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  • शी जिनपिंग ने पांच साल में एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने का किया बड़ा एलान

    शी जिनपिंग ने पांच साल में एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने का किया बड़ा एलान


    नई दिल्ली ।
    चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अगले पांच वर्षों में एक लाख युवा अमेरिकियों को चीन आने का निमंत्रण दिया है। इन युवाओं के लिए पढ़ाई और विभिन्न आदान-प्रदान कार्यक्रमों के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब चीन और अमेरिका के बीच संबंधों में व्यापार, तकनीक और अन्य रणनीतिक मुद्दों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। शी जिनपिंग ने युवाओं को दोनों देशों के भविष्य के संबंधों से जोड़ते हुए लोगों के बीच संपर्क और आपसी समझ बढ़ाने पर जोर दिया।

    शी जिनपिंग ने कहा कि चीन और अमेरिका के रिश्तों की उम्मीद दोनों देशों के लोगों से जुड़ी है और इन संबंधों का भविष्य युवाओं के हाथ में है। इसी सोच के तहत उन्होंने अगले पांच वर्षों में एक लाख युवा अमेरिकियों को चीन आने का न्योता देने की घोषणा की। इन यात्राओं में शिक्षा के साथ सांस्कृतिक और अन्य आदान-प्रदान कार्यक्रमों को भी शामिल किया जाएगा।

    यह पहली बार नहीं है जब चीन की ओर से अमेरिकी युवाओं को इस तरह आमंत्रित किया गया है। नवंबर 2023 में भी पांच वर्षों के भीतर 50 हजार युवा अमेरिकियों को चीन बुलाने की पहल की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह लक्ष्य तय समय से करीब ढाई साल पहले ही पूरा हो गया। इसके बाद अब प्रस्तावित संख्या को बढ़ाकर एक लाख कर दिया गया है।

    इस पहल के तहत अमेरिकी युवाओं ने चीन के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया है। कई युवाओं ने वहां शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लिया, स्थानीय लोगों से मुलाकात की और चीन के इतिहास तथा आधुनिक विकास को करीब से समझने का अवसर पाया। चीन में आयोजित कार्यक्रमों में विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच संवाद और विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां भी शामिल रही हैं।

    अपने संबोधन में शी जिनपिंग ने चीन और अमेरिका के पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दोनों देशों के सहयोग को याद किया और कहा कि उस समय दोनों पक्षों ने फासीवादी ताकतों के खिलाफ मिलकर लड़ाई लड़ी थी। उनका कहना था कि इस साझा इतिहास को दोनों देशों के लोगों ने याद रखा है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन और अमेरिका के सहयोग का उल्लेख किया। उन्होंने चीन की मदद करने वाले अमेरिकी पायलटों के समूह ‘फ्लाइंग टाइगर्स’ की भूमिका को याद किया। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच पुराने संपर्कों से जुड़े ‘गंग हो’ शब्द का भी जिक्र किया और इसे मिलकर काम करने के अर्थ से जोड़ा।

    शी जिनपिंग ने यह भी कहा कि चीन के राष्ट्रीय पुनरुत्थान का लक्ष्य और अमेरिका को फिर से महान बनाने की कोशिश एक-दूसरे के साथ आगे बढ़ सकती हैं। उन्होंने दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती और संपर्क बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

    एक लाख अमेरिकी युवाओं को चीन बुलाने की नई पहल को शिक्षा, सांस्कृतिक संपर्क और लोगों के बीच संवाद बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। पिछले कार्यक्रम में 50 हजार युवाओं का लक्ष्य समय से पहले पूरा होने के बाद अब इसकी संख्या दोगुनी की गई है। आने वाले पांच वर्षों में इस पहल के तहत कितने युवा चीन पहुंचते हैं और इससे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक एवं सामाजिक संपर्क किस स्तर तक बढ़ता है, यह आगे स्पष्ट होगा।

  • यूपी समेत पांच चुनावी राज्यों में अक्टूबर में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण की तैयारी

    यूपी समेत पांच चुनावी राज्यों में अक्टूबर में वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण की तैयारी

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश समेत अगले वर्ष विधानसभा चुनाव वाले पांच राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण यानी SSR की प्रक्रिया अक्टूबर में शुरू किए जाने की संभावना है। इसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। प्रस्तावित प्रक्रिया में 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि माना जा सकता है। इन राज्यों में विधानसभा चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में प्रस्तावित हैं, ऐसे में चुनाव से पहले मतदाता सूचियों को अपडेट करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    SSR के तहत मौजूदा मतदाता सूची को संशोधित और अपडेट किया जाता है। इसमें नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना, विवरण में सुधार करना और जरूरी संशोधन करना शामिल होता है। इसके विपरीत SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण में मतदाता सूची का अधिक व्यापक सत्यापन किया जाता है। इसमें मतदाताओं की पात्रता और दर्ज विवरणों की विस्तृत जांच की जाती है।

    मौजूदा स्थिति में देशभर में एक साथ SSR कराने की संभावना कम बताई जा रही है। इसकी प्रमुख वजह 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के तीसरे चरण की प्रक्रिया और जनगणना से जुड़ी गतिविधियां हैं। चुनाव आयोग को विभिन्न राज्यों में चल रही इन प्रक्रियाओं के बीच मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण का कार्यक्रम तय करना है।

    पांच चुनावी राज्यों में SSR कराने का संबंध आगामी विधानसभा चुनावों से भी है। चुनाव से पहले संबंधित मतदाता सूचियों को निर्धारित अर्हता तिथि के आधार पर अपडेट किया जाता है। प्रस्तावित प्रक्रिया में 1 जनवरी 2027 को अर्हता तिथि रखा जा सकता है। इससे उन लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जो निर्धारित तिथि तक मतदान की पात्रता हासिल कर चुके होंगे।

    इस बीच चुनाव आयोग के भीतर मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अलग-अलग स्तर पर उठाए गए सवाल भी चर्चा में हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले कुछ समय के दौरान आयोग की प्रक्रियाओं और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं। इन मुद्दों में मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया समेत पुनरीक्षण से जुड़े विषय शामिल बताए गए हैं।

    इन आपत्तियों पर चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि किसी भी संस्थान में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामने आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले एक वर्ष में लिए गए उसके आदेश और फैसले पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम रहे हैं। मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों पर भी आयोग ने आंतरिक सहमति होने की बात कही है।

    देशव्यापी SSR को लेकर जनगणना की समय-सारणी भी एक महत्वपूर्ण कारक है। वर्ष 2026 में जनगणना की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ रही है। कुछ पहाड़ी और बर्फीले क्षेत्रों में इसकी समय-सारणी को अलग रखा गया है। ऐसे में पूरे देश में एक साथ मतदाता सूची पुनरीक्षण कराने के बजाय चुनावी राज्यों को प्राथमिकता देने की संभावना जताई जा रही है।

    फिलहाल अक्टूबर में पांच राज्यों में SSR के संभावित आदेश और इसकी विस्तृत समय-सारणी पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। यदि प्रक्रिया शुरू होती है, तो उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर की मतदाता सूचियों में नए नाम जोड़ने, गलतियों को सुधारने और आवश्यक संशोधन करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने मांगा दो साल का समय

    OBC क्रीमी लेयर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए सरकार ने मांगा दो साल का समय

    नई दिल्ली । अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC क्रीमी लेयर से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने दो साल का समय मांगा है। सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि फैसले को लागू करने की प्रक्रिया इस तरह तय की जानी चाहिए, जिससे पहले से चल रही और पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं पर अचानक असर न पड़े। अदालत ने केंद्र की इस मांग पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है।

    सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को OBC क्रीमी लेयर से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम यानी PSU या निजी क्षेत्र में कार्यरत माता या पिता के वेतन अथवा आय को अकेले ही इस आधार के रूप में नहीं माना जा सकता कि संबंधित परिवार OBC क्रीमी लेयर के दायरे में आता है। अदालत ने क्रीमी लेयर निर्धारित करने के लिए माता-पिता के पद और उनकी श्रेणी की स्थिति के साथ आय या संपत्ति से जुड़े निर्धारित मानकों को भी ध्यान में रखने की बात कही थी।

    इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सरकार का पक्ष रखा। केंद्र ने आग्रह किया कि फैसले को भविष्य में प्रभावी तरीके से लागू करने की अनुमति दी जाए। सरकार का कहना था कि अदालत द्वारा तय किए गए कानूनी सिद्धांत को लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर पर्याप्त तैयारी की जरूरत होगी।

    सरकार ने दो साल की अवधि इसलिए मांगी है ताकि नई व्यवस्था लागू करते समय पहले से शुरू हो चुकी भर्ती प्रक्रियाओं में अनिश्चितता पैदा न हो। केंद्र के अनुसार, इस अवधि में अलग-अलग परिस्थितियों से जुड़े मामलों को व्यवस्थित करने, प्रतिस्पर्धी उम्मीदवारों के अधिकारों में संतुलन बनाने और प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक बदलाव करने का अवसर मिलेगा।

    सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जुड़े मामलों पर अलग-अलग उच्च न्यायालयों में विचार किया गया है। केंद्र की ओर से बताया गया कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में लंबित मामलों को सुप्रीम कोर्ट या किसी एक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने के लिए भी याचिका दायर की गई है। इससे जुड़े मामलों में एकरूपता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

    सुप्रीम कोर्ट के मूल फैसले का केंद्र सरकार ने विरोध नहीं किया है। सरकार की मांग मुख्य रूप से फैसले को लागू करने की समयसीमा से जुड़ी है। केंद्र का कहना है कि दो साल का समय मिलने से व्यवस्था में अचानक बदलाव के कारण पैदा होने वाली प्रशासनिक कठिनाइयों को कम किया जा सकेगा।

    11 मार्च के फैसले में अदालत ने OBC क्रीमी लेयर की पहचान से जुड़े मानकों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। अदालत के अनुसार, केवल माता-पिता की आय को देखकर निर्णय नहीं किया जा सकता, बल्कि उनके पद और सेवा की स्थिति को भी निर्धारित नियमों के साथ देखा जाना जरूरी है। इस व्यवस्था का संबंध उन उम्मीदवारों की पात्रता से है जो OBC आरक्षण का लाभ लेना चाहते हैं।

    अब केंद्र की ओर से मांगी गई दो साल की मोहलत पर आगे की सुनवाई में स्थिति स्पष्ट होगी। इस मामले का असर OBC क्रीमी लेयर की पात्रता और भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े प्रशासनिक नियमों पर पड़ सकता है।

  • एसपी बालासुब्रमण्यम की आवाज के वो 10 यादगार गीत, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में बनाई खास पहचान

    एसपी बालासुब्रमण्यम की आवाज के वो 10 यादगार गीत, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में बनाई खास पहचान

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के महान पार्श्व गायकों में शामिल एसपी बालासुब्रमण्यम की आज छठी पुण्यतिथि है। पांच दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने हिंदी के साथ तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम समेत कई भाषाओं में हजारों गीतों को अपनी आवाज दी। उनकी आवाज में भावनाओं की ऐसी विविधता थी कि रोमांटिक गीतों से लेकर भावुक और मधुर रचनाओं तक हर तरह के गाने श्रोताओं के बीच खास पहचान बना लेते थे। 25 सितंबर 2020 को उनके निधन के बाद भी उनके गीत लगातार लोगों की यादों का हिस्सा बने हुए हैं।

    4 जून 1946 को जन्मे एसपी बालासुब्रमण्यम ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी, लेकिन संगीत के प्रति उनका लगाव उन्हें गायकी की दुनिया में ले आया। उन्होंने संगीत प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया और 15 दिसंबर 1966 को तेलुगु फिल्म ‘श्री श्री श्री मर्यादा रामन्ना’ से बतौर पार्श्व गायक अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई और आगे चलकर हिंदी फिल्मों में भी उनकी आवाज बेहद लोकप्रिय हुई।

    साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘एक दूजे के लिए’ से उन्होंने हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान मजबूत की। इस फिल्म के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके बाद सलमान खान की फिल्मों में उनकी आवाज ने खास लोकप्रियता हासिल की। ‘मैंने प्यार किया’, ‘हम आपके हैं कौन’, ‘साजन’ और ‘लव’ जैसी फिल्मों के गीतों ने उनकी आवाज को हिंदी दर्शकों के बीच घर-घर पहुंचाया।

    एसपी बालासुब्रमण्यम के नाम गायकी से जुड़े कई उल्लेखनीय रिकॉर्ड भी रहे। उनका करियर करीब पांच दशक तक चला और उन्होंने 16 भारतीय भाषाओं में 40 हजार से अधिक गीत रिकॉर्ड किए। एक दिन में उन्होंने कन्नड़ में 21, तमिल में 19 और हिंदी में 16 गाने रिकॉर्ड किए। उन्हें अलग-अलग भाषाओं में गायकी के लिए छह बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें 2001 में पद्म श्री और 2011 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

    उनके लोकप्रिय हिंदी गीतों में ‘आजा शाम होने आई’ खास है। इसी तरह ‘दिल दीवाना’ और ‘मेरे रंग में रंगने वाली’ जैसे गीतों ने भी उनकी आवाज को घर-घर तक पहुंचाया। इन गीतों में उनकी गायकी की सहजता और रोमांटिक अंदाज साफ नजर आता है।

    फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ का ‘पहला पहला प्यार है’ भी आज तक श्रोताओं के बीच लोकप्रिय है। ‘साजन’ का ‘बहुत प्यार करते हैं’ और ‘देखा है पहली बार’ उनकी यादगार प्रस्तुतियों में शामिल हैं। वहीं फिल्म ‘लव’ का ‘साथिया तूने क्या किया’ भी उनकी चर्चित प्रस्तुतियों में गिना जाता है।

    ‘एक दूजे के लिए’ का ‘हम बने तुम बने’ भी उनकी यादगार प्रस्तुतियों में शामिल है। वहीं ‘पत्थर के फूल’ का ‘कभी तू छलिया लगता है’ भी उनकी लोकप्रिय गीतों की सूची का हिस्सा रहा। इन गीतों के जरिए एसपी बालासुब्रमण्यम ने हिंदी सिनेमा के संगीत में अपनी अलग पहचान बनाई, जिसे आज भी संगीत प्रेमी याद करते हैं।

  • एशियन गेम्स में भारत का जोरदार प्रदर्शन शूटिंग में गोल्ड के बाद कबड्डी के दोनों फाइनल में एंट्री स्क्वैश में भी मेडल पक्का

    एशियन गेम्स में भारत का जोरदार प्रदर्शन शूटिंग में गोल्ड के बाद कबड्डी के दोनों फाइनल में एंट्री स्क्वैश में भी मेडल पक्का


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारत के लिए 25 सितंबर का दिन पदकों और शानदार मुकाबलों से भरा रहा। प्रतियोगिता के इस चरण में भारतीय खिलाड़ियों ने शूटिंग कबड्डी स्क्वैश हॉकी और बॉक्सिंग समेत कई खेलों में अपना दम दिखाया। दिन की शुरुआत ही शूटिंग में बड़ी उपलब्धि के साथ हुई जब कमलजीत और सुरुचि सिंह की जोड़ी ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिक्स्ड टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। भारतीय जोड़ी ने 484.6 अंक के एशियन गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। यह भारत का शूटिंग में पहला गोल्ड और एशियन गेम्स में कुल दूसरा गोल्ड रहा।

    शूटिंग में भारत को एक और पदक मिला। पुरुषों की 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन टीम स्पर्धा में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर रुद्रांक्ष पाटिल और नीरज कुमार की तिकड़ी ने सिल्वर मेडल जीता। हालांकि व्यक्तिगत स्पर्धा में ऐश्वर्य प्रताप सिंह तोमर फाइनल तक पहुंचे लेकिन वह पांचवें स्थान पर रहे जबकि नीरज कुमार आठवें स्थान पर रहे। इस तरह शूटिंग में भारत का प्रदर्शन कई पदकों के साथ जारी रहा।

    कबड्डी के मैदान से भी भारत के लिए बड़ी खबर सामने आई। भारतीय महिला टीम ने सेमीफाइनल में नेपाल को 48-24 से हराकर फाइनल में जगह बनाई। इसके बाद पुरुष टीम ने भी थाईलैंड के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए 66-28 की जीत दर्ज की और फाइनल का टिकट हासिल कर लिया। इस तरह एशियन गेम्स में भारतीय महिला और पुरुष दोनों कबड्डी टीमें खिताबी मुकाबले में पहुंच गईं।

    स्क्वैश में भी भारत के खाते में पदक पक्के हुए। अभय सिंह ने पुरुष सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल में जापान के रयुनोसुके त्सुकुए को 11-4 11-3 11-6 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। महिला सिंगल्स में अनाहत सिंह ने हमवतन तन्वी खन्ना को 3-0 से हराकर अंतिम चार में प्रवेश किया। मिक्स्ड डबल्स में जोशना चिनप्पा और वेलवन सेंथिलकुमार की जोड़ी ने भी सेमीफाइनल में जगह बनाकर पदक सुनिश्चित किया।

    हॉकी में भी भारतीय महिला टीम ने जापान के खिलाफ 3-1 से जीत दर्ज की। भारत की ओर से लालरेमसियामी इशिका और नवनीत ने गोल किए। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में जगह बनाई। वहीं बॉक्सिंग में सचिन सिवाच ने 60 किलोग्राम वर्ग में मोहम्मद अबू जाजेह को 4-1 से हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया और वह पदक से एक जीत दूर पहुंच गए।

    टेबल टेनिस में भारत को कुछ सफलता मिली तो कुछ मुकाबलों में निराशा भी हाथ लगी। दिव्या चितले और मनुष शाह की जोड़ी ने सेमीफाइनल में पहुंचकर पदक पक्का किया जबकि मानव ठक्कर का पुरुष सिंगल्स अभियान दूसरे दौर में हार के साथ खत्म हो गया। भारतीय तैराकों ने भी फाइनल में जगह बनाकर उम्मीदें कायम रखीं। साजन प्रकाश पुरुषों की 200 मीटर बटरफ्लाई के फाइनल में पहुंचे जबकि ऋषभ दास और उत्कर्ष पाटिल ने 200 मीटर बैकस्ट्रोक के फाइनल में जगह बनाई।

    25 सितंबर की शुरुआत भारत ने 17 पदकों के साथ की थी और शूटिंग के गोल्ड तथा सिल्वर के बाद पदक संख्या 19 तक पहुंच गई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भारत के खाते में अब 2 गोल्ड 8 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज हैं। एशियन गेम्स में भारतीय दल के लिए आगे भी एथलेटिक्स कबड्डी शूटिंग स्क्वैश बैडमिंटन और अन्य खेलों में मुकाबले जारी हैं।

  • 6 एपिसोड की इस हॉरर सीरीज में है रहस्यमयी मौतों का राज, पहली 3 बहुओं की कहानी जानकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे

    6 एपिसोड की इस हॉरर सीरीज में है रहस्यमयी मौतों का राज, पहली 3 बहुओं की कहानी जानकर खड़े हो जाएंगे रोंगटे


    नई दिल्ली। अगर आपको हॉरर के साथ सस्पेंस और थ्रिलर से भरपूर कहानियां देखना पसंद है तो ओटीटी पर मौजूद अय्याना माने आपके लिए दिलचस्प सीरीज साबित हो सकती है। साल 2025 में आई यह कन्नड़ हॉरर मिस्ट्री थ्रिलर सीरीज अपनी रहस्यमयी कहानी और लगातार आने वाले ट्विस्ट के कारण दर्शकों का ध्यान खींचती है। कहानी जैसे जैसे आगे बढ़ती है वैसे वैसे घर से जुड़े कई ऐसे राज सामने आते हैं जो पूरी कहानी को और ज्यादा रहस्यमय बना देते हैं। खास बात यह है कि पूरी सीरीज सिर्फ 6 एपिसोड की है और हर एपिसोड करीब 18 से 20 मिनट का है।

    अय्याना माने की कहानी जाजी नाम की एक लड़की से शुरू होती है जिसकी शादी दुष्यंत नाम के युवक से होती है। शादी के बाद जब जाजी अपने नए ससुराल पहुंचती है तो उसे वहां के माहौल में कुछ अलग महसूस होता है। जाजी के ससुराल का नाम अय्याना माने है और परिवार ने उससे दुष्यंत की पिछली शादी से जुड़ी एक अहम बात छिपाई होती है। दुष्यंत की पहले भी शादी हो चुकी थी और उसकी पहली पत्नी की मौत हो गई थी। जाजी के लिए यह जानकारी पहले से ही हैरान करने वाली होती है लेकिन ससुराल पहुंचने के बाद हालात और भी डरावने हो जाते हैं।

    जाजी जिस दिन शादी के बाद घर आती है उसी दिन उसके ससुर की मौत हो जाती है। इस घटना के बाद घर का माहौल बदल जाता है और जाजी को परिवार के लोगों का व्यवहार भी सामान्य नहीं लगता। वह खुद को इस बड़े से घर में काफी अकेला महसूस करने लगती है। इसी दौरान घर की नौकरानी उसके लिए सहारे का काम करती है। नौकरानी जाजी को घर से जुड़ी एक ऐसी बात बताती है जिसे सुनकर उसके होश उड़ जाते हैं।

    जाजी को पता चलता है कि इस घर की पहले की तीन बहुओं की भी रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। यह जानकारी मिलने के बाद उसके मन में कई सवाल खड़े हो जाते हैं। आखिर इस घर की बहुओं के साथ ऐसा क्या हुआ था। क्या इन मौतों के पीछे कोई गहरा राज छिपा है और क्या जाजी भी किसी खतरे में है। इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जाजी खुद इस रहस्य की तह तक जाने की कोशिश करती है।

    जाजी की पड़ताल जैसे जैसे आगे बढ़ती है वैसे वैसे कहानी में नए राज खुलते जाते हैं। उसे पता चलता है कि इन घटनाओं का संबंध उसके ससुराल के परिवार से है और कहानी का एक अहम कनेक्शन उसकी सास से जुड़ा हुआ है। यहीं से सीरीज का सस्पेंस और ज्यादा गहरा हो जाता है। दर्शकों को हर एपिसोड में कहानी के नए पहलू देखने को मिलते हैं और कई घटनाएं ऐसी हैं जो डर का माहौल पैदा करती हैं।

    सीरीज की कहानी में हॉरर के साथ मिस्ट्री और थ्रिलर का मेल देखने को मिलता है। यही वजह है कि कहानी सिर्फ डराने पर निर्भर नहीं रहती बल्कि दर्शकों को यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि आखिर घर के अंदर चल क्या रहा है। हर नए एपिसोड के साथ पुराने सवालों के साथ नए सवाल भी सामने आते हैं।

    अय्याना माने में खुशी रवि अक्षय नायक मानसी सुधीर अनिरुद्ध आचार्य रमेश इंदिरा हिथा चंद्रशेखर और विजय सोभराज जैसे कलाकार नजर आते हैं। सीरीज का निर्देशन रमेश इंदिरा ने किया है जबकि इसका निर्माण श्रुति नायडू प्रोडक्शन्स ने किया है। बैकग्राउंड स्कोर एल वी मुत्थु ने गणेश के साथ तैयार किया है।

    अगर आप हॉरर मिस्ट्री और थ्रिलर कंटेंट पसंद करते हैं तो यह 6 एपिसोड की सीरीज कम समय में एक रहस्यमय कहानी देखने का विकल्प देती है। अय्याना माने को जी5 पर देखा जा सकता है। सीरीज की IMDb रेटिंग 6.8 बताई गई है।

  • अक्षय कुमार के घर में दिखा रहस्यमयी साया, ट्विंकल खन्ना ने जताया शक, बेटे आरव की बात सुनकर सहम गए थे एक्टर

    अक्षय कुमार के घर में दिखा रहस्यमयी साया, ट्विंकल खन्ना ने जताया शक, बेटे आरव की बात सुनकर सहम गए थे एक्टर


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार अपनी फिल्मों में कई बार डर और रहस्य से भरी कहानियां पर्दे पर दिखा चुके हैं लेकिन उनकी निजी जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा भी काफी चर्चा में रहा है। अक्षय कुमार ने अपनी हॉरर कॉमेडी फिल्म भूत बंगला के प्रमोशन के दौरान अपने घर में हुए एक ऐसे अनुभव का जिक्र किया था जिसने उन्हें भी कुछ देर के लिए सोचने पर मजबूर कर दिया था। इस घटना में उनकी पत्नी ट्विंकल खन्ना और बेटे आरव का भी जिक्र सामने आया था। अक्षय ने बताया था कि उस समय उनका परिवार एक दूसरे घर में रहता था और ट्विंकल को वहां अक्सर कुछ अजीब महसूस होता था।

    अक्षय के मुताबिक ट्विंकल खन्ना उनसे कई बार कहती थीं कि घर में कुछ है। अक्षय ने शुरुआत में उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया था। उनका मानना था कि पढ़ी लिखी होने के बावजूद इस तरह की बातों पर विश्वास करना आसान नहीं होना चाहिए। वह इसे सामान्य डर या वहम मानते थे। ट्विंकल हालांकि अपने अनुभव को लेकर लगातार आश्वस्त थीं और उन्होंने घर में किसी महिला के घूमने जैसी अनुभूति होने की बात भी कही थी।

    उस समय अक्षय और ट्विंकल का बेटा आरव करीब चार या पांच साल का था। अक्षय ने बताया कि एक दिन उनके बेटे के साथ ऐसा कुछ हुआ जिसने उन्हें भी हैरान कर दिया। आरव लेटा हुआ था और अचानक उसने कमरे में एक दिशा की ओर इशारा किया। इसके बाद वह वहां मौजूद किसी अनदेखी चीज से बात करने लगा। अक्षय ने जब उससे पूछा कि वह किससे बात कर रहा है तो आरव ने ऐसा जवाब दिया जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई।

    अक्षय के अनुसार उनका बेटा उस जगह की तरफ देखकर वहां से चले जाने के लिए कह रहा था। बच्चे की बात सुनकर अक्षय कुछ पल के लिए चौंक गए। ट्विंकल ने भी इस घटना को अपनी पहले कही गई बात से जोड़ते हुए कहा था कि वह पहले से महसूस करती थीं कि घर में कुछ है। इस अनुभव के बाद अक्षय ने माना कि कुछ ऐसी घटनाएं हो सकती हैं जिन्हें तुरंत समझा पाना आसान नहीं होता।

    हालांकि अक्षय कुमार ने यह भी स्पष्ट किया था कि भूत या अलौकिक शक्तियों के अस्तित्व का वैज्ञानिक प्रमाण उनके पास नहीं है। उन्होंने इस अनुभव को अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी घटना के तौर पर बताया था। उनका कहना था कि दुनिया में ऊर्जा को लेकर अलग अलग तरह की मान्यताएं हैं और कुछ लोग सकारात्मक ऊर्जा से घिरे होने की बात करते हैं तो कुछ नकारात्मक ऊर्जा की मौजूदगी महसूस करने का दावा करते हैं।

    अक्षय ने बताया था कि इस अनुभव के बाद उन्होंने वह घर बदल लिया था। इस पूरे किस्से को उन्होंने किसी पक्के प्रमाण के तौर पर पेश नहीं किया बल्कि अपने परिवार के साथ हुए एक असामान्य अनुभव के रूप में साझा किया था। यही वजह है कि अक्षय कुमार से जुड़ा यह पुराना किस्सा आज भी उनके प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है। खासतौर पर तब जब अभिनेता खुद हॉरर फिल्मों में नजर आते हैं और पर्दे पर डरावनी कहानियों का हिस्सा बनते रहे हैं।

  • बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान को पछाड़ा, इस खास मामले में निकले सबसे आगे, जानें पूरी कहानी

    बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान को पछाड़ा, इस खास मामले में निकले सबसे आगे, जानें पूरी कहानी


    नई दिल्ली। अमिताभ बच्चन और शाहरुख खान बॉलीवुड के दो ऐसे नाम हैं जिनकी लोकप्रियता कई दशकों से कायम है। अमिताभ बच्चन को हिंदी सिनेमा का शहंशाह कहा जाता है तो शाहरुख खान को बॉलीवुड का बादशाह और किंग खान कहा जाता है। दोनों की फैन फॉलोइंग देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में है। अब सोशल मीडिया से जुड़े एक आंकड़े में अमिताभ बच्चन ने शाहरुख खान को मामूली अंतर से पीछे छोड़ दिया है। एम3एम हुरुन इंडिया रिच लिस्ट की रिपोर्ट में दोनों सितारों की सोशल मीडिया मौजूदगी को लेकर आंकड़े सामने आए हैं।

    रिपोर्ट के मुताबिक इंस्टाग्राम लिंक्डइन और एक्स यानी पहले ट्विटर पर अमिताभ बच्चन की कुल फॉलोइंग करीब 4.87 करोड़ है। वहीं शाहरुख खान की इन तीनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुल फॉलोइंग करीब 4.86 करोड़ बताई गई है। इस तरह दोनों सितारों के बीच करीब एक लाख फॉलोअर्स का अंतर है। यानी सोशल मीडिया फॉलोइंग के इस आंकड़े में अमिताभ बच्चन शाहरुख खान से थोड़ा आगे निकल गए हैं। हालांकि अंतर इतना कम है कि दोनों की लोकप्रियता के स्तर में इससे कोई बड़ा फर्क नजर नहीं आता।

    इस सूची में ऋतिक रोशन भी दोनों सितारों के काफी करीब हैं। रिपोर्ट में ऋतिक रोशन की तीनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुल फॉलोइंग करीब 4.81 करोड़ बताई गई है। इसके बाद करण जौहर का नाम आता है जिनकी कुल फॉलोइंग करीब 1.82 करोड़ है। इस आंकड़े से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बॉलीवुड के बड़े सितारों की सोशल मीडिया पर कितनी मजबूत पकड़ है।

    सोशल मीडिया फॉलोइंग के अलावा रिपोर्ट में सितारों की संपत्ति से जुड़े आंकड़े भी चर्चा में हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शाहरुख खान और उनके परिवार की कुल नेटवर्थ करीब 10 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। वहीं अमिताभ बच्चन और उनके परिवार की कुल नेटवर्थ करीब 4 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। सलमान खान की नेटवर्थ करीब 3 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। इस तरह संपत्ति के मामले में भी इन सितारों से जुड़े आंकड़े काफी चर्चा में रहे हैं।

    वहीं खेल जगत के दिग्गज भी इस रिच लिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए हैं। क्रिकेटर विराट कोहली पांचवें स्थान पर बताए गए हैं। उनके बाद सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी का नाम आता है। इससे साफ है कि मनोरंजन जगत के साथ क्रिकेट सितारों की लोकप्रियता और आर्थिक प्रभाव भी काफी बड़ा है।

    शाहरुख खान की फिल्मों की बात करें तो वह आखिरी बार 2023 में रिलीज हुई फिल्म डंकी में नजर आए थे। इसी साल उनकी पठान और जवान जैसी फिल्मों ने भी दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा बटोरी थी। अब उनकी अगली फिल्म किंग को लेकर फैंस में उत्सुकता बनी हुई है। फिल्म में शाहरुख खान के साथ सुहाना खान दीपिका पादुकोण अभिषेक बच्चन और अरशद वारसी जैसे कलाकार नजर आएंगे।

    किंग का निर्देशन सिद्धार्थ आनंद कर रहे हैं और फिल्म को लेकर शाहरुख पहले ही बता चुके हैं कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए खास है। उन्होंने फिल्म के एक्शन स्टोरी और विजुअल्स को लेकर भी फैंस की उत्सुकता बढ़ाई है। फिल्म क्रिसमस के मौके पर दिसंबर में रिलीज होने की बात सामने आई है। ऐसे में एक तरफ जहां अमिताभ बच्चन सोशल मीडिया फॉलोइंग के आंकड़े में मामूली बढ़त के कारण चर्चा में हैं वहीं शाहरुख खान की नजर अब अपनी अगली फिल्म किंग पर टिकी है।

  • नागोया एशियाई खेलों में भारत की बड़ी चुनौती, 17 मेडल के बाद सिर्फ एक गोल्ड, हांगझोउ के प्रदर्शन से कितना बदला समीकरण

    नागोया एशियाई खेलों में भारत की बड़ी चुनौती, 17 मेडल के बाद सिर्फ एक गोल्ड, हांगझोउ के प्रदर्शन से कितना बदला समीकरण


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स 2026 में भारत के खाते में 24 सितंबर तक कुल 17 मेडल आ चुके हैं लेकिन इनमें गोल्ड सिर्फ एक है। भारत ने 7 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज मेडल भी जीते हैं। पदकों की कुल संख्या देखकर प्रदर्शन सामान्य नजर आ सकता है लेकिन मेडल टैली में भारत 14वें स्थान पर है और यही आंकड़ा भारतीय खेल व्यवस्था के सामने कई सवाल खड़े कर रहा है। खास बात यह है कि नागोया एशियन गेम्स की तैयारी के लिए पिछले तीन साल में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग इंटरनेशनल एक्सपोजर उपकरण कोचिंग और विशेषज्ञ सेवाओं पर 702.86 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम यानी TOPS के जरिए 97.84 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इस तरह कुल सरकारी निवेश करीब 800.70 करोड़ रुपये तक पहुंचता है।

    नागोया में भारत का एकमात्र गोल्ड महिला क्रिकेट टीम ने जीता है। भारतीय टीम ने श्रीलंका को 147 रनों से हराकर लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके बाद भारत को सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जरूर मिले लेकिन गोल्ड की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हो सकी। यही आंकड़ा सबसे ज्यादा चर्चा में है क्योंकि इससे पहले हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 106 मेडल जीते थे। इनमें 28 गोल्ड 38 सिल्वर और 40 ब्रॉन्ज शामिल थे। भारत उस प्रदर्शन के साथ चौथे स्थान पर रहा था।

    हांगझोउ के बाद भारतीय खेलों से उम्मीदें भी काफी बढ़ गई हैं। पहली बार 100 से ज्यादा मेडल जीतने के बाद अब एशियन गेम्स में भारत के प्रदर्शन को उसी पैमाने पर देखा जा रहा है। हालांकि नागोया गेम्स अभी खत्म नहीं हुए हैं इसलिए अंतिम मेडल टैली आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। भारत के कई खेलों में अभी मुकाबले बाकी हैं और आने वाले दिनों में मेडल की संख्या बढ़ सकती है।

    इस बार भारत ने 501 खिलाड़ियों का दल उतारा है जिसमें 310 खिलाड़ी पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। टीम के साथ 265 सदस्यीय सपोर्ट स्टाफ भी मौजूद है। तैयारी पर खर्च की बात करें तो इंटरनेशनल एक्सपोजर पर 251.4 करोड़ रुपये घरेलू ट्रेनिंग पर 118.3 करोड़ रुपये उपकरणों पर 89.2 करोड़ रुपये विदेशी विशेषज्ञों पर 86.3 करोड़ रुपये और विदेशी ट्रेनिंग पर 39.8 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि तैयारी का दायरा काफी बड़ा रहा है।

    भारत की चुनौती केवल मेडल की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि अलग अलग खेलों में गोल्ड जीतने की क्षमता बढ़ाना भी महत्वपूर्ण है। हांगझोउ में शूटिंग और एथलेटिक्स ने भारत को बड़ी संख्या में पदक दिलाए थे। एथलेटिक्स से 29 और शूटिंग से 22 पदक आए थे। शूटिंग ने 7 गोल्ड जबकि एथलेटिक्स ने 6 गोल्ड जीते थे। नागोया में शुरुआती चरण में इन खेलों से वैसी गोल्ड बढ़त दिखाई नहीं दी है।

    मेडल टैली में चीन जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश भारत से आगे हैं। हांगझोउ में भी भारत इन देशों के बाद चौथे स्थान पर रहा था। ऐसे में नागोया भारतीय खेलों के लिए सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाने का मंच नहीं है बल्कि अलग अलग खेलों में मजबूत प्रदर्शन की क्षमता परखने का अवसर भी है। एशियन गेम्स का प्रदर्शन लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक की तैयारियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इसलिए नागोया के अंतिम आंकड़े आने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत कुल कितने मेडल जीतता है और उनमें गोल्ड की हिस्सेदारी कितनी रहती है।

  • घर में सुख समृद्धि के लिए रखें इन बातों का ध्यान, मुख्य द्वार से बेडरूम तक ये Vastu Tips आएंगे काम

    घर में सुख समृद्धि के लिए रखें इन बातों का ध्यान, मुख्य द्वार से बेडरूम तक ये Vastu Tips आएंगे काम


    नई दिल्ली। घर को केवल रहने की जगह नहीं बल्कि परिवार की खुशियों और सुकून से जुड़ा स्थान माना जाता है। वास्तु शास्त्र में भी घर के अलग अलग हिस्सों की दिशा और वहां रखी जाने वाली चीजों को लेकर कई मान्यताएं बताई गई हैं। वास्तु के अनुसार घर में सामान का सही स्थान और साफ सफाई का ध्यान रखने से सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है। आधुनिक घरों में हर वास्तु नियम को पूरी तरह अपनाना संभव नहीं होता इसलिए बिना किसी बड़े बदलाव के भी कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखा जा सकता है।

    वास्तु में घर के मुख्य द्वार को खास महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि प्रवेश द्वार घर के वातावरण पर प्रभाव डालने वाला प्रमुख स्थान है। इसलिए इसे साफ सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। दरवाजे के आसपास अनावश्यक सामान जूते चप्पल और कबाड़ जमा करने से बचने की सलाह दी जाती है। प्रवेश स्थान पर पर्याप्त रोशनी होना भी जरूरी माना जाता है। वास्तु परंपरा में उत्तर पूर्व और पूर्व दिशा के प्रवेश द्वार को अनुकूल माना गया है हालांकि किसी घर का प्रवेश द्वार दूसरी दिशा में होने का मतलब यह नहीं है कि वहां जरूरी तौर पर कोई समस्या होगी।

    रसोई को लेकर भी वास्तु में कई नियम बताए गए हैं। दक्षिण पूर्व दिशा को अग्नि तत्व से जुड़ा माना जाता है इसलिए इस दिशा को रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है। उत्तर पश्चिम को भी कुछ परिस्थितियों में विकल्प माना जाता है। रसोई में चूल्हे और सिंक को बिल्कुल साथ रखने से बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि वास्तु में अग्नि और जल को अलग तत्व माना गया है। खाना बनाते समय पूर्व दिशा की ओर मुंह करके खाना बनाना भी कई वास्तु परंपराओं में शुभ माना जाता है। साथ ही रसोई में साफ सफाई और पर्याप्त वेंटिलेशन रखना व्यावहारिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।

    बेडरूम की बात करें तो मास्टर बेडरूम के लिए दक्षिण पश्चिम दिशा को वास्तु में स्थिरता से जोड़ा जाता है। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखने की सलाह भी कई वास्तु परंपराओं में दी जाती है। बेडरूम में अनावश्यक सामान जमा करने से बचना चाहिए और सोने की जगह को शांत तथा व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है। आईने को सीधे बेड के सामने रखने से बचने की सलाह भी कुछ वास्तु गाइड में दी जाती है।

    घर के उत्तर पूर्व हिस्से को भी वास्तु में महत्वपूर्ण माना जाता है। इस हिस्से को हल्का साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। पूजा स्थान को लेकर भी इसी दिशा को कई वास्तु परंपराओं में उपयुक्त माना गया है। घर के बीच के हिस्से में भारी सामान का जमाव कम रखना और आने जाने का रास्ता खुला रखना भी वास्तु आधारित सुझावों में शामिल है।

    वास्तु से जुड़े नियमों को अपनाते समय यह समझना भी जरूरी है कि अलग अलग परंपराओं और विशेषज्ञों की सलाह में अंतर हो सकता है। खासकर फ्लैट या किराए के मकान में घर की दिशा बदलना संभव नहीं होता। ऐसे में सफाई रोशनी हवा का बेहतर आवागमन सामान को व्यवस्थित रखना और रास्तों को खुला रखना जैसे आसान उपाय किए जा सकते हैं। ये बदलाव घर को अधिक आरामदायक और व्यवस्थित बनाने में भी मदद करते हैं। इसलिए वास्तु को लेकर डरने के बजाय इसे पारंपरिक मान्यताओं और बेहतर घरेलू व्यवस्था के संदर्भ में समझना ज्यादा उपयोगी हो सकता है।