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  • Russia-Ukraine के बीच भीषण हवाई हमलों में 10 लोगों की मौत… ट्रंप ने पुतिन से की समझौते की अपील

    Russia-Ukraine के बीच भीषण हवाई हमलों में 10 लोगों की मौत… ट्रंप ने पुतिन से की समझौते की अपील


    कीव।
    रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine War) के बीच हवाई हमले तेज हो गए हैं। शनिवार को यूक्रेन में रूसी हमलों में चार लोगों की मौत हुई, जबकि रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र (Krasnodar Krai) में यूक्रेनी ड्रोन हमले (Ukrainian drone attacks) में तीन लोगों की जान गई। रूसी कब्जे वाले यूक्रेन के जापोरिज्जिया क्षेत्र में भी यूक्रेनी हमलों में तीन लोगों की मौत की सूचना है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) के साथ समझौता करने की अपील की।


    यूक्रेन में रूसी हमलों से चार लोगों की मौत

    यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, रूस ने शनिवार को कीव, जापोरिज्जिया, सूमी और खारकीव समेत कई इलाकों को निशाना बनाया। जापोरिज्जिया में एक घर के मलबे में दबने से दो महिलाओं की मौत हो गई। सूमी शहर में भी रूसी हमले में दो लोगों की जान गई। कीव क्षेत्र के बोरीस्पिल जिले में रूसी ड्रोन हमले के बाद एक गोदाम में आग लग गई, जिसमें दो लोग घायल हुए। राजधानी कीव के कई इलाकों में भी ड्रोन हमलों की सूचना है। अधिकारियों के अनुसार, यहां चार लोग घायल हुए और आवासीय तथा कार्यालय इमारतों को नुकसान पहुंचा।


    रूस का दावा- डेटा सेंटर को हुआ नुकसान

    रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि कीव पर किए गए हमले में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं और स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशन से जुड़े एक डेटा सेंटर को नुकसान पहुंचा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि रूस रोजाना हमलों को और तेज कर रहा है। उन्होंने कीव और जापोरिज्जिया के रिहायशी इलाकों समेत कई स्थानों पर हुए हमलों का उल्लेख करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस के खिलाफ मजबूत प्रतिक्रिया की अपील की।


    ट्रंप ने जेलेंस्की से पुतिन के साथ समझौते की अपील की

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान जेलेंस्की के साथ हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए कहा कि वह चाहते हैं कि यूक्रेनी राष्ट्रपति पुतिन के साथ समझौता करें। ट्रंप ने कहा, “मैं चाहता हूं कि वह समझौता करें। मैं चाहता हूं कि वह पुतिन के साथ समझौता करें और मैं चाहता हूं कि पुतिन भी उनके साथ समझौता करें।” उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों पक्ष निकट भविष्य में, संभवतः सर्दियों के भारी होने से पहले, किसी समझौते तक पहुंच सकते हैं।

  • गुल्की जोशी ने बताया फिटनेस और खूबसूरती का राज, डाइट-वर्कआउट के साथ मी टाइम को भी दिया महत्व

    गुल्की जोशी ने बताया फिटनेस और खूबसूरती का राज, डाइट-वर्कआउट के साथ मी टाइम को भी दिया महत्व

    नई दिल्ली । अभिनेत्री गुल्की जोशी इन दिनों एक शो में डॉ. सृष्टि अग्रवाल का किरदार निभा रही हैं। अपने फिट और आकर्षक लुक को बनाए रखने के लिए वह केवल एक्सरसाइज पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि खान-पान, नींद, हाइड्रेशन और मानसिक सुकून को भी अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा मानती हैं। उनके मुताबिक फिटनेस और खूबसूरती के लिए किसी बेहद सख्त रूटीन की बजाय ऐसा संतुलित तरीका अपनाना जरूरी है, जिसे लंबे समय तक आसानी से जारी रखा जा सके।

    गुल्की जोशी सख्त डाइट के बजाय बैलेंस्ड और सस्टेनेबल डाइट को प्राथमिकता देती हैं। वह अपने खाने में पर्याप्त प्रोटीन, सब्जियां और फल शामिल करने की कोशिश करती हैं। घर का बना भोजन उनकी डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शूटिंग के व्यस्त शेड्यूल के कारण कभी-कभी खाने का समय प्रभावित हो जाता है, लेकिन वह अपनी दिनचर्या को संतुलित रखने की कोशिश करती हैं।

    हाइड्रेशन पर भी वह खास ध्यान देती हैं। उनका मानना है कि किसी भी तरह के भोजन को पूरी तरह छोड़ने के बजाय संतुलन बनाए रखना बेहतर है। जंक और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड फूड को सीमित मात्रा में लेना उनकी प्राथमिकता है। उनके अनुसार डाइट ऐसी होनी चाहिए, जिसे बिना परेशानी और दबाव के लंबे समय तक फॉलो किया जा सके।

    वर्कआउट की बात करें तो गुल्की नियमित रूप से एक्सरसाइज करने की कोशिश करती हैं। हालांकि शूटिंग शेड्यूल के कारण उनके वर्कआउट रूटीन में बदलाव आता रहता है। वह ऐसे व्यायाम पसंद करती हैं, जिनमें स्ट्रेंथ, मोबिलिटी और कार्डियो का संतुलन बना रहे।

    गुल्की के लिए वॉकिंग भी फिटनेस रूटीन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अगर किसी दिन जिम जाना संभव नहीं हो पाता, तो वह पूरे दिन खुद को शारीरिक रूप से सक्रिय रखने की कोशिश करती हैं। उनके मुताबिक फिटनेस में सबसे महत्वपूर्ण चीज निरंतरता है। यानी किसी एक दिन बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने के बजाय नियमित रूप से एक्टिव रहना ज्यादा जरूरी है।

    मानसिक स्वास्थ्य और सुकून के लिए वह अपने लिए मी टाइम निकालना भी जरूरी मानती हैं। कभी कुछ समय शांत बैठना, फोन से दूरी बनाना या पसंदीदा लोगों के साथ वक्त बिताना उन्हें मानसिक रूप से बेहतर महसूस कराता है। वह कोशिश करती हैं कि तनाव को खुद पर हावी न होने दें और उन चीजों को लेकर ज्यादा परेशान न हों, जो उनके नियंत्रण में नहीं हैं।

    गुल्की के अनुसार सकारात्मक सोच एक दिन में विकसित होने वाली आदत नहीं है। इसके लिए रोज खुद को समझने और बेहतर महसूस करने की कोशिश करनी पड़ती है। उनके लिए मानसिक शांति भी फिटनेस और अच्छी लाइफस्टाइल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    नींद को वह अपनी फिटनेस और ब्यूटी रूटीन का सबसे जरूरी हिस्सा मानती हैं। उनके मुताबिक पर्याप्त और अच्छी नींद का असर चेहरे की खूबसूरती पर भी दिखाई देता है। इसके साथ वह शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने और बेसिक स्किन केयर में नियमितता पर ध्यान देती हैं।

    शूटिंग के दौरान लगातार मेकअप करना पड़ता है, इसलिए मेकअप को अच्छी तरह हटाना और त्वचा को साफ व मॉयश्चराइज रखना उनकी स्किन केयर रूटीन का हिस्सा है। वह जरूरत से ज्यादा नए प्रोडक्ट्स आजमाने के बजाय अपनी त्वचा के अनुकूल बेसिक प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना पसंद करती हैं। उनका मानना है कि जब व्यक्ति अंदर से स्वस्थ और खुश महसूस करता है, तो उसका सकारात्मक असर चेहरे पर भी नजर आता है।

  • छतरपुर में अंतिम संस्कार में जा रहे परिवार की बोलेरो ट्रक से टकराई, पांच लोगों की मौत, बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का साया

    छतरपुर में अंतिम संस्कार में जा रहे परिवार की बोलेरो ट्रक से टकराई, पांच लोगों की मौत, बच्चों के सिर से उठा माता-पिता का साया

    मध्य प्रदेश: के छतरपुर जिले में शनिवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत हो गई। चौका गांव के पास बोलेरो और ट्रक के बीच जोरदार टक्कर हो गई। दुर्घटना में तीन महिलाओं समेत पांच लोगों की जान चली गई, जबकि बोलेरो चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। परिवार के पांच सदस्यों की एक साथ मौत से क्षेत्र में शोक का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, बोलेरो में चालक समेत कुल छह लोग सवार थे। सभी लोग एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान चौका गांव के नजदीक बोलेरो की ट्रक से टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि बोलेरो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार लोग वाहन के भीतर फंस गए। दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत और बचाव का प्रयास शुरू किया।

    हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान बिजावर निवासी दौलत रैकवार, उनकी पत्नी बीना रैकवार, श्याम बाई रैकवार, संजय रैकवार और कौशल्या रैकवार के रूप में हुई है। दुर्घटना में बोलेरो चालक छोटू रैकवार की जान बच गई, लेकिन उसे गंभीर चोटें आई हैं। घायल चालक को तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल पहुंचाया गया। हालत गंभीर होने के कारण चिकित्सकों ने उसे आगे के इलाज के लिए ग्वालियर रेफर कर दिया।

    घटना की सूचना मिलते ही मातगुवां पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई। इसके बाद दुर्घटनाग्रस्त वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। पुलिस ने मृतकों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हादसे के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

    बताया जा रहा है कि परिवार के लोग एक अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जा रहे थे। मृतक दौलत रैकवार की बेटी अलका का विवाह पिछले वर्ष छतरपुर जिले के बगौता गांव में हुआ था। हाल ही में अलका के ससुर का निधन हो गया था। इसी वजह से परिवार के सदस्य अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जा रहे थे। लेकिन रास्ते में चौका गांव के पास हुए हादसे ने परिवार की खुशियों और उम्मीदों को गहरे दुख में बदल दिया।

    दुर्घटना में जान गंवाने वाले पांचों लोग एक ही परिवार से जुड़े थे। हादसे की खबर मिलते ही उनके परिजनों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। परिवार के सदस्य राजू रैकवार ने बताया कि दुर्घटना में उनकी मां श्यामबाई, भाई दौलत, भाभी बीना, बहू कौशल्या और भतीजे संजय की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि इस हादसे के बाद उनके भाई और भाभी के बच्चे अनाथ हो गए हैं।

    परिवार के पांच सदस्यों को एक साथ खोने का दर्द बयान करते हुए राजू रैकवार फूट-फूटकर रो पड़े। हादसे में बच्चों के माता-पिता और अन्य परिजनों की मौत से परिवार के सामने अब उनके पालन-पोषण और भविष्य की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

    छतरपुर में हुई इस दुर्घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। अंतिम संस्कार में शामिल होने जा रहे परिजनों को रास्ते में ही अपनी जान गंवानी पड़ी। स्थानीय प्रशासन और पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों की जांच में जुटे हैं।

  • चेहरे पर ताजा एलोवेरा जेल लगाने से पहले जानें जरूरी सावधानियां, वरना हो सकती है जलन और रैशेज की समस्या

    चेहरे पर ताजा एलोवेरा जेल लगाने से पहले जानें जरूरी सावधानियां, वरना हो सकती है जलन और रैशेज की समस्या

    नई दिल्ली । एलोवेरा जेल को त्वचा की देखभाल के लिए लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता है। घर में लगे पौधे से ताजा जेल निकालकर चेहरे या बालों पर लगाने का चलन भी काफी आम है। लेकिन प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं है कि इसे बिना किसी सावधानी के सीधे त्वचा पर लगाया जाए। एलोवेरा की ताजी पत्ती काटने पर उससे निकलने वाला पीला पदार्थ त्वचा के लिए परेशानी पैदा कर सकता है।

    एलोवेरा की पत्ती के बाहरी हिस्से के पास पीले रंग का लेटेक्स पाया जाता है। इसमें एलोइन नामक घटक मौजूद होता है, जो कुछ लोगों की त्वचा में जलन, खुजली, लालिमा या चकत्ते जैसी समस्या पैदा कर सकता है। इसलिए पत्ती से जेल निकालने के बाद इसे तुरंत चेहरे पर लगाने के बजाय पहले पीले पदार्थ को पूरी तरह बाहर निकालना जरूरी है।

    इसके लिए ताजी पत्ती को पौधे से काटने के बाद करीब 20 से 30 मिनट तक किसी बर्तन में सीधा खड़ा करके रखा जा सकता है। इस दौरान पत्ती से निकलने वाला पीला पदार्थ बाहर निकल जाता है। इसके बाद पत्ती को साफ बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। पत्ती के किनारों पर मौजूद कांटेदार हिस्से को भी सावधानी से हटा दें। इसके बाद अंदर मौजूद पारदर्शी जेल को निकाला जा सकता है।

    ताजा एलोवेरा जेल चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना भी जरूरी है। इसके लिए जेल की थोड़ी मात्रा सीधे चेहरे पर लगाने के बजाय कोहनी या कान के पीछे त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाएं। करीब 15 मिनट तक देखने के बाद त्वचा की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। अगर वहां जलन, लालिमा, खुजली या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो चेहरे पर इसका इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है।

    एलोवेरा जेल को लंबे समय तक निकालकर रखने से भी बचना चाहिए। ताजा जेल में आमतौर पर किसी तरह का प्रिजर्वेटिव नहीं होता। हवा और बैक्टीरिया के संपर्क में आने के कारण इसे लंबे समय तक रखने पर इसके खराब होने की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए जरूरत के मुताबिक ही जेल निकालना बेहतर है।

    पुराने या खराब हो चुके जेल को त्वचा पर लगाने से जलन, रैशेज या अन्य त्वचा संबंधी परेशानी हो सकती है। इसी तरह चेहरे पर जरूरत से ज्यादा एलोवेरा जेल लगाने से भी बचना चाहिए। बार-बार या अत्यधिक इस्तेमाल से कुछ लोगों की त्वचा रूखी या संवेदनशील हो सकती है।

    अगर चेहरे पर पहले से कट, घाव या सक्रिय मुंहासे हैं, तो ऐसे हिस्सों पर ताजा एलोवेरा जेल लगाने से सावधानी बरतनी चाहिए। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष रूप से पैच टेस्ट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    एलोवेरा का इस्तेमाल करते समय साफ-सफाई, सही मात्रा और उचित प्रक्रिया का ध्यान रखना जरूरी है। प्राकृतिक उत्पाद होने के बावजूद हर व्यक्ति की त्वचा पर इसका असर एक जैसा नहीं होता। किसी भी तरह की जलन या एलर्जी दिखाई देने पर इस्तेमाल रोक देना चाहिए।

  • उज्जैन दौरे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, महाकाल मंदिर में विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण, जानें पूरा कार्यक्रम

    उज्जैन दौरे पर मुख्यमंत्री मोहन यादव, महाकाल मंदिर में विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण, जानें पूरा कार्यक्रम

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार, 27 सितंबर को उज्जैन के दौरे पर हैं। इस दौरान वे शहर में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में विकास कार्यों का भूमिपूजन, लोकार्पण और अन्य गतिविधियां निर्धारित हैं। इसके साथ ही वे सिंगल क्लिक के माध्यम से विकास कार्यों की सौगात देंगे। उज्जैन में कार्यक्रम पूरे करने के बाद मुख्यमंत्री भोपाल के लिए रवाना होंगे, जहां शाम को भी उनके कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।

    मुख्यमंत्री का उज्जैन दौरा सुबह से ही शुरू हो गया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, वे सुबह 7 बजे दशहरा मैदान पहुंचे। यहां सुबह 7 बजे से 7:45 बजे तक स्थानीय कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद सुबह 7:55 बजे मुख्यमंत्री वीआईपी गेस्ट हाउस पहुंचे। सुबह के कार्यक्रम पूरे होने के बाद दिन के अन्य आयोजनों की तैयारियां की गईं।

    मुख्यमंत्री का अगला प्रमुख कार्यक्रम महाकाल मंदिर परिसर में आयोजित किया जाएगा। निर्धारित समय के अनुसार, वे सुबह 10:45 बजे महाकाल मंदिर के पार्किंग परिसर में अन्न क्षेत्र के सामने पहुंचेंगे। इसके बाद सुबह 10:50 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेंगे। इस दौरान विकास कार्यों से जुड़े भूमिपूजन और लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विकास परियोजनाओं का भूमिपूजन करेंगे और तैयार कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। इसके अलावा, सिंगल क्लिक के माध्यम से विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया जाएगा। इस आयोजन में प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ को सुनने का कार्यक्रम भी शामिल है। धार्मिक नगरी उज्जैन में आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    महाकाल मंदिर परिसर में निर्धारित कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 12:40 बजे वीआईपी गेस्ट हाउस पहुंचेंगे। यहां से आगे के कार्यक्रमों में शामिल होने की तैयारी करेंगे। इसके बाद दोपहर 2 बजे वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शाजापुर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव से जुड़ेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की ऑनलाइन सहभागिता निर्धारित है।

    दोपहर 2:20 बजे मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से उज्जैन हेलीपैड पहुंचेंगे। इसके बाद दोपहर 2:25 बजे से 3:10 बजे के बीच हेलीकॉप्टर से भोपाल के स्टेट हैंगर के लिए रवाना होंगे। राजधानी पहुंचने के बाद उनका अगला कार्यक्रम पार्टी कार्यालय में निर्धारित है। दोपहर 3:25 बजे वे कार से पार्टी कार्यालय पहुंचेंगे और 3:30 बजे स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। यहां का कार्यक्रम पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री अपने निवास के लिए रवाना होंगे।

    मुख्यमंत्री का दिन का कार्यक्रम यहीं समाप्त नहीं होगा। शाम 6:30 बजे वे भोपाल के रविंद्र भवन पहुंचेंगे। यहां निर्धारित स्थानीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वे कार से वापस अपने निवास के लिए रवाना होंगे।

    इस प्रकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 27 सितंबर का कार्यक्रम उज्जैन और भोपाल के बीच निर्धारित है। उज्जैन में विकास कार्यों के भूमिपूजन, लोकार्पण और धार्मिक नगरी से जुड़े आयोजनों में भाग लेने के बाद वे राजधानी में शाम के कार्यक्रमों में शामिल होंगे। पूरे दिन के दौरे में धार्मिक, विकासात्मक, कृषि और संगठनात्मक गतिविधियां उनके कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी।

  • PCOS से बिगड़ सकती है नींद, तेज खर्राटे और सुबह की थकान जैसे संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

    PCOS से बिगड़ सकती है नींद, तेज खर्राटे और सुबह की थकान जैसे संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

    नई दिल्ली ।पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस को आमतौर पर अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ने और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इसका संबंध नींद से जुड़ी परेशानियों से भी हो सकता है। पीसीओएस से जूझ रही महिलाओं में अगर तेज खर्राटे, रात में बार-बार नींद खुलना, सोते समय सांस लेने में परेशानी या पर्याप्त नींद के बावजूद सुबह थकान बनी रहती है, तो इन संकेतों को सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    इन लक्षणों का संबंध स्लीप एपनिया जैसी समस्या से हो सकता है। पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया का जोखिम सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक बताया गया है। इस स्थिति में सोते समय सांस की नली कुछ समय के लिए संकरी या बंद हो सकती है। इससे सांस लेने में रुकावट आती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो सकता है।

    जब नींद के दौरान सांस लेने में रुकावट आती है, तो शरीर सामान्य सांस बहाल करने के लिए बार-बार जागने की स्थिति में पहुंच सकता है। इसका असर पूरी नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है। कई बार व्यक्ति को यह महसूस भी नहीं होता कि रात में उसकी नींद बार-बार टूट रही है।

    पीसीओएस और अनिद्रा के बीच भी संबंध देखा जाता है। पीसीओएस में इंसुलिन रेजिस्टेंस, वजन बढ़ना और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। दूसरी ओर, लंबे समय तक नींद की कमी या स्लीप एपनिया जैसी स्थिति शरीर में तनाव हार्मोन और इंसुलिन रेजिस्टेंस को प्रभावित कर सकती है। इस तरह दोनों स्थितियां एक-दूसरे पर असर डाल सकती हैं।

    नींद लगातार पूरी न होने या बार-बार बाधित होने से थकान, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और मूड में बदलाव जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। जिन महिलाओं को पहले से अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ने या इंसुलिन रेजिस्टेंस जैसी पीसीओएस से जुड़ी परेशानियां हैं, उनके लिए खराब नींद इन समस्याओं को और चुनौतीपूर्ण बना सकती है।

    हालांकि, केवल खर्राटे आने का मतलब स्लीप एपनिया होना नहीं है। लेकिन अगर खर्राटे बहुत तेज और नियमित हैं, सोते समय सांस रुकने जैसा महसूस होता है, रात में घुटन होती है या सांस लेने की गति बढ़ जाती है, तो इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। सुबह उठने के बाद सिरदर्द रहना या पर्याप्त नींद के बावजूद दिनभर नींद और थकान महसूस होना भी डॉक्टर से सलाह लेने का कारण हो सकता है।

    पीसीओएस को मैनेज करने के लिए केवल पीरियड्स को नियमित करने या वजन कम करने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं माना जाता। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और तनाव को बेहतर तरीके से संभालना भी महत्वपूर्ण है।

    अगर किसी महिला में स्लीप एपनिया से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर स्थिति के अनुसार आगे की जांच और उपचार की सलाह दे सकते हैं। नींद शरीर के हार्मोनल, मेटाबॉलिक और समग्र स्वास्थ्य से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, इसलिए लगातार होने वाली नींद की समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    पीसीओएस लंबे समय तक बनी रहने वाली स्थिति हो सकती है, लेकिन सही जीवनशैली और चिकित्सकीय देखभाल के जरिए इसके प्रभावों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इसलिए शरीर में होने वाले बदलावों और नींद से जुड़े लगातार बने रहने वाले संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।

  • जेड प्लांट की पत्तियां पीली पड़ना माना जाता है अशुभ, जानिए वजह और तुरंत करने वाले जरूरी उपाय

    जेड प्लांट की पत्तियां पीली पड़ना माना जाता है अशुभ, जानिए वजह और तुरंत करने वाले जरूरी उपाय

    नई दिल्ली । घर में पौधे रखना वास्तु शास्त्र में शुभ माना जाता है। इनसे घर की सुंदरता बढ़ने के साथ वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने की भी मान्यता है। जेड प्लांट भी ऐसे पौधों में शामिल है, जिसे वास्तु और फेंगशुई में शुभ तथा समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि घर में हरा-भरा जेड प्लांट सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक होता है। वहीं, इसके अचानक पीले पड़ने या खराब होने को कुछ वास्तु मान्यताओं में शुभ संकेत नहीं माना जाता।

    जेड प्लांट की पत्तियों का पीला पड़ना धन से जुड़ी परेशानियों का संकेत माना जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, अगर पौधा अपनी हरियाली खोने लगे तो इसे घर में आर्थिक स्थिति से जुड़ी बाधाओं के संकेत के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, पौधे की पत्तियों का पीला होना उसके रखरखाव से जुड़ी वजहों से भी हो सकता है, इसलिए पौधे की देखभाल पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    वास्तु मान्यताओं में जेड प्लांट के पीले पड़ने को घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने से भी जोड़ा जाता है। ऐसी मान्यता है कि नकारात्मक वातावरण बढ़ने पर घर में तनाव और आपसी कलह की स्थिति बन सकती है। इसलिए पौधे के खराब होने पर घर की साफ-सफाई और आसपास के वातावरण पर भी ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

    अगर जेड प्लांट को घर की पूर्व दिशा में रखा गया है और उसकी पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं, तो इसे परिवार से जुड़ी परिस्थितियों के लिहाज से भी सतर्क रहने का संकेत माना जाता है। कुछ वास्तु मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति परिवार के किसी सदस्य के स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी या रिश्तों में मनमुटाव की ओर संकेत कर सकती है।

    जेड प्लांट की सही जगह और देखभाल को लेकर भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। वास्तु के अनुसार इसे पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। अगर पौधे को मुख्य द्वार के पास रखा गया है तो वहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मुख्य द्वार के आसपास गंदगी या जूते-चप्पल रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

    जेड प्लांट को तेज और सीधी धूप में रखने से भी बचना चाहिए। इसे हल्की धूप में करीब तीन से चार घंटे रखने की सलाह दी जाती है। पौधे में पानी डालते समय भी सावधानी जरूरी है। जब गमले की ऊपर की मिट्टी सूखी दिखाई दे, तभी पानी देना चाहिए। जरूरत से ज्यादा पानी पौधे के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    अगर पौधे की कुछ पत्तियां पूरी तरह पीली या खराब हो चुकी हैं, तो उन्हें धीरे से काटकर हटा देना चाहिए। साथ ही पौधे की मिट्टी, रोशनी और पानी देने की व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। इस तरह जेड प्लांट की नियमित देखभाल करके उसे स्वस्थ और हरा-भरा रखने की कोशिश की जा सकती है।

  • जोधपुर में गरजा F-35, 40 देशों की वायु सेनाएं दिखाएंगी ताकत, तरंग शक्ति 2026 शुरू

    जोधपुर में गरजा F-35, 40 देशों की वायु सेनाएं दिखाएंगी ताकत, तरंग शक्ति 2026 शुरू


    नई दिल्ली। राजस्थान के जोधपुर में बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास ‘तरंग शक्ति 2026’ शुरू हो गया है। इस बार अभ्यास में अमेरिकी F-35 Lightning II लड़ाकू विमान पहली बार शामिल हुए हैं। अमेरिका के छह F-35 विमानों के साथ 200 से ज्यादा एयरमैन भारत पहुंचे हैं। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी।

    पहली बार तरंग शक्ति में शामिल हुआ F-35

    अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि अमेरिकी एयरपावर जोधपुर पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि F-35 पहली बार ‘तरंग शक्ति’ अभ्यास में हिस्सा ले रहे हैं। ये विमान भारतीय वायु सेना के साथ-साथ अभ्यास में शामिल अन्य साझेदार देशों की वायु सेनाओं के साथ भी उड़ान भरेंगे।

    F-35 Lightning II को अमेरिकी वायु शक्ति के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिना जाता है। ऐसे में पहली बार ‘तरंग शक्ति’ में इसकी भागीदारी अभ्यास के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। भारतीय लड़ाकू विमानों के साथ इसकी उड़ान से दोनों देशों की वायु सेनाओं को एक-दूसरे की क्षमताओं और संचालन के तरीकों को समझने का अवसर मिलेगा।

    26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक चलेगा अभ्यास

    भारतीय वायु सेना का ‘तरंग शक्ति 2026’ अभ्यास 26 सितंबर से 12 अक्टूबर तक जोधपुर में चलेगा। इसमें करीब 40 देशों की भागीदारी हो रही है। इनमें से सात देश अपने लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य संसाधनों के साथ अभ्यास में शामिल होंगे, जबकि बाकी देश पर्यवेक्षक के तौर पर हिस्सा ले रहे हैं।

    अभ्यास के दौरान अलग-अलग देशों की वायु सेनाएं संयुक्त प्रशिक्षण और परिचालन गतिविधियों में हिस्सा लेंगी। इसका उद्देश्य विभिन्न वायु सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने के साथ उनके अनुभव और संचालन प्रक्रियाओं को साझा करना है।

    भारत में पहले भी आया है F-35

    अमेरिकी F-35 की भारत में यह पहली मौजूदगी नहीं है। इससे पहले यह विमान एयरो इंडिया के दौरान भारत में प्रदर्शित हो चुका है। हालांकि, ‘तरंग शक्ति 2026’ में इसकी भागीदारी खास है, क्योंकि पहली बार यह बहुराष्ट्रीय वायु अभ्यास में भारतीय और दूसरे साझेदार देशों के लड़ाकू विमानों के साथ उड़ान भरेगा।

    क्या है ‘तरंग शक्ति’ का मकसद?

    ‘तरंग शक्ति’ का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग देशों की वायु सेनाओं के बीच साझा प्रशिक्षण और तालमेल को बढ़ाना है। अभ्यास में शामिल देशों को एक-दूसरे के साथ काम करने और संयुक्त अभियानों की प्रक्रियाओं को समझने का मौका मिलता है।

    इस तरह के अभ्यास से अलग-अलग वायु सेनाओं को अपनी कार्यप्रणाली, तकनीक और परिचालन अनुभव साझा करने का अवसर मिलता है। साथ ही, भाग लेने वाले देशों के सैनिकों को दूसरे देशों की वायु सेनाओं के साथ समन्वय स्थापित करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिलता है।

    रक्षा सहयोग के लिए भी अहम मंच

    करीब 40 देशों की भागीदारी वाला यह अभ्यास भारत के लिए दूसरे देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने का एक मंच भी है। सात देश अपने लड़ाकू विमानों और सैन्य संसाधनों के साथ इसमें हिस्सा ले रहे हैं, जबकि अन्य देश पर्यवेक्षक के रूप में गतिविधियों को देखेंगे।

    अभ्यास के दौरान F-35 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमानों की भागीदारी से विभिन्न देशों की वायु सेनाओं को नई तकनीक और संचालन क्षमताओं को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। भारतीय वायु सेना और मित्र देशों की वायु सेनाओं के बीच संयुक्त उड़ान और प्रशिक्षण गतिविधियां इस सहयोग को और व्यापक बनाएंगी।

    ‘तरंग शक्ति 2026’ ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत विभिन्न देशों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यासों के जरिए आपसी परिचालन तालमेल और रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। जोधपुर में होने वाला यह अभ्यास इसी सहयोग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

  • UNGA में जयशंकर का PAK को कड़ा संदेश, बोले- दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते

    UNGA में जयशंकर का PAK को कड़ा संदेश, बोले- दोस्ती और सद्भावना आतंकवाद के साथ नहीं चल सकते


    नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में आतंकवाद को लेकर भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ किसी तरह की ढील नहीं दी जा सकती। उन्होंने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा कि एक देश लगातार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और हाल ही में उसने तथ्यों को भी गलत तरीके से पेश किया।

    जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद फैलाने वालों को अपना रवैया बदलना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के साथ दोस्ती और सद्भावना की बात साथ-साथ नहीं चल सकती। भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति पर कायम है और इस मुद्दे पर लगातार अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपना पक्ष रखता रहा है।

    शांति और सुरक्षा के लिए बना था संयुक्त राष्ट्र
    न्यूयॉर्क में UNGA को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से हुई थी। इसके बावजूद आज भी संघर्ष और टकराव दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियों के रूप में मौजूद हैं।

    उन्होंने कहा कि शांति बनाए रखने में नाकामी का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि विकास और प्रगति भी प्रभावित होती है। वैश्वीकृत दुनिया में किसी एक हिस्से में होने वाले युद्ध और संघर्ष का असर दूसरे हिस्सों पर भी पड़ता है। ऐसे में तनाव कम करना और संवाद के जरिए समाधान तलाशना जरूरी है।

    समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा पर जोर
    जयशंकर ने कमर्शियल शिपिंग और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों और समुद्री कर्मचारियों को निशाना बनाना स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव कम करने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। इससे पहले भारत और लाइबेरिया की ओर से समुद्री सुरक्षा और सीफेयरर्स की सुरक्षा को लेकर ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ पहल पर भी जोर दिया गया है। जयशंकर ने कहा था कि दुनिया में जारी संघर्षों का असर भोजन, ईंधन, उर्वरक और वित्त जैसी बुनियादी जरूरतों पर भी पड़ रहा है।

    यूक्रेन युद्ध पर बोले- अंतहीन युद्ध खत्म होना चाहिए
    यूक्रेन में जारी संघर्ष का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह युद्ध पांचवें साल में पहुंच गया है और यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब अंतहीन युद्ध की समाप्ति होनी चाहिए।

    जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि संघर्षों का समाधान केवल सैन्य रास्ते से नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति के जरिए तलाशा जाना चाहिए। उनका संबोधन ऐसे समय हुआ है, जब संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी यूक्रेन में तत्काल युद्धविराम और लंबे समय तक कायम रहने वाली शांति की जरूरत पर जोर दे चुके हैं।

    फिलिस्तीनियों के लिए भारत की मानवीय मदद जारी
    पश्चिम एशिया की स्थिति पर जयशंकर ने कहा कि भारत फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय सहायता और राहत कार्यों में मदद कर रहा है। भारत लंबे समय से फिलिस्तीन के मुद्दे पर मानवीय सहायता और दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन की बात करता रहा है। संयुक्त राष्ट्र में भी भारत ने स्वतंत्र, संप्रभु और व्यवहार्य फिलिस्तीनी राष्ट्र की स्थापना के साथ इजराइल के साथ शांति और सुरक्षा में रहने वाले दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन दोहराया है।

    जयशंकर ने कहा कि शांति का मतलब केवल युद्ध का खत्म होना नहीं है। यदि दुनिया लगातार खतरों और दबावों से घिरी रहेगी तो स्थिरता और सुरक्षा कमजोर होगी। स्थायी शांति के लिए स्थिरता, सुरक्षा और भरोसे का माहौल बनाना जरूरी है। इनमें से किसी भी आधार को कमजोर करने से शांति की स्थिति भी प्रभावित होगी।

    हथियार की तरह इस्तेमाल हो रही अर्थव्यवस्था और तकनीक
    विदेश मंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के दशकों बाद भी दुनिया में हर चीज को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। प्रतिस्पर्धा की सोच हावी हो रही है और संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है।

    उन्होंने वित्त और बाजारों तक पहुंच सीमित करने, सप्लाई चेन में रुकावट डालने और तकनीक को रोकने जैसे कदमों का जिक्र किया। उनका कहना था कि ऐसे उपायों का असर सिर्फ संबंधित देशों तक नहीं रहता, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास पर भी पड़ता है।

    ग्लोबल साउथ के सामने 4F का संकट
    जयशंकर ने ग्लोबल साउथ की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि विकासशील देशों के सामने चुनौतियां और गंभीर हैं। उन्होंने ‘4F’ संकट की बात कही। इसमें Food यानी भोजन, Fuel यानी ईंधन, Fertilizer यानी उर्वरक और Finance यानी वित्त शामिल हैं।

    उनके मुताबिक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों और तनाव का सीधा असर इन चारों क्षेत्रों पर पड़ रहा है। ऐसे में वैश्विक संस्थाओं और देशों के सामने चुनौती यह है कि वे स्थिरता और भरोसे का ऐसा वातावरण तैयार करें, जिससे विकासशील देशों की बुनियादी जरूरतों और विकास पर संकट का असर कम हो।

    पश्चिम एशिया में टू-स्टेट सॉल्यूशन पर भारत का रुख
    पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि भारत का दृढ़ विश्वास है कि टू-स्टेट सॉल्यूशन यानी दो-राष्ट्र समाधान जरूरी है। इसके तहत इजराइल और फिलिस्तीन को शांति और सुरक्षा के साथ रहने का रास्ता तलाशने की बात कही जाती है।

    संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी 81वें महासभा सत्र के दौरान दो-राष्ट्र समाधान को पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का महत्वपूर्ण आधार बता चुके हैं।

    जयशंकर के संबोधन में आतंकवाद, समुद्री सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट, फिलिस्तीन को मानवीय सहायता और ग्लोबल साउथ की आर्थिक चुनौतियों जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। भारत ने इस दौरान आतंकवाद के खिलाफ अपने रुख को दोहराने के साथ वैश्विक स्तर पर शांति, स्थिरता और संवाद की जरूरत पर जोर दिया।

  • UNSC में भारत की स्थायी सीट के समर्थन में रूस, जर्मनी-जापान की दावेदारी का विरोध

    UNSC में भारत की स्थायी सीट के समर्थन में रूस, जर्मनी-जापान की दावेदारी का विरोध


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को रूस का खुला समर्थन मिला है। 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भारत के साथ ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का भी समर्थन किया। वहीं उन्होंने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों के लिए नई स्थायी सीटें बढ़ाने का विरोध किया और कहा कि सुधार का फोकस एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की भागीदारी बढ़ाने पर होना चाहिए।

    लावरोव ने जर्मनी-जापान की दावेदारी पर जताई आपत्ति

    UN महासभा में अपने संबोधन के दौरान लावरोव ने कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के नाम पर पश्चिमी देशों को अतिरिक्त स्थायी सीटें नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने खास तौर पर जर्मनी और जापान की दावेदारी का विरोध किया।

    रूस का कहना है कि मौजूदा UNSC संरचना में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका को उनकी मौजूदा वैश्विक भूमिका के अनुरूप प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। इसी आधार पर मॉस्को भारत और ब्राजील को स्थायी सदस्य बनाने का समर्थन कर रहा है।

    लावरोव ने यह भी कहा कि सुरक्षा परिषद में सुधार के दौरान अफ्रीकी महाद्वीप के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। रूस पहले भी सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधिक बनाने की बात कहता रहा है। सितंबर 2026 में भारत-रूस वार्षिक शिखर बैठक के संयुक्त बयान में भी रूस ने सुधार के बाद विस्तारित UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना समर्थन दोहराया था।

    भारत को कई देशों का समर्थन

    UN महासभा के मौजूदा सत्र के दौरान भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी के समर्थन में कई देशों ने अपनी बात रखी है।

    मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने G4 और L69 के रुख का समर्थन करते हुए भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी दोहराई। वहीं पुर्तगाल ने भी सुरक्षा परिषद में बदलाव की जरूरत बताई है। पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो ने ज्यादा प्रतिनिधित्व वाली UNSC की पैरवी की, जिसमें अफ्रीका, ब्राजील और भारत को स्थायी प्रतिनिधित्व देने का समर्थन शामिल है।

    इसके अलावा 22 सितंबर को भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान यानी G4 के विदेश मंत्रियों ने भी UNSC सुधार पर बैठक की और सुरक्षा परिषद में सुधार को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर जरूरी बताया।

    जापान और अफ्रीकी देशों की भी अलग मांग

    मार्शल आइलैंड्स की राष्ट्रपति हिल्डा हाइने ने कहा कि उनका देश जापान और उसके G4 साझेदारों को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता दिलाने के समर्थन पर लंबे समय से कायम है।

    वहीं जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने भी UNSC में बदलाव की मांग की। उनका कहना है कि सुरक्षा परिषद की संरचना मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करने वाली होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने स्थायी और गैर-स्थायी, दोनों तरह की सीटों की संख्या बढ़ाने की पैरवी की।

    अफ्रीकी देशों की ओर से भी सुरक्षा परिषद में ज्यादा प्रतिनिधित्व की मांग लगातार उठती रही है। सिएरा लियोन के राष्ट्रपति जूलियस माडा बायो ने कहा कि UNSC अभी भी 1945 की दुनिया की तस्वीर पेश करता है। उन्होंने अफ्रीका की 1.6 अरब से ज्यादा आबादी का हवाला देते हुए कहा कि महाद्वीप के पास परिषद में कोई स्थायी सीट नहीं है।

    G4 में भारत के साथ कौन-कौन?

    भारत UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए ब्राजील, जर्मनी और जापान के साथ G4 समूह का हिस्सा है। चारों देश सुरक्षा परिषद में स्थायी और गैर-स्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग करते हैं। G4 देशों ने सितंबर 2026 में भी सुरक्षा परिषद सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जरूरत दोहराई है।

    भारत की ओर से भी सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में बदलाव की मांग लगातार की जाती रही है। भारत का तर्क है कि 80 साल से ज्यादा पुरानी व्यवस्था आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं और वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती।

    कैसे काम करती है UNSC?

    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका पांच स्थायी सदस्य हैं। इन सभी के पास वीटो का अधिकार है।

    बाकी 10 सदस्य गैर-स्थायी होते हैं, जिन्हें दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने के लिए UN चार्टर में संशोधन करना होगा।

    इसके लिए महासभा में दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ सदस्य देशों की ओर से अनुसमर्थन जरूरी है। इसमें मौजूदा पांचों स्थायी सदस्यों की मंजूरी भी शामिल है।

    यही वजह है कि UNSC में स्थायी सदस्यता का विस्तार केवल किसी एक देश के समर्थन से संभव नहीं है। इसके लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहमति और UN चार्टर में औपचारिक बदलाव की जरूरत होगी।