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  • त्वचा की नमी बनाए रखने में मददगार है ग्लिसरीन, ऐसे करें इस्तेमाल और पाएं सॉफ्ट स्किन

    त्वचा की नमी बनाए रखने में मददगार है ग्लिसरीन, ऐसे करें इस्तेमाल और पाएं सॉफ्ट स्किन


    नई दिल्ली। आजकल त्वचा को मुलायम और हाइड्रेटेड रखने के लिए लोग तरह तरह के स्किन केयर प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कई बार साधारण और आसानी से मिलने वाली चीजें भी त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। ग्लिसरीन भी ऐसा ही एक लोकप्रिय मॉइस्चराइजिंग घटक है जिसका इस्तेमाल कई क्रीम और मॉइस्चराइजर में किया जाता है। त्वचा विशेषज्ञों की सलाह में भी ग्लिसरीन को ऐसे घटकों में शामिल किया जाता है जो रूखी त्वचा को नमी देने में मदद कर सकते हैं।

    ग्लिसरीन को ह्यूमेक्टेंट माना जाता है। इसका मतलब है कि यह त्वचा की सतह पर नमी बनाए रखने में मदद करता है। खासकर जिन लोगों की त्वचा रूखी रहती है उनके लिए ग्लिसरीन युक्त मॉइस्चराइजर उपयोगी हो सकता है। हालांकि चेहरे पर सीधे ग्लिसरीन लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि इसे किस तरह और किस चीज के साथ इस्तेमाल किया जाए। हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी नए प्रोडक्ट को इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है।

    अगर आप ग्लिसरीन को स्किन केयर रूटीन में शामिल करना चाहते हैं तो सबसे पहले चेहरे को किसी माइल्ड क्लींजर से साफ करें। त्वचा को जोर से रगड़ने से बचें क्योंकि इससे जलन और रूखापन बढ़ सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी भी चेहरे की सफाई के लिए हल्के क्लींजर और गुनगुने पानी का इस्तेमाल करने की सलाह देती है।

    चेहरा साफ करने के बाद त्वचा को पूरी तरह सुखाने के बजाय हल्का नम रहने दें। इसके बाद ग्लिसरीन वाले मॉइस्चराइजर या उपयुक्त स्किन केयर प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है। नम त्वचा पर मॉइस्चराइजर लगाने से नमी को बनाए रखने में मदद मिल सकती है। त्वचा विशेषज्ञ भी नहाने या चेहरा धोने के बाद नम त्वचा पर मॉइस्चराइजर लगाने की सलाह देते हैं।

    ग्लिसरीन का इस्तेमाल खास तौर पर रूखी त्वचा में फायदेमंद हो सकता है। इससे त्वचा में नमी बनी रहने में मदद मिलती है और रूखापन कम महसूस हो सकता है। नियमित मॉइस्चराइजिंग से त्वचा अधिक मुलायम महसूस हो सकती है। हालांकि ग्लिसरीन को चेहरे पर लगाने से यह दावा नहीं किया जा सकता कि इससे रंग बदल जाएगा या किसी तरह की त्वचा संबंधी समस्या पूरी तरह ठीक हो जाएगी।

    स्किन केयर में एक और जरूरी बात यह है कि जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट इस्तेमाल न किए जाएं। कई अलग अलग एक्टिव प्रोडक्ट एक साथ लगाने से संवेदनशील त्वचा में जलन हो सकती है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार स्किन केयर प्रोडक्ट लगाने का क्रम भी महत्वपूर्ण होता है। सामान्य तौर पर चेहरा साफ करने के बाद ट्रीटमेंट प्रोडक्ट और फिर मॉइस्चराइजर या सनस्क्रीन लगाया जाता है।

    दिन के समय स्किन केयर करते हुए सनस्क्रीन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। धूप से त्वचा को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूरी माना जाता है। केवल ग्लिसरीन लगाने से धूप से त्वचा की सुरक्षा नहीं होती इसलिए मॉइस्चराइजिंग के साथ सन प्रोटेक्शन भी स्किन केयर रूटीन का हिस्सा होना चाहिए।

    अगर ग्लिसरीन या किसी नए स्किन केयर प्रोडक्ट को लगाने के बाद जलन लालिमा खुजली या असहजता महसूस हो तो उसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए। लगातार समस्या रहने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। खासकर बहुत संवेदनशील त्वचा या पहले से किसी त्वचा रोग से परेशान लोगों को घरेलू प्रयोग करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

    इस तरह ग्लिसरीन को स्किन केयर रूटीन में शामिल करने का सबसे आसान तरीका इसे किसी उपयुक्त मॉइस्चराइजर या ग्लिसरीन युक्त प्रोडक्ट के रूप में इस्तेमाल करना है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह त्वचा की नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है और रूखी त्वचा को मुलायम महसूस कराने में उपयोगी हो सकता है।

  • भोपाल में गणपति विसर्जन के लिए कड़े इंतजाम, घाटों पर जाना मना, क्रेन और पोकलेन से होगा विसर्जन

    भोपाल में गणपति विसर्जन के लिए कड़े इंतजाम, घाटों पर जाना मना, क्रेन और पोकलेन से होगा विसर्जन


    भोपाल । भोपाल में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का सिलसिला शुरू हो गया है। सुबह से ही शहर के अलग अलग इलाकों से श्रद्धालु छोटी गणेश प्रतिमाएं लेकर विसर्जन घाटों पर पहुंचने लगे हैं। दोपहर के बाद बड़ी प्रतिमाओं के पहुंचने का क्रम भी शुरू हो गया। शाम होते होते घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की संभावना है। गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का यह सिलसिला देर रात तक जारी रहने की उम्मीद है। अनंत चतुर्दशी के मौके पर बड़ी संख्या में प्रतिमाओं के विसर्जन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए हैं।

    भोपाल में डोल ग्यारस से ही गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का क्रम शुरू हो चुका था। पिछले दो दिनों में प्रमुख विसर्जन घाटों पर डेढ़ हजार से ज्यादा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा चुका है। अब अनंत चतुर्दशी पर सबसे ज्यादा प्रतिमाओं के पहुंचने की संभावना है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम की टीमें घाटों पर तैनात रहेंगी।

    विसर्जन के दौरान श्रद्धालुओं को पानी में उतरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्रतिमाओं को सुरक्षित तरीके से विसर्जित कराने के लिए क्रेन और पोकलेन मशीनों की मदद ली जाएगी। प्रशासन की ओर से 13 क्रेन और 12 पोकलेन मशीनों की व्यवस्था की गई है। इन मशीनों के जरिए बड़ी प्रतिमाओं को घाटों पर तय प्रक्रिया के अनुसार विसर्जित कराया जाएगा। इससे श्रद्धालुओं को पानी में जाने से रोकने के साथ हादसों की आशंका को भी कम करने की कोशिश की जा रही है।

    शहर के प्रमुख विसर्जन घाटों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। खटलापुरा प्रेमपुरा संत हिरदाराम नगर बैरागढ़ हथाईखेड़ा डैम शाहपुरा और आर्च ब्रिज सहित कई स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। पुलिस कंट्रोल रूम से भी इन प्रमुख स्थानों पर नजर रखी जाएगी। घाटों पर पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार मौजूद रहेंगी ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और किसी तरह की परेशानी होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।

    नगर निगम ने उन लोगों के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था की है जो घाटों तक प्रतिमा लेकर नहीं जाना चाहते। शहर में दो दर्जन से ज्यादा स्थानों पर मूर्ति संग्रहण स्टॉल लगाए जा रहे हैं। लालघाटी चौराहा गांधी नगर करोंद चौराहा कोलार रायसेन रोड अवधपुरी सहित कई इलाकों में यह व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु पूजा के बाद अपनी गणेश प्रतिमा इन संग्रहण केंद्रों पर जमा कर सकेंगे। इसके बाद नगर निगम इन प्रतिमाओं का सामूहिक रूप से विसर्जन करेगा।

    रात के समय विसर्जन जुलूसों और घाटों पर पर्याप्त रोशनी रहे इसके लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। नगर निगम के अनुसार प्रेमपुरा रानी कमलापति शाहपुरा खटलापुरा हथाईखेड़ा मालीखेड़ी और बैरागढ़ घाटों पर 1090 एलईडी फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं। इसके अलावा चल समारोह के मार्गों पर 575 अतिरिक्त फ्लड लाइट्स लगाई गई हैं।

    गणेश विसर्जन को लेकर शहर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने के साथ प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर भीड़ नियंत्रण और रोशनी तक सभी व्यवस्थाओं पर नजर रखी जा रही है। देर रात तक चलने वाले विसर्जन कार्यक्रम के दौरान प्रशासन का मुख्य जोर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और व्यवस्थित तरीके से प्रतिमाओं के विसर्जन पर रहेगा।

  • पीयूष गोयल बोले- PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 20 ट्रिलियन डॉलर, 30 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत

    पीयूष गोयल बोले- PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 20 ट्रिलियन डॉलर, 30 ट्रिलियन डॉलर लक्ष्य की ओर बढ़ता भारत

    नई दिल्ली ।वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि क्रय शक्ति समता यानी PPP के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार करीब 20 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि इस आधार पर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मंत्री ने यह बात राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित 13वें पीएएफआई एनुअल फोरम 2026 में कही।

    गोयल ने कहा कि भारत अब 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके अनुसार, जैसे-जैसे देश इस लक्ष्य की ओर बढ़ेगा, अलग-अलग आर्थिक मापदंडों के बीच मौजूद अंतर भी कम होता जाएगा। उन्होंने भारत की बदलती आर्थिक स्थिति और वैश्विक बाजारों के साथ बढ़ते जुड़ाव को व्यापार वार्ताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।

    क्रय शक्ति समता ऐसी विनिमय दरों को दर्शाती है, जिनका उद्देश्य अलग-अलग देशों में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों के स्तर में अंतर को ध्यान में रखते हुए मुद्राओं की वास्तविक खरीद क्षमता की तुलना करना है। इसी आधार पर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं के आकार की तुलना की जाती है।

    गोयल ने कहा कि भारत व्यापार और आर्थिक साझेदारी को लेकर ऐसी अर्थव्यवस्था के रूप में बातचीत कर रहा है, जिसके 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की उम्मीद है। उन्होंने व्यापक आर्थिक साझेदारी की संभावनाओं पर भी जोर दिया। इसमें सामान, सेवाओं, पर्यटकों, शिक्षण संस्थानों और खेलों से जुड़े लोगों के आसान आवागमन को बढ़ावा देने की बात शामिल है।

    उन्होंने बताया कि भारत की कई देशों और क्षेत्रों के साथ व्यापार वार्ताएं चल रही हैं। इनमें कनाडा, चिली, पेरू, सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन, मेक्सिको, मालदीव, यूरेशिया, मध्य एशिया, रूस, गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल और इजरायल शामिल हैं।

    इन वार्ताओं का प्रमुख उद्देश्य भारत के लिए वैश्विक वैल्यू चेन और सप्लाई चेन में भागीदारी के अवसर बढ़ाना है। इसके साथ ही सामान और सेवाओं के आवागमन को आसान बनाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। मंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजारों से जुड़ाव बढ़ाने के लिए आर्थिक साझेदारी महत्वपूर्ण है।

    सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि अगले पांच वर्षों में भारत में सेमीकंडक्टर की सालाना खपत की मांग 150 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है। उन्होंने इस क्षेत्र में बढ़ती जरूरतों के अनुरूप क्षमताओं के विकास पर जोर दिया।

    मंत्री ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने बड़े लैंग्वेज मॉडल और एजेंटिक मॉडल सहित एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही भारतीय स्टार्टअप्स के लिए इनोवेशन और डीप-टेक इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में काम करने की बात कही।

    गोयल ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत निजी क्षेत्र द्वारा अंतरिक्ष में रॉकेट लॉन्च करने वाला तीसरा देश बन गया है। इसके अलावा उन्होंने भारत की युवा आबादी के वैश्विक घटनाक्रमों और अवसरों को लेकर बढ़ती जागरूकता का जिक्र किया। उन्होंने युवाओं की अपने भविष्य से जुड़े फैसले लेने की क्षमता पर भरोसा जताया और देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की वृद्धि का भी उल्लेख किया।

  • MP में परिवहन व्यवस्था को मिली नई रफ्तार, 351 बसों को हरी झंडी, गांवों तक पहुंचेगी ई-बस सेवा

    MP में परिवहन व्यवस्था को मिली नई रफ्तार, 351 बसों को हरी झंडी, गांवों तक पहुंचेगी ई-बस सेवा


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। करीब 21 साल के लंबे अंतराल के बाद प्रदेश की सड़कों पर सरकारी बसें एक बार फिर दौड़ती नजर आएंगी। भोपाल के भेल दशहरा मैदान में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा की शुरुआत की जा रही है। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मौजूदगी में 351 बसों को हरी झंडी दिखाई गई। इन बसों में 180 इलेक्ट्रिक बसें भी शामिल हैं। नई बस सेवा के जरिए शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों को भी बेहतर सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने की तैयारी है।

    मध्यप्रदेश राज्य परिवहन निगम की बस सेवा वर्ष 2005 में बंद हो गई थी। इसके बाद प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में निजी बस संचालकों की भूमिका बढ़ती गई। अब सरकार ने दोबारा सरकारी बस सेवा को नए स्वरूप में शुरू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत इंटरसिटी और इंट्रासिटी दोनों तरह की बसों को संचालित किया जाएगा। शुरुआत में प्रदेश के सात शहरों को इस सेवा से जोड़ा जा रहा है।

    नई बसों में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है। बसों में CCTV कैमरे लगाए गए हैं जिनकी स्क्रीन ड्राइवर के सामने रहेगी। यात्रियों के लिए आरामदायक सीटों की व्यवस्था की गई है। इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने से परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ प्रदूषण कम करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया गया है।

    सरकार की योजना केवल शहरों तक बस सेवा सीमित रखने की नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों को भी इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने प्रदेश की करीब 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों तक बस सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इससे छोटे कस्बों और गांवों में रहने वाले लोगों को रोजगार शिक्षा इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए शहरों तक पहुंचने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

    सरकार ने इस योजना को बड़े स्तर पर विस्तार देने की भी तैयारी की है। पहले साल करीब 1500 बसों के संचालन का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद बसों की संख्या लगातार बढ़ाई जाएगी और वर्ष 2031 तक प्रदेश में करीब 15000 बसें संचालित करने की योजना है। यानी आने वाले वर्षों में सार्वजनिक परिवहन का नेटवर्क काफी बड़ा करने की तैयारी है।

    बस सेवा के संचालन के लिए PPP मॉडल अपनाया जाएगा। इसके तहत निजी ऑपरेटर भी परिवहन सेवा में भागीदारी करेंगे। ऑपरेटरों को यात्रियों से मिलने वाले राजस्व के अलावा विज्ञापन और कार्गो जैसी गतिविधियों से अतिरिक्त आय के अवसर भी मिलेंगे। इससे बस संचालन को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की कोशिश की जा रही है।

    भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सहित प्रदेश के कई मंत्री और नेता कार्यक्रम में मौजूद रहे। बस सेवा शुरू होने को लेकर यात्रियों में भी उत्सुकता देखने को मिली। यात्रियों ने बसों में सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं को लेकर संतोष जताया।

    करीब दो दशक बाद सरकारी बस सेवा की वापसी से मध्यप्रदेश के सार्वजनिक परिवहन को नया विस्तार मिलने की उम्मीद है। अब सबसे बड़ा फोकस इस बात पर रहेगा कि नई बस सेवा कितने शहरों और गांवों तक पहुंचती है और यात्रियों को नियमित सुरक्षित और सुविधाजनक सफर कितना उपलब्ध करा पाती है।

  • 504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थाओं से जुड़े 504 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में छह अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। जांच एजेंसी ने साकेत कुमार, राम कुमार सिंह, पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन पर बैंक अधिकारियों तथा अन्य आरोपियों के साथ कथित आपराधिक साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। चार्जशीट में सरकारी धन को निजी बैंकों में स्थानांतरित कराने, बैंक चयन और एफडी निवेश से जुड़े नियमों की अनदेखी तथा वित्त विभाग की निर्धारित सीमाओं को दरकिनार करने जैसे आरोप शामिल हैं।

    जांच के मुताबिक अधिकारियों पर सरकारी धन के निवेश में प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने के साथ-साथ कथित तौर पर रिश्वत या अन्य अनुचित लाभ लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। मामले में सबूत छिपाने और वित्तीय फैसलों के जरिए कुछ निजी बैंक अधिकारियों को फायदा पहुंचाने की बात भी चार्जशीट में कही गई है।

    साकेत कुमार के संबंध में आरोप है कि उन्होंने 16 जून 2025 से 10 अप्रैल 2026 के बीच विकास एवं पंचायत विभाग के आयुक्त एवं सचिव के पद पर रहते हुए हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। जांच के अनुसार, एक निजी बैंक के पूर्व अधिकारी की सिफारिश पर एचपीजीसीएल पेंशन फंड ट्रस्ट से 25 करोड़ रुपये निकाले गए और उन्हें संबंधित बैंक में जमा कराया गया।

    पंचकूला नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राम कुमार सिंह को लेकर भी चार्जशीट में वित्तीय लेनदेन का उल्लेख है। जांच के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को उनके आवास पर 50 लाख रुपये पहुंचाए गए। इसके बाद 22 जनवरी को दिल्ली में उनके बेटे प्रशांत सिंह को तीन अलग-अलग किश्तों में कुल दो करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप है। इन किश्तों में एक करोड़ रुपये, 50 लाख रुपये और 50 लाख रुपये शामिल थे।

    हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष विनीत गर्ग के मामले में भी कथित अनुचित लाभ का उल्लेख किया गया है। जांच में आरोप लगाया गया कि दीपावली से पहले एक बैंक अधिकारी के माध्यम से उनके घर 50-50 ग्राम वजन के दो सोने के सिक्के पहुंचाए गए। चार्जशीट में पंकज अग्रवाल के लिए होटल में पार्टियों और नृत्य कार्यक्रमों के आयोजन का भी उल्लेख है। इन घटनाओं को सरकारी वित्तीय फैसलों से जुड़े कथित अनुचित लाभ के संदर्भ में जांचा गया।

    एचपीजीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष मोहम्मद शाइन पर भी बैंक को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। चार्जशीट के मुताबिक नवंबर 2024 में इंडसइंड बैंक में करीब 108.46 करोड़ रुपये की एफडी समय से पहले तुड़वाई गई। इसमें से 50 करोड़ रुपये दूसरे निजी बैंक में जमा कराए गए। जांच एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया से एचपीजीसीएल को करीब 1.66 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ।

    वहीं, प्रदीप कुमार पर ब्याज दरों से संबंधित अनियमितताओं के जरिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है। चार्जशीट के अनुसार इस मामले में बोर्ड को करीब 159.86 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    कुल मिलाकर जांच में सरकारी संस्थाओं के बैंक खातों और सावधि जमा से जुड़े फैसलों, बैंक चयन, धन हस्तांतरण और कथित निजी लाभ के बीच संबंधों की पड़ताल की गई है। छह अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल चार्जशीट में दर्ज आरोप हैं। मामले में इन आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांच होगी और अंतिम जिम्मेदारी अदालत के निर्णय के आधार पर तय होगी।

  • सीजेपी प्रदर्शन में एआई से महिला की फोटो से छेड़छाड़ का आरोप, चार नामों के साथ एफआईआर दर्ज

    सीजेपी प्रदर्शन में एआई से महिला की फोटो से छेड़छाड़ का आरोप, चार नामों के साथ एफआईआर दर्ज

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान एक महिला की निजी तस्वीर के कथित दुरुपयोग का मामला सामने आया है। महिला की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उसकी निजी तस्वीर को एआई और फेस-स्वैप टूल की मदद से बदलकर फर्जी तस्वीर तैयार की गई और बाद में उसका इस्तेमाल प्रदर्शन से जुड़े पोस्टर और बैनर में किया गया।

    महिला ने साइबर पुलिस थाने में दी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने उसकी तस्वीर का उसकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया। उसके मुताबिक, मूल तस्वीर में डिजिटल तरीके से बदलाव कर उसे आपत्तिजनक और गलत रूप दिया गया। महिला का कहना है कि इस तस्वीर का इस्तेमाल उसकी सामाजिक छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।

    शिकायत के अनुसार, कथित तौर पर तैयार की गई फर्जी तस्वीर के बड़े-बड़े पोस्टर और बैनर जंतर-मंतर पर लगाए गए। महिला ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उसके खिलाफ अमर्यादित नारे भी लगाए गए। उसने कहा कि उसकी निजी तस्वीर को सार्वजनिक प्रदर्शन में इस तरह इस्तेमाल किए जाने से उसकी गरिमा प्रभावित हुई और उसे सामाजिक स्तर पर नुकसान उठाना पड़ा।

    महिला ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान वीडियो बनाए गए और बाद में उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। शिकायत में विशेष रूप से इंस्टाग्राम के माध्यम से वीडियो वायरल किए जाने का उल्लेख है। महिला के अनुसार, तस्वीर और वीडियो के प्रसार से उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा तथा निजी जीवन से जुड़ी सामग्री उसकी सहमति के बिना सार्वजनिक हुई।

    इस मामले में एफआईआर में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के नाम दर्ज किए गए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन चारों को एफआईआर में आरोपी नहीं बनाया गया है। एफआईआर में नाम दर्ज होने और आरोपी बनाए जाने की स्थिति अलग-अलग होती है, इसलिए मामले में उनकी भूमिका जांच के दौरान स्पष्ट होगी।

    महिला ने अपनी शिकायत में यह भी स्पष्ट किया है कि उसका सीजेपी या जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन से कोई संबंध नहीं है। उसका आरोप है कि इसके बावजूद उसकी तस्वीर को बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया। उसने कहा कि तस्वीर में डिजिटल छेड़छाड़ कर उसे ऐसे तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे उसकी व्यक्तिगत गरिमा और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।

    मामले में अब पुलिस द्वारा प्रदर्शन से संबंधित पोस्टर, बैनर, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच की जा सकती है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि महिला की मूल तस्वीर कहां से प्राप्त की गई, उसमें बदलाव किस माध्यम से किया गया और तैयार की गई सामग्री को प्रदर्शन तक कैसे पहुंचाया गया।

    इसके अलावा सोशल मीडिया पर प्रसारित कथित वीडियो और तस्वीरों की भी पड़ताल की जा सकती है। डिजिटल सामग्री तैयार करने, उसे सार्वजनिक करने और प्रदर्शन में इस्तेमाल करने वालों की भूमिका जांच का हिस्सा हो सकती है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

    महिला ने पूरे घटनाक्रम को अपनी निजता, गरिमा और प्रतिष्ठा से जुड़ा मामला बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि या जिम्मेदारी तय होना पुलिस जांच के निष्कर्ष पर निर्भर करेगा।

  • डॉक्टरों के परिवार की बेटी कैसे बनीं अभिनेत्री? छोटी बुआ से शुरू हुआ फिल्मों का सफर, मां ने दिया सबसे बड़ा सहारा

    डॉक्टरों के परिवार की बेटी कैसे बनीं अभिनेत्री? छोटी बुआ से शुरू हुआ फिल्मों का सफर, मां ने दिया सबसे बड़ा सहारा


    नई दिल्ली। अभिनेत्री दिव्या दत्ता आज 25 सितंबर को अपना 49वां जन्मदिन मना रही हैं। करीब तीन दशक से ज्यादा लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने अलग अलग तरह के किरदार निभाकर अपनी खास पहचान बनाई है। लुधियाना जैसे शहर से निकलकर मुंबई की फिल्मी दुनिया तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं रहा। इसके पीछे परिवार का साथ मेहनत संघर्ष और खुद पर भरोसा सबसे बड़ी वजह रहे। दिव्या दत्ता का जन्म 25 सितंबर 1977 को पंजाब के लुधियाना में डॉक्टर माता पिता के घर हुआ था। परिवार में ज्यादातर लोग डॉक्टर थे लेकिन बचपन से ही दिव्या का मन अभिनय और फिल्मों की तरफ खिंचने लगा था।

    दिव्या दत्ता पढ़ाई में भी काफी अच्छी थीं। बचपन में उनके माता पिता दोनों सरकारी डॉक्टर थे और उनके घर मरीजों का आना जाना लगा रहता था। लोगों के अलग अलग बोलने के अंदाज को सुनते सुनते दिव्या ने कई तरह की भाषा सीख ली थी। उनके पिता को लगा कि बच्ची को कुछ समय दिल्ली में अपनी बुआओं के साथ रहना चाहिए। इसके बाद दिव्या दिल्ली में अपनी तीन बुआओं के पास रहने लगीं। उनकी बुआएं शिक्षिका थीं और उन्होंने दिव्या की पढ़ाई के साथ उनके व्यक्तित्व को भी निखारा।

    दिव्या के भीतर फिल्मों का शौक उनकी सबसे छोटी बुआ ने जगाया। उन्हें फिल्में देखने का बहुत शौक था और दिव्या भी उनके साथ फिल्में देखने लगीं। धीरे धीरे फिल्मों की दुनिया उन्हें आकर्षित करने लगी। वह स्कूल जाने के लिए भी अपनी पसंदीदा अभिनेत्रियों जैसा हेयरस्टाइल बनवाना चाहती थीं। कभी वह नीतू कपूर की तरह दिखना चाहतीं तो कभी जीनत अमान और हेमा मालिनी से प्रभावित होतीं। इसी दौर में उनके भीतर अभिनेत्री बनने का सपना आकार लेने लगा।

    लेकिन दिव्या की जिंदगी में सात साल की उम्र में बड़ा बदलाव आया। उनके पिता का अचानक निधन हो गया। इस घटना ने बेहद कम उम्र में उन्हें जिम्मेदार बना दिया। इसके बाद उनकी मां डॉ नलिनी दत्ता ने दिव्या और उनके भाई की परवरिश अकेले की। दिव्या अपनी मां के बेहद करीब थीं और उनके साथ रहते हुए उन्होंने अभिनय की कई बारीकियां अनजाने में सीख लीं।

    दिव्या बताती हैं कि उनकी मां को पुरानी अभिनेत्रियां पसंद थीं और वह अक्सर उनके अंदाज में एक्सप्रेशन देती थीं। दिव्या भी मां की नकल किया करती थीं। दोनों साथ में गाने सुनते और छत पर डांस करते थे। मां के हाव भाव और अभिनय की शैली को देखते देखते दिव्या के भीतर अभिनय की समझ विकसित होती गई। आगे चलकर फिल्म ट्रेन टू पाकिस्तान में काम करते समय मां से सीखी ये बातें उनके काफी काम आईं।

    मुंबई पहुंचने की कहानी भी दिलचस्प है। दिव्या को फिल्मी मैगजीन पढ़ने का शौक था। एक दिन उन्होंने स्टारडस्ट में छपे टैलेंट हंट का फॉर्म भर दिया लेकिन बाद में इसे भूल गईं। जब उनका फॉर्म स्वीकार हो गया तो उन्होंने अपनी मां को बताया कि वह अभिनेत्री बनना चाहती हैं और मुंबई जाना चाहती हैं। परिवार में कई लोगों ने इस फैसले का विरोध किया लेकिन उनकी मां बेटी के सपने के साथ मजबूती से खड़ी रहीं।

    मुंबई आने के बाद दिव्या को कई बार रिजेक्शन का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने फिल्मों में अपनी जगह बनाई और कई यादगार किरदार निभाए। आज दिव्या दत्ता का नाम उन अभिनेत्रियों में लिया जाता है जिन्होंने अपने दमदार अभिनय से हिंदी सिनेमा में अलग पहचान बनाई है। उनके जन्मदिन पर उनकी यह कहानी बताती है कि एक छोटे शहर से शुरू हुआ सपना परिवार के भरोसे और लगातार संघर्ष के दम पर मायानगरी तक पहुंच सकता है।

  • यूएन में नेतन्याहू ने ममदानी पर साधा निशाना, कहा- न्यूयॉर्क में यहूदी खुद को सुरक्षित नहीं मानते

    यूएन में नेतन्याहू ने ममदानी पर साधा निशाना, कहा- न्यूयॉर्क में यहूदी खुद को सुरक्षित नहीं मानते

    नई दिल्ली । इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ममदानी की गाजा और इस्राइल से जुड़ी टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि उनकी बयानबाजी से न्यूयॉर्क में रहने वाले यहूदी समुदाय के बीच असुरक्षा की भावना बढ़ी है। नेतन्याहू ने ममदानी को यहूदी-विरोधी मेयर भी बताया।

    अपने भाषण में नेतन्याहू ने कहा कि ममदानी के मेयर चुने जाने के बाद कई यहूदी न्यूयॉर्क में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग उनसे बातचीत के दौरान कहते हैं कि शहर तेजी से बदल गया है और अब वह पहले जैसा नहीं रहा। यह टिप्पणी दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चल रहे सार्वजनिक विवाद के बीच आई है।

    ममदानी गाजा में इस्राइल की सैन्य कार्रवाई के मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने नेतन्याहू के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं और फिलिस्तीनी अधिकारों की वकालत की है। ममदानी का रुख रहा है कि इस्राइल की नीतियों की आलोचना करना अपने आप में यहूदी-विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। दूसरी ओर, नेतन्याहू उनकी टिप्पणियों को इस्राइल और यहूदी समुदाय की सुरक्षा से जोड़ते रहे हैं।

    नेतन्याहू और ममदानी के बीच विवाद का एक प्रमुख मुद्दा अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय यानी आईसीसी का गिरफ्तारी वारंट भी रहा है। ममदानी ने अपने चुनाव अभियान के दौरान कहा था कि यदि नेतन्याहू न्यूयॉर्क आए तो वह उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट लागू कराने की कोशिश करेंगे। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि न्यूयॉर्क शहर के पास किसी विदेशी नेता को गिरफ्तार करने का अधिकार नहीं है। हाल के दिनों में उन्होंने अमेरिकी संघीय सरकार से आईसीसी के वारंट का सम्मान करने की अपील भी की है।

    नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान इस मुद्दे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ममदानी ने उन्हें न्यूयॉर्क आने से रोकने और चुप कराने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि न तो उन्हें और न ही सच्चाई को चुप कराया जा सकता है।

    इसी सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ममदानी के बीच न्यूयॉर्क में मुलाकात भी हुई थी। दोनों नेताओं के बीच कई राजनीतिक और नीतिगत मतभेद हैं, लेकिन बैठक में शहर से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र में ट्रंप के इस्राइल के प्रति समर्थन की प्रशंसा की और उन्हें अपना महत्वपूर्ण साझेदार बताया।

    इस पूरे विवाद में एक तरफ ममदानी इस्राइल की गाजा नीति और फिलिस्तीनी अधिकारों को लेकर अपनी आलोचना पर कायम हैं, वहीं नेतन्याहू उनकी टिप्पणियों को यहूदी समुदाय की सुरक्षा और यहूदी-विरोधी भावना के संदर्भ में पेश कर रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक टकराव अब गाजा युद्ध के साथ-साथ न्यूयॉर्क में यहूदी सुरक्षा, आईसीसी के गिरफ्तारी वारंट और अमेरिकी सरकार की भूमिका जैसे मुद्दों से भी जुड़ गया है।

    नेतन्याहू के संयुक्त राष्ट्र संबोधन के दौरान कई प्रतिनिधि सभागार से बाहर भी चले गए और न्यूयॉर्क में उनके दौरे के खिलाफ प्रदर्शन हुए। इस घटनाक्रम ने उनके भाषण को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी राजनीतिक मतभेदों को भी सामने ला दिया।

  • लद्दाख हिंसा की बरसी पर सोनम वांगचुक ने जताया एनकाउंटर का डर, मांगा अमित शाह का इस्तीफा

    लद्दाख हिंसा की बरसी पर सोनम वांगचुक ने जताया एनकाउंटर का डर, मांगा अमित शाह का इस्तीफा

    नई दिल्ली । लद्दाख में पिछले साल हुई लेह हिंसा की पहली बरसी पर जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका जताई। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें मुठभेड़ में मारे जाने का डर है। वांगचुक ने इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग करते हुए 24 सितंबर 2025 की हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।

    लेह में हिंसा की पहली बरसी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वांगचुक ने कहा कि उन्हें अपनी जान को लेकर चेतावनियां मिली हैं। उनका कहना था कि यदि देश और समाज को किसी मुद्दे पर जागरूक करने के लिए उन्हें किसी भी तरह के परिणाम का सामना करना पड़े, तो वह उसके लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें जेल भेजे जाने के बाद अब उनके साथ मुठभेड़ होने की आशंका भी जताई जा रही है।

    वांगचुक ने पिछले साल की घटना की न्यायिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्ट सामने नहीं लाई जाती है तो पुलिस कार्रवाई और गोलीबारी की परिस्थितियों की जांच के लिए स्वतंत्र जन न्यायाधिकरण गठित करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। उनका कहना था कि घटना में हुई मौतों के लिए जिम्मेदारी तय होना जरूरी है।

    24 सितंबर 2025 को लेह में गंभीर कानून-व्यवस्था की स्थिति के बाद पुलिस कार्रवाई में चार लोगों की मौत हुई थी। केंद्र सरकार ने घटना की परिस्थितियों, पुलिस कार्रवाई और चार लोगों की मौत के कारणों की जांच के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता में न्यायिक जांच गठित की थी। वांगचुक ने जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और घटना के लिए जवाबदेही तय करने की मांग दोहराई।

    वांगचुक ने कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग दोहराई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साल के प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों ने स्थानीय युवाओं पर स्वचालित हथियारों का इस्तेमाल किया और बाद में प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रविरोधी बताया गया। उन्होंने कहा कि घटना में मारे गए लोगों को गोली लगी थी और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। ये आरोप वांगचुक द्वारा लगाए गए हैं।

    उन्होंने दिल्ली में छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग का भी उल्लेख किया। वांगचुक ने उस मांग का समर्थन करते हुए सवाल उठाया कि लद्दाख में हुई हिंसा और चार लोगों की मौत के मामले में भी समान रूप से जवाबदेही की मांग क्यों नहीं की गई।

    हिंसा की पहली बरसी पर लेह और लद्दाख के कई हिस्सों में बंद का असर दिखाई दिया। लेह और कारगिल में दुकानें तथा कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में कम आवाजाही रही। कुछ लोगों ने 24 सितंबर को मृतकों की याद में शहीद दिवस के रूप में मनाया।

    वांगचुक ने यह भी कहा कि बरसी के कार्यक्रम में अपेक्षाकृत कम लोगों की मौजूदगी को आंदोलन की हार नहीं माना जाना चाहिए। उनके मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधों के बीच भी लोगों ने पिछले साल की घटना में मारे गए चार लोगों को याद किया और न्याय तथा जवाबदेही की मांग को सामने रखा। लद्दाख में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा की मांग को लेकर आंदोलन का मुद्दा भी इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में बना हुआ है।

  • शी जिनपिंग ने पांच साल में एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने का किया बड़ा एलान

    शी जिनपिंग ने पांच साल में एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने का किया बड़ा एलान


    नई दिल्ली ।
    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अगले पांच वर्षों में एक लाख युवा अमेरिकियों को चीन आने का निमंत्रण दिया है। इन युवाओं के लिए पढ़ाई और विभिन्न आदान-प्रदान कार्यक्रमों के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब चीन और अमेरिका के बीच संबंधों में व्यापार, तकनीक और अन्य रणनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। शी जिनपिंग ने युवाओं को दोनों देशों के भविष्य के संबंधों से जोड़ते हुए लोगों के बीच संपर्क और आपसी समझ बढ़ाने पर जोर दिया।

    शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका के रिश्तों की उम्मीद दोनों देशों के लोगों से जुड़ी है और इन संबंधों का भविष्य युवाओं के हाथ में है। इसी सोच के तहत उन्होंने अगले पांच वर्षों में एक लाख युवा अमेरिकियों को चीन आने का न्योता देने की घोषणा की। इन यात्राओं में शिक्षा के साथ सांस्कृतिक और अन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों को भी शामिल किया जाएगा।

    यह पहली बार नहीं है जब चीन की ओर से अमेरिकी युवाओं को इस तरह आमंत्रित किया गया है। नवंबर 2023 में भी पांच वर्षों के भीतर 50 हजार युवा अमेरिकियों को चीन बुलाने की पहल की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह लक्ष्य तय समय से करीब ढाई साल पहले ही पूरा हो गया। इसके बाद अब प्रस्तावित संख्या को बढ़ाकर एक लाख कर दिया गया है।

    इस पहल के तहत अमेरिकी युवाओं ने चीन के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया है। कई युवाओं ने वहां शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया, स्थानीय लोगों से मुलाकात की और चीन के इतिहास तथा आधुनिक विकास को करीब से समझने का अवसर पाया। चीन में आयोजित कार्यक्रमों में विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच संवाद और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां भी शामिल रही हैं।

    अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने चीन और अमेरिका के पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दोनों देशों के सहयोग को याद किया और कहा कि उस समय दोनों पक्षों ने फासीवादी ताकतों के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी थी। उनका कहना था कि इस साझा इतिहास को दोनों देशों के लोगों ने याद रखा है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन और अमेरिका के सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने चीन की मदद करने वाले अमेरिकी पायलटों के समूह ‘फ्लाइंग टाइगर्स’ की भूमिका को याद किया। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच पुराने संपर्कों से जुड़े ‘गंग हो’ शब्द का भी जिक्र किया और इसे मिलकर काम करने के अर्थ से जोड़ा।

    शी जिनपिंग ने यह भी कहा कि चीन के राष्ट्रीय पुनरुत्थान का लक्ष्य और अमेरिका को फिर से महान बनाने की कोशिश एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती और संपर्क बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

    एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने की नई पहल को शिक्षा, सांस्कृतिक संपर्क और लोगों के बीच संवाद बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। पिछले कार्यक्रम में 50 हजार युवाओं का लक्ष्य समय से पहले पूरा होने के बाद अब इसकी संख्या दोगुनी की गई है। आने वाले पांच वर्षों में इस पहल के तहत कितने युवा चीन पहुंचते हैं और इससे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक एवं सामाजिक संपर्क किस स्तर तक बढ़ता है, यह आगे स्पष्ट होगा।