Blog

  • सावन व्रत में रोज-रोज साबूदाना खिचड़ी से हो गए हैं बोर? इस बार बनाएं साबूदाने की 5 स्वादिष्ट और आसान रेसिपी

    सावन व्रत में रोज-रोज साबूदाना खिचड़ी से हो गए हैं बोर? इस बार बनाएं साबूदाने की 5 स्वादिष्ट और आसान रेसिपी

    नई दिल्ली । सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही देशभर के शिव भक्त भगवान भोलेनाथ की आराधना के साथ व्रत और पूजा-पाठ में जुट जाते हैं। इस दौरान अधिकतर घरों में व्रत के भोजन के रूप में साबूदाना सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, कई दिनों तक लगातार साबूदाना खिचड़ी खाने से लोग एक जैसा स्वाद महसूस करने लगते हैं। ऐसे में यदि आप व्रत के दौरान अपने भोजन में कुछ नया और स्वादिष्ट शामिल करना चाहते हैं, तो साबूदाने से कई आसान और लाजवाब व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं। ये रेसिपी स्वाद बढ़ाने के साथ व्रत के भोजन में विविधता भी लाती हैं।

    साबूदाना वड़ा व्रत के दौरान सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक माना जाता है। इसे बनाने के लिए भीगे हुए साबूदाने में उबले आलू, भुनी मूंगफली का चूरा, सेंधा नमक और हरी मिर्च मिलाकर छोटे-छोटे वड़े तैयार किए जाते हैं। इन्हें हल्का तलकर या कम तेल में सेंककर दही अथवा व्रत वाली चटनी के साथ परोसा जा सकता है। यह बाहर से कुरकुरा और अंदर से मुलायम होता है।

    अगर व्रत में मीठा खाने की इच्छा हो तो साबूदाना खीर एक बेहतरीन विकल्प है। दूध में साबूदाना अच्छी तरह पकाकर उसमें चीनी या स्वादानुसार मिठास, इलायची और कटे हुए मेवे मिलाए जाते हैं। यह रेसिपी स्वादिष्ट होने के साथ ऊर्जा भी प्रदान करती है और परिवार के सभी सदस्यों को पसंद आती है।

    कुरकुरे स्नैक पसंद करने वालों के लिए साबूदाना पापड़ भी अच्छा विकल्प है। इसे पहले से तैयार करके सुरक्षित रखा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर इसे हल्का सेंककर या तलकर तुरंत परोसा जा सकता है। यह चाय या व्रत के हल्के नाश्ते के साथ भी अच्छा लगता है।

    साबूदाना थालीपीठ भी व्रत के भोजन में स्वाद बढ़ाने वाला व्यंजन है। इसमें साबूदाने के साथ उबले आलू, मूंगफली और सेंधा नमक मिलाकर आटे जैसा मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद इसे तवे पर हल्के तेल या घी के साथ दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंका जाता है। दही के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है।

    हल्का और जल्दी बनने वाला विकल्प चाहने वालों के लिए साबूदाना चिवड़ा भी अच्छा चुनाव हो सकता है। इसमें साबूदाने को भूनकर मूंगफली और सेंधा नमक मिलाया जाता है। यह कम समय में तैयार हो जाता है और हल्की भूख मिटाने के लिए उपयुक्त माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार साबूदाने में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इसका संतुलित मात्रा में सेवन करना चाहिए। व्रत के दौरान केवल साबूदाने पर निर्भर रहने के बजाय फल, दूध, दही और मेवों को भी भोजन में शामिल करना बेहतर माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति को मधुमेह या अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो व्रत का भोजन तय करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित रहेगा। सही संतुलन और विविधता के साथ तैयार किए गए ये व्यंजन सावन के व्रत को स्वादिष्ट, पौष्टिक और यादगार बना सकते हैं।

  • Aaj Ka Rashifal 30 July 2026: सावन के पहले दिन बने आयुष्मान और गजकेसरी योग, जानें किस राशि की चमकेगी किस्मत

    Aaj Ka Rashifal 30 July 2026: सावन के पहले दिन बने आयुष्मान और गजकेसरी योग, जानें किस राशि की चमकेगी किस्मत


    नई दिल्ली । 30 जुलाई 2026 का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास रहने वाला है। इस दिन से भगवान शिव को समर्पित पवित्र सावन मास की शुरुआत हो रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार श्रावण कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा और द्वितीया तिथि का संयोग रहेगा। चंद्रमा पूरे दिन मकर राशि में गोचर करेंगे। साथ ही आयुष्मान योग, गजकेसरी योग, वाशि योग, सुनफा योग और आनंदादि योग जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं। इन योगों का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलेगा। कई जातकों को करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों में सफलता मिलेगी, जबकि कुछ लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    मेष राशि के लिए नौकरी और करियर में उन्नति के योग बन रहे हैं। व्यापार विस्तार की योजनाएं सफल हो सकती हैं। कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है। यात्रा लाभदायक रहेगी और वैवाहिक जीवन में मधुरता बढ़ेगी।

    वृषभ राशि वालों के लिए भाग्य का साथ मिलेगा। पारिवारिक व्यापार में नए अवसर प्राप्त होंगे। समाज में सम्मान बढ़ेगा और लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे हो सकते हैं। हालांकि कार्यस्थल पर किसी पर आंख बंद करके भरोसा करने से बचें।

    मिथुन राशि के लिए दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। व्यापार में उतार-चढ़ाव रहेगा और निवेश सोच-समझकर करना होगा। सरकारी कार्यों में विशेष सतर्कता रखें तथा पारिवारिक मामलों में धैर्य बनाए रखें।

    कर्क राशि वालों के लिए यह दिन बेहद शुभ रहने वाला है। व्यापार में नए ऑर्डर मिलने की संभावना है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और पुराने कर्ज से राहत मिल सकती है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या नई जिम्मेदारी मिल सकती है।

    सिंह राशि के लिए आय में वृद्धि और करियर में सकारात्मक बदलाव के संकेत हैं। सरकारी मामलों में राहत मिल सकती है। बैंक लोन से जुड़े कार्य पूरे होंगे और व्यापार में लाभ के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे।

    कन्या राशि वालों को नई योजनाओं में सफलता मिलेगी। व्यापार में नई तकनीक अपनाने से लाभ होगा। नौकरी में आत्मविश्वास के साथ किए गए कार्य सफल रहेंगे, हालांकि स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना होगा।

    तुला राशि के जातकों को संपत्ति और पारिवारिक मामलों में विवाद से बचने की सलाह है। व्यापार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। कार्यस्थल पर दस्तावेजों और महत्वपूर्ण निर्णयों में सावधानी बरतें।

    वृश्चिक राशि वालों के लिए रुका हुआ धन वापस मिलने की संभावना है। व्यापारिक बैठकों में सफलता मिलेगी और नौकरी बदलने की इच्छा रखने वालों को नए अवसर मिल सकते हैं।

    धनु राशि के लिए आर्थिक दृष्टि से दिन बेहद लाभकारी रहेगा। व्यापार में बड़ा लाभ मिलने के योग हैं। पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों का समाधान निकल सकता है। परिवार का सहयोग भी मिलेगा।

    मकर राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। नए व्यापारिक अवसर प्राप्त होंगे और लाभ में वृद्धि होगी। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी तथा नौकरी में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा।

    कुंभ राशि के जातकों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है। कार्यस्थल पर वाणी पर संयम रखें। अनावश्यक विवाद और आर्थिक जोखिम से बचना बेहतर रहेगा।

    मीन राशि वालों के लिए आय बढ़ाने के प्रयास सफल होंगे। नौकरी बदलने की योजना सफल हो सकती है। व्यापारिक यात्राएं लाभदायक रहेंगी और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

    30 जुलाई 2026 का शुभ मुहूर्त
    शुभ चौघड़िया (प्रातः): सुबह 7:00 बजे से 8:00 बजे तक
    शुभ चौघड़िया (सायं): शाम 5:00 बजे से 6:00 बजे तक
    राहुकाल: दोपहर 1:30 बजे से 3:00 बजे तक
    यात्रा के लिए शुभ दिशा: दक्षिण

    सावन के पहले दिन भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और दान-पुण्य करना विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

  • मप्र सरकार के 60 फीसदी उपज खरीदने के फैसले के बाद किसानों का आंदोलन खत्म

    मप्र सरकार के 60 फीसदी उपज खरीदने के फैसले के बाद किसानों का आंदोलन खत्म


    – मप्र सरकार प्रत्येक पात्र किसान से करेगी मूंग का 60 प्रतिशत उपार्जन, स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाई

    भोपाल। मध्य प्रदेश में चल रहे किसान आंदोलन के बीच राज्य सरकार ने प्रत्येक पात्र किसान से 60 फीसदी तक मूंग खरीदी करने का ऐलान किया है। नर्मदापुरम, सीहोर और हरदा जैसे जिलों में लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ खरीदी की जाएगी। साथ ही स्लॉट बुकिंग की अवधि 10 अगस्त तक बढ़ा दी है और मूंग खरीदी की अंतिम तारीख 20 अगस्त कर दी गई है।

    बुधवार की रात सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच मंत्रालय में हुई बैठक के बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया है। सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच सहमति बनने के बाद किसान अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो गए। प्रशासन ने बसों के जरिए किसानों को उनके वाहनों तक पहुंचाया। देर रात तक आंदोलन पूरी तरह समाप्त हो गया।

    एडिशनल सीपी शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि किसानों ने सहमति जता दी है। इसके बाद प्रशासन ने रोशनपुरा चौराहे से किसानों को बसों के जरिए उनकी गाड़ियों तक पहुंचाकर रवाना किया। बाद में रोशनपुरा चौराहा लगभग खाली हो गया। बाणगंगा की ओर जाने वाले मार्ग को छोड़कर बाकी रास्ते यातायात के लिए खोल दिए गए।

    कृषि मंत्री एंदल सिंह कंषाना ने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर बुधवार को किसानों के साथ चर्चा के लिए गठित मंत्री समूह की किसान प्रतिनिधियों के साथ चर्चा हुई। किसानों के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है कि अब प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 25 प्रतिशत नहीं, बल्कि 60 प्रतिशत उपार्जन किया जाएगा, जो नर्मदापुरम, सीहोर एवं हरदा जैसे जिलों में लगभग 3 क्विंटल प्रति एकड़ आता है। यह निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू किया जाएगा और प्रयास रहेगा कि अधिक से अधिक किसानों को इसका लाभ मिले।

    उन्होंने बताया कि किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अवधि भी 10 दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब किसान 30 जुलाई के स्थान पर 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग कर सकेंगे। इसी प्रकार उपार्जन की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त की जा रही है।

    कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित में कार्य करती आई है। अन्नदाता प्रदेश की अर्थव्यवस्था और समृद्धि का आधार हैं और उनके परिश्रम से उत्पादित उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है ।

    उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा इस वर्ष ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन के लिए मध्य प्रदेश को 4.52 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। भारत सरकार की योजना के अंतर्गत राज्य के कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत उपार्जन किए जाने का प्रावधान है। भारत सरकार के इसी नियम के अंतर्गत निर्णय लिया गया था कि प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर उपार्जित किया जाएगा।

    उन्होने किसान भाइयों-बहनों को आश्वस्त किया कि मध्य प्रदेश सरकार सदैव किसानों के हित में खड़ी है। जहाँ तक खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था से संबंधित शिकायतों और व्यावहारिक समस्याओं का प्रश्न है, यह व्यवस्था राज्य शासन का एक महत्वपूर्ण सुधार है और आने वाले समय में इससे किसानों को काफी सुविधा एवं लाभ मिलेगा।

    ई-टोकन व्यवस्था में सुधार के लिये समिति गठित होगी

    कृषि मंत्री ने बताया कि चूँकि यह एक नई व्यवस्था है, इसलिए प्रारंभिक स्तर पर सामने आ रही समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया है। यह समिति ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी सभी समस्याओं का परीक्षण कर राज्य सरकार को अपनी अनुशंसाएँ प्रस्तुत करेगी। समिति की अनुशंसाओं के आधार पर आवश्यक सुधार तत्काल किए जाएंगे। सुझाव प्राप्त होकर सुधार होने तक ई-टोकन से खाद वितरण की व्यवस्था तत्काल प्रभाव से स्थगित की जा रही है।

  • अद्वितीय है महर्षि सांदीपनि आश्रम, भगवान श्रीकृष्ण ने 5100 वर्ष पूर्व इसी पावन स्थल पर ग्रहण की थी विद्या

    अद्वितीय है महर्षि सांदीपनि आश्रम, भगवान श्रीकृष्ण ने 5100 वर्ष पूर्व इसी पावन स्थल पर ग्रहण की थी विद्या


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम अत्यंत गौरवशाली और अद्वितीय है। लगभग 5100 वर्ष पूर्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इसी पावन स्थल पर महर्षि सांदीपनि से विद्या ग्रहण की थी। भगवान श्रीकृष्ण से शिक्षा प्राप्त कर जगद्गुरु की उपाधि से विभूषित हुए।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम उज्जैन स्थित ऐतिहासिक महर्षि सांदीपनि आश्रम में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर उज्जैन के प्रमुख देवस्थानों के विकास कार्यों का शुभारंभ हो रहा है, जिसमें शहर को गीता भवन की बड़ी सौगात भी मिल रही है। उन्होंने कहा कि आज गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर हम सभी गुरुओं का सम्मान कर अपने जीवन को धन्य करें।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर उज्जैन स्थित ऐतिहासिक महर्षि सांदीपनि आश्रम पहुंचे और यहां पूजन-अर्चन और आरती की। पूजा-अर्चना पं. कीर्ति रूपम व्यास एवं राहुल व्यास के द्वारा संपन्न कराई गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने अपनी स्वरचित पुस्तक ‘महर्षि सांदीपनि: भारतीय गुरुकुल परंपरा के शिल्पी’ की प्रति महर्षि सांदीपनि की प्रतिमा के समक्ष अर्पित की।

    मुख्यमंत्री ने आश्रम परिसर में स्थित अति प्राचीन श्री कुंडेश्वर महादेव और श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर में भी दर्शन-पूजन किया। आश्रम के मुख्य पुजारी परिवार द्वारा मुख्यमंत्री का अंगवस्त्रम् ओढ़ाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत-सम्मान किया गया।

    आश्रम में हुआ पंचामृत अभिषेक और स्लेट पूजन

    महर्षि सांदीपनि व्यास के वंशज एवं मंदिर के मुख्य पुजारी पं. कीर्ति रुपम व्यास ने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर आश्रम में प्रतिवर्षानुसार विशेष अनुष्ठान आयोजित किए गए। प्रात:काल भगवान श्रीकृष्ण, भगवान श्री बलराम और गुरु सांदीपनि का पंचामृत अभिषेक एवं विशेष पूजन किया गया। परंपरा अनुसार, प्रथम बार शिक्षा प्रारंभ करने वाले छोटे बच्चों द्वारा ‘स्लेट पूजन’ का आयोजन भी हुआ।

    गुरु गादी परिसर को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा

    गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन स्थित वृंदावन पूरा में संत शिरोमणि रविदास महाराज की चरण पादुका और गुरु गादी स्थल पहुंचकर श्रद्धापूर्वक नमन किया एवं श्रद्धापूर्वक चादर चढ़ाई। राज्य के सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्थल के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि संत रविदास जी महाराज के इस चरण पादुका एवं गुरु गादी परिसर को भव्य और दिव्य स्वरूप प्रदान किया जाएगा, जिसके लिए जल्द ही आवश्यक विकास कार्य शुरू किए जाएंगे। उन्होंने कहा शिरोमणि रविदास महाराज के आदर्श, उपदेश और विचार आज भी समाज में समानता, सद्भाव और मानवता की भावना का संचार करते हैं। उनका जीवन पूरी मानव जाति के लिए एक मार्गदर्शक है।

    इस गरिमामय आयोजन में जन प्रतिनिधियों और रविदास समाज के प्रमुख लोगों की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। कार्यक्रम में नगर अध्यक्ष संजय अग्रवाल, महापौर मुकेश टटवाल, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी और उपाध्यक्ष मुकेश यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री सत्यनारायण जटिया सहित रविदास समाज के संभागीय अध्यक्ष मनोहर सुरेश कुसुमारिया, विजेंद्र चौहान, कमल हनोतिया, कमलकांत राजोरिया, विक्रम परमार, रितेश जटिया, अंबाराम चौहान, प्रशासनिक अधिकारी एवं भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

  • इंडिया मोबाइल कांग्रेस की थीम स्केल विदाउट बाउंड्रीज का अनावरण, 7 से 10 अक्टूबर तक होगा आयोजन

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस की थीम स्केल विदाउट बाउंड्रीज का अनावरण, 7 से 10 अक्टूबर तक होगा आयोजन


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) के 10वें संस्करण की आधिकारिक थीम ‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज़’ का अनावरण किया। उन्होंने कहा कि यह थीम भारत की डिजिटल क्षमताओं, नवाचार और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व को नई दिशा देने का प्रतीक है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 का आयोजन 7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में होगा।

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण में 100 से अधिक देशों के प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इसमें 1.5 लाख से अधिक आगंतुक, 300 से अधिक प्रदर्शक और साझेदार तथा 1,500 से अधिक प्रौद्योगिकी आधारित उपयोग प्रस्तुत किए जाएंगे। आयोजन का उद्देश्य नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, स्टार्टअप, निवेशकों, शिक्षाविदों और वैश्विक प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है।

    ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि जब प्रौद्योगिकी प्रत्येक नागरिक तक पहुंचती है तो अवसर पैदा होते हैं और जब अवसर प्रत्येक नागरिक तक पहुंचते हैं तो परिवर्तन अनिवार्य हो जाता है। आज देश में 133 करोड़ लोगों के हाथों में मोबाइल फोन हैं और डेटा की कीमत 287 रुपये प्रति जीबी से घटकर लगभग आठ रुपये प्रति जीबी रह गई है, जो तकनीक के लोकतंत्रीकरण का उदाहरण है।

    उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत में विकसित प्रौद्योगिकी, नवाचार और समाधान विश्व की सीमाओं को पार करें। भारत अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक मानकों, डिजिटल समाधान और नई प्रौद्योगिकियों को दिशा देने वाला देश बन रहा है। उन्होंने कहा कि ‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज़’ इसी सोच को दर्शाती है।

    सिंधिया ने कहा कि भारत 6जी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी वैश्विक नेतृत्व की तैयारी कर रहा है। भारत 6जी गठबंधन और वैश्विक मानकों के विकास में देश की सक्रिय भूमिका भविष्य की डिजिटल व्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण होगी। उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और ग्वालियर में स्थापित देश के पहले दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार और उद्योग मिलकर काम कर रहे हैं।

    संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत के दूरसंचार क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है। आज देश के प्रत्येक जिले तक 5जी सेवा पहुंच चुकी है और मोबाइल सेवाएं देश के लगभग प्रत्येक नागरिक तक उपलब्ध हैं। भारत ने स्वदेशी 4जी तकनीक भी विकसित की है और अब सरकार का लक्ष्य देश के प्रत्येक गांव तक उच्च गति ब्रॉडबैंड पहुंचाना है।

    उन्होंने कहा कि भारतनेट परियोजना, 5जी फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए), 6जी, क्वांटम संचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उपग्रह संचार जैसी प्रौद्योगिकियों के माध्यम से देश को डिजिटल इंडिया से इंटेलिजेंट इंडिया की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

    दूरसंचार विभाग के सचिव एवं डिजिटल संचार आयोग के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा कि इंडिया मोबाइल कांग्रेस आज भारत का प्रमुख डिजिटल मंच बन चुका है। इसमें प्रौद्योगिकी आधारित नवाचारों और वैश्विक भागीदारी में लगातार वृद्धि हुई है। इस वर्ष की थीम भारत की बढ़ती डिजिटल क्षमता और वैश्विक योगदान को प्रतिबिंबित करती है।

    सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के अध्यक्ष राहुल वत्स ने कहा कि वर्ष 2017 में इंडिया मोबाइल कांग्रेस की शुरुआत 32 हजार आगंतुकों और 100 प्रदर्शकों के साथ हुई थी। आज यह केवल उद्योग का आयोजन नहीं, बल्कि भारत का प्रमुख प्रौद्योगिकी मंच बन चुका है, जहां नीति, उद्योग और नवाचार का संगम होता है। उन्होंने कहा कि पहले भारत दुनिया से सीखने आता था, लेकिन अब दुनिया भारत के नवाचारों को देखने आती है।

    इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में 5जी और 6जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, क्वांटम कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा, उपग्रह संचार, डीपटेक, क्लीनटेक, इंडस्ट्री 4.0, एंटरप्राइज ट्रांसफॉर्मेशन, स्मार्ट मोबिलिटी, औद्योगिक स्वचालन और परिवहन प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में नवीनतम तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा।

    आयोजन को चार प्रमुख स्तंभ सृष्टि (भविष्य का निर्माण), संवर्धन (विकास को गति), सशक्त (अवसरों का विस्तार) और सुरक्षा (विश्वास को सुदृढ़ करना) के आधार पर तैयार किया गया है। इन स्तंभों के माध्यम से सुरक्षित, समावेशी और टिकाऊ डिजिटल नवाचारों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

    स्टार्टअप कार्यक्रम ‘एस्पायर’ के तहत 400 से अधिक स्टार्टअप, 300 से अधिक निवेशक, इनक्यूबेटर, एक्सेलेरेटर और वेंचर कैपिटल संस्थाएं भाग लेंगी। कार्यक्रम के दौरान 700 से अधिक निवेशक-स्टार्टअप बैठकें, मेंटरशिप सत्र, लाइव पिचिंग, नेटवर्किंग और रणनीतिक साझेदारी के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

    थीम के औपचारिक अनावरण से पहले इंडिया मोबाइल कांग्रेस ने सत्वा कंसल्टिंग के सहयोग से दूरसंचार एवं संबंधित क्षेत्रों के कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) और स्थिरता विशेषज्ञों की गोलमेज बैठक का भी आयोजन किया, जिसमें समावेशी विकास और डिजिटल परिवर्तन को गति देने में सीएसआर की भूमिका पर चर्चा की गई।

  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तब लागू होगा जब भारत को तुलनात्मक लाभ मिलेगा: गोयल

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तब लागू होगा जब भारत को तुलनात्मक लाभ मिलेगा: गोयल


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण तभी लागू होगा, जब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में लाभ मिले।

    पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने भरोसा जताया कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण तब लागू हो जाएगा, जब अमेरिका भारतीय निर्यात को पड़ोसी देशों और आसियान देशों के मुकाबले टैरिफ के मामले में बेहतर स्थिति देगा।

    संवाददाताओं से बात करते हुए गोयल ने कहा कि भारत ने बीटीए के शुरुआती चरण पर बातचीत पूरी कर ली है और अब अमेरिका की तरफ से ज़रूरी कदमों का इंतज़ार कर रहा है। उन्होंने कहा कि यही इस समझौते के पहले चरण का मूल आधार है और जैसे ही यह आधार फिर से स्थापित होगा, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता लागू करने के लिए तैयार होगा। अमेरिका ने उस जांच के तहत भारत पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाया है।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की कानूनी समीक्षा अंतिम चरण में है। गोयल ने कहा, ‘‘जब तक भारत को प्रतिस्पर्धी बढ़त या कम से कम प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर शुल्क दरें मिलती रहेंगी, तबतक भारत, अमेरिका को अपना निर्यात बढ़ाता रहेगा और वहां उपलब्ध विशाल बाजार के अवसरों का लाभ भी उठाता रहेगा।’

    उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान में इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा की थी।

  • गुरूकुल परम्परा और नवीन तकनीक से गढ़ेंगे भविष्य का मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

    गुरूकुल परम्परा और नवीन तकनीक से गढ़ेंगे भविष्य का मध्य प्रदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति इसकी गुरू परम्परा है। जब गुरूकुल के संस्कार आधुनिक विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अतिरिक्त क्षमता से जुड़ेंगे, तब हमारी ऐसी पीढ़ी तैयार होगी, जो ज्ञान में श्रेष्ठ, चरित्र में उत्कृष्ट और राष्ट्र निर्माण के प्रति एकनिष्ठ होगी। यही विकसित मध्य प्रदेश और विकसित भारत की सबसे बड़ी नींव है। विकसित भारत का सपना आधुनिक शिक्षा और अत्याधुनिक कक्षाओं से ही पूरा होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार देर शाम ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ के अवसर पर उज्जैन के माधव विज्ञान महाविद्यालय में आयोजित ‘महर्षि सांदीपनि गुरू पर्व’ समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय हमारी पुरातन गुरूकुल शिक्षा पद्धति का नूतन एवं आधुनिक स्वरूप है। इन विद्यालयों के माध्यम से एक बेहतर कल की ओर बढ़ रहे हैं। इन विद्यालयों से हम अपने लाखों विद्यार्थियों का एक सुनहरा भविष्य गढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षा, संस्कार, तकनीक और सांस्कृति चेतना के अद्भुत समन्वय का संदेश देकर कहा कि मध्यप्रदेश में विकसित हो रहे सांदीपनि विद्यालय भविष्य के भारत के निर्माण की आधारशिला सिद्ध होंगे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस मौके पर उज्जैन जिले के लिए कुल 587.23 करोड़ रुपये की लागत के विभिन्न श्रेणी के 9 बड़े विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया। उन्होंने बीते तीन वर्ष तक बोर्ड परीक्षाओं में लगातार शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम देने वाले 6 प्राचार्यों को सांदीपनि अलंकरण से सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा विभाग में नव नियुक्त 7500 प्राथमिक शाला शिक्षकों में से 10 शिक्षकों को प्रतीकात्मक रूप से नियुक्ति पत्र प्रदान किए।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर केंद्रित ‘मिशन बुनियाद’ का शुभारंभ किया। यह मिशन प्रदेश के 8 जिलों के 500 शासकीय स्कूलों में चलाया जाएगा। इसमें कक्षा में 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को एआई से पर्सनली पढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘सर्वांग’ एवं ‘श्रीकृष्ण विद्यांजलि’ नामक दो पुस्तिकाओं का विमोचन किया। उन्होंने नेशनल मीन्स कम मेरिट में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का भी सम्मान किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में भव्य गीता भवन बनाने का संकल्प लिया है। आज उज्जैन में गीता भवन का लोकार्पण नागरिकों के लिए कई प्रकार से सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। यह शिक्षा विभाग का गीता भवन है। नगर निगम और उज्जैन विकास प्राधिकरण के भी अलग-अलग गीता भवन बनाए जाएंगे। सिंहस्थ: 2028 की तैयारियों के साथ ही इंदौर-उज्जैन मेट्रोपोलिटन सिटी के विकास कार्य भी निरंतर जारी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में नई भर्तियों की शुरुआत की है। विगत दो साल में पुलिस विभाग में 18 हजार से अधिक पदों पर भर्ती करने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग में 10 हजार शिक्षकों की भर्ती का काम पूरा हुआ है। आज 3 संभागों के लगभग 1000 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिले हैं। उन्होंने कहा कि ये शिक्षक महर्षि सांदीपनि के वंशज के रूप में जाने जाएंगे। शिक्षक भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की मित्रता के भाव से बच्चों को शिक्षित करेंगे।

    उन्होंने कहा कि आज शासकीय विद्यालयों के ऐसे प्राचार्यों को, जिन्होंने 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में तीन साल तक शत-प्रतिशत परीक्षा परिणाम दिया है, उन्हें सम्मानित किया गया है। प्रदेश के ऐसे सभी स्कूलों के प्राचार्यों को एक लाख रुपये की सम्मान राशि और प्राध्यापकों के साथ स्कूल में विकास कार्यों के लिए 5 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इससे स्कूल शिक्षा में और बेहतरी का एक सकारात्मक संदेश जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जबलपुर में एकमात्र मेडिकल यूनिवर्सिटी है। दूसरी की महती आवश्यकता महसूस हो रही है। इसलिए अब उज्जैन में ही नवीन धनवन्तरी चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। प्रदेश सरकार स्कूल से लेकर विदेशों में पढ़ाई तक हर स्तर पर सहायता करने के लिए तैयार है। मध्य प्रदेश, पूरे देश का इकलौता राज्य है, जो 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को डॉक्टर बनाने के लिए उनकी फीस के रूप में 70 से 80 लाख रुपये तक खर्च कर रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने बच्चों की पढ़ाई के लिए एआई आधारित मिशन बुनियाद अंतर्गत नई शिक्षा योजना की शुरुआत कर दी है। यह प्रदेश की शिक्षा पद्धति में एक नये युग के आरंभ जैसा है।

    उन्होंने कहा कि ‘गुरु पूर्णिमा महोत्सव’ के अवसर पर प्रदेशभर में 60 नए सांदीपनि विद्यालयों की सौगात मिली है। इनमें 39 स्कूल शिक्षा विभाग और 21 जनजातीय कार्य विभाग के हैं। हमारे सर्वसुविधायुक्त सांदीपनि विद्यालय भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का स्मरण कराते हैं। पहले और दूसरे चरण में सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण पर हमारी सरकार करीब 25 हजार 500 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्यों के लिए हमारे पास धन की कोई कमी नहीं है। अब निजी स्कूलों के विद्यार्थी भी बड़े पैमाने पर हमारे सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश ले रहे हैं, लेकिन पहले सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक पढ़ चुके विद्यार्थियों को मौका दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अवन्तिका नगरी (उज्जैन) दुनिया की 7 पवित्र नगरियों में से एक है, जहां बाबा महाकाल विराजे हैं। जन्म-मृत्यु सब बाबा महाकाल के हाथों में है। उज्जैन ज्ञान-विज्ञान और इतिहास की धरती है।

    उन्होंने गुरू की महत्ता बताते हुए कहा कि माता-पिता प्रथम गुरू होते है। जीवन में माता-पिता से हम कभी भी ऊऋण नहीं हो सकते हैं। गुरु की महिमा ऐसी है कि उसे भगवान से भी श्रेष्ठ माना गया है। लेकिन सांदीपनि गुरु ने अपने परम शिष्य (भगवान श्रीकृष्ण) को जगतगुरू के रूप में देखा। उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में ही भगवान श्रीकृष्ण को पुस्तकीय ज्ञान से कहीं अधिक यथार्थ कर्मवाद की शिक्षा मिली।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा ज्ञान कदम-कदम पर अपनी परीक्षा मांगता है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से सदैव मनुष्यों को आगे बढ़ने और हिम्मत से काम करने की प्रेरणा देता है। पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवत्गीता के 18वें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने मानव जीवन के रहस्य, प्रकृति प्रेम और योग के महत्व का विस्तार से वर्णन किया है।

  • MP सरकार का बड़ा फैसला: किसानों से 60% मूंग खरीदेगी सरकार, खाद की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित

    MP सरकार का बड़ा फैसला: किसानों से 60% मूंग खरीदेगी सरकार, खाद की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों के हित में ग्रीष्मकालीन मूंग उपार्जन और खाद वितरण व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। किसान प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाने वाली मूंग की मात्रा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। साथ ही, किसानों की सुविधा के लिए स्लॉट बुकिंग और उपार्जन की समय-सीमा भी बढ़ा दी गई है। वहीं, खाद वितरण के लिए लागू की गई ई-टोकन व्यवस्था को फिलहाल स्थगित कर उसकी समीक्षा कराने का फैसला लिया गया है।

    कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने बैठक के बाद बताया कि भारत सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत कुल उत्पादन का अधिकतम 25 प्रतिशत उपार्जन किए जाने का प्रावधान है। इसी के अनुरूप पहले प्रत्येक पात्र किसान से उसकी उपज का 25 प्रतिशत खरीदने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, किसानों की मांग और व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रत्येक पात्र किसान से उसकी मूंग उपज का 60 प्रतिशत तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का निर्णय लिया है।

    उन्होंने बताया कि नर्मदापुरम, हरदा और सीहोर जैसे प्रमुख मूंग उत्पादक जिलों में यह औसतन लगभग तीन क्विंटल प्रति एकड़ के बराबर उपार्जन होगा।

    सरकार ने उपार्जन प्रक्रिया में अधिक से अधिक किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त कर दी है। इसी प्रकार, मूंग खरीदी की अंतिम तिथि भी 10 अगस्त के बजाय अब 20 अगस्त निर्धारित की गई है।

    बैठक में किसानों ने खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं भी उठाईं। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है। समिति ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा कर सरकार को अपनी अनुशंसाएं देगी, जिनके आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएंगे।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति की रिपोर्ट आने तक खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था स्थगित रहेगी और किसानों को पूर्व की व्यवस्था के अनुसार खाद उपलब्ध कराया जाएगा।

    बैठक में सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री कृष्णा गौर सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं किसान प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

    प्रमुख निर्णय

    • प्रत्येक पात्र किसान से मूंग उपज का 25 प्रतिशत के स्थान पर 60 प्रतिशत तक उपार्जन।
    • निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू।
    • स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 30 जुलाई से बढ़ाकर 10 अगस्त।
    • मूंग उपार्जन की अंतिम तिथि 10 अगस्त से बढ़ाकर 20 अगस्त।
    • खाद वितरण की ई-टोकन व्यवस्था फिलहाल स्थगित।
    • कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय समिति करेगी ई-टोकन प्रणाली की समीक्षा।
    • समिति की अनुशंसा मिलने तक खाद का वितरण पुरानी व्यवस्था के अनुसार जारी रहेगा।

  • झरने वाले सीन से मिली पहचान, लेकिन इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है मंदाकिनी की जिंदगी और फिल्मी सफर

    झरने वाले सीन से मिली पहचान, लेकिन इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प है मंदाकिनी की जिंदगी और फिल्मी सफर

    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री मंदाकिनी का नाम आज भी 1985 में रिलीज हुई फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के साथ सबसे पहले जुड़ता है। अपनी पहली बड़ी फिल्म से ही उन्होंने दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई और रातोंरात स्टार बन गईं। हालांकि, उनकी पहचान अक्सर फिल्म के चर्चित झरने वाले दृश्य तक सीमित कर दी जाती है, जबकि उनकी निजी जिंदगी और फिल्मी सफर कई दिलचस्प घटनाओं से भरा रहा है। 30 जुलाई को जन्मदिन के मौके पर उनके जीवन के कई ऐसे पहलू याद किए जाते हैं, जिन्होंने उन्हें बॉलीवुड की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल किया।

    मंदाकिनी का जन्म 30 जुलाई 1963 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में यास्मीन जोसेफ के रूप में हुआ था। उनके पिता ब्रिटिश मूल के थे, जबकि उनकी मां मुस्लिम परिवार से थीं। फिल्मों में आने से पहले उनका नाम यास्मीन ही था। शुरुआती दौर में उन्हें एक फिल्म के लिए ‘माधुरी’ नाम से भी साइन किए जाने की चर्चा रही, लेकिन इसी बीच उनकी मुलाकात फिल्मकार राज कपूर से हुई। राज कपूर ने उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उनका नाम बदलकर ‘मंदाकिनी’ रख दिया, जो आगे चलकर उनकी स्थायी पहचान बन गया।

    राज कपूर ने अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ में मंदाकिनी को मुख्य भूमिका दी। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता साबित हुई और मंदाकिनी रातोंरात लोकप्रिय हो गईं। फिल्म के कुछ दृश्य उस समय काफी चर्चा में रहे और इन्हीं के कारण वह लंबे समय तक सुर्खियों में बनी रहीं। हालांकि, उनके अभिनय, स्क्रीन प्रेजेंस और सहज अभिव्यक्ति की भी खूब सराहना हुई। इस फिल्म के बाद उन्हें हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में गिना जाने लगा।

    इसके बाद मंदाकिनी ने मिथुन चक्रवर्ती, संजय दत्त, गोविंदा, आदित्य पंचोली और अन्य कई बड़े सितारों के साथ फिल्मों में काम किया। ‘जीते हैं शान से’ का लोकप्रिय गीत ‘जूली जूली जॉनी का दिल तुमपे आया जूली’ आज भी उनके यादगार गीतों में गिना जाता है। 1980 और 1990 के दशक में उन्होंने कई फिल्मों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई और दर्शकों के बीच अलग पहचान बनाई।

    अपने करियर के दौरान मंदाकिनी को कई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि कई बार फिल्मों के लिए चयन होने के बावजूद उन्हें अंतिम समय में बदल दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उस दौर में फिल्म उद्योग का माहौल महिलाओं के लिए आसान नहीं था और कई अवसर उनके हाथ से निकल गए। कुछ फिल्मों में उन्हें साइन किए जाने की चर्चाएं भी रहीं, लेकिन वे परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं।

    1996 में रिलीज हुई फिल्म ‘जोरदार’ के बाद मंदाकिनी ने फिल्मों से लगभग दूरी बना ली। बाद में उन्होंने पूर्व बौद्ध भिक्षु डॉ. कग्युर टी. रिनपोछे ठाकुर से विवाह किया और पारिवारिक जीवन को प्राथमिकता दी। लंबे समय तक लाइमलाइट से दूर रहने के बावजूद आज भी मंदाकिनी का नाम हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में लिया जाता है, जिन्होंने कम समय में अपनी अलग पहचान बनाई और दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई।

  • 1 अगस्त से चीनी कारोबार पर सख्ती, जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने तय की नई स्टॉक सीमा

    1 अगस्त से चीनी कारोबार पर सख्ती, जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने तय की नई स्टॉक सीमा

    नई दिल्ली । देशभर में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने 1 अगस्त 2026 से 30 नवंबर 2026 तक चीनी के थोक और खुदरा कारोबारियों के लिए स्टॉक सीमा लागू करने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य जमाखोरी और सट्टेबाजी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाना है, ताकि त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर पर्याप्त मात्रा में चीनी उपलब्ध हो सके।

    नए नियम के अनुसार थोक व्यापारी, खुदरा विक्रेता और बड़े रिटेल स्टोर अधिकतम 4,000 क्विंटल तक ही चीनी का स्टॉक अपने पास रख सकेंगे। इसके साथ ही कारोबारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मिलों से खरीदी गई चीनी को 30 दिनों के भीतर बाजार में बेच दिया जाए। निर्धारित अवधि से अधिक समय तक स्टॉक रोककर रखने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का मानना है कि इससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

    सरकार ने कारोबारियों के लिए पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से साप्ताहिक स्टॉक विवरण देना भी अनिवार्य किया है। सभी संबंधित व्यापारियों को प्रत्येक सप्ताह सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध चीनी के स्टॉक की जानकारी दर्ज करनी होगी। इससे प्रशासन को बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखने और आवश्यक होने पर त्वरित कार्रवाई करने में सुविधा मिलेगी।

    यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब त्योहारों के मौसम में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मांग बढ़ने के बावजूद बाजार में कृत्रिम संकट उत्पन्न न हो और उपभोक्ताओं को आवश्यक वस्तु उचित मूल्य पर मिलती रहे। साथ ही, चीनी की आपूर्ति श्रृंखला भी सुचारु रूप से संचालित होती रहे।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत लागू किया जाएगा। यदि कोई व्यापारी निर्धारित स्टॉक सीमा या समयसीमा का उल्लंघन करता पाया जाता है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। खाद्य विभाग के अधिकारी जांच के दौरान गोदामों का निरीक्षण कर सकेंगे और नियमों के विरुद्ध पाए गए पुराने स्टॉक को जब्त भी किया जा सकता है।

    नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ व्यापारिक लाइसेंस रद्द करने, संबंधित सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण समाप्त करने और अन्य कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान रखा गया है। गंभीर मामलों में दोष सिद्ध होने पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ कारावास की सजा भी दी जा सकती है। सरकार का मानना है कि कड़े प्रावधानों से जमाखोरी की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारियों को अब अपनी खरीद और बिक्री की योजना मांग के अनुरूप बनानी होगी। उन्हें उतनी ही मात्रा में चीनी का स्टॉक रखना होगा, जिसे स्थानीय बाजार में लगभग 20 से 25 दिनों के भीतर आसानी से बेचा जा सके। इससे गोदामों में अनावश्यक भंडारण कम होगा और बाजार में नियमित आपूर्ति बनी रहेगी।

    सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से चीनी की उपलब्धता बेहतर होगी, कीमतों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव पर नियंत्रण रहेगा और त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही, बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति व्यवस्था अधिक संतुलित बनेगी।