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  • दिन ढलते ही क्यों बेहोश जैसे हो जाते थे पाकिस्तान के 'सोलर किड्स'? जानिए इस रहस्यमयी बीमारी की पूरी कहानी

    दिन ढलते ही क्यों बेहोश जैसे हो जाते थे पाकिस्तान के 'सोलर किड्स'? जानिए इस रहस्यमयी बीमारी की पूरी कहानी


    नई दिल्ली।
    पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के दो भाइयों का एक दुर्लभ चिकित्सीय मामला वर्षों तक दुनियाभर के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के लिए रहस्य बना रहा। दिनभर पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय रहने वाले ये दोनों बच्चे सूर्यास्त के बाद अचानक इतनी कमजोरी महसूस करने लगते थे कि न चल पाते थे, न बोल पाते थे और न ही अपने हाथ-पैर हिला पाते थे। इसी असामान्य स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने उन्हें “सोलर किड्स” का नाम दिया।

    जानकारी के अनुसार, दोनों बच्चे दिन में अन्य बच्चों की तरह स्कूल जाते, खेलते-कूदते और सामान्य गतिविधियां करते थे। लेकिन जैसे ही शाम होती और अंधेरा बढ़ने लगता, उनके शरीर की शक्ति तेजी से समाप्त होने लगती थी। कुछ ही समय में वे लगभग निष्क्रिय अवस्था में पहुंच जाते थे।

    डॉक्टरों के लिए बना चुनौतीपूर्ण मामला

    बच्चों को इलाज के लिए इस्लामाबाद स्थित पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने विस्तृत जांच शुरू की। प्रारंभिक परीक्षणों में बीमारी का स्पष्ट कारण सामने नहीं आया। डॉक्टरों का कहना था कि उन्होंने अपने चिकित्सकीय जीवन में इस प्रकार का मामला पहले कभी नहीं देखा था।

    सूरज की रोशनी से नहीं मिला सीधा संबंध

    परिवार का मानना था कि बच्चों को ऊर्जा सूर्य की रोशनी से मिलती है और सूर्यास्त के बाद उनकी शक्ति समाप्त हो जाती है। हालांकि चिकित्सकों ने इस संभावना की जांच की। बच्चों को दिन के समय पूरी तरह अंधेरे कमरे में भी रखा गया, लेकिन वे सामान्य रूप से सक्रिय रहे। इससे विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि बीमारी का सीधा संबंध सूर्य की रोशनी से नहीं है।

    दुर्लभ आनुवंशिक बीमारी की आशंका

    विशेषज्ञों ने इसे किसी दुर्लभ आनुवंशिक (जेनेटिक) न्यूरोलॉजिकल विकार से जुड़ा मामला माना। जांच के लिए दोनों बच्चों के रक्त के नमूने विदेश की प्रयोगशालाओं में भेजे गए। साथ ही उनके गांव की मिट्टी और वातावरण के नमूनों का भी परीक्षण कराया गया, ताकि किसी पर्यावरणीय कारण की संभावना का पता लगाया जा सके। इसके बावजूद बीमारी का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हो सका।

    परिवार की पृष्ठभूमि भी बनी शोध का विषय

    दोनों बच्चों के माता-पिता रिश्ते में चचेरे भाई-बहन हैं। परिवार के छह बच्चों में से दो की कम उम्र में मृत्यु हो चुकी थी, जबकि अन्य भाई-बहनों में इस तरह के कोई लक्षण नहीं पाए गए। इस कारण विशेषज्ञों ने आनुवंशिक कारणों की संभावना पर विशेष ध्यान केंद्रित किया।

    आज भी शोध का विषय

    इस अनोखे मामले ने दुनिया भर के चिकित्सा वैज्ञानिकों का ध्यान आकर्षित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दुर्लभ मामलों का अध्ययन भविष्य में आनुवंशिक और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद कर सकता है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने काफी प्रगति की है, लेकिन “सोलर किड्स” का मामला आज भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है।

    चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि “सोलर किड्स” नाम लोकप्रिय जरूर हो गया, लेकिन अब तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है जो यह साबित करे कि इस बीमारी का सीधा संबंध सूर्य की रोशनी से था। यही कारण है कि यह मामला आज भी चिकित्सा जगत की सबसे दुर्लभ और रहस्यमयी घटनाओं में शामिल माना जाता है।

  • वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं पर बरसी हैवानियत नाबालिग ने डंडे से पीटा वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप

    वृद्धाश्रम में बुजुर्ग महिलाओं पर बरसी हैवानियत नाबालिग ने डंडे से पीटा वीडियो सामने आने के बाद मचा हड़कंप


    इंदौर । इंदौर के एक वृद्धाश्रम से सामने आया मारपीट का वीडियो लोगों को झकझोर देने वाला है। वीडियो में एक नाबालिग लड़का वृद्ध महिलाओं पर डंडे से हमला करता दिखाई दे रहा है। बीच बचाव करने पहुंची अन्य महिलाओं के साथ भी उसने हाथापाई की। घटना सामने आने के बाद पुलिस और प्रशासन सक्रिय हो गया है तथा मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार नाबालिग की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं बताई जा रही है और इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    घटना शहर के मरीमाता पानी की टंकी के पास स्थित महाराणा प्रताप वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित वृद्धाश्रम की है। वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि करीब 14 वर्षीय लड़का हाथ में डंडा लेकर एक बुजुर्ग महिला पर लगातार हमला कर रहा है। जब आश्रम में मौजूद अन्य महिलाएं उसे रोकने की कोशिश करती हैं तो वह उनके साथ भी मारपीट करने लगता है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों में आक्रोश फैल गया और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग उठने लगी।

    मामले की जानकारी मिलते ही बाणगंगा थाना पुलिस ने वृद्धाश्रम की संचालिका नीलम दुबे को पूछताछ के लिए थाने बुलाया। पुलिस ने उनसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो इसके लिए आवश्यक निर्देश दिए। फिलहाल पुलिस ने संचालिका को समझाइश देकर छोड़ दिया है जबकि पूरे मामले की जांच जारी है।

    एसीपी रुबीना मिजवानी के अनुसार पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि नाबालिग करीब पांच महीने पहले अपनी मां के साथ वृद्धाश्रम में रहने आया था। उसकी मां गंभीर रूप से झुलस गई थीं और कुछ समय बाद उनकी मृत्यु हो गई। मां के निधन के बाद से लड़का वहीं रह रहा था। पुलिस के अनुसार बुधवार को किसी बात को लेकर उसका एक बुजुर्ग महिला से विवाद हो गया जिसके बाद उसने गुस्से में डंडा उठाकर हमला कर दिया। वीडियो में यह भी दिखाई दे रहा है कि बीच बचाव करने वाले लोगों के साथ भी उसने आक्रामक व्यवहार किया।

    पुलिस का कहना है कि बच्चे की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं होने की जानकारी मिली है इसलिए उसके साथ संवेदनशील तरीके से कार्रवाई की जाएगी। सबसे पहले उसकी विशेषज्ञों द्वारा काउंसलिंग कराई जाएगी ताकि उसकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति का सही आकलन किया जा सके। इसके साथ ही वृद्धाश्रम प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि उसे तत्काल बुजुर्गों से अलग रखा जाए ताकि किसी अन्य व्यक्ति की सुरक्षा को खतरा न हो।

    प्रशासन ने यह भी निर्णय लिया है कि नाबालिग को वृद्धाश्रम से हटाकर बाल संरक्षण से जुड़ी संस्था के सुपुर्द किया जाएगा जहां उसकी उचित देखभाल इलाज और काउंसलिंग की व्यवस्था की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि उसकी परिस्थितियों और मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए पुनर्वास की दिशा में काम करना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    इस घटना ने वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों का कहना है कि ऐसे संस्थानों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की नियमित निगरानी मानसिक स्वास्थ्य की जांच और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि बुजुर्ग सुरक्षित वातावरण में अपना जीवन व्यतीत कर सकें। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और वीडियो के आधार पर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

  • PoK में कई हफ्तों से प्रदर्शन जारी.. जनरल डायर की तरह फायरिंग कर रहा PAK…. स्थिति तनावपूर्ण

    PoK में कई हफ्तों से प्रदर्शन जारी.. जनरल डायर की तरह फायरिंग कर रहा PAK…. स्थिति तनावपूर्ण


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pakistan-occupied Kashmir- PoK) में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है। आठ हफ्तों से जारी आंदोलन के दौरान रावलाकोट और मीरपुर (Rawalakot and Mirpur) में प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर निहत्थे नागरिकों पर अंधाधुंध गोलीबारी करने का आरोप लगाया है। अधिकारों, शांति और क्षेत्रीय संसाधनों पर अधिकार की मांग को लेकर जारी यह विरोध प्रदर्शन 50 से अधिक दिनों से चल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पिछले तीन दिनों में भारी सुरक्षा बलों की तैनाती और कई क्षेत्रों में हुई झड़पों के बाद हालात चिंताजनक रूप से बिगड़े हैं।

    प्रदर्शनकारियों के अनुसार, भारी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद रावलाकोट में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। उनका आरोप है कि प्रदर्शनकारियों पर फिर से गोलीबारी की गई, जिसमें हताहतों की संख्या प्रशासनिक आंकड़ों से कहीं अधिक है। वहीं, मीरपुर में प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई है।


    परिजनों का लाश भी नसीब नहीं

    प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों पर मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अधिकारियों द्वारा मृतकों के शवों को उनके परिजनों को सौंपने से रोका जा रहा है। रिश्तेदारों की सहमति के बिना ही शवों को दफनाया जा रहा है। आरोप है कि कुछ शवों को बेहद अपमानजनक तरीके से घसीटकर वाहनों में लादा गया।


    मीडिया ब्लैकआउट

    आंदोलनकारियों ने पाकिस्तानी मीडिया पर हिंसा के वास्तविक आंकड़ों को छिपाने और आंदोलन की गलत तस्वीर पेश करने का आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर जारी वीडियो और स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के बयान यह दर्शाते हैं कि स्थिति सरकारी दावों से कहीं अधिक भयावह है। इसके अलावा, सुरक्षाकर्मियों काले कपड़ों में आए संदिग्ध लोगों पर दुकानों में लूटपाट, राशन की चोरी और घरों में तोड़फोड़ करने के आरोप भी लगे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आरोपों पर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।


    दमन के बावजूद बढ़ रहा जनसमर्थन

    सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के बावजूद आंदोलनकारियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। आयोजकों का दावा है कि बुधवार को 500 से अधिक नए लोग इस धरने में शामिल हुए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक अधिकारों, सुशासन और स्थानीय संसाधनों पर मालिकाना हक से जुड़ी उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं यह आंदोलन जारी रहेगा।

  • TDS कट चुका तो कल तक फाइल करें ITR…. वरना हो सकता है नुकसान

    TDS कट चुका तो कल तक फाइल करें ITR…. वरना हो सकता है नुकसान


    नई दिल्ली।
    आपकी सैलरी (Salary), फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit-FD), प्रॉपर्टी बेचने या किसी अन्य ट्रांजेक्शन (Transaction) पर टीडीएस (TDS) कट चुका है। लेकिन आपने 31 जुलाई 2026 तक इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return- ITR) दाखिल नहीं किया है। तो इसे हल्के में लेने की गलती न करें। सिर्फ टैक्स कट जाने या टैक्स जमा कर देने से आपकी जिम्मेदारी पूरी नहीं होती। आईटीआर फाइल नहीं करने पर आपको लेट फीस, ब्याज, टैक्स नोटिस और कई दूसरे नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।


    क्यों फाइल करें आईटीआर?

    टैक्स का पेमेंट करना और आईटीआर दाखिल करना दो अलग-अलग कानूनी जिम्मेदारियां हैं। अगर आपकी इनकम आईटीआर फाइल करने की लिमिट में आती है, तो टीडीएस कटने या पूरा टैक्स जमा होने के बावजूद रिटर्न फाइल करना जरूरी है। अगर ऐसा नहीं किया जाता, तो इनकम टैक्स विभाग के रिकॉर्ड में आपकी इनकम और टीडीएस का मिलान नहीं हो पाता, जिससे विभाग की ओर से नोटिस भेजा जा सकता है।

    नहीं मिलेगा रिफंड
    अगर आपकी कुल सालाना इनकम 2.5 लाख रुपये से कम है और टीडीएस कट चुका है, तो आईटीआर दाखिल करके आप उस रकम का टैक्स रिफंड ले सकते हैं। लेकिन अगर आपने रिटर्न ही दाखिल नहीं किया, तो यह पैसा वापस नहीं मिलेगा। यानी आपका ही पैसा सरकार के पास अटका रह सकता है।

    नहीं होगा ये नुकसान

    वहीं, अगर आपकी टैक्स देनदारी बनती है और आपने समय पर आईटीआर दाखिल नहीं किया, तो आपको ब्याज और लेट फीस का पेमेंट करना पड़ सकता है। इनकम टैक्स कानून की धारा 234F के तहत देरी से आईटीआर दाखिल करने पर 5,000 रुपये तक की लेट फीस लग सकती है, अगर आपकी कुल इनकम 5 लाख रुपये से अधिक है। इसके अलावा, बकाया टैक्स पर धारा 234A के तहत ब्याज भी देना पड़ सकता है।


    ये हैं नियम

    क्रिप्टो या अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) में निवेश करने वालों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। इस तरह की इनकम पर 30 प्रतिशत की दर से टैक्स लगता है और यह नियम बेसिक छूट सीमा से अलग है। यानी अगर आपकी दूसरी कोई इनकम नहीं है और सिर्फ क्रिप्टो से कमाई हुई है, तब भी टैक्स और आईटीआर से जुड़े नियम लागू हो सकते हैं।


    आईटीआर फाइल करने का फायदा

    अगर आप समय पर आईटीआर दाखिल नहीं करते हैं, तो भविष्य में होने वाले कुछ फायदे भी छूट सकते हैं। उदाहरण के लिए कुछ मामलों में आप अपने नुकसान को अगले सालों में एडजस्ट नहीं कर पाएंगे। साथ ही इनकम टैक्स विभाग के पास एक्सचेंज और अन्य संस्थानों से ट्रांजेक्शन की जानकारी पहले से पहुंच रही है, इसलिए रिटर्न नहीं फाइल करने पर जांच या नोटिस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

  • मूंग खरीदी विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल किसानों ने पूछा मुख्यमंत्री रहते बढ़ा कोटा अब कृषि मंत्री बनकर क्यों नहीं मिली राहत

    मूंग खरीदी विवाद ने बढ़ाई सियासी हलचल किसानों ने पूछा मुख्यमंत्री रहते बढ़ा कोटा अब कृषि मंत्री बनकर क्यों नहीं मिली राहत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन भले ही फिलहाल समाप्त हो गया हो लेकिन इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। प्रदेश के किसान अब यह जानना चाहते हैं कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्रीय कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश से ही आते हैं तो फिर समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने में देरी क्यों हुई। किसानों का कहना है कि इसी मुद्दे को लेकर उन्हें तीन दिन तक राजधानी भोपाल में आंदोलन करना पड़ा जबकि समय रहते फैसला लिया जाता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

    दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का अनुरोध किया था। हालांकि केंद्र से अतिरिक्त कोटे की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करने का निर्णय लिया और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की।

    किसान संगठनों का आरोप है कि पहले भी ऐसे हालात बनते रहे हैं लेकिन उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र से बातचीत कर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा बढ़वाने में सफल रहते थे। इस बार ऐसा नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ी है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर मूंग उत्पादन होता है लेकिन खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

    भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान निकाल लिया जाता तो किसानों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान संगठनों ने यह भी कहा कि सरकारों को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

    किसानों की नाराजगी के पीछे आर्थिक कारण भी हैं। इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि खुले बाजार में किसानों को लगभग 5500 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। शुरुआत में प्रति एकड़ केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही थी जबकि शेष उपज बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। इससे प्रति एकड़ किसानों की आय में हजारों रुपए का अंतर आ रहा था और बड़े किसानों को लाखों रुपए तक का नुकसान होने की आशंका थी।

    इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश सरकार को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आशा योजना के नियमों के अनुसार केंद्र अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादन ही समर्थन मूल्य पर खरीद सकता है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को दिया गया है जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है।

    हालांकि प्रदेश सरकार का तर्क है कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग उत्पादन और खरीदी करने वाला राज्य है इसलिए अन्य राज्यों में उपयोग नहीं हो रहे कोटे का हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। फिलहाल सरकार द्वारा 60 प्रतिशत खरीदी की घोषणा के बाद आंदोलन थम गया है लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं जाएगी तब तक यह मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

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    MadhyaPradesh, MoongProcurement, FarmersProtest, ShivrajSinghChouhan, MSP मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन भले ही फिलहाल समाप्त हो गया हो लेकिन इसके बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर सवालों का सिलसिला तेज हो गया है। प्रदेश के किसान अब यह जानना चाहते हैं कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और केंद्रीय कृषि मंत्री भी मध्य प्रदेश से ही आते हैं तो फिर समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा बढ़ाने में देरी क्यों हुई। किसानों का कहना है कि इसी मुद्दे को लेकर उन्हें तीन दिन तक राजधानी भोपाल में आंदोलन करना पड़ा जबकि समय रहते फैसला लिया जाता तो इस स्थिति से बचा जा सकता था।

    दरअसल मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी का कोटा 4.54 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 8.06 लाख मीट्रिक टन करने का अनुरोध किया था। हालांकि केंद्र से अतिरिक्त कोटे की मंजूरी नहीं मिली। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अपने स्तर पर पात्र किसानों से 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करने का निर्णय लिया और आंदोलन समाप्त कराने की कोशिश की।

    किसान संगठनों का आरोप है कि पहले भी ऐसे हालात बनते रहे हैं लेकिन उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्र से बातचीत कर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा बढ़वाने में सफल रहते थे। इस बार ऐसा नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ी है। किसान स्वराज संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में बड़े पैमाने पर मूंग उत्पादन होता है लेकिन खरीदी की सीमा तय होने के कारण किसानों को अपनी उपज का बड़ा हिस्सा खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

    भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने भी केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बताते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों का असर किसानों पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका कहना है कि यदि समय रहते समाधान निकाल लिया जाता तो किसानों को आंदोलन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती। किसान संगठनों ने यह भी कहा कि सरकारों को राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर किसानों के हित में निर्णय लेने चाहिए।

    किसानों की नाराजगी के पीछे आर्थिक कारण भी हैं। इस वर्ष मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य 8768 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है जबकि खुले बाजार में किसानों को लगभग 5500 रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। शुरुआत में प्रति एकड़ केवल 1.20 क्विंटल मूंग ही समर्थन मूल्य पर खरीदी जा रही थी जबकि शेष उपज बाजार में कम दाम पर बेचनी पड़ रही थी। इससे प्रति एकड़ किसानों की आय में हजारों रुपए का अंतर आ रहा था और बड़े किसानों को लाखों रुपए तक का नुकसान होने की आशंका थी।

    इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश सरकार को भेजे अपने पत्र में स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आशा योजना के नियमों के अनुसार केंद्र अधिकतम 25 प्रतिशत उत्पादन ही समर्थन मूल्य पर खरीद सकता है। इसी आधार पर मध्य प्रदेश के लिए 4 लाख 54 हजार 580 मीट्रिक टन मूंग खरीदी की स्वीकृति दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि देशभर में स्वीकृत कुल खरीदी का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को दिया गया है जो किसी भी राज्य के मुकाबले सबसे अधिक है।

    हालांकि प्रदेश सरकार का तर्क है कि मध्य प्रदेश देश में सबसे अधिक मूंग उत्पादन और खरीदी करने वाला राज्य है इसलिए अन्य राज्यों में उपयोग नहीं हो रहे कोटे का हिस्सा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि अधिक से अधिक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके। फिलहाल सरकार द्वारा 60 प्रतिशत खरीदी की घोषणा के बाद आंदोलन थम गया है लेकिन किसानों का कहना है कि जब तक पूरी उपज समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं जाएगी तब तक यह मुद्दा पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा।

  • 8वीं के छात्र को 200 बार गाली लिखने की सजा, अभिभावकों ने की शिकायत; शिक्षा विभाग ने बैठाई जांच

    8वीं के छात्र को 200 बार गाली लिखने की सजा, अभिभावकों ने की शिकायत; शिक्षा विभाग ने बैठाई जांच


    अंबिकापुर ।
    छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित एक निजी स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र को कथित तौर पर 200 बार ‘मां’ से जुड़ी गाली लिखने की सजा दिए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद छात्र के अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) से शिकायत की है। शिकायत के आधार पर शिक्षा विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आरोप सही पाए जाने पर संबंधित शिक्षिका के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    जानकारी के अनुसार, शहर से लगे ग्राम सरगवां स्थित बिरला ओपन माइंड इंटरनेशनल स्कूल में 28 जुलाई को कक्षा आठ के दो छात्रों के बीच विवाद और मारपीट हो गई थी। आरोप है कि इस घटना के बाद कक्षा की शिक्षिका ने एक छात्र को अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत हिंदी और अंग्रेजी में 100-100 बार गाली लिखने का निर्देश दिया। छात्र ने अपनी कॉपी में कुल 200 बार वही शब्द लिखे। इसके बाद उससे कहा गया कि वह कॉपी घर ले जाकर अपने माता-पिता को दिखाए और उनके हस्ताक्षर करवाकर वापस स्कूल लाए।

    घर पहुंचने पर छात्र के परिजनों ने कॉपी देखी तो वे हैरान रह गए। छात्र के पिता ने इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत दर्ज कराते हुए कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि छात्र से कोई गलती हुई थी तो शिक्षक का दायित्व उसे समझाना और सही मार्गदर्शन देना था, न कि इस प्रकार की आपत्तिजनक सजा देना। उन्होंने कहा कि इस तरह की सजा से बच्चे के मानसिक विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    मामला सामने आने के बाद छात्र संगठनों ने भी इसकी निंदा करते हुए संबंधित शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश झा ने बताया कि शिकायत प्राप्त होने के बाद सहायक संचालक को पूरे मामले की जांच सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षिका के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को इस प्रकार की सजा देना उचित नहीं है और शिक्षा विभाग मामले को गंभीरता से देख रहा है।

  • E20 पेट्रोल से खराब हो जाएंगे इन गाड़ियों के कल-पुर्जे…. सरकार ने संसद में दी बड़ी जानकारी

    E20 पेट्रोल से खराब हो जाएंगे इन गाड़ियों के कल-पुर्जे…. सरकार ने संसद में दी बड़ी जानकारी


    नई दिल्ली।
    E20 पर जारी बहस के बीच केंद्र ने इस मुद्दे पर संसद (Parliament) में बड़ी जानकारी दी है। सरकार ने बुधवार को कहा कि एक अप्रैल, 2005 से पेश की गई और वर्ष 2016 से पहले बनी बीएस-थ्री (BS-III) गाड़ियों को ई-20 ईंधन से चलाने पर उसके कुछ रबर पुर्जे बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

    राज्यसभा (Rajya Sabha) में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ई-20 ईंधन (E-20 fuel) के इस्तेमाल से गाड़ियों के ‘माइलेज’ पर पड़ने वाले असर को लेकर जताई गई चिंता के बारे में ऑटोमोबाइल कंपनियों और गाड़ियों व इंजन की जांच करने वाली एजेंसियों ने साफ किया है कि गाड़ी का माइलेज सिर्फ ईंधन के प्रकार के अलावा कई अन्य कारकों से भी प्रभावित होता है।


    सरकार ने बताया- स्टडी की गई थी

    गडकरी ने कहा कि दो-पहिया और चार-पहिया गाड़ियों पर ई-20 के असर का पता लगाने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) देहरादून, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) ने मिलकर एक अध्ययन किया था।


    इंजन में बदलाव की जरूरत नहीं

    उन्होंने कहा कि अध्ययन में कार और दो-पहिया गाड़ियों के इंजन में कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं पाई गई। उनके अनुसार, इन अध्ययनों से पुष्टि हुई कि पुरानी गाड़ियों के प्रदर्शन में भी कोई खास अंतर नहीं आया और न ही ई-20 इंधन के साथ चलाने पर उनमें कोई असामान्य टूट-फूट देखी गई।

    मंत्री ने कहा कि गाड़ी चलाने में आसानी, स्टार्ट होने की क्षमता (स्टार्टबिलिटी), मेटल के साथ तालमेल (मेटल कम्पैटिबिलिटी) और प्लास्टिक के साथ तालमेल (प्लास्टिक कम्पैटिबिलिटी) जैसे पैमानों पर कोई समस्या नहीं देखी गई।


    इन गाड़ियों में बदलने पड़ सकते हैं रबर पार्ट्स

    उन्होंने कहा, ‘सिर्फ एक अप्रैल, 2005 से पेश की गई और वर्ष 2016 से पहले बनी बीएस-थ्री गाड़ियों के परीक्षण के मामले में, रबर के कुछ पुर्जे और गास्केट को बदलने की जरूरत पड़ सकती है, जिसे गाड़ी की नियमित होने वाली सर्विसिंग के दौरान आसानी से ठीक किया जा सकता है।’


    कंपनियां वारंटी क्लेम देती रहेंगी

    गाड़ी चलाने, स्टार्ट होने की क्षमता, मेटल और प्लास्टिक के साथ तालमेल जैसे पैमानों पर कोई समस्या नहीं देखी गई। साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों ने कहा है कि वे ई-20 ईंधन का इस्तेमाल करने वाली गाड़ियों के लिए वारंटी क्लेम देती रहेंगी।

    खास बात है कि ये घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है, जब आने वाले दिनों में करीब 3 बड़े आयोजन ई20 के खिलाफ होने जा रहे हैं। वहीं, आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ई-20 पेट्रोल 2023 से पहले बनी गाड़ियों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने इसके लिए 1 अगस्त को संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया है। जबकि, 4 अगस्त को परिवहन यूनियन संसद तक मार्च की तैयारी में हैं।

  • लोकसभा में पास होने के बाद आज राज्यसभा में पेश होगा 'एंटी-पेपर लीक बिल….

    लोकसभा में पास होने के बाद आज राज्यसभा में पेश होगा 'एंटी-पेपर लीक बिल….


    नई दिल्ली।
    लोकसभा (Lok Sabha) में हंगामे के बीच पास होने के बाद, अब मोदी सरकार (Modi Government) गुरुवार यानी आज 30 जुलाई को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ (Public Examinations -Prevention of Unfair Means- Amendment Bill, 2026) राज्यसभा (Rajya Sabha) में पेश करने जा रही है। देशभर में छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन के बाद लाए गए इस नए और सख्त संशोधन विधेयक पर आज पूरे देश की निगाहें टिकी हैं।

    बुधवार को विपक्ष के भारी हंगामे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कड़े तेवरों के बावजूद सरकार ने इसे लोकसभा से ध्वनि मत से पारित करा लिया। अब सवाल यह है कि क्या उच्च सदन यानी राज्यसभा में सरकार को इस बिल को पास कराने में कोई अड़चन आएगी? आइए समझते हैं राज्यसभा का ताजा ‘नंबर गेम’।


    राज्यसभा का नंबर गेम: क्या आसानी से पास होगा बिल?

    राज्यसभा की कुल संख्या 245 है, हालांकि अभी 242 सांसद हैं। अभी खास बहुमत के लिए 162 सांसदों की जरूरत है। वहीं साधारण बहुमत का आंकड़ा 123 है। एंटी-पेपर लीक वाले इस बिल के लिए साधारण बहुमत की ही जरूरत है।

    गठबंधन / दल – सांसदों की संख्या- बहुमत का आंकड़ा (123)

    NDA (सत्ता पक्ष) – 152 – बहुमत से 29 सांसद ज्यादा
    INDIA (विपक्ष) – 63 –
    अन्य दल – 29 –
    रिक्त सीट – 1 –
    कुल – 245 –

    राज्यसभा में NDA के पास अपने दम पर 152 सांसदों का मजबूत आंकड़ा है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े (123) से काफी ज्यादा है। ऐसे में ‘एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026’ को उच्च सदन से पास कराने में सरकार को कोई खास मुश्किल नहीं होगी, भले ही विपक्ष कितना भी हंगामा क्यों न करे।

    इस कानून का मकसद लोगों, संगठित समूहों और संस्थाओं को अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने और अपराध करने से प्रभावी ढंग से रोकना है, जिससे सार्वजनिक परीक्षाओं की पवित्रता बनी रहे।


    ‘एंटी-पेपर लीक संशोधन बिल 2026’ में नया क्या है?

    साल 2024 के मूल कानून को और अधिक सख्त बनाने के लिए इस 2026 के संशोधन विधेयक में कई कड़े प्रावधान जोड़े गए हैं। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए इस बिल की मुख्य बातें इस प्रकार हैं।
    – संगठित पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोह, संस्थानों या अधिकारियों को अब 10 साल तक की सख्त कैद होगी (पहले यह अधिकतम 5 साल थी)।
    – पेपर लीक सिंडिकेट और इसमें शामिल सर्विस प्रोवाइडर संस्थानों पर 10 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।
    – इन मामलों को लंबा खिंचने से रोकने के लिए हर राज्य में ‘स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट’ बनाए जाएंगे, जहां रोजाना सुनवाई होगी।
    – किसी भी पेपर लीक मामले की जांच राज्य पुलिस या स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।


    लोकसभा में खूब हुआ हंगामा

    लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की कुछ टिप्पणियों को लेकर सत्तापक्ष के सदस्यों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान हुए हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। दोपहर ढाई बजे प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब दिया। इसके बाद विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। विधेयक में पेपर लीक रोकने के कई कड़े प्रावधान किए गए हैं।


    क्यों मची है संसद में रार?

    इस बिल के लोकसभा में पास होने के दौरान भारी राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला। हाल ही में हुए NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में 36 दिनों तक छात्रों का प्रदर्शन चला था, जिसके दबाव में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा तक देना पड़ा।

    बुधवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर पुलिस ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया। इस पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल के दावों को बेबुनियाद और तथ्यहीन बताते हुए खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।

  • मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान

    मूंग खरीदी को लेकर किसानों का शक्ति प्रदर्शन भोपाल की सड़कें हुईं जाम सरकार ने 60 प्रतिशत खरीदी का किया ऐलान


    भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल बुधवार को किसानों के बड़े आंदोलन का केंद्र बनी रही। मूंग की शत प्रतिशत समर्थन मूल्य पर खरीदी और खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था समाप्त करने जैसी मांगों को लेकर नर्मदापुरम संभाग से पैदल पहुंचे हजारों किसान राजधानी की सड़कों पर डटे रहे। आंदोलन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई और कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया। दिनभर चले प्रदर्शन और सरकार के साथ बातचीत के बाद देर रात सरकार ने किसानों की प्रमुख मांगों पर सहमति जताई जिसके बाद आंदोलन धीरे धीरे समाप्त होने लगा और किसानों ने सड़कें खाली करना शुरू कर दीं।

    किसानों का कहना था कि मूंग की पूरी फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर उपज बेचने की मजबूरी न हो। इसके अलावा खाद वितरण में लागू ई टोकन व्यवस्था को भी समाप्त करने की मांग उठाई गई। किसानों का आरोप था कि मौजूदा व्यवस्था के कारण समय पर खाद नहीं मिल पाती जिससे खेती प्रभावित होती है और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर डेरा डाल दिया। बाणगंगा चौराहे समेत कई स्थानों पर किसान देर रात तक जमे रहे। सरकार की ओर से मांगें स्वीकार करने की घोषणा के बाद भी प्रदर्शनकारी तत्काल हटने को तैयार नहीं हुए और लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वापस लौटने की प्रक्रिया शुरू की।

    प्रदर्शन के दौरान किसानों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की की स्थिति भी बनी। कुछ किसानों के कपड़े फट गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारी पहले केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पहुंचे जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। इसके बाद उनका जत्था मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए रोशनपुरा चौराहे से मुख्यमंत्री निवास तक भारी पुलिस बल तैनात किया गया। कई स्थानों पर बसों और डंपरों से बैरिकेडिंग कर रास्ते बंद किए गए ताकि प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सके।

    आंदोलन के दौरान किसानों ने विरोध दर्ज कराने के लिए अलग अलग तरीके अपनाए। कुछ किसानों ने अर्धनग्न होकर प्रदर्शन किया जबकि कई प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर ही दाल बाटी बनाकर भोजन तैयार किया। किसानों के समर्थन में बड़ी संख्या में युवा भी पहुंचे जिन्होंने सरकार को सद्बुद्धि देने की कामना करते हुए हवन किया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजधानी का सामान्य जनजीवन प्रभावित कर दिया और लोगों को घंटों ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ा।

    सरकार ने देर रात जारी बयान में किसानों की कई मांगें स्वीकार करने की घोषणा की। कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बताया कि प्रदेश सरकार अब 60 प्रतिशत तक मूंग खरीदी करेगी। नर्मदापुरम सीहोर और हरदा जैसे प्रमुख उत्पादक जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ मूंग खरीदी जाएगी। इसके साथ ही स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी गई है जबकि समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी की अंतिम तिथि 20 अगस्त निर्धारित की गई है। सरकार ने किसानों से आंदोलन समाप्त कर अपने घर लौटने की अपील भी की।

    सरकार की घोषणा के बाद अधिकांश किसानों ने देर रात वापस लौटना शुरू कर दिया और राजधानी की सड़कों पर यातायात धीरे धीरे सामान्य होने लगा। हालांकि किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि घोषित फैसलों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ तो भविष्य में आंदोलन फिर से तेज किया जाएगा।

  • दाग धब्बों से लेकर ऑयली स्किन तक नींबू है कितना फायदेमंद जानिए कब और कैसे करें सही इस्तेमाल

    दाग धब्बों से लेकर ऑयली स्किन तक नींबू है कितना फायदेमंद जानिए कब और कैसे करें सही इस्तेमाल


    नई दिल्ली । आजकल हर कोई बिना ज्यादा खर्च किए चमकदार और स्वस्थ त्वचा पाना चाहता है। ऐसे में कई लोग घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं और उनमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीजों में नींबू शामिल है। विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर नींबू त्वचा की देखभाल में उपयोगी माना जाता है। हालांकि इसका सही तरीके से उपयोग करना बेहद जरूरी है क्योंकि गलत इस्तेमाल से त्वचा को फायदा होने की बजाय नुकसान भी हो सकता है।

    नींबू में मौजूद विटामिन सी त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करता है। यह डेड स्किन सेल्स को हटाने में सहायक माना जाता है और चेहरे की रंगत को निखारने में योगदान दे सकता है। इसके अलावा नींबू में मौजूद प्राकृतिक गुण अतिरिक्त तेल को कम करने में मदद कर सकते हैं जिससे ऑयली स्किन वाले लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।

    अगर चेहरे पर हल्के दाग धब्बे या पिंपल के निशान हैं तो नींबू का सीमित और सावधानीपूर्वक उपयोग लाभदायक माना जाता है। लेकिन नींबू को कभी भी सीधे चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। इसे एलोवेरा जेल दही शहद या गुलाब जल जैसी त्वचा के लिए सौम्य चीजों के साथ मिलाकर ही इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। इससे त्वचा पर जलन और रूखापन होने का खतरा कम हो सकता है।

    नींबू का उपयोग करने से पहले त्वचा पर पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। हाथ के किसी छोटे हिस्से पर लगाकर कुछ समय तक देखें। यदि लालपन खुजली या जलन महसूस हो तो इसे चेहरे पर बिल्कुल न लगाएं। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि नींबू का अम्लीय स्वभाव त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि नींबू लगाने के तुरंत बाद धूप में नहीं निकलना चाहिए। नींबू में मौजूद प्राकृतिक तत्व सूर्य की किरणों के प्रति त्वचा को अधिक संवेदनशील बना सकते हैं जिससे त्वचा पर जलन या काले धब्बे पड़ने की आशंका बढ़ सकती है। यदि नींबू का उपयोग किया है तो चेहरा अच्छी तरह धोने के बाद ही बाहर निकलें और सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें।

    त्वचा की देखभाल केवल घरेलू नुस्खों से पूरी नहीं होती। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना अच्छी नींद लेना और नियमित रूप से त्वचा की सफाई करना भी उतना ही जरूरी है। यदि चेहरे पर लगातार मुंहासे एलर्जी या अन्य त्वचा संबंधी समस्या बनी रहती है तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर विकल्प है।

    नींबू एक उपयोगी प्राकृतिक सामग्री है लेकिन हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। इसलिए जो उपाय किसी एक व्यक्ति के लिए फायदेमंद हो वह दूसरे के लिए उपयुक्त हो यह जरूरी नहीं है। सही जानकारी और सावधानी के साथ इसका सीमित उपयोग त्वचा की देखभाल में मददगार हो सकता है। स्वस्थ और सुंदर त्वचा पाने के लिए घरेलू उपायों के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।