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  • मुस्लिमों के पवित्र शहर मक्का पर मिसाइल अटैक का खतरा…. हूती विद्रोही कर सकते हैं हमला

    मुस्लिमों के पवित्र शहर मक्का पर मिसाइल अटैक का खतरा…. हूती विद्रोही कर सकते हैं हमला


    मक्का।
    मुस्लिमों (Muslims) के सबसे पवित्र शहर मक्का (Holiest city, Mecca) पर हमले का साया मंडरा रहा है। ये बात खुद सऊदी अरब (Saudi Arabia) की सुरक्षा एजेंसियां कह रही हैं। उन्हें डर है कि ईरान समर्थित हूती विद्रोही (Houthi rebels) इस पवित्र शहर को अपना निशाना बना सकते हैं। सऊदी सिविल डिफेंस ने गुरुवार को पवित्र शहर मक्का और अन्य इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया है। अमूमन ऐसी चेतावनियां मिसाइल हमले के संभावित खतरे का संकेत देती हैं। एजेंसी ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर एक पोस्ट में कहा, “मक्का शहर में संभावित खतरे के बारे में आगाह करने के लिए ‘नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म’ की ओर से चेतावनी जारी की गई है।”

    10 दिनों से भी कम समय में यह दूसरी बार है, जब अधिकारियों ने मक्का के लिए ऐसी चेतावनी जारी की है। सऊदी अरब के पश्चिमी तट के अन्य इलाकों के लिए भी अलग-अलग चेतावनियां जारी की गईं, जिनमें लाल सागर के किनारे बसा यानबू (Yanbu) शहर और ताइफ, जेद्दा और तबुक इलाके शामिल हैं। समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, कुछ मिनटों बाद ये अलर्ट हटा लिए गए। हाल के हफ्तों में, ऐसे अलर्ट के बाद यमन के हूती विद्रोहियों (ईरान समर्थित एक सशस्त्र समूह) ने हमले किए हैं।

    पिछले हफ्ते, सऊदी अरब ने हूतियों पर मक्का को ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश का आरोप लगाया था, जिसे मार गिराया गया। सऊदी अरब ने कहा कि 2017 के बाद से ऐसी कोशिश पहली बार हुई थी। दूसरी तरफ, हूती समूह ने इन आरोपों से इनकार किया है। पिछला अलर्ट 15 सितंबर को जारी किया गया था, जब सऊदी अरब की एयर डिफेंस सिस्टम ने मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया था। वह ड्रोन प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल नहीं हो पाया था। कुछ दिनों बाद, हूतियों ने कई सालों में पहली बार सऊदी राजधानी रियाद को निशाना बनाया, जिससे इस संघर्ष में तनाव और बढ़ गया।

    बता दें कि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार के बीच नई लड़ाई चल रही है, जो तेहरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच हो रही है। यह संघर्ष तब शुरू हुआ, जब इस सशस्त्र समूह ने सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की और लाल सागर में उसके जहाजों को निशाना बनाया। इस महीने की शुरुआत में, हूतियों ने सऊदी समर्थित सरकारी बलों से इलाके छीनने के बाद बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के पास रणनीतिक तटीय इलाकों पर कब्जा कर लिया। यह इलाका सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

  • काले रंग और मोटे शरीर को लेकर पत्नी के ताने का आरोप तलाक मांगने पहुंचे पति को हाई कोर्ट से झटका

    काले रंग और मोटे शरीर को लेकर पत्नी के ताने का आरोप तलाक मांगने पहुंचे पति को हाई कोर्ट से झटका


    नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पति की अपील खारिज कर दी है। पति ने अपनी पत्नी पर कई आरोप लगाए थे और दावा किया था कि पत्नी उसे काले रंग और मोटे शरीर वाला बताकर परेशान करती थी। पति की ओर से इन बातों को वैवाहिक जीवन में क्रूरता का आधार बताया गया था लेकिन हाई कोर्ट ने माना कि केवल ऐसे आरोप तलाक की डिक्री देने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया जिसमें पति की तलाक की याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी थी।

    मामला जांजगीर चांपा जिले के 28 वर्षीय अक्ष घोष और रायगढ़ जिले की 25 वर्षीय पूजा सीत से जुड़ा है। दोनों की शादी 7 मार्च 2019 को रायगढ़ जिले के एक गांव में हुई थी। शादी के बाद पत्नी करीब दो से तीन महीने तक पति और उसके परिवार के साथ रही। पति का आरोप था कि इस दौरान पत्नी का व्यवहार उसके प्रति शत्रुतापूर्ण रहा। उसने यह भी आरोप लगाया कि पत्नी उसे झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देती थी और अक्सर अपने मायके चली जाती थी। पति के मुताबिक पत्नी उसकी अनुमति के बिना एक रिश्तेदार की शादी में राजस्थान गई और करीब 25 दिन बाद वापस लौटी। इसी दौरान उसने जुड़वां बच्चों के गर्भपात का भी जिक्र किया।

    दूसरी तरफ पत्नी ने पति के आरोपों से इनकार किया। महिला ने अपने पति पर दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाया। उसका कहना था कि इस जानकारी के बाद पति ने शराब पीना शुरू कर दिया था। महिला ने पति पर दुर्व्यवहार करने और गर्भावस्था के दौरान उचित इलाज नहीं कराने का भी आरोप लगाया। उसके अनुसार बीमार होने पर उसकी मां उसे रायगढ़ के अस्पताल लेकर गई थी। ठीक होने के बाद उसने पति और उसके परिवार से उसे वापस ले जाने का अनुरोध किया लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद महिला की मां ने 24 फरवरी 2020 को रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। महिला ने घरेलू हिंसा कानून के तहत भी पति और उसके परिवार के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत में कार्रवाई शुरू की थी।

    मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की ओर से रखे गए आरोपों और उपलब्ध सबूतों की जांच की। अदालत ने पाया कि पति अपनी पत्नी की ओर से की गई कथित क्रूरता और परित्याग के आरोपों को ठोस सबूतों से साबित नहीं कर सका। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति ने कई आरोप लगाए लेकिन उन्हें प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य सामने नहीं रखे गए। पत्नी द्वारा पति को काले रंग या मोटे शरीर वाला बताने का आरोप भी अपने आप में तलाक देने का पर्याप्त आधार नहीं माना गया।

    हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि पति यह साबित करने में असफल रहा कि पत्नी बिना उचित कारण अपने माता पिता के साथ रह रही थी। इसके साथ ही वह यह भी साबित नहीं कर सका कि पत्नी ने वैवाहिक संबंध खत्म करने की मंशा से उसे छोड़ दिया था। जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के फैसले को सही माना और पति की अपील खारिज कर दी। फैमिली कोर्ट ने जहां पति की तलाक याचिका खारिज की थी वहीं पत्नी की ओर से दायर स्त्रीधन वापस करने की याचिका को मंजूर किया था। हाई कोर्ट ने बिना किसी लागत के अपील खारिज करते हुए डिक्री तैयार करने का निर्देश दिया।

  • इटली: मेलोनी सरकार ने स्कूलों के लिए बदले नियम… भाषा की सीमा तय, नकाब पर भी रोक

    इटली: मेलोनी सरकार ने स्कूलों के लिए बदले नियम… भाषा की सीमा तय, नकाब पर भी रोक


    रोम।
    इटली (Italy) में स्कूलों (Schools) को लेकर प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी (Prime Minister Giorgia Meloni) की सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने स्कूलों (Schools) में इटैलियन भाषा (Italian language) की कम जानकारी रखने वाले बच्चों की संख्या पर एक सीमा तय कर दी है. इसके साथ ही स्कूलों में नकाब पर भी रोक लगाने का फैसला लिया गया है।

    फैसले के पक्ष में मेलोनी प्रशासन का कहना है कि इन नियमों से छात्रों में इटैलियन भाषा को सीखने और स्कूलों में एकीकरण को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी. लेकिन विपक्ष के साथ ही कुछ शिक्षक संगठनों और यूनियनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इस फैसले से छात्रों और उनके परिवारों पर असर पड़ सकता है।

    सरकार के नए प्लान के मुताबिक किसी भी क्लास में इटैलियन भाषा पर कम पकड़ वाले बच्चों की संख्या 30 फीसदी होगी. इस फैसले में खास बात यह है कि बच्चों की सीमा नागरिकता के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी भाषा की क्षमता के आधार पर तय की जाएगी। यानी अगर किसी दूसरे यूरोपीय संघ के देश का छात्र भी इटैलियन भाषा अच्छी तरह नहीं बोलता, तो वह भी इस नियम के दायरे में आएगा. सरकार का तर्क है कि इससे स्कूलों में ऐसी क्लासेज कम होंगी, जहां ज्यादातर बच्चों को भाषा समझने में दिक्कत हो।


    स्कूलों में चेहरा ढकने पर भी रोक

    इन्हीं नियमों में स्कूलों में ऐसे इस्लामिक पहनावे पर भी रोक लगाने का फैसला किया गया है, जिससे चेहरा पूरी तरह ढक जाता हो. नियम का हवाला देते हुए सरकार का कहना है कि इससे स्कूलों में कम्यूनिकेशन और एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा. मेलोनी ने इन फैसलों को सोशल मीडिया पर “कॉमन सेंस” वाले उपाय बताए. उनके मुताबिक इनका मकसद छात्रों को अलग-अलग समूहों में बांटना नहीं, बल्कि सभी को समान अवसर देना है।


    विपक्ष ने नियमों पर उठाए सवाल

    सरकार के फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है. आलोचकों का कहना है कि 30 फीसदी की सीमा के चलते कुछ छात्रों को अपने घर के आसपास के स्कूल के बजाय दूसरे इलाके के स्कूल में जाना पड़ सकता है. विपक्षी दलों और कुछ शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकार इमिग्रेशन के मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला रही है।

    सरकार का डिक्री तुरंत लागू हो गया है, लेकिन इसे 60 दिनों के भीतर संसद की मंजूरी लेनी होगी. संसद में मेलोनी के गठबंधन के पास बहुमत है. ऐसे में आने वाले दिनों में इटली की इमिग्रेशन और पहचान पर भी इस फैसले का असर दिख सकता है।

  • फेस्टिव सीजन में नहीं होगी LPG की किल्लत …. मोदी सरकार ने Plan-B पर शुरू किया काम

    फेस्टिव सीजन में नहीं होगी LPG की किल्लत …. मोदी सरकार ने Plan-B पर शुरू किया काम


    नई दिल्ली।
    अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच अभी भी सबकुछ ठीक नहीं हो पाया है, मिडिल ईस्ट टेंशन (Middle East Tensions) के बीच होर्मुज (Hormuz) ही नहीं, बाब-अल-मंदेब समेत अन्य समुद्री रूट्स में बाधाएं जारी हैं. भारत (India) के लिए ये सब इसलिए खास है, क्योंकि देश में फेस्टिव सीजन (Festive season) शुरू होने वाला है. यानी LPG की खपत बढ़ना तय है, लेकिन इस तेज त्योहारी मांग को पूरा करने में खाड़ी देशों से सप्लाई में रुकावट का बुरा असर पड़ सकता है. ऐसे में अभी से सरकार ने अपने प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) पर काम करना शुरू कर दिया है, ताकि आम जनता को त्योहारों पर एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से न जूझना पड़े. इसके लिए सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियां एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं.


    घरेलू मांग पूरा करने के लिए तैयारी

    ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, त्योहारी मौसम में एलपीजी की घरेलू मांग बढ़ने के कारण सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियां लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) का उत्पादन बढ़ाने लगी हैं. इसके पीछे वजह ये है कि वेस्ट एशिया टेंशन के बीच फारस की खाड़ी से एलपीजी आपूर्ति में व्यवधान जारी है, जिससे देश की कुकिंग गैस सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा हो रहा है. सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के चलते त्योहारों से पहले ही उत्पादन में इजाफा किया जाने लगा है।


    20% बढ़ा देश में LPG का उत्पादन

    त्योहारी सीजन और सप्लाई में रुकावट के बीच सरकार का प्लान काम करता नजर आने लगा है. सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों का घरेलू एलपीजी उत्पादन बढ़कर लगभग 44,000 टन प्रतिदिन हो गया है, जो बीते अगस्त महीने के औसत उत्पादन से लगभग 20% ज्यादा है. LPG Production में घरेलू स्तर पर ये बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है, जबकि भारत नवंबर में दिवाली तक चलने वाली उच्च खपत की अवधि के लिए तैयार हो रहा है, जबकि सर्दियों की मांग से इसे और बढ़ावा मिल सकता है।


    सरकार लगातार उठा रही कदम

    भले ही अमेरिका और ईरान के बीच हमलों का सिलसिला थमा हुआ है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दोनों के बीच तनातनी बिल्कुल खत्म नहीं है. ऐसे में लंबे समय से बाधित तेल-गैस आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण इस समुद्री रूट की वजह से भारत में एलपीजी शॉर्टेज (LPG Shortage In India) को पूरा करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है. इसे लेकर अब केंद्र ने राज्यों और प्रमुख उद्योगों के लिए एलपीजी आवंटन तय कर दिया है।

    बता दें कि घरेलू रिफाइनरियों ने युद्ध के दौरान के अपने हाई एलपीजी प्रोडक्शन को कम कर दिया था, क्योंकि गर्मियों के दौरान अमेरिका और अफ्रीका से वैकल्पिक आपूर्ति होने लगी थी. लेकिन त्योहारों के लिए ये काफी नहीं है, ऐसे में घरेलू एलपीजी उत्पादन में फिर से बढ़ोतरी शुरू की गई है. इसके साथ ही सरकार ने मार्च में LPG Supply Crisis के दौरान लागू न्यूनतम रिफिल वेटिंग टाइम को 45 दिनों से घटाकर अब 25 दिन कर दिया है।


    भारत दूसरा बड़ा LPG आयातक

    भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी आयातक है और ऐतिहासिक रूप से फारस की खाड़ी से आपूर्ति पर बहुत अधिक निर्भर रहा है. इस निर्भरता के कारण देश में इस क्षेत्र में जारी संघर्ष और व्यापारिक उथल-पुथल से पैदा होने वाली रुकावटों का बड़ा असर देखने को मिलता है।

    फिलहाल देश में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (LPG Cylinder Price) की बात करें, तो दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये और कोलकाता में 968 रुपये है. बात नोएडा की करें, तो यहां पर घरेलू एलपीजी सिलेंडर 939.50 रुपये पर मिल रहा है, जबकि हैदराबाद में इसका दाम सबसे अधिक 994 रुपये है. वहीं कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर यानी 19 किलोग्राम के LPG Cylinder का रेट देखें, तो दिल्ली 2,747.50 रुपये, जबकि मुंबई में ये 2,701 रुपये का है।

  • अनंत चतुर्दशी पर 18 साल बाद बना दुर्लभ संयोग: 4 राशियों के लिए धन और तरक्की के योग

    अनंत चतुर्दशी पर 18 साल बाद बना दुर्लभ संयोग: 4 राशियों के लिए धन और तरक्की के योग


    नई दिल्ली। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी यानी अनंत चतुर्दशी को सनातन धर्म में बेहद पवित्र माना गया है। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा कर 14 गांठों वाला अनंत सूत्र धारण किया जाता है और गणपति बप्पा को विदाई दी जाती है। इस बार 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ पंचक भी रहेगा और ज्योतिषीय गणना के अनुसार चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा।

    ज्योतिष गणना के मुताबिक इस दिन कुंभ राशि में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग बनने की बात कही जा रही है। चंद्रमा के कुंभ राशि में रहने के कारण पंचक का प्रभाव भी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस संयोग का असर सभी राशियों पर अलग-अलग हो सकता है, लेकिन चार राशियों के लिए आर्थिक लाभ, करियर और सफलता के विशेष योग बताए जा रहे हैं।

    18 साल बाद कुंभ राशि में चंद्र-राहु का संयोग

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार राहु किसी एक राशि में करीब 18 महीने यानी डेढ़ साल तक रहते हैं, जबकि चंद्रमा लगभग सवा दो दिन में राशि बदलते हैं। ऐसे में राहु के कुंभ राशि में गोचर के दौरान चंद्रमा का भी इसी राशि में आना अपेक्षाकृत दुर्लभ संयोग माना जाता है।

    इसी आधार पर अनंत चतुर्दशी के दिन कुंभ राशि में चंद्रमा और राहु की युति को करीब 18 साल बाद बनने वाला संयोग बताया जा रहा है। वहीं, पंचांग के अनुसार 25 सितंबर को चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा और शतभिषा नक्षत्र के बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश करेगा। इस दिन पंचक भी दर्ज है।

    मेष राशि: आय के नए रास्ते खुलने के योग

    मेष राशि वालों के लिए यह युति 11वें भाव यानी आय और लाभ के भाव में बनने की बात कही गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इसका सकारात्मक प्रभाव आर्थिक मामलों में देखने को मिल सकता है। आय के नए स्रोत बन सकते हैं। लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना है। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए किसी बड़ी डील के फाइनल होने के योग बन सकते हैं।

    मिथुन राशि: भाग्य का साथ, विदेश से जुड़े काम में अवसर

    मिथुन राशि के जातकों के लिए चंद्रमा और राहु का संयोग 9वें भाव यानी भाग्य और धर्म के भाव में बनने की बात कही गई है।

    इसके प्रभाव से अटके हुए काम गति पकड़ सकते हैं। उच्च शिक्षा, विदेश व्यापार और ऑनलाइन बिजनेस से जुड़े लोगों को नए अवसर मिल सकते हैं। धार्मिक यात्रा के योग भी बन सकते हैं। भाग्य का साथ मिलने से कई महत्वपूर्ण काम पूरे होने की संभावना जताई जा रही है।

    तुला राशि: निवेश से लाभ और रचनात्मक क्षेत्र में पहचान

    तुला राशि के लिए यह युति 5वें भाव यानी बुद्धि, संतान और लाभ से जुड़े भाव में बनने की बात कही गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक शेयर मार्केट या पुराने निवेश से अचानक आर्थिक लाभ मिल सकता है। रचनात्मक और मीडिया क्षेत्र से जुड़े लोगों के काम को पहचान मिल सकती है। इस दौरान अन्य शुभ ग्रहों के प्रभाव को भी तुला राशि के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है।

    धनु राशि: आत्मविश्वास बढ़ेगा, करियर में बदलाव के संकेत

    धनु राशि के जातकों के लिए चंद्रमा और राहु का संयोग तीसरे भाव यानी पराक्रम और छोटे भाई-बहनों से संबंधित भाव में बनने की बात कही गई है।

    इससे आत्मविश्वास और काम करने की क्षमता बढ़ने के योग बताए जा रहे हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारी मिल सकती है या पदोन्नति के अवसर बन सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपकी कार्यशैली की सराहना हो सकती है। विरोधियों पर प्रभाव बढ़ने के भी संकेत बताए गए हैं।

  • ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात में दिखी गर्मजोशी, लेकिन बड़े मुद्दे अभी बाकी, बैठक से निकले 5 अहम संकेत

    ट्रंप-जिनपिंग की मुलाकात में दिखी गर्मजोशी, लेकिन बड़े मुद्दे अभी बाकी, बैठक से निकले 5 अहम संकेत


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात में दोनों देशों के बीच रिश्तों में नरमी के संकेत जरूर दिखे, लेकिन कई बड़े और संवेदनशील मुद्दों पर अभी अंतिम समाधान सामने नहीं आया है। व्यापार समझौते की अवधि बढ़ाने से लेकर ताइवान, अमेरिका-चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, बैठक में ऐसे पांच मुद्दे सामने आए जो आने वाले समय में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय कर सकते हैं।

    1. ट्रेड डील सिर्फ दो महीने के लिए आगे बढ़ी

    बैठक से सबसे बड़ा व्यावहारिक नतीजा व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के रूप में सामने आया। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका और चीन उस ट्रेड डील को दो महीने के लिए बढ़ाने पर सहमत हुए हैं, जिसने पिछले साल दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर को खत्म करने में भूमिका निभाई थी। यह समझौता नवंबर में खत्म होने वाला था।

    हालांकि, यह विस्तार लंबी अवधि का समाधान नहीं है। टैरिफ, चीन की खरीद, रेयर-अर्थ सप्लाई और तकनीकी प्रतिबंध जैसे जटिल मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे भी जारी रहेगी। यानी फिलहाल इन मुद्दों पर अंतिम सहमति के बजाय बातचीत के लिए समय बढ़ाया गया है।

    2. व्हाइट हाउस में अमेरिकी अंदाज में हुआ भव्य स्वागत

    जिनपिंग के दौरे के दौरान व्हाइट हाउस में भव्य समारोहों का आयोजन किया गया। ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति के स्वागत के लिए अमेरिकी सैन्य परंपरा और शान-शौकत को खास तौर पर प्रदर्शित किया।

    बुधवार और गुरुवार को आयोजित कार्यक्रमों में त्रिकोणीय टोपियां और विशेष वेशभूषा पहने सैनिकों ने मार्च किया। संगीत के साथ आसमान में फाइटर जेट्स और बमवर्षक विमानों ने भी उड़ान भरी। एक मौके पर जेट की तेज आवाज से राष्ट्रपति ट्रंप भी चौंक गए।

    ट्रंप ने जिनपिंग को व्हाइट हाउस के नए हेलीपैड और ‘मरीन वन’ हेलीकॉप्टर की जानकारी भी दी। इस तरह बैठक के राजनीतिक एजेंडे के साथ दोनों नेताओं की मुलाकात में प्रतीकात्मक और औपचारिक पहलू भी नजर आया।

    3. ताइवान पर चीन ने अमेरिका से सावधानी बरतने को कहा

    बैठक में ताइवान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, शी जिनपिंग ने ट्रंप से ताइवान के सवाल पर चर्चा की और उम्मीद जताई कि अमेरिका इस मुद्दे को बेहद सावधानी से संभालेगा।

    चीनी पक्ष ने यह भी कहा कि बीजिंग चाहता है कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता का स्पष्ट रूप से विरोध करे।

    हालांकि, अमेरिका ने ताइवान को लेकर अपने पुराने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है। इस मुद्दे पर किसी बड़े बदलाव का असर ताइवान की सुरक्षा और अमेरिकी कांग्रेस में राजनीतिक प्रतिक्रिया पर भी पड़ सकता है।

    4. ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र, टकराव के जोखिम पर संकेत

    शी जिनपिंग ने मुलाकात के दौरान एक बार फिर ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ का जिक्र किया। यह एक अकादमिक अवधारणा है, जिसके मुताबिक किसी उभरती हुई महाशक्ति और मौजूदा प्रमुख महाशक्ति के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा से टकराव का खतरा पैदा हो सकता है।

    जिनपिंग ने हालांकि यह भी कहा कि इस जोखिम से बचा जा सकता है। उनके इस संदर्भ को अमेरिका और चीन के बीच जारी रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखा गया। दोनों देशों के बीच आर्थिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के साथ सैन्य टकराव की आशंका भी लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय रही है।

    5. AI को लेकर दोनों नेताओं की सोच अलग

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य और उसके नियमन को लेकर ट्रंप और जिनपिंग के विचारों में अंतर दिखाई दिया।

    राष्ट्रपति ट्रंप AI को ‘सुपर इंटेलिजेंस’ यानी ‘SI’ कहने पर जोर देते हैं और उनका रुख नई तरह के नियंत्रण लागू करने के प्रति सतर्कता का रहा है। दूसरी ओर, जिनपिंग ने कहा कि दुनिया की प्रमुख शक्तियों के रूप में अमेरिका और चीन की जिम्मेदारी है कि AI के विकास को नियंत्रित किया जाए।

    जिनपिंग ने जोर दिया कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि AI इंसानों के नियंत्रण में रहे और मानवता के हित में काम करे। इससे संकेत मिलता है कि तकनीक के भविष्य को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं के साथ नीति और नियमन को लेकर मतभेद भी बने हुए हैं।

    स्टेट डिनर में टेक जगत के दिग्गज भी पहुंचे

    ट्रंप ने जिनपिंग के साथ बैठक के बाद व्हाइट हाउस में चीनी राष्ट्रपति के सम्मान में शानदार स्टेट डिनर का आयोजन किया। इसमें टेक्नोलॉजी जगत की कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल हुईं।

    डिनर में गूगल के सुंदर पिचई, OpenAI के सैम ऑल्टमैन और Nvidia के जेनसेन ह्वांग जैसे टेक जगत के दिग्गज मौजूद रहे। ऐसे में बैठक के राजनीतिक और व्यापारिक एजेंडे के साथ AI और तकनीकी क्षेत्र की भूमिका भी खास तौर पर चर्चा में रही।

    कुल मिलाकर, ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात में व्यापार के मोर्चे पर सीमित अवधि का समझौता जरूर हुआ, लेकिन ताइवान, तकनीकी प्रतिबंध, रेयर-अर्थ सप्लाई और AI जैसे कई अहम मुद्दे अभी भी बातचीत के दायरे में हैं। दोनों देशों के रिश्तों में आगे की दिशा इन मुद्दों पर होने वाली अगली बातचीत से तय होगी।

  • LPG Rule Change: 1 अक्टूबर से सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए बदलेगा नियम, जानें क्या करना होगा ?

    LPG Rule Change: 1 अक्टूबर से सब्सिडी वाले सिलेंडर के लिए बदलेगा नियम, जानें क्या करना होगा ?


    नई दिल्ली। LPG उपभोक्ताओं के लिए 1 अक्टूबर 2026 से नया नियम लागू होने जा रहा है। अब घरेलू LPG सिलेंडर को लागू सब्सिडी के साथ रेगुलेटेड रिटेल सेलिंग प्राइस (RSP) पर बुक करने के लिए Biometric Aadhaar Authentication (BAA) पूरा करना जरूरी होगा। जिन उपभोक्ताओं का यह ऑथेंटिकेशन पहले ही हो चुका है, उन्हें दोबारा प्रक्रिया नहीं करनी होगी। सरकार के मुताबिक, 19 सितंबर 2026 तक 27.43 करोड़ सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ता यानी 89.9% पहले ही BAA पूरा कर चुके हैं।

    1 अक्टूबर से क्या बदलेगा?

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, 1 अक्टूबर से जिन घरेलू LPG उपभोक्ताओं ने Biometric Aadhaar Authentication पूरा नहीं किया है, उनके लिए सब्सिडी के साथ RSP पर रिफिल बुकिंग BAA पूरा होने के बाद ही उपलब्ध होगी। यानी ऑथेंटिकेशन पूरा कराने के बाद ही सब्सिडी वाले रेट पर रिफिल बुक किया जा सकेगा।

    हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि BAA नहीं कराने वाले उपभोक्ताओं को LPG मिलना पूरी तरह बंद नहीं होगा। ऐसे उपभोक्ता अपनी पसंद दर्ज कराने के बाद स्थानीय उपलब्धता के आधार पर 5 या 10 किलो के सिलेंडर बाजार कीमत पर बिना सब्सिडी के ले सकेंगे।

    जिन्हें पहले ही करा लिया, उन्हें कुछ नहीं करना

    अगर किसी LPG उपभोक्ता का Biometric Aadhaar Authentication पहले ही पूरा हो चुका है, तो उसे यह प्रक्रिया दोबारा कराने की जरूरत नहीं है। ऐसे उपभोक्ताओं को रिफिल पहले की तरह मिलता रहेगा।

    सरकार का कहना है कि BAA का उद्देश्य सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर का लाभ वास्तविक और पात्र परिवारों तक पहुंचाना है। इससे घरेलू सब्सिडी वाले सिलेंडरों के व्यावसायिक और औद्योगिक इस्तेमाल को रोकने, डुप्लीकेट कनेक्शन की पहचान करने और अपात्र कनेक्शन हटाने में मदद मिलेगी।

    27.43 करोड़ उपभोक्ता करा चुके हैं BAA

    पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 19 सितंबर 2026 तक देश में 27.43 करोड़ सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ताओं ने Biometric Aadhaar Authentication पूरा कर लिया था। यह कुल सक्रिय घरेलू LPG उपभोक्ताओं का 89.9% है।

    उपभोक्ताओं को पहले 30 जून 2026 तक BAA पूरा करने के लिए कहा गया था। बाद में समयसीमा कई बार बढ़ाई गई। इसे 31 जुलाई, 7 अगस्त, 15 अगस्त, 23 अगस्त, 31 अगस्त, 7 सितंबर और अंत में 14 सितंबर 2026 तक बढ़ाया गया था। अब 1 अक्टूबर से सब्सिडी वाले रिफिल की बुकिंग के लिए BAA पूरा होना जरूरी होगा।

    घर बैठे भी पूरा कर सकते हैं ऑथेंटिकेशन

    LPG उपभोक्ताओं के लिए BAA पूरा करने के कई विकल्प उपलब्ध हैं। इसके लिए गैस एजेंसी के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है।

    डिलीवरी के समय: LPG सिलेंडर की डिलीवरी के दौरान डिलीवरी कर्मचारी OMC के मोबाइल ऐप के जरिए मौके पर ही ऑथेंटिकेशन पूरा कर सकता है।

    गैस एजेंसी पर: उपभोक्ता अपने LPG डिस्ट्रीब्यूटर के शोरूम पर जाकर भी Biometric Aadhaar Authentication करा सकते हैं।

    मोबाइल ऐप से: घर बैठे संबंधित ऑयल मार्केटिंग कंपनी के मोबाइल ऐप से भी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। इंडेन के लिए IndianOil ONE, भारत गैस के लिए HelloBPCL और HP गैस के लिए HP PAY ऐप का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    सितंबर में 14.2 किलो सिलेंडर पर करीब 210 रुपए की सब्सिडी

    सरकार के मुताबिक सितंबर 2026 में 14.2 किलो के घरेलू LPG सिलेंडर पर निहित सब्सिडी करीब 210 रुपए प्रति सिलेंडर है। जून 2026 में यह राशि 721 रुपए प्रति सिलेंडर तक पहुंच गई थी। सरकार का कहना है कि घरेलू LPG को किफायती बनाए रखने के लिए सब्सिडी को वास्तविक पात्र उपभोक्ताओं तक पहुंचाना जरूरी है।

    1 अक्टूबर से पहले करा लें BAA

    जिन उपभोक्ताओं ने अब तक Biometric Aadhaar Authentication नहीं कराया है, उन्हें सरकार ने 1 अक्टूबर से पहले यह प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी है। यह सुविधा शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में उपलब्ध है। LPG सेवाओं से संबंधित सहायता के लिए उपभोक्ता 1800 2333 555 टोल-फ्री हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं।

  • SEBI ने बदले निवेश के नियम: PMS के लिए विदेशी शेयर, IPO, REIT-InvIT समेत कई नए रास्ते खुले

    SEBI ने बदले निवेश के नियम: PMS के लिए विदेशी शेयर, IPO, REIT-InvIT समेत कई नए रास्ते खुले


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने कई अहम बदलावों को मंजूरी दी है। नए नियमों के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स (PMS) के निवेश का दायरा बढ़ेगा। अब विदेशी लिस्टेड शेयर, डेट सिक्योरिटीज, REIT, विदेशी म्यूचुअल फंड, ETF, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज जैसे विकल्प भी उनके निवेश दायरे में आ सकेंगे। इसके साथ ही IPO, प्राइमरी मार्केट डेट, FPI, REIT-InvIT, विज्ञापन और सेटलमेंट से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। SEBI ने 2026 के नए PMS रेगुलेशन को मंजूरी दी है।

    PMS के जरिए निवेश के विकल्प बढ़ेंगे
    SEBI ने 2020 के पुराने नियमों की जगह 2026 के नए पोर्टफोलियो मैनेजर्स रेगुलेशन को मंजूरी दी है। इसके बाद PMS के लिए निवेश के विकल्प बढ़ जाएंगे। तय नियमों और सीमाओं के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर्स विदेशी लिस्टेड शेयरों, डेट सिक्योरिटीज, REIT, विदेशी म्यूचुअल फंड, ETF, इंडेक्स फंड और विदेशी सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश कर सकेंगे।

    क्लाइंट की मंजूरी मिलने पर पोर्टफोलियो मैनेजर उसके कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) का 10% तक इन्वेस्टमेंट-ग्रेड अनलिस्टेड नॉन-कन्वर्टिबल डेट सिक्योरिटीज में भी लगा सकेगा।

    IPO और प्राइमरी मार्केट में भी निवेश
    नए नियमों के तहत PMS के लिए IPO और प्राइमरी मार्केट डेट में निवेश का रास्ता भी खुला है। इसका मतलब है कि PMS के जरिए अपना पैसा मैनेज कराने वाले निवेशकों के लिए नए शेयर जारी होने के समय निवेश का विकल्प उपलब्ध होगा।

    भारतीय म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट प्लान स्कीमों में निवेश की भी अनुमति दी गई है। इनमें ETF, इंडेक्स फंड और स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड शामिल हैं। इस सुविधा के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 25 लाख रुपए रखी गई है।

    PMS के नियमों का आकार भी हुआ छोटा
    SEBI ने निवेश के विकल्प बढ़ाने के साथ नियमों को आसान बनाने पर भी जोर दिया है। नए PMS नियमों का दस्तावेज 70 पेज से घटाकर 33 पेज कर दिया गया है। SEBI के मुताबिक, इसमें शब्दों की संख्या भी करीब 42% कम की गई है।

    इसके अलावा इंडिपेंडेंट फंड मैनेजर का नया कॉन्सेप्ट भी मंजूर किया गया है। ऐसे फंड मैनेजर रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर के साथ मिलकर क्लाइंट का पोर्टफोलियो संभाल सकेंगे। हालांकि, उनके काम की जिम्मेदारी और देनदारी रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर की ही रहेगी।

    प्रिंसिपल ऑफिसर बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी शर्तों में भी राहत दी गई है। वहीं, 100 करोड़ रुपए से कम AUM वाले पोर्टफोलियो मैनेजर्स को डीलिंग रूम की अनिवार्य शर्त से छूट मिलेगी। हालांकि, उन्हें ऑडिट ट्रेल और मजबूत इंटरनल कंट्रोल बनाए रखना होगा।

    FPI को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में नया विकल्प
    SEBI ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI के लिए भी निवेश का दायरा बढ़ाया है। अब FPI फिजिकली सेटल्ड नॉन-एग्रीकल्चर कमोडिटी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स में हिस्सा ले सकेंगे।

    इनमें ऐसे फ्यूचर्स और ऑप्शंस शामिल होते हैं, जिनका अंतर्निहित मूल्य कृषि उत्पादों के बजाय अन्य कच्चे माल, धातुओं या ऊर्जा स्रोतों से जुड़ा होता है। हालांकि, इसके लिए समयसीमा तय की गई है। FPI को टेंडर पीरियड शुरू होने से पहले और एक्सपायरी से कम से कम तीन दिन पहले अपनी पोजिशन खत्म करनी होगी।

    5 करोड़ की संपत्ति वाले व्यक्ति भी बन सकेंगे Accredited Investor
    SEBI ने Accredited Investor की कैटेगरी का दायरा भी बढ़ाया है। अब सिक्योरिटीज मार्केट में 5 करोड़ रुपए की संपत्ति रखने वाले व्यक्तिगत निवेशक और 20 करोड़ रुपए की संपत्ति वाले बॉडी कॉरपोरेट्स भी कुछ मौजूदा आय और नेटवर्थ शर्तें पूरी करने पर इस कैटेगरी में शामिल हो सकेंगे।

    Accredited Investor ऐसे निवेशकों की श्रेणी है, जिन्हें कुछ विशेष निवेश विकल्पों में निवेश के लिए अपेक्षाकृत अधिक वित्तीय क्षमता वाला माना जाता है। SEBI ने अगस्त 2026 में इस फ्रेमवर्क की समीक्षा से जुड़ा कंसल्टेशन पेपर भी जारी किया था।

    सेलिब्रिटी के वित्तीय विज्ञापनों पर नए नियम
    वित्तीय कंपनियों और मार्केट इंटरमीडियरी के विज्ञापनों में सेलिब्रिटी की भूमिका को लेकर भी नियम बदले गए हैं। SEBI ने Common Advertisement Code को मंजूरी दी है।

    इसके तहत कोई सेलिब्रिटी किसी ब्रांड या कंपनी का प्रचार कर सकता है, लेकिन किसी खास वित्तीय प्रोडक्ट या सर्विस को सीधे एंडोर्स नहीं कर सकेगा। यानी वह किसी कंपनी के विज्ञापन में नजर आ सकता है, लेकिन निवेशकों से किसी विशेष वित्तीय प्रोडक्ट को खरीदने या उसमें पैसा लगाने की अपील नहीं कर सकेगा। इस विषय पर SEBI ने जून 2026 में कंसल्टेशन पेपर जारी किया था।

    10 लाख रुपए तक के मामलों में फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट
    शेयर बाजार से जुड़े विवादों और नियमों के उल्लंघन के मामलों में सेटलमेंट प्रक्रिया को भी बदला गया है। SEBI ने सेटलमेंट अमाउंट तय करने का नया फॉर्मूला मंजूर किया है।

    10 लाख रुपए तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट का रास्ता होगा। गलत तरीके से कमाई गई रकम, बचाए गए नुकसान या निवेशकों को हुए नुकसान की वसूली अलग से तय होगी। नए फॉर्मूले का उद्देश्य सेटलमेंट राशि तय करते समय एक ही नुकसान या रकम की दो बार गणना की समस्या को दूर करना है।

    SEBI के आंकड़ों के मुताबिक, FY24-25 में सेटलमेंट के 703 आवेदन आए थे। FY25-26 में 439 आवेदन आए और 170 मामलों का निपटारा हुआ। इसके साथ ही 1 अप्रैल 2014 से 30 सितंबर 2015 के बीच BSE के इलिक्विड स्टॉक ऑप्शंस में गैर-असली ट्रेड से जुड़े मामलों के लिए चौथी सेटलमेंट स्कीम, 2026 को भी मंजूरी दी गई है।

    REIT और InvIT के लिए विदेशी फंड जुटाने का रास्ता
    SEBI ने REIT और पब्लिकली लिस्टेड InvIT से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है। अब ये मंजूर विदेशी बाजारों में डिपॉजिटरी रिसीट्स जारी कर सकेंगे। इससे इन साधनों के लिए विदेशी निवेश जुटाने का एक नया माध्यम उपलब्ध हो सकता है। REIT और InvIT से जुड़े नियमों को आसान बनाने के लिए SEBI ने अगस्त 2026 में अलग-अलग कंसल्टेशन पेपर भी जारी किए थे।

    वोटिंग नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब 75% आउटस्टैंडिंग यूनिट्स की जगह डाले गए वोट्स का 75% होना पर्याप्त होगा। स्पॉन्सर बदलने की स्थिति में एग्जिट ऑफर के नियमों में भी बदलाव किया गया है और असहमत यूनिटहोल्डर्स के साथ व्यवहार को स्पष्ट किया गया है।

    रिसर्च एनालिस्ट और वॉल्ट मैनेजर के नियमों में बदलाव
    SEBI ने रिसर्च एनालिस्ट और रिसर्च एंटिटीज के लिए कुछ कंप्लायंस नियमों को भी आसान किया है। संस्थागत निवेशकों के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग रखने से जुड़ी शर्तों में राहत दी गई है।

    वहीं, वॉल्ट मैनेजर्स के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की सीमा 50 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपए कर दी गई है। नए नियमों में स्टोरेज, सुरक्षा, इंश्योरेंस, गवर्नेंस और रिस्क मैनेजमेंट से जुड़ी शर्तों को भी मजबूत किया गया है। वॉल्ट मैनेजर्स के नियमों में गोल्ड और सिल्वर ETF तथा बुलियन डेरिवेटिव्स से जुड़े बुलियन को भी शामिल किया गया है।

    इस तरह SEBI के हालिया फैसलों में एक तरफ पोर्टफोलियो मैनेजर्स और कुछ निवेशकों के लिए निवेश के विकल्प बढ़ाए गए हैं, वहीं विज्ञापन, सेटलमेंट, रिस्क मैनेजमेंट और अनुपालन से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया गया है।

  • शुक्रवार व्रत के ये नियम बदल सकते हैं पूजा का तरीका जानिए क्या करें क्या न करें और किस चीज से रहें दूर

    शुक्रवार व्रत के ये नियम बदल सकते हैं पूजा का तरीका जानिए क्या करें क्या न करें और किस चीज से रहें दूर


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और शुक्र देव की आराधना से जुड़ा माना जाता है। वहीं कई श्रद्धालु इस दिन संतोषी माता का व्रत भी रखते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का व्रत सुख शांति सौभाग्य और समृद्धि की कामना से किया जाता है। अलग अलग परंपराओं में शुक्रवार के व्रत की पूजा विधि और नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी परंपरा के अनुसार संकल्प लेकर पूजा करनी चाहिए।

    शुक्रवार व्रत की शुरुआत करने से पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और स्वच्छ वस्त्र धारण करने की परंपरा है। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके अपने आराध्य का ध्यान किया जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु पूजा के दौरान अपनी मनोकामना के साथ व्रत का संकल्प लेते हैं। सामान्य रूप से पूजा में देवी देवता को उनके प्रिय माने जाने वाले फूल फल और प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। व्रत की कथा और आरती का भी विशेष महत्व माना जाता है।

    अगर शुक्रवार को संतोषी माता का व्रत रखा जा रहा है तो प्रचलित मान्यता के अनुसार गुड़ और चने का भोग लगाया जाता है। संतोषी माता के शुक्रवार व्रत में खट्टी चीजों से परहेज करने की परंपरा है। व्रती अपनी क्षमता के अनुसार उपवास रख सकते हैं और कई परंपराओं में एक समय सात्विक भोजन करने का विधान बताया गया है। कुछ लोग केवल फल दूध या अन्य व्रत सामग्री का सेवन करते हैं।

    माता लक्ष्मी की पूजा करने वाले श्रद्धालु शुक्रवार को घर की साफ सफाई पर विशेष ध्यान देते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार साफ और व्यवस्थित घर में लक्ष्मी का वास माना जाता है। पूजा के दौरान माता लक्ष्मी को फूल फल और मिठाई अर्पित की जाती है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल पर दीपक जलाने की परंपरा भी कई जगह प्रचलित है। कुछ मान्यताओं में सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनना और सफेद वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना गया है।

    व्रत के दौरान केवल भोजन का त्याग करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि मन और व्यवहार की शुद्धता पर भी जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार क्रोध ईर्ष्या चुगली और निंदा से बचना चाहिए। व्रत के दौरान भगवान का ध्यान मंत्र जाप भजन या धार्मिक पाठ करने की परंपरा है। जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी व्रत से जुड़े धार्मिक आचरण का हिस्सा माना जाता है।

    शुक्रवार व्रत में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति किस देवी देवता के लिए व्रत कर रहा है। संतोषी माता के व्रत में खट्टी चीजों से बचने की मान्यता प्रमुख है। वहीं सामान्य उपवास में फल दूध दही और सात्विक भोजन का सेवन करने की परंपरा कई परिवारों में है। स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार व्रत रखने का तरीका तय करना भी जरूरी है और अस्वस्थ व्यक्ति को कठोर उपवास करने से बचना चाहिए।

    व्रत पूरा होने के बाद पारण भी नियमपूर्वक करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत खोलते समय सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए और पहले भगवान को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण करना शुभ माना जाता है। इस तरह शुक्रवार का व्रत केवल उपवास तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूजा पाठ संयम दान और सकारात्मक आचरण से जुड़ी धार्मिक परंपरा के रूप में मनाया जाता है।

  • MP में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव, आज 13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

    MP में बारिश का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव, आज 13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय हो गया है। शुक्रवार को प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से में तेज बारिश का दौर रहने की संभावना है। जबलपुर समेत 13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जबकि 16 जिलों में भारी बारिश का अनुमान है। इन इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच से ज्यादा बारिश हो सकती है। सतना में अतिवृष्टि की आशंका को देखते हुए 25 और 26 सितंबर को नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। IMD के सतना पूर्वानुमान में भी 25 से 27 सितंबर तक भारी बारिश की चेतावनी है।

    13 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

    दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के बीच सक्रिय हुए सिस्टम के चलते शुक्रवार को टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, दमोह, उमरिया, जबलपुर, नरसिंहपुर, मंडला, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है।

    इनके अलावा भिंड, दतिया, निवाड़ी, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, शहडोल, डिंडौरी, अनूपपुर, सागर, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल और पांढुर्णा में भारी बारिश होने का अनुमान है।

    प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी मौसम बदला रहेगा। भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है।

    सतना में 25-26 सितंबर को स्कूल बंद

    अतिवृष्टि की संभावना को देखते हुए सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने 25 और 26 सितंबर को नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के स्कूलों में अवकाश घोषित किया है। यह आदेश शासकीय, अशासकीय, केंद्रीय, नवोदय और आईसीएसई समेत सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा। IMD के सतना पूर्वानुमान में 25, 26 और 27 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी दर्ज है।

    25-26 को ज्यादा असर, 27 को भी बारिश

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में विकसित हुआ अवदाब अब महत्वपूर्ण मौसमी सिस्टम के रूप में स्ट्रॉन्ग हो गया है। इसके कारण 25 और 26 सितंबर को प्रदेश में सिस्टम का असर ज्यादा रहने की संभावना है। 27 सितंबर को भी कई इलाकों में तेज बारिश हो सकती है। इसके बाद सिस्टम आगे बढ़ जाएगा।

    मानसून की विदाई में अब सिर्फ 6 दिन

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक रहता है। यानी मानसून की विदाई में अब छह दिन बाकी हैं। इस बार भी सितंबर के आखिरी सप्ताह से प्रदेश में मानसून की वापसी शुरू होने की संभावना है। राजस्थान के कई जिलों से मानसून विदा हो चुका है।

    सामान्य से 2.4 इंच कम बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 873.4 मिमी यानी 34.4 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक 935.1 मिमी यानी 36.8 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश में अब तक 2.4 इंच कम पानी गिरा है। ओवरऑल बारिश सामान्य से 7% कम है।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश 2% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 11% कम हुई है। पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश करीब 2% कम है।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 23% तक कम बारिश हुई है। हालांकि, पिछले एक सप्ताह में बारिश के आंकड़े में काफी सुधार आया है। गुरुवार को भी यह आंकड़ा माइनस 2% था।

    पश्चिमी हिस्से के इन जिलों में ज्यादा कमी

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 8% से 50% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    23 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी

    प्रदेश के 23 जिलों में इस सीजन अब तक औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इनमें अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी शामिल हैं।