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  • अक्षय खन्ना के बाहर होते ही दृश्यम 3 में जयदीप अहलावत की एंट्री, अजय देवगन की फिल्म में बढ़ा सस्पेंस

    अक्षय खन्ना के बाहर होते ही दृश्यम 3 में जयदीप अहलावत की एंट्री, अजय देवगन की फिल्म में बढ़ा सस्पेंस


    नई दिल्ली।अजय देवगन स्टारर दृश्यम फ्रेंचाइजी बॉलीवुड की उन चुनिंदा फिल्मों में शामिल है, जिसने अपनी मजबूत कहानी और सस्पेंस से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। साल 2015 में रिलीज हुई दृश्यम और इसके बाद आए सीक्वल ने बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ ऑडियंस के बीच भी जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। अब फैंस लंबे समय से दृश्यम 3 का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और इसी बीच फिल्म से जुड़ी एक बड़ी अपडेट सामने आई है।

    हाल ही में अजय देवगन ने दृश्यम 3 की रिलीज डेट का ऐलान कर फैंस की एक्साइटमेंट बढ़ा दी थी। इसके बाद खबर आई कि अभिनेता अक्षय खन्ना इस फिल्म का हिस्सा नहीं रहेंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्षय खन्ना ने हालिया सफल फिल्मों छावा और धुरंधर के बाद अपनी फीस में भारी बढ़ोतरी कर दी थी। इतना ही नहीं, उनकी कुछ अतिरिक्त डिमांड्स भी थीं, जिनके चलते फिल्म का बजट प्रभावित होने लगा। ऐसे में मेकर्स ने आपसी सहमति से उन्हें फिल्म से बाहर करने का फैसला लिया।अक्षय खन्ना के बाहर होने की खबर के बाद यह सवाल उठने लगा था कि आखिर दृश्यम 3 में उनकी जगह कौन लेगा। अब इस पर सस्पेंस खत्म हो गया है। एंटरटेनमेंट वेबसाइट पिंकविला की रिपोर्ट के अनुसार, दृश्यम 3 में अब जयदीप अहलावत की एंट्री हो चुकी है। जयदीप फिल्म में एक अहम और प्रभावशाली किरदार निभाते नजर आएंगे, जो कहानी को नई दिशा देगा।

    जयदीप अहलावत बीते कुछ सालों में अपने दमदार अभिनय से इंडस्ट्री में अलग पहचान बना चुके हैं। पाताल लोक में उनके किरदार को दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों ने खूब सराहा था। इसके अलावा वह दफैमिली मैन,जाने जान, राजी और ज्वेल थीफ जैसी फिल्मों और वेब सीरीज में भी अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुके हैं। आने वाले समय में वह शाहरुख खान की फिल्म किंग में भी नजर आने वाले हैं। ऐसे में दृश्यम 3 में उनकी मौजूदगी फिल्म के सस्पेंस और थ्रिल को कई गुना बढ़ा सकती है।अगर फिल्म की कास्ट की बात करें तो दृश्यम 3में अजय देवगन एक बार फिर विजय सलगांवकर के आइकॉनिक किरदार में दिखाई देंगे। तब्बू भी IG मीरा देशमुख के रोल में लौट रही हैं। इनके अलावा श्रिया सरन, इशिता दत्ता और मृणाल जाधव अपने पुराने किरदारों में नजर आएंगी। इंस्पेक्टर गायतोंडे का किरदार निभाने वाले कमलेश सावंत की भी वापसी तय मानी जा रही है। हाल ही में यह भी खबर आई थी कि श्रेयस तलपड़े को भी फिल्म में अहम रोल के लिए कास्ट किया गया है।

    दृश्यम की कहानी साल 2015 में मीरा देशमुख के बेटे सैम की हत्या से शुरू हुई थी। पिछले दो भागों में पुलिस लगातार यह साबित करने की कोशिश करती रही कि विजय सलगांवकर ही इस मर्डर के पीछे है, लेकिन हर बार विजय अपनी चतुराई से कानून को मात देता रहा। अब दृश्यम 3 को इस कहानी का आखिरी हिस्सा बताया जा रहा है, जिसे अभिषेक पाठक डायरेक्ट कर रहे हैं।फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। जयदीप अहलावत की एंट्री के बाद यह उम्मीद और भी बढ़ गई है कि दृश्यम 3 में कहानी पहले से ज्यादा ट्विस्ट और टर्न्स से भरी होगी, जो दर्शकों को अंत तक सीट से बांधे रखेगी।

  • बांग्लादेश में कंडोम की भारी किल्लत, 50 वर्षों में पहली बार बढ़ी प्रजनन दर

    बांग्लादेश में कंडोम की भारी किल्लत, 50 वर्षों में पहली बार बढ़ी प्रजनन दर

    नई दिल्‍ली। शेख हसीना की सरकार के पतन के साथ ही बांग्लादेश अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। वहां हर दिन उपद्रव देखने को मिल जा रहे हैं। इस सबके बीच एक गंभीर संकट सामने आ खड़ी हुई है। बांग्लादेश इन दिनों कंडोम की भारी किल्लत का सामना कर रहा है। इसके कारण जन्मदर में भी बीते 50 वर्षों में भारी उछाल हुआ है। बांग्लादेश का यह ताजा संकट फंड की कमी और मानव संसाधन की भारी कमी के कारण उत्पन्न हुआ है। इसकी वजह से बीते कुछ वर्षों में गर्भनिरोधकों की आपूर्ति लगातार घटती गई है, जिसका सीधा असर देश की जनसंख्या वृद्धि पर पड़ रहा है।

    स्थिति यह है कि परिवार नियोजन महानिदेशालय के पास उपलब्ध कंडोम का स्टॉक मात्र 39 दिनों के लिए बचा है। ऐसे में अगले वर्ष की शुरुआत में कम से कम एक महीने तक कंडोम वितरित नहीं किए जा सकेंगे। इससे परिवार नियोजन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है।
    50 वर्षों में पहली बार बढ़ी प्रजनन दर

    यह संकट ऐसे समय सामने आया है जब देश में कुल प्रजनन दर के मामले में पिछले 50 वर्षों में पहली बार वृद्धि दर्ज की गई है। मल्टीपल इंडिकेटर क्लस्टर सर्वे 2025 के अनुसार, प्रजनन दर 2024 के 2.3 से बढ़कर 2.4 हो गई है। विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि गर्भनिरोधकों की कमी बनी रही तो प्रजनन दर और बढ़ सकती है।
    गर्भनिरोधकों के उपयोग में भारी गिरावट

    सर्वे के अनुसार, 15 से 49 वर्ष की विवाहित महिलाओं में गर्भनिरोधकों का उपयोग 2019 के 62.7% से घटकर 58.2% रह गया है। आधुनिक गर्भनिरोधकों तक पहुंच भी 77.4% से घटकर 73.5% रह गई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि गर्भनिरोधकों की उपलब्धता और प्रजनन दर के बीच सीधा संबंध है।
    कोविड के बाद बिगड़ी स्थिति

    बांग्लादेश के अधिकारियों के मुताबिक, कोविड-19 महामारी (2020) के दौरान गर्भनिरोधकों की मांग तो बढ़ी, लेकिन सरकार ने उस समय परिवार नियोजन को प्राथमिकता नहीं दी। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त वहां की मीडिया आुटलेट ‘द डेलीस्टार’ को बताया कि 2023 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने करीब एक साल तक गर्भनिरोधकों की खरीद रोक दी, जिससे आपूर्ति में भारी अंतर आ गया।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2019 में कंडोम की आपूर्ति 97.48 लाख थी, जो सितंबर 2025 तक घटकर 41.52 लाख रह गई। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार ने पिछले महीने सभी पांच गर्भनिरोधकों की खरीद के लिए एक परियोजना को मंजूरी दी है, लेकिन खरीद प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम तीन महीने लगेंगे। उन्होंने कहा कि सीमित मात्रा में कंडोम की खरीद की जा रही है, फिर भी अगले साल एक महीने तक सप्लाई बाधित रह सकती है।

    ढाका विश्वविद्यालय के जनसंख्या विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अमीनुल इस्लाम का कहना है कि गर्भनिरोधकों और स्टाफ की कमी ने जन्म नियंत्रण गतिविधियों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर प्रजनन दर पर पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में कई दंपति दो से अधिक बच्चे चाहने लगे हैं, जो चिंता का विषय है।

  • बढ़ सकती है आसिम मुनीर की टेंशन, पाकिस्तानी तालिबान बना रहा एयर फोर्स

    बढ़ सकती है आसिम मुनीर की टेंशन, पाकिस्तानी तालिबान बना रहा एयर फोर्स


    इस्‍लामाबाद। पाकिस्तान की परेशानी अब बढ़ने वाली है। बलोचिस्तान के लिए लड़ रहे उग्रवादियों ने पहले ही पाकिस्तानी रेलवे को उस क्षेत्र में बंद करवा दिया है। अब तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान भी अपने नए कारनामों की वजह से पाकिस्तान की नाक में दम करने वाला है। 2026 के लिए अपने नए संगठनात्मक ढांचे का ऐलान करते हुए टीटीपी ने बताया कि वह अब एयरफोर्स की एक यूनिट बनाने के प्रयास में है।
    एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी तालिबान का यह कदम उनके इस्लामाबाद की तरफ बढ़ने का नया तरीका है। टीटीपी के सूत्रों के मुताबिक इस नए ढांचे में उनके लड़ाकों की तैनाती और किस क्षेत्र के लिए कौन से कमांडर तैनात होंगे उसकी पूरी जानकारी होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर टीटीपी एयरफोर्स जैसी मजबूत प्रणाली को बनाने में कामयाब हो जाता है, तो यह पाकिस्तान के लिए बहुत ही बड़ा खतरा होगा। गौरतलब है कि अभी तक एक ही उग्रवादी संगठन ऐसा हुआ है, जिसके पास अपनी नौसेना और वायुसेना थी। वह था श्रीलंका का लिट्टे।

    अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तानी तालिबान ने इस्लामाबाद की नाक में दम करके रखा है। नवंबर 2022 में पाकिस्तान सरकार के साथ संघर्ष विराम खत्म करने के बाद टीटीपी लगातार पुलिसकर्मियों और कानून व्यवस्था से जुड़े लोगों पर हमले करता रहा है। इसके चलते पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांत लगातार अशांत हैं।

    पाकिस्तान तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान को फितना अल खवारिज कहकर संबोधित करता है। उन्होंने इस पर प्रतिबंध लगा रखा है। पाकिस्तान इसके कमांडरों को मारने के लिए लगातार अफगानिस्तान पर हमले करता रहता है। हाल ही में पाकिस्तान और तालिबान अफगानिस्तान के बीच जो लड़ाई शुरू हुई थी उसके पीछे तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान के कमांडरों पर किया गया हमला ही था। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार लगातार टीटीपी को समर्थन देती है, जबकि तालिबान का कहना है कि वह किसी भी तरह की आतंकी घटना के लिए अपने देश की जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देते।
    क्या टीटीपी के लिए एयरफोर्स बनाना मुमकिन है?

    तहरीक ए तालिबान के लिए एयरफोर्स बनाना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए बहुत ही उच्च तकनीक की जरूरत होती है। आज से 20 या 15 साल पहले यह बात कर रहे होते, तो हमें इस बात को कोरी धमकी मान सकते थे। लेकिन ड्रोन वॉर फेयर के इस युग में टीटीपी किस स्तर पर वायुसेना बनाने की बात कर रहा है इस पर अभी तक ज्यादा खुलासा नहीं हुआ है। अगर टीटीपी के हाथ उच्च तकनीक वाले ड्रोन और रॉकेट लॉन्चर और अन्य चीजें जल जाती हैं, तो फिर यह पाकिस्तान के लिए एक बड़ी परेशानी वाली बात होगी। हालांकि, तब भी पाकिस्तानी सेना का सामना कर पाना तालिबान के लिए आसान नहीं होगा।

  • सर्दियों में लेमन ग्रास टी इम्यूनिटी बूस्ट और एनर्जी का प्राकृतिक स्रोत

    सर्दियों में लेमन ग्रास टी इम्यूनिटी बूस्ट और एनर्जी का प्राकृतिक स्रोत


    नई दिल्ली । सर्दियों के मौसम में ठंड से बचाव और सेहत बनाए रखने के लिए लेमन ग्रास टी एक प्राकृतिक वरदान है। सर्दियों में लेमन ग्रास टी की चुस्की खासतौर पर फायदेमंद है। यह ताजगी भरी हर्बल ड्रिंक एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाती है।लेमन ग्रास टी न केवल पाचन सुधारती है बल्कि प्राकृतिक रूप से तनाव से राहत देती है और इम्यूनिटी बढ़ाती है। आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल हो रही यह चाय सर्दी-जुकाम से बचाव के लिए भी बेहतरीन है।
    भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लेमन ग्रास टी के फायदों से अवगत कराता है। इसका सेवन पाचन तंत्र के लिए बहुत फायदेमंद है। यह पेट फूलना गैस और अपच जैसी समस्याओं को दूर करती है। लेमन ग्रास टी में मौजूद सिट्रल कंपाउंड पाचन एंजाइम्स को एक्टिव करता है जिससे भोजन आसानी से पचता है। सर्दियों में भारी खाने से होने वाली तकलीफों में यह राहत देती है।

    प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में भी लेमन ग्रास टी का बड़ा योगदान है। इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं जो संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं। सर्दियों में वायरल इंफेक्शन और फ्लू से बचाव के लिए रोजाना एक कप पीना लाभकारी है। यह टी सूजन कम करने में भी प्रभावी है। एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण जोड़ों के दर्द मांसपेशियों की अकड़न और सर्दी से होने वाली सूजन में आराम मिलता है। साथ ही यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालती है और डिटॉक्स का काम करती है।

    लेमन ग्रास टी थकान को उतारने में भी प्रभावी है। रिलैक्सेशन को बढ़ावा देने वाली यह टी तनाव और चिंता कम करती है। इसकी सुगंध मूड को बेहतर बनाती है और नींद अच्छी आती है। सर्दियों की लंबी रातों में एक कप गर्म लेमन ग्रास टी पीना शांति का एहसास देता है। लेमन ग्रास टी बनाने के लिए ताजा या सूखे लेमन ग्रास के डंठल लें काटकर पानी में उबाल लें। इसे 5 से 10 मिनट तक उबालने के बाद छान लें। स्वाद के लिए इसमें शहद या नींबू भी मिला सकते हैं।लेमन ग्रास टी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसे रोजाना 1 या 2 कप से ज्यादा न पीएं। गर्भवती महिलाएं या कोई दवा ले रहे हों तो डॉक्टर से सलाह के बाद ही सेवन करें।

  • स्वाद और सेहत का अद्भुत मिलाजुला: रसोई के इस मसाले से पाएं दोनों का बेहतरीन संगम

    स्वाद और सेहत का अद्भुत मिलाजुला: रसोई के इस मसाले से पाएं दोनों का बेहतरीन संगम


    नई दिल्ली । आयुर्वेद बताता है कि भारतीय रसोई घर में ऐसे कई मसाले हैं जिनके सेवन से कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं को मात दी जा सकती है। ऐसे ही एक मसाले का नाम जायफल है जो न केवल व्यंजनों में स्वाद और खुशबू जोड़ता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद है।रसोई घर में रखा जायफल स्वाद बढ़ाने में कारगर है। औषधीय गुणों से भरपूर जायफल के बारे में आयुर्वेद विस्तार से जानकारी देता है। इसे दाल करी सब्जियां और मिठाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है।
    इसकी अनोखी सुगंध और हल्की मिठास किसी भी डिश को चार चांद लगा देती है।भारतीय व्यंजनों में जायफल का इस्तेमाल सदियों से होता आ रहा है। इसे अक्सर धनिया हल्दी मिर्च और अन्य मसालों के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है जो डिश को ताजगी और मसालेदार स्वाद देता है। गरम मसाला में भी जायफल शामिल होता है। मिठाइयों जैसे हलवा खीर या लड्डू में इसका पाउडर डालने से स्वाद दोगुना हो जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार जायफल सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला नहीं बल्कि सेहत का साथी भी है। जायफल का सबसे बड़ा फायदा नींद की समस्या में है। यह प्राकृतिक रूप से मानसिक शांति प्रदान करता है और अनिद्रा से राहत दिलाता है। रात को दूध में थोड़ा सा पीसा जायफल मिलाकर पीने से अच्छी नींद आती है। इसके अलावा जायफल पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह गैस अपच पेट फूलना और कब्ज जैसी आम समस्याओं से छुटकारा दिलाता है।

    जायफल में मौजूद तत्व पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं जिससे भोजन आसानी से पचता है। आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि सीमित मात्रा में जायफल का सेवन शरीर के लिए लाभकारी है। यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है जो इम्यूनिटी बढ़ाता है और सूजन कम करता है। हालांकि ज्यादा मात्रा में जायफल हानिकारक हो सकता है इसलिए रोजाना थोड़ी मात्रा ही इस्तेमाल करें। गर्भवती महिलाएं या कोई दवा ले रहे लोग डॉक्टर से सलाह लें।

  • महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज, अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का कोई अधिकार नहीं

    महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज, अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का कोई अधिकार नहीं


    कश्‍मीर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कैदियों की जेल बदलने पर बड़ा बयान दिया। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजन है कि जम्मू-कश्मीर के कैदियों को अन्य जगहों की जेलों से वापस घर लाने के आग्रह वाली उनकी याचिका को उच्च न्यायालय में खारिज कर दिया गया। स्थानीय कैदियों के स्थानांतरण का आग्रह करते हुए महबूबा मुफ्ती की ओर से दायर जनहित याचिका को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। एचसी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इसे राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए दायर किया गया है। महबूबा ने श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘अदालत का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण और आश्चर्यजनक है।’
    महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उच्च न्यायालय का कहना है कि कोई भी आम आदमी जनहित याचिका दायर कर सकता है, लेकिन चूंकि वह एक राजनीतिक नेता हैं, इसलिए उनकी जनहित याचिका राजनीतिक कारणों से है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘उच्च न्यायालय यह भूल रहा है कि राजनीतिक नेता जमीनी हकीकतों से गहराई से जुड़े रहते हैं। मैं एक राजनीतिक नेता होने के नाते जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्थिति से भली-भांति परिचित हूं। गरीब लोग जेल में बंद अपने परिजनों से मिलने नहीं जा सकते। वे अपना मुकदमा कैसे लड़ेंगे!’ पीडीपी प्रमुख ने यह भी सवाल उठाया कि अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया।
    महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज

    पीडीपी चीफ ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का अधिकार नहीं है। राजनीतिक नेता के रूप में मुझे कोई भी मुद्दा उठाने का पूरा अधिकार है। अदालत को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था। उसे सरकार से पूछना चाहिए था कि कितने विचाराधीन कैदी जेलों में हैं और उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।’ जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत में चर्चा उनके पेशे से परे इस मुद्दे पर होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, ‘अदालत ने मेरा मामला खारिज करने के लिए अजीब तर्क दिए हैं। यह फैसला तर्क पर आधारित होना चाहिए था, लेकिन मुझे खेद है कि अदालत ने ऐसा फैसला सुनाते हुए कहा कि मैं राजनीति कर रही हूं। अनुच्छेद 21 के तहत हमें इन मुद्दों को उठाने और अदालतों में जाने का मौलिक अधिकार है।’
    कुलदीप सिंह सेंगर मामले पर क्या कहा

    महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को खत्म नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल उन कैदियों को स्थानांतरित करने तक सीमित थी, जिन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है और इस फैसले ने न्यायपालिका में विश्वास को ठेस पहुंचाई है। बलात्कार के दोषी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा निलंबित किए जाने के बारे में पूछे जाने पर महबूबा ने आरोप लगाया कि न्यायपालिका का राजनीतिकरण कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ न्यायाधीश अब भी सत्ता के सामने खड़े होने को तैयार हैं। उनका इशारा सूरजपुर जिला न्यायालय की ओर से अखलाक मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप वापस लेने से इनकार किए जाने की ओर था। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश सौरभ द्विवेदी ने सरकार से लड़ाई लड़ी और उनसे कहा कि वे मामला वापस नहीं ले सकते, तथा आदेश दिया कि इसकी सुनवाई प्रतिदिन की जाए। महबूबा ने कहा, ‘इसका मतलब है कि स्थिति मिली-जुली है। अगर अधिकतर न्यायाधीश राजनीति से प्रभावित हो गए हैं, तो द्विवेदी जैसे न्यायाधीश बहुत कम हैं।’

  • इलाज न मिलने से भारतीय मूल के शख्स की मौत पर कनाडा को भारत के विदेश मंत्रालय ने सुनाई खरी-खरी

    इलाज न मिलने से भारतीय मूल के शख्स की मौत पर कनाडा को भारत के विदेश मंत्रालय ने सुनाई खरी-खरी

    नई दिल्‍ली। कनाडा में भारतीय मूल के शख्स की कथित चिकित्सकीय लापरवाही से हुई मौत पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रधीर जायसवाल ने शुक्रवार को दो टूक कहा कि इस मामले की जिम्मेदारी कनाडा सरकार को लेनी ही चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि मृतक भारतीय मूल का था, लेकिन वह कनाडा का नागरिक था।
    उन्होंने कहा, “व्यक्ति भले ही भारतीय मूल का था, लेकिन वह कनाडा का नागरिक था। इसलिए इस मामले में कनाडा सरकार की जिम्मेदारी बनती है।”

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 44 वर्षीय प्रशांत श्रीकुमार की कनाडा के एडमंटन शहर के ग्रे नन्स अस्पताल में इलाज का इंतजार करते हुए मौत हो गई। वह पेशे से अकाउंटेंट थे और तीन बच्चों के पिता थे। 22 दिसंबर को काम के दौरान उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। आरोप है कि गंभीर दर्द की शिकायत के बावजूद डॉक्टरों ने इसे गंभीर नहीं माना और उन्हें आठ घंटे से ज्यादा समय तक इंतजार कराया, जिससे उनकी मौत हो गई।
    ‘पापा, मैं दर्द सहन नहीं कर पा रहा’

    प्रशांत के पिता कुमार श्रीकुमार ने बताया, ‘‘उसने मुझसे कहा, ‘पापा, मैं दर्द सहन नहीं कर पा रहा हूं।’ उसने अस्पताल कर्मियों को भी बताया कि उसे असहनीय दर्द हो रहा है।” परिजनों के अनुसार, इसके बाद अस्पताल में प्रशांत का इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) किया गया था, लेकिन उन्हें बताया गया कि रिपोर्ट में कोई भी दिक्कत की बात सामने नहीं आई है और उन्हें इंतजार करने को कहा गया। उन्होंने बताया कि इस दौरान उनके बेटे को दर्द के लिए ‘टाएलेनॉल’ दवा दी गई। कुमार ने बताया कि वह इंतज़ार करता रहा, नर्से थोड़े अंतराल पर प्रशांत का रक्तचाप जांचती रहीं। कुमार ने बताया कि आठ घंटे से अधिक समय बीतने के बाद प्रशांत को उपचार के लिए बुलाया गया।
    परिवार में पत्नी और तीन बच्चे

    कुमार ने बताया, ‘‘बैठने के बाद 10 सेकंड ही बीते होंगे, उसने मुझे देखा, खड़ा हुआ, अपना हाथ सीने पर रखा और गिर पड़ा।’’ रिपोर्ट के अनुसार नर्सों ने चिकित्सकों को बुलाया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, प्रत्यक्ष तौर पर हृदयाघात से उनकी मौत हो गई। प्रशांत के परिवार में पत्नी और तीन बच्चे हैं जिनकी उम्र तीन, 10 और 14 वर्ष है।
    भारतीय छात्र की गोली मारकर हत्या मामले पर भी प्रतिक्रिया

    इसी ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय ने कनाडा में भारतीय छात्र की गोली मारकर हत्या पर भी गहरा दुख जताया।

    MEA ने कहा कि भारतीय दूतावास पीड़ित परिवार के संपर्क में है और हर संभव मदद की जा रही है। मृतक छात्र की पहचान शिवांक अवस्थी के रूप में हुई है, जो टोरंटो विश्वविद्यालय में पीएचडी का छात्र था। मंगलवार को यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो के स्कारबरो कैंपस के पास उसका शव मिला। पुलिस के अनुसार, उसे गोली मारी गई थी और इस मामले को हत्या मानकर जांच की जा रही है।

    रणधीर जायसवाल ने कहा, “यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। हम पीड़ित परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर मामले की जानकारी जुटा रहे हैं।” इन दोनों घटनाओं के बाद कनाडा में भारतीय समुदाय की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

  • वडोदरा का वेमार प्राइमरी स्कूल बना प्रेरणा का स्रोत, बच्चों को शिक्षा से बढ़कर भविष्य की दिशा दे रहा है

    वडोदरा का वेमार प्राइमरी स्कूल बना प्रेरणा का स्रोत, बच्चों को शिक्षा से बढ़कर भविष्य की दिशा दे रहा है


    अहमदाबाद । वडोदरा जिले के सावली तालुका स्थित वेमार प्राइमरी स्कूल आज गुजरात के सरकारी स्कूलों के लिए एक आदर्श उदाहरण बनकर उभर रहा है। यह स्कूल बच्चों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखता बल्कि उन्हें व्यावहारिक शिक्षा के जरिए भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कर रहा है।गुजरात सरकार की ज्ञान ही शक्ति है पहल के तहत स्कूल में रचनात्मकता आत्मनिर्भरता और नवाचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    स्कूल में नियमित पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को विभिन्न सह-पाठ्यक्रम और कौशल-आधारित गतिविधियों में भी सक्रिय रूप से शामिल किया जाता है। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनकी छिपी प्रतिभाएं सामने आ रही हैं। यहां रोबोट निर्माण हस्तशिल्प मार्बल आर्ट मार्शल आर्ट और व्यावसायिक प्रशिक्षण जैसी गतिविधियां शुरू की गई हैं जिन्हें लेकर छात्रों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।वेमार प्राइमरी स्कूल के शिक्षक बच्चों के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं। वे न केवल पढ़ाई पर ध्यान देते हैं बल्कि बच्चों को प्रयोगात्मक सीख के लिए भी प्रेरित करते हैं। कक्षा में पढ़ाई और हाथों से सीखने के इस संतुलन ने प्राथमिक स्तर पर शिक्षा को अधिक रोचक और प्रभावी बना दिया है।

    शिक्षकों का मानना है कि बच्चों के शुरुआती वर्ष उनके बौद्धिक विकास और जीवन कौशल को मजबूत करने के लिए बेहद अहम होते हैं। इसी सोच के साथ यह स्कूल मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन में लागू मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस और समग्र शिक्षा अभियान की नीतियों को जमीन पर उतार रहा है। अकादमिक पढ़ाई के साथ कौशल विकास पर जोर देकर वेमार प्राइमरी स्कूल ने गुजरात के सरकारी स्कूल तंत्र में समग्र और व्यावहारिक शिक्षा का एक नया मानक स्थापित किया है।गुजरात ने शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत और लगातार बढ़ता हुआ बुनियादी ढांचा तैयार किया है। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक राज्य में सार्वजनिक निवेश और नीतिगत फोकस के चलते हजारों सरकारी और अनुदानित स्कूलों को उन्नत कक्षाओं डिजिटल लर्निंग टूल्स विज्ञान प्रयोगशालाओं और पुस्तकालयों से लैस किया गया है।

    उच्च शिक्षा के स्तर पर गुजरात में विश्वविद्यालयों इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों का व्यापक नेटवर्क है। आईआईटी गांधीनगर आईआईएम अहमदाबाद और एम्स राजकोट जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान राज्य की शैक्षणिक पहचान को मजबूत करते हैं। अहमदाबाद गांधीनगर वडोदरा सूरत और राजकोट जैसे शिक्षा केंद्रों में मजबूत ढांचा छात्रावास शोध सुविधाएं और इनक्यूबेशन सेंटर उपलब्ध हैं। वहीं डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्मार्ट क्लासरूम ग्रामीण इलाकों तक शिक्षा की पहुंच को मजबूत कर रहे हैं जिससे गुजरात देश के अग्रणी शिक्षा राज्यों में अपनी जगह बना रहा है।

  • गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह

    गुजरात बन रहा स्टार्टअप और नवाचार का हब, आई-हब से युवा स्टार्टअप्स को मिल रही प्रगति की राह


    अहमदाबाद । गुजरात देश के उन राज्यों में तेजी से शामिल हो रहा है जहां नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को मजबूत आधार मिल रहा है। सक्रिय सरकारी नीतियों और युवाओं को आगे बढ़ाने वाले दृष्टिकोण के चलते गुजरात आज युवा उद्यमिता का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है। गुजरात सरकार की स्टूडेंट स्टार्टअप एंड इनोवेशन पॉलिसी के तहत स्थापित आई-हब गुजरात ने नए विचारों को सफल व्यवसायों में बदलने में अहम भूमिका निभाई है।

    एसएसआईपी को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए वर्ष 2019 में ई-हब गुजरात की स्थापना की गई थी। यह एक सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म के रूप में काम करता है जहां छात्रों नवाचारकर्ताओं और स्टार्टअप्स को विचार से लेकर बाजार तक की पूरी यात्रा में सहयोग मिलता है। आइडिया की पहचान उसकी जांच इनक्यूबेशन और बाजार तक पहुंच बनाने तक ई-हब हर चरण में मार्गदर्शन मेंटरशिप और संस्थागत समर्थन प्रदान करता है।

    अहमदाबाद में स्थित अत्याधुनिक ई-हब परिसर में इस समय सैकड़ों स्टार्टअप्स को तैयार किया जा रहा है। यहां स्टार्टअप्स को इनक्यूबेशन सुविधाएं अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और फंडिंग के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं जिससे युवा उद्यमियों को शुरुआती चुनौतियों से उबरने और अपने विचारों को टिकाऊ व्यवसाय में बदलने में मदद मिलती है।

    गुजरात की नवाचार केंद्रित सोच को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। भारत सरकार की स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग 2018 में गुजरात को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया था। यह उपलब्धि एसएसआईपी जैसी नीतियों और राज्य के मजबूत स्टार्टअप ढांचे की सफलता को दर्शाती है। गुजरात सरकार के शिक्षा विभाग के अंतर्गत काम करने वाला ई-हब छात्रों शैक्षणिक संस्थानों उद्योग और समाज के बीच एक मजबूत सेतु का काम कर रहा है।

    गुजरात लगातार भारत सरकार की स्टार्टअप रैंकिंग में शीर्ष राज्यों में शामिल रहा है। इसका श्रेय एसएसआईपी ई-हब गुजरात सेक्टर आधारित इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप्स के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाओं को जाता है। राज्य में फिनटेक एग्रीटेक हेल्थटेक मैन्युफैक्चरिंग क्लीन एनर्जी और डीप टेक जैसे क्षेत्रों में हजारों पंजीकृत स्टार्टअप्स सक्रिय हैं।

    अहमदाबाद गांधीनगर सूरत वडोदरा और राजकोट जैसे शहर स्टार्टअप हब के रूप में उभर चुके हैं। यहां 100 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर विश्वविद्यालयों से जुड़े इनोवेशन सेल सरकारी सीड फंडिंग और मजबूत एमएसएमई व औद्योगिक क्लस्टर मौजूद हैं। विश्वस्तरीय बंदरगाह बेहतर लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी निवेशकों के अनुकूल शासन और व्यापार व निर्माण से जुड़ी उद्यमशील संस्कृति गुजरात को देशभर के स्टार्टअप्स और नवाचारकर्ताओं के लिए पसंदीदा राज्य बना रही है।

  • गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया नमन, देशवासियों को दी शुभकामनाएं

    गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर प्रधानमंत्री मोदी ने किया नमन, देशवासियों को दी शुभकामनाएं


    नई दिल्ली । पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखाश्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पवित्र प्रकाश उत्सव पर हम उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं। वे साहस करुणा और बलिदान की मूर्ति हैं। उनका जीवन और शिक्षाएं हमें सच्चाई न्याय धर्म के लिए खड़े होने और मानवीय गरिमा की रक्षा करने के लिए प्रेरित करती हैं। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी का विजन पीढ़ियों को सेवा और निस्वार्थ कर्तव्य के लिए मार्गदर्शन करता रहता है।

    उन्होंने इस साल की शुरुआत में तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब की अपनी यात्रा की कुछ यादगार तस्वीरें साझा कीं। इन तस्वीरों में प्रधानमंत्री को गुरुद्वारे में प्रार्थना करते जोड़ा साहिब के दर्शन करते और सेवादारों के साथ लंगर परोसते हुए देखा जा सकता है।दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दी।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखाअन्याय और दमन के विरुद्ध चेतना जागृत करने वाले खालसा पंथ के संस्थापक सरबंस दानी साहिब-ए-कमाल श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पावन प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। उन्होंने आगे लिखागुरु साहिब का जीवन शौर्य त्याग और आध्यात्मिक उत्कर्ष का अद्वितीय समन्वय है। उन्होंने मानवता को यह संदेश दिया कि धर्म सत्य और मर्यादा की रक्षा हेतु सर्वस्व का समर्पण ही सर्वोच्च मानवीय कर्तव्य है। उनके आदर्श बलिदान और महान गुरु परंपरा के प्रति उनकी अडिग निष्ठा युगों-युगों तक समाज और राष्ट्र का मार्गदर्शन करती रहेगी।

    सीएम रेखा गुप्ता ने दशम गुरु के चरणों के नमन करते हुए लिखाउनके सत्य सेवा और बलिदान के सिद्धांतों को जीवन में आत्मसात करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा है। गुरु गोबिंद सिंह सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। पटना साहिब वह पवित्र स्थल है जहां 1666 में गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म हुआ था। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की जो साहस समानता और न्याय का प्रतीक बना। मुगल अत्याचारों के खिलाफ उन्होंने योद्धा बनकर संघर्ष किया और पांच प्यारों को अमृत छकाकर खालसा का जन्म दिया।