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  • सूर्य ग्रहण के बाद स्नान पूजा और दान का क्या है महत्व जानिए कब जरूरी है और कब नहीं लागू होता यह नियम

    सूर्य ग्रहण के बाद स्नान पूजा और दान का क्या है महत्व जानिए कब जरूरी है और कब नहीं लागू होता यह नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सूर्य ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं बल्कि गहरी धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक महत्व से जुड़ा अवसर माना जाता है। ग्रहण के दौरान और उसके समाप्त होने के बाद कई परंपराओं का पालन किया जाता है जिनमें स्नान पूजा और दान का विशेष महत्व बताया गया है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा के पीछे धार्मिक मान्यताएं और आध्यात्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं। यही कारण है कि सूर्य ग्रहण समाप्त होते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान कर भगवान का स्मरण करते हैं और अपने दिन की शुरुआत शुभ कार्यों से करते हैं।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। ऐसे में ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना शारीरिक और मानसिक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि स्नान करने से व्यक्ति स्वयं को पवित्र बनाकर दोबारा पूजा पाठ और धार्मिक कार्यों के योग्य बनाता है। यह परंपरा केवल बाहरी स्वच्छता तक सीमित नहीं बल्कि मन और विचारों की पवित्रता का भी संदेश देती है। हालांकि इस मान्यता का वैज्ञानिक रूप से कोई निश्चित प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इसे मुख्य रूप से धार्मिक आस्था के रूप में ही देखा जाता है।

    स्नान के बाद भगवान की पूजा करने की परंपरा भी विशेष महत्व रखती है। श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करते हैं दीप प्रज्वलित करते हैं मंत्र जाप करते हैं और अपने इष्ट देव की आराधना करते हैं। ऐसा विश्वास किया जाता है कि ग्रहण के बाद किया गया ईश्वर का स्मरण मन को शांति प्रदान करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। कई लोग इस अवसर पर गायत्री मंत्र आदित्य हृदय स्तोत्र और सूर्य मंत्रों का जाप भी करते हैं ताकि जीवन में सुख समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना पूरी हो सके।

    ग्रहण समाप्त होने के बाद दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक ग्रंथों में अन्न वस्त्र फल दक्षिणा और जरूरतमंदों की सहायता को पुण्यदायी माना गया है। यह भी कहा जाता है कि अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान व्यक्ति के भीतर सेवा और परोपकार की भावना को मजबूत करता है। धर्म शास्त्रों में दान को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रतीक माना गया है।

    सूर्य ग्रहण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी रहता है कि यदि ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई ही नहीं दे तो क्या वहां भी ग्रहण के सभी नियम लागू होते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई नहीं देता वहां सामान्यतः सूतक काल मान्य नहीं माना जाता। ऐसे में ग्रहण के बाद स्नान करना अनिवार्य धार्मिक नियम नहीं माना जाता। फिर भी अनेक लोग अपनी पारिवारिक परंपरा और व्यक्तिगत आस्था के अनुसार स्नान पूजा और दान जैसे कार्य करते हैं।

    ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहण के बाद स्नान करने की परंपरा नई सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक है। उनका कहना है कि इससे व्यक्ति अपने मन में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लेता है। यदि ग्रहण आपके क्षेत्र में दिखाई नहीं देता तो धार्मिक नियमों का पालन पूरी तरह आपकी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।

    धार्मिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण बात यह मानी जाती है कि ग्रहण के बाद भगवान का स्मरण किया जाए सकारात्मक विचार अपनाए जाएं और जीवन में सदाचार सेवा तथा आध्यात्मिकता को स्थान दिया जाए। यही ग्रहण की परंपराओं का वास्तविक संदेश भी माना जाता है।

  • एमपी सरकार का बड़ा फैसला, बिल्डिंग परमिशन के लिए विभागों के चक्कर खत्म, डिजिटल सिस्टम लागू

    एमपी सरकार का बड़ा फैसला, बिल्डिंग परमिशन के लिए विभागों के चक्कर खत्म, डिजिटल सिस्टम लागू


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में भवन निर्माण की अनुमति प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब घर, व्यावसायिक भवन या अन्य निर्माण कार्यों के लिए बिल्डिंग परमिशन लेते समय लोगों को कई विभागों से अलग-अलग अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लाने की बाध्यता नहीं रहेगी। सरकार ने पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया है, जिससे आवेदन से लेकर अनुमति जारी होने तक सभी चरण ऑनलाइन पूरे होंगे और केवल डिजिटल दस्तावेज ही स्वीकार किए जाएंगे।

    नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने इस संबंध में प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को विस्तृत निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे द्वारा जारी आदेश के अनुसार नई व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों, निवेशकों, बिल्डर्स और निर्माण एजेंसियों को अनावश्यक औपचारिकताओं और विभागीय चक्करों से राहत देना है।

    नई व्यवस्था के तहत सहकारिता विभाग, गृह निर्माण सहकारी समितियों, नजूल विभाग और बिजली विभाग से विभिन्न प्रकार की एनओसी लेने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा रक्षा प्रतिष्ठानों, मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल तथा विकास प्राधिकरणों से जुड़े मामलों में भी अब आवेदक को स्वयं एनओसी लाने की जरूरत नहीं होगी।

    यदि किसी मामले में संबंधित विभाग की राय आवश्यक होगी तो भवन अनुमति देने वाला सक्षम प्राधिकारी आवेदन प्राप्त होने के सात दिन के भीतर संबंधित विभाग को प्रकरण भेजेगा। संबंधित विभाग को 21 दिनों के भीतर अपनी आपत्ति या अनापत्ति दर्ज करनी होगी। यदि निर्धारित समय सीमा में कोई जवाब नहीं मिलता है तो भवन अनुमति की प्रक्रिया बिना विलंब आगे बढ़ाई जा सकेगी। इससे फाइलों के लंबित रहने और अनावश्यक देरी पर रोक लगेगी।

    हालांकि सरकार ने कुछ मामलों में एनओसी की अनिवार्यता बरकरार रखी है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण और हेरिटेज क्षेत्रों से जुड़े मामलों में एनओसी केवल तभी आवश्यक होगी जब ऑनलाइन जीआईएस आधारित जांच में संबंधित भूखंड प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्र में पाया जाएगा। सामान्य मामलों में इन विभागों से अलग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।

    सरकार ने पर्यावरण और अग्निशमन संबंधी नियमों को भी स्पष्ट किया है। केवल निर्धारित सीमा से बड़े भवनों और परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृति आवश्यक होगी। इसी तरह वृक्ष कटाई की अनुमति भी केवल उन्हीं मामलों में ली जाएगी जहां वास्तव में पेड़ों को हटाने की आवश्यकता होगी। अग्निशमन विभाग की अनापत्ति राष्ट्रीय भवन संहिता के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार लागू रहेगी।

    राज्य सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से भवन निर्माण अनुमति प्रक्रिया तेज होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डिजिटल प्रक्रिया लागू होने से दस्तावेजों की जांच, स्वीकृति और रिकॉर्ड प्रबंधन भी अधिक प्रभावी होगा। इससे निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ शहरी विकास परियोजनाओं में भी तेजी आने की उम्मीद है।

  • ग्लास्गो में गरजेंगे भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी, नीरज चोपड़ा की अगुआई में तीनों एथलीटों ने फाइनल में बनाई जगह।

    ग्लास्गो में गरजेंगे भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी, नीरज चोपड़ा की अगुआई में तीनों एथलीटों ने फाइनल में बनाई जगह।


    नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के लिए एथलेटिक्स के मैदान से बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है। ग्लास्गो के प्रसिद्ध स्कॉटस्टाउन स्टेडियम में आयोजित पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के क्वालिफिकेशन राउंड में दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा की अगुआई में भारत की तीन सदस्यीय जेवलिन टीम ने दमदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल का टिकट हासिल कर लिया है। नीरज चोपड़ा के साथ-साथ रोहित यादव और यशवीर सिंह ने भी शीर्ष-12 में जगह बनाई है, जिससे इस स्पर्धा में हिस्सा ले रहा पूरा भारतीय दल अब सीधे पदक की दौड़ में शामिल हो गया है।

    प्रतियोगिता के दौरान स्कॉटस्टाउन स्टेडियम का माहौल खिलाड़ियों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा। लगभग 18 डिग्री सेल्सियस का कम तापमान और सामने से लगातार आ रही तेज हवाओं ने थ्रोअर्स की राह कठिन बना दी। विपरीत परिस्थितियों का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे क्वालिफिकेशन राउंड में भाग ले रहे 18 प्रतिभागियों में से एक भी एथलीट 84 मीटर के ऑटोमैटिक क्वालिफिकेशन मार्क को नहीं छू सका। केवल चार खिलाड़ी ही 80 मीटर की दूरी तय कर पाए, जिसके चलते प्रदर्शन के आधार पर शीर्ष-12 खिलाड़ियों को अंतिम चरण के लिए चुना गया।

    पूर्व राष्ट्रमंडल खेल स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा ने अत्यंत संयमित रणनीति के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास में 79.61 मीटर की दूरी दर्ज कर क्वालिफिकेशन में पांचवां स्थान प्राप्त किया। शुरुआती प्रयासों में ही स्थान सुरक्षित हो जाने के कारण उन्होंने अपनी ऊर्जा बचाते हुए अंतिम थ्रो नहीं करने का फैसला किया। उनके साथी भारतीय एथलीट रोहित यादव ने 78.37 मीटर थ्रो के साथ नौवां और यशवीर सिंह ने 78.36 मीटर के थ्रो के साथ दसवां स्थान हासिल कर फाइनल में अपनी जगह पक्की की।

    ग्लास्गो की ठंड और कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्टेडियम में उपस्थित दर्शकों का सबसे ज्यादा समर्थन भारतीय स्टार नीरज चोपड़ा को मिला। पीठ के निचले हिस्से में लगी चोट के कारण लंबे समय तक मैदान से दूर रहने के बाद हाल ही में प्रतिस्पर्धी खेल में वापसी करने वाले नीरज के लिए यह पड़ाव बेहद खास है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिली इस सफलता से खिलाड़ी के गृहनगर हरियाणा के पानीपत जिले में स्थित खंडरा गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है और पूरे देश को अब फाइनल मुकाबले में उनसे एक और ऐतिहासिक स्वर्ण पदक की उम्मीद है।

    अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों की बात करें तो श्रीलंका के रुमेश थरंगा पथिरागे ने 82.84 मीटर के थ्रो के साथ क्वालिफिकेशन में शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि पेरिस ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता पाकिस्तान के अरशद नदीम 78.63 मीटर के साथ सातवें स्थान पर रहकर फाइनल में पहुंचे। वहीं पूर्व राष्ट्रमंडल चैंपियन केन्या के जूलियस येगो 13वें स्थान पर रहने के कारण प्रतियोगिता से बाहर हो गए। भारतीय दल का यह प्रदर्शन एथलेटिक्स में भारत की बढ़ती धमक को दर्शाता है और अब शुक्रवार देर रात होने वाले खिताबी मुकाबले पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी।

  • अन्न के अनादर से नाराज हो सकती हैं मां अन्नपूर्णा, जानिए भोजन परोसते समय किन वास्तु नियमों का पालन है अनिवार्य।

    अन्न के अनादर से नाराज हो सकती हैं मां अन्नपूर्णा, जानिए भोजन परोसते समय किन वास्तु नियमों का पालन है अनिवार्य।

    नई दिल्ली। हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में भोजन को केवल शरीर के पोषण का साधन नहीं माना गया है, बल्कि इसे साक्षात अन्नपूर्णा का स्वरूप और अत्यंत पवित्र माना गया है। घर में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए रसोईघर से लेकर भोजन परोसने तक कई महत्वपूर्ण वास्तु नियम बताए गए हैं। इन्हीं नियमों में से एक बेहद महत्वपूर्ण नियम थाली में रोटी परोसने के सही तरीके से जुड़ा हुआ है। अक्सर लोग जल्दबाजी या अनजाने में किसी व्यक्ति के हाथ में सीधे रोटी थमा देते हैं, जिसे वास्तु के दृष्टिकोण से अत्यंत अशुभ और दोषपूर्ण माना गया है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी भी व्यक्ति चाहे वह परिवार का सदस्य हो, अतिथि हो या कोई याचक, उसके हाथ में सीधे रोटी देना अन्न का अनादर करने के समान है। मान्यता है कि इस प्रकार से भोजन देने से देवी अन्नपूर्णा और माता लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। हाथ में रोटी देने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और धीरे-धीरे परिवार को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, ऐसा करने से देने वाले और लेने वाले दोनों के संबंधों पर विपरीत प्रभाव पड़ता है तथा घर की बरकत समाप्त होने लगती है।

    शास्त्रों में भोजन परोसने की एक निश्चित और मर्यादित प्रक्रिया निर्धारित की गई है। भोजन हमेशा सम्मानपूर्वक साफ-सुथरी थाली या प्लेट में रखकर ही दिया जाना चाहिए। जब भी किसी को रोटी परोसनी हो, तो उसे सीधे हाथ में देने के बजाय प्लेट में ही रखना चाहिए। इसके अलावा, थाली में एक साथ तीन रोटियां परोसना भी वास्तु शास्त्र और हिंदू परंपराओं में वर्जित माना गया है। मान्यता है कि तीन संख्या को शुभ कार्यों में अनुकूल नहीं माना जाता, इसलिए थाली में हमेशा एक, दो या विषम-सम के सही संयोजन में ही रोटियां रखनी चाहिए।

    वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि अन्न का सम्मान सीधे तौर पर व्यक्ति के मानसिक तनाव और घर की सुख-शांति से जुड़ा होता है। जब हम किसी को आदरपूर्वक भोजन कराते हैं, तो उससे सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है। इसके विपरीत, अनुचित तरीके से भोजन परोसने पर घर में क्लेश और बीमारियां पनपने लगती हैं। रसोईघर में पहली रोटी गाय के लिए और अंतिम रोटी कुत्ते के लिए निकालने की परंपरा भी इसी सम्मान और वास्तु संतुलन का हिस्सा है, जिससे ग्रह दोष शांत होते हैं।

    भोजन बनाते समय और परोसते समय मन की पवित्रता भी उतनी ही आवश्यक मानी गई है। वास्तु के अनुसार यदि भोजन बनाते या परोसते समय मन में क्रोध, ईर्ष्या या चिड़चिड़ापन हो, तो उस अन्न का प्रभाव खाने वाले के विचारों पर भी पड़ता है। इसलिए, हाथ में रोटी न देने का नियम केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि इसके पीछे गहरा वास्तु और व्यावहारिक तर्क छिपा हुआ है। इस छोटे से नियम का पालन करके घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मकता और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखा जा सकता है।

  • कोबरा से सामना, वोट का खुलासा और भ्रष्टाचार पर हमला, मध्य प्रदेश की राजनीति में दिनभर रही हलचल

    कोबरा से सामना, वोट का खुलासा और भ्रष्टाचार पर हमला, मध्य प्रदेश की राजनीति में दिनभर रही हलचल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक चर्चा का माहौल बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छात्र जीवन का एक रोमांचक अनुभव साझा किया, जिसमें उनके हाथ पर जहरीला कोबरा लिपट गया था। दूसरी ओर दतिया उपचुनाव में मतदान करने के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने खुले तौर पर बताया कि उन्होंने भाजपा और पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। वहीं गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने सार्वजनिक मंच से खनिज विभाग पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगाकर अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर सवाल खड़े कर दिए।

    उज्जैन में बन रहे स्नेक पार्क के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कॉलेज जीवन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि विज्ञान महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने जादू की कुछ ट्रिक्स सीखी थीं। गणेश उत्सव के एक कार्यक्रम में प्रदर्शन के लिए वे एक सांप लेकर पहुंचे और उससे जादू का खेल दिखाया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोस्तों के कहने पर जब उन्होंने सांप को बाहर निकाला तो वह अचानक सक्रिय हो गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने सांप को मजबूती से पकड़ लिया, लेकिन वह उनके हाथ पर लिपट गया और दूसरे हाथ पर काटने की कोशिश करने लगा। बाद में जब वे सांप को वापस छोड़ने पहुंचे तो पता चला कि वह साधारण सांप नहीं बल्कि जहरीला कोबरा था और उसके विषैले दांत भी सुरक्षित थे। यह सुनकर वे भी हैरान रह गए। मुख्यमंत्री का यह अनुभव सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी आश्चर्यचकित रह गए।

    उधर दतिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने कमल के फूल के निशान पर वोट दिया है और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में मतदान किया है। उनके इस बयान की राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा रही। नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की जीत का दावा भी किया। दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह बड़ी बढ़त से चुनाव जीतेंगे। अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं।

    गुना में उद्योग विभाग के एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वैध रसीद होने के बावजूद रेत लेकर जा रहे व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रयास किया गया। विधायक ने कहा कि कार्रवाई असली दोषियों पर होने के बजाय आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मंच से ही विभागीय अधिकारियों पर अवैध वसूली के आरोप लगाए और कहा कि इस संबंध में अधिकारियों से बात करने की कोशिश भी की, लेकिन उनकी बात तक नहीं सुनी गई। भाजपा विधायक के इन आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव से जुड़ा एक दिलचस्प घटनाक्रम भी सामने आया। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की एक टीम वोट मांगने के लिए ऐसे गांव पहुंच गई, जो दतिया विधानसभा क्षेत्र में आता ही नहीं था। जब कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों से भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की तो लोगों ने बताया कि वे इस उपचुनाव के मतदाता ही नहीं हैं क्योंकि उनका गांव भांडेर विधानसभा क्षेत्र में आता है। यह सुनकर कार्यकर्ता असहज हो गए और उन्हें वहां से लौटना पड़ा।

    एक ही दिन में सामने आए इन घटनाक्रमों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग कारणों से हलचल पैदा कर दी। मुख्यमंत्री का रोचक अनुभव, चुनावी बयानबाजी, सरकारी विभागों पर भ्रष्टाचार के आरोप और चुनाव प्रचार की चूक—इन सभी ने राजनीतिक चर्चा को नया विषय दे दिया।

  • सीमा कालीरमन का बड़ा खुलासा, बोलीं- खेल का आनंद लिया, मेडल अपने आप मिल गया

    सीमा कालीरमन का बड़ा खुलासा, बोलीं- खेल का आनंद लिया, मेडल अपने आप मिल गया


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत का गौरव बढ़ाने वाली सीमा कालीरमन ने अपनी सफलता के पीछे का राज साझा किया है। ग्लासगो में शानदार प्रदर्शन के बाद सीमा ने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान उनका पूरा ध्यान केवल अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर था। उन्होंने बताया कि उन्होंने मेडल के बारे में बिल्कुल नहीं सोचा, बल्कि खेल का आनंद लेते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की और यही सोच उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी।

    समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सीमा ने कहा कि पदक जीतने की खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने परिणाम की चिंता छोड़कर खेल का आनंद लेना शुरू किया है, तभी से उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया है। उनके अनुसार यदि खिलाड़ी केवल अपना सर्वश्रेष्ठ देने पर ध्यान दे तो सफलता अपने आप उसके कदम चूमती है।

    सीमा ने यह भी बताया कि इस बार वह अपने चार साल के बेटे से दूर रहकर कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेने आई थीं। उन्होंने स्वीकार किया कि बेटे की याद उन्हें लगातार आती रही और उसका जिक्र होते ही वह भावुक हो जाती हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हुए पूरे फोकस के साथ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और देश के लिए पदक जीतने में सफल रहीं।

    उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का बड़ा श्रेय अपने पति और निजी कोच रविंदर कालीरमन को दिया। सीमा ने कहा कि पिछले वर्ष एशियन चैंपियनशिप में उनके पति साथ नहीं थे, जिसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ा था। लेकिन इस बार ग्लासगो में रविंदर की मौजूदगी ने उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया। उन्होंने बताया कि उनके पति ने कभी उन पर पदक जीतने का दबाव नहीं बनाया। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि खेल का आनंद लो और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करो। यही सलाह उनके लिए सबसे बड़ी प्रेरणा बनी।

    सीमा ने कहा कि एक खिलाड़ी की सफलता केवल मैदान पर दिखाई देने वाले प्रदर्शन तक सीमित नहीं होती, बल्कि उसके पीछे वर्षों का संघर्ष, त्याग और कठिन मेहनत छिपी होती है। उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को मानसिक दबाव, आर्थिक चुनौतियों और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यदि सही समय पर सहयोग और सुविधाएं मिलें तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम और ऊंचा कर सकते हैं।

    उन्होंने सरकार से भी अपील की कि जिन युवाओं में खेलों के प्रति जुनून और प्रतिभा है, उन्हें शुरुआती स्तर से बेहतर प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उनका मानना है कि समय पर मिला समर्थन कई खिलाड़ियों के सपनों को साकार कर सकता है और भारत को भविष्य में और अधिक अंतरराष्ट्रीय पदक दिला सकता है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के महिला डिस्कस थ्रो फाइनल में सीमा कालीरमन ने 58.65 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर कांस्य पदक अपने नाम किया। यह उपलब्धि न केवल उनके करियर की बड़ी सफलता है, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। उनके संघर्ष, समर्पण और सकारात्मक सोच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर हर चुनौती को पार किया जा सकता है।

  • मेडल से चूकीं मार्टिना देवी, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की उम्मीदों को लगा झटका

    मेडल से चूकीं मार्टिना देवी, कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की उम्मीदों को लगा झटका


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला वेटलिफ्टर मार्टिना देवी मैबाम ने शानदार संघर्ष तो किया, लेकिन पदक जीतने का सपना पूरा नहीं हो सका। महिला 86+ किलोग्राम भार वर्ग में उन्होंने कुल 245 किलोग्राम वजन उठाकर पांचवां स्थान हासिल किया। कांस्य पदक उनसे महज 5 किलोग्राम दूर रह गया। उनकी इस करीबी हार ने भारतीय खेल प्रेमियों को निराश जरूर किया, लेकिन उनके जुझारू प्रदर्शन ने सभी का दिल जीत लिया।

    ग्लासगो के एसईसी आर्माडिलो एरीना में आयोजित इस मुकाबले में मार्टिना की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। स्नैच स्पर्धा में उन्होंने पहले दो प्रयासों में 103 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन दोनों बार असफल रहीं। लगातार दो असफल प्रयासों के बाद दबाव काफी बढ़ गया था। ऐसे में उन्होंने तीसरे प्रयास में वजन बढ़ाकर 105 किलोग्राम उठाया और सफलता हासिल की। यह लिफ्ट पूरी होते ही उनकी आंखों में खुशी और राहत के आंसू साफ दिखाई दिए।

    स्नैच के बाद क्लीन एंड जर्क में मार्टिना ने दमदार शुरुआत करते हुए पहले प्रयास में 140 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसके बाद उन्होंने 144 और 146 किलोग्राम का प्रयास किया, लेकिन दोनों कोशिशें सफल नहीं हो सकीं। इस तरह उनका कुल स्कोर 245 किलोग्राम रहा, जो उन्हें पांचवें स्थान तक ही पहुंचा सका।

    इस स्पर्धा में मेजबान इंग्लैंड की एमिली कैंपबेल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 278 किलोग्राम वजन उठाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने स्नैच में 115 किलोग्राम और क्लीन एंड जर्क में 163 किलोग्राम का सफल प्रयास कर कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड भी बनाया। मलेशिया की सिती अकीलाह फरहाना ड्रामन ने 253 किलोग्राम के साथ रजत पदक जीता, जबकि कनाडा की एटा मे लव ने कुल 250 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक अपने नाम किया।

    मार्टिना यदि अपने दूसरे या तीसरे क्लीन एंड जर्क प्रयास में 144 किलोग्राम वजन उठाने में सफल हो जातीं तो उनका कुल स्कोर 249 किलोग्राम हो जाता और वह पदक की दौड़ में मजबूती से बनी रहतीं। वहीं 146 किलोग्राम की सफल लिफ्ट उन्हें सीधे कांस्य पदक तक पहुंचा सकती थी। हालांकि खेल में छोटे अंतर ही बड़ा फैसला करते हैं और इस बार किस्मत उनका साथ नहीं दे सकी।

    इसके बावजूद मार्टिना का प्रदर्शन भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। उन्होंने दबाव की स्थिति में वापसी करते हुए अपनी मानसिक मजबूती का परिचय दिया और अंत तक पदक की दौड़ में बनी रहीं। आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में उनसे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का अभियान लगातार मजबूत बना हुआ है। अब तक भारतीय दल 15 पदक जीत चुका है, जिनमें 3 स्वर्ण, 9 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। मार्टिना भले ही इस बार पदक से चूक गईं, लेकिन उनका संघर्ष और जज्बा भविष्य के लिए भारतीय वेटलिफ्टिंग को नई उम्मीद जरूर देता है।

  • राष्ट्रपति मुर्मु ने बढ़ाया भारतीय खिलाड़ियों का हौसला, लवप्रीत और सीमा को दी शानदार जीत की बधाई

    राष्ट्रपति मुर्मु ने बढ़ाया भारतीय खिलाड़ियों का हौसला, लवप्रीत और सीमा को दी शानदार जीत की बधाई


    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन का सिलसिला लगातार जारी है। आठवें दिन भारत के खाते में दो अहम पदक जुड़े, जब वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने पुरुषों के 110 प्लस किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीता और सीमा कालीरमन ने महिला डिस्कस थ्रो स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया। दोनों खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर देशभर में खुशी की लहर दौड़ गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु समेत कई शीर्ष नेताओं ने उन्हें बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन को देश के लिए गर्व का क्षण बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लवप्रीत सिंह को बधाई देते हुए कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीतना उनकी मेहनत, दृढ़ संकल्प और शानदार प्रदर्शन का परिणाम है। उन्होंने लिखा कि लवप्रीत की इस सफलता पर हर भारतीय को गर्व है और उन्हें उम्मीद है कि वह आने वाले वर्षों में भी देश के लिए नई उपलब्धियां हासिल करेंगे।

    राष्ट्रपति ने सीमा कालीरमन की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतना सीमा की कड़ी मेहनत, समर्पण और संघर्ष का प्रमाण है। राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि सीमा की उपलब्धि देश की युवा महिलाओं को खेलों में आगे बढ़ने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करेगी।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी दोनों खिलाड़ियों को बधाई देते हुए उनके प्रदर्शन को भारतीय खेलों के लिए गौरवपूर्ण बताया। उन्होंने लवप्रीत सिंह की ताकत, मेहनत और आत्मविश्वास की सराहना करते हुए कहा कि यह पदक उनकी निरंतर मेहनत का परिणाम है। वहीं सीमा कालीरमन के लिए उन्होंने कहा कि महिलाओं के डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने साहस, दृढ़ निश्चय और संघर्ष की शानदार मिसाल पेश की है।

    केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने लवप्रीत को 388 किलोग्राम कुल भार उठाकर रजत पदक जीतने पर बधाई दी और कहा कि उनका प्रदर्शन भारतीय वेटलिफ्टिंग के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। वहीं सीमा कालीरमन के लिए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (एनसीओई) पटियाला की इस एथलीट ने कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी सीमा कालीरमन को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि उनकी मेहनत, अनुशासन और मजबूत इरादों का परिणाम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सीमा भविष्य में भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन करती रहेंगी और देश को कई यादगार पल देंगी।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लवप्रीत सिंह और सीमा कालीरमन की सफलता केवल दो पदकों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन हजारों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना देखते हैं। दोनों खिलाड़ियों की मेहनत और समर्पण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और लगातार प्रयास से अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की जा सकती है।

  • उंगली की चोट ने बढ़ाई पाकिस्तान की मुश्किलें, वेस्टइंडीज के खिलाफ नहीं खेलेंगे शान मसूद

    उंगली की चोट ने बढ़ाई पाकिस्तान की मुश्किलें, वेस्टइंडीज के खिलाफ नहीं खेलेंगे शान मसूद


    नई दिल्ली । वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट में मिली हार के बाद पाकिस्तान क्रिकेट टीम की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। टीम के अनुभवी बल्लेबाज शान मसूद चोट के कारण दूसरे टेस्ट मैच से बाहर हो गए हैं। उनकी गैरमौजूदगी ऐसे समय में सामने आई है, जब पाकिस्तान पहले ही सीरीज में पिछड़ चुका है और वापसी की कोशिश में जुटा है। अब टीम को बल्लेबाजी क्रम में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।

    पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि शान मसूद के बाएं हाथ की तर्जनी उंगली में गंभीर चोट लगी है। यह चोट उन्हें वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टेस्ट की पहली पारी के दौरान तेज गेंदबाज जयडेन सील्स की गेंद लगने से हुई थी। चोट लगने के बाद मसूद दर्द से कराहते नजर आए थे, लेकिन उन्होंने दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने की कोशिश की। हालांकि वह पूरी तरह फिट नहीं थे और अपनी बल्लेबाजी से कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ सके।

    चोट के बाद कराए गए स्कैन और मेडिकल जांच में उंगली को आराम देने की सलाह दी गई है। फिलहाल पाकिस्तान टीम का मेडिकल पैनल उनका इलाज कर रहा है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि उनकी वापसी पूरी तरह रिकवरी की रफ्तार और मेडिकल रिपोर्ट पर निर्भर करेगी। ऐसे में 19 अगस्त से इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज के पहले मुकाबले में भी उनके खेलने को लेकर संशय बना हुआ है।

    पाकिस्तान के लिए यह झटका इसलिए भी बड़ा माना जा रहा है क्योंकि टीम पहले टेस्ट में बल्लेबाजी के मोर्चे पर बुरी तरह संघर्ष करती दिखाई दी थी। चौथी पारी में 211 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए पूरी टीम महज 120 रन पर सिमट गई थी। आठ बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके। कप्तान बाबर आजम ने नाबाद 58 रन बनाकर संघर्ष जरूर किया, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें किसी बल्लेबाज का साथ नहीं मिला और पाकिस्तान को 90 रन से हार का सामना करना पड़ा।

    अब दूसरा टेस्ट 2 अगस्त से खेला जाना है, जहां पाकिस्तान के सामने सीरीज बराबर करने की चुनौती होगी। ऐसे में शान मसूद जैसे अनुभवी बल्लेबाज की अनुपस्थिति टीम के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गई है। चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन को अब उनके विकल्प पर फैसला करना होगा ताकि बल्लेबाजी क्रम को मजबूती मिल सके।

    दूसरी ओर वेस्टइंडीज पहले टेस्ट की जीत से आत्मविश्वास से भरी हुई है और सीरीज अपने नाम करने के इरादे से मैदान पर उतरेगी। ऐसे में पाकिस्तान पर दबाव पहले से कहीं ज्यादा होगा। टीम को न केवल बल्लेबाजी में बेहतर प्रदर्शन करना होगा, बल्कि शुरुआती विकेट बचाकर बड़ी साझेदारियां भी बनानी होंगी। शान मसूद की चोट ने इस चुनौती को और कठिन बना दिया है।

  • Spain: सेउटा बॉर्डर पर सुरक्षा बलों को चकमा देकर स्पेन में घुसे 3000 प्रवासी…

    Spain: सेउटा बॉर्डर पर सुरक्षा बलों को चकमा देकर स्पेन में घुसे 3000 प्रवासी…


    मेड्रिड।
    स्पेन (Spain) के ‘सेउटा’ (‘Ceuta’) की सीमा पर गुरुवार को अजीब संकट खड़ा हो गया. हजारों की संख्या में प्रवासी (Traveller) सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों को चकमा देकर और उन्हें धकेलते हुए सेउटा में दाखिल हो गए. साल 2021 के बाद इस स्पेन में ये अब तक का सबसे बड़ा प्रवासी संकट माना जा रहा है.

    स्पेनिश अधिकारियों ने कोई संख्या जारी नहीं की है, लेकिन स्पेन के सरकारी ब्रॉडकास्टर TVE के अनुमान के मुताबिक, महज कुछ ही घंटों में 2,000 से 3,000 प्रवासी सेउटा की सीमा में दाखिल हो चुके हैं।

    कई प्रवासियों ने समुद्र के रास्ते तैरकर सीमा पार की, जबकि कई मोरक्को और स्पेन को अलग करने वाली सीमा की सुरक्षा बाड़ को तोड़कर अंदर घुस आए. बताया जा रहा है कि इस अफरा-तफरी में 9 लोगों की मौत भी हो गई है।


    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

    इस घुसपैठ ने स्थानीय पुलिस को बेबस कर दिया और अफ्रीका के साथ यूरोपीय संघ की एकमात्र भूमि सीमा पर सुरक्षा चिंताओं को फिर से बढ़ा दिया है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में प्रवासियों को लाइफ जैकेट और काम चलाऊ ट्यूबों के सहारे समुद्र के जरिए ताराजल बांध के आसपास तैरते हुए देखा जा सकता है।

    वहीं, कुछ लोगों ने सीमा का दरवाजा जबरन खोल दिया और दौड़कर सेउटा में प्रवेश किया. सीमा पार करते समय कुछ प्रवासियों को ‘लॉन्ग लिव स्पेन’ के नारे लगाते भी सुना गया।


    सेउटा में आपातकाल लगाने की तैयारी

    हालात को बिगड़ता देख सेउटा के क्षेत्रीय प्रमुख जुआन जेसुस विवाश ने केंद्र सरकार से इमरजेंसी का ऐलान करने की मांग की. उन्होंने कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए सेना तैनात करने और मोरक्को से लगी सीमा को अस्थायी रूप से बंद करने की मांग की है।

    इस संकट पर स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने कहा कि सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा, ‘हम जरूरी संसाधनों को जुटा रहे हैं, मोरक्को और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए कदम उठा रहे हैं।


    ‘गंभीर मानवीय और सामाजिक आपातकाल’ घोषित

    मोरक्को से आए प्रवासियों को बाद स्पेन में ‘गंभीर मानवीय और सामाजिक आपातकाल’ का ऐलान कर दिया गया है. सेउटा के क्षेत्रीय नेता जुआन जेसुस विवाश के मुताबिक, प्रवासियों के ठहरने के केंद्र पूरी तरह भर चुके हैं और सैकड़ों लोगों को खुले आसमान के नीचे सोने पर मजबूर होना पड़ रहा है. बिना पेरेंट्स के आए नाबालिग बच्चों के रहने के केंद्र अपनी क्षमता से 2,400% ज्यादा भर चुके हैं।

    फिलहाल रोजाना औसतन 300 प्रवासी सेउटा की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं. इससे मई 2021 जैसे संकट के दोहराए जाने का डर सता रहा है, जब कुछ ही दिनों में 10,000 के करीब लोग यहां घुस आए थे. इस गंभीर संकट से निपटने के लिए जुआन जेसुस विवाश ने केंद्र सरकार से तुरंत प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेन के गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मारलास्का स्थानीय अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों से मिलने के लिए सेउटा का दौरा करने वाले हैं. स्पेन सरकार का कहना है कि सीमा सुरक्षा को मजबूत करने और मानवीय मदद पहुंचाने के लिए कई मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं, वहीं मोरक्को के सुरक्षा बल भी घुसपैठ को रोकने में स्पेन का सहयोग कर रहे हैं।

    स्पेन के गृह मंत्रालय ने कहा कि अवैध रूप से घुसे लोगों को तुरंत वापस भेजा जाएगा. मंत्रालय ने इस घुसपैठ के लिए मानव तस्करी नेटवर्क को जिम्मेदार ठहराया है।