रंग में रंगा नजर आता है। नवरात्र के पांचवे दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष आयोजन किया जाता है। इस दिन मंदिरों और घरों में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है जो पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ मां का स्मरण करते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय की माता हैं जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है। इसी कारण उन्हें स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। उनका स्वरूप अत्यंत दिव्य और मनमोहक माना जाता है। मां सिंह पर विराजमान रहती हैं और उनके चार भुजाओं से उनका सौंदर्य और शक्ति झलकती है। उनकी एक भुजा में बाल रूप में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं जबकि अन्य हाथों में कमल पुष्प और वरमुद्रा होती है। यह स्वरूप मातृत्व शक्ति और करुणा का अद्भुत संगम दर्शाता है।

    मां स्कंदमाता को कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण पद्मासना देवी भी कहा जाता है। धार्मिक ग्रंथों और लोकमान्यताओं के अनुसार उनके सच्चे मन से पूजन करने पर संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। नि:संतान दंपतियों को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। इसके साथ ही माता की कृपा से संतान की उन्नति और सुख समृद्धि की कामना भी पूरी होती है।

    नवरात्र के इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा से भक्तों को ज्ञान बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है। यह आशीर्वाद जीवन में सकारात्मकता और संतुलन बनाए रखने में सहायक होता है। इसलिए पांचवे दिन भक्त विशेष रूप से पीले या सफेद रंग के वस्त्र धारण करते हैं और मां के लिए कमल पुष्प फल और मिठाइयों का भोग अर्पित करते हैं। कई भक्त दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं और भजन कीर्तन के माध्यम से मां की स्तुति करते हैं।

    मंदिरों में इस दिन विशेष आयोजन होते हैं। भजन कीर्तन धार्मिक कार्यक्रम और कथा सरिता के माध्यम से भक्तों का मन आध्यात्मिक अनुभव से भर जाता है। इस अवसर पर लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ मां स्कंदमाता की कृपा की कामना करते हैं और एक दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।

    मां स्कंदमाता की भक्ति से जीवन में सुख शांति और समृद्धि का संचार होता है। माता के आशीर्वाद से मानसिक शक्ति विवेक और ज्ञान की वृद्धि होती है जिससे जीवन में हर क्षेत्र में संतुलन और सफलता मिलती है। इस दिन की पूजा से भक्त यह भी विश्वास रखते हैं कि मां की कृपा से उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और संतान से जुड़ी हर चिंता दूर होगी।

    चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन का यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि यह आस्था विश्वास और समाजिक एकता का भी प्रतीक है। मां स्कंदमाता के पूजन से हर भक्त अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव की आशा रखता है और मां की दिव्य कृपा को अनुभव करता है। इस पावन अवसर पर श्रद्धालु हर वर्ष की तरह इस साल भी पूरे मनोयोग और विश्वास के साथ मां स्कंदमाता के पूजन में शामिल हुए।

  • कोठी विवाद में डॉ. गोविंद सिंह का जवाब, धरना प्रदर्शन पर उठे सवालों का खंडन

    कोठी विवाद में डॉ. गोविंद सिंह का जवाब, धरना प्रदर्शन पर उठे सवालों का खंडन


    भिंड । लहार विधानसभा क्षेत्र में कोठी विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। विधायक अम्बरीश शर्मा के धरना प्रदर्शन के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह पर लगाए गए सरकारी रास्ते पर अवैध निर्माण के आरोपों को लेकर राजनीति गर्म हो गई है। इस मामले में डॉ. गोविंद सिंह ने सख्त शब्दों में पलटवार किया और कहा कि उनके ऊपर लगाए जा रहे सभी आरोप पूरी तरह निराधार हैं और तथ्यों से परे हैं।

    डॉ. गोविंद सिंह ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर उनके बेटे और भाई के नाम से कोठी बनी हुई है यदि यह सरकारी रास्ते पर बनी साबित होती है तो वह स्वयं अपने हाथों से रास्ता खुलवा देंगे। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में उन्होंने कभी कोई गलत कार्य नहीं किया है और न ही ऐसे किसी कार्य का समर्थन करेंगे। उन्होंने तात्कालीन कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव और स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठाते हुए बताया कि सर्वे गलत तरीके से कराया गया। उनके अनुसार दो अलग-अलग सर्वे रिपोर्ट सामने आई हैं जिनमें पहली रिपोर्ट को बदलकर दूसरी तैयार की गई जो कई सवाल खड़े करती है।

    डॉ. सिंह ने विधायक अम्बरीश शर्मा की भाषा शैली पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह की भाषा का उपयोग करना उचित नहीं है। विधायक द्वारा जेसीबी से खुद कोठी तोड़ने की बात कहना उनके दबंगई रवैये को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और उन्हें कोर्ट से स्टे मिला हुआ है। न्यायालय ने सभी साक्ष्यों के आधार पर आदेश दिए हैं ऐसे में धरना प्रदर्शन कर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश न्यायोचित नहीं है। डॉ. गोविंद सिंह ने कहा कि यह लड़ाई अदालत में लड़ी जा रही है और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

    वहीं विधायक अम्बरीश शर्मा ने अपने धरना प्रदर्शन के दौरान गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि लहार स्थित डॉ. गोविंद सिंह की कोठी उस स्थान पर बनी है जहां से दलित और पिछड़ा वर्ग की बस्ती मझतौरा मोहल्ला का सरकारी रास्ता निकलता है। उन्होंने दावा किया कि इस रास्ते का सर्वे नंबर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है और करीब डेढ़ साल पहले हुई प्रशासनिक जांच में यह स्पष्ट हो गया था कि रास्ता कोठी के भीतर आता है।

    विधायक ने कहा कि संबंधित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट और स्थानीय सिविल न्यायालय में अपना पक्ष रखा लेकिन कहीं से राहत नहीं मिली। एसडीएम कोर्ट ने भी दलित बस्ती के पक्ष में निर्णय देते हुए रास्ता खोलने के निर्देश दिए। उन्होंने सीधे आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने सरकारी रास्ते पर अवैध रूप से कोठी का निर्माण कराया और मांग की कि निर्माण हटाकर बस्ती के लोगों के लिए रास्ता तुरंत खोला जाए।

    इस विवाद ने इलाके में राजनीतिक उबाल पैदा कर दिया है। दोनों पक्षों के बयान सामने आने के बाद मामला और भी संवेदनशील हो गया है। डॉ. गोविंद सिंह ने यह भी कहा कि वे हमेशा कानून और न्यायपालिका का पालन करते आए हैं और मामले का निपटारा अदालत के आदेशों के अनुसार होना चाहिए।

    कोठी विवाद ने लहार विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच भी सवाल खड़े कर दिए हैं। भले ही धरना प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी हो लेकिन डॉ. गोविंद सिंह ने यह साफ कर दिया है कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।

  • अमेरिका–इज़रायल की अटूट दोस्ती: रणनीति, राजनीति और वैश्विक शक्ति का अद्भुत गठजोड़

    अमेरिका–इज़रायल की अटूट दोस्ती: रणनीति, राजनीति और वैश्विक शक्ति का अद्भुत गठजोड़


    नई दिल्ली:अमेरिका और इज़रायल का रिश्ता आज के समय में केवल दोस्ती नहीं बल्कि एक गहरा रणनीतिक गठबंधन बन चुका है, जिसे वैश्विक राजनीति का सबसे मजबूत समीकरण माना जाता है, यह रिश्ता केवल भावनाओं पर नहीं बल्कि सुरक्षा, तकनीक, खुफिया जानकारी और आर्थिक हितों पर आधारित है, अमेरिका इज़रायल को मध्य पूर्व में अपना एक ऐसा मजबूत ठिकाना मानता है जो पूरे क्षेत्र में उसके हितों की रक्षा करता है, इज़रायल अमेरिका के लिए एक ऐसा सहयोगी है जो उसके रणनीतिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

    मध्य पूर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां तेल और गैस के विशाल भंडार हैं, वहां इज़रायल अमेरिका के लिए एक सुरक्षा ढाल की तरह काम करता है, ईरान जैसे देशों के साथ तनाव के दौरान इज़रायल न केवल अपने हितों की रक्षा करता है बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका के हितों की भी सुरक्षा करता है, यही कारण है कि अमेरिका इज़रायल को हर साल अरबों डॉलर की सैन्य सहायता देता है, हालांकि यह सहायता अंततः अमेरिकी अर्थव्यवस्था को ही वापस मिल जाती है क्योंकि इज़रायल इन पैसों से अमेरिकी हथियार खरीदता है

    युद्ध के मैदान में इन हथियारों के उपयोग से अमेरिका को वास्तविक समय का डेटा मिलता है जिससे वह अपने हथियारों को और उन्नत बना सकता है, मिसाइल डिफेंस सिस्टम जैसे आयरन डोम में भी अमेरिका की अहम भागीदारी है, यह सहयोग दोनों देशों को तकनीकी रूप से और मजबूत बनाता है

    खुफिया जानकारी के क्षेत्र में भी इज़रायल अमेरिका का बेहद भरोसेमंद साझेदार है, इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद का नेटवर्क दुनिया के कई हिस्सों में फैला हुआ है, खासकर इस्लामिक देशों और ईरान के अंदर इसकी पकड़ मजबूत मानी जाती है, इस एजेंसी से मिलने वाली जानकारियां अमेरिका के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं, जिससे वह अपने देश पर संभावित खतरों को समय रहते रोक पाता है

    तकनीकी और आर्थिक साझेदारी भी इस रिश्ते का अहम हिस्सा है, इज़रायल को स्टार्टअप नेशन कहा जाता है, जहां दुनिया की बड़ी कंपनियां जैसे इंटेल, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट अपने रिसर्च सेंटर स्थापित कर चुकी हैं, इज़रायल और अमेरिका के बीच टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का गहरा संबंध है, जिसने दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है

    अमेरिका की घरेलू राजनीति में भी इज़रायल का प्रभाव साफ देखा जा सकता है, अमेरिकी इज़रायल पब्लिक अफेयर्स कमेटी जैसी शक्तिशाली लॉबी वहां की विदेश नीति को प्रभावित करती है, कोई भी अमेरिकी नेता इज़रायल के खिलाफ खुलकर नहीं जा सकता क्योंकि इससे उसका राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है

    इसके अलावा अमेरिका में एक बड़ा ईसाई वर्ग इज़रायल को धार्मिक दृष्टिकोण से समर्थन देता है, वे इसे अपनी आस्था का हिस्सा मानते हैं और इज़रायल की सुरक्षा को अपना कर्तव्य समझते हैं, यह धार्मिक और सांस्कृतिक समर्थन भी इस रिश्ते को मजबूत बनाता है

    इतिहास की बात करें तो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने यूरोप से आए कई यहूदी वैज्ञानिकों और बुद्धिजीवियों को शरण दी, जिनमें अल्बर्ट आइंस्टीन जैसे महान वैज्ञानिक शामिल थे, जिन्होंने परमाणु अनुसंधान और मैनहट्टन प्रोजेक्ट की नींव रखने में भूमिका निभाई, एडवर्ड टेलर और जॉन वॉन न्यूमैन जैसे वैज्ञानिकों ने अमेरिका को वैज्ञानिक महाशक्ति बनाने में योगदान दिया

    ऑपरेशन पेपरक्लिप के जरिए भी अमेरिका ने जर्मन वैज्ञानिकों को अपने साथ जोड़ा, जिससे अंतरिक्ष और रक्षा तकनीक में बड़ी प्रगति हुई, इस तरह यह रिश्ता केवल आज का नहीं बल्कि दशकों पुरानी रणनीतिक सोच का परिणाम है

  • 1 अप्रैल से एटीएम नियमों में होगा बड़ा बदलाव, निकासी सीमा और चार्ज पर पड़ेगा असर

    1 अप्रैल से एटीएम नियमों में होगा बड़ा बदलाव, निकासी सीमा और चार्ज पर पड़ेगा असर

    नई दिल्ली। अगले महीने 1 अप्रैल 2026 से बैंकिंग नियमों में बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जो सीधे एटीएम इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को प्रभावित करेंगे। इन बदलावों के तहत एचडीएफसी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बंधन बैंक ने कैश निकासी सीमा, फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट और चार्ज को लेकर नई व्यवस्था तैयार की है।

    एचडीएफसी बैंक ने फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में किया बदलाव

    एचडीएफसी बैंक ने घोषणा की है कि अब एटीएम कैश विथड्रॉल UPI आधारित फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट से जोड़ा जाएगा। इसका मतलब है कि तय फ्री लिमिट पार होने के बाद हर अतिरिक्त एटीएम ट्रांजैक्शन पर ग्राहकों को 23 रुपये और टैक्स देना होगा। नए नियम मेट्रो शहरों में तीन फ्री ट्रांजैक्शन और नॉन-मेट्रो शहरों में पांच फ्री ट्रांजैक्शन तक ही लागू होंगे। इसके बाद किए जाने वाले हर लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क लगेगा।

    PNB ने घटाई ATM निकासी सीमा

    Punjab National Bank ने अपने कुछ डेबिट और प्रीमियम कार्ड्स पर कैश निकासी सीमा घटाने का फैसला किया है। चुनिंदा डेबिट कार्ड्स पर अब ग्राहक पहले की तुलना में आधी राशि, यानी 50,000 रुपये प्रतिदिन, ही निकाल सकेंगे। वहीं कुछ प्रीमियम कार्ड्स पर दैनिक निकासी सीमा घटाकर 75,000 रुपये कर दी गई है। पहले यह सीमा 1.5 लाख रुपये तक थी। यह बदलाव 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगा।

    बंधन बैंक ने भी बदले नियम

    बंधन बैंक ने भी अपने ग्राहकों के लिए ATM ट्रांजैक्शन से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। अब ग्राहक बैंक के अपने एटीएम पर महीने में सिर्फ 5 फ्री फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन कर सकेंगे। अन्य बैंकों के एटीएम से यह सीमा घटाकर 3 फ्री ट्रांजैक्शन कर दी गई है। तय सीमा पार होने पर हर अतिरिक्त लेनदेन पर 23 रुपये का चार्ज लागू होगा।