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  • स्किन केयर में सिरके का इस्तेमाल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें वरना त्वचा को हो सकता है नुकसान

    स्किन केयर में सिरके का इस्तेमाल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें वरना त्वचा को हो सकता है नुकसान


    नई दिल्ली । स्किन केयर के लिए लोग तरह तरह के घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। इन्हीं में सिरका भी शामिल है जिसका इस्तेमाल कुछ लोग त्वचा की सफाई और अतिरिक्त तेल को कम करने के लिए करते हैं। खासतौर पर एप्पल साइडर विनेगर को लेकर इंटरनेट पर कई तरह के दावे किए जाते हैं। हालांकि सिरका एक अम्लीय पदार्थ है इसलिए इसे चेहरे पर सीधे लगाना त्वचा के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। स्किन केयर में इसका इस्तेमाल करने से पहले इसके संभावित फायदे और सावधानियों को समझना जरूरी है।

    सिरके में एसिटिक एसिड मौजूद होता है। इसी अम्लीय प्रकृति की वजह से यह त्वचा के पीएच को प्रभावित कर सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि पतला किया हुआ सिरका त्वचा से अतिरिक्त तेल और गंदगी हटाने में मदद कर सकता है। लेकिन हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और जिस चीज से किसी व्यक्ति को फायदा महसूस हो वही दूसरे व्यक्ति की त्वचा में जलन पैदा कर सकती है। खासतौर पर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को घरेलू प्रयोग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

    अगर कोई व्यक्ति सिरके को स्किन केयर में शामिल करना चाहता है तो सबसे जरूरी बात इसे बिना पतला किए चेहरे पर न लगाना है। शुद्ध सिरका त्वचा में जलन लालिमा खुजली या सूखापन पैदा कर सकता है। आंखों के आसपास की त्वचा पर इसे बिल्कुल नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा खुले घाव कट या पहले से irritated त्वचा पर सिरका लगाने से समस्या बढ़ सकती है।

    घरेलू स्किन केयर में किसी भी नए पदार्थ का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर माना जाता है। इसके लिए बहुत थोड़ी मात्रा को त्वचा के किसी छोटे हिस्से पर लगाकर प्रतिक्रिया देखी जा सकती है। अगर जलन खुजली लालिमा या सूजन जैसी समस्या दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए। चेहरे की त्वचा पर प्रयोग करने से पहले यह सावधानी विशेष रूप से जरूरी है।

    मुंहासों को लेकर भी सिरके के इस्तेमाल की चर्चा होती है। कुछ लोग मानते हैं कि इसकी अम्लीय प्रकृति बैक्टीरिया और अतिरिक्त तेल को प्रभावित कर सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मुंहासों के इलाज के लिए सिरका एक प्रमाणित विकल्प है। मुंहासे लगातार बने रहते हैं या त्वचा पर दर्दनाक दाने और निशान हो रहे हैं तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।

    सिरके का इस्तेमाल करने के बाद त्वचा में सूखापन महसूस हो सकता है। ऐसे में हल्का और त्वचा के अनुकूल मॉइस्चराइजर इस्तेमाल करना जरूरी हो सकता है। दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन लगाना भी स्किन केयर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने के चक्कर में त्वचा की मूल देखभाल को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि बाजार में मिलने वाले अलग अलग प्रकार के सिरके एक जैसे नहीं होते। खाने के लिए इस्तेमाल होने वाला सिरका और किसी विशेष कॉस्मेटिक उद्देश्य के लिए तैयार उत्पाद अलग हो सकते हैं। इसलिए इंटरनेट पर बताए गए किसी भी नुस्खे को बिना समझे चेहरे पर इस्तेमाल करना सही नहीं है।

    कुल मिलाकर सिरका स्किन केयर का कोई जादुई उपाय नहीं है। कुछ लोगों को पतला किए गए सिरके से त्वचा पर अलग अनुभव हो सकता है लेकिन गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर जलन और त्वचा की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इसलिए चेहरे पर सिरका लगाने से पहले त्वचा के प्रकार को समझना जरूरी है। संवेदनशील त्वचा वाले लोग या पहले से किसी त्वचा संबंधी समस्या से परेशान व्यक्ति घरेलू प्रयोग करने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लें। स्वस्थ त्वचा के लिए नियमित सफाई मॉइस्चराइजिंग और सनस्क्रीन जैसी बुनियादी देखभाल ज्यादा महत्वपूर्ण है।

  • मानेसर में मारुति सुजुकी ने शुरू किया ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट, कम कार्बन उत्सर्जन वाले विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा

    मानेसर में मारुति सुजुकी ने शुरू किया ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट, कम कार्बन उत्सर्जन वाले विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा


    नई दिल्ली ।
    मारुति सुजुकी इंडिया ने हरियाणा के मानेसर स्थित अपने विनिर्माण संयंत्र में 300 किलोवाट क्षमता वाले ग्रीन हाइड्रोजन इलेक्ट्रोलाइजर प्लांट का संचालन शुरू कर दिया है। इस परियोजना को स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल और उत्पादन प्रक्रिया से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है।

    यह परियोजना पायलट आधार पर संचालित की जाएगी। इसके तहत नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल करके ग्रीन हाइड्रोजन तैयार की जाएगी। तैयार हाइड्रोजन को प्राकृतिक गैस के साथ मिलाकर विनिर्माण गतिविधियों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे उत्पादन प्रक्रिया में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

    परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू मानेसर संयंत्र में पहले से स्थापित सौर ऊर्जा प्रणाली का बेहतर उपयोग करना है। छुट्टियों या कम उत्पादन वाले दिनों में जब संयंत्र में उपलब्ध सौर ऊर्जा का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाता, तब अतिरिक्त बिजली का उपयोग हाइड्रोजन उत्पादन के लिए किया जाएगा।

    इसके लिए अतिरिक्त सौर ऊर्जा से इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया के जरिए ग्रीन हाइड्रोजन तैयार की जाएगी। उत्पादन के बाद हाइड्रोजन को संग्रहित किया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार विनिर्माण कार्यों में इसका उपयोग किया जाएगा। इस व्यवस्था से अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा को उपयोगी ईंधन में बदलने की दिशा में काम किया जाएगा।

    इस परियोजना को भविष्य में ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक के व्यापक इस्तेमाल के लिए एक लर्निंग प्लेटफॉर्म के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। इससे हरियाणा और गुजरात में स्थित अन्य विनिर्माण इकाइयों में इस तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाओं को समझने और आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    यह पहल केंद्र सरकार के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के अनुरूप है। इसके साथ ही यह उत्पादन गतिविधियों में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

    कंपनी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिसाशी ताकेउची ने कहा कि कंपनी ने अपने उत्पादों के साथ-साथ विनिर्माण प्रक्रियाओं के लिए भी मल्टी-पाथवे रणनीति अपनाई है। उनके अनुसार, ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना के अलावा सौर ऊर्जा, बायोगैस और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों में भी निवेश किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है। ऐसे में भविष्य में प्रतिस्पर्धात्मकता का निर्धारण केवल लागत और गुणवत्ता से नहीं होगा, बल्कि कार्बन उत्सर्जन की तीव्रता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    कंपनी के अनुसार, वह कम-कार्बन और ऊर्जा दक्ष विनिर्माण के लिए आवश्यक क्षमताएं अभी से विकसित कर रही है। इसके तहत विनिर्माण परिचालनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी लाने का लक्ष्य तय किया गया है।

    वित्त वर्ष 2030-31 तक विनिर्माण परिचालनों से होने वाले उत्सर्जन को मौजूदा 6.15 लाख टन से घटाकर 2.66 लाख टन तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना इसी दिशा में उठाए गए कदमों में शामिल है।

  • गणपति विसर्जन के बाद पसरा मातम, तालाब में गिरा युवक रातभर रहा लापता, सुबह बेलों में फंसा मिला शव

    गणपति विसर्जन के बाद पसरा मातम, तालाब में गिरा युवक रातभर रहा लापता, सुबह बेलों में फंसा मिला शव


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के पोहरी नगर परिषद क्षेत्र के नानोरा गांव में गणेश विसर्जन के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया। बुधवार रात तालाब में गिरे 25 वर्षीय मूकबधिर युवक का शव गुरुवार सुबह बरामद किया गया। रात में अंधेरा अधिक होने के कारण पुलिस और स्थानीय लोगों ने काफी तलाश की लेकिन युवक का कोई सुराग नहीं मिल सका। सुबह दोबारा सर्चिंग अभियान शुरू किया गया तो कुछ दूरी पर पानी में फैली बेलों के बीच युवक का शव फंसा मिला। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम पसर गया।

    मृतक की पहचान हरगोविंद जाटव उम्र 25 वर्ष पुत्र अंतु जाटव के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक हरगोविंद मूकबधिर था। बताया गया कि बुधवार रात वह शौच के लिए तालाब के दूसरे हिस्से की ओर गया था। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह पानी में जा गिरा। तालाब में गिरने के बाद आसपास मौजूद लोगों को घटना की जानकारी हुई।

    हादसे के वक्त तालाब के दूसरे छोर पर गणेश प्रतिमा का विसर्जन चल रहा था। वहां मौजूद लोगों ने युवक को तालाब में गिरते हुए देखा। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर पोहरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से युवक की तलाश शुरू की गई।

    रात में तालाब में काफी देर तक सर्चिंग अभियान चलाया गया। पुलिस और स्थानीय लोग पानी में युवक को तलाशते रहे लेकिन अंधेरा होने के कारण अभियान में परेशानी आई। काफी कोशिश के बाद भी युवक का पता नहीं चल सका। इसके बाद रात में तलाश रोकनी पड़ी और सुबह दोबारा सर्चिंग शुरू करने का फैसला किया गया।

    गुरुवार सुबह पुलिस ने एक बार फिर तालाब में तलाश शुरू की। इस दौरान पानी के भीतर कुछ दूरी पर फैली बेलों के बीच हरगोविंद का शव फंसा हुआ दिखाई दिया। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। हादसे की खबर मिलते ही परिजन भी मौके पर पहुंच गए।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पोहरी थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस हादसे से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है।

    गणेश विसर्जन के दौरान हुई इस घटना से नानोरा गांव में शोक का माहौल है। जिस समय गांव में गणेश प्रतिमा के विसर्जन को लेकर लोग जुटे थे उसी दौरान एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया। रात के अंधेरे में शुरू हुई तलाश सुबह तालाब में पानी की बेलों के बीच शव मिलने के साथ खत्म हुई। घटना ने गांव के लोगों को भी गमगीन कर दिया है।

  • कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल का शिलान्यास, गौतम अदाणी बोले- बंगाल का चिकित्सा भविष्य होगा बेहतर

    कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल का शिलान्यास, गौतम अदाणी बोले- बंगाल का चिकित्सा भविष्य होगा बेहतर

    नई दिल्ली ।अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने गुरुवार को कोलकाता में 2,000 बेड वाले गैर-लाभकारी अस्पताल अदाणी आरोग्य मंदिर के शिलान्यास के मौके पर इसे पश्चिम बंगाल के चिकित्सा क्षेत्र के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ टेक्नोलॉजी और डिजिटल हेल्थ के इस्तेमाल पर भी केंद्रित होगा।

    गौतम अदाणी ने अस्पताल की शुरुआत के अवसर को विशेष दिन बताते हुए कहा कि 2,000 बेड वाला यह गैर-लाभकारी संस्थान आधुनिक मेडिकल कॉलेज, उन्नत शोध और स्वास्थ्य सेवाओं की सुविधाओं से जुड़ा होगा। उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी और डिजिटल हेल्थ को इसमें महत्वपूर्ण स्थान दिया जाएगा, जिससे बंगाल में चिकित्सा व्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि अदाणी आरोग्य मंदिर बंगाल के प्रति समूह की व्यापक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इसके तहत विश्वस्तरीय भौतिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में योगदान देने की बात कही गई है।

    शिलान्यास कार्यक्रम में गौतम अदाणी ने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनका आभार भी जताया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल की प्रस्तावित सुविधाओं और इसके सामाजिक उद्देश्य को लेकर जानकारी साझा की।

    अदाणी के अनुसार अदाणी आरोग्य मंदिर एक विश्वस्तरीय और गैर-लाभकारी चिकित्सा संस्थान होगा। इसमें कुल 2,000 बेड होंगे। इनमें से 1,000 बेड आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित किए जाएंगे। ऐसे लोग जो राज्य और केंद्र की स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत पात्र हैं, उनके लिए इन बेड की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है।

    अस्पताल के केंद्र में एक मेडिकल कॉलेज भी होगा। इसके साथ उन्नत शोध और चिकित्सा देखभाल से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। गौतम अदाणी ने कहा कि इस व्यवस्था से बंगाल में कुशल स्वास्थ्यकर्मियों को तैयार करने की नींव रखी जाएगी।

    उन्होंने बताया कि अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सुविधाओं के निर्माण में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। उनके अनुसार इस संस्थान से राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में 10,000 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

    गौतम अदाणी ने कार्यक्रम के दौरान पश्चिम बंगाल में समूह के व्यापक निवेश की योजना भी साझा की। उन्होंने कहा कि 2035 तक बंगाल में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा।

    प्रस्तावित निवेश में कई अलग-अलग क्षेत्र शामिल होंगे। इनमें बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स, बिजली उत्पादन, बिजली ट्रांसमिशन और वितरण, सड़कें, पुल और रोपवे के साथ ग्रीन सीमेंट तथा हाइपरस्केल डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    अदाणी ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की इस परियोजना के साथ राज्य में बुनियादी ढांचे और अन्य क्षेत्रों में भी निवेश की योजना आगे बढ़ाई जाएगी। 2,000 बेड वाला अदाणी आरोग्य मंदिर अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और रिसर्च सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा।

    परियोजना में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए प्रस्तावित 1,000 बेड की व्यवस्था को भी प्रमुख हिस्सा बताया गया है। इसके अलावा मेडिकल शिक्षा और उन्नत शोध के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने पर जोर दिया गया है।

    इस तरह शिलान्यास कार्यक्रम में अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं, मेडिकल शिक्षा, शोध, डिजिटल तकनीक और रोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी सामने रखी गई। साथ ही पश्चिम बंगाल में 2035 तक 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की योजना भी बताई गई।

  • भारत के UPI ने रचा वैश्विक रिकॉर्ड, हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर बना डिजिटल भुगतान का बेंचमार्क

    भारत के UPI ने रचा वैश्विक रिकॉर्ड, हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर बना डिजिटल भुगतान का बेंचमार्क


    नई दिल्ली ।
    भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में लगातार बड़े स्तर पर विस्तार कर रहा है। वर्तमान में यह डिजिटल पेमेंट नेटवर्क हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन प्रोसेस कर रहा है। इसके साथ ही भारत ने बड़े पैमाने पर डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन को एक साथ आगे बढ़ाने का उदाहरण पेश किया है।

    एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रियल-टाइम पेमेंट इकोसिस्टम डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रमुख सफलताओं में शामिल है। UPI के विस्तार ने बड़ी संख्या में लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ने में भूमिका निभाई है। इसके बावजूद डिजिटल लेनदेन की वृद्धि मजबूत बनी हुई है।

    रिपोर्ट में वैश्विक भुगतान उद्योग को लेकर भी अनुमान सामने रखा गया है। इसके अनुसार, वर्ष 2030 तक वैश्विक भुगतान उद्योग का राजस्व 2.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। हालांकि आने वाले वर्षों में इसकी वृद्धि दर पिछले पांच वर्षों की तुलना में कुछ धीमी रहने का अनुमान है। पिछले पांच वर्षों में यह वृद्धि करीब 7 प्रतिशत प्रतिवर्ष रही, जबकि आगे लगभग 5 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि का अनुमान जताया गया है।

    भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल को वित्तीय समावेशन और बड़े पैमाने पर उपयोग के बीच संतुलन बनाने वाले उदाहरण के तौर पर बताया गया है। UPI के जरिए करोड़ों लोगों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़े जाने के साथ लेनदेन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    डिजिटल भुगतान के साथ क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। खास तौर पर ऑनलाइन भुगतान के क्षेत्र में क्रेडिट कार्ड उपयोग में तेजी देखी जा रही है। इससे बैंकों, फिनटेक कंपनियों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए नई मूल्यवर्धित सेवाएं विकसित करने के अवसर बन रहे हैं।

    डिजिटल भुगतान क्षेत्र का अगला चरण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एजेंटिक कॉमर्स से जुड़ा हुआ बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में एआई आधारित सिस्टम भुगतान प्रक्रिया को अधिक सहज, सुरक्षित और स्वचालित बनाने में मदद कर सकते हैं।

    एआई के बढ़ते इस्तेमाल का असर भुगतान और ट्रांजैक्शन बैंकिंग क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। इससे कंपनियों को परिचालन लागत कम करने, उत्पादों में सुधार करने और पारंपरिक प्रक्रियाओं को स्वचालित करने में मदद मिल सकती है। ट्रेड फाइनेंस और भुगतान संचालन जैसी कागजी प्रक्रियाओं में भी तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ रही हैं।

    एजेंटिक कॉमर्स को लेकर बड़े व्यापारियों के रुख से भी इसकी बढ़ती अहमियत का संकेत मिलता है। सर्वेक्षण में शामिल 73 प्रतिशत बड़े व्यापारियों ने कहा कि बेहतर एजेंट-आधारित लेनदेन की सुविधा और समर्थन मिलने पर वे अपने भुगतान सेवा प्रदाता को बदलने पर विचार कर सकते हैं। इससे भुगतान कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा में एजेंटिक कॉमर्स की भूमिका बढ़ने के संकेत मिलते हैं।

    रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर भुगतान संप्रभुता के बढ़ते महत्व का भी उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार, दुनिया के 137 देशों में फिलहाल चौबीसों घंटे इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम उपलब्ध हैं। इससे वैश्विक भुगतान व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक विविध और व्यापक हो रही है।

    भारत का UPI इसी बदलते वैश्विक डिजिटल भुगतान परिदृश्य में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने वाले रियल-टाइम भुगतान नेटवर्क के रूप में सामने आया है। हर महीने 20 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन की प्रोसेसिंग इसके विस्तार और डिजिटल भुगतान के बढ़ते उपयोग को दर्शाती है।

  • दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें नियंत्रण में रखने की तैयारी, सरकार और उद्योग ने पर्याप्त आपूर्ति का दिया भरोसा

    दशहरा-दिवाली पर चीनी की कीमतें नियंत्रण में रखने की तैयारी, सरकार और उद्योग ने पर्याप्त आपूर्ति का दिया भरोसा


    नई दिल्ली ।दशहरा और दिवाली समेत आगामी त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध कराने के लिए सरकार और चीनी उद्योग मिलकर काम कर रहे हैं। त्योहारों के दौरान चीनी की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने पर जोर दिया जा रहा है।

    इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महानिदेशक दीपक बल्लानी ने कहा कि त्योहारी मौसम में उपभोक्ताओं को उचित दर पर चीनी उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि दशहरा और इसके बाद दिवाली सहित कई प्रमुख त्योहार आने वाले हैं, ऐसे में मांग में संभावित बढ़ोतरी के बावजूद चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर रखना जरूरी है।

    उन्होंने बताया कि घरेलू बाजार में फिलहाल चीनी की आपूर्ति पर्याप्त बनी हुई है। खुदरा कीमतों में भी नरमी की शुरुआत हो चुकी है और आने वाले सप्ताहों में इसमें और कमी आने की संभावना जताई गई है।

    चीनी की कीमतों में कमी का असर खुदरा बाजार में पूरी तरह दिखाई देने में कुछ समय लग सकता है। इसका कारण एक्स-मिल कीमतों और उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाली खुदरा कीमतों के बीच रहने वाला अंतर है। मिल स्तर पर कीमत कम होने के बाद इसका लाभ आपूर्ति श्रृंखला के अलग-अलग चरणों से गुजरते हुए धीरे-धीरे खुदरा बाजार तक पहुंचता है।

    बताया गया है कि एक्स-मिल चीनी की कीमतों में करीब 25 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ चुकी है। पूरे देश में एक्स-मिल कीमत का औसत वर्तमान में करीब 4,450 रुपये प्रति क्विंटल बताया गया है।

    एक्स-मिल कीमत वह दर होती है जिस पर चीनी मिल से निकलते समय चीनी की बिक्री की जाती है। इसके बाद परिवहन, भंडारण, थोक कारोबार और खुदरा स्तर से गुजरने के कारण अंतिम उपभोक्ता तक पहुंचने वाली कीमत अलग हो सकती है।

    त्योहारी सीजन में चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण चीनी की जरूरत भी अधिक होती है। ऐसे में सरकार और उद्योग के सामने पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रखने के साथ कीमतों को स्थिर बनाए रखने की चुनौती रहती है।

    चीनी उद्योग की ओर से कहा गया है कि मौजूदा स्थिति में घरेलू बाजार में आपूर्ति को लेकर कोई बड़ी कमी नहीं है। एक्स-मिल स्तर पर कीमतों में आई गिरावट का असर आने वाले समय में खुदरा बाजार पर भी दिखाई देने की उम्मीद है।

    बाजार में कम लागत के अनुरूप कीमतों में बदलाव होने के साथ उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलने की संभावना है। हालांकि, मिल स्तर से खुदरा बाजार तक कीमतों में बदलाव पहुंचने में कुछ समय लग सकता है।

    त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने के बावजूद सरकार और उद्योग का लक्ष्य चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त कीमत का दबाव नहीं पड़ने देना है। मौजूदा एक्स-मिल कीमतों में आई गिरावट के आधार पर आने वाले समय में खुदरा चीनी की कीमतों में भी नरमी की उम्मीद जताई गई है।

    इससे दशहरा और दिवाली के दौरान चीनी की बढ़ती मांग के बीच उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना है। सरकार और उद्योग की ओर से आपूर्ति तथा कीमतों पर लगातार नजर रखने की बात कही गई है।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की मांग, वकील ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुमति मांगी

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की मांग, वकील ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुमति मांगी

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकील ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने इस कार्रवाई के लिए आवश्यक अनुमति देने का अनुरोध किया है। यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित असहमतियों पर चर्चा तेज है।

    ब्रजेश सिंह ने अपने पत्र में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने मीडिया में सामने आई जानकारी का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग का संचालन इस तरह हुआ, मानो महत्वपूर्ण फैसले एक ही व्यक्ति द्वारा लिए जा रहे हों। पत्र में इसे सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों में बताई गई चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से अलग बताया गया है।

    आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की लिखित सहमति आवश्यक होती है। मौजूदा स्थिति में ब्रजेश सिंह का पत्र इसी अनुमति के लिए भेजा गया है। यानी अभी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई आपराधिक अवमानना मामला शुरू नहीं हुआ है और पत्र के आधार पर आगे की प्रक्रिया अटॉर्नी जनरल की अनुमति पर निर्भर करेगी।

    इस मांग की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी जानकारी भी है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा सामने आया है। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म 6 में बदलाव तथा मतदाता सूची से जुड़े दूसरे विषयों पर सवाल उठाए जाने की बात कही गई है।

    विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की चर्चा हुई है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर उन्होंने सवाल उठाए तथा यह दावा किया कि कुछ निर्णय उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए। मतदाता सूची के डिजिटल डाटा और उसके प्रबंधन से जुड़े विषय भी इन आपत्तियों में शामिल बताए गए हैं।

    इन घटनाक्रमों के बाद विपक्षी दलों की ओर से भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सवाल उठाए गए हैं। कुछ विपक्षी दलों ने उनके इस्तीफे की मांग की है और एसआईआर की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। पहले दिए गए महाभियोग नोटिस को लेकर भी राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इस नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण सहित कई आरोप लगाए गए थे।

    हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद या फैसलों में असहमति के दावों को अलग तरीके से प्रस्तुत किया है। आयोग का कहना है कि उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं और एसआईआर से जुड़े निर्णयों को भी सभी तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त है। आयोग ने यह भी कहा है कि वैचारिक मतभेद को टकराव नहीं माना जाना चाहिए।

    आयोग के अनुसार, व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देना केवल चुनाव आयुक्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी अपने सुझाव देने के लिए अधिकृत है। इस तरह एक ओर कथित लिखित आपत्तियों और दूसरी ओर आयोग की सर्वसम्मति वाली सफाई के बीच विवाद बना हुआ है।

    अब ब्रजेश सिंह द्वारा अटॉर्नी जनरल को भेजे गए पत्र के बाद मामले का कानूनी पहलू भी चर्चा में आ गया है। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों और चुनाव आयोग की बहु-सदस्यीय व्यवस्था का हवाला देते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही की अनुमति मांगी गई है। आगे की स्थिति अटॉर्नी जनरल की ओर से लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी।

  • HIV से बचाव का बदला तरीका 8 हफ्ते में लगने वाले इंजेक्शन ने रोज की गोली को दी चुनौती स्टडी में चौंकाने वाले नतीजे

    HIV से बचाव का बदला तरीका 8 हफ्ते में लगने वाले इंजेक्शन ने रोज की गोली को दी चुनौती स्टडी में चौंकाने वाले नतीजे


    नई दिल्ली । HIV से बचाव को लेकर हुई एक स्टडी में लंबे समय तक असर करने वाले इंजेक्शन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शोध में हर 8 सप्ताह में लगाए जाने वाले कैबोटेग्राविर इंजेक्शन को HIV से बचाव के लिए रोजाना ली जाने वाली गोली की तुलना में ज्यादा प्रभावी पाया गया। इस नतीजे के बाद HIV संक्रमण के जोखिम वाले लोगों के लिए बचाव के विकल्पों को लेकर चर्चा बढ़ी है। हालांकि सबसे जरूरी बात यह है कि कैबोटेग्राविर HIV का इलाज नहीं है बल्कि संक्रमण से पहले बचाव के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है।

    HIV शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने वाला वायरस है। संक्रमण से बचाव के लिए ऐसे लोगों को प्री एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस यानी PrEP दिया जा सकता है जिन्हें HIV संक्रमण का जोखिम अधिक हो। लंबे समय से इसके लिए रोजाना दवा लेने का विकल्प इस्तेमाल किया जाता रहा है। रोज गोली लेने की व्यवस्था में सबसे बड़ी चुनौती नियमितता की होती है क्योंकि कई बार लोग किसी दिन दवा लेना भूल सकते हैं। ऐसे में लंबे समय तक असर करने वाला इंजेक्शन एक वैकल्पिक तरीका हो सकता है।

    कैबोटेग्राविर इसी तरह का इंजेक्शन है जिसे लगभग 8 सप्ताह के अंतर पर लगाया जाता है। उपलब्ध स्टडी में कुल 4566 लोगों को शामिल किया गया था। प्रतिभागियों को अलग अलग समूहों में रखा गया जिसमें एक समूह को हर 8 सप्ताह में कैबोटेग्राविर का इंजेक्शन दिया गया जबकि दूसरे समूह को रोजाना HIV से बचाव की गोली दी गई। अध्ययन के दौरान इंजेक्शन वाले समूह में 13 लोगों में HIV संक्रमण पाया गया जबकि रोज गोली लेने वाले समूह में 39 संक्रमण दर्ज किए गए। शोधकर्ताओं के निष्कर्ष के अनुसार इंजेक्शन ने HIV से बचाव में बेहतर प्रभाव दिखाया।

    महिलाओं में भी इस इंजेक्शन की प्रभावशीलता को लेकर अध्ययन किया गया। इसमें 3224 महिलाओं को शामिल किया गया था। हर 8 सप्ताह में कैबोटेग्राविर लेने वाले समूह में HIV संक्रमण के 4 मामले सामने आए जबकि रोजाना गोली लेने वाले समूह में 36 मामले दर्ज किए गए। इन परिणामों ने लंबे समय तक असर करने वाले HIV प्रिवेंशन इंजेक्शन की संभावित उपयोगिता को सामने रखा।

    हालांकि इन नतीजों का यह मतलब नहीं है कि HIV की मौजूदा दवाओं की जरूरत खत्म हो गई है। कैबोटेग्राविर का इस्तेमाल HIV से संक्रमित व्यक्ति के इलाज के लिए नहीं किया जाता। यह उन लोगों के लिए बचाव का विकल्प है जिन्हें HIV संक्रमण का खतरा है और जिनके लिए डॉक्टर PrEP की सलाह देते हैं। अगर किसी व्यक्ति को पहले से HIV संक्रमण है तो उसके लिए डॉक्टर की निगरानी में अलग उपचार की जरूरत होती है।

    इंजेक्शन लेने से पहले HIV की स्थिति की जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी होती है। इसके अलावा इंजेक्शन की अगली खुराक समय पर लेना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए स्टडी के सकारात्मक परिणामों के बावजूद इसे अपनी मर्जी से इस्तेमाल करने के बजाय योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही PrEP का विकल्प चुनना चाहिए।

  • 500 करोड़ के मानहानि नोटिस पर आदित्य ठाकरे का 25 पेज में जवाब, माफी मांगने और पोस्ट हटाने से किया इनकार

    500 करोड़ के मानहानि नोटिस पर आदित्य ठाकरे का 25 पेज में जवाब, माफी मांगने और पोस्ट हटाने से किया इनकार

    नई दिल्ली ।शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने दिवंगत दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की ओर से भेजे गए 500 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस का 25 पन्नों में जवाब दिया है। जवाब में आदित्य ठाकरे ने नोटिस में लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए माफी मांगने, सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और 500 करोड़ रुपये का मुआवजा देने से इनकार किया है।

    कानूनी जवाब के मुताबिक, 16 सितंबर 2026 को आदित्य ठाकरे के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से अंग्रेजी और मराठी में किए गए दो पोस्ट में सतीश सालियान का नाम नहीं लिया गया था। जवाब में यह भी कहा गया है कि पोस्ट में ऐसा कोई स्पष्ट संदर्भ नहीं था, जिससे सतीश सालियान की पहचान की जा सके।

    आदित्य ठाकरे की ओर से यह भी दोहराया गया है कि वह दिशा सालियान से कभी मिले या उन्हें जानते तक नहीं थे। उन्होंने अपने इस बयान पर कायम रहने की बात कही है। कानूनी जवाब में कहा गया है कि संबंधित पोस्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं था।

    जवाब में दावा किया गया है कि दोनों पोस्ट का संदर्भ उनके नाम को दिशा सालियान की मौत से जोड़ने वाले लंबे समय से चल रहे राजनीतिक और मीडिया अभियान से था। इसमें कहा गया कि कुछ व्यक्तियों और कथित हित समूहों की ओर से उनके नाम को इस मामले से जोड़ने की कोशिशों पर सवाल उठाए गए थे।

    सतीश सालियान की ओर से भेजे गए नोटिस में आदित्य ठाकरे के बयानों और मामले से जुड़े उनके सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताई गई थी। नोटिस में पोस्ट हटाने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और अंग्रेजी तथा मराठी में माफीनामा प्रकाशित करने की मांग की गई थी।

    आदित्य ठाकरे के जवाब में इन सभी मांगों को अस्वीकार कर दिया गया है। उनकी ओर से कहा गया है कि संबंधित पोस्ट में कोई झूठा या मानहानिकारक बयान नहीं दिया गया। 500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग को भी जवाब में खारिज किया गया है।

    कानूनी जवाब में यह भी कहा गया है कि किसी मामले में जांच शुरू होना अपने आप में किसी व्यक्ति की संलिप्तता या अपराध साबित नहीं करता। जवाब में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की बात कही गई है।

    दिशा सालियान की मौत जून 2020 में मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उनकी मौत के बाद इस मामले को लेकर अलग-अलग तरह के दावे सामने आए और इसे लेकर लंबे समय से जांच तथा कानूनी प्रक्रिया चलती रही है।

    आदित्य ठाकरे की ओर से कहा गया है कि वह दिशा सालियान के पिता के साथ व्यक्तिगत विवाद में नहीं पड़ना चाहते। साथ ही उन्होंने मामले की जांच को तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ने देने की बात कही है।

    25 पन्नों के जवाब में नोटिस वापस लेने की मांग भी की गई है। इस तरह 500 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस पर दोनों पक्षों के बीच कानूनी विवाद अब आगे बढ़ने की स्थिति में है। फिलहाल आदित्य ठाकरे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट वापस लेने या माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है।

  • समस्तीपुर में लड़की से बदसलूकी का वीडियो वायरल, बांध बाइपास रोड पर घटना के बाद युवकों की पहचान में जुटी पुलिस

    समस्तीपुर में लड़की से बदसलूकी का वीडियो वायरल, बांध बाइपास रोड पर घटना के बाद युवकों की पहचान में जुटी पुलिस

    नई दिल्ली /बिहार के समस्तीपुर में लड़की के साथ कथित बदसलूकी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मामला कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर गांव का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में कुछ युवक एक लड़की के साथ गाली-गलौज और कथित तौर पर गलत व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं। लड़की से छेड़खानी और बैड टच करने का आरोप भी लगाया गया है।

    बताया गया है कि बुधवार शाम लड़की एक परिचित लड़के के साथ बांध बाइपास रोड से गुजर रही थी। रास्ते में वह कुछ देर के लिए रुकी और वहां फोटो लेने लगी। इसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंच गए। आरोप है कि युवकों ने लड़की के साथ बदसलूकी और छेड़खानी शुरू कर दी।

    घटना के दौरान किसी व्यक्ति ने मोबाइल फोन से वीडियो बना लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची और पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी।

    जानकारी के मुताबिक, लड़की अपने एक परिचित युवक के साथ रास्ते से गुजर रही थी और कुछ समय के लिए वहां रुककर फोटो खींच रही थी। इसी दौरान कुछ युवक उसके पास पहुंचे और कथित तौर पर उसके साथ गाली-गलौज करने लगे। वीडियो में युवकों का व्यवहार भी दिखाई दे रहा है, जिसके आधार पर पुलिस मामले की जानकारी जुटा रही है।

    वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने इसमें दिखाई दे रहे युवकों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस घटना से जुड़े वीडियो की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं।

    स्थानीय लोगों की ओर से यह बात सामने आई है कि वीडियो में नजर आ रहे युवक इसी गांव के रहने वाले हो सकते हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी इस जानकारी की पुष्टि नहीं की है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही युवकों की पहचान और घटना से जुड़ी अन्य जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।

    पुलिस घटना वाली जगह के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना किस परिस्थिति में हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

    समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह ने मामले को गंभीर बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और उसमें दिखाई दे रहे युवकों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है।

    पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस वीडियो और घटना से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है। युवकों की पहचान और मामले में उनकी भूमिका जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।