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  • काले बादलों और बारिश से सागर में बढ़ी ठंडक सीजन में अब तक 36.7 इंच बारिश सामान्य कोटे से 12 इंच दूर

    काले बादलों और बारिश से सागर में बढ़ी ठंडक सीजन में अब तक 36.7 इंच बारिश सामान्य कोटे से 12 इंच दूर


    सागर। सागर जिले में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पिछले 24 घंटे से जिले के कई इलाकों में रिमझिम बारिश का दौर जारी है। शनिवार सुबह से आसमान में काले और घने बादल छाए रहे और रुक रुककर बारिश होती रही। लगातार हो रही बारिश के कारण वातावरण में ठंडक बढ़ गई है। दिन और रात दोनों के तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। अधिकतम तापमान करीब 5 डिग्री तक नीचे आया है जबकि न्यूनतम तापमान में भी करीब 3 डिग्री की गिरावट दर्ज हुई है।

    फिलहाल जिले में अधिकतम तापमान करीब 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच गया है। बारिश के चलते मौसम सुहावना बना हुआ है। सुबह से बादल छाए रहने के कारण धूप का असर भी कम रहा। कई इलाकों में रुक रुककर बारिश होती रही जिससे सड़कों और खुले इलाकों में भी नमी बनी रही।

    मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण छत्तीसगढ़ में बना डिप्रेशन सागर जिले से दक्षिण पूर्व दिशा में सक्रिय है और उत्तर उत्तर पश्चिम की ओर आगे बढ़ रहा है। इसके अगले करीब 12 घंटे में कमजोर होकर निम्न दबाव क्षेत्र में बदलने की संभावना जताई गई है। हालांकि सिस्टम कमजोर होने के बाद भी इसकी नमी का असर मध्यप्रदेश में बना रह सकता है। यही वजह है कि शनिवार को भी जिले में बादल छाए रहने और दोपहर के बाद कुछ स्थानों पर गरज चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक 27 सितंबर से सिस्टम के कमजोर होने के बाद मौसम में धीरे धीरे सुधार आ सकता है। इसके साथ ही बारिश का दौर भी कम होने के आसार हैं। हालांकि स्थानीय स्तर पर नमी बनी रहने के कारण कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

    पिछले 24 घंटे के दौरान सागर जिले में औसतन 9.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है। सागर शहर में 8.8 मिलीमीटर बारिश हुई। जैसीनगर और राहतगढ़ में 13 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। खुरई में 11 मिलीमीटर और मालथौन में 8 मिलीमीटर बारिश हुई। बंडा में 9 मिलीमीटर जबकि शाहगढ़ में सबसे अधिक 14 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। गढ़ाकोटा और केसली में भी 11 11 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई।

    बारिश के बावजूद जिले में इस मानसून सीजन की कुल औसत बारिश सामान्य आंकड़े से अभी पीछे है। अब तक सागर जिले में 36.7 इंच औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है जबकि जिले की सामान्य बारिश 48.4 इंच मानी जाती है। सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा करने के लिए अभी करीब 12 इंच औसत बारिश की जरूरत है।

    पिछले साल 26 सितंबर तक जिले में 44.3 इंच औसत बारिश दर्ज हो चुकी थी। इस लिहाज से इस वर्ष अब तक बारिश का आंकड़ा पिछले साल की तुलना में करीब 17.09 प्रतिशत कम है। आने वाले दिनों में मौसम का रुख और बारिश की स्थिति यह तय करेगी कि जिले का बारिश का आंकड़ा सामान्य कोटे के कितने करीब पहुंचता है।

  • भारत का मजबूत बॉन्ड बाजार बना भरोसे का आधार, आर्थिक मजबूती से शेयरों में लौट सकती है तेजी

    भारत का मजबूत बॉन्ड बाजार बना भरोसे का आधार, आर्थिक मजबूती से शेयरों में लौट सकती है तेजी


    नई दिल्ली ।
    भारतीय बॉन्ड बाजार ने हाल के वर्षों में घरेलू परिस्थितियों के साथ-साथ वैश्विक वित्तीय दबावों के बीच भी मजबूत प्रदर्शन किया है। भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता के अनुसार, देश के बॉन्ड बाजार की मजबूती केवल पिछले प्रदर्शन की तुलना में ही बेहतर नहीं रही है, बल्कि दुनिया के कई प्रमुख बाजारों की तुलना में भी इसका प्रदर्शन मजबूत रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती का असर आगे चलकर शेयर बाजार में भी दिखाई दे सकता है।

    उन्होंने बताया कि अमेरिका में बॉन्ड यील्ड लंबे समय के ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बावजूद भारतीय बॉन्ड बाजार ने अपेक्षाकृत मजबूती बनाए रखी। इसके पीछे केंद्र सरकार की राजकोषीय अनुशासन के प्रति प्रतिबद्धता और आने वाले वर्षों में आर्थिक विकास की बेहतर संभावनाओं को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। वित्तीय स्थिति में सुधार और भविष्य में राजकोषीय परिणामों के बेहतर रहने की उम्मीद ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।

    मौद्रिक नीति की विश्वसनीयता और महंगाई से जुड़े संरचनात्मक दबावों में कमी को भी बॉन्ड बाजार के लिए सकारात्मक माना गया है। इन परिस्थितियों ने भारतीय ऋण बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद की है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत के बॉन्ड बाजार की मजबूती और सार्वजनिक वित्त को संतुलित रखने की नीति को महत्वपूर्ण माना गया है।

    हालांकि, शेयर बाजार में बॉन्ड बाजार जैसी मजबूती अभी पूरी तरह दिखाई नहीं दी है। इसके पीछे वैश्विक स्तर पर निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को एक वजह माना जा रहा है। खासतौर पर कुछ विकसित अर्थव्यवस्थाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कंपनियों और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी विकास संभावनाएं निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

    पूनम गुप्ता के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजार ने जून 2022 से सितंबर 2024 के बीच उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। इसके बाद कुछ दूसरे देशों के बाजारों में तेजी का दौर देखने को मिला। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक मजबूती लंबे समय में शेयर बाजार के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है और भारतीय इक्विटी दोबारा निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन सकती है।

    उन्होंने भारत के भुगतान संतुलन और रुपये की स्थिति पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, भारत लंबे समय से सीमित चालू खाता घाटे और अपेक्षाकृत मजबूत पूंजी प्रवाह की स्थिति में रहा है। समय के साथ सकल घरेलू उत्पाद के मुकाबले चालू खाता घाटे में कमी आई है, जिससे देश के बाहरी क्षेत्र की मजबूती बढ़ी है।

    उन्होंने कहा कि भारत का चालू खाता घाटा उन स्तरों से काफी नीचे है, जिन्हें आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित माना जाता है। देश के लिए शुद्ध सेवा निर्यात और विदेशों में रहने वाले भारतीयों से मिलने वाला रेमिटेंस महत्वपूर्ण संरचनात्मक ताकत बने हुए हैं।

    सेवा क्षेत्र से होने वाली आय और रेमिटेंस लगातार मजबूत रहने के कारण वस्तुओं के व्यापार में होने वाले घाटे की भरपाई करने में मदद मिलती है। इसी वजह से भारत का चालू खाता घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 1 प्रतिशत से नीचे नियंत्रित रहने में सफल रहा है। यह स्थिति देश की बाहरी आर्थिक स्थिरता और भविष्य की विकास संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार मानी जा रही है।

  • वैश्विक दबाव के बीच लगातार सातवें सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी पर रहा बिकवाली का असर

    वैश्विक दबाव के बीच लगातार सातवें सप्ताह शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी पर रहा बिकवाली का असर

    नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक और भू-राजनीतिक चिंताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार सातवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। सप्ताह के दौरान कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाए रखा। हालांकि, सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन प्रमुख सूचकांकों में कुछ सुधार देखने को मिला।

    साप्ताहिक आधार पर निफ्टी में 0.88 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। शुक्रवार को निफ्टी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 23,140 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह सेंसेक्स में शुक्रवार को 315 अंक यानी 0.43 प्रतिशत की तेजी आई और यह 73,895 के स्तर पर बंद हुआ। इसके बावजूद पूरे सप्ताह के आधार पर सेंसेक्स में 0.54 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

    सप्ताह के दौरान बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। गुरुवार को दोनों प्रमुख सूचकांकों में 1.6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई थी। इसके बाद शुक्रवार को कुछ चुनिंदा शेयरों में निचले स्तर पर खरीदारी बढ़ने से बाजार में सीमित सुधार आया। हालांकि, सप्ताहभर के दबाव को पूरी तरह दूर करने में यह तेजी सफल नहीं रही।

    कच्चे तेल की कीमतों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। सप्ताह के दौरान ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से अधिक के स्तर पर कारोबार करता रहा। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी चिंताओं ने तेल कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा। सप्ताह के अंत में तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, जिससे आयात बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर संभावित दबाव को लेकर चिंता कुछ कम हुई।

    अमेरिकी बॉन्ड बाजार में बढ़ी यील्ड भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौती बनी रही। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड सप्ताह के दौरान 5.10 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई। ऊंची बॉन्ड यील्ड से वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां सख्त होती हैं और उभरते बाजारों की परिसंपत्तियों के प्रति निवेशकों का आकर्षण प्रभावित हो सकता है।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा। सप्ताह के दौरान विदेशी निवेशकों ने 11,490 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिक्री की। यह लगातार छठा सप्ताह रहा, जब विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में शुद्ध विक्रेता रहे। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी और सप्ताह के दौरान 16,398 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया। घरेलू निवेश से बाजार में गिरावट को कुछ हद तक सीमित करने में मदद मिली।

    सितंबर में अब तक विदेशी निवेशक 18,531 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 52,617 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की है। इसके बावजूद निफ्टी अगस्त के अंत के स्तर से करीब 3.9 प्रतिशत नीचे बना हुआ है।

    आने वाले सप्ताह में बाजार की दिशा कई वैश्विक संकेतों से प्रभावित हो सकती है। पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और अमेरिका के दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। तकनीकी स्तर पर 23,000 को निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट क्षेत्र और 23,200 को निकटतम रेजिस्टेंस स्तर माना जा रहा है। ऐसे में वैश्विक घटनाक्रम और निवेश प्रवाह बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव की स्थिति बनाए रख सकते हैं।

  • एक हफ्ते में सोना 4 हजार और चांदी 10 हजार रुपये सस्ती, दिल्ली सर्राफा बाजार में फिर दिखी हलचल

    एक हफ्ते में सोना 4 हजार और चांदी 10 हजार रुपये सस्ती, दिल्ली सर्राफा बाजार में फिर दिखी हलचल


    नई दिल्ली ।
    दिल्ली के सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में सप्ताहभर की बड़ी गिरावट के बाद कुछ बदलाव देखने को मिला। सोने के भाव में शुक्रवार को 200 रुपये की मामूली बढ़त दर्ज की गई और 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना 1,52,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे लगातार चार कारोबारी सत्रों से जारी सोने की गिरावट पर फिलहाल विराम लगा।

    इससे एक दिन पहले गुरुवार को सोना 1,52,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। शुक्रवार की बढ़त के बावजूद पूरे सप्ताह की तस्वीर देखें तो कीमती धातुओं की कीमतों में काफी दबाव रहा। एक सप्ताह के दौरान सोने के भाव में करीब 4,000 रुपये यानी लगभग 2.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, चांदी की कीमत में इससे भी बड़ी गिरावट देखने को मिली और यह एक सप्ताह में करीब 10,000 रुपये यानी लगभग 4 प्रतिशत सस्ती हो गई।

    स्थानीय सर्राफा बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमत 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर स्थिर रही। सप्ताह की शुरुआत में कीमती धातुओं की कीमतों में कमजोरी का असर लगातार कई कारोबारी सत्रों तक देखने को मिला। हालांकि, शुक्रवार को निचले स्तर पर खरीदारी बढ़ने से सोने के भाव को कुछ सहारा मिला और इसमें मामूली सुधार दर्ज किया गया।

    कीमती धातुओं की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार के घटनाक्रम का भी असर रहा। सप्ताह के दौरान अमेरिकी डॉलर में तेज मजबूती ने सोने पर दबाव बनाया। डॉलर की मजबूती आम तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर में कारोबार करने वाली कीमती धातुओं के लिए चुनौती पैदा करती है। हालांकि, सप्ताह के अंत में डॉलर अपने हालिया उच्च स्तर से नीचे आया, जिससे सोने और चांदी को कुछ राहत मिली।

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर भी बाजार के माहौल पर पड़ा। शुक्रवार को इन परिस्थितियों के बीच निवेशकों की धारणा में कुछ सुधार दिखाई दिया। इसके साथ ही बॉन्ड बाजार में स्थिरता आने से भी कीमती धातुओं की कीमतों को सीमित समर्थन मिला।

    विदेशी बाजार में भी शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में सुधार दर्ज किया गया। हाजिर सोना 27.73 डॉलर यानी करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 4,301.40 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इसी तरह हाजिर चांदी में करीब 1.4 प्रतिशत की तेजी आई और इसकी कीमत 64.72 डॉलर प्रति औंस रही।

    विदेशी बाजार में आई इस तेजी से सोने की कीमत एक बार फिर 4,300 डॉलर प्रति औंस के स्तर से ऊपर पहुंच गई, जबकि चांदी भी 65 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंची। इससे पिछले दो कारोबारी सत्रों में आई गिरावट से कुछ हद तक उबरने में मदद मिली।

    फिलहाल भारतीय बाजार में सप्ताहभर की गिरावट के बाद सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार को मिला सुधार निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहा। हालांकि, पूरे सप्ताह के आंकड़ों में दोनों कीमती धातुओं की कीमतें अभी भी निचले स्तर पर रहीं। शनिवार और रविवार को सर्राफा बाजार बंद रहने के कारण अब अगले कारोबारी सत्र में कीमतों की दिशा पर बाजार की नजर रहेगी।

  • जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के प्रस्ताव पर हंगामा, नारेबाजी और धक्कामुक्की के बाद कार्यवाही स्थगित

    जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पूर्ण राज्य के प्रस्ताव पर हंगामा, नारेबाजी और धक्कामुक्की के बाद कार्यवाही स्थगित


    नई दिल्ली । जम्मू-कश्मीर विधानसभा में शुक्रवार को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के प्रस्ताव को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने केंद्र शासित प्रदेश को तत्काल और पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग वाला प्रस्ताव सदन में पेश किया। प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भाजपा विधायकों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद सदन का माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया। नारेबाजी, तीखी बहस, धक्कामुक्की और दस्तावेजों को फाड़ने की घटनाओं के बीच विधानसभा की कार्यवाही पहले कुछ समय और बाद में सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रस्ताव के जरिए जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया गया और इसे आगे भारत सरकार के पास भेजने की बात भी शामिल थी। हालांकि, प्रस्ताव की प्रस्तावना में वर्ष 2000 के स्वायत्तता संबंधी प्रस्ताव और नवंबर 2024 में पारित विशेष दर्जे से जुड़े प्रस्ताव के संदर्भ ने विवाद खड़ा कर दिया।

    भाजपा विधायकों ने प्रस्ताव में स्वायत्तता के पुराने संदर्भ को शामिल किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सदन में स्वायत्तता से संबंधित विषय पर चर्चा नहीं होनी चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते कई विधायक अपनी सीटों से उठकर सदन के बीचोंबीच पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे।

    हंगामे के दौरान प्रस्ताव की प्रतियां फाड़कर सदन के बीच में फेंके जाने की भी घटना सामने आई। स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने सदन के बीच से एक कुर्सी उठाने का प्रयास किया। मार्शलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की और बाद में उन्हें सदन से बाहर ले जाया गया।

    विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने कई बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने देने की अपील की। लेकिन लगातार जारी नारेबाजी और हंगामे के कारण स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद अध्यक्ष ने पहले करीब 30 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित की। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी हंगामा जारी रहा, जिसके बाद सदन की बैठक सोमवार तक स्थगित कर दी गई।

    इससे पहले कांग्रेस विधायकों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयोग को लेकर भी सदन में विरोध जताया था। इस दौरान नारेबाजी हुई और सदन का माहौल पहले से ही गरम रहा।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पूर्ण राज्य के दर्जे के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुराने सार्वजनिक बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में, जहां नेता प्रतिपक्ष भी मौजूद थे, उन्होंने राज्य के दर्जे का मुद्दा उठाया था। उनके अनुसार, उस समय प्रधानमंत्री ने इसे सामान्य वादा नहीं बल्कि ‘मोदी की गारंटी’ बताया था। उमर ने सवाल उठाया कि यदि यह गारंटी थी, तो अब तक इसे पूरा क्यों नहीं किया गया।

    जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। विधानसभा में शुक्रवार की कार्यवाही ने इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और भाजपा के बीच मतभेद को एक बार फिर सामने ला दिया। फिलहाल प्रस्ताव पर आगे की चर्चा और सदन की अगली कार्रवाई सोमवार को होने की संभावना है।

  • अरिजीत सिंह से तुलना पर अभिजीत सावंत ने खोला पुराना राज, बोले- एक समय मैं बहुत पॉपुलर था लेकिन…

    अरिजीत सिंह से तुलना पर अभिजीत सावंत ने खोला पुराना राज, बोले- एक समय मैं बहुत पॉपुलर था लेकिन…


    नई दिल्ली । अभिजीत सावंत और अरिजीत सिंह ने साल 2005 के आसपास अपने संगीत करियर की शुरुआत की, लेकिन दोनों का सफर आगे चलकर बिल्कुल अलग दिशा में गया। एक ओर अभिजीत सावंत रियलिटी शो जीतने के बाद अचानक घर-घर में पहचान बनाने वाले गायक बन गए, वहीं अरिजीत सिंह ने लंबे समय तक पर्दे के पीछे रहकर संगीतकारों और कंपोजर्स के साथ काम किया। अब अभिजीत ने दोनों के शुरुआती दौर की तुलना करते हुए अपने अनुभव साझा किए हैं।

    अभिजीत सावंत ने बताया कि रियलिटी शो जीतने के बाद उन्हें बहुत कम समय में बड़ी लोकप्रियता मिल गई थी। उस दौर में वह लगातार लोगों की नजरों में थे और उनके करियर को लेकर उम्मीदें भी काफी बढ़ गई थीं। दूसरी तरफ अरिजीत उस समय लाइमलाइट से काफी दूर थे। वह स्टूडियो में जाकर संगीत से जुड़े अलग-अलग काम कर रहे थे और अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे।

    अभिजीत के मुताबिक, शुरुआती वर्षों में अरिजीत को बतौर गायक वह पहचान नहीं मिली थी, जो बाद में उन्हें हासिल हुई। उन्होंने बताया कि अरिजीत ने करीब एक दशक तक म्यूजिक इंडस्ट्री में अलग-अलग भूमिकाओं में काम करते हुए अनुभव हासिल किया। इस दौरान उन्होंने कई संगीतकारों और म्यूजिशियंस के साथ काम किया और धीरे-धीरे अपनी क्षमता को मजबूत किया।

    अपने उस दौर को याद करते हुए अभिजीत ने कहा कि अगर उस समय दोनों की लोकप्रियता की तुलना की जाए, तो वह खुद काफी ज्यादा लोकप्रिय थे, जबकि अरिजीत को बहुत कम लोग जानते थे। हालांकि, दोनों के सामने मौजूद चुनौतियां अलग थीं। अभिजीत पर अचानक मिली लोकप्रियता को बनाए रखने का दबाव था, जबकि अरिजीत को लंबे समय तक अपनी पहचान बनाने के लिए इंतजार और मेहनत करनी पड़ी।

    अभिजीत ने यह भी बताया कि अरिजीत ने उन वर्षों का इस्तेमाल अपने संगीत अनुभव को मजबूत करने में किया। उन्होंने संगीतकारों के साथ लगातार काम किया और इसी प्रक्रिया में अपनी प्रतिभा को निखारा। इसके बाद उन्हें बतौर प्लेबैक सिंगर बड़े अवसर मिलने लगे और उनकी आवाज ने अलग पहचान बनानी शुरू की।

    अरिजीत सिंह के करियर में फिल्म ‘आशिकी 2’ का गाना ‘तुम ही हो’ बेहद महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। हालांकि इससे पहले भी वह फिल्मों के लिए गाने रिकॉर्ड कर चुके थे, लेकिन इस गीत ने उन्हें देशभर में बड़ी पहचान दिलाई। अभिजीत ने भी माना कि ‘तुम ही हो’ अरिजीत के करियर में ऐसा गाना साबित हुआ, जिसने उनकी पहचान को पूरी तरह बदल दिया।

    अभिजीत ने अरिजीत की सफलता को केवल मेहनत से जोड़ने के बजाय किस्मत के पहलू का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि किसी खास गाने का किसी कलाकार की आवाज तक पहुंचना कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। उनके अनुसार, हर कलाकार का अपना समय और अपना सफर होता है।

    अभिजीत ने यह भी कहा कि दर्शकों को केवल सफल व्यक्ति की उपलब्धियों को देखकर दूसरे लोगों की कमियां नहीं निकालनी चाहिए। उनके मुताबिक, हर कलाकार अपनी जिंदगी और करियर में आगे बढ़ने के लिए प्रयास करता है और हर किसी की परिस्थितियां अलग होती हैं। इसलिए लोगों को अलग-अलग कलाकारों के सफर को समझने की कोशिश करनी चाहिए।

  • नानी ने बताया बेटे अर्जुन का उनकी फिल्मों के चुनाव पर कितना असर, ‘द पैराडाइज’ को लेकर भी किया खुलासा

    नानी ने बताया बेटे अर्जुन का उनकी फिल्मों के चुनाव पर कितना असर, ‘द पैराडाइज’ को लेकर भी किया खुलासा


    नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के अभिनेता नानी इन दिनों अपनी फिल्म ‘द पैराडाइज’ को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म में उन्होंने पहले से अलग और ज्यादा इंटेंस अंदाज में किरदार निभाया है। इसी बीच एक प्रमोशनल बातचीत में नानी ने अपने करियर, फिल्मों के चुनाव और बेटे अर्जुन के उनकी पसंद पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में खुलकर बात की। अभिनेता ने बताया कि पिता बनने के बाद फिल्मों को लेकर उनका नजरिया पहले की तुलना में काफी बदला है।

    नानी लंबे समय से अलग-अलग तरह के किरदारों और पारिवारिक दर्शकों के बीच लोकप्रिय फिल्मों के लिए पहचाने जाते हैं। हालांकि, उन्होंने अपने करियर में लगातार अलग तरह के प्रयोग भी किए हैं। साल 2020 में रिलीज हुई फिल्म ‘वी’ में उन्होंने सीरियल किलर का किरदार निभाकर अपनी सामान्य छवि से हटकर भूमिका निभाई थी। इसके बाद भी वह एक्शन और गंभीर विषयों वाली फिल्मों का हिस्सा बने।

    फिल्मों के चुनाव पर बात करते हुए नानी ने बताया कि उनके बेटे अर्जुन के बड़े होने का असर भी उनके फैसलों पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि अब वह इस बात के बारे में सोचते हैं कि जब उनका बेटा बड़ा होकर उनकी फिल्में देखेगा, तब वह उन दृश्यों को किस नजर से देखेगा। अभिनेता के मुताबिक, वह ऐसा कोई मौका नहीं चाहते जब उनका बेटा उनकी फिल्म देखते हुए असहज महसूस करे और उन्हें खुद भी उस स्थिति में शर्मिंदगी महसूस हो।

    नानी ने मजाकिया अंदाज में यह सवाल भी रखा कि जब उनका बेटा 15 साल का होगा और उनकी फिल्म देखेगा, तब क्या उन्हें कुछ दृश्यों के दौरान चैनल बदलना पड़ेगा। उन्होंने माना कि बेटे के जीवन में आने के बाद उनकी फिल्में चुनने की प्रक्रिया पर सकारात्मक असर पड़ा है। अब किसी प्रोजेक्ट को स्वीकार करते समय वह उसके कंटेंट और परिवार के नजरिए से भी विचार करते हैं।

    हालांकि, नानी ने यह भी स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि वह सिर्फ पारिवारिक फिल्मों तक सीमित रहना चाहते हैं। ‘द पैराडाइज’ जैसी फिल्म में उन्होंने एक्शन और इंटेंसिटी से भरी भूमिका निभाई है। फिल्म को ए सर्टिफिकेट मिला है, इसलिए उनका बेटा अभी इसे नहीं देख सकता।

    नानी ने बताया कि उनका बेटा उनसे पूछ चुका है कि क्या वह ‘द पैराडाइज’ देख सकता है। अभिनेता ने उसे समझाया कि फिल्म रिलीज होते ही इसे देखना संभव नहीं है। जब उन्हें लगेगा कि अर्जुन इस तरह की फिल्म देखने के लिए सही उम्र और मानसिक तैयारी में है, तब वह इसे देख सकेगा।

    जब नानी से पूछा गया कि इस तरह की इंटेंस फिल्में करने से क्या वह पारिवारिक दर्शकों से दूर हो सकते हैं, तो उन्होंने कहा कि एक अभिनेता के तौर पर अलग-अलग तरह के जॉनर और किरदारों को तलाशना जरूरी है। उनके अनुसार, कुछ कहानियों और किरदारों को खास तरह की तीव्रता और प्रदर्शन की जरूरत होती है और कलाकार के लिए ऐसे अनुभव भी महत्वपूर्ण हैं।

    ‘द पैराडाइज’ का निर्देशन श्रीकांत ओडेला ने किया है। फिल्म में नानी के साथ राघव जुयाल, मोहनलाल, सोनाली बेंद्रे और संपत राज अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म को कई भाषाओं में रिलीज किया गया है और इसका संगीत अनिरुद्ध रविचंदर ने तैयार किया है। नानी के लिए यह फिल्म उनके करियर में एक और अलग तरह का प्रयोग मानी जा रही है।

  • शुभमन गिल चोटिल होकर वनडे सीरीज से बाहर हुए तो कौन संभालेगा कप्तानी, रोहित शर्मा को मिलेगा नया ओपनिंग पार्टनर

    शुभमन गिल चोटिल होकर वनडे सीरीज से बाहर हुए तो कौन संभालेगा कप्तानी, रोहित शर्मा को मिलेगा नया ओपनिंग पार्टनर


    नई दिल्ली । भारत और वेस्टइंडीज के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का आगाज 27 सितंबर से होने जा रहा है। सीरीज शुरू होने से ठीक पहले भारतीय टीम को कप्तान शुभमन गिल की चोट के रूप में बड़ा झटका लगा है। 25 सितंबर को अभ्यास के दौरान तेज गेंद उनकी दाहिनी कोहनी पर लगी, जिसके बाद वह दर्द में नजर आए। चोट के कारण वह दोबारा बल्लेबाजी करने नहीं लौटे और बाकी अभ्यास सत्र में रिकवरी पर ध्यान दिया।

    अभ्यास के दौरान मोहम्मद सिराज की एक तेज गेंद गिल की कोहनी पर लगी। गेंद लगते ही वह दर्द से परेशान दिखाई दिए। उनके साथ बल्लेबाजी कर रहे विराट कोहली और सिराज ने भी उनका हाल जाना। इसके बाद टीम के फिजियोथेरेपिस्ट और सपोर्ट स्टाफ ने उनकी जांच की और उपचार दिया। गिल की कोहनी पर पट्टी भी बांधी गई।

    गिल के पास पहले वनडे से पहले कुछ समय जरूर है, लेकिन उनकी चोट की गंभीरता को देखते हुए टीम प्रबंधन उन्हें लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहेगा। भारतीय टीम के लिए अगले साल होने वाले वनडे विश्व कप की तैयारियां भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में कप्तान को पूरी तरह फिट हुए बिना मैदान पर उतारने का जोखिम उठाने से बचा जा सकता है।

    गिल के लिए चोट का यह पहला अनुभव नहीं है। पिछले महीने श्रीलंका में अभ्यास के दौरान उनकी उंगली में चोट लगी थी। इसके बावजूद वह समय रहते फिट होकर दो टेस्ट मैचों की सीरीज में हिस्सा लेने में सफल रहे थे। अब उनकी ताजा चोट को लेकर अंतिम फैसला मेडिकल आकलन और उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगा।

    अगर गिल को वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले वनडे में आराम दिया जाता है, तो सबसे बड़ा सवाल कप्तानी को लेकर होगा। ऐसी स्थिति में उप-कप्तान केएल राहुल टीम की कमान संभाल सकते हैं। राहुल के पास वनडे क्रिकेट में कप्तानी का अनुभव भी है और वह लंबे समय से भारतीय टीम के अहम खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं।

    राहुल ने भारत की ओर से 15 वनडे मैचों में कप्तानी की है। इनमें भारतीय टीम ने 10 मुकाबलों में जीत दर्ज की, जबकि पांच मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा राहुल बल्लेबाजी के साथ विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी भी संभालते रहे हैं। इसलिए गिल की अनुपस्थिति में उनकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो सकती है।

    गिल के नहीं खेलने की स्थिति में भारतीय टीम के शीर्ष क्रम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है। रोहित शर्मा के साथ यशस्वी जायसवाल को पारी की शुरुआत करने का मौका मिल सकता है। जायसवाल पहले भी भारतीय टीम के लिए अलग-अलग प्रारूपों में ओपनिंग कर चुके हैं और गिल की अनुपस्थिति में उनके लिए यह बड़ी जिम्मेदारी होगी।

    इस तरह गिल की चोट का असर सिर्फ कप्तानी पर ही नहीं, बल्कि टीम के ओपनिंग संयोजन पर भी पड़ सकता है। हालांकि अंतिम फैसला उनकी फिटनेस रिपोर्ट और टीम प्रबंधन के आकलन के बाद ही सामने आएगा। सीरीज शुरू होने से पहले भारतीय टीम के लिए गिल की स्थिति सबसे अहम सवालों में से एक बनी हुई है।

  • ईरान ने अमेरिका के सामने रखी तीन शर्तें, मानने पर सात दिन में होर्मुज खोलने का प्रस्ताव

    ईरान ने अमेरिका के सामने रखी तीन शर्तें, मानने पर सात दिन में होर्मुज खोलने का प्रस्ताव

    नई दिल्ली । ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, अगर अमेरिका तेहरान की तीन प्रमुख शर्तें स्वीकार करता है, तो सात दिन के भीतर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सामान्य आवाजाही बहाल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव स्वीकार करने का फैसला अब अमेरिका के हाथ में है।

    ईरान ने अपने प्रस्ताव को मध्यस्थता के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया है। इसके तहत अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी हटानी होगी, ईरान के तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट देनी होगी और ऐसा युद्धविराम लागू करना होगा, जिसमें लेबनान भी शामिल हो। ईरान का कहना है कि इन मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

    अब्बास अराघची के मुताबिक, अमेरिका की ओर से जरूरी शुरुआती कदम पूरे करने में चार से पांच दिन लग सकते हैं। इसके बाद छठे दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोला जा सकता है। सातवें दिन अमेरिका के साथ आगे की बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव है। इस बातचीत में दोनों पक्ष आपसी सहमति वाले मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं, जिसमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी शामिल हो सकता है।

    ईरान ने इस योजना को जून में हुए एक समझौते से भी जोड़ा है। ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिका से अपेक्षित कुछ कदम पहले से उस समझौते में शामिल थे। तेहरान के मुताबिक, प्रस्ताव का उद्देश्य समुद्री आवाजाही बहाल करने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच रुकी हुई कूटनीतिक प्रक्रिया को फिर से शुरू करना है।

    होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। युद्ध से पहले दुनिया के समुद्री तेल और गैस कारोबार का करीब पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता था। क्षेत्र में जारी संघर्ष और समुद्री आवाजाही में रुकावट का असर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी अमेरिका के साथ बातचीत फिर शुरू करने की इच्छा जताई है। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी बने हुए हैं। ईरानी पक्ष ने संकेत दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट खोलने के प्रस्ताव और परमाणु मुद्दे पर रियायतों को अलग-अलग विषयों के रूप में देखा जा रहा है।

    अमेरिका की ओर से इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग संकेत सामने आए हैं। कुछ दावों में प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही गई है, जबकि दूसरी ओर मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी रहने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में प्रस्ताव पर अंतिम सहमति और उसके बाद होने वाली कार्रवाई को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

    ईरान के सात दिन के प्रस्ताव के तहत पहले अमेरिका से तीन शर्तों पर कदम उठाने की अपेक्षा है। इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट खोलने और बातचीत दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। अब इस योजना पर अमेरिका की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच होने वाली कूटनीतिक बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • काम न मिलने पर घर बैठी थीं परिणीति चोपड़ा, 15 साल के करियर की गलतियों और मुश्किल दौर पर खुलकर बोलीं

    काम न मिलने पर घर बैठी थीं परिणीति चोपड़ा, 15 साल के करियर की गलतियों और मुश्किल दौर पर खुलकर बोलीं


    नई दिल्ली । परिणीति चोपड़ा बॉलीवुड में अपने 15 साल के सफर के अहम पड़ाव पर पहुंचने वाली हैं। फिल्म ‘लेडीज वर्सेस रिकी बहल’ से अभिनय की शुरुआत करने वाली परिणीति ने इन वर्षों में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। उनके करियर में सफलता के साथ ऐसे दौर भी आए, जब उन्हें काम नहीं मिला और काफी समय घर पर बैठकर गुजारना पड़ा। अपने इस मुश्किल दौर को याद करते हुए अभिनेत्री ने माना कि करियर में उनसे कई गलतियां हुईं और उन्होंने उन गलतियों से काफी कुछ सीखा।

    परिणीति ने बताया कि वह किसी फिल्मी परिवार से नहीं आती थीं, इसलिए करियर की शुरुआत में लिए गए फैसलों का असर भी उन्हें खुद ही झेलना पड़ा। उनके मुताबिक, कभी गलत फिल्मों का चुनाव हुआ, कभी फैशन को लेकर गलतियां हुईं और कभी पब्लिक रिलेशन से जुड़े फैसले भी सही नहीं रहे। उन्होंने कहा कि उनके करियर की ये सभी गलतियां लोगों के सामने हुईं और उन्हें इन्हीं अनुभवों से आगे बढ़ना सीखना पड़ा।

    अभिनेत्री के करियर में एक ऐसा समय भी आया, जब उनके पास कोई काम नहीं था। दूसरी ओर, उन्होंने ऐसा दौर भी देखा जब लगातार काम के कारण परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया। उनके अनुसार, करियर में आए इन दोनों तरह के अनुभवों ने उन्हें काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन को समझने में मदद की।

    इन दिनों परिणीति वेब सीरीज ‘शक – ट्रस्ट नो वन’ के जरिए ओटीटी पर भी नजर आ रही हैं। इसमें वह एक ऐसी मां की भूमिका निभा रही हैं, जो आठ साल से अपनी लापता बेटी की तलाश कर रही है और उसे अपने ही परिवार के लोगों पर शक है। अभिनेत्री ने बताया कि सस्पेंस और थ्रिलर से जुड़े किरदार निभाना उन्हें काफी पसंद है। कहानी का रहस्य अंत तक बनाए रखना इस प्रोजेक्ट की खास चुनौती थी, क्योंकि शूटिंग पहले ही पूरी हो चुकी थी।

    परिणीति ने मदरहुड और कामकाजी महिलाओं को लेकर भी अपनी राय रखी। उनका कहना है कि किसी नई मां को यह बताने का अधिकार दूसरों को नहीं है कि उसे कब काम पर लौटना चाहिए। अगर कोई महिला बच्चे के जन्म के बाद अपनी इच्छा से काम जारी रखना चाहती है, तो उसके फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।

    अभिनेत्री ने मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों और उन पर की जाने वाली टिप्पणियों पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बच्चे को जन्म देना बेहद कठिन अनुभव है और इसके बाद शरीर पर आने वाले बदलावों को लेकर महिलाओं को शर्मिंदा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने शरीर पर आए स्ट्रेच मार्क्स को भी मां बनने के अनुभव का हिस्सा बताया।

    काम और परिवार के संतुलन पर परिणीति ने कहा कि अगर शुरुआत में ही काम की परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट बातचीत हो, तो दोनों चीजों को साथ संभाला जा सकता है। उनका मानना है कि आज की युवा महिलाएं करियर और परिवार दोनों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहती हैं। उनके अनुसार, इसके लिए कामकाजी महिलाओं और मेकर्स के बीच समझदारी और सहयोग जरूरी है।