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  • Index Option में पैसा लगाने से पहले जान लें पूरा तरीका CE और PE कैसे काम करते हैं समझें आसान भाषा में

    Index Option में पैसा लगाने से पहले जान लें पूरा तरीका CE और PE कैसे काम करते हैं समझें आसान भाषा में


    नई दिल्ली। Index Option Trading शेयर बाजार में ट्रेडिंग का एक ऐसा तरीका है जिसमें किसी एक कंपनी के शेयर के बजाय पूरे इंडेक्स के उतार चढ़ाव पर ट्रेड किया जाता है। Nifty और Bank Nifty जैसे इंडेक्स के Options में ट्रेड करने वाले लोग बाजार की दिशा के अनुसार Call Option या Put Option खरीदने या बेचने की रणनीति अपनाते हैं। हालांकि Index Option में कम समय में बड़ा मुनाफा होने की संभावना के साथ नुकसान का जोखिम भी काफी अधिक होता है। इसलिए शुरुआत करने से पहले इसके बेसिक नियमों को समझना जरूरी है।

    Index Option में मुख्य रूप से दो तरह के कॉन्ट्रैक्ट होते हैं जिन्हें Call और Put कहा जाता है। Call Option यानी CE का इस्तेमाल आम तौर पर तब किया जाता है जब ट्रेडर को लगता है कि इंडेक्स का स्तर ऊपर जा सकता है। वहीं Put Option यानी PE का इस्तेमाल तब किया जाता है जब बाजार में गिरावट की संभावना दिखाई देती है। Option खरीदने वाला ट्रेडर इसके लिए Premium चुकाता है। यह Premium बाजार की स्थिति और कई अन्य कारकों के आधार पर लगातार बदलता रहता है।

    Index Option में ट्रेड शुरू करने के लिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि किस इंडेक्स में ट्रेड करना है। इसके बाद Expiry Date और Strike Price को देखा जाता है। Strike Price वह स्तर होता है जिस पर Option Contract आधारित होता है। Expiry वह तारीख होती है जिस दिन उस Contract की अवधि समाप्त होती है। अलग अलग Index Options में Expiry से जुड़े नियम और कॉन्ट्रैक्ट की उपलब्धता अलग हो सकती है इसलिए ट्रेड करने से पहले एक्सचेंज की मौजूदा जानकारी देखना जरूरी है।

    मान लीजिए किसी ट्रेडर को लगता है कि इंडेक्स ऊपर जा सकता है। वह अपनी रणनीति और जोखिम क्षमता के अनुसार Call Option खरीदने पर विचार कर सकता है। अगर इंडेक्स की दिशा उसके अनुमान के अनुसार जाती है तो Option Premium बढ़ सकता है। इसी तरह बाजार में गिरावट की संभावना पर Put Option पर विचार किया जाता है। लेकिन केवल इंडेक्स के ऊपर या नीचे जाने का अनुमान सही होना पर्याप्त नहीं है क्योंकि Premium पर Time Decay और Implied Volatility जैसे कई कारकों का भी असर पड़ता है।

    Index Option में सबसे महत्वपूर्ण बात Risk Management है। शुरुआत में पूरी पूंजी को एक ही ट्रेड में लगाना जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए ट्रेड लेने से पहले यह तय करना चाहिए कि अधिकतम कितना नुकसान स्वीकार किया जा सकता है। Stop Loss का इस्तेमाल भी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। बिना योजना के बार बार ट्रेड करने या नुकसान की भरपाई के लिए बड़ी रकम लगाने से जोखिम तेजी से बढ़ सकता है।

    Options Trading में Leverage के कारण छोटी पूंजी से बड़ी Contract Value पर एक्सपोजर मिल सकता है। यही वजह है कि मुनाफे के साथ नुकसान भी तेजी से बढ़ सकता है। Option Selling में जोखिम और भी अलग तरीके का हो सकता है और कुछ परिस्थितियों में नुकसान काफी बड़ा हो सकता है। इसलिए शुरुआती ट्रेडर को किसी भी रणनीति को वास्तविक पैसे से इस्तेमाल करने से पहले उसके जोखिम और संभावित नुकसान को अच्छी तरह समझना चाहिए।

    Index Option में ट्रेड करने से पहले बाजार का ट्रेंड वॉल्यूम Volatility Support और Resistance जैसे संकेतकों को समझना उपयोगी हो सकता है। इसके साथ ही किसी एक संकेत के आधार पर निर्णय लेने के बजाय पूरी ट्रेडिंग योजना बनाना बेहतर होता है। सबसे जरूरी बात यह है कि Options को आसान कमाई का जरिया न समझें। बाजार में कोई भी रणनीति निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं देती। सीखने के लिए पहले Paper Trading या छोटे स्तर से अभ्यास करना और जरूरत पड़ने पर SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार से सलाह लेना अधिक सुरक्षित तरीका हो सकता है।

  • UN में पाकिस्तानी पत्रकार ने आतंकवाद पर पूछा सवाल, जयशंकर बोले- ‘एक आतंकी देश मुझसे ये पूछ रहा’

    UN में पाकिस्तानी पत्रकार ने आतंकवाद पर पूछा सवाल, जयशंकर बोले- ‘एक आतंकी देश मुझसे ये पूछ रहा’


    नई दिल्ली। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान एक पाकिस्तानी पत्रकार ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए सवाल किया। जयशंकर ने जवाब देते हुए कहा, “एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है। कम ऑन।” इसके बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए वहां से चले गए। घटना के दौरान भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने भी पत्रकार से कहा कि उसे उसका जवाब साफ तौर पर मिल चुका है।

    पत्रकार ने बीच में टोककर पूछा- आतंकवाद कब बंद करेंगे?

    जयशंकर न्यूयॉर्क में भारत और लाइबेरिया की ओर से शुरू किए गए ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स’ से जुड़े प्रेस इंटरैक्शन में बोल रहे थे। उनके साथ लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेइसोलो न्यांती भी मौजूद थीं।

    प्रेस बातचीत के बाद एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर को बीच में टोकते हुए पूछा कि भारत सरकार पाकिस्तान में आतंकवाद को प्रायोजित करना कब बंद करेगी। उसने भारत पर ‘प्रॉक्सी टेररिज्म’ को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए सवाल किया।

    जयशंकर ने बिना लंबी प्रतिक्रिया दिए कहा, “एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है। कम ऑन।” इसके बाद वह मुस्कुराए और वहां से चले गए।

    भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वतनेनी ने इसके बाद पत्रकार से कहा, “आपने अपना जवाब सुन लिया है। आपने अपना जवाब साफ तौर पर सुन लिया है।” इस घटना का वीडियो भी सामने आया है।

    25 देशों के साथ समुद्री सुरक्षा पर पहल

    यह सवाल-जवाब उस प्रेस इंटरैक्शन के दौरान हुआ, जिसमें जयशंकर और लाइबेरिया की विदेश मंत्री समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग की सुरक्षा को लेकर नई पहल की जानकारी दे रहे थे। भारत और लाइबेरिया ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के इतर ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑन सेफ्टी एंड सिक्योरिटी ऑफ शिपिंग एंड सीफेयरर्स’ की शुरुआत की है।

    जयशंकर ने कहा कि समुद्र में कमर्शियल जहाजों और नाविकों पर होने वाले हमलों को किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों को रुकना ही चाहिए।

    विदेश मंत्री के मुताबिक, भारत समुद्री कर्मचारियों का एक प्रमुख सोर्स देश है, जबकि लाइबेरिया के पास टनेज के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग रजिस्ट्रियों में से एक है। दोनों देशों ने समान हितों वाले अन्य देशों और प्रमुख जहाज मालिकों को भी इस पहल से जोड़ने की कोशिश की है।

    ‘हमलों को रुकना ही चाहिए’

    जयशंकर ने कहा कि हाल के महीनों में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, रेड सी और ब्लैक सी समेत अलग-अलग समुद्री क्षेत्रों में कमर्शियल शिपिंग और मर्चेंट मैरिनर्स पर हमले हुए हैं। उनके मुताबिक, इन घटनाओं से समुद्री व्यापार प्रभावित होता है और लोगों की जान जाती है।

    उन्होंने कहा कि इस तरह की हिंसा और जान-माल के नुकसान का कोई औचित्य नहीं हो सकता। भारत और लाइबेरिया की पहल का उद्देश्य समुद्री कर्मचारियों और कमर्शियल शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर दुनिया का ध्यान बढ़ाना है।

    जयशंकर के मुताबिक, दुनिया के मर्चेंट फ्लीट को करीब 20 लाख समुद्री कर्मचारी चलाते हैं। उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में काम करना पड़ता है और हाल के घटनाक्रम ने उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है।

    पीएम मोदी भी उठा चुके हैं नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

    नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भारत की ओर से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी उठाया जाता रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स बैठक के दौरान समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उठाया है।

    जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर बयानबाजी भी चर्चा में है।

  • UN में पाकिस्तान की हार को जीत बता रहे थे शहबाज, भारतीय दूत की छूट गई हंसी, वीडियो वायरल

    UN में पाकिस्तान की हार को जीत बता रहे थे शहबाज, भारतीय दूत की छूट गई हंसी, वीडियो वायरल


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में 2025 के भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष का जिक्र करते हुए पाकिस्तान की ओर से इसे अपनी सफलता के तौर पर पेश किया। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संघर्ष रोकने में कथित ‘समय पर हस्तक्षेप’ के लिए धन्यवाद भी दिया। शहबाज के भाषण के दौरान वहां मौजूद भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास का रिएक्शन कैमरे में कैद हो गया और उनका वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

    शहबाज ने ट्रंप को दिया ‘क्रेडिट’

    शुक्रवार को UNGA में अपने करीब 23 मिनट के संबोधन में शहबाज शरीफ ने मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘समय पर हस्तक्षेप’ से दक्षिण एशिया में करोड़ों लोगों की जान बची।

    शरीफ ने ट्रंप के ‘दृढ़तापूर्ण और दूरदर्शी नेतृत्व’ के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने दावा किया कि अगर ट्रंप उस समय हस्तक्षेप नहीं करते तो हालात और गंभीर हो सकते थे।

    हालांकि, भारत लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि मई 2025 में दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए किसी तीसरे पक्ष ने मध्यस्थता की थी। भारत का कहना है कि संघर्ष विराम को लेकर सहमति दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क के बाद बनी थी।

    भारतीय राजनयिक का रिएक्शन कैमरे में कैद

    शहबाज शरीफ जब 2025 के संघर्ष को लेकर पाकिस्तान का पक्ष रख रहे थे, उसी दौरान सभा में मौजूद भारतीय राजनयिक आर. श्रीनिवास की प्रतिक्रिया कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में उनका हंसना नजर आया।

    शहबाज ने अपने भाषण में कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया को दोबारा 2025 जैसी स्थिति में जाने से रोकने के लिए कश्मीर मुद्दे का ‘न्यायसंगत और निष्पक्ष समाधान’ जरूरी है।

    भारत संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मंचों पर पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी दावों को खारिज करता रहा है। भारत का कहना है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है।

    सिंधु जल संधि का भी उठाया मुद्दा

    शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में सिंधु जल संधि का भी जिक्र किया। उन्होंने भारत के इस फैसले पर आपत्ति जताई कि 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को ‘अबेयांस’ में रखने का फैसला किया था।

    भारत का रुख है कि सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की कार्रवाई से जुड़े सवालों के समाधान तक संधि स्थगित रहेगी। वहीं पाकिस्तान इस फैसले को चुनौती देता रहा है।

    शहबाज ने UNGA में भारत की ओर से सिंधु नदी के पानी को लेकर किसी भी कदम को गंभीर परिणामों से जोड़ते हुए चेतावनी भी दी।

    कश्मीर पर फिर अंतरराष्ट्रीय मंच से बात

    पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कश्मीर मुद्दे को भी अपने भाषण का हिस्सा बनाया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से कश्मीर पर अपनी स्थिति के अनुरूप कार्रवाई की मांग दोहराई और कहा कि पाकिस्तान कश्मीरियों को राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन देता रहेगा।

    भारत का रुख इसके उलट है। नई दिल्ली कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की पाकिस्तान की कोशिशों को खारिज करता रहा है और इसे भारत-पाकिस्तान के बीच का विषय मानता है।

    आसिम मुनीर की भी कई बार तारीफ

    शहबाज शरीफ ने अपने भाषण में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का भी कई बार उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कूटनीति के लिए रास्ता बनाने में मुनीर के लगातार प्रयासों की भूमिका रही।

    2025 के संघर्ष का जिक्र करते हुए शरीफ ने पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई की भी प्रशंसा की और इसे अपनी ओर से प्रभावी जवाब के तौर पर पेश किया।

    भारत देगा ‘राइट टू रिप्लाई’

    UNGA में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के भाषण के बाद भारत की ओर से ‘राइट टू रिप्लाई’ के तहत जवाब दिए जाने की प्रक्रिया भी तय है। भारत आमतौर पर पाकिस्तान के नेता के संबोधन के बाद अपने स्थायी मिशन के अपेक्षाकृत युवा राजनयिक को जवाब देने के लिए भेजता है।

    इस बार भी पाकिस्तान के कश्मीर, आतंकवाद और सिंधु जल संधि से जुड़े बयानों पर भारत की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

  • ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी, शनिवार की डेडलाइन के बाद तय होगा आंदोलन का अगला कदम

    ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ी कॉकरोच जनता पार्टी, शनिवार की डेडलाइन के बाद तय होगा आंदोलन का अगला कदम


    नई दिल्ली। SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उठ रहे सवालों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी ने एक बार फिर अपना अल्टिमेटम दोहरा दिया है। पार्टी ने कहा है कि अगर शनिवार तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय में दी गई है जब चुनाव आयोग के भीतर ही मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

    कॉकरोच जनता पार्टी लंबे समय से SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रारूप मतदाता सूचियों से बाहर किए गए हैं। संगठन ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तत्काल इस्तीफे की मांग के साथ SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग रखी है। पार्टी के मुताबिक अगर शनिवार तक उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन से आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर शुरू किया जाएगा।

    पार्टी ने सोशल मीडिया पर जंतर मंतर पर जुट रहे युवाओं का वीडियो साझा करते हुए अपने समर्थकों से आंदोलन की तैयारी करने को कहा है। इससे पहले संगठन ने CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टिमेटम दिया था लेकिन बाद में आंदोलन की तारीख बदलकर 2 अक्टूबर कर दी गई। पार्टी के संयोजक अभिजीत दीपके और सह संयोजक सौरव दास तथा आशुतोष रांका ने इलेक्शन कमीशन ठीक करो अभियान के तहत अपनी मांगें सामने रखी हैं।

    पार्टी का दावा है कि SIR प्रक्रिया के कारण 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक वैध नाम बाहर हो गए हैं। संगठन ने चुनाव आयोग से मांग की है कि वह यह स्पष्ट करे कि मतदाता सूची से हटाए गए प्रत्येक नाम के संबंध में कानूनी और पारदर्शी प्रक्रिया का पालन किया गया है या नहीं। साथ ही पार्टी ने नाम हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और सत्यापन पूरा होने तक जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग की है।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने यह भी मांग रखी है कि SIR से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुप्रीम कोर्ट या किसी स्वतंत्र न्यायिक समिति को सौंपे जाएं ताकि पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा हो सके। इसके अलावा पार्टी मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को निरस्त कर अधिक पारदर्शी नियुक्ति व्यवस्था बनाने की मांग कर रही है।

    इसी बीच चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई थी। दूसरी ओर चिराग पासवान ने भी कहा कि यदि चुनाव आयोग पर आरोप लगाए जा रहे हैं तो मुख्य चुनाव आयुक्त को सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को लेकर कई शहरों में प्रदर्शन किया है। ऐसे में शनिवार की समयसीमा और 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन के कारण SIR विवाद आने वाले दिनों में और चर्चा में रह सकता है।

  • क्या शनिवार को बाल कटवाने से बचना चाहिए जानिए धार्मिक मान्यता से लेकर इसके पीछे की वजह तक पूरी बात

    क्या शनिवार को बाल कटवाने से बचना चाहिए जानिए धार्मिक मान्यता से लेकर इसके पीछे की वजह तक पूरी बात


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सप्ताह के अलग अलग दिनों को लेकर कई तरह की धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हीं में से एक मान्यता शनिवार को बाल और नाखून नहीं काटने से जुड़ी है। कई परिवारों में आज भी शनिवार के दिन बाल कटवाने से बचा जाता है। इसके पीछे मुख्य रूप से शनि देव से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को माना जाता है। हालांकि यह परंपरा धार्मिक विश्वासों पर आधारित है और इसे वैज्ञानिक नियम नहीं माना जाता है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित माना जाता है। शनि देव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है। मान्यता है कि व्यक्ति को अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त होता है। इसी वजह से शनिवार को कई ऐसे कामों से बचने की परंपरा बनी जिनमें शरीर से किसी चीज को काटना या हटाना शामिल है। बाल काटना भी इसी परंपरा से जोड़ा गया है।

    पुरानी मान्यताओं में बालों को शरीर का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता था। पहले के समय में लोग अपनी दिनचर्या और कामकाज को भी सप्ताह के दिनों के अनुसार व्यवस्थित करते थे। कुछ विशेष दिनों को पूजा पाठ और धार्मिक गतिविधियों के लिए रखा जाता था। शनिवार को शनि देव की आराधना और सेवा का दिन माना गया इसलिए इस दिन बाल कटवाने से बचने की परंपरा धीरे धीरे कई परिवारों में स्थापित हो गई।

    एक अन्य धार्मिक मान्यता शनि देव और व्यक्ति के कर्मों से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि शनिवार के दिन व्यक्ति को संयम रखना चाहिए और ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिसे परंपरा में अनावश्यक माना गया हो। बाल कटवाने से बचना भी इसी संयम का हिस्सा माना जाता है। कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में कहा जाता है कि शनिवार को बाल कटवाने से शनि से संबंधित नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं। हालांकि यह ज्योतिषीय विश्वास है और इसका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

    शनिवार के दिन बाल न कटवाने के साथ कई लोग नाखून काटने से भी बचते हैं। धार्मिक दृष्टि से इसे भी उसी परंपरा का हिस्सा माना जाता है। कुछ परिवारों में मंगलवार और शनिवार दोनों दिन बाल कटवाने से बचने की परंपरा होती है जबकि कुछ लोग केवल शनिवार को ऐसा करते हैं। अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसके नियम अलग हो सकते हैं।

    शनिवार को बाल कटवाने से जुड़ी एक व्यावहारिक वजह भी बताई जाती है। पुराने समय में आज की तरह हर दिन नाई की दुकानें आसानी से उपलब्ध नहीं होती थीं। लोगों के लिए सप्ताह में कुछ निश्चित दिन ही बाल कटवाने के लिए सुविधाजनक होते थे। धार्मिक परंपराओं के साथ ऐसी सामाजिक और व्यावहारिक व्यवस्थाओं ने भी अलग अलग दिनों से जुड़े नियमों को मजबूत किया होगा।

    शनिवार के दिन शनि देव की पूजा करने वाले लोग सरसों के तेल का दीपक जलाते हैं और काले तिल का दान करते हैं। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और सेवा करना भी इस दिन की धार्मिक परंपराओं में शामिल है। मान्यता के अनुसार शनिवार को संयम और सदाचार के साथ दिन बिताना शुभ माना जाता है।

    इस तरह शनिवार को बाल न कटवाने की परंपरा मुख्य रूप से धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं से जुड़ी हुई है। इसे मानना या न मानना व्यक्ति की अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से शनिवार को बाल कटवाने पर किसी विशेष नुकसान का प्रमाण नहीं है। इसलिए इस परंपरा को धार्मिक विश्वास के रूप में समझना उचित है।

  • UP: आठ बार विधायक रहे सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का निधन, अखिलेश-योगी ने जताया शोक

    UP: आठ बार विधायक रहे सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का निधन, अखिलेश-योगी ने जताया शोक


    नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ के SGPGI में निधन हो गया। 73 वर्षीय चौधरी लंबे समय से हृदय और किडनी संबंधी बीमारियों से जूझ रहे थे और रात करीब 9 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन पर सपा समेत उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में शोक जताया गया।

    सपा के मीडिया प्रभारी सुशील पांडे के मुताबिक, राम गोविंद चौधरी को करीब दो सप्ताह पहले SGPGI में भर्ती कराया गया था। इससे पहले लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उनकी हार्ट सर्जरी हुई थी। मैक्स अस्पताल में भी उनका लंबे समय तक इलाज चला था और डायलिसिस की गई थी।

    आठ बार विधायक, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे

    राम गोविंद चौधरी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे। वह आठ बार विधायक चुने गए और मार्च 2017 से मार्च 2022 तक उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने मुलायम सिंह यादव की सरकार में दो अलग-अलग कार्यकाल में मंत्री के तौर पर काम किया। इसके अलावा 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव सरकार में भी मंत्री रहे।

    उनके निधन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना समेत कई नेताओं ने शोक जताया।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चौधरी के निधन को अत्यंत दुखद बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी और शोकाकुल परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति मिलने की प्रार्थना की।

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष के निधन पर दुख जताया। वहीं विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि राम गोविंद चौधरी के निधन से प्रदेश ने एक अनुभवी राजनेता और समर्पित जनप्रतिनिधि खो दिया है।

    छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

    राम गोविंद चौधरी का जन्म 9 जुलाई 1953 को बलिया जिले के सिकंदरपुर क्षेत्र के एक गांव में हुआ था। तीन भाइयों में सबसे बड़े चौधरी ने शुरुआती पढ़ाई गांव और सिकंदरपुर में की। इसके बाद उन्होंने बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज में BSc में दाखिला लिया।

    छात्र समस्याओं को लेकर आंदोलनों में सक्रिय रहने के कारण उन्हें कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने श्री मुरली मनोहर टाउन पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में दाखिला लिया और यहीं से छात्र राजनीति में उनकी सक्रियता बढ़ी।

    1972 में वह टाउन कॉलेज छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए, जबकि 1974 में छात्रसंघ के अध्यक्ष बने।

    आपातकाल में जेल गए, जेपी आंदोलन से जुड़े

    आपातकाल के दौरान राम गोविंद चौधरी लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए चलाए गए आंदोलन में सक्रिय रहे। वह जिले की ‘छात्र युवा वाहिनी’ के सह-संयोजक भी बने। इस दौरान उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और बलिया तथा बाराबंकी की जेलों में रखा गया।

    उन्होंने ‘संपूर्ण क्रांति’ के प्रणेता लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ काम किया। इसके साथ ही वह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के करीबी सहयोगियों में भी शामिल रहे।

    मुलायम और अखिलेश सरकार में मंत्री रहे

    राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक जीवन समाजवादी आंदोलन से दशकों तक जुड़ा रहा। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर में कमजोर और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

    मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व वाली सरकार में उन्होंने दो अलग-अलग कार्यकाल में मंत्री की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2012 से 2017 के बीच अखिलेश यादव सरकार में भी वह मंत्री रहे। वर्ष 2017 में उन्हें विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनाया गया और मार्च 2022 तक उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली।

    राम गोविंद चौधरी के परिवार में उनका बेटा और अन्य परिजन हैं। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त किया।

  • शनिवार के दिन ऐसे करें शनि देव की पूजा व्रत से जुड़े नियम और विधि जानकर मिलेगा मन को संतोष

    शनिवार के दिन ऐसे करें शनि देव की पूजा व्रत से जुड़े नियम और विधि जानकर मिलेगा मन को संतोष


    नई दिल्ली। शनिवार का दिन भगवान शनि देव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार को व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को अनुशासन के साथ अपने कर्मों पर ध्यान देने की प्रेरणा मिलती है। शनि देव को न्याय का देवता माना जाता है इसलिए इस दिन पूजा के साथ अच्छे आचरण और जरूरतमंद लोगों की सहायता को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। अगर आप शनिवार का व्रत करना चाहते हैं तो पूजा विधि और व्रत से जुड़े नियमों की जानकारी होना जरूरी है।

    शनिवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ कपड़े पहनकर पूजा स्थल की सफाई करें और भगवान शनि देव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। पूजा के दौरान शनि देव की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। दीपक को श्रद्धा के साथ जलाने के बाद शनि देव की पूजा करें और उन्हें तेल तथा काले तिल अर्पित किए जा सकते हैं।

    पूजा के दौरान शनि देव के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शनि देव के मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके साथ ही हनुमान जी की पूजा करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि हनुमान जी की भक्ति करने से मन में भय कम होता है और व्यक्ति को सकारात्मकता मिलती है। शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना भी कई लोग शुभ मानते हैं।

    शनिवार व्रत के दौरान भोजन को लेकर भी अलग अलग धार्मिक परंपराएं हैं। कुछ लोग पूरे दिन निर्जल व्रत रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। व्रत रखने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। फलाहार करने वाले लोग फल दूध और व्रत में खाए जाने वाले सात्विक भोजन का सेवन कर सकते हैं। व्रत का उद्देश्य केवल भोजन का त्याग करना नहीं बल्कि मन और व्यवहार में संयम रखना भी माना जाता है।

    शनिवार के दिन जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। काले तिल काला वस्त्र सरसों का तेल और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने की परंपरा कई स्थानों पर है। किसी गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना भी पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दान करते समय दिखावे से बचना चाहिए और श्रद्धा को महत्व देना चाहिए।

    शनिवार को किसी के साथ गलत व्यवहार करने से बचना चाहिए। क्रोध विवाद और अपशब्दों से दूरी बनाना बेहतर माना जाता है। पूजा के साथ अपने कर्मों में ईमानदारी रखना भी इस दिन के संदेश से जोड़ा जाता है। शाम के समय दोबारा दीपक जलाकर शनि देव का स्मरण किया जा सकता है। इसके बाद अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार व्रत का पारण किया जाता है।

    शनिवार व्रत से जुड़ी मान्यताएं अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती हैं। इसलिए पूजा करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा और स्थानीय धार्मिक विधि का भी ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में विश्वास रखने वाले लोग शनिवार को पूजा के साथ सेवा दान और संयम को जीवन में अपनाकर इस दिन को विशेष बना सकते हैं।

  • अक्टूबर से 122 दिन शनि बदलेंगे नक्षत्र, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्‍मत

    अक्टूबर से 122 दिन शनि बदलेंगे नक्षत्र, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्‍मत


    नई दिल्ली। ज्योतिषीय गणना के अनुसार 9 अक्टूबर 2026 को रात 7 बजकर 28 मिनट पर शनि नक्षत्र परिवर्तन करने जा रहे हैं। शनि के उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश के बाद करीब 122 दिनों तक इसका प्रभाव रहने की मान्यता है। ज्योतिष के अनुसार इस दौरान वृषभ, मिथुन, कन्या, मकर और तुला राशि के जातकों के करियर और आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव के योग बन सकते हैं।

    ज्योतिष में शनि को कर्म, अनुशासन और मेहनत से जुड़ा ग्रह माना जाता है। शनि की चाल में होने वाले बदलाव का प्रभाव लंबे समय तक रहने की मान्यता है। इस बार शनि का नक्षत्र परिवर्तन इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि उत्तर भाद्रपद को शनि का अपना नक्षत्र माना जाता है।

    9 अक्टूबर को क्या बदलेगा?
    फिलहाल शनि रेवती नक्षत्र के प्रथम पद में गोचर कर रहे हैं। 9 अक्टूबर को रात 7 बजकर 28 मिनट पर वे उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। उपलब्ध ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह परिवर्तन करीब 122 दिनों की अवधि से जुड़ा है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक इस दौरान शनि का प्रभाव कामकाज, आर्थिक स्थिति और जिम्मेदारियों से जुड़े मामलों में अलग-अलग रूप में देखने को मिल सकता है।

    शनि को मेहनत और कर्म के आधार पर परिणाम देने वाला ग्रह माना जाता है। इसलिए इस अवधि में जल्दबाजी के बजाय नियमित मेहनत और अनुशासन पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

    वृषभ: नौकरी और आमदनी में बदलाव की संभावना
    वृषभ राशि के जातकों के लिए शनि का यह नक्षत्र परिवर्तन नौकरी और आर्थिक मामलों में बदलाव का संकेत माना जा रहा है। कामकाज में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ आमदनी में सुधार की संभावना भी बताई गई है।

    जो लोग लंबे समय से किसी नए अवसर का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें अपने प्रयास जारी रखने चाहिए। नौकरीपेशा लोगों के लिए काम में बदलाव या नई भूमिका सामने आने की ज्योतिषीय मान्यता है।

    मिथुन: आय के नए रास्ते बन सकते हैं
    मिथुन राशि वालों के लिए 9 अक्टूबर के बाद का समय आर्थिक मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आय के नए साधन बनने या पहले से चल रहे काम से लाभ मिलने की संभावना बताई गई है।

    नौकरी और कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय अनुकूल रहने की मान्यता है। हालांकि आर्थिक फैसले लेते समय बजट और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी रहेगा।

    कन्या: प्रमोशन या नई जिम्मेदारी के योग
    कन्या राशि के जातकों के करियर में बदलाव देखने को मिल सकता है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना बताई गई है। कुछ लोगों को बेहतर नौकरी का प्रस्ताव भी मिल सकता है।

    कारोबार करने वालों के लिए भी नए अवसर सामने आने की ज्योतिषीय मान्यता है। इस दौरान किसी पुराने प्रोजेक्ट या लंबे समय से रुके हुए काम से फायदा मिलने की संभावना बन सकती है।

    मकर: प्रॉपर्टी और आर्थिक लाभ के अवसर
    मकर राशि के स्वामी शनि ही हैं। इसलिए शनि के अपने नक्षत्र में प्रवेश को इस राशि के लिए विशेष माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में प्रगति हो सकती है।

    आर्थिक स्थिति में अचानक लाभ के अवसर भी बन सकते हैं। हालांकि किसी बड़े निवेश या संपत्ति से जुड़े फैसले लेने से पहले पूरी जानकारी हासिल करना जरूरी होगा।

    तुला: अटके काम आगे बढ़ने की मान्यता
    तुला राशि के जातकों के लिए शनि का यह बदलाव लंबे समय से रुके कामों को गति देने वाला माना जा रहा है। अटके हुए काम दोबारा शुरू हो सकते हैं।

    कमाई और खर्च के बीच संतुलन बनाने में भी मदद मिलने की संभावना बताई गई है। हालांकि बेवजह के खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी होगा, ताकि आर्थिक लाभ का सही इस्तेमाल किया जा सके।

    किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है असर?
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि के नक्षत्र परिवर्तन का असर मुख्य रूप से करियर, आय, कारोबार, जिम्मेदारियों और संपत्ति से जुड़े मामलों पर पड़ सकता है। किसी व्यक्ति को नई जिम्मेदारी मिल सकती है, जबकि किसी के लंबे समय से रुके काम आगे बढ़ने की संभावना बन सकती है।

    हालांकि शनि के नक्षत्र परिवर्तन का प्रभाव व्यक्ति की पूरी जन्मकुंडली, दशा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर भी निर्भर माना जाता है। इसलिए केवल राशि के आधार पर किसी व्यक्ति के भविष्य के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    इस दौरान किन बातों का ध्यान रखें?
    ज्योतिष में शनि को अनुशासन और कर्म से जोड़ा जाता है। इसलिए इस अवधि में काम को टालने के बजाय समय पर पूरा करने, जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने और आर्थिक मामलों में अनावश्यक जोखिम से बचने की सलाह दी जाती है।

  • ईरान का 7 दिन का प्लान ट्रंप ने ठुकराया, नवंबर के बाद फिर हमले की आशंका

    ईरान का 7 दिन का प्लान ट्रंप ने ठुकराया, नवंबर के बाद फिर हमले की आशंका


    नई दिल्ली। ईरान ने अमेरिका के सामने तनाव कम करने के लिए 7 दिन का प्रस्ताव रखा था, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और परमाणु मुद्दे पर बातचीत फिर शुरू करने की पेशकश की गई थी। इसके बदले ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, तेल बिक्री प्रतिबंधों में राहत और लेबनान को शामिल करते हुए युद्धविराम की मांग की थी। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर के मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा अमेरिकी हमले की संभावना जताई गई है।

    ईरान ने रखा था सात दिन का फॉर्मूला

    ईरान का प्रस्ताव कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि अमेरिका यदि प्रस्ताव स्वीकार करता है तो सात दिन की समयसीमा उसी दिन से शुरू हो जाएगी। उनका कहना था कि इसके लिए जरूरी तैयारियां पहले ही पूरी की जा चुकी हैं।

    प्रस्ताव के तहत ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए तैयार था। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत दोबारा शुरू करने की बात कही गई थी।

    इसके बदले ईरान ने अमेरिका के सामने तीन शर्तें रखी थीं—

    ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जाए।
    ईरान के तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट दी जाए।
    ऐसा युद्धविराम लागू किया जाए, जिसमें लेबनान भी शामिल हो।

    अराघची के मुताबिक, अमेरिका इन कदमों को चार से पांच दिन में पूरा कर सकता था। इसके बाद छठे दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और सातवें दिन अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव था।

    ट्रंप ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव?

    वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। ट्रंप को भरोसा नहीं है कि ईरान उनकी मांगों को पूरा करेगा। इसी वजह से उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा है कि नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ दोबारा बमबारी शुरू हो सकती है।

    हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अगर अमेरिका दोबारा हमला करता है तो उसका स्तर कितना बड़ा होगा।

    रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप फिलहाल बड़े सैन्य अभियान को लेकर पूरी तरह तैयार नजर नहीं आ रहे हैं। इसकी एक वजह अमेरिका के हथियारों का घटता भंडार बताया गया है। अमेरिका अपने हथियारों को दूसरी संभावित सैन्य जरूरतों के लिए भी बचाकर रखना चाहता है।

    अराघची बोले- अब फैसला अमेरिका के हाथ में

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि अब फैसला अमेरिका को करना है। उनका कहना था कि ईरान दबाव, धमकी या डराने की कोशिश के आगे अपने संप्रभु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।

    इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजश्कियान ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रुख का स्वागत किया है। उन्होंने बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाने के समर्थन के लिए शी का शुक्रिया अदा किया।

    बातचीत और सैन्य कार्रवाई के बीच अटका मामला

    फिलहाल ईरान ने तनाव कम करने के लिए सात दिन का रास्ता सामने रखा है, लेकिन ट्रंप ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिका को ईरान की ओर से अपनी मांगें पूरी किए जाने पर संदेह है। दूसरी ओर, नवंबर के मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा अमेरिकी हमले की संभावना सामने आई है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खुलता है या तनाव फिर सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ता है, यह ट्रंप के अगले रुख पर निर्भर करेगा।

  • एमपी में फिर बदला मौसम, 18 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, निवाड़ी-टीकमगढ़ समेत 4 में ऑरेंज अलर्ट

    एमपी में फिर बदला मौसम, 18 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, निवाड़ी-टीकमगढ़ समेत 4 में ऑरेंज अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर अभी थमा नहीं है। मौसम विभाग ने शनिवार को जबलपुर और रीवा समेत 18 जिलों में अति भारी या भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सतना में ऑरेंज अलर्ट है। तेज बारिश की आशंका को देखते हुए सतना में नर्सरी से कक्षा 8वीं और मैहर में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के स्कूल शनिवार को बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।

    18 जिलों में तेज बारिश का अलर्ट

    IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, अगले 24 घंटे में भिंड, दतिया, पन्ना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, दमोह, कटनी, मैहर, उमरिया, शहडोल, जबलपुर, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश हो सकती है।

    वहीं निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और सतना में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अगले 48 घंटे बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।

    सतना-मैहर में स्कूलों की छुट्टी

    मूसलधार बारिश की चेतावनी को देखते हुए सतना जिले में शनिवार को नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के सभी स्कूलों में अवकाश घोषित किया गया है। इसी तरह मैहर जिले में नर्सरी से कक्षा 12वीं तक के सभी स्कूल बंद रहेंगे।

    इन जिलों में बूंदाबांदी के आसार

    प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा और मंदसौर में बूंदाबांदी का अनुमान है।

    इसके अलावा शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, पांढुर्णा, अनूपपुर, सागर और पन्ना में भी बूंदाबांदी हो सकती है।

    अगले 48 घंटे अहम, निचले इलाकों में सावधानी

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार सितंबर के आखिरी सप्ताह में मध्य प्रदेश का मौसम फिर सक्रिय है। गहरे अवदाब की तीव्रता लगातार कम हो रही है, लेकिन इसके उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने और इससे जुड़ी नमी के कारण पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का दौर बना हुआ है।

    उन्होंने बताया कि अगले 48 घंटे खास तौर पर महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन, किसान और आम लोगों को स्थानीय मौसम चेतावनियों पर नजर रखनी चाहिए। नदी-नालों, पुल-पुलियों और निचले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।

    मानसून की विदाई में अब 5 दिन बाकी

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य समय 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है। यानी मानसून की विदाई में अब पांच दिन बाकी हैं। आने वाले दिनों में प्रदेश से मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है। राजस्थान के कई जिलों से मानसून लौट चुका है।

    सामान्य से 2.2 इंच कम बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 880.5 मिमी यानी 34.7 इंच बारिश दर्ज हुई है। यह सामान्य बारिश 937.9 मिमी यानी 36.9 इंच से 2.2 इंच कम है।

    प्रदेश में ओवरऑल सामान्य से 6% कम बारिश हुई है। पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा सामान्य के बराबर है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% कम पानी गिरा है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य के बराबर पहुंच गया है। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 21% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में इन आंकड़ों में काफी सुधार हुआ है। शुक्रवार को भी प्रदेश के पूर्वी हिस्से का आंकड़ा सामान्य के बराबर आ गया।

    पश्चिमी हिस्से में 8 से 50% तक कमी

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 8% से 50% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।