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  • 31 हजार रुपए में अघोरी बनाने का ऑफर, तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को बना रहे शिकार

    31 हजार रुपए में अघोरी बनाने का ऑफर, तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को बना रहे शिकार


    मध्य प्रदेश । श्मशान, खोपड़ियां, काले वस्त्र और रहस्यमयी अनुष्ठानों के बीच ‘सिद्धि’ और ‘चमत्कार’ का ऐसा मायाजाल बुना जा रहा है, जिसमें लोगों के डर, लालच और अंधविश्वास को निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पैसों की बारिश, गड़ा हुआ धन खोज निकालने, दुश्मनों का नाश करने और खोया प्यार वापस दिलाने जैसे दावे किए जा रहे हैं। इन दावों के पीछे कथित तौर पर एक ऐसा नेटवर्क सक्रिय है, जो तंत्र-मंत्र और अघोरी साधना के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूल रहा है।

    पड़ताल में सामने आया कि ‘अघोर गुरुदीक्षा’, ‘श्मशान साधना’ और ‘तंत्र सिद्धि’ जैसे नामों से बाकायदा कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इन कोर्सों के लिए हजारों से लेकर लाखों रुपए तक की फीस मांगी जाती है। दावा किया जाता है कि कुछ दिनों या महीनों की साधना के बाद व्यक्ति विशेष शक्तियां प्राप्त कर सकता है, जिससे धन प्राप्ति, गड़ा खजाना खोजने या अन्य मनोकामनाएं पूरी करने में सहायता मिलेगी।

    जांच के दौरान सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो मिले, जिनमें कथित तांत्रिक साधना के दौरान नोटों की बारिश या जमीन से धन निकलने जैसे दृश्य दिखा रहे थे। इन्हीं वीडियो के आधार पर संपर्क करने पर एक व्यक्ति ने खुद को अघोरी साधक बताते हुए विभिन्न प्रकार की साधनाएं सिखाने का दावा किया। बातचीत में उसने कहा कि पहले गुरुदीक्षा लेनी होगी, फिर गुरुमंत्र, गणेश साधना और कुलदेव साधना के बाद अन्य सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं। उसने यह भी दावा किया कि पैसों की बारिश जैसी सिद्धि हासिल करने के लिए लंबे समय तक साधना करनी पड़ती है।

    हालांकि जब इन दावों की गहराई से जांच की गई तो कई बातें संदिग्ध मिलीं। कथित रूप से दिखाए गए कुछ वीडियो ऐसे मामलों से जुड़े पाए गए, जहां संबंधित व्यक्तियों पर पहले से ही धोखाधड़ी और ठगी के आरोप लग चुके थे। इसके बावजूद इन वीडियो का उपयोग नए लोगों को आकर्षित करने और विश्वास दिलाने के लिए किया जा रहा है।

    पड़ताल में यह भी सामने आया कि कथित गुरुदीक्षा और तंत्र साधना के लिए तय शुल्क लिया जाता है। कुछ मामलों में रजिस्ट्रेशन फीस, आधार कार्ड की कॉपी और अग्रिम भुगतान की मांग की गई। यहां तक कि व्यक्तिगत मुलाकात के लिए भी हजारों रुपए मांगे गए। कई संस्थानों और व्यक्तियों द्वारा तंत्र साधना के पैकेज, ऑनलाइन प्रशिक्षण और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से कथित रहस्यमयी ज्ञान देने के ऑफर भी दिए जा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नेटवर्क लोगों की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। आर्थिक संकट, बीमारी, पारिवारिक समस्याएं या जल्दी सफलता पाने की इच्छा रखने वाले लोगों को चमत्कारिक दावों के जरिए प्रभावित किया जाता है। धीरे-धीरे उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि विशेष अनुष्ठान या साधना उनकी सभी समस्याओं का समाधान कर सकती है।

    ज्योतिषाचार्य पंडित जयदीप दुबे के अनुसार वास्तविक ज्योतिष और तंत्र विद्या का इस प्रकार के चमत्कारिक दावों से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि कुछ लोग धर्म, तंत्र और आध्यात्मिकता की आड़ में लोगों के डर और लालच का फायदा उठाकर आर्थिक शोषण कर रहे हैं। ऐसे दावों का कोई वैज्ञानिक या प्रमाणित आधार नहीं है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले ऐसे वीडियो और दावों से सावधान रहना चाहिए। किसी भी चमत्कारिक दावे पर विश्वास करने से पहले तथ्यों की जांच करना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। जागरूकता ही ऐसे कथित तांत्रिकों और ठगी के जाल से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • सिंगापुर ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाई

    सिंगापुर ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाई

    नई दिल्ली। सिंगापुर सरकार ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक कर दिया है। यह कार्रवाई ‘ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट 2023’ (OCHA) के तहत की गई। अधिकारियों ने कहा कि ये पोस्ट जानबूझकर भारतीय समुदाय को निशाना बनाकर भड़काऊ सामग्री फैलाने के लिए बनाई गई थीं।

    सिंगापुर के गृह मंत्रालय (MHA) ने YouTube, Facebook और X को निर्देश दिए कि वे इन पोस्टों तक स्थानीय उपयोगकर्ताओं की पहुंच रोकें। सरकार ने इसे विदेशी कनेक्शन वाले गलत जानकारी फैलाने के अभियान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई बताया। इस कदम का उद्देश्य सिंगापुर जैसे बहुसांस्कृतिक शहर-राज्य में सामाजिक सद्भाव बनाए रखना और नस्लीय तनाव को रोकना है।

    पोस्टों में क्या था कंटेंट
    अधिकारियों ने बताया कि आपत्तिजनक सामग्री पिछले महीने चीन के ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर शुरू हुई थी। शुरुआत में यह सिंगापुर की सांस्कृतिक पहचान और जातीय राजनीति पर केंद्रित थी। बाद में पोस्ट और अधिक भड़काऊ हो गई, जिसमें दावा किया गया कि भारतीयों की बढ़ती आबादी सिंगापुर के लिए खतरा है और देश के कई संस्कृतियों वाले ढांचे को कमजोर कर रही है।

    कुछ पोस्टों में कहा गया कि सिंगापुर की सामाजिक स्थिरता उसके बहुसांस्कृतिक ढांचे की वजह से नहीं, बल्कि चीनी बहुल आबादी की वजह से बनी हुई है। इसके साथ ही कुछ पोस्टों ने भारतवंशी नेताओं के प्रभाव को लेकर आलोचना की और भारतीय प्रवासियों के बढ़ते प्रभाव को देश के हितों के लिए हानिकारक बताया।

    कंटेंट को विश्वसनीय दिखाने के लिए ‘लिटिल इंडिया’ की व्यस्त सड़कों और पगोडा स्ट्रीट पर भारतीय त्योहारों के वीडियो का इस्तेमाल किया गया। पोस्ट में अपमानजनक भाषा का भी इस्तेमाल हुआ, जैसे भारतीय आबादी की तुलना “करी (curry) के जमावड़े” से करना।

    कानूनी आधार और जांच
    MHA ने कहा कि ये पोस्ट सिंगापुर के दंड संहिता (Penal Code) की धारा 298A के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। यह धारा उन गतिविधियों को अपराध मानती है जो जानबूझकर नस्लीय या धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी, नफरत या दुर्भावना को बढ़ावा देती हैं।

    जांच में पता चला कि यह सामग्री संभवतः चीन स्थित प्लेटफ़ॉर्म से शुरू हुई और फिर अन्य सोशल मीडिया चैनलों पर फैल गई। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सामग्री फैलाने के प्रयास सुनियोजित और जानबूझकर किए गए थे।

    सिंगापुर पुलिस ने प्लेटफ़ॉर्मों को निर्देश दिए कि वे सभी ज़रूरी कदम उठाएं ताकि स्थानीय उपयोगकर्ताओं को इन भड़काऊ पोस्टों तक पहुंच न मिले। अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई बहुसांस्कृतिक समाज में सद्भाव बनाए रखने और नस्लीय नफरत फैलाने वाली सामग्री से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी।

    इस कदम से सिंगापुर ने दिखा दिया कि वह नस्लीय और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने में कड़ा रुख अपनाने के लिए तत्पर है, और विदेशों से आई किसी भी भड़काऊ सामग्री को रोकने के लिए कानूनी और तकनीकी माध्यमों का प्रयोग कर रहा है।

  • स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए पैडलिंग, फिट इंडिया रैली में शामिल हुए सैकड़ों प्रतिभागी

    स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए पैडलिंग, फिट इंडिया रैली में शामिल हुए सैकड़ों प्रतिभागी


    मध्य प्रदेश । फिट इंडिया मूवमेंट के तहत उज्जैन में रविवार को एक भव्य साइकिल रैली का आयोजन किया गया, जिसमें 300 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा आयोजित इस रैली का उद्देश्य नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, जल बचत और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जनजागरूकता फैलाना था।

    इस आयोजन में यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (वाईएचएआई), जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग, क्रीड़ा भारती मालवा प्रांत तथा सोसायटी ऑफ ग्लोबल साइकिल का विशेष सहयोग रहा। रैली का शुभारंभ सिंहस्थ मेला कार्यालय से किया गया, जहां उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप शिवा ने हरी झंडी दिखाकर प्रतिभागियों को रवाना किया।

    करीब 7 किलोमीटर लंबी यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। प्रतिभागी पॉलीटेक्निक कॉलेज, अपना स्वीट, तीन बत्ती चौराहा, टॉवर चौक, शहीद पार्क, संजीवनी हॉस्पिटल और कालिदास अकादमी जैसे प्रमुख स्थलों से होते हुए पुनः सिंहस्थ मेला कार्यालय पहुंचे। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने फिटनेस, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

    कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि आयोजन को सभी वर्गों के लोगों के लिए समावेशी बनाया गया। जिन लोगों के पास साइकिल उपलब्ध नहीं थी, उनके लिए योग सत्र का आयोजन किया गया। इससे अधिक से अधिक नागरिक इस अभियान से जुड़ सके और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के महत्व को समझ सके।

    आयोजकों ने बताया कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को देखते हुए साइकिलिंग को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। साइकिल न केवल शारीरिक फिटनेस बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि ईंधन की खपत कम कर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए रैली के माध्यम से लोगों को दैनिक जीवन में साइकिल के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।

    रैली में युवाओं, खेल प्रेमियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। पूरे मार्ग में प्रतिभागियों का उत्साह देखने लायक था। लोगों ने फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण के नारों के साथ शहरवासियों को जागरूक करने का प्रयास किया।

    कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण, स्वच्छता और हरित जीवनशैली के महत्व पर भी जोर दिया गया। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

    सफलतापूर्वक संपन्न हुई इस साइकिल रैली ने एक बार फिर साबित किया कि जब समाज, प्रशासन और सामाजिक संगठन मिलकर किसी अभियान को आगे बढ़ाते हैं, तो उसका प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देता है। यह आयोजन उज्जैन को फिट, स्वच्छ और पर्यावरण के प्रति जागरूक शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • महाकाल की भस्म आरती में पहुंचीं किंजल दवे और मोनल गज्जर, बाबा का लिया आशीर्वाद

    महाकाल की भस्म आरती में पहुंचीं किंजल दवे और मोनल गज्जर, बाबा का लिया आशीर्वाद


    मध्य प्रदेश । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब प्रसिद्ध गुजराती गायिका किंजल दवे और फिल्म अभिनेत्री मोनल गज्जर ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।

    दोनों कलाकार सुबह करीब 4 बजे मंदिर परिसर पहुंचीं और नंदी हॉल में बैठकर लगभग दो घंटे तक चलने वाली भस्म आरती में श्रद्धापूर्वक शामिल हुईं। इस दौरान वे लगातार भगवान महाकाल का जाप करती नजर आईं और पूरे समय भक्ति भाव में लीन रहीं। आरती के बीच उन्होंने नंदी महाराज का पूजन भी किया और अपनी मनोकामनाएं भगवान के चरणों में अर्पित कीं।

    भस्म आरती के पश्चात दोनों ने विधिवत रूप से भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से उप प्रशासक एस.एन. सोनी ने उनका स्वागत किया और सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह भी प्रदान किए।

    इस अवसर पर गायिका किंजल दवे ने भावुक होकर कहा कि यह उनका लगभग दो महीनों में दूसरा महाकाल दर्शन है। उन्होंने कहा, “बाबा महाकाल ने मुझे दोबारा यहां बुलाया है, मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मानती हूं।” उन्होंने मंदिर प्रबंधन और सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

    अभिनेत्री मोनल गज्जर, जो मुख्य रूप से गुजराती और तेलुगु फिल्मों में सक्रिय हैं, इससे पहले भी 8 अप्रैल को महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आ चुकी हैं। इस बार भी वे पूरी श्रद्धा और सादगी के साथ आरती में शामिल हुईं।

    मंदिर परिसर में दोनों कलाकारों की उपस्थिति के दौरान भक्तों में उत्साह देखने को मिला, हालांकि पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और धार्मिक मर्यादा के अनुरूप संपन्न हुआ।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती को विशेष महत्व प्राप्त है, और इसमें शामिल होना श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत सौभाग्य की बात मानी जाती है। इस अवसर ने एक बार फिर उज्जैन की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक महत्व को उजागर किया।

  • तेलंगाना के 28 वर्षीय अंशुल कुंचा की अमेरिका में हत्या, परिवार मांग रहा शव का जल्द भारत भेजा जाना

    तेलंगाना के 28 वर्षीय अंशुल कुंचा की अमेरिका में हत्या, परिवार मांग रहा शव का जल्द भारत भेजा जाना

    नई दिल्ली। अमेरिका के फिलाडेल्फिया में तेलंगाना के 28 वर्षीय भारतीय युवक अंशुल कुंचा की हत्या कर दी गई। अंशुल अमेरिका में एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत थे और अतिरिक्त आय के लिए वीकेंड पर पिज्जा डिलीवरी का पार्ट-टाइम काम भी करते थे।

    शनिवार रात को अंशुल को एक सुनसान इलाके में फर्जी पिज्जा ऑर्डर मिला। जब वह उस स्थान पर पिज्जा डिलीवरी देने गए, तो दो नकाबपोश हमलावरों ने उन पर हमला किया। हमलावरों ने अंशुल के सिर में कई गोलियां मारी और वहां से फरार हो गए। पुलिस के अनुसार जिस मकान में ऑर्डर दिया गया था वह खाली था।

    अंशुल की बहन तन्वी ने बताया कि यह कोई लूटपाट की घटना नहीं थी। हमलावरों ने उनसे न तो पैसे लिए और न ही कोई सामान छीना। यह पूरी घटना पूर्व नियोजित हत्या का संकेत देती है। अंशुल पहले भी लूटपाट का शिकार हो चुके थे, लेकिन इस बार का हमला सुनियोजित और घातक था।

    सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, फिलाडेल्फिया हाउसिंग अथॉरिटी के सीसीटीवी कैमरों में अंशुल को पिज्जा डिलीवरी करते हुए देखा गया, और उनके पीछे दो संदिग्धों को चलते हुए कैद किया गया। दोनों संदिग्ध गहरे रंग के कपड़े पहने थे और उनके पास बैकपैक था।

    परिवार ने अमेरिकी अधिकारियों और भारतीय वाणिज्य दूतावास से अंशुल का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत भेजने की अपील की है। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय महावाण्यसदास ने सोशल मीडिया पर अंशुल की असामयिक मृत्यु पर शोक व्यक्त किया और बताया कि वे परिवार के संपर्क में हैं तथा हर संभव मदद प्रदान की जा रही है।

    अंशुल लगभग चार साल पहले नौकरी के सिलसिले में अमेरिका गए थे। परिवार के अनुसार, वे मेहनती और जिम्मेदार व्यक्ति थे, जो वीकेंड में अतिरिक्त आय के लिए पिज्जा डिलीवरी का काम करते थे। उनका परिवार इस घटना से गहरे सदमे में है।

    पुलिस ने कहा कि फिलहाल मामले की जांच जारी है और संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिल रहा है कि यह हत्या व्यक्तिगत रूप से अंशुल को निशाना बनाने के लिए की गई थी।

    अंशुल की बहन ने कहा, “भाई की हत्या केवल हमारी परिवारिक दुख की वजह नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि विदेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान देना कितना जरूरी है। हम चाहते हैं कि उनके हत्यारों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और उनका शव भारत लाया जाए।”

    यह घटना फिलाडेल्फिया में भारतीय समुदाय और परिवार को हिला कर रख दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा और जांच टीमों को तैनात किया गया है।

    अंशुल की असामयिक मौत से भारतीय समुदाय में चिंता और सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। फिलहाल जांच जारी है, और परिवार तथा दूतावास दोनों यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि शव को भारत लाने की प्रक्रिया जल्द पूरी हो।

  • विश्व साइकिल दिवस पर सड़कों पर उतरे ITBP जवान, फिट इंडिया का दिया संदेश

    विश्व साइकिल दिवस पर सड़कों पर उतरे ITBP जवान, फिट इंडिया का दिया संदेश


    मध्य प्रदेश । विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर शिवपुरी में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईटीआई) द्वारा एक प्रेरणादायी साइकिल रैली का आयोजन किया गया। ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ के तहत आयोजित इस रैली का उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्य, फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में संस्थान के अधिकारियों, अधीनस्थ अधिकारियों, जवानों और प्रशिक्षुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर स्वस्थ जीवनशैली को अपनाने का संदेश दिया।

    रैली का शुभारंभ संस्थान के उप महानिरीक्षक (दूरसंचार) राजेश चौधरी ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित अधिकारियों, जवानों और प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए साइकिलिंग के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता और तनाव के बीच साइकिल चलाना स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने का एक सरल, सस्ता और प्रभावी माध्यम है। नियमित साइकिलिंग न केवल शरीर को सक्रिय रखती है, बल्कि हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को भी कम करने में सहायक होती है।

    राजेश चौधरी ने कहा कि साइकिल चलाने से शारीरिक क्षमता में वृद्धि होती है, शरीर की सहनशक्ति बढ़ती है और मोटापा, मधुमेह तथा उच्च रक्तचाप जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। उन्होंने यह भी बताया कि साइकिलिंग मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है, क्योंकि यह तनाव और चिंता को कम करने में सहायक होती है तथा व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है।

    कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर भी विशेष जोर दिया गया। डीआईजी ने कहा कि बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच साइकिल का उपयोग एक प्रभावी समाधान बन सकता है। साइकिल चलाने से ईंधन की बचत होती है, कार्बन उत्सर्जन कम होता है और स्वच्छ वातावरण के निर्माण में योगदान मिलता है। उन्होंने कहा कि यदि लोग छोटी दूरी के लिए मोटर वाहनों की बजाय साइकिल का उपयोग करें तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

    इस अवसर पर उन्होंने सभी प्रतिभागियों को ‘संडे ऑन साइकिल’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक व्यक्ति सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल चलाने की आदत विकसित करे, ताकि स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि फिट और स्वस्थ नागरिक ही एक मजबूत और विकसित राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    रैली में शामिल अधिकारियों, जवानों और प्रशिक्षुओं ने नियमित व्यायाम और साइकिलिंग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। पूरे आयोजन के दौरान प्रतिभागियों में उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली। कार्यक्रम का समापन स्वास्थ्य, फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के संदेश के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का माध्यम बना, बल्कि समाज को स्वच्छ और स्वस्थ भविष्य की दिशा में प्रेरित करने वाला एक सकारात्मक प्रयास भी साबित हुआ।

  • सीएम विजय ने एमके स्टालिन पर वार, कहा- आपके अपने लोग ही आपकी राजनीति खत्म करेंगे

    सीएम विजय ने एमके स्टालिन पर वार, कहा- आपके अपने लोग ही आपकी राजनीति खत्म करेंगे

    नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके (TVK) के प्रमुख सी. जोसेफ विजय ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर करारा हमला बोला है। टीवीके ने स्पष्ट किया कि स्टालिन को सबसे बड़ा राजनीतिक झटका उनके विरोधियों से नहीं, बल्कि उनके अपने करीबी सहयोगियों और आसपास सक्रिय लोगों से मिलेगा।

    टीवीके की आईटी विंग ने डीएमके (DMK) पर आरोप लगाया कि पार्टी परिवारवाद और सत्ता को केवल अपने ही परिवार तक सीमित रखती है। टीवीके ने कहा कि उनकी पार्टी गठबंधन और जनता के समर्थन के माध्यम से सत्ता में आई है, जबकि डीएमके केवल अपने परिवार और करीबी लोगों के लिए सत्ता संरक्षित रखता है।

    सीएम विजय ने स्टालिन को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि उनके इर्द-गिर्द मौजूद लोग उन्हें वास्तविक परिस्थितियों और जमीनी सच्चाई से दूर रख रहे हैं। टीवीके ने तंज कसते हुए कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो स्टालिन को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, जैसा कि उन्होंने कोलाथुर सीट और सत्ता खोने के समय देखा था।

    टीवीके ने अपने बयान में यह भी कहा कि पार्टी केवल राजनीतिक फायदा उठाने वाली स्वार्थी ताकत नहीं है और वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने में विश्वास रखती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि स्टालिन का राजनीतिक अंत उनके विरोधियों से नहीं, बल्कि उनके आसपास सक्रिय चापलूसों के समूह से होगा।

    टीवीके के इस बयान पर अभी तक DMK की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह बयान आगामी विधानसभा और स्थानीय चुनावों को लेकर तमिलनाडु में बढ़ते तनाव को दर्शाता है।

    टीवीके का दावा है कि उनकी पार्टी जनता के व्यापक समर्थन के साथ सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। इसके जरिए वह यह संदेश देना चाहती है कि लोकतांत्रिक सहयोग और जनता की आवाज पर आधारित राजनीति ही टिकाऊ है।

    विश्लेषकों का कहना है कि सीएम विजय का यह हमला केवल पूर्व सीएम स्टालिन पर निशाना नहीं है, बल्कि यह DMK के भीतर सत्ता संघर्ष और नेतृत्व विवाद को उजागर करने की कोशिश भी है। आगामी महीनों में तमिलनाडु की राजनीतिक तस्वीर में इसके असर दिख सकते हैं।

    टीवीके ने अपने बयान के अंत में यह भी आगाह किया कि स्टालिन को सही तस्वीर और वास्तविक परिस्थितियों की जानकारी नहीं दी जा रही है। अगर यही स्थिति जारी रही, तो यह उनके लिए गंभीर राजनीतिक परिणाम ला सकता है।

    इस बयान से साफ है कि तमिलनाडु की राजनीति में टीवीके और DMK के बीच टकराव अब और बढ़ सकता है, और आने वाले समय में दोनों पार्टियों की रणनीतियों और गठबंधनों पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

  • जमीन के बंटवारे पर भाइयों में बवाल, हिस्सेदारी मांगने पर तीसरे भाई की पिटाई

    जमीन के बंटवारे पर भाइयों में बवाल, हिस्सेदारी मांगने पर तीसरे भाई की पिटाई


    मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले के रातोर गांव में पैतृक संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद उस समय हिंसक हो गया जब दो भाइयों पर अपने ही तीसरे भाई के साथ मारपीट करने का आरोप लगा। घटना में घायल युवक को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, रातोर गांव निवासी अतर सिंह जाटव अपने परिवार के साथ रहते हैं। परिवार में कुल छह भाई हैं और उनके पिता का कुछ समय पहले निधन हो चुका है। पिता की मृत्यु के बाद परिवार की संपत्ति का औपचारिक बंटवारा नहीं हो पाया है। परिवार के पास मकान, वाहन और अन्य पैतृक संपत्तियां हैं, जिन्हें लेकर लंबे समय से विवाद की स्थिति बनी हुई है।

    अतर सिंह का आरोप है कि उनके भाई नेपाल जाटव ने परिवार की अधिकांश संपत्ति पर कब्जा कर रखा है और अन्य भाइयों को उनका हिस्सा नहीं दिया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर शनिवार रात विवाद बढ़ गया। अतर सिंह के मुताबिक वह मजदूरी कर घर लौटे थे और उन्होंने अपने भाई से संपत्ति के बंटवारे के संबंध में चर्चा की। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते विवाद में बदल गई।

    घायल युवक का आरोप है कि विवाद बढ़ने पर नेपाल जाटव ने उनके साथ गाली-गलौज की और फिर मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान उनके दूसरे भाई विनोद जाटव भी मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि दोनों भाइयों ने मिलकर उनके साथ मारपीट की। अतर सिंह का कहना है कि उन पर लाठी से हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान चप्पलों से भी उन्हें पीटा गया।

    घटना के बाद अतर सिंह घायल अवस्था में घर के आंगन में पड़े रहे। उनकी पत्नी अनिता जाटव ने बताया कि उन्हें इस घटना की जानकारी उनकी बेटी ने दी थी। जब वह मौके पर पहुंचीं तो उनके पति अचेत अवस्था में पड़े हुए थे। परिवार के अन्य सदस्यों की मदद से उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।

    घटना की सूचना पुलिस को भी दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दोनों पक्षों के बयान लिए जा रहे हैं और चिकित्सीय रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    ग्रामीण क्षेत्रों में पैतृक संपत्ति और जमीन के बंटवारे को लेकर होने वाले विवाद अक्सर पारिवारिक रिश्तों में तनाव पैदा कर देते हैं। कई बार ऐसे मामले हिंसक झगड़ों में बदल जाते हैं, जिससे परिवारों में लंबे समय तक कटुता बनी रहती है। रातोर गांव की यह घटना भी इसी प्रकार के विवाद का उदाहरण बनकर सामने आई है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं घायल युवक का जिला अस्पताल में उपचार जारी है और उसकी स्थिति पर चिकित्सकों की नजर बनी हुई है।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के खिलाफ हुए प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना रुख और सख्त कर लिया है। संगठन ने सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर विस्तारित किया जाएगा।

    CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के बाद जारी बयान में कहा कि यह आंदोलन यहीं समाप्त नहीं होगा और आगे इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर पर हुआ प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और ऐतिहासिक था, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।

    अभिजीत दीपके ने कहा कि प्रदर्शन में कई ऐसे लोग भी शामिल हुए जिन्होंने पहली बार किसी आंदोलन में हिस्सा लिया। उनके अनुसार, यह इस बात का संकेत है कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर समाज में गहरी चिंता मौजूद है। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आगे की रणनीति पर लगातार काम किया जाएगा।

    संगठन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है। CJP का कहना है कि यदि अगले सात दिनों में मंत्री के इस्तीफे या उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    अभिजीत दीपके ने यह भी कहा कि वह आने वाले दिनों में सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को संबोधित करेंगे और आगे की रणनीति साझा करेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि आंदोलन को डिजिटल और जमीनी दोनों स्तरों पर आगे बढ़ाया जाएगा।

    CJP प्रवक्ता आशीष रांका ने भी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यह अंतिम अवसर है। उन्होंने कहा कि या तो सरकार स्वयं कार्रवाई करे या प्रधानमंत्री स्तर पर निर्णय लिया जाए। उनके अनुसार, यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं तो देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

    जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में कई घंटों तक नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन चला, जिसके बाद कार्यक्रम समाप्त किया गया। हालांकि आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन का अंत नहीं बल्कि शुरुआत है।

    इस बीच राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए कहा गया कि कुछ लोग विदेश में बैठकर देश की युवा नीति और शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा।

    यह पूरा मामला अब शिक्षा व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में CJP के अल्टीमेटम और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • एलपीजी सिलेंडर महंगा: सरकार का बड़ा बयान, प्रति सिलेंडर 700 रुपये नुकसान का दावा, पाकिस्तान-अमेरिका से की तुलना

    एलपीजी सिलेंडर महंगा: सरकार का बड़ा बयान, प्रति सिलेंडर 700 रुपये नुकसान का दावा, पाकिस्तान-अमेरिका से की तुलना


    नई दिल्ली ।
    घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में हुई 29 रुपये की बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने इस फैसले को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में उपभोक्ताओं को एलपीजी अब भी कई देशों की तुलना में सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है।

    दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 942 रुपये हो गई है, जो पहले 913 रुपये थी। इससे पहले मार्च में भी 60 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह कुल मिलाकर हालिया अवधि में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में 89 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस मूल्य निर्धारण के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को प्रत्येक सिलेंडर की बिक्री पर लगभग 700 रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार में एलपीजी की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण आपूर्ति लागत काफी बढ़ गई है, जिसे घरेलू उपभोक्ताओं पर पूरी तरह नहीं डाला गया है।

    सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक एलपीजी बेंचमार्क कीमतों में लगभग 46 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके कारण भारत में घरेलू एलपीजी की वास्तविक आपूर्ति लागत 1,600 रुपये प्रति सिलेंडर से अधिक हो गई है।

    इसके बावजूद उपभोक्ताओं को सिलेंडर 942 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी के बाद यह कीमत और कम होकर लगभग 642 रुपये रह जाती है। हालांकि इस योजना में सब्सिडी वितरण को लेकर हाल के समय में बदलाव भी देखने को मिले हैं, जिससे लाभार्थियों के बीच चर्चा बनी हुई है।

    सरकार के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में घरेलू एलपीजी पर कुल नुकसान बढ़कर लगभग 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 41,338 करोड़ रुपये था। इस बढ़ते नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति देने को मंजूरी दी है।

    सरकार ने यह भी कहा कि संकट के समय देश में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए घरेलू उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की गई है। इसके साथ ही अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त आयात की व्यवस्था भी की गई है, ताकि घरेलू मांग पूरी की जा सके।

    भारत में एलपीजी की कीमतों की तुलना पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों के साथ-साथ अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे विकसित देशों से भी की गई है। सरकार का दावा है कि भारत में घरेलू रसोई गैस अब भी अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर उपलब्ध है।

    इस मूल्य संशोधन को लेकर सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं पर वैश्विक बाजार का पूरा असर डालने से बचाना और देशभर में रसोई गैस की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करना है।