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  • 70 साल के बाद कैंसर का बढ़ता खतरा एक्सपर्ट्स ने बताए शुरुआती लक्षण बचाव और समय पर जांच का महत्व

    70 साल के बाद कैंसर का बढ़ता खतरा एक्सपर्ट्स ने बताए शुरुआती लक्षण बचाव और समय पर जांच का महत्व


    नई दिल्ली । उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के प्राकृतिक बदलाव होते हैं और इसी के साथ कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगता है। इनमें कैंसर सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक माना जाता है। हाल के वर्षों में सामने आई कई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च यह संकेत देती हैं कि बुजुर्गों में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सबसे चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में मरीजों में बीमारी का पता तब चलता है जब कैंसर काफी आगे बढ़ चुका होता है। ऐसे में इलाज जटिल हो जाता है और मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना भी कम हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर की कोशिकाओं में लंबे समय तक होने वाले बदलाव कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं। इसके अलावा प्रतिरक्षा प्रणाली भी पहले की तुलना में कमजोर होने लगती है जिससे शरीर असामान्य कोशिकाओं को प्रभावी तरीके से खत्म नहीं कर पाता। यही कारण है कि 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में कैंसर के मामले अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिलते हैं।

    हाल में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में लाखों बुजुर्ग मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि बड़ी संख्या में लोगों को कैंसर का पता तब चला जब उन्हें गंभीर स्थिति में अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराना पड़ा। ऐसे मरीजों में जीवित रहने की संभावना उन लोगों की तुलना में काफी कम पाई गई जिनमें बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो गई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि समय पर जांच और सही निदान जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि फेफड़े लिवर पेट कोलन ओवरी और पैंक्रियाज जैसे कैंसर के मामलों में देर से पहचान होने की संभावना अधिक रहती है। वहीं स्तन और प्रोस्टेट कैंसर जैसे कुछ प्रकारों में नियमित जांच के कारण शुरुआती चरण में बीमारी पकड़ में आने की संभावना बेहतर होती है। इसलिए डॉक्टर उम्र के अनुसार समय समय पर हेल्थ चेकअप और स्क्रीनिंग कराने की सलाह देते हैं।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि बुजुर्गों में अचानक वजन कम होना लगातार थकान भूख में कमी लंबे समय तक खांसी मल या पेशाब की आदतों में बदलाव शरीर के किसी हिस्से में असामान्य गांठ बार बार खून आना या बिना कारण दर्द बने रहना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि ये संकेत लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई कि कई बार अधिक उम्र होने के कारण मरीजों को आवश्यक इलाज कम मिल पाता है जबकि उनकी शारीरिक स्थिति उपचार के लिए उपयुक्त हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इलाज का निर्णय केवल उम्र के आधार पर नहीं बल्कि मरीज की संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

    स्वस्थ जीवनशैली नियमित व्यायाम संतुलित आहार धूम्रपान और शराब से दूरी पर्याप्त नींद तथा समय समय पर स्वास्थ्य जांच कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। परिवार के सदस्यों की भी जिम्मेदारी है कि वे बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखें और किसी भी असामान्य बदलाव को हल्के में न लें। समय पर पहचान और सही उपचार ही कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार साबित हो सकता है।

  • दतिया उपचुनाव में दोपहर 3 बजे तक 61.99% मतदान, कांग्रेस-बीजेपी कर रही अपनी-अपनी जीत का दावा

    दतिया उपचुनाव में दोपहर 3 बजे तक 61.99% मतदान, कांग्रेस-बीजेपी कर रही अपनी-अपनी जीत का दावा

    दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को मतदान उत्साहपूर्ण माहौल में जारी है। 3 बजे तक 61.99 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। जिले के 291 मतदान केंद्रों पर कुल 2 लाख 20 हजार 400 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।

    इस बीच कांग्रेस ने सिरोल क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका जताई। पार्टी प्रत्याशी घनश्याम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और निर्वाचन अधिकारियों से बातचीत कर निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने की मांग की।

    वहीं, कांग्रेस के आरोपों पर पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस चुनाव हारने की आशंका के चलते बेबुनियाद आरोप लगा रही है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी की हताशा और निराशा को दर्शाता है।

    ठाकुरपुरा के बूथ संख्या-275 पर कुल 841 मतदाता हैं। यहां दोपहर 3:30 बजे तक करीब 82 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। पिछले विधानसभा चुनाव में इसी बूथ पर लगभग 98 प्रतिशत मतदान हुआ था।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने डबरा में दावा किया कि दतिया में प्रशासनिक दबाव और धनबल का इस्तेमाल किया गया, लेकिन इसके बावजूद जनता कांग्रेस के पक्ष में मतदान कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह बड़ी बढ़त के साथ चुनाव जीतेंगे और पार्टी को करीब 25 हजार वोटों से विजय मिलेगी।

    उधर, कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए पार्टी कार्यकर्ता शिवपुरी सीमा पर सक्रिय हैं और दतिया की जनता प्रदेश की “सरकारी अराजकता” का लोकतांत्रिक जवाब देने के लिए मतदान कर रही है।

    मतदान के दौरान मौसम ने भी करवट बदली। दतिया शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश हुई, जिसके बाद तेज धूप निकलने से उमस बढ़ गई। मौसम की चुनौती के बावजूद मतदान केंद्रों पर मतदान प्रक्रिया लगातार जारी रही।

  • नीली जर्सी से ऑरेंज तक भारतीय हॉकी का नया सफर हॉकी इंडिया ने बताया बदलाव का बड़ा तकनीकी कारण

    नीली जर्सी से ऑरेंज तक भारतीय हॉकी का नया सफर हॉकी इंडिया ने बताया बदलाव का बड़ा तकनीकी कारण


    नई दिल्ली। भारतीय हॉकी टीम की नई ऑरेंज जर्सी को लेकर उठे सवालों पर हॉकी इंडिया ने कहा कि नीली जर्सी और नीले टर्फ के कारण खिलाड़ियों की दृश्यता प्रभावित हो रही थी। खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ की सलाह के बाद यह फैसला लिया गया।
    भारतीय हॉकी टीम की नई ऑरेंज जर्सी को लेकर उठे सवालों पर हॉकी इंडिया ने कहा कि नीली जर्सी और नीले टर्फ के कारण खिलाड़ियों की दृश्यता प्रभावित हो रही थी। खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ की सलाह के बाद यह फैसला लिया गया।

    भारतीय हॉकी टीम की नई जर्सी को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। हॉकी इंडिया ने साफ किया है कि टीम की पारंपरिक नीली जर्सी को बदलकर ऑरेंज रंग अपनाने का फैसला किसी प्रचार या ब्रांडिंग के लिए नहीं बल्कि खिलाड़ियों की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है। संस्था का कहना है कि आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हॉकी टर्फ का रंग भी नीला होता है जिससे खिलाड़ियों की जर्सी मैदान में आसानी से घुलमिल जाती थी और इससे दृश्यता के साथ खेल पर भी असर पड़ रहा था।

    दरअसल हाल ही में हॉकी इंडिया ने एफआईएच हॉकी विश्व कप से पहले भारतीय टीम की नई ऑरेंज जर्सी लॉन्च की थी। इसके बाद भारतीय टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय हॉकी की पहचान हमेशा से नीली जर्सी रही है और फैंस भी टीम को उसी रंग में देखना पसंद करते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर ऑरेंज रंग चुनने का क्या कारण है।

    हॉकी इंडिया ने इस पर विस्तृत जवाब देते हुए बताया कि यह निर्णय खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ के साथ कई दौर की चर्चा के बाद लिया गया। संस्था के अनुसार खिलाड़ियों ने महसूस किया कि नीले रंग की जर्सी और नीली सिंथेटिक हॉकी पिच का रंग लगभग एक जैसा होने से मैच के दौरान खिलाड़ियों की पहचान और दृश्यता प्रभावित होती है। इससे पासिंग मूवमेंट और खेल की गति पर भी असर पड़ सकता है। इसी वजह से खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ ने पीले या ऑरेंज जैसे अलग रंगों का सुझाव दिया था। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ऑरेंज रंग को अंतिम रूप दिया गया।

    हॉकी इंडिया ने यह भी कहा कि ऑरेंज रंग केवल तकनीकी दृष्टि से ही उपयुक्त नहीं है बल्कि इसका राष्ट्रीय महत्व भी है। यह रंग भारतीय तिरंगे का हिस्सा है और साहस त्याग ऊर्जा और राष्ट्र गौरव का प्रतीक माना जाता है। संस्था का मानना है कि नई जर्सी खिलाड़ियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ भारतीय पहचान को भी मजबूत करेगी।

    संस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलना कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के दौरान टीम की किट में बदलाव किए जा चुके हैं। वर्ष 2014 के हॉकी विश्व कप में भारतीय टीम पीले रंग की जर्सी में उतरी थी जबकि 2018 के विश्व कप में आसमानी नीले रंग की अलग डिजाइन वाली जर्सी का उपयोग किया गया था। इसलिए मौजूदा बदलाव को परंपरा से अलग नहीं बल्कि समय और आवश्यकता के अनुसार किया गया निर्णय बताया गया है।

    हॉकी इंडिया का कहना है कि खिलाड़ियों का प्रदर्शन सर्वोच्च प्राथमिकता है और यदि किसी तकनीकी बदलाव से उनकी दृश्यता और खेल बेहतर होता है तो ऐसे फैसले भविष्य में भी लिए जा सकते हैं। संस्था को उम्मीद है कि नई ऑरेंज जर्सी में भारतीय टीम विश्व मंच पर शानदार प्रदर्शन करेगी और एक नई पहचान के साथ देश का गौरव बढ़ाएगी।

  • महंगे हेयर प्रोडक्ट्स छोड़िए अलसी अपनाइए बालों को मजबूत चमकदार और हेल्दी बनाने का आसान घरेलू उपाय

    महंगे हेयर प्रोडक्ट्स छोड़िए अलसी अपनाइए बालों को मजबूत चमकदार और हेल्दी बनाने का आसान घरेलू उपाय


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में प्रदूषण खराब खानपान तनाव और केमिकल युक्त हेयर प्रोडक्ट्स के कारण बालों का झड़ना रूखापन और समय से पहले सफेद होना आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में लोग प्राकृतिक उपायों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। अलसी जिसे फ्लैक्ससीड भी कहा जाता है बालों की देखभाल के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प माना जाता है। इसमें ओमेगा थ्री फैटी एसिड प्रोटीन विटामिन ई फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं जो बालों की जड़ों को पोषण देने में मदद करते हैं।

    अलसी का नियमित और सही तरीके से उपयोग करने से बाल मजबूत बनने में सहायता मिल सकती है। इसमें मौजूद ओमेगा थ्री फैटी एसिड स्कैल्प को पोषण देता है और बालों की जड़ों तक जरूरी पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है। इससे बालों के टूटने और झड़ने की समस्या कम हो सकती है। साथ ही विटामिन ई बालों की प्राकृतिक चमक बनाए रखने और उन्हें मुलायम बनाने में सहायक माना जाता है।

    अगर आपके बाल रूखे और बेजान हो गए हैं तो अलसी का जेल एक अच्छा प्राकृतिक हेयर जेल साबित हो सकता है। अलसी के बीजों को पानी में उबालकर तैयार किया गया जेल बालों को बिना नुकसान पहुंचाए प्राकृतिक नमी देने में मदद करता है। इसे बाल धोने से पहले या हेयर स्टाइलिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बालों में चमक आती है और फ्रिजी हेयर की समस्या कम हो सकती है।

    अलसी का सेवन भी बालों की सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है। रोजाना सीमित मात्रा में भुनी हुई अलसी या अलसी पाउडर को दही सलाद या स्मूदी में मिलाकर खाने से शरीर को जरूरी पोषण मिलता है जो बालों की ग्रोथ में मदद कर सकता है। हालांकि किसी भी नई चीज को नियमित आहार में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।

    यदि स्कैल्प में रूसी या खुजली की समस्या रहती है तो अलसी के जेल में एलोवेरा जेल मिलाकर लगाने से आराम मिल सकता है। यह मिश्रण स्कैल्प को ठंडक पहुंचाने के साथ नमी बनाए रखने में भी मदद करता है। लेकिन अगर किसी को स्कैल्प पर संक्रमण एलर्जी या गंभीर त्वचा संबंधी समस्या है तो घरेलू उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    अलसी का उपयोग करते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। पहली बार इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करें ताकि किसी प्रकार की एलर्जी का पता चल सके। तैयार किया गया अलसी जेल लंबे समय तक कमरे के तापमान पर न रखें बल्कि फ्रिज में सुरक्षित रखें और कुछ दिनों के भीतर उपयोग कर लें। किसी भी घरेलू उपाय से तुरंत चमत्कारी परिणाम की उम्मीद नहीं करनी चाहिए क्योंकि अच्छे परिणाम के लिए नियमित देखभाल और संतुलित जीवनशैली भी उतनी ही जरूरी होती है।

    स्वस्थ बाल केवल बाहरी देखभाल से नहीं बल्कि सही खानपान पर्याप्त पानी नियमित नींद और तनाव से दूरी बनाए रखने से भी मिलते हैं। अलसी इन सभी प्रयासों के साथ एक प्रभावी प्राकृतिक सहयोगी बन सकती है। यदि बालों का झड़ना लगातार बढ़ रहा हो या कोई गंभीर समस्या हो तो त्वचा एवं बाल विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सही कदम होगा।

  • कंगना रनौत के बयान पर झांसी में महिला कांग्रेस का प्रदर्शन, उठाई माफी की मांग

    कंगना रनौत के बयान पर झांसी में महिला कांग्रेस का प्रदर्शन, उठाई माफी की मांग

    झांसी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं को लेकर भाजपा सांसद कंगना रनौत की कथित टिप्पणी के विरोध में गुरुवार को झांसी में महिला कांग्रेस ने कचहरी चौराहा पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए सांसद से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।

    महिला कांग्रेस की शहर अध्यक्ष आसिया सिद्दीकी ने आरोप लगाया कि भाजपा विरोध और असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन छात्रों के आंदोलन को अपमानित करने वाली भाषा का इस्तेमाल दुर्भाग्यपूर्ण है।

    कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नीट पेपर लीक जैसे मामलों से देशभर के कई छात्र मानसिक रूप से प्रभावित हुए हैं और कुछ ने आत्महत्या जैसा कदम भी उठाया। ऐसे समय में आंदोलनरत छात्रों के संघर्ष का मजाक उड़ाना उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है।

    प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कंगना रनौत से देश के विद्यार्थियों से सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सांसद अपने बयान पर माफी नहीं मांगती हैं तो विरोध प्रदर्शन को और व्यापक किया जाएगा। इस मौके पर कार्यकर्ताओं ने भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

  • फिरोजाबाद में फ्लोराइड का कहर: गर्भ से नवजात तक असर, हर महीने 2 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण की चपेट में

    फिरोजाबाद में फ्लोराइड का कहर: गर्भ से नवजात तक असर, हर महीने 2 हजार से अधिक बच्चे कुपोषण की चपेट में


    फिरोजाबाद। फिरोजाबाद जिले में भूजल में बढ़ते फ्लोराइड का असर अब नवजातों के स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, फ्लोराइडयुक्त पानी के सेवन से गर्भवती महिलाओं में कैल्शियम की कमी बढ़ रही है, जिससे कम वजन और कुपोषित बच्चों का जन्म हो रहा है। हालात ऐसे हैं कि जिले में हर महीने औसतन दो हजार से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार मिल रहे हैं।

    जिला बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में 2,354 बच्चे कुपोषित और 559 बच्चे अति कुपोषित पाए गए। वहीं जून में यह संख्या क्रमशः 2,542 और 667 दर्ज की गई थी।

    351 गांवों का भूजल फ्लोराइड से प्रभावित
    जल जीवन मिशन के सर्वे के अनुसार, जिले के 790 गांवों में से 351 गांवों के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई है। कुछ क्षेत्रों में इसकी मात्रा 3 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जबकि सुरक्षित सीमा 1 से 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर मानी जाती है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में टूंडला, नारखी, हाथवंत, एका और जसराना ब्लॉक शामिल हैं। अगस्त 2023 में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली ‘हर घर नल से जल’ योजना शुरू होने के बावजूद अब तक प्रभावित क्षेत्रों को अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।

    विशेषज्ञ बोले- फ्लोराइड और पोषण की कमी दोनों जिम्मेदार

    शिकोहाबाद संयुक्त चिकित्सालय के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) के प्रभारी एवं सीएमएस डॉ. रमेश चंद केशव का कहना है कि फ्लोराइडयुक्त पानी गर्भवती महिलाओं के शरीर में कैल्शियम की कमी पैदा करता है, जिससे कमजोर और कम वजन वाले बच्चों का जन्म होता है। उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार की कमी और जन्म के बाद उचित पोषण न मिलना भी कुपोषण का बड़ा कारण है। वर्तमान में एनआरसी में सात कुपोषित बच्चों का इलाज चल रहा है।

    इलाज से सुधर रही बच्चों की स्थिति
    हाथवंत की निवासी प्रियंका देवी ने बताया कि उनके क्षेत्र में खारा और फ्लोराइडयुक्त पानी मिलता है। उनके बच्चे का जन्म के समय वजन केवल 1.8 किलोग्राम था, जो उपचार के बाद बढ़कर 3.8 किलोग्राम हो गया है। वहीं शिकोहाबाद की संगीता देवी ने बताया कि उनके छह माह के बेटे का जन्म के समय वजन 1.6 किलोग्राम था, जो अब बढ़कर 3.4 किलोग्राम हो चुका है।

    पुष्टाहार वितरण भी बना चुनौती
    जिला बाल विकास एवं पुष्टाहार अधिकारी केसरी नंदन तिवारी ने बताया कि मेन्यू में बदलाव के कारण उत्पादन प्रभावित होने से पुष्टाहार की आपूर्ति बाधित हुई है। नतीजतन आंगनबाड़ी केंद्रों तक जून और जुलाई का पुष्टाहार नहीं पहुंच सका। जिले में 15,036 गर्भवती महिलाओं और 15,520 धात्री माताओं को इसका लाभ मिलना है।

    जल जीवन मिशन का लक्ष्य 2027
    नमामि गंगे एडीएम मोहनलाल गुप्ता ने बताया कि ‘हर घर नल से जल’ योजना का कार्य दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बजट मिलने के बाद परियोजना पर काम दोबारा शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि फ्लोराइड प्रभावित गांवों में दोबारा पानी की जांच कराकर प्राथमिकता के आधार पर स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

    सुरक्षित फ्लोराइड की सीमा
    विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के अनुसार, पीने के पानी में फ्लोराइड की आदर्श मात्रा 1 मिलीग्राम प्रति लीटर है, जबकि 1.5 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक फ्लोराइड स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। अधिक मात्रा में फ्लोराइड हड्डियों, दांतों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों के शारीरिक विकास पर गंभीर असर डाल सकता है।

  • गोरखपुर में खाकी हुई शर्मसार: अस्पताल से 10 वर्षीय बच्ची का अपहरण, दुष्कर्म के बाद की हत्या

    गोरखपुर में खाकी हुई शर्मसार: अस्पताल से 10 वर्षीय बच्ची का अपहरण, दुष्कर्म के बाद की हत्या


    गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पुलिस महकमे को शर्मसार कर देने वाली वारदात सामने आई है। पुलिस की वर्दी पहने एक सिपाही ने जिला अस्पताल से 10 वर्षीय बच्ची का कथित रूप से अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किया और बाद में हत्या कर शव चिवटहा पुल के नीचे फेंक दिया। पुलिस ने आरोपी सिपाही अभिषेक यादव को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए बर्खास्तगी की संस्तुति भेजी गई है और उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की तैयारी की जा रही है।

    पुलिस के अनुसार, आजमगढ़ के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के गोपालगंज निवासी पीड़ित परिवार पिछले चार वर्षों से गोरखपुर में रह रहा है। बच्ची के पिता ई-रिक्शा चलाते हैं। 27 जुलाई को बड़ी बेटी की तबीयत खराब होने पर उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसी रात करीब साढ़े आठ बजे 10 वर्षीय बच्ची अपनी बहन के लिए खाना लेकर अस्पताल पहुंची। खाना खिलाने के बाद वह रात करीब नौ बजे घर लौटने के लिए निकली, लेकिन घर नहीं पहुंची।

    परिजनों ने काफी तलाश के बाद कोतवाली थाने में अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान अस्पताल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। 39 सेकंड की फुटेज में पुलिस की वर्दी पहने एक युवक बच्ची से बातचीत करता और फिर उसे बाइक पर बैठाकर ले जाता दिखाई दिया। जांच में उसकी पहचान सिपाही अभिषेक यादव के रूप में हुई।

    पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद गुरुवार तड़के चिवटहा पुल के नीचे से बच्ची का शव बरामद किया गया। शव मिलने के बाद मामले में हत्या की धाराएं भी जोड़ दी गईं। पुलिस अब वारदात के पूरे घटनाक्रम और हत्या के कारणों की जांच कर रही है।

    एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि बच्ची को दुर्भावनापूर्ण तरीके से अगवा किया गया था। आरोपी सिपाही अभिषेक यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की जाएगी और सेवा से बर्खास्त करने की रिपोर्ट भी भेज दी गई है।

    पांच बहनों में दूसरे नंबर पर थी मासूम
    परिजनों ने बताया कि बच्ची पांच बहनों में दूसरे नंबर की थी। उसकी मां नौ माह की गर्भवती है। बड़ी बहन के अस्पताल में भर्ती होने के कारण वह उसके लिए खाना लेकर गई थी। घर लौटते समय आरोपी सिपाही के संपर्क में आने के बाद वह लापता हो गई, जिसके बाद यह दर्दनाक वारदात सामने आई।

  • कांवड़ यात्रा के चलते मुरादाबाद में आज रात से लागू होगा डायवर्जन, दिल्ली-लखनऊ समेत कई रूटों पर बदलेगा ट्रैफिक

    कांवड़ यात्रा के चलते मुरादाबाद में आज रात से लागू होगा डायवर्जन, दिल्ली-लखनऊ समेत कई रूटों पर बदलेगा ट्रैफिक

    मुरादाबाद। कांवड़ यात्रा को देखते हुए मुरादाबाद में गुरुवार रात से दिल्ली रोड पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से विस्तृत डायवर्जन योजना लागू होगी। फिलहाल छोटे और चार पहिया वाहनों का आवागमन जारी रहेगा, लेकिन कांवड़ियों की संख्या बढ़ने पर इनके लिए भी वैकल्पिक मार्ग लागू किए जा सकते हैं।

    पुलिस अधीक्षक (यातायात) सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि डायवर्जन व्यवस्था का सख्ती से पालन कराने के लिए प्रमुख चौराहों और मार्गों पर पुलिस बल तैनात रहेगा। एसपी सिटी कुमार रण विजय सिंह के अनुसार, कांवड़ यात्रा के मद्देनजर हाईवे और कांवड़ मार्ग से जुड़े थाना क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।

    इन मार्गों से गुजरेंगे भारी वाहन
    शाहजहांपुर से दिल्ली जाने वाले वाहन बदायूं, बबराला, नरौरा और बुलंदशहर होकर जाएंगे।
    मुरादाबाद से दिल्ली जाने वाले ट्रक और अन्य भारी वाहन संभल, बबराला, नरौरा, बुलंदशहर और हापुड़ के रास्ते भेजे जाएंगे।
    बरेली और रामपुर से दिल्ली जाने वाले वाहन बिलारी, सिरसी, संभल, चौधरी सराय और गंगा एक्सप्रेस-वे के जरिए निकलेंगे।
    मुरादाबाद से मेरठ और दिल्ली की ओर जाने वाले वाहन गांगन तिराहा, मनोटा, सिरसी, संभल, बबराला, नरौरा, डिबाई, बुलंदशहर और हापुड़ मार्ग का उपयोग करेंगे।
    दिल्ली और गाजियाबाद से रामपुर, बरेली व लखनऊ जाने वाले भारी वाहन हापुड़, सिंभावली, डिबाई, नरौरा और बदायूं होकर गुजरेंगे।
    बिजनौर और हरिद्वार की दिशा में जाने वाले वाहनों को काशीपुर तिराहा, ठाकुरद्वारा, जसपुर, अफजलगढ़ और धामपुर मार्ग से भेजा जाएगा, जबकि हल्के वाहन टीएमयू और अगवानपुर मार्ग से संचालित होंगे।

    डीजीपी के सामने पेश होगा कांवड़ यात्रा का प्लान
    गुरुवार को बरेली में डीजीपी कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इस बैठक में मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया जिले की ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत प्रेजेंटेशन देंगे। प्रशासन ने कांवड़ियों की सुविधा और सुचारु यातायात बनाए रखने के लिए व्यापक योजना तैयार की है।

    काशीपुर-रामनगर रूट पर आधी बसें चलेंगी
    31 जुलाई से 24 अगस्त तक लागू रहने वाले डायवर्जन के कारण काशीपुर-रामनगर रूट पर बस संचालन भी प्रभावित रहेगा। सामान्य दिनों में जहां 70 बसें चलती हैं, वहीं इस अवधि में केवल 35 बसों का संचालन होगा। यात्रियों की सुविधा के लिए रामपुर दोराहा से हर 30 मिनट पर बस उपलब्ध रहेगी। कांवड़ यात्रा समाप्त होने के बाद 24 अगस्त से सभी बसें पहले की तरह नियमित रूप से संचालित की जाएंगी।

  • जन औषधि योजना के तहत किफायती न्यूट्रास्यूटिकल्स पर सरकार का जोर, कम कीमत में मिल रहे पोषण सप्लीमेंट

    जन औषधि योजना के तहत किफायती न्यूट्रास्यूटिकल्स पर सरकार का जोर, कम कीमत में मिल रहे पोषण सप्लीमेंट

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत उपलब्ध न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद देशभर के परिवारों के लिए स्वास्थ्यवर्धक पोषण सप्लीमेंट को अधिक सुलभ और किफायती बना रहे हैं। सरकार के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य आवश्यक पोषण उत्पादों को कम कीमत पर उपलब्ध कराकर आम लोगों के स्वास्थ्य संबंधी खर्च को कम करना और संतुलित पोषण को बढ़ावा देना है।

    सरकार के मुताबिक, जन औषधि केंद्रों पर विभिन्न आयु वर्ग और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के न्यूट्रास्यूटिकल उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें प्रोटीन बार, इम्यूनिटी बार, महिलाओं के लिए विशेष प्रोटीन सप्लीमेंट, माल्ट आधारित पोषण आहार तथा प्रोटीन पाउडर जैसे उत्पाद शामिल हैं। इन उत्पादों को बच्चों, कामकाजी लोगों, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और फिटनेस के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं की पोषण आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    सरकारी जानकारी के अनुसार, जन औषधि प्रोटीन बार और इम्यूनिटी बार 35 ग्राम के चॉकलेट पैक में उपलब्ध हैं। वहीं महिलाओं के लिए तैयार किए गए विशेष प्रोटीन बूस्ट को चॉकलेट और वनीला फ्लेवर में 250 ग्राम पैक के रूप में उपलब्ध कराया गया है। सरकार का कहना है कि इन उत्पादों का उद्देश्य रोजमर्रा के आहार में अतिरिक्त पोषण उपलब्ध कराना है ताकि विभिन्न वर्गों की पोषण संबंधी जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके।

    जन औषधि योजना के अंतर्गत पोषण रेंज में माल्ट आधारित न्यूट्रिशनल फूड भी शामिल किया गया है। सरकार के अनुसार, यह उत्पाद आवश्यक विटामिन और खनिजों से समृद्ध है और पूरे परिवार के लिए दैनिक पोषण का एक उपयोगी विकल्प माना जाता है। 500 ग्राम के सामान्य माल्ट पैक के साथ कोको फ्लेवर वाला विकल्प भी उपलब्ध है। इसके अलावा कम मात्रा में खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं के लिए छोटे सैशे पैक भी उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे कम बजट वाले परिवारों को भी इन उत्पादों तक आसान पहुंच मिल सके।

    सरकार का कहना है कि विभिन्न पैक आकार उपलब्ध होने से उपभोक्ता अपनी आवश्यकता और आर्थिक क्षमता के अनुसार उत्पाद चुन सकते हैं। इन पोषण उत्पादों को तैयार करना भी आसान है और नियमित उपयोग के लिए उपयुक्त माना गया है। इससे परिवारों को कम लागत में अतिरिक्त पोषण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।

    फिटनेस और प्रोटीन की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए योजना के तहत 100 प्रतिशत व्हे प्रोटीन पाउडर और जन औषधि प्रोटीन पाउडर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार, ये उत्पाद दैनिक प्रोटीन की आवश्यकता पूरी करने के साथ-साथ मांसपेशियों की रिकवरी में भी सहायक माने जाते हैं। विशेष रूप से व्यायाम करने वाले लोगों और अधिक प्रोटीन की आवश्यकता वाले उपभोक्ताओं के लिए इन्हें उपयोगी विकल्प बताया गया है।

    प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना का मुख्य उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण दवाओं और स्वास्थ्य संबंधी उत्पादों को आम नागरिकों तक किफायती दरों पर पहुंचाना है। सरकार का कहना है कि न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों को योजना में शामिल करने से अब लोगों को केवल सस्ती दवाएं ही नहीं, बल्कि कम कीमत पर पोषण संबंधी उत्पाद भी उपलब्ध हो रहे हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक समावेशी बनाने और पोषण संबंधी जागरूकता बढ़ाने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।

    सरकार का मानना है कि जन औषधि केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध इन उत्पादों से परिवारों का स्वास्थ्य व्यय कम करने, संतुलित पोषण को प्रोत्साहित करने और विभिन्न आय वर्ग के लोगों तक आवश्यक पोषण उत्पाद पहुंचाने में मदद मिल रही है। आने वाले समय में भी इस श्रेणी में नए उत्पाद शामिल किए जाने की संभावना पर काम जारी है।

  • कपल्स के लिए परफेक्ट है उदयपुर सिर्फ 10 हजार में घूमिए महल झीलें बाजार और स्वादिष्ट राजस्थानी व्यंजन

    कपल्स के लिए परफेक्ट है उदयपुर सिर्फ 10 हजार में घूमिए महल झीलें बाजार और स्वादिष्ट राजस्थानी व्यंजन


    नई दिल्ली । अगर आप अपने पार्टनर के साथ किसी खूबसूरत और रोमांटिक जगह पर छुट्टियां बिताने का सपना देख रहे हैं लेकिन बजट की चिंता आपको रोक रही है तो उदयपुर आपके लिए शानदार विकल्प साबित हो सकता है। झीलों की नगरी के नाम से मशहूर यह शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता भव्य महलों ऐतिहासिक इमारतों रंगीन बाजारों और राजस्थानी संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। अच्छी बात यह है कि थोड़ी सी प्लानिंग के साथ एक कपल करीब 10 हजार रुपये के बजट में यहां आरामदायक और यादगार यात्रा कर सकता है।

    कम खर्च में उदयपुर घूमने के लिए अप्रैल से सितंबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इस दौरान पर्यटकों की भीड़ कम रहती है जिससे होटल और यात्रा दोनों पर अच्छी बचत हो जाती है। अगर पहले से ट्रेन या फ्लाइट की बुकिंग कर ली जाए तो किराया काफी कम हो सकता है। ट्रेन से यात्रा सबसे किफायती विकल्प मानी जाती है जबकि ऑफ सीजन में कई बार सस्ती फ्लाइट भी मिल जाती है।

    रहने के लिए उदयपुर में कई बजट होटल गेस्ट हाउस और होमस्टे उपलब्ध हैं। यहां साफ सुथरे कमरे उचित कीमत पर मिल जाते हैं। कई जगहों पर नाश्ता और मुफ्त वाईफाई जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं। अगर थोड़ा अलग अनुभव चाहते हैं तो छोटे हेरिटेज होटल भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं जहां राजस्थानी मेहमाननवाजी का शानदार अनुभव मिलता है।

    उदयपुर का स्वादिष्ट भोजन आपकी यात्रा को और खास बना देता है। यहां दाल बाटी चूरमा गट्टे की सब्जी प्याज कचौरी और पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद जरूर लेना चाहिए। स्थानीय ढाबों और रेस्टोरेंट में कम कीमत में भरपेट भोजन मिल जाता है। अगर स्ट्रीट फूड पसंद है तो हाथीपोल बाजार और बड़ा बाजार में कई स्वादिष्ट व्यंजन बेहद किफायती दामों में उपलब्ध हैं।

    शहर घूमने के लिए लोकल बस ऑटो और किराये की स्कूटी सबसे अच्छे विकल्प हैं। स्कूटी लेकर आप अपनी सुविधा के अनुसार पूरे दिन आराम से शहर की खूबसूरत गलियों झीलों और दर्शनीय स्थलों का आनंद ले सकते हैं। इससे समय की बचत भी होती है और खर्च भी कम आता है।

    उदयपुर की यात्रा सिटी पैलेस देखे बिना पूरी नहीं मानी जाती। यह भव्य महल शहर की शान है जहां से पिछोला झील का अद्भुत नजारा दिखाई देता है। शाम के समय यहां का वातावरण और भी आकर्षक हो जाता है। पिछोला झील में बोट राइड का अनुभव कपल्स के लिए बेहद यादगार होता है। सूर्यास्त के समय झील का दृश्य किसी फिल्मी नजारे से कम नहीं लगता। इसके अलावा जगमंदिर फतेह सागर झील सहेलियों की बाड़ी भारतीय लोक कला मंडल और सज्जनगढ़ मानसून पैलेस भी घूमने लायक प्रमुख स्थान हैं।

    अगर आपको खरीदारी का शौक है तो हाथीपोल बाजार बड़ा बाजार चेतक सर्किल और पैलेस रोड जरूर जाएं। यहां राजस्थानी बंधनी साड़ियां मिनिएचर पेंटिंग चांदी के आभूषण हस्तशिल्प और पारंपरिक मोजड़ियां उचित दामों पर मिल जाती हैं। थोड़ा मोलभाव करके आप अच्छी खरीदारी भी कर सकते हैं।

    सही बजट प्लानिंग सस्ते ठहरने के विकल्प लोकल ट्रांसपोर्ट और स्थानीय भोजन का चुनाव करके एक कपल आसानी से दो से तीन दिन की शानदार उदयपुर यात्रा करीब 10 हजार रुपये में पूरी कर सकता है। अगर आप कम खर्च में रॉयल फील और यादगार छुट्टियों का आनंद लेना चाहते हैं तो उदयपुर निश्चित रूप से आपकी ट्रैवल लिस्ट में सबसे ऊपर होना चाहिए।