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  • दाग धब्बों से लेकर ऑयली स्किन तक नींबू है कितना फायदेमंद जानिए कब और कैसे करें सही इस्तेमाल

    दाग धब्बों से लेकर ऑयली स्किन तक नींबू है कितना फायदेमंद जानिए कब और कैसे करें सही इस्तेमाल


    नई दिल्ली । आजकल हर कोई बिना ज्यादा खर्च किए चमकदार और स्वस्थ त्वचा पाना चाहता है। ऐसे में कई लोग घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं और उनमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चीजों में नींबू शामिल है। विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर नींबू त्वचा की देखभाल में उपयोगी माना जाता है। हालांकि इसका सही तरीके से उपयोग करना बेहद जरूरी है क्योंकि गलत इस्तेमाल से त्वचा को फायदा होने की बजाय नुकसान भी हो सकता है।

    नींबू में मौजूद विटामिन सी त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करता है। यह डेड स्किन सेल्स को हटाने में सहायक माना जाता है और चेहरे की रंगत को निखारने में योगदान दे सकता है। इसके अलावा नींबू में मौजूद प्राकृतिक गुण अतिरिक्त तेल को कम करने में मदद कर सकते हैं जिससे ऑयली स्किन वाले लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।

    अगर चेहरे पर हल्के दाग धब्बे या पिंपल के निशान हैं तो नींबू का सीमित और सावधानीपूर्वक उपयोग लाभदायक माना जाता है। लेकिन नींबू को कभी भी सीधे चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। इसे एलोवेरा जेल दही शहद या गुलाब जल जैसी त्वचा के लिए सौम्य चीजों के साथ मिलाकर ही इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। इससे त्वचा पर जलन और रूखापन होने का खतरा कम हो सकता है।

    नींबू का उपयोग करने से पहले त्वचा पर पैच टेस्ट जरूर करना चाहिए। हाथ के किसी छोटे हिस्से पर लगाकर कुछ समय तक देखें। यदि लालपन खुजली या जलन महसूस हो तो इसे चेहरे पर बिल्कुल न लगाएं। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि नींबू का अम्लीय स्वभाव त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि नींबू लगाने के तुरंत बाद धूप में नहीं निकलना चाहिए। नींबू में मौजूद प्राकृतिक तत्व सूर्य की किरणों के प्रति त्वचा को अधिक संवेदनशील बना सकते हैं जिससे त्वचा पर जलन या काले धब्बे पड़ने की आशंका बढ़ सकती है। यदि नींबू का उपयोग किया है तो चेहरा अच्छी तरह धोने के बाद ही बाहर निकलें और सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें।

    त्वचा की देखभाल केवल घरेलू नुस्खों से पूरी नहीं होती। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना अच्छी नींद लेना और नियमित रूप से त्वचा की सफाई करना भी उतना ही जरूरी है। यदि चेहरे पर लगातार मुंहासे एलर्जी या अन्य त्वचा संबंधी समस्या बनी रहती है तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर विकल्प है।

    नींबू एक उपयोगी प्राकृतिक सामग्री है लेकिन हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। इसलिए जो उपाय किसी एक व्यक्ति के लिए फायदेमंद हो वह दूसरे के लिए उपयुक्त हो यह जरूरी नहीं है। सही जानकारी और सावधानी के साथ इसका सीमित उपयोग त्वचा की देखभाल में मददगार हो सकता है। स्वस्थ और सुंदर त्वचा पाने के लिए घरेलू उपायों के साथ संतुलित जीवनशैली अपनाना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

  • शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    शव यात्रा से सियासी संदेश तक एमपी की राजनीति में एक दिन में दिखे कई रंग बिजली संकट पर बवाल जलभराव पर टकराव और विजयवर्गीय के गीत के चर्चे

    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में गुरुवार को राजनीति प्रशासन और जनआक्रोश से जुड़ी कई घटनाओं ने पूरे दिन सुर्खियां बटोरीं। कहीं बिजली कटौती से परेशान लोगों ने ऊर्जा मंत्री के खिलाफ अनोखा विरोध प्रदर्शन किया तो कहीं बारिश के बाद जलभराव को लेकर महापौर और नगर निगम कमिश्नर आमने सामने आ गए। वहीं कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक भावुक गीत भी राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया।

    शिवपुरी जिले के सिरसौद क्षेत्र में लंबे समय से बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाल दी। ग्रामीणों ने पहले मंत्री की प्रतीकात्मक अर्थी बनाई फिर उसके पास बैठकर मातम मनाया और बाद में अंतिम यात्रा निकालकर प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बिजली संकट को लेकर कई बार अधिकारियों और मंत्री तक शिकायत पहुंचाई गई लेकिन केवल आश्वासन मिले जबकि हालात जस के तस बने रहे। नाराज लोगों ने कहा कि जब समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो विरोध का यह तरीका अपनाना पड़ा।

    प्रद्युम्न सिंह तोमर अक्सर सफाई अभियान निरीक्षण और जनसंपर्क जैसे कार्यक्रमों को लेकर चर्चा में रहते हैं लेकिन इस बार विरोध प्रदर्शन ने बिजली व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बिजली व्यवस्था सुधारने पर उतना ही ध्यान दिया जाता जितना प्रचार और जनसंपर्क पर दिया जाता है तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।

    उधर मुरैना में बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आई। हालात का जायजा लेने पहुंचीं महापौर शारदा सोलंकी ने नगर निगम की तैयारियों पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से पूछा कि बारिश से पहले नालों की सफाई क्यों नहीं कराई गई। निरीक्षण के दौरान महापौर और नगर निगम कमिश्नर के बीच तीखी बहस भी हुई। बताया गया कि कमिश्नर ने अपने तरीके से काम करने की बात कही जिस पर महापौर ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि यदि प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बात नहीं मानेगा तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम की तैयारियों और प्रशासनिक समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए।

    इधर इंदौर में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया जिसमें वह जाने कहां गए वो दिन गीत गाते नजर आए। विजयवर्गीय पहले भी कई बार अपनी गायकी का शौक दिखा चुके हैं लेकिन इस बार उनके गीत को लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हाल ही में उन्होंने एक कार्यक्रम में भाजपा संगठन के कुछ नेताओं के अच्छे समय का जिक्र करते हुए मजाकिया अंदाज में कहा था कि शायद उनका भी अच्छा समय आ जाए। इसके बाद अब उनके गीत को भी उसी बयान से जोड़कर देखा जा रहा है हालांकि मंत्री की ओर से इस पर कोई राजनीतिक टिप्पणी नहीं की गई है।

    इसी बीच राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज रही कि हाल ही में राजधानी भोपाल में हुए मूंग खरीदी आंदोलन के पीछे एक पूर्व मंत्री की रणनीति काम कर रही थी। हालांकि इस संबंध में किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में जनता की मूलभूत समस्याएं प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा के केंद्र में बनी हुई हैं।

  • मूंग खरीदी पर सियासत और सिस्टम दोनों सवालों के घेरे में सरकार को हजारों करोड़ की चपत किसानों की मांग अब भी अधूरी

    मूंग खरीदी पर सियासत और सिस्टम दोनों सवालों के घेरे में सरकार को हजारों करोड़ की चपत किसानों की मांग अब भी अधूरी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों से किसान समर्थन मूल्य पर पूरी मूंग खरीदे जाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। नर्मदापुरम के सेठानी घाट से बड़ी संख्या में किसान पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे और मुख्यमंत्री निवास तक अपनी आवाज पहुंचाई। किसानों का कहना है कि उनकी पूरी उपज की सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें बाजार में कम कीमत पर फसल बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।

    किसानों के बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने मूंग खरीदी का दायरा बढ़ाने की बात कही लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा आर्थिक तथ्य भी सामने आया है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में लक्ष्य से अधिक मूंग खरीदी के कारण सरकार को लगभग 3346 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। यानी हर वर्ष औसतन 1115 करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ राज्य सरकार पर पड़ा है। इस नुकसान में खरीदी परिवहन भंडारण और बाद में बाजार में बिक्री के दौरान होने वाला घाटा शामिल है।

    मध्य प्रदेश सरकार का कहना है कि वह केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए खरीदी कोटे से अधिक मात्रा में मूंग खरीदती रही है जिससे आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा है। इसी कारण राज्य सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को कई बार पत्र लिखकर प्रदेश के लिए खरीदी का कोटा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि जिन राज्यों में मूंग की सरकारी खरीदी बहुत कम होती है वहां का अप्रयुक्त कोटा मध्य प्रदेश को दिया जाना चाहिए ताकि किसानों को राहत मिल सके और कुल राष्ट्रीय सीमा भी प्रभावित न हो।

    हालांकि केंद्र सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश को पहले से मिले कोटे का भी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है। केंद्र के अनुसार 16 जुलाई तक निर्धारित कोटे का केवल दो प्रतिशत ही खरीदा गया था। ऐसे में पहले उपलब्ध लक्ष्य के अनुरूप खरीदी पूरी करने के बाद ही अतिरिक्त कोटे पर विचार किया जा सकता है। इसी मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच लगातार पत्राचार जारी है।

    आंकड़ों पर नजर डालें तो मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा मूंग खरीदी करने वाला राज्य है। वर्ष 2023-24 में प्रदेश के लिए 2.76 लाख मीट्रिक टन खरीदी की स्वीकृति मिली और पूरी मात्रा खरीदी गई। वर्ष 2024-25 में 3.31 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 2.90 लाख मीट्रिक टन खरीदी हुई जबकि वर्ष 2025-26 में 3.51 लाख मीट्रिक टन की स्वीकृति के बावजूद 4.20 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी गई जो निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक रही।

    दूसरी ओर राजस्थान महाराष्ट्र कर्नाटक हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्वीकृति मिलने के बावजूद वास्तविक खरीदी काफी कम रही। कई राज्यों में उत्पादन की तुलना में सरकारी खरीदी तीन प्रतिशत से भी कम रही जबकि मध्य प्रदेश में हर वर्ष कुल उत्पादन का लगभग 20 से 22 प्रतिशत हिस्सा समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है। यही वजह है कि प्रदेश पर अतिरिक्त आर्थिक भार भी अधिक पड़ रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर खरीदी नीति में संतुलित बदलाव करें तथा वास्तविक उत्पादन के आधार पर कोटा तय किया जाए तो किसानों को भी राहत मिलेगी और सरकार पर अनावश्यक वित्तीय बोझ भी कम होगा। फिलहाल मूंग खरीदी का मुद्दा किसानों सरकार और केंद्र के बीच सबसे बड़ी कृषि चुनौती बनकर सामने आया है।

  • मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत

    मध्य प्रदेश में बारिश का रेड जोन तैयार तीन मौसमी सिस्टम से अगले चार दिन आफत की आशंका बैतूल में दीवार गिरने से मजदूर की मौत


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में मानसून ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में लगातार बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार इस समय मानसून ट्रफ साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसमी सिस्टम एक साथ सक्रिय हैं जिसके कारण अगले चार दिनों तक पूरे प्रदेश में झमाझम बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इन सिस्टमों के संयुक्त प्रभाव से कई जिलों में भारी से अति भारी वर्षा हो सकती है। इसके चलते प्रशासन को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह से लगातार रुक रुककर बारिश हो रही है। वहीं इंदौर ग्वालियर जबलपुर रीवा सतना और कई अन्य जिलों में भी गरज चमक के साथ बारिश दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले चौबीस घंटों में कुछ इलाकों में चार इंच से अधिक बारिश हो सकती है जिससे नदियों और नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका है।

    बारिश के बीच बैतूल जिले से एक दुखद हादसा भी सामने आया है। गंज थाना क्षेत्र में देर रात हुई तेज बारिश के दौरान रेलवे की बाउंड्री वॉल पास बनी एक झोपड़ी पर गिर गई। हादसे के समय झोपड़ी में सो रहे 27 वर्षीय मजदूर राहुल उइके मलबे में दब गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं उनके साथी शनि सिंह को मामूली चोटें आई हैं। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और राहत दल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति का जायजा लिया।

    मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अलग अलग स्तर के अलर्ट जारी किए हैं। धार देवास बुरहानपुर हरदा और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा उज्जैन शाजापुर सीहोर बड़वानी खरगोन खंडवा रायसेन सागर बैतूल छिंदवाड़ा पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इन जिलों में लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।

    लगातार हो रही बारिश का असर प्रदेश के कई हिस्सों में दिखाई देने लगा है। बालाघाट में कई नदी नाले उफान पर हैं और ग्रामीण इलाकों के कई मार्ग बंद हो गए हैं। बैहर परसवाड़ा मार्ग पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित हुआ। ग्वालियर और अन्य शहरों में भी जलभराव की स्थिति बनने लगी है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय किया जा रहा है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार वर्तमान मौसमी सिस्टम दो अगस्त तक सक्रिय बने रहेंगे। इस दौरान प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि लगातार वर्षा से नदी नालों में अचानक जलस्तर बढ़ सकता है। किसानों के लिए यह बारिश फायदेमंद मानी जा रही है लेकिन शहरी क्षेत्रों में जलभराव और ग्रामीण इलाकों में आवागमन प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है। ऐसे में मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना और अनावश्यक जोखिम से बचना बेहद जरूरी होगा।

  • CSK के गोल्डन कोच स्टीफन फ्लेमिंग अब इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट की बदलेंगे तस्वीर रिपोर्ट्स में बड़ा दावा

    CSK के गोल्डन कोच स्टीफन फ्लेमिंग अब इंग्लैंड टेस्ट क्रिकेट की बदलेंगे तस्वीर रिपोर्ट्स में बड़ा दावा


    नई दिल्ली। इंग्लैंड क्रिकेट टीम को जल्द ही नया टेस्ट मुख्य कोच मिल सकता है और इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार के रूप में न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान तथा चेन्नई सुपर किंग्स के सबसे सफल कोच स्टीफन फ्लेमिंग का नाम सामने आया है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने लंबी चयन प्रक्रिया के बाद फ्लेमिंग को अपनी पहली पसंद माना है। यदि अंतिम औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं तो फ्लेमिंग इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कमान संभालेंगे और यह उनके कोचिंग करियर का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय अध्याय होगा।

    स्टीफन फ्लेमिंग का नाम क्रिकेट जगत के सबसे सफल और सम्मानित कोचों में लिया जाता है। उन्होंने इंडियन प्रीमियर लीग में चेन्नई सुपर किंग्स को पांच बार चैंपियन बनाया और टीम को लगातार सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई। शांत स्वभाव शानदार रणनीति और खिलाड़ियों से बेहतर तालमेल उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है। इसी कारण उन्हें आधुनिक क्रिकेट का बेहतरीन मैनेजर और रणनीतिकार माना जाता है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने कई उम्मीदवारों का इंटरव्यू लिया लेकिन फ्लेमिंग अनुभव नेतृत्व क्षमता और लंबे समय तक सफल टीम तैयार करने की योग्यता के कारण सबसे आगे निकल गए। उनके सामने टॉम मूडी जोनाथन ट्रॉट और रिचर्ड डॉसन जैसे दावेदार भी थे लेकिन बोर्ड का झुकाव फ्लेमिंग की ओर दिखाई दिया।

    बताया जा रहा है कि इंग्लैंड की टेस्ट टीम में यह बदलाव ब्रेंडन मैकुलम के टेस्ट कोच पद से हटने के बाद किया जा रहा है जबकि सीमित ओवरों की टीम के साथ उनकी भूमिका अलग बनी रह सकती है। ऐसे में इंग्लैंड पहली बार टेस्ट और व्हाइट बॉल क्रिकेट के लिए अलग कोचिंग मॉडल अपनाने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

    फ्लेमिंग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इंग्लैंड की टेस्ट टीम को फिर से मजबूत बनाना होगी। उन्हें नए कप्तान के चयन टीम संयोजन युवा खिलाड़ियों को तैयार करने और आगामी बड़ी टेस्ट सीरीज के लिए मजबूत रणनीति बनानी होगी। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनका शांत नेतृत्व और खिलाड़ियों को आत्मविश्वास देने की शैली इंग्लैंड के ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

    हालांकि इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड की ओर से अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है लेकिन लगभग सभी प्रमुख रिपोर्ट्स में फ्लेमिंग को इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार बताया गया है। यदि नियुक्ति तय होती है तो यह केवल इंग्लैंड क्रिकेट ही नहीं बल्कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट के इतिहास में भी एक बड़ा बदलाव माना जाएगा क्योंकि IPL के सबसे सफल कोचों में शामिल फ्लेमिंग अब अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में अपनी नई पहचान बनाने की तैयारी करेंगे

  • गुरुवार को पीला रंग पहनने से क्यों मिलती है सुख समृद्धि और सफलता भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए जानें इसका पूरा महत्व

    गुरुवार को पीला रंग पहनने से क्यों मिलती है सुख समृद्धि और सफलता भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए जानें इसका पूरा महत्व


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी देवता को समर्पित माना गया है। गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीला रंग केवल एक रंग नहीं बल्कि ज्ञान समृद्धि सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि गुरुवार के दिन अधिकतर श्रद्धालु पीले वस्त्र धारण करते हैं और भगवान विष्णु को पीले पुष्प हल्दी चने की दाल और केले का भोग अर्पित करते हैं।

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु पीतांबर धारण करते हैं। उनका यह स्वरूप संसार के पालनकर्ता के रूप में शांति संतुलन और समृद्धि का संदेश देता है। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति गुरुवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करता है तथा पीले रंग का प्रयोग करता है उसके जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है। परिवार में खुशहाली बनी रहती है और आर्थिक परेशानियां धीरे धीरे दूर होने लगती हैं।

    ज्योतिष शास्त्र में भी गुरुवार का संबंध देवगुरु बृहस्पति ग्रह से बताया गया है। बृहस्पति को ज्ञान धर्म शिक्षा संतान विवाह धन और सम्मान का कारक ग्रह माना जाता है। पीला रंग बृहस्पति का प्रिय रंग माना जाता है। इसलिए गुरुवार को पीले वस्त्र पहनना पीली वस्तुओं का दान करना और भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे कुंडली में बृहस्पति की स्थिति मजबूत होती है और जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं।

    गुरुवार के दिन पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल चने की दाल हल्दी केसर और केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ या ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं और जरूरतमंद लोगों को पीले वस्त्र भोजन या पीली दाल का दान करते हैं। दान और सेवा को भी इस दिन विशेष पुण्यदायी माना गया है।

    पीले रंग का मनोवैज्ञानिक महत्व भी काफी खास माना जाता है। यह रंग आशा आत्मविश्वास उत्साह और सकारात्मक सोच का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ साथ यह व्यक्ति के मन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करने वाला रंग भी माना जाता है। यही वजह है कि गुरुवार को पीला रंग पहनना केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि सकारात्मक जीवनशैली का भी प्रतीक माना जाता है।

    ध्यान रखने योग्य बात यह है कि किसी भी पूजा या व्रत का सबसे महत्वपूर्ण आधार सच्ची श्रद्धा अच्छे कर्म और सकारात्मक सोच होती है। पीले वस्त्र धारण करना और पूजा करना आस्था का विषय है। यदि व्यक्ति भगवान विष्णु की भक्ति के साथ सदाचार सेवा और ईमानदारी का मार्ग अपनाता है तो जीवन में सुख शांति और समृद्धि का मार्ग स्वयं प्रशस्त होने लगता है।

  • सावन में करें इन पवित्र पौधों का रोपण भगवान शिव की कृपा के साथ घर में बढ़ेगी खुशहाली और दूर होंगी परेशानियां

    सावन में करें इन पवित्र पौधों का रोपण भगवान शिव की कृपा के साथ घर में बढ़ेगी खुशहाली और दूर होंगी परेशानियां


    नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ प्रकृति के सबसे सुंदर रूप का भी प्रतीक माना जाता है। चारों ओर हरियाली और बारिश का मौसम पौधारोपण के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के अनुसार इस पवित्र महीने में कुछ विशेष पौधे लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख समृद्धि का आगमन माना जाता है। यही कारण है कि सावन के दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घर आंगन और आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाने की परंपरा निभाते हैं।

    इन पौधों में सबसे पहला स्थान तुलसी का माना जाता है। भारतीय संस्कृति में तुलसी को अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। मान्यता है कि घर में तुलसी का पौधा लगाने से नकारात्मक ऊर्जा दूर रहती है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बढ़ता है। प्रतिदिन सुबह तुलसी में जल अर्पित करना और शाम को दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे घर का वातावरण शांत और सकारात्मक बना रहता है।

    केले का पौधा भी सावन में लगाने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसका संबंध भगवान विष्णु और गुरु ग्रह से माना जाता है। घर के खुले स्थान या पिछले हिस्से में केले का पौधा लगाने और गुरुवार के दिन उसकी पूजा करने से पारिवारिक सुख समृद्धि में वृद्धि होने की मान्यता है। ऐसा भी माना जाता है कि इससे आर्थिक स्थिरता और जीवन में शुभ अवसर बढ़ते हैं।

    अनार का पौधा केवल घर की सुंदरता ही नहीं बढ़ाता बल्कि इसे समृद्धि और शुभता का प्रतीक भी माना जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार इसे घर के मुख्य प्रवेश द्वार से थोड़ी दूरी पर लगाना अच्छा माना जाता है। मान्यता है कि यह पौधा नकारात्मक प्रभावों से रक्षा करता है और परिवार की उन्नति के नए मार्ग खोलने में सहायक माना जाता है।

    शमी का पौधा भी धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इसका संबंध शनिदेव से जोड़ा जाता है। सावन के शनिवार को शमी का पौधा लगाने और उसके पास सरसों के तेल का दीपक जलाने की परंपरा कई स्थानों पर प्रचलित है। ऐसी मान्यता है कि इससे कार्यों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक विश्वास है।

    पीपल का वृक्ष भारतीय संस्कृति में अत्यंत पूजनीय माना गया है। इसे घर के भीतर लगाने की बजाय मंदिर परिसर पार्क या सार्वजनिक स्थान पर लगाना अधिक उचित माना जाता है। पीपल का पौधा पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लंबे समय तक ऑक्सीजन प्रदान करने वाले प्रमुख वृक्षों में शामिल है। इसकी देखभाल करना धार्मिक आस्था के साथ साथ प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी संदेश देता है।

    सावन का महीना केवल पूजा और व्रत का ही नहीं बल्कि प्रकृति से जुड़ने का भी अवसर है। इस दौरान पौधारोपण करने से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है और हरियाली में वृद्धि होती है। यदि धार्मिक आस्था के साथ इन पौधों का रोपण किया जाए और नियमित रूप से उनकी देखभाल की जाए तो यह न केवल घर की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि पर्यावरण को भी स्वच्छ और संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए इस सावन पौधे लगाने की परंपरा को अपनाकर प्रकृति और संस्कृति दोनों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई जा सकती है।

  • बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर

    बिना बयानबाजी के छा गए वीवीएस लक्ष्मण टीम इंडिया में भरोसे और संतुलन की नई संस्कृति से बदली जीत की तस्वीर


    नई दिल्ली। जिम्बाब्वे दौरे पर भारतीय क्रिकेट टीम ने सिर्फ सीरीज जीतकर ही नहीं बल्कि अपने बदले हुए अंदाज से भी सभी का ध्यान आकर्षित किया है। इस बदलाव के केंद्र में अंतरिम मुख्य कोच वीवीएस लक्ष्मण रहे जिन्होंने बिना किसी बयानबाजी और विवाद के केवल तीन मैचों में टीम के भीतर नया आत्मविश्वास पैदा कर दिया। खिलाड़ियों पर भरोसा जताने की उनकी शैली और शांत नेतृत्व ने यह साबित किया कि सफल कोचिंग केवल रणनीति तक सीमित नहीं होती बल्कि ड्रेसिंग रूम का माहौल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।

    इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के दौरान भारतीय टीम लगातार हार और आलोचनाओं का सामना कर रही थी। टीम चयन से लेकर रणनीति तक कई फैसलों पर सवाल उठे थे। ऐसे समय में जब गौतम गंभीर उपलब्ध नहीं थे तब वीवीएस लक्ष्मण ने अंतरिम कोच की जिम्मेदारी संभाली और खिलाड़ियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित किया। उन्होंने किसी भी खिलाड़ी पर सार्वजनिक दबाव बनाने के बजाय उनका मनोबल बढ़ाने पर जोर दिया।

    इसका असर मैदान पर भी साफ दिखाई दिया। कप्तान श्रेयस अय्यर और युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी समेत कई खिलाड़ियों ने खुलकर लक्ष्मण के मार्गदर्शन की सराहना की। टीम के भीतर आत्मविश्वास और सहजता का माहौल बना जिससे खिलाड़ी बिना किसी अतिरिक्त दबाव के अपना स्वाभाविक खेल दिखा सके। लंबे समय बाद भारतीय ड्रेसिंग रूम में सकारात्मक ऊर्जा स्पष्ट नजर आई।

    वीवीएस लक्ष्मण की चयन नीति भी चर्चा का विषय बनी। उन्होंने टीम में बदलाव जरूर किए लेकिन केवल प्रयोग करने के लिए नहीं बल्कि खिलाड़ियों की क्षमता और टीम की जरूरत को ध्यान में रखकर फैसले लिए। दूसरे टी20 मुकाबले में यश ठाकुर को मौका दिया गया जबकि सीरीज अपने नाम करने के बाद तीसरे मैच में सूर्यांश शेडगे को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया गया। इससे खिलाड़ियों को यह संदेश मिला कि प्रदर्शन और तैयारी के आधार पर सभी को अवसर मिलेगा।

    युवा खिलाड़ियों के साथ लक्ष्मण का जुड़ाव उनकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में लंबे समय तक काम करने के कारण वह उभरते क्रिकेटरों की मानसिकता और उनकी जरूरतों को अच्छी तरह समझते हैं। शुभमन गिल यशस्वी जायसवाल और वैभव सूर्यवंशी जैसे कई खिलाड़ियों ने उनके मार्गदर्शन में अपने खेल को निखारा है। यही अनुभव अंतरिम कोच के रूप में भी उनके काम आया।

    हालांकि तीन मैचों के आधार पर यह कहना उचित नहीं होगा कि टीम की सभी समस्याएं समाप्त हो गई हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने कई आसान कैच छोड़े जिससे फील्डिंग अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। बल्लेबाजी और रणनीति में सुधार जरूर दिखाई दिया लेकिन फील्डिंग में निरंतरता लाने की जरूरत बनी हुई है।

    वीवीएस लक्ष्मण इससे पहले भी कई बार अंतरिम मुख्य कोच की भूमिका निभा चुके हैं और हर बार उनके काम की सराहना हुई है। इसके बावजूद उन्होंने स्थायी मुख्य कोच बनने के बजाय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने की जिम्मेदारी को प्राथमिकता दी। अब उनके हालिया प्रदर्शन के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या भारतीय क्रिकेट को भविष्य में अलग अलग प्रारूपों के लिए अलग मुख्य कोच की व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    फिलहाल इतना तय है कि जिम्बाब्वे दौरे ने यह साबित कर दिया है कि टीम की सफलता केवल रणनीति या तकनीक पर निर्भर नहीं करती बल्कि खिलाड़ियों के भीतर विश्वास जगाने और उन्हें खुलकर खेलने का माहौल देने वाला नेतृत्व भी उतना ही अहम होता है। वीवीएस लक्ष्मण ने अपने शांत स्वभाव और संतुलित फैसलों से यही संदेश पूरी क्रिकेट दुनिया को दिया है।

  • 16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई

    16 राज्यों में फूड पॉइजनिंग से हड़कंप क्या भारत की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर मंडरा रहा है बड़ा संकट जानिए पूरी सच्चाई


    नई दिल्ली । देश में लगातार सामने आ रहे फूड पॉइजनिंग के मामलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में 16 राज्यों में भोजन से जुड़ी बीमारियों के मामले दर्ज होने और 11 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की खबर ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। यह घटना केवल किसी एक राज्य या एक कंपनी तक सीमित नहीं है बल्कि यह संकेत देती है कि खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

    फूड पॉइजनिंग तब होती है जब दूषित भोजन या पेय पदार्थ शरीर में पहुंचकर बैक्टीरिया वायरस परजीवी या हानिकारक रसायनों के माध्यम से संक्रमण फैला देते हैं। इसके कारण उल्टी दस्त पेट दर्द बुखार कमजोरी और कई बार गंभीर स्थिति तक पैदा हो सकती है। छोटे बच्चों बुजुर्गों गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों में इसका खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि खराब गुणवत्ता वाले कच्चे पदार्थों का उपयोग स्वच्छता की अनदेखी निर्माण प्रक्रिया में लापरवाही गलत तरीके से पैकेजिंग और खाद्य पदार्थों का अनुचित भंडारण फूड पॉइजनिंग की प्रमुख वजह बनते हैं। यदि किसी कंपनी द्वारा तय मानकों का पालन नहीं किया जाता तो बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य खतरे में पड़ सकता है।

    भारत में खाद्य सुरक्षा की जिम्मेदारी भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई पर है। यह संस्था खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तय करती है और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। समय समय पर खाद्य नमूनों की जांच भी की जाती है लेकिन देश की विशाल आबादी और तेजी से बढ़ते खाद्य बाजार को देखते हुए निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    उपभोक्ताओं की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पैक्ड फूड खरीदते समय निर्माण तिथि समाप्ति तिथि एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर और पैकेज की स्थिति जरूर जांचनी चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों को खरीदते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। लंबे समय तक खुले में रखा भोजन खाने से बचना चाहिए और हमेशा साफ पानी का ही उपयोग करना चाहिए।

    यदि किसी व्यक्ति को भोजन करने के कुछ समय बाद लगातार उल्टी दस्त तेज बुखार या पेट में असहनीय दर्द जैसी परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है।

    16 राज्यों में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि कंपनियों विक्रेताओं और उपभोक्ताओं सभी को अपनी भूमिका ईमानदारी से निभानी होगी। सुरक्षित भोजन हर नागरिक का अधिकार है और इसके लिए गुणवत्ता नियंत्रण सख्त निगरानी तथा जनजागरूकता तीनों का मजबूत होना बेहद जरूरी है। यदि सभी स्तरों पर जिम्मेदारी के साथ काम किया जाए तो फूड पॉइजनिंग जैसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है और लोगों का स्वास्थ्य बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सकता है।

  • ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    ग्लासगो में भारत का तिरंगा बुलंद गोल्ड सिल्वर की बरसात दिलीप गावित और श्रीशंकर चमके बॉक्सिंग में भी बढ़ीं पदकों की उम्मीदें

    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। ग्लासगो में आयोजित खेलों के सातवें दिन भारत ने एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश का गौरव बढ़ाया। पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में शानदार दौड़ लगाते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने 10.71 सेकंड का समय निकालते हुए नया गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इस ऐतिहासिक जीत के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। वहीं उनके साथी मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड के साथ सिल्वर जीतकर भारत को शानदार वन टू फिनिश दिलाई।

    भारत की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार दूसरा सिल्वर मेडल है। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम 2022 में भी रजत पदक जीता था। फाइनल मुकाबले में जमैका के ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड हासिल किया जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने ब्रॉन्ज जीता। श्रीशंकर ने पूरे मुकाबले में शानदार निरंतरता दिखाई और अंतिम प्रयास तक पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।

    एथलेटिक्स के अलावा भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय बॉक्सिंग दल के सभी 10 खिलाड़ियों ने अपने अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाला प्रत्येक खिलाड़ी कम से कम कांस्य पदक का दावेदार बन जाता है। इस तरह भारत ने मुक्केबाजी में कम से कम 10 पदक पहले ही सुनिश्चित कर लिए हैं जो बर्मिंघम 2022 के प्रदर्शन से भी बेहतर उपलब्धि मानी जा रही है।

    इन शानदार प्रदर्शनों के बाद भारत की पदक तालिका भी मजबूत हुई है। देश के खाते में अब 15 पदक हो चुके हैं जिनमें 3 स्वर्ण 9 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में खिलाड़ियों की निरंतर सफलता ने भारतीय दल का मनोबल और बढ़ा दिया है।

    दिलीप गावित की ऐतिहासिक जीत और श्रीशंकर की शानदार छलांग ने यह साबित कर दिया कि भारतीय एथलेटिक्स लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वहीं मुक्केबाजों का दमदार प्रदर्शन आने वाले दिनों में भारत के पदकों की संख्या और बढ़ाने की उम्मीद जगा रहा है। ग्लासगो से लगातार मिल रही इन सफलताओं ने भारतीय खेल प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंचा दिया है और अब सभी की नजर आगामी फाइनल मुकाबलों पर टिकी हुई है जहां भारत के पास कई और पदक जीतने का सुनहरा अवसर होगा।