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  • तुला राशि में बुध का प्रवेश बदल सकता है इन 3 राशियों का हाल खर्च से लेकर करियर तक बढ़ेंगी उलझनें

    तुला राशि में बुध का प्रवेश बदल सकता है इन 3 राशियों का हाल खर्च से लेकर करियर तक बढ़ेंगी उलझनें


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के राशि परिवर्तन को विशेष महत्व दिया जाता है। मान्यता है कि ग्रहों की चाल में बदलाव का प्रभाव अलग अलग राशियों पर अलग तरीके से पड़ सकता है। बुध को बुद्धि संवाद तर्क व्यापार और निर्णय क्षमता का कारक माना जाता है। ऐसे में बुध का राशि परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। 26 सितंबर 2026 को बुध तुला राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस गोचर का प्रभाव तीन राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है। इन राशि वालों को धन नौकरी व्यापार और महत्वपूर्ण निर्णयों के मामलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    इस गोचर का असर वृषभ राशि के जातकों पर दिखाई देने की संभावना बताई गई है। इस दौरान पहले से लंबित कामों को पूरा करने में उम्मीद से अधिक समय लग सकता है। किसी काम को लेकर जल्दबाजी करने के बजाय धैर्य के साथ आगे बढ़ना जरूरी रहेगा। परिवार में छोटी छोटी बातों को लेकर मतभेद की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में बातचीत के दौरान संयम बनाए रखना फायदेमंद रहेगा। यदि आप किसी नई योजना या समझौते पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं तो उसके सभी पहलुओं की अच्छी तरह जांच करना जरूरी होगा। आर्थिक मामलों में खर्च बढ़ने की संभावना के चलते बजट पर नियंत्रण रखना महत्वपूर्ण रहेगा। निवेश से जुड़े किसी फैसले में भी जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है।

    कर्क राशि वालों के लिए भी बुध का यह गोचर कुछ मामलों में सावधानी की मांग कर सकता है। इस दौरान आत्मविश्वास में कमी महसूस होने के साथ कामकाज में बार बार अड़चन आने की स्थिति बन सकती है। आर्थिक पक्ष की बात करें तो अचानक कुछ खर्च सामने आ सकते हैं। इसके अलावा कहीं फंसा हुआ धन वापस मिलने में देरी होने की संभावना भी बताई गई है। नौकरी करने वाले लोगों को कार्यस्थल पर अधिकारियों के साथ बातचीत करते समय अपने शब्दों पर विशेष ध्यान देना चाहिए और संयम बनाए रखना चाहिए। वहीं कारोबार से जुड़े लोगों के लिए बड़े निवेश और महत्वपूर्ण फैसलों में सोच विचार करना जरूरी रहेगा।

    धनु राशि के जातकों के लिए बुध का तुला राशि में गोचर करियर और शिक्षा से जुड़े मामलों में धैर्य रखने का संकेत दे रहा है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को मनपसंद अवसर हासिल करने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है। विद्यार्थियों का ध्यान पढ़ाई से भटकने की स्थिति बन सकती है इसलिए एकाग्रता बनाए रखना जरूरी होगा। व्यापार में नई साझेदारी या किसी बड़े सौदे पर आगे बढ़ने से पहले दस्तावेजों और आर्थिक पक्ष की अच्छी तरह जांच करनी चाहिए। अटके हुए कार्यों को पूरा होने में भी अपेक्षा से अधिक समय लग सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध से संबंधित परेशानियों को कम करने के लिए भगवान गणेश की उपासना को शुभ माना जाता है। गणेश मंत्र का जाप करने और उन्हें हरे रंग की मिठाई अर्पित करने की परंपरा बताई गई है। जरूरतमंद लोगों को हरी वस्तुओं का दान करने और पशुओं को हरा चारा खिलाने की सलाह भी दी जाती है। हालांकि ये उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

  • 25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर

    25 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और क्रूड ऑयल पर नजर, जानिए अहम स्तर


    नई दिल्ली। 25 सितंबर 2026 शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर रहेगी। इससे एक दिन पहले यानी 24 सितंबर को घरेलू बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। कारोबार के दौरान Sensex और Nifty दोनों दबाव में रहे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इसके साथ ही वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का असर भी भारतीय बाजार पर दिखाई दिया।

    24 सितंबर की सुबह Sensex करीब 576 अंक की गिरावट के साथ 74251 के आसपास कारोबार कर रहा था जबकि Nifty 23245 के स्तर तक फिसल गया था। बाजार में गिरावट का असर कई प्रमुख शेयरों और सेक्टर पर देखने को मिला। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर भी दबाव रहा। रिपोर्ट के मुताबिक बाजार पूंजीकरण में शुरुआती कारोबार के दौरान 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई थी।

    अब 25 सितंबर को बाजार की दिशा तय करने में Nifty के अहम तकनीकी स्तर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बाजार विश्लेषण के अनुसार 23200 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के तौर पर देखा जा रहा है। यदि Nifty इस स्तर के नीचे टिकता है तो 23100 से 23000 का क्षेत्र अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट बन सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 23500 का स्तर अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

    बाजार की चाल पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का असर भी बना रह सकता है। 24 सितंबर को अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.1 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई थी जो 2007 के बाद का ऊंचा स्तर बताया गया। बढ़ती यील्ड के कारण निवेशकों के बीच ब्याज दरों को लेकर नए अनुमान बन रहे हैं। इसका असर दुनियाभर के शेयर बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है।

    कच्चे तेल की कीमत भी निवेशकों के लिए अहम संकेत रहेगी। Brent crude 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है इसलिए तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से बाजार में तेल की हर बड़ी चाल पर नजर बनी रहेगी।

    इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। 23 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयरों में खरीदारी की थी जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक भी खरीदार रहे थे। ऐसे में 25 सितंबर को अगर संस्थागत निवेश का रुख बदलता है तो बाजार की चाल पर उसका असर दिखाई दे सकता है।

    निवेशकों के लिए फिलहाल बाजार में तेजी या गिरावट को लेकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय प्रमुख तकनीकी स्तरों और वैश्विक संकेतों पर नजर रखना जरूरी होगा। खासतौर पर Nifty का 23200 के आसपास व्यवहार और 23500 के स्तर की ओर उसकी चाल बाजार की दिशा के बारे में महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। शेयर बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम और अपनी निवेश रणनीति को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • उज्जैन: सड़क चौड़ीकरण की जद में आया CM यादव और उनकी बहन का मकान… जानें क्या बोले परिजन?

    उज्जैन: सड़क चौड़ीकरण की जद में आया CM यादव और उनकी बहन का मकान… जानें क्या बोले परिजन?


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में सिंहस्थ महाकुम्भ 2028 (Simhastha Mahakumbh 2028) की तैयारी के सिलसिले में उज्जैन (Ujjain) में बड़े पैमाने पर सड़कों के चौड़ीकरण (Road widening) का काम चल रहा है। अब इस काम की जद में राज्य के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) और उनकी बड़ी बहन व निगम सभापति कलावती यादव (Kalavati Yadav) का पैतृक मकान का भी आ गया है। जिसके बाद नगर निगम की टीम ने उनके मकानों की नप्ती कर लाल निशान लगा दिए हैं। उधर सीएम के परिजन भी शहर के विकास के लिए अपने मकान के प्रभावित हिस्से को तोड़ने के लिए तैयार हैं।

    बता दें कि उज्जैन में साल 2028 में लगने वाले सिंहस्थ महाकुम्भ को देखते हुए उज्जैन की प्रमुख सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। इसमे इंदौर रोड सहित कई स्थानों पर पुल के निर्माण किए जा रहे हैं, वहीं शहर के भीतर करीब 62 प्रमुख सड़कों का चौड़ीकरण का कार्य प्रगति पर है। इसके अलावा शहर के सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी डैम और खान डायवर्सन सहित कई बड़े प्रोजेक्ट भी सिंहस्थ की तैयारियों का हिस्सा हैं। इसी के तहत शिप्रा नदी के दोनों किनारों पर करीब 29 किमी लंबे घाट भी विकसित किए जा रहे है।


    730 मीटर लंबी रोड को 15 मीटर चौड़ा किया जाना बाकी

    इसके साथ ही उज्जैन में कई मंदिरों व मस्जिदों सहित कई धर्म स्थलों के कुछ हिस्सों को तोड़ने की तैयारी की जा रही है, इसमे कंठाल, तेलीवाड़ा, सर्राफा, पाटनी बाजार जैसे कुछ इलाकों में सड़कों का चौड़ीकरण पूरा हो चुका है। अब खजूर वाली मस्जिद से अब्दालपुरा, जीवाजीगंज थाना होते हुए गणेश चौक तक जाने वाली 730 मीटर लंबी रोड को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। इसकी जद में 272 इमारतें आ रही हैं। इनमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पैतृक मकान और उनकी बड़ी बहन नगर निगम सभापति कलावती यादव का घर भी शामिल है।


    1974 में बना था मकान, CM का बचपन बीता

    प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दादा रामचंद्र यादव ने 1974 में यह मकान बनवाया था और इस मकान में ही उनके दोनों बेटे पूनमचंद्र यादव और शंकरलाल यादव सहित सभी परिजनों का बचपन बीता। पूनमचंद्र यादव के 5 बच्चे हैं। इनमें नंदलाल यादव, नारायण यादव, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, बेटी ग्यारसी बाई और उज्जैन की नगर निगम सभापति कलावती यादव शामिल हैं। फिलहाल, इस मकान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के चाचा शंकरलाल यादव का परिवार रहता है। सड़क चौड़ीकरण में इस मकान के साथ कलावती यादव के मकान का भी करीब 15 फीट हिस्सा आ रहा है।

    ‘शहर के विकास के लिए प्रभावित हिस्से को तोड़ने को तैयार’
    मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की बहन और निगम सभापति कलावती यादव का कहना है कि वे शहर के विकास के लिए अपने मकान के प्रभावित हिस्से को तोड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि खजूर वाली मस्जिद से गणेश चौक तक सड़क चौड़ीकरण में हमारा पैतृक मकान भी आ रहा है। इस इलाके में रहने वाले सभी लोग हमारे परिवार जैसे हैं। किसी के साथ भाजपा-कांग्रेस, हिंदू-मुस्लिम के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। जिन नागरिकों के मकान प्रभावित हो रहे हैं, उनकी समस्याओं को अधिकारियों से चर्चा कर दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।

  • रीति तिवारी के गाली विवाद के बाद बिग बॉस में होगी पिता की एंट्री? मनोज तिवारी काजी तौकीर को सुना सकते हैं खरी-खोटी

    रीति तिवारी के गाली विवाद के बाद बिग बॉस में होगी पिता की एंट्री? मनोज तिवारी काजी तौकीर को सुना सकते हैं खरी-खोटी


    नई दिल्ली। बिग बॉस 20 का घर इस समय विवादों से घिरा हुआ है। शो में कंटेस्टेंट्स के बीच लगातार बहस और टकराव देखने को मिल रहा है और इसी बीच रीति तिवारी और काजी तौकीर के बीच हुआ विवाद चर्चा में बना हुआ है। बीते दिनों एक टास्क के दौरान रीति तिवारी ने काजी तौकीर और उदिति सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। मामला इतना बढ़ गया कि घरवालों को बीच में आकर दोनों पक्षों को अलग करना पड़ा। अब इसी विवाद के बीच वीकेंड का वार को लेकर एक नई चर्चा सामने आई है कि भोजपुरी अभिनेता और रीति तिवारी के पिता मनोज तिवारी शो में बेटी का समर्थन करने पहुंच सकते हैं। हालांकि उनके बिग बॉस 20 में आने की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    रिपोर्ट के मुताबिक वीकेंड का वार में मनोज तिवारी की संभावित एंट्री को लेकर चर्चा चल रही है। बताया जा रहा है कि अगर वह शो में आते हैं तो बेटी रीति के विवाद को लेकर अपनी बात रख सकते हैं। साथ ही काजी तौकीर के साथ हुए विवाद पर भी उनसे बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है। रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि परिस्थितियां ऐसी बनाई जा सकती हैं जिससे रीति को अगले सप्ताह की नॉमिनेशन प्रक्रिया से राहत मिल सके। हालांकि इन सभी बातों को फिलहाल संभावित घटनाक्रम के तौर पर ही देखा जा रहा है क्योंकि शो की ओर से मनोज तिवारी की एंट्री को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    दरअसल बुधवार के एपिसोड में बिग बॉस ने घरवालों को एक टास्क दिया था। इसमें अलग अलग टीमों के सदस्यों को रैप के अंदाज में एक दूसरे को रोस्ट करना था। कंटेस्टेंट्स ने एक दूसरे पर मजेदार टिप्पणियां कीं लेकिन रीति तिवारी और काजी तौकीर के बीच बात काफी आगे बढ़ गई। रिपोर्ट के अनुसार रीति ने काजी तौकीर और उदिति सिंह के खिलाफ गाली का इस्तेमाल किया। इसके बाद घर का माहौल गरमा गया और मामला हाथापाई तक पहुंचने की स्थिति में दिखाई दिया। घरवालों ने दोनों को अलग कर स्थिति संभाली।

    गुरुवार के एपिसोड में भी इस विवाद का असर देखने को मिला। रिपोर्ट के मुताबिक रीति ने अपनी गलती मानने के बजाय खुद को सही बताया। इसके बाद बिग बॉस 20 के प्रोमो को लेकर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई। कई दर्शकों ने रीति के व्यवहार पर प्रतिक्रिया दी और सोशल मीडिया पर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। वहीं कुछ लोगों ने इस पूरे विवाद को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं दीं। ऐसे में अब सभी की नजरें वीकेंड का वार पर टिकी हैं कि सलमान खान इस विवाद को किस तरह उठाते हैं और कंटेस्टेंट्स से क्या सवाल करते हैं।

    बिग बॉस 20 में कुल 16 कंटेस्टेंट्स ने एंट्री की थी। रिपोर्ट के मुताबिक रोहेद खान के बाहर होने के बाद अब घर में मैरी कॉम माही विज कनिका मान आम्रपाली दुबे ईशा रिखी खुशी दुबे अरिश्फा खान कुशल तंवर उर्फ गुल्लू तन्मय सिंह उर्फ ScoutOp रैपर यंग DSA आसिफ खान फैजल खान काजी तौकीर अमन गांधी उदिति सिंह और रीति तिवारी मौजूद हैं। अब वीकेंड का वार में मनोज तिवारी की संभावित एंट्री होती है या नहीं और रीति काजी विवाद पर सलमान खान क्या रुख अपनाते हैं यह आने वाले एपिसोड में साफ होगा।

  • देशभर में आज अनंत चतुर्दशी की धूम…. जानिए बप्पा के विसर्जन का शुभ मुहूर्त

    देशभर में आज अनंत चतुर्दशी की धूम…. जानिए बप्पा के विसर्जन का शुभ मुहूर्त


    नई दिल्ली।
    देशभर में 10 दिन का गणेश उत्सव (Ganesh Utsav) आज समाप्त होने जा रहा है। यानी आज गणेश जी का विसर्जन (Ganesh Visarjan 2026 Shubh Muhurat) किया जा रहा है। वहीं, आज अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) का त्योहार भी मनाया जा रहा है. अनंत चतुर्दशी के दिन केवल गणेश विसर्जन ही नहीं होता, बल्कि इस दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के ‘अनंत’ (असीम) रूप की पूजा भी की जाती है.

    पौराणिक मान्यता के मुताबिक, गणपति विसर्जन के दिन बप्पा दोबारा अपने धाम कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान कर जाते है और पीछे छोड़ जाते हैं सुख, समृद्धि और शुभता का आशीर्वाद. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर वेदव्यास जी द्वारा बोले गए महाभारत के लेखन कार्य को पूर्ण करने के बाद गणेश जी ने शीतल जल में स्नान किया था. साथ ही, यह दिन सृष्टि के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के ‘अनंत’ रूप की आराधना का भी विशेष पर्व माना जाता है. आइए जानते हैं अनंत चतुर्दशी के इस महापर्व पर गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजन विधि.।

    गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

    – प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)- सुबह 06 बजकर 11 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक
    – अपराह्न मुहूर्त (चर)- शाम 4 बजकर 44 मिनट से लेकर 6 बजकर 14 मिनट तक
    – अपराह्न मुहूर्त (शुभ)- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से लेकर 1 बजकर 43 मिनट तक
    – रात्रि मुहूर्त (लाभ)- रात 9 बजकर 14 मिनट से लेकर 10 बजकर 43 मिनट तक.
    – रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर)- 12:13 ए एम से 04:42 ए एम, सितम्बर 26


    गणेश विसर्जन तिथि

    द्रिक पंचांग के अनुसार, गणेश विसर्जन की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 25 सितंबर यानी आज रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगी.


    गणेश विसर्जन की सही एवं संपूर्ण विधि

    सबसे पहले विसर्जन से पूर्व गणेश जी की विधिवत अंतिम पूजा करें. गणेश जी को लाल चंदन, दूर्वा, मोदक, लड्डू, फूल और फल अर्पित करें. फिर, कपूर जलाकर गणेश जी की आरती गाएं. इसके बाद जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए हाथ जोड़कर क्षमा मांगें.


    पूजा समाप्त होने पर कहें ये मंत्र-

    “गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थाने परमेश्वर।
    यत्र ब्रह्मादयो देवाः तत्र गच्छ हुताशन॥”

    इसके बाद लकड़ी के पटरे (चौकी) को थोड़ा सा हिलाएं. यह इस बात का संकेत है कि बप्पा की स्थापना का समय समाप्त हो गया है. चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा को विराजमान करें. साथ ही, उनके साथ पूजा सामग्री, थोड़े से चावल, और मोदक की एक छोटी सी पोटली बांधकर रखें. बाप्पा को पूरे सम्मान के साथ सिर या हाथों में उठाकर विसर्जन स्थल तक ले जाएं. रास्ते भर “गणपति बप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या!” के जयकारे लगाएं. विसर्जन स्थल (नदी, तालाब या घर के कुंड) पर पहुंचकर एक बार फिर आरती करें. तत्पश्चात प्रतिमा को धीरे-धीरे और आदरपूर्वक जल में प्रवाहित करें।


    इको-फ्रेंडली विसर्जन

    – एक बड़े गमले, बाल्टी या टब में साफ जल भरें.
    – गणेश जी की प्रतिमा को मंत्रों और जयकारों के साथ जल में धीरे से डुबोएं.
    – जब मिट्टी पूरी तरह घुल जाए, तो उस जल और मिट्टी को घर के पौधों या बगीचे में डाल दें. इससे बप्पा का आशीर्वाद पेड़-पौधों के रूप में हमेशा आपके घर में रहेगा.

  • केदारनाथ में 5 माह में निकला 50.3 मीट्रिक टन कचरा…. पिछले पूरे साल से ढाई गुना ज्यादा

    केदारनाथ में 5 माह में निकला 50.3 मीट्रिक टन कचरा…. पिछले पूरे साल से ढाई गुना ज्यादा


    देहरादून।
    केदारनाथ धाम (Kedarnath Dham) से इस साल कचरे के बढ़ते आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं. दरअसल, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच यहां 50.30 मीट्रिक टन कचरा (50.30 Metric Tonnes Waste) निकला है. यह कचरा पिछले साल पूरे टूरिस्ट सीजन (Tourist season) में जुटाए गए कचरे से ढाई गुना से भी ज्यादा है।

    यह जानकारी नगर पंचायत ने आरटीआई के जवाब में दी है. दरअसल, नोएडा के आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने केदारनाथ में कचरे को लेकर यह सवाल उठाया था. जवाब मिलने के बाद केदारनाथ की सफाई व्यवस्था और पर्यावरण पर फिर बहस शुरू हो गई है।

    पिछले तीन सालों के मुकाबले तेजी से बढ़ा कचरा
    नगर पंचायत की ओर से जारी आकंड़ो के मुताबिक केदारनाथ में 2023 में 32.58 मीट्रिक टन कचरा निकला था. 2024 में यह आंकड़ा 26.10 मीट्रिक टन रहा. 2025 में कचरा और घटकर 21.40 मीट्रिक टन रह गया था. लेकिन 2026 में सिर्फ पांच महीनों में ही 50.30 मीट्रिक टन कचरा निकल गया।

    2026 का यह आकंड़ा 2023 के कुल कचरे से करीब 54 प्रतिशत ज्यादा है. 2024 के मुकाबले यह लगभग 93 प्रतिशत ज्यादा है. 2025 की तुलना में यह करीब 135 प्रतिशत ज्यादा है.

    महीनेवार आंकड़े भी यही कहानी बता रहे हैं. अप्रैल 2026 में 1.7 मीट्रिक टन कचरा निकला. मई में यह बढ़कर 16.3 मीट्रिक टन हो गया. वहीं जून में 11.5 मीट्रिक टन, जुलाई में 10.5 मीट्रिक टन और अगस्त में 10.3 मीट्रिक टन कचरा दर्ज किया गया. मई का आंकड़ा सबसे ज्यादा रहा. इससे साफ है कि तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ कचरा भी तेजी से बढ़ रहा है.


    पहाड़ी इलाकों में प्लास्टिक का निपटान भी मुश्किल

    नगर पंचायत ने प्लास्टिक कचरे का भी ब्योरा दिया है. इन आकंड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक करीब 20 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा निकला है. इसमें से 18.5 मीट्रिक टन, यानी 92.5 प्रतिशत, प्रोसेस कर दिया गया है. करीब 1.5 मीट्रिक टन प्लास्टिक अभी बचा हुआ है. यह आंकड़ा बताता है कि प्लास्टिक का दबाव भी कम नहीं है. पहाड़ी इलाकों में प्लास्टिक का निपटान और भी मुश्किल हो जाता है।

    नगर पंचायत का कहना है कि केदारनाथ में लैंडफिल की कुल क्षमता 30,000 वर्ग फुट है. इसमें 28,000 वर्ग फुट जगह अभी बची हुई है. पिछले पांच साल में केदारनाथ में चार लैंडफिल बनाए गए हैं. लेकिन आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता का कहना है कि बढ़ते कचरे के बीच लैंडफिल पर निर्भरता हिमालयी पर्यावरण के लिए खतरनाक हो सकती है. इतने संवेदनशील क्षेत्र में यह हाल किसी गंभीर चेतावनी से कम नहीं है।

    आरटीआई कार्यकर्ता अमित गुप्ता ने कहा कि इस साल अब तक करीब 15 लाख श्रद्धालु केदारनाथ पहुंच चुके हैं. इतनी बड़ी भीड़ से वहां की सफाई और कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर दबाव और बढ़ गया है. गुप्ता ने कहा कि हमें ही अपने पवित्र और संवेदनशील तीर्थ स्थान को कचरे का ढेर बनने से बचाना होगा. यात्रा व्यवस्था के साथ पर्यावरण सुरक्षा को भी उतनी ही गंभीरता से लेना होगा।

  • 28 सितंबर से 3 दिन हड़ताल… दूसरे बैंक के ATM से निकासी पर नहीं लगेगा शुल्क, रविवार को भी खुलेंगे बैंक

    28 सितंबर से 3 दिन हड़ताल… दूसरे बैंक के ATM से निकासी पर नहीं लगेगा शुल्क, रविवार को भी खुलेंगे बैंक


    नई दिल्ली।
    बैंक यूनियनों (Bank Unions) की 28 सिंतबर से प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी हड़ताल (Three-day Nationwide Strike) के दौरान दूसरे बैंकों के एटीएम (ATMs Other Banks) से पैसे निकालने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सेंट्रल बैंक, पंजाब एंड सिंध समेत कई बैंकों ने इस संबंध में घोषणा की है। 

    हड़ताल के मद्देनजर 27 सितंबर रविवार को बैंक खुले रहेंगे। उधर, हड़ताल को देखते हुए केंद्र ने सितंबर के वेतन व पेंशन का भुगतान 5 दिन पहले करने का फैसला किया है। केंद्रीय कर्मियों, औद्योगिक कर्मचारियों और पेंशनरों के खाते में वेतन व पेंशन शुक्रवार को ही भेजने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे कर्मियों का वेतन भी इसी के साथ आएगा।

  • BJP ने 5 राज्यों के चुनाव में खर्च किए 529.38 करोड़ रुपये, सबसे ज्यादा बंगाल में 287 करोड़

    BJP ने 5 राज्यों के चुनाव में खर्च किए 529.38 करोड़ रुपये, सबसे ज्यादा बंगाल में 287 करोड़


    नई दिल्ली
    । भाजपा (BJP) ने पांच राज्यों- असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों (Assembly elections) में कुल 529.38 करोड़ रुपये खर्च किए। इसमें सबसे ज्यादा 286.99 करोड़ रुपये पश्चिम बंगाल (West Bengal) में खर्च हुए। बंगाल में पार्टी ने चुनाव प्रचार पर 217.16 करोड़ रुपए और उम्मीदवारों पर 69.83 करोड़ रुपए खर्च किए। बाकी 4 राज्यों में पार्टी ने 242 करोड़ रुपए खर्च किए। वहीं, कांग्रेस (Congress) ने कुल मिले चुनावी फंड 207.17 करोड़ रुपये में से सबसे ज्यादा केरल चुनाव में 105.34 करोड़ रुपए खर्च किए। भाजपा का बंगाल में खर्च कांग्रेस के पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में किए गए कुल 248.55 करोड़ रुपए के खर्च से ज्यादा रहा। सीपीआई(एम) का कुल खर्च 39.04 करोड़ रुपए रहा। इसका खुलासा चुनाव आयोग को सौंपी गई खर्च रिपोर्ट से हुआ है। कांग्रेस ने बंगाल चुनाव में 42.08 करोड़ रुपए खर्च किए।


    बंगाल में भाजपा ने 207 सीटों पर जमाया कब्जा

    बंगाल में भाजपा ने 293 सीटों में से 207 सीटें जीतीं, जबकि तृणमूल को 80 सीटें मिलीं। कांग्रेस ने राज्य में 293 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा और 2 सीटें जीतीं।


    कांग्रेस ने 42 करोड़ खर्चे

    कांग्रेस ने बंगाल में कुल 42.08 करोड़ रुपए खर्च किए। इसमें 12.96 करोड़ रुपए प्रचार और 29.12 करोड़ रुपए उम्मीदवारों से जुड़े खर्च पर लगाए गए। सीपीआई (एम) ने बंगाल में 197 सीटों पर चुनाव लड़ा और एक सीट जीती। पार्टी ने चुनाव में 8.23 करोड़ रुपए खर्च किए। वहीं, तृणमूल की चुनावी खर्च रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।


    केरल में कांग्रेस खर्च में आगे

    केरल में कांग्रेस ने चुनाव में 105.34 करोड़ रुपए खर्च किए। इसमें प्रचार पर 71.30 करोड़ और उम्मीदवारों पर 34.05 करोड़ रुपए खर्च करना शामिल है। बीजेपी ने केरल में प्रचार पर 54.93 करोड़ और उम्मीदवारों पर 27.74 करोड़ रुपए खर्च किए। सीपीआई (एम) ने 26.30 करोड़ प्रचार और 2.31 करोड़ रुपए उम्मीदवारों पर लगाए।


    भाजपा को चुनाव के दौरान 1,472.8 करोड़ फंड मिला

    बीजेपी ने असम में 96.27 करोड़ रुपए, तमिलनाडु में 51.56 करोड़ रुपए, पुडुचेरी में 11.90 करोड़ रुपए खर्च किए। 5 राज्यों में चुनाव के दौरान भाजपा को 1,472.8 करोड़ रुपए मिले। वहीं, कांग्रेस को 207.17 करोड़ रुपए मिले।

  • मां लक्ष्मी की कृपा पाने का खास उपाय, शुक्रवार को पढ़ें शीला की व्रत कथा, बदल सकती है जीवन की दिशा

    मां लक्ष्मी की कृपा पाने का खास उपाय, शुक्रवार को पढ़ें शीला की व्रत कथा, बदल सकती है जीवन की दिशा


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु मां लक्ष्मी के वैभव लक्ष्मी स्वरूप की पूजा करते हैं और सुख समृद्धि धन वैभव तथा परिवार की खुशहाली की कामना से व्रत रखते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार शुक्रवार के दिन श्रद्धा के साथ मां लक्ष्मी का पूजन करने और व्रत कथा का श्रवण करने से मन को शांति मिलती है। वैभव लक्ष्मी व्रत की प्रचलित कथा में शीला नाम की एक महिला की कहानी बताई जाती है जिसके जीवन में कठिन परिस्थितियों के बीच मां लक्ष्मी का मार्गदर्शन आता है।

    कथा के अनुसार एक नगर में शीला नाम की महिला अपने पति के साथ रहती थी। शुरुआत में उसका परिवार सुखी था लेकिन समय के साथ पति गलत संगति में पड़ गया। धीरे धीरे घर की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी और परिवार में परेशानियां बढ़ती चली गईं। पति के व्यवहार में भी बदलाव आ गया। इन परिस्थितियों से शीला काफी दुखी रहने लगी लेकिन उसने भगवान पर अपना विश्वास नहीं छोड़ा।

    एक दिन शीला को एक वृद्ध महिला मिली। उस महिला ने उसके दुख को समझा और उसे शुक्रवार को मां लक्ष्मी का वैभव लक्ष्मी व्रत करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि श्रद्धा और नियम के साथ यह व्रत किया जाता है और व्रत के दौरान मां लक्ष्मी का ध्यान तथा कथा का पाठ किया जाता है। धार्मिक कथा के अनुसार वृद्ध महिला ने शीला को व्रत की विधि और संकल्प के बारे में भी बताया।

    शीला ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और मां लक्ष्मी के सामने व्रत करने का संकल्प लिया। कथा में बताया जाता है कि जब उसने आंखें खोलीं तो वह वृद्ध महिला वहां नहीं थीं। शीला को विश्वास हुआ कि स्वयं मां लक्ष्मी उसके मार्गदर्शन के लिए उस रूप में आई थीं। इसके बाद उसने श्रद्धा के साथ शुक्रवार का व्रत शुरू किया।

    शीला ने सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण किए और पूरे भक्तिभाव से मां लक्ष्मी का पूजन किया। शाम को पूजा के दौरान दीपक जलाया गया और मां को प्रसाद अर्पित किया गया। प्रचलित वैभव लक्ष्मी व्रत कथा में श्री यंत्र और लक्ष्मी के विभिन्न स्वरूपों के पूजन का भी उल्लेख मिलता है। व्रत के दौरान किसी की निंदा या चुगली से बचने और मन को सकारात्मक रखने की बात कही गई है।

    कथा के अनुसार शीला ने लगातार श्रद्धा के साथ व्रत किया। धीरे धीरे उसके परिवार की परिस्थितियों में बदलाव आने लगा। पति के व्यवहार में भी सुधार हुआ और उसने मेहनत से काम करना शुरू किया। समय के साथ परिवार में फिर से सुख शांति और आर्थिक स्थिरता आने लगी। शीला का विश्वास मां लक्ष्मी के प्रति और मजबूत हो गया।

    प्रचलित मान्यता के अनुसार वैभव लक्ष्मी व्रत को 11 या 21 शुक्रवार तक करने का संकल्प लिया जाता है। अंतिम शुक्रवार को उद्यापन की परंपरा बताई गई है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी को खीर या अन्य प्रसाद अर्पित किया जाता है और श्रद्धा के अनुसार महिलाओं या कन्याओं को प्रसाद तथा पूजन सामग्री दी जाती है। अलग अलग परंपराओं में उद्यापन की विधि अलग हो सकती है।

    माता लक्ष्मी की यह कथा भक्तों को श्रद्धा धैर्य और अच्छे आचरण का संदेश देती है। धार्मिक मान्यता है कि शुक्रवार को पूरे विश्वास के साथ मां लक्ष्मी का स्मरण और पूजन करने से घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखते हैं और माता से परिवार की सुख शांति तथा समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

  • मुस्लिमों के पवित्र शहर मक्का पर मिसाइल अटैक का खतरा…. हूती विद्रोही कर सकते हैं हमला

    मुस्लिमों के पवित्र शहर मक्का पर मिसाइल अटैक का खतरा…. हूती विद्रोही कर सकते हैं हमला


    मक्का।
    मुस्लिमों (Muslims) के सबसे पवित्र शहर मक्का (Holiest city, Mecca) पर हमले का साया मंडरा रहा है। ये बात खुद सऊदी अरब (Saudi Arabia) की सुरक्षा एजेंसियां कह रही हैं। उन्हें डर है कि ईरान समर्थित हूती विद्रोही (Houthi rebels) इस पवित्र शहर को अपना निशाना बना सकते हैं। सऊदी सिविल डिफेंस ने गुरुवार को पवित्र शहर मक्का और अन्य इलाकों के लिए अलर्ट जारी किया है। अमूमन ऐसी चेतावनियां मिसाइल हमले के संभावित खतरे का संकेत देती हैं। एजेंसी ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर एक पोस्ट में कहा, “मक्का शहर में संभावित खतरे के बारे में आगाह करने के लिए ‘नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म’ की ओर से चेतावनी जारी की गई है।”

    10 दिनों से भी कम समय में यह दूसरी बार है, जब अधिकारियों ने मक्का के लिए ऐसी चेतावनी जारी की है। सऊदी अरब के पश्चिमी तट के अन्य इलाकों के लिए भी अलग-अलग चेतावनियां जारी की गईं, जिनमें लाल सागर के किनारे बसा यानबू (Yanbu) शहर और ताइफ, जेद्दा और तबुक इलाके शामिल हैं। समाचार एजेंसी AFP के अनुसार, कुछ मिनटों बाद ये अलर्ट हटा लिए गए। हाल के हफ्तों में, ऐसे अलर्ट के बाद यमन के हूती विद्रोहियों (ईरान समर्थित एक सशस्त्र समूह) ने हमले किए हैं।

    पिछले हफ्ते, सऊदी अरब ने हूतियों पर मक्का को ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश का आरोप लगाया था, जिसे मार गिराया गया। सऊदी अरब ने कहा कि 2017 के बाद से ऐसी कोशिश पहली बार हुई थी। दूसरी तरफ, हूती समूह ने इन आरोपों से इनकार किया है। पिछला अलर्ट 15 सितंबर को जारी किया गया था, जब सऊदी अरब की एयर डिफेंस सिस्टम ने मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया था। वह ड्रोन प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल नहीं हो पाया था। कुछ दिनों बाद, हूतियों ने कई सालों में पहली बार सऊदी राजधानी रियाद को निशाना बनाया, जिससे इस संघर्ष में तनाव और बढ़ गया।

    बता दें कि ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार के बीच नई लड़ाई चल रही है, जो तेहरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच हो रही है। यह संघर्ष तब शुरू हुआ, जब इस सशस्त्र समूह ने सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की और लाल सागर में उसके जहाजों को निशाना बनाया। इस महीने की शुरुआत में, हूतियों ने सऊदी समर्थित सरकारी बलों से इलाके छीनने के बाद बाब अल-मंडेब स्ट्रेट के पास रणनीतिक तटीय इलाकों पर कब्जा कर लिया। यह इलाका सऊदी अरब के तेल निर्यात के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।