Blog

  • गणपति विसर्जन को लेकर MP में हाई अलर्ट, इंदौर में रात तक चलेंगी झांकियां, घाटों पर तैनात रहेगा भारी फोर्स

    गणपति विसर्जन को लेकर MP में हाई अलर्ट, इंदौर में रात तक चलेंगी झांकियां, घाटों पर तैनात रहेगा भारी फोर्स


    इंदौर । अनंत चतुर्दशी के मौके पर शुक्रवार को मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ भव्य झांकियों और चल समारोह की रौनक देखने को मिलेगी। इंदौर में 103 साल पुरानी झांकी परंपरा के तहत शाम 6 बजे से 9 किलोमीटर से ज्यादा लंबे मार्ग पर झांकियां निकलेंगी। इसके साथ ही अखाड़ों के उस्ताद और खलीफा पारंपरिक खेलों तथा युद्ध कलाओं के करतब दिखाएंगे। प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में भी विसर्जन को लेकर घाटों और कृत्रिम कुंडों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं।

    इंदौर में चल समारोह मिल क्षेत्र से शुरू होकर मजदूर मैदान एमजी रोड कृष्णपुरा नंदलालपुरा जवाहर मार्ग नृसिंह बाजार गोराकुंड खजूरी बाजार होते हुए राजवाड़ा तक पहुंचेगा। शाम 6 बजे खजराना गणेश की झांकी के साथ समारोह की शुरुआत होगी और देर रात तक झांकियां तथा अखाड़े निकलते रहेंगे। सुरक्षा को देखते हुए झांकियों में धारदार हथियार और नशे पर रोक रहेगी। डीजे के इस्तेमाल को भी नियंत्रित किया गया है। झांकी पर अधिकतम दो स्पीकर लगाने की अनुमति होगी। हाथी और ऊंट को भी समारोह में शामिल करने पर रोक रहेगी। दोपहर 3 बजे से झांकी मार्ग और आसपास के इलाकों में यातायात डायवर्ट किया जाएगा।

    इंदौर में इस बार कई धार्मिक और सामाजिक संदेश देने वाली झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। देशी मिल की झांकियों में दुर्गा माता और महिषासुर वध के साथ भगवान शंकर और माता सती से जुड़ा प्रसंग दिखाया जाएगा। एक झांकी में नशामुक्ति का संदेश भी दिया जाएगा। कल्याण मिल की झांकी में भगवान जगन्नाथ की पहली रथ यात्रा का प्रसंग और दूसरी झांकी में नारी शक्ति को प्रमुखता दी जाएगी। होप टेक्सटाइल मिल की झांकियों में गणेशजी की आराधना और भगवान शिव की बारात को धार्मिक प्रसंगों के आधार पर प्रस्तुत किया जाएगा।

    भोपाल में भी गणेश विसर्जन को लेकर व्यापक तैयारी की गई है। प्रेमपुरा रानी कमलापति बैरागढ़ खटलापुरा हथाईखेड़ा और शाहपुरा प्रमुख विसर्जन स्थलों में शामिल हैं। छोटी प्रतिमाओं के लिए वार्ड और जोन स्तर पर कृत्रिम कुंड बनाए गए हैं जबकि बड़ी प्रतिमाओं के लिए क्रेन की व्यवस्था की गई है। घाटों पर पुलिस गोताखोर फायर ब्रिगेड और सीसीटीवी के जरिए निगरानी की जाएगी। प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्जन लागू रहेगा।

    उज्जैन में चल समारोह रात 10 बजे से शुरू होगा। इसके बाद प्रतिमाओं को रामघाट और सुनहरी घाट समेत निर्धारित स्थानों तक ले जाया जाएगा। शाम से ही कई मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन लागू रहेगा। ग्वालियर में सागरताल पर बनाए गए अस्थायी कुंड में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जाएगा। पुलिस प्रशासन के साथ नगर निगम की टीम मौजूद रहेगी और ड्रोन से निगरानी की जाएगी।

    जबलपुर में भी विसर्जन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। बड़ी प्रतिमाओं के लिए नर्मदा जल से भरा कृत्रिम कुंड बनाया गया है जहां क्रेन की मदद से विसर्जन कराया जाएगा। गौरीघाट तिलवारा घाट अधारताल खमरिया रांझी और गोकलपुर समेत कई स्थानों पर व्यवस्थाएं की गई हैं। तीन पत्ती चौक से गौरीघाट जाने वाले मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहेगा और जरूरत के अनुसार यातायात डायवर्ट किया जाएगा।

    अनंत चतुर्दशी पर प्रदेशभर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रमुख घाटों और चल समारोह वाले मार्गों पर पुलिस बल के साथ फायर ब्रिगेड गोताखोर और अन्य आपात सेवाओं की तैनाती रहेगी। कई स्थानों पर ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी। प्रशासन का फोकस भीड़ नियंत्रण सुरक्षित विसर्जन और यातायात व्यवस्था बनाए रखने पर रहेगा।

  • महाराष्ट्र में SIR को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा मामला, ज्ञानेश कुमार के 14 फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाएं दाखिल

    महाराष्ट्र में SIR को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा मामला, ज्ञानेश कुमार के 14 फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाएं दाखिल

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से एक याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के पिछले करीब दस महीनों के दौरान लिए गए 14 प्रशासनिक फैसलों और कार्रवाइयों को चुनौती दी गई है। याचिका में इन फैसलों को रद्द करने के साथ ही SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की गई है।

    याचिका में दावा किया गया है कि इन 14 मामलों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, मतदाता सूची के डेटाबेस, चुनाव पंजीकरण अधिकारियों तथा तकनीकी व्यवस्था से जुड़े कई फैसलों पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों पर अदालत की ओर से अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

    याचिका में मतदाता सूची तैयार करने और उसके प्रबंधन से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक फैसलों को चुनौती दी गई है। इसमें फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया, मतदाताओं के नाम हटाने और फिर बहाल करने तथा चुनावी डेटाबेस के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कुछ फैसले दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए थे।

    महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर भी याचिका में कई मांगें रखी गई हैं। इसमें प्रक्रिया के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और SIR पर रोक लगाने की मांग शामिल है। इसके अलावा उन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव स्थगित करने की मांग की गई है, जहां SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यह मांग तब तक के लिए की गई है, जब तक नई और कानूनी प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची तैयार नहीं हो जाती।

    याचिकाकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक समिति गठित करने की मांग भी की है। इसके साथ ही संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 326 से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। याचिका में मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रखने और गलत तरीके से नाम हटाए जाने से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।

    दूसरी याचिका महाराष्ट्र में SIR के क्रियान्वयन से जुड़े सवालों पर केंद्रित है। इसमें SIR कराने के आदेश, उसके आधार और अपनाई जा रही प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग मतदाता की चुनावी पात्रता का आकलन कर सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम निर्णय करने का अधिकार उसके पास नहीं है।

    याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि SIR के दौरान कुछ बूथ लेवल अधिकारी लोगों से फॉर्म लेते समय सहायक दस्तावेज मांग रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने से बचाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षा उपायों की मांग की है।

    मामले की सुनवाई 28 सितंबर को होने की संभावना है। दोनों याचिकाएं अलग-अलग पीठों के समक्ष सूचीबद्ध हो सकती हैं। फिलहाल अदालत ने याचिकाओं में लगाए गए आरोपों और मांगों पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। आगे की सुनवाई में संबंधित पक्षों के तर्क और अदालत की कार्यवाही के बाद मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • करोड़ों खर्च के बाद भी सीवर की समस्या बरकरार, हाईकोर्ट की सख्ती के बीच ईएनसी बोले- कई लोग जाएंगे जेल

    करोड़ों खर्च के बाद भी सीवर की समस्या बरकरार, हाईकोर्ट की सख्ती के बीच ईएनसी बोले- कई लोग जाएंगे जेल


    शिवपुरी । शिवपुरी के लंबे समय से अधूरे पड़े सीवर प्रोजेक्ट को लेकर अब मामला गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट ग्वालियर ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसी बीच अगली सुनवाई से कुछ दिन पहले नगरीय विकास एवं आवास विभाग के इंजीनियर इन चीफ प्रदीप एस मिश्रा शिवपुरी पहुंचे और सीवर प्रोजेक्ट का मौका निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने संकेत दिए कि जिन लोगों की गलती सामने आएगी उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और सरकारी राशि की रिकवरी भी हो सकती है।

    जानकारी के मुताबिक शिवपुरी में झील संरक्षण परियोजना के तहत सीवर प्रोजेक्ट के लिए करीब 67 करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे। लेकिन करीब 13 साल के दौरान इस प्रोजेक्ट पर 111 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। यानी स्वीकृत राशि से लगभग 44 करोड़ रुपए अधिक खर्च होने के बाद भी सीवर लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह चालू नहीं हो पाए हैं। इसका सीधा असर शहर की व्यवस्था पर पड़ रहा है और सीवेज के नालों के जरिए सख्य सागर यानी चांदपाठा झील तक पहुंचने की समस्या बनी हुई है।

    हाईकोर्ट ग्वालियर ने 27 जुलाई 2026 की सुनवाई के दौरान मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी स्थिति और अधिकारियों की जवाबदेही से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को रिपोर्ट तैयार करने के लिए दो महीने का समय दिया गया था। अगली सुनवाई 28 सितंबर को होनी है। इससे पहले 24 सितंबर को एसीएस की जगह ईएनसी प्रदीप एस मिश्रा शिवपुरी पहुंचे और पूर्वी हिस्से में सीवर लाइन तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का जायजा लिया।

    निरीक्षण के दौरान सीवर लाइन की स्थिति और प्लांट से जुड़ी व्यवस्थाओं को देखा गया। झांसी तिराहे के पास सीवर चैंबर खोलकर लाइन में फंसा मलबा निकालने का काम भी किया जा रहा था। ईएनसी ने कहा कि सीवर लाइन चोक होने के कारण प्रोजेक्ट चालू नहीं हो पाया है। उन्होंने साफ किया कि इसे पूरा कराकर चालू करना जरूरी है क्योंकि सरकार की बड़ी राशि इस प्रोजेक्ट पर खर्च हो चुकी है।

    ईएनसी प्रदीप एस मिश्रा ने कहा कि जिस तरह हाईकोर्ट ने मामले को संज्ञान में लिया है उसमें जिसकी गलती होगी उस पर रिकवरी निकलेगी और कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों पर गंभीर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि अंतिम जिम्मेदारी और निर्णय हाईकोर्ट के स्तर पर तय होगा। ईएनसी ने बताया कि वह अपनी निरीक्षण रिपोर्ट एसीएस को सौंपेंगे जिसके आधार पर विभाग की ओर से रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि सीवर प्रोजेक्ट को पूरी तरह फंक्शनल करना होगा। सीवर लाइन की सफाई के साथ जरूरी चैंबर भी व्यवस्थित तरीके से बनाने होंगे। एसटीपी का संचालन ठीक तरीके से होना जरूरी है क्योंकि सीवेज के कारण पर्यावरण पर भी असर पड़ रहा है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सबकी नजर है। रिपोर्ट सामने आने के बाद सीवर प्रोजेक्ट में हुई देरी और खर्च की जिम्मेदारी को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • अभिजीत दीपके ने विपक्ष पर उठाए सवाल, कहा- चुनाव में गड़बड़ी मानते हैं तो फिर लगातार हिस्सा क्यों लेते हैं

    अभिजीत दीपके ने विपक्ष पर उठाए सवाल, कहा- चुनाव में गड़बड़ी मानते हैं तो फिर लगातार हिस्सा क्यों लेते हैं


    नई दिल्ली ।
    कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के आरोपों को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विपक्ष को लगता है कि चुनाव सही तरीके से नहीं हो रहे हैं, तो वह लगातार ऐसे चुनावों में हिस्सा क्यों ले रहा है। दीपके ने कहा कि विपक्ष को संभवतः इस बात का डर है कि चुनाव से दूर रहने पर उसका राजनीतिक अस्तित्व खत्म हो सकता है।

    दीपके ने कहा कि एक तरफ विपक्ष चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाता है और दूसरी तरफ उन्हीं चुनावों में लगातार हिस्सा लेता है। उनके अनुसार, ऐसी स्थिति में चुनावी प्रक्रिया पर लगाए जा रहे आरोपों और चुनाव में भागीदारी के बीच विरोधाभास दिखाई देता है। उन्होंने विपक्ष से देश और लोकतंत्र को राजनीतिक अस्तित्व से ऊपर रखने की अपील की।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी दल को चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आपत्ति है, तो उसे अपने रुख पर स्पष्टता दिखानी चाहिए। दीपके के मुताबिक, चुनावों में लगातार भाग लेने से लोगों के बीच यह संदेश जा सकता है कि चुनावी प्रक्रिया सामान्य और प्रतिस्पर्धी है, जबकि विपक्ष खुद उस पर सवाल उठा रहा है।

    दीपके ने विपक्षी दलों की आंतरिक स्थिति को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं को तोड़ा जा रहा है और पार्टियों में विभाजन हो रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसे माहौल में केवल चुनाव लड़ते रहना राजनीतिक ताकत को बनाए रखने का पर्याप्त तरीका नहीं है। उन्होंने विपक्ष से व्यापक लोकतांत्रिक हितों को ध्यान में रखते हुए अपने रुख पर विचार करने को कहा।

    अपनी बात समझाने के लिए दीपके ने चुनावों की तुलना क्रिकेट के एक फिक्स मैच से की। उन्होंने कहा कि ऐसे मैच में हर कैच जानबूझकर नहीं छोड़ा जाता। कुछ कैच पकड़े भी जा सकते हैं और मुकाबले को अंतिम ओवर तक ले जाया जा सकता है, जिससे लोगों को मुकाबला बराबरी का दिखाई दे।

    दीपके ने इसी उदाहरण के आधार पर दावा किया कि यदि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी हो, तो विपक्ष को कुछ स्थानों पर जीत भी मिल सकती है। उनके मुताबिक, ऐसी जीतें विपक्ष को चुनाव लड़ते रहने के लिए पर्याप्त हो सकती हैं और इससे लोगों के बीच वास्तविक प्रतिस्पर्धा होने का विश्वास बना रह सकता है। यह उनका चुनावी प्रक्रिया को लेकर दिया गया तर्क है।

    उन्होंने कहा कि विपक्ष यदि चुनावों को कथित तौर पर तय या प्रभावित मानता है तो उसे उसी प्रक्रिया का हिस्सा बने रहने के बजाय अपने रुख पर विचार करना चाहिए। दीपके ने विपक्ष से राजनीतिक अस्तित्व की चिंता से आगे बढ़कर देश और लोकतंत्र के बारे में सोचने की अपील की।

    दीपके की यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आई है। इससे पहले उन्होंने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी और 48 घंटे का समय देने की बात कही थी। उनका ताजा बयान भी चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों और विपक्ष की चुनावी रणनीति पर केंद्रित है।

    उन्होंने विपक्ष से कहा कि यदि उसे चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है तो उसे लगातार उसमें भाग लेने के बजाय स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। दीपके का कहना है कि चुनाव में भागीदारी जारी रखने से उस व्यवस्था को वैधता मिलती है, जिस पर विपक्ष स्वयं सवाल उठा रहा है। उन्होंने इसी आधार पर विपक्ष की चुनावी रणनीति और राजनीतिक अस्तित्व को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

  • कतर के अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजेगी शिवपुरी की आवाज, मनु वैशाली 25 सितंबर को पेश करेंगी अपनी कविताएं

    कतर के अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजेगी शिवपुरी की आवाज, मनु वैशाली 25 सितंबर को पेश करेंगी अपनी कविताएं


    शिवपुरी । शिवपुरी की युवा कवयित्री मनु वैशाली अब अपनी कविताओं की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने जा रही हैं। शिवपुरी शहर से निकलकर साहित्यिक मंचों पर अपनी पहचान बनाने वाली मनु वैशाली 25 सितंबर 2026 को कतर की राजधानी दोहा में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करेंगी। यह अवसर उनके साहित्यिक सफर के लिए खास माना जा रहा है क्योंकि पहली बार उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी रचनाओं और काव्य प्रस्तुति के जरिए श्रोताओं से रूबरू होने का मौका मिलेगा। कार्यक्रम का आयोजन शाम 7 बजे दोहा के टाइम राको में किया जाएगा जहां देश और विदेश से जुड़े कई कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे।

    आयोजकों के अनुसार दोहा में आयोजित होने वाला यह अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन सीजन 2 है। कार्यक्रम में कविता के साथ भावनाओं और प्रेरणा से जुड़ी विभिन्न प्रस्तुतियां भी होंगी। कवि सम्मेलन के दौरान हास्य और काव्य की प्रस्तुतियां श्रोताओं का मनोरंजन करेंगी। इसके अलावा विद्यार्थियों के सम्मान समारोह का भी आयोजन किया जाएगा। इस तरह साहित्य और प्रतिभा सम्मान को एक ही मंच पर जोड़ने की तैयारी की गई है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिंदी भाषा और साहित्य से जुड़े लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

    मनु वैशाली मूल रूप से शिवपुरी शहर की रहने वाली हैं। शिवपुरी निवासी रामनिवास बघेल चिन्नौदी के अनुसार मनु का परिवार मेडिकल कॉलेज के पास स्थित तात्याटोपे नगर में रहता है। फिलहाल मनु वैशाली दिल्ली में रह रही हैं। देश के अलग अलग राज्यों में आयोजित होने वाले कवि सम्मेलनों में वह पहले भी अपनी रचनाओं का पाठ कर चुकी हैं। अपनी कविताओं और मंचीय प्रस्तुतियों के जरिए उन्होंने साहित्य प्रेमियों के बीच पहचान बनाई है। अब दोहा में होने वाली उनकी प्रस्तुति उनके साहित्यिक सफर को एक नया विस्तार देने जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन में मनु वैशाली के साथ अमित शर्मा एकाग्र शर्मा और गौरव साक्षी समेत कई अन्य कवि भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे। अलग अलग अंदाज और विषयों के साथ होने वाली इन प्रस्तुतियों के जरिए कार्यक्रम में साहित्य की विविधता देखने को मिलेगी। खास बात यह है कि विदेश में रहने वाले हिंदी भाषी लोगों के बीच भी हिंदी कविता और कवि सम्मेलनों को लेकर रुचि बनी हुई है। ऐसे में दोहा का यह मंच हिंदी साहित्य से जुड़े रचनाकारों के लिए अपनी बात और रचनात्मकता को व्यापक श्रोताओं तक पहुंचाने का अवसर बनेगा।

    मनु वैशाली के अंतरराष्ट्रीय मंच पर काव्य पाठ करने की खबर से उनके परिवार और मित्रों में भी उत्साह है। शिवपुरी के साहित्य प्रेमियों और शुभचिंतकों ने उन्हें इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर की युवा प्रतिभा का विदेश में आयोजित होने वाले साहित्यिक कार्यक्रम में शामिल होना शिवपुरी के लिए भी गौरव का अवसर है। अब 25 सितंबर को दोहा में होने वाली मनु वैशाली की प्रस्तुति पर शिवपुरी के लोगों की नजर रहेगी। उनके काव्य पाठ के जरिए शिवपुरी की साहित्यिक प्रतिभा की आवाज अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचेगी।

  • शिवपुरी में मजदूर पर जानलेवा हमला, मिर्ची डालकर किया अंधा, पीठ पर चाकू से कई वार कर भागा आरोपी

    शिवपुरी में मजदूर पर जानलेवा हमला, मिर्ची डालकर किया अंधा, पीठ पर चाकू से कई वार कर भागा आरोपी


    शिवपुरी । शिवपुरी शहर के झांसी तिराहा इलाके में शुक्रवार सुबह एक मजदूर पर चाकू से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि हमलावर ने पहले मजदूर की आंखों में मिर्ची डाल दी और इसके बाद चाकू से उसकी पीठ पर कई वार कर दिए। अचानक हुए हमले से मौके पर अफरा तफरी मच गई। वारदात के बाद आरोपी हाथ में चाकू लेकर मौके से फरार हो गया। घायल मजदूर को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसका उपचार जारी है।

    घायल मजदूर की पहचान नवाब साहब रोड निवासी मनोज धाकड़ के रूप में हुई है। मनोज झांसी तिराहा स्थित एक हार्डवेयर दुकान पर काम करता है। मिली जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे मनोज दुकान के बाहर खड़ा हुआ था। इसी दौरान कठमई इलाके का रहने वाला गौरव कुशवाह वहां पहुंचा। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच पहले से किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था।

    मनोज के अनुसार गौरव ने अचानक उस पर हमला कर दिया। आरोप है कि सबसे पहले उसकी आंखों में मिर्ची डाल दी गई। आंखों में मिर्ची पड़ने के बाद मनोज संभल पाता इससे पहले आरोपी ने चाकू निकालकर उसकी पीठ पर कई वार कर दिए। अचानक हुए हमले के कारण मनोज घायल होकर वहीं गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों के बीच भी कुछ देर के लिए हड़कंप की स्थिति बन गई।

    हमले के बाद आरोपी चाकू लहराते हुए मौके से भाग गया। घटना की सूचना मिलने पर आसपास के लोगों ने घायल मजदूर को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। मनोज को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टर उसकी चोटों का उपचार कर रहे हैं।

    घटना के पीछे पुराना विवाद होने की बात सामने आ रही है। हार्डवेयर दुकान के मालिक के मुताबिक गुरुवार शाम को मनोज और गौरव के बीच किसी बात को लेकर बहस हुई थी। उस समय विवाद ज्यादा नहीं बढ़ा था लेकिन अगले दिन सुबह दोनों के बीच फिर से कहासुनी होने के बाद मामला हिंसक हो गया। हालांकि हमले की वास्तविक वजह क्या थी यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    बताया गया है कि जिस व्यक्ति पर हमले का आरोप है वह तीन पहिया लोडिंग वाहन चलाता है। वह इसी हार्डवेयर दुकान पर सामान की लोडिंग और अनलोडिंग का काम भी करता है। इसी वजह से दोनों के बीच पहले से परिचय होने की बात सामने आई है। पुलिस अब विवाद की शुरुआत और हमले से पहले दोनों के बीच हुई बातचीत सहित अन्य पहलुओं की जानकारी जुटा रही है।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस हमले की वजह के साथ साथ आरोपी की तलाश और घटना से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ कर रही है। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती है।

    फिलहाल घायल मजदूर का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हमले के बाद इलाके में भी घटना को लेकर चर्चा बनी हुई है।

  • पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू, जानिए पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या तक सभी श्राद्ध तिथियां और धार्मिक मान्यताएं

    पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू, जानिए पूर्णिमा से सर्वपितृ अमावस्या तक सभी श्राद्ध तिथियां और धार्मिक मान्यताएं

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करने की विशेष अवधि माना जाता है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितृपक्ष के दिनों में पूर्वज अपने वंशजों के समीप आते हैं और उनके द्वारा किए गए अन्न तथा जल के अर्पण से तृप्त होते हैं। इसी कारण इन 16 दिनों को धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व दिया जाता है।

    हिंदू पंचांग के अनुसार पितृपक्ष की शुरुआत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से मानी जाती है। इसे श्राद्ध पक्ष या महालय पक्ष भी कहा जाता है। इस वर्ष पितृपक्ष 26 सितंबर, शनिवार से शुरू होगा और 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा।

    26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध होगा। इसके बाद 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध, 28 सितंबर को द्वितीया श्राद्ध, 29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध और 30 सितंबर को चतुर्थी तथा पंचमी श्राद्ध किया जाएगा। अक्टूबर में 1 तारीख को षष्ठी श्राद्ध, 2 अक्टूबर को सप्तमी श्राद्ध, 3 अक्टूबर को अष्टमी श्राद्ध और 4 अक्टूबर को नवमी श्राद्ध रहेगा।

    इसके बाद 5 अक्टूबर को दशमी श्राद्ध, 6 अक्टूबर को एकादशी श्राद्ध, 7 अक्टूबर को द्वादशी श्राद्ध, 8 अक्टूबर को त्रयोदशी श्राद्ध और 9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध होगा। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या रहेगी, जिसे महालय अमावस्या भी कहा जाता है। यह पितृपक्ष का अंतिम दिन होगा।

    सर्वपितृ अमावस्या का विशेष महत्व माना जाता है। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं होती, उनके लिए इस दिन श्राद्ध करने की परंपरा है। यदि किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका हो, तब भी सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने का धार्मिक महत्व बताया गया है।

    धार्मिक परंपरा के अनुसार किसी व्यक्ति की मृत्यु जिस हिंदू तिथि को हुई हो, पितृपक्ष में उसी तिथि पर उसका श्राद्ध किया जाता है। इसलिए श्राद्ध की तिथि केवल अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख के आधार पर तय नहीं की जाती। इसके लिए हिंदू पंचांग में मृत्यु की तिथि को देखा जाता है। यदि मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं है, तो स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार श्राद्ध का समय निर्धारित किया जाता है।

    पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म में संकल्प, तर्पण, पिंडदान, सात्विक भोजन का अर्पण और दान जैसी परंपराएं शामिल मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भोजन का एक हिस्सा गाय, कौवे और कुत्ते के लिए भी अलग रखा जाता है।

    तर्पण के दौरान जल में काले तिल, जौ और कुशा मिलाकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित करने की परंपरा है। इसके अलावा संबंधित पूर्वज की मृत्यु तिथि पर पिंडदान किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए इन कर्मों से पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए प्रार्थना पूरी होती है।

  • MP में बढ़ेगी VIP उड़ानों की रफ्तार, 225 करोड़ का हेलीकॉप्टर आया, 350 करोड़ के जेट की तैयारी, बनेंगे 63 हेलीपैड

    MP में बढ़ेगी VIP उड़ानों की रफ्तार, 225 करोड़ का हेलीकॉप्टर आया, 350 करोड़ के जेट की तैयारी, बनेंगे 63 हेलीपैड


    भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार अपने हवाई बेड़े को आधुनिक बनाने के साथ प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी का नेटवर्क मजबूत करने की तैयारी कर रही है। सरकार ने करीब 225 करोड़ रुपए की लागत से एयरबस ACH160 हेलीकॉप्टर खरीदने की प्रक्रिया पूरी की है। इसके अलावा करीब 350 करोड़ रुपए का बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 जेट भी सरकारी बेड़े में शामिल होने वाला है। जेट की डिलीवरी सितंबर के अंत तक प्रस्तावित बताई जा रही है जबकि नए हेलीकॉप्टर की डिलीवरी नवंबर में होने की जानकारी सामने आई है।

    नए हेलीकॉप्टर और जेट के इस्तेमाल को आसान बनाने के लिए प्रदेश में हेलीपैड और हवाई पट्टियों के विस्तार पर भी काम किया जाएगा। सरकार अगले दो साल में करीब 63 नए हेलीपैड बनाने की योजना पर काम कर रही है। इनका नेटवर्क इस तरह विकसित करने की तैयारी है कि लगभग हर 50 किलोमीटर के दायरे में हेलीपैड उपलब्ध हो सके। इससे मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी को प्रदेश के अलग अलग जिलों और दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने में सुविधा मिल सकती है।

    फिलहाल मध्यप्रदेश में करीब 250 हेलीपैड होने की जानकारी दी गई है। कई बार किसी जिले के दौरे के दौरान पहले विमान से एयरपोर्ट तक पहुंचना पड़ता है और उसके बाद सड़क या हेलीकॉप्टर से आगे का सफर करना होता है। नए हेलीपैड का नेटवर्क तैयार होने के बाद संबंधित क्षेत्र के नजदीक हेलीकॉप्टर से पहुंचने का विकल्प बढ़ सकता है।

    एयरबस ACH160 आधुनिक सुविधाओं से लैस हेलीकॉप्टर है। मध्यप्रदेश सरकार के लिए तैयार किए जा रहे हेलीकॉप्टर में दो पायलट के साथ नौ लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी। कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार इस मॉडल को अधिकतम 10 यात्रियों की क्षमता के साथ भी कॉन्फिगर किया जा सकता है। इसकी अधिकतम उड़ान अवधि करीब चार घंटे 30 मिनट बताई गई है। इसमें आधुनिक तकनीक और कैमरा सिस्टम जैसी सुविधाएं भी मौजूद रहेंगी।

    नए जेट के संचालन की तैयारी भी शुरू हो चुकी है। मध्यप्रदेश के पायलट विश्वास राय और अरविंद सिंह ने जुलाई में कनाडा जाकर बॉम्बार्डियर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया है। जेट को प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा एयरफील्ड पर संचालित करने के लिए रनवे की लंबाई और दूसरी जरूरी सुविधाओं को विकसित करना भी जरूरी होगा।

    बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 के संचालन के लिए कम से कम करीब 1800 मीटर लंबे रनवे की जरूरत बताई गई है। बेहतर संचालन के लिए करीब 2100 मीटर लंबा रनवे उपयोगी माना जा रहा है। विभागीय आकलन के मुताबिक प्रदेश के 28 एयरफील्ड में से फिलहाल करीब 10 स्थान ऐसे हैं जहां यह जेट उतर सकता है। इनमें सात एयरपोर्ट और तीन हवाई पट्टियां शामिल हैं।

    प्रदेश की करीब 20 हवाई पट्टियों में अभी सिर्फ तीन जगह रनवे 1800 मीटर या उससे ज्यादा लंबा है। इनमें मंदसौर की नौलखा बीड सिवनी और मंडला की कान्हा हवाई पट्टी शामिल हैं। सतना एयरपोर्ट का रनवे करीब 1300 मीटर लंबा होने के कारण यहां इस जेट के संचालन के लिए विस्तार की जरूरत होगी।

    सरकार करीब 20 हवाई पट्टियों के विस्तार की योजना भी बना रही है। विभागीय अनुमान के मुताबिक इस काम पर 300 से 400 करोड़ रुपए तक खर्च हो सकता है। रनवे विस्तार के अलावा जमीन एप्रोच रोड सुरक्षा क्षेत्र और दूसरी विमानन सुविधाओं को भी विकसित करना होगा।

    नए जेट और हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल मुख्य रूप से मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी यात्राओं के लिए किया जाएगा। सरकार के मुताबिक पिछले ढाई साल में विमान और हेलीकॉप्टर किराए पर हर साल औसतन 60 से 70 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। नए हवाई बेड़े के आने के बाद किराए पर होने वाला यह खर्च बचने की संभावना है। सरकार के पास मौजूद पुराना एयरबस EC155 B1 हेलीकॉप्टर वर्ष 2011 में खरीदा गया था और बढ़ते रखरखाव खर्च के बीच नए हेलीकॉप्टर की जरूरत महसूस की गई।

  • यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो बना वैश्विक मंच, सीएम योगी बोले- परंपरा और तकनीक से पॉसिबिलिटी को प्रॉस्पेरिटी में बदला

    यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो बना वैश्विक मंच, सीएम योगी बोले- परंपरा और तकनीक से पॉसिबिलिटी को प्रॉस्पेरिटी में बदला

    नई दिल्ली । ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में शुक्रवार से चौथे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह आयोजन उत्तर प्रदेश की औद्योगिक, पारंपरिक और तकनीकी क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि ट्रेड शो प्रदेश की परंपरा और तकनीक को एक मंच पर लाकर वैश्विक बाजार से जोड़ने का काम कर रहा है।

    मुख्यमंत्री ने ट्रेड शो में पहुंचे 90 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, विदेशी खरीदारों और प्रदर्शकों का स्वागत किया। उन्होंने जापान, सिंगापुर और बेलारूस के राजदूतों तथा उच्चायुक्तों के प्रति भी आभार जताया। उनके मुताबिक इस बार करीब 600 विदेशी खरीदार और लगभग डेढ़ लाख बी2बी विजिटर आयोजन में शामिल होने वाले हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश की प्रमुख ताकत उसकी परंपरा और उद्यमशीलता में है। इसी सोच के तहत प्रदेश के पारंपरिक उद्योगों और स्थानीय उत्पादों को वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट यानी ओडीओपी के माध्यम से पहचान देने का प्रयास किया गया है। अलग-अलग जिलों के विशिष्ट उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने पर काम किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश तेजी से मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश से दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात विभिन्न देशों को किया जा रहा है। उनके अनुसार यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो इसी बदलाव को प्रदर्शित करने वाला महत्वपूर्ण मंच बन गया है।

    इस बार ट्रेड शो करीब 36 हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में आयोजित किया गया है। इसमें 2400 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं। यहां उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों के साथ आधुनिक तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई और नवाचार से जुड़े उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

    योगी ने कहा कि इस आयोजन के जरिए छोटे उद्यमियों, कारीगरों, बुनकरों और एमएसएमई को सीधे वैश्विक बाजार से जुड़ने का अवसर मिल रहा है। इससे उत्पादकों को बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है और बिचौलियों की भूमिका कम करने की संभावना भी बनती है। उन्होंने ट्रेड शो को केवल व्यापारिक आयोजन के बजाय उत्तर प्रदेश में हो रहे बदलाव को दुनिया के सामने रखने वाला मंच बताया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक प्रदेश के हस्तशिल्प, बुनकरों और पारंपरिक कारीगरों को पर्याप्त मंच नहीं मिल पाया। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो उनके उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक हुनर और सांस्कृतिक विरासत अब बड़े कारोबार से जुड़ रहे हैं।

    अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने अमित शाह के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने की प्रक्रिया के दौरान पारंपरिक उद्योगों की क्षमता को पहचानने पर जोर दिया गया था। उन्होंने कहा कि ओडीओपी इसी सोच के तहत उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि ट्रेड शो में ऑस्ट्रिया, रूस, बेलारूस, वियतनाम और फ्रांस समेत कई देशों की भागीदारी है। उनके अनुसार इन देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी, तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उपक्रम की संभावनाओं पर काम करने का अवसर मिल रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत के विभिन्न देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उत्तर प्रदेश को भी मिल रहा है। प्रदेश अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को निवेश के लिए आकर्षित करने और वैश्विक निर्यात की संभावनाएं बढ़ाने पर जोर दे रहा है। योगी ने कहा कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो उत्तर प्रदेश की परंपरा, उद्योग और वैश्विक बाजार से बढ़ते जुड़ाव का प्रतीक बन रहा है।

  • MP में शिक्षक भर्ती का बड़ा प्लान, 48 हजार पदों पर होगी तैयारी, TET के बाद 30 हजार शिक्षकों को प्रमोशन से मिलेंगे नए मौके

    MP में शिक्षक भर्ती का बड़ा प्लान, 48 हजार पदों पर होगी तैयारी, TET के बाद 30 हजार शिक्षकों को प्रमोशन से मिलेंगे नए मौके


    भोपाल। मध्यप्रदेश में शिक्षकों की पदोन्नति और नई भर्ती को लेकर बड़ी तस्वीर सामने आई है। प्रदेश में 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET के बाद आगे बढ़ सकती है। दिसंबर में प्रस्तावित TET का परिणाम आने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग प्रमोशन की पहली सूची जारी करने की तैयारी कर रहा है। शिक्षकों के प्रमोशन के बाद खाली होने वाले पदों और सेवानिवृत्ति के कारण रिक्त होने वाले पदों को मिलाकर अगले चरण में करीब 48 हजार पदों पर भर्ती की स्थिति बन सकती है।
    दरअसल प्रदेश सरकार ने 30 जुलाई से सभी विभागों में प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू की थी। कई विभागों में करीब एक लाख पदोन्नतियां हो चुकी हैं। स्कूल शिक्षा विभाग में लिपिक संवर्ग और कुछ उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के प्रमोशन भी किए जा चुके हैं। हालांकि शिक्षक संवर्ग की पदोन्नति अभी बाकी है। विभाग की ओर से प्रमोशन के लिए पात्र शिक्षकों की सूची तैयार की जा चुकी है और अब TET के परिणाम का इंतजार किया जा रहा है।
    शिक्षकों की पदोन्नति को TET से जोड़ने के पीछे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दिसंबर 2028 तक छह बार शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जानी है। पहली परीक्षा दिसंबर में माध्यमिक शिक्षा मंडल के माध्यम से प्रस्तावित है। परीक्षा का परिणाम आने के बाद विभाग शिक्षक संवर्ग की पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकता है।
    नई भर्ती के लिहाज से भी आने वाला समय महत्वपूर्ण हो सकता है। फिलहाल स्कूल शिक्षा विभाग में करीब 10 हजार पद खाली बताए जा रहे हैं। इसके अलावा मार्च 2027 तक करीब 8 हजार शिक्षक सेवानिवृत्त हो सकते हैं। इस तरह मौजूदा रिक्तियों और संभावित रिटायरमेंट को मिलाकर करीब 18 हजार पद खाली होने की स्थिति बन सकती है।

    इसके साथ ही 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों के प्रमोशन होने पर उनके वर्तमान पद भी रिक्त होंगे। इन दोनों स्थितियों को जोड़ने पर करीब 48 हजार पदों पर नई भर्ती की संभावनाएं बन सकती हैं। हालांकि इन पदों में वर्ग एक वर्ग दो और वर्ग तीन के कितने पद होंगे इसकी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। अंतिम संख्या विभाग की ओर से पदों की समीक्षा और रिक्तियों के निर्धारण के बाद सामने आएगी।
    प्रमोशन और भर्ती की यह प्रक्रिया उन युवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है जो शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षकों के पदोन्नत होने के बाद उनके पुराने पद खाली होंगे और इन पदों पर नए अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता खुल सकता है। हालांकि नई भर्ती का विज्ञापन तत्काल आने की संभावना नहीं बताई जा रही है।
    विभाग की मौजूदा तैयारी के अनुसार शिक्षक भर्ती का विज्ञापन मार्च 2028 के बाद जारी किया जा सकता है। इसके बाद परीक्षा परिणाम और नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी होने में भी समय लगेगा। ऐसे में 2026 में नई शिक्षक भर्ती का विज्ञापन आने की संभावना फिलहाल नहीं है।
    दूसरी ओर शिक्षक संगठन TET की अनिवार्यता का विरोध करते हुए जल्द प्रमोशन की मांग कर रहे हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री और विभागीय अधिकारियों के साथ हुई चर्चाओं में भी यह मुद्दा उठाया गया है। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने 27 सितंबर से प्रस्तावित आंदोलन में प्रमोशन की मांग को शामिल किया है। अब दिसंबर की TET और उसके बाद होने वाली विभागीय प्रक्रिया पर शिक्षकों और भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं दोनों की नजर रहेगी।