Blog

  • बिग बॉस 20 में रीति तिवारी और काजी तौकीर का विवाद बढ़ा, मनोज तिवारी के नाम से वायरल हुई फर्जी माफी पोस्ट

    बिग बॉस 20 में रीति तिवारी और काजी तौकीर का विवाद बढ़ा, मनोज तिवारी के नाम से वायरल हुई फर्जी माफी पोस्ट

    नई दिल्ली ।बिग बॉस 20 में रीति तिवारी और काजी तौकीर के बीच रैप टास्क के दौरान हुआ विवाद चर्चा में है। शो के आगामी एपिसोड में दोनों के साथ उदिति भी इस टास्क का हिस्सा नजर आएंगी। टास्क के दौरान प्रतियोगियों को एक-दूसरे को रोस्ट करना था। इसी दौरान रीति की कुछ बातों पर काजी ने आपत्ति जताई और दोनों के बीच बहस शुरू हो गई।

    बताया गया कि रैप टास्क के दौरान काजी ने रीति को बिना गाली दिए रोस्ट किया। इसके बाद रीति की बारी आई तो उन्होंने काजी और उदिति को लेकर अपशब्दों का इस्तेमाल किया। रीति की बातों पर काजी नाराज हो गए और उन्होंने उन्हें इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करने के लिए कहा।

    काजी ने कहा कि रोस्टिंग की भी एक सीमा होती है और इस तरह की बातें उचित नहीं हैं। दोनों के बीच काफी देर तक बहस हुई। इस दौरान उदिति वहां से चली गईं और बाद में उनके रोने की बात सामने आई। काजी ने भी स्पष्ट किया कि वह इस तरह की बातें सुनना स्वीकार नहीं कर सकते।

    विवाद के दौरान काजी ने कैमरे की तरफ देखकर रीति के पिता मनोज तिवारी का भी जिक्र किया। इसके बाद सोशल मीडिया पर मनोज तिवारी के नाम से एक पोस्ट तेजी से वायरल होने लगी। पोस्ट में दावा किया गया कि उन्होंने अपनी बेटी के व्यवहार पर शर्मिंदगी जताते हुए काजी तौकीर से माफी मांगी है।

    वायरल पोस्ट में मनोज तिवारी की ओर से काजी से माफी मांगने और रीति के कथित व्यवहार को अनुचित बताने की बात लिखी गई थी। पोस्ट सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई और कई लोगों ने इसे मनोज तिवारी की प्रतिक्रिया के तौर पर साझा किया।

    हालांकि, वायरल हो रही यह पोस्ट फर्जी बताई गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मनोज तिवारी ने रीति और काजी के विवाद को लेकर ऐसी कोई पोस्ट नहीं की है और न ही उन्होंने काजी से माफी मांगी है। उनके नाम का इस्तेमाल करके यह फर्जी पोस्ट तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित की गई।

    पोस्ट के कमेंट सेक्शन में भी कई लोगों ने इसकी सत्यता पर सवाल उठाए और इसे फेक बताया। इस वजह से मनोज तिवारी की कथित माफी को लेकर सामने आया दावा वास्तविक प्रतिक्रिया नहीं माना जा रहा है।

    मनोज तिवारी इससे पहले अपनी बेटी रीति के बिग बॉस गेम को लेकर प्रतिक्रिया दे चुके हैं। कुछ समय पहले उनसे रीति के खेल के बारे में सवाल किया गया था। इस पर उन्होंने कहा था कि वह रीति का गेम डर-डरकर देखते हैं।

    अब रीति और काजी के बीच हुए विवाद के बाद इस मामले को लेकर आगे शो में क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर नजर बनी हुई है। खासतौर पर वीकेंड का वार में इस विवाद का जिक्र होता है या नहीं, यह आगामी एपिसोड में स्पष्ट होगा।

  • दूध-दही से स्नैक्स तक ऑनलाइन बिक्री पर FSSAI की सख्ती, प्रोडक्ट दावों और धतूरे की बिक्री पर उठे सवाल

    दूध-दही से स्नैक्स तक ऑनलाइन बिक्री पर FSSAI की सख्ती, प्रोडक्ट दावों और धतूरे की बिक्री पर उठे सवाल

    नई दिल्ली ।घर बैठे किराने का सामान और खाने-पीने की चीजें मंगाने वाले ग्राहकों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कार्रवाई सामने आई है। खाद्य सुरक्षा और मानक से जुड़े मामलों की निगरानी करने वाली संस्था FSSAI ने Amazon, Flipkart, Zepto, Swiggy Instamart और BigBasket के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू की है। इन प्लेटफॉर्म पर कुछ खाद्य उत्पादों से जुड़े दावों को नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने और एक मामले में धतूरे के फल तथा बीज की ऑनलाइन बिक्री से संबंधित मामला सामने आया है।

    FSSAI की कार्रवाई Happilo Premium Date Bites Zesty Orange से जुड़े मामले में पांचों प्लेटफॉर्म तक पहुंची है। जानकारी के अनुसार इस उत्पाद पर किए गए कुछ दावों को निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं माना गया और उन्हें भ्रामक बताया गया। यह उत्पाद Amazon, Flipkart, Zepto, Swiggy Instamart और BigBasket पर उपलब्ध था। इसी वजह से इस मामले में सभी पांच प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

    इसके अलावा Milky Mist के कुछ डेयरी उत्पादों को लेकर भी आपत्ति सामने आई है। इनमें Fresh Low Fat Cream, Farm Fresh Curd और Greek Yoghurt शामिल हैं। इन उत्पादों से जुड़े मामलों में Swiggy Instamart और BigBasket के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

    पूरे मामले में धतूरे के फल और बीज की ऑनलाइन बिक्री से जुड़ा प्रकरण भी सामने आया है। धतूरा खाने की वस्तु नहीं है और इसके फल तथा बीज जहरीले माने जाते हैं। FSSAI ने इसे प्रतिबंधित खाद्य पदार्थों की श्रेणी में रखा है।

    FSSAI के अनुसार Amazon, Swiggy Instamart और BigBasket पर धतूरे के फल और बीज को ऑनलाइन प्रदर्शित करने तथा बेचने से जुड़े मामले सामने आए हैं। इसी आधार पर इन तीनों प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

    प्लेटफॉर्म के हिसाब से देखें तो BigBasket और Swiggy Instamart पर तीन तरह के मामले सामने आए हैं। इनमें Happilo उत्पाद से जुड़ा मामला, Milky Mist के उत्पादों से संबंधित आपत्ति और धतूरे की ऑनलाइन बिक्री का मामला शामिल है। Amazon पर Happilo उत्पाद और धतूरे से जुड़े मामलों में कार्रवाई शुरू की गई है। वहीं Flipkart और Zepto के खिलाफ फिलहाल Happilo उत्पाद से जुड़े मामले में कार्रवाई शुरू होने की जानकारी है।

    इस कार्रवाई का असर सीधे तौर पर ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। अब ग्राहक किराने के सामान के साथ दूध, दही, पनीर, स्नैक्स और दूसरी खाद्य वस्तुएं भी ऑनलाइन मंगाते हैं। ऐसे में खरीदारी के दौरान वे अक्सर ऑनलाइन लिस्टिंग में दी गई जानकारी और उत्पाद की पैकिंग पर लिखे दावों पर निर्भर करते हैं।

    FSSAI की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि ऑनलाइन माध्यम से खाद्य उत्पादों की बिक्री करने वाले प्लेटफॉर्म भी खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के दायरे में आते हैं। ऑनलाइन उपलब्ध किसी उत्पाद की लिस्टिंग में दी गई जानकारी और उसके दावों को लेकर भी नियामकीय कार्रवाई हो सकती है।

    हालांकि इस मामले में अभी अंतिम जुर्माने या दंड की जानकारी सामने नहीं आई है। FSSAI ने फिलहाल दंडात्मक कार्रवाई शुरू करने की बात कही है, इसलिए प्रक्रिया अभी जारी है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।

    साथ ही इस कार्रवाई को संबंधित उत्पादों और ऑनलाइन लिस्टिंग से जुड़े मामलों के रूप में देखा जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे संबंधित कंपनियों के खिलाफ अंतिम दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता, क्योंकि कार्रवाई की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

  • G4 देशों ने UNSC की 80 साल पुरानी संरचना में सुधार को जरूरी बताया, दिल्ली में होगी अगली समीक्षा बैठक

    G4 देशों ने UNSC की 80 साल पुरानी संरचना में सुधार को जरूरी बताया, दिल्ली में होगी अगली समीक्षा बैठक

    नई दिल्ली ।संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में सुधार को लेकर भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान ने एक बार फिर अपनी साझा मांग दोहराई है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में हुई G4 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना में जल्द सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

    बैठक में चारों देशों ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा परिषद में सुधार पहले की तुलना में अधिक जरूरी हो गया है। G4 का मानना है कि परिषद की मौजूदा संरचना करीब 80 साल पुरानी है और आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करती। इसी वजह से परिषद की प्रतिनिधित्व क्षमता, वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, जर्मनी के विदेश मंत्री डॉ. योहान डेविड वाडेफुल और जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु शामिल हुए। मंत्रियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार से जुड़ी अंतर-सरकारी वार्ताओं में हुई प्रगति और चर्चाओं की समीक्षा की।

    G4 देशों ने सुरक्षा परिषद की सदस्यता में स्थायी और गैर-स्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार को सुधार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। चारों देशों ने यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच दोनों श्रेणियों में सदस्यता बढ़ाने के समर्थन की व्यापक मौजूदगी है।

    अफ्रीका के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की जरूरत पर भी बैठक में जोर दिया गया। G4 देशों ने सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वकारी और प्रभावी बनाने के लिए ऐसी व्यवस्था की आवश्यकता बताई, जो वर्तमान वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों को बेहतर तरीके से दर्शा सके।

    G4 की ओर से सुधार प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाने और ठोस परिणाम हासिल करने की मांग की गई। देशों ने सुरक्षा परिषद की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में व्यापक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए अंतर-सरकारी वार्ता प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है और G4 इस प्रक्रिया में लगातार सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।

    न्यूयॉर्क में हुई चर्चा के बाद अब G4 देशों की अगली समीक्षा बैठक दिल्ली में प्रस्तावित है। इसमें सुधार प्रक्रिया में हुई प्रगति और आगे की दिशा पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक के जरिए चारों देश सुरक्षा परिषद में प्रतिनिधित्व बढ़ाने, स्थायी और गैर-स्थायी सदस्यता के विस्तार तथा सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों पर अपने समन्वय की समीक्षा करेंगे।

    G4 देशों की बैठक ऐसे समय हुई है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की संरचना को वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की मांग लगातार उठ रही है। सुधार समर्थक देशों का जोर परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वकारी, विश्वसनीय और प्रभावी बनाने पर है। G4 ने भी इसी दिशा में प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और लंबे समय से लंबित सुधार को ठोस रूप देने की आवश्यकता पर अपना रुख दोहराया है।

  • TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से अंतिम फैसले की समयसीमा बताने को कहा

    TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से अंतिम फैसले की समयसीमा बताने को कहा

    नई दिल्ली ।तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग से पूछा कि वह दोनों गुटों के बीच चल रहे विवाद पर अंतिम फैसला लेने में कितना समय लेगा। अदालत ने विवाद का जल्द निपटारा किए जाने की जरूरत पर जोर दिया है।

    यह मामला ममता बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका से जुड़ा है। उन्होंने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न को फिलहाल फ्रीज कर दिया गया है।

    चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अंतरिम व्यवस्था के तहत अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए हैं। ममता बनर्जी के गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न मिला है।

    सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने चुनाव आयोग से यह बताने को कहा है कि विवाद पर अंतिम निर्णय लेने के लिए उसे कितना समय चाहिए। अदालत में यह भी चर्चा हुई कि मामले की सुनवाई को तेज तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है, ताकि दोनों पक्षों के दावों और उपलब्ध साक्ष्यों पर जल्द निर्णय लिया जा सके।

    ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल अदालत में पेश हुए। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनाव को रोकने की मांग नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि पार्टी को उसके मूल नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने की अनुमति मिलनी चाहिए।

    सिब्बल ने इस विवाद को पार्टी की पहचान और अस्तित्व से जुड़ा विषय बताया। उनकी ओर से चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर भी सवाल उठाए गए और कहा गया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान नाम और चिह्न फ्रीज किए जाने से संबंधित पक्ष के सामने प्रभावी कानूनी उपाय का सवाल पैदा होता है।

    विवाद की पृष्ठभूमि में तृणमूल कांग्रेस के भीतर दो गुटों के बीच पार्टी के नाम, संगठनात्मक नियंत्रण और चुनाव चिह्न को लेकर दावे शामिल हैं। चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद फिलहाल मूल नाम और चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए वैकल्पिक नाम और चिह्न दिए हैं।

    आगामी उपचुनावों को देखते हुए यह विवाद महत्वपूर्ण हो गया है। दोनों गुटों के उम्मीदवारों को फिलहाल अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न के तहत चुनाव प्रक्रिया में आगे बढ़ना होगा। ऐसे में अंतिम फैसला कब आता है, इस पर दोनों पक्षों की नजर बनी हुई है।

    सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से अंतिम निर्णय के लिए समयसीमा बताने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। उस सुनवाई में आयोग की ओर से विवाद के निपटारे में लगने वाले संभावित समय के बारे में अदालत को जानकारी दी जाएगी।

    फिलहाल TMC का मूल नाम और ‘फूल-घास’ चुनाव चिह्न अंतरिम रूप से फ्रीज है। अंतिम फैसला आने तक दोनों गुटों के लिए आवंटित वैकल्पिक नाम और चिह्न ही चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल किए जाएंगे।

  • मजदूरी से लौटे परिजन तो घर में दिखा खौफनाक मंजर, अकेले थे भूरा जाटव, टीबी का चल रहा था इलाज

    मजदूरी से लौटे परिजन तो घर में दिखा खौफनाक मंजर, अकेले थे भूरा जाटव, टीबी का चल रहा था इलाज


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के कोलारस थाना क्षेत्र के लुकवासा में बुधवार शाम एक अधेड़ व्यक्ति का शव घर के अंदर फंदे पर लटका मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान गांधीनगर वार्ड क्रमांक 13 निवासी 50 वर्षीय भूरा पुत्र ओमकार जाटव के रूप में हुई है। घटना के समय परिवार के सभी सदस्य मजदूरी करने के लिए घर से बाहर गए हुए थे जबकि भूरा जाटव घर पर अकेले थे। शाम को जब उनकी पत्नी मजदूरी से वापस लौटीं तो कमरे के अंदर का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने भूरा को फंदे पर लटका देखा जिसके बाद परिजनों और आसपास के लोगों को घटना की जानकारी दी गई। लोगों ने आनन फानन में उन्हें नीचे उतारा लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

    जानकारी के मुताबिक भूरा जाटव के बेटे रंजीत उनकी पत्नी गुड्डी बाई और दूसरे बेटे राजा बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे मजदूरी करने के लिए घर से निकले थे। रोज की तरह परिवार के लोग काम पर चले गए थे। भूरा उस समय घर पर ही थे। परिवार के सदस्य दिनभर मजदूरी करने के बाद शाम करीब 4:30 बजे वापस लौटे। इसी दौरान गुड्डी बाई की नजर कमरे में गई तो उन्होंने भूरा को फंदे पर लटका देखा। यह देखकर वह घबरा गईं और उन्होंने तुरंत परिवार के अन्य सदस्यों तथा पड़ोसियों को सूचना दी।

    घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। परिजनों ने भूरा को फंदे से नीचे उतारा लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। लुकवासा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेने के बाद आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों के मुताबिक भूरा जाटव लंबे समय से टीबी की बीमारी से परेशान थे और उनका इलाज भी चल रहा था। बीमारी को लेकर वह काफी समय से परेशान बताए जा रहे थे। हालांकि घटना के पीछे बीमारी के अलावा कोई अन्य वजह थी या नहीं इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को देखा जा रहा है।

    पुलिस की कार्रवाई के बाद गुरुवार को भूरा जाटव के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाने की प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस ने परिवार के सदस्यों से भी घटना के संबंध में जानकारी ली है। फिलहाल पुलिस की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। जिस घर में परिवार के लोग रोजी रोटी के लिए सुबह मजदूरी करने निकले थे उसी घर में शाम को उन्हें अपने परिजन का शव मिला। घटना ने पूरे इलाके के लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।

  • कम उम्र में सफेद हो रहे हैं बाल तो इन बातों पर दें, ध्यान पोषण और लाइफस्टाइल में बदलाव से मिल सकती है मदद

    कम उम्र में सफेद हो रहे हैं बाल तो इन बातों पर दें, ध्यान पोषण और लाइफस्टाइल में बदलाव से मिल सकती है मदद


    नई दिल्ली ।आजकल कम उम्र में बाल सफेद होना कई लोगों के लिए चिंता का विषय बन गया है। कुछ लोगों के बालों में 20 से 30 साल की उम्र के बीच ही सफेद बाल दिखाई देने लगते हैं। इसके पीछे केवल उम्र ही जिम्मेदार नहीं होती बल्कि आनुवंशिक कारण तनाव धूम्रपान और शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी भी भूमिका निभा सकती है। बालों का प्राकृतिक रंग मेलेनिन नामक पिगमेंट से तय होता है और उम्र बढ़ने के साथ बालों की जड़ों में मौजूद मेलेनोसाइट कोशिकाएं कम मेलेनिन बनाने लगती हैं। इसी वजह से बाल धीरे धीरे सफेद या ग्रे दिखाई देने लगते हैं।

    अगर आप अपने बालों को लंबे समय तक प्राकृतिक रूप से काला और स्वस्थ बनाए रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी डाइट पर ध्यान देना जरूरी है। खाने में पर्याप्त प्रोटीन के साथ आयरन और विटामिन बी12 जैसे पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होना जरूरी है। कुछ मामलों में इन पोषक तत्वों की कमी समय से पहले बाल सफेद होने से जुड़ी पाई गई है। हालांकि बिना जांच के किसी विटामिन या सप्लीमेंट का सेवन शुरू करना सही तरीका नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच कराकर ही कमी की पुष्टि करनी चाहिए।

    तनाव को नियंत्रित करना भी बालों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लगातार तनाव शरीर पर अलग अलग तरह से असर डाल सकता है और शोध में तनाव तथा बालों के रंग में बदलाव के बीच संबंध देखा गया है। इसलिए पर्याप्त नींद नियमित शारीरिक गतिविधि और तनाव कम करने वाली आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    धूम्रपान की आदत भी समय से पहले बाल सफेद होने से जुड़ी पाई गई है। इसलिए बालों की सेहत के साथ पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए धूम्रपान से दूरी बनाना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा बालों पर बहुत ज्यादा गर्मी और कठोर केमिकल ट्रीटमेंट का इस्तेमाल भी कम करना चाहिए। बार बार कलर या दूसरे केमिकल ट्रीटमेंट कराने से बाल रूखे और कमजोर हो सकते हैं।

    बालों को काला करने के लिए इंटरनेट पर आंवला करी पत्ता तेल प्याज या कई तरह के घरेलू नुस्खे बताए जाते हैं लेकिन इनसे सफेद हो चुके बाल स्थायी रूप से दोबारा काले होने का मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। अगर बाल पहले ही सफेद हो चुके हैं तो उन्हें ढकने के लिए हेयर कलर का इस्तेमाल किया जा सकता है। हेयर कलर इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है क्योंकि कुछ लोगों को इससे एलर्जी या त्वचा में जलन हो सकती है।

    अगर कम उम्र में अचानक तेजी से बाल सफेद होने लगें या इसके साथ बाल झड़ने और स्कैल्प से जुड़ी दूसरी समस्या भी दिखाई दे तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। कुछ मामलों में विटामिन की कमी या अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां भी बालों में बदलाव से जुड़ी हो सकती हैं। सही कारण पता चलने के बाद ही उचित उपाय किया जा सकता है।

    इसलिए बालों को नेचुरली काला बनाए रखने का सबसे व्यावहारिक तरीका किसी एक चमत्कारी नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित खानपान तनाव नियंत्रण धूम्रपान से दूरी और बालों की सही देखभाल पर ध्यान देना है। उम्र के कारण सफेद हुए बालों को पूरी तरह वापस काला करने का कोई प्रमाणित घरेलू तरीका नहीं है लेकिन स्वस्थ जीवनशैली समय से पहले होने वाले बदलावों को कम करने में मदद कर सकती है।

  • गोबर फेंकने गई महिला के साथ अचानक हुआ दर्दनाक हादसा, बाड़े में पड़े कटे तार को हटाते ही लगा करंट

    गोबर फेंकने गई महिला के साथ अचानक हुआ दर्दनाक हादसा, बाड़े में पड़े कटे तार को हटाते ही लगा करंट


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र के कार्या गांव में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में 53 वर्षीय महिला की मौत हो गई। महिला अपने घर के बाड़े में गोबर फेंकने गई थी। इसी दौरान वहां घरेलू बिजली सप्लाई की लाइन के कटे हुए तार की चपेट में आ गई। करंट लगते ही महिला बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ी। परिजन उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

    मृतका की पहचान कार्या गांव निवासी ईश्वरदेवी जाटव उम्र 53 वर्ष के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक गुरुवार सुबह ईश्वरदेवी भैंसों का गोबर इकट्ठा कर उसे बाड़े में फेंकने के लिए गई थीं। इसी दौरान उनकी नजर बाड़े से होकर निकली बिजली की लाइन पर पड़ी। बताया गया कि बिजली के तार में कट लगा हुआ था और वह खुला हुआ था।

    ईश्वरदेवी ने तार को हटाने की कोशिश की। जैसे ही उन्होंने हाथ से तार को छुआ उन्हें तेज करंट लग गया। बिजली का झटका इतना जोरदार था कि वह मौके पर ही बेसुध होकर जमीन पर गिर गईं। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों और परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो तुरंत उन्हें संभाला गया।

    महिला की हालत गंभीर देखकर परिजन बिना देर किए उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उनकी जांच की लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी अस्पताल पहुंची। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है। आवश्यक कार्रवाई के बाद महिला के शव का पोस्टमार्टम कराया गया और फिर शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस अब हादसे से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

    इस घटना के बाद बाड़े में बिजली के तार की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया गया है कि जिस तार में कट लगा हुआ था उसे हटाने की कोशिश के दौरान महिला करंट की चपेट में आ गई। ग्रामीण इलाकों में खुले और क्षतिग्रस्त बिजली तारों को लेकर अक्सर सुरक्षा का सवाल सामने आता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं लोगों के लिए गंभीर खतरे का कारण बन सकती हैं।

    गुरुवार सुबह हुए इस हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। ईश्वरदेवी रोजमर्रा के घरेलू काम के लिए बाड़े में गई थीं लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि वहां मौजूद बिजली का एक खुला तार उनकी जान ले लेगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • नवरात्रि से पहले फाल्गुनी पाठक ने पेश किया नया लगातार चलने वाला गरबा, एक घंटे तक थिरकने का तैयार किया म्यूजिकल सफर

    नवरात्रि से पहले फाल्गुनी पाठक ने पेश किया नया लगातार चलने वाला गरबा, एक घंटे तक थिरकने का तैयार किया म्यूजिकल सफर

    नई दिल्ली ।नवरात्रि का त्योहार नजदीक आते ही गरबा और डांडिया की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इसी बीच गरबा गायिका फाल्गुनी पाठक ने इस नवरात्रि के लिए एक नई संगीत पेशकश तैयार की है। इसका नाम ‘गरबा नाइट्स विद फाल्गुनी पाठक’ है। यह एक घंटे का लगातार चलने वाला गरबा है, जिसे खास तौर पर नवरात्रि के उत्सव और गरबा आयोजनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

    इस नई पेशकश की खासियत इसका लगातार चलने वाला म्यूजिक फॉर्मेट है। इसमें अलग-अलग गानों को इस तरह जोड़ा गया है कि एक गाना खत्म होते ही दूसरा शुरू हो जाता है। इस वजह से संगीत के बीच लंबा अंतर नहीं आता और गरबा करने का सिलसिला लगातार जारी रखा जा सकता है।

    फाल्गुनी पाठक ने अपने नए गरबा कलेक्शन को लेकर कहा कि गरबा उनके लिए हमेशा लोगों के साथ जुड़ने, जश्न मनाने और संगीत व भक्ति में पूरी तरह डूबने का माध्यम रहा है। उन्होंने बताया कि ‘गरबा नाइट्स विद फाल्गुनी पाठक’ के जरिए इस नवरात्रि के लिए एक नया म्यूजिकल सफर तैयार किया गया है।

    उन्होंने इस बात को लेकर उत्साह जताया कि लोग इन गानों को सुनें, गरबा करें और एक साथ मिलकर नवरात्रि का जश्न मनाएं। उनके मुताबिक, इन धुनों के साथ लोग अपनी यादों को भी जोड़ सकेंगे।

    फाल्गुनी पाठक ने बताया कि इस गरबा कलेक्शन को विशेष रूप से नवरात्रि और गरबा आयोजनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसे केवल बड़े आयोजनों में ही नहीं, बल्कि दोस्तों और परिवार के साथ होने वाली छोटी-बड़ी महफिलों में भी सुना जा सकता है।

    नए गरबा कलेक्शन में गानों की प्रस्तुति को इस तरह रखा गया है कि संगीत शुरू होने के बाद डांस का सिलसिला बना रहे। गानों के बीच लगातार जुड़ाव होने के कारण इसे एक लंबे गरबा सेशन के तौर पर सुना जा सकता है। इस पेशकश का उद्देश्य नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा आयोजनों के माहौल में उत्साह बनाए रखना है।

    फाल्गुनी पाठक ने कहा कि इस संगीत को सुनते हुए लोग एक और राउंड के लिए गरबा मैदान में उतरने से खुद को रोक न पाएं, इसी भावना के साथ इसे तैयार किया गया है। लगातार चलने वाले इस गरबा कलेक्शन में संगीत, भक्ति और उत्सव के माहौल को एक साथ जोड़ने की कोशिश की गई है।

    इस नए कलेक्शन में फाल्गुनी पाठक की आवाज इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। गरबा और नवरात्रि के संगीत से उनकी आवाज लंबे समय से जुड़ी रही है। इस नई पेशकश में भी उनकी गायकी को केंद्र में रखा गया है।

    म्यूजिक कंपनी की ओर से भी ‘गरबा नाइट्स विद फाल्गुनी पाठक’ को गरबा संगीत की अपनी पेशकश में एक नई कड़ी के तौर पर प्रस्तुत किया गया है। इसमें संगीत की प्रस्तुति के साथ फाल्गुनी पाठक की आवाज को शामिल किया गया है।

    नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों में इस एक घंटे के लगातार चलने वाले कलेक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है। दोस्तों और परिवार के साथ होने वाली महफिलों के लिए भी इसे तैयार किया गया है। इस तरह नई पेशकश नवरात्रि के दौरान संगीत और गरबा के उत्सवी माहौल का हिस्सा बनने के लिए तैयार है।

  • MP BJP को मिला नया संगठन महामंत्री, 8 महीने बाद चंद्रशेखर की एंट्री, हितानंद शर्मा के हटने के बाद बदली तस्वीर

    MP BJP को मिला नया संगठन महामंत्री, 8 महीने बाद चंद्रशेखर की एंट्री, हितानंद शर्मा के हटने के बाद बदली तस्वीर


    भोपाल। मध्य प्रदेश भाजपा में करीब आठ महीने से खाली चल रहे प्रदेश संगठन महामंत्री के पद पर अब नियुक्ति हो गई है। पार्टी ने चंद्रशेखर को मध्य प्रदेश का नया प्रदेश महामंत्री संगठन नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति के साथ ही प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में लंबे समय से खाली चल रही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी पूरी हो गई है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक चंद्रशेखर पहले राजस्थान और तेलंगाना भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।

    दरअसल जनवरी 2026 में तत्कालीन प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की संघ में वापसी हुई थी। उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्य क्षेत्र में सह बौद्धिक प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद मध्य प्रदेश भाजपा में प्रदेश संगठन महामंत्री का पद खाली हो गया था। नई नियुक्ति होने तक क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में संगठन से जुड़े काम देख रहे थे।


    अब चंद्रशेखर को यह जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रदेश भाजपा के संगठनात्मक कामकाज में उनकी भूमिका अहम होगी। संगठन महामंत्री पार्टी के संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय से जुड़े काम देखते हैं। प्रदेश से लेकर जिला और बूथ स्तर तक संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में भी इस पद की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

    चंद्रशेखर की पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वह उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के रहने वाले हैं और संघ में विभाग प्रचारक के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके बाद उन्होंने काशी क्षेत्र में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभाली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी उन्हें संगठन से जुड़ा दायित्व मिला।

    सितंबर 2017 में चंद्रशेखर को राजस्थान भाजपा का संगठन महामंत्री बनाया गया था। उन्होंने करीब छह साल तक राजस्थान में संगठन का काम संभाला। इसके बाद जनवरी 2024 में उन्हें तेलंगाना भाजपा का संगठन महामंत्री बनाया गया। अब मध्य प्रदेश में उन्हें नई जिम्मेदारी दी गई है।

    मध्य प्रदेश भाजपा में यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब पार्टी अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की प्रक्रिया में है। चंद्रशेखर के सामने प्रदेश संगठन के विभिन्न स्तरों के बीच समन्वय बनाए रखने के साथ कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

    इससे पहले हितानंद शर्मा ने सितंबर 2020 में मध्य प्रदेश भाजपा में सह संगठन महामंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी। मार्च 2022 में सुहास भगत की संघ में वापसी के बाद हितानंद को प्रदेश संगठन महामंत्री बनाया गया था। जनवरी 2026 में उनकी संघ में वापसी के बाद से यह पद खाली था।

    अब चंद्रशेखर की नियुक्ति के साथ मध्य प्रदेश भाजपा को पूर्णकालिक प्रदेश संगठन महामंत्री मिल गया है। आने वाले समय में उनकी संगठनात्मक कार्यशैली और प्रदेश भाजपा के अलग-अलग स्तरों के साथ समन्वय पर पार्टी के भीतर नजर रहेगी।

  • एचडीएफसी बैंक ने डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले पांच नए प्रयोग किए

    एचडीएफसी बैंक ने डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले पांच नए प्रयोग किए


    मुंबई।
    एचडीएफसी बैंक ने देश में केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) यानी डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए पांच नए उपयोग मामलों का प्रदर्शन किया है। बैंक का कहना है कि इन पहलों के जरिए डिजिटल रुपये को उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर कॉर्पोरेट भुगतान और कर्मचारी लाभ तक के क्षेत्रों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

    पिछले सप्ताह एक उद्योग मंच पर प्रदर्शित इन पहलों में डिजिटल रुपये की उपयोगिता, प्रोग्रामेबिलिटी, नियामकीय अनुपालन और पहुंच को केंद्र में रखा गया। बैंक के मुताबिक, इन प्रयोगों का उद्देश्य डिजिटल रुपये को देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था में अधिक व्यावहारिक और रोजमर्रा के इस्तेमाल वाली भुगतान व्यवस्था के रूप में विकसित करना है।

    क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड को डिजिटल रुपये में बदलने की सुविधा

    एचडीएफसी बैंक के नए प्रयोगों में क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड पॉइंट को डिजिटल रुपये में भुनाने की सुविधा शामिल है। इसके तहत ग्राहक अपने रिवॉर्ड पॉइंट का इस्तेमाल ब्रांड-विशेष वाउचर के बजाय डिजिटल रुपये के रूप में कर सकेंगे। इन डिजिटल रुपयों का उपयोग भोजन, ईंधन, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी विभिन्न श्रेणियों में किया जा सकेगा।

    बैंक के अनुसार, इस व्यवस्था में ग्राहक अपने रिवॉर्ड का पूरा मूल्य इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे रिवॉर्ड कार्यक्रमों में ग्राहकों को अधिक विकल्प और पारदर्शिता मिलने की उम्मीद है।

    प्रचार अभियानों में डिजिटल रुपया वाउचर

    दूसरे प्रयोग के तहत बैंक प्रचार अभियानों में डिजिटल रुपया गिफ्ट वाउचर का इस्तेमाल करेगा। पात्र ग्राहक किसी निर्धारित प्रचार अभियान या कार्यक्रम की शर्तें पूरी करने पर डिजिटल रुपया वाउचर प्राप्त कर सकेंगे। बैंक द्वारा ट्रिगर किए जाने के बाद यह वाउचर सीधे ग्राहक के एचडीएफसी बैंक डिजिटल रुपया वॉलेट में डाला जा सकेगा।

    ग्राहक इन वाउचर का इस्तेमाल मर्चेंट श्रेणियों में उपलब्ध यूपीआई क्यूआर कोड को स्कैन कर भुगतान के लिए कर सकेंगे। बैंक का मानना है कि इससे प्रचार अभियानों को ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक अधिक उपयोगी बनाया जा सकता है।

    कर्मचारी भत्तों और प्रतिपूर्ति में डिजिटल रुपये का इस्तेमाल

    तीसरे प्रयोग में कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए डिजिटल रुपये के इस्तेमाल की व्यवस्था प्रदर्शित की गई। इसके तहत संगठन एचडीएफसी बैंक के कॉर्पोरेट नेट बैंकिंग मंच के माध्यम से अपने कर्मचारियों को भोजन, ईंधन और यात्रा जैसे निर्धारित भत्ते डिजिटल रुपये में वितरित कर सकेंगे।

    प्रोग्रामेबल भुगतान की मदद से कंपनियां यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि जारी की गई राशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाए। इससे नियामकीय अनुपालन के साथ-साथ वित्तीय टीमों के लिए भुगतान के मिलान और निगरानी की प्रक्रिया को भी आसान बनाने का लक्ष्य है।

    भीम के जरिए डिजिटल रुपया वॉलेट तक पहुंच

    बैंक ने डिजिटल रुपये को भीम के साथ जोड़ने की सुविधा भी प्रदर्शित की। इसके तहत एचडीएफसी बैंक के डिजिटल रुपया वॉलेट भीम के माध्यम से उपलब्ध होंगे और ग्राहक अपने सीबीडीसी वॉलेट से यूपीआई जैसी परिचित भुगतान प्रक्रिया के जरिए लेन-देन कर सकेंगे।

    बैंक के अनुसार, इस एकीकरण से डिजिटल रुपये के उपयोग में आसानी बढ़ने के साथ व्यापारी स्वीकार्यता के दायरे को भी विस्तार मिल सकता है।

    बिना इंटरनेट के विमान में भुगतान

    पांचवीं पहल ऑफलाइन सीबीडीसी भुगतान से जुड़ी है। इसके तहत विमान में यात्रा के दौरान इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में भी डिजिटल रुपये के माध्यम से भुगतान किया जा सकेगा। बैंक ने इसे डिजिटल रुपये के इस्तेमाल को जमीनी कनेक्टिविटी से आगे बढ़ाने वाली पहल के रूप में प्रदर्शित किया है।

    एचडीएफसी बैंक के ब्रांच बैंकिंग, पेमेंट्स, ट्रेजरी, लायबिलिटी प्रोडक्ट्स, मार्केटिंग, वर्चुअल चैनल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर के ग्रुप हेड आशीष पार्थसारथी ने कहा कि डिजिटल रुपया सरकारी मुद्रा में लोगों के भरोसे को प्रोग्रामेबिलिटी, पारदर्शिता और मजबूत नियंत्रण के साथ जोड़ता है। उन्होंने कहा कि बैंक द्वारा प्रदर्शित उपयोग के मामले खुदरा और थोक बाजार में उद्देश्य आधारित भुगतान, अनुपालन और ऑडिट से जुड़ी उभरती जरूरतों को पूरा करने की दिशा में हैं।

    एचडीएफसी बैंक के सीनियर ईवीपी रजनीश प्रभु ने कहा कि डिजिटल रुपये को बड़े स्तर पर अपनाने का अगला चरण उसकी रोजमर्रा की उपयोगिता से जुड़ा होगा। यूपीआई, मर्चेंट स्वीकार्यता, रिवॉर्ड, कर्मचारी लाभ और ऑफलाइन भुगतान जैसे परिचित क्षेत्रों के साथ सीबीडीसी को जोड़ने से ग्राहकों और कारोबारों के लिए इसका इस्तेमाल आसान हो सकता है।

    बैंक के अनुसार, सीबीडीसी और यूपीआई की प्रकृति अलग-अलग होने के बावजूद दोनों भुगतान व्यवस्था के व्यापक डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं। डिजिटल रुपये की प्रोग्रामेबिलिटी का इस्तेमाल कॉर्पोरेट भुगतान को निर्धारित उद्देश्यों से जोड़ने, अनुपालन को बेहतर बनाने और लेन-देन की निगरानी को आसान करने के लिए किया जा सकता है। एचडीएफसी बैंक ने कहा कि वह भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर सीबीडीसी की संभावनाओं को व्यावहारिक और बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले समाधानों में बदलने की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।