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  • TMC विधायक कुणाल घोष की कार पर हुगली में हमला, अंडे फेंके और शीशा तोड़ा; चार महीने में तीसरी घटना

    TMC विधायक कुणाल घोष की कार पर हुगली में हमला, अंडे फेंके और शीशा तोड़ा; चार महीने में तीसरी घटना

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में शनिवार को TMC विधायक कुणाल घोष की कार को भीड़ ने घेर लिया। कुणाल घोष श्रीरामपुर में ममता बनर्जी की रैली में शामिल होने के लिए जा रहे थे। उत्तरपाड़ा में उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेरकर अंडे फेंके गए। हमले के दौरान कार का पीछे का शीशा भी टूट गया।

    घटना के सामने आए वीडियो में कुणाल घोष ड्राइवर के बगल वाली सीट पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। कार की पिछली सीट पर भी कुछ लोग मौजूद थे। वीडियो में भीड़ की ओर से विरोध करते हुए ‘गो बैक’ के नारे लगाए जाने की बात सामने आई है। कुछ दृश्यों में कुणाल घोष अंडे फेंकने वाले लोगों के सामने हाथ जोड़ते हुए भी दिखाई दिए।

    हमले के बाद कुणाल घोष ने घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने इसे जंगलराज बताते हुए कहा कि उनकी कार पर पत्थर और अंडे फेंके गए तथा रास्ता रोक दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि मौके पर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था। घोष के मुताबिक, वह कोलकाता लौट रहे हैं और लालबाजार या भवानी भवन जाकर शिकायत दर्ज कराएंगे।

    TMC नेताओं ने इस घटना के पीछे BJP के शामिल होने का आरोप लगाया है। पार्टी नेता असित मजूमदार ने कहा कि यह आम लोगों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि पहले से सुनियोजित हमला था। वहीं उत्तरपाड़ा से BJP विधायक दीपांजन चक्रवर्ती ने घटना को लोगों का गुस्सा बताया।

    कुणाल घोष पर पिछले कुछ महीनों में विरोध और हमले की अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं। 15 जून को कोलकाता के कालीघाट में ममता बनर्जी के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान उन पर अंडा फेंका गया था। शिकायत के बाद पुलिस ने चंदन सिंह और रवि कोयल को गिरफ्तार किया था। बाद में दोनों को जमानत मिल गई थी।

    इसके अलावा अगस्त में कोलकाता के गरपार इलाके में कुणाल घोष के घर, क्लब और पार्टी ऑफिस में तोड़फोड़ का आरोप लगा था। उस समय वह घर पर मौजूद नहीं थे। घोष ने दावा किया था कि बाहर से लोगों को बुलाकर उन्हें निशाना बनाया गया और पार्टी ऑफिस के बाहर लगे ममता बनर्जी तथा उनके पोस्टर और बैनर फाड़े गए।

    पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ विरोध की कई घटनाओं का भी जिक्र सामने आया है। 28 मई को नॉर्थ 24 परगना में TMC सांसद सौगत रॉय की कार पर अंडे फेंके जाने और नारेबाजी की बात कही गई। 30 मई को सोनारपुर में TMC सांसद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ अंडे, पत्थर और जूते फेंके जाने का आरोप लगा था। सुरक्षाकर्मियों को उन्हें हेलमेट पहनाकर वहां से निकालना पड़ा था।

    6 जून को मदन मित्रा के काफिले पर अंडे फेंके जाने की घटना सामने आई। इसके बाद युवा नेता सौमित्र बनर्जी और पूर्व मंत्री उदयन गुहा के खिलाफ भी अंडे और जूते फेंके जाने की घटनाएं बताई गईं। 1 जुलाई को कृष्णनगर में TMC सांसद महुआ मोइत्रा पर अंडे, सब्जियां और पत्थर फेंके जाने का आरोप लगा।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कुणाल घोष की ओर से ममता बनर्जी के सुरक्षा घेरे के बावजूद विरोध प्रदर्शन होने पर सवाल उठाए गए हैं। वहीं मई 2026 में अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा Z+ से घटाकर Z किए जाने और कुणाल घोष की अतिरिक्त सुरक्षा को विधायक स्तर तक सीमित किए जाने की जानकारी दी गई है।

  • कश्मीर और पानी पर भारत को घेरने पहुंचे शहबाज से आतंकवाद पर हुआ सीधा सवाल UN के बाहर चुपचाप आगे बढ़ गए पाक PM

    कश्मीर और पानी पर भारत को घेरने पहुंचे शहबाज से आतंकवाद पर हुआ सीधा सवाल UN के बाहर चुपचाप आगे बढ़ गए पाक PM


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत के खिलाफ कई आरोप लगाए और कश्मीर तथा सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाया लेकिन संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर जब उनसे पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े सवाल पूछे गए तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। 24 सितंबर को UN मुख्यालय में प्रवेश करते समय पत्रकार ने उनसे पूछा कि पाकिस्तान आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेगा। शहबाज शरीफ सवाल को अनसुना करते हुए आगे बढ़ गए। बाद में मुख्यालय से निकलते समय उनसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद पर कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया। इस बार भी उन्होंने प्रतिक्रिया नहीं दी और आगे निकल गए। इस घटनाक्रम की पुष्टि कई मीडिया रिपोर्टों में हुई है।

    इसके एक दिन बाद 25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान शहबाज शरीफ ने भारत पर सिंधु नदी के पानी को हथियार बनाने का आरोप लगाया और कश्मीर का मुद्दा उठाया। उन्होंने सिंधु नदी प्रणाली को पाकिस्तान और पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए भारत की नीतियों पर सवाल उठाए। साथ ही अपने भाषण में भारत के साथ संघर्ष का संदर्भ भी दिया। उनके संबोधन के बाद भारत ने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल किया।

    संयुक्त राष्ट्र में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के दावों का जवाब देते हुए उसके आतंकवाद और राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने पाकिस्तान के राजनीतिक ढांचे को लेकर फॉर्म-47 का संदर्भ दिया और कहा कि पाकिस्तान में सत्ता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। गहलोत ने ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में पाए जाने का भी उल्लेख किया और आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर सवाल उठाया।

    भारत की ओर से जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी गई। गहलोत ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में लोगों के अधिकारों तथा वहां की स्थिति पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और धार्मिक कट्टरता से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।

    भारत और पाकिस्तान के बीच संयुक्त राष्ट्र में यह बयानबाजी ऐसे समय हुई जब दोनों देशों के प्रतिनिधि अपने अपने पक्ष को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखने की कोशिश कर रहे थे। शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में भारत की नीतियों पर सवाल उठाए तो भारत ने जवाब के अधिकार के तहत पाकिस्तान के आतंकवाद संबंधी रिकॉर्ड और उसकी आंतरिक राजनीतिक व्यवस्था को मुद्दा बनाया।

    इस पूरे घटनाक्रम में UN मुख्यालय के बाहर पूछे गए सवाल भी चर्चा में रहे। पत्रकारों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से सीधे आतंकवादियों को कथित तौर पर पनाह देने और हाफिज सईद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सवाल किया लेकिन शहबाज शरीफ ने दोनों मौकों पर कोई सार्वजनिक जवाब नहीं दिया।

  • यूपी चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचे योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में चुनाव और राज्य के मुद्दों पर चर्चा

    यूपी चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचे योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में चुनाव और राज्य के मुद्दों पर चर्चा

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 26 सितंबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुई है। मुलाकात के कारण राज्य की राजनीति में चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच इससे पहले भी इस साल मुलाकातें हो चुकी हैं।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे को उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बैठक के दौरान हुई चर्चाओं का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है। ऐसे में मुलाकात के एजेंडे को लेकर सामने आई अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याओं को तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच हुई बैठक ने राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर स्वाभाविक रूप से ध्यान आकर्षित किया है। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे और प्रधानमंत्री से मुलाकात के बीच चुनावी तैयारियों से जुड़े विषयों पर चर्चा की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    मुलाकात से एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ग्रेटर नोएडा में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में शामिल हुए थे। इस दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने रूस, वियतनाम, बेलारूस, जापान और सिंगापुर सहित भागीदार देशों की कंपनियों के साथ बैठक की थी और प्रदेश में रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, विमानन, मेडिकल डिवाइस, कृषि तथा विनिर्माण क्षेत्र में निवेश का आमंत्रण दिया था।

    दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की केंद्रीय नेतृत्व के साथ अन्य बैठकों की भी जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात प्रस्तावित थी।

    योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी के बीच उत्तर प्रदेश को लेकर संवाद पहले भी होता रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। इससे पहले 8 अगस्त 2026 को भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। इन मुलाकातों की आधिकारिक जानकारी में मुख्य रूप से दोनों नेताओं के मिलने की पुष्टि की गई थी।

    वर्तमान दिल्ली दौरा ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। राज्य सरकार और केंद्रीय नेतृत्व के बीच होने वाली बैठकों को इसी व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक संदर्भ में देखा जा रहा है।

    फिलहाल 26 सितंबर की मुलाकात में किन-किन विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई, इसे लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए बैठक को लेकर सामने आ रही चुनावी रणनीति संबंधी चर्चाओं को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इतना स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और यह मुलाकात उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुई है।

  • 30 सितंबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक की संभावित बैठक, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर चर्चा

    30 सितंबर को दिल्ली में INDIA ब्लॉक की संभावित बैठक, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर चर्चा

    नई दिल्ली । विपक्षी दलों का INDIA ब्लॉक 30 सितंबर को नई दिल्ली में बैठक कर सकता है। इस संभावित बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विपक्षी दल इन विषयों पर आगे की संयुक्त रणनीति तैयार करने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

    बैठक का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली हो सकता है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ संयुक्त कार्रवाई की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।

    इस घटनाक्रम में पश्चिम बंगाल की राजनीति से जुड़े तृणमूल कांग्रेस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का एक मुद्दे पर साथ आना भी महत्वपूर्ण है। दोनों दल राज्य में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं, लेकिन चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर समन्वित कार्रवाई की जरूरत जता रहे हैं।

    मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एमए बेबी ने विपक्षी दलों को पत्र लिखकर बैठक बुलाने का अनुरोध किया था। इसके बाद उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी बातचीत की। ममता बनर्जी ने इस मामले से निपटने के लिए समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

    विपक्षी दलों में कांग्रेस और वामपंथी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने तथा SIR प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग उठा रहे हैं। इस मुद्दे पर विपक्ष संसद के दोनों सदनों में नया प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। इसके कानूनी पहलुओं पर विशेषज्ञों से राय ली जा रही है।

    कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक 29 सितंबर को प्रस्तावित है। इस बैठक में पार्टी चुनाव आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण से जुड़े विवाद पर अपना रुख स्पष्ट कर सकती है। इसके बाद 30 सितंबर को होने वाली संभावित विपक्षी बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है।

    विपक्ष की मौजूदा लामबंदी के पीछे चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े फैसलों पर कथित मतभेद की खबर भी एक वजह बताई जा रही है। सामने आई जानकारी में दावा किया गया था कि आयोग के अन्य आयुक्तों ने पुनरीक्षण से संबंधित कुछ फैसलों पर आपत्तियां जताई थीं।

    हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि बहुसदस्यीय संस्था में अलग-अलग विचार सामने आना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग ने अपने आदेशों को वैधानिक बताया है। इस मुद्दे पर विपक्ष और चुनाव आयोग के रुख में अंतर बना हुआ है।

    इससे पहले 23 विपक्षी दलों और एक सांसद ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। विपक्षी दल अब संसद में प्रस्ताव लाने और आपसी समन्वय के जरिए आगे की कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं।

    30 सितंबर की संभावित बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। बैठक में शामिल होने वाले दलों और अंतिम एजेंडे को लेकर आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।

  • पहाड़ों में गरजी सैन्य ट्रेनिंग मंगोलियाई जवानों ने सीखी भारतीय तकनीक नोमैडिक एलीफेंट 2026 में दिखी मार्शल विरासत

    पहाड़ों में गरजी सैन्य ट्रेनिंग मंगोलियाई जवानों ने सीखी भारतीय तकनीक नोमैडिक एलीफेंट 2026 में दिखी मार्शल विरासत


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में भारत और मंगोलिया की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास नोमैडिक एलीफेंट 2026 तेजी से आगे बढ़ रहा है। फॉरेन ट्रेनिंग नोड पर चल रहे इस अभ्यास में दोनों देशों के जवान कठिन और व्यावहारिक प्रशिक्षण के जरिए अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत कर रहे हैं। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना और मंगोलियाई सशस्त्र बलों के बीच आपसी तालमेल सामरिक समझ और ऑपरेशनल क्षमताओं को बढ़ाना है। नोमैडिक एलीफेंट का यह 18वां संस्करण 21 सितंबर से शुरू हुआ है और 3 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इसमें दोनों देशों की सेनाओं के 45-45 जवान हिस्सा ले रहे हैं।

    अभ्यास के दौरान मंगोलियाई सैनिकों को छोटे हथियारों से जुड़े प्रशिक्षण का व्यावहारिक अनुभव दिया गया। जवानों ने हथियारों की पहचान और उनकी कार्यप्रणाली के साथ सुरक्षा ड्रिल लोडिंग और अनलोडिंग निशाना लगाने तथा फायरिंग जैसी गतिविधियों में हिस्सा लिया। प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के दौरान हथियारों को सुरक्षित और अनुशासित तरीके से इस्तेमाल करने पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे मंगोलियाई सैनिकों को भारतीय सेना की प्रशिक्षण पद्धति और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को करीब से समझने का अवसर मिला।

    भारतीय सेना की टुकड़ी ने इस दौरान रूम इंटरवेंशन ड्रिल का भी प्रदर्शन किया। इस ड्रिल में कमरे में व्यवस्थित तरीके से प्रवेश तलाशी समन्वित मूवमेंट संचार फायर अनुशासन और घायल व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालने जैसी तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। आबादी वाले इलाकों में अभियान के दौरान टीमवर्क और स्थितिजन्य जागरूकता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए दोनों देशों के सैनिकों ने एक दूसरे के साथ हैंड्स ऑन ट्रेनिंग भी की। इससे जवानों को अपनी तकनीकों और प्रक्रियाओं को साझा करने का मौका मिला।

    अभ्यास के दौरान मंगोलियाई सैनिकों ने अपनी पारंपरिक मार्शल कला की झलक भी पेश की। उन्होंने मंगोलियाई क्लासिकल कुश्ती बोख और बिना हथियार के युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया। पारंपरिक कुश्ती तकनीकों नियंत्रित ग्रैपलिंग और क्लोज कॉम्बैट मूवमेंट के जरिए मंगोलियाई जवानों ने अपनी ताकत फुर्ती अनुशासन और शारीरिक दक्षता का प्रदर्शन किया। इस गतिविधि ने सैन्य प्रशिक्षण के साथ दोनों देशों के सैनिकों के बीच पेशेवर संवाद और आपसी समझ को भी बढ़ाया।

    नोमैडिक एलीफेंट 2026 का व्यापक उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के जनादेश के तहत अर्ध शहरी और पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद रोधी अभियानों के लिए दोनों देशों की संयुक्त सैन्य क्षमता को मजबूत करना है। अभ्यास के दौरान सैनिकों को अलग अलग परिस्थितियों में मिलकर काम करने और सामरिक स्तर पर बेहतर तालमेल विकसित करने का अवसर मिल रहा है। भारत और मंगोलिया के बीच लंबे समय से रक्षा सहयोग जारी है और नोमैडिक एलीफेंट जैसे अभ्यास इसी सहयोग को व्यावहारिक प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाते हैं। पिथौरागढ़ में चल रहा यह सैन्य अभ्यास दोनों देशों के जवानों को एक दूसरे की कार्यप्रणाली समझने के साथ संयुक्त अभियानों के लिए बेहतर समन्वय विकसित करने का मंच दे रहा है।

  • सोनीपत में खेत के कमरे में 32 वर्षीय महिला की हत्या, पति पर शराब के नशे में कस्सी से हमला करने का आरोप

    सोनीपत में खेत के कमरे में 32 वर्षीय महिला की हत्या, पति पर शराब के नशे में कस्सी से हमला करने का आरोप

    नई दिल्ली: हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव रहमाणा में 32 वर्षीय महिला की हत्या का मामला सामने आया है। महिला की पहचान राजवंती के रूप में हुई है। वह अपने पति और करीब 11 साल के बेटे के साथ एक किसान के खेत में बने कमरे में रह रही थी। आरोप है कि घरेलू विवाद के चलते उसके पति नरेश ने शराब के नशे में उस पर धारदार कृषि उपकरण कस्सी से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण महिला की मौत हो गई। घटना के बाद से आरोपी पति की तलाश की जा रही है।

    राजवंती और उसका पति नरेश मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं। दोनों अपने बेटे के साथ सोनीपत के रहमाणा गांव में किसान राजेंद्र के खेत में बने कमरे में रह रहे थे। बताया गया है कि पति-पत्नी के बीच अक्सर घरेलू मामलों को लेकर विवाद होता रहता था। ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों शराब पीने के आदी थे और उनके बीच आए दिन कहासुनी होती थी।

    आरोप है कि घटना के समय नरेश शराब के नशे में था। घरेलू विवाद के दौरान उसने कथित तौर पर कस्सी से राजवंती पर हमला कर दिया। महिला के चेहरे, सिर और पेट पर कई वार किए गए। हमले में उसे गंभीर चोटें आईं, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    महिला की हत्या की सूचना मिलने पर मोहाना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और वारदात से जुड़े तथ्यों की पड़ताल के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को भी बुलाया गया।

    पुलिस की शुरुआती जांच में हत्या के पीछे घरेलू विवाद की बात सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर महिला के पति नरेश पर हत्या करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस घटनाक्रम की सभी परिस्थितियों की जांच कर रही है और आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

    पुलिस प्रवक्ता रवींद्र कुमार के मुताबिक, गांव रहमाणा से महिला की हत्या की सूचना मिली थी। शुरुआती जांच में महिला के पति पर हत्या का आरोप सामने आया है। महिला पर किसी तेजधार हथियार से हमला किए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपी पति की तलाश की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान वारदात से जुड़े तथ्यों, घरेलू विवाद की परिस्थितियों और महिला की मौत के कारणों की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

  • मौसम के बदले तेवर: हेमकुंड साहिब में बर्फबारी, यूपी में सड़कों पर पानी, हिमाचल-उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम के बदले तेवर: हेमकुंड साहिब में बर्फबारी, यूपी में सड़कों पर पानी, हिमाचल-उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट

    नोएडा। मानसून की विदाई के बीच देश के उत्तर और मध्य हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब में बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है, वहीं उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश से कई शहरों में जलभराव की स्थिति है। हिमाचल प्रदेश में भी बादल सक्रिय हैं और कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड में तो 26 और 27 सितंबर के लिए कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट है।

    यूपी में बारिश से जनजीवन प्रभावित, 19 जिलों में स्कूल बंद
    उत्तर प्रदेश में बृहस्पतिवार आधी रात के बाद शुरू हुआ बारिश का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहने के आसार हैं। प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में कहीं धीमी तो कहीं तेज बारिश हुई। लगातार बारिश से सड़कों पर पानी भर गया और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    मौसम विभाग ने श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा 62 जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट है।

    बारिश के कारण मानसून सीजन में प्रदेश में रह गया करीब चार फीसदी बारिश का अंतर भी पूरा हो गया है। हालात को देखते हुए शनिवार को 19 जिलों में स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है। नर्सरी से लेकर डिग्री कॉलेज तक के शिक्षण संस्थान प्रभावित रहेंगे। चार जिलों में कक्षा आठ तक और अन्य जिलों में कक्षा 12 तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर सिंह ने भी स्कूल बंद रखने के प्रशासन के फैसले का समर्थन किया है।

    बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बढ़ी बारिश
    वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने नए मौसम तंत्र के पश्चिमी विक्षोभ के साथ मिलने से उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं। शनिवार को भी बारिश का दायरा और बढ़ने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान गिरा है। कई जगह अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे पहुंच गया है।

    खेतों में बिछी धान की फसल
    लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी धान समेत दूसरी फसलें गिर गई हैं। जौनपुर, मिर्जापुर और आजमगढ़ में धान की फसल बिछने की सूचना है। इससे किसानों को फसल खराब होने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

    हिमाचल में चार दिन बारिश, 27 सितंबर को सबसे ज्यादा असर
    हिमाचल प्रदेश में भी मौसम का मिजाज बदल गया है। प्रदेश में अगले चार दिन बारिश का दौर रहने का अनुमान है। राजधानी शिमला में सुबह धूप खिली, लेकिन दोपहर होते-होते घने बादल छा गए।

    मौसम विभाग के अनुसार 26 सितंबर की शाम या रात से 29 सितंबर की सुबह तक दक्षिण-पूर्वी हिमाचल और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है। 27 सितंबर को बारिश की तीव्रता सबसे अधिक रहने का पूर्वानुमान है।

    मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के मुताबिक सिरमौर, शिमला, सोलन, मंडी और बिलासपुर के कुछ हिस्सों में 26 सितंबर की शाम से 29 सितंबर की सुबह तक व्यापक बारिश हो सकती है। इस दौरान कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ अंधड़ और बिजली चमकने की भी आशंका है।

    29 सितंबर को भी कई हिस्सों में बारिश हो सकती है, जबकि 30 सितंबर से 2 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर हल्की बारिश का अनुमान है। पिछले 24 घंटे में धर्मशाला में 46.0 मिमी, भरेरी में 18.2 मिमी, धौलाकुआं में 11.0 मिमी और भरवाईं में 8.0 मिमी बारिश दर्ज की गई।

    हिमाचल में किस दिन कौन सा अलर्ट
    27 सितंबर: सिरमौर में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। बिलासपुर, मंडी, शिमला, सोलन और किन्नौर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    28 सितंबर: शिमला, सोलन और सिरमौर में येलो अलर्ट रहेगा।
    27 और 28 सितंबर: ऊना, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, किन्नौर और स्पीति के कुछ हिस्सों में मध्यम बारिश की संभावना है।
    26 से 28 सितंबर के बीच शिमला, सोलन और सिरमौर तथा 27 सितंबर को किन्नौर, बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी में कुछ स्थानों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
    26 सितंबर को शिमला, सिरमौर और किन्नौर में कई जगह हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर तेज बारिश का अनुमान है। कुल्लू, कांगड़ा, मंडी और लाहौल-स्पीति में हल्की बारिश हो सकती है।

    उत्तराखंड में हेमकुंड साहिब बर्फ से ढका, कई जिलों में रेड अलर्ट
    उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब में मौसम खराब होने के बाद लगातार बर्फबारी हो रही है। बर्फबारी के चलते धाम में ठंड काफी बढ़ गई है। इसी बीच प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हुआ है।

    मौसम विज्ञान केंद्र ने 26 से 28 सितंबर तक बारिश की गतिविधियों को लेकर चेतावनी जारी की है। मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार मौजूदा मौसम प्रणालियों के कारण 26 और 27 सितंबर को पर्वतीय जिलों के कुछ हिस्सों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    दक्षिण ओडिशा और उससे सटे दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर बना अवदाब पिछले छह घंटे में 15 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा है। इसके प्रभाव से उत्तराखंड में बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है।

    26 सितंबर को इन जिलों में रेड अलर्ट
    बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट है। वहीं देहरादून, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    27 सितंबर को भी कई जिलों में खतरा
    27 सितंबर को देहरादून, टिहरी, हरिद्वार और पौड़ी में भारी से बहुत भारी तथा कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट है।

    नैनीताल, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का ऑरेंज अलर्ट है।

    28 सितंबर को उत्तरकाशी, हरिद्वार और देहरादून में कुछ स्थानों पर भारी बारिश और गर्जन के साथ तेज बारिश का दौर आने की संभावना है।

    भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा, यात्रा में सावधानी की अपील
    मौसम विभाग ने संवेदनशील इलाकों में हल्के से मध्यम भूस्खलन और चट्टानें गिरने से सड़क व राजमार्ग बाधित होने की आशंका जताई है। बिजली और पानी जैसी सामुदायिक सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

    इसके अलावा नदियों का जलस्तर बढ़ने, नालों में अचानक बाढ़ आने और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा है। कच्चे मकानों, पुलों और निर्माणाधीन भवनों को भी नुकसान पहुंच सकता है। चारधाम यात्रा, पर्वतारोहण अभियान और हेली सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।

    प्रशासन ने तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को मौसम को देखते हुए सतर्क रहने और जरूरी होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी है। लोगों से नदी-नालों और उफनती धाराओं में जाने, तैरने या नौका विहार से बचने को कहा गया है। भारी बारिश के दौरान घर के भीतर रहने और सक्रिय भूस्खलन वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है।

    गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा अस्थायी रूप से रोकी
    उत्तरकाशी जिले में रेड अलर्ट के मद्देनजर प्रशासन ने गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर हीना और डोबाटा होल्डिंग पॉइंट्स पर यात्रियों को आगे जाने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा सुचारू है।

    जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र और स्मार्ट कंट्रोल रूम को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सभी तहसीलों से बारिश और भूस्खलन की सूचनाएं लगातार जुटाई जा रही हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की लाइव सीसीटीवी से भी निगरानी की जा रही है।

    एनएच, बीआरओ, पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को मशीनरी और मैनपावर तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। सड़क बंद होने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द खोलने को कहा गया है। सभी तहसीलों को भी अलर्ट पर रहने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल देने के निर्देश हैं।

  • अयोध्या के राम-जानकी मंदिर में चोरी, अष्टधातु की प्राचीन प्रतिमाएं ले गए चोर, पूजा का सामान भी गायब

    अयोध्या के राम-जानकी मंदिर में चोरी, अष्टधातु की प्राचीन प्रतिमाएं ले गए चोर, पूजा का सामान भी गायब

    अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या में प्राचीन श्री राम-जानकी मंदिर को चोरों ने निशाना बनाया। टकसाल चौक स्थित मंदिर में ताला तोड़कर चोर अष्टधातु की श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण जी की प्राचीन मूर्तियां समेत पूजा का सामान, लोटा और घंटा भी ले गए। घटना का पता 25 सितंबर की शाम उस समय चला, जब पुजारी आरती के लिए मंदिर पहुंचे।

    आरती के लिए पहुंचे पुजारी तो टूटा मिला ताला
    चोरी की वारदात चौकी चौक क्षेत्र के टकसाल चौक स्थित प्राचीन श्री राम-जानकी मंदिर में हुई। यह मंदिर रामयश कीर्तन सभा परिसर में है और पुराने प्रभात सिनेमा के नाम से भी इस स्थान की पहचान बताई गई है।

    25 सितंबर 2026 की शाम पुजारी जब मंदिर में आरती के लिए पहुंचे तो मुख्य द्वार का ताला टूटा हुआ मिला। अंदर जाकर देखने पर मंदिर से प्राचीन अष्टधातु की श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण जी की मूर्तियां गायब मिलीं। इसके अलावा पूजा में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान, लोटा और घंटा भी नहीं मिला।

    अध्यक्ष ने एक व्यक्ति पर जताई आशंका
    घटना के बाद रामयश कीर्तन सभा के अध्यक्ष सुनील कुमार त्रिवेदी ने चौकी चौक पुलिस को लिखित प्रार्थना पत्र दिया। तहरीर में उन्होंने दिल्ली दरवाजा निवासी लवकुश गुप्ता, पुत्र स्व. मिन्नू गुप्ता, पर वारदात में शामिल होने की आशंका जताई है।

    हालांकि, आरोपी पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस मामले में तहरीर में लगाए गए आरोपों और अन्य संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

    सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
    तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि चोरी की वारदात से जुड़े सुराग मिल सकें। पुलिस नामजद व्यक्ति की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश भी दे रही है।

    मंदिर से प्राचीन प्रतिमाओं की चोरी के बाद स्थानीय स्तर पर भी घटना को लेकर चिंता है। अब पुलिस के सामने मूर्तियों को बरामद करने के साथ वारदात में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की चुनौती है।

  • यूपी में 36 घंटे बाद मौसम सामान्य होने के आसार, 63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश, 117 मकान क्षतिग्रस्त

    यूपी में 36 घंटे बाद मौसम सामान्य होने के आसार, 63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश, 117 मकान क्षतिग्रस्त


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार 48 घंटे से हो रही भारी बारिश और खराब मौसम के बीच प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नेपाल में भारी बारिश के चलते सीमावर्ती जिलों में नदियों के जलस्तर पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 36 घंटे बाद प्रदेश में मौसम के सामान्य होने की संभावना है।

    प्रभावित परिवारों से मिलेंगे अधिकारी
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत और बचाव व्यवस्था सक्रिय रखी गई है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने शनिवार को प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति में आमजन की जान-माल की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जिलाधिकारियों को स्वयं फील्ड में रहकर हालात का आकलन करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तुरंत निर्णय लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    नेपाल सीमा पर विशेष सतर्कता
    नेपाल में हो रही भारी बारिश को देखते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत सीमावर्ती जिलों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन को नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और बाढ़ राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने के लिए कहा गया है।

    राहत आयुक्त ने अधिकारियों से कहा है कि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य में देरी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित इलाकों में टीमें लगातार भ्रमण कर स्थिति की निगरानी करेंगी।

    36 घंटे बाद राहत मिलने की उम्मीद
    भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 36 घंटे बाद प्रदेश में मौसम सामान्य होने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहें।

    किसी भी आपदा या आपात स्थिति में तत्काल सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी 1070 हेल्पलाइन दर्ज है।

    63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    राहत आयुक्त के मुताबिक, प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटे में पूरे प्रदेश में सामान्य से 19 गुना अधिक वर्षा हुई। सबसे ज्यादा अंतर फर्रुखाबाद में रहा, जहां सामान्य से 200 गुना अधिक बारिश दर्ज की गई। कानपुर नगर में यह आंकड़ा 160 गुना, जबकि कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में सामान्य से 130 गुना अधिक रहा।

    भदोही, देवरिया और अलीगढ़ में सामान्य बारिश दर्ज हुई, जबकि गाजीपुर में सबसे कम बारिश हुई। वहीं बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ में बारिश दर्ज नहीं हुई।

    117 मकान क्षतिग्रस्त
    पिछले 48 घंटे में अतिवृष्टि और आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है। राहत आयुक्त ने संबंधित जिलाधिकारियों को प्रभावित परिवारों को नियमानुसार अनुमन्य सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    अधिकारियों को बारिश से हुए नुकसान का तत्काल सर्वे और आकलन कराने को भी कहा गया है, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द राहत दी जा सके। फील्ड अधिकारियों को फसलों को हुए नुकसान का भी त्वरित आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

    फायर सर्विस और आपदा मित्रों की मदद लेने के निर्देश
    प्रशासन को जरूरत के अनुसार फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए गए हैं। सभी राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण और निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    जिलाधिकारियों को खुद फील्ड में रहकर स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने भी बारिश प्रभावित जिलों में अधिकारियों को सतर्क रहने और जरूरत के मुताबिक स्थानीय स्तर पर स्कूलों समेत गैर-जरूरी सेवाओं के संबंध में निर्णय लेने को कहा है।

    कच्चे मकानों और जलभराव वाले इलाकों पर नजर
    प्रशासन ने लेखपालों और ग्राम विकास अधिकारियों को कच्चे मकानों के आसपास जलभराव की स्थिति पर तत्काल नजर रखने को कहा है। जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

    जरूरत पड़ने पर ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि खराब मौसम के दौरान आमजन की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

  • ग्वालियर में चार राज्यों के जजों का सम्मेलन AI और डिजिटल सबूतों पर मंथन जस्टिस मिश्रा ने बताई नई चुनौती

    ग्वालियर में चार राज्यों के जजों का सम्मेलन AI और डिजिटल सबूतों पर मंथन जस्टिस मिश्रा ने बताई नई चुनौती


    ग्वालियर। ग्वालियर में मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से क्षेत्रीय न्यायिक सम्मेलन की शुरुआत हुई। दो दिवसीय सम्मेलन में मध्य प्रदेश के साथ महाराष्ट्र गुजरात और राजस्थान से न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने न्यायिक शिक्षा और बदलती तकनीक के बीच तालमेल की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायदान सिर्फ कानून की धाराओं को जानने तक सीमित नहीं है बल्कि अदालत में न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों और उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है।

    उद्घाटन सत्र में न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि वर्तमान दौर में न्यायपालिका के सामने कई ऐसी परिस्थितियां सामने आ रही हैं जिनका सामना न्यायिक अधिकारियों ने अपने करियर के शुरुआती दौर में नहीं किया होगा। सोशल मीडिया यूट्यूब और डीपफेक जैसी तकनीकों ने वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करने की चुनौती बढ़ा दी है। ऐसे में अदालतों के सामने पेश किए जाने वाले डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता को समझना और उनकी जांच की प्रक्रिया से परिचित होना महत्वपूर्ण हो गया है।

    उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल अपराधों में भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे मामलों में साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ या कृत्रिम सामग्री तैयार करने की संभावनाओं को समझना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। न्यायमूर्ति मिश्रा के अनुसार न्यायिक अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्यों की जटिलताओं और आधुनिक तकनीक के प्रभाव को समझने के लिए लगातार सीखते रहना होगा।

    न्यायमूर्ति मिश्रा ने न्यायिक शिक्षा को किसी निश्चित पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय बदलती परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अनुभव से यह पता चलता है कि अतीत में क्या हुआ है लेकिन शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों से निपटने की क्षमता विकसित करना है जो पहले सामने नहीं आई हैं। बदलते समाज के साथ न्यायपालिका को भी अपनी सोच और समझ का दायरा लगातार बढ़ाना होगा।

    सम्मेलन में पुराने कानूनों की वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्याख्या और नए आपराधिक कानूनों के प्रभाव पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा DNA रिपोर्ट वॉयस सैंपल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल फुटप्रिंट जैसे साक्ष्यों को समझने के लिए न्यायिक अधिकारियों के तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर दिया गया। फॉरेंसिक लैब पुलिस जांच और जेल व्यवस्था की कार्यप्रणाली को समझने के लिए फील्ड ट्रेनिंग की जरूरत पर भी विचार किया गया।

    न्यायिक प्रशिक्षण में Ethics Logic और Psychology जैसे विषयों को शामिल करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। साथ ही न्यायिक अधिकारियों को अपनी सीमाओं और पूर्वाग्रहों को पहचानकर लगातार सीखने की जरूरत बताई गई। सम्मेलन में निष्पक्षता समानता और संवेदनशीलता को न्यायिक प्रशिक्षण का अहम हिस्सा बनाने पर भी मंथन किया गया।

    मध्य प्रदेश में तीनों नए आपराधिक कानूनों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल का भी उल्लेख किया गया। न्यायिक अकादमी में पारंपरिक प्रशिक्षण से आगे बढ़कर 360 डिग्री और इमर्सिव लर्निंग पर जोर देने की बात सामने आई। इसके साथ ही ADR और Mediation को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

    सम्मेलन में मध्य प्रदेश महाराष्ट्र गुजरात और राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश राज्य न्यायिक अकादमियों के निदेशक रजिस्ट्री अधिकारी और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी भी रही। सम्मेलन का मुख्य फोकस बदलती तकनीक नए कानून और आधुनिक दौर की न्यायिक चुनौतियों के अनुरूप अधिकारियों को तैयार करने पर रहा।