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  • इंडिया गठबंधन में कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं…. इंडिया गठबंधन में सहयोगियों दलों ने खोला मोर्चा

    इंडिया गठबंधन में कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं…. इंडिया गठबंधन में सहयोगियों दलों ने खोला मोर्चा


    नई दिल्ली।
    हाल ही में तमिलनाडु (Tamil Nadu), केरल (Kerala) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) के बाद ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन में दरारें गहरी होती जा रही हैं। सोमवार को नई दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की अहम बैठक में वीसीके (VCK) और वामपंथी दलों ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति को लेकर जोरदार हमला बोला है। तमिलनाडु की सत्ता से बाहर हुई डीएमके की नाराजगी इस कदर बढ़ गई है कि उसने गठबंधन में कांग्रेस के मौजूद रहने पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

    डीएमके की दो टूक- ‘कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं’
    डीएमके के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी अब इंडिया गठबंधन का हिस्सा तभी बनेगी, जब कांग्रेस इस गुट का हिस्सा नहीं होगी। डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “हम चुनाव प्रणाली ‘SIR’ के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भेजे जाने वाले पत्र पर भी हस्ताक्षर नहीं करेंगे।” नई दिल्ली में हुई इस बैठक में कांग्रेस द्वारा डीएमके से नाता तोड़ने का मुद्दा पूरी तरह छाया रहा और सहयोगियों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी।


    राहुल गांधी पर वामदलों का सीधा हमला

    केरल में कांग्रेस और वामदलों के बीच की तल्खी बैठक के दौरान खुलकर सामने आ गई। सीपीएम नेता जॉन ब्रिटास, सीपीआई के संतोष कुमार और डी. राजा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने केरल चुनाव के दौरान लेफ्ट को ‘बीजेपी की बी-टीम’ बताया था।

    वामपंथी नेताओं ने डीएमके के गठबंधन से अलग होने के लिए कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराया और कई आरोप लगाए। जैसे- कांग्रेस ने तमिलनाडु चुनाव खत्म होने के ठीक बाद अचानक टीवीके (TVK) के पाले में जाकर द्रविड़ पार्टी (डीएमके) को उकसाने का काम किया है। कांग्रेस के इसी रवैये के कारण डीएमके ने गठबंधन छोड़ने जैसा बड़ा कदम उठाया।


    कांग्रेस की रणनीति से बिखर रहा है विपक्ष: वीसीके

    बैठक के दौरान वीसीके (VCK) के प्रमुख तोल थिरुमावलवन ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पार्टी के हालिया फैसलों ने कई सहयोगी दलों के भीतर गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। उन्होंने गठबंधन के भविष्य पर चिंता जताते हुए कुछ अहम बिंदु रखे: जैसे- केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कांग्रेस की जो रणनीति रही है, उसने गठबंधन के उन प्रमुख स्तंभों को कमजोर किया है जो अब तक मजबूती से खड़े थे। कांग्रेस के इस रवैये से मुख्य रूप से डीएमके, टीएमसी (TMC) और सीपीएम (CPM) जैसी अहम पार्टियों को नुकसान पहुंचा है। वीसीके प्रमुख ने स्पष्ट किया कि विपक्षी एकजुटता के बड़े लक्ष्य को देखते हुए कांग्रेस की यह रणनीति न तो वांछनीय है और न ही किसी भी तरह से फायदेमंद।

    सूत्रों ने बताया कि बैठक में शामिल माकपा के राज्यसभा सदस्य ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों का विषय उठाया। भाकपा महासचिव डी राजा ने भी इसको लेकर नाराजगी जताई कि राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद कांग्रेस द्वारा केरल में वाम नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए।

    सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नीति के तहत पार्टी की ओर से चुनाव में एक विषय उठाया गया था। विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं ने भी कहा कि अब इन बातों को भूलकर आगे बढ़ना है और मिलकर भाजपा का मुकाबला करना है। सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने कहा कि गठबंधन के घटक दलों को एक दूसरे की आलोचना से बचना चाहिए।


    क्या रहा बैठक का नतीजा?

    विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक में शामिल कई नेताओं ने पुराने गिले-शिकवे भूलकर, बड़ा दिल दिखाते हुए और एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा मोदी सरकार को चुनौती देने का सुझाव दिया।

    सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इस बात की जोरदार पैरवी की कि गठबंधन में शामिल दलों को एक दूसरे की आलोचना करने से बचना चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस गठबंधन को लेकर उनके रुख में बड़ा बदलाव आया है।

    बैठक में ममता और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात भी हुई। सूत्रों ने बताया कि बैठक औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ममता ने सोनिया गांधी से करीब 10 मिनट लंबी बातचीत की। कांग्रेस ने दोनों नेताओं की एक-दूसरे को गले लगाते हुए तस्वीर भी अपने सोशल मीडिया मंच पर साझा की।

  • केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर

    केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर


    नई दिल्ली।
    देश में हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (Domestic LPG Cylinder Prices) में तेल वितरण कंपनियों ने 29 रुपये की बढ़ोतरी कर महंगाई का बम फोड़ा था. ये तीन महीने में 14.2 किलोग्राम वाले LPG Cylinder की कीमत में दूसरी बढ़ोतरी थी. सिलेंडर महंगा होने के बाद अब सरकार (Government) ने उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojna) के लाभार्थियों को बड़ा झटका दिया है. इस सरकारी स्कीम के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की संख्या में बड़ी कटौती की गई है।

    इसके साथ ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, PMUY के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा. उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार रिफिल की खपत होती है, पहले PMUY लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर DBT मिलता था।


    9 नहीं, अब सिर्फ 4 सिलेंडर

    प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत अब तक लाभार्थियों के लिए रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 थी, जिसे कम करते हुए सरकार ने सिर्फ 4 कर दिया है. केंद्र सरकार के इस बड़े फैसले को लेकर अधिकारियों ने बताया कि ये कदम वित्तीय सहायता को वास्तविक औसत घरेलू खपत के स्तर के अनुरूप बनाता है।

    पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने इस संबंध में कहा कि संशोधित पात्रता उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है.


    2016 में शुरुआत, अब तक ऐसे घटी संख्या

    मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की थी और इसका उद्देश्य वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना था. योजना की शुरुआत में इसके लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिए जाते थे. लेकिन फिर सरकार ने इस वार्षिक कोटे को कम करते 9 कर दिया था और अब इसे घटाकर सिर्फ चार करने का फैसला लिया गया है.

    उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर पर सरकार सब्सिडी (LPG Cylinder Subsidy) भी देती है. इन्हें किफायती बनाए रखने के लिए सरकार ने मई 2022 में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की, जिसे अगले साल यानी अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया था. सरकार की ओर से दी जाने वाली ये एलपीजी सब्सिडी हर रिफिल खरीद के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा की जाती है।


    उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर का दाम

    बता दें कि 7 जून को घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 942 रुपये हो गई. इससे पहले 7 मार्च को तेल वितरण कंपनियों ने 60 रुपये की बढ़ोतरी की थी. इस हिसाब से 300 रुपये की सब्सिडी के साथ उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अपने पहले चार सिलेंडरों के लिए प्रति रिफिल 642 रुपये का भुगतान करना होगा.

    पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने 2022 से अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं. हाल ही में घरेलू खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, सरकारी तेल विपणन कंपनियां बेचे गए प्रत्येक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं।

  • अवैध इमिग्रेशन और नशे की तस्करी रोकने के लिए साथ काम करेंगे रूस-पाकिस्तान, दोनों के बीच हुई बड़ी डील

    अवैध इमिग्रेशन और नशे की तस्करी रोकने के लिए साथ काम करेंगे रूस-पाकिस्तान, दोनों के बीच हुई बड़ी डील


    बिश्केक।
    किर्गिस्तान (Kyrgyzstan) की राजधानी बिश्केक (Bishkek) में शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization- SCO) के गृह और सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रियों की अहम बैठक के दौरान पाकिस्तान और रूस (Pakistan and Russia) के बीच एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। पाकिस्तानी गृह मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों ने अवैध इमिग्रेशन और नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए एक साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है।

    पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी इस विशेष बैठक में हिस्सा लेने के लिए बिश्केक में मौजूद थे। इस दौरे पर उन्होंने रूस के अलावा कई अन्य सदस्य देशों के नेताओं से भी मुलाकात की, जिसमें अफगानिस्तान से पनप रहे ‘आतंकवाद’ का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।


    रूस के साथ समझौते की अहम बातें

    पाकिस्तानी गृह मंत्रालय के अनुसार, गृह मंत्री मोहसिन नकवी और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव के बीच जिन समझौतों पर मुहर लगी है, वे इस प्रकार हैं-
    – अवैध नागरिकों का डिपोर्टेशन: पाकिस्तान के गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, दोनों देश एक-दूसरे के यहां अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की पहचान करने और उनकी वतन वापसी सुनिश्चित करने में एक-दूसरे की मदद करेंगे।
    – घुसपैठ पर लगाम: अवैध इमिग्रेशन को रोकने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा ताकि गैर-कानूनी तरीके से होने वाली आवाजाही को रोका जा सके।
    – ड्रग्स तस्करी पर एक्शन: नशीले पदार्थों की हेराफेरी को जड़ से खत्म करने के लिए भी दोनों पक्षों के बीच एक अलग और महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ साझा कार्रवाई की जाएगी।

    SCO के मंच का फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी गृह मंत्री ने उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के प्रतिनिधियों के साथ भी अलग-अलग बैठकें कीं।
    – उज्बेकिस्तान: उज्बेक गृह मंत्री अजीज ताशपुलातो के साथ लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसियों (कानून लागू करने वाली संस्थाओं) के बीच सहयोग और जॉइंट ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने पर चर्चा हुई। इसके लिए दोनों देशों के गृह मंत्रालयों के बीच एक ‘वर्किंग ग्रुप’ बनाने का भी फैसला लिया गया।
    – किर्गिस्तान: किर्गिस्तान के गृह मंत्री उलान नियाजबेकोव के साथ आपसी हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार पर सहमति बनी। नकवी ने किर्गिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का गैर-स्थायी सदस्य चुने जाने पर बधाई दी और SCO बैठक के शानदार इंतजामों के लिए उनका शुक्रिया अदा किया।
    – कजाकिस्तान: कजाख समकक्ष यर्झान सादेनोव के साथ अवैध इमिग्रेशन को रोकने के लिए द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और आपसी रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाने पर रजामंदी हुई।


    अफगानिस्तान में रूस का ‘डबल गेम

    दूसरी तरफ रूस और अफगानिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों ने क्षेत्रीय कूटनीति में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। कूटनीतिक मामलों की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘द डिप्लोमैट’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, रूस अब अफगानिस्तान को लेकर एक बेहद सधी हुई दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है। मॉस्को और तालिबान के बीच तेजी से गहरे होते संबंध इस बात का साफ इशारा हैं कि अफगानिस्तान की विदेश नीति में बड़े बदलाव आ रहे हैं और इस पूरे खेल में सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ रहा है।


    रूस की दोहरी रणनीति क्या है?

    रिपोर्ट के मुताबिक, रूस अफगानिस्तान के मामले में एक साथ दो अलग-अलग मोर्चों पर काम कर रहा है। आतंकवाद पर सार्वजनिक रुख: रूस एक तरफ सार्वजनिक मंचों पर अफगानिस्तान से पनपने वाले आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मध्य एशिया के देशों में अपनी व्यापक सुरक्षा भूमिका और सैन्य दखल को सही ठहराना है।

    तालिबान के साथ सुरक्षा गठजोड़: वहीं दूसरी तरफ, रूस पर्दे के पीछे तालिबान के साथ अपने सुरक्षा संबंधों का लगातार विस्तार कर रहा है। मॉस्को का लक्ष्य तालिबान के साथ इस रणनीतिक गठजोड़ के जरिए मध्य एशिया में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए एक ठोस जमीनी हथियार तैयार करना है।


    पाकिस्तान के लिए सिकुड़ती जा रही है जमीन

    रूस और तालिबान के बीच इस नए समीकरण ने पाकिस्तान के रणनीतिक दांव-पेंच को बुरी तरह उलझा दिया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान के लिए अब अफगानिस्तान में पैंतरेबाजी की गुंजाइश लगातार खत्म होती जा रही है।

    रूस के साथ नए समझौते और संबंध स्थापित होने के बाद, अफगानिस्तान (काबुल) अब इस स्थिति का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ एक ‘लेवरेज’ या कूटनीतिक हथियार के तौर पर कर रहा है। पहले जो पाकिस्तान अफगानिस्तान के मामलों में एक ‘रिंगमास्टर’ की भूमिका में खुद को देखता था, अब रूस की सीधी एंट्री और तालिबान की स्वतंत्र विदेश नीति के कारण उसका प्रभाव तेजी से घट रहा है।

  • लक्षद्वीप को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला…., 47 साल से लागू शराबबंदी को किया खत्म

    लक्षद्वीप को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला…., 47 साल से लागू शराबबंदी को किया खत्म


    नई दिल्ली।
    लक्षद्वीप (Lakshadweep) को लेकर केंद्र सरकार (Central government) ने बड़ा फैसला किया है। यहां 47 साल पहले लागू की गई शराबबंदी (Prohibition of alcohol) अब खत्म कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक द्वीपसमहू में पर्यटन को बढ़ावा देने और राजस्व के लिए सरकार ने यह फैसला किया है। आपको बता दें कि लक्षद्वीप में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। ऐसे में इस्लामिक सिद्धातों को देखते हुए यहां 1979 में शराबबंदी लागू की गई थी। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से लक्षद्वीप के लोग खुश नहीं हैं।


    क्यों हटा ली गई शराबबंदी

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने लक्षद्वीप एक्साइज रेग्युलेशन 2026 पर साइन कर दिए हैं। इसके बाद लक्षद्वीप प्रोहिबिशन रेग्युलेश 1979 को वापस ले लिया गया है। केंद्र सरकार लक्षद्वीप को वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। ऐसे में विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए रेस्तरां और होटलों में शराब उपलब्ध करवाने और रेवेन्यू जनरेट करने के लिए सरकार ने लगभग 50 साल पुराना कानून वापस ले लिया है।

    नए नियमों के मुताबिक नियंत्रित तरीके से द्वीपसमूह में शराब बेची जा सकगी। सरकार को इससे बड़ा मुनाफा होने वाला है. सरकार शराब पर एक्साइज ड्यूटी, लाइसेंस फीस और अन्य चार्ज लगाकर कमाई करेगी। पूरी तरह से लागू की गई शराबबंदी को नए कानून ने रिप्लेस कर दिया है और अब नियंत्रित करीके से शराब की मैन्युफेक्चरिंग, आयात, निर्यात, ट्रांसपोर्ट और बिक्री को लागू किया जाएगा। साथ ही सरकार इन सारी गतिविधियों पर पूरी नजर रखेगी।


    कैसे काम करेगा नया नियम

    रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऐसा नहीं है कि शराब को मनमाने तरीके से बेचने की छूट दे दी गई है। इसपर सरकार का पूर् नियंत्रण होगा। देसी और विदेशी शराब पर 400 फीसदी का आबकारी कर लगाया गया है। इसके अलावा बियर पर 200 फीसदी और वाइन पर 80 पर्सेंट का कर वसूला जाएगा। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट एजेंसियां शराब बिक्री के लिए लाइसेंस ले सकती हैं। 21 साल से नीचे वालों को शराब बेचने की अनुमति नहीं होगी।


    क्यों है इस फैसले पर विवाद कि आशंका

    लक्षद्वीप में 96.5 पर्सेंट मुसलमान रहते हैं। 1979 में शराबबंदी इस्लामिक सिद्धातों को ध्यान में रखकर ही की गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां शराब बेचने की अनुमति देकर माहौल बिगाड़ने का ही प्रयास है। अपने फायदे के लिए सरकार समाज को दूषित करना चाहती है। लक्षद्वीप से सांसद हमदुल्लाह सईद ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह से सरकार की उपलब्धता से युवाओं को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। वे नशे के आदी हो जाएंगे और फिर लक्षद्वीप में भी अपराध बढ़ने लगेंगे।

  • मौसम का बदलेगा मिजाज! आंधी, बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, कई राज्यों में राहत तो कहीं बढ़ेगी उमस

    मौसम का बदलेगा मिजाज! आंधी, बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, कई राज्यों में राहत तो कहीं बढ़ेगी उमस



    मध्य प्रदेशदेशभर में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 9 जून को कई राज्यों में तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक के साथ मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, जिसके चलते कई क्षेत्रों में राहत की बारिश देखने को मिल सकती है, जबकि कुछ इलाकों में गर्मी और उमस का असर बरकरार रहेगा।

    मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और अन्य राज्यों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई है। कई स्थानों पर 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    मध्य प्रदेश में भी मौसम के तेवर बदले हुए नजर आ सकते हैं। भोपाल, सीहोर, विदिशा, सागर, सतना, उज्जैन और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। पिछले दिनों प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाएं दर्ज की गई थीं, जिससे तापमान में गिरावट और मौसम में बदलाव देखने को मिला था।

    दक्षिण भारत में मानसून की गतिविधियां तेज हो रही हैं। केरल और कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बाढ़ और जलभराव की आशंका को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

    पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और आसपास के राज्यों में व्यापक वर्षा के संकेत हैं। वहीं उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बादलों की आवाजाही के बावजूद उमस और गर्मी का असर महसूस किया जा सकता है।

    मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की प्रगति के साथ आने वाले दिनों में देश के अधिक हिस्सों में वर्षा गतिविधियां बढ़ेंगी। हालांकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी गर्म और शुष्क हवाओं का प्रभाव बना रह सकता है। ऐसे में नागरिकों को मौसम विभाग की चेतावनियों और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की आवश्यकता है।

    कुल मिलाकर 9 जून का दिन मौसम के लिहाज से काफी सक्रिय रहने वाला है। कहीं बारिश राहत देगी तो कहीं तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा चुनौती बन सकता है। इसलिए घर से निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर लें और आवश्यक सावधानी बरतें।

  • शेयर बाजार में आज रहना होगा सतर्क! ग्लोबल दबाव के बीच उतार-चढ़ाव की आशंका, निवेशकों की नजर निफ्टी-सेंसेक्स पर

    शेयर बाजार में आज रहना होगा सतर्क! ग्लोबल दबाव के बीच उतार-चढ़ाव की आशंका, निवेशकों की नजर निफ्टी-सेंसेक्स पर


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का कारोबारी सत्र उतार-चढ़ाव भरा रहने की संभावना है। सोमवार को बाजार में आई बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सेंसेक्स और निफ्टी संभल पाएंगे या फिर दबाव और बढ़ेगा। वैश्विक संकेत फिलहाल बाजार के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं। एशियाई बाजारों में कमजोरी, अमेरिका के बाजारों में बिकवाली, मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

    पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली थी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गए थे। बाजार पूंजीकरण में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी आई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर अभी भी बना हुआ है।

    आज के कारोबार में सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों का रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय है। इससे महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार की धारणा पर पड़ता है।

    हालांकि बाजार के लिए कुछ सकारात्मक संकेत भी मौजूद हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदम और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की लगातार खरीदारी बाजार को समर्थन दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू निवेश प्रवाह बाजार में बड़ी गिरावट को सीमित कर सकता है।

    तकनीकी दृष्टि से देखें तो निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह स्तर बना रहता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं इसके नीचे फिसलने पर बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। निवेशकों को फिलहाल जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने से बचने और गुणवत्ता वाले शेयरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है।

    बैंकिंग, एफएमसीजी और चुनिंदा डिफेंस शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है, जबकि आईटी और निर्यात आधारित सेक्टर वैश्विक दबाव के कारण कमजोर रह सकते हैं। कुल मिलाकर आज का दिन बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है, लेकिन चुनिंदा सेक्टरों में अवसर भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रणनीति के साथ बाजार में कदम रखने की जरूरत होगी।

  • नींबू से स्किन केयर: चेहरे पर निखार या नुकसान? जानिए सही इस्तेमाल का तरीका

    नींबू से स्किन केयर: चेहरे पर निखार या नुकसान? जानिए सही इस्तेमाल का तरीका


    नई दिल्ली । सुंदर और बेदाग त्वचा पाने के लिए लोग अक्सर घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। इन्हीं में से एक है नींबू, जो विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। नींबू को त्वचा की रंगत निखारने, अतिरिक्त तेल कम करने और दाग-धब्बों को हल्का करने के लिए लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि त्वचा विशेषज्ञों का मानना है कि नींबू का उपयोग सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि इसकी अम्लीय प्रकृति कई लोगों की त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकती है।

    नींबू में मौजूद विटामिन-सी त्वचा में कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करता है, जिससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार दिखाई दे सकती है। इसके अलावा इसमें प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं, जो मुंहासों की समस्या को कम करने में सहायक हो सकते हैं। तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए नींबू अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में मददगार माना जाता है।

    हालांकि नींबू को सीधे चेहरे पर लगाना हमेशा सुरक्षित नहीं माना जाता। इसकी अधिक अम्लीयता त्वचा में जलन, लालिमा, खुजली और रुखापन पैदा कर सकती है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष रूप से सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नींबू के रस को सीधे लगाने के बजाय शहद, दही या गुलाब जल जैसी चीजों के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना बेहतर होता है।

    स्किन केयर के लिए एक लोकप्रिय उपाय नींबू और शहद का मिश्रण है। एक चम्मच शहद में कुछ बूंदें नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर 10 से 15 मिनट तक लगाया जा सकता है। इसके बाद सादे पानी से चेहरा धो लें। यह त्वचा को नमी देने के साथ हल्की चमक भी प्रदान कर सकता है। वहीं दही और नींबू का मिश्रण त्वचा की टैनिंग कम करने में मददगार माना जाता है।

    नींबू का इस्तेमाल करने के बाद धूप में जाने से बचना चाहिए। नींबू में मौजूद कुछ तत्व सूर्य की किरणों के प्रति त्वचा को अधिक संवेदनशील बना सकते हैं, जिससे जलन या पिग्मेंटेशन की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए नींबू आधारित फेस पैक का उपयोग शाम के समय करना अधिक उपयुक्त माना जाता है।

    यदि त्वचा पर पहले से किसी प्रकार की एलर्जी, घाव, एक्जिमा या गंभीर मुंहासे हैं, तो नींबू का प्रयोग करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना भी एक अच्छा विकल्प है।

    कुल मिलाकर, नींबू स्किन केयर में उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसका सही और संतुलित इस्तेमाल ही त्वचा को लाभ पहुंचाता है। बिना जानकारी के अत्यधिक प्रयोग करने से फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है।

  • मंगलवार व्रत-पूजा विधि: बजरंगबली को ऐसे करें प्रसन्न, दूर होंगे संकट और बरसेगी कृपा

    मंगलवार व्रत-पूजा विधि: बजरंगबली को ऐसे करें प्रसन्न, दूर होंगे संकट और बरसेगी कृपा


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। संकटमोचन हनुमान की आराधना के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भक्त मंगलवार का व्रत रखकर श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करते हैं, उनके जीवन से दुख, संकट, भय और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। साथ ही मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव भी कम होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

    मंगलवार व्रत की शुरुआत प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से होती है। स्नान के बाद स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ करके भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर पूजा प्रारंभ करें। हनुमानजी को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, गुड़ और चने का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि बजरंगबली को सिंदूर अत्यंत प्रिय है, इसलिए सिंदूर अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    पूजा के दौरान हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। जो लोग पूरा सुंदरकांड नहीं पढ़ सकते, वे कम से कम हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ अवश्य करें। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से मनोबल बढ़ता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

    व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर सात्विक आहार ग्रहण करते हैं। कई लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार का सेवन करते हैं। इस दिन लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशीली वस्तुओं से दूर रहने की सलाह दी जाती है। व्रत का पारण सूर्यास्त के बाद या पूजा सम्पन्न होने के बाद किया जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगलवार का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जिनकी कुंडली में मंगल दोष हो या जो भूमि, भवन, नौकरी, व्यापार अथवा विवाह संबंधी बाधाओं का सामना कर रहे हों। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत करने से मंगल ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं।

    मंगलवार के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। गरीब और जरूरतमंद लोगों को गुड़, मसूर की दाल, लाल वस्त्र या भोजन का दान करना शुभ माना जाता है। यह पुण्य के साथ-साथ ग्रहों की अनुकूलता बढ़ाने वाला भी माना जाता है।

    धार्मिक दृष्टि से मंगलवार का व्रत केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, अनुशासन और सेवा की भावना को भी मजबूत करता है। श्रद्धा, भक्ति और सच्चे मन से किए गए व्रत-पूजन से भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति, साहस तथा सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

  • हर्निया और साइटिका से बचाव में कारगर है उपविष्ठ कोणासन, महिलाओं के लिए भी बेहद फायदेमंद

    हर्निया और साइटिका से बचाव में कारगर है उपविष्ठ कोणासन, महिलाओं के लिए भी बेहद फायदेमंद


    नई दिल्ली । भागदौड़ भरी जिंदगी, घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत और शारीरिक गतिविधियों में कमी आज कई स्वास्थ्य समस्याओं की बड़ी वजह बन रही है। कमर दर्द, मांसपेशियों में जकड़न, पाचन संबंधी परेशानियां, साइटिका और हर्निया जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में योग न केवल शरीर को फिट रखने का माध्यम बन रहा है, बल्कि कई बीमारियों से बचाव का प्राकृतिक उपाय भी साबित हो रहा है। इन्हीं प्रभावशाली योगासनों में उपविष्ठ कोणासन का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

    उपविष्ठ कोणासन एक ऐसा योगासन है, जो शरीर के निचले हिस्से पर विशेष रूप से कार्य करता है। इस आसन में दोनों पैरों को फैलाकर बैठा जाता है और धीरे-धीरे शरीर को आगे की ओर झुकाया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान जांघों, हैमस्ट्रिंग, पेल्विक क्षेत्र, रीढ़ की हड्डी और पेट की मांसपेशियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नियमित अभ्यास से शरीर में लचीलापन बढ़ता है और मांसपेशियों की जकड़न कम होती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार उपविष्ठ कोणासन का सबसे बड़ा लाभ हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों को मिलता है। लंबे समय तक बैठे रहने के कारण ये मांसपेशियां अकड़ जाती हैं, जिससे चलने-फिरने और झुकने में परेशानी हो सकती है। इस आसन के दौरान होने वाला खिंचाव मांसपेशियों को लचीला बनाता है और शरीर की गतिशीलता को बेहतर करता है। यही कारण है कि ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है।

    यह योगासन पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार को भी बेहतर बनाने का काम करता है। शरीर के इस हिस्से में कई महत्वपूर्ण अंग मौजूद होते हैं, जिनके स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त रक्त प्रवाह जरूरी है। उपविष्ठ कोणासन के अभ्यास से इस क्षेत्र में रक्त का संचार बढ़ता है, जिससे अंगों की कार्यक्षमता बेहतर होती है और कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम हो सकता है।

    हर्निया की रोकथाम में भी इस आसन को उपयोगी माना जाता है। हर्निया की समस्या अक्सर पेट की मांसपेशियों के कमजोर होने से उत्पन्न होती है। उपविष्ठ कोणासन पेट और पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है, जिससे शरीर के अंदरूनी अंगों को बेहतर सहारा मिलता है और हर्निया का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि जिन लोगों को पहले से हर्निया है, उन्हें यह आसन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए।

    साइटिका के मरीजों के लिए भी यह योगासन राहत देने वाला माना जाता है। साइटिका में नसों पर दबाव के कारण कमर से लेकर पैरों तक दर्द महसूस होता है। इस आसन से होने वाला नियंत्रित खिंचाव नसों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे दर्द और असहजता में राहत मिल सकती है।

    महिलाओं के लिए भी उपविष्ठ कोणासन कई मायनों में फायदेमंद है। यह पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ाकर हार्मोनल संतुलन को बेहतर बनाने में मदद करता है। नियमित अभ्यास मासिक धर्म चक्र को संतुलित रखने और पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द एवं ऐंठन को कम करने में सहायक माना जाता है।

    योग विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी योगासन का लाभ तभी मिलता है जब उसे सही तकनीक और नियमितता के साथ किया जाए। इसलिए शुरुआती लोगों को प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में ही उपविष्ठ कोणासन का अभ्यास करना चाहिए। सही तरीके से किया गया यह योगासन शरीर को लचीला, मजबूत और स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।