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  • सावधान! बाजार में मिलने वाले ये ‘हेल्दी’ फूड लंबे समय में कर सकते हैं नुकसान

    सावधान! बाजार में मिलने वाले ये ‘हेल्दी’ फूड लंबे समय में कर सकते हैं नुकसान


    नई दिल्ली आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास घर का ताजा और पुराना खाना बनाने का समय कम हो रहा है। यही वजह है कि लोग मार्केट में मीटिंग वाले स्ट्रैटेजी और रेडी-टू-ईट फूड पर भारी प्रतिबंध हो गए हैं। खास बात यह है कि इन मूर्तियों को ‘हल्दी’ में शामिल किया जाता है।

    हर ‘हेल्दी’ चीज़ सच में स्वस्थ नहीं है
    बाजार में ऐसे कई खाद्य उत्पाद मौजूद हैं, जिनमें कम चीनी, ज्यादा पोषण और फिटनेस के नाम शामिल हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। इनमें से कुछ चीनी, केमिकल और सर्जिकल शरीर को धीरे-धीरे नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 ‘हेल्डी’ फ़ार्म, जो असल में आपकी सेहत बना सकते हैं।

    1. साबुत अनाज: साबुत अनाज की कमी, शुगर अधिक
    पैक्ड सामान में स्टेक-इलेक्ट्रिक उत्पाद शामिल हैं, लेकिन इनमें अक्सर अतिरिक्त चीनी, प्रिजर्वेटिव और कलात्मक रंग मिलाए जाते हैं। वहीं, साबुत अनाज की दुकानों पर मिलने वाले सामुहिक फलों में भी सब्जी की कमी होती है, जो फल का सबसे जरूरी हिस्सा होता है। ऐसे में पूरा फल खाना बड़ा खतरनाक होता है।

    2. इंस्टिटेंट ओट्स: अधिकांश व्यापारियों का नुकसान
    इन्टेंट ओट्स को अर्ली बनने वाला वैलिडिटी विकल्प माना जाता है, लेकिन काफी आकर्षक बनाया जाता है। इसमें स्वाद, नमक और कई बार चीनी भी मिलाई जाती है। इसके बजाय कम आकर्षक वाले स्टील-कैट ओट्स बड़े पैमाने पर उद्यम और राक्षसी होते हैं।

    3. ब्राउन बेडर: नाम ‘हेल्दी’, अंदर से मेडा
    बाजार में मिलने वाली ज्यादातर ब्राउन ब्रेडेड को मल्टीग्रेन या आटा ब्रेडेड बेरोजगारों द्वारा बेची जाती है, लेकिन हकीकत में इनमें मैदा की मात्रा अधिक होती है। रंग देने के लिए कैरमल या अन्य पदार्थ मिलाए जाते हैं, जिससे यह भूरा दिखता है। ऐसे में ब्राउन बेडर को आंख बंद करके स्टेक मैन लेना गलत हो सकता है।

    4. फ्लेवर्ड दही या लस्सी: स्वाद में मीठा, सेहत में नुकसान
    पैक्ड फ्लेवर्ड दही या लस्सी का स्वाद अच्छा ही लगता है, लेकिन इनमें फ्लेवर, प्रिजर्वेटिव और मात्रा में शुगर मिलाई होती है। इसके नियमित सेवन से वजन बढ़ सकता है और रक्त शर्करा में कमी हो सकती है। सादा दही या घर की बनी लस्सी मुख्य रूप से सुरक्षित विकल्प है।

    5. शुगर मुक्त उत्पाद: शुगर मुक्त उत्पाद
    यहां ‘शुगर-फ्री’ के नाम पर कई उत्पाद खत्म किए जा रहे हैं, लेकिन इनमें आर्टिफिशियल स्वीटनर या रिफाइंड तत्व मौजूद हैं। लंबे समय तक इसका सेवन शरीर के लिए लाभकारी हो सकता है। प्राकृतिक मिश्रण जैसे गुड़ या शहद को भी सीमित मात्रा में ही लेना चाहिए।

    सही चुनाव से ही संभव सही स्वास्थ्य
    विशेषज्ञ का मानना ​​है कि संभवतः संभव हो, प्राकृतिक और कमोडिटी भोजन को ही शामिल करना चाहिए। ट्रैक्टर और विज्ञापन के झांसे में गाइन ‘हल्दी’ टैग वाले प्रोडक्ट्स पर नजर बंद करके पक्का नुकसान हो सकता है।

  • ऊर्जा मंत्री के क्षेत्र में भी गंदा पानी: ग्वालियर में नालियों के बीच से होकर गुजर रही पाइपलाइनें, स्वास्थ्य खतरे में

    ऊर्जा मंत्री के क्षेत्र में भी गंदा पानी: ग्वालियर में नालियों के बीच से होकर गुजर रही पाइपलाइनें, स्वास्थ्य खतरे में


    ग्वालियर । ग्वालियर शहर में पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है। इंदौर के भागीरथपुरा हादसे के बावजूद यहां हालात में कोई सुधार नहीं हुआ है। सरकारी निर्देशों के बावजूद कई इलाकों में पाइपलाइनें सीवर और नालों के बीच से गुजर रही हैं जिससे गंदा और दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा है।

    नगर निगम ने दो महीने में मात्र 28 स्थानों की पहचान की जिनमें से केवल 13 पर सुधार किया जा सका। बाकी जगहों पर खतरा अब भी जस का तस बना हुआ है। रविवार को कई इलाकों में निगम को मौके पर उतरकर मोटर से पानी निकालना पड़ा। कई वार्डों में सीवर लाइन चोक होने से गंदा पानी सड़कों और गलियों में भर गया जिससे घरों में मटमैला पानी पहुंच रहा है।

    वार्ड 38 में नलों से शुरुआती 10 मिनट तक मटमैला पानी आता है और कई बार उसमें कीड़े भी दिखाई देते हैं। वार्ड 39 में नालियों के बीच से खुली पाइपलाइनें गुजर रही हैं। वार्ड 17 के निवासी नवीन तोमर ने बताया कि यहां कभी भी पूरी तरह साफ पानी नहीं आता। पानी में लगातार मटमैलापन और बदबू बनी रहती है और कई बार कीड़े भी पड़ जाते हैं।

    हजीरा इलाके जो ऊर्जा मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर का निवास क्षेत्र है में भी पानी की समस्या गंभीर है। स्थानीय पार्षद धर्मेंद्र वर्मा ने बताया कि लोग लगातार शिकायत लेकर आते हैं लेकिन निगम के अधिकारियों के भेदभावपूर्ण रवैये के कारण समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।

    शहर के कई हिस्सों में लोग सीवरयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं। वार्ड 12 में लोग बताते हैं कि नल खोलने पर ऐसा लगता है मानो नालों का पानी आ गया हो। वार्ड 16 में ताज़ा पानी में दुर्गंध और सफेद झाग दिखाई दे रही थी। लोग फिटकरी या अन्य सामग्री डालकर ही पानी को उपयोग लायक बनाते हैं।स्थानीय निवासी बीमार पड़ रहे हैं और पानी की समस्या पर लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। कई लोगों ने सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई लेकिन ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हुई।

    नगर निगम के उपायुक्त प्रदीप सिंह तोमर ने कहा कि गंदे पानी की समस्या के समाधान के लिए प्रयास लगातार जारी हैं और नगर निगम का अमला कार्यरत है। बावजूद इसके शहरवासियों की चिंता बरकरार है और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ता जा रहा है।

  • BTS की ग्रैंड वापसी 260000 लोगों की भीड़ में नेटफ्लिक्स पर लाइव शो ने मचाई धूम

    BTS की ग्रैंड वापसी 260000 लोगों की भीड़ में नेटफ्लिक्स पर लाइव शो ने मचाई धूम


    नई दिल्ली :
    दक्षिण कोरिया का विश्व प्रसिद्ध के पॉप बैंड BTS एक लंबे इंतजार के बाद फिर से सुर्खियों में आ गया है मिलिट्री सर्विस के कारण करीब चार साल तक ब्रेक लेने के बाद इस मशहूर बैंड ने 21 मार्च 2026 को अपनी शानदार वापसी की और अपने फैंस को एक बार फिर मंत्रमुग्ध कर दिया

    BTS ने अपनी वापसी नेटफ्लिक्स पर लाइव स्ट्रीम किए गए खास कार्यक्रम ‘BTS द कमबैक लाइव अरिरंग’ के जरिए की यह कार्यक्रम सोल के ग्वांगवामुन स्क्वायर में आयोजित किया गया था जहां बैंड के सातों सदस्यों ने एक साथ मंच पर परफॉर्म किया और अपने दमदार म्यूजिक और परफॉर्मेंस से दर्शकों का दिल जीत लिया

    इस इवेंट को लेकर फैंस में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला सियोल मेट्रोपॉलिटन पुलिस के आंकड़ों के अनुसार करीब 260000 लोग इस कार्यक्रम को देखने के लिए सेंट्रल सियोल में जमा हुए यह संख्या BTS की वैश्विक लोकप्रियता और उनके प्रति फैंस के गहरे लगाव को दर्शाती है

    कार्यक्रम के दौरान मौजूद फैंस ने अपनी खुशी और भावनाएं साझा कीं एक महिला फैन ने बताया कि उन्होंने लंबे समय से इस पल का इंतजार किया था और BTS की वापसी उनके लिए बेहद खास है उन्होंने कहा कि उन्होंने एल्बम को पूरी तरह से सुनने का इंतजार किया ताकि वह इसे लाइव अनुभव कर सकें

    एक अन्य फैन ने भी अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह पल उनके लिए बहुत ही खास है क्योंकि वे काफी समय से BTS की वापसी का इंतजार कर रही थीं

    वहीं नेपाल से आई एक फैन ने बताया कि वह इस बड़े कॉन्सर्ट का हिस्सा बनकर बेहद खुश हैं और यह उनके लिए पहला इतना बड़ा BTS इवेंट है उन्होंने बताया कि वे BTS के कई सदस्यों को पसंद करती हैं और खास तौर पर जंगकुक का नाम उन्हें बहुत आकर्षित करता है

    BTS की यह वापसी न केवल उनके फैंस के लिए एक भावनात्मक क्षण है बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि यह बैंड वैश्विक संगीत जगत में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है मिलिट्री ब्रेक के बाद इस धमाकेदार वापसी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि BTS की लोकप्रियता और प्रभाव पहले की तरह ही बरकरार है

  • गणगौर पर्व की भव्य परंपरा: महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजीं, रायसेन में निकाली गई भव्य शोभायात्रा

    गणगौर पर्व की भव्य परंपरा: महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजीं, रायसेन में निकाली गई भव्य शोभायात्रा


    रायसेन । रायसेन शहर में लोक आस्था के महापर्व गणगौर को धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस पावन अवसर पर महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए कठिन उपवास रखा और शिव-पार्वती स्वरूप ईसर-गणगौर की विशेष पूजा-अर्चना की।

    दोपहर के समय मुखर्जी नगर से भव्य शोभायात्रा की शुरुआत हुई। महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सजीं, मंगल गीत गा रही थीं और नृत्य करते हुए यात्रा में शामिल हुईं। शोभायात्रा शहर के प्रमुख मार्गों से होकर मिश्र तालाब तक पहुंची। रास्ते में उपस्थित लोगों ने पुष्प वर्षा करके माता गणगौर का स्वागत किया।

    शोभायात्रा में शामिल महिलाओं और श्रद्धालुओं ने पूरे मार्ग में उत्सव का माहौल बनाए रखा। इस दौरान समाज के सभी वर्गों के लोग उपस्थित थे और उन्होंने अपने-अपने ढंग से महापर्व में भाग लिया।

    अंत में तालाब के घाट पर विधिपूर्वक गणगौर की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु और श्रद्धालु मौजूद रहे। उन्होंने गणगौर पूजन और आरती में भाग लेकर पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया।

    इस आयोजन से न केवल समाज में एकता और भाईचारे की भावना मजबूत हुई, बल्कि लोक संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान भी दिखाई दिया। महिलाएं उत्सव में प्रमुख रूप से शामिल रही और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए पूरे उत्सव को जीवंत और श्रद्धालु माहौल में बदल दिया।

    गणगौर पर्व का यह आयोजन शहर में सामाजिक और धार्मिक जीवन में उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि महिलाओं की आस्था, समाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है।

  • गर्मी में राहत का आसान उपाय, शीतली प्राणायाम का सही तरीका जानें

    गर्मी में राहत का आसान उपाय, शीतली प्राणायाम का सही तरीका जानें


    नई दिल्ली मूल में हल्दी गर्मी, चिलचिलाती धूप और लू के थेपेडर्स ने लोगों की समस्याओं को प्रभावित किया है। ऐसे मौसम में शरीर को ठंडा और दिमाग को शांत रखना बड़ी चुनौती बन जाता है। इस स्थिति में शीतली प्राणायाम एक आसान और प्राकृतिक उपाय के रूप में सामने आता है, जो बिना किसी औषधि के शरीर और मन को ठंडक प्रदान करता है।

    आयुष मंत्रालय भी आधिकारिक तौर पर कार्य करता है
    भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी इस प्राणायाम के निषेध की सलाह देता है। यह योगिक श्वसन तकनीक समरलैण्ड में बेहद ही मजबूत मैनी बनाती है और शरीर के तापमान को बनाए रखने में मदद करती है। ‘शीतली’ शब्द का अर्थ ही शीतलता प्रदान करना है, और यह अभ्यास गुण के लिए जाना जाता है।

    शीतली प्राणायाम कैसे काम करता है
    शीतली प्राणायाम एक विशेष श्वास तकनीक है, जिसमें जीभ को नलिका (ट्यूब) की तरह घुमाकर मुंह से अंदर हवा ली जाती है। यह अदृश्य हवा सीधे गले और शरीर में प्रवेश करती है, जिससे तुरंत ठंड लग जाती है। नियमित अभ्यास से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और मन शांत होता है।

    गर्मी में मिलने वाले जबरदस्त फायदे
    विशेषज्ञ के अनुसार, शीतली प्राणायाम कई स्वास्थ्य लाभ देता है। यह लू और हीट स्ट्रोक से बचाव में मदद करता है। साथ ही तनाव, चिंता और निराशा को कम कर मानसिक शांति प्रदान करता है।

    यह पाचन तंत्र के लिए भी बेहद हानिकारक है। पेट की गर्मी को कम करके एसिडिटी, कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। हाई ब्लड वाले लोगों के लिए भी ऐसा माना जाता है, क्योंकि यह डांस को बनाए रखने में सहायक होता है। इसके अलावा इससे त्वचा को भी फायदा मिलता है। गर्मी से होने वाले रैशेज, जलन और त्वचा संबंधी चिंताओं से राहत मिलती है। रात को सोने से पहले इसका अभ्यास करने से नींद अच्छी और गहरी आती है।

    सही सूत्र जानना जरूरी है
    शांत वातावरण में सुबह के समय शीतली प्राणायाम करना सबसे अच्छा माना जाता है। सुखासन या पद्मासन में लम्बी जीभ को बाहर की ओर झुकाएं और उसे नलिका के आकार में घुमाएं (यदि संभव न हो तो शरीर को गोल घुमाने का भी प्रयास किया जा सकता है)। इसके बाद मुंह से धीरे-धीरे सांस अंदर लें और कुछ सेकंड तक रोकें। फिर नाक से धीरे-धीरे सांस छोड़ें। इस प्रक्रिया को 5 से 10 बार दोहराना चाहिए। प्रतिदिन 5 से 10 मिनट का अभ्यास साम्य होता है।

    इन लोगों को कलाकारों से सावधान रहना चाहिए
    वैसे तो शीतली प्राणायाम बहुत अच्छा है, लेकिन ठंड-जुकाम, सांस या गले से जुड़ी समस्या वाले लोगों को इसे पहले योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह से जरूर लेना चाहिए।

  • हाईवे निर्माण में निगम की मिलीभगत ग्रामीण परेशान रात में कचरा डंप कर फोरलेन की गुणवत्ता खतरे में

    हाईवे निर्माण में निगम की मिलीभगत ग्रामीण परेशान रात में कचरा डंप कर फोरलेन की गुणवत्ता खतरे में


    भोपाल। भोपाल-रायसेन-सागर नेशनल हाईवे 146 के फोरलेन निर्माण में गंभीर भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। ठेकेदारों द्वारा बेस फीलिंग में मुरम की बजाय कचरे का इस्तेमाल किया जा रहा है। आदमपुर क्षेत्र से होकर गुजर रहे इस हाईवे पर भोपाल नगर निगम की मिलीभगत के आरोप भी लगाए गए हैं।

    नियमानुसार हाईवे की बेस फिलिंग के लिए मुरम का कोपरा आवश्यक है और नगर निगम का कचरा प्रोसेस कर खाद बनाया जाता है। लेकिन ठेकेदार और निगम के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से रातों-रात सैकड़ों डंपर कचरा हाईवे में फेंका जा रहा है। इस कदम से निर्माण की गुणवत्ता खतरे में है और भविष्य में रोड धंसने और पुल गिरने जैसी घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।

    स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि रात को 12 बजे के बाद लगातार कचरा डंप किया जाता है। इससे न केवल सड़क की मजबूती प्रभावित हो रही है बल्कि कचरे से उठने वाली बदबू और गंदगी ने उनके जीवन को भी परेशान कर दिया है। बिलखिरिया के ग्रामीणों ने इसका विरोध जताया है और प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग की है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि कचरे से बेस फीलिंग करने से सड़क की लाइफ कम हो जाएगी और भारी बारिश या भारी यातायात की स्थिति में सड़क धंस सकती है। पुलों और ओवरब्रिज की मजबूती भी खतरे में पड़ सकती है। इस तरह के भ्रष्टाचार से केवल ग्रामीण ही नहीं बल्कि यात्रियों और पूरे परिवहन तंत्र की सुरक्षा भी प्रभावित होगी।

    इस पूरे मामले में ठेकेदारों और निगम के अधिकारियों की मिलीभगत उजागर हुई है। ईमानदार निरीक्षण और सही सामग्री का उपयोग करने में लापरवाही ने हाईवे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर समय पर सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में बड़े हादसे होने की संभावना है।

    ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे इसे अनदेखा नहीं करेंगे और अधिकारियों से सार्वजनिक जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सड़क निर्माण में पारदर्शिता, गुणवत्ता और नियमों का पालन ही लंबे समय तक सुरक्षित हाईवे सुनिश्चित कर सकता है।

  • 'तुम्बाड' के डायरेक्टर का बड़ा धमाका: बिना एक पैसा खर्च किए बना डाली 80 मिनट की हॉरर फिल्म; जानें कहाँ फ्री में देखें 'मन पिशाच'।

    'तुम्बाड' के डायरेक्टर का बड़ा धमाका: बिना एक पैसा खर्च किए बना डाली 80 मिनट की हॉरर फिल्म; जानें कहाँ फ्री में देखें 'मन पिशाच'।

    नई दिल्ली: भारतीय सिनेमा में हॉरर फिल्मों की परिभाषा बदलने वाली फिल्म ‘तुम्बाड’ के निर्देशक राही अनिल बर्वे एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन इस बार चर्चा किसी करोड़ों के बजट वाली फिल्म की नहीं, बल्कि एक ऐसे क्रांतिकारी प्रयोग की है जिसने फिल्म जगत को हैरान कर दिया है। राही अनिल बर्वे ने पूरी तरह से “ज़ीरो बजट” में एक 80 मिनट की हॉरर फिल्म ‘मन पिशाच’ तैयार की है। यह फिल्म न केवल एक निर्देशक की कल्पनाशीलता का प्रमाण है, बल्कि उन तमाम उभरते हुए फिल्ममेकर्स के लिए एक प्रेरणा भी है जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपने पूरे नहीं कर पाते। 17 मार्च को रिलीज हुई इस फिल्म को राही ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और अपने पर्सनल कंप्यूटर की मदद से अकेले ही अंजाम दिया है।

    राही अनिल बर्वे ने इस फिल्म को बनाने के पीछे के अपने संघर्ष और उद्देश्य को सोशल मीडिया पर विस्तार से साझा किया है। उन्होंने बताया कि यह फिल्म एक प्रयोग थी—यह देखने के लिए कि क्या कोई अकेला फिल्ममेकर बिना किसी टीम या फंडिंग के एक पूरी फीचर लेंथ फिल्म बना सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे चाहते तो लोग हायर कर सकते थे और बेहतर विजुअल्स बनवा सकते थे, लेकिन तब यह प्रयोग विफल हो जाता। उनके अनुसार, एक बेहतरीन फिल्म बनाने के लिए महंगे कैमरों से ज्यादा अच्छी लेखन क्षमता, गहरी कल्पनाशीलता, एक बेसिक लैपटॉप और ढेर सारे धैर्य की जरूरत होती है। उन्होंने फोटोशॉप और प्रीमियर जैसे बेसिक टूल्स का उपयोग कर ‘मन पिशाच’ को वह डरावना स्वरूप दिया है, जिसे देखकर दर्शक दंग रह गए हैं।

    फिल्म ‘मन पिशाच’ के प्लॉट की बात करें, तो यह 1 घंटे 20 मिनट की एक ऐसी कहानी है जो आपको भीतर तक झकझोर देगी। कहानी एक पुरातत्व अधिकारी (Archaeology Officer) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में एक बेहद रहस्यमयी गांव पहुँचता है। उस गांव के नियम और वहां रहने वाले लोग सामान्य नहीं हैं। जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, अधिकारी के साथ घटने वाली अजीबोगरीब घटनाएँ दर्शक को बेचैन करने लगती हैं। क्या वह उस शापित गांव से सही-सलामत बाहर निकल पाएगा? इसी सस्पेंस के इर्द-गिर्द राही ने एक डरावना जाल बुना है। फिल्म के विजुअल्स और बैकग्राउंड स्कोर इतने प्रभावी हैं कि विश्वास करना मुश्किल होता है कि इसे ज़ीरो बजट में बनाया गया है।

    सोशल मीडिया और यूट्यूब पर ‘मन पिशाच’ को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। यूजर्स राही अनिल बर्वे के इस साहस और प्रतिभा की सराहना कर रहे हैं। दर्शकों का कहना है कि राही जैसे टैलेंट को पहचानना इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस फिल्म को देखने के लिए दर्शकों को एक भी पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है; यह फिल्म राही अनिल बर्वे के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर पूरी तरह से मुफ्त उपलब्ध है। अगर आप भी हॉरर फिल्मों के शौकीन हैं और ‘तुम्बाड’ जैसी कलाकारी के कायल हैं, तो ‘मन पिशाच’ आपके लिए एक मस्ट-वॉच फिल्म है।

  • गर्मियों में इन 5 पत्तियों का सेवन, शरीर रहेगा स्वस्थ और बीमारियां रहेंगी दूर

    गर्मियों में इन 5 पत्तियों का सेवन, शरीर रहेगा स्वस्थ और बीमारियां रहेंगी दूर


    नई दिल्ली। भारत में प्राचीन समय से ही जड़ी-बूटियों और आयुर्वेद के ज़रिए रोगों का उपचार किया जाता रहा है। आज भले ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति ने इलाज को आसान बना दिया हो, लेकिन आयुर्वेद न सिर्फ़ बीमारियों को जड़ से खत्म करने की बात करता है, बल्कि शरीर को रोगों से दूर रखने के उपाय भी बताता है।

    गर्मी में बढ़ती समस्याएं और प्राकृतिक समाधान
    गर्मी के मौसम में अक्सर ब्लड प्रेशर, मुंहासे, फोड़े-फुंसी और पाचन संबंधी परेशानियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में लोग दवाओं का सहारा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद में कुछ ऐसे प्राकृतिक उपाय बताए गए हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। खासकर कुछ पत्तियां ऐसी हैं, जिनका सेवन करने से कई समस्याओं से राहत मिल सकती है।

    नीम के पत्ते: प्राकृतिक एंटीबायोटिक
    नीम की पत्तियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं। इनमें प्राकृतिक एंटीबायोटिक गुण होते हैं, जो खून को साफ करने में मदद करते हैं। शुगर, बुखार, मुंहासे और फोड़े-फुंसी जैसी समस्याओं में नीम बहुत लाभकारी माना जाता है। गर्मियों में नीम की कोमल सब्जियों को चबाना या उनका जूस पीना शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।

    सहजन के पत्ते: पोषण का भंडार
    मोरिंगा यानी सहजन के पत्ते आयरन और कैल्शियम से भरपूर होते हैं। ये शरीर में खून की कमी दूर करने, कमजोरी कम करने और पाचन क्रिया सुधारने में मदद करते हैं। इसके अलावा ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में भी सहजन फायदेमंद है। सहजन के पत्तों का सूप या जूस गर्मियों में शरीर को ऊर्जा देता है।

    शीशम के पत्ते: महिलाओं के लिए लाभकारी
    शीशम के पत्ते विशेष रूप से महिलाओं के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं, मासिक धर्म की अनियमितता और सफेद पानी जैसी परेशानियों में इनका उपयोग किया जाता है। शीशम के पत्तों को मिश्री के साथ पीसकर सुबह खाली पेट सेवन करने से लाभ मिल सकता है।

    बरगद के पत्ते: त्वचा के लिए बाध्य
    बरगद के पेड़ के पत्ते त्वचा रोगों में बेहद असरदार होते हैं। फंगल इंफेक्शन और त्वचा से जुड़ी समस्याओं में बरगद के पत्तों को उगलकर उसका सेवन करना फायदेमंद माना जाता है। यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

    पीपल के पत्ते: आयुर्वेदिक औषधि
    पीपल के पेड़ के पत्तों को आयुर्वेद में विशेष औषधि माना गया है। पथरी, सिस्ट और अन्य आंतरिक समस्याओं में इसके रस का सेवन लाभकारी माना जाता है। यह शरीर के अंदरूनी अंगों को मजबूत करने में सहायक होता है।

    सेवन से पहले बरतें सावधानी
    हालांकि ये सभी पत्ते औषधीय गुणों से भरपूर हैं, लेकिन इनके सेवन करने से पहले किसी चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह जरूर लेनी चाहिए। हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए सही मात्रा और तरीका जानना जरूरी है।

  • मनी लॉन्ड्रिंग मामला सामने आया पूर्व अधिकारी जगदीश सरवटे कोर्ट में पेश जांच जारी

    मनी लॉन्ड्रिंग मामला सामने आया पूर्व अधिकारी जगदीश सरवटे कोर्ट में पेश जांच जारी


    जबलपुर। जबलपुर में आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर जगदीश प्रसाद सरवटे अब कानूनी विवाद में घिर गए हैं। पीएमएलए विशेष न्यायालय में उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की चार्जशीट दाखिल की है। ईडी भोपाल जोनल ऑफिस ने अदालत में अभियोजन की शिकायत पेश की और अदालत के आदेश पर आरोपी खुद अदालत में पेश हुए।

    सरवटे पर आरोप है कि उन्होंने अपनी आय से अधिक संपत्ति अर्जित की और अवैध कमाई को सफेद करने का प्रयास किया। जांच में प्रदेश के भोपाल मंडला उमरिया और सिवनी जिलों में कुल 11.81 करोड़ की संपत्ति चिन्हित की गई। फरवरी 2026 में अदालत के आदेश पर इन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया। मामला अभी जांचाधीन है और कानूनी प्रक्रिया जारी है।

    मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में आरोपी द्वारा अवैध और वैध स्रोतों से संपत्ति अर्जित करना और उसे सफेद करना गंभीर अपराध माना जाता है। ईडी की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी अधिकारियों के वित्तीय लेनदेन की निगरानी और जवाबदेही बेहद आवश्यक है।

    पूर्व अधिकारी के खिलाफ यह मामला प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की अहमियत को उजागर करता है। अधिकारियों की संपत्ति की जांच और कुर्की यह संकेत देती है कि कानून के पालन में किसी को भी छूट नहीं दी जाएगी। अदालत में मामले की सुनवाई लगातार जारी है और मीडिया और आम जनता की नजरें इस पर टिकी हैं।

    जगदीश सरवटे ने चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में पेश होकर कानूनी प्रक्रिया का पालन किया। अब पीएमएलए कोर्ट में सुनवाई जारी है और अदालत से निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप सही पाए जाते हैं या नहीं। फिलहाल संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क है और जांच पूरी होने तक आगे की कार्रवाई जारी रहेगी।

    मनी लॉन्ड्रिंग के इस मामले से यह साफ हो गया है कि वित्तीय पारदर्शिता और कानून का पालन हर सरकारी अधिकारी के लिए अनिवार्य है। ईडी की कार्रवाई यह संदेश देती है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे और कोई भी अधिकारी कानून के दायरे से बाहर नहीं है।

  • शूटिंग के दौरान किशोर कुमार को पड़ा असली जोरदार मुक्का, 'विलेन' प्राण को आखिर क्यों उठाना पड़ा यह कदम?

    शूटिंग के दौरान किशोर कुमार को पड़ा असली जोरदार मुक्का, 'विलेन' प्राण को आखिर क्यों उठाना पड़ा यह कदम?


    नई दिल्ली:  भारतीय सिनेमा के इतिहास में किशोर कुमार एक ऐसे कलाकार रहे हैं, जिनकी ऊर्जा और मजाकिया अंदाज का कोई मुकाबला नहीं था। लेकिन कभी-कभी उनकी यही ‘मस्ती’ उनके साथी कलाकारों के लिए सिरदर्द बन जाया करती थी। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा बॉलीवुड के मशहूर विलेन प्राण ने साझा किया था, जो फिल्म ‘पहली झलक’ की शूटिंग से जुड़ा है। प्राण और किशोर कुमार की जोड़ी ने ‘हाफ टिकट’ और ‘आशा’ जैसी कई यादगार फिल्मों में साथ काम किया, लेकिन ‘पहली झलक’ के सेट पर कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना खुद किशोर दा ने भी नहीं की होगी। वाकया एक फाइट सीन का था, जहाँ प्राण को किशोर कुमार के पेट में मुक्का मारना था, लेकिन किशोर कुमार की खिलंदड़ फितरत के चलते यह सीन पूरा होना नामुमकिन लग रहा था।

    प्राण साहब ने एक पुराने इंटरव्यू में इस घटना को याद करते हुए बताया था कि किशोर कुमार के साथ सीरियस सीन शूट करना किसी चुनौती से कम नहीं था। उस दिन फाइट सीन के दौरान जैसे ही प्राण उनके करीब जाकर फिल्मी मुक्का मारते, किशोर कुमार दर्द का नाटक करने के बजाय जोर-जोर से हंसने लगते थे। एक के बाद एक लगभग 12 से 14 रीटेक हो चुके थे, लेकिन किशोर कुमार गंभीर होने का नाम ही नहीं ले रहे थे। पूरी यूनिट परेशान थी और वक्त निकलता जा रहा था। आखिरकार, प्राण ने एक कड़ा फैसला लिया। अगले शॉट में जैसे ही कैमरा रोल हुआ, प्राण ने हवा में हाथ चलाने के बजाय सचमुच का एक जोरदार मुक्का किशोर कुमार के पेट में जड़ दिया। असली चोट लगते ही किशोर कुमार के मुंह से चीख निकल पड़ी और वे दर्द से दोहरे हो गए। प्राण ने तुरंत कहा, “बस, यही रिएक्शन तो हमें फिल्म के लिए चाहिए था!”

    इस वाकये के बाद सीन तो परफेक्ट शूट हो गया, लेकिन किशोर कुमार की हालत कुछ देर के लिए खराब हो गई थी। प्राण ने मजाकिया लहजे में यह भी स्वीकार किया कि किशोर कुमार का व्यक्तित्व इतना संक्रामक था कि उनके साथ काम करते-करते एक गंभीर विलेन की छवि वाला इंसान भी उनकी तरह ही बन जाता था। प्राण ने कहा कि अगर वे एक-दो फिल्में और किशोर दा के साथ कर लेते, तो शायद वे भी उनके ‘क्लोन’ बन जाते और अपनी गंभीरता खो देते। यह किस्सा आज भी बॉलीवुड के गलियारों में बड़े चाव से सुनाया जाता है, जो यह दर्शाता है कि उस दौर के कलाकारों के बीच कितनी गहरी समझ और काम के प्रति कितना अनूठा समर्पण हुआ करता था। किशोर कुमार आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी ये शरारतें और प्राण साहब जैसे दिग्गजों के साथ उनके ये किस्से आज भी प्रशंसकों के चेहरों पर मुस्कान ले आते हैं।