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  • जहां सुकून और डर साथ रहते हैं, 1986 की त्रासदी से जुड़ी है इस झील की कहानी

    जहां सुकून और डर साथ रहते हैं, 1986 की त्रासदी से जुड़ी है इस झील की कहानी


    नई दिल्ली दुनिया में कई ऐसी जगहें हैं, जो देखने में बेहद खूबसूरत लगती हैं, लेकिन उनके अंदर खतरनाक रहस्य भी पाए जाते हैं। न्योस झील ऐसी ही एक झील है, जो अपनी प्राकृतिक प्रकृति के साथ-साथ संकटग्रस्त इतिहास के लिए भी जानी जाती है। अफ्रीकी देश कैमरून में स्थित यह झील के लिए भी रहस्य बनी हुई है।

    1986: जब लेक ने उगला डेथ का बादल देखा
    21 अगस्त 1986 की रात इतिहास की सबसे रहस्यमय प्राकृतिक घटनाएँ दर्ज हैं। उस दिन इस झील से अचानक निकला आसमानी गैस का बादल, जिसने आसपास के लोगों को अपनी चपेट में ले लिया।

    करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की आबादी वाले इस गैस क्लाउड ने करीब 1800 लोगों, 3500 लोगों और अनगिनत पक्षियों की जान ले ली। सबसे अजीब बात यह है कि लोग सोते-सोते ही दम तोड़ गए और उन्हें कुछ समझने का मौका भी नहीं मिला।

    क्या है ‘लिमनिक विस्फोट’ का रहस्य?
    इस घटना को लिमनिक विस्फोट का नाम दिया गया है। असल में, यह झील एक वैज्ञानिक क्रेटर में बनी है, जहां नीचे मौजूद मैग्मा कांसॉली कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है।

    यह गैस झील की गहराई में जमा होता है और जब दबाव अधिक बढ़ता है, तो अचानक विस्फोट की तरह बाहर निकलता है। यह गैस हवा से भारी होती है, इसलिए जमीन के पास बहती है और ऑक्सीजन की जगह ले जाती है, जिससे सांस लेना असंभव हो जाता है।

    राक्षसों के बीच बसी है यह खतरनाक झील
    लेक न्योस उत्तर-पश्चिमी कैमरून के ओकू आर्किटेक्चर क्षेत्र में स्थित है। यह एक क्रेटर झील है, जो टोकरा विस्फोट से बने पानी के दावे से बनी है। झील की गहराई में मौजूद गैस का लगातार जमाव इसमें दुनिया की सबसे खतरनाक झीलें शामिल हैं। यहां की जमीन और प्राकृतिक प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर यह प्राकृतिक खतरे हमेशा के लिए बरकरार है।

    गेन ने कैसे किया खतरनाक को कम
    1986 की घटना के बाद इस खतरे को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया। वर्ष 2001 में यहां ‘डीगैसिंग सिस्टम’ का आविष्कार किया गया, जिसके माध्यम से पाइपों के माध्यम से गैस को धीरे-धीरे बाहर निकाला गया। इसके बाद 2011 में दो और पाइपलाइन लगाए गए, जिससे गैस पर नियंत्रण हो गया। अब झील से गैस धीरे-धीरे-धीमी गहराई पर बनी हुई है, जिससे बड़े विस्फोट की आशंका काफी हद तक कम हो गई है।

    आज भी रहस्य और डॉक्टर का रहस्य है
    आज भी न्योस झील देखने में शांत और सुंदर दिखती है, लेकिन इसके अंदर छिपा खतरा पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। वैज्ञानिक इस झील और अफ्रीका की अन्य झीलों पर नजर रख रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी को बरकरार रखा जा सके।

  • दतिया में नवरात्र में बड़ी माता का दिव्य श्रृंगार: फूल-आभूषणों से सजा मंदिर, श्रद्धालुओं की भीड़

    दतिया में नवरात्र में बड़ी माता का दिव्य श्रृंगार: फूल-आभूषणों से सजा मंदिर, श्रद्धालुओं की भीड़


    दतिया । दतिया में स्थित श्री विजय काली पीठ बड़ी माता मंदिर इन दिनों अपने आकर्षक दिव्य श्रृंगार के लिए भक्तों का ध्यान खींच रहा है। चैत्र नवरात्र के अवसर पर माता को फूलों आभूषणों और सुंदर वस्त्रों से सजा कर उनके दरबार में दर्शनार्थियों का स्वागत किया जा रहा है। भक्त इस दृश्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और पूरे मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का माहौल बना रहता है।

    मंदिर परिसर में नवरात्र के दौरान मेले का आयोजन भी किया गया है। श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचकर पूजा अर्चना कर रहे हैं। मंदिर प्रशासन ने भक्तों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की भी व्यवस्था की है। बड़ी माता को दतिया शहर की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है और हर साल नवरात्र में उनके दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ती है।

    इतिहास के अनुसार दतिया रियासत के राजा विजय बहादुर ने 1839 से 1857 के बीच इस मंदिर की स्थापना कराई थी। मान्यता है कि राजा ने अपनी त्वचा रोग से मुक्ति पाने के लिए देवी की स्थापना कराई थी। लोकविश्वास है कि चेचक जैसी बीमारियों में देवी को जल अर्पित कर पीड़ित को पिलाने से लाभ मिलता है।

    बुंदेला राजाओं का बनारस से संबंध रहा है और वे देवी उपासक थे। शहर में मांगलिक कार्यों की शुरुआत आज भी बड़ी माता के पूजन से होती है। नवरात्र के दौरान नवमी और दशमी पर यहां जवारे चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

    भक्तों का कहना है कि माता का दिव्य श्रृंगार और मंदिर का वातावरण उन्हें आध्यात्मिक ऊर्जा और मानसिक शांति प्रदान करता है। बड़े माता के दर्शन और विशेष पूजा अर्चना के कारण नवरात्र के अवसर पर मंदिर में भक्तों की उपस्थिति हर साल बढ़ती ही जा रही है।

  • महिलाओं की नींद पर रिसर्च, सामने आया ‘स्लीप जेंडर गैप’ का सच

    महिलाओं की नींद पर रिसर्च, सामने आया ‘स्लीप जेंडर गैप’ का सच


    नई दिल्ली बायबैक द्वारा किए गए कई शोधों में एक दिलचस्प लेकिन अनोखा तथ्य सामने आया है- महिलाओं और पुरुषों की नींद का साफ मतलब है। इस अंतर को जेंडर स्लीप गैप कहा जाता है। यह केवल सोने के समय का फर्क नहीं है, बल्कि नींद की गुणवत्ता, गहराई और मानसिक प्रभावों से भी फर्क पड़ता है।

    मातृभाषा की नींद पर गहरा असर
    एक अध्ययन के अनुसार, 45 साल से कम उम्र की केवल 48% माताएं ही प्रतिदिन 7 घंटे की नींद ले कर बेरोजगार हैं, जबकि बिना बच्चों वाली 62% महिलाएं पूरी तरह से सोती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि देश की महिलाओं की नींद सबसे ज्यादा प्रभावित होती है। बच्चों की देखभाल, रात में बार-बार उठना और वजन का बोझ महिलाओं की नींद को बाधित करता है।

    ग्लोबल रिपोर्ट में भी आई सच्चाई सामने
    2025 में स्लीप साइकल की एक ग्लोबल रिपोर्ट में पाया गया कि केवल 57% महिलाएं ही सामान्य मूड के साथ जागती हैं, जो पुरुषों के लिए कम है। यह संकेत बताता है कि महिलाओं की नींद केवल कम होती है, बल्कि उनकी गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।

    सबसे बड़ी वजह
    महिलाओं के जीवन में ऐसे कई चरण आते हैं, जहां मासिक धर्म, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति जैसे परिवर्तन होते हैं। ये बदलाव नींद के पैटर्न को प्रभावित करते हैं। नींद का बार-बार टूटना और गहरी नींद की कमी महिलाओं में आम समस्या बन जाती है, जिससे शरीर और दिमाग को पूरा आराम नहीं मिलता।

    सामाजिक दबाव और जिम्मेदारियाँ भी जिम्मेदार
    केवल जैविक कारण ही नहीं, बल्कि सामाजिक कारण भी ये ‘जेंडर स्लीप गैप’ हैं। घर और काम के बीच संतुलन, परिवार की जिम्मेदारी, बच्चों की देखभाल और मानसिक तनाव, महिलाओं की नींद पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    महिलाओं को अधिक नींद क्यों आती है?
    विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाएं अधिक से अधिक मल्टीटास्किंग करती हैं और वैज्ञानिक रूप से भी अधिक सक्रिय रहती हैं। इससे उनके दिमाग को आराम की अधिक आवश्यकता होती है। लेकिन जब इसकी बिल्कुल जरूरत नहीं है, तो इसका असर उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने लगता है।

    स्वास्थ्य पर पड़ सकता है गंभीर असर
    महिलाओं में लगातार नींद की कमी से थकान, चिड़चिड़ापन, तनाव और अनिद्रा की समस्या हो सकती है। इसके अलावा हृदय रोग और मेटाबोलिक विकार का खतरा भी बढ़ जाता है।
    विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अच्छी नींद केवल आराम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की बुनियाद है।

    जागरूकता ही समाधान
    ‘जेंडर स्लीप गैप’ को डाउनलोड करें और इसे कम करने के लिए जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। परिवार और समाज को भी इस दिशा में प्रेरित किया जाएगा, ताकि महिलाओं को पर्याप्त सुविधा और बेहतर स्वास्थ्य मिल सके।

  • नेपाल में बदलाव की बयार बालेन शाह का नया राजनीतिक अध्याय और हिंदुत्व बहस की नई दिशा

    नेपाल में बदलाव की बयार बालेन शाह का नया राजनीतिक अध्याय और हिंदुत्व बहस की नई दिशा


    नई दिल्ली
    : नेपाल की राजनीति इन दिनों एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रही है हाल ही में हुए आम चुनावों ने देश के सत्ता समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है अब 35 वर्ष के युवा नेता बालेंद्र शाह देश के नए प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं उनकी शपथ को लेकर खास चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि वे 27 मार्च को राम नवमी के दिन पद की शपथ लेंगे यह तारीख केवल एक औपचारिक निर्णय नहीं मानी जा रही बल्कि इसे गहरे राजनीतिक और सामाजिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है

    बालेंद्र शाह जिन्हें लोग बालेन के नाम से भी जानते हैं पहले एक रैपर के रूप में लोकप्रिय हुए थे उन्होंने अपने गीतों के माध्यम से भ्रष्टाचार और सिस्टम की खामियों पर खुलकर सवाल उठाए थे इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 2022 में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीतकर अपनी अलग पहचान बनाई अब वही युवा नेता प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं और यह नेपाल की राजनीति में एक नया अध्याय माना जा रहा है

    उनका राजनीतिक सफर केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं है बल्कि यह एक बड़े बदलाव का संकेत भी देता है वे मधेशी समुदाय से आते हैं और इस समुदाय से प्रधानमंत्री बनने वाले पहले नेता हैं यह उपलब्धि नेपाल की सामाजिक संरचना में समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है उनके नेतृत्व में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने हालिया चुनावों में भारी बहुमत हासिल किया है और 275 सदस्यीय संसद में 182 सीटें जीतकर स्पष्ट जनादेश प्राप्त किया है

    विशेषज्ञों का मानना है कि राम नवमी के दिन शपथ लेने का निर्णय एक रणनीतिक संदेश है यह जनता की आस्था से जुड़ने का प्रयास माना जा रहा है और इसे राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण समझा जा रहा है कुछ विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम यह दर्शाता है कि नया नेतृत्व धार्मिक भावनाओं को स्वीकार करता है लेकिन वह पारंपरिक राजनीति से अलग दिशा में आगे बढ़ना चाहता है

    यह भी माना जा रहा है कि बालेंद्र शाह का यह निर्णय नेपाल की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाने का प्रयास है नेपाल हमेशा से अपनी अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने का पक्षधर रहा है ऐसे में राम नवमी जैसे पवित्र दिन पर शपथ लेना उस परंपरा को आगे बढ़ाने जैसा है

    दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि इसे भारत के संदर्भ में सीधे तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए नेपाल की अपनी राजनीतिक और धार्मिक पहचान है और वहां की राजनीति अपनी परिस्थितियों के अनुसार विकसित होती है बालेन शाह की सोच पुराने राजशाही मॉडल से अलग है जहां राजा को भगवान का अवतार माना जाता था इसके विपरीत वे आधुनिक और लोकतांत्रिक सोच के समर्थक माने जाते हैं

    उनके समर्थक मुख्य रूप से युवा वर्ग से हैं जो परिवर्तन की मांग कर रहे थे यह युवा नेतृत्व नेपाल की राजनीति में नई ऊर्जा और नई सोच लेकर आया है अब देखना होगा कि प्रधानमंत्री के रूप में बालेंद्र शाह किस तरह देश की आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करते हैं

  • नवरात्रि डाइट टिप्स: साबूदाना बना सबसे बेहतर विकल्प, हल्का और हेल्दी भोजन

    नवरात्रि डाइट टिप्स: साबूदाना बना सबसे बेहतर विकल्प, हल्का और हेल्दी भोजन


    नई दिल्ली चैत्र नवरात्रि के नौ पावन दिनों में भक्त पूरी श्रद्धा से मां दुर्गा की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। इस दौरान शरीर को स्वायत्त ऊर्जा और पोषण की नियुक्ति अत्यंत आवश्यक है। सही आहार न लेने पर कमजोरी, थकान और पाचन संबंधी विकार हो सकते हैं। ऐसे में साबूदाना व्रत का एक आदर्श और मानक आहार के रूप में सामने आता है।

    प्रभावकारी, स्वादिष्ट और तत्काल ऊर्जा प्रदान करने वाला
    साबूदाना कसावा (टैपिओका) का कन्द से तैयार किया जाता है और दानों के रूप में छोटे-छोटे मोती के रूप में होता है। पानी या दूध में मसाले के बाद यह स्टॉक और हो जाता है। व्रत के दौरान इसमें सजावट, खेड या साधारण स्टॉकर यात्रा होती है। सुबह-सुबह साबूदाना के सेवन से पूरे दिन शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और थकान महसूस नहीं होती।

    पोषण से भरपूर, पाचन के लिए लाभकारी
    साबूदाना कार्बोहाइड्रेट का बेहतरीन स्रोत है, जो तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है। इसमें प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन और विटामिन भी पाए जाते हैं। पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज की समस्या से राहत देता है। व्रत के दौरान अक्सर गैस, अपच या भारीपन महसूस होता है, लेकिन साबूदाना इन समस्याओं को कम करने में मदद करता है। यह प्रभाव होता है और आसानी से पच जाता है, जिससे पेट पर भी प्रभाव पड़ता है।

    दिल, वजन और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए
    साबूदाना में मौजूद पदार्थ और मैग्नीशियम दिल को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं और ब्लड वॉल्यूम को स्थिर बनाए रखते हैं। कम कैलोरी होने के कारण यह वजन बढ़ने से भी रोकता है। इसमें मौजूद विटामिन्स और बालों के अलावा त्वचा और बालों के लिए भी चमत्कारी होते हैं। नियमित सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, जिससे शारीरिक संतुलन से लड़ने में सक्षम बनता है।

    कृमि में भी सीमित मात्रा में मिलावट
    विशेषज्ञ के अनुसार, साबूदाना की मात्रा सीमित मात्रा में हो सकती है, क्योंकि इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन ब्लड शुगर को स्थिर बनाए रखने में मदद करते हैं। हालाँकि, इसका सेवन डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।

    ऐसे डॉक्यूमेंट्री साबूदाना
    साबूदाना बनाने में 2-3 घंटे का समय लगता है. इसके बाद फ़्लॉइकर में आलू, मटर और मूंगफली की दुकानें शामिल हैं। विभिन्न प्रकार की इकाइयाँ तैयार करें। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ राक्षसी भी है। मूंगफली और आलू मिलाने से इसमें प्रोटीन और ऊर्जा की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे व्रत के दौरान संपूर्ण आहार बन जाता है।

  • दतिया में साइबर ठगी का मामला: महिला को नौकरी और इलाज का बहाना देकर ठगे गए लाखों

    दतिया में साइबर ठगी का मामला: महिला को नौकरी और इलाज का बहाना देकर ठगे गए लाखों


    दतिया । दतिया के कोतवाली थाना क्षेत्र में रविवार को साइबर ठगी का गंभीर मामला सामने आया। फेसबुक पर दोस्ती कर महिला सुमन भटनागर (57) से आरोपियों ने इलाज और नौकरी का झांसा देकर करीब 18 लाख रुपये ठग लिए। पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    सुमन भटनागर ने बताया कि 1 मार्च 2025 को उनकी फेसबुक आईडी पर शिवम वीरेंद्र सिंह नामक व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट आई। बातचीत बढ़ने के बाद आरोपी ने अपनी मां के इलाज का बहाना बनाकर पहले 20 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए। इसके बाद अलग-अलग बहानों से लगातार रकम मांगते रहे।

    आरोपी ने कभी मां के इलाज, कभी एक्सीडेंट और कभी बहन की बीमारी का बहाना बनाकर महिला से पैसे लिए। अगस्त 2025 से महिला को बिजली विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा भी दिया गया और करीब साढ़े तीन लाख रुपये ठगे गए। आरोपियों ने ‘टीना मैम’ नाम की महिला और किसी ‘सर’ से भी बात कराई ताकि महिला को भरोसे में लिया जा सके और पैसे ट्रांसफर कराए जा सकें।

    पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। महिला ने मोबाइल नंबर और लेनदेन के स्क्रीनशॉट के साथ शिकायत दी। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की पहचान और लोकेशन ट्रेस कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से सतर्क रहें और किसी भी तरह के लालच में आकर पैसे न भेजें। यह घटना साइबर ठगी और सोशल मीडिया पर धोखाधड़ी की गंभीरता को उजागर करती है।

  • अंजड नगर में चैत्र नवरात्रि: गायत्री मंदिर में विशेष पंचकुंडीय यज्ञ और साधकों का जप-तप

    अंजड नगर में चैत्र नवरात्रि: गायत्री मंदिर में विशेष पंचकुंडीय यज्ञ और साधकों का जप-तप


    बड़वानी । अंजड नगर के ठीकरी रोड स्थित गायत्री मंदिर में चैत्र नवरात्रि को भक्तिभाव और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान साधक प्रतिदिन सुबह 5 बजे से सामूहिक जप, तप, ध्यान और साधना कर रहे हैं। परम पूज्य गुरुदेव की वाणी के बाद नादयोग साधना का क्रम निरंतर चलता रहा।

    रविवार सुबह 7:30 बजे से मंदिर में परिव्राजक और महिला मंडल की बहनों ने संगीत के साथ देव पूजन और देव आव्हान किया। इसके बाद पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ शुरू हुआ। यज्ञशाला में विश्व कल्याण की भावना के साथ गायत्री मंत्र के साथ आहुतियां प्रदान की गई। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के कई स्वरूपों, महालक्ष्मी और महामृत्युंजय मंत्रों के साथ विशेष आहुतियां दी जा रही हैं।

    इसके साथ ही परम पूज्य गुरुदेव का 18 सूत्रीय सदसंकल्प पाठ भी सभी साधकों के साथ दोहराया गया। सुबह 9:30 बजे यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद वेदमाता गायत्री और भगवान प्रज्ञेश्वर महादेव की आरती हुई और प्रसादी का वितरण किया गया।

    गायत्री शक्तिपीठ के प्रमुख ट्रस्टी जगदीश एग्रो ने बताया कि चैत्र नवरात्रि की सप्तमी 25 मार्च को पंचकुंडीय यज्ञ के साथ कई प्रकार के संस्कार निशुल्क संपन्न करवाए जाएंगे। इनमें पुंसवन, नामकरण, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत और मुंडन जैसे संस्कार शामिल हैं।

    उन्होंने यह भी बताया कि 27 मार्च को नवमी के दिन सुबह 8 बजे से नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न कर नौ दिनों से चल रहे आयोजन की महा पूर्णाहुति की जाएगी। इसी अवसर पर भगवान श्रीरामचंद्र जी का पूजन और जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके पश्चात मंचासीन कार्यक्रम और अमृतासन प्रसादी का वितरण होगा। ट्रस्ट मंडल और परिजन नगर की धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आवाहन कर रहे हैं।

    हिन्दू शास्त्रों के अनुसार चैत्र और अश्विन माह की नवरात्रि शक्ति संचय करने का सर्वोत्तम समय है। इस अवसर पर साधक 24 हजार गायत्री मंत्रों का जप करते हैं, जिसे “लघु अनुष्ठान” कहा जाता है। साधक प्रतिदिन 27 माला गायत्री मंत्र का जप सुबह 4 से 8 बजे या शाम 4 से सूर्यास्त तक कर रहे हैं। साधक और परिजन अपनी सामर्थ्य और इच्छा अनुसार व्रतों का पालन भी कर रहे हैं।

    पंचकुंडीय यज्ञ में नगर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालुजन आए और धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है बल्कि नगर और आसपास के लोगों में सामूहिक भक्ति और श्रद्धा की भावना को भी प्रगाढ़ बनाता है।

  • बिहार दिवस पर नीतीश कुमार का संदेश विकास सांस्कृतिक गौरव और पीएम मोदी के योगदान की सराहना

    बिहार दिवस पर नीतीश कुमार का संदेश विकास सांस्कृतिक गौरव और पीएम मोदी के योगदान की सराहना


    नई दिल्ली:बिहार दिवस के अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राज्य के विकास और सांस्कृतिक गौरव पर विस्तृत संदेश साझा किया उन्होंने अपने संदेश में बिहार की समृद्ध विरासत, परंपराओं और विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए इसे राज्य और देश दोनों के लिए गर्व का विषय बताया

    मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में कहा कि बिहार के सर्वांगीण विकास, सामाजिक न्याय, सुशासन और मजबूत आधारभूत संरचना के निर्माण के लिए उनकी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केंद्र सरकार का सहयोग राज्य के विकास को नई गति दे रहा है और इसी सहयोग से बिहार तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर है

    नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन और समर्थन से बिहार के प्रतिभाशाली लोग राज्य और देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा और राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

    अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने बिहार दिवस को राज्य की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव बताया उन्होंने कहा कि यह दिन बिहार के सामर्थ्य, परंपरा और गौरवशाली अतीत को याद करने का अवसर है बिहार की भूमि ने प्राचीन काल से ही ज्ञान, आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को दिशा दी है

    उन्होंने भगवान बुद्ध और आचार्य चाणक्य का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार की धरती ने ऐसे महान व्यक्तित्वों को जन्म दिया है जिन्होंने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित किया है चाणक्य और चंद्रगुप्त मौर्य के प्रयासों ने एक सशक्त और संगठित भारत की नींव रखी जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है

    नीतीश कुमार ने बिहार के लोगों की मेहनत, ईमानदारी और प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि बिहारवासियों ने देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई है चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, उद्योग, कला या संस्कृति हर क्षेत्र में बिहार के लोगों का योगदान उल्लेखनीय रहा है

    उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के लोग जहां भी जाते हैं अपनी संस्कृति और मूल्यों को साथ लेकर चलते हैं जिससे राज्य की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होती है उन्होंने विशेष रूप से छठ महापर्व का उल्लेख किया जो अब दुनिया भर में बिहार की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में ऐतिहासिक संदर्भों का भी उल्लेख किया जिसमें महात्मा गांधी के चंपारण सत्याग्रह, लोकनायक जयप्रकाश नारायण का आंदोलन और जननायक कर्पूरी ठाकुर का योगदान शामिल है उन्होंने कहा कि इन महान नेताओं ने बिहार और देश को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई

    उन्होंने राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और समावेशी विकास के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और कहा कि बिहार अब तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं

    अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का बिहार अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेते हुए आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर बढ़ रहा है यह यात्रा न केवल बिहार की बल्कि पूरे भारत की प्रगति और परिवर्तन की कहानी को भी दर्शाती है

  • सावधान! बाजार में मिलने वाले ये ‘हेल्दी’ फूड लंबे समय में कर सकते हैं नुकसान

    सावधान! बाजार में मिलने वाले ये ‘हेल्दी’ फूड लंबे समय में कर सकते हैं नुकसान


    नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास घर का ताजा और पुराना खाना बनाने का समय कम हो रहा है। यही वजह है कि लोग मार्केट में मीटिंग वाले स्ट्रैटेजी और रेडी-टू-ईट फूड पर भारी प्रतिबंध हो गए हैं। खास बात यह है कि इन मूर्तियों को ‘हल्दी’ में शामिल किया जाता है।

    हर ‘हेल्दी’ चीज़ सच में स्वस्थ नहीं है
    बाजार में ऐसे कई खाद्य उत्पाद मौजूद हैं, जिनमें कम चीनी, ज्यादा पोषण और फिटनेस के नाम शामिल हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। इनमें से कुछ चीनी, केमिकल और सर्जिकल शरीर को धीरे-धीरे नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 ‘हेल्डी’ फ़ार्म, जो असल में आपकी सेहत बना सकते हैं।

    1. साबुत अनाज: साबुत अनाज की कमी, शुगर अधिक
    पैक्ड सामान में स्टेक-इलेक्ट्रिक उत्पाद शामिल हैं, लेकिन इनमें अक्सर अतिरिक्त चीनी, प्रिजर्वेटिव और कलात्मक रंग मिलाए जाते हैं। वहीं, साबुत अनाज की दुकानों पर मिलने वाले सामुहिक फलों में भी सब्जी की कमी होती है, जो फल का सबसे जरूरी हिस्सा होता है। ऐसे में पूरा फल खाना बड़ा खतरनाक होता है।

    2. इंस्टिटेंट ओट्स: अधिकांश व्यापारियों का नुकसान
    इन्टेंट ओट्स को अर्ली बनने वाला वैलिडिटी विकल्प माना जाता है, लेकिन काफी आकर्षक बनाया जाता है। इसमें स्वाद, नमक और कई बार चीनी भी मिलाई जाती है। इसके बजाय कम आकर्षक वाले स्टील-कैट ओट्स बड़े पैमाने पर उद्यम और राक्षसी होते हैं।

    3. ब्राउन बेडर: नाम ‘हेल्दी’, अंदर से मेडा
    बाजार में मिलने वाली ज्यादातर ब्राउन ब्रेडेड को मल्टीग्रेन या आटा ब्रेडेड बेरोजगारों द्वारा बेची जाती है, लेकिन हकीकत में इनमें मैदा की मात्रा अधिक होती है। रंग देने के लिए कैरमल या अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं, जिससे यह भूरा दिखता है। ऐसे में ब्राउन बेडर को आंख बंद करके स्टेक मैन लेना गलत हो सकता है।

    4. फ्लेवर्ड दही या लस्सी: स्वाद में मीठा, सेहत में नुकसान
    पैक्ड फ्लेवर्ड दही या लस्सी का स्वाद अच्छा ही लगता है, लेकिन इनमें फ्लेवर, प्रिजर्वेटिव और मात्रा में शुगर मिलाई होती है। इसके नियमित सेवन से वजन बढ़ सकता है और रक्त शर्करा में कमी हो सकती है। सादा दही या घर की बनी लस्सी मुख्य रूप से सुरक्षित विकल्प है।

    5. शुगर मुक्त उत्पाद: शुगर मुक्त उत्पाद
    यहां ‘शुगर-फ्री’ के नाम पर कई उत्पाद खत्म किए जा रहे हैं, लेकिन इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर या रिफाइंड तत्व मौजूद हैं। लंबे समय तक इसका सेवन शरीर के लिए लाभकारी हो सकता है। प्राकृतिक मिश्रण जैसे गुड़ या शहद को भी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।

    सही चुनाव से ही संभव सही स्वास्थ्य
    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि संभवतः संभव हो, प्राकृतिक और कमोडिटी भोजन को ही शामिल करना चाहिए। ट्रैक्टर और विज्ञापन के झांसे में गाइन ‘हल्दी’ टैग वाले प्रोडक्ट्स पर नजर बंद करके पक्का नुकसान हो सकता है।

  • ऊर्जा मंत्री के क्षेत्र में भी गंदा पानी: ग्वालियर में नालियों के बीच से होकर गुजर रही पाइपलाइनें, स्वास्थ्य खतरे में

    ऊर्जा मंत्री के क्षेत्र में भी गंदा पानी: ग्वालियर में नालियों के बीच से होकर गुजर रही पाइपलाइनें, स्वास्थ्य खतरे में


    ग्वालियर । ग्वालियर शहर में पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। इंदौर के भागीरथपुरा हादसे के बावजूद यहां हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। सरकारी निर्देशों के बावजूद कई इलाकों में पाइपलाइनें सीवर और नालों के बीच से गुजर रही हैं जिससे गंदा और दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा है।

    नगर निगम ने दो महीने में मात्र 28 स्थानों की पहचान की जिनमें से केवल 13 पर सुधार किया जा सका। बाकी जगहों पर खतरा अब भी जस का तस बना हुआ है। रविवार को कई इलाकों में निगम को मौके पर उतरकर मोटर से पानी निकालना पड़ा। कई वार्डों में सीवर लाइन चोक होने से गंदा पानी सड़कों और गलियों में भर गया जिससे घरों में मटमैला पानी पहुंच रहा है।

    वार्ड 38 में नलों से शुरुआती 10 मिनट तक मटमैला पानी आता है और कई बार उसमें कीड़े भी दिखाई देते हैं। वार्ड 39 में नालियों के बीच से खुली पाइपलाइनें गुजर रही हैं। वार्ड 17 के निवासी नवीन तोमर ने बताया कि यहां कभी भी पूरी तरह साफ पानी नहीं आता। पानी में लगातार मटमैलापन और बदबू बनी रहती है और कई बार कीड़े भी पड़ जाते हैं।

    हजीरा इलाके जो ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर का निवास क्षेत्र है में भी पानी की समस्या गंभीर है। स्थानीय पार्षद धर्मेंद्र वर्मा ने बताया कि लोग लगातार शिकायत लेकर आते हैं लेकिन निगम के अधिकारियों के भेदभावपूर्ण रवैये के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

    शहर के कई हिस्सों में लोग सीवरयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं। वार्ड 12 में लोग बताते हैं कि नल खोलने पर ऐसा लगता है मानो नालों का पानी आ गया हो। वार्ड 16 में ताज़ा पानी में दुर्गंध और सफेद झाग दिखाई दे रही थी। लोग फिटकरी या अन्य सामग्री डालकर ही पानी को उपयोग लायक बनाते हैं।स्थानीय निवासी बीमार पड़ रहे हैं और पानी की समस्या पर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। कई लोगों ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई लेकिन ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई।

    नगर निगम के उपायुक्त प्रदीप सिंह तोमर ने कहा कि गंदे पानी की समस्या के समाधान के लिए प्रयास लगातार जारी हैं और नगर निगम का अमला कार्यरत है। बावजूद इसके शहरवासियों की चिंता बरकरार है और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ता जा रहा है।