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  • हर किसी के बस की बात नहीं-IPL में 800 से ज्यादा रन बनाने वाले सिर्फ 4 खिलाड़ी

    हर किसी के बस की बात नहीं-IPL में 800 से ज्यादा रन बनाने वाले सिर्फ 4 खिलाड़ी


    नई दिल्ली। इंडियन प्रीमियर लीग के इतिहास में हर सीजन में कई बल्लेबाज शानदार प्रदर्शन करते हैं, लेकिन 800 से ज्यादा रन बनाना किसी सपने से कम नहीं होता। अब तक इस लीग में सिर्फ 4 बल्लेबाज ही ऐसे कर पाए हैं, एक ही सीजन में 800+ रन बनाकर इतिहास रच दिया।

    विराट कोहली: 973 रन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड

    आईपीएल के इतिहास में एक सीजन में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड विराट कोहली के नाम है। उन्होंने 2016 सीजन में 16 मैचों में 973 रन बनाए, जो आज तक कोई नहीं तोड़ पाया।
    इस दौरान उनकी रेटिंग में 4 शतक और 7 शतक शामिल थे। कोहली आज भी इस लीग में 900+ रन बनाने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं।

    शुभमन गिल: यंग स्टार का धमाका

    शुभमन गिल ने आईपीएल 2023 (16वें सीजन) में शानदार प्रदर्शन करते हुए 890 रन बनाए।
    157 के स्ट्राइक रेट से प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने 3 शतक और 4 शतक जड़े और अपनी क्लास साबित की।

    डेविड वार्नर: विस्फोटक ओपनर की ताकत

    इस खास लिस्ट में डेविड वॉर्नर भी शामिल हैं। उन्होंने 2016 में 848 रन बनाए और अपनी टीम को जगह दी।
    वॉर्नर आईपीएल इतिहास के सबसे सफल विदेशी खिलाड़ी हैं और लगातार रन बनाने के लिए जाते हैं।

    जोस बटलर: आक्रामक नाव का नमूना

    इंग्लैंड के शुरुआती-बैलेबाज जोस बटलर ने 2022 सीज़न में 863 रन बनाए इस सूची में जगह बनाई गई है। उन्होंने पूरे सीज़न में नाटकीय नाटकीयता और कई मैचों में अकेले दम पर टीम को जीत दिलाई।

    800+ रन का पात्र इतना खास क्यों है?

    एक आईपीएल सीजन में 800 रन बनाना मुश्किल होता है क्योंकि:
    सिर्फ 14-17 मैच ही मिलते हैं
    हर मैच में निरंतर प्रदर्शन आवश्यक होता है
    रिज्यूमे रणनीतिक रणनीति स्थिर रहती है

  • सेहत से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त इंदौर में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई कई डेयरियों पर छापा

    सेहत से खिलवाड़ नहीं होगा बर्दाश्त इंदौर में खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई कई डेयरियों पर छापा


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में मिलावटी दूध के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। लोगों की सेहत से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर अब लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सोमवार को कनाडिया क्षेत्र में छापेमारी कर कई डेयरियों की जांच की।

    खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने कनाडिया रोड और आसपास के इलाकों में सघन अभियान चलाते हुए जोशी दूध दही भंडार ओसवाल डेरी गणेश दूध दही भंडार और पूजा डेयरी सहित कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने अलग अलग डेयरियों से दूध और दुग्ध उत्पादों के नमूने एकत्र किए ताकि उनकी गुणवत्ता की जांच की जा सके।

    कार्रवाई के दौरान जोशी दूध दही भंडार से 4 ओसवाल डेरी से 3 गणेश दूध दही भंडार से 3 और पूजा डेयरी से दूध व मावा के 2 नमूने लिए गए। इस तरह कुल 12 सैंपल जब्त किए गए हैं जिन्हें जांच के लिए भेजा जा रहा है। अधिकारियों ने मौके पर ही डेयरी संचालकों को साफ सफाई बनाए रखने और मिलावट से दूर रहने के सख्त निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य पदार्थों में किसी भी तरह की मिलावट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने डेयरी संचालकों को चेतावनी दी कि अगर नियमों का उल्लंघन पाया गया तो कानूनी कार्रवाई तय है।

    खाद्य विभाग के अनुसार सभी नमूनों को जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कदम उठाए जाएंगे जिसमें जुर्माना से लेकर लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।

    प्रशासन का कहना है कि यह अभियान केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है बल्कि इसे लगातार जारी रखा जाएगा। शहर के अन्य इलाकों में भी इसी तरह की छापेमारी कर मिलावटी दूध और नकली दुग्ध उत्पाद बेचने वालों पर शिकंजा कसा जाएगा।

    कुल मिलाकर इंदौर प्रशासन का यह कदम साफ संकेत देता है कि अब खाद्य सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लोगों की सेहत से समझौता करने वालों के खिलाफ सख्ती लगातार बढ़ती रहेगी।

  • ग्लोबल टेंशन से सहमा बाजार! भारतीय शेयर मार्केट की कमजोर शुरुआत

    ग्लोबल टेंशन से सहमा बाजार! भारतीय शेयर मार्केट की कमजोर शुरुआत


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ तौर पर देखने को मिला। व्यापारिक प्रतिष्ठानों की शुरुआत ही भारी गिरावट के साथ हुई, जिससे व्यापारियों की चिंता और बढ़ गई। सुबह 9:28 बजे बीएसई सेंसेक्स 1,309 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1.78 प्रतिशत शेयर 73,223 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 408 अंक 1.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,705 पर कारोबार हुआ।

    हर सेक्टर में बिकवाली,अजनबी में डर का माहौल

    शुरुआती कारोबार में बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। मेटल, पीएससीयू बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। इसके अलावा रियल्टी, डिफेंस, आईटी, स्कॉर्पियो, एनर्जी और आर्किटेक्चर जैसे लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में बिजनेस कर रहे थे। लार्जकैप स्टॉकहोम के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर बाजार में भी नजर आए। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में भी तेजी से गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ हो गया कि बाजार में व्यापक स्तर पर कमजोरी बनी हुई है।

    वैश्विक हस्ताक्षर भी फ़्राईड, एशियाई अख़्तियार में भी गिरावट

    भारतीय बाज़ार की इस गिरावट के पीछे अंतर्राष्ट्रीय संकेत भी बड़ी वजह बने। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सियोल जैसे एशियाई सामानों की भी भारी बिक्री आंकी गई है। वहीं, अमेरिकी बाजार में भी पिछले सत्र में गिरावट के साथ गिरावट आई थी, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा टूट गया है।

    तेल के कारखाने और मध्य पूर्व संकट बना सबसे बड़ा कारण

    वैज्ञानिकों के अनुसार, इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में भारी तनाव है, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भारी असमानता। इस क्षेत्र में वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है, और यहां किसी भी तरह के संकटग्रस्त कच्चे तेल की आपूर्ति को तेजी से बढ़ाया जा सकता है। तेल की पेट्रोलियम कंपनी भारत जैसे तीर्थ-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इसी वजह से तेल की पेट्रोलियम कंपनी की कीमत में भी बढ़ोतरी होती है।

    विदेशी ग्राहकों की लगातार बिकवाली

    बाजार पर दबाव बढ़ाने वाला एक और बड़ा कारण विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली है। पिछले फेस्टिवल सत्र में एफओआई ने 5,518 करोड़ रुपये की बड़ी बिक्री की, जिससे बाजार का सेंटीमेंट और गिरावट आई। हालाँकि, घरेलू एंटरप्राइज़ कॉमर्स (डीआईआई) ने कुछ हद तक खरीदारी कर बाजार को सहारा देने की कोशिश की।

    आगे क्या? विद्यार्थी के लिए संकेत

    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि जब तक मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं हुआ और तेल की कीमतें स्थिर नहीं हुईं, तब तक बाजार में मिश्रण बना रह सकता है। आवेदकों को अनुमति और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव से ऊर्जा संकट गहराया होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र

    मिडिल ईस्ट तनाव से ऊर्जा संकट गहराया होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र


    नई दिल्ली:
    पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता को बढ़ा दिया है इस स्थिति को लेकर International Energy Agency के प्रमुख फतिह बिरोल ने कड़ी चेतावनी जारी की है उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं हैं बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है

    बिरोल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है और यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इसके परिणाम बेहद व्यापक होंगे उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है जिससे कई देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी

    उन्होंने खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत पर जोर दिया जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है लेकिन मौजूदा तनाव के कारण यहां से शिपिंग प्रभावित हो रही है जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है

    आईईए प्रमुख ने यह भी चेतावनी दी कि इस संकट का असर किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि हर देश इसकी चपेट में आएगा उन्होंने कहा कि चाहे विकसित देश हों या विकासशील सभी को इस ऊर्जा संकट के प्रभाव का सामना करना पड़ेगा

    इसी बीच ईरान की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है और वहां से समुद्री यातायात जारी है हालांकि तनावपूर्ण हालात के चलते सुरक्षा उपायों को सख्त किया गया है जिससे शिपिंग की गति प्रभावित हुई है

    आईईए ने पहले भी सरकारों और नागरिकों को ऊर्जा खपत कम करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं इनमें घर से काम करना अनावश्यक यात्रा से बचना और ऊर्जा की बचत करने वाले आधुनिक उपाय अपनाना शामिल है इन कदमों का उद्देश्य ऊर्जा की मांग को कम करना और संकट के प्रभाव को सीमित करना है

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा यह स्थिति वैश्विक मंदी के खतरे को भी जन्म दे सकती है

    फतिह बिरोल ने अपने बयान में यह भी कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष वैश्विक ऊर्जा संकट को और गहरा कर रहा है और यदि समय रहते इसका समाधान नहीं हुआ तो इसके प्रभाव आने वाले समय में और अधिक गंभीर हो सकते हैं

    इस प्रकार पश्चिम एशिया का यह तनाव अब केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष न रहकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम बन गया है जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है

  • टेक दुनिया में बड़ा बदलाव! सैमसंग और एप्पल के बीच फाइल ट्रांसफर अब और हारने

    टेक दुनिया में बड़ा बदलाव! सैमसंग और एप्पल के बीच फाइल ट्रांसफर अब और हारने


    नई दिल्ली। टेक वर्ल्ड में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपने फाइल-शेयरिंग प्लेटफॉर्म क्विक शेयर को एयरड्रॉप के साथ कंपैटिबल बनाया है। इसका मतलब यह है कि अब क्लाइमेट और आईफोन ग्राहकों के बीच फाइल शेयर करना पहले कहीं और आसान हो जाएगा।

    गैलेक्सी S26 उपभोक्ता को मिलेगा पहला फायदा

    यह नई सुविधा सुविधा Galaxy S26 सीरीज उपभोक्ताओं के लिए शुरू की गई है। इस अपडेट के बाद गैलेक्सी उपभोक्ता सीधे आईफोन उपभोक्ताओं के साथ फोटो, वीडियो, कॉन्टैक्ट और अन्य चीजें साझा कर सकते हैं। पहले यह संभव नहीं था, क्योंकि दोनों प्लेटफॉर्म अलग-अलग सिस्टम पर काम करते थे।

    कैसे काम करें यह विशेषता?

    क्विक शेयर और एयरड्रॉप दोनों ही रॉकेट और रॉकेट डिटेक्शन तकनीक पर आधारित हैं। अब इन दोनों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (पारस्पर काम करने की क्षमता) जोड़ दिया गया है, जिससे अलग-अलग ऑपरेटिंग सिस्टम के उपकरण भी आसानी से जुड़ सकते हैं।

    कंपनी के अनुसार:

    शुरुआत में यह फीचर गैलेक्सी S26 पर उपलब्ध होगा
    बाद में इसे अन्य बाज़ारों तक भी विस्तारित किया जाएगा
    अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में इसकी शुरुआत सबसे पहले होगी
    कार से घर नियंत्रण: नई स्मार्ट सेवा शुरू की गई

    सिर्फ फाइल शेयरिंग ही नहीं, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स ने हुंडई मोटर ग्रुप के साथ मिलकर एक नई “कार-टू-होम” सर्विस भी लॉन्च की है। इस सेवा के माध्यम से उपभोक्ता स्मार्टथिंग्स प्लेटफॉर्म का उपयोग करके अपनी कार से ही घर के उपकरणों को नियंत्रित कर सकते हैं।

    उदाहरण:

    घर पहुंचने से पहले एसी और लाइट ऑन करें
    बाहरी व्यवसाय ही गैर-जरूरी सुपरमार्केट बंद
    रोबोटिक रॉकेट लॉन्चर को चालू करना
    यह सुविधा 2022 के बाद हुंडई और किआ में उपलब्ध है।

    नवरात्र एक्सपीरियंस में बड़ा बदलाव

    इस कदम को टेक और इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से एप्पल एंड्रॉइड के बीच फाइल शेयरिंग एक बड़ी समस्या बनी हुई है। अब इस इंटरऑपरेबिलिटी से उपभोक्ता को अलग-अलग इकोसिस्टम के बावजूद भी सहज अनुभव मिलेगा।

  • 60 तक खेल सकता हूं, MS Dhoni ने IPL भविष्य पर दिया बड़ा संकेत, फैंस में जबरदस्त उत्साह

    60 तक खेल सकता हूं, MS Dhoni ने IPL भविष्य पर दिया बड़ा संकेत, फैंस में जबरदस्त उत्साह


    नई दिल्ली। आईपीएल 2026 से पहले चेन्नई सुपर किंग्स के एक फैन इवेंट में एम.एस. धोनी ने अपने रिटायरमेंट को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने एक बार फिर चर्चाओं को तेज कर दिया। 44 वर्षीय धोनी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह 60 साल की उम्र तक भी आईपीएल खेल सकते हैं। उनके इस बयान से स्टेडियम में मौजूद फैंस जोश से भर गए।

    चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान अभिनेता शिवकार्तिकेयन ने धोनी से कहा कि वह रिटायरमेंट की बातों को नजरअंदाज कर लंबे समय तक खेलते रहें। इस पर धोनी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, मुश्किल होगा लेकिन कोशिश कर सकता हूं। इसके बाद पूरा स्टेडियम ‘धोनी-धोनी’ के नारों से गूंज उठा। इस पल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    आईपीएल इतिहास में एम.एस. धोनी का नाम सबसे सफल खिलाड़ियों में शुमार है। उन्होंने अब तक 278 मैचों में 5439 रन बनाए हैं और चेन्नई सुपर किंग्स को 5 बार खिताब दिलाया है। आईपीएल 2026 उनका 19वां सीजन होगा। हालांकि, उन्होंने 2024 से पहले कप्तानी छोड़ दी थी और टीम की जिम्मेदारी ऋतुराज गायकवाड़ को सौंप दी गई थी।

    क्या होगा आखिरी सीजन?
    धोनी के भविष्य को लेकर अटकलें लगातार जारी हैं। चेन्नई सुपर किंग्स के CEO काशी विश्वनाथन ने संकेत दिए हैं कि धोनी 2026 का सीजन खेलेंगे, लेकिन उनकी भूमिका पहले से अलग हो सकती है।

    पिछले कुछ सीजन में उनके रोल में बदलाव साफ देखा गया है अब वह कप्तान नहीं हैं, निचले क्रम में फिनिशर की भूमिका निभाते हैं और इम्पैक्ट प्लेयर नियम के कारण उनकी भागीदारी सीमित हो गई है।

    टीम में नए खिलाड़ियों के आने से विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी भविष्य में साझा की जा सकती है, लेकिन धोनी का अनुभव अब भी टीम के लिए बेहद अहम बना हुआ है। खासकर तब, जब 2025 में टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था।

    नई शुरुआत या विदाई का संकेत?

    आईपीएल 2026 चेन्नई सुपर किंग्स के लिए बदलाव का साल हो सकता है और संभव है कि यह एम.एस. धोनी के करियर का आखिरी अध्याय भी साबित हो। हालांकि फैंस की उम्मीद अब भी कायम है कि ‘माही’ एक बार फिर मैदान पर अपना जादू दिखाएंगे, चाहे वह 60 तक खेलने की बात मजाक में ही क्यों न हो।

  • Finance Bill 2026-27 आज पेश, कॉर्पोरेट कानून में भी बड़े बदलाव की तैयारी

    Finance Bill 2026-27 आज पेश, कॉर्पोरेट कानून में भी बड़े बदलाव की तैयारी


    नई दिल्ली। देश की आर्थिक दिशा तय करने वाले अहम कदम के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पेश किया। यह दोनों विधेयक आने वाले वित्त वर्ष के लिए सरकार की नीतियां, बजट नीतियां और कॉर्पोरेट नीतियां में सुधार को लागू करने की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

    वित्त विधेयक 2026-27: बजट लागू करने की दिशा में अहम कदम

    वित्त विधेयक 2026-27 का मुख्य उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट नीतियों को कानूनी रूप देना है। इसके जरिए सरकार कराधान, खर्च और आर्थिक नीतियों को लागू करेगी। संसद में इस पर चर्चा होगी और इसे पारित कराने की कोशिश की जाएगी। यह विधेयक देश की आर्थिक रणनीति, विकास योजनाओं और राजकोषीय संतुलन को सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

    कॉर्पोरेट कानून में बदलाव की तैयारी

    इसके साथ ही निर्मला सीतारमण कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक 2026 भी पेश किया, जिसमें कंपनी अधिनियम 2013 और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम 2008 में बदलाव प्रस्तावित हैं। इन संशोधनों का उद्देश्य कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मजबूत करना, हस्तांतरण बढ़ाना और कंपनियों के संचालन को अधिक पक्षपाती बनाना है।

    कंपनी अधिनियम कंपनियों के गठन, प्रबंधन और बंद होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है, जबकि एलएलपी अधिनियम संयंत्रों को सीमित दायित्वों के साथ काम करने का अवसर देता है। नए संशोधनों से निवेश माहौल को और बेहतर बनाने की उम्मीद है।

    IBC संशोधन का रास्ता भी साफ

    सरकार ने पहले ही दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) में संशोधन को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को इसे हरी झंडी दी थी, जिससे मौजूदा सत्रों में IBC संशोधन विधेयक पेश होने का रास्ता साफ हो गया है।

    संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित बदलाव

    प्रस्तावित संशोधन बैजयंत पांडा की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की सिफारिशों पर आधारित हैं। समिति ने दिसंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें दिवालियापन प्रक्रिया को तेज करने और देरी को कम करने पर जोर दिया गया था।

    समिति ने सुझाव दिया:

    दिवालियापन मामलों के समाधान के लिए सख्त समयसीमा
    लेनदारों की समिति (CoC) को अधिक अधिकार
    सीमा पार दिवालियापन के लिए नया ढांचा
    निवेश और अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

    इन विधेयकों के लागू होने से भारत में वित्तीय माहौल और मजबूत होने की उम्मीद है। तेज दिवालियापन प्रक्रिया और बेहतर कॉर्पोरेट गवर्नेंस से भारतीयों का भरोसा बढ़ेगा और आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

  • वित्त विधेयक और कॉर्पोरेट कानून संशोधन 2026-27 पर सरकार का बड़ा कदम संसद में पेश होंगी अहम नीतियां

    वित्त विधेयक और कॉर्पोरेट कानून संशोधन 2026-27 पर सरकार का बड़ा कदम संसद में पेश होंगी अहम नीतियां


    नई दिल्ली:
    केंद्र सरकार आर्थिक और कॉर्पोरेट ढांचे में बड़े सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman सोमवार को संसद में वित्त विधेयक 2026-27 और कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक 2026 पेश करेंगी इन विधेयकों का उद्देश्य देश की वित्तीय प्रणाली को मजबूत बनाना और व्यावसायिक वातावरण को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है

    वित्त विधेयक 2026-27 का मुख्य उद्देश्य आगामी वित्तीय वर्ष के लिए केंद्र सरकार की वित्तीय योजनाओं और कर संबंधी प्रावधानों को लागू करना है यह विधेयक सरकार की बजटीय घोषणाओं को कानूनी रूप देने के साथ-साथ आर्थिक नीतियों को व्यवहार में लाने का आधार प्रदान करता है इसके पारित होने के बाद देश की राजकोषीय व्यवस्था और विकास योजनाओं को नई दिशा मिलेगी

    इसके साथ ही कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक 2026 भी पेश किया जाएगा जिसमें कंपनी अधिनियम 2013 और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम 2008 में बदलाव का प्रस्ताव है यह विधेयक कॉर्पोरेट गवर्नेंस को बेहतर बनाने निवेशकों के हितों की रक्षा करने और कंपनियों के संचालन को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

    कंपनी अधिनियम कंपनियों के गठन संचालन और विघटन को नियंत्रित करता है जबकि सीमित देयता भागीदारी अधिनियम साझेदारों को सीमित देयता के साथ एक लचीला ढांचा प्रदान करता है इन दोनों कानूनों में प्रस्तावित संशोधन व्यवसायों के लिए अधिक अनुकूल और आधुनिक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है

    इसके अतिरिक्त सरकार ने हाल ही में दिवालियापन और दिवालिया संहिता में संशोधन को मंजूरी दी है जिससे देश में संकटग्रस्त कंपनियों के समाधान की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है इस पहल का उद्देश्य देरी को कम करना और वित्तीय अनुशासन को मजबूत करना है

    इस संबंध में एक संसदीय समिति ने भी महत्वपूर्ण सिफारिशें दी हैं जिसका नेतृत्व भाजपा सांसद Baijayant Panda ने किया था समिति ने मौजूदा दिवालियापन प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए यह सुझाव दिया कि मामलों के निपटान के लिए सख्त समयसीमा निर्धारित की जाए इससे समाधान प्रक्रिया तेज और अधिक प्रभावी हो सकेगी

    समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि लेनदारों की समिति को अधिक अधिकार दिए जाएं ताकि वे निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी ला सकें और ऋणदाताओं के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके इसके अलावा सीमा पार दिवालियापन के लिए एक समर्पित ढांचे की सिफारिश की गई है जिससे अंतरराष्ट्रीय परिसंपत्तियों और विदेशी लेनदारों से जुड़े मामलों को बेहतर तरीके से संभाला जा सके

    इन विधेयकों और संशोधनों का उद्देश्य भारत के वित्तीय और कॉर्पोरेट ढांचे को अधिक मजबूत पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाना है यदि ये प्रस्ताव पारित हो जाते हैं तो आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक नीतियों और निवेश वातावरण पर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल सकता है

  • सोना-चांदी धड़ाम! कीमतों में बड़ी गिरावट, 14,500 रुपये तक सस्ता हुआ गोल्ड

    सोना-चांदी धड़ाम! कीमतों में बड़ी गिरावट, 14,500 रुपये तक सस्ता हुआ गोल्ड


    नई दिल्ली। सोने और चांदी के जिले में सोमवार को आंशिक ढलान वाला दृश्य मिला, जिसने अवशोषण को चौंका दिया। घरेलू बाजार बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोना और चांदी दोनों में तेजी से बिकवाली दर्ज की गई। सोने का दाम 1.37 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे चला गया है, जबकि चांदी का दाम भी 2.13 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर से नीचे चला गया है। यह गिरावट हाल के समय की सबसे बड़ी गिरावट में से एक पैसा जा रही है।

    MCX पर सोने- पानी के भाव में भारी गिरावट

    2 अप्रैल 2026 को फॉक्सवैगन्स की कीमत 7,619 रुपए पर पहुंच गई। कारोबार के दौरान सोना 1,36,403 रुपये के रु. तक पहुंच गया, जबकि ऊपरी स्तर 1,40,158 रुपये रहा। वहीं चांदी के 5 मई 2026 के दशक में और भी तेज गिरावट देखने को मिली। चांदी का भाव 14,495 रुपये पर 6.39 प्रतिशत टूटकर 2,12,277 रुपये पर आ गया। इंट्रा-डे में चांदी 2,11,086 रुपये तक।

    अंतर्राष्ट्रीय इस्टेट का दिखावा भी असरदार

    वैश्विक संस्था में भी मंदी का रुख देखने को मिला। COMEX (कॉमेक्स) पर सोना 5.50 प्रतिशत टूटकर 4,359 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया, जबकि सिल्वर 6.65 प्रतिशत टूटकर 65.08 डॉलर प्रति शेयर पर पहुंच गया। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस गिरावट का सीधा असर भारतीय उद्योग पर भी डाला गया है।

    इतनी बड़ी गिरावट क्यों?

    विशेषज्ञ के अनुसार, इस गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। मोती लाल ओसवाल के कमोडिटी पसन्द मानव मोदी का कहना है कि अमीर भाई-बहनों ने सोने की मांग को कमजोर कर दिया है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तनाव ने बाजार में अनिश्चितता पैदा कर दी है।

    राजनीतिक तनाव और असहमति की रणनीति

    हालांकि आम तौर पर ग्लोबल टेंशन के समय सोना सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार की तस्वीर अलग नजर आती है। भीष्म रुचि की आशा और डॉलर की रेस्तरां के विद्यार्थियों ने सोने से दूरी बना ली। वहीं मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट ने ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, जिसका असर कमोडिटी बाजार पर भी पड़ा है।

    आगे क्या रहेगा रुख?

    विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आने वाले सोने और चांदी के सिक्कों में दिन जारी कर सकते हैं। संस्था की नजरें अब सांख्यिकी के आंकड़े, मध्याह्न के बिंदु और वैश्विक राजनीतिक संकट पर रहेंगे। यदि हितधारकों के पास स्वामित्व है, तो सोने में दबाव बनाया जा सकता है।

  • पश्चिम एशिया तनाव पर IEA प्रमुख की चेतावनी, बोले-‘वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा’

    पश्चिम एशिया तनाव पर IEA प्रमुख की चेतावनी, बोले-‘वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा खतरा’


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने अब पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। International Energy Agency (आईईए) के प्रमुख Fatih Birol ने साफ कहा है कि यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। Iran, United States और Israel के बीच जारी टकराव का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में साफ दिखने लगा है। ऑस्ट्रेलिया में एक कार्यक्रम के दौरान बिरोल ने कहा कि दुनिया इस समय एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रही है और अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो कोई भी देश इसके प्रभाव से बच नहीं पाएगा।

    होर्मुज स्ट्रेट बना संकट की जड़, तेल सप्लाई पर असर

    इस पूरे संकट का सबसे बड़ा केंद्र Strait of Hormuz है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। दुनिया भर में खपत होने वाले करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है और रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल यहां से गुजरता है। मौजूदा तनाव के कारण इस मार्ग से शिपिंग प्रभावित हुई है, जिससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में अस्थिरता बढ़ गई है। हालांकि ईरान ने दावा किया है कि स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं है और नेविगेशन जारी है, लेकिन जमीनी हालात निवेशकों और देशों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं।

    महंगाई और आर्थिक दबाव बढ़ने के संकेत

    तेल सप्लाई में रुकावट का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने से ट्रांसपोर्ट, उत्पादन और रोजमर्रा की चीजों की लागत बढ़ जाती है। बिरोल ने इसे ग्लोबल ऑयल मार्केट के इतिहास की सबसे बड़ी सप्लाई बाधाओं में से एक बताया है। उन्होंने कहा कि अगर यह स्थिति बनी रहती है, तो ऊर्जा संकट गहरा सकता है और दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं दबाव में आ सकती हैं।

    कोई देश नहीं बचेगा असर से

    आईईए प्रमुख ने स्पष्ट कहा कि यह संकट किसी एक या दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका असर विकसित और विकासशील-दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा। भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जहां महंगाई और चालू खाते के घाटे पर असर पड़ सकता है।

    IEA की सलाह: ऊर्जा बचत ही समाधान

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आईईए ने सरकारों, कंपनियों और आम लोगों के लिए कुछ सुझाव भी दिए हैं। इसमें जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम अपनाना, अनावश्यक हवाई यात्रा से बचना और ईंधन की खपत कम करना शामिल है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक कुकिंग और अन्य आधुनिक विकल्पों को अपनाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि एलपीजी और तेल पर निर्भरता कम की जा सके।