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  • 351 बसों को मिली हरी झंडी तो सामने आईं पुरानी तस्वीरें, सीट से लेकर रेडियम तक पर उठे सवाल

    351 बसों को मिली हरी झंडी तो सामने आईं पुरानी तस्वीरें, सीट से लेकर रेडियम तक पर उठे सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की वापसी के साथ ही सुगम परिवहन सेवा को लेकर सवाल भी खड़े होने लगे हैं। 25 सितंबर को भोपाल के भेल दशहरा मैदान से केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर इस सेवा की शुरुआत की। इस व्यवस्था के तहत भोपाल समेत इंदौर जबलपुर रीवा देवास कटनी और भिंड में इंटरसिटी और इंट्रासिटी बसों का संचालन किया जा रहा है। सरकार की योजना सार्वजनिक परिवहन को बेहतर और सुविधाजनक बनाने की है लेकिन सेवा शुरू होते ही पुरानी बसों की हालत चर्चा का विषय बन गई है।

    सुगम परिवहन सेवा में शामिल 351 बसों में 180 इलेक्ट्रिक बसें हैं। इन्हें आधुनिक सुविधाओं से लैस और एयर कंडीशन बताया गया है। इसके अलावा 171 बसें पहले से अलग अलग शहरों में सिटी बस सेवा के रूप में चल रही थीं। भोपाल में ऐसी 58 बसें शामिल हैं। पहले ये बसें लाल रंग में संचालित होती थीं और भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड के तहत आती थीं। नई व्यवस्था में इन्हें मध्य प्रदेश यात्री परिवहन कंपनी के अधीन किया गया है। इसके बाद बसों को एकरूपता देने के लिए इनका रंग बदला गया और उन पर रेडियम लगाया गया।

    यहीं से विवाद शुरू हुआ। सामने आई तस्वीरों और वीडियो में कुछ बसों के अंदर सीटों और हैंडल की स्थिति खराब दिखाई गई है। एक बस के ड्राइवर की सीट उखड़ी हुई नजर आई जबकि कुछ हिस्सों में फर्श की हालत भी ठीक नहीं बताई गई। कांग्रेस ने इन तस्वीरों और वीडियो के आधार पर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पुरानी बसों को केवल बाहर से नया रूप देकर सेवा में उतारा गया है।

    कांग्रेस की ओर से सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया गया जिसमें बस की बॉडी पर लगाया गया रेडियम उखड़ता हुआ दिखाई देता है। कांग्रेस नेताओं ने रंगरोगन और रेडियम लगाने के काम को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता अभिनव बारोलिया ने दावा किया कि बसों की रंगाई पुताई और रेडियम लगाने से जुड़ा टेंडर अभी प्रक्रिया में था और एजेंसी के चयन को लेकर सवाल खड़े किए। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है।

    भोपाल में चल रही कई पुरानी डीजल बसें 2018 और 2019 मॉडल की बताई जा रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इन बसों में पहले भी खराबी और धुआं निकलने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं। करीब दस महीने पहले लिंक रोड नंबर एक पर एक सिटी बस में शॉर्ट सर्किट के बाद धुआं उठने की घटना भी हुई थी। हालांकि उस समय यात्रियों को सुरक्षित उतार लिया गया था।

    अधिकारियों के मुताबिक पुरानी और नई दोनों तरह की बसों को एक ही व्यवस्था के तहत लाने के कारण सभी बसों को एक जैसा स्वरूप दिया गया है। स्मार्ट सिटी सीईओ अंजू अरुण कुमार ने बताया कि एकरूपता के लिए संबंधित कंपनी की ओर से बसों पर रंग किया गया है। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने भी बताया कि बसें अब मध्य प्रदेश यात्री परिवहन कंपनी के अधीन आ गई हैं।

    सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में सार्वजनिक परिवहन का दायरा बढ़ाना है। पहले साल में 1500 बसें और वर्ष 2031 तक 15 हजार बसें चलाने की योजना बताई गई है। ऐसे में नई सेवा की शुरुआत के साथ उठे सवाल यह संकेत देते हैं कि बसों के बाहरी स्वरूप के साथ उनकी तकनीकी और अंदरूनी स्थिति पर भी बराबर ध्यान देना जरूरी होगा। यात्रियों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन सुनिश्चित करने के लिए बसों की नियमित जांच और रखरखाव व्यवस्था अहम भूमिका निभाएगी।

  • Pitru Paksha 2026: पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें इन 7 चीजों का दान जानें सही समय और धार्मिक महत्व

    Pitru Paksha 2026: पितरों को प्रसन्न करने के लिए करें इन 7 चीजों का दान जानें सही समय और धार्मिक महत्व


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का समय पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान श्राद्ध तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म किए जाते हैं। साथ ही जरूरतमंद लोगों को दान देने की परंपरा भी रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितरों की तृप्ति होती है और परिवार में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।

    पितृ पक्ष में अन्न दान को विशेष महत्व दिया गया है। गेहूं चावल जौ काले चने और अन्य जरूरत की खाद्य सामग्री का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अन्न का दान करने से घर में अन्न की कमी नहीं रहती और परिवार में बरकत बनी रहती है। इसलिए श्राद्ध कर्म के साथ जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या राशन सामग्री देना शुभ माना जाता है।

    दूसरे महत्वपूर्ण दानों में काले तिल का नाम लिया जाता है। श्राद्ध और तर्पण की परंपराओं में काले तिल का इस्तेमाल किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काले तिल का दान पितरों की प्रसन्नता के लिए शुभ माना जाता है। तर्पण के दौरान भी इसका विशेष उपयोग किया जाता है।

    गौ सेवा को भी पितृ पक्ष से जोड़कर देखा जाता है। सामर्थ्य के अनुसार गौशाला में हरा चारा गुड़ या भूसा दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि गौ सेवा से पुण्य की प्राप्ति होती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। जो लोग गौदान करने में सक्षम नहीं हैं वे गौशाला में जाकर सेवा या चारे का दान कर सकते हैं।

    वस्त्र दान भी पितृ पक्ष में किया जाने वाला प्रमुख दान माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को धोती कुर्ता गमछा चादर या अन्य उपयोगी कपड़े दिए जा सकते हैं। मान्यता के अनुसार वस्त्र दान से जीवन में सुख और सम्मान की प्राप्ति होती है। हालांकि दान करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वस्त्र साफ और उपयोग के योग्य हों।

    घी और गुड़ का दान भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। पितृ पक्ष में जरूरतमंद लोगों को शुद्ध घी या गुड़ देना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे घर में सुख शांति और पारिवारिक सौहार्द से जोड़कर देखा गया है।

    सामर्थ्य के अनुसार चांदी या सोने का दान भी किया जा सकता है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति महंगी धातु का दान ही करे। अपनी क्षमता के अनुसार किया गया दान और जरूरतमंद की सहायता अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा नमक का दान भी कुछ धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे नकारात्मकता दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में मदद मिलती है।

    पितृ पक्ष में दान करने के समय को लेकर भी विशेष मान्यता है। श्राद्ध कर्म और दान के लिए दोपहर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है। कुतप काल को भी श्राद्ध से जुड़े कर्मों के लिए उपयुक्त बताया गया है। हालांकि अलग अलग परंपराओं और स्थानों के अनुसार समय में अंतर हो सकता है इसलिए श्राद्ध या तर्पण की विधि करते समय स्थानीय पंचांग या विद्वान की सलाह लेना उचित रहता है।

    कुल मिलाकर पितृ पक्ष केवल दान करने का अवसर नहीं बल्कि पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करने और जरूरतमंदों की मदद करने का समय भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में श्रद्धा से किया गया अन्न दान काले तिल का दान गौ सेवा वस्त्र दान घी और गुड़ का दान चांदी या सोने का दान तथा नमक का दान विशेष पुण्यकारी माना जाता है।

  • ओमान की टीम में 9 अल बलूशी खिलाड़ी एशियन गेम्स में एक ही परिवार नाम ने खींचा सबका ध्यान

    ओमान की टीम में 9 अल बलूशी खिलाड़ी एशियन गेम्स में एक ही परिवार नाम ने खींचा सबका ध्यान


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में क्रिकेट मुकाबलों के बीच ओमान की टीम अपनी हार से ज्यादा एक अनोखे संयोग को लेकर चर्चा में आ गई है। हॉन्ग कॉन्ग के खिलाफ मुकाबले में ओमान की प्लेइंग इलेवन में एक ही सरनेम वाले सात खिलाड़ी मैदान पर उतरे। यही नहीं ओमान के पूरे स्क्वॉड में इस सरनेम वाले खिलाड़ियों की संख्या नौ है। क्रिकेट मुकाबले में ऐसा संयोग देखकर हर किसी का ध्यान ओमान की टीम की तरफ चला गया।

    25 सितंबर को निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में हॉन्ग कॉन्ग और ओमान के बीच मुकाबला खेला गया। हॉन्ग कॉन्ग ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और निर्धारित 20 ओवर में आठ विकेट खोकर 121 रन बनाए। लक्ष्य का पीछा करने उतरी ओमान की टीम 20 ओवर में छह विकेट पर 80 रन ही बना सकी और उसे 41 रन से हार का सामना करना पड़ा।

    हालांकि मैच का नतीजा ओमान के पक्ष में नहीं रहा लेकिन उसकी प्लेइंग इलेवन ने खूब सुर्खियां बटोरीं। ओमान की टीम में मोहम्मद अल बलूशी शुऐब अल बलूशी जुबैर अल बलूशी वहीद अल बलूशी ईसा अल बलूशी नवीद अल बलूशी और फारिस अल बलूशी शामिल थे। यानी मैदान पर मौजूद 11 खिलाड़ियों में से सात के नाम के साथ अल बलूशी सरनेम जुड़ा हुआ था।

    अगर पूरे स्क्वॉड की बात करें तो वसीम अल बलूशी और कैस अल बलूशी के नाम भी इसी सूची में शामिल हैं। इस तरह ओमान के स्क्वॉड में कुल नौ खिलाड़ी ऐसे हैं जिनके नाम के साथ अल बलूशी जुड़ा हुआ है। यही वजह रही कि मुकाबले के दौरान ओमान की टीम का यह अनोखा संयोग क्रिकेट प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन गया।

    इस मुकाबले में एक और दिलचस्प बात देखने को मिली। ओमान की बल्लेबाजी की शुरुआत भी अल बलूशी सरनेम वाले खिलाड़ियों ने की। मोहम्मद अल बलूशी और शुऐब अल बलूशी के बाद जुबैर अल बलूशी और वहीद अल बलूशी ने बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभाली। हालांकि हॉन्ग कॉन्ग के गेंदबाजों के सामने ओमान के बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सके। शुऐब अल बलूशी ने सबसे ज्यादा 20 रन बनाए जबकि मोहम्मद ने दो रन जुबैर ने खाता नहीं खोला और वहीद सिर्फ एक रन बना सके। ईसा अल बलूशी ने सात रन बनाए।

    गेंदबाजी में भी अल बलूशी नाम का दबदबा देखने को मिला। मोहम्मद अल बलूशी शुऐब अल बलूशी और नवीद अल बलूशी ने मिलकर हॉन्ग कॉन्ग के पांच विकेट हासिल किए। मोहम्मद सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने 17 रन देकर तीन विकेट अपने नाम किए।

    मोहम्मद अल बलूशी ने इसी साल ओमान के लिए टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू किया था। वह अब तक छह टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेल चुके हैं और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 81 रन है जो उन्होंने बहरीन के खिलाफ बनाया था। शुऐब भी छह टी20 इंटरनेशनल खेल चुके हैं और उनके नाम 117 रन के साथ चार विकेट हैं।

    जुबैर अल बलूशी ने भी छह टी20 इंटरनेशनल मुकाबले खेले हैं जबकि वहीद ने हॉन्ग कॉन्ग के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। नवीद अल बलूशी ने पांच टी20 इंटरनेशनल मैचों में सात विकेट हासिल किए हैं। फारिस अल बलूशी के नाम दो टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों में 10 रन हैं।

    अब ओमान की टीम के सामने मलेशिया की चुनौती है। क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने के लिए यह मुकाबला उसके अभियान में अहम साबित होगा। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर होगी कि क्या अल बलूशी सरनेम वाले खिलाड़ियों से सजी ओमान की टीम अगले मुकाबले में अपने प्रदर्शन से भी सुर्खियां बटोर पाती है।

  • मैराथन में भारत की ऐतिहासिक वापसी सावन बरवाल ने जीता सिल्वर बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड

    मैराथन में भारत की ऐतिहासिक वापसी सावन बरवाल ने जीता सिल्वर बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए 26 सितंबर का दिन बेहद खास बन गया। नागोया में भारत के लंबी दूरी के धावक सावन बरवाल ने पुरुष मैराथन में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। उनके इस प्रदर्शन के साथ एशियन गेम्स की मैराथन स्पर्धा में भारत का 44 साल लंबा पदक का इंतजार खत्म हो गया। सावन ने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकंड का समय निकालकर रेस पूरी की। यह उनका पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन होने के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी बन गया।

    मैराथन के फाइनल में जापान के इचिटाका यामाशिता ने 2 घंटे 10 मिनट 49 सेकंड के समय के साथ गोल्ड मेडल अपने नाम किया। सावन उनसे 48 सेकंड पीछे रहे। चीन के पेइयू फेंग ने 2 घंटे 12 मिनट 13 सेकंड के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। सावन ने रेस के शुरुआती हिस्से में जिस तरह का प्रदर्शन किया उससे साफ था कि वह पदक की मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।

    रेस की शुरुआत से ही सावन ने अपनी गति बनाए रखी। 5 किलोमीटर के पड़ाव पर वह दूसरे स्थान पर थे लेकिन 10 किलोमीटर तक पहुंचते पहुंचते उन्होंने बढ़त हासिल कर ली। 15 किलोमीटर और 20 किलोमीटर के पड़ाव पर भी सावन सबसे आगे बने रहे। हाफ मैराथन यानी 21.1 किलोमीटर की दूरी उन्होंने 1 घंटे 5 मिनट 54 सेकंड में पूरी की और उस समय भी वह रेस में आगे चल रहे थे।

    25 किलोमीटर तक सावन की बढ़त कायम रही और उन्होंने 1 घंटे 18 मिनट 19 सेकंड का समय दर्ज किया। इसके बाद जापान के यामाशिता ने रफ्तार बढ़ाई और 30 किलोमीटर के आसपास सावन को पीछे छोड़ दिया। हालांकि भारतीय धावक ने हार नहीं मानी और 35 किलोमीटर के पड़ाव तक फिर से बढ़त हासिल कर ली। रेस के अंतिम हिस्से में मुकाबला बेहद कड़ा रहा लेकिन 40 किलोमीटर के बाद यामाशिता ने निर्णायक बढ़त बना ली। अंत में सावन ने सिल्वर मेडल के साथ रेस पूरी की।

    इस पदक का ऐतिहासिक महत्व इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि भारत ने एशियन गेम्स में इससे पहले पुरुष मैराथन का पदक 1982 के दिल्ली एशियन गेम्स में जीता था। उससे पहले 1951 के एशियन गेम्स में भारत को मैराथन में गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल मिले थे। सावन का नागोया सिल्वर भारत के लिए 44 साल बाद इस स्पर्धा में आया पदक है। खास बात यह भी है कि 1982 के बाद यह पहला मौका है जब भारत ने देश के बाहर आयोजित एशियन गेम्स की मैराथन में पदक जीता है।

    सावन के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह इससे पहले राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। इसी साल अप्रैल में रॉटरडैम मैराथन में उन्होंने 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड का समय निकालकर शिवनाथ सिंह के 48 साल पुराने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। शिवनाथ सिंह ने 1978 में 2 घंटे 12 मिनट का रिकॉर्ड बनाया था। अब नागोया में सावन ने अपने ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड में और सुधार कर दिया।

    भारत के दूसरे धावक कार्तिक करकेरा भी इस फाइनल में उतरे थे। वह 19 धावकों के बीच 17वें स्थान पर रहे। वहीं सावन बरवाल का सिल्वर भारतीय एथलेटिक्स के लिए एक बड़ी उपलब्धि बन गया है।

  • Bigg Boss 20 में रीति तिवारी ने पार की हद तो सलमान खान ने लगा दी फटकार जानिए क्या हुआ था टास्क में

    Bigg Boss 20 में रीति तिवारी ने पार की हद तो सलमान खान ने लगा दी फटकार जानिए क्या हुआ था टास्क में


    नई दिल्ली। Bigg Boss 20 के घर में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। कंटेस्टेंट्स के बीच लगातार बहस और टकराव देखने को मिल रहा है और अब रीति तिवारी से जुड़ा विवाद वीकेंड का वार तक पहुंच गया है। साथी कंटेस्टेंट काजी तौकीर और उदिति सिंह के साथ हुई तीखी बहस के बाद रीति के व्यवहार और भाषा को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब शो के नए प्रोमो में सलमान खान भी इस पूरे मामले पर अपनी नाराजगी जाहिर करते नजर आ रहे हैं।

    दरअसल घर में कंटेस्टेंट्स के बीच एक दूसरे को डिस करने का टास्क रखा गया था। इसी दौरान रीति तिवारी और उदिति सिंह के बीच मुकाबला होना था। हालांकि उदिति के पीछे हटने के बाद काजी तौकीर इस मुकाबले में सामने आए। टास्क के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और माहौल लगातार गरमाता चला गया।

    आरोप है कि इस दौरान रीति ने उदिति और काजी के खिलाफ ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया जिसे शो के प्रसारण के दौरान म्यूट करना पड़ा। इस पर घर के अंदर भी मामला बढ़ गया। अपनी सफाई में रीति ने कहा कि उनके शब्दों का इस्तेमाल टास्क के दौरान राइमिंग के लिए किया गया था और उन्हें सामान्य स्लैंग की तरह इस्तेमाल किया गया।

    मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। एक अन्य टास्क के दौरान रीति और काजी के बीच फिर से तनाव देखने को मिला। इस दौरान रीति ने काजी को उनके पिता का हवाला देते हुए चेतावनी दी। इसके बाद घर का माहौल और ज्यादा गरमा गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं।

    अब वीकेंड का वार के प्रोमो में सलमान खान इस मामले पर अपनी बात रखते नजर आ रहे हैं। प्रोमो में सलमान ने रीति के व्यवहार को लेकर सवाल उठाया और कहा कि बदतमीजी की भी एक सीमा होती है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि घर के बाकी सदस्य भी रीति को उकसाने में भूमिका निभा रहे थे।

    सलमान खान ने आसिफ खान से भी सवाल किया कि अगर इसी तरह की बात उनकी अपनी बहन के लिए कही गई होती तो क्या वह इसे आसानी से स्वीकार कर लेते। सलमान के इस सवाल के बाद शो में मौजूद कंटेस्टेंट्स का रिएक्शन भी देखने लायक रहा।

    Bigg Boss में अक्सर टास्क के दौरान प्रतियोगियों के बीच बहस देखने को मिलती है लेकिन कई बार बात निजी टिप्पणियों और आपत्तिजनक भाषा तक पहुंच जाती है। ऐसे मामलों में वीकेंड का वार में सलमान खान कंटेस्टेंट्स के व्यवहार पर सवाल उठाते रहे हैं। इस बार भी रीति तिवारी से जुड़े विवाद को लेकर सलमान का रुख प्रोमो में सख्त नजर आ रहा है।

    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वीकेंड का वार के पूरे एपिसोड में सलमान खान रीति तिवारी को क्या कहते हैं और रीति इस फटकार पर किस तरह अपनी सफाई देती हैं। साथ ही काजी तौकीर और उदिति सिंह के साथ आगे उनके रिश्ते किस दिशा में जाते हैं यह भी शो के आने वाले एपिसोड में देखने को मिलेगा।

  • सहवाग को मिला रियलिटी शो का ऑफर तो बच्चों ने कर दिया मना बोले पापा यहां तो खूब होते हैं झगड़े

    सहवाग को मिला रियलिटी शो का ऑफर तो बच्चों ने कर दिया मना बोले पापा यहां तो खूब होते हैं झगड़े


    नई दिल्ली। क्रिकेट के मैदान पर अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से दुनिया भर में पहचान बनाने वाले वीरेंद्र सहवाग अब मनोरंजन की दुनिया में एक नई पारी शुरू करने जा रहे हैं पूर्व भारतीय क्रिकेटर जल्द ही रियलिटी शो Rise and Fall 2 को होस्ट करते दिखाई देंगे। शो के प्रीमियर से पहले सहवाग ने अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा की हैं। सबसे ज्यादा चर्चा उनके बच्चों के रिएक्शन की हो रही है जिन्होंने पिता के इस फैसले को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर दी थी।

    सहवाग ने बताया कि जब शो का प्रोमो सामने आया और उनके बच्चों को पता चला कि वह एक रियलिटी शो की मेजबानी करने वाले हैं तो उन्होंने पिता से सवाल कर दिया। बच्चों ने पूछा कि पापा आप यह शो क्यों कर रहे हैं। उन्हें लगा कि यह काम सहवाग के लिए सही नहीं होगा। बच्चों की चिंता की एक बड़ी वजह शो का फॉर्मेट था क्योंकि उन्हें पता था कि रियलिटी शो में प्रतियोगियों के बीच बहस और विवाद देखने को मिल सकते हैं।

    सहवाग के मुताबिक बच्चों ने उन्हें बताया कि ऐसे शो में अक्सर लड़ाई और बहस होती है। इसलिए उन्हें इस बात की चिंता थी कि उनके पिता इस तरह के माहौल का हिस्सा क्यों बन रहे हैं। हालांकि सहवाग ने बच्चों को समझाया कि उनके लिए भी यह बिल्कुल नया अनुभव है और जिंदगी में कभी कभी अलग तरह की चुनौतियों को स्वीकार करना चाहिए।

    दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ सहवाग के बच्चों ने ही इस शो को लेकर संकोच नहीं जताया था बल्कि शुरुआत में खुद वीरेंद्र सहवाग भी इसकी मेजबानी के लिए तैयार नहीं थे। उन्होंने बताया कि जब उन्हें पहली बार Rise and Fall 2 को होस्ट करने का प्रस्ताव मिला था तो उन्होंने सीधे मना कर दिया था। उनका कहना था कि वह होस्टिंग नहीं कर सकते।

    इसके बाद शो की टीम ने सहवाग को इसके फॉर्मेट के बारे में विस्तार से समझाया। उन्हें शो की कुछ क्लिप्स भी दिखाई गईं और बताया गया कि यह लाइव कार्यक्रम नहीं है बल्कि पहले से रिकॉर्ड किया जाता है। टीम ने उन्हें भरोसा दिलाया कि शो के दौरान आने वाली किसी भी परेशानी में उन्हें पूरा सहयोग मिलेगा। इसके बाद सहवाग ने इसे अपने लिए एक नए चैलेंज के तौर पर लेने का फैसला किया।

    सहवाग ने यह भी बताया कि अब उन्हें शो की पूरी टीम से अच्छा सपोर्ट मिल रहा है। क्रिकेट से अलग कैमरे के सामने एक होस्ट की भूमिका निभाना उनके लिए नया अनुभव जरूर है लेकिन वह इसे लेकर उत्साहित हैं। क्रिकेट के कई दूसरे सितारे भी मनोरंजन की दुनिया से जुड़ चुके हैं। सौरव गांगुली से लेकर हरभजन सिंह शिखर धवन और रोहित शर्मा तक अलग अलग टीवी और मनोरंजन कार्यक्रमों में नजर आ चुके हैं।

    सहवाग का मानना है कि पहले क्रिकेटर्स के लिए मनोरंजन की दुनिया में ऐसे मौके कम होते थे। उन्होंने सौरव गांगुली का उदाहरण देते हुए बताया कि दादागिरी जैसे कार्यक्रमों के जरिए क्रिकेटर्स के लिए इस क्षेत्र में नई राह खुली। अब सहवाग खुद इसी नई भूमिका में नजर आने वाले हैं।

    वीरेंद्र सहवाग ने 20 अक्टूबर 2015 को अपने 37वें जन्मदिन पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लिया था। करीब डेढ़ दशक लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर के बाद अब उनकी एक नई पारी कैमरे के सामने शुरू होने जा रही है। Rise and Fall 2 का प्रीमियर 26 सितंबर को Amazon पर होना है। अब दर्शकों की नजर इस बात पर होगी कि क्रिकेट के मैदान वाला सहवाग का बेबाक अंदाज रियलिटी शो की मेजबानी में कितना अलग दिखाई देता है।

  • उदयपुर घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ये जगहें जरूर देखें झीलों महलों और इतिहास से सजा है शहर

    उदयपुर घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ये जगहें जरूर देखें झीलों महलों और इतिहास से सजा है शहर


    नई दिल्ली। राजस्थान का उदयपुर अपनी खूबसूरत झीलों राजसी महलों और ऐतिहासिक विरासत के कारण देशभर के पर्यटकों के बीच खास पहचान रखता है। अरावली की पहाड़ियों से घिरा यह शहर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और शाही वास्तुकला के लिए जाना जाता है। अगर आप किसी ऐसी जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं जहां इतिहास संस्कृति प्रकृति और सुकून एक साथ देखने को मिले तो उदयपुर एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां परिवार दोस्तों या पार्टनर के साथ अलग अलग तरह की यात्रा का अनुभव लिया जा सकता है।

    उदयपुर की यात्रा में सबसे पहले सिटी पैलेस को शामिल किया जा सकता है। पिछोला झील के किनारे स्थित यह विशाल परिसर राजस्थानी वास्तुकला की झलक दिखाता है। महल के अलग अलग हिस्सों में खूबसूरत नक्काशी पुराने भवन और राजसी सजावट देखने को मिलती है। यहां से पिछोला झील और आसपास के क्षेत्र का खूबसूरत नजारा भी दिखाई देता है। इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह जगह खास आकर्षण हो सकती है।

    पिछोला झील उदयपुर की पहचान से जुड़ी प्रमुख जगहों में शामिल है। झील में नाव की सवारी करते हुए आसपास के महलों और पहाड़ियों का दृश्य देखा जा सकता है। शाम के समय यहां का वातावरण बेहद खूबसूरत नजर आता है। नाव की सवारी के लिए मौसम और स्थानीय नियमों के अनुसार उपलब्ध सेवाओं की जानकारी पहले लेना बेहतर रहता है।

    उदयपुर में फतेहसागर झील भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। झील के आसपास का क्षेत्र घूमने और कुछ समय शांत वातावरण में बिताने के लिए पसंद किया जाता है। यहां आसपास की हरियाली और अरावली की पहाड़ियों का दृश्य यात्रा को खास बना सकता है। सुबह या शाम के समय यहां घूमना कई लोगों को पसंद आता है।

    सज्जनगढ़ पैलेस जिसे मानसून पैलेस के नाम से भी जाना जाता है उदयपुर की एक और प्रमुख जगह है। ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यहां से शहर और आसपास की झीलों का विस्तृत दृश्य देखा जा सकता है। सूर्यास्त के समय इस क्षेत्र का नजारा खास आकर्षण बन सकता है। हालांकि यहां जाने से पहले प्रवेश समय और स्थानीय परिवहन की जानकारी जांच लेना जरूरी है।

    अगर आप प्रकृति और वन्यजीवों में रुचि रखते हैं तो सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य भी यात्रा में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा सहेलियों की बाड़ी अपनी हरियाली फव्वारों और ऐतिहासिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यह जगह शांत समय बिताने और तस्वीरें लेने के लिए लोकप्रिय है।

    उदयपुर की यात्रा केवल पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है। शहर के स्थानीय बाजारों में राजस्थानी हस्तशिल्प कपड़े आभूषण सजावटी सामान और पारंपरिक वस्तुएं भी देखी जा सकती हैं। राजस्थान के पारंपरिक भोजन का स्वाद लेना भी यात्रा का हिस्सा बन सकता है। दाल बाटी चूरमा और अन्य स्थानीय व्यंजनों का आनंद कई पर्यटक लेते हैं।

    उदयपुर घूमने का सही समय चुनना भी जरूरी है। मौसम अपेक्षाकृत सुहावना हो तो शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों को आराम से देखा जा सकता है। यात्रा से पहले होटल परिवहन प्रवेश शुल्क और पर्यटन स्थलों के खुलने के समय की जानकारी जांच लेना बेहतर रहेगा। इस तरह थोड़ी सी योजना के साथ उदयपुर की यात्रा को आरामदायक और यादगार बनाया जा सकता है। झीलों महलों पहाड़ियों और राजस्थानी संस्कृति का मेल इस शहर को खास पर्यटन अनुभव देता है।

  • अमेरिका में वोटर लिस्ट की होगी नागरिकता जांच, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के SAVE सिस्टम को दी मंजूरी

    अमेरिका में वोटर लिस्ट की होगी नागरिकता जांच, सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के SAVE सिस्टम को दी मंजूरी


    नई दिल्ली। अमेरिका में मतदाता सूची में नागरिकता सत्यापन को लेकर बड़ा कानूनी फैसला सामने आया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्रंप प्रशासन के संशोधित SAVE सिस्टम के इस्तेमाल का रास्ता फिलहाल साफ कर दिया। इस आदेश के बाद राज्य मतदाता सूची में दर्ज लोगों की नागरिकता की पुष्टि के लिए Department of Homeland Security यानी DHS के SAVE सिस्टम का इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि यह व्यवस्था राज्यों के लिए अनिवार्य नहीं है और सुप्रीम कोर्ट का आदेश फिलहाल निचली अदालत के फैसले पर रोक लगाने तक सीमित है।

    SAVE यानी Systematic Alien Verification for Entitlements सिस्टम का इस्तेमाल लंबे समय से नागरिकता और इमिग्रेशन से जुड़ी जानकारी की पुष्टि के लिए किया जाता रहा है। ट्रंप प्रशासन ने 2025 में इसके दायरे को बढ़ाने की दिशा में कदम उठाया था। इसके तहत सिस्टम में प्राकृतिक रूप से जन्मे अमेरिकी नागरिकों से जुड़े रिकॉर्ड और Social Security Administration की जानकारी को भी जोड़ने की व्यवस्था की गई। साथ ही राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों को मतदाता पंजीकरण तथा मौजूदा वोटर लिस्ट में नागरिकता की पुष्टि के लिए इसका इस्तेमाल करने की अनुमति देने की कोशिश की गई।

    इस बदलाव को लेकर कानूनी विवाद भी शुरू हुआ। निचली अदालत ने संशोधित SAVE सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। अदालत में यह तर्क दिया गया था कि नई व्यवस्था से निजी जानकारी की सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े होते हैं और गलत डेटा के कारण पात्र अमेरिकी नागरिकों को भी गैर नागरिक के तौर पर चिन्हित किए जाने का जोखिम हो सकता है। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने 25 सितंबर 2026 को आपातकालीन आदेश के जरिए निचली अदालत की रोक को फिलहाल स्थगित कर दिया।

    सुप्रीम कोर्ट के बहुमत ने कहा कि संघीय सरकार के पास राज्यों और स्थानीय चुनाव अधिकारियों की नागरिकता सत्यापन संबंधी मांगों का जवाब देने का दायित्व है। अदालत ने यह भी कहा कि निचली अदालत का आदेश सरकार को उस कार्यक्रम के इस्तेमाल से रोक रहा है जिसे वह इस काम के लिए उपयुक्त मानती है। इस फैसले से राज्यों को आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची की जांच के लिए SAVE सिस्टम का इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई है।

    हालांकि फैसले के साथ कुछ महत्वपूर्ण सीमाएं भी जुड़ी हैं। रिपोर्टों के मुताबिक चुनाव के बेहद करीब मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने पर संघीय कानून की पाबंदियां लागू रहती हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी इस बात का उल्लेख किया गया है कि ऐसी सीमाएं आगामी चुनाव पर व्यवस्था के तत्काल प्रभाव को सीमित करती हैं। राज्यों की ओर से व्यक्तिगत स्तर पर नागरिकता की जांच की जा सकती है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर राज्य को बड़े पैमाने पर नाम हटाने की स्वतः अनुमति मिल गई है।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों सोनिया सोतोमयोर एलेना कगन और केतनजी ब्राउन जैक्सन ने असहमति जताई। विरोध करने वाले पक्ष ने SAVE में Social Security रिकॉर्ड जोड़ने और गलत पहचान की आशंका को लेकर सवाल उठाए हैं। अदालत के सामने यह भी बताया गया कि संशोधित सिस्टम की जानकारी के आधार पर कुछ पात्र नागरिकों को गलत तरीके से गैर नागरिक के तौर पर चिन्हित किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

    फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अंतिम रूप से पूरे विवाद का निपटारा नहीं करता बल्कि निचली अदालत की रोक को आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान स्थगित करता है। ऐसे में अमेरिका में मतदाता सूची की नागरिकता जांच और SAVE सिस्टम की वैधता को लेकर कानूनी बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।

  • UN महासभा : कई देशों के प्रतिनिधियों से मिले जयशंकर…, ईरान-रूस के समकक्षों से अलग से की मुलाकात

    UN महासभा : कई देशों के प्रतिनिधियों से मिले जयशंकर…, ईरान-रूस के समकक्षों से अलग से की मुलाकात

    न्यूयार्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S. Jaishankar) ने शुक्रवार को ईरान और रूस (Iran and Russia) के अपने समकक्षों से मुलाकात की, जिनके साथ द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी संघर्ष समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। जयशंकर (Jaishankar) ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Russian Foreign Minister Sergey Lavrov) से मुलाकात की और द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ ब्रिक्स समूह में सहयोग पर चर्चा की। जयशंकर ने ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात के इस समूह का जिक्र करते हुए कहा कि आज रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ सकारात्मक बैठक हुई। कई मौजूदा मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। द्विपक्षीय संबंधों और ब्रिक्स में सहयोग की भी समीक्षा की।

    भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हिस्सा लिया था। जयशंकर ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ हुई बातचीत उपयोगी रही। हमने खाड़ी संघर्ष से जुड़े ताजा घटनाक्रम पर चर्चा की।

    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर कड़ा जवाब दिया, जिसने उनसे आतंकवाद से जुड़ा सवाल पूछा था। यहां पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल का कड़ा जवाब देते हुए जयशंकर ने कहा कि एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। आप तो बोलो ही मत। जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसोलो न्यंती ने संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पोत परिवहन और समुद्री कर्मियों की सुरक्षा पर बने ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स’ के बारे में संवाददाताओं को संबोधित किया।

    उनके संबोधन के बाद, पाकिस्तानी पत्रकार ने खड़े होकर जयशंकर से चिल्लाते हुए पूछा कि आपकी सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगी? संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने पाकिस्तानी पत्रकार से कहा कि आपने अपना जवाब सुन लिया है। आपने अपना जवाब साफ-साफ सुन लिया है। गुरुवार को, जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ संयुक्त राष्ट्र भवन में दाखिल हो रहे थे, तो एक भारतीय पत्रकार ने उनसे पूछा था कि आप आतंकवादियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?

  • बंगाल: CM शुभेंदु अधिकारी ने राष्ट्रपति द्वारा एंटी-गुंडा बिल लौटाने की खबरों का किया खंडन…?

    बंगाल: CM शुभेंदु अधिकारी ने राष्ट्रपति द्वारा एंटी-गुंडा बिल लौटाने की खबरों का किया खंडन…?


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Chief Minister Suvendu Adhikari) ने शुक्रवार को उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने ‘गुंडा रोधी विधेयक’ को पुनर्विचार के लिए राज्य सरकार को वापस भेज दिया है। शुभेंदु ने कहा कि प्रस्तावित कानून फिलहाल गृह मंत्रालय के विचाराधीन है। मीडिया के एक वर्ग में खबर आई थी कि राष्ट्रपति ने विधेयक के एक प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए इसे लौटा दिया है, जो केंद्र के एक मादक पदार्थ रोधी कानून के साथ ओवरलैप कर सकता है।

    शुभेंदु ने देर शाम राज्य सचिवालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह फर्जी खबर है। इसका कोई आधार नहीं है। यह विधेयक अभी राष्ट्रपति तक नहीं पहुंचा है और विचार-विमर्श के लिए गृह मंत्रालय के पास ही है। वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौजूद मुख्यमंत्री ने कहा कि विधेयक पूर्ण रूप से स्पष्ट है और उन्होंने इसके राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने की उम्मीद जताई।

    जून में पारित हुए इस विधेयक का उद्देश्य संगठित अपराध, बार-बार अपराध करने वालों और सार्वजनिक अव्यवस्था पर अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार को व्यापक अधिकार प्रदान करना है। इस कानून के माध्यम से निवारक हिरासत और संपत्ति जब्ती जैसे उपायों के जरिए सिंडिकेट, जबरन वसूली रैकेट, भूमि कब्जा, अवैध खनन और राजनीतिक हिंसा पर लगाम लगाने का प्रयास किया गया है।

    इससे पहले खबरें आई थीं कि राष्ट्रपति ने एंटी-गुंडा विधेयक राष्ट्रपति द्वारा बिना मंजूरी के वापस लौटा दिया है। ऐसी भी खबरें आई थीं कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बयान दिया है कि अब इसके कानूनी प्रावधानों की जांच करेगी और नए मसौदे पर काम करेगी। इसमें कहा गया था कि एंटी-गुंडा कानून चार अन्य राज्यों में अस्तित्व में है। हम कानूनी तरीकों से काम करेंगे। कोई कठिनाई नहीं होगी।