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  • काम न मिलने पर घर बैठी थीं परिणीति चोपड़ा, 15 साल के करियर की गलतियों और मुश्किल दौर पर खुलकर बोलीं

    काम न मिलने पर घर बैठी थीं परिणीति चोपड़ा, 15 साल के करियर की गलतियों और मुश्किल दौर पर खुलकर बोलीं


    नई दिल्ली । परिणीति चोपड़ा बॉलीवुड में अपने 15 साल के सफर के अहम पड़ाव पर पहुंचने वाली हैं। फिल्म ‘लेडीज वर्सेस रिकी बहल’ से अभिनय की शुरुआत करने वाली परिणीति ने इन वर्षों में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। उनके करियर में सफलता के साथ ऐसे दौर भी आए, जब उन्हें काम नहीं मिला और काफी समय घर पर बैठकर गुजारना पड़ा। अपने इस मुश्किल दौर को याद करते हुए अभिनेत्री ने माना कि करियर में उनसे कई गलतियां हुईं और उन्होंने उन गलतियों से काफी कुछ सीखा।

    परिणीति ने बताया कि वह किसी फिल्मी परिवार से नहीं आती थीं, इसलिए करियर की शुरुआत में लिए गए फैसलों का असर भी उन्हें खुद ही झेलना पड़ा। उनके मुताबिक, कभी गलत फिल्मों का चुनाव हुआ, कभी फैशन को लेकर गलतियां हुईं और कभी पब्लिक रिलेशन से जुड़े फैसले भी सही नहीं रहे। उन्होंने कहा कि उनके करियर की ये सभी गलतियां लोगों के सामने हुईं और उन्हें इन्हीं अनुभवों से आगे बढ़ना सीखना पड़ा।

    अभिनेत्री के करियर में एक ऐसा समय भी आया, जब उनके पास कोई काम नहीं था। दूसरी ओर, उन्होंने ऐसा दौर भी देखा जब लगातार काम के कारण परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल हो गया। उनके अनुसार, करियर में आए इन दोनों तरह के अनुभवों ने उन्हें काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन को समझने में मदद की।

    इन दिनों परिणीति वेब सीरीज ‘शक – ट्रस्ट नो वन’ के जरिए ओटीटी पर भी नजर आ रही हैं। इसमें वह एक ऐसी मां की भूमिका निभा रही हैं, जो आठ साल से अपनी लापता बेटी की तलाश कर रही है और उसे अपने ही परिवार के लोगों पर शक है। अभिनेत्री ने बताया कि सस्पेंस और थ्रिलर से जुड़े किरदार निभाना उन्हें काफी पसंद है। कहानी का रहस्य अंत तक बनाए रखना इस प्रोजेक्ट की खास चुनौती थी, क्योंकि शूटिंग पहले ही पूरी हो चुकी थी।

    परिणीति ने मदरहुड और कामकाजी महिलाओं को लेकर भी अपनी राय रखी। उनका कहना है कि किसी नई मां को यह बताने का अधिकार दूसरों को नहीं है कि उसे कब काम पर लौटना चाहिए। अगर कोई महिला बच्चे के जन्म के बाद अपनी इच्छा से काम जारी रखना चाहती है, तो उसके फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।

    अभिनेत्री ने मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले बदलावों और उन पर की जाने वाली टिप्पणियों पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बच्चे को जन्म देना बेहद कठिन अनुभव है और इसके बाद शरीर पर आने वाले बदलावों को लेकर महिलाओं को शर्मिंदा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने शरीर पर आए स्ट्रेच मार्क्स को भी मां बनने के अनुभव का हिस्सा बताया।

    काम और परिवार के संतुलन पर परिणीति ने कहा कि अगर शुरुआत में ही काम की परिस्थितियों को लेकर स्पष्ट बातचीत हो, तो दोनों चीजों को साथ संभाला जा सकता है। उनका मानना है कि आज की युवा महिलाएं करियर और परिवार दोनों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना चाहती हैं। उनके अनुसार, इसके लिए कामकाजी महिलाओं और मेकर्स के बीच समझदारी और सहयोग जरूरी है।

  • अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान के साथ काम का अनुभव किया साझा, बताया क्यों मुश्किल हालात में भी नहीं मानते हार

    अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान के साथ काम का अनुभव किया साझा, बताया क्यों मुश्किल हालात में भी नहीं मानते हार

    नई दिल्ली ।अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान के साथ काम करने के अपने अनुभव को साझा करते हुए उनके व्यक्तित्व की एक खास बात बताई है। उन्होंने कहा कि शाहरुख किसी भी परिस्थिति में हार नहीं मानते और मुश्किल समय में भी सामने वाले का आत्मविश्वास बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। दोनों कलाकारों ने कई फिल्मों में साथ काम किया है और उनकी जोड़ी को दर्शकों ने अलग-अलग भूमिकाओं में देखा है।

    अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान ने ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘मोहब्बतें’, ‘वीर जारा’, ‘भूतनाथ’ और ‘कभी अलविदा ना कहना’ जैसी फिल्मों में साथ काम किया है। लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ काम करने के अनुभव के आधार पर अमिताभ ने शाहरुख के स्वभाव को लेकर अपनी बात रखी।

    यह बातचीत उस समय हुई जब अभिनेता राजकुमार राव एक फिल्म के प्रचार के लिए अमिताभ बच्चन के शो में पहुंचे थे। उनके साथ अभिनेत्री वामिका गब्बी भी मौजूद थीं। बातचीत के दौरान राजकुमार राव ने बताया कि शाहरुख खान की फिल्मी यात्रा ने उन्हें अभिनय के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    राजकुमार ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उन्होंने कम उम्र में ही अभिनेता बनने का फैसला कर लिया था। उन्होंने अमिताभ बच्चन को भी अपनी प्रेरणा बताया और कहा कि उनके घर में अमिताभ का पोस्टर तक मौजूद था। इसके साथ ही उन्होंने शाहरुख खान की यात्रा से भी प्रभावित होने की बात कही।

    राजकुमार के अनुसार, शाहरुख की कहानी उन्हें इसलिए प्रेरित करती थी क्योंकि वह दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर थिएटर और छोटे-छोटे कार्यक्रमों से होते हुए हिंदी सिनेमा के बड़े सितारे बने। राजकुमार ने अपने शुरुआती मुंबई प्रवास का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वह पहली बार एक शो के सिलसिले में मुंबई पहुंचे थे, तब उनका चयन नहीं हुआ था। उस दौर में वह शाहरुख के बंगले के बाहर तक खड़े रहते थे।

    राजकुमार की बात सुनने के बाद अमिताभ बच्चन ने शाहरुख के साथ काम करने का अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि शाहरुख ऐसे व्यक्ति हैं, जो किसी भी बात पर आसानी से हार नहीं मानते। उनके मुताबिक, किसी भी समस्या का सामना होने पर शाहरुख अपने व्यवहार से सामने वाले व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ाने की कोशिश करते हैं।

    इस दौरान राजकुमार राव की आगामी फिल्म ‘प्रहार’ की भी चर्चा हुई। यह फिल्म सरकारी वकील उज्ज्वल निकम के जीवन पर आधारित बताई गई है। फिल्म के ट्रेलर में 26/11 मुंबई आतंकी हमलों से जुड़े मामले और अजमल कसाब के मुकदमे को भी दिखाया गया है।

    वहीं अमिताभ बच्चन के आगामी प्रोजेक्ट्स की बात करें तो वह ‘कल्कि 2898 एडी’ और ‘सेक्शन 84’ से जुड़े हैं। ‘कल्कि 2898 एडी’ में उनके साथ प्रभास और कमल हासन प्रमुख भूमिकाओं में हैं। दूसरी ओर ‘सेक्शन 84’ में अमिताभ के साथ निमृत कौर और अभिषेक बनर्जी नजर आएंगे।

    अमिताभ और शाहरुख की फिल्मों में साथ दिखाई देने की यात्रा के साथ अब उनके पुराने अनुभवों से जुड़े किस्से भी चर्चा में बने रहते हैं। इस बातचीत में अमिताभ की कही बात ने शाहरुख के काम करने के तरीके और संघर्ष के दौरान उनके रवैये की एक झलक पेश की।

  • नेटफ्लिक्स पर साउथ फिल्मों का दबदबा, रवि तेजा की ‘इरुमुडी’ ने अजय देवगन की ‘धमाल 4’ को पीछे छोड़ा

    नेटफ्लिक्स पर साउथ फिल्मों का दबदबा, रवि तेजा की ‘इरुमुडी’ ने अजय देवगन की ‘धमाल 4’ को पीछे छोड़ा


    नई दिल्ली ।शनिवार को नेटफ्लिक्स की ट्रेंडिंग फिल्मों की सूची में साउथ सिनेमा का दबदबा देखने को मिला। देशभर में सबसे ज्यादा देखी जा रही फिल्मों की शीर्ष सूची में कई दक्षिण भारतीय फिल्मों ने अपनी जगह बनाई है। खास बात यह है कि शीर्ष दस में केवल दो हिंदी फिल्में शामिल हैं। रवि तेजा की ‘इरुमुडी’ ने पहला स्थान हासिल किया है, जबकि अजय देवगन की ‘धमाल 4’ सातवें पायदान पर है।

    ट्रेंडिंग सूची में सबसे ऊपर ‘इरुमुडी’ है। रवि तेजा की इस फिल्म की कहानी एक पिता और उसकी बेटी के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी में सस्पेंस, थ्रिल और भावनात्मक पहलुओं को शामिल किया गया है। सिनेमाघरों में दर्शकों के बीच चर्चा में रही यह फिल्म अब ओटीटी पर भी दर्शकों का ध्यान खींच रही है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने के बाद फिल्म शीर्ष स्थान तक पहुंच गई है।

    दूसरे नंबर पर तमिल कॉमेडी फिल्म ‘मोथा रात्रि’ ट्रेंड कर रही है। फिल्म की कहानी एक शादी के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जहां गांव का एक पंडित अपमान महसूस करने के बाद बीच समारोह से चला जाता है। इसके बाद कहानी में कई हास्यपूर्ण घटनाएं सामने आती हैं। हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आई यह फिल्म दर्शकों के बीच अपनी जगह बना रही है।

    तीसरे स्थान पर सूर्या की ‘विश्वनाथ एंड सन’ मौजूद है। फिल्म में संजय विश्वनाथ नाम के एक अमीर कारोबारी की कहानी दिखाई गई है, जो 40 वर्ष की उम्र पार करने के बाद भी शादी नहीं करना चाहता। अपनी मां की इच्छा पूरी करने के लिए वह सरोगेसी के जरिए पिता बनता है। बच्चे से जुड़ी परेशानी सामने आने के बाद उसकी सरोगेट मां की तलाश शुरू होती है।

    चौथे नंबर पर हुमा कुरैशी की ‘बेबी डू डाई डू’ है। फिल्म की कहानी बेबी करमकर नाम की एक ऐसी महिला पर केंद्रित है, जो सुन और बोल नहीं सकती। वह गुप्त कॉन्ट्रैक्ट किलर है और अपनी जुड़वां बहन की हत्या का बदला लेने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति की तलाश करती है। फिल्म में चंकी पांडे और सिकंदर खेर भी अहम भूमिकाओं में हैं।

    ‘लस्ट स्टोरीज 3’ पांचवें स्थान पर बनी हुई है। फिल्म चार अलग-अलग कहानियों के जरिए मानवीय रिश्तों और इच्छाओं के विभिन्न पहलुओं को सामने रखती है। इसमें राधिका आप्टे, विजय वर्मा, राधिका मदान, कोंकणा सेन शर्मा और अभिषेक बनर्जी जैसे कलाकार नजर आते हैं।

    तापसी पन्नू की ‘गांधारी’ छठे नंबर पर है। कहानी एक ऐसी मां की है, जिसकी बेटी लापता हो जाती है और वह उसकी तलाश में जुट जाती है। इसके बाद सामने आने वाली घटनाएं फिल्म की मुख्य कहानी बनती हैं।

    अजय देवगन की ‘धमाल 4’ सातवें स्थान पर पहुंच गई है। सिनेमाघरों में फिल्म को मिली-जुली प्रतिक्रिया के बाद ओटीटी पर इसे दर्शकों का ध्यान मिल रहा है। इसके बाद ‘बेस्ट ऑफ द बेस्ट’ आठवें, आर माधवन की ‘GDN’ नौवें और ‘कोरियन कनकराजू’ दसवें स्थान पर हैं। इस तरह शनिवार की सूची में दक्षिण भारतीय फिल्मों की मजबूत मौजूदगी देखने को मिली।

  • हार्दिक पांड्या फिर चोटिल, न्यूजीलैंड सीरीज से बाहर, तीन सप्ताह आराम के बाद जिम्बाब्वे सीरीज से वापसी संभव

    हार्दिक पांड्या फिर चोटिल, न्यूजीलैंड सीरीज से बाहर, तीन सप्ताह आराम के बाद जिम्बाब्वे सीरीज से वापसी संभव

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या की वापसी की राह एक बार फिर चोट के कारण रुक गई है। उनकी दाहिनी पिंडली में दोबारा चोट सामने आई है, जिसके चलते वह कम से कम तीन सप्ताह तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहेंगे। इस चोट के कारण हार्दिक न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली टी20 और वनडे सीरीज का हिस्सा नहीं बन पाएंगे। पिछले चार महीनों में यह कम से कम तीसरा मौका है, जब चोट ने उनकी वापसी की योजना को प्रभावित किया है।

    हार्दिक की ‘रिटर्न टू प्ले’ तारीख 20 सितंबर तय की गई थी। इसी योजना के तहत उन्हें छह अक्टूबर से ऑस्ट्रेलिया ए के खिलाफ शुरू होने वाली वनडे सीरीज के लिए भारत ए टीम में चुना गया था। हालांकि, ताजा स्कैन में उनकी दाहिनी पिंडली में चोट सामने आने के बाद यह योजना भी प्रभावित हो गई है।

    मेडिकल आकलन के तहत हार्दिक को करीब दो सप्ताह तक पूरी तरह आराम करने की सलाह दी गई है। इसके बाद उनकी स्थिति का दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा और यह तय होगा कि वह रिहैबिलिटेशन कब शुरू कर सकते हैं। उनकी फिटनेस पर आगे की वापसी इसी प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

    न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज 22 अक्टूबर से शुरू होनी है। इसके बाद दोनों टीमों के बीच वनडे मुकाबले खेले जाएंगे। मौजूदा स्थिति में हार्दिक के इस पूरी सीरीज तक फिट होकर मैदान पर लौटने की संभावना नहीं है। ऐसे में उनकी वापसी के लिए टीम प्रबंधन को आगे के विकल्पों पर विचार करना होगा।

    हार्दिक की चोट की शुरुआत अफगानिस्तान के खिलाफ टी20 सीरीज से ठीक पहले हुई थी। फील्डिंग ड्रिल के दौरान उन्हें घुटने के आसपास अचानक तेज दर्द महसूस हुआ था। इसके बाद उन्होंने ब्रेक लिया और कुछ दिनों तक आराम किया। फिटनेस प्रमाणपत्र हासिल करने की तैयारी के दौरान दर्द फिर उभर आया। इसके बाद कराए गए स्कैन में चोट की पुष्टि हुई थी।

    32 वर्षीय हार्दिक आईपीएल के बाद से बेंगलुरु में रहकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग कर रहे थे। उनका लक्ष्य फिटनेस हासिल करके प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी करना था, लेकिन लगातार सामने आ रही परेशानियों ने उनकी योजना को प्रभावित किया है। पिछले चार महीनों में अफगानिस्तान वनडे, इंग्लैंड टी20 और अब ऑस्ट्रेलिया ए सीरीज के दौरान उनकी वापसी चोट की वजह से प्रभावित हुई है।

    हार्दिक को एशियन गेम्स के लिए भारतीय दल के साथ जापान भेजने की भी योजना थी। इसके लिए यात्रा संबंधी प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन ताजा चोट के बाद उनकी उपलब्धता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

    अब हार्दिक के लिए अगला संभावित मौका जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे सीरीज हो सकता है। अगर वह तब तक पूरी तरह फिट होते हैं तो उस सीरीज से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी कर सकते हैं। इसके अलावा उनकी मैच फिटनेस परखने के लिए घरेलू क्रिकेट में विजय हजारे ट्रॉफी या सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में खेलने का विकल्प भी मौजूद हो सकता है। हालांकि, अंतिम फैसला उनकी फिटनेस और मेडिकल आकलन के आधार पर ही होगा।

  • देव आनंद ने स्टैंप बेचकर काटे मुश्किल दिन, होर्डिंग से पहचाना सितारा, अमिताभ के साथ क्यों नहीं की फिल्म?

    देव आनंद ने स्टैंप बेचकर काटे मुश्किल दिन, होर्डिंग से पहचाना सितारा, अमिताभ के साथ क्यों नहीं की फिल्म?

    नई दिल्ली । देव आनंद हिंदी सिनेमा के उन दिग्गज कलाकारों में शामिल रहे, जिनकी पहचान केवल अभिनय तक सीमित नहीं रही। अभिनेता के साथ-साथ वह निर्देशक, लेखक, निर्माता और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहे। 26 सितंबर 1923 को धर्मदेव पिशोरिमल आनंद के रूप में जन्मे देव आनंद ने अपने लंबे फिल्मी करियर में 100 से अधिक फिल्मों में काम किया। उनकी खास शैली, अभिनय और व्यक्तित्व ने उन्हें कई दशकों तक दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाए रखा।

    फिल्मी दुनिया में कदम रखने से पहले देव आनंद ने सामान्य नौकरी से अपने जीवन की शुरुआत की थी। उन्होंने एक अकाउंटेंसी फर्म में क्लर्क के तौर पर काम किया, जहां उन्हें 85 रुपये मासिक वेतन मिलता था। इसके बाद उन्होंने मिलिट्री सेंसर ऑफिस में नौकरी की और वहां उनकी तनख्वाह 160 रुपये थी। हालांकि, अभिनय की दुनिया में जाने का सपना उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा। नौकरी छोड़ने के बाद शुरुआती दौर में उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। यहां तक कि गुजारा चलाने के लिए उन्होंने अपना स्टैंप कलेक्शन तक बेच दिया था। बाद में उन्हें फिल्म ‘हम एक हैं’ में काम करने का अवसर मिला और यहीं से उनके फिल्मी सफर ने गति पकड़ी।

    देव आनंद अपने अभिनय के साथ-साथ अपने पहनावे और खास अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। फिल्म ‘काला पानी’ के दौरान उनके काले कपड़ों को लेकर एक चर्चित किस्सा सामने आता है। बताया जाता है कि उनके काले परिधान में नजर आने को लेकर प्रशंसकों में जबरदस्त उत्साह रहता था। इसी दौर से जुड़ी एक घटना में एक महिला की जान जाने की बात भी कही जाती है, जिसके बाद उनके काले कपड़े पहनने पर रोक लगाए जाने का किस्सा मशहूर हुआ।

    देव आनंद महान अभिनेता और कॉमेडियन चार्ली चैपलिन के भी प्रशंसक थे। 1954 में स्विट्जरलैंड के मॉन्ट्रो में उनकी चार्ली चैपलिन से मुलाकात हुई। उन्हें सामने देखकर देव आनंद बेहद उत्साहित हो गए और जोर से उनका अभिवादन किया। यह मुलाकात उनके लिए यादगार रही।

    देव आनंद, दिलीप कुमार और राज कपूर को 1950 और 1960 के दशक में हिंदी सिनेमा के प्रमुख सितारों में गिना जाता था। तीनों के बीच पेशेवर प्रतिस्पर्धा की चर्चाएं होती थीं, लेकिन निजी स्तर पर उनके संबंध अच्छे बताए जाते थे। देव आनंद की दिलीप कुमार से मिलने की इच्छा आखिरी दिनों तक बनी रही, मगर यह पूरी नहीं हो सकी। 4 दिसंबर 2011 को देव आनंद का निधन हो गया।

    उनकी जिंदगी में अभिनेत्री सुरैया का भी खास स्थान रहा। दोनों की नजदीकियां फिल्म ‘विद्या’ के दौरान बढ़ीं। बाद में देव आनंद ने सुरैया को शादी के लिए प्रपोज किया और उन्हें हीरे की अंगूठी भी दी। हालांकि, सुरैया की मां इस रिश्ते के पक्ष में नहीं थीं और दोनों विवाह नहीं कर सके। बाद में देव आनंद ने कल्पना कार्तिक से शादी की।

    देव आनंद ने जैकी श्रॉफ को भी उनके शुरुआती दौर में अवसर दिया। उन्होंने एक होर्डिंग पर जैकी श्रॉफ की तस्वीर देखी थी और उन्हें फिल्म में लेने का विचार किया। जैकी श्रॉफ ने फिल्म ‘स्वामी दादा’ से अभिनय की शुरुआत की और आगे चलकर ‘हीरो’ के जरिए बड़ी पहचान बनाई।

    देव आनंद ने अपने करियर में अनेक बड़े कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन अमिताभ बच्चन के साथ कभी स्क्रीन साझा नहीं की। ‘जंजीर’ में इंस्पेक्टर विजय खन्ना की भूमिका पहले देव आनंद को पेश की गई थी। उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया। बाद में यही भूमिका अमिताभ बच्चन ने निभाई और यह फिल्म उनके करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल हुई। इस तरह दोनों दिग्गज कलाकारों का साथ काम करने का अवसर कभी नहीं आया।

    देव आनंद ने फिल्मों के अलावा राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल के दौर में उन्होंने सरकार के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया और बाद में एक राजनीतिक दल भी बनाया। अपने लंबे सफर में उन्हें कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। उनकी फिल्में, गीत और अभिनय आज भी हिंदी सिनेमा की विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं।

  • शिवपुरी में गणेश विसर्जन शोभायात्रा का भव्य नजारा, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब और सुबह तक चला उत्सव

    शिवपुरी में गणेश विसर्जन शोभायात्रा का भव्य नजारा, सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब और सुबह तक चला उत्सव


    शिवपुरी। शिवपुरी में गणेशोत्सव का समापन शुक्रवार रात बेहद भव्य अंदाज में हुआ। भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विदाई देने के लिए शहर में निकली विसर्जन शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। आयोजकों के अनुसार इस भव्य आयोजन में करीब 2 लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। रात करीब 8 बजे शुरू हुई शोभायात्रा का सिलसिला सुबह 6 बजे तक चलता रहा। इस दौरान शहर की प्रमुख सड़कों पर गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालु उत्साह के साथ शोभायात्रा में शामिल होते रहे।

    शोभायात्रा के दौरान कस्टम गेट और हंस बिल्डिंग चौराहे पर विशेष मंच बनाए गए थे। इन मंचों से होकर गणेश प्रतिमाएं और आकर्षक झांकियां गुजरीं। अलग अलग रूपों में सजाई गई झांकियों ने लोगों का ध्यान खींचा। बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन्हें देखने के लिए सड़कों के किनारे जमा रहे। शोभायात्रा में शामिल युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला।

    इस बार शोभायात्रा में डीजे भी प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहे। ट्रकों पर बड़े बड़े डीजे सिस्टम लगाए गए थे। रातभर तेज संगीत और प्रस्तुतियों का दौर चलता रहा। युवा डीजे की धुन पर नाचते नजर आए। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की प्रतिमाओं के सामने भक्ति गीतों पर उत्साह जताया। पूरा शहर देर रात तक गणेशमय नजर आया।

    शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के लिए सामाजिक संगठनों और आयोजकों की ओर से जगह जगह भंडारे लगाए गए। लोगों को प्रसादी वितरित की गई। इसके अलावा पानी और दूसरी जरूरी व्यवस्थाएं भी की गई थीं। लंबी दूरी तक चलने वाली शोभायात्रा में शामिल लोगों के लिए इन व्यवस्थाओं से काफी सहूलियत मिली।

    आधी रात के बाद गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हुआ। बड़ी प्रतिमाओं को अमोला पुल के पास सिंध नदी में विसर्जित किया गया। वहीं छोटी प्रतिमाओं के लिए मझेरा तालाब और गणेश कुंड में व्यवस्था की गई थी। श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच भगवान गणेश को विदाई दी। विसर्जन के दौरान कई जगह श्रद्धालु भावुक भी नजर आए।

    इतने बड़े आयोजन को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की ओर से सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। प्रमुख मार्गों के साथ विसर्जन स्थलों पर पुलिस बल तैनात रहा। नदी और अन्य जल स्रोतों पर गोताखोरों को भी अलर्ट रखा गया था। अधिकारियों ने देर रात तक मौके पर रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी की।

    शोभायात्रा के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और विसर्जन प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से पूरा कराने के लिए प्रशासन ने जरूरी इंतजाम किए। रातभर चलने वाले इस आयोजन में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही लेकिन पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

    सुबह होते होते अधिकांश गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन पूरा हो चुका था। इसके साथ ही कई दिनों से चल रहे गणेशोत्सव का समापन हो गया। श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर जल्दी आने की कामना के साथ गणपति बप्पा को विदाई दी। शिवपुरी में गणेश विसर्जन की यह शोभायात्रा शहर में आस्था और उत्साह से भरे यादगार आयोजनों में शामिल रही।

  • शिवपुरी में पितृपक्ष शुरू होते ही बाणगंगा और भदैयाकुंड पर उमड़ी भीड़, पूर्वजों के लिए हुआ तर्पण-पिंडदान

    शिवपुरी में पितृपक्ष शुरू होते ही बाणगंगा और भदैयाकुंड पर उमड़ी भीड़, पूर्वजों के लिए हुआ तर्पण-पिंडदान


    शिवपुरी । शिवपुरी में पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही शनिवार को धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ गई। शहर के प्रमुख बाणगंगा और भदैयाकुंड घाट पर सुबह से ही लोग अपने पूर्वजों के निमित्त पूजा और धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचने लगे। सुबह करीब 7 बजे से दोनों स्थानों पर श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। परिवार के लोग पूजा सामग्री लेकर घाटों पर पहुंचे और पंडितों की देखरेख में तर्पण श्राद्ध और पिंडदान की विधि पूरी की।

    पितृपक्ष को हिंदू परंपरा में पूर्वजों के स्मरण और उनके निमित्त धार्मिक कर्मकांड करने का विशेष समय माना जाता है। इसी मान्यता के चलते शिवपुरी में भी कई परिवार अपने पितरों के लिए निर्धारित तिथि के अनुसार अनुष्ठान करने पहुंचे। घाटों पर लोगों ने स्नान और पूजा के बाद पितरों को जल अर्पित किया। इसके साथ ही पिंडदान और श्राद्ध कर्म भी किए गए।

    सुबह के समय बाणगंगा और भदैयाकुंड दोनों स्थानों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। अलग अलग क्षेत्रों से परिवारों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। कई लोग अपने साथ पूजा सामग्री लेकर पहुंचे थे। घाटों पर पंडितों की मौजूदगी में मंत्रोच्चार के साथ कर्मकांड संपन्न कराया गया। परिवार के सदस्यों ने पूर्वजों को याद करते हुए उनकी आत्मा की शांति और परिवार की सुख समृद्धि की कामना की।

    पंडित शिव नारायण शर्मा के अनुसार पितृपक्ष में अपनी परंपरा और पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध और तर्पण करने की धार्मिक मान्यता है। इस दौरान परिवार अपने पितरों के निमित्त जल अर्पित करते हैं और निर्धारित विधि से पूजा करते हैं। उन्होंने बताया कि पितृपक्ष के दौरान अलग अलग तिथियों पर पूर्वजों के लिए कर्मकांड किए जाते हैं।

    इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत 26 सितंबर से हुई है और यह 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस अवधि में श्रद्धालु अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि के अनुसार संबंधित श्राद्ध तिथि पर तर्पण और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। कई परिवारों के लिए पितृपक्ष का पहला दिन विशेष महत्व रखता है और इसी वजह से पहले दिन भी घाटों पर अच्छी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

    शिवपुरी के बाणगंगा और भदैयाकुंड पर सुबह से बढ़ती भीड़ के बीच धार्मिक वातावरण बना रहा। घाटों पर परिवारों के समूह दिखाई दिए जो अपने पूर्वजों के निमित्त पूजा करते नजर आए। जैसे जैसे दिन आगे बढ़ा वैसे वैसे दोनों स्थानों पर लोगों की आवाजाही बढ़ती गई।

    पितृपक्ष के दौरान शिवपुरी में आने वाले दिनों में भी इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। अलग अलग तिथियों पर लोग अपने पूर्वजों के लिए निर्धारित श्राद्ध कर्म करेंगे। इस दौरान तर्पण पिंडदान और श्राद्ध जैसे अनुष्ठानों के जरिए परिवार अपने पितरों का स्मरण करेंगे और उनकी आत्मा की शांति की कामना करेंगे।

  • 40 की उम्र में घुटनों का दर्द क्यों बढ़ रहा है, लंबे समय तक मुड़े पैर और गलत चाल बन सकती है वजह

    40 की उम्र में घुटनों का दर्द क्यों बढ़ रहा है, लंबे समय तक मुड़े पैर और गलत चाल बन सकती है वजह


    भोपाल । आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करना और घंटों एक ही मुद्रा में रहना लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। ऑफिस में लगातार कुर्सी पर बैठे रहना हो या घर में लंबे समय तक पैर मोड़कर बैठना हो इन आदतों का असर शरीर के जोड़ों पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक घुटनों को लंबे समय तक मोड़कर रखने और उसके बाद गलत तरीके से चलने की आदत से घुटने के जोड़ पर सामान्य से अधिक दबाव पड़ सकता है। समय के साथ यह समस्या दर्द और जोड़ से जुड़ी दूसरी परेशानियों का कारण बन सकती है।

    ऑर्थो स्पाइन एंड स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञेश सक्सेना के अनुसार लंबे समय तक घुटने मोड़कर रहने के बाद चलने के तरीके में बदलाव दिखाई दे सकता है। कुछ लोगों में घुटना हल्का मुड़ा रहता है और पैर के पंजे बाहर की ओर निकल जाते हैं। इस तरह के वॉकिंग पैटर्न को आमतौर पर डक वॉकिंग कहा जाता है। लगातार ऐसा होने पर घुटने के जोड़ पर दबाव का वितरण सामान्य नहीं रहता और इससे लंबे समय में परेशानी बढ़ सकती है।

    घुटने की संरचना शरीर का वजन संभालने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब पैर सामान्य स्थिति में सीधा रहता है तो घुटने का लॉकिंग मैकेनिज्म शरीर का भार संभालने में मदद करता है। लेकिन घुटना लगातार मुड़ी हुई स्थिति में रहने पर यह व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। डॉक्टर के मुताबिक इससे जोड़ के अंदर मौजूद कार्टिलेज पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना रहती है। कार्टिलेज कमजोर होने पर दर्द और चलने फिरने में परेशानी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

    अर्थराइटिस की समस्या बढ़ने पर इसे अलग अलग ग्रेड में देखा जाता है। गंभीर अवस्था में घुटने के जोड़ को काफी नुकसान हो सकता है और कुछ मरीजों में डॉक्टर नी रिप्लेसमेंट जैसी सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति में बीमारी का कारण और उसकी गंभीरता अलग हो सकती है इसलिए केवल किसी एक आदत को इसका सीधा कारण मानना उचित नहीं है।

    डॉ. सक्सेना के मुताबिक पहले घुटनों के अर्थराइटिस के मरीज अधिकतर 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र में देखने को मिलते थे। अब अपेक्षाकृत कम उम्र के लोगों में भी घुटने से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने करीब 40 वर्ष की उम्र में अर्थराइटिस के मरीजों की संख्या बढ़ने की बात कही है। उनके अनुसार गलत लाइफस्टाइल शारीरिक गतिविधि की कमी लंबे समय तक बैठे रहना और गलत वॉकिंग पैटर्न इसके पीछे भूमिका निभा सकते हैं।

    घुटनों को स्वस्थ रखने के लिए लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से बचना जरूरी है। यदि काम के कारण लगातार बैठना पड़ता है तो बीच बीच में उठकर पैर सीधा करना और कुछ देर चलना उपयोगी हो सकता है। डॉक्टर ने हर दो घंटे के अंतराल में कुछ समय पैर सीधा रखने की एक्सरसाइज करने की सलाह दी है।

    चलते समय हील टो पैटर्न अपनाना भी मददगार हो सकता है। इसमें कदम रखते समय पहले एड़ी जमीन पर आती है और इसके बाद पंजा आगे बढ़ता है। शुरुआत में थोड़े कदमों के साथ इसका अभ्यास किया जा सकता है। इसके अलावा बैठकर पैर को सीधा उठाने वाली एक्सरसाइज घुटने के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि अगर घुटने में लगातार दर्द सूजन जकड़न या चलने में परेशानी हो रही है तो इसे केवल गलत बैठने या चलने की आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है। सही समय पर कारण पता चलने और उचित सलाह मिलने से घुटनों की समस्या को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

  • गडकरी ने RTO को चेताया तो करण सिंह वर्मा ने कहा अगले जन्म में नाग बनोगे, सीधी में कीचड़ में फंसी महापौर की कार

    गडकरी ने RTO को चेताया तो करण सिंह वर्मा ने कहा अगले जन्म में नाग बनोगे, सीधी में कीचड़ में फंसी महापौर की कार


    भोपाल । मध्य प्रदेश में 21 साल बाद सरकारी बस सेवा की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के सियासी गलियारों में कई दिलचस्प तस्वीरें और बयान चर्चा में हैं। भोपाल में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बसों की फिटनेस और RTO व्यवस्था को लेकर अधिकारियों को सख्त संदेश दिया। वहीं सीहोर में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने अपने भाषण में अच्छे कर्म करने और किसी का बुरा नहीं चाहने की सीख देते हुए कहा कि गलत काम करने वालों को अगले जन्म में नाग बनना पड़ सकता है। इसी बीच सीधी जिले में सड़क निर्माण की मांग को लेकर चल रहे धरने में पहुंचीं सिंगरौली की महापौर रानी अग्रवाल की गाड़ी कीचड़ में फंस गई और उन्हें करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर धरना स्थल तक पहुंचना पड़ा।

    भोपाल में सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम में नितिन गडकरी ने बसों की गुणवत्ता और फिटनेस को लेकर RTO अधिकारियों को चेतावनी दी। उन्होंने अपने संबोधन में व्यंग्य करते हुए कुछ अधिकारियों को गांधीवादी बताया और कहा कि गांधी की नोट दिखाई देने पर तुरंत ठप्पा लगाने की बात कही। गडकरी का यह बयान RTO व्यवस्था में भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनके सख्त रुख के तौर पर देखा गया। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि किसी ऐसी बस को मंजूरी दी जाती है जो निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतरती तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है।

    गडकरी का जोर बसों की गुणवत्ता और यात्रियों की सुरक्षा पर था। उन्होंने कहा कि बसों को सड़क पर उतारने से पहले कड़ी जांच और परीक्षण जरूरी है। फिटनेस मानकों पर खरी उतरने के बाद ही किसी बस को सड़क पर चलने की अनुमति मिलनी चाहिए। मध्य प्रदेश में शुरू हुई नई परिवहन सेवा के तहत 351 बसें उतारी गई हैं जिनमें 180 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं।

    इसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नई बसों के भगवा रंग को लेकर कांग्रेस पर तंज किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सड़कों पर भगवा रंग की बसें चलना उनके लिए खुशी की बात है और विपक्ष को यह पसंद नहीं आएगा। सरकारी बस सेवा के दोबारा शुरू होने के मौके पर मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।

    उधर सीहोर जिले में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा का बयान भी चर्चा में आ गया। एक कार्यक्रम में उन्होंने लोगों को किसी का बुरा नहीं करने और बदले की भावना से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि गलत काम करने वालों को सुधर जाना चाहिए वरना अगले जन्म में नाग बनना पड़ेगा। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम का यह हिस्सा सोशल मीडिया और स्थानीय चर्चाओं में सुर्खियों में रहा।

    अब बात सीधी की जहां सड़क की बदहाली ने एक जनप्रतिनिधि को भी रास्ते में रोक दिया। खड्डी खुर्द के बगैहा टोला में सड़क निर्माण की मांग को लेकर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर लीला साहू ग्रामीणों के साथ 11 दिनों से धरने पर थीं। इसी आंदोलन को समर्थन देने सिंगरौली की महापौर और आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल पहुंचीं। लेकिन धरना स्थल तक पहुंचने से पहले ही उनकी गाड़ी कच्ची और कीचड़ भरी सड़क में फंस गई। ग्रामीणों ने धक्का देकर वाहन को बाहर निकाला। इसके बाद महापौर को करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर धरना स्थल तक जाना पड़ा।

    महापौर रानी अग्रवाल ने मौके पर सड़क की स्थिति देखी और ग्रामीणों की परेशानी को लेकर सरकार को पत्र लिखने की बात कही। ग्रामीणों के अनुसार यह रास्ता आसपास के कई गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ता है और बारिश के दौरान कीचड़ के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है।

    इस तरह एक ही दिन मध्य प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को लेकर गडकरी की सख्त चेतावनी से लेकर मंत्री के धार्मिक संदर्भ वाले बयान और खराब सड़क में फंसी महापौर की गाड़ी तक कई घटनाएं चर्चा में रहीं। इन घटनाओं ने सरकारी परिवहन व्यवस्था से लेकर सड़क और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर अलग-अलग सवालों को सामने ला दिया है।

  • भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, ड्राफ्ट में लैंडयूज बदला तो भी तुरंत नहीं हटेगी सीलिंग

    भोपाल के नए मास्टर प्लान का रास्ता साफ, ड्राफ्ट में लैंडयूज बदला तो भी तुरंत नहीं हटेगी सीलिंग


    भोपाल । भोपाल के नए मास्टर प्लान को लेकर लंबे समय से चल रही कवायद अब अगले चरण में पहुंच गई है। 21 साल से लंबित मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद मध्य प्रदेश सरकार को इसे प्रकाशित करने और लोगों से दावे आपत्तियां लेने की अनुमति मिल गई है। हालांकि ड्राफ्ट जारी होने का मतलब यह नहीं है कि रहवासी क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां तत्काल वैध हो जाएंगी या सीलिंग की कार्रवाई रुक जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया आदेश में मौजूदा मास्टर प्लान और लागू बिल्डिंग बायलॉज के आधार पर कार्रवाई जारी रखने की स्थिति स्पष्ट की है।

    22 सितंबर को हुई सुनवाई के आदेश में भोपाल का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार है और इसे प्रकाशित कर लोगों से दावे और आपत्तियां आमंत्रित करने की अनुमति चाहिए। अदालत ने ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी है लेकिन अंतिम मास्टर प्लान को लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी देना और आवश्यक अनुमति लेना जरूरी रहेगा। इसका मतलब है कि ड्राफ्ट की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है लेकिन अंतिम प्लान पर अभी अदालत की निगरानी बनी रहेगी।

    सीलिंग के मामले में भी अदालत ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। फिलहाल किसी जमीन या भवन में चल रही गतिविधि की वैधता मौजूदा मास्टर प्लान और संबंधित बिल्डिंग नियमों के आधार पर जांची जाएगी। यदि कोई क्षेत्र विशेष रूप से आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित है और वहां नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि चल रही है तो अधिकारियों को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे मामलों में केवल नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में संभावित लैंडयूज बदलाव का प्रस्ताव तत्काल राहत का आधार नहीं बनेगा।

    अदालत ने उन इलाकों को अलग माना है जहां मौजूदा मास्टर प्लान में जमीन के उपयोग को स्पष्ट रूप से किसी एक श्रेणी में निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे स्थानों पर मिश्रित उपयोग के सवाल पर विचार किया जा सकता है लेकिन फिलहाल वहां यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं अगर कोई निर्माण पूरी तरह बिना अनुमति के हुआ है तो कानून के अनुसार सीलिंग या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ सकती है।

    भोपाल में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर पहले से ही कार्रवाई चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक नगर निगम ने बड़ी संख्या में ऐसे प्रतिष्ठानों को चिन्हित किया है और कई मामलों में नोटिस तथा कार्रवाई की गई है। इस दौरान कुछ प्रतिष्ठानों के दोबारा खुलने की शिकायतें भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखी गई थीं। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कार्रवाई में किसी तरह का भेदभाव या चुनिंदा तरीके से कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।

    अब कारोबारियों और रहवासियों की नजर नए मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर है। ड्राफ्ट सामने आने के बाद लोग अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद सरकार को अंतिम प्लान की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना होगा। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि ड्राफ्ट में किसी क्षेत्र के लैंडयूज में बदलाव प्रस्तावित होने मात्र से वहां चल रही मौजूदा व्यावसायिक गतिविधि स्वतः वैध नहीं मानी जाएगी। इस मामले में अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी।