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  • युद्ध के लिए फंडिंग…. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक जहाज निकालने के 20 लाख डॉलर वसूल रहा ईरान

    युद्ध के लिए फंडिंग…. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से एक जहाज निकालने के 20 लाख डॉलर वसूल रहा ईरान


    तेहरान।
    अमेरिका और इजरायल (America and Israel) से युद्ध लड़ रहा ईरान (Iran) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर जहाजों से वसूली (Recovery Ships) कर रहा है। खबर है कि कुछ जहाजों को गुजरने देने के लिए लाखों डॉलर लिए जा रहे हैं। ईरान के एक सांसद ने ही ऐसा दावा किया है। इससे पहले ईरान ने धमकी दी थी कि अगर अमेरिका की तरफ से हमले किए जाते हैं, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।

    ईरान इंटरनेशनल के अनुसार, ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य, अलादीन ब्रूजेर्दी ने कहा कि यह कदम पहले ही लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा, ‘अब, चूंकि युद्ध की अपनी लागत होती है, इसलिए स्वाभाविक रूप से हमें यह करना चाहिए और Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट शुल्क लेना चाहिए।’

    ब्रूजेर्दी ने डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी का भी जिक्र किया, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि यदि 48 घंटों के भीतर स्ट्रेट को नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के बिजली और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकता है। इसके जवाब में ब्रूजेर्दी ने कहा कि इजरायल का ऊर्जा ढांचा भी ईरान की पहुंच में है और उसे ‘एक दिन के भीतर’ पूरी तरह तबाह किया जा सकता है।


    अमेरिका अलर्ट

    संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने रविवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ अपनी ‘रेड लाइन्स’ पर अडिग हैं। उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की लगभग नाकेबंदी का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान को दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को बंधक नहीं बनाने देंगे।


    ट्रंप ने कहा था 48 घंटे में होर्मुज खोले ईरान

    अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि अगर ईरान ने 48 घंटों के अंदर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से फिर नहीं खोला तो ईरान के बिजली संयंत्रों को पूरी तरह तबाह कर देंगे। ट्रंप का यह बयान शनिवार को दिए उनके बयान से उलट था। उन्होंने कहा था कि वह युद्ध को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन रविवार तड़के उन्होंने ईरान को नई धमकी दे डाली। ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी नौसैनिक और भारी लैंडिंग क्राफ्ट क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं।

    आईजी मार्केट विश्लेषक टोनी साइकैमोर ने कहा, राष्ट्रपति ट्रंप की धमकी ने अब बाजारों पर 48 घंटे की अनिश्चितता का टिक टिक करता हुआ टाइम बम रख दिया है। यदि इस अल्टीमेटम को वापस नहीं लिया गया, तो हम सोमवार को दुनियाभर के शेयर बाजारों को ‘ब्लैक मंडे’ के रूप में गिरते हुए और तेल की कीमतों को काफी ऊंचे स्तर पर जाते हुए देखेंगे।


    बंद कर सकता है ईरान

    ईरान की सेना ने चेतावनी दी कि यदि ट्रंप देश के बिजली संयंत्रों को निशाना बनाते हैं, तो वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर देंगे। सेना की ऑपरेशनल कमांड ‘खातम अल-अंबिया’ ने सरकारी टीवी द्वारा प्रसारित बयान में कहा, यदि ईरान के बिजली संयंत्रों के संबंध में अमेरिका की धमकियों पर अमल किया गया, तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा, और इसे तब तक नहीं खोला जाएगा जब तक कि हमारे नष्ट किए गए बिजली संयंत्रों का पुनर्निर्माण नहीं हो जाता।

  • बंगाल में भगवान राम की प्रतिमा तोड़ी.. सिर काट ले गए बदमाश… गरमाई सियासत

    बंगाल में भगवान राम की प्रतिमा तोड़ी.. सिर काट ले गए बदमाश… गरमाई सियासत


    कोलकाता।
    पश्चिम बंगाल (West Bengal) के नंदीग्राम में भगवान राम की प्रतिमा (Lord Rama Statue) के साथ तोड़फोड़ की घटना सामने आई है, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा में विपक्ष के नेता और भाजपा के प्रमुख चेहरे शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) ने इसकी कड़ी निंदा की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम नवमी के उत्सव से ठीक पहले रात के अंधेरे में अज्ञात लोगों ने वेटुरिया बस स्टैंड पर लगभग तैयार हो चुकी भगवान राम की मूर्ति का सिर काटकर ले गए। यह घटना पूर्वी मेदिनीपुर जिले (East Medinipur district) के नंदीग्राम के बूथ नंबर 122, ब्लॉक-2 में हुई है। अधिकारी ने इसे हिंदू आस्था पर हमला करार देते हुए कहा कि राज्य में ऐसे कृत्य अब आम हो गए हैं।

    शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी सरकार हिंदुओं के खिलाफ है और वोट बैंक की राजनीति के लिए गुंडों को बचा रही है। अधिकारी ने इसे जिहादियों की ओर से की गई कार्रवाई बताया और कहा कि तुष्टिकरण की नीति के कारण ऐसे हमले बढ़ रहे हैं। उन्होंने एक वीडियो भी साझा किया जिसमें क्षतिग्रस्त प्रतिमा दिखाई गई है। उन्होंने सनातनियों से एकजुट होकर इस सरकार को विदा करने का आह्वान किया, क्योंकि ऐसी घटनाएं हिंदू त्योहारों से पहले स्थिति को बिगाड़ रही हैं।


    चुनावी माहौल और गरमाया

    यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भी अहम है, जहां शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं। नंदीग्राम वह स्थान है जहां 2021 में उन्होंने ममता बनर्जी को हराकर बड़ा उलटफेर किया था। अधिकारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार हिंदू देवी-देवताओं और मंदिरों पर हमलों को रोकने में नाकाम है। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसी घटनाएं चुनावी माहौल को प्रभावित कर रही हैं। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन भी किया है।

    इस घटना ने राज्य में धार्मिक और राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। शुभेंदु अधिकारी ने इसे सनातन धर्म पर लगातार हमलों की श्रृंखला बताया और कहा कि ममता बनर्जी की सरकार के कारण स्थिति बदतर हो रही है। उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी कि अगर दोषियों को सजा नहीं मिली तो स्थिति और बेकाबू हो सकती है। यह मामला अब चुनाव प्रचार में एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जहां भाजपा हिंदू भावनाओं को केंद्र में रखकर टीएमसी पर हमलावर है।

  • PAN, पेट्रोल से लेकर HRA तक….. एक अप्रैल से बदलेंगे ये नियम, आम आदमी पर होगा सीधा असर

    PAN, पेट्रोल से लेकर HRA तक….. एक अप्रैल से बदलेंगे ये नियम, आम आदमी पर होगा सीधा असर


    नई दिल्ली।
    नया वित्त वर्ष 2026-27 (New Financial Year 2026-27) शुरू होते ही 1 अप्रैल से कई बड़े नियम लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों, खासकर सैलरीड कर्मचारियों (Salaried Employees) और टैक्सपेयर्स (Taxpayers) पर पड़ेगा। पैन कार्ड, HRA, क्रेडिट कार्ड (Credit Card) और पेट्रोल से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए जा रहे हैं, जो आपकी जेब और टैक्स प्लानिंग दोनों को प्रभावित करेंगे।


    PAN कार्ड के नियम सख्त, अब सिर्फ आधार से काम नहीं चलेगा

    अब तक पैन कार्ड बनवाने के लिए सिर्फ आधार पर्याप्त था, लेकिन 1 अप्रैल 2026 से यह सुविधा खत्म हो जाएगी। नए नियमों के तहत पैन बनवाने या उसमें सुधार करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज देना अनिवार्य होगा। इससे पैन प्रक्रिया पहले से ज्यादा सख्त और सुरक्षित हो जाएगी।


    HRA क्लेम में बड़ा बदलाव, बताना होगा मकान मालिक से रिश्ता

    सैलरीड कर्मचारियों के लिए HRA से जुड़ा नियम और सख्त किया गया है। अब अगर आप सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा किराया देते हैं, तो आपको मकान मालिक का PAN देना होगा और साथ ही यह भी बताना होगा कि वह आपके परिवार का सदस्य है या नहीं। यह जानकारी नए फॉर्म 124 में देनी होगी। इसका उद्देश्य फर्जी HRA क्लेम पर रोक लगाना है।


    क्रेडिट कार्ड पर सख्ती, बड़े ट्रांजैक्शन सीधे आयकर विभाग की नजर में

    1 अप्रैल से क्रेडिट कार्ड से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। अब बड़े ट्रांजैक्शन और भुगतान की जानकारी इनकम टैक्स डिपॉर्टमेंट को दी जाएगी। अगर कोई व्यक्ति साल में 10 लाख रुपये से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल डिजिटल माध्यम से चुकाता है या 1 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान कैश में करता है, तो इसकी रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी। इससे हर बड़ा खर्च सीधे आपके PAN रिकॉर्ड से जुड़ जाएगा।


    अब क्रेडिट कार्ड से भी भर सकेंगे टैक्स

    सरकार ने करदाताओं को राहत देते हुए अब टैक्स भुगतान के लिए क्रेडिट कार्ड को भी मान्य कर दिया है। पहले यह सुविधा केवल नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड तक सीमित थी। हालांकि, भुगतान करते समय अतिरिक्त चार्ज या प्रोसेसिंग फीस का ध्यान रखना जरूरी होगा।


    कंपनी के क्रेडिट कार्ड पर खर्च पर टैक्स नियम स्पष्ट

    अगर किसी कर्मचारी को कंपनी की ओर से क्रेडिट कार्ड दिया जाता है और उसका पेमेंट कंपनी करती है, तो यह एक प्रकार का लाभ माना जाएगा और उस पर टैक्स लग सकता है। हालांकि, यदि खर्च पूरी तरह आधिकारिक काम के लिए है और उसका सही रिकॉर्ड मौजूद है, तो उस पर टैक्स नहीं लगेगा।


    नया आयकर अधिनियम 2025 लागू

    1 अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू किया जाएगा, जो पुराने 1961 कानून की जगह लेगा। यह टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।


    सख्त नियम
    पेट्रोल में 20% एथेनॉल अनिवार्य, गुणवत्ता भी बदलेगी

    अब पूरे देश में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर भी नए मानक लागू होंगे, जिससे प्रदूषण कम करने और ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।


    क्या है इसका सीधा असर?

    इन सभी बदलावों का सीधा असर आपकी टैक्स प्लानिंग, खर्च और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। खासतौर पर सैलरीड लोगों और ज्यादा खर्च करने वालों को अब ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि हर बड़ा ट्रांजैक्शन अब टैक्स सिस्टम की नजर में होगा।

  • नवरात्रि व्रत में हेल्दी रहना है आसान, जानें नींबू पानी पीने का सही तरीका

    नवरात्रि व्रत में हेल्दी रहना है आसान, जानें नींबू पानी पीने का सही तरीका


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि 2026 में श्रद्धालु मां दुर्गा की भक्ति के साथ कठिन उपवास भी रखते हैं। व्रत के दौरान शरीर में ऊर्जा की कमी और पोषण का असंतुलन देखना आम है। भारी भोजन से परहेज होने की वजह से शरीर हल्का रहता है लेकिन ऐसे में ऊर्जा बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में नींबू पानी एक प्राकृतिक और सुलभ विकल्प है जो न केवल प्यास बुझाता है बल्कि व्रत के दौरान होने वाली शारीरिक समस्याओं को दूर करने में भी मदद करता है।

    नींबू पानी को सेहत का पावरहाउस कहा जाता है। इसमें भरपूर विटामिन-सी एंटीऑक्सीडेंट और साइट्रिक एसिड होता है। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में ताजा नींबू निचोड़कर पीने से शरीर में सुरक्षा कवच बनता है। यह न सिर्फ संक्रमण से बचाता है बल्कि थकान और कमजोरी को भी दूर रखता है।

    व्रत के दौरान खान-पान में बदलाव के कारण पेट फूलना गैस अपच और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गुनगुना नींबू पानी पीने से पाचन तंत्र सक्रिय रहता है पेट की अम्लता कम होती है और आंतों की सफाई होती है। नियमित सेवन से लिवर डिटॉक्स होता है जिससे हानिकारक टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और आप हल्का व ऊर्जावान महसूस करते हैं।

    नींबू पानी वजन घटाने और त्वचा की चमक के लिए भी लाभकारी है। व्रत में कुट्टू के आटे या तले हुए फलाहार के कारण वजन बढ़ने की शिकायत रहती है। नींबू पानी मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है फैट बर्न करने में मदद करता है और भूख नियंत्रित करता है। साथ ही विटामिन-सी त्वचा को निखारता है मुहांसों और दाग-धब्बों को कम करता है और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाता है।

    नींबू पानी बनाने का सही तरीका बेहद आसान है। सबसे पहले एक गिलास पानी हल्का गुनगुना करें। इसमें आधा ताजा नींबू निचोड़ें। बेहतर स्वाद और पोषण के लिए आप थोड़ा सा शहद मिला सकते हैं। सफेद चीनी का प्रयोग न करें क्योंकि यह नींबू के डिटॉक्स गुणों को कम कर सकती है। व्रत के दौरान इसे सुबह खाली पेट या दिन में 2-3 बार फलाहार के साथ पी सकते हैं। यह छोटा सा बदलाव आपकी नवरात्रि साधना को सेहतमंद और सुखद बना देगा।

  • इच्छा मृत्यु का वरदान फिर भी 58 दिन बाणों पर क्यों लेटे रहे भीष्म पितामह जानिए असली रहस्य

    इच्छा मृत्यु का वरदान फिर भी 58 दिन बाणों पर क्यों लेटे रहे भीष्म पितामह जानिए असली रहस्य


    नई दिल्ली । महाभारत के विशाल और गूढ़ इतिहास में भीष्म पितामह का व्यक्तित्व त्याग संकल्प और धर्म का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। देवव्रत से भीष्म बने इस महान योद्धा को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था यानी वे जब चाहें तब अपने प्राण त्याग सकते थे। लेकिन कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन जब वे बाणों की शय्या पर गिरे तब उन्होंने तुरंत मृत्यु को स्वीकार नहीं किया बल्कि 58 दिनों तक असहनीय पीड़ा सहते हुए जीवित रहने का निर्णय लिया। यही निर्णय उन्हें साधारण योद्धा से महान आत्मा के रूप में स्थापित करता है।

    कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन का दृश्य अत्यंत मार्मिक था। अर्जुन ने शिखंडी को आगे कर भीष्म पर बाणों की वर्षा की क्योंकि भीष्म अपने वचन के कारण शिखंडी के विरुद्ध शस्त्र नहीं उठा सकते थे। परिणामस्वरूप उनका शरीर सैकड़ों बाणों से विदीर्ण होकर धरती पर नहीं गिरा बल्कि उन्हीं बाणों पर टिक गया। यह दृश्य केवल युद्ध का नहीं बल्कि त्याग और संकल्प की पराकाष्ठा का प्रतीक बन गया।

    सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है कि जब उनके पास मृत्यु को चुनने की स्वतंत्रता थी तो उन्होंने इस पीड़ा को क्यों स्वीकार किया। इसका उत्तर उनके जीवन के मूल सिद्धांत में छिपा है जो था धर्म को सर्वोपरि रखना। भीष्म ने अपने वरदान का उपयोग केवल व्यक्तिगत मुक्ति के लिए नहीं किया बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान देने के अवसर के रूप में किया।

    उन्होंने मृत्यु को इसलिए टाला ताकि वे धर्म और नीति का उपदेश दे सकें। बाणों की शय्या पर लेटे हुए उन्होंने युधिष्ठिर को राजधर्म न्याय सत्य और जीवन के गूढ़ सिद्धांतों का ज्ञान दिया। यही उपदेश आगे चलकर महाभारत के शांति पर्व और भीष्म पर्व का आधार बने जो आज भी जीवन मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।

    इसके अलावा भीष्म ने शुभ समय की प्रतीक्षा भी की। हिंदू मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण में प्राण त्यागना अत्यंत शुभ और मोक्षदायक माना जाता है। इसलिए उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने तक अपने शरीर को त्यागने का निर्णय स्थगित रखा। यह उनकी गहरी आध्यात्मिक समझ और आस्था को दर्शाता है।

    उनका यह निर्णय केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि मानसिक शक्ति का भी अद्भुत उदाहरण था। असहनीय दर्द के बावजूद उन्होंने अपने मन और आत्मा को अडिग बनाए रखा। यह दिखाता है कि मनुष्य की इच्छाशक्ति शरीर की सीमाओं से कहीं अधिक शक्तिशाली हो सकती है।

    बाणों की शय्या केवल पीड़ा का प्रतीक नहीं थी बल्कि जीवन के सत्य का दर्पण भी थी। यह सिखाती है कि कर्मों का फल हर व्यक्ति को भोगना पड़ता है लेकिन उसे स्वीकार कर उससे सीख लेना ही सच्चा धर्म है अंततः भीष्म पितामह का यह निर्णय हार नहीं बल्कि उनकी महानता का प्रतीक था। उन्होंने अपने कष्ट को ज्ञान में बदलकर मानवता को यह संदेश दिया कि सच्ची शक्ति कठिन परिस्थितियों में धैर्य कर्तव्य और धर्म का पालन करने में ही निहित है।

     महाभारत के विशाल और गूढ़ इतिहास में भीष्म पितामह का व्यक्तित्व त्याग संकल्प और धर्म का सर्वोच्च उदाहरण माना जाता है। देवव्रत से भीष्म बने इस महान योद्धा को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था यानी वे जब चाहें तब अपने प्राण त्याग सकते थे। लेकिन कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन जब वे बाणों की शय्या पर गिरे तब उन्होंने तुरंत मृत्यु को स्वीकार नहीं किया बल्कि 58 दिनों तक असहनीय पीड़ा सहते हुए जीवित रहने का निर्णय लिया। यही निर्णय उन्हें साधारण योद्धा से महान आत्मा के रूप में स्थापित करता है।

    कुरुक्षेत्र युद्ध के दसवें दिन का दृश्य अत्यंत मार्मिक था। अर्जुन ने शिखंडी को आगे कर भीष्म पर बाणों की वर्षा की क्योंकि भीष्म अपने वचन के कारण शिखंडी के विरुद्ध शस्त्र नहीं उठा सकते थे। परिणामस्वरूप उनका शरीर सैकड़ों बाणों से विदीर्ण होकर धरती पर नहीं गिरा बल्कि उन्हीं बाणों पर टिक गया। यह दृश्य केवल युद्ध का नहीं बल्कि त्याग और संकल्प की पराकाष्ठा का प्रतीक बन गया।

    सबसे बड़ा प्रश्न यही उठता है कि जब उनके पास मृत्यु को चुनने की स्वतंत्रता थी तो उन्होंने इस पीड़ा को क्यों स्वीकार किया। इसका उत्तर उनके जीवन के मूल सिद्धांत में छिपा है जो था धर्म को सर्वोपरि रखना। भीष्म ने अपने वरदान का उपयोग केवल व्यक्तिगत मुक्ति के लिए नहीं किया बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान देने के अवसर के रूप में किया।

    उन्होंने मृत्यु को इसलिए टाला ताकि वे धर्म और नीति का उपदेश दे सकें। बाणों की शय्या पर लेटे हुए उन्होंने युधिष्ठिर को राजधर्म न्याय सत्य और जीवन के गूढ़ सिद्धांतों का ज्ञान दिया। यही उपदेश आगे चलकर महाभारत के शांति पर्व और भीष्म पर्व का आधार बने जो आज भी जीवन मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।

    इसके अलावा भीष्म ने शुभ समय की प्रतीक्षा भी की। हिंदू मान्यताओं के अनुसार उत्तरायण में प्राण त्यागना अत्यंत शुभ और मोक्षदायक माना जाता है। इसलिए उन्होंने सूर्य के उत्तरायण होने तक अपने शरीर को त्यागने का निर्णय स्थगित रखा। यह उनकी गहरी आध्यात्मिक समझ और आस्था को दर्शाता है।

    उनका यह निर्णय केवल आध्यात्मिक नहीं बल्कि मानसिक शक्ति का भी अद्भुत उदाहरण था। असहनीय दर्द के बावजूद उन्होंने अपने मन और आत्मा को अडिग बनाए रखा। यह दिखाता है कि मनुष्य की इच्छाशक्ति शरीर की सीमाओं से कहीं अधिक शक्तिशाली हो सकती है।

    बाणों की शय्या केवल पीड़ा का प्रतीक नहीं थी बल्कि जीवन के सत्य का दर्पण भी थी। यह सिखाती है कि कर्मों का फल हर व्यक्ति को भोगना पड़ता है लेकिन उसे स्वीकार कर उससे सीख लेना ही सच्चा धर्म है।

    अंततः भीष्म पितामह का यह निर्णय हार नहीं बल्कि उनकी महानता का प्रतीक था। उन्होंने अपने कष्ट को ज्ञान में बदलकर मानवता को यह संदेश दिया कि सच्ची शक्ति कठिन परिस्थितियों में धैर्य कर्तव्य और धर्म का पालन करने में ही निहित है।

  • दिल्ली से इंदौर तक फूडी डेस्टिनेशन भारत के ये 6 शहर बनाते हैं खाने का अनुभव यादगार

    नई दिल्ली:भारत अपनी विविधता के साथ साथ अपने अनोखे स्वादों के लिए भी दुनिया भर में जाना जाता है हर शहर का अपना एक अलग फूड कल्चर है जो वहां की संस्कृति और परंपरा को दर्शाता है ऐसे कई शहर हैं जहां घूमने से ज्यादा लोग खाने के लिए जाते हैं और वहां का हर व्यंजन एक अलग अनुभव देता है

    दिल्ली इस सूची में सबसे ऊपर आती है जहां स्ट्रीट फूड से लेकर मुगलई खाने तक हर चीज का स्वाद लोगों को आकर्षित करता है चांदनी चौक की गलियों में मिलने वाले छोले भटूरे परांठे और बटर चिकन का स्वाद एक बार लेने के बाद बार बार मन करता है यहां का खाना सिर्फ पेट नहीं बल्कि दिल भी भर देता है

    लखनऊ को नवाबी स्वाद का शहर कहा जाता है जहां गलौटी कबाब अवधी बिरयानी और निहारी जैसी डिशेस बेहद लोकप्रिय हैं यहां का खाना सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि एक नफासत और तहजीब का भी प्रतीक है लखनऊ में हर व्यंजन को बनाने और परोसने का तरीका भी खास होता है

    अमृतसर का नाम आते ही पंजाबी खाने की खुशबू मन को लुभा लेती है यहां का अमृतसरी कुलचा छोले और मक्खन से भरपूर व्यंजन हर खाने के शौकीन को पसंद आते हैं लस्सी और सरसों का साग मक्के की रोटी यहां की खास पहचान हैं जो लोगों को बार बार यहां खींच लाती हैं

    कोलकाता अपने मीठे और बंगाली व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है यहां माछेर झोल कोषा मंगशो और रसगुल्ला जैसी मिठाइयां लोगों को बेहद पसंद आती हैं बंगाल का खाना अपने हल्के मसालों और अनोखे स्वाद के लिए जाना जाता है और यहां की मिठाइयों का कोई मुकाबला नहीं

    हैदराबाद को बिरयानी का शहर कहा जाता है यहां की हैदराबादी बिरयानी दुनियाभर में मशहूर है इसके अलावा हलीम मिर्च का सालन और डबल का मीठा भी यहां के खास व्यंजन हैं बिरयानी के शौकीन लोग खास तौर पर इस शहर का रुख करते हैं

    इंदौर को भारत का स्ट्रीट फूड हब कहा जाता है सराफा और छप्पन दुकान यहां के प्रमुख फूड डेस्टिनेशन हैं जहां पोहा जलेबी भुट्टे का कीस और दाल बाफला जैसे व्यंजन लोगों को खूब पसंद आते हैं इंदौर का खाना स्वाद के साथ साथ साफ सफाई के लिए भी जाना जाता है

    इन सभी शहरों की खास बात यह है कि यहां का खाना सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है बल्कि यह वहां की संस्कृति और परंपरा को भी दर्शाता है अगर आप खाने के शौकीन हैं तो ये शहर आपके लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं हैं

  • राम नवमी पर अयोध्या जाने से पहले जानें भीड़ और सुरक्षा की पूरी जानकारी

    राम नवमी पर अयोध्या जाने से पहले जानें भीड़ और सुरक्षा की पूरी जानकारी


    नई दिल्ली । राम नवमी 2026 का पावन पर्व 26 मार्च को अयोध्या में मनाया जाएगा और इस बार राम लला के भव्य मंदिर के निर्माण के बाद यह उत्सव और भी खास होने वाला है। इस मौके पर देश दुनिया से लाखों भक्त अयोध्या पहुँचते हैं, जिससे यात्रा के दौरान भारी भीड़ और व्यवस्थाओं से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। इसलिए यात्रा को आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है।

    सबसे पहले दर्शन का सही समय चुनना महत्वपूर्ण है। राम नवमी के दिन मंदिर में कतारें कई किलोमीटर लंबी हो सकती हैं। यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं तो राम नवमी से 2 3 दिन पहले या उत्सव के 2 दिन बाद मंदिर जाने की योजना बनाएं। मुख्य उत्सव के दिन सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक मंदिर परिसर में सबसे अधिक भीड़ रहती है क्योंकि इसी समय मध्याह्न की विशेष आरती और सूर्य तिलक होता है।

    ठहरने और खाने पीने का भी सही प्लान बनाना जरूरी है। भीड़ के कारण अयोध्या के होटलों और धर्मशालाओं के दाम बढ़ जाते हैं। यदि मुख्य शहर में कमरे नहीं मिल रहे हैं तो फैजाबाद (अयोध्या कैंट) या गुप्तार घाट के पास ठहरने का विकल्प देखें। यहां से मंदिर तक ई रिक्शा आसानी से उपलब्ध हैं। अयोध्या के प्रमुख मठों और मंदिरों में भंडारा और प्रसाद की व्यवस्था रहती है, और राम पथ के किनारे कई किफायती भोजनालय भी हैं।

    भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के नियमों का पालन करना जरूरी है। प्रशासन ने इस बार ई पास या क्यूआर कोड आधारित प्रवेश व्यवस्था पर जोर दिया है। मंदिर के अंदर मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैमरा और चमड़े के सामान ले जाना वर्जित है। भारी भीड़ को देखते हुए बुजुर्गों और छोटे बच्चों को मुख्य उत्सव के दिन मंदिर ले जाने से बचें। राम जन्मभूमि पथ पर लंबी पैदल यात्रा के लिए आरामदायक जूते पहनना न भूलें।

    अयोध्या की यात्रा केवल मुख्य मंदिर तक सीमित न रखें। यात्रा के दौरान हनुमानगढ़ी, कनक भवन, नागेश्वरनाथ मंदिर और सरयू तट की आरती का भी आनंद लें। शाम के समय सरयू घाट पर होने वाला लेजर शो भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है।

    राम नवमी पर अयोध्या की यात्रा आस्था का अनूठा अनुभव है। इसके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहना, समय पर बुकिंग करना और धैर्य रखना जरूरी है। सही तैयारी के साथ आप राम लला के दर्शन को आराम से और सफलतापूर्वक कर पाएंगे।

  • मीठा खरबूजा चुनने के आसान ट्रिक्स: खुशबू, रंग और वजन से पहचानें

    मीठा खरबूजा चुनने के आसान ट्रिक्स: खुशबू, रंग और वजन से पहचानें


    नई दिल्ली । खरबूजा गर्मियों का एक बेहतरीन फल है, जो हाइड्रेशन और न्यूट्रिशन दोनों का पैकेज लेकर आता है। इसे अपनी डाइट में शामिल करना स्वादिष्ट और हेल्दी आदत बन सकती है। लेकिन अक्सर खरबूजा खरीदते समय यह तय करना मुश्किल होता है कि वह मीठा होगा या नहीं। आज हम आपको कुछ आसान टिप्स बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप हर बार मीठा और रसदार खरबूजा खरीद सकते हैं।सबसे पहले खुशबू से पहचानें। पका और मीठा खरबूजा नीचे यानी डंठल वाली साइड से मीठी खुशबू देता है। अगर कोई खुशबू नहीं है तो वह खरबूजा कच्चा हो सकता है और उसे बिल्कुल ना लें।

    दूसरी ट्रिक रंग की है। खरबूजे का छिलका हल्का पीला या सुनहरा होना चाहिए। बहुत हरा खरबूजा अभी कच्चा है और मीठा नहीं होगा। इसलिए रंग देखकर ही अनुमान लगाना आसान हो जाता है। तीसरी ट्रिक वजन की है। खरबूजे को हाथ में उठाएं और देखें कि वह अपने आकार के हिसाब से भारी लगे या नहीं। भारी होने का मतलब है कि अंदर रस और मिठास ज्यादा है। हल्का खरबूजा कम मीठा हो सकता है।

    इसके अलावा डंठल वाले हिस्से को हल्का दबाकर देखें। बहुत सख्त हिस्सा कच्चा होता है और बहुत नरम हिस्सा ज्यादा पका या खराब हो सकता है। खरबूजे को हल्की थपकी देने पर उसकी आवाज भी बता सकती है। अगर हल्की खोखली आवाज आती है तो यह अच्छा और मीठा खरबूजा है। जबकि भारी या भरी हुई आवाज वाले खरबूजे कम पके या कम मीठे होंगे।

    अंत में सतह देखें। खरबूजे के ऊपर जाल साफ और उभरा हुआ हो तो वह अच्छा माना जाता है। चिकना या फीका खरबूजा कम पका होगा और मीठा नहीं आएगा। इन आसान टिप्स को अपनाकर आप गर्मियों में हर बार मीठा, रसदार और ताजगी भरा खरबूजा खरीद सकते हैं।

  • चेहरे की झुर्रियां करें कम और पाएं नैचुरल चमक जानिए 8 आसान घरेलू तरीके

    चेहरे की झुर्रियां करें कम और पाएं नैचुरल चमक जानिए 8 आसान घरेलू तरीके


    नई दिल्ली । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बढ़ती उम्र का असर सबसे पहले चेहरे पर दिखाई देने लगता है। तनाव प्रदूषण और असंतुलित खानपान त्वचा की प्राकृतिक चमक को कम कर देते हैं। नतीजतन चेहरे पर झुर्रियां और महीन रेखाएं समय से पहले ही नजर आने लगती हैं। कई लोग इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं लेकिन उनमें मौजूद केमिकल्स कई बार त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। ऐसे में घरेलू और प्राकृतिक उपाय एक सुरक्षित और असरदार विकल्प साबित हो सकते हैं।

    एलोवेरा त्वचा के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। इसमें मौजूद तत्व त्वचा की लोच को बढ़ाने में मदद करते हैं। ताजे एलोवेरा जेल को चेहरे पर लगाकर कुछ समय के लिए छोड़ दें और फिर गुनगुने पानी से धो लें। यह त्वचा को गहराई से मॉइस्चराइज करता है और उसे मुलायम बनाता है।

    नारियल तेल भी त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह त्वचा के अंदर जाकर उसे पोषण देता है और कोलेजन के निर्माण को बढ़ावा देता है। रात में सोने से पहले हल्के हाथों से चेहरे की मालिश करने से त्वचा में कसाव आता है और झुर्रियां धीरे धीरे कम होने लगती हैं।

    अंडे की सफेदी त्वचा को तुरंत टाइट करने में मदद करती है। इसमें मौजूद प्रोटीन त्वचा को मजबूती देता है। इसे चेहरे पर लगाकर सूखने दें और फिर धो लें। यह उपाय त्वचा को तुरंत तरोताजा और जवां दिखाने में मदद करता है।

    नींबू और शहद का मिश्रण भी काफी असरदार माना जाता है। शहद त्वचा को नमी प्रदान करता है जबकि नींबू में मौजूद विटामिन सी त्वचा को साफ और चमकदार बनाता है। यह मिश्रण दाग धब्बों को हल्का करने के साथ झुर्रियों को कम करने में सहायक होता है।

    केले का फेस मास्क त्वचा को पोषण देने का एक आसान तरीका है। पके हुए केले में शहद मिलाकर लगाने से त्वचा को जरूरी विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं। इससे त्वचा की कोशिकाएं पुनर्जीवित होती हैं और चेहरे पर प्राकृतिक चमक लौटती है।

    जैतून का तेल भी एंटी एजिंग गुणों से भरपूर होता है। इसमें मौजूद विटामिन त्वचा को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं और उसे स्वस्थ बनाए रखते हैं। नियमित उपयोग से त्वचा में निखार आता है और झुर्रियां कम होती हैं।खीरे का रस त्वचा को ठंडक और ताजगी देता है। यह त्वचा को हाइड्रेट रखने के साथ रोमछिद्रों को कसने में मदद करता है। इसे नियमित रूप से लगाने से त्वचा साफ और फ्रेश दिखती है।

    इन सभी उपायों के साथ साथ शरीर को अंदर से स्वस्थ रखना भी बेहद जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और संतुलित आहार लेना त्वचा की खूबसूरती बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। अगर आप रोजाना इन आसान घरेलू उपायों को अपनाते हैं तो बिना किसी साइड इफेक्ट के आप लंबे समय तक जवान और दमकती त्वचा पा सकते हैं।

  • नवरात्रि समाप्त होने से पहले करें पीली सरसों के ये महाउपाय, आर्थिक तंगी और गृह-क्लेश दूर

    नवरात्रि समाप्त होने से पहले करें पीली सरसों के ये महाउपाय, आर्थिक तंगी और गृह-क्लेश दूर


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि 2026 पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। नवरात्रि का हर दिन माता दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा के लिए समर्पित है और तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना होती है। देवी भागवत पुराण के अनुसार मां चंद्रघंटा अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी हैं। ज्योतिषियों के अनुसार, नवरात्रि के दौरान कुछ विशेष उपाय करने से जीवन में सुख-समृद्धि और धन लाभ की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

    इन उपायों में पीली सरसों के उपाय काफी प्रभावी माने जाते हैं। सबसे पहले नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए पीली सरसों को लाल कपड़े में बांधकर पोटली बना लें और नवरात्रि के दिनों में अपने घर के मुख्य द्वार पर लटका दें। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं कर पाती।

    आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए रात को एक मुट्ठी पीली सरसों अपने सिर से 7 बार वारकर किसी सुनसान चौराहे या बहते जल में प्रवाहित करें। इस उपाय से धन वृद्धि में बाधाएं दूर होती हैं। यदि कर्ज से छुटकारा पाना हो तो लाल कपड़े में पीली सरसों बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखें।

    नजर दोष और गृह-क्लेश से मुक्ति के लिए पीली सरसों और सेंधा नमक को मिलाकर पूरे घर में घुमाएं और फिर इसे घर की सीमा से बाहर फेंक दें। ऐसा करने से घर की भारी ऊर्जा समाप्त हो जाती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।

    करियर और व्यापार में उन्नति के लिए मंगलवार या रविवार की शाम यह उपाय करें। थोड़ी पीली सरसों अपने सिर से 7 बार वारकर घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर या किसी चौराहे पर फेंक दें। यह प्रयोग कार्यक्षेत्र की बाधाओं को दूर करने में सहायक माना जाता है।

    मां दुर्गा का आशीर्वाद पाने के लिए नवरात्रि में नियमित पूजा करें और अपनी पूजा सामग्री में पीली सरसों को भी शामिल करें। पूजा की थाली में कुछ सरसों के दाने रखने से साधना पूर्ण मानी जाती है और माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    इन आसान पीली सरसों उपायों को अपनाकर आप नवरात्रि समाप्त होने से पहले आर्थिक तंगी, गृह-क्लेश, नजर दोष और कार्यक्षेत्र की बाधाओं से मुक्ति पा सकते हैं। साथ ही घर में सुख-शांति और समृद्धि का संचार भी सुनिश्चित होता है।