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  • झारखंड राज्यसभा सीटों पर सियासी गतिरोध खत्म, JMM-कांग्रेस में 1-1 सीट पर बनी निर्णायक सहमति

    झारखंड राज्यसभा सीटों पर सियासी गतिरोध खत्म, JMM-कांग्रेस में 1-1 सीट पर बनी निर्णायक सहमति

    नई दिल्ली । झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर महागठबंधन के दो प्रमुख घटक दल, झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच जारी विवाद अब समाप्त हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बताया कि दोनों दलों के लिए एक-एक सीट पर चुनाव लड़ने की सहमति हो गई है। इससे पहले झामुमो के विधायकों ने दोनों सीटों पर दावा ठोक दिया था, जिससे गठबंधन में तनातनी बढ़ गई थी।

    पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को झामुमो ने राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है। बैद्यनाथ राम लातेहार से पूर्व विधायक रह चुके हैं और आदिवासी एवं पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने में उनका योगदान सराहनीय माना जाता है। झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि बैद्यनाथ राम पार्टी के मजबूत और समर्पित कार्यकर्ता हैं और उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

    जानकारी के अनुसार, इस विवाद को सुलझाने में पार्टी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक, भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने सीएम हेमंत सोरेन से लंबी चर्चा की। इसके बाद सीएम ने दोनों दलों के लिए एक-एक सीट पर उम्मीदवार तय करने पर सहमति दे दी। राज्यसभा की दो सीटों पर अब कांग्रेस और जेएमएम के एक-एक उम्मीदवार मैदान में होंगे।

    बताया जा रहा है कि झारखंड में पहले कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार प्रणव झा का नाम घोषित कर दिया था, जिससे जेएमएम नेतृत्व में नाराजगी उत्पन्न हो गई थी। पार्टी के नेताओं का आरोप था कि कांग्रेस ने जेएमएम को विश्वास में लिए बिना नाम की घोषणा की थी। हालांकि अब दोनों पार्टियों के बीच सभी मतभेद दूर होते दिख रहे हैं और सहमति से उम्मीदवार तय हो गए हैं।

    सीएम हेमंत सोरेन ने रविवार रात गठबंधन के सभी विधायकों को डिनर पर बुलाया। इस बैठक का मकसद गठबंधन के भीतर आपसी सामंजस्य बनाए रखना और भविष्य में सहयोग को मजबूत करना बताया गया है। इससे पहले JMM की ओर से दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की संभावना जताई गई थी, लेकिन अब विवाद खत्म होकर गठबंधन में स्थिरता लौट आई है।

    राज्यसभा चुनाव से पहले इस तरह का समाधान महागठबंधन के लिए राहत भरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों दलों की आपसी सहमति से न केवल राज्यसभा में प्रतिनिधित्व तय होगा, बल्कि भविष्य में झारखंड में गठबंधन को भी मजबूती मिलेगी। बैद्यनाथ राम के नाम पर सहमति से आदिवासी और पिछड़े वर्ग के प्रतिनिधित्व को भी ध्यान में रखा गया है।

    हालांकि चुनाव की प्रक्रिया अभी जारी है, लेकिन JMM और कांग्रेस के बीच विवाद के शांत होने से महागठबंधन की छवि बेहतर बनी है। दोनों दलों के नेताओं ने आपसी सहयोग और संवाद को ही भविष्य में निर्णय लेने का आधार बनाने का संकल्प जताया है। इससे राज्यसभा चुनाव की तैयारी और रणनीति को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

  • “मैं खुद लटक जाऊंगी…” बेटे ने बताए मां के आखिरी शब्द, सामने आई दिल दहला देने वाली घटना

    “मैं खुद लटक जाऊंगी…” बेटे ने बताए मां के आखिरी शब्द, सामने आई दिल दहला देने वाली घटना


    मध्य प्रदेश । जबलपुर के आधारताल क्षेत्र में सामने आए पति-पत्नी की मौत के सनसनीखेज मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। अब इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम गवाह वह 8 वर्षीय मासूम बच्चा बन गया है, जिसने अपनी मां और सौतेले पिता के बीच मौत से पहले हुई पूरी घटना अपनी आंखों से देखी। बच्चे के बयान ने पुलिस जांच को नई दिशा दी है और इस दर्दनाक पारिवारिक त्रासदी की कई परतें खोल दी हैं।

    पुलिस के अनुसार, 3 जून की रात घर में पति-पत्नी के बीच विवाद हुआ था। विवाद इतना बढ़ गया कि मामला जानलेवा स्थिति तक पहुंच गया। बच्चे ने पुलिस को बताया कि उसके पिता मयंक सिंह ने गुस्से में चाकू उठा लिया था। इसी दौरान उसकी मां नेहा सिंह ने कथित तौर पर कहा कि यदि उसे मारना है तो वह खुद ही फांसी लगाकर जान दे देगी। इसके बाद घर के भीतर जो कुछ हुआ, वह पूरे मामले का सबसे संवेदनशील हिस्सा बन गया है।

    मासूम के बयान के मुताबिक, मयंक ने कमरे में फंदा तैयार किया। जब नेहा फंदे के नीचे रखी टेबल पर खड़ी हुई तो कुछ ही क्षणों में वह फंदे पर लटक गई। पुलिस अब बच्चे के बयान, घटनास्थल के साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

    बच्चे ने यह भी बताया कि मां के फंदे पर लटकने के बाद पिता ने कुछ देर बाद उसे नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि पूरी रात महिला का शव घर में ही पड़ा रहा। जब बच्चे ने मां के बारे में पूछा तो उसे बताया गया कि वह आराम कर रही है। इसके बाद पिता बेटे को दूसरे कमरे में ले जाकर सो गया।

    अगले दिन मयंक अपने बेटे को स्कूटी से बहन के घर छोड़ आया। इसी बीच पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि नेहा सिंह की पहले पति से शादी हुई थी और उसके निधन के बाद वर्ष 2024 में मयंक से उसकी मुलाकात हुई थी। दोनों ने परिवार की सहमति से विवाह किया था और आधारताल में किराए के मकान में रह रहे थे।

    जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि जनवरी 2025 में विजय नगर स्थित एक स्पा सेंटर पर पुलिस कार्रवाई के दौरान नेहा वहां मिली थी। इसके बाद पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ने लगा था। मयंक कथित तौर पर नहीं चाहता था कि नेहा वहां काम करे, जबकि नेहा रोजगार जारी रखना चाहती थी। बाद में वह इंदौर में काम करने लगी, लेकिन बेटे से मिलने नियमित रूप से जबलपुर आती थी और परिवार की आर्थिक सहायता भी करती थी।

    पुलिस के अनुसार, 5 जून को मयंक बेटे को अपनी बहन के घर छोड़कर निकल गया। इसके बाद वह जीसीएफ क्षेत्र के एक खंडहरनुमा भवन में पहुंचा, जहां उसने कथित रूप से एक सुसाइड नोट लिखा। बाद में शनिवार को उसी स्थान पर उसका शव फंदे से लटका मिला। घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट में उसने पत्नी की हत्या करने की बात स्वीकार करने का दावा किया है और कुछ पारिवारिक सदस्यों पर प्रताड़ना के आरोप भी लगाए हैं।

    रांझी थाना पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। बच्चे के बयान, सुसाइड नोट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक प्रभावित वह मासूम है, जिसने कुछ ही दिनों में अपनी मां और पिता दोनों को खो दिया।

  • घर के बाहर झगड़ा शांत कराने पहुंचीं बीजेपी नेता, पिस्टल से चली गोली बनी मौत की वजह

    घर के बाहर झगड़ा शांत कराने पहुंचीं बीजेपी नेता, पिस्टल से चली गोली बनी मौत की वजह


    मध्य प्रदेश । जबलपुर में भाजपा की सक्रिय महिला नेता और पूर्व पार्षद प्रत्याशी संगीता रजक की गोली लगने से मौत हो गई। घटना शनिवार देर रात न्यू शोभापुर क्षेत्र में हुई, जिसके बाद उन्हें गंभीर हालत में उपचार के लिए हैदराबाद ले जाया गया। वहां ओमेगा अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।

    प्राथमिक जानकारी के अनुसार घटना शनिवार और रविवार की दरम्यानी रात करीब 1 से 2 बजे के बीच की है। बताया जा रहा है कि संगीता रजक के घर के बाहर कुछ लोग गाली-गलौज और शोर-शराबा कर रहे थे। आवाज सुनकर संगीता रजक अपने पति बंटी रजक के साथ घर से बाहर निकलीं। दोनों ने कथित रूप से वहां मौजूद लोगों को समझाने और शांत रहने के लिए कहा, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

    इसी दौरान संगीता रजक घर के भीतर गईं और अपनी लाइसेंसी पिस्टल लेकर बाहर आ गईं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक हड़बड़ाहट और अफरा-तफरी के माहौल में उनके हाथ में मौजूद पिस्टल का ट्रिगर दब गया। गोली सीधे उनके पेट में लगी, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ीं।

    घटना के बाद परिजन और आसपास के लोग उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। बाद में बेहतर उपचार की उम्मीद में उन्हें हैदराबाद के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के प्रयासों के बावजूद मृत घोषित कर दिया।

    घटना की सूचना मिलते ही रांझी थाना पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव का पंचनामा तैयार कराया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की। प्रारंभिक जांच में यह मामला दुर्घटनावश गोली चलने का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सभी संभावित पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।

    जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि देर रात घर के बाहर विवाद किस कारण से हो रहा था और वहां मौजूद लोग कौन थे। इसके अलावा घटना के समय की परिस्थितियों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों को भी जांच का हिस्सा बनाया जा रहा है।

    पुलिस जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले अज्ञात बदमाशों ने संगीता रजक के घर पर बम फेंकने और वाहन में तोड़फोड़ करने की घटना को अंजाम दिया था। इस संबंध में उनके पति बंटी रजक ने पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। ऐसे में पुलिस पुराने घटनाक्रम और हालिया घटना के बीच किसी संभावित संबंध की भी पड़ताल कर रही है।

    संगीता रजक ने पिछले नगरीय निकाय चुनाव में गोकलपुर वार्ड से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ा था। हालांकि वे चुनाव नहीं जीत सकी थीं, लेकिन क्षेत्र में उनकी सक्रिय राजनीतिक पहचान थी। बताया जा रहा है कि वे आगामी स्थानीय निकाय चुनाव की तैयारियों में भी जुटी हुई थीं। उनके पति बंटी रजक भी भाजपा संगठन में सक्रिय रहे हैं और विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।

    फिलहाल पुलिस परिजनों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। इस दुखद घटना से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक का माहौल है।

  • 24 हफ्ते का गर्भ होने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग को मां बनने की अनुमति

    24 हफ्ते का गर्भ होने पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग को मां बनने की अनुमति


    मध्य प्रदेश । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में 16 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को बच्चे को जन्म देने की अनुमति प्रदान करते हुए राज्य सरकार को नवजात के पालन-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारियां उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़िता और उसके परिवार की इच्छा का सम्मान करना आवश्यक है, क्योंकि उन्होंने गर्भपात कराने से स्पष्ट रूप से इनकार किया था।

    मामला खरगोन जिले के बालकवाड़ा थाना क्षेत्र का है, जहां एक नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया था। घटना के बाद किशोरी गर्भवती हो गई। जब मामला न्यायालय के समक्ष पहुंचा, तब गर्भावस्था 24 सप्ताह से अधिक हो चुकी थी। चूंकि पीड़िता नाबालिग थी और गर्भावस्था उन्नत अवस्था में थी, इसलिए मंडलेश्वर स्थित पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने उचित दिशा-निर्देश और आदेश के लिए मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को भेज दिया।

    हाईकोर्ट ने मामले को याचिका के रूप में दर्ज कर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान बालकवाड़ा थाना के सब-इंस्पेक्टर मिथुन चौबे की उपस्थिति में पीड़िता और उसके माता-पिता अदालत में पेश हुए। पहचान की पुष्टि के बाद न्यायालय ने पीड़िता और उसके परिजनों की राय जानी। इस दौरान पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह गर्भपात नहीं कराना चाहती और बच्चे को जन्म देना चाहती है। उसके माता-पिता ने भी इस निर्णय का समर्थन किया।

    शनिवार को जस्टिस राजेंद्र कुमार वाणी की वेकेशन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए पीड़िता की इच्छा को महत्व दिया। अदालत ने माना कि ऐसे संवेदनशील मामलों में पीड़िता की राय और उसकी स्वतंत्र इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी आधार पर न्यायालय ने बच्चे को जन्म देने की अनुमति प्रदान की।

    साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए। आदेश के अनुसार गर्भावस्था के दौरान पीड़िता को सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्रसव, उपचार, पोषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्त खर्च सरकार वहन करेगी। इसके अलावा नवजात के जन्म के बाद उसकी देखभाल, शिक्षा, भोजन, वस्त्र, चिकित्सा और अन्य आवश्यक जरूरतों की जिम्मेदारी भी राज्य सरकार पर होगी।

    हाईकोर्ट ने संबंधित कलेक्टर को निर्देश दिया है कि नवजात के 16 वर्ष की आयु तक उसके समुचित विकास और आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियां बच्चे और उसकी मां के भविष्य में बाधा नहीं बननी चाहिए।

    कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है, जहां दुष्कर्म पीड़िता गर्भपात के बजाय बच्चे को जन्म देने का निर्णय लेती है। न्यायालय ने एक ओर पीड़िता की इच्छा और अधिकारों की रक्षा की है, वहीं दूसरी ओर जन्म लेने वाले बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए राज्य की जिम्मेदारी भी तय की है।

    यह निर्णय न्यायिक संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है, जिसमें पीड़िता, उसके परिवार और नवजात के हितों को संतुलित रूप से ध्यान में रखा गया है।

  • भारत-नेपाल संबंधों में नई चुनौतियां: नेपाली विदेश मंत्री ने दोहराया ‘कालापानी-लिपुलेख हमारा अधिकार’

    भारत-नेपाल संबंधों में नई चुनौतियां: नेपाली विदेश मंत्री ने दोहराया ‘कालापानी-लिपुलेख हमारा अधिकार’

    नई दिल्ली । नेपाल के विदेश मंत्री Shishir Khanal इन दिनों भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरे के दौरान उन्होंने भारत के शीर्ष नेतृत्व के साथ विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। उनकी यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद से जुड़े कई मुद्दे फिर से चर्चा में हैं। इस दौरान उन्होंने भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत करने पर भी जोर दिया, लेकिन सीमा विवाद को लेकर उनका पुराना रुख एक बार फिर सामने आया है।

    यात्रा के दौरान शिशिर खनाल ने भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय सहयोग, सीमा प्रबंधन, सांस्कृतिक संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से बातचीत हुई। दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने और संवाद के माध्यम से सभी संवेदनशील विषयों को सुलझाने की आवश्यकता पर बल दिया।

    हालांकि, मीडिया से बातचीत के दौरान नेपाल के विदेश मंत्री ने एक बार फिर भारत-नेपाल सीमा विवाद से जुड़े Kalapani और Lipulekh क्षेत्र को नेपाल का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि नेपाल लंबे समय से इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है और यह मुद्दा ऐतिहासिक और भू-राजनीतिक संदर्भों से जुड़ा हुआ है। उनके इस बयान ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुर्खियों में ला दिया है।

    शिशिर खनाल ने साथ ही यह भी कहा कि नेपाल इस मुद्दे को किसी भी प्रकार की उग्र राष्ट्रवादी बयानबाजी के बजाय शांतिपूर्ण और कूटनीतिक बातचीत के माध्यम से सुलझाना चाहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों को आपसी सम्मान और समझ के आधार पर बातचीत की मेज पर बैठकर समाधान तलाशना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता बनी रहे और रिश्तों में विश्वास और मजबूत हो सके।

    उन्होंने कैलाश मानसरोवर यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि कई श्रद्धालु नेपाल के मार्ग से इस यात्रा पर जाते हैं, इसलिए सीमा क्षेत्र में स्थिरता और सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही उन्होंने भारत और चीन के बीच हुए कुछ समझौतों को लेकर भी नेपाल की चिंता व्यक्त की और कहा कि इस तरह के निर्णयों में नेपाल की सहमति और भागीदारी को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह क्षेत्रीय संतुलन से जुड़ा विषय है।

    भारत की प्रगति और आर्थिक विकास की सराहना करते हुए शिशिर खनाल ने कहा कि भारत ने वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बनाई है और यह क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने नेपाल में चल रहे जन-आंदोलनों और सामाजिक परिस्थितियों का भी जिक्र किया। साथ ही भारत में हाल के एक आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस विषय पर अधिक टिप्पणी नहीं करना चाहते, जिससे उनके बयान को लेकर विभिन्न राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं।

    कुल मिलाकर यह यात्रा भारत-नेपाल संबंधों में संवाद और सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन सीमा विवाद से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के रुख में अंतर एक बार फिर स्पष्ट दिखाई दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, आगे की बातचीत ही इन संवेदनशील मामलों के समाधान का रास्ता तय करेगी।

  • 31 हजार रुपए में अघोरी बनाने का ऑफर, तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को बना रहे शिकार

    31 हजार रुपए में अघोरी बनाने का ऑफर, तंत्र-मंत्र के नाम पर लोगों को बना रहे शिकार


    मध्य प्रदेश । श्मशान, खोपड़ियां, काले वस्त्र और रहस्यमयी अनुष्ठानों के बीच ‘सिद्धि’ और ‘चमत्कार’ का ऐसा मायाजाल बुना जा रहा है, जिसमें लोगों के डर, लालच और अंधविश्वास को निशाना बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पैसों की बारिश, गड़ा हुआ धन खोज निकालने, दुश्मनों का नाश करने और खोया प्यार वापस दिलाने जैसे दावे किए जा रहे हैं। इन दावों के पीछे कथित तौर पर एक ऐसा नेटवर्क सक्रिय है, जो तंत्र-मंत्र और अघोरी साधना के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूल रहा है।

    पड़ताल में सामने आया कि ‘अघोर गुरुदीक्षा’, ‘श्मशान साधना’ और ‘तंत्र सिद्धि’ जैसे नामों से बाकायदा कोर्स संचालित किए जा रहे हैं। इन कोर्सों के लिए हजारों से लेकर लाखों रुपए तक की फीस मांगी जाती है। दावा किया जाता है कि कुछ दिनों या महीनों की साधना के बाद व्यक्ति विशेष शक्तियां प्राप्त कर सकता है, जिससे धन प्राप्ति, गड़ा खजाना खोजने या अन्य मनोकामनाएं पूरी करने में सहायता मिलेगी।

    जांच के दौरान सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो मिले, जिनमें कथित तांत्रिक साधना के दौरान नोटों की बारिश या जमीन से धन निकलने जैसे दृश्य दिखा रहे थे। इन्हीं वीडियो के आधार पर संपर्क करने पर एक व्यक्ति ने खुद को अघोरी साधक बताते हुए विभिन्न प्रकार की साधनाएं सिखाने का दावा किया। बातचीत में उसने कहा कि पहले गुरुदीक्षा लेनी होगी, फिर गुरुमंत्र, गणेश साधना और कुलदेव साधना के बाद अन्य सिद्धियां प्राप्त की जा सकती हैं। उसने यह भी दावा किया कि पैसों की बारिश जैसी सिद्धि हासिल करने के लिए लंबे समय तक साधना करनी पड़ती है।

    हालांकि जब इन दावों की गहराई से जांच की गई तो कई बातें संदिग्ध मिलीं। कथित रूप से दिखाए गए कुछ वीडियो ऐसे मामलों से जुड़े पाए गए, जहां संबंधित व्यक्तियों पर पहले से ही धोखाधड़ी और ठगी के आरोप लग चुके थे। इसके बावजूद इन वीडियो का उपयोग नए लोगों को आकर्षित करने और विश्वास दिलाने के लिए किया जा रहा है।

    पड़ताल में यह भी सामने आया कि कथित गुरुदीक्षा और तंत्र साधना के लिए तय शुल्क लिया जाता है। कुछ मामलों में रजिस्ट्रेशन फीस, आधार कार्ड की कॉपी और अग्रिम भुगतान की मांग की गई। यहां तक कि व्यक्तिगत मुलाकात के लिए भी हजारों रुपए मांगे गए। कई संस्थानों और व्यक्तियों द्वारा तंत्र साधना के पैकेज, ऑनलाइन प्रशिक्षण और व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से कथित रहस्यमयी ज्ञान देने के ऑफर भी दिए जा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नेटवर्क लोगों की कमजोरियों का फायदा उठाते हैं। आर्थिक संकट, बीमारी, पारिवारिक समस्याएं या जल्दी सफलता पाने की इच्छा रखने वाले लोगों को चमत्कारिक दावों के जरिए प्रभावित किया जाता है। धीरे-धीरे उन्हें यह विश्वास दिलाया जाता है कि विशेष अनुष्ठान या साधना उनकी सभी समस्याओं का समाधान कर सकती है।

    ज्योतिषाचार्य पंडित जयदीप दुबे के अनुसार वास्तविक ज्योतिष और तंत्र विद्या का इस प्रकार के चमत्कारिक दावों से कोई संबंध नहीं है। उनका कहना है कि कुछ लोग धर्म, तंत्र और आध्यात्मिकता की आड़ में लोगों के डर और लालच का फायदा उठाकर आर्थिक शोषण कर रहे हैं। ऐसे दावों का कोई वैज्ञानिक या प्रमाणित आधार नहीं है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाले ऐसे वीडियो और दावों से सावधान रहना चाहिए। किसी भी चमत्कारिक दावे पर विश्वास करने से पहले तथ्यों की जांच करना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। जागरूकता ही ऐसे कथित तांत्रिकों और ठगी के जाल से बचने का सबसे प्रभावी उपाय है।

  • सिंगापुर ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाई

    सिंगापुर ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट पर रोक लगाई

    नई दिल्ली। सिंगापुर सरकार ने भारतीयों के खिलाफ नस्लीय नफरत फैलाने वाली 14 सोशल मीडिया पोस्ट को ब्लॉक कर दिया है। यह कार्रवाई ‘ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट 2023’ (OCHA) के तहत की गई। अधिकारियों ने कहा कि ये पोस्ट जानबूझकर भारतीय समुदाय को निशाना बनाकर भड़काऊ सामग्री फैलाने के लिए बनाई गई थीं।

    सिंगापुर के गृह मंत्रालय (MHA) ने YouTube, Facebook और X को निर्देश दिए कि वे इन पोस्टों तक स्थानीय उपयोगकर्ताओं की पहुंच रोकें। सरकार ने इसे विदेशी कनेक्शन वाले गलत जानकारी फैलाने के अभियान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई बताया। इस कदम का उद्देश्य सिंगापुर जैसे बहुसांस्कृतिक शहर-राज्य में सामाजिक सद्भाव बनाए रखना और नस्लीय तनाव को रोकना है।

    पोस्टों में क्या था कंटेंट
    अधिकारियों ने बताया कि आपत्तिजनक सामग्री पिछले महीने चीन के ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर शुरू हुई थी। शुरुआत में यह सिंगापुर की सांस्कृतिक पहचान और जातीय राजनीति पर केंद्रित थी। बाद में पोस्ट और अधिक भड़काऊ हो गई, जिसमें दावा किया गया कि भारतीयों की बढ़ती आबादी सिंगापुर के लिए खतरा है और देश के कई संस्कृतियों वाले ढांचे को कमजोर कर रही है।

    कुछ पोस्टों में कहा गया कि सिंगापुर की सामाजिक स्थिरता उसके बहुसांस्कृतिक ढांचे की वजह से नहीं, बल्कि चीनी बहुल आबादी की वजह से बनी हुई है। इसके साथ ही कुछ पोस्टों ने भारतवंशी नेताओं के प्रभाव को लेकर आलोचना की और भारतीय प्रवासियों के बढ़ते प्रभाव को देश के हितों के लिए हानिकारक बताया।

    कंटेंट को विश्वसनीय दिखाने के लिए ‘लिटिल इंडिया’ की व्यस्त सड़कों और पगोडा स्ट्रीट पर भारतीय त्योहारों के वीडियो का इस्तेमाल किया गया। पोस्ट में अपमानजनक भाषा का भी इस्तेमाल हुआ, जैसे भारतीय आबादी की तुलना “करी (curry) के जमावड़े” से करना।

    कानूनी आधार और जांच
    MHA ने कहा कि ये पोस्ट सिंगापुर के दंड संहिता (Penal Code) की धारा 298A के तहत अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। यह धारा उन गतिविधियों को अपराध मानती है जो जानबूझकर नस्लीय या धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी, नफरत या दुर्भावना को बढ़ावा देती हैं।

    जांच में पता चला कि यह सामग्री संभवतः चीन स्थित प्लेटफ़ॉर्म से शुरू हुई और फिर अन्य सोशल मीडिया चैनलों पर फैल गई। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सामग्री फैलाने के प्रयास सुनियोजित और जानबूझकर किए गए थे।

    सिंगापुर पुलिस ने प्लेटफ़ॉर्मों को निर्देश दिए कि वे सभी ज़रूरी कदम उठाएं ताकि स्थानीय उपयोगकर्ताओं को इन भड़काऊ पोस्टों तक पहुंच न मिले। अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई बहुसांस्कृतिक समाज में सद्भाव बनाए रखने और नस्लीय नफरत फैलाने वाली सामग्री से सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी।

    इस कदम से सिंगापुर ने दिखा दिया कि वह नस्लीय और धार्मिक सद्भाव बनाए रखने में कड़ा रुख अपनाने के लिए तत्पर है, और विदेशों से आई किसी भी भड़काऊ सामग्री को रोकने के लिए कानूनी और तकनीकी माध्यमों का प्रयोग कर रहा है।

  • स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए पैडलिंग, फिट इंडिया रैली में शामिल हुए सैकड़ों प्रतिभागी

    स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए पैडलिंग, फिट इंडिया रैली में शामिल हुए सैकड़ों प्रतिभागी


    मध्य प्रदेश । फिट इंडिया मूवमेंट के तहत उज्जैन में रविवार को एक भव्य साइकिल रैली का आयोजन किया गया, जिसमें 300 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा आयोजित इस रैली का उद्देश्य नागरिकों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, जल बचत और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जनजागरूकता फैलाना था।

    इस आयोजन में यूथ हॉस्टल्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (वाईएचएआई), जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग, क्रीड़ा भारती मालवा प्रांत तथा सोसायटी ऑफ ग्लोबल साइकिल का विशेष सहयोग रहा। रैली का शुभारंभ सिंहस्थ मेला कार्यालय से किया गया, जहां उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप शिवा ने हरी झंडी दिखाकर प्रतिभागियों को रवाना किया।

    करीब 7 किलोमीटर लंबी यह रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। प्रतिभागी पॉलीटेक्निक कॉलेज, अपना स्वीट, तीन बत्ती चौराहा, टॉवर चौक, शहीद पार्क, संजीवनी हॉस्पिटल और कालिदास अकादमी जैसे प्रमुख स्थलों से होते हुए पुनः सिंहस्थ मेला कार्यालय पहुंचे। रैली के दौरान प्रतिभागियों ने फिटनेस, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

    कार्यक्रम की विशेष बात यह रही कि आयोजन को सभी वर्गों के लोगों के लिए समावेशी बनाया गया। जिन लोगों के पास साइकिल उपलब्ध नहीं थी, उनके लिए योग सत्र का आयोजन किया गया। इससे अधिक से अधिक नागरिक इस अभियान से जुड़ सके और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के महत्व को समझ सके।

    आयोजकों ने बताया कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों को देखते हुए साइकिलिंग को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। साइकिल न केवल शारीरिक फिटनेस बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि ईंधन की खपत कम कर पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए रैली के माध्यम से लोगों को दैनिक जीवन में साइकिल के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया।

    रैली में युवाओं, खेल प्रेमियों, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। पूरे मार्ग में प्रतिभागियों का उत्साह देखने लायक था। लोगों ने फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण के नारों के साथ शहरवासियों को जागरूक करने का प्रयास किया।

    कार्यक्रम के दौरान जल संरक्षण, स्वच्छता और हरित जीवनशैली के महत्व पर भी जोर दिया गया। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ और जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करते हैं।

    सफलतापूर्वक संपन्न हुई इस साइकिल रैली ने एक बार फिर साबित किया कि जब समाज, प्रशासन और सामाजिक संगठन मिलकर किसी अभियान को आगे बढ़ाते हैं, तो उसका प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देता है। यह आयोजन उज्जैन को फिट, स्वच्छ और पर्यावरण के प्रति जागरूक शहर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • महाकाल की भस्म आरती में पहुंचीं किंजल दवे और मोनल गज्जर, बाबा का लिया आशीर्वाद

    महाकाल की भस्म आरती में पहुंचीं किंजल दवे और मोनल गज्जर, बाबा का लिया आशीर्वाद


    मध्य प्रदेश । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अनोखा दृश्य देखने को मिला, जब प्रसिद्ध गुजराती गायिका किंजल दवे और फिल्म अभिनेत्री मोनल गज्जर ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।

    दोनों कलाकार सुबह करीब 4 बजे मंदिर परिसर पहुंचीं और नंदी हॉल में बैठकर लगभग दो घंटे तक चलने वाली भस्म आरती में श्रद्धापूर्वक शामिल हुईं। इस दौरान वे लगातार भगवान महाकाल का जाप करती नजर आईं और पूरे समय भक्ति भाव में लीन रहीं। आरती के बीच उन्होंने नंदी महाराज का पूजन भी किया और अपनी मनोकामनाएं भगवान के चरणों में अर्पित कीं।

    भस्म आरती के पश्चात दोनों ने विधिवत रूप से भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से उप प्रशासक एस.एन. सोनी ने उनका स्वागत किया और सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह भी प्रदान किए।

    इस अवसर पर गायिका किंजल दवे ने भावुक होकर कहा कि यह उनका लगभग दो महीनों में दूसरा महाकाल दर्शन है। उन्होंने कहा, “बाबा महाकाल ने मुझे दोबारा यहां बुलाया है, मैं स्वयं को अत्यंत सौभाग्यशाली मानती हूं।” उन्होंने मंदिर प्रबंधन और सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

    अभिनेत्री मोनल गज्जर, जो मुख्य रूप से गुजराती और तेलुगु फिल्मों में सक्रिय हैं, इससे पहले भी 8 अप्रैल को महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए आ चुकी हैं। इस बार भी वे पूरी श्रद्धा और सादगी के साथ आरती में शामिल हुईं।

    मंदिर परिसर में दोनों कलाकारों की उपस्थिति के दौरान भक्तों में उत्साह देखने को मिला, हालांकि पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण और धार्मिक मर्यादा के अनुरूप संपन्न हुआ।

    श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती को विशेष महत्व प्राप्त है, और इसमें शामिल होना श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत सौभाग्य की बात मानी जाती है। इस अवसर ने एक बार फिर उज्जैन की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक महत्व को उजागर किया।

  • तेलंगाना के 28 वर्षीय अंशुल कुंचा की अमेरिका में हत्या, परिवार मांग रहा शव का जल्द भारत भेजा जाना

    तेलंगाना के 28 वर्षीय अंशुल कुंचा की अमेरिका में हत्या, परिवार मांग रहा शव का जल्द भारत भेजा जाना

    नई दिल्ली। अमेरिका के फिलाडेल्फिया में तेलंगाना के 28 वर्षीय भारतीय युवक अंशुल कुंचा की हत्या कर दी गई। अंशुल अमेरिका में एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत थे और अतिरिक्त आय के लिए वीकेंड पर पिज्जा डिलीवरी का पार्ट-टाइम काम भी करते थे।

    शनिवार रात को अंशुल को एक सुनसान इलाके में फर्जी पिज्जा ऑर्डर मिला। जब वह उस स्थान पर पिज्जा डिलीवरी देने गए, तो दो नकाबपोश हमलावरों ने उन पर हमला किया। हमलावरों ने अंशुल के सिर में कई गोलियां मारी और वहां से फरार हो गए। पुलिस के अनुसार जिस मकान में ऑर्डर दिया गया था वह खाली था।

    अंशुल की बहन तन्वी ने बताया कि यह कोई लूटपाट की घटना नहीं थी। हमलावरों ने उनसे न तो पैसे लिए और न ही कोई सामान छीना। यह पूरी घटना पूर्व नियोजित हत्या का संकेत देती है। अंशुल पहले भी लूटपाट का शिकार हो चुके थे, लेकिन इस बार का हमला सुनियोजित और घातक था।

    सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, फिलाडेल्फिया हाउसिंग अथॉरिटी के सीसीटीवी कैमरों में अंशुल को पिज्जा डिलीवरी करते हुए देखा गया, और उनके पीछे दो संदिग्धों को चलते हुए कैद किया गया। दोनों संदिग्ध गहरे रंग के कपड़े पहने थे और उनके पास बैकपैक था।

    परिवार ने अमेरिकी अधिकारियों और भारतीय वाणिज्य दूतावास से अंशुल का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत भेजने की अपील की है। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय महावाण्यसदास ने सोशल मीडिया पर अंशुल की असामयिक मृत्यु पर शोक व्यक्त किया और बताया कि वे परिवार के संपर्क में हैं तथा हर संभव मदद प्रदान की जा रही है।

    अंशुल लगभग चार साल पहले नौकरी के सिलसिले में अमेरिका गए थे। परिवार के अनुसार, वे मेहनती और जिम्मेदार व्यक्ति थे, जो वीकेंड में अतिरिक्त आय के लिए पिज्जा डिलीवरी का काम करते थे। उनका परिवार इस घटना से गहरे सदमे में है।

    पुलिस ने कहा कि फिलहाल मामले की जांच जारी है और संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। प्रारंभिक जांच से यह संकेत मिल रहा है कि यह हत्या व्यक्तिगत रूप से अंशुल को निशाना बनाने के लिए की गई थी।

    अंशुल की बहन ने कहा, “भाई की हत्या केवल हमारी परिवारिक दुख की वजह नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि विदेश में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर ध्यान देना कितना जरूरी है। हम चाहते हैं कि उनके हत्यारों को जल्द गिरफ्तार किया जाए और उनका शव भारत लाया जाए।”

    यह घटना फिलाडेल्फिया में भारतीय समुदाय और परिवार को हिला कर रख दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा और जांच टीमों को तैनात किया गया है।

    अंशुल की असामयिक मौत से भारतीय समुदाय में चिंता और सुरक्षा को लेकर बहस छिड़ गई है। फिलहाल जांच जारी है, और परिवार तथा दूतावास दोनों यह सुनिश्चित करने में लगे हैं कि शव को भारत लाने की प्रक्रिया जल्द पूरी हो।