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  • दिल की धड़कनों का बिगड़ा संतुलन पड़ सकता है भारी जानिए Atrial Fibrillation के लक्षण कारण और बचाव के आसान उपाय

    दिल की धड़कनों का बिगड़ा संतुलन पड़ सकता है भारी जानिए Atrial Fibrillation के लक्षण कारण और बचाव के आसान उपाय


    नई दिल्ली। दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है और इसकी नियमित धड़कन पूरे शरीर में रक्त संचार को सुचारु बनाए रखती है। लेकिन जब दिल की धड़कन सामान्य लय खो देती है और बहुत तेज या अनियमित होने लगती है तो यह Atrial Fibrillation यानी एट्रियल फिब्रिलेशन का संकेत हो सकता है। यह ऐसी बीमारी है जिसके बारे में आज भी बड़ी संख्या में लोग जानकारी नहीं रखते जबकि यह स्ट्रोक हार्ट फेलियर और कई गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है।

    Atrial Fibrillation में दिल के ऊपरी कक्ष यानी एट्रिया सामान्य तरीके से सिकुड़ने की बजाय बहुत तेजी और अनियमित रूप से कंपन करने लगते हैं। इसके कारण दिल पूरे शरीर में रक्त को प्रभावी ढंग से पंप नहीं कर पाता। जब रक्त का प्रवाह धीमा होता है तो दिल के भीतर थक्का बनने की आशंका बढ़ जाती है। यही थक्का मस्तिष्क तक पहुंचकर स्ट्रोक का कारण बन सकता है जो कई बार जानलेवा भी साबित होता है।

    इस बीमारी के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। मरीज को दिल की धड़कन तेज महसूस होना सीने में घबराहट सांस फूलना चक्कर आना कमजोरी जल्दी थक जाना या सीने में असहजता महसूस हो सकती है। कुछ लोगों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते और बीमारी का पता नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान चलता है। यही कारण है कि इसे खामोश बीमारी भी कहा जाता है।

    बढ़ती उम्र उच्च रक्तचाप मधुमेह मोटापा थायरॉयड की समस्या धूम्रपान अत्यधिक शराब का सेवन तनाव और पहले से मौजूद हृदय रोग Atrial Fibrillation के प्रमुख जोखिम कारक माने जाते हैं। इसके अलावा शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खानपान भी इस बीमारी की संभावना बढ़ा सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही इलाज से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। डॉक्टर ईसीजी इकोकार्डियोग्राफी या अन्य जांचों के माध्यम से इसकी पुष्टि करते हैं। उपचार के दौरान मरीज की स्थिति के अनुसार दवाएं दी जाती हैं ताकि दिल की धड़कन नियंत्रित रहे और रक्त का थक्का बनने का खतरा कम हो सके। कुछ मामलों में विशेष चिकित्सीय प्रक्रियाओं की भी आवश्यकता पड़ सकती है।

    स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित व्यायाम करें संतुलित और पौष्टिक भोजन लें नमक और तैलीय भोजन का सेवन सीमित रखें धूम्रपान और शराब से दूरी बनाए रखें पर्याप्त नींद लें और तनाव को नियंत्रित करने के लिए योग या ध्यान का सहारा लें। यदि पहले से ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी समस्या है तो उसका नियमित उपचार कराना भी बेहद जरूरी है।

    यदि आपको बार बार दिल की धड़कन अनियमित महसूस होती है सांस लेने में परेशानी होती है या अचानक कमजोरी और चक्कर आने जैसी समस्या होती है तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा न करें। समय पर हृदय रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेकर जांच कराना भविष्य में होने वाली गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है। जागरूकता और समय पर उपचार ही इस खामोश लेकिन गंभीर बीमारी से सुरक्षित रहने का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • बांग्लादेशी घुसपैठ पर संसदीय समिति सख्त, सीमाओं पर संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने की दी सिफारिश।

    बांग्लादेशी घुसपैठ पर संसदीय समिति सख्त, सीमाओं पर संयुक्त निगरानी तंत्र बनाने की दी सिफारिश।

    नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच द्विपक्षीय संबंधों और सीमा प्रबंधन को लेकर संसद की विदेश मामलों की स्थायी समिति ने एक महत्वपूर्ण समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत की है। वरिष्ठ सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि पड़ोसी देश बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ आज भी भारत की आंतरिक सुरक्षा और जनसांख्यिकी के लिए एक अत्यंत गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। समिति ने इस संवेदनशील समस्या से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच एक समर्पित ‘संयुक्त कार्य समूह’ या स्थायी द्विपक्षीय तंत्र स्थापित करने का सुझाव दिया है, ताकि सीमा पार से होने वाली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

    रिपोर्ट में उजागर किया गया है कि वर्तमान समय में लगभग 2,369 संदिग्ध प्रवासियों की राष्ट्रीयता की पुष्टि का मामला बांग्लादेश सरकार के पास लंबित पड़ा हुआ है। स्थायी समिति का मानना है कि दोनों देशों के बीच एक औपचारिक और जवाबदेह प्रशासनिक ढांचा बनने से पहचान सत्यापन की यह प्रक्रिया त्वरित गति से पूरी की जा सकेगी। इसके साथ ही, समिति ने यह मानवीय और कानूनी हिदायत भी दी है कि जांच और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया के दौरान पूरी सतर्कता बरती जाए ताकि किसी भी भारतीय नागरिक को गलती से सीमा पार न भेजा जाए और हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए।

    सीमा सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों देशों के बीच फैली 4,096 किलोमीटर लंबी कुल सीमा में से लगभग 3,231 किलोमीटर हिस्से में ही सुरक्षा बाड़ लगाई जा सकी है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, नदी क्षेत्रों और विवादित भूखंडों के कारण अभी भी करीब 864 किलोमीटर की सीमा बिना बाड़ के खुली हुई है, जिसका फायदा अवैध गतिविधियों के लिए उठाया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार इस घुसपैठ का सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव सीमावर्ती राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और असम पर पड़ रहा है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को लगातार सतर्क रहना पड़ता है।

    सुरक्षा चिंताओं के अलावा समिति ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक नियमों के दुरुपयोग पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) के तहत मिलने वाली रियायतों का गलत फायदा उठाकर तीसरे देशों की सामग्री, विशेष रूप से चीनी कपड़ों और उत्पादों को बांग्लादेश के रास्ते भारतीय बाजारों में खपाया जा रहा है। इससे घरेलू उद्योगों और निष्पक्ष व्यापार प्रतिस्पर्धा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। समिति ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय को व्यापारिक नियमों को और अधिक कड़ा करने और उच्च स्तर पर इस मुद्दे को उठाने का परामर्श दिया है।

    संसदीय समिति ने सुरक्षा और व्यापारिक कड़ाई के साथ-साथ कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को पुनः पटरी पर लाने की आवश्यकता पर भी बल दिया है। स्थिति सामान्य होते ही वीजा सेवाओं को चरणबद्ध तरीके से सुचारू करने, वार्षिक संयुक्त साहित्य महोत्सवों के आयोजन और युवाओं के आदान-प्रदान के माध्यम से जन-सामान्य के बीच आपसी विश्वास बढ़ाने की सिफारिश की गई है। इसके अतिरिक्त, समिति ने वैश्विक पटल पर भारत की वैज्ञानिक और कूटनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए ‘ध्रुवीय राजदूत’ की नियुक्ति और अंटार्कटिका में अनुसंधान केंद्रों के निर्माण में तेजी लाने का सुझाव भी दिया है।

  • महान एयर और आईआरजीसी को सहायता पहुंचाने के आरोप में चार देशों की छह संस्थाओं व व्यक्तियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू।

    महान एयर और आईआरजीसी को सहायता पहुंचाने के आरोप में चार देशों की छह संस्थाओं व व्यक्तियों पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू।

    नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर एक नया तनावपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका ने ईरान की शक्तिशाली सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष सहायता प्रदान करने के गंभीर आरोप में भारत, चीन, रूस और ईरान से जुड़ी छह संस्थाओं तथा व्यक्तियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने की आधिकारिक घोषणा की है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व क्षेत्र में ईरानी सैन्य गतिविधियों को मिलने वाले वित्तीय, तकनीकी और रसद संबंधी सहयोग को पूरी तरह से रोकना है।

    अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, इन प्रतिबंधों की मुख्य जद में वे अंतरराष्ट्रीय इकाइयां और कंपनियां आई हैं जो ईरान की विवादित विमानन सेवा ‘महान एयर’ को रसद तथा अन्य संसाधन उपलब्ध करा रही थीं। वाशिंगटन का आरोप है कि इस एयरलाइन का उपयोग लंबे समय से मध्य पूर्व के विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में हथियार, सैन्य कर्मियों और आधुनिक युद्ध उपकरणों के परिवहन के लिए किया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त, टेक सेक्टर से जुड़ी संस्था डाडेनेगर स्टार्टअप स्टूडियो को भी प्रतिबंधित सूची में डाला गया है, जिस पर आईआरजीसी की फ्रंट कंपनी के रूप में काम करने और अमेरिकी व इजरायली रक्षा ठिकानों की निगरानी जानकारी जुटाने का आरोप है।

    यह दंडात्मक कार्रवाई अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ‘ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल’ (ओएफएसी) द्वारा संशोधित कार्यकारी आदेश 13224 के तहत लागू की गई है। यह विशेष आदेश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठनों, उनके सहयोगियों, समर्थकों और वित्तीय तंत्र को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है। अमेरिकी नीति निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि आईआरजीसी और उससे जुड़े वैश्विक तंत्र को किसी भी प्रकार की सहायता प्रदान करने वाली विदेशी संस्थाओं को अमेरिकी वित्तीय बाजार से पूरी तरह से अलग कर दिया जाएगा।

    कार्रवाई के साथ ही अमेरिकी विदेश विभाग ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और निजी वैश्विक कंपनियों के लिए एक गंभीर चेतावनी भी जारी की है। इसमें विशेष रूप से महान एयर या अन्य किसी प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइन के साथ वाणिज्यिक संबंध रखने वाली संस्थाओं को उनसे जुड़े गंभीर कानूनी, व्यावसायिक और वित्तीय जोखिमों के प्रति आगाह किया गया है। अमेरिकी विदेश नीति के अधिकारियों ने दोहराया कि वे उन सभी व्यक्तिगत और संस्थागत नेटवर्क की पहचान जारी रखेंगे जो क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न करने वाले सैन्य संगठनों को संसाधन उपलब्ध कराते हैं।

    उल्लेखनीय है कि महान एयर को सबसे पहले वर्ष 2011 में आईआरजीसी की विशेष ‘कुद्स फोर्स’ को तकनीकी और वित्तीय सहायता देने के कारण अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया गया था। वहीं, आईआरजीसी स्वयं कई वर्षों से अमेरिका की ओर से कड़े प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। चार प्रमुख देशों से जुड़ी संस्थाओं पर एक साथ हुई इस कार्रवाई से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक क्षेत्र और वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

  • वरिष्ठ अभिनेता के बयान से बॉलीवुड में नई चर्चा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जताई गहरी श्रद्धा और सम्मान।

    वरिष्ठ अभिनेता के बयान से बॉलीवुड में नई चर्चा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति जताई गहरी श्रद्धा और सम्मान।

    नई दिल्ली। फिल्म उद्योग के जाने-माने अभिनेता सुदेश बेरी अपने एक हालिया बयान को लेकर अचानक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बातचीत के दौरान उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त किया है। अभिनेता ने प्रधानमंत्री के संघर्ष और नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि भले ही वे उनसे कभी व्यक्तिगत रूप से नहीं मिले हैं, लेकिन उनके मन में देश के सर्वोच्च नेता के प्रति ईश्वर तुल्य आदर और निष्ठा का भाव है।

    वार्तालाप के दौरान सुदेश बेरी ने देश में चल रहे विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक प्रदर्शनों की शैली पर भी बेबाक राय रखी। उन्होंने हाल के दिनों में चर्चा में आए एक संगठन और उनके विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि केवल जंतर-मंतर जैसी जगहों पर बैठकर प्रदर्शन करने से समाज का वास्तविक भला नहीं होता। अभिनेता का मानना है कि यदि कोई सच में जनसेवा करना चाहता है, तो उसे बच्चों के लिए खेल के मैदान, बुजुर्गों के लिए आश्रम और जरूरतमंदों के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे ठोस सामाजिक कार्यों में अपना योगदान देना चाहिए।

    प्रधानमंत्री का बचाव करते हुए अभिनेता ने उनके शुरुआती जीवन के संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा कि एक बेहद साधारण पृष्ठभूमि से उठकर विश्व पटल पर देश का प्रतिनिधित्व करना कोई साधारण बात नहीं है। उन्होंने भावुक होते हुए व्यक्त किया कि जिस तरह लोग बिना देखे ईश्वर पर विश्वास और उनका सम्मान करते हैं, ठीक उसी तरह वे भी प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व और राष्ट्र-निर्माण के प्रयासों के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा रखते हैं और अवसर मिलने पर उन्हें नमन करना चाहते हैं।

    मनोरंजन जगत में अक्सर कलाकारों के राजनीतिक और सामाजिक बयानों को लेकर काफी बहस देखने को मिलती है। सुदेश बेरी के इस बयान ने भी सोशल मीडिया और सिनेमा प्रेमियों के बीच एक नई वैचारिक चर्चा को जन्म दे दिया है। जहां कुछ लोग उनके बेबाक अंदाज और विचार की सराहना कर रहे हैं, वहीं कुछ अन्य लोग विरोध प्रदर्शनों पर दिए गए उनके सुझावों को लेकर अलग दृष्टिकोण रखते हैं।

    अभिनय क्षेत्र की बात करें तो सुदेश बेरी लंबे समय से भारतीय सिनेमा और टेलीविजन उद्योग से जुड़े रहे हैं। उन्होंने ‘बॉर्डर’ जैसी देशभक्ति पर आधारित ऐतिहासिक फिल्मों से लेकर कई लोकप्रिय धारावाहिकों में अपनी सशक्त अभिनय क्षमता का परिचय दिया है। हाल ही में वे ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों के सीक्वल में एक संक्षिप्त भूमिका में नजर आए थे। फिलहाल उनके इस बयान के बाद बॉलीवुड के गलियारों में उनकी काफी चर्चा हो रही है।

  • ग्लास्गो में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, आठवें दिन दो पदक जीतकर बढ़ाया देश का मान।

    ग्लास्गो में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, आठवें दिन दो पदक जीतकर बढ़ाया देश का मान।

    नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेल 2026 के आठवें दिन भारतीय एथलीटों ने उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए देश की झोली में दो महत्वपूर्ण पदक डाले। ग्लास्गो में चल रहे इन खेलों में भारत को पुरुषों की भारोत्तोलन स्पर्धा में एक रजत और महिलाओं की डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में एक कांस्य पदक हासिल हुआ। इसके साथ ही एथलेटिक्स के कई अन्य आयोजनों में भी भारतीय खिलाड़ियों ने अपनी छाप छोड़ी और फाइनल दौर में प्रवेश कर आगामी दिनों में और अधिक पदकों की उम्मीदों को जीवंत कर दिया है।

    भारोत्तोलन के मैदान से भारत के लिए सबसे बड़ी सफलता पुरुषों के 110+ किलोग्राम भार वर्ग में आई, जहां लवप्रीत सिंह ने अपनी ताकत का लोहा मनवाया। लवप्रीत ने स्नैच श्रेणी में 176 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क श्रेणी में 212 किलोग्राम का वजन उठाते हुए कुल 388 किलोग्राम भार उठाया और रजत पदक अपने नाम किया। वह बेहद कड़े मुकाबले में महज एक किलोग्राम के अंतर से स्वर्ण पदक से चूक गए। वहीं, महिला वर्ग के 86+ किलोग्राम भार वर्ग में मार्टिना देवी मेबाम कुल 245 किलोग्राम भार उठाकर पांचवें स्थान पर रहीं।

    दिन की दूसरी बड़ी उपलब्धि महिलाओं की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में मिली, जहां अनुभवी एथलीट सीमा ने भारत को कांस्य पदक दिलाया। सीमा ने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 58.65 मीटर दूर थ्रो फेंककर पोडियम पर तीसरा स्थान पक्का किया। इसी स्पर्धा में भारत की एक अन्य खिलाड़ी निधि रानी ने भी शानदार प्रदर्शन किया और 57.10 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ चौथे स्थान पर रहीं। एथलेटिक्स में भारत का यह मिला-जुला प्रदर्शन वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती धाक को प्रदर्शित करता है।

    एथलेटिक्स के अन्य ट्रैक और फील्ड इवेंट्स में भी भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में नीरज चोपड़ा, रोहित यादव और यशवीर सिंह तीनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए शीर्ष-12 में जगह बनाई और फाइनल में प्रवेश किया। इसके अतिरिक्त, पुरुषों की त्रिकूद स्पर्धा में प्रवीण चित्रावले और सेल्वा प्रभु ने क्वालिफाइंग दौर में क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान हासिल कर फाइनल का टिकट पक्का किया, जबकि डेकाथलॉन में तेजस्विन शंकर ने हाई जंप और लॉन्ग जंप में व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए बेहतरीन अंक बटोरे।

    हालांकि, कुछ स्पर्धाओं में भारत को निराशा का सामना भी करना पड़ा। पुरुषों की 200 मीटर दौड़ के सेमीफाइनल में अनिमेष कुजुर और 400 मीटर दौड़ में विशाल टीके फाइनल में जगह बनाने से चूक गए। गोला फेंक में तजिंदर पाल सिंह तूर पांचवें स्थान पर रहे। दूसरी ओर, लॉन बॉल्स में पुरुषों की पेयर्स टीम ने जीत दर्ज की, जबकि ट्रैक साइकिलिंग में भारतीय टीम पदक दौर तक नहीं पहुंच सकी। कुल मिलाकर आठवां दिन भारत के लिए पदकों और नए अवसरों से भरा रहा।

  • केसरिया रंग पर छिड़ा घमासान, भारतीय हॉकी की पहचान और नीली जर्सी के इतिहास पर उठा बड़ा सवाल।

    केसरिया रंग पर छिड़ा घमासान, भारतीय हॉकी की पहचान और नीली जर्सी के इतिहास पर उठा बड़ा सवाल।

    नई दिल्ली। खेल जगत में किसी भी राष्ट्रीय टीम की जर्सी केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि उसकी दशकों पुरानी पहचान, विरासत और प्रशंसकों के भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक होती है। भारतीय खेल इतिहास में ‘मैन इन ब्लू’ और ‘विमेन इन ब्लू’ की अवधारणा केवल एक शब्द नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर भारत की खेल पहचान बन चुकी है। आगामी एफआईएच विश्व कप से ठीक पहले हॉकी इंडिया द्वारा भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम की प्राथमिक जर्सी का रंग पारंपरिक नीले से बदलकर केसरिया करने के फैसले ने देश में एक नया विवाद और गहन वैचारिक बहस छेड़ दी है।

    हॉकी इंडिया ने जर्सी का रंग बदलने के पीछे तकनीकी और खेल विज्ञान से जुड़े कारणों का हवाला दिया है। महासंघ का तर्क है कि आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं में अधिकांश सिंथेटिक एस्ट्रोटर्फ नीले रंग की होती हैं। मैचों के दौरान नीली जर्सी पहनकर खेलने से खिलाड़ियों के कपड़े नीले टर्फ के रंग में मिल जाते हैं, जिससे मैदान पर साथी खिलाड़ियों की दृश्यता में बाधा आती है और त्वरित निर्णय लेने में परेशानी होती है। सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों के परामर्श से दृश्यता में सुधार के उद्देश्य से ही यह बदलाव किया गया है।

    हालांकि, इस तकनीकी दलील के बावजूद खेल जगत के कई दिग्गजों और पूर्व कप्तानों ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। पूर्व दिग्गजों का कहना है कि भारतीय हॉकी का गौरवशाली इतिहास नीली जर्सी के साथ जुड़ा हुआ है और विश्व पटल पर भारत की पहचान इसी रंग से बनती रही है। खेल के अंतरराष्ट्रीय जानकारों का मानना है कि ब्राजील की पीली, न्यूजीलैंड की काली या इटली की नीली जर्सी की तरह भारतीय टीम का नीला रंग भी दशकों की मेहनत के बाद एक वैश्विक ब्रांड बना था, जिसे एक झटके में बदलना अनुचित है।

    राजनीतिक गलियारों में भी इस बदलाव को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों के नेताओं ने इस फैसले को सांस्कृतिक और वैचारिक ब्रांडिंग का हिस्सा बताते हुए सवाल उठाए हैं, जबकि खेल प्रशासन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि खेलों में जर्सी के डिजाइन और रंग समय-समय पर बदलते रहे हैं और इस निर्णय को किसी राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए।

    वैश्विक खेलों में जर्सी के रंग और राष्ट्रीय ध्वज के बीच अंतर होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन किसी स्थापित खेल राष्ट्र की प्राथमिक पहचान को अचानक बदल देना हमेशा से चर्चा का विषय बनता रहा है। 1928 से लेकर अब तक ओलंपिक और विश्व कप के मंचों पर भारतीय हॉकी ने जो स्वर्णिम अध्याय लिखे हैं, वे किसी एक रंग से कहीं बढ़कर हैं। फिलहाल, यह बहस केवल एक रंग तक सीमित न रहकर खेल की ब्रांडिंग, विरासत और संस्थागत फैसलों में पारदर्शिता के इर्द-गिर्द घूम रही है।

  • तेलंगाना में घर के आंगन में पहुंचा 12 फीट लंबा अजगर, सुबह-सुबह विशालकाय जीव को देख फैली भारी दहशत।

    तेलंगाना में घर के आंगन में पहुंचा 12 फीट लंबा अजगर, सुबह-सुबह विशालकाय जीव को देख फैली भारी दहशत।

    नई दिल्ली। मानसून के मौसम में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवासों से निकलकर आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी क्रम में तेलंगाना के मंचेरियल जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और भयावह मामला प्रकाश में आया है। मंचेरियल के मंदामर्री सेकेंड जोन इलाके में एक आवासीय मकान के आंगन में अचानक लगभग 12 फीट लंबा विशालकाय अजगर दिखाई देने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह घटी इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार के सदस्यों के बीच भारी दहशत का माहौल बन गया।

    घटना की शुरुआत सुबह के समय हुई जब घर के सदस्य अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। इसी दौरान आंगन में एक कोने में कुंडली मारकर बैठे विशालकाय अजगर पर गृहस्वामी रमेश और उनके परिजनों की नजर पड़ी। इतने बड़े जीव को अचानक अपने घर के परिसर में देखकर परिवार के सदस्य घबरा गए और तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के पड़ोसी भी अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ एकत्रित हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अजगर की लंबाई करीब 12 फीट थी और वह काफी विशाल था। रिहायशी बस्ती के बीचों-बीच इतने बड़े अजगर को देखकर लोग भयभीत हो गए। अनहोनी की आशंका को देखते हुए परिजनों ने तुरंत बच्चों को सुरक्षित कमरों के भीतर बंद कर दिया। हालांकि, इस दौरान कुछ स्थानीय निवासियों ने सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित होने लगा, जिससे आसपास के अन्य इलाकों में भी चर्चा का बाजार गर्म हो गया।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में छोटी-मोटी प्रजातियों के सांप अक्सर देखे जाते हैं, लेकिन इतने बड़े आकार का अजगर पहली बार किसी के घर के भीतर पहुंचा है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि बारिश के कारण प्राकृतिक आवासों और जंगलों में पानी भर जाने की वजह से यह जीव सूखे और सुरक्षित स्थान की तलाश में भटकते हुए आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश कर गया। इस घटना के बाद से पूरे मोहल्ले में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोग आसपास की झाड़ियों और खाली पड़े भूखंडों पर विशेष निगरानी रख रहे हैं।

    पर्यावरण और वन्यजीव विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जानकारों का कहना है कि बारिश के दिनों में झाड़ियों, पुरानी लकड़ियों के ढेर और पानी जमा होने वाले स्थानों पर विषैले व विशालकाय जीवों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में किसी भी वन्यजीव को नुकसान पहुंचाने या उकसाने के बजाय उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और तुरंत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या वन विभाग की टीम को सूचित करना चाहिए ताकि समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।

  • सोनम ने किया सरेंडर, अब छह महीने में ट्रायल पूरा करने की चुनौती, जनवरी तक आ सकता है फैसला

    सोनम ने किया सरेंडर, अब छह महीने में ट्रायल पूरा करने की चुनौती, जनवरी तक आ सकता है फैसला


    इंदौर  इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी के ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने के बाद अब मामले की सुनवाई निर्णायक चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पालन में सोनम ने 29 जुलाई को मेघालय के शिलॉन्ग स्थित ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। इसके साथ ही अब कानूनी प्रक्रिया तेज होने की संभावना जताई जा रही है। विधि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अदालत में सुनवाई तय समय-सीमा के भीतर पूरी होती है तो इस बहुचर्चित मामले में जनवरी 2027 तक फैसला आ सकता है।

    सोनम के सरेंडर के बाद सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रायल छह महीने में पूरा करने की जो समय-सीमा तय की गई है, उसकी गणना किस तारीख से होगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह अवधि सरेंडर की तारीख से नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई 2026 के आदेश की तारीख से मानी जाएगी। अदालत ने अपने आदेश में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया कि छह महीने की अवधि सरेंडर के दिन से प्रभावी होगी। इसलिए आदेश जारी होने की तारीख ही कानूनी रूप से समय-सीमा का आधार मानी जाएगी।

    कानूनी विशेषज्ञ एडवोकेट आशीष एस. शर्मा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को सोनम को अंतरिम राहत देते हुए दो महत्वपूर्ण शर्तें रखी थीं। पहली, तीन सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करना और दूसरी, यदि छह महीने के भीतर ट्रायल अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ता या पूरा नहीं होता तो आरोपी को दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता होगी।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि छह महीने की शर्त केवल ट्रायल में देरी के आधार पर दोबारा जमानत मांगने से जुड़ी है। यदि इस दौरान कोई नया कानूनी आधार सामने आता है, जैसे गंभीर स्वास्थ्य समस्या, गवाहों की जिरह में कोई महत्वपूर्ण नया तथ्य या ऐसा कोई कानूनी पहलू जो मामले की दिशा बदल सकता हो, तो आरोपी छह महीने पूरे होने का इंतजार किए बिना भी नई जमानत याचिका दायर कर सकती है।

    अभियोजन पक्ष से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक सबूत, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल रिकॉर्ड और फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अभियोजन को यह साबित करना होगा कि सभी साक्ष्य एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और उनकी पूरी श्रृंखला केवल आरोपियों की संलिप्तता की ओर ही संकेत करती है। यदि यह वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी संदेह से परे सिद्ध हो जाती है, तो इन्हीं के आधार पर दोष सिद्ध होने की संभावना मजबूत होगी।

    विशेषज्ञों के अनुसार सोनम द्वारा तय समय से पहले सरेंडर करना भी कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इससे यह संदेश जाता है कि उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान किया और न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग किया। भविष्य में यदि वह जमानत की मांग करती है तो उसका पक्ष यह तर्क रख सकता है कि उसने अदालत के सभी निर्देशों का समय पर पालन किया और जांच व ट्रायल में पूरा सहयोग दिया। हालांकि केवल समय पर सरेंडर करना जमानत मिलने का स्वतः आधार नहीं बनता।

    अब इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में अदालत की कार्यवाही, आरोप तय होने की प्रक्रिया, गवाहों की गवाही और वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की अपेक्षित समय-सीमा के अनुसार आगे बढ़ती है तो अगले वर्ष जनवरी तक इस बहुचर्चित मामले में फैसला आने की संभावना जताई जा रही है।

  • यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    यूट्यूब व्लॉग के जरिए अभिनेत्री और उनके पति ने साझा की आपबीती, पूरी रात पुलिस स्टेशन में बिताकर कराई एफआईआर।

    नई दिल्ली। मनोरंजन जगत की चर्चित अभिनेत्री संभावना सेठ और उनके पति अविनाश द्विवेदी एक गंभीर घटनाक्रम के कारण सुर्खियों में आ गए हैं। इस दंपति ने अपनी इंसानियत और सतर्कता का परिचय देते हुए एक युवती को बंधक बनाए जाने और प्रताड़ित किए जाने के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपनी घरेलू सहायिका की बहन की जान बचाने के लिए इस दंपति को पूरी रात मुंबई के पुलिस स्टेशन में बितानी पड़ी, जिसके बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया और पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए।

    पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब अभिनेत्री की घरेलू सहायिका ने रोते हुए अपनी बहन के साथ हो रहे अत्याचार की जानकारी दी। उसने बताया कि उसकी बहन को मुंबई के खारघर इलाके में स्थित एक मकान में एक एजेंसी के जरिए काम पर रखा गया था। वहां उसे दर्जनों पालतू जानवरों की देखभाल के लिए रखा गया था, लेकिन धीरे-धीरे उस पर काम का अत्यधिक बोझ डाल दिया गया। जब युवती ने काम करने में असमर्थता जताई, तो आरोपी दंपत्ति ने उसे घर में ही बंधक बना लिया। आरोप है कि युवती को खाना देना बंद कर दिया गया, उसके पहचान पत्र और कपड़े छीन लिए गए और लगातार जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अभिनेत्री और उनके पति तुरंत हरकत में आए। उन्होंने पहले फोन के माध्यम से संबंधित पक्षों से संपर्क कर युवती को छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद एक गैर-सरकारी संगठन की मदद से बेहद मशक्कत के बाद पीड़िता को उस घर से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जब पीड़िता को सुरक्षित स्थान पर लाया गया, तो उसकी मानसिक स्थिति काफी दयनीय थी और वह अत्यधिक डरी-सहमी हुई थी।

    मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी पक्ष ने खुद को बचाने और पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पीड़िता पर ही झूठे आरोप लगाने की कोशिश की। इसके बाद अभिनेत्री और उनके पति स्वयं आधी रात को मुंबई के बांगुर नगर पुलिस स्टेशन पहुंचे। दोनों ने पूरी रात पुलिस स्टेशन में रुककर अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। काफी मशक्कत और सबूत पेश किए जाने के बाद सुबह पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए आरोपियों के खिलाफ औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की।

    इस पूरी घटना का विवरण दंपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया है, जिसकी हर तरफ सराहना हो रही है। घरेलू सहायिका और उसके परिवार ने अभिनेत्री और उनके पति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यदि वे समय पर ढाल बनकर नहीं खड़े होते, तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की कानूनी जांच शुरू कर दी है और पीड़िता को आवश्यक सहायता प्रदान की जा रही है।

  • बॉलीवुड गलियारों के कथित सीक्रेट रिलेशनशिप पर नया खुलासा, इंटरव्यू के इंतजार के दौरान वैनिटी से बाहर निकली थीं अभिनेत्री।

    बॉलीवुड गलियारों के कथित सीक्रेट रिलेशनशिप पर नया खुलासा, इंटरव्यू के इंतजार के दौरान वैनिटी से बाहर निकली थीं अभिनेत्री।

    नई दिल्ली। बॉलीवुड उद्योग में सितारों के व्यक्तिगत जीवन और आपसी संबंधों को लेकर चर्चाएं अक्सर सुर्खियों में बनी रहती हैं। इसी क्रम में अभिनेता सनी देओल और अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया के कथित संबंधों को लेकर एक बार फिर नई चर्चा शुरू हो गई है। फिल्म उद्योग में दशकों से चल रही इन अफवाहों के बीच वरिष्ठ फिल्म पत्रकार ज्योति वेंकटेश ने एक पुराने वाकये का जिक्र करते हुए इस विषय पर बड़ा दावा किया है, जिससे सिनेमा जगत के गलियारों में पुरानी यादें और अटकलें फिर से ताजा हो गई हैं।

    वरिष्ठ पत्रकार ने एक हालिया साक्षात्कार में दावा किया कि फिल्म उद्योग में कई ऐसे संबंध होते हैं, जिनकी जानकारी लगभग सभी को होती है लेकिन उन पर सार्वजनिक रूप से कम ही बात की जाती है। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि सालों पहले वह अभिनेता सनी देओल का साक्षात्कार लेने के लिए मुंबई स्थित प्रसिद्ध कमालिस्तान स्टूडियो पहुंचे थे। जब वे निर्धारित बातचीत के लिए अभिनेता की वैनिटी वैन की ओर बढ़े, तो वहां मौजूद निजी कर्मचारियों ने उन्हें रोक दिया और थोड़ा इंतजार करने का अनुरोध किया।

    पत्रकार के अनुसार, लगभग आधे घंटे के लंबे इंतजार के बाद अभिनेता स्वयं वैनिटी वैन से बाहर आए और विलंब के लिए शिष्टाचारपूर्वक खेद व्यक्त किया। हालांकि, साक्षात्कार शुरू होने से ठीक पहले जो दृश्य देखने को मिला, वह काफी चौंकाने वाला था। पत्रकार ने दावा किया कि उसी वैनिटी वैन का दरवाजा दोबारा खुला और उसमें से प्रसिद्ध अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया बाहर निकलीं। अभिनेत्री ने वहां मौजूद पत्रकार को देखकर औपचारिक अभिवादन किया और फिर वहां से चली गईं, जिसके बाद साक्षात्कार की प्रक्रिया शुरू हो सकी।

    इस पूरी घटना के बाद जब पत्रकार ने वैनिटी वैन के भीतर जाकर अभिनेता से मुलाकात की, तो माहौल को सहज बनाने का प्रयास किया गया। पत्रकार का कहना है कि अभिनेता ने इस मुलाकात को पूरी तरह व्यावसायिक बताते हुए स्पष्ट किया कि वे दोनों किसी आगामी प्रोजेक्ट की पटकथा पर चर्चा कर रहे थे। हालांकि, इस घटना के बाद से ही दोनों कलाकारों के बीच के समीकरणों को लेकर उद्योग के भीतर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे थे, जो समय-समय पर मीडिया की सुर्खियों का हिस्सा बनते रहे हैं।

    बॉलीवुड के इतिहास में ऐसे कई किस्से दर्ज हैं जो पर्दे के पीछे की कहानियों को सामने लाते हैं। दोनों कलाकारों ने हमेशा अपने निजी जीवन को मीडिया की चकाचौंध से दूर रखने की कोशिश की है और इन दावों पर कभी सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, दशकों पुराने इस वाकये के सार्वजनिक मंच पर आने के बाद एक बार फिर मनोरंजन जगत में दोनों के रिश्तों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।