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  • ट्रंप-जेलेंस्की मुलाकात के बाद रूस ने यूक्रेन पर कर दी मिसाइल और ड्रोन की बारिश

    ट्रंप-जेलेंस्की मुलाकात के बाद रूस ने यूक्रेन पर कर दी मिसाइल और ड्रोन की बारिश


    मॉस्को/कीव।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की वॉशिंगटन में हुई बैठक के कुछ ही समय बाद रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, हमलों में देश के कई प्रमुख शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन हमलों की टाइमिंग को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

    रिपोर्टों के अनुसार, रूस ने बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया। हमलों का असर कीव, ल्विव और नीप्रोपेत्रोव्स्क सहित कई क्षेत्रों में देखा गया। यूक्रेन ने दावा किया कि कई सैन्य और नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया, जबकि रूस का कहना है कि उसके हमले केवल सैन्य लक्ष्यों पर केंद्रित थे।

    पैट्रियट एयर डिफेंस पर चर्चा के बीच हमला

    ट्रंप और जेलेंस्की की बैठक के दौरान यूक्रेन की वायु सुरक्षा क्षमता बढ़ाने और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम की उपलब्धता पर चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि रूस ने ऐसे समय में हमला कर यूक्रेन की मौजूदा वायु सुरक्षा चुनौतियों का लाभ उठाने की कोशिश की। हालांकि, इस संबंध में रूस की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है।

    पोलैंड सीमा के निकट भी बढ़ी सतर्कता

    हमलों के दौरान एक रूसी मिसाइल के पोलैंड की सीमा के निकट पहुंचने की खबरों के बाद पड़ोसी देश पोलैंड ने अपनी वायु सुरक्षा व्यवस्था को अलर्ट पर रखा। पोलिश अधिकारियों ने स्थिति पर नजर रखने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की पुष्टि की है। हालांकि, घटना के कारणों और परिस्थितियों की जांच जारी है।

    रूस ने सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना

    रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमलों का उद्देश्य यूक्रेन के सैन्य एयरबेस, हथियार निर्माण इकाइयों, ड्रोन भंडारण केंद्रों और अन्य सैन्य अवसंरचना को निशाना बनाना था। मंत्रालय ने इसे यूक्रेन की ओर से हाल के दिनों में रूस के भीतर किए गए ड्रोन हमलों के जवाब में की गई कार्रवाई बताया।

    कूटनीतिक प्रयासों पर असर की आशंका

    विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप-जेलेंस्की बैठक के तुरंत बाद हुए इन हमलों से रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के कूटनीतिक प्रयासों को झटका लग सकता है। हालांकि, हमलों की टाइमिंग के पीछे रूस का क्या संदेश था, इस बारे में आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इससे जुड़े विभिन्न दावों को अभी विश्लेषकों के आकलन के रूप में ही देखा जा रहा है।

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

  • दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44% मतदान, लोकतंत्र के पर्व में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी

    दतिया विधानसभा उपचुनाव में 71.44% मतदान, लोकतंत्र के पर्व में मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर निभाई भागीदारी


    दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए गुरुवार को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित माहौल में मतदान संपन्न हो गया। लोकतंत्र के इस महापर्व में मतदाताओं ने उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, पूरे विधानसभा क्षेत्र में 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

    सुबह मतदान शुरू होते ही विभिन्न मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। युवाओं, महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं ने भी बड़ी संख्या में मतदान कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।

    निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े तथा पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल के नेतृत्व में सभी मतदान केंद्रों पर सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की गई थी। मतदाताओं के लिए पेयजल, छाया, चिकित्सा सहायता और दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। प्रशासन और पुलिस ने पूरे दिन मतदान प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखी, जिससे मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

    निर्वाचन कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, विधानसभा क्षेत्र के 2,20,410 मतदाताओं ने मतदान किया। इनमें 1,16,116 पुरुष मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 74.09, जबकि 1,04,284 महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत 68.48 रहा। वहीं 10 अन्य मतदाताओं में से 40 प्रतिशत ने अपने मताधिकार का उपयोग किया।

    मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतदान दल कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ईवीएम और निर्वाचन सामग्री लेकर सुरक्षित रूप से संग्रहण केंद्र पहुंचे, जहां सामग्री जमा कराने की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से पूरी कराई गई।

    जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखड़े ने मतदान प्रक्रिया को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी मतदाताओं, निर्वाचन ड्यूटी में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों, पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बल, मीडिया प्रतिनिधियों और अन्य सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।

  • Datia by-election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में शाम 5 बजे तक 69.36% मतदान

    Datia by-election: दतिया विधानसभा उपचुनाव में शाम 5 बजे तक 69.36% मतदान

    भोपाल/दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार को सुबह 7 बजे से मतदान जारी है। जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, शाम 5 बजे तक 69.36 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और पूरे क्षेत्र में मतदान को लेकर उत्साह बना रहा। मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहेगा।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर वोट डाले जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ संवेदनशील और अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी गई।

    मतदान के दौरान कांग्रेस ने सिरोल और जिगना क्षेत्रों में फर्जी मतदान की आशंका जताते हुए शिकायत दर्ज कराई। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से चर्चा की। वहीं, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि चुनाव में हार की आशंका होने पर कांग्रेस इस तरह के आरोप लगाती है और यह उसकी हताशा को दर्शाता है।

    उधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने पहले मतदान का बहिष्कार किया और “सड़क नहीं तो वोट नहीं” के नारे लगाए। बाद में एसडीएम अशोक अवस्थी की समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    इसी बीच रामसागर गांव के एक मतदान केंद्र से पुलिस कांग्रेस के एक पोलिंग एजेंट को अपने साथ ले गई। उस पर मतदाताओं से बातचीत करने का आरोप लगाया गया था। कांग्रेस नेताओं के थाने पहुंचने और विरोध दर्ज कराने के बाद पुलिस ने एजेंट को छोड़ दिया।

    इस उपचुनाव में 23 उम्मीदवार मैदान में हैं, हालांकि सीधा मुकाबला कांग्रेस के घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच माना जा रहा है। निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 3 अगस्त को मतगणना होगी और उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।

    गौरतलब है कि दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को सहकारी ग्रामीण विकास बैंक फर्जीवाड़ा मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से दो वर्ष की सजा मिलने के बाद रिक्त हुई थी। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर 80.2 प्रतिशत मतदान हुआ था। तब राजेंद्र भारती ने भाजपा के नरोत्तम मिश्रा को 7,742 मतों से पराजित किया था। उन्हें 88,977 और नरोत्तम मिश्रा को 81,235 वोट मिले थे, जबकि NOTA को 1,452 मत प्राप्त हुए थे।

  • लिथियम कोबाल्ट और निकेल की बढ़ेगी रिकॉर्ड मांग विकसित भारत के लक्ष्य में क्रिटिकल मिनरल निभाएंगे सबसे अहम भूमिका

    लिथियम कोबाल्ट और निकेल की बढ़ेगी रिकॉर्ड मांग विकसित भारत के लक्ष्य में क्रिटिकल मिनरल निभाएंगे सबसे अहम भूमिका


    नई दिल्ली। भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसके साथ ही आने वाले वर्षों में क्रिटिकल मिनरल की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि होने की संभावना जताई गई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2047 तक देश में लिथियम कोबाल्ट निकेल ग्रेफाइट तांबा और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की मांग वर्तमान स्तर से चार से दस गुना तक बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत को विकसित भारत 2047 और 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करना है तो इन महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होगी।

    रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए भी तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। यही कारण है कि बैटरियों और ऊर्जा भंडारण प्रणाली में इस्तेमाल होने वाले खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है। अनुमान है कि केवल इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों की मांग ही वर्ष 2030 तक 110 से 130 गीगावाट तक पहुंच सकती है जिससे इन खनिजों का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा।

    रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत को केवल खनिजों के आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू स्तर पर अन्वेषण रिफाइनिंग प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग की मजबूत व्यवस्था विकसित करनी होगी। यदि देश समय रहते इन क्षेत्रों में निवेश करता है तो भविष्य में वैश्विक आपूर्ति संकट और आयात पर बढ़ती निर्भरता से बचा जा सकता है। इसके साथ ही घरेलू उद्योगों को भी नई गति मिलेगी और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

    विशेषज्ञों ने विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तीन चरणों वाला रोडमैप भी सुझाया है। पहले चरण में वर्ष 2026 से 2031 के बीच बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसमें एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पॉन्सिबिलिटी लागू करना सर्कुलर मिनरल प्रोसेसिंग जोन विकसित करना और बैटरी ट्रेसबिलिटी तथा रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करना शामिल है। दूसरे चरण में वर्ष 2031 से 2036 के बीच रीसाइक्लिंग नेटवर्क का विस्तार और ग्रीन फाइनेंसिंग के जरिए औद्योगिक विकास को गति देने की योजना प्रस्तावित की गई है।

    तीसरे और अंतिम चरण में वर्ष 2036 से 2047 तक भारत को रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत घरेलू रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने आयात पर निर्भरता कम करने और 10 से 15 अरब डॉलर की वार्षिक रीसाइक्लिंग अर्थव्यवस्था विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इससे भारत वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में मजबूत स्थिति हासिल कर सकता है।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नीतियों का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं बल्कि संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। इसके लिए खनिज आधारित रणनीतियों को अपनाने घरेलू वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने और मंजूरी प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता बताई गई है। साथ ही डाउनस्ट्रीम मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने और निजी निवेश आकर्षित करने पर भी जोर दिया गया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि रिफाइनिंग सेपरेशन और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्र अत्यधिक पूंजी निवेश वाले हैं और इनमें निवेश का लाभ लंबे समय बाद मिलता है। इसलिए सरकारी सहायता ग्रीन बॉन्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वेंचर कैपिटल और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों के सहयोग जैसी बहुस्तरीय वित्तीय व्यवस्था विकसित करना जरूरी होगा। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के लिए किए गए वित्तीय प्रावधान को सकारात्मक कदम बताते हुए रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों के लिए और अधिक लक्षित वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए ताकि भारत भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को आत्मनिर्भर तरीके से पूरा कर सके।

  • पश्चिम मध्य रेलवे का बड़ा फैसला तत्काल टिकट प्रणाली पूरी तरह बदली अब दस्तावेज सत्यापन के बाद ही बनेगा टोकन

    पश्चिम मध्य रेलवे का बड़ा फैसला तत्काल टिकट प्रणाली पूरी तरह बदली अब दस्तावेज सत्यापन के बाद ही बनेगा टोकन


    नई दिल्ली। रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत और टिकट दलालों पर सख्ती की दिशा में पश्चिम मध्य रेलवे ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। एक अगस्त से भोपाल जबलपुर और कोटा मंडल के सभी आरक्षण केंद्रों पर तत्काल टिकट बुकिंग की नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। इस नई प्रणाली का उद्देश्य वास्तविक यात्रियों को प्राथमिकता देना आरक्षण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और अनधिकृत एजेंटों तथा बिचौलियों की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है। रेलवे का मानना है कि इस बदलाव से तत्काल टिकट पाने के लिए घंटों लाइन में लगने वाले यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी और टिकटों की फर्जी बुकिंग पर भी अंकुश लगेगा।

    अब तक तत्काल टिकट के लिए पहले आओ पहले पाओ के आधार पर टोकन जारी किए जाते थे। कोई भी व्यक्ति लाइन में लगकर टोकन प्राप्त कर सकता था और यह स्पष्ट नहीं होता था कि वह टिकट अपने लिए बनवा रहा है या किसी अन्य व्यक्ति के लिए। इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कई लोग बार बार लाइन में लगकर अलग अलग यात्रियों के लिए टिकट बुक कराने की कोशिश करते थे जिससे आम यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। रेलवे को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं जिनमें दलालों की सक्रियता और वास्तविक यात्रियों को टिकट न मिलने की बात सामने आ रही थी।

    नई व्यवस्था के तहत अब केवल लाइन में पहले पहुंचना ही पर्याप्त नहीं होगा। टोकन लेने वाले व्यक्ति को यह बताना होगा कि वह अपना टिकट बनवा रहा है अपने परिवार के किसी सदस्य का टिकट बनवा रहा है या किसी अन्य व्यक्ति का। इसके आधार पर यात्रियों को दो अलग अलग प्राथमिकता श्रेणियों में रखा जाएगा। प्राथमिकता ए में स्वयं और निकट परिवार के सदस्य शामिल होंगे जिनमें माता पिता पति पत्नी पुत्र पुत्री भाई बहन तथा दादा दादी आते हैं। इन सभी के टिकटों की बुकिंग पहले की जाएगी। इसके बाद प्राथमिकता बी के तहत अन्य व्यक्तियों के टिकट बनाए जाएंगे।

    नई प्रणाली में पहचान और संबंध साबित करने वाले दस्तावेज भी अनिवार्य कर दिए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने परिवार के सदस्य का टिकट बनवा रहा है तो उसे सरकारी दस्तावेज के माध्यम से संबंध का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। वहीं किसी अन्य व्यक्ति का टिकट बनवाने की स्थिति में संबंधित यात्री के पहचान पत्र की स्वयं सत्यापित प्रति और उसके हस्ताक्षर भी आवश्यक होंगे। रेलवे का कहना है कि इससे फर्जी बुकिंग और गलत जानकारी देकर टिकट लेने की संभावना काफी कम हो जाएगी।

    टोकन वितरण की प्रक्रिया भी पहले से अधिक नियंत्रित रहेगी। एसी तत्काल टिकट के लिए सुबह साढ़े आठ बजे से नौ बजे तक प्रत्येक काउंटर पर अधिकतम दस टोकन जारी किए जाएंगे जबकि स्लीपर श्रेणी के लिए सुबह नौ बजे से साढ़े नौ बजे तक अधिकतम पंद्रह टोकन दिए जाएंगे। प्रत्येक टोकन पर संबंधित काउंटर का नंबर अंकित रहेगा और उसका पूरा रिकॉर्ड रजिस्टर में सुरक्षित रखा जाएगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर उसकी जांच की जा सके।

    रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था में टोकन किसी दूसरे व्यक्ति को हस्तांतरित नहीं किया जा सकेगा। जिस व्यक्ति के नाम पर टोकन जारी होगा वही टिकट बुक करा सकेगा। साथ ही बार बार टोकन लेने वाले लोगों का रिकॉर्ड भी रखा जाएगा जिससे संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करना आसान होगा। इससे दलालों और बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक सीमित होने की उम्मीद है।

    वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया के अनुसार नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य वास्तविक यात्रियों और उनके परिवार को प्राथमिकता देना है ताकि टिकट वितरण निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो सके। रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत आरक्षण केंद्रों से ही टिकट बनवाएं और किसी भी अनधिकृत एजेंट या बिचौलिए के झांसे में आने से बचें। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद तत्काल टिकट बुकिंग पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित पारदर्शी और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

  • मध्य प्रदेश में मानसून का प्रचंड रूप भोपाल उज्जैन से लेकर हरदा और खरगोन तक झमाझम बारिश बैतूल में दर्दनाक हादसा

    मध्य प्रदेश में मानसून का प्रचंड रूप भोपाल उज्जैन से लेकर हरदा और खरगोन तक झमाझम बारिश बैतूल में दर्दनाक हादसा


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और एक साथ तीन मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश के कई जिलों में लगातार तेज बारिश का दौर जारी है। मानसून ट्रफ साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन के एक साथ सक्रिय होने के कारण राजधानी भोपाल सहित उज्जैन रतलाम हरदा और खरगोन में रुक रुक कर तेज बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने आने वाले घंटों में कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा की संभावना जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

    बारिश के बीच बैतूल जिले से दुखद खबर सामने आई है। बुधवार देर रात गंज थाना क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल उसके पास बनी झोपड़ी पर गिर गई। हादसे के समय झोपड़ी में सो रहे 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके की मौके पर ही मौत हो गई जबकि उसका साथी शनि सिंह घायल हो गया। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से राहत कार्य किया गया तथा घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले चौबीस घंटों में छिंदवाड़ा जिले के हर्रई में लगभग छह इंच बारिश दर्ज की गई जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। इसके अलावा पचमढ़ी में करीब पांच इंच और बैतूल के भैंसदेही क्षेत्र में चार इंच से अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई। बैतूल जिले के अधिकांश इलाकों में तेज बारिश हुई जबकि छिंदवाड़ा के तामिया नरसिंहपुर के गाडरवारा देवास के खातेगांव और शिवपुरी के पोहरी में भी जोरदार बारिश दर्ज की गई।

    प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाओं ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी। भिंड जिले में सबसे तेज करीब पचास किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली। इसके अलावा नर्मदापुरम सीहोर इंदौर रायसेन दतिया बड़वानी बैतूल सिवनी जबलपुर उमरिया सागर पन्ना छिंदवाड़ा और सीधी में भी तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। कई स्थानों पर पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की भी खबरें सामने आई हैं।

    राजधानी भोपाल में सुबह से मौसम का मिजाज लगातार बदलता रहा। कभी तेज धूप तो कभी घने बादलों के साथ बारिश का सिलसिला चलता रहा। उज्जैन में भी सुबह से अच्छी बारिश हुई जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। हरदा में कई सड़कें पानी से भर गईं जबकि खरगोन में रुक रुक कर बारिश का दौर जारी रहा। रतलाम में दोपहर के समय तेज बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया।

    मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए प्रदेश के सत्रह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। धार देवास बुरहानपुर हरदा और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है। वहीं उज्जैन शाजापुर सीहोर बड़वानी खरगोन खंडवा रायसेन सागर बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि तीनों मौसम प्रणालियों के सक्रिय रहने के कारण अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। प्रशासन ने नदी नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने तथा जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। मौसम विभाग ने भी नागरिकों से बिजली गिरने और तेज बारिश के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

  • भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में ऐतिहासिक बदलाव पीएम मोदी के दौरे ने रक्षा व्यापार और समुद्री सहयोग को दी नई दिशा

    भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में ऐतिहासिक बदलाव पीएम मोदी के दौरे ने रक्षा व्यापार और समुद्री सहयोग को दी नई दिशा


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया न्यूजीलैंड यात्रा ने भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। लगभग दो दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस ऐतिहासिक यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। न्यूजीलैंड इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स द्वारा प्रकाशित एक विश्लेषण में कहा गया है कि इस यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़कर व्यापक रणनीतिक साझेदारी के नए चरण में प्रवेश कर चुके हैं।

    दो दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने वर्ष 2030 तक के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया। इस रणनीतिक साझेदारी के अंतर्गत रक्षा व्यापार समुद्री सुरक्षा कृषि पर्यटन खेल संस्कृति विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहित अनेक क्षेत्रों में सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में दोनों देश साझा हितों और वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करेंगे।

    यात्रा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का रखा गया। इसके लिए निवेश व्यापारिक सहयोग आपूर्ति श्रृंखला और नई आर्थिक संभावनाओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था और विशाल उपभोक्ता बाजार को देखते हुए न्यूजीलैंड भारत को अपनी दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण साझेदार मान रहा है।

    विश्लेषण में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2030 तक भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत का बढ़ता मध्यम वर्ग वैश्विक बाजार के लिए नई संभावनाएं प्रस्तुत करता है। यही कारण है कि न्यूजीलैंड भारत के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है।

    दौरे के दौरान कुल 18 महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए जिनमें 10 समझौते और सहमति पत्र शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को मजबूत करना भी है। रोडमैप टू 2030 के माध्यम से दोनों देशों ने रक्षा सहयोग समुद्री सुरक्षा वैज्ञानिक अनुसंधान शिक्षा सांस्कृतिक आदान प्रदान और लोगों के बीच संपर्क को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है।

    रक्षा और समुद्री सुरक्षा इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष रहे। दोनों देशों ने म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट अरेंजमेंट पर सहमति जताई जिससे भारतीय नौसेना और न्यूजीलैंड रक्षा बल जरूरत पड़ने पर एक दूसरे की सुविधाओं का उपयोग ईंधन भरने रखरखाव और रसद सहायता के लिए कर सकेंगे। इसके अलावा हिंद प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और समन्वय को मजबूत करने के लिए एक नए समुद्री सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए।

    आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को भी नई मजबूती दी गई है। दोनों देशों ने संयुक्त कार्य समूह गठित करने पर सहमति जताई है जो खुफिया सूचनाओं के आदान प्रदान और सुरक्षा समन्वय को और प्रभावी बनाएगा। साथ ही अवैध मछली पकड़ने जैसी समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए भी साझा प्रयास किए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को नई रणनीतिक दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी आर्थिक विकास क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक सहयोग के नए अवसर पैदा करेगी तथा हिंद प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाएगी।

  • वॉशिंगटन में हाई लेवल बैठक इजरायल और अमेरिका ने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में बढ़ाए कदम

    वॉशिंगटन में हाई लेवल बैठक इजरायल और अमेरिका ने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने की दिशा में बढ़ाए कदम


    नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल तेज होती दिखाई दे रही है। वॉशिंगटन दौरे पर पहुंचे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर दोनों देशों के साझा सुरक्षा हितों और भविष्य की रक्षा रणनीति पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान लगभग 16 अरब डॉलर के संभावित संयुक्त रक्षा फंड के गठन का प्रस्ताव भी प्रमुख विषय रहा। माना जा रहा है कि इस फंड का उपयोग अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों के अनुसंधान विकास और नई रक्षा तकनीकों को तैयार करने के लिए किया जाएगा जिससे दोनों देशों की सैन्य क्षमता और अधिक मजबूत हो सके।

    बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ भी अलग अलग मुलाकात की। इन बैठकों में पश्चिम एशिया की मौजूदा सुरक्षा स्थिति ईरान की गतिविधियों लेबनान से जुड़े हालात और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर विचार विमर्श किया गया। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और अधिक प्रभावी बनाने तथा साझा सुरक्षा चुनौतियों का मिलकर सामना करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बैठक के बाद सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि इजरायल के साथ अमेरिका की रक्षा साझेदारी बेहद मजबूत है और दोनों देश साझा सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए लगातार साथ काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि उनकी टीम के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया और भविष्य की रणनीतिक योजनाओं पर सकारात्मक चर्चा हुई।

    सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित 16 अरब डॉलर का संयुक्त रक्षा फंड नई पीढ़ी की रक्षा प्रणालियों मिसाइल तकनीक और उन्नत सैन्य अनुसंधान को गति देने के उद्देश्य से तैयार किया जा सकता है। यदि इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिलती है तो यह अमेरिका और इजरायल के रक्षा सहयोग के इतिहास में सबसे बड़े संयुक्त निवेशों में शामिल होगा।

    बैठक के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर भी गंभीर चर्चा हुई। बताया गया कि नेतन्याहू ने अमेरिकी पक्ष को कुछ खुफिया जानकारियों से अवगत कराया जिनका संबंध कथित तौर पर ईरान की भूमिगत परमाणु गतिविधियों से है। हालांकि इस विषय पर दोनों देशों के बीच रणनीतिक समन्वय बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।

    व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के नेताओं के बीच अब्राहम समझौते को आगे बढ़ाने और पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने के प्रयासों पर भी बातचीत हुई। अमेरिका क्षेत्र में कूटनीतिक समाधान को बढ़ावा देना चाहता है जबकि इजरायल सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सख्त रुख बनाए हुए है। इसके बावजूद दोनों देशों ने अपने संबंधों को और मजबूत करने तथा साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान निकालने की इच्छा व्यक्त की।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं है बल्कि पश्चिम एशिया की बदलती भू राजनीतिक परिस्थितियों में अमेरिका और इजरायल की संयुक्त रणनीति को भी नई दिशा दे सकती है। आने वाले समय में इस प्रस्तावित रक्षा फंड और सुरक्षा सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले सामने आ सकते हैं जो वैश्विक रणनीतिक संतुलन पर भी असर डाल सकते हैं।

  • एयरपोर्ट अथॉरिटी में निकली बंपर भर्ती अनुभवी उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका 6 अगस्त से पहले करें आवेदन

    एयरपोर्ट अथॉरिटी में निकली बंपर भर्ती अनुभवी उम्मीदवारों के लिए सुनहरा मौका 6 अगस्त से पहले करें आवेदन


    नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र में प्रतिष्ठित नौकरी की तलाश कर रहे अनुभवी पेशेवरों के लिए बेहतरीन अवसर सामने आया है। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण यानी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने एडसिल इंडिया लिमिटेड के माध्यम से संविदा आधार पर सीनियर कंसल्टेंट और कंसल्टेंट सहित कुल 10 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार निर्धारित योग्यता के साथ 6 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती उन अभ्यर्थियों के लिए खास है जो कानून मीडिया कंटेंट राइटिंग ग्राफिक डिजाइन वीडियो एडिटिंग और क्लिनिकल साइकोलॉजी जैसे क्षेत्रों में अनुभव रखते हैं।

    इस भर्ती के तहत सीनियर कंसल्टेंट के छह और कंसल्टेंट के चार पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। सीनियर कंसल्टेंट के पदों में कॉर्पोरेट मुख्यालय नई दिल्ली और उत्तरी क्षेत्र के कार्यालयों के लिए नियुक्तियां होंगी। वहीं कंसल्टेंट के पदों में कंटेंट राइटर ग्राफिक डिजाइनर वीडियो एडिटर और उत्तरी क्षेत्र के लिए क्लिनिकल साइकोलॉजी विशेषज्ञ की नियुक्ति की जाएगी।

    ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 24 जुलाई से शुरू हो चुकी है और आवेदन करने की अंतिम तिथि 6 अगस्त निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि अंतिम समय की परेशानी से बचने के लिए समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सीनियर कंसल्टेंट के लिए उम्मीदवार के पास कानून की प्रोफेशनल डिग्री होना आवश्यक है। इसके साथ ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया में अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण की पात्रता भी होनी चाहिए। कुछ पदों के लिए क्लिनिकल साइकोलॉजी में एमफिल और वैध आरसीआई लाइसेंस अनिवार्य रखा गया है।

    कंटेंट राइटर पद के लिए मास कम्युनिकेशन जर्नलिज्म या इंग्लिश लिटरेचर में डिग्री अथवा संबंधित विषय में मास्टर डिग्री मांगी गई है। ग्राफिक डिजाइनर पद के लिए मल्टीमीडिया एनिमेशन विजुअल कम्युनिकेशन या संबंधित क्षेत्र में डिग्री या एडवांस डिप्लोमा आवश्यक है। वीडियो एडिटर पद के लिए फिल्म प्रोडक्शन मीडिया स्टडीज मास कम्युनिकेशन या विजुअल आर्ट्स से संबंधित योग्यता निर्धारित की गई है।

    इन सभी पदों के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं बल्कि संबंधित क्षेत्र में पांच से दस वर्ष का व्यावसायिक अनुभव भी जरूरी है। अधिकतम आयु सीमा पद के अनुसार 40 से 45 वर्ष निर्धारित की गई है जबकि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट मिलेगी।

    चयन प्रक्रिया पूरी तरह योग्यता और अनुभव पर आधारित होगी। सबसे पहले उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग की जाएगी। इसके बाद व्यक्तिगत साक्षात्कार आयोजित होगा और अंत में दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। सफल अभ्यर्थियों को पद के अनुसार प्रति माह लगभग 1 लाख 20 हजार रुपए से लेकर 1 लाख 50 हजार रुपए तक का वेतन दिया जाएगा।

    एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया की यह भर्ती उन पेशेवरों के लिए शानदार अवसर है जो अपने अनुभव के आधार पर प्रतिष्ठित संस्थान में कार्य करना चाहते हैं। आकर्षक वेतन बेहतर कार्य वातावरण और राष्ट्रीय स्तर की संस्था में काम करने का मौका इस भर्ती को और भी खास बनाता है। ऐसे में योग्य उम्मीदवारों को अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना जल्द आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लेनी चाहिए।

  • 70 साल के बाद कैंसर का बढ़ता खतरा एक्सपर्ट्स ने बताए शुरुआती लक्षण बचाव और समय पर जांच का महत्व

    70 साल के बाद कैंसर का बढ़ता खतरा एक्सपर्ट्स ने बताए शुरुआती लक्षण बचाव और समय पर जांच का महत्व


    नई दिल्ली । उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के प्राकृतिक बदलाव होते हैं और इसी के साथ कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ने लगता है। इनमें कैंसर सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक माना जाता है। हाल के वर्षों में सामने आई कई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च यह संकेत देती हैं कि बुजुर्गों में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सबसे चिंता की बात यह है कि बड़ी संख्या में मरीजों में बीमारी का पता तब चलता है जब कैंसर काफी आगे बढ़ चुका होता है। ऐसे में इलाज जटिल हो जाता है और मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना भी कम हो सकती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उम्र के साथ शरीर की कोशिकाओं में लंबे समय तक होने वाले बदलाव कैंसर का जोखिम बढ़ाते हैं। इसके अलावा प्रतिरक्षा प्रणाली भी पहले की तुलना में कमजोर होने लगती है जिससे शरीर असामान्य कोशिकाओं को प्रभावी तरीके से खत्म नहीं कर पाता। यही कारण है कि 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों में कैंसर के मामले अपेक्षाकृत ज्यादा देखने को मिलते हैं।

    हाल में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में लाखों बुजुर्ग मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि बड़ी संख्या में लोगों को कैंसर का पता तब चला जब उन्हें गंभीर स्थिति में अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भर्ती कराना पड़ा। ऐसे मरीजों में जीवित रहने की संभावना उन लोगों की तुलना में काफी कम पाई गई जिनमें बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो गई थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि समय पर जांच और सही निदान जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि फेफड़े लिवर पेट कोलन ओवरी और पैंक्रियाज जैसे कैंसर के मामलों में देर से पहचान होने की संभावना अधिक रहती है। वहीं स्तन और प्रोस्टेट कैंसर जैसे कुछ प्रकारों में नियमित जांच के कारण शुरुआती चरण में बीमारी पकड़ में आने की संभावना बेहतर होती है। इसलिए डॉक्टर उम्र के अनुसार समय समय पर हेल्थ चेकअप और स्क्रीनिंग कराने की सलाह देते हैं।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि बुजुर्गों में अचानक वजन कम होना लगातार थकान भूख में कमी लंबे समय तक खांसी मल या पेशाब की आदतों में बदलाव शरीर के किसी हिस्से में असामान्य गांठ बार बार खून आना या बिना कारण दर्द बने रहना जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि ये संकेत लगातार बने रहें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    रिपोर्ट में यह भी चिंता जताई गई कि कई बार अधिक उम्र होने के कारण मरीजों को आवश्यक इलाज कम मिल पाता है जबकि उनकी शारीरिक स्थिति उपचार के लिए उपयुक्त हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इलाज का निर्णय केवल उम्र के आधार पर नहीं बल्कि मरीज की संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

    स्वस्थ जीवनशैली नियमित व्यायाम संतुलित आहार धूम्रपान और शराब से दूरी पर्याप्त नींद तथा समय समय पर स्वास्थ्य जांच कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं। परिवार के सदस्यों की भी जिम्मेदारी है कि वे बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखें और किसी भी असामान्य बदलाव को हल्के में न लें। समय पर पहचान और सही उपचार ही कैंसर के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार साबित हो सकता है।