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  • मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद

    मप्र के उज्जैन में सिंहस्थ से पहले दो धड़ों में बंटे अखाड़े, अध्यक्ष पद को लेकर विवाद


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश के उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 (महाकुंभ) से पहले अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर विवाद सामने आया है। इस पद पर दो दावे किए जा रहे हैं। 13 अखाड़े दो गुट में बंटे नजर आ रहे हैं। एक धड़ा निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी को अध्यक्ष मानता है, जबकि दूसरा महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव रविंद्र पुरी को अध्यक्ष बता रहा है। एक जैसा नाम होने से असमंसज की स्थिति बनी है।

    दरअसल, उज्जैन में वर्ष 2028 में सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर जहां एक और सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। निरंजनी अखाड़े के रविंद्र पुरी पिछले छह महीनों से अध्यक्ष के रूप में उज्जैन आते-जाते रहे हैं। इस दौरान प्रशासन ने उन्हें शिप्रा नदी प्रोजेक्ट सहित मेले की तैयारियों की जानकारी भी दी, लेकिन अब साधु संतों में दो फाड़ दिखाई दे रही है। देश के 13 अखाड़े में से आठ अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है।

    रविवार को उज्जैन में मंगलनाथ मार्ग स्थित निर्वाणी अणि अखाड़ा में संतों का समागम हुआ। इसमें बड़ी संख्या में संत मौजूद रहे। संतों के इस समागम में 13 में से आठ अखाड़ों के साधु संत शामिल हुए। खास बात यह रही कि यहां हरिद्वार से पहली बार आए महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव संत रविंद्र पुरी महाराज स्वागत सम्मान हुआ। ढोल-नगाड़ों के बीच संतों में उत्साह नजर आया। कार्यक्रम में महंत सत्यानंद महाराज (बड़ा उदासीन), महंत मंगलदास जी (नया अखाड़ा), महंत विनीत गिरी (महानिर्वाणी), महंत रामेश्वर दास, भगवान दास और दिग्विजय दास सहित विभिन्न अखाड़ों के संत-महंत शामिल हुए।

    कार्यक्रम के बाद रविंद्र पुरी महाराज ने मीडिया से कहा कि वे खुद वर्तमान में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष हैं। उनके साथ में निर्मोही अणि अखाड़े के राजेंद्र दास सचिव हैं। उन्हें लिखित और चयनित दोनों रूपों में 13 में से आठ अखाड़े का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद चार संप्रदाय से मिलकर बनी है। इसमें संन्यासी, उदासीन, वैष्णव और निर्मल शामिल है। इन चारों संप्रदाय के अखाड़े उनके नेतृत्व वाली अखाड़ा परिषद में शामिल हैं। इसीलिए वे खुद अखाड़ा परिषद के चुने गए अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2028 मे सिंहस्थ महाकुंभ आयोजित होने वाला है। सिंहस्थ को लेकर सरकार और प्रशासन बड़े स्तर पर तैयारी कर रहा है। सिंहस्थ कुंभ के आयोजन को लेकर हमारी समय समय पर अधिकारियों से सूक्ष्म चर्चा होती रहती है। हम लगातार अधिकारियों के संपर्क में रहेंगे।


    इन अखाड़ों का समर्थन बताया

    देश के 13 अखाड़े में से 8 अखाड़ों का समर्थन महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पूरी महाराज को मिला है। इन अखाड़ों में 1- महानिर्वाणी अखाड़ा, 2- अटल अखाड़ा, 3-निर्मल अखाड़ा, 4- नया उदासी अखाड़ा, 5- बड़ा उदासीन अखाड़ा, 6-निर्वाणी अणि अखाड़ा, 7- दिगंबर अणि अखाड़ा और 8-निर्मोही अणि अखाड़ा शामिल है। इस प्रकार बहुमत के आधार पर अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महानिर्वाणी अखाड़े के रविंद्र पुरी महाराज ही होंगे।

    इधर निरंजनी अखाड़े से जुड़े रविंद्र पूरी महाराज ने कहा कि कुम्भ आ रहा है, ऐसे कई संत अपने आप को अध्यक्ष बताएंगे। सर्वसम्मति से मुझे अध्यक्ष बनाया गया था। जब मैंने इस्तीफा दिया नहीं तो महानिर्वाणी वाले रविंद्र पूरी कैसे अध्यक्ष बन सकते है।

  • चैत्र नवरात्रि पर शिवसिटी में निकली एक किलोमीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा, विशाल भंडारे का भी आयोजन

    चैत्र नवरात्रि पर शिवसिटी में निकली एक किलोमीटर लंबी भव्य चुनरी यात्रा, विशाल भंडारे का भी आयोजन

    भोपाल। राजधानी भोपाल के अरहेड़ी रोड स्थित शिवसिटी कॉलोनी में रविवार को चैत्र नवरात्रि के अवसर पर खेड़ापति हनुमान मंदिर से भव्य चुनरी यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का माहौल बना रहा।

    जानकारी के अनुसार, अयोध्या नगर से लगे अरहेड़ी रोड की शिवसिटी कॉलोनी से शुरू हुई करीब एक किलोमीटर लंबी इस यात्रा में श्रद्धालु डीजे, ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ आगे बढ़ते रहे। दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम के तहत भगवान शनिदेव की स्थापना भी की गई। इसके बाद चुनरी यात्रा निकाली गई और श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया।

    इस आयोजन में शिवसिटी के साथ ही शिवालय कॉलोनी और शिवधाम कॉलोनी के नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। भक्तिमय वातावरण में संपन्न कार्यक्रम के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और धार्मिक उत्सव का आनंद लिया।

  • लेक न्योस का खौफनाक सच 1986 की त्रासदी और दुनिया की सबसे खतरनाक झील

    लेक न्योस का खौफनाक सच 1986 की त्रासदी और दुनिया की सबसे खतरनाक झील

    नई दिल्ली:दुनिया में कई प्राकृतिक स्थल अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं लेकिन कुछ जगहें ऐसी भी हैं जहां सुंदरता के पीछे खतरनाक रहस्य छिपा होता है कैमरून की लेक न्योस ऐसी ही एक झील है जो देखने में शांत और आकर्षक लगती है लेकिन इसका इतिहास एक भयानक त्रासदी से जुड़ा है

    लेक न्योस कैमरून के ओकू ज्वालामुखी क्षेत्र में स्थित एक क्रेटर झील है जो एक निष्क्रिय ज्वालामुखी के गड्ढे में बनी है वैज्ञानिकों के अनुसार इस झील की गहराई में मौजूद मैग्मा लगातार कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता रहता है यह गैस पानी में घुलकर झील के तल में जमा होती रहती है और जब दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है तो यह गैस अचानक विस्फोट की तरह बाहर निकल सकती है

    इस घटना को लीम्निक विस्फोट कहा जाता है 21 अगस्त 1986 को लेक न्योस से अचानक बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड का घातक बादल निकला यह बादल लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आसपास की घाटी में फैल गया इस भयावह घटना में करीब 1800 लोगों की जान चली गई इसके अलावा हजारों मवेशी और कई पक्षी भी इस गैस के कारण मारे गए लोग ज्यादातर अपने घरों में सो रहे थे और उन्हें सांस लेने का मौका तक नहीं मिला

    गैस का यह बादल भारी होने के कारण जमीन के करीब ही फैल गया और इसमें ऑक्सीजन की कमी थी जिससे सांस लेना असंभव हो गया यह घटना इतिहास की सबसे दर्दनाक प्राकृतिक आपदाओं में से एक मानी जाती है

    घटना के बाद वैज्ञानिकों ने लेक न्योस के रहस्य को समझने के लिए विस्तृत अध्ययन किया और पाया कि झील के नीचे जमा गैस ही इस त्रासदी का कारण थी इसके बाद इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए उपाय किए गए

    साल 2001 में झील में एक डीगैसिंग सिस्टम लगाया गया जिसमें पाइपों के जरिए धीरे धीरे गैस को बाहर निकाला जाने लगा ताकि दबाव खतरनाक स्तर तक न पहुंचे बाद में 2011 में और पाइप लगाए गए जिससे गैस के सुरक्षित निष्कासन को और बेहतर बनाया गया

    इस तकनीक की मदद से अब झील से कार्बन डाइऑक्साइड नियंत्रित तरीके से बाहर निकल रही है और बड़े विस्फोट का खतरा काफी हद तक कम हो गया है वैज्ञानिक अभी भी अन्य अफ्रीकी झीलों जैसे लेक मोनन पर नजर बनाए हुए हैं जहां ऐसी ही खतरनाक स्थिति बन सकती है जो यह याद दिलाती है कि प्रकृति जितनी सुंदर है उतनी ही अनिश्चित और खतरनाक भी हो सकती है

  • लिथियम से लेकर टाइटेनियम तक भारत की नई खनिज नीति से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

    लिथियम से लेकर टाइटेनियम तक भारत की नई खनिज नीति से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल


    नई दिल्ली:
    देश की आर्थिक उन्नति और भविष्य की ऊर्जा परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है सोमवार से खनिज ब्लॉकों की नीलामी के सातवें चरण की शुरुआत होगी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे द्वारा किया जाएगा। भारत के खान मंत्रालय के अनुसार यह नीलामी देश की खनिज सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए बेहद अहम मानी जा रही है
    आज के समय में जब दुनिया स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रही है तब लिथियम ग्रेफाइट दुर्लभ पृथ्वी तत्व टंगस्टन वैनेडियम और धातुओं जैसे खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है हालांकि इन खनिजों की उपलब्धता सीमित है और कुछ ही क्षेत्रों में केंद्रित होने के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना रहता है।
    46 खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर चुकी है जिसे उद्योग जगत से पॉजिटिव रिएक्शन मिला है इससे यह संकेत मिलता है कि भारत के खनिज क्षेत्र में निवेश और भागीदारी बढ़ रही है सातवें चरण में इस रेट को जारी रखते हुए कई राज्यों में 19 नए ब्लॉक नीलामी के लिए पेश किए जाएंगे जिनमें स्वच्छ ऊर्जा उर्वरक और खनिज उद्योगों के लिए जरूरी खनिज शामिल हैं

    नीलामी प्रक्रिया को ज्यादा उचित और असरदार बनाने के लिए सरकार ने नियमों में भी कई सुधार किए हैं 2025 और 2026 के संशोधनों के तहत प्रदर्शन सुरक्षा अग्रिम भुगतान और अन्य गतिविधियों को सरल बनाया गया है साथ ही बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा गारंटी बॉन्ड की सुविधा भी दी गई है जिससे भारतीयों को आसानी होगी

    यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन दो चरणों वाली उचित नीलामी प्रणाली के तहत आयोजित की जाएगी जिसमें उच्चतम बोली लगाने वाले को खनन का अधिकार मिलेगा इस पहल से न केवल देश की खनिज आपूर्ति मजबूत होगी बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता भी वहीं

    आने वाले समय में यह कदम भारत को स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है

  • डिमोना-अराद मिसाइल स्ट्राइक: ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया

    डिमोना-अराद मिसाइल स्ट्राइक: ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया


    नई दिल्ली । इजरायल के दक्षिणी शहरों डिमोना और अराद में शनिवार को ईरान ने बड़े पैमाने पर मिसाइल हमला किया जिसमें 100 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। घायलों में से 11 लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इजरायली मीडिया के अनुसार ईरान की ओर से ताबड़तोड़ हमलों में इजरायली एयर डिफेंस कम से कम दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में नाकाम रहा।

    हमलों के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायल डिफेंस फोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने जनता को भरोसा दिलाते हुए कहा कि देश अपने दुश्मनों से हर मोर्चे पर लड़ता रहेगा। हमलों में गंभीर रूप से घायल लोगों में डिमोना में हुए हमले के कारण 12 साल का एक लड़का और अराद में 5 साल की एक लड़की शामिल हैं।

    डिमोना इलाके में ईरान ने कई मिसाइल हमले किए जिन्हें न्यूक्लियर रिसर्च फैसिलिटी को निशाना बनाने के लिए किया गया था। यह फैसिलिटी डिमोना से लगभग 10 किलोमीटर और अराद से 30 किलोमीटर दूर स्थित है। ईरानी मीडिया ने बताया कि यह हमला इजरायल के परमाणु केंद्रों पर बदले के तौर पर किया गया है। अमेरिका और इजरायल पहले से ही ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए लगातार दबाव डाल रहे हैं।

    इजरायल के मैगन डेविड एडोम इमरजेंसी सर्विस के अनुसार डिमोना में हमले के दौरान गंभीर रूप से घायल लड़के के अलावा 30 साल की एक महिला को भी कांच के टुकड़ों से मामूली चोटें आईं। शहर में 31 अन्य लोगों को हल्की चोटों का इलाज किया गया जबकि 14 लोगों को एक्यूट एंग्जायटी के लिए मेडिकल सहायता मिली। एमडीए पैरामेडिक कार्मेल कोहेन ने कहा कि हमले के बाद मौके पर अफरा-तफरी मची हुई थी और बहुत ज्यादा नुकसान हुआ।

    बीर्शेबा के सोरोका मेडिकल सेंटर ने जानकारी दी कि हमले में घायल सात लोगों को भर्ती किया गया जिनमें गंभीर रूप से घायल 12 साल का बच्चा भी शामिल था। बच्चों और अन्य गंभीर घायलों का इलाज ट्रॉमा रूम और सर्जिकल इमरजेंसी रूम में किया जा रहा है।

    डिमोना में हुए हमले के कुछ घंटों बाद पास के अराद में भी एक बैलिस्टिक मिसाइल के टकराने से कई इमारतों को नुकसान हुआ। एमडीए की टीम ने अराद में हमले के दौरान 71 लोगों का इलाज किया और उन्हें अस्पताल भेजा। इसमें 10 गंभीर घायल शामिल थे जिनमें 5 साल की बच्ची भी थी। 13 लोगों की हालत स्थिर बताई गई जबकि 48 लोगों को हल्की चोटें आईं। चार और लोगों को अतिरिक्त इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    इस हमले ने इजरायल के न्यूक्लियर शहरों और नागरिक सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न किया है। विशेषज्ञ इसे ईरान की ओर से इजरायल के परमाणु कार्यक्रम और सुरक्षा रणनीति पर बड़ा प्रहार मान रहे हैं। इस घटना ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

  • भारत में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी पर रूस का बड़ा हमला दूतावास की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

    भारत में यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी पर रूस का बड़ा हमला दूतावास की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

    नई दिल्ली: भारत में हाल ही में जापानी नागरिकों के अपराधी मामले में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नया विवाद खड़ा किया गया है, राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 13 मार्च को नई दिल्ली, कोलकाता और कोलकाता के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर छह जापानी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिकों पर मामला दर्ज किया था।

    रूस के विदेश मंत्री की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने आरोप लगाया कि ये जापानी नागरिक सीमा पार कर मिजोरम के रास्ते भारत में बचे हुए थे और उन्होंने स्थानीय हथियार बंद विचारधारा से संपर्क स्थापित किया था और उनका उद्देश्य कथित तौर पर यूरोप में बने साम्राज्य पर हमला करना और इन विचारधाराओं को कम्युनिस्ट असेंबल करना और इलेक्ट्रॉनिक वॉर्सफेयर की ट्रेनिंग देना था।

    रूस ने यह भी दावा किया है कि उत्तर पूर्व भारत में सक्रिय विद्रोही सहयोगियों के साथ संबंध हो सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।

    इस पूरी घटना में रूस ने भारत में यूक्रेनी दूतावास की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। मारिया जखारोवा ने कहा कि दूतावास की प्रतिक्रिया हैरान करने वाली है और वह अपने देश के सहयोगियों को अलग करने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जापान ने भारत के समकक्ष टेररिज्म कानून के उल्लंघन पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी और समर्थित मीडिया पर आरोप लगाया।

    रूस ने इस अंक में वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के नेतृत्व वाले वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के नेतृत्व में इस मुद्दे को रखा है, जिसमें कहा गया है कि दुनिया भर में कम्युनिस्ट पार्टी का केंद्र बनाया जा रहा है और पश्चिमी देशों द्वारा सैन्य समर्थन के कारण स्थिति और जटिल हो रही है।

    रूस का दावा है कि जापान से जुड़े नेटवर्क को मध्य पूर्व, दक्षिण एशिया और अफ्रीका तक सक्रिय किया जा सकता है।

    इस मामले में पूरे भारत में सुरक्षा शैक्षणिक संस्थान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को एक बार फिर से उजागर किया गया है, वहीं यह घटना वैश्विक राजनीति में बढ़ते तनाव और आरोप प्रत्यारोप के नए दौर की ओर भी संकेत दिए गए हैं, इस मामले में इस मामले पर और घोषणा होने की संभावना है, जिससे स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

  • ईरान में युद्ध का कहर: तेहरान सहित देशभर में हमलों की संख्या 80,000 से ऊपर

    ईरान में युद्ध का कहर: तेहरान सहित देशभर में हमलों की संख्या 80,000 से ऊपर


    नई दिल्ली । ईरान के रेड क्रेसेंट सोसायटी के अध्यक्ष पीरहुसैन कोलिवंद ने एक बयान में कहा है कि युद्ध की शुरुआत के बाद से अमेरिका और इजरायल ने ईरान में 80 000 से अधिक नागरिक स्थलों पर हमला किया है। इन हमलों में अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन भी शामिल है। कोलिवंद ने बताया कि इनमें से 20 000 से अधिक हमले तेहरान में हुए हैं जबकि शेष 60 000 अन्य इलाकों में दर्ज किए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि इन हमलों में करीब 18 790 व्यापारिक प्रतिष्ठान 266 मेडिकल सेंटर और 498 स्कूल निशाने पर रहे। हमलों में कम से कम 12 स्वास्थ्यकर्मी मारे गए और 90 से अधिक घायल हुए। युद्ध की शुरुआत से अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है जिनमें बच्चे और 231 महिलाएं भी शामिल हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस संघर्ष में अब तक 1 500 से अधिक लोग मारे गए हैं।

    इसी बीच इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी ने देश के मध्य हवाई क्षेत्र में इजरायल के एफ-16 लड़ाकू विमान को निशाना बनाने का दावा किया है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार तेहरान की सेना ने तेल अवीव के पास बेन गुरियन एयरपोर्ट पर सैन्य विमानों के ईंधन टैंकों पर भी हमला किया।

    ईरान के खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़ागरी ने चेतावनी दी कि यदि संयुक्त अरब अमीरात से दक्षिणी ईरानी द्वीपों पर हमले दोहराए गए तो रास अल-खैमाह पर भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि हर हमला उसी जगह पर जवाब देगा जहां से हमला हुआ।

    28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर तेहरान और ईरान के कई अन्य शहरों पर हमला किया था। इस हमले में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और आम नागरिक मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

    इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक तेल और ऊर्जा बाजार पर भी गहरा प्रभाव डाला है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस पर चिंता व्यक्त की है और युद्ध की तत्काल समाप्ति की आवश्यकता को रेखांकित किया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश अपने नागरिकों और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी तरह की आक्रामक कार्रवाई का जवाब देगा।

    इस संघर्ष ने न केवल क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित किया है बल्कि वैश्विक मानवाधिकार और युद्ध कानून की स्थितियों को भी चुनौती दी है। नागरिक इलाकों स्वास्थ्य केंद्रों और स्कूलों पर हमले ने एक मानवीय संकट को जन्म दिया है जिसे तत्काल अंतरराष्ट्रीय ध्यान की आवश्यकता है।

  • जी7 ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की, कहा ये वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा

    जी7 ने ईरान के हमलों की कड़ी निंदा की, कहा ये वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा


    वॉशिंगटन । जी7 देशों ने ईरान द्वारा पश्चिम एशिया में किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की है और कहा है कि इन हरकतों से न केवल प्रभावित देशों बल्कि वैश्विक सुरक्षा को भी गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। समूह ने साथ ही प्रभावित देशों के प्रति अपना समर्थन भी जाहिर किया।

    जी7 देशों के विदेश मंत्रियों ने यूरोपीय संघ के हाई रिप्रेजेंटेटिव के साथ संयुक्त बयान में कहा कि वे ईरान और उसके प्रॉक्सी के हमलों के खिलाफ अपने साझेदारों का समर्थन करते हैं। बयान में उल्लेख किया गया कि बहरीन कुवैत ओमान कतर सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात जॉर्डन और इराक में आम नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए हमलों की निंदा करते हैं जिसमें ऊर्जा सुविधाएं भी शामिल हैं।

    समूह ने चेतावनी दी कि ईरानी गतिविधियां क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। उन्होंने तेहरान से अपील की कि अपनी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकें। जी7 ने खासकर होर्मुज स्ट्रेट और उससे जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में सुरक्षा सुनिश्चित करने की अहमियत पर जोर दिया।

    बयान में कहा गया कि वैश्विक सप्लाई चेन और ऊर्जा मार्केट की स्थिरता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। जी7 ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्यों द्वारा 11 मार्च को किए गए स्टॉक रिलीज फैसले का हवाला देते हुए ग्लोबल ऊर्जा सप्लाई की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई।

    इसके अलावा समूह ने दोहराया कि ईरान को कभी भी न्यूक्लियर हथियार हासिल नहीं करने चाहिए। उन्होंने ईरान से बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम रोकने अस्थिर गतिविधियों को खत्म करने और अपने ही नागरिकों के खिलाफ हिंसा बंद करने की अपील की।

    जी7 ने प्रभावित देशों के हमलों से खुद की रक्षा करने के अधिकार का समर्थन करते हुए कहा कि ये देश अपने नागरिकों और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए उचित कदम उठा सकते हैं। समूह ने इराक में ईरान और उसकी मिलिशिया द्वारा डिप्लोमैटिक सुविधाओं और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों की भी निंदा की खासकर अमेरिका और काउंटर आईएसआईएस कोएलिशन फोर्स के खिलाफ। बयान में निष्कर्ष निकाला गया कि जी7 क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी और आवश्यक क़दम उठाने के लिए तैयार हैं।

  • ट्रेन की टक्कर से बस पर तबाही, 12 मृतक और दर्जनों घायल, रेलवे जांच में जुटी

    ट्रेन की टक्कर से बस पर तबाही, 12 मृतक और दर्जनों घायल, रेलवे जांच में जुटी


    नई दिल्ली । बांग्लादेश के कोमिला में रविवार सुबह एक दर्दनाक रेल हादसा हुआ। पडुआ बाजार लेवल क्रॉसिंग पर मेल ट्रेन और बस की भीषण टक्कर में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। घटना इतनी भयानक थी कि बस के परखच्चे उड़ गए और कई यात्रियों की चीखें सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे।

    कोमिला सदर साउथ पुलिस स्टेशन के ईपीजेड चौकी के सब इंस्पेक्टर सैफुल इस्लाम ने बताया कि मरने वालों में सात पुरुष, तीन महिलाएं और दो बच्चे शामिल हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि इलाज के दौरान अन्य मृतकों की संख्या बढ़कर 12 हो गई।

    स्थानीय सूत्रों और पुलिस के अनुसार, ट्रेन मामून स्पेशल बस को जंगल्या कचुआ क्षेत्र में लगभग आधा किलोमीटर तक घसीटती हुई ले गई। घटना के समय क्रॉसिंग पर कोई गेटमैन मौजूद नहीं था। घटना के बाद फायर सर्विस, हाईवे पुलिस और स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुँचे और घायल यात्रियों को अस्पताल ले गए।

    बांग्लादेशी मीडिया के अनुसार, हादसे वाली बस चपैनवाबगंज से लक्ष्मीपुर जा रही थी। ट्रेन के इंजन में बस उलझ गई और ट्रेन रुकने से पहले लगभग एक किलोमीटर तक बस घिसटती चली गई। इसके कारण बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। अस्पताल सूत्रों के मुताबिक 18 घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जिनमें से आठ अभी भी भर्ती हैं।

    रेलवे प्रशासन ने घटना की जांच के लिए दो कमेटियां गठित की हैं, एक डिविजनल और एक रीजनल। इसके अलावा, पडुआर बाजार क्रॉसिंग के दो गेटमैन मेहदी हसन और हेलाल उद्दीन को सस्पेंड कर दिया गया है। हादसे के कारण ढाका चटगांव रेल मार्ग पर ट्रेन सेवा तीन घंटे तक बाधित रही। बांग्लादेश रेलवे के अधिकारियों ने कहा कि दुर्घटना का कारण और सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच की जा रही है। घटना ने पूरे इलाके में चिंता और सदमे का माहौल पैदा कर दिया है।

  • स्टारडम से गिरावट तक अरमान कोहली का संघर्ष अक्षय-सनी भी नहीं बचा सके डूबता करियर

    स्टारडम से गिरावट तक अरमान कोहली का संघर्ष अक्षय-सनी भी नहीं बचा सके डूबता करियर


    नई दिल्ली:
    बॉलीवुड में कई ऐसे सितारे रहे हैं जिनकी किस्मत ने बड़ा साथ नहीं दिया और अरमान कोहली का नाम भी उन्हीं में शामिल है एक समय था जब उनके पिता राजकुमार कोहली ने अपने बेटे के करियर को संवारने के लिए अपनी पूरी ताकत और पूंजी दांव पर लगा दी थी इसके बावजूद अरमान कोहली वह मुकाम हासिल नहीं कर सके जिसकी उनसे उम्मीद की जा रही थी

    वर्ष 2002 में रिलीज हुई फिल्म जानी दुश्मन: एक अनोखी कहानी में अक्षय कुमार सनी देओल सुनील शेट्टी और मनीषा कोइराला जैसे बड़े सितारों के बीच भी फिल्म का मुख्य केंद्र अरमान कोहली ही थे उनके पिता राजकुमार कोहली ने इस फिल्म के जरिए अपने बेटे के डूबते करियर को संवारने की पूरी कोशिश की लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई हालांकि बाद में यह टीवी पर जरूर लोकप्रिय हो गई

    अरमान कोहली का जन्म एक फिल्मी परिवार में हुआ था जहां उनके पिता 70 और 80 के दशक के मशहूर निर्माता निर्देशक थे और उनकी मां निशि कोहली भी अपने समय की एक सफल अभिनेत्री रही हैं ऐसे माहौल में उनका बचपन फिल्मों और बड़े सितारों के बीच बीता जिससे उन्हें इंडस्ट्री में शुरुआत से ही कई मौके मिले

    लेकिन करियर की शुरुआत से ही उनके फैसलों ने उनके भविष्य पर गहरा असर डाला 1992 में उन्हें दीवाना फिल्म में दिव्या भारती के साथ काम करने का मौका मिला लेकिन सेट पर उनके व्यवहार के कारण उन्हें इस फिल्म से बाहर कर दिया गया बाद में यह फिल्म शाहरुख खान के लिए एक बड़ी सफलता साबित हुई और उन्होंने रातोंरात सुपरस्टार का दर्जा हासिल कर लिया

    इसके बाद बाजीगर और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स भी उनके हाथ से निकल गए क्योंकि उन्होंने उन भूमिकाओं को स्वीकार करने से मना कर दिया जो उन्हें लीड रोल के बराबर नहीं लगती थीं इन फैसलों का सीधा फायदा अन्य कलाकारों को मिला और वे फिल्में इतिहास बन गईं

    इसी दौरान उनके पिता ने लगातार उन्हें लॉन्च करने की कोशिश की लेकिन विरोधी अनाम और जुआरी जैसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं हालांकि फिल्म कहर में सनी देओल और सुनील शेट्टी जैसे सितारों के साथ काम करने के बाद भी उन्हें बड़ा ब्रेक नहीं मिला

    2015 में सलमान खान की सिफारिश पर उन्हें प्रेम रतन धन पायो में एक नकारात्मक भूमिका मिली और फिल्म सफल भी रही लेकिन यह उनके करियर को नई ऊंचाई नहीं दे सकी

    2013 में रियलिटी शो बिग बॉस 7 ने उन्हें एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया लेकिन इस बार वजह नकारात्मक थी शो में उनके गुस्से और विवादों ने उनकी छवि को काफी नुकसान पहुंचाया एक घटना के दौरान सोफिया हयात के साथ विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस तक मामला पहुंच गया और उन्हें राष्ट्रीय टेलीविजन पर गिरफ्तार भी किया गया

    यह घटना उनके करियर के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई और उनकी छवि एक गुस्सैल और अस्थिर व्यक्ति के रूप में स्थापित हो गई आज अरमान कोहली भले ही एक्टिंग से दूर हैं लेकिन वह अपने नए प्रोजेक्ट्स और निर्देशन की योजना के साथ इंडस्ट्री में वापसी की कोशिश में जुटे हुए हैं