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  • विवादों के समाधान पर चीन का बड़ा संकेत, जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले सीमा मुद्दे पर बढ़ी उम्मीद

    विवादों के समाधान पर चीन का बड़ा संकेत, जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले सीमा मुद्दे पर बढ़ी उम्मीद

    नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के संकेतों के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे जिनपिंग की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। इस मुलाकात से पहले भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग के बयान ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर सकारात्मक उम्मीदें बढ़ाई हैं।

    चीनी राजदूत ने कहा है कि चीन और भारत बातचीत को आगे बढ़ाने, सहयोग मजबूत करने और आपसी मतभेदों का उचित समाधान निकालने के लिए मिलकर काम करेंगे। उनके इस बयान को सीमा विवाद समेत दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे मुद्दों को बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

    लगातार तीसरे साल मोदी-शी की मुलाकात

    शू फेइहोंग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि चीन और भारत राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच होने वाली द्विपक्षीय बैठक की तैयारियां कर रहे हैं। रूस के कजान और चीन के तियानजिन में दोनों नेताओं की मुलाकातों के बाद यह लगातार तीसरा वर्ष होगा, जब मोदी और शी आमने-सामने बातचीत करेंगे।

    चीनी राजदूत ने कहा कि चीन दोनों नेताओं की ओर से दिए गए रणनीतिक मार्गदर्शन को लागू करने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करेगा। दोनों देशों के संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से आगे बढ़ाने, संवाद बढ़ाने और सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि दोनों देश अपने मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाने के साथ अच्छे पड़ोसियों की तरह मित्रता निभाएंगे और एक-दूसरे की सफलता में साझेदार बनकर आगे बढ़ेंगे।

    धीरे-धीरे सामान्य हो रहे भारत-चीन संबंध

    पिछले कुछ वर्षों में भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। वर्ष 2024 में रूस के कजान में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और 2025 में चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच महत्वपूर्ण बातचीत हुई थी।

    इन मुलाकातों के बाद दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने और द्विपक्षीय संबंधों को आगे ले जाने की कोशिशें तेज हुई हैं। ऐसे में नई दिल्ली में प्रस्तावित मोदी-शी बैठक को इस प्रक्रिया की अगली महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।

    भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का भी चीन ने किया समर्थन

    शी जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले चीन ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का भी समर्थन किया है। शू फेइहोंग ने एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि चीन ब्रिक्स सहयोग को काफी महत्व देता है और इस वर्ष सफल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के आयोजन में भारत का समर्थन करता है।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। सम्मेलन में दुनिया की कई प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि हिस्सा लेने पहुंचे हैं।

    मोदी-शी की बैठक पर टिकी निगाहें

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक पर दोनों देशों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। बैठक में सीमा विवाद, व्यापार, निवेश, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

    चीनी राजदूत के ताजा बयान से संकेत मिलता है कि बीजिंग भारत के साथ मतभेदों को टकराव के बजाय संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने पर जोर दे रहा है। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाली मोदी-शी वार्ता भारत-चीन संबंधों की आगे की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • 11 हजार की नौकरी, 5 मकान और SUV का मालिक! PNB के 17.29 करोड़ के जाली नोट कांड में संविदा कर्मचारी पर शक

    11 हजार की नौकरी, 5 मकान और SUV का मालिक! PNB के 17.29 करोड़ के जाली नोट कांड में संविदा कर्मचारी पर शक

    सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट से मिले 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए सवाल सामने आ रहे हैं। अब बैंक का एक संविदा कर्मचारी जांच एजेंसियों के रडार पर है। महज 11 हजार रुपये मासिक वेतन पर ड्राइवर-लोडर के तौर पर काम करने वाले इस कर्मचारी की संपत्तियों ने जांच अधिकारियों का ध्यान खींचा है।

    जांच में सामने आया है कि कर्मचारी के पास पांच मकान, SUV और अपना ड्राइवर तक है। इसी वजह से उसकी आय और संपत्ति के बीच के अंतर को लेकर एजेंसियां पड़ताल कर रही हैं। इस मामले में करेंसी चेस्ट के निलंबित मैनेजर अमित कुमार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) चंडीगढ़ से गिरफ्तार कर चुकी है।

    मैनेजर का PA बनकर करता था काम?

    सहारनपुर पुलिस और NIA की संयुक्त जांच में पता चला है कि संविदा कर्मचारी का आधिकारिक काम कैश वैन चलाने तथा कैश की लोडिंग-अनलोडिंग तक सीमित था। हालांकि, जांच एजेंसियों के मुताबिक वह करेंसी चेस्ट के भीतर मैनेजर अमित कुमार के पर्सनल असिस्टेंट (PA) की तरह काम करता था।

    बताया जा रहा है कि उसे मुख्य चेस्ट एरिया में बेरोकटोक आने-जाने की सुविधा हासिल थी। यही वजह है कि एजेंसियां अब उसकी भूमिका की बारीकी से जांच कर रही हैं।

    असली नोटों की जगह जाली करेंसी रखने का शक

    जांच का एक प्रमुख बिंदु यह है कि क्या करेंसी चेस्ट में रखे असली नोटों के बंडलों से रकम निकालकर उनकी जगह जाली नोट रखे गए थे। एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि यदि असली रकम चेस्ट से बाहर निकाली गई तो उसे ठिकाने लगाने में संविदा कर्मचारी की कोई भूमिका थी या नहीं।

    फिलहाल जांच एजेंसियां उसके खिलाफ मिले संपत्ति संबंधी इनपुट और करेंसी चेस्ट में उसकी पहुंच के बीच संबंध तलाश रही हैं।

    जाली नोटों का नेटवर्क कितना बड़ा?

    NIA अब इस सवाल का भी जवाब तलाश रही है कि करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में 500 रुपये के उच्च गुणवत्ता वाले जाली नोट आखिर कहां से पहुंचे। जांच एजेंसी इस संभावना को भी देख रही है कि कहीं इस पूरे मामले के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट या विदेशी नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

    नेपाल सीमा से जुड़े किसी नेटवर्क की संभावित भूमिका को लेकर भी जांच की जा रही है। हालांकि, इस दिशा में जांच अभी जारी है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना बाकी है।

    बैंक शाखाओं और ATM तक तो नहीं पहुंचे नकली नोट?

    NIA और SIT के साथ RBI की संयुक्त ऑडिट टीम भी करेंसी चेस्ट से जुड़े रिकॉर्ड और नकदी के प्रवाह की जांच कर रही है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बरामद जाली नोटों में से कोई हिस्सा पहले ही बैंक की दूसरी शाखाओं, ATM या बाजार में तो नहीं पहुंच गया।

    17.29 करोड़ रुपये की जाली करेंसी की बरामदगी के बाद अब जांच का फोकस सिर्फ करेंसी चेस्ट तक सीमित नहीं है। एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं और असली रकम तथा जाली नोटों की अदला-बदली किस तरीके से की गई।

  • शादी के लिए बांदा में आशिक का हाईवोल्टेज ड्रामा केन नदी के रेलवे पुल पर चढ़कर दी कूदने की धमकी पुलिस ने ऐसे संभाला मामला

    शादी के लिए बांदा में आशिक का हाईवोल्टेज ड्रामा केन नदी के रेलवे पुल पर चढ़कर दी कूदने की धमकी पुलिस ने ऐसे संभाला मामला


    उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश के बांदा में शादी की जिद को लेकर एक युवक ने ऐसा कदम उठा लिया जिसे देखकर मौके पर मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। मटौंध थाना क्षेत्र के भूरागढ़ इलाके में करीब 20 वर्षीय युवक केन नदी के रेलवे पुल की लगभग 30 फीट ऊंची रेलिंग पर चढ़ गया और नीचे कूदने की धमकी देने लगा। युवक लगातार अपनी कथित प्रेमिका को मौके पर बुलाने की मांग कर रहा था। उसका कहना था कि अगर उसकी शादी लड़की से नहीं कराई गई तो वह पुल से छलांग लगा देगा। युवक के इस हाईवोल्टेज ड्रामे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और काफी देर तक उसे समझाने का प्रयास करती रही।

    बताया जा रहा है कि युवक लड़की से शादी करना चाहता था लेकिन लड़की इसके लिए तैयार नहीं थी। शादी को लेकर दोनों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई थी। इसी बात से नाराज होकर युवक रेलवे पुल की रेलिंग पर जा चढ़ा। राहगीरों ने जब उसे इतनी ऊंचाई पर खतरनाक स्थिति में देखा तो तुरंत पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई और युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के लिए बातचीत शुरू की।

    पुलिस ने युवक को काफी समझाया लेकिन वह नीचे आने को तैयार नहीं था। वह बार बार अपनी कथित प्रेमिका को बुलाने की मांग कर रहा था। युवक का कहना था कि लड़की को सामने लाया जाए और उससे शादी करा दी जाए। पुलिस ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसकी मांग पर लड़की को मौके पर बुलाया। लड़की के पहुंचने के बाद पुलिस ने युवक को समझाया और किसी तरह उसे रेलिंग से नीचे उतार लिया। इसके बाद पुलिस ने राहत की सांस ली क्योंकि युवक काफी ऊंचाई पर खड़ा था और किसी भी तरह की जल्दबाजी गंभीर हादसे का कारण बन सकती थी।

    युवक के सुरक्षित नीचे उतरने के बाद मामले में एक और अहम मोड़ सामने आया। पुलिस के मुताबिक युवक के खिलाफ पहले से ही एक मुकदमा दर्ज था और वह पुलिस की नजर में वांछित चल रहा था। बताया गया कि लड़की की शिकायत पर उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस पहले से ही उसकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही थी। ऐसे में पुल से नीचे उतारने के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

    अपर पुलिस अधीक्षक शिवराज के मुताबिक पुलिस को सूचना मिली थी कि केन नदी के भूरागढ़ इलाके में रेलवे पुल के ऊपर एक व्यक्ति चढ़ा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और समझा बुझाकर युवक को सुरक्षित नीचे उतारा गया। युवक की पहचान विकास के रूप में हुई। पुलिस अधिकारी के अनुसार उसके खिलाफ पहले से अभियोग दर्ज था और विवेचना के दौरान उसके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य जुटाए गए थे। इसी आधार पर उसकी गिरफ्तारी की गई और उसे न्यायालय के समक्ष पेश करने की कार्रवाई की गई।

    पुलिस के अनुसार युवक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो बनाने का काम भी करता था। उसके खिलाफ दर्ज मामले में जांच जारी थी। पुल पर युवक के चढ़ने और पुलिस द्वारा उसे नीचे उतारने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया। घटना ने एक बार फिर दिखाया कि निजी रिश्तों से जुड़े विवाद में भावनात्मक दबाव और खतरनाक कदम कितनी बड़ी परेशानी खड़ी कर सकते हैं। फिलहाल पुलिस ने युवक को सुरक्षित नीचे उतारने के बाद कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • रामायण के हजारों करोड़ के बजट के बीच हनुमान अंश का कमाल महज 2 करोड़ में बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास

    रामायण के हजारों करोड़ के बजट के बीच हनुमान अंश का कमाल महज 2 करोड़ में बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास


    नई दिल्ली। बॉलीवुड में बड़े बजट की फिल्मों को अक्सर बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता की गारंटी माना जाता है। करोड़ों रुपये का बजट बड़े सितारे भव्य सेट और जबरदस्त प्रचार किसी फिल्म को रिलीज से पहले ही चर्चा में ला देते हैं। लेकिन फिल्म हनुमान अंश ने इस सोच को काफी हद तक चुनौती दे दी है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने अपनी कहानी और दर्शकों की पसंद के दम पर ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
    नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरित यह फिल्म शुरुआत में बेहद सीमित स्तर पर रिलीज हुई थी। शुरुआती दिनों में इसकी कमाई भी बहुत ज्यादा नहीं थी लेकिन धीरे धीरे दर्शकों के बीच फिल्म की चर्चा बढ़ती गई। पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ ने इसकी रफ्तार बदल दी और सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या लगातार बढ़ने लगी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म ने 35 दिनों में करीब 193 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन कर लिया था। इसके बाद 36वें दिन भी फिल्म की कमाई का सिलसिला जारी रहा और घरेलू बॉक्स ऑफिस पर यह 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के ग्रॉस आंकड़े को पार कर गई। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म के 36वें दिन भी बड़ी संख्या में शो चल रहे थे।

    फिल्म की सबसे खास बात इसका बेहद कम बजट है। जहां बड़े प्रोजेक्ट्स में हजारों करोड़ रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं वहीं हनुमान अंश करीब 2 करोड़ रुपये में तैयार हुई। इसके बावजूद फिल्म का कलेक्शन उसके बजट से कई गुना ज्यादा पहुंच गया। यही वजह है कि अब इसकी तुलना बड़े बजट की आने वाली फिल्मों से भी की जा रही है।

    हनुमान अंश की सफलता सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं है। फिल्म की शुरुआत धीमी होने के बावजूद दर्शकों ने इसे धीरे धीरे अपनाया। फिल्म को बड़े स्टार सिस्टम का सहारा नहीं मिला था और न ही शुरुआत में बड़े पैमाने पर प्रचार हुआ था। इसके बावजूद दर्शकों की प्रतिक्रिया ने फिल्म को आगे बढ़ाया।

    फिल्म की सफलता में इसकी आध्यात्मिक कहानी को भी अहम माना जा रहा है। नीम करोली बाबा से जुड़ी आस्था और उनके जीवन से प्रेरित प्रसंगों ने खासतौर पर श्रद्धालुओं और आध्यात्मिक विषयों में रुचि रखने वाले दर्शकों को आकर्षित किया। फिल्म की चर्चा सोशल मीडिया और दर्शकों के बीच बढ़ती गई और यही चर्चा इसके लिए सबसे बड़ा प्रचार बन गई।

    अब इस फिल्म की सफलता को बड़े बजट वाली फिल्मों के लिए एक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर 4000 करोड़ रुपये के भारी भरकम बजट वाली रामायण जैसे बड़े प्रोजेक्ट के सामने हनुमान अंश का उदाहरण यह सवाल जरूर खड़ा करता है कि क्या बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ बजट ही सबसे बड़ा हथियार है। हालांकि दोनों फिल्मों का विषय पैमाना और निर्माण अलग है इसलिए सीधी तुलना करना सही नहीं होगा।

    फिर भी हनुमान अंश ने यह साबित कर दिया है कि कम बजट में बनी फिल्म भी मजबूत कहानी और दर्शकों के भरोसे के दम पर बड़ी व्यावसायिक सफलता हासिल कर सकती है। फिल्म की अंतरराष्ट्रीय रिलीज भी 11 सितंबर से शुरू हो चुकी है जिससे अब इसकी कमाई और आगे बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।

  • धोनी से लिंकअप ने बदली एक्ट्रेस की जिंदगी रिश्ता टूटा फिर भी पीछा नहीं छोड़ी खबरें राय लक्ष्मी ने बताया क्यों लगी थी इतनी चिढ़

    धोनी से लिंकअप ने बदली एक्ट्रेस की जिंदगी रिश्ता टूटा फिर भी पीछा नहीं छोड़ी खबरें राय लक्ष्मी ने बताया क्यों लगी थी इतनी चिढ़


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल महेंद्र सिंह धोनी का नाम अपने करियर के दौरान कई बार फिल्मी दुनिया की अभिनेत्रियों के साथ जोड़ा गया। इन्हीं में एक नाम साउथ सिनेमा की अभिनेत्री राय लक्ष्मी का भी रहा है। एक दौर में दोनों के रिश्ते की खबरों ने खूब सुर्खियां बटोरी थीं। हालांकि यह रिश्ता ज्यादा लंबा नहीं चला लेकिन इसके खत्म होने के बाद भी राय लक्ष्मी का नाम लंबे समय तक धोनी के साथ जोड़ा जाता रहा। यही बात अभिनेत्री के लिए परेशानी का कारण बन गई थी।

    बताया जाता है कि साल 2009 के आसपास धोनी और राय लक्ष्मी के बीच नजदीकियों की खबरें सामने आई थीं। दोनों के रिश्ते को लेकर मीडिया में खूब चर्चा हुई। उस समय धोनी भारतीय क्रिकेट के बड़े सितारे बन चुके थे और राय लक्ष्मी भी दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना रही थीं। ऐसे में दोनों का नाम एक साथ जुड़ना स्वाभाविक रूप से लोगों के लिए काफी दिलचस्प खबर बन गया।

    धोनी ने इस रिश्ते को लेकर सार्वजनिक तौर पर ज्यादा कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ राय लक्ष्मी ने साल 2014 में एक इंटरव्यू के दौरान धोनी के साथ अपने रिश्ते की बात स्वीकार की थी। हालांकि समय के साथ दोनों अलग हो गए लेकिन ब्रेकअप के बाद भी जब भी धोनी के पुराने रिश्तों की चर्चा होती तो राय लक्ष्मी का नाम जरूर सामने आ जाता।

    यही सिलसिला धीरे धीरे अभिनेत्री के लिए परेशान करने वाला बन गया। राय लक्ष्मी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि लोगों के लगातार सवालों ने उन्हें इस हद तक परेशान कर दिया था कि उन्हें यह रिश्ता अपने जीवन पर पड़े किसी दाग जैसा महसूस होने लगा था। उनका कहना था कि हैरानी होती थी कि लोग इतने समय बाद भी उस रिश्ते को लेकर अपनी ऊर्जा खर्च कर रहे हैं।

    राय लक्ष्मी ने यह भी चिंता जाहिर की थी कि भविष्य में जब उनके बच्चे बड़े होंगे और इंटरनेट या न्यूज रिपोर्ट में उनके बारे में ऐसी खबरें पढ़ेंगे तो वह उनसे क्या सवाल करेंगे। अभिनेत्री के लिए सबसे ज्यादा परेशानी की बात यही थी कि रिश्ता खत्म होने के बावजूद उसका जिक्र उनकी जिंदगी से पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

    धोनी से जुड़ी इन खबरों के बीच राय लक्ष्मी की अपनी फिल्मी पहचान भी रही है। उन्होंने दक्षिण भारतीय फिल्मों के अलावा हिंदी फिल्मों में भी काम किया। जूली 2 अर्जुन सिंह आईपीएस बैच 2000 और अकीरा जैसी फिल्मों में वह नजर आईं। इसके अलावा उन्होंने कई टीवी सीरियल्स में भी काम किया।

    राय लक्ष्मी और धोनी की कथित रिलेशनशिप भले ही बहुत पुरानी बात हो चुकी है लेकिन इसका असर लंबे समय तक अभिनेत्री की सार्वजनिक छवि के साथ जुड़ा रहा। एक तरफ धोनी ने इस मामले पर ज्यादा चर्चा नहीं की तो दूसरी तरफ राय लक्ष्मी को बार बार उन्हीं सवालों का सामना करना पड़ा। यही वजह रही कि समय बीतने के साथ वह इस लिंकअप की खबरों से काफी इरिटेट होने लगी थीं। उनके पुराने बयान यह बताते हैं कि किसी सेलिब्रिटी की निजी जिंदगी से जुड़ी खबरें खत्म हो जाने के बाद भी उनकी चर्चा किस तरह लंबे समय तक उसके साथ बनी रह सकती है।

  • महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स छोड़िए मुल्तानी मिट्टी से घर पर करें चेहरे की देखभाल जानिए सही इस्तेमाल का आसान तरीका

    महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स छोड़िए मुल्तानी मिट्टी से घर पर करें चेहरे की देखभाल जानिए सही इस्तेमाल का आसान तरीका

    नई दिल्ली । चेहरे की थकान पिंपल्स और अतिरिक्त तेल से हैं परेशान तो काम आएगी मुल्तानी मिट्टी इन तरीकों से करें इस्तेमाआज के समय में चेहरे की चमक और त्वचा की सेहत बनाए रखने के लिए लोग कई तरह के महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन घर में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें भी त्वचा की देखभाल में मददगार हो सकती हैं। इन्हीं में से एक है मुल्तानी मिट्टी। इसे लंबे समय से त्वचा की सफाई और अतिरिक्त तेल को कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। खासतौर पर ऑयली स्किन वाले लोगों के लिए मुल्तानी मिट्टी एक आसान घरेलू विकल्प मानी जाती है। हालांकि इसका इस्तेमाल त्वचा के प्रकार को ध्यान में रखकर करना जरूरी है।

    मुल्तानी मिट्टी त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी हटाने में मदद कर सकती है। चेहरे पर दिनभर धूल प्रदूषण और पसीने की वजह से जमा होने वाली गंदगी त्वचा को बेजान दिखा सकती है। ऐसे में मुल्तानी मिट्टी का फेस पैक चेहरे की सतह को साफ करने में मदद कर सकता है। इसे लगाने के बाद त्वचा कुछ समय के लिए ज्यादा साफ और फ्रेश महसूस हो सकती है।

    मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल करने के लिए सबसे आसान तरीका है इसे गुलाब जल के साथ मिलाकर फेस पैक तैयार करना। एक कटोरी में मुल्तानी मिट्टी लेकर उसमें जरूरत के अनुसार गुलाब जल डालें और अच्छी तरह मिलाकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे पर पतली परत में लगाएं और पूरी तरह सूखने से पहले सामान्य पानी से धो लें। इसके बाद त्वचा पर हल्का मॉइस्चराइजर लगाना बेहतर रहता है।

    अगर आपकी त्वचा बहुत ज्यादा ऑयली है तो मुल्तानी मिट्टी में थोड़ा एलोवेरा जेल मिलाया जा सकता है। इससे फेस पैक त्वचा पर लगाने में आसान हो जाता है। वहीं रूखी या संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल सावधानी से करना चाहिए क्योंकि यह त्वचा से तेल सोखती है और बार बार इस्तेमाल करने पर ड्राईनेस या खिंचाव बढ़ सकता है। ऐसे लोगों के लिए इसे दूध या किसी सौम्य मॉइस्चराइजिंग सामग्री के साथ मिलाने का विकल्प रखा जा सकता है लेकिन किसी भी नए मिश्रण को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है।

    मुल्तानी मिट्टी चेहरे की गंदगी और अतिरिक्त तेल को हटाने में मदद कर सकती है लेकिन इसे हर दिन इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। जरूरत से ज्यादा फेस पैक लगाने से त्वचा की प्राकृतिक नमी प्रभावित हो सकती है। सामान्य तौर पर सप्ताह में एक बार से शुरुआत करना बेहतर माना जा सकता है और त्वचा की प्रतिक्रिया के अनुसार इस्तेमाल की आवृत्ति तय की जा सकती है।

    यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि मुल्तानी मिट्टी किसी त्वचा रोग का इलाज नहीं है। अगर चेहरे पर लगातार मुंहासे लालिमा जलन खुजली या किसी तरह की एलर्जी की समस्या है तो घरेलू उपायों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। किसी भी प्राकृतिक सामग्री को सुरक्षित समझकर बिना जांच के इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सही तरीके और अपनी त्वचा के प्रकार को ध्यान में रखकर मुल्तानी मिट्टी का इस्तेमाल किया जाए तो यह सामान्य स्किन केयर रूटीन का एक सरल हिस्सा बन सकती है।

  • धर्मेंद्र की फिल्मों में जब बदले गए सीन तो आगबबूला हुए सनी देओल डायरेक्टर को पीटने तक पहुंचा मामला लेखक ने बताई पर्दे के पीछे की कहानी

    धर्मेंद्र की फिल्मों में जब बदले गए सीन तो आगबबूला हुए सनी देओल डायरेक्टर को पीटने तक पहुंचा मामला लेखक ने बताई पर्दे के पीछे की कहानी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र की जिंदगी और फिल्मी करियर से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों के बीच चर्चा में रहते हैं। अपने लंबे करियर में एक समय ऐसा भी आया था जब धर्मेंद्र ने B और C ग्रेड फिल्मों में काम किया। इस दौर को लेकर अक्सर सवाल उठता रहा है कि आखिर इतने बड़े और सम्मानित अभिनेता को इस तरह की फिल्मों में काम करने की जरूरत क्यों पड़ी। अब नेशनल अवॉर्ड विनर राइटर रणबीर पुष्प ने इस पूरे मामले से जुड़ा एक किस्सा साझा किया है जिसने धर्मेंद्र के उस दौर की एक अलग तस्वीर सामने रख दी है।

    रणबीर पुष्प ने सिद्धार्थ कनन को दिए इंटरव्यू में धर्मेंद्र से जुड़ी कई बातें बताईं। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र बेहद जेंटलमैन अभिनेता थे और इंडस्ट्री में उनकी अपनी एक अलग इज्जत थी। रणबीर के मुताबिक उन्हें इस बात का स्पष्ट कारण नहीं पता कि धर्मेंद्र को B और C ग्रेड फिल्मों में काम क्यों करना पड़ा लेकिन संभव है कि फिल्मों की कहानी जिस तरह उन्हें बताई गई हो शूटिंग के दौरान चीजें वैसी नहीं रही हों।

    रणबीर ने बताया कि कई बार कलाकार के सामने कहानी और सीन को एक तरीके से पेश किया जाता है लेकिन फिल्म बनते समय उसमें बदलाव कर दिए जाते हैं। उनके मुताबिक ऐसा भी संभव है कि धर्मेंद्र को कुछ सीन सामान्य एक्शन या कहानी का हिस्सा बताए गए हों लेकिन बाद में उन्हें अलग अंदाज में फिल्माया गया हो। डायरेक्टर ने कहानी को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया हो और शूटिंग के दौरान तस्वीर कुछ और निकली हो।

    इसी सिलसिले में उन्होंने निर्देशक कांति शाह का जिक्र किया। रणबीर के मुताबिक कांति शाह ने एक्शन वाले सीन को रोमांटिक सीन में बदल दिया था। जब इस बदलाव की जानकारी सनी देओल को मिली तो वह काफी नाराज हुए। रणबीर ने दावा किया कि सनी देओल ने कांति शाह के साथ मारपीट भी की थी। इसके बाद सनी ने अपने पिता धर्मेंद्र से कहा था कि वह ऐसी फिल्मों में काम नहीं करेंगे।

    धर्मेंद्र के उस दौर को लेकर रणबीर ने यह भी कहा कि कभी कभी इंसान भरोसे या भोलेपन में भी ऐसे फैसले कर लेता है। संभव है कि किसी पुराने परिचित या फिल्म से जुड़े व्यक्ति ने धर्मेंद्र से कुछ सीन करने के लिए कहा हो और उन्होंने रिश्तों या भरोसे के चलते हामी भर दी हो। रणबीर ने धर्मेंद्र के व्यक्तित्व का जिक्र करते हुए कहा कि वह हमेशा रिश्ते निभाने वाले इंसान रहे हैं।

    कांति शाह बॉलीवुड में निर्देशक निर्माता और स्क्रीनराइटर के तौर पर जाने जाते हैं। उन्होंने मिथुन चक्रवर्ती और धर्मेंद्र जैसे कलाकारों के साथ भी काम किया। उनके नाम मार धाड़ बसंती तांगेवाली मुन्नी बाई जरूरत और दरवाजा जैसी फिल्में जुड़ी हैं। B ग्रेड फिल्मों के दौर में कांति शाह का नाम भी काफी चर्चा में रहा।

    धर्मेंद्र ने अपने करियर में एक लंबा सफर तय किया और कई यादगार फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। ऐसे में उनके B और C ग्रेड फिल्मों वाले दौर की कहानी हमेशा लोगों की दिलचस्पी का विषय रही है। रणबीर पुष्प द्वारा साझा किया गया यह किस्सा इसी पुराने दौर से जुड़ी एक ऐसी परत सामने लाता है जिसमें फिल्म की कहानी और शूटिंग के दौरान हुए बदलावों को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं। हालांकि इस पूरे मामले में सामने आई बातें रणबीर पुष्प द्वारा साझा किए गए अनुभव और दावों पर आधारित हैं।

  • धमकियों के बीच कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, सुरक्षा बढ़ाने और जांच की मांग उठाई

    धमकियों के बीच कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने अमित शाह को लिखी चिट्ठी, सुरक्षा बढ़ाने और जांच की मांग उठाई

    नई दिल्ली ।कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने बढ़ती धमकियों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर सुरक्षा को लेकर तत्काल कदम उठाने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे करीब 15 वर्षों से घाटी में अपना जीवन दोबारा बसाने की कोशिश कर रहे हैं और मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें फिर से विस्थापन की ओर धकेले जाने का डर सताने लगा है।

    ऑल PM पैकेज एम्प्लॉईज फोरम के अध्यक्ष सनी रैना ने पत्र के जरिए कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों और उनके परिवारों की चिंताओं को सामने रखा है। उनका कहना है कि भले ही बाहर से हालात सामान्य दिखाई दें, लेकिन घाटी में रहने वाले परिवारों के बीच डर और तनाव बना हुआ है। कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा के साथ बच्चों के भविष्य की भी चिंता है।

    कर्मचारियों ने कहा है कि हाल में सामने आ रही हर धमकी उन्हें 1990 के दशक की घटनाओं की याद दिलाती है। उनके मुताबिक उस दौर में भी धमकी भरे पत्र और नोटिस डर का माहौल बनाने के शुरुआती संकेत बने थे। इसके बाद बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। अब नए धमकी भरे पत्रों के सामने आने से पुराना भय दोबारा गहराने लगा है।

    पिछले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज के तहत तैनात कर्मचारियों को लगातार धमकियां मिलने की बात सामने आई है। कई पत्रों में सरकारी नौकरी छोड़ने का अल्टीमेटम दिए जाने और ऐसा नहीं करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी का उल्लेख है। इन धमकियों के पीछे यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल यानी ULC नाम के संगठन का नाम सामने आ रहा है।

    कर्मचारियों की चिंता केवल धमकी भरे पत्रों तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि निजी जानकारी ऑनलाइन लीक होने से भी असुरक्षा बढ़ी है। सोशल मीडिया पर कुछ कर्मचारियों के फोन नंबर, घर के पते और वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर तक प्रसारित किए जाने की बात कही गई है। इससे घाटी में रहने वाले परिवारों की चिंता और बढ़ गई है।

    कर्मचारियों ने अपनी आवासीय स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। बड़ी संख्या में कर्मचारी अभी किराए के कमरों में रह रहे हैं। वहीं, जिन स्थानों पर ट्रांजिट कॉलोनियां बनाई गई हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पर्याप्त सुरक्षा के अभाव में वे खुद को खतरे के बीच महसूस कर रहे हैं।

    गृह मंत्री को भेजे गए पत्र में धमकियों की गंभीरता से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है। कर्मचारियों ने PM पैकेज के तहत काम कर रहे लोगों, उनके परिवारों और आवासीय कॉलोनियों की सुरक्षा बढ़ाने की अपील की है। साथ ही सभी आवासों की सुरक्षा समीक्षा कराने की मांग रखी गई है।

    कर्मचारियों ने यह भी कहा है कि धमकी मिलने की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने और समय पर सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि वे कश्मीर घाटी छोड़ना नहीं चाहते। पिछले 15 वर्षों में उन्होंने उस जीवन को फिर से खड़ा करने की कोशिश की है, जो कई दशक पहले उजड़ गया था।

    2022 में राहुल भट की हत्या के बाद भी घाटी में कार्यरत कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे थे। अब नई धमकियों के बाद उनकी चिंता फिर सामने आई है। कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नौकरी और सुरक्षा में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न किया जाए। वे घाटी में रहकर काम करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सुरक्षित माहौल की मांग कर रहे हैं।

  • शिवपुरी में फर्जी अस्पतालों पर शिकंजा मरीजों के लिए लगाए थे पलंग और इलाज की व्यवस्था पंजीयन के कागज नहीं मिले तो दोनों संस्थान सील

    शिवपुरी में फर्जी अस्पतालों पर शिकंजा मरीजों के लिए लगाए थे पलंग और इलाज की व्यवस्था पंजीयन के कागज नहीं मिले तो दोनों संस्थान सील


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में बिना जरूरी पंजीयन के संचालित किए जा रहे स्वास्थ्य संस्थानों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। इसी अभियान के तहत कोलारस में शुक्रवार शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो मेडिकल स्टोर और उनसे जुड़े अस्पतालों की जांच की। जांच के दौरान दोनों स्थानों पर मरीजों के इलाज और उन्हें भर्ती करने जैसी व्यवस्थाएं मिलीं। हालांकि जब टीम ने अस्पताल संचालन से संबंधित पंजीयन के दस्तावेज मांगे तो संचालक इन्हें प्रस्तुत नहीं कर सके। इसके बाद विभाग ने दोनों मेडिकल स्टोर और उनसे जुड़े अस्पतालों को सील कर दिया।

    यह कार्रवाई कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर की गई। जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रोहित भदकारिया के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम सबसे पहले फूल राज होटल के सामने स्थित धाकड़ मेडिकल स्टोर पहुंची। टीम ने मेडिकल स्टोर की जांच के साथ उसके पास संचालित किए जा रहे एएस अस्पताल का भी निरीक्षण किया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अस्पताल डॉ. पुष्पेंद्र सिंह के नाम पर बताया गया था लेकिन मौके पर एक ऐसा व्यक्ति मरीजों का इलाज करता मिला जो इसके लिए पात्र नहीं था।

    जांच के दौरान अस्पताल के अंदर मरीजों को भर्ती करने के लिए 10 पलंग भी रखे हुए मिले। इससे स्पष्ट हुआ कि वहां केवल सामान्य मेडिकल स्टोर का संचालन नहीं हो रहा था बल्कि मरीजों के इलाज और भर्ती की व्यवस्था भी बनाई गई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संचालक से अस्पताल के पंजीयन सहित अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे लेकिन मौके पर संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद विभाग ने एएस अस्पताल के साथ धाकड़ मेडिकल स्टोर को भी सील कर दिया।

    इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम कटरा मोहल्ले में स्थित गोपाल मेडिकल स्टोर पहुंची। यहां भी जांच के दौरान मेडिकल स्टोर के पास बने कमरों में अस्पताल जैसी व्यवस्था दिखाई दी। इन कमरों में मरीजों को भर्ती करने के लिए पलंग मौजूद थे। इसके अलावा मरीजों को बोतल चढ़ाने और इलाज करने की व्यवस्था भी मिली। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में संचालक रंजन अधिकारी से अस्पताल के पंजीयन से जुड़े दस्तावेज मांगे लेकिन वह भी जरूरी कागजात टीम के सामने प्रस्तुत नहीं कर सके।

    दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने गोपाल मेडिकल स्टोर और उसके पास संचालित हो रहे अस्पताल को भी सील कर दिया। विभाग की इस कार्रवाई के बाद इलाके में बिना अनुमति या पंजीयन के स्वास्थ्य सेवाएं संचालित करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है।

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय ऋषीश्वर ने बताया कि कलेक्टर के निर्देश पर जिले में अवैध स्वास्थ्य संस्थानों की लगातार जांच की जा रही है। विभाग का उद्देश्य ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई करना है जहां नियमों का पालन किए बिना मरीजों का इलाज किया जा रहा है। कार्रवाई करने वाली टीम में खंड चिकित्सा अधिकारी कोलारस डॉ. संजय राठौड़ और फार्मासिस्ट बालेंदु रघुवंशी भी शामिल रहे।

    स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई से यह सवाल भी सामने आया है कि बिना पंजीयन और आवश्यक दस्तावेजों के मरीजों के इलाज तथा भर्ती की व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही थी। विभाग अब जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की जांच जारी रखने की तैयारी में है।

  • शिवपुरी में आकाशीय बिजली ने मचाई तबाही मां और 5 साल के बेटे को लगा करंट 70 हजार से ज्यादा का नुकसान

    शिवपुरी में आकाशीय बिजली ने मचाई तबाही मां और 5 साल के बेटे को लगा करंट 70 हजार से ज्यादा का नुकसान


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में तीन दिन तक तेज धूप रहने के बाद शुक्रवार को एक बार फिर मौसम ने करवट ली। दिनभर आसमान में बादल छाए रहे और शाम के समय जिले के कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। इसी दौरान बैराड़ नगर के वार्ड क्रमांक 11 में शाखा स्कूल के पास रहने वाले हेमंत यादव के मकान पर अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। तेज कड़कड़ाहट के साथ गिरी बिजली से घर की दूसरी मंजिल पर जोरदार असर हुआ और देखते ही देखते घर की वायरिंग तथा कई बिजली के उपकरण खराब हो गए। परिवार के अनुसार इस घटना में 70 हजार रुपए से अधिक का नुकसान हुआ है।

    हेमंत यादव के मुताबिक शुक्रवार शाम मौसम बदला हुआ था और आसमान में बादल छाए हुए थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ उनके मकान की दूसरी मंजिल पर आकाशीय बिजली गिरी। बिजली गिरने के बाद घर के भीतर विद्युत व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। स्विच बोर्ड और वायरिंग में तेज झटका लगा जिसके कारण कई जगह तार जल गए। घर में लगे बिजली के उपकरण भी इसकी चपेट में आ गए।

    बताया गया है कि बिजली गिरने से घर के करीब आठ पंखे दो कूलर और लगभग 28 लाइटें खराब हो गईं। इसके अलावा एलईडी ट्यूब लाइट चार्जर और अन्य विद्युत उपकरण भी जल गए। हादसे के बाद परिवार में अफरा तफरी मच गई। तेज आवाज सुनकर आसपास रहने वाले लोग भी तुरंत मौके पर पहुंचे और परिवार की मदद की। घर की बिजली व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित होने के कारण परिवार के सामने तत्काल मरम्मत की समस्या खड़ी हो गई।

    आकाशीय बिजली का असर केवल बिजली के उपकरणों तक सीमित नहीं रहा। इसकी चपेट में आने से हेमंत यादव की पत्नी सुरक्षा यादव और उनके पांच साल के बेटे वंशू को भी बिजली का झटका लगा। बताया गया है कि वंशू के पैर में चोट आई है। हालांकि राहत की बात यह रही कि हादसे में किसी की जान नहीं गई और परिवार के किसी सदस्य को गंभीर नुकसान नहीं हुआ।

    हेमंत यादव खुर्रका में सचिव के पद पर तैनात हैं। परिवार ने बिजली गिरने के बाद हुए नुकसान का आकलन करते हुए इसे 70 हजार रुपए से अधिक बताया है। अचानक हुई इस घटना से परिवार को आर्थिक नुकसान के साथ कुछ समय के लिए घरेलू बिजली व्यवस्था से भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

    इधर शिवपुरी जिले में इस साल अब तक बारिश का आंकड़ा भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। भू अभिलेख अधीक्षक के अनुसार 1 जून 2026 से अब तक जिले में 907.37 मिलीमीटर औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है। पिछले साल इसी अवधि में 1376.47 मिलीमीटर औसत बारिश रिकॉर्ड हुई थी। जिले की औसत वार्षिक बारिश 816.3 मिलीमीटर है जबकि वर्ष 2025 में कुल 1585.86 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी।

    तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार शिवपुरी में 944.80 मिलीमीटर बैराड़ में 988 मिलीमीटर पोहरी में 930 मिलीमीटर नरवर में 920 मिलीमीटर करैरा में 903.60 मिलीमीटर पिछोर में 944 मिलीमीटर कोलारस में 780.90 मिलीमीटर बदरवास में 958.50 मिलीमीटर और खनियाधाना में 796.50 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। मौसम में बदलाव के बीच आकाशीय बिजली की घटना ने एक बार फिर बारिश के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत को सामने ला दिया है।