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  • दतिया उपचुनाव में लोकतंत्र का महापर्व मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें सड़क के मुद्दे पर विरोध के बीच दोनों दलों ने किया जीत का दावा

    दतिया उपचुनाव में लोकतंत्र का महापर्व मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें सड़क के मुद्दे पर विरोध के बीच दोनों दलों ने किया जीत का दावा


    दतिया  दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए गुरुवार सुबह सात बजे से मतदान शांतिपूर्ण माहौल में शुरू हुआ। सुबह से ही मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं और लोगों ने लोकतंत्र के इस महापर्व में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। शुरुआती घंटों में ही 16.33 प्रतिशत मतदान दर्ज होने से चुनाव को लेकर लोगों की सक्रिय भागीदारी साफ दिखाई दी। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मतदाता समय से पहले मतदान केंद्रों पर पहुंच गए जिससे पूरे जिले में चुनावी माहौल उत्साहपूर्ण बना रहा।

    हालांकि मतदान के बीच एक स्थान पर स्थानीय समस्या भी प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई। बसई क्षेत्र के लखनपुर गांव के ग्रामीणों ने मुख्य सड़क निर्माण की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार कर दिया और सड़क नहीं तो वोट नहीं के नारे लगाए। ग्रामीणों का कहना था कि लंबे समय से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सूचना मिलने पर प्रशासन हरकत में आया और एसडीएम अशोक अवस्थी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया जिसके बाद लगभग पचास ग्रामीणों ने मतदान में हिस्सा लिया।

    चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपने अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने मतदान करने के बाद दावा किया कि जनता इस बार भाजपा के अहंकार को जवाब देगी और कांग्रेस ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि बसई क्षेत्र में कांग्रेस के पोलिंग एजेंट को बूथ के भीतर प्रवेश नहीं करने दिया गया। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग भी की।

    वहीं भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने मतदान से पहले मां पीतांबरा पीठ पहुंचकर दर्शन किए और दतिया के विकास युवाओं के रोजगार तथा भयमुक्त वातावरण की कामना की। इसके बाद उन्होंने अपने मतदान केंद्र पर पहुंचकर पोलिंग एजेंटों से मुलाकात की और विश्वास जताया कि जनता विकास के पक्ष में मतदान कर रही है तथा भाजपा को भरपूर समर्थन मिलेगा।

    जिले में कुल 291 मतदान केंद्र बनाए गए हैं जहां दो लाख बीस हजार चार सौ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग ने स्वतंत्र निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। संवेदनशील मतदान केंद्रों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं जबकि सेक्टर मोबाइल दल लगातार क्षेत्र में गश्त कर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मंजीत सिंह चावला ने कई मतदान केंद्रों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। वहीं कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि सभी मतदान केंद्रों पर निर्धारित समय पर मतदान शुरू हुआ और पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संचालित की जा रही है। प्रशासन ने मतदाताओं से निर्भय होकर मतदान करने की अपील भी की।

    दतिया उपचुनाव में शुरुआती मतदान प्रतिशत और मतदाताओं के उत्साह ने संकेत दिया है कि लोकतंत्र के इस महत्वपूर्ण अवसर पर जनता अपने अधिकार का उपयोग करने के लिए पूरी तरह जागरूक है। अब सभी की नजर मतदान समाप्त होने के बाद आने वाले नतीजों पर टिकी हुई है जो यह तय करेंगे कि दतिया की जनता ने किस पर अपना भरोसा जताया है।

  • सावन का महीना आज से शुरू, जानें जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि और पूरे महीने के जरूरी नियम

    सावन का महीना आज से शुरू, जानें जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि और पूरे महीने के जरूरी नियम


    नई दिल्ली । भगवान शिव को समर्पित पवित्र सावन मास का शुभारंभ आज से हो गया है, जो 28 अगस्त तक चलेगा। हिंदू धर्म में इस पूरे महीने को शिव आराधना, तप, व्रत और भक्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि सावन में विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस वर्ष सावन के पहले दिन कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

    आज जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त
    सावन के पहले दिन भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए कई शुभ समय निर्धारित हैं—
    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:36 बजे से 5:24 बजे तक
    प्रातः संध्या: सुबह 4:39 बजे से 5:41 बजे तक
    अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:20 बजे से 1:12 बजे तक
    विजय मुहूर्त: शाम 4:28 बजे से 5:29 बजे तक
    प्रदोष काल: शाम 5:32 बजे से रात 8:30 बजे तक

    पहले दिन बन रहे हैं कई शुभ योग
    सावन के आरंभ पर श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग, शश महापुरुष राजयोग, हंस राजयोग और गुरु-आदित्य राजयोग का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इन योगों में शिव पूजा और जलाभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

    सावन सोमवार की तिथियां
    3 अगस्त – पहला सावन सोमवार
    10 अगस्त – दूसरा सावन सोमवार
    17 अगस्त – तीसरा सावन सोमवार
    24 अगस्त – चौथा सावन सोमवार

    ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
    सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग पर तांबे के पात्र से शुद्ध जल, गंगाजल और कच्चा दूध अर्पित करें। बेलपत्र, धतूरा, भांग, आंकड़े के फूल, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, अक्षत और शहद चढ़ाकर धूप-दीप करें। फिर शिव चालीसा, रुद्राष्टकम का पाठ तथा ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। अंत में फल, मिठाई या पंचामृत का भोग लगाकर आरती करें।

    सावन में क्या करें
    – प्रतिदिन शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें।
    – सात्विक भोजन का पालन करें।
    – जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करें।
    – ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का नियमित जाप करें।

    किन बातों से करें परहेज
    – मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और बासी भोजन का सेवन न करें।
    – बाल, नाखून और दाढ़ी कटवाने से बचें।
    – घर में कलह और किसी का अपमान करने से परहेज करें।
    – मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें।

    सावन का धार्मिक महत्व
    हिंदू मान्यता के अनुसार सावन भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था, जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे ‘नीलकंठ’ कहलाए। विष की ज्वाला शांत करने के लिए देवताओं ने उन पर जल अर्पित किया था। तभी से सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक की परंपरा चली आ रही है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लंबी कूद में चमके मुरली श्रीशंकर 8.09 मीटर की छलांग लगाकर भारत को दिलाया सिल्वर

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में लंबी कूद में चमके मुरली श्रीशंकर 8.09 मीटर की छलांग लगाकर भारत को दिलाया सिल्वर


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। भारत के स्टार लॉन्ग जंपर मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश को सिल्वर मेडल दिलाया। ग्लासगो में आयोजित फाइनल मुकाबले में श्रीशंकर ने 8.09 मीटर की शानदार छलांग लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया और एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का गौरव बढ़ाया।

    केरल के पलक्कड़ के रहने वाले 27 वर्षीय श्रीशंकर ने प्रतियोगिता की शुरुआत 8.03 मीटर की छलांग से की। इसके बाद दूसरे प्रयास में उन्होंने 8.09 मीटर की दूरी तय की जो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन साबित हुआ। इसके बाद कुछ प्रयास फाउल रहे लेकिन उन्होंने आत्मविश्वास बनाए रखा और अंतिम दो प्रयासों में 7.94 मीटर तथा 7.97 मीटर की छलांग लगाकर अपना अभियान समाप्त किया। पूरे मुकाबले के दौरान वह पदक की दौड़ में मजबूती से बने रहे।

    यह उपलब्धि श्रीशंकर के करियर की एक और बड़ी सफलता है। इससे पहले उन्होंने 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भी सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रचा था। वह कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुषों की लंबी कूद में पदक जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट बने थे। अब ग्लासगो में भी उन्होंने लगातार दूसरी बार सिल्वर जीतकर अपनी प्रतिभा और निरंतरता को साबित कर दिया है।

    इस मुकाबले में जमैका के विश्व चैंपियन ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने 8.08 मीटर की छलांग के साथ ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा क्योंकि चार खिलाड़ियों ने आठ मीटर से अधिक दूरी तय की लेकिन श्रीशंकर का प्रदर्शन उन्हें दूसरे स्थान तक पहुंचाने में सफल रहा।

    भारत के लिए इस स्पर्धा में एक और एथलीट लोकेश सत्यनाथन भी उतरे थे। उन्होंने 7.97 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर पांचवां स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक से चूक गए लेकिन उनका प्रदर्शन भी सराहनीय रहा और भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत छोड़ गया।

    श्रीशंकर के इस सिल्वर मेडल के साथ भारत के कुल पदकों की संख्या और बढ़ गई। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स दोनों में भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता जा रहा है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि भारतीय खिलाड़ी अब विश्व स्तर की प्रतियोगिताओं में हर इवेंट में मजबूत चुनौती पेश कर रहे हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय दल का आत्मविश्वास लगातार बढ़ रहा है। वेटलिफ्टिंग पैरा एथलेटिक्स और अब लंबी कूद जैसे इवेंट में मिले पदकों ने देश की उम्मीदों को और मजबूत किया है। श्रीशंकर की यह सफलता आने वाले युवा खिलाड़ियों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और भारतीय एथलेटिक्स को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • ग्लासगो में भारत की रफ्तार का जलवा 100 मीटर टी47 में गोल्ड और सिल्वर जीतकर पैरा एथलीट्स ने बढ़ाया देश का मान

    ग्लासगो में भारत की रफ्तार का जलवा 100 मीटर टी47 में गोल्ड और सिल्वर जीतकर पैरा एथलीट्स ने बढ़ाया देश का मान


    नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के पैरा एथलीटों ने ऐसा प्रदर्शन किया जिसने पूरे देश को गर्व से भर दिया। ग्लासगो में आयोजित पुरुषों की 100 मीटर टी47 फाइनल स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने गोल्ड और सिल्वर दोनों पदकों पर कब्जा जमाकर इतिहास रच दिया। यह उपलब्धि केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं रही बल्कि भारतीय पैरा एथलेटिक्स के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की मेहनत का भी शानदार प्रमाण बन गई।

    भारत के दिलीप महादु गावित ने 10.71 सेकंड का समय निकालते हुए न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया बल्कि नया गेम्स रिकॉर्ड भी कायम कर दिया। यह उनके करियर का इस सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। वहीं दूसरे भारतीय धावक मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ ने 10.83 सेकंड का समय निकालकर रजत पदक अपने नाम किया और भारत को इस स्पर्धा में वन टू फिनिश दिलाई। इंग्लैंड के केविन सैंटोस 10.85 सेकंड के साथ तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें कांस्य पदक मिला।

    दिलीप गावित की यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक बन गई। वह कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में पैरा एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए हैं। इससे पहले महिला शॉट पुट एफ57 वर्ग में शर्मिला ने भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था। अब दिलीप का नाम भी भारतीय पैरा खेलों के स्वर्णिम इतिहास में दर्ज हो गया है।

    इस शानदार प्रदर्शन के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का तीसरा स्वर्ण पदक भी आया। इससे पहले मीराबाई चानू और शर्मिला स्वर्ण जीत चुकी थीं। दिलीप और बासिल की सफलता के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है जिसमें 3 गोल्ड 9 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज पदक शामिल हैं। इससे पदक तालिका में भारत की स्थिति भी और मजबूत हुई है।

    महाराष्ट्र के नासिक के पास स्थित तोरण डोंगरी गांव से आने वाले दिलीप गावित लंबे समय से भारतीय पैरा एथलेटिक्स का बड़ा नाम रहे हैं। उन्होंने एशियन पैरा गेम्स 2022 में 400 मीटर टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत के लिए ऐतिहासिक 100वां पदक दिलाया था। इसके अलावा पेरिस पैरालंपिक 2024 के फाइनल में पहुंचकर भी उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था। अब कॉमनवेल्थ गेम्स में गेम्स रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ दिया है।

    वहीं केरल के मलप्पुरम जिले के वेलियानकोड के रहने वाले मोहम्मद बासिल मोर्सिंगनाकथ भी लगातार मेहनत और अनुशासित प्रशिक्षण के दम पर भारतीय पैरा स्प्रिंटिंग में नई पहचान बना रहे हैं। तिरुवनंतपुरम स्थित एलएनसीपीई साई केंद्र में कोच श्रीनिवासन के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेने वाले बासिल ने इस प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर साबित कर दिया कि भारत के पास विश्व स्तर पर चुनौती देने वाले प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा खिलाड़ियों का यह प्रदर्शन आने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भी बेहद उत्साहजनक माना जा रहा है। दिलीप और बासिल की सफलता ने यह संदेश दिया है कि भारतीय पैरा एथलीट अब केवल भागीदारी नहीं बल्कि स्वर्णिम इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतर रहे हैं। उनकी उपलब्धि देश के लाखों युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

  • जॉर्डन मिसाइल हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, ईरान पर फिर शुरू हुई एयरस्ट्राइक

    जॉर्डन मिसाइल हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, ईरान पर फिर शुरू हुई एयरस्ट्राइक


    नई दिल्ली। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाने की कथित कोशिश के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार रात ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गई, जिससे कुछ समय के लिए रुका सैन्य अभियान दोबारा शुरू हो गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इससे पहले इस सप्ताह ईरान की ओर से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने का दावा किया गया था।

    मिसाइल हमले के जवाब में सैन्य कार्रवाई
    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान से दागी गई सभी मिसाइलों को बीच रास्ते में ही निष्क्रिय कर दिया गया और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। अमेरिकी सेना ने इसे मध्य-पूर्व में तैनात अपने सैनिकों पर हमला करने की कोशिश बताया। CENTCOM ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि गुरुवार रात (अमेरिकी समयानुसार) ईरान के खिलाफ जवाबी हवाई अभियान शुरू किया गया। सेना का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी ठिकानों पर कथित मिसाइल हमले के जवाब में की गई है।

    ट्रंप ने दी थी कड़ी चेतावनी
    एयरस्ट्राइक शुरू होने से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि अमेरिकी सैनिकों पर किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि यदि अमेरिकी हितों को निशाना बनाया गया तो जिम्मेदार पक्ष को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

    इराक में भी संयुक्त अभियान
    इस बीच अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के खिलाफ संयुक्त हवाई अभियान भी चलाया। पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि कार्रवाई के दौरान पूर्वी इराक में मिलिशिया के हथियार भंडार और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का आरोप है कि पिछले तीन दिनों में उसके सैन्य ठिकानों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमलों के पीछे ईरान समर्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का हाथ है।

    कूटनीतिक प्रयासों के बीच बढ़ा तनाव
    हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत की खबरें भी सामने आई थीं। इसी वजह से अमेरिका ने पिछले सप्ताह अपने हवाई अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया था, ताकि कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं का आकलन किया जा सके। हालांकि, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर कथित मिसाइल हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया और अमेरिका ने दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।

    नेतन्याहू से मुलाकात के बाद तेज हुई रणनीति
    अमेरिका की ताजा कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच ईरान को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में कूटनीति, आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य विकल्पों सहित कई संभावित रणनीतियों पर विचार किया गया।

  • राहु 2 अगस्त को बदलेंगे नक्षत्र, मंगल के प्रभाव से मेष समेत इन 4 राशियों की चमकेगी किस्‍मत

    राहु 2 अगस्त को बदलेंगे नक्षत्र, मंगल के प्रभाव से मेष समेत इन 4 राशियों की चमकेगी किस्‍मत


    नई दिल्ली। सावन माह की शुरुआत के साथ ही ग्रह-नक्षत्रों में भी महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, 2 अगस्त 2026 को राहु अपने स्वामित्व वाले शतभिषा नक्षत्र से निकलकर मंगल के स्वामित्व वाले धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में राहु को अप्रत्याशित परिणाम देने वाला ग्रह माना जाता है। ऐसे में यह नक्षत्र परिवर्तन कुछ राशियों के लिए करियर, धन और सफलता के नए अवसर लेकर आ सकता है।

    धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल हैं, जो साहस, ऊर्जा और भूमि से जुड़े कार्यों के कारक माने जाते हैं। इसलिए राहु का यह गोचर कई लोगों के लिए उन्नति और आर्थिक लाभ के संकेत दे रहा है।

    मेष राशि
    मेष राशि के स्वामी मंगल होने से राहु का यह नक्षत्र परिवर्तन शुभ परिणाम देने वाला माना जा रहा है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है और आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है। लंबे समय से रुके कार्य पूरे होने लगेंगे। नया कारोबार या नया प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए भी समय अनुकूल रह सकता है।

    मिथुन राशि
    मिथुन राशि के जातकों के लिए यह गोचर भाग्य का साथ लेकर आ सकता है। विदेश यात्रा, विदेशी व्यापार या दूरस्थ क्षेत्रों से जुड़े कार्यों में लाभ मिलने के संकेत हैं। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या वेतन वृद्धि के अवसर मिल सकते हैं। समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ने की भी संभावना है।

    तुला राशि
    तुला राशि वालों के लिए यह समय संपत्ति और निवेश के लिहाज से लाभकारी माना जा रहा है। जमीन, मकान या वाहन खरीदने की योजना साकार हो सकती है। पुराने निवेश से अच्छा लाभ मिलने के योग हैं। प्रतियोगी परिस्थितियों में सफलता मिलने और विरोधियों पर बढ़त बनाने के संकेत भी हैं।

    कुंभ राशि
    धनिष्ठा नक्षत्र का संबंध कुंभ राशि से भी माना जाता है। ऐसे में राहु का यह परिवर्तन आत्मविश्वास बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। करियर में नई उपलब्धियां मिल सकती हैं। टेक्नोलॉजी, रिसर्च और मीडिया से जुड़े लोगों के लिए समय विशेष रूप से अनुकूल रह सकता है। लंबे समय से अटका धन मिलने की संभावना भी बन सकती है।

    राहु के शुभ प्रभाव के लिए करें ये उपाय
    – शनिवार के दिन पक्षियों को बाजरा या सप्तधान्य खिलाएं।
    – नियमित रूप से ‘ॐ रां राहवे नमः’ मंत्र की एक माला का जाप करें।
    – भगवान शिव का जलाभिषेक करें और शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करें।

  • भगवान विष्णु का गुरुवार व्रत कैसे रखें जानिए संपूर्ण व्रत विधि पूजा के नियम और सुख समृद्धि पाने के अचूक उपाय

    भगवान विष्णु का गुरुवार व्रत कैसे रखें जानिए संपूर्ण व्रत विधि पूजा के नियम और सुख समृद्धि पाने के अचूक उपाय


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनहार और जगत के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत तथा पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि धन वैभव और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसी मान्यता है कि श्रीहरि की कृपा से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं परिवार में खुशहाली आती है और करियर तथा व्यापार में सफलता के नए मार्ग खुलते हैं। जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है उनके लिए भी यह व्रत अत्यंत लाभकारी माना गया है।

    व्रत की शुरुआत प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से करनी चाहिए। स्नान के बाद स्वच्छ और संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के पूजा स्थल की साफ सफाई कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद जल गंगाजल अक्षत हल्दी चंदन पीले पुष्प तुलसी दल और पीले फल अर्पित करें। भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय मानी जाती है इसलिए पूजा में तुलसी दल अवश्य चढ़ाएं। घी का दीपक जलाकर धूप अर्पित करें और श्रद्धा के साथ विष्णु सहस्रनाम विष्णु चालीसा या ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में आरती कर परिवार की सुख समृद्धि और मंगल की कामना करें।

    व्रत के दौरान सात्विक आहार का विशेष महत्व होता है। कई श्रद्धालु पूरे दिन निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं जबकि कुछ लोग केवल एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन में चने की दाल बेसन से बने व्यंजन पीले चावल केला केसर युक्त खीर या अन्य सात्विक पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। इस दिन मांस मदिरा लहसुन प्याज और तामसिक भोजन का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है। साथ ही क्रोध झूठ और कटु वचन से भी बचने की सलाह दी जाती है क्योंकि भगवान विष्णु शांत और सरल स्वभाव के प्रतीक माने जाते हैं।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार के दिन दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन पीले वस्त्र हल्दी चने की दाल केला केसर या पीली मिठाई का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और गौ सेवा करना भी पुण्यदायी माना गया है। कहा जाता है कि दान और सेवा से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने लगती हैं।

    व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना भी आवश्यक माना गया है। इस दिन बाल कटवाने नाखून काटने और अनावश्यक विवाद से बचना चाहिए। घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखें और किसी का अपमान न करें। यदि संभव हो तो धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें और अधिक से अधिक समय भगवान के स्मरण में बिताएं। विवाहित दंपति यदि श्रद्धापूर्वक यह व्रत करते हैं तो दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ती है और परिवार में सुख शांति बनी रहती है।

    मान्यता है कि जो श्रद्धालु लगातार श्रद्धा विश्वास और नियमों के साथ भगवान विष्णु का गुरुवार व्रत करते हैं उन्हें श्रीहरि की विशेष कृपा प्राप्त होती है। उनके जीवन से आर्थिक संकट दूर होते हैं मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और घर में सुख समृद्धि तथा वैभव का स्थायी वास होता है। इसलिए यदि आप अपने जीवन में सफलता शांति और समृद्धि चाहते हैं तो भगवान विष्णु के व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि विधान के साथ अवश्य करें।

  • सावन के पावन गुरुवार पर अपनाएं यह विशेष पूजा विधि विष्णु कृपा से चमकेगा भाग्य और घर में आएगी खुशहाली

    सावन के पावन गुरुवार पर अपनाएं यह विशेष पूजा विधि विष्णु कृपा से चमकेगा भाग्य और घर में आएगी खुशहाली


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवताओं के गुरु बृहस्पति देव की उपासना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिन ज्ञान धर्म समृद्धि वैवाहिक सुख संतान सुख और आर्थिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा करते हैं उन पर श्रीहरि की विशेष कृपा बनी रहती है और जीवन की अनेक परेशानियां धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं। वहीं जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है उन्हें भी गुरुवार का व्रत और पूजा विशेष लाभ पहुंचाती है।

    गुरुवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले या हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के मंदिर की अच्छी तरह सफाई कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। पूजा के दौरान भगवान को पीले फूल हल्दी चंदन केसर पीले फल केले और बेसन या चने की दाल से बने प्रसाद का भोग अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर धूप अर्पित करें और विष्णु सहस्रनाम विष्णु चालीसा या ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। यदि संभव हो तो देवगुरु बृहस्पति के मंत्रों का भी जाप करें जिससे गुरु ग्रह मजबूत होता है और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

    गुरुवार के दिन व्रत रखने का भी विशेष महत्व बताया गया है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं और कई लोग केवल एक समय पीले रंग का भोजन करते हैं। भोजन में चने की दाल बेसन की रोटी केसर युक्त खीर या पीले चावल का सेवन शुभ माना जाता है। इस दिन तामसिक भोजन मांस मदिरा और लहसुन प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार को पीली वस्तुओं का दान करने से भी विशेष पुण्य मिलता है। गरीब और जरूरतमंद लोगों को चने की दाल हल्दी पीले वस्त्र केला या केसर का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही किसी योग्य ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और घर में सुख समृद्धि का वास होता है।

    गुरुवार के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन भी करना चाहिए। इस दिन बाल कटवाने नाखून काटने और अनावश्यक क्रोध करने से बचना चाहिए। महिलाओं को इस दिन बाल धोने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है हालांकि इस विषय में अलग अलग परंपराएं प्रचलित हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पूरे दिन सकारात्मक विचार रखें और किसी का अपमान या अनादर न करें।

    मान्यता है कि जो व्यक्ति लगातार श्रद्धा और विश्वास के साथ गुरुवार की पूजा और व्रत करता है उसके जीवन में धन धान्य सुख शांति और वैभव का आगमन होता है। भगवान विष्णु की कृपा से परिवार में प्रेम बना रहता है कार्यों में सफलता मिलती है और जीवन की बाधाएं धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं। इसलिए यदि आप भी अपने जीवन में सुख समृद्धि और सकारात्मक बदलाव चाहते हैं तो गुरुवार के दिन पूरे विधि विधान से भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा अवश्य करें।

  • रोज-रोज की रोटी से बच्चे हो गए बोर? बची हुई रोटियों से तैयार करें ये 7 टेस्टी और पौष्टिक रेसिपीज

    रोज-रोज की रोटी से बच्चे हो गए बोर? बची हुई रोटियों से तैयार करें ये 7 टेस्टी और पौष्टिक रेसिपीज


    नई दिल्ली। घर में अक्सर रात की बनी कुछ रोटियां बच जाती हैं, लेकिन अगले दिन वही रोटियां बच्चों को परोसना आसान नहीं होता। कई बच्चे बासी रोटी खाने से मना कर देते हैं, जिससे खाना बर्बाद होने की नौबत आ जाती है। ऐसे में थोड़ी सी रचनात्मकता और कुछ सामान्य सामग्री की मदद से बची हुई रोटियों को स्वादिष्ट और पौष्टिक डिश में बदला जा सकता है। ये रेसिपीज न केवल बच्चों को पसंद आएंगी, बल्कि लंच बॉक्स और शाम के नाश्ते के लिए भी बेहतरीन विकल्प बन सकती हैं।

    सबसे आसान विकल्प टोफू रोटी रोल है। टोफू के छोटे-छोटे टुकड़ों को प्याज और हल्के मसालों के साथ भूनकर तैयार करें। रोटी पर हरी चटनी या टोमैटो सॉस लगाकर इसमें टोफू की स्टफिंग भरें और रोल बनाकर हल्का सेंक लें। यह प्रोटीन से भरपूर और स्वादिष्ट स्नैक बन जाता है।

    चना रोटी रोल भी बच्चों के लिए हेल्दी विकल्प है। उबले हुए चनों को हल्का मैश करके उसमें प्याज, टमाटर, धनिया और मसाले मिलाएं। इस मिश्रण को रोटी पर फैलाकर रोल तैयार करें और तवे पर हल्का सेंक लें। चटनी या दही के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है।

    अगर घर में राजमा बचा हुआ है तो उससे भी शानदार रोल बनाया जा सकता है। राजमा को मैश कर उसमें प्याज, टमाटर और मसाले मिलाएं। तैयार मिश्रण को रोटी में भरकर रोल बना लें। ऊपर से थोड़ा नींबू का रस डालने से इसका स्वाद और ताजगी बढ़ जाती है।

    दाल रोटी चीला भी बची हुई रोटियों का बेहतरीन उपयोग है। भीगी हुई मूंग दाल का गाढ़ा घोल तैयार करें और उसमें नमक व मसाले मिलाएं। इस घोल को रोटी पर फैलाकर दोनों तरफ से तवे पर सेंक लें। कुरकुरा बनने के बाद इसे हरी चटनी या दही के साथ परोसा जा सकता है।

    पनीर भुर्जी रोटी रोल बच्चों का पसंदीदा विकल्प बन सकता है। पनीर को प्याज, टमाटर और हल्के मसालों के साथ भूनकर भुर्जी तैयार करें। इसे रोटी में भरकर रोल बना लें। यह टिफिन के लिए भी सुविधाजनक और पौष्टिक विकल्प माना जाता है।

    सोया रोटी रोल भी प्रोटीन से भरपूर रेसिपी है। भीगे हुए सोया ग्रेन्यूल्स को प्याज और मसालों के साथ पकाकर तैयार करें। इसे रोटी में भरकर हल्का सेंक लें। यह लंबे समय तक पेट भरा रखने वाला और स्वादिष्ट स्नैक साबित हो सकता है।

    हरी मूंग रोटी रोल भी कम समय में तैयार होने वाली हेल्दी डिश है। उबली हुई हरी मूंग को मैश कर उसमें प्याज, टमाटर, काली मिर्च और नमक मिलाएं। रोटी पर हरी चटनी लगाकर यह मिश्रण भरें और रोल बना लें। यह बच्चों के साथ-साथ बड़ों के लिए भी पौष्टिक नाश्ता बन सकता है।

    बची हुई रोटियों को फेंकने के बजाय इस तरह नए स्वाद में बदलकर न केवल भोजन की बर्बादी रोकी जा सकती है, बल्कि बच्चों को पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन भी परोसा जा सकता है। थोड़ी सी तैयारी के साथ ये सभी रेसिपीज कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाती हैं और पूरे परिवार को पसंद आ सकती हैं।

  • एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 3 मजबूत सिस्टम एक्टिव, 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    एमपी में मानसून ने पकड़ी रफ्तार, 3 मजबूत सिस्टम एक्टिव, 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून फिर से पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रदेश के ऊपर मानसून ट्रफ, साइक्लोनिक सर्कुलेशन और शियर जोन जैसे तीन मजबूत मौसम सिस्टम सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से अगले चार दिनों तक विशेष रूप से मालवा-निमाड़ क्षेत्र सहित कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना है।

    मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए उज्जैन और सागर संभाग समेत 17 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। कुछ इलाकों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 इंच या उससे अधिक वर्षा होने की संभावना जताई गई है।

    5 जिलों में अति भारी बारिश की चेतावनी
    आईएमडी भोपाल के अनुसार धार, देवास, बुरहानपुर, हरदा और नर्मदापुरम जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, जहां अति भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा उज्जैन, शाजापुर, सीहोर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, रायसेन, सागर, बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और सिवनी में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। वहीं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, सतना सहित प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान है।

    2 अगस्त तक बना रहेगा असर
    मौसम विभाग का कहना है कि वर्तमान मानसूनी सिस्टम 2 अगस्त तक सक्रिय रहेंगे। इस दौरान कई जिलों में लगातार तेज बारिश और कुछ स्थानों पर अति भारी वर्षा हो सकती है। बुधवार को रतलाम, बालाघाट, पचमढ़ी और भोपाल समेत कई क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई।

    अब भी सामान्य से 16% कम बारिश
    बारिश का दौर तेज होने के बावजूद प्रदेश में अब तक सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक औसतन 14.1 इंच (359.3 मिमी) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 16.9 इंच (428.9 मिमी) वर्षा होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में फिलहाल करीब 16 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है। क्षेत्रवार आंकड़ों के अनुसार, पूर्वी मध्य प्रदेश में 15 प्रतिशत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि, अगले कुछ दिनों तक जारी रहने वाले तेज बारिश के दौर से इस कमी में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।