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  • भोपाल में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, राजधानी दो दिन रही थमी, सरकार ने मानी बड़ी मांगें, आंदोलन हुआ खत्म

    भोपाल में किसानों का शक्ति प्रदर्शन, राजधानी दो दिन रही थमी, सरकार ने मानी बड़ी मांगें, आंदोलन हुआ खत्म


    भोपाल । भोपाल में किसानों के आंदोलन ने दो दिनों तक राजधानी की रफ्तार लगभग थाम दी। मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर नर्मदापुरम हरदा सीहोर समेत कई जिलों से आए हजारों किसानों ने ऐसा दबाव बनाया कि आखिरकार सरकार को बातचीत की मेज पर आना पड़ा। किसान एक के बाद एक 22 बैरिकेड पार करते हुए मुख्यमंत्री निवास से महज एक किलोमीटर पहले तक पहुंच गए। उनके सामने केवल तीन बैरिकेड शेष थे। इसी दौरान सरकार ने वार्ता का रास्ता अपनाया और देर रात आंदोलन समाप्त हो गया।

    आंदोलन के चलते रोशनपुरा न्यू मार्केट और मुख्यमंत्री निवास के आसपास का पूरा इलाका पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। कई स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी जबकि प्रमुख मार्गों पर स्कूल बसों और गिट्टी से भरे डंपरों को बैरिकेड के रूप में खड़ा कर यातायात रोकने की कोशिश की गई। इसके बावजूद किसानों का काफिला लगातार आगे बढ़ता रहा और पुलिस की अधिकांश रणनीतियां नाकाम साबित हुईं।

    सुबह मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों से संवाद कर समस्याओं का समाधान निकालने की बात कही थी। लेकिन जब प्रदर्शनकारी रोशनपुरा तक पहुंच गए तब सरकार ने कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना विश्वास सारंग और कृष्णा गौर सहित चार मंत्रियों की समिति गठित कर किसान नेताओं से बातचीत शुरू कराई। मंत्रालय में करीब दो घंटे चली चर्चा के बाद सरकार ने कई अहम घोषणाएं कीं।

    सरकार ने मूंग खरीदी की सीमा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का फैसला लिया। इसके साथ ही खाद वितरण की ई टोकन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया। स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 10 अगस्त तक और खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त तक बढ़ा दी गई। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में खाद वितरण हाईब्रिड व्यवस्था के तहत किया जाएगा जिसमें आधार नंबर मोबाइल नंबर और वितरण का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज रहेगा।

    हालांकि किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है लेकिन उनकी मूल मांग अब भी पूरी नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी मूंग की फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जानी चाहिए और वे इस मांग से पीछे नहीं हटेंगे। संगठन के नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि आगे भी जरूरत पड़ी तो आंदोलन दोबारा किया जाएगा।

    इस आंदोलन के दौरान पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए। नर्मदापुरम हरदा इटारसी और भैरूंदा सहित कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश हुई। करीब 60 किसान नेताओं को हिरासत में भी लिया गया लेकिन बाद में उन्हें छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद किसान बड़ी संख्या में भोपाल पहुंचने में सफल रहे और सरकार को अंततः वार्ता के लिए मजबूर होना पड़ा।

    इधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य सरकार को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि केंद्र ने मध्य प्रदेश को देश में सबसे अधिक 4.54 लाख टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी है। उन्होंने कहा कि पहले स्वीकृत कोटे की पूरी खरीदी की जाए उसके बाद अतिरिक्त कोटे पर विचार किया जाएगा।

    करीब दो दिन तक चले इस आंदोलन के बाद देर रात किसानों ने धरना समाप्त कर दिया और वापस लौटना शुरू किया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन खत्म होने के बाद गुरुवार से स्कूल और सामान्य यातायात पूर्ववत संचालित होंगे।

  • मनीपाल हेल्थ आईपीओ में लिस्टिंग गेन सीमित, मजबूत कारोबार के दम पर दीर्घकालिक निवेश की सलाह

    मनीपाल हेल्थ आईपीओ में लिस्टिंग गेन सीमित, मजबूत कारोबार के दम पर दीर्घकालिक निवेश की सलाह

    नई दिल्ली । देश के हेल्थकेयर सेक्टर की प्रमुख अस्पताल श्रृंखलाओं में शामिल मनीपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज का ₹9,275.22 करोड़ का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) निवेशकों के लिए खुल चुका है। कंपनी इस सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से अपने विस्तार की योजनाओं को गति देने के साथ-साथ कर्ज का बोझ कम करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। पहले दिन मिले शुरुआती निवेशकों के रुझान के बाद बाजार में यह चर्चा तेज है कि इस आईपीओ में निवेश करना कितना लाभदायक हो सकता है और किन निवेशकों के लिए यह अवसर उपयुक्त माना जा रहा है।

    मनीपाल हेल्थ देश की सबसे बड़ी निजी अस्पताल श्रृंखलाओं में गिनी जाती है। कंपनी के नेटवर्क में 13,000 से अधिक बेड उपलब्ध हैं और पिछले कुछ वर्षों में इसने नए अस्पताल स्थापित करने के साथ-साथ अस्पतालों के अधिग्रहण के जरिए अपने कारोबार का लगातार विस्तार किया है। मजबूत ब्रांड पहचान, व्यापक उपस्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में लंबे अनुभव ने कंपनी को उद्योग की प्रमुख संस्थाओं में शामिल किया है।

    कंपनी की एक बड़ी विशेषता इसके प्रमोटर समूह और संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी मानी जा रही है। वैश्विक स्तर के प्रतिष्ठित निवेशकों की मौजूदगी से कंपनी की विश्वसनीयता को मजबूती मिली है। साथ ही, बीते वर्षों में कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन में भी सुधार देखने को मिला है, जिससे इसके भविष्य की विकास संभावनाओं को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

    आईपीओ के मूल्यांकन को भी उद्योग के अन्य सूचीबद्ध अस्पताल समूहों की तुलना में प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है। कंपनी ने प्रति शेयर ₹560 से ₹590 का प्राइस बैंड तय किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह मूल्यांकन बाजार की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए संतुलित दिखाई देता है। सार्वजनिक निर्गम से प्राप्त राशि का बड़ा हिस्सा कंपनी अपने मौजूदा कर्ज को कम करने में लगाएगी, जिससे भविष्य में ब्याज व्यय में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। इससे कंपनी की लाभप्रदता और नकदी प्रवाह दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    हालांकि निवेशकों के सामने कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। कंपनी की आय का लगभग 46 प्रतिशत हिस्सा केवल कर्नाटक से आता है, जिससे किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर अधिक निर्भरता का जोखिम बना रहता है। यदि उस क्षेत्र में कारोबार प्रभावित होता है तो कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर असर पड़ सकता है। हालांकि कंपनी अन्य राज्यों में नए अस्पताल शुरू करने और अपनी मौजूदगी बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रही है, जिससे भविष्य में यह निर्भरता कम होने की उम्मीद है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस आईपीओ से पहले दिन भारी प्रीमियम पर लिस्टिंग की संभावना सीमित हो सकती है। इसलिए केवल अल्पकालिक मुनाफे या लिस्टिंग गेन की उम्मीद रखने वाले निवेशकों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता। इसके विपरीत, जिन निवेशकों का निवेश दृष्टिकोण तीन वर्ष या उससे अधिक का है, उनके लिए यह आईपीओ बेहतर विकल्प माना जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग, कंपनी का मजबूत प्रबंधन और विस्तार की योजनाएं इसे लंबी अवधि में संभावनाओं वाला निवेश बना सकती हैं।

    मनीपाल हेल्थ का आईपीओ 29 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक निवेशकों के लिए खुला है। कंपनी इस निर्गम के जरिए कुल ₹9,275.22 करोड़ जुटाने की योजना पर काम कर रही है। इसमें नए शेयर जारी करने के साथ ऑफर फॉर सेल भी शामिल है। रिटेल निवेशकों के लिए न्यूनतम 25 शेयरों का एक लॉट निर्धारित किया गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्गम उन निवेशकों के लिए अधिक उपयुक्त हो सकता है जो गुणवत्तापूर्ण कंपनियों में लंबी अवधि के निवेश के माध्यम से स्थिर रिटर्न की तलाश कर रहे हैं।

  • सोना-चांदी के दामों में हलचल, जानिए आज 10 ग्राम गोल्ड का नया रेट

    सोना-चांदी के दामों में हलचल, जानिए आज 10 ग्राम गोल्ड का नया रेट


    नई दिल्ली ।
    अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक के बाद गुरुवार को वैश्विक और घरेलू सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला। ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले के बाद शुरुआती कारोबार में सोने की कीमतों में तेजी दर्ज की गई, लेकिन कुछ ही घंटों बाद बाजार में मुनाफावसूली और निवेशकों की बदली रणनीति के कारण कीमतों में फिर नरमी आ गई। इसका असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दिया, जहां सोने और चांदी के ताजा भाव में बदलाव दर्ज किया गया।

    अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने अपनी बेंचमार्क ब्याज दर को 3.50 प्रतिशत से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बरकरार रखने का निर्णय लिया। बाजार पहले से ही इस फैसले की संभावना जता रहा था, लेकिन निवेशकों की निगाहें महंगाई और भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर फेड नेतृत्व की टिप्पणियों पर टिकी रहीं। महंगाई को निर्धारित लक्ष्य के करीब लाने की चुनौती बरकरार रहने के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भी ध्यान दिया।

    फेड के फैसले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड की कीमत में तेजी आई और यह लगभग 4,078 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। शुरुआती कारोबार के दौरान कीमतें 4,080 डॉलर प्रति औंस के स्तर को भी छूती दिखाई दीं। हालांकि यह तेजी लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी और बाद में बाजार में बिकवाली बढ़ने से सोने का भाव घटकर करीब 4,058 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी शुरुआती मजबूती के बाद इसी तरह का रुख देखने को मिला।

    वैश्विक बाजार में आई इस हलचल का असर घरेलू सर्राफा बाजार पर भी पड़ा। भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1,47,000 रुपये के स्तर तक पहुंच गई। वहीं चांदी के दाम में भी बढ़त दर्ज की गई और इसका भाव करीब 2,25,300 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। कारोबारियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों और डॉलर की चाल का असर आने वाले कारोबारी सत्रों में भी घरेलू कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

    वायदा बाजार में भी सोने के दाम मजबूत रहे। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 10 ग्राम सोना लगभग 570 रुपये की बढ़त के साथ 1,42,192 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। इसके विपरीत एमसीएक्स पर चांदी की कीमतों में कमजोरी रही और इसका भाव करीब 852 रुपये घटकर 2,16,652 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि हाजिर और वायदा बाजार में निवेशकों की रणनीति अलग-अलग बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों, डॉलर इंडेक्स की चाल और केंद्रीय बैंकों की भविष्य की नीति पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है तो सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ सकती है। वहीं आर्थिक संकेतकों में सुधार और डॉलर की मजबूती की स्थिति में कीमतों पर दबाव भी देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और घरेलू बाजार के रुझानों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। सोने और चांदी की कीमतों में हाल के दिनों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा गया है, इसलिए निवेश संबंधी निर्णय बाजार की मौजूदा स्थिति और दीर्घकालिक रणनीति को ध्यान में रखकर लेना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।

  • फेड के ब्याज दर फैसले के बाद अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट, वैश्विक दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती

    फेड के ब्याज दर फैसले के बाद अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट, वैश्विक दबाव के बीच भारतीय शेयर बाजार ने दिखाई मजबूती

    नई दिल्ली । अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के फैसले के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के फैसले से अमेरिकी निवेशकों की उम्मीदों को झटका लगा, जिसके चलते अमेरिकी शेयर बाजार में तेज बिकवाली दर्ज की गई। दूसरी ओर, वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत स्थिर शुरुआत की और शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए।

    अमेरिका में डॉऊ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज कारोबार के दौरान 1,100 अंकों से अधिक तक फिसल गया। इसके साथ ही नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांकों में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को ब्याज दरों को लेकर अधिक स्पष्ट संकेतों की उम्मीद थी, लेकिन फेडरल रिजर्व द्वारा मौजूदा दरों को बरकरार रखने के फैसले ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। इसके बाद निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे व्यापक बिकवाली देखने को मिली।

    फेडरल रिजर्व ने अपनी नीति समीक्षा के बाद ब्याज दरों को 3.50 से 3.75 प्रतिशत के दायरे में बनाए रखने का निर्णय लिया। केंद्रीय बैंक ने यह संकेत भी दिया कि महंगाई पर पूरी तरह नियंत्रण पाने की प्रक्रिया अभी जारी है और भविष्य के निर्णय आर्थिक आंकड़ों के आधार पर लिए जाएंगे। इसी कारण बाजार को निकट भविष्य में ब्याज दरों को लेकर कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिल सकी।

    अमेरिकी बाजार में आई गिरावट का असर एशियाई बाजारों पर भी दिखाई दिया, हालांकि विभिन्न देशों के बाजारों में मिश्रित रुख रहा। कुछ प्रमुख एशियाई सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई, जबकि कुछ बाजारों में हल्की कमजोरी देखने को मिली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशक वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अमेरिकी मौद्रिक नीति के संभावित प्रभाव का आकलन करने में जुटे हुए हैं।

    वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने अपेक्षाकृत संतुलित प्रदर्शन किया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान के साथ खुले। बाजार में ऑटोमोबाइल और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि बैंकिंग और रियल एस्टेट क्षेत्र के कुछ शेयरों पर दबाव बना रहा। विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा और भारतीय अर्थव्यवस्था की अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति ने बाजार को शुरुआती समर्थन दिया।

    विदेशी बाजारों की हलचल के बीच भारतीय मुद्रा में भी मजबूती दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले छह पैसे मजबूत होकर 95.59 के स्तर पर पहुंच गया। मुद्रा बाजार के जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार की स्थिरता और विदेशी मुद्रा प्रवाह से रुपये को समर्थन मिला, हालांकि वैश्विक घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की दिशा काफी हद तक अमेरिका से आने वाले आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान और फेडरल रिजर्व की भविष्य की नीति पर निर्भर करेगी। वहीं भारतीय बाजार में भी विदेशी निवेश, कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक संकेतकों का असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल निवेशकों की निगाहें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार की मजबूती के बीच संतुलन पर बनी हुई हैं।

  • अवैध बैनर पोस्टरों पर कार्रवाई अधूरी, कलेक्टोरेट के सामने ही नियमों की उड़ रही धज्जियां, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

    अवैध बैनर पोस्टरों पर कार्रवाई अधूरी, कलेक्टोरेट के सामने ही नियमों की उड़ रही धज्जियां, जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल


    इंदौर । हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद इंदौर शहर में अवैध राजनीतिक धार्मिक और सामाजिक बैनर पोस्टरों पर कार्रवाई अधूरी नजर आ रही है। आदेश के तीसरे दिन भी शहर के प्रमुख मार्गों और सरकारी कार्यालयों के बाहर बड़ी संख्या में अवैध होर्डिंग्स और पोस्टर लगे दिखाई दिए। सबसे ज्यादा चर्चा कलेक्टोरेट परिसर के बाहर बने विशाल प्रवेश द्वार की हो रही है जो जिम्मेदार अधिकारियों की नजरों से अब तक ओझल बना हुआ है।

    कलेक्टोरेट के सामने बना यह बड़ा प्रवेश द्वार ऐसे स्थान पर स्थित है जहां से रोजाना कलेक्टर सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी गुजरते हैं। इसके बावजूद अब तक इसे हटाने की कोई कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालयों के सामने ही नियमों का पालन नहीं होगा तो शहरभर में अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    नगर निगम की ओर से दावा किया गया है कि शहरभर से अब तक करीब एक हजार अवैध बैनर पोस्टर हटाए जा चुके हैं और अभियान लगातार जारी है। बुधवार को भी कई इलाकों में कार्रवाई कर अवैध पोस्टर और बैनर हटाए गए। हालांकि शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अब भी बड़ी संख्या में राजनीतिक धार्मिक और सामाजिक आयोजनों से जुड़े पोस्टर और होर्डिंग्स लगे हुए दिखाई दिए।

    एबी रोड और एमजी रोड जैसे व्यस्त मार्गों पर भी यूनीपोल मिनी पोल और लॉलीपॉप पोल पर बड़ी संख्या में बैनर पोस्टर लगे मिले। इनमें राजनीतिक कार्यक्रमों धार्मिक आयोजनों और सामाजिक गतिविधियों के प्रचार संबंधी सामग्री शामिल थी। बताया जा रहा है कि इनमें से कई होर्डिंग्स के लिए नगर निगम में निर्धारित शुल्क भी जमा नहीं कराया गया है।

    इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जब शहरभर में अवैध होर्डिंग्स हटाने का अभियान चलाया जा रहा है तो सरकारी कार्यालयों के बाहर लगे बैनर पोस्टरों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। कलेक्टोरेट जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के बाहर अवैध प्रवेश द्वार और पोस्टरों का बने रहना अभियान की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है।

    शहर के विभिन्न इलाकों में भी हालात लगभग एक जैसे हैं। कई स्थानों पर धार्मिक और राजनीतिक संगठनों के बैनर अब भी सार्वजनिक स्थलों पर लगे हुए हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि हाईकोर्ट के आदेश का पूरी गंभीरता से पालन कराया जाए तो अभियान की शुरुआत सबसे पहले सरकारी परिसरों और प्रमुख प्रशासनिक भवनों के बाहर से होनी चाहिए।

    अब लोगों की नजरें नगर निगम और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी सरकारी परिसरों के बाहर लगे अवैध होर्डिंग्स और प्रवेश द्वारों पर भी समान रूप से कार्रवाई करते हैं या फिर अभियान केवल चुनिंदा स्थानों तक ही सीमित रह जाता है।

  • सावन की शुरुआत पर बाबा महाकाल का अद्भुत दर्शन, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब

    सावन की शुरुआत पर बाबा महाकाल का अद्भुत दर्शन, पंचामृत अभिषेक और भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब


    उज्जैन। सावन मास के शुभारंभ के साथ ही विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। गुरुवार तड़के तीन बजे मंदिर के पट खुलते ही भगवान महाकाल की पारंपरिक भस्म आरती का आयोजन हुआ। सावन के पहले ही दिन बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने के लिए देशभर से आए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में जुटे। पूरा महाकाल धाम हर हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से गूंज उठा।

    नियमों के अनुसार सबसे पहले भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध दही घी शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से विधिवत अभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक के बाद भगवान को भस्म अर्पित की गई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक परंपरा के अनुसार महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह दिखाई दिया।

    भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल का भव्य राजा स्वरूप श्रृंगार किया गया। भगवान को भांग चंदन त्रिपुंड रजत चंद्र और सुगंधित गुलाब के पुष्पों से अलंकृत किया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट रजत शेषनाग मुकुट रुद्राक्ष की माला रजत मुंडमाला और आकर्षक पुष्पहार पहनाए गए। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। इस दिव्य स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

    भस्म आरती के दौरान गर्भगृह में विराजमान सभी देवी देवताओं का भी विधि विधान से पूजन किया गया। प्रथम घंटा बजाकर हरि ओम का जल अर्पित किया गया और कपूर आरती के साथ पूजा संपन्न हुई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और इस दिव्य दर्शन का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।

    सावन के पहले दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी रहीं और प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा व्यवस्थाओं के व्यापक इंतजाम किए गए। मंदिर समिति के अनुसार पूरे सावन माह में लाखों श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए दर्शन व्यवस्था सुरक्षा और अन्य सुविधाओं को और अधिक मजबूत किया गया है ताकि भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। इस दौरान महाकाल मंदिर में प्रतिदिन विशेष पूजन अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। सावन के पहले दिन बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन और भस्म आरती ने श्रद्धालुओं की आस्था को नई ऊर्जा प्रदान की और पूरे महाकाल धाम को शिवमय बना दिया।

  • दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया उपचुनाव में सुबह 10 बजे तक 16.33% मतदान, वोटिंग को लेकर मतदाताओं में उत्साह

    दतिया। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह 7 बजे से मतदान शांतिपूर्ण माहौल में जारी है। मतदान को लेकर मतदाताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। सुबह 10 बजे तक 16.33 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। ग्रामीण इलाकों सहित कई मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मतदान प्रक्रिया शाम 6 बजे तक जारी रहेगी।

    मतदान शुरू होने से पहले तीन मतदान केंद्रों पर ईवीएम से जुड़े उपकरणों में तकनीकी खराबी सामने आई। मतदान केंद्र क्रमांक 186 पर वीवीपैट, 108 पर बैलेटिंग यूनिट (BU) और 290 पर कंट्रोल यूनिट (CU) में समस्या आने पर मॉक पोल के दौरान सभी एजेंटों और कैमरों की मौजूदगी में उपकरण बदल दिए गए। इसके बाद निर्धारित समय पर मतदान शुरू कराया गया। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि तकनीकी खामी का समय रहते समाधान कर लिया गया था, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित नहीं हुई।

    इधर, बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव में मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने “सड़क नहीं तो वोट नहीं” का नारा लगाते हुए मतदान का बहिष्कार किया। सूचना मिलने पर एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा की। समझाइश के बाद करीब 50 ग्रामीणों ने मतदान किया।

    कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने मतदान करने के बाद अपनी जीत का दावा करते हुए कहा कि जनता भाजपा के अहंकार का जवाब देगी। वहीं भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले पीतांबरा पीठ में दर्शन कर प्रदेश और दतिया के विकास, युवाओं को रोजगार तथा भयमुक्त वातावरण की कामना की। इसके बाद उन्होंने मतदान केंद्र क्रमांक 158 पहुंचकर पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की और भाजपा के पक्ष में भारी मतदान होने का दावा किया।

    दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों पर 2 लाख 20 हजार 400 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला ने विभिन्न मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। वहीं, जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि सभी केंद्रों पर मतदान शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो रहा है। इस दौरान पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भी अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

  • भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर

    भोपाल को मिली आधुनिक AC ई-बसों की सौगात, तीन रूटों पर शुरू हुई सेवा, सिर्फ ₹7 से करें आरामदायक सफर


    भोपाल । राजधानी भोपाल की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। शहर की सड़कों पर पहली बार वातानुकूलित इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो गया है। टिकटिंग सॉफ्टवेयर की सफल टेस्टिंग और खाली बसों के ट्रायल रन के बाद गुरुवार सुबह से इन बसों में आम यात्रियों का सफर भी शुरू हो गया। शुरुआती चरण में तीन प्रमुख रूटों पर 10 एसी ई बसें चलाई जा रही हैं। सबसे खास बात यह है कि यात्रियों को एयर कंडीशनर सुविधा का लाभ लेने के लिए कोई अतिरिक्त किराया नहीं देना होगा। न्यूनतम किराया 7 रुपए और अधिकतम 40 रुपए निर्धारित किया गया है जो पहले से संचालित लाल सिटी बसों के बराबर ही है।

    नई इलेक्ट्रिक बसों का संचालन चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होते हुए बैरागढ़ और चिचली तक तथा चिरायु हॉस्पिटल से डीबी मॉल मेट्रो स्टेशन होकर कोच फैक्ट्री तक किया जा रहा है। इसके अलावा कोलार से एमपी नगर के बीच भी तीन बसें चलाई जा रही हैं जिससे शहर के हजारों यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    ई बसों की शुरुआत से उन यात्रियों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा जो रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं। कोलार निवासी ममता जोशी ने बताया कि उन्होंने नयापुरा से एमपी नगर तक एसी बस में सफर किया और केवल 17 रुपए किराया लगा। उनके अनुसार सफर पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आरामदायक और सुविधाजनक रहा।

    इन इलेक्ट्रिक बसों में आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। पहली बार दिव्यांग यात्रियों के लिए हाइड्रोलिक डोर की व्यवस्था की गई है जिससे व्हीलचेयर या ट्राइसाइकिल के साथ आसानी से बस में चढ़ा और उतरा जा सकेगा। बस के भीतर इतनी जगह भी उपलब्ध कराई गई है कि दो व्हीलचेयर एक साथ खड़ी रह सकें। इसके अलावा प्रत्येक बस में छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं जिनकी निगरानी कंट्रोल रूम से की जाएगी ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    भोपाल की ट्रैफिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इन बसों का आकार भी विशेष रूप से तैयार किया गया है। नई इलेक्ट्रिक बसों की लंबाई करीब 9 मीटर है जबकि पुरानी सिटी बसें लगभग 12 मीटर लंबी थीं। कम लंबाई होने के कारण ये बसें संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में आसानी से संचालित हो सकेंगी और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी।

    फिलहाल शहर में 30 इलेक्ट्रिक बसें पहुंच चुकी हैं जिनमें से पहले चरण में 10 बसों का संचालन शुरू किया गया है। दूसरे चरण में 10 और बसें सड़कों पर उतरेंगी जबकि 15 अगस्त को प्रदेश स्तरीय लोकार्पण कार्यक्रम के बाद सभी 30 बसें नियमित रूप से यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगी। इसके साथ ही अगले 10 से 12 दिनों में 20 और नई इलेक्ट्रिक बसें भोपाल पहुंचने की संभावना है जिससे शहर का इलेक्ट्रिक बस बेड़ा और मजबूत होगा।

    इन बसों के संचालन के लिए बैरागढ़ डिपो में आधुनिक चार्जिंग स्टेशन तैयार किए गए हैं जहां 11 चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए गए हैं। इससे नियमित संचालन के दौरान बसों की चार्जिंग में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। नगर निगम का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते उपयोग से प्रदूषण में कमी आएगी और शहर के लोगों को सुरक्षित आरामदायक तथा पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की सुविधा मिलेगी।

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने किया आत्मसमर्पण, अब तेज होगी राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सोनम ने किया आत्मसमर्पण, अब तेज होगी राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई


    इंदौर । इंदौर के चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मेघालय के शिलॉन्ग स्थित अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। कोर्ट में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को उसकी जमानत रद्द करते हुए तीन सप्ताह के भीतर संबंधित अदालत में सरेंडर करने का आदेश दिया था। निर्धारित समय सीमा पूरी होने से पहले ही सोनम ने अदालत पहुंचकर आत्मसमर्पण कर दिया।

    सोनम के सरेंडर के बाद मृतक राजा रघुवंशी के भाई विपिन रघुवंशी ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने मेघालय सरकार और जांच एजेंसियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा था कि हाईकोर्ट और ट्रायल कोर्ट ने केवल तकनीकी आधार पर जमानत देकर गलती की थी। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी के दौरान कारणों की जानकारी दिए जाने में यदि कोई सीमित कमी रही भी हो तो केवल उसी आधार पर आरोपी को जमानत देना उचित नहीं माना जा सकता।

    सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 22 के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण बताना आवश्यक है लेकिन इस मामले में यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी को पूरी तरह से जानकारी नहीं दी गई थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि गिरफ्तारी के आधार बिल्कुल न बताना और कुछ जानकारियों में तकनीकी कमी होना दोनों अलग-अलग परिस्थितियां हैं। इसलिए केवल प्रक्रिया संबंधी आपत्तियों के आधार पर जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता।

    सर्वोच्च अदालत ने यह भी कहा कि सोनम ने मजिस्ट्रेट के समक्ष गिरफ्तारी के कारणों और संबंधित दस्तावेज प्राप्त होने की पुष्टि की थी। यदि जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की कमी भी हो तो कानून जांच एजेंसी को दोबारा कार्रवाई करने का अधिकार देता है। ऐसे में तकनीकी पहलुओं के आधार पर जमानत देना न्यायोचित नहीं माना जा सकता।

    जस्टिस एमएम सुंदरेशन और जस्टिस पीबी वरेले की पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है और आरोपी की मेरिट के आधार पर जमानत याचिकाएं पहले ही खारिज हो चुकी हैं। इस चरण में आरोपी का जेल से बाहर रहना ट्रायल को प्रभावित कर सकता है। इसी कारण अदालत ने हाईकोर्ट का जमानत आदेश रद्द करते हुए सोनम को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

    सुप्रीम कोर्ट ने मेघालय पुलिस को यह भी निर्देश दिया है कि राजा रघुवंशी हत्याकांड की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी करने का प्रयास किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में ट्रायल पूरा नहीं होता है तो आरोपी कानून के तहत दोबारा जमानत के लिए आवेदन कर सकती है।

    सोनम के आत्मसमर्पण के साथ अब इस बहुचर्चित हत्याकांड की कानूनी प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है। जांच एजेंसियों और पीड़ित परिवार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि अदालत में सुनवाई तय समय सीमा के भीतर पूरी हो और मामले में न्यायिक प्रक्रिया जल्द अपने अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचे।

  • बस की टक्कर से ऑटो चालक की मौत करंट लगने से युवक ने तोड़ा दम फूड डिलीवरी बॉय ने उठाया आत्मघाती कदम

    बस की टक्कर से ऑटो चालक की मौत करंट लगने से युवक ने तोड़ा दम फूड डिलीवरी बॉय ने उठाया आत्मघाती कदम


    इंदौर । इंदौर में बुधवार रात और गुरुवार सुबह अलग-अलग इलाकों में हुई तीन दर्दनाक घटनाओं ने शहर को झकझोर दिया। एक ओर सड़क हादसे में ऑटो चालक की मौत हो गई तो दूसरी ओर पानी की मोटर चालू करते समय करंट लगने से एक युवक ने दम तोड़ दिया। वहीं लसूड़िया क्षेत्र में एक फूड डिलीवरी बॉय का शव फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने तीनों मामलों में जांच शुरू कर दी है।

    पहली घटना तिलक नगर थाना क्षेत्र की है जहां निजी ट्रेवल्स की बस की टक्कर से 24 वर्षीय राजा गोयल की मौत हो गई। राजा अपने दोस्त मांझी के साथ बाइक से पिपल्याहाना स्थित एक दुकान पर सामान लेने गया था। देर रात लौटते समय तेज रफ्तार बस ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन डॉक्टरों ने राजा को मृत घोषित कर दिया जबकि उसके साथी का इलाज जारी है।

    मृतक राजा शांति नगर मूसाखेड़ी का रहने वाला था और पेशे से ऑटो चालक था। उसके परिवार में पत्नी ढाई साल का बेटा और बड़ा भाई हैं। पुलिस ने हादसे के बाद बस को जब्त कर चालक को हिरासत में ले लिया है। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

    दूसरी घटना आजाद नगर थाना क्षेत्र के इंदिरा एकता नगर की है। यहां 25 वर्षीय वसीम अपने घर में पानी की मोटर चालू कर रहा था। इसी दौरान अचानक उसे तेज करंट लग गया और वह जमीन पर गिर पड़ा। आसपास के लोग और परिजन उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन चिकित्सक उसकी जान नहीं बचा सके।

    वसीम भी ऑटो चालक था और अपने परिवार का मुख्य सहारा माना जाता था। उसके परिवार में दो छोटे बच्चे भाई और बहन हैं। पुलिस ने मामले में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है और बिजली के करंट लगने की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

    तीसरी घटना लसूड़िया थाना क्षेत्र की है जहां 22 वर्षीय रजनीश ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी। रजनीश मूल रूप से कटनी जिले का रहने वाला था और करीब छह महीने पहले रोजगार की तलाश में इंदौर आया था। वह अपने बड़े भाई शुभम के साथ किराए के मकान में रहकर फूड डिलीवरी का काम करता था।

    बुधवार देर रात जब शुभम काम से वापस घर लौटा तो काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद मकान मालिक की मदद से कमरे का ताला तोड़ा गया। अंदर रजनीश का शव फंदे से लटका मिला। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    पुलिस ने मृतक का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में आत्महत्या के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस परिजनों और परिचितों से पूछताछ कर सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    इन तीनों घटनाओं ने अलग-अलग परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। सड़क सुरक्षा बिजली उपकरणों के सुरक्षित उपयोग और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। पुलिस ने सभी मामलों में जांच जारी रखते हुए लोगों से सतर्कता बरतने और किसी भी तरह की परेशानी होने पर समय रहते मदद लेने की अपील की है।