Blog

  • दिल जीतने वाला फैसला! Shiv Thakare ने ‘The 50’ जीतकर फैन को दी पूरी प्राइज मनी

    दिल जीतने वाला फैसला! Shiv Thakare ने ‘The 50’ जीतकर फैन को दी पूरी प्राइज मनी


    नई दिल्ली।‘द 50 शो’ (The 50) एक ऐसा रियलिटी शो था जहां पर 50 सेलेब्स आए और अपना गेम खेलते हुए नजर आएं। शो ‘द 50’ का पहला सीजन रविवार 22 मार्च को खत्म हो गया है। 1 फरवरी से शुरू हुए इस शो का खिताब शिव ठाकरे ने अपने नाम किया। 26 दिनों तक चले टास्क और दिमागी खेल के बाद शिव ने ट्रॉफी अपने नाम की।

    फाइनल में पहुंचे थे ये खिलाड़ी
    जब से शुरू हुआ था तो 50 लोग इसमें नजर आ रहे थे फिर धीरे-धीरे सब से बाहर निकलने लगे इसके बाद फिनाले में शिव ठाकरे का मिस्टर फैसु, काका, रजत दलाल और कृष्णा श्रॉफ के साथ मुकाबला हुआ और उन्होंने सबको मत देकर ट्रॉफी जीती। फैंस ने सोशल मीडिया पर शिव को बधाई दी और उनकी जीत को पूरी तरह से सही बताया। इस जीत के साथ, उन्होंने एक बार फिर रियलिटी शो में अपनी जबरदस्त फैन फॉलोइंग और लोकप्रियता साबित कर दी।

    कितनी मिली प्राइस मनी
    आपको बता दें कि, शिव ठाकरे को चमचमाती हुई द 50 की ट्रॉफी मिली लेकिन प्राइस मनी उन्हें नहीं बल्कि उनके फैन को मिली। द 50 का यही रुल था की प्राइस मनी आपको नहीं आपके फैन को मिलेगी आपको अपने फैंस के लिए इस शो को खेलना था और जितना था। इस पर शिव ठाकरे ने भी कहा, मुझे इस बात की सबसे ज्यादा खुशी है कि मेरे किसी एक चाहने वाले को 50 लाख का इनाम मिलेगा।मैं इस समय बहुत भावुक हूं और आने वाले कल के लिए बेहद उत्साहित हूं।

    जीत के बाद शिव ठाकरे
    ट्रॉफी जीतने के बाद शिव ठाकरे ने कहा, ‘यह 50 का अनुभव मेरे लिए बिल्कुल नया था। मैं शिव ठाकरे का एक अलग पहलू दिखाना चाहता था। एक ऐसा पहलू जो यह मानता है कि अपनी बात सुनाने के लिए आपको चिल्लाने या लड़ने की जरूरत नहीं है। आप पूरे दिल से खेल सकते हैं, खुद के प्रति सच्चे रह सकते हैं। फिर भी जीत सकते हैं। पहले सीजन का विजेता बनना, खासकर 50 मजबूत खिलाड़ियों के बीच, एक ऐसी बात है जिसे हमेशा याद रखा जाएगा।

  • पश्चिम एशिया संकट पर पीएम मोदी का बड़ा कदम: आज लोकसभा में देंगे बयान, ईरान-इजरायल जंग के बीच भारत की 'सुरक्षा कवच' रणनीति तैयार!

    नई दिल्ली:  पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों के बीच भारत सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर दो बजे लोकसभा में एक महत्वपूर्ण वक्तव्य देने वाले हैं। माना जा रहा है कि पीएम मोदी ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी इस भीषण संघर्ष से वैश्विक स्तर पर पैदा हुए ऊर्जा संकट और इसके भारत पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर संसद को संबोधित करेंगे। इस संबोधन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोमवार सुबह ही प्रधानमंत्री ने संसद भवन परिसर में विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ एक बड़ी बैठक की, जिसमें मौजूदा हालातों की विस्तृत समीक्षा की गई।

    इससे पहले रविवार शाम को प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक में पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण पेट्रोलियम, बिजली, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और खाद सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ने वाले अपेक्षित प्रभावों पर गहन चर्चा की गई। कैबिनेट सचिव ने एक विशेष प्रेजेंटेशन के जरिए वैश्विक स्थिति और भारत सरकार द्वारा अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि युद्ध का प्रभाव केवल अल्पकालिक नहीं, बल्कि मध्यम और दीर्घकालिक भी हो सकता है। ऐसे में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को इस झटके से बचाने के लिए तत्काल और दूरगामी, दोनों तरह के जवाबी उपायों पर काम शुरू कर दिया है।

    आम आदमी की बुनियादी जरूरतों, जैसे भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा को लेकर सरकार ने विस्तृत आकलन किया है। विशेष रूप से किसानों के लिए खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पिछले कुछ वर्षों में खाद का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने के लिए जो कदम उठाए गए थे, उनसे फिलहाल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी। साथ ही, भविष्य में उपलब्धता बनाए रखने के लिए वैकल्पिक स्रोतों की भी तलाश शुरू कर दी गई है। ऊर्जा के मोर्चे पर राहत की बात यह है कि सभी पावर प्लांट्स में कोयले का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे देश में बिजली की कमी होने की आशंका नहीं है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने इस संकट से निपटने के लिए ‘संपूर्ण सरकार’ (Whole-of-Government) के दृष्टिकोण पर बल दिया है। उन्होंने मंत्रियों और सचिवों के एक विशेष समूह के गठन का निर्देश दिया है, जो सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करेगा। पीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस बदलते वैश्विक घटनाक्रम के बीच भारतीय नागरिकों को कम से कम असुविधा होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि युद्ध की आड़ में आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी को रोका जा सके। केमिकल, फार्मास्यूटिकल और औद्योगिक कच्चे माल के आयात के लिए नए और विविध स्रोतों की पहचान की जा रही है, ताकि भारतीय उद्योगों की गति धीमी न पड़े। आज लोकसभा में पीएम का बयान इस पूरी रणनीति का खाका देश के सामने रखेगा।

  • BSEB Bihar Board 12th Result 2026: कुछ पलों में आने वाला है बिहार बोर्ड 12th का रिजल्ट, इस लिंक पर क्लिक कर जानें रिजल्ट

    BSEB Bihar Board 12th Result 2026: कुछ पलों में आने वाला है बिहार बोर्ड 12th का रिजल्ट, इस लिंक पर क्लिक कर जानें रिजल्ट


    नई दिल्ली। BSEB Bihar Board 12th के छात्रों के लिए एक बड़ी खबर सामने निकल कर आ रही है। छात्रों के 12वी क्लास का परिणाम आने वाला है। छात्र-छात्राएं जो कई दिनों से अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे वह दोहपर 1:30 बजे अपना रिजल्ट देख पाएंगे। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि BSEB Bihar Board 12th Result 2026 का रिजल्ट 23 मार्च को जारी किया जाएगा।

    BSEB ने दी आधिकारिक जानकारी
    बिहार बोर्ड की 12वी क्लास की परीक्षा के परिणाम पर टकटकी लगाए छात्रों ने बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के ट्वीट के बाद राहत की सांस ली है। बोर्ड ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी कि रिजल्ट दोपहर 1:30 बजे जारी किया जाएगा।

    कहां देख सकते हैं BSEB Bihar Board 12th Result 2026
    results.biharboardonline.com
    biharboardonline.bihar.gov.in
    interbiharboard.com
    secondary.biharboardonline.com

    कैसे देख पाएंगे BSEB Bihar Board 12th Result 2026
    स्टेप 1: सबसे पहले छात्रों को आधिकारिक वेबसाइट biharboardonline.bihar.gov.in पर जाना होगा।
    स्टेप 2: इसके बाद छात्र अपना रोल कोड और रोल नंबर डालें और कैप्चा भरें।
    स्टेप 3: फिर छात्र ‘View’ बटन पर क्लिक करें।
    स्टेप 4: इसके बाद छात्रों को स्क्रीन पर उनका रिजल्ट दिखने लग जाएगा।
    स्टेप 5: फिर छात्र मार्कशीट डाउनलोड करें।
    स्टेप 6: अंत में भविष्य के लिए छात्र इसका प्रिंट भी निकाल सकते हैं।

    2 से 13 फरवरी के बीच आयोजित हुई थी BSEB Bihar Board 12th की परीक्षा
    साल 2026 में बिहार बोर्ड की 12वीं क्लास की परीक्षा का आयोजन 2 फरवरी से 13 फरवरी के बीच आयोजित किया गया था। यह परीक्षा राज्यभर के 1,762 केंद्रों पर आयोजित की गईं। परीक्षा दो शिफ्ट में हुई, जिसमें पहली शिफ्ट सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक चली। हालांकि अब इसका रिजल्ट के साथ समापन हो जाएगा।

  • कोलकाता पोर्ट सीट पर चर्चा में प्रियदर्शिनी हकीम कौन हैं और क्यों बनीं कोलकाता में

    कोलकाता पोर्ट सीट पर चर्चा में प्रियदर्शिनी हकीम कौन हैं और क्यों बनीं कोलकाता में

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट इन दिनों खास चर्चा में है और इसकी मुख्य वजह हैं Priyadarshini Hakim जो तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी की उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरी हैं

    प्रियदर्शिनी हकीम को मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की करीबी और भरोसेमंद युवा नेता माना जाता है उनकी राजनीतिक सक्रियता और संगठन में बढ़ती पकड़ ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया है खास बात यह है कि वे अपने पिता और राज्य सरकार में मंत्री तथा कोलकाता के मेयर Firhad Hakim के साथ भी लगातार प्रचार करती नजर आती हैं

    प्रियदर्शिनी हकीम की पहचान केवल एक उम्मीदवार तक सीमित नहीं है बल्कि उन्हें टीएमसी के भीतर एक उभरते हुए युवा चेहरे के रूप में देखा जा रहा है पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें एक महत्वपूर्ण सीट कोलकाता पोर्ट से चुनावी मैदान में उतारा है जो राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जाती है

    चुनाव प्रचार के दौरान प्रियदर्शिनी की छवि एक विनम्र और जमीन से जुड़ी नेता के रूप में उभर रही है वह लोगों से हाथ जोड़कर मिलती हैं और सीधे जनता से संवाद स्थापित करने की कोशिश करती हैं उनके प्रचार शैली में सादगी और संपर्क पर जोर दिया जा रहा है जिससे वे मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं

    माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इस सीट पर खास फोकस है और उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार में जुटने के निर्देश दिए हैं भवानीपुर को चुनावी प्रचार का मुख्य केंद्र बनाया गया है जहां से रणनीति तैयार की जा रही है

    प्रियदर्शिनी हकीम की चर्चा का एक बड़ा कारण उनका राजनीतिक परिवार भी है क्योंकि उनके पिता फिरहाद हकीम राज्य की राजनीति में एक अनुभवी और प्रभावशाली नेता हैं इस वजह से उन्हें राजनीतिक अनुभव और मार्गदर्शन दोनों मिल रहा है जो उनके चुनावी अभियान को मजबूती देता है

    टीएमसी के भीतर उन्हें एक ऐसे चेहरे के रूप में देखा जा रहा है जो आने वाले समय में पार्टी की युवा नेतृत्व की भूमिका निभा सकती हैं उनकी सक्रियता और पार्टी के प्रति निष्ठा उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार बनाती है

    इस प्रकार कोलकाता पोर्ट सीट न केवल एक चुनावी मुकाबला बन गई है बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए चेहरों का उदय हो रहा है और प्रियदर्शिनी हकीम जैसे युवा नेता भविष्य की राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं

  • बंजर खेत में हरा भरा कमाल: बैतूल किसान ने तरबूज से कमाए 4 लाख

    बंजर खेत में हरा भरा कमाल: बैतूल किसान ने तरबूज से कमाए 4 लाख

    बैतूल । मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी ब्लॉक के हीरापुर-2 गांव के किसान दिलीप मंडल ने बंजर और बिना सिंचाई वाली जमीन को हरा-भरा कर आर्थिक सफलता की मिसाल पेश की है। वे पिछले 5 सालों से धान की फसल निकालने के बाद यही जमीन तरबूज की खेती के लिए उपयोग कर रहे हैं। केवल चार महीने में उनकी आय 3 से 6 लाख रुपए तक पहुँच जाती है।

    दिलीप मंडल ने बताया कि इस खेत पर 10 साल पहले केवल कंटीली झाड़ियां थीं। जमीन असमान थी और बारिश के मौसम में ही सीमित फसल आती थी। धीरे-धीरे नदी में रेत कम होने पर लोग तरबूज की खेती खेतों में करने लगे। उन्होंने भी अपनी जमीन को समतल कर निजी तालाब बनाकर तरबूज और रबी की फसल शुरू की। इस समय 5 एकड़ में तरबूज की खेती चल रही है जो 15 मार्च के बाद बाजार में बिकने लगेगी।

    कुल निवेश करीब ढाई लाख रुपए है जिसमें बीज खाद और मेहनत शामिल हैं। प्रति एकड़ 10 से 25 टन तक फसल निकलती है और बाजार में कीमत 10 से 20 रुपए प्रति किलो मिलती है। इससे सालाना 3 से 6 लाख रुपए की आमदनी होती है और पिछले वर्ष शुद्ध मुनाफा 3.75 लाख रुपए रहा।

    किसान ने खेती के लिए खास तकनीक अपनाई है। सबसे पहले बीजों को अंकुरित किया जाता है। फिर 2 गुणा 3 इंच के गड्ढों में तीन बीज और 200 ग्राम गोबर की खाद डालकर बुवाई की जाती है। पौधों में 3-4 पत्तियां आने के बाद सिंचाई शुरू होती है और खेत में नमी बनाए रखना जरूरी है। इसके अलावा फसल के बीच में जैविक और रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग किया जाता है।

    वर्तमान में 5 एकड़ में कलिया गोल्ड और करन वैरायटी के बीज लगाए गए हैं जिसकी कीमत 32 हजार रुपए प्रति किलो है। कुल मिलाकर 2 किलो बीज और ढाई लाख रुपए की लागत में किसान 3 से 6 लाख रुपए की कमाई कर रहा है।

    दिलीप मंडल की यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि उचित योजना सिंचाई प्रबंधन और सही तकनीक के जरिए बंजर जमीन को भी उपजाऊ बनाया जा सकता है। उनके प्रयास से न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ी है बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं।

  • मंच पर फूट-फूट कर रो पड़े संजय निषाद, क्या छोड़ेंगे BJP का साथ? जानिए सपा में जाने को लेकर खुद ही कैसे साफ की तस्वीर

    मंच पर फूट-फूट कर रो पड़े संजय निषाद, क्या छोड़ेंगे BJP का साथ? जानिए सपा में जाने को लेकर खुद ही कैसे साफ की तस्वीर


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब संजय निषाद का गोरखपुर रैली में रोते हुए वीडियो सामने आया। गोरखपुर में आयोजित इस रैली के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।

    क्या सपा में वापसी करेंगे?
    वीडियो वायरल होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा था कि क्या संजय निषाद फिर से समाजवादी पार्टी में लौटेंगे? इस पर खुद संजय निषाद ने साफ कहा कि सपा ने उनके लिए पहले ही दरवाजे बंद कर दिए थे। ऐसे में उनके वापस जाने का कोई सवाल ही नहीं है।

    BJP के साथ रहने का किया ऐलान
    संजय निषाद ने साफ तौर पर कहा कि वे भारतीय जनता पार्टी के साथ ही बने रहेंगे। उन्होंने कहा कि जब सबने उनका साथ छोड़ दिया था, तब BJP ने उनका साथ दिया और वे 2019 से लगातार पार्टी को समर्थन दे रहे हैं। इस बयान से यह साफ हो गया है कि फिलहाल वे NDA के साथ ही रहेंगे।

    आरक्षण को लेकर उठाई आवाज
    रैली के दौरान संजय निषाद ने अपने मुख्य मुद्दे यानी आरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि निषाद समाज को SC आरक्षण मिलना चाहिए और इसके लिए वे लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने BJP से भी इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

    संजय निषाद ने समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि निषाद समाज का हक इन पार्टियों ने छीना है, जबकि अब वे अपने समाज को एकजुट करने में लगे हैं। संजय निषाद के रोने वाले वीडियो ने भले ही सियासी अटकलों को हवा दी हो, लेकिन उन्होंने खुद साफ कर दिया है कि वे BJP के साथ ही रहेंगे। अब देखना होगा कि आने वाले चुनावी माहौल में उनका अगला कदम क्या होता है और इसका यूपी की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।

  • शाहरुख-सलमान की दोस्ती पर सलीम खान का बड़ा बयान कंपीटिटर कभी दोस्त नहीं बन सकते

    शाहरुख-सलमान की दोस्ती पर सलीम खान का बड़ा बयान कंपीटिटर कभी दोस्त नहीं बन सकते


    नई दिल्ली:
    बॉलीवुड के दो सबसे बड़े सितारे Shah Rukh Khan और Salman Khan आज भले ही अच्छे दोस्त माने जाते हों लेकिन एक समय ऐसा भी था जब दोनों के बीच तनाव और अनबन की खबरें सुर्खियों में रहती थीं उनके रिश्ते को लेकर फिल्म इंडस्ट्री और आम दर्शकों के बीच भी कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं

    इस विषय पर पहली बार खुलकर बात की थी सलमान खान के पिता और मशहूर लेखक Salim Khan ने उन्होंने एक इंटरव्यू में रिश्तों और दोस्ती की परिभाषा को अपने नजरिए से समझाया और बताया कि हर रिश्ते में मतभेद होना स्वाभाविक है लेकिन इससे प्यार कम नहीं होता

    सलीम खान ने अपने बयान में कहा कि उनके और सलमान के बीच भी कई विचारों में अंतर है लेकिन इसके बावजूद उनका प्यार मजबूत है उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रिश्तों की असली ताकत प्यार और समझ में होती है न कि केवल समान विचारों में

    जब बात शाहरुख और सलमान के रिश्ते पर आई तो उन्होंने कहा कि दोनों ही बड़े कलाकार हैं और एक ही क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करते हैं ऐसे में उनके बीच प्रतिद्वंद्विता होना स्वाभाविक है सलीम खान के अनुसार जब दो लोग एक ही काम के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं तो उनके बीच हमेशा एक दूरी बनी रहती है लेकिन यह दूरी आपसी सम्मान को खत्म नहीं करती

    उन्होंने यह भी समझाया कि कंपीटिटर के बीच सामान्य शिष्टाचार और बातचीत संभव है जैसे एक-दूसरे को शुभकामनाएं देना या काम के बारे में बातचीत करना लेकिन गहरी दोस्ती की अपेक्षा हमेशा वास्तविकता से दूर हो सकती है

    सलीम खान ने यह भी कहा कि दोस्ती और प्रतिस्पर्धा दो अलग-अलग चीजें हैं और हर रिश्ते की अपनी सीमाएं होती हैं उनके अनुसार दो प्रतिस्पर्धियों के बीच प्यार भले ही संभव हो लेकिन दोस्ती जैसा गहरा रिश्ता बन पाना मुश्किल होता है

    हालांकि समय के साथ Shah Rukh Khan और Salman Khan ने अपने रिश्तों को सुधार लिया और आज दोनों के बीच आपसी सम्मान और दोस्ती का रिश्ता देखा जाता है दोनों सितारे कई मौकों पर एक साथ नजर आते हैं और एक-दूसरे के काम की सराहना भी करते हैं यह पूरा मामला दर्शाता है कि समय के साथ रिश्तों में बदलाव आ सकता है और प्रतिस्पर्धा के बावजूद सम्मान और समझदारी से संबंधों को बेहतर बनाया जा सकता है

  • प्रशासन में जवाबदेही की नई मिसाल मोहन यादव ने कलेक्टर एसपी तक को नहीं बख्शा

    प्रशासन में जवाबदेही की नई मिसाल मोहन यादव ने कलेक्टर एसपी तक को नहीं बख्शा


    भोपाल । मध्य प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सख्त संदेश देते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव लगातार कड़े फैसले लेते नजर आ रहे हैं। अपने सवा दो साल के कार्यकाल में उन्होंने यह साफ कर दिया है कि लापरवाही और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल ही में गुना के एसपी अंकित सोनी और सीधी के कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को हटाने की कार्रवाई इसी सख्ती का ताजा उदाहरण है।

    13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से ही डॉ. यादव ने प्रशासन में जवाबदेही तय करने की दिशा में आक्रामक रुख अपनाया है। अब तक उनके कार्यकाल में 10 आईएएस और 8 आईपीएस अधिकारियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। खास बात यह है कि इन कार्रवाइयों में कई कलेक्टर और एसपी स्तर के अधिकारी भी शामिल हैं जो प्रशासनिक ढांचे में बेहद अहम माने जाते हैं।

    गुना में हाल ही में सामने आए मामले में एक व्यापारी से एक करोड़ रुपये की जब्ती के बाद कथित रूप से 20 लाख रुपये लेकर छोड़ देने और उचित कार्रवाई न करने के आरोपों के चलते एसपी अंकित सोनी को हटा दिया गया। इस मामले में थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया है। वहीं सीधी में कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी पर दफ्तर में नियमित रूप से उपस्थित न रहने और जनसुनवाई में लापरवाही के आरोप लगे जिसके बाद उन्हें पद से हटाया गया।

    इससे पहले भी कई बड़े मामलों में सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। इंदौर में दूषित पानी की आपूर्ति से हुई मौतों के बाद नगर निगम आयुक्त और अपर आयुक्त पर कार्रवाई की गई। हरदा में पटाखा फैक्ट्री विस्फोट और सागर में दीवार गिरने जैसी घटनाओं में भी कलेक्टर और एसपी को हटाया गया। मऊगंज हत्याकांड और सिवनी में गोवंश हत्या के मामलों में भी प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए पद से हटाया गया।

    शाजापुर में एक कलेक्टर द्वारा ड्राइवर से अपमानजनक व्यवहार का वीडियो वायरल होने के बाद भी तत्काल कार्रवाई की गई थी। वहीं कटनी में विवादों में घिरे एसपी को भी हटाकर स्पष्ट संदेश दिया गया कि व्यक्तिगत आचरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना प्रशासनिक कार्य।

    इन सभी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि सरकार अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री का यह रुख प्रशासनिक मशीनरी में अनुशासन और जिम्मेदारी बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में यह एक नया प्रशासनिक ट्रेंड बनता दिख रहा है जहां लापरवाही या विवाद सामने आते ही त्वरित कार्रवाई की जा रही है। इससे एक ओर जहां अधिकारियों में सतर्कता बढ़ी है वहीं आम जनता के बीच यह संदेश भी गया है कि शासन अब गंभीर मामलों में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा।

  • Political Kissa: शादी से पहले ही कह दिया था…एक दिन CM बनूंगा”, 30 साल बाद सच हुआ सपना; जानिए हिमंता बिस्वा सरमा का ये दिलचस्प किस्सा

    Political Kissa: शादी से पहले ही कह दिया था…एक दिन CM बनूंगा”, 30 साल बाद सच हुआ सपना; जानिए हिमंता बिस्वा सरमा का ये दिलचस्प किस्सा


    नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की जिंदगी का एक दिलचस्प किस्सा इन दिनों चर्चा में है। करीब 30 साल पहले उन्होंने अपनी पत्नी से कहा था कि वह एक दिन मुख्यमंत्री बनेंगे। उस समय यह सिर्फ एक सपना था, लेकिन अब वह सच हो चुका है।

    पत्नी ने सुनाया खास पल
    उनकी पत्नी रिनिकी भुयान सरमा ने बताया कि 9 मई को जब हिमंता घर लौटे तो उन्होंने कहा- मुझे मुख्यमंत्री नामित किया गया है। यह सुनकर वह हैरान रह गईं और पूछा, कौन? इस पर उन्होंने जवाब दिया मैं। यह पल उनके परिवार के लिए बेहद खास था। इसके अगले दिन 10 मई को हिमंता बिस्वा सरमा ने गुवाहाटी में असम के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस दौरान उनका पूरा परिवार मौजूद रहा।

    छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
    हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक करियर छात्र जीवन से ही शुरू हो गया था। AASU से जुड़े 1994 में सक्रिय राजनीति में आए युवाओं और छात्रों के लिए कई काम किए 1996 में उन्होंने जलुकबारी से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और 2001 में पहली जीत हासिल की। इसके बाद से वह लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं और उनका कद राजनीति में बढ़ता गया।

    कांग्रेस से BJP तक का सफर
    हिमंता बिस्वा सरमा ने अपने करियर में बड़ा राजनीतिक बदलाव भी किया। पहले कांग्रेस में रहे 2015 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए इसके बाद उनका राजनीतिक ग्राफ तेजी से ऊपर गया 2021 में वह असम के मुख्यमंत्री बने। हिमंता बिस्वा सरमा की कहानी यह दिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो सपने जरूर पूरे होते हैं। एक युवा नेता का सपना आज मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच चुका है, जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा बन गया है।

  • नवरात्रि व्रत में क्यों खास है कुट्टू? ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखने का आसान तरीका

    नवरात्रि व्रत में क्यों खास है कुट्टू? ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रखने का आसान तरीका


    नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में व्रत रखने का समय सही खान-पान बेहद जरूरी है, ताकि शरीर को ऊर्जा और पोषण दोनों मिले रहें। ऐसे में ‘कुट्टू का आटा’ फलाहार का सबसे लोकप्रिय और क्लासिक संस्करण सामने आया है। यह अनाज नहीं, बल्कि एक बीज है, जो कि स्वास्थ्य के लिए विटामिन-मुक्त होने के कारण बेहद हानिकारक माना जाता है।

    ऊर्जा से परिपूर्णता, ऊर्जा से भरपूर सक्रियता

    कुट्टू में प्रचुर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन पाए जाते हैं, जो व्रत के दौरान तत्काल ऊर्जा आपूर्ति का काम करते हैं। इससे कमजोरी और थकान महसूस नहीं होती और आप गंभीर सक्रिय रहते हैं।

    कंपनियों का निर्माण मजबूत होता है

    कुट्टू में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम जोड़ों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। व्रत के दौरान जब समग्रता सीमित होती है, तब यह शरीर को आवश्यक वस्तुएं प्रदान करता है।

    दिल और खून के लिए बढ़िया

    कुट्टू में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट दिल को स्वस्थ रखते हैं और खराब एंटीऑक्सीडेंट को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही यह ब्लड मॉड्यूल को कंट्रोल में रखने में भी सहायक होता है।

    अचाना रिश्ता

    सबसे अच्छा कुट्टू पाचन तंत्र के लिए अत्यंत उपयोगी है। इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है और पेट पर असर पड़ता है।

    वॉल्टेज में भी सुरक्षित

    कुट्टू का ग्लाइसेमिक वैज्ञानिक कम होता है, जिससे ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता है। इसका कारण यह है कि इसे श्रमिकों के रोगी भी सीमित मात्रा में खा सकते हैं।

    वजन नियंत्रण में सहायक

    कुट्टू खाने से लंबे समय तक पेट भरा रहता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ज्यादा खाने से बचाव होता है। इससे वजन नियंत्रित में रहता है।

    व्रत में कैसे करें सेवन?

    कुट्टू से कई स्वादिष्ट और सब्जी व्यंजन बनाये जा सकते हैं:

    कुट्टू की पूरी और पराठा
    पकौड़ी और टुकड़े
    खेड और हलवा
    कुट्टू की कढ़ी
    व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग करें, जिससे पाचन और बेहतर होता है।

    नवरात्रि के व्रत में कुट्टू का सिर्फ स्वाद नहीं मिलता, बल्कि शरीर को पूरा पोषण भी मिलता है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है, रक्त को नियंत्रित करता है और पाचन को मापता है—यानी व्रत के दौरान स्वास्थ्य का पूरा होना जरूरी है।