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  • अभिनेता मुश्ताक खान का 56 साल की उम्र में निधन, लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे मशहूर कॉमेडियन

    अभिनेता मुश्ताक खान का 56 साल की उम्र में निधन, लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे मशहूर कॉमेडियन

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के अभिनेता और कॉमेडियन मुश्ताक खान का गुरुवार को 56 साल की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से कैंसर से जूझ रहे थे और उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत में शोक की लहर है। बताया गया कि उन्होंने गुरुवार शाम करीब 7 बजे अंतिम सांस ली।

    मुश्ताक खान के निधन की पुष्टि अभिनेता और कॉमेडियन सुनील पाल ने की। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े संगठन के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने भी उनके निधन की पुष्टि की। जानकारी के अनुसार, मुश्ताक खान की बीमारी काफी गंभीर हो चुकी थी और कैंसर आखिरी चरण में पहुंच गया था।

    मुश्ताक खान ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई चर्चित हिंदी फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने मुख्य भूमिकाओं के साथ-साथ सपोर्टिंग और कॉमिक किरदारों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी खासियत यह थी कि सीमित स्क्रीन टाइम में भी वह अपने अभिनय और कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का ध्यान खींच लेते थे।

    उनके फिल्मी सफर में ‘आशिकी’, ‘हम हैं राही प्यार के’, ‘हेरा फेरी’, ‘जोड़ी नंबर 1’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘वेलकम’ और ‘राउडी राठौर’ जैसी चर्चित फिल्में शामिल रहीं। इसके अलावा उन्होंने बाद के वर्षों में ‘गदर 2’, ‘बधाई दो’ और ‘स्त्री 2’ जैसी फिल्मों में भी काम किया।

    मुश्ताक खान की सबसे लोकप्रिय भूमिकाओं में अक्षय कुमार और कैटरीना कैफ की फिल्म ‘वेलकम’ का बल्लू किरदार शामिल रहा। वर्ष 2007 में रिलीज हुई इस फिल्म में उनका किरदार दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय हुआ था। फिल्म का उनका चर्चित कॉमिक संवाद और उससे जुड़ा दृश्य लंबे समय तक लोगों की यादों में बना रहा। बाद में भी यह दृश्य सोशल मीडिया और मीम्स के जरिए चर्चा में आता रहा।

    हालांकि, मुश्ताक खान के करियर की पहचान केवल एक किरदार तक सीमित नहीं रही। कई दशकों तक उन्होंने फिल्मों और टेलीविजन में अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाईं। छोटे और सहायक किरदारों को अपने अंदाज से प्रभावशाली बनाना उनकी अभिनय शैली की प्रमुख विशेषता रही।

    मुश्ताक खान ने फिल्मों के अलावा टेलीविजन पर भी काम किया। वह लोकप्रिय टीवी शो ‘कुछ रंग प्यार के ऐसे भी’ में नजर आए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनका स्क्रीन डेब्यू वर्ष 1980 में आई फिल्म ‘अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है’ से हुआ था।

    मुश्ताक खान का जन्म 31 दिसंबर 1969 को मध्य प्रदेश में हुआ था। उनका परिवार मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर से जुड़ा रहा है। उनके परिवार में पत्नी सलमा खान और दो बेटे हैं। उनके निधन से हिंदी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसने लंबे समय तक सहायक और हास्य भूमिकाओं के जरिए दर्शकों का मनोरंजन किया।

  • 17 साल की उम्र में जैकी श्रॉफ संग काम करने से नर्वस थीं करिश्मा कपूर, पुराने अनुभव को किया याद

    17 साल की उम्र में जैकी श्रॉफ संग काम करने से नर्वस थीं करिश्मा कपूर, पुराने अनुभव को किया याद

    नई दिल्ली ।अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने अपने शुरुआती फिल्मी करियर के दिनों को याद करते हुए जैकी श्रॉफ के साथ काम करने का अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने जैकी श्रॉफ के साथ 1992 में रिलीज हुई फिल्म ‘पुलिस ऑफिसर’ में काम किया था, तब वह केवल 17 साल की थीं। यह उनके करियर के शुरुआती दौर की फिल्म थी और उस समय बड़े अभिनेता के साथ काम करने को लेकर वह काफी नर्वस हो गई थीं।

    जैकी श्रॉफ एक डांस रियलिटी शो के पांचवें सीजन में बतौर अतिथि पहुंचे थे। इसी दौरान करिश्मा कपूर ने उनके साथ अपने पुराने अनुभव को याद किया। उन्होंने बताया कि ‘पुलिस ऑफिसर’ उनके शुरुआती प्रोजेक्ट्स में शामिल थी। यह फिल्म उन्होंने ‘प्रेम कैदी’ के बाद की थी और उस समय उनकी उम्र महज 17 वर्ष थी।

    करिश्मा ने फिल्म के एक बड़े डांस नंबर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि फिल्म में ‘देखो ये लड़की करंट मारती है’ गाना था, जिसमें बड़ी संख्या में डांसर्स शामिल थे। उनके लिए यह अनुभव इसलिए भी अलग था क्योंकि पहली बार वह इतने सारे डांसर्स और किसी बड़े स्टार के साथ एक साथ काम कर रही थीं।

    अभिनेत्री ने बताया कि इस वजह से वह शूटिंग के दौरान काफी डरी हुई और नर्वस थीं। शुरुआती करियर में किसी बड़े अभिनेता के साथ काम करना और इतने बड़े डांस सीक्वेंस का हिस्सा बनना उनके लिए नया अनुभव था। उन्होंने जैकी श्रॉफ के साथ काम करने को सम्मान और खुशी का अवसर भी बताया।

    करिश्मा ने जैकी श्रॉफ के प्रति अपना सम्मान जताते हुए कहा कि उनके साथ काम करने का अनुभव हमेशा उनके लिए खास रहेगा। पुराने प्रोजेक्ट को याद करते हुए उन्होंने उस दौर की अपनी भावनाओं को भी साझा किया और बताया कि उस समय वह काफी घबराई हुई थीं।

    इस दौरान जैकी श्रॉफ ने भी करिश्मा कपूर की तारीफ की। उन्होंने उन्हें शानदार अभिनेत्री बताते हुए उनकी प्रतिभा और बहुमुखी क्षमता की प्रशंसा की। जैकी श्रॉफ ने कहा कि करिश्मा एक मल्टीटैलेंटेड कलाकार हैं और वह अलग-अलग तरह के काम कर सकती हैं।

    उन्होंने करिश्मा के साथ काम करने को अपने लिए भी सम्मान और खुशी का अनुभव बताया। जैकी श्रॉफ ने उनके परिवार का भी जिक्र किया और कहा कि यह परिवार फिल्म इंडस्ट्री का मजबूत हिस्सा रहा है। उन्होंने करिश्मा और उनके परिवार के प्रति अपना सम्मान और गर्व व्यक्त किया।

    करिश्मा कपूर और जैकी श्रॉफ ने वर्ष 1992 में आई फिल्म ‘पुलिस ऑफिसर’ में साथ काम किया था। फिल्म का निर्देशन अशोक गायकवाड़ ने किया था। इसमें अरुणा ईरानी और परेश रावल भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में थे।

    फिल्म की कहानी जय नाम के एक ईमानदार और मेहनती पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी में जय की हत्या के बाद किशन नाम का एक ठग उसकी जगह लेता है। इसके बाद वह अपने भाई की मौत का बदला लेने की कोशिश करता है। फिल्म में करिश्मा और जैकी की जोड़ी भी उस दौर के दर्शकों के बीच चर्चा में रही थी।

  • यात्रा पर निकलने से पहले भूलकर भी न छोड़ें ये जरूरी तैयारी इन आसान टिप्स से सफर बनेगा आरामदायक

    यात्रा पर निकलने से पहले भूलकर भी न छोड़ें ये जरूरी तैयारी इन आसान टिप्स से सफर बनेगा आरामदायक


    नई दिल्ली। यात्रा पर निकलना हर किसी के लिए उत्साह से भरा होता है लेकिन सफर को यादगार और आरामदायक बनाने के लिए सिर्फ टिकट और होटल की बुकिंग कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। घर से निकलने से पहले कुछ जरूरी तैयारियां कर लेना बेहद काम आता है। चाहे यात्रा कुछ दिनों की हो या लंबी ट्रिप की हो यदि पहले से सही प्लानिंग की जाए तो रास्ते में आने वाली कई परेशानियों से बचा जा सकता है। सबसे पहले यात्रा से जुड़े जरूरी दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए। टिकट होटल की बुकिंग पहचान पत्र और जरूरत पड़ने पर पासपोर्ट वीजा जैसे दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए। डिजिटल कॉपी फोन या ईमेल में रखना भी उपयोगी हो सकता है।

    यात्रा शुरू करने से पहले जिस जगह जाना है वहां के मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेना भी जरूरी है। मौसम के अनुसार कपड़े और जरूरी सामान पैक करने से सफर आसान हो जाता है। ठंडे स्थान पर जा रहे हैं तो गर्म कपड़े और जरूरी दवाएं साथ रखें जबकि गर्म या बारिश वाले इलाके के लिए उसी हिसाब से सामान तैयार करें। अचानक मौसम बदलने की स्थिति में काम आने वाली चीजों को भी बैग में जगह देनी चाहिए।

    सामान पैक करते समय जरूरत और वजन दोनों का ध्यान रखें। बहुत ज्यादा सामान लेकर चलने से यात्रा के दौरान परेशानी बढ़ सकती है। कपड़ों के साथ चार्जर पावर बैंक जरूरी दवाएं टूथब्रश और व्यक्तिगत इस्तेमाल की चीजें अलग से व्यवस्थित करना बेहतर रहता है। जरूरी सामान ऐसी जगह रखें जहां जरूरत पड़ने पर उसे तुरंत निकाला जा सके। यदि यात्रा हवाई जहाज या ट्रेन से है तो टिकट और पहचान संबंधी दस्तावेज आसानी से उपलब्ध रखें।

    पैसों को लेकर भी पहले से तैयारी कर लेना समझदारी है। यात्रा के लिए अनुमानित बजट तैयार करें और उसमें यात्रा होटल भोजन स्थानीय परिवहन और घूमने फिरने का खर्च शामिल करें। पूरी रकम एक ही जगह रखने के बजाय जरूरी धन को अलग अलग सुरक्षित स्थानों पर रखना बेहतर हो सकता है। डिजिटल पेमेंट की सुविधा उपयोगी है लेकिन नेटवर्क या तकनीकी समस्या की स्थिति के लिए कुछ वैकल्पिक व्यवस्था रखना भी काम आ सकता है।

    मोबाइल फोन को यात्रा से पहले पूरी तरह चार्ज कर लें और जरूरी नंबर सेव कर लें। होटल या यात्रा से जुड़े संपर्क नंबर के साथ परिवार के किसी सदस्य या करीबी व्यक्ति को अपनी यात्रा की जानकारी देना भी उपयोगी है। भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल पर पर्यटकों के लिए आपातकालीन स्थिति में 112 राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर और 1363 पर्यटन हेल्पलाइन नंबर दिए गए हैं।

    स्वास्थ्य से जुड़ी तैयारियों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति नियमित दवा लेता है तो पर्याप्त दवा साथ रखनी चाहिए। लंबी यात्रा में पानी पीते रहना और जरूरत के अनुसार आराम करना जरूरी है। खाने पीने के मामले में भी सफाई का ध्यान रखना चाहिए। यात्रा के दौरान स्थानीय भोजन का आनंद लेते समय अपनी सहनशीलता और स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहतर है।

    यात्रा से पहले घर की सुरक्षा की तैयारी करना भी जरूरी है। बिजली के गैर जरूरी उपकरण बंद कर दें गैस की जांच कर लें और घर को लंबे समय के लिए खाली छोड़ रहे हैं तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी दें। यात्रा की योजना और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी परिवार के सदस्य के पास भी होनी चाहिए।

    इसके अलावा यात्रा के दौरान स्थानीय नियमों और पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। डिजिटल टिकट और दस्तावेजों का इस्तेमाल करने से कागज की जरूरत कम हो सकती है। पर्यटन स्थलों पर कचरा न फैलाना और सिंगल यूज प्लास्टिक से बचना जिम्मेदार यात्री की पहचान है।

    इस तरह यात्रा से पहले थोड़ी सी तैयारी सफर को काफी आसान बना सकती है। टिकट और दस्तावेजों की जांच से लेकर मौसम के अनुसार पैकिंग बजट स्वास्थ्य और सुरक्षा तक हर छोटी बात पर ध्यान देना चाहिए। जब तैयारी पहले से पूरी होती है तो सफर के दौरान अनावश्यक तनाव कम रहता है और यात्री अपने सफर का बेहतर तरीके से आनंद ले सकता है।

  • बैंकों की 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल, ग्राहकों के लिए जारी हुई जरूरी बैंकिंग सलाह

    बैंकों की 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की हड़ताल, ग्राहकों के लिए जारी हुई जरूरी बैंकिंग सलाह

    नई दिल्ली ।देश में 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की प्रस्तावित बैंक हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना है। हड़ताल के मद्देनजर ग्राहकों को अपने जरूरी बैंकिंग काम पहले ही निपटाने की सलाह दी गई है। इस दौरान खास तौर पर बैंक शाखाओं में होने वाले काम प्रभावित हो सकते हैं।

    हड़ताल की तारीखों से पहले 26 सितंबर को सितंबर का चौथा शनिवार और 27 सितंबर को रविवार है। ऐसे में सामान्य बैंकिंग व्यवस्था के कारण शाखाओं से जुड़े काम पहले ही प्रभावित रहेंगे। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल होने से ग्राहकों को लगातार कई दिनों तक शाखा संबंधी काम के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।

    इसी स्थिति को देखते हुए ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे हड़ताल शुरू होने से पहले अपने जरूरी लेनदेन और बैंक से जुड़े महत्वपूर्ण काम पूरे कर लें। इससे हड़ताल के दौरान शाखाओं में संभावित व्यवधान के कारण होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।

    ग्राहकों के लिए यह भी स्पष्ट किया गया है कि इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध रहेंगी। एटीएम और ग्राहक सेवा केंद्रों के जरिए मिलने वाली सुविधाओं का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा मोबाइल बैंकिंग एप्लीकेशन के माध्यम से उपलब्ध वित्तीय सेवाओं का उपयोग जारी रखा जा सकता है।

    इंटरनेट बैंकिंग के जरिए कई जरूरी वित्तीय काम घर बैठे किए जा सकते हैं। इसी तरह यूपीआई के माध्यम से भुगतान और धनराशि से जुड़े कई सामान्य लेनदेन किए जा सकते हैं। इसलिए हड़ताल की अवधि में ग्राहकों को जहां संभव हो, डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।

    प्रस्तावित हड़ताल को लेकर बैंक कर्मचारियों की यूनियनों की ओर से कई मांगें रखी गई हैं। इनमें पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू करना प्रमुख मांग है। फिलहाल बैंकों में रविवार के अलावा दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है। कर्मचारी सभी शनिवार को छुट्टी देने की व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं।

    पांच दिन के कार्य सप्ताह को लेकर मार्च 2024 में हुए वेतन समझौते के दौरान सहमति बनी थी, लेकिन कर्मचारियों के अनुसार इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसके अलावा प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन यानी पीएलआई व्यवस्था को लेकर भी यूनियनों ने विरोध जताया है।

    कर्मचारी संगठनों का कहना है कि संशोधित पीएलआई व्यवस्था में बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों के बीच प्रोत्साहन को लेकर अंतर है। कर्मचारियों के विरोध के बाद सितंबर 2026 में इस संशोधित व्यवस्था को फिलहाल रोक दिया गया है।

    ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 27 सितंबर, रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में सामान्य बैंकिंग कामकाज की अनुमति दी गई है। इस दौरान शाखाएं, कार्यालय, एटीएम से जुड़ी शाखाएं और करेंसी चेस्ट संचालित रहेंगे। इसका उद्देश्य लगातार कई दिनों तक बैंकिंग सेवाओं में संभावित व्यवधान को कम करना है।

    इससे पहले 11 सितंबर को बैंक यूनियनों की ओर से एक दिन की हड़ताल की गई थी। अब 28 से 30 सितंबर तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल प्रस्तावित है। यूनियनों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो 26 अक्टूबर से देशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा सकती है।

  • फर्जी पासपोर्ट रैकेट में बड़ा खुलासा 70 में करीब 50 पासपोर्ट सिर्फ तीन गवाहों से बने पैसों के लेनदेन की जांच तेज

    फर्जी पासपोर्ट रैकेट में बड़ा खुलासा 70 में करीब 50 पासपोर्ट सिर्फ तीन गवाहों से बने पैसों के लेनदेन की जांच तेज

    ग्वालियर । मध्य प्रदेश में बांग्लादेशी नागरिकों के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पासपोर्ट तैयार कराने वाले नेटवर्क की जांच में एसटीएफ को पैसों के लेनदेन से जुड़े अहम सुराग मिले हैं। जांच एजेंसी के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में फर्जीवाड़े से हासिल रकम को एक ऐसे बैंक खाते के जरिए घुमाया जाता था जो कागजों में एक बौद्ध भिक्षु के नाम पर था। एसटीएफ का आरोप है कि खाते का वास्तविक संचालन गिरोह के मास्टरमाइंड रियाल चौधरी उर्फ भंते मैतानंद के पास था।

    जांच के अनुसार विदिशा की एसबीआई शाखा में वर्ष 2021-22 के दौरान यह बैंक खाता खोला गया था। खाता बौद्ध भिक्षु गुलाब राय गौतम के नाम पर दर्ज है लेकिन इसमें रियाल चौधरी का मोबाइल नंबर इस्तेमाल होने की बात सामने आई है। एसटीएफ के मुताबिक इस खाते का इस्तेमाल फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेज तैयार कराने से जुड़े पैसों के लेनदेन के लिए किया जाता था। जांच एजेंसी अब खाते की पूरी बैंक स्टेटमेंट और उससे जुड़े ट्रांजेक्शन की जानकारी खंगाल रही है।

    एसटीएफ के अनुसार रियाल चौधरी ने गुलाब राय गौतम से यह बैंक खाता हर महीने 10 हजार रुपए किराए पर लिया था। फर्जीवाड़े से मिलने वाली रकम पहले इसी खाते में जमा होने की बात सामने आई है। इसके बाद दस्तावेज तैयार कराने और पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया में शामिल लोगों के खातों में रकम भेजी जाती थी। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खाते से किन लोगों को भुगतान किया गया और इस नेटवर्क में पैसों का पूरा रास्ता क्या था।

    जांच में एक और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। एसटीएफ के मुताबिक मध्य प्रदेश में चिह्नित 70 फर्जी पासपोर्ट में से करीब 50 पासपोर्ट केवल तीन लोगों की गवाही के आधार पर जारी हुए। इन नामों में गया प्रसाद गौतम गुलाब राय और रियाल चौधरी उर्फ भंते मैतानंद शामिल हैं। जांच एजेंसी के अनुसार अधिकांश पासपोर्ट आवेदनों में इन्हीं लोगों से जुड़े मोबाइल नंबर दर्ज थे और पते के तौर पर बौद्ध मठों का इस्तेमाल किया गया था।

    एसटीएफ ने अब तक इस मामले में बांग्लादेशी नागरिकों के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले बिचौलियों और कथित तौर पर मदद करने वाले लोगों समेत 75 आरोपियों को चिह्नित किया है। इनमें से 19 आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। इन फरार आरोपियों पर 20 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया है। इनमें डबरा के गुलाब राय समेत भोपाल और बैतूल से जुड़े आरोपी शामिल हैं।

    जांच एजेंसी के अनुसार बैतूल भोपाल छिंदवाड़ा के पांढुर्णा और डबरा के मठों के पतों का इस्तेमाल फर्जी पासपोर्ट बनवाने में किया गया। भोपाल के अन्नानगर से 40 डबरा से 17 बैतूल के आमला बौद्ध मठ से 11 और छिंदवाड़ा पांढुर्णा क्षेत्र से 2 मामलों की पहचान की गई है।

    अब एसटीएफ पासपोर्ट सेवा केंद्र से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेजों के सत्यापन और पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में कहीं किसी स्तर पर अनियमितता हुई थी या नहीं। फरार आरोपियों की तलाश में एसटीएफ की टीमें असम महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश दिल्ली और पंजाब तक भेजी गई हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क से जुड़े लोगों और पैसों के पूरे लेनदेन की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • FASTag चोरी या गुम होने पर तुरंत करें ये जरूरी काम, नहीं तो टोल भुगतान के साथ खाते से पैसे कटने का खतरा

    FASTag चोरी या गुम होने पर तुरंत करें ये जरूरी काम, नहीं तो टोल भुगतान के साथ खाते से पैसे कटने का खतरा

    नई दिल्ली ।FASTag ने राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर टोल भुगतान की प्रक्रिया को काफी आसान बनाया है। वाहन की विंडस्क्रीन पर लगा FASTag संबंधित बैंक खाते या वॉलेट से जुड़ा होता है और टोल प्लाजा से गुजरते समय निर्धारित राशि अपने आप कट जाती है। ऐसे में अगर FASTag चोरी हो जाए या वाहन से निकाल लिया जाए तो समय रहते उसे ब्लॉक करना जरूरी हो जाता है।

    FASTag के चोरी या गुम होने की जानकारी मिलते ही सबसे पहला कदम उसे बंद करवाना होना चाहिए। इसके लिए FASTag जारी करने वाले बैंक के टोल-फ्री कस्टमर केयर नंबर पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है। बैंक को FASTag के चोरी या गुम होने की जानकारी देकर उसे हॉटलिस्ट या ब्लॉक करने का अनुरोध किया जा सकता है।

    अगर संबंधित बैंक का कस्टमर केयर नंबर उपलब्ध नहीं है या तत्काल संपर्क करने में परेशानी हो रही है तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की हेल्पलाइन 1033 पर भी संपर्क किया जा सकता है। इस नंबर के माध्यम से FASTag की हॉटलिस्टिंग या ब्लॉकिंग के लिए अनुरोध दर्ज कराया जा सकता है।

    FASTag को ऑनलाइन भी बंद किया जा सकता है। इसके लिए जिस बैंक या वॉलेट से FASTag जुड़ा है, उसके आधिकारिक मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल पर लॉगिन करना होगा। इसके बाद FASTag से संबंधित सेक्शन में जाकर मैनेज FASTag या ब्लॉक/डीएक्टिवेट जैसे विकल्प को तलाशना होगा।

    ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान FASTag के बंद करने का कारण पूछा जा सकता है। ऐसी स्थिति में चोरी या गुम होने से संबंधित विकल्प का चयन करके FASTag को डीएक्टिवेट किया जा सकता है। इससे चोरी हुए या गुम FASTag के आगे इस्तेमाल की आशंका को कम करने में मदद मिलती है।

    अगर FASTag के साथ वाहन भी चोरी हुआ है या केवल FASTag ही चोरी किया गया है तो पुलिस में शिकायत दर्ज कराना भी जरूरी कदम है। ऑनलाइन FIR या पुलिस शिकायत दर्ज कराने से चोरी की घटना का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार हो जाता है। इससे भविष्य में चोरी किए गए FASTag के किसी गलत इस्तेमाल से संबंधित स्थिति में वाहन मालिक के पास शिकायत का रिकॉर्ड मौजूद रहेगा।

    पुलिस शिकायत की जरूरत नया FASTag जारी कराने के दौरान भी पड़ सकती है। संबंधित बैंक नया FASTag जारी करने के लिए पुलिस रिपोर्ट की कॉपी मांग सकता है। इसलिए चोरी या गुम होने की स्थिति में ब्लॉक कराने के साथ शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया भी पूरी करना उपयोगी है।

    पुराना FASTag पूरी तरह ब्लॉक होने के बाद वाहन मालिक संबंधित बैंक से नया FASTag जारी करने का अनुरोध कर सकता है। नया FASTag मिलने और सक्रिय होने के बाद पुराने FASTag से जुड़े बकाया वॉलेट बैलेंस के संबंध में बैंक की प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

    पुराने FASTag में मौजूद राशि को लेकर भी बैंक से जानकारी लेना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद बचा हुआ वॉलेट बैलेंस नए FASTag से जुड़े खाते में स्थानांतरित किया जा सकता है। इसलिए FASTag चोरी या गुम होने पर देरी करने के बजाय पहले उसे बंद कराना, फिर पुलिस शिकायत और नया FASTag जारी कराने की प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण है।

  • जमुई नाबालिग की तस्वीर विवाद पर तेजस्वी ने CM सम्राट चौधरी के खिलाफ सजा की मांग की, जानिए POCSO के कड़े प्रावधान

    जमुई नाबालिग की तस्वीर विवाद पर तेजस्वी ने CM सम्राट चौधरी के खिलाफ सजा की मांग की, जानिए POCSO के कड़े प्रावधान

    नई दिल्ली ।बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से जुड़े एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि जमुई की एक नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात के दौरान ली गई तस्वीर को इस तरह सार्वजनिक किया गया, जिससे बच्ची की पहचान उजागर होने की स्थिति बनी। विवाद सामने आने के बाद पोस्ट को हटा दिया गया। इस मामले को लेकर विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई और सजा की मांग की गई है।

    नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मामले में पॉक्सो यानी बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून का हवाला दिया है। उनका कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना कानून के प्रावधानों के दायरे में आता है और इसके लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हालांकि, किसी व्यक्ति के खिलाफ कानूनी दोष सिद्ध होना जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

    दरअसल, जमुई जिले में 19 सितंबर को दसवीं कक्षा की एक नाबालिग छात्रा और उसके दोस्त के साथ युवकों द्वारा कथित तौर पर छेड़खानी और बदसलूकी की घटना सामने आई थी। घटना से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ था। मामले ने कानून-व्यवस्था और नाबालिग पीड़िता की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए।

    इसी मामले के बाद मुख्यमंत्री ने पीड़िता और उसके परिवार से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद जारी किए गए पोस्ट में बच्ची और उसके परिवार को न्याय का भरोसा दिलाने की बात कही गई थी। पोस्ट में यह भी कहा गया था कि मामले में दोषियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल के जरिए एक महीने के भीतर कठोर सजा सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी। विवाद इस बात को लेकर हुआ कि पोस्ट में पीड़िता की पहचान छिपाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे।

    POCSO कानून वर्ष 2012 में बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के उद्देश्य से लागू किया गया था। इसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को संरक्षण दिया जाता है। कानून में बच्चों के खिलाफ होने वाले विभिन्न यौन अपराधों की पहचान, जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उनके हितों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

    इस कानून में नाबालिग पीड़ित या पीड़िता की पहचान और निजता को लेकर भी विशेष सुरक्षा दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी बच्चे को कानूनी कार्रवाई के दौरान ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े, जिससे उसकी पहचान सार्वजनिक हो या उसकी गरिमा प्रभावित हो।

    POCSO की धारा 23 इसी विषय से संबंधित है। इसके तहत बच्चे से जुड़े मामले की रिपोर्टिंग या टिप्पणी करते समय उसकी निजता और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है। ऐसी जानकारी सार्वजनिक करने पर रोक है, जिससे बच्चे की पहचान सामने आ सकती है।

    पहचान के दायरे में बच्चे का नाम, पता, तस्वीर, परिवार से जुड़ी जानकारी, स्कूल, पड़ोस या ऐसी कोई अन्य जानकारी शामिल हो सकती है, जिससे उसकी पहचान का पता लगाया जा सके। कानून का उद्देश्य विशेष रूप से यह है कि यौन अपराध से प्रभावित बच्चे की पहचान सार्वजनिक न हो और उसकी निजता सुरक्षित रहे।

    धारा 23 के प्रावधानों के उल्लंघन पर छह महीने से एक वर्ष तक की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान बताया गया है। हालांकि किसी विशेष मामले में यह धारा लागू होती है या नहीं, यह संबंधित तथ्यों, जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर तय किया जाता है।

    जमुई मामले में तस्वीर को लेकर उठे विवाद के बाद अब मुख्य मुद्दा यही है कि नाबालिग की पहचान सार्वजनिक होने के आरोप की कानूनी जांच किस तरह आगे बढ़ती है। राजनीतिक स्तर पर इस मामले को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, जबकि कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण संबंधित प्रक्रिया के बाद ही किया जा सकता है।

  • जयपुर के खोह नागोरियान में पैंथर की हलचल से बढ़ी दहशत, वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों ने की निगरानी की मांग

    जयपुर के खोह नागोरियान में पैंथर की हलचल से बढ़ी दहशत, वायरल वीडियो के बाद ग्रामीणों ने की निगरानी की मांग

    नई दिल्ली । जयपुर के खोह नागोरियान इलाके में पैंथर की हलचल का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि रात के समय इलाके में पैंथर की गतिविधियां देखी गई हैं। इस बीच पैंथर की कथित मौजूदगी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद आसपास के लोगों में डर का माहौल बन गया है।

    स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, इलाके में पैंथर की आवाजाही पहले भी कई बार देखे जाने की बात सामने आती रही है। इस बार पैंथर की गतिविधि कैमरे में कैद होने का दावा किया जा रहा है। वीडियो के सामने आने के बाद ग्रामीणों ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी है और क्षेत्र में सुरक्षा तथा निगरानी बढ़ाने की मांग की है।

    ग्रामीणों का कहना है कि आबादी वाले क्षेत्र के आसपास पैंथर की मौजूदगी चिंता का विषय है। रात के समय लोगों की आवाजाही और आसपास रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों में आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से संभावित पैंथर मूवमेंट वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां नियमित निगरानी रखने की मांग की है।

    स्थानीय लोगों ने इलाके में वन विभाग की गश्त बढ़ाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि संभावित गतिविधियों वाले स्थानों पर नजर रखी जाए, ताकि पैंथर की मौजूदगी और उसके आने-जाने के रास्तों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। इससे आबादी वाले क्षेत्र में पैंथर की आवाजाही की स्थिति पर नजर रखना आसान हो सकता है।

    पैंथर की कथित लगातार गतिविधियों को देखते हुए ग्रामीणों ने कैमरा ट्रैप लगाने की मांग भी की है। उनका कहना है कि कैमरा ट्रैप के माध्यम से इलाके में पैंथर की वास्तविक मौजूदगी और उसके मूवमेंट का पता लगाया जा सकता है। इससे वन विभाग को आगे की कार्रवाई के लिए जरूरी जानकारी मिल सकेगी।

    इसके अलावा ग्रामीणों ने पैंथर को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पैंथर आबादी के आसपास लगातार सक्रिय पाया जाता है तो उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि वन विभाग स्थिति का आकलन कर उचित कार्रवाई करे।

    वायरल वीडियो में रात के अंधेरे में पैंथर जैसी गतिविधि दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में इसकी चर्चा बढ़ गई है। हालांकि, पैंथर की लगातार मौजूदगी और उसके वास्तविक मूवमेंट की स्थिति वन विभाग की निगरानी और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    फिलहाल खोह नागोरियान क्षेत्र में पैंथर की कथित हलचल को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों ने वन विभाग से जल्द निगरानी बढ़ाने, संभावित स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाने और जरूरत पड़ने पर पिंजरा लगाने की मांग की है। वन विभाग की ओर से की जाने वाली निगरानी और आगे की कार्रवाई से ही यह स्पष्ट होगा कि पैंथर इलाके में लगातार सक्रिय है या आसपास के वन क्षेत्र से आबादी की ओर आया है।

  • बेटे के बोन मैरो मैच न होने से खुला महिला से दुष्कर्म का राज, मोरबी में आरोपी पार्षद पति फरार

    बेटे के बोन मैरो मैच न होने से खुला महिला से दुष्कर्म का राज, मोरबी में आरोपी पार्षद पति फरार


    नई दिल्ली ।
    गुजरात के मोरबी में एक महिला ने एक व्यक्ति पर कई वर्षों तक ब्लैकमेल कर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब महिला के कैंसर पीड़ित पति के इलाज के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी की जा रही थी। परिवार के इकलौते बेटे का स्टेम सेल सैंपल लेकर पिता से मिलान कराया गया, लेकिन मेडिकल जांच में दोनों का बोन मैरो मैच नहीं हुआ। इसके बाद परिवार के सामने ऐसा मामला आया, जिसने महिला के लंबे समय से छिपे दर्द को उजागर कर दिया।

    बताया गया है कि इस घटना की शुरुआत करीब छह साल पहले वर्ष 2020 में हुई थी। महिला के पति को बोन कैंसर जैसी गंभीर बीमारी होने का पता चला था। इलाज के लिए तत्काल पैसों की जरूरत थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी। पति के इलाज का खर्च जुटाने के लिए महिला ने महिलाओं के कपड़ों का कारोबार करने वाले शैलेश लक्ष्मण मकवाना से एक लाख रुपये उधार लिए थे।

    महिला का आरोप है कि जब वह समय पर कर्ज की रकम वापस नहीं कर सकी, तब शैलेश मकवाना ने उसकी आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाना शुरू कर दिया। आरोप के मुताबिक, आरोपी ने कर्ज की रकम लौटाने के लिए दबाव बनाया और महिला को डराने-धमकाने के साथ ब्लैकमेल किया। इसके बाद उसने कथित तौर पर महिला के साथ बार-बार दुष्कर्म किया।

    महिला के मुताबिक, पति की बीमारी और परिवार की परिस्थितियों के कारण वह लंबे समय तक इस घटना के बारे में किसी को नहीं बता सकी। सामाजिक बदनामी और पति की नाजुक हालत के कारण उसने कथित तौर पर कई वर्षों तक यह बात अपने तक सीमित रखी।

    समय बीतने के साथ महिला के पति की हालत खराब होती गई। हाल ही में डॉक्टरों ने बोन मैरो ट्रांसप्लांट को इलाज का जरूरी विकल्प बताया। इसके लिए उनके बेटे का स्टेम सेल सैंपल लिया गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह पिता के लिए उपयुक्त है या नहीं। जांच के बाद जब बेटे का बोन मैरो पिता से मैच नहीं हुआ, तो परिवार में सवाल खड़े होने लगे।

    इसके बाद महिला ने पति और परिवार के सामने कथित दुष्कर्म की पूरी घटना बताई। महिला ने आरोप लगाया कि शैलेश मकवाना ने कर्ज और उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर उसे वर्षों तक प्रताड़ित किया और उसके साथ दुष्कर्म करता रहा।

    घटना सामने आने के बाद महिला ने मोरबी के ए-डिवीजन पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने 9 सितंबर को मामले में एफआईआर दर्ज की। आरोपी शैलेश मकवाना मोरबी नगर निगम के वार्ड नंबर 8 की बीजेपी पार्षद का पति बताया गया है। मामला दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गया।

    पुलिस उपाधीक्षक जे. एम. आल के मुताबिक, आरोपी की तलाश के लिए अलग-अलग पुलिस टीमें बनाई गई हैं और कई स्थानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।

    मामले की जांच में अब वैज्ञानिक साक्ष्यों पर भी जोर दिया जा रहा है। पुलिस अदालत से अनुमति लेकर आरोपी शैलेश मकवाना और बच्चे का डीएनए टेस्ट कराने की तैयारी में है। डीएनए जांच और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • ढाबला फंटा के पास तेज रफ्तार टक्कर ने छीनी युवक की जिंदगी, हादसे के बाद कार छोड़कर फरार हुआ चालक

    ढाबला फंटा के पास तेज रफ्तार टक्कर ने छीनी युवक की जिंदगी, हादसे के बाद कार छोड़कर फरार हुआ चालक


    उज्जैन । उज्जैन में गुरुवार रात जावरा-उज्जैन रोड पर हुए सड़क हादसे में एक बाइक सवार युवक की मौत हो गई। हादसा भेरूगढ़ थाना क्षेत्र में ढाबला फंटा के पास रात करीब 11 बजे हुआ। बताया जा रहा है कि इसी दौरान एक चार पहिया वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद वाहन चालक घटनास्थल पर गाड़ी छोड़कर फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

    मृतक की पहचान खेड़ला निवासी कालू पिता हेमा जी बंजारा के रूप में हुई है। हादसे के समय कालू बाइक पर अकेले सवार थे। रात के समय जावरा-उज्जैन रोड पर हुई इस दुर्घटना के बाद आसपास के लोगों में भी हड़कंप की स्थिति बन गई। हादसे की सूचना पुलिस को दी गई जिसके बाद भेरूगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के पहुंचने से पहले ही टक्कर मारने वाला चालक अपना वाहन मौके पर छोड़कर वहां से फरार हो चुका था।

    पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर दुर्घटना में शामिल चार पहिया वाहन को अपने कब्जे में ले लिया। वाहन को जब्त करने के बाद पुलिस अब उसके चालक की पहचान करने की कोशिश कर रही है। पुलिस का मानना है कि जब्त वाहन के आधार पर फरार चालक तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। हादसा किस वजह से हुआ और टक्कर के समय वाहन की गति कितनी थी इन बिंदुओं को लेकर भी जांच की जा रही है।

    भेरूगढ़ थाना प्रभारी शैलेंद्र प्रताप राजावत के अनुसार दुर्घटना के समय बाइक पर सिर्फ कालू सवार थे। हादसे में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। शुक्रवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिवार के सुपुर्द कर दिया गया। इसके बाद परिजन शव को लेकर अपने गांव रवाना हुए।

    हादसे के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ा दी है। अब पुलिस दुर्घटना के कारणों के साथ ही फरार चालक की पहचान करने में जुटी है। मौके पर छोड़े गए चार पहिया वाहन को जांच का अहम आधार माना जा रहा है। पुलिस वाहन से जुड़े दस्तावेजों और अन्य जानकारी के जरिए चालक तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

    जावरा-उज्जैन रोड पर देर रात हुए इस हादसे ने एक परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना की वास्तविक वजह और फरार चालक की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस ने वाहन जब्त कर लिया है और फरार चालक की तलाश जारी है।