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  • सोनीपत में खेत के कमरे में 32 वर्षीय महिला की हत्या, पति पर शराब के नशे में कस्सी से हमला करने का आरोप

    सोनीपत में खेत के कमरे में 32 वर्षीय महिला की हत्या, पति पर शराब के नशे में कस्सी से हमला करने का आरोप

    नई दिल्ली: हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव रहमाणा में 32 वर्षीय महिला की हत्या का मामला सामने आया है। महिला की पहचान राजवंती के रूप में हुई है। वह अपने पति और करीब 11 साल के बेटे के साथ एक किसान के खेत में बने कमरे में रह रही थी। आरोप है कि घरेलू विवाद के चलते उसके पति नरेश ने शराब के नशे में उस पर धारदार कृषि उपकरण कस्सी से हमला कर दिया। गंभीर चोटों के कारण महिला की मौत हो गई। घटना के बाद से आरोपी पति की तलाश की जा रही है।

    राजवंती और उसका पति नरेश मूल रूप से बिहार के मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं। दोनों अपने बेटे के साथ सोनीपत के रहमाणा गांव में किसान राजेंद्र के खेत में बने कमरे में रह रहे थे। बताया गया है कि पति-पत्नी के बीच अक्सर घरेलू मामलों को लेकर विवाद होता रहता था। ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों शराब पीने के आदी थे और उनके बीच आए दिन कहासुनी होती थी।

    आरोप है कि घटना के समय नरेश शराब के नशे में था। घरेलू विवाद के दौरान उसने कथित तौर पर कस्सी से राजवंती पर हमला कर दिया। महिला के चेहरे, सिर और पेट पर कई वार किए गए। हमले में उसे गंभीर चोटें आईं, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में मामले को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    महिला की हत्या की सूचना मिलने पर मोहाना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और वारदात से जुड़े तथ्यों की पड़ताल के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को भी बुलाया गया।

    पुलिस की शुरुआती जांच में हत्या के पीछे घरेलू विवाद की बात सामने आई है। प्रारंभिक जानकारी के आधार पर महिला के पति नरेश पर हत्या करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस घटनाक्रम की सभी परिस्थितियों की जांच कर रही है और आरोपी की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

    पुलिस प्रवक्ता रवींद्र कुमार के मुताबिक, गांव रहमाणा से महिला की हत्या की सूचना मिली थी। शुरुआती जांच में महिला के पति पर हत्या का आरोप सामने आया है। महिला पर किसी तेजधार हथियार से हमला किए जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपी पति की तलाश की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान वारदात से जुड़े तथ्यों, घरेलू विवाद की परिस्थितियों और महिला की मौत के कारणों की पड़ताल की जा रही है। फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है।

  • मौसम के बदले तेवर: हेमकुंड साहिब में बर्फबारी, यूपी में सड़कों पर पानी, हिमाचल-उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट

    मौसम के बदले तेवर: हेमकुंड साहिब में बर्फबारी, यूपी में सड़कों पर पानी, हिमाचल-उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट

    नोएडा। मानसून की विदाई के बीच देश के उत्तर और मध्य हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली है। उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब में बर्फबारी से ठंड बढ़ गई है, वहीं उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश से कई शहरों में जलभराव की स्थिति है। हिमाचल प्रदेश में भी बादल सक्रिय हैं और कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड में तो 26 और 27 सितंबर के लिए कई जिलों में रेड और ऑरेंज अलर्ट है।

    यूपी में बारिश से जनजीवन प्रभावित, 19 जिलों में स्कूल बंद
    उत्तर प्रदेश में बृहस्पतिवार आधी रात के बाद शुरू हुआ बारिश का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहने के आसार हैं। प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में कहीं धीमी तो कहीं तेज बारिश हुई। लगातार बारिश से सड़कों पर पानी भर गया और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    मौसम विभाग ने श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर में अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके अलावा 62 जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश का अलर्ट है।

    बारिश के कारण मानसून सीजन में प्रदेश में रह गया करीब चार फीसदी बारिश का अंतर भी पूरा हो गया है। हालात को देखते हुए शनिवार को 19 जिलों में स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया गया है। नर्सरी से लेकर डिग्री कॉलेज तक के शिक्षण संस्थान प्रभावित रहेंगे। चार जिलों में कक्षा आठ तक और अन्य जिलों में कक्षा 12 तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर सिंह ने भी स्कूल बंद रखने के प्रशासन के फैसले का समर्थन किया है।

    बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बढ़ी बारिश
    वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने नए मौसम तंत्र के पश्चिमी विक्षोभ के साथ मिलने से उत्तर प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज हुई हैं। शनिवार को भी बारिश का दायरा और बढ़ने की संभावना है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तापमान गिरा है। कई जगह अधिकतम तापमान सामान्य से नीचे पहुंच गया है।

    खेतों में बिछी धान की फसल
    लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी धान समेत दूसरी फसलें गिर गई हैं। जौनपुर, मिर्जापुर और आजमगढ़ में धान की फसल बिछने की सूचना है। इससे किसानों को फसल खराब होने और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।

    हिमाचल में चार दिन बारिश, 27 सितंबर को सबसे ज्यादा असर
    हिमाचल प्रदेश में भी मौसम का मिजाज बदल गया है। प्रदेश में अगले चार दिन बारिश का दौर रहने का अनुमान है। राजधानी शिमला में सुबह धूप खिली, लेकिन दोपहर होते-होते घने बादल छा गए।

    मौसम विभाग के अनुसार 26 सितंबर की शाम या रात से 29 सितंबर की सुबह तक दक्षिण-पूर्वी हिमाचल और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है। 27 सितंबर को बारिश की तीव्रता सबसे अधिक रहने का पूर्वानुमान है।

    मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के मुताबिक सिरमौर, शिमला, सोलन, मंडी और बिलासपुर के कुछ हिस्सों में 26 सितंबर की शाम से 29 सितंबर की सुबह तक व्यापक बारिश हो सकती है। इस दौरान कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ अंधड़ और बिजली चमकने की भी आशंका है।

    29 सितंबर को भी कई हिस्सों में बारिश हो सकती है, जबकि 30 सितंबर से 2 अक्टूबर तक कुछ स्थानों पर हल्की बारिश का अनुमान है। पिछले 24 घंटे में धर्मशाला में 46.0 मिमी, भरेरी में 18.2 मिमी, धौलाकुआं में 11.0 मिमी और भरवाईं में 8.0 मिमी बारिश दर्ज की गई।

    हिमाचल में किस दिन कौन सा अलर्ट
    27 सितंबर: सिरमौर में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। बिलासपुर, मंडी, शिमला, सोलन और किन्नौर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है।

    28 सितंबर: शिमला, सोलन और सिरमौर में येलो अलर्ट रहेगा।
    27 और 28 सितंबर: ऊना, हमीरपुर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, किन्नौर और स्पीति के कुछ हिस्सों में मध्यम बारिश की संभावना है।
    26 से 28 सितंबर के बीच शिमला, सोलन और सिरमौर तथा 27 सितंबर को किन्नौर, बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी में कुछ स्थानों पर 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
    26 सितंबर को शिमला, सिरमौर और किन्नौर में कई जगह हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर तेज बारिश का अनुमान है। कुल्लू, कांगड़ा, मंडी और लाहौल-स्पीति में हल्की बारिश हो सकती है।

    उत्तराखंड में हेमकुंड साहिब बर्फ से ढका, कई जिलों में रेड अलर्ट
    उत्तराखंड के हेमकुंड साहिब में मौसम खराब होने के बाद लगातार बर्फबारी हो रही है। बर्फबारी के चलते धाम में ठंड काफी बढ़ गई है। इसी बीच प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हुआ है।

    मौसम विज्ञान केंद्र ने 26 से 28 सितंबर तक बारिश की गतिविधियों को लेकर चेतावनी जारी की है। मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सीएस तोमर के अनुसार मौजूदा मौसम प्रणालियों के कारण 26 और 27 सितंबर को पर्वतीय जिलों के कुछ हिस्सों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    दक्षिण ओडिशा और उससे सटे दक्षिण छत्तीसगढ़ के ऊपर बना अवदाब पिछले छह घंटे में 15 किमी प्रति घंटे की गति से उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ा है। इसके प्रभाव से उत्तराखंड में बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है।

    26 सितंबर को इन जिलों में रेड अलर्ट
    बागेश्वर, नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत और ऊधमसिंह नगर के कुछ हिस्सों में भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट है। वहीं देहरादून, पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और अल्मोड़ा में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    27 सितंबर को भी कई जिलों में खतरा
    27 सितंबर को देहरादून, टिहरी, हरिद्वार और पौड़ी में भारी से बहुत भारी तथा कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट है।

    नैनीताल, उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का ऑरेंज अलर्ट है।

    28 सितंबर को उत्तरकाशी, हरिद्वार और देहरादून में कुछ स्थानों पर भारी बारिश और गर्जन के साथ तेज बारिश का दौर आने की संभावना है।

    भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा, यात्रा में सावधानी की अपील
    मौसम विभाग ने संवेदनशील इलाकों में हल्के से मध्यम भूस्खलन और चट्टानें गिरने से सड़क व राजमार्ग बाधित होने की आशंका जताई है। बिजली और पानी जैसी सामुदायिक सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

    इसके अलावा नदियों का जलस्तर बढ़ने, नालों में अचानक बाढ़ आने और निचले इलाकों में जलभराव का खतरा है। कच्चे मकानों, पुलों और निर्माणाधीन भवनों को भी नुकसान पहुंच सकता है। चारधाम यात्रा, पर्वतारोहण अभियान और हेली सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है।

    प्रशासन ने तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को मौसम को देखते हुए सतर्क रहने और जरूरी होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी है। लोगों से नदी-नालों और उफनती धाराओं में जाने, तैरने या नौका विहार से बचने को कहा गया है। भारी बारिश के दौरान घर के भीतर रहने और सक्रिय भूस्खलन वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है।

    गंगोत्री-यमुनोत्री यात्रा अस्थायी रूप से रोकी
    उत्तरकाशी जिले में रेड अलर्ट के मद्देनजर प्रशासन ने गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर हीना और डोबाटा होल्डिंग पॉइंट्स पर यात्रियों को आगे जाने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि बदरीनाथ-केदारनाथ यात्रा सुचारू है।

    जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र और स्मार्ट कंट्रोल रूम को अलर्ट मोड पर रखा गया है। सभी तहसीलों से बारिश और भूस्खलन की सूचनाएं लगातार जुटाई जा रही हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की लाइव सीसीटीवी से भी निगरानी की जा रही है।

    एनएच, बीआरओ, पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को मशीनरी और मैनपावर तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं। सड़क बंद होने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द खोलने को कहा गया है। सभी तहसीलों को भी अलर्ट पर रहने और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल देने के निर्देश हैं।

  • अयोध्या के राम-जानकी मंदिर में चोरी, अष्टधातु की प्राचीन प्रतिमाएं ले गए चोर, पूजा का सामान भी गायब

    अयोध्या के राम-जानकी मंदिर में चोरी, अष्टधातु की प्राचीन प्रतिमाएं ले गए चोर, पूजा का सामान भी गायब

    अयोध्या। धर्मनगरी अयोध्या में प्राचीन श्री राम-जानकी मंदिर को चोरों ने निशाना बनाया। टकसाल चौक स्थित मंदिर में ताला तोड़कर चोर अष्टधातु की श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण जी की प्राचीन मूर्तियां समेत पूजा का सामान, लोटा और घंटा भी ले गए। घटना का पता 25 सितंबर की शाम उस समय चला, जब पुजारी आरती के लिए मंदिर पहुंचे।

    आरती के लिए पहुंचे पुजारी तो टूटा मिला ताला
    चोरी की वारदात चौकी चौक क्षेत्र के टकसाल चौक स्थित प्राचीन श्री राम-जानकी मंदिर में हुई। यह मंदिर रामयश कीर्तन सभा परिसर में है और पुराने प्रभात सिनेमा के नाम से भी इस स्थान की पहचान बताई गई है।

    25 सितंबर 2026 की शाम पुजारी जब मंदिर में आरती के लिए पहुंचे तो मुख्य द्वार का ताला टूटा हुआ मिला। अंदर जाकर देखने पर मंदिर से प्राचीन अष्टधातु की श्रीराम, जानकी और लक्ष्मण जी की मूर्तियां गायब मिलीं। इसके अलावा पूजा में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान, लोटा और घंटा भी नहीं मिला।

    अध्यक्ष ने एक व्यक्ति पर जताई आशंका
    घटना के बाद रामयश कीर्तन सभा के अध्यक्ष सुनील कुमार त्रिवेदी ने चौकी चौक पुलिस को लिखित प्रार्थना पत्र दिया। तहरीर में उन्होंने दिल्ली दरवाजा निवासी लवकुश गुप्ता, पुत्र स्व. मिन्नू गुप्ता, पर वारदात में शामिल होने की आशंका जताई है।

    हालांकि, आरोपी पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस मामले में तहरीर में लगाए गए आरोपों और अन्य संभावित पहलुओं की जांच कर रही है।

    सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
    तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि चोरी की वारदात से जुड़े सुराग मिल सकें। पुलिस नामजद व्यक्ति की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश भी दे रही है।

    मंदिर से प्राचीन प्रतिमाओं की चोरी के बाद स्थानीय स्तर पर भी घटना को लेकर चिंता है। अब पुलिस के सामने मूर्तियों को बरामद करने के साथ वारदात में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की चुनौती है।

  • यूपी में 36 घंटे बाद मौसम सामान्य होने के आसार, 63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश, 117 मकान क्षतिग्रस्त

    यूपी में 36 घंटे बाद मौसम सामान्य होने के आसार, 63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश, 117 मकान क्षतिग्रस्त


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लगातार 48 घंटे से हो रही भारी बारिश और खराब मौसम के बीच प्रशासन को अलर्ट मोड पर रखा गया है। नेपाल में भारी बारिश के चलते सीमावर्ती जिलों में नदियों के जलस्तर पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 36 घंटे बाद प्रदेश में मौसम के सामान्य होने की संभावना है।

    प्रभावित परिवारों से मिलेंगे अधिकारी
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राहत और बचाव व्यवस्था सक्रिय रखी गई है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने शनिवार को प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों को अतिवृष्टि से प्रभावित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मिलने और उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति में आमजन की जान-माल की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। जिलाधिकारियों को स्वयं फील्ड में रहकर हालात का आकलन करने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तुरंत निर्णय लेने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    नेपाल सीमा पर विशेष सतर्कता
    नेपाल में हो रही भारी बारिश को देखते हुए पूर्वी उत्तर प्रदेश समेत सीमावर्ती जिलों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। प्रशासन को नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और बाढ़ राहत एवं बचाव दलों को अलर्ट मोड पर रखने के लिए कहा गया है।

    राहत आयुक्त ने अधिकारियों से कहा है कि किसी भी आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य में देरी नहीं होनी चाहिए। प्रभावित इलाकों में टीमें लगातार भ्रमण कर स्थिति की निगरानी करेंगी।

    36 घंटे बाद राहत मिलने की उम्मीद
    भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अगले 36 घंटे बाद प्रदेश में मौसम सामान्य होने की संभावना है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बेहद जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें और मौसम खराब होने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहें।

    किसी भी आपदा या आपात स्थिति में तत्काल सहायता के लिए राहत हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की वेबसाइट पर भी 1070 हेल्पलाइन दर्ज है।

    63 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    राहत आयुक्त के मुताबिक, प्रदेश के 63 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटे में पूरे प्रदेश में सामान्य से 19 गुना अधिक वर्षा हुई। सबसे ज्यादा अंतर फर्रुखाबाद में रहा, जहां सामान्य से 200 गुना अधिक बारिश दर्ज की गई। कानपुर नगर में यह आंकड़ा 160 गुना, जबकि कन्नौज, कानपुर देहात और हरदोई में सामान्य से 130 गुना अधिक रहा।

    भदोही, देवरिया और अलीगढ़ में सामान्य बारिश दर्ज हुई, जबकि गाजीपुर में सबसे कम बारिश हुई। वहीं बागपत, गाजियाबाद, मथुरा, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली, गौतमबुद्धनगर और हापुड़ में बारिश दर्ज नहीं हुई।

    117 मकान क्षतिग्रस्त
    पिछले 48 घंटे में अतिवृष्टि और आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में 117 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है। राहत आयुक्त ने संबंधित जिलाधिकारियों को प्रभावित परिवारों को नियमानुसार अनुमन्य सहायता राशि तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    अधिकारियों को बारिश से हुए नुकसान का तत्काल सर्वे और आकलन कराने को भी कहा गया है, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द राहत दी जा सके। फील्ड अधिकारियों को फसलों को हुए नुकसान का भी त्वरित आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

    फायर सर्विस और आपदा मित्रों की मदद लेने के निर्देश
    प्रशासन को जरूरत के अनुसार फायर सर्विस, पीएसी, सिविल डिफेंस, होमगार्ड और आपदा मित्रों की सेवाएं लेने के निर्देश दिए गए हैं। सभी राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखते हुए प्रभावित क्षेत्रों में लगातार भ्रमण और निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

    जिलाधिकारियों को खुद फील्ड में रहकर स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने भी बारिश प्रभावित जिलों में अधिकारियों को सतर्क रहने और जरूरत के मुताबिक स्थानीय स्तर पर स्कूलों समेत गैर-जरूरी सेवाओं के संबंध में निर्णय लेने को कहा है।

    कच्चे मकानों और जलभराव वाले इलाकों पर नजर
    प्रशासन ने लेखपालों और ग्राम विकास अधिकारियों को कच्चे मकानों के आसपास जलभराव की स्थिति पर तत्काल नजर रखने को कहा है। जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

    जरूरत पड़ने पर ऐसे परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि खराब मौसम के दौरान आमजन की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

  • ग्वालियर में चार राज्यों के जजों का सम्मेलन AI और डिजिटल सबूतों पर मंथन जस्टिस मिश्रा ने बताई नई चुनौती

    ग्वालियर में चार राज्यों के जजों का सम्मेलन AI और डिजिटल सबूतों पर मंथन जस्टिस मिश्रा ने बताई नई चुनौती


    ग्वालियर। ग्वालियर में मध्य प्रदेश राज्य न्यायिक अकादमी की ओर से क्षेत्रीय न्यायिक सम्मेलन की शुरुआत हुई। दो दिवसीय सम्मेलन में मध्य प्रदेश के साथ महाराष्ट्र गुजरात और राजस्थान से न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने न्यायिक शिक्षा और बदलती तकनीक के बीच तालमेल की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि न्यायदान सिर्फ कानून की धाराओं को जानने तक सीमित नहीं है बल्कि अदालत में न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों और उनकी वास्तविक परिस्थितियों को समझना भी जरूरी है।

    उद्घाटन सत्र में न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि वर्तमान दौर में न्यायपालिका के सामने कई ऐसी परिस्थितियां सामने आ रही हैं जिनका सामना न्यायिक अधिकारियों ने अपने करियर के शुरुआती दौर में नहीं किया होगा। सोशल मीडिया यूट्यूब और डीपफेक जैसी तकनीकों ने वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर करने की चुनौती बढ़ा दी है। ऐसे में अदालतों के सामने पेश किए जाने वाले डिजिटल साक्ष्यों की विश्वसनीयता को समझना और उनकी जांच की प्रक्रिया से परिचित होना महत्वपूर्ण हो गया है।

    उन्होंने कहा कि तकनीक का इस्तेमाल अपराधों में भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे मामलों में साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ या कृत्रिम सामग्री तैयार करने की संभावनाओं को समझना न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। न्यायमूर्ति मिश्रा के अनुसार न्यायिक अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्यों की जटिलताओं और आधुनिक तकनीक के प्रभाव को समझने के लिए लगातार सीखते रहना होगा।

    न्यायमूर्ति मिश्रा ने न्यायिक शिक्षा को किसी निश्चित पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय बदलती परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अनुभव से यह पता चलता है कि अतीत में क्या हुआ है लेकिन शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसी परिस्थितियों से निपटने की क्षमता विकसित करना है जो पहले सामने नहीं आई हैं। बदलते समाज के साथ न्यायपालिका को भी अपनी सोच और समझ का दायरा लगातार बढ़ाना होगा।

    सम्मेलन में पुराने कानूनों की वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप व्याख्या और नए आपराधिक कानूनों के प्रभाव पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा DNA रिपोर्ट वॉयस सैंपल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और डिजिटल फुटप्रिंट जैसे साक्ष्यों को समझने के लिए न्यायिक अधिकारियों के तकनीकी प्रशिक्षण पर जोर दिया गया। फॉरेंसिक लैब पुलिस जांच और जेल व्यवस्था की कार्यप्रणाली को समझने के लिए फील्ड ट्रेनिंग की जरूरत पर भी विचार किया गया।

    न्यायिक प्रशिक्षण में Ethics Logic और Psychology जैसे विषयों को शामिल करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। साथ ही न्यायिक अधिकारियों को अपनी सीमाओं और पूर्वाग्रहों को पहचानकर लगातार सीखने की जरूरत बताई गई। सम्मेलन में निष्पक्षता समानता और संवेदनशीलता को न्यायिक प्रशिक्षण का अहम हिस्सा बनाने पर भी मंथन किया गया।

    मध्य प्रदेश में तीनों नए आपराधिक कानूनों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की पहल का भी उल्लेख किया गया। न्यायिक अकादमी में पारंपरिक प्रशिक्षण से आगे बढ़कर 360 डिग्री और इमर्सिव लर्निंग पर जोर देने की बात सामने आई। इसके साथ ही ADR और Mediation को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

    सम्मेलन में मध्य प्रदेश महाराष्ट्र गुजरात और राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश राज्य न्यायिक अकादमियों के निदेशक रजिस्ट्री अधिकारी और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी भी रही। सम्मेलन का मुख्य फोकस बदलती तकनीक नए कानून और आधुनिक दौर की न्यायिक चुनौतियों के अनुरूप अधिकारियों को तैयार करने पर रहा।

  • खुरैरी चौराहे पर दर्दनाक हादसा ट्रक ने बाइक को मारी टक्कर छात्र की मौके पर मौत चालक फरार

    खुरैरी चौराहे पर दर्दनाक हादसा ट्रक ने बाइक को मारी टक्कर छात्र की मौके पर मौत चालक फरार

    ग्वालियर । ग्वालियर में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में 17 वर्षीय छात्र की जान चली गई। मुरार थाना क्षेत्र के खुरैरी चौराहे के पास तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार दो छात्रों को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों छात्र बाइक से उछलकर हाईवे पर जा गिरे। इसी दौरान ट्रक का पहिया एक छात्र के सिर के ऊपर से गुजर गया। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में उसका साथी भी बुरी तरह घायल हुआ है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।

    मृतक छात्र की पहचान भिंड जिले के गोहद स्थित संतोष नगर निवासी लवकुश धवल के रूप में हुई है। लवकुश बालकृष्ण धवल का 17 वर्षीय बेटा था और कक्षा 12वीं में पढ़ाई कर रहा था। वह अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। परिवार में उसकी एक छोटी बहन है। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

    जानकारी के अनुसार शुक्रवार को लवकुश अपने दोस्त प्रशांत कुमार के साथ बाइक से बड़ागांव के पास खुरैरी में रहने वाले एक अन्य दोस्त से मिलने गया था। शाम को दोनों दोस्त से मिलकर बाइक से अपने घर लौट रहे थे। जैसे ही वे खुरैरी चौराहे के पास पहुंचे तभी पीछे से आए ट्रक क्रमांक RJ 11-GB 2235 के चालक ने तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाते हुए उनकी बाइक में टक्कर मार दी।

    हादसे के बाद दोनों छात्र सड़क पर गिर गए। लवकुश ट्रक के पहिए की चपेट में आ गया जबकि प्रशांत के सिर और दाहिने पैर में गंभीर चोटें आईं। घटना की सूचना मिलते ही मुरार थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों घायलों को जिला अस्पताल मुरार पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद लवकुश को मृत घोषित कर दिया। उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। शनिवार दोपहर जिला अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस में शव का पोस्टमार्टम कराया गया।

    हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से भागने लगा। पुलिस ने अन्य वाहन चालकों की मदद से ट्रक का पीछा किया। पुलिस को पीछे आता देखकर चालक ट्रक को रास्ते में छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने दुर्घटनाकारित ट्रक जब्त कर लिया है। अब आरोपी चालक की तलाश की जा रही है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और ट्रक से जुड़े दस्तावेजों की मदद से चालक तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    मुरार थाना टीआई मैना पटेल ने बताया कि सड़क हादसे में 17 वर्षीय छात्र की मौत हुई है जबकि उसका दोस्त गंभीर रूप से घायल है। ट्रक को जब्त कर लिया गया है और फरार चालक की तलाश जारी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के बाद एक परिवार ने अपना इकलौता बेटा खो दिया जबकि दूसरे परिवार में घायल छात्र के जल्द स्वस्थ होने की चिंता बनी हुई है।

  • आत्मनिर्भर बैटरी इकोसिस्टम के लिए सेकंड-लाइफ तकनीक जरूरी, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

    आत्मनिर्भर बैटरी इकोसिस्टम के लिए सेकंड-लाइफ तकनीक जरूरी, पुन: उपयोग और रीसाइक्लिंग पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

    नई दिल्ली । भारत में मजबूत, आत्मनिर्भर और सर्कुलर बैटरी इकोसिस्टम विकसित करने के लिए केवल बैटरी निर्माण क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने बैटरियों के निर्माण से लेकर उनके उपयोग, सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन और जीवनचक्र समाप्त होने के बाद प्रबंधन तक पूरी व्यवस्था को एक साथ विकसित करने की जरूरत बताई है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में बैटरी क्षेत्र से जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा हुई। इसमें नीति निर्माताओं, उद्योग प्रतिनिधियों, शोधकर्ताओं और अन्य हितधारकों ने भारत में तेजी से विकसित हो रहे बैटरी इकोसिस्टम को लेकर विचार साझा किए।

    द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट की महानिदेशक डॉ. विभा धवन ने कहा कि बैटरी क्षेत्र पर चर्चा केवल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल के बाद भी जिन बैटरियों में पर्याप्त क्षमता बची रहती है, उनके सेकंड-लाइफ एप्लिकेशन की संभावनाओं पर ध्यान देना जरूरी है। इससे बैटरियों के उपयोगी जीवन को बढ़ाया जा सकता है और उनकी आर्थिक उपयोगिता का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा।

    भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव विजय मित्तल ने घरेलू विनिर्माण और सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ सेकंड-लाइफ बैटरियों, ट्रेसबिलिटी, मानकों और रीसाइक्लिंग से जुड़े ढांचे के विकास की जरूरत बताई। उनके अनुसार ऐसे प्रयास भारत में प्रतिस्पर्धी और सर्कुलर बैटरी अर्थव्यवस्था विकसित करने में मदद कर सकते हैं।

    नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के वैज्ञानिक कुलदीप राणा ने कहा कि सेकंड-लाइफ बैटरियों का इस्तेमाल केवल इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़े क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। इनका उपयोग घरेलू उपकरणों, रूफटॉप सोलर पीवी सिस्टम और यूपीएस सिस्टम जैसे क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।

    सम्मेलन के दौरान बैटरी वैल्यू चेन के कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। इनमें घरेलू एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल निर्माण क्षमता का विस्तार, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी का विकास और इस्तेमाल की जा चुकी बैटरियों के पुन: उपयोग, पुनर्प्रयोजन तथा रीसाइक्लिंग की बढ़ती जरूरत शामिल रही।

    वरिष्ठ निदेशक ए.के. सक्सेना ने कहा कि बैटरी क्षेत्र में केवल उत्पादन की मात्रा बढ़ाने के बजाय मूल्य सृजन को स्थानीय स्तर पर बढ़ावा देने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने बैटरियों को शुरुआती डिजाइन चरण से ही सर्कुलर दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर तैयार करने की आवश्यकता बताई।

    उन्होंने यह भी कहा कि सेकंड-लाइफ बैटरियों की बची हुई क्षमता और प्रदर्शन का सही आकलन जरूरी है। इससे इन बैटरियों के इस्तेमाल को लेकर उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस के प्रबंध निदेशक विनायक वालिम्बे ने भारत में मजबूत और प्रतिस्पर्धी बैटरी उद्योग के निर्माण के लिए घरेलू मूल्य संवर्धन बढ़ाने पर जोर दिया।

    वहीं, बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड की वरिष्ठ प्रबंधक सुगंधिता वाधेरा ने भविष्य में बढ़ने वाली बिजली मांग के प्रभावी प्रबंधन पर बात रखी। उन्होंने राज्यों के लिए क्षमता नियोजन, मजबूत भुगतान सुरक्षा व्यवस्था और वितरण क्षेत्र में अधिक लचीले ऊर्जा संसाधनों की जरूरत बताई। उनके अनुसार इससे ऊर्जा तंत्र को अधिक मजबूत बनाने और बदलती जरूरतों के अनुसार तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद मिल सकती है।

  • आरबीआई ने एनबीएफसी की टिकाऊ वृद्धि के लिए सुशासन, लिक्विडिटी, जोखिम प्रबंधन, ग्राहक भरोसे और साइबर सुरक्षा पर जोर दिया

    आरबीआई ने एनबीएफसी की टिकाऊ वृद्धि के लिए सुशासन, लिक्विडिटी, जोखिम प्रबंधन, ग्राहक भरोसे और साइबर सुरक्षा पर जोर दिया

    नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने कहा है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां अब केवल वैकल्पिक ऋणदाता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विशेषीकृत वित्तीय साझेदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रही हैं। ऐसे में एनबीएफसी क्षेत्र की दीर्घकालिक और टिकाऊ वृद्धि के लिए संस्थानों को पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

    सितंबर बुलेटिन में दिए गए उनके विचारों के अनुसार, देश में एनबीएफसी क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। वर्तमान में एनबीएफसी ऋण सकल नॉमिनल जीडीपी के 16.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि एक साल पहले यह 15.9 प्रतिशत था। इसी तरह अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कुल ऋण में एनबीएफसी क्षेत्र की हिस्सेदारी बढ़कर 27 प्रतिशत हो गई है, जो पहले 26 प्रतिशत थी।

    मुर्मू ने सबसे पहले सुशासन को मजबूत संस्थान की बुनियाद बताया। उनके अनुसार, निदेशक मंडल और शीर्ष प्रबंधन को संगठन के स्तर पर अनुपालन और नैतिक मूल्यों की मजबूत संस्कृति विकसित करनी चाहिए। एनबीएफसी का आकार बढ़ने के साथ उसके प्रशासनिक और संस्थागत ढांचे को भी उसी अनुरूप मजबूत करने की जरूरत है।

    दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्र के तौर पर उन्होंने लिक्विडिटी प्रबंधन को रेखांकित किया। उनके अनुसार, बाजार की धारणा में बदलाव और सीमित फंडिंग स्रोतों के कारण एनबीएफसी तथा हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों पर दबाव बन सकता है। इसलिए कंपनियों को अपने फंडिंग स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत है। उन्होंने गहरे और तरल कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को इस दिशा में मददगार बताया।

    मुर्मू ने सिक्योरिटाइजेशन को भी केवल लिक्विडिटी जुटाने के साधन के तौर पर नहीं देखने की बात कही। इसे जोखिम हस्तांतरण और पूंजी मुक्त करने के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया। इसके लिए पारदर्शिता और उचित नियामकीय मानकों का पालन जरूरी बताया गया।

    तीसरे क्षेत्र में संपत्ति गुणवत्ता और जोखिम प्रबंधन शामिल हैं। ऋण वृद्धि की रफ्तार बढ़ने के साथ खराब ऋण और परिसंपत्ति गुणवत्ता से जुड़े जोखिम भी बढ़ सकते हैं। ऐसे में नियमित स्ट्रेस टेस्टिंग, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप प्रावधान व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई गई।

    इस दिशा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल को भी बढ़ाने पर जोर दिया गया। इन तकनीकों की मदद से उधारकर्ताओं में वित्तीय तनाव के शुरुआती संकेतों की पहचान की जा सकती है। साथ ही ऋण मंजूरी के मानकों से समझौता नहीं करने की बात कही गई।

    चौथे क्षेत्र के रूप में ग्राहक विश्वास को महत्वपूर्ण संपत्ति बताया गया। वित्तीय नवाचार की गति उपभोक्ता संरक्षण से आगे नहीं निकलनी चाहिए, विशेषकर कमजोर और संवेदनशील ग्राहकों के मामले में। आचरण-आधारित विनियमन, प्रभावी शिकायत निवारण और जिम्मेदार ऋण वितरण को प्राथमिकता देने की बात कही गई।

    पांचवें क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन और साइबर सुरक्षा को रखा गया। सप्लाई चेन फाइनेंस में ब्लॉकचेन और धोखाधड़ी की पहचान में एआई के इस्तेमाल को बढ़ाने की जरूरत बताई गई। हालांकि तकनीकी विस्तार के साथ साइबर जोखिम भी बढ़ते हैं। इसलिए ग्राहक डेटा की सुरक्षा और संस्थानों पर भरोसा बनाए रखने के लिए साइबर सुरक्षा में निवेश को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। तकनीकी नवाचार का उद्देश्य केवल दक्षता बढ़ाना नहीं, बल्कि निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।

  • Skin Care With Curd: चेहरे पर दही लगाने से मिल सकते हैं ये फायदे निखरी त्वचा के लिए ऐसे करें इस्तेमाल

    Skin Care With Curd: चेहरे पर दही लगाने से मिल सकते हैं ये फायदे निखरी त्वचा के लिए ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली। दही सिर्फ खाने के स्वाद को बढ़ाने वाला खाद्य पदार्थ नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल त्वचा की देखभाल के लिए भी किया जाता है। दही में लैक्टिक एसिड पाया जाता है जो त्वचा की ऊपरी सतह पर जमा मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा दही में मौजूद प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व त्वचा को मुलायम बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि घरेलू स्किन केयर में दही का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए चेहरे पर कोई भी घरेलू नुस्खा लगाने से पहले सावधानी रखना जरूरी है।

    अगर त्वचा रूखी और बेजान नजर आती है तो सादा दही चेहरे पर लगाने का आसान तरीका हो सकता है। इसके लिए ताजा और बिना स्वाद वाला दही लें और उसे साफ चेहरे पर हल्की परत में लगाएं। कुछ देर बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। दही त्वचा को नमी देने में मदद कर सकता है और त्वचा को मुलायम महसूस करा सकता है। इसे चेहरे पर जोर से रगड़ने से बचना चाहिए क्योंकि ज्यादा रगड़ने से संवेदनशील त्वचा में जलन हो सकती है।

    दही को शहद के साथ मिलाकर भी फेस पैक की तरह इस्तेमाल किया जाता है। शहद त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद कर सकता है जबकि दही त्वचा को मुलायम रखने में सहायक हो सकता है। दोनों को मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा अधिक हाइड्रेटेड महसूस हो सकती है। इस तरह के घरेलू फेस पैक को आंखों के आसपास की त्वचा पर लगाने से बचना चाहिए।

    अगर त्वचा सामान्य है और हल्की डल नजर आ रही है तो दही में बेसन मिलाकर फेस पैक बनाया जा सकता है। बेसन त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी हटाने में मदद कर सकता है जबकि दही त्वचा को मुलायम बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इस मिश्रण को चेहरे पर लगाकर सूखने के लिए बहुत देर तक न छोड़ें। हल्के हाथों से पानी की मदद से इसे साफ करना बेहतर रहेगा।

    दही का इस्तेमाल करते समय कुछ जरूरी सावधानियां भी रखनी चाहिए। सबसे पहले चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर है। इसके लिए मिश्रण की थोड़ी मात्रा त्वचा के छोटे हिस्से पर लगाकर देखें। अगर लालिमा खुजली जलन या किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो इसे चेहरे पर इस्तेमाल न करें। बहुत संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    अगर चेहरे पर सक्रिय मुंहासे घाव एलर्जी या त्वचा संबंधी कोई समस्या है तो घरेलू नुस्खों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। दही को चेहरे पर लगाने से तुरंत कोई चमत्कारी बदलाव होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। अच्छी त्वचा के लिए पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना पर्याप्त नींद लेना और नियमित रूप से त्वचा की सफाई करना भी जरूरी है।

    कुल मिलाकर दही को घरेलू स्किन केयर रूटीन में शामिल किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल से त्वचा को मुलायम और नमीयुक्त महसूस कराने में मदद मिल सकती है। लेकिन हर त्वचा पर इसका असर एक जैसा हो यह जरूरी नहीं है। इसलिए अपनी त्वचा की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए इसका इस्तेमाल करें और किसी भी तरह की जलन या एलर्जी होने पर तुरंत उपयोग बंद कर दें।

  • भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में दिखे महाकाल जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर

    भस्म अर्पण के बाद निराकार से साकार रूप में दिखे महाकाल जयकारों से गूंज उठा मंदिर परिसर


    उज्जैन । उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में शनिवार तड़के भगवान महाकाल की भस्म आरती विधि विधान के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हो गई। पंडे और पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और फिर पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ।

    पंचामृत अभिषेक के दौरान दूध दही घी शक्कर और फलों के रस का उपयोग किया गया। इसके बाद प्रथम घंटाल बजाकर भगवान महाकाल को हरिओम का जल अर्पित किया गया। भस्म आरती की विशेष परंपरा के तहत होने वाले पूजन के बीच गर्भगृह में मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियां जारी रहीं।

    अभिषेक के बाद भगवान महाकाल का विशेष शृंगार किया गया। इस दौरान बाबा महाकाल को रजत ओम और बिल्वपत्र से सजा मुकुट धारण कराया गया। इसके साथ ही रुद्राक्ष की माला और शेषनाग का रजत मुकुट भी अर्पित किया गया। भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड और त्रिशूल सजाया गया जबकि डमरू से भी विशेष शृंगार किया गया।

    बाबा महाकाल को रजत की मुंडमाला और रुद्राक्ष की माला पहनाई गई। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों की मालाएं भी अर्पित की गईं। विशेष शृंगार के बाद भगवान महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। भस्म आरती में शामिल होने पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के इस दिव्य स्वरूप के दर्शन किए।

    पूजन के दौरान भगवान गणेश माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का भी विधि विधान से पूजन किया गया। भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई और नैवेद्य चढ़ाया गया। सभी धार्मिक प्रक्रियाओं के बाद भस्म आरती की मुख्य परंपरा संपन्न हुई।

    महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल के विशेष दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह दिखाई दिया।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की मौजूदगी बनी रही। जैसे ही पूजन और आरती की प्रक्रिया आगे बढ़ी वैसे ही पूरा परिसर भगवान महाकाल के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।

    महाकाल मंदिर में होने वाली भस्म आरती प्रतिदिन की धार्मिक दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरती के दौरान होने वाले अभिषेक पूजन भस्म अर्पण और विशेष शृंगार के बाद भगवान महाकाल के अलग अलग स्वरूप में दर्शन होते हैं। शनिवार की भस्म आरती में भी बाबा महाकाल का रजत ओम बिल्वपत्र मुकुट और रुद्राक्ष से किया गया शृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहा।