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  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की मांग, वकील ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुमति मांगी

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की मांग, वकील ने अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर कार्रवाई की अनुमति मांगी

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट के वकील ब्रजेश सिंह ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने इस कार्रवाई के लिए आवश्यक अनुमति देने का अनुरोध किया है। यह मांग ऐसे समय सामने आई है, जब चुनाव आयोग के भीतर फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की कथित असहमतियों पर चर्चा तेज है।

    ब्रजेश सिंह ने अपने पत्र में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने मीडिया में सामने आई जानकारी का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के नेतृत्व में बहु-सदस्यीय चुनाव आयोग का संचालन इस तरह हुआ, मानो महत्वपूर्ण फैसले एक ही व्यक्ति द्वारा लिए जा रहे हों। पत्र में इसे सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों में बताई गई चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से अलग बताया गया है।

    आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की लिखित सहमति आवश्यक होती है। मौजूदा स्थिति में ब्रजेश सिंह का पत्र इसी अनुमति के लिए भेजा गया है। यानी अभी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई आपराधिक अवमानना मामला शुरू नहीं हुआ है और पत्र के आधार पर आगे की प्रक्रिया अटॉर्नी जनरल की अनुमति पर निर्भर करेगी।

    इस मांग की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी जानकारी भी है। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा सामने आया है। इन आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म 6 में बदलाव तथा मतदाता सूची से जुड़े दूसरे विषयों पर सवाल उठाए जाने की बात कही गई है।

    विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर भी दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की चर्चा हुई है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर उन्होंने सवाल उठाए तथा यह दावा किया कि कुछ निर्णय उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए। मतदाता सूची के डिजिटल डाटा और उसके प्रबंधन से जुड़े विषय भी इन आपत्तियों में शामिल बताए गए हैं।

    इन घटनाक्रमों के बाद विपक्षी दलों की ओर से भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सवाल उठाए गए हैं। कुछ विपक्षी दलों ने उनके इस्तीफे की मांग की है और एसआईआर की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। पहले दिए गए महाभियोग नोटिस को लेकर भी राजनीतिक दबाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इस नोटिस में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण सहित कई आरोप लगाए गए थे।

    हालांकि, चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेद या फैसलों में असहमति के दावों को अलग तरीके से प्रस्तुत किया है। आयोग का कहना है कि उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जा रहे हैं और एसआईआर से जुड़े निर्णयों को भी सभी तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी प्राप्त है। आयोग ने यह भी कहा है कि वैचारिक मतभेद को टकराव नहीं माना जाना चाहिए।

    आयोग के अनुसार, व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देना केवल चुनाव आयुक्तों तक सीमित नहीं है, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी अपने सुझाव देने के लिए अधिकृत है। इस तरह एक ओर कथित लिखित आपत्तियों और दूसरी ओर आयोग की सर्वसम्मति वाली सफाई के बीच विवाद बना हुआ है।

    अब ब्रजेश सिंह द्वारा अटॉर्नी जनरल को भेजे गए पत्र के बाद मामले का कानूनी पहलू भी चर्चा में आ गया है। पत्र में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों और चुनाव आयोग की बहु-सदस्यीय व्यवस्था का हवाला देते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही की अनुमति मांगी गई है। आगे की स्थिति अटॉर्नी जनरल की ओर से लिए जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी।

  • HIV से बचाव का बदला तरीका 8 हफ्ते में लगने वाले इंजेक्शन ने रोज की गोली को दी चुनौती स्टडी में चौंकाने वाले नतीजे

    HIV से बचाव का बदला तरीका 8 हफ्ते में लगने वाले इंजेक्शन ने रोज की गोली को दी चुनौती स्टडी में चौंकाने वाले नतीजे


    नई दिल्ली । HIV से बचाव को लेकर हुई एक स्टडी में लंबे समय तक असर करने वाले इंजेक्शन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शोध में हर 8 सप्ताह में लगाए जाने वाले कैबोटेग्राविर इंजेक्शन को HIV से बचाव के लिए रोजाना ली जाने वाली गोली की तुलना में ज्यादा प्रभावी पाया गया। इस नतीजे के बाद HIV संक्रमण के जोखिम वाले लोगों के लिए बचाव के विकल्पों को लेकर चर्चा बढ़ी है। हालांकि सबसे जरूरी बात यह है कि कैबोटेग्राविर HIV का इलाज नहीं है बल्कि संक्रमण से पहले बचाव के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला तरीका है।

    HIV शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने वाला वायरस है। संक्रमण से बचाव के लिए ऐसे लोगों को प्री एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस यानी PrEP दिया जा सकता है जिन्हें HIV संक्रमण का जोखिम अधिक हो। लंबे समय से इसके लिए रोजाना दवा लेने का विकल्प इस्तेमाल किया जाता रहा है। रोज गोली लेने की व्यवस्था में सबसे बड़ी चुनौती नियमितता की होती है क्योंकि कई बार लोग किसी दिन दवा लेना भूल सकते हैं। ऐसे में लंबे समय तक असर करने वाला इंजेक्शन एक वैकल्पिक तरीका हो सकता है।

    कैबोटेग्राविर इसी तरह का इंजेक्शन है जिसे लगभग 8 सप्ताह के अंतर पर लगाया जाता है। उपलब्ध स्टडी में कुल 4566 लोगों को शामिल किया गया था। प्रतिभागियों को अलग अलग समूहों में रखा गया जिसमें एक समूह को हर 8 सप्ताह में कैबोटेग्राविर का इंजेक्शन दिया गया जबकि दूसरे समूह को रोजाना HIV से बचाव की गोली दी गई। अध्ययन के दौरान इंजेक्शन वाले समूह में 13 लोगों में HIV संक्रमण पाया गया जबकि रोज गोली लेने वाले समूह में 39 संक्रमण दर्ज किए गए। शोधकर्ताओं के निष्कर्ष के अनुसार इंजेक्शन ने HIV से बचाव में बेहतर प्रभाव दिखाया।

    महिलाओं में भी इस इंजेक्शन की प्रभावशीलता को लेकर अध्ययन किया गया। इसमें 3224 महिलाओं को शामिल किया गया था। हर 8 सप्ताह में कैबोटेग्राविर लेने वाले समूह में HIV संक्रमण के 4 मामले सामने आए जबकि रोजाना गोली लेने वाले समूह में 36 मामले दर्ज किए गए। इन परिणामों ने लंबे समय तक असर करने वाले HIV प्रिवेंशन इंजेक्शन की संभावित उपयोगिता को सामने रखा।

    हालांकि इन नतीजों का यह मतलब नहीं है कि HIV की मौजूदा दवाओं की जरूरत खत्म हो गई है। कैबोटेग्राविर का इस्तेमाल HIV से संक्रमित व्यक्ति के इलाज के लिए नहीं किया जाता। यह उन लोगों के लिए बचाव का विकल्प है जिन्हें HIV संक्रमण का खतरा है और जिनके लिए डॉक्टर PrEP की सलाह देते हैं। अगर किसी व्यक्ति को पहले से HIV संक्रमण है तो उसके लिए डॉक्टर की निगरानी में अलग उपचार की जरूरत होती है।

    इंजेक्शन लेने से पहले HIV की स्थिति की जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी होती है। इसके अलावा इंजेक्शन की अगली खुराक समय पर लेना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए स्टडी के सकारात्मक परिणामों के बावजूद इसे अपनी मर्जी से इस्तेमाल करने के बजाय योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही PrEP का विकल्प चुनना चाहिए।

  • 500 करोड़ के मानहानि नोटिस पर आदित्य ठाकरे का 25 पेज में जवाब, माफी मांगने और पोस्ट हटाने से किया इनकार

    500 करोड़ के मानहानि नोटिस पर आदित्य ठाकरे का 25 पेज में जवाब, माफी मांगने और पोस्ट हटाने से किया इनकार

    नई दिल्ली ।शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने दिवंगत दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की ओर से भेजे गए 500 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस का 25 पन्नों में जवाब दिया है। जवाब में आदित्य ठाकरे ने नोटिस में लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए माफी मांगने, सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और 500 करोड़ रुपये का मुआवजा देने से इनकार किया है।

    कानूनी जवाब के मुताबिक, 16 सितंबर 2026 को आदित्य ठाकरे के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से अंग्रेजी और मराठी में किए गए दो पोस्ट में सतीश सालियान का नाम नहीं लिया गया था। जवाब में यह भी कहा गया है कि पोस्ट में ऐसा कोई स्पष्ट संदर्भ नहीं था, जिससे सतीश सालियान की पहचान की जा सके।

    आदित्य ठाकरे की ओर से यह भी दोहराया गया है कि वह दिशा सालियान से कभी मिले या उन्हें जानते तक नहीं थे। उन्होंने अपने इस बयान पर कायम रहने की बात कही है। कानूनी जवाब में कहा गया है कि संबंधित पोस्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं था।

    जवाब में दावा किया गया है कि दोनों पोस्ट का संदर्भ उनके नाम को दिशा सालियान की मौत से जोड़ने वाले लंबे समय से चल रहे राजनीतिक और मीडिया अभियान से था। इसमें कहा गया कि कुछ व्यक्तियों और कथित हित समूहों की ओर से उनके नाम को इस मामले से जोड़ने की कोशिशों पर सवाल उठाए गए थे।

    सतीश सालियान की ओर से भेजे गए नोटिस में आदित्य ठाकरे के बयानों और मामले से जुड़े उनके सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताई गई थी। नोटिस में पोस्ट हटाने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और अंग्रेजी तथा मराठी में माफीनामा प्रकाशित करने की मांग की गई थी।

    आदित्य ठाकरे के जवाब में इन सभी मांगों को अस्वीकार कर दिया गया है। उनकी ओर से कहा गया है कि संबंधित पोस्ट में कोई झूठा या मानहानिकारक बयान नहीं दिया गया। 500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग को भी जवाब में खारिज किया गया है।

    कानूनी जवाब में यह भी कहा गया है कि किसी मामले में जांच शुरू होना अपने आप में किसी व्यक्ति की संलिप्तता या अपराध साबित नहीं करता। जवाब में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की बात कही गई है।

    दिशा सालियान की मौत जून 2020 में मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उनकी मौत के बाद इस मामले को लेकर अलग-अलग तरह के दावे सामने आए और इसे लेकर लंबे समय से जांच तथा कानूनी प्रक्रिया चलती रही है।

    आदित्य ठाकरे की ओर से कहा गया है कि वह दिशा सालियान के पिता के साथ व्यक्तिगत विवाद में नहीं पड़ना चाहते। साथ ही उन्होंने मामले की जांच को तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ने देने की बात कही है।

    25 पन्नों के जवाब में नोटिस वापस लेने की मांग भी की गई है। इस तरह 500 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस पर दोनों पक्षों के बीच कानूनी विवाद अब आगे बढ़ने की स्थिति में है। फिलहाल आदित्य ठाकरे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट वापस लेने या माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है।

  • समस्तीपुर में लड़की से बदसलूकी का वीडियो वायरल, बांध बाइपास रोड पर घटना के बाद युवकों की पहचान में जुटी पुलिस

    समस्तीपुर में लड़की से बदसलूकी का वीडियो वायरल, बांध बाइपास रोड पर घटना के बाद युवकों की पहचान में जुटी पुलिस

    नई दिल्ली /बिहार के समस्तीपुर में लड़की के साथ कथित बदसलूकी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मामला कर्पूरीग्राम थाना क्षेत्र के जगतसिंहपुर गांव का बताया जा रहा है। वायरल वीडियो में कुछ युवक एक लड़की के साथ गाली-गलौज और कथित तौर पर गलत व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं। लड़की से छेड़खानी और बैड टच करने का आरोप भी लगाया गया है।

    बताया गया है कि बुधवार शाम लड़की एक परिचित लड़के के साथ बांध बाइपास रोड से गुजर रही थी। रास्ते में वह कुछ देर के लिए रुकी और वहां फोटो लेने लगी। इसी दौरान कुछ युवक वहां पहुंच गए। आरोप है कि युवकों ने लड़की के साथ बदसलूकी और छेड़खानी शुरू कर दी।

    घटना के दौरान किसी व्यक्ति ने मोबाइल फोन से वीडियो बना लिया। बाद में यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंची और पुलिस ने इसकी जांच शुरू कर दी।

    जानकारी के मुताबिक, लड़की अपने एक परिचित युवक के साथ रास्ते से गुजर रही थी और कुछ समय के लिए वहां रुककर फोटो खींच रही थी। इसी दौरान कुछ युवक उसके पास पहुंचे और कथित तौर पर उसके साथ गाली-गलौज करने लगे। वीडियो में युवकों का व्यवहार भी दिखाई दे रहा है, जिसके आधार पर पुलिस मामले की जानकारी जुटा रही है।

    वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने इसमें दिखाई दे रहे युवकों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस घटना से जुड़े वीडियो की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं।

    स्थानीय लोगों की ओर से यह बात सामने आई है कि वीडियो में नजर आ रहे युवक इसी गांव के रहने वाले हो सकते हैं। हालांकि, पुलिस ने अभी इस जानकारी की पुष्टि नहीं की है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही युवकों की पहचान और घटना से जुड़ी अन्य जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।

    पुलिस घटना वाली जगह के बारे में भी जानकारी जुटा रही है। इसके साथ ही वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों और पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना किस परिस्थिति में हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

    समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक अरविंद प्रताप सिंह ने मामले को गंभीर बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और उसमें दिखाई दे रहे युवकों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है।

    पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस वीडियो और घटना से जुड़ी उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है। युवकों की पहचान और मामले में उनकी भूमिका जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

  • व्हाइट हाउस मीडिया बैन पर ट्रंप प्रशासन को कोर्ट से झटका, तीन संस्थानों की प्रेस एक्सेस बहाल करने का आदेश

    व्हाइट हाउस मीडिया बैन पर ट्रंप प्रशासन को कोर्ट से झटका, तीन संस्थानों की प्रेस एक्सेस बहाल करने का आदेश


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को व्हाइट हाउस से तीन मीडिया संस्थानों को प्रतिबंधित करने के मामले में अदालत से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी फेडरल जज टिमोथी केली ने तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस में प्रवेश संबंधी प्रेस एक्सेस तुरंत बहाल करने का आदेश दिया है। यह मामला प्रेस की स्वतंत्रता और संवैधानिक प्रक्रिया से जुड़े विवाद के बीच अदालत पहुंचा था।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को तीन प्रमुख अमेरिकी मीडिया संस्थानों को व्हाइट हाउस परिसर से प्रतिबंधित करने का फैसला किया था। इसके बाद संबंधित संस्थानों ने अदालत का रुख किया और अपने पत्रकारों की पहुंच बहाल करने की मांग की। उनका कहना था कि प्रतिबंध अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट में दी गई प्रेस स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का उल्लंघन करता है।

    मामले की सुनवाई के दौरान जज टिमोथी केली ने इस बात पर ध्यान दिया कि प्रतिबंध लागू करने से पहले संबंधित पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि किसी व्यक्ति से संवैधानिक रूप से संरक्षित अधिकार वापस लेने से पहले उसे नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

    जज केली ने ट्रंप प्रशासन को तीनों मीडिया संस्थानों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करने का निर्देश दिया। अदालत का आदेश ऐसे समय आया है जब प्रतिबंध के खिलाफ दायर मुकदमे में मीडिया संस्थानों ने तत्काल राहत की मांग की थी।

    ट्रंप प्रशासन की ओर से अदालत में इस फैसले का बचाव करते हुए कहा गया कि व्हाइट हाउस में पत्रकारों की पहुंच कोई पूर्ण संवैधानिक अधिकार नहीं, बल्कि प्रशासन की ओर से दी जाने वाली सुविधा है। सरकार ने सुरक्षा से जुड़े कारणों का भी हवाला दिया और तर्क दिया कि राष्ट्रपति के पास संवेदनशील सरकारी परिसर में प्रवेश को नियंत्रित करने का अधिकार है।

    न्याय विभाग ने यह भी दलील दी कि संविधान का फर्स्ट अमेंडमेंट प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा करता है, लेकिन इससे पत्रकारों को बिना अनुमति व्हाइट हाउस या अन्य संवेदनशील सरकारी परिसरों में असीमित प्रवेश का अधिकार नहीं मिल जाता।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पुराने अपीलीय फैसलों का भी संदर्भ लिया। इन फैसलों के आधार पर कहा गया कि व्हाइट हाउस की प्रेस एक्सेस वापस लेने से पहले संबंधित पत्रकारों या मीडिया संस्थानों को उचित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए।

    इस विवाद के बीच अमेरिका के कई बड़े टीवी नेटवर्क ने भी व्हाइट हाउस की साझा लाइव वीडियो कवरेज रोक दी थी। यह कदम तीन मीडिया संस्थानों पर लगाए गए प्रतिबंध के विरोध में उठाया गया था। इससे राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की साझा मीडिया कवरेज प्रभावित हुई।

    अदालत के आदेश के बाद अब तीनों प्रतिबंधित मीडिया संस्थानों के पत्रकारों की व्हाइट हाउस पहुंच बहाल करने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, मामला अभी कानूनी प्रक्रिया में है और प्रतिबंध को लेकर प्रशासन तथा मीडिया संस्थानों के बीच विवाद अदालत में आगे भी जारी रहेगा।

  • भोपाल वकील-पुलिस विवाद में निलंबित थाना प्रभारी राजन अहिरवार ने वीडियो जारी कर जांच को लेकर रखी अपनी बात

    भोपाल वकील-पुलिस विवाद में निलंबित थाना प्रभारी राजन अहिरवार ने वीडियो जारी कर जांच को लेकर रखी अपनी बात

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल के जहांगीराबाद इलाके में वकील और पुलिसकर्मियों के बीच हुआ विवाद अब जांच और कार्रवाई के अगले चरण में पहुंच गया है। मामले में दोनों पक्षों की ओर से शिकायत दर्ज होने के बाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। निलंबन के बाद राजन अहिरवार ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपना पक्ष सामने रखा है।

    राजन अहिरवार ने इंस्टाग्राम पर साझा किए गए वीडियो में कहा कि उनकी जांच से महिला पुलिस अधिकारी को दूर रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक उनकी बात सही तरीके से नहीं पहुंच पाई। प्रदर्शन के बाद उन्होंने अपना मोबाइल फ्लाइट मोड पर रखा था और सुबह वीडियो पोस्ट कर अपनी बात सार्वजनिक की।

    विवाद के मामले में अधिवक्ता राकेश रावल की शिकायत पर जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार और दो अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। दूसरी ओर पुलिस की तरफ से भी राकेश रावल के खिलाफ सरकारी काम में रुकावट डालने, बदसलूकी और मारपीट के आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।

    विवाद के बाद डीसीपी जोन-1 ने थाना प्रभारी राजन अहिरवार के साथ कॉन्स्टेबल यश लखेरा और आरक्षक रामस्वरूप को निलंबित कर दिया। कार्रवाई के बाद जहांगीराबाद थाने की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर हरि किशन लोहिया को सौंपी गई है। पुलिस विभाग की ओर से पूरे मामले की जांच जारी है।

    मामले को लेकर अधिवक्ताओं ने भी प्रदर्शन किया। कार्रवाई की मांग को लेकर मंगलवार रात वकील जहांगीराबाद थाने में देर रात करीब तीन बजे तक प्रदर्शन करते रहे। इसके बाद बुधवार को भी अधिवक्ताओं ने कोर्ट चौराहे पर प्रदर्शन किया और रास्ते बंद कर दिए।

    विवाद की शुरुआत 22 सितंबर की शाम गणेश विसर्जन के दौरान खटलापुरा इलाके में हुई बताई गई है। आरक्षक हरि ओम वर्मा की शिकायत के अनुसार, उस समय उनकी ड्यूटी इलाके में लगाई गई थी। इसी दौरान एक लाल रंग की कार वहां पहुंची। आरक्षक ने चालक को आगे जाने से रोकने की कोशिश की, जिसके बाद कार सड़क पर खड़ी कर दी गई।

    शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद पुलिसकर्मियों और अधिवक्ता राकेश रावल के बीच बहस हुई। आरक्षक हरि ओम वर्मा ने आरोप लगाया कि राकेश रावल ने पुलिसकर्मियों के साथ गाली-गलौज की, मारपीट की और धमकी भी दी। आरक्षक के अनुसार, घटना की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई और इसके बाद थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई गई।

    दूसरी ओर अधिवक्ता की शिकायत के आधार पर भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस तरह दोनों पक्षों की शिकायतों के आधार पर पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ रही है।

    निलंबन के बाद थाना प्रभारी राजन अहिरवार की ओर से सामने आए वीडियो ने मामले को एक और मोड़ दिया है। उन्होंने अपनी जांच से महिला पुलिस अधिकारी को अलग रखने की मांग करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचने में कमी का दावा किया है। फिलहाल पूरे मामले की जांच पुलिस विभाग की ओर से की जा रही है और इसी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट, चांदी भी फिसली; दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में आज इतने हुए भाव

    नई दिल्ली । भारतीय सर्राफा बाजार में 24 सितंबर 2026, गुरुवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। दोनों प्रमुख कीमती धातुओं के भाव में कमजोरी दर्ज की गई है। सोने की कीमत में 390 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई, जबकि चांदी का भाव करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक फिसल गया।

    सोने की कीमतों में आई इस गिरावट के बाद 22 कैरेट गोल्ड का भाव अधिकांश प्रमुख शहरों में 1,39,060 रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे पहुंच गया है। वहीं 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,750 रुपये प्रति 10 ग्राम से कम हो गई है। अलग-अलग शहरों में सोने के भाव में मामूली अंतर दर्ज किया गया है।

    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,700 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। वहीं 22 कैरेट सोने का भाव 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। दिल्ली में दोनों कैरेट के भाव में गिरावट के बाद ये कीमतें सामने आई हैं।

    मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, जबकि 22 कैरेट गोल्ड का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। अहमदाबाद में 24 कैरेट सोना 1,51,600 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    कोलकाता में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट का भाव 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। जयपुर में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट सोना 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    बेंगलुरु में 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,550 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट की कीमत 1,38,908 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। लखनऊ में 24 कैरेट सोना 1,51,700 रुपये और 22 कैरेट गोल्ड 1,39,058 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भी सोने की कीमतें प्रमुख शहरों के करीब रहीं। यहां 24 कैरेट सोने का भाव 1,51,600 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोने की कीमत 1,38,958 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

    सोने के साथ चांदी के भाव में भी आज कमजोरी आई है। पिछले दिन की तुलना में चांदी की कीमत में करीब 1,460 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के बाद अधिकांश शहरों में चांदी का भाव 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया है।

    24 सितंबर को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में आई गिरावट से सर्राफा बाजार में दोनों धातुओं के भाव नीचे आए हैं। अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर है, जबकि चांदी का भाव अधिकांश शहरों में करीब 2,34,620 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया है।

    अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो खरीदारी से पहले अपने शहर में लागू ताजा भाव की जानकारी लेना जरूरी है, क्योंकि शहर के अनुसार कीमतों में अंतर हो सकता है।

  • ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात के बीच अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर पर राहत, व्यापारिक युद्धविराम जनवरी 2027 तक बढ़ाया गया

    ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात के बीच अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर पर राहत, व्यापारिक युद्धविराम जनवरी 2027 तक बढ़ाया गया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से जारी व्यापारिक तनाव के बीच दोनों देशों ने फिलहाल राहत की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। दोनों देशों ने मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम की अवधि को करीब दो महीने आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। पहले यह समझौता 10 नवंबर 2026 को समाप्त होना था, लेकिन अब इसकी अवधि बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 कर दी गई है।

    इस फैसले से अमेरिका और चीन को टैरिफ सहित कई व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत जारी रखने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापारिक विवाद में टैरिफ, आयात-निर्यात और अन्य आर्थिक विषयों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में युद्धविराम की अवधि बढ़ने से बातचीत के जरिए समाधान तलाशने का अवसर मिलेगा।

    यह फैसला चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान सामने आया है। शी जिनपिंग अपनी पत्नी पेंग लियुआन के साथ अमेरिका पहुंचे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ने उनका स्वागत किया। इसके बाद ट्रंप और जिनपिंग के बीच मुलाकात भी हुई।

    दोनों नेताओं की बैठक को अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बातचीत के दौरान टैरिफ समेत कई आर्थिक और व्यापारिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव कम करने और आगे की बातचीत का रास्ता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

    मौजूदा व्यापारिक युद्धविराम की अवधि बढ़ाए जाने का सीधा मतलब यह है कि दोनों देशों के पास अब अपने विवादित मुद्दों पर चर्चा के लिए पहले की तुलना में अधिक समय रहेगा। इससे तत्काल व्यापारिक टकराव बढ़ने की स्थिति को टालने में मदद मिल सकती है।

    अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रखने की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं, लेकिन दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद जरूरी है।

    अमेरिका और चीन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं। दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। इसी वजह से दोनों देशों के बीच टैरिफ और व्यापार नीति से जुड़े फैसलों पर दुनियाभर की नजर रहती है।

    युद्धविराम की अवधि बढ़ने के बावजूद दोनों देशों के बीच सभी व्यापारिक मतभेद समाप्त नहीं हुए हैं। टैरिफ और अन्य आर्थिक मुद्दों पर आगे भी बातचीत जारी रहने की संभावना है। दोनों पक्षों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अस्थायी राहत को आगे किसी व्यापक व्यापारिक समझौते की दिशा में ले जा सकें।

    अब 10 जनवरी 2027 तक अमेरिका और चीन के पास व्यापारिक विवादों पर बातचीत आगे बढ़ाने का अतिरिक्त समय है। ट्रंप और जिनपिंग की मुलाकात के बीच हुआ यह फैसला दोनों देशों के बीच जारी व्यापारिक संवाद को बनाए रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

  • आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत मामले में राहुल गांधी ने परिवार से की बात, हरसंभव मदद का भरोसा दिया

    आईआईटी बॉम्बे छात्र साहिल वाकोडे की मौत मामले में राहुल गांधी ने परिवार से की बात, हरसंभव मदद का भरोसा दिया

    नई दिल्ली ।आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत का मामला लगातार चर्चा में है। इसी बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने साहिल के परिवार से बातचीत कर समर्थन जताया और न्याय की लड़ाई में हरसंभव मदद का भरोसा दिया। गुरुवार को उन्होंने साहिल के माता-पिता से वीडियो कॉल के जरिए बात की। बातचीत के दौरान परिवार की स्थिति और मामले से जुड़ी उनकी चिंताओं को लेकर चर्चा हुई।

    साहिल वाकोडे की मौत के बाद उनके परिवार ने संस्थान के प्रशासन और कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार की ओर से साहिल के साथ कथित जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की जांच अभी जारी है। परिवार ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    साहिल की मौत के मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच कर रही है। जांच एजेंसी परीक्षा केंद्र, हॉस्टल और घटना से पहले की गतिविधियों से जुड़े अलग-अलग साक्ष्यों को खंगाल रही है। जांच में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के अलावा साहिल तथा संबंधित अधिकारियों के बीच हुई बातचीत को भी देखा जा रहा है।

    पुलिस की जांच में 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान हुई घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 बजे से 12:45 बजे के बीच साहिल परीक्षा कक्ष में मौजूद था। इस दौरान उसके पास मौजूद किसी वस्तु को लेकर उससे पूछताछ की गई और बाद में उसे अन्य छात्रों से अलग ले जाया गया। इसके बाद वह हॉस्टल की ओर गया।

    साहिल ऊर्जा विज्ञान एवं इंजीनियरिंग विभाग में द्वितीय वर्ष का छात्र था। संस्थान की ओर से बताया गया था कि परीक्षा के दौरान उसके पास मोबाइल फोन पाया गया था और उसने प्रश्नपत्र से जुड़े जवाब हासिल करने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल करने की कोशिश की थी। संस्थान के अनुसार, परीक्षा प्रशिक्षक और विभाग प्रमुख ने इस संबंध में साहिल से बातचीत की थी। उसे समझाया गया था और यह भरोसा दिलाया गया था कि इस घटना का उसके करियर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    बातचीत के बाद साहिल अपने हॉस्टल के कमरे में लौट गया था। बाद में उसी दिन वह कमरे में मृत पाया गया। उसके परिवार ने इस घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठाए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

    जातिगत भेदभाव के आरोपों को लेकर संस्थान की ओर से कहा गया है कि साहिल ने अपने जीवनकाल में एससी-एसटी प्रकोष्ठ या प्रशासन के पास इस तरह की कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। दूसरी ओर, परिवार ने संबंधित अधिकारियों पर कथित भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की सच्चाई जांच का विषय है।

    मामले में साहिल के कमरे से मिले मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। परीक्षा हॉल और हॉस्टल के अलग-अलग हिस्सों के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है। फाइनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी इंतजार है।

    इस बीच साहिल के परिवार से राहुल गांधी की बातचीत को मामले में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक हस्तक्षेप के तौर पर देखा जा रहा है। बातचीत के दौरान उन्होंने परिवार को समर्थन और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। मामले में जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • रुपये में मजबूती की गुंजाइश, चालू खाता घाटा घटने और एफटीए से निर्यात बढ़ने की उम्मीद

    रुपये में मजबूती की गुंजाइश, चालू खाता घाटा घटने और एफटीए से निर्यात बढ़ने की उम्मीद

    नई दिल्ली ।भारतीय रुपये में मौजूदा स्तर से स्थिरता आने के साथ आगे मजबूती की भी पर्याप्त गुंजाइश है। भारतीय रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने कहा कि आने वाले वर्षों में चालू खाते का घाटा कम होने की उम्मीद है। इसके साथ वस्तुओं के निर्यात में बढ़ती सफलता और हाल के मुक्त व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसर रुपये की स्थिति को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

    31 मार्च 2025 से 16 सितंबर 2026 के बीच रुपया प्वाइंट-टू-प्वाइंट आधार पर कुल 13.1 प्रतिशत कमजोर हुआ है। ऐसे में मौजूदा स्तर से भारतीय मुद्रा के स्थिर होने और मजबूत होने की संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है। पूनम गुप्ता ने कहा कि जब पूंजी प्रवाह से जुड़े उपाय पहली बार घोषित किए गए थे, तब बाजार विश्लेषकों ने भी रुपये के स्थिर होने और मजबूती की उम्मीद जताई थी।

    मुंबई में आयोजित एक सम्मेलन में पूनम गुप्ता ने कहा कि आरबीआई विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित परिस्थितियां सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक के पास कई दशकों के चालू खाते के घाटे या भुगतान संतुलन में दर्ज शुद्ध घाटे को पूरा करने की क्षमता है।

    भारत पारंपरिक रूप से चालू खाते में मामूली घाटा और पूंजी खाते में बड़ा अधिशेष दर्ज करता रहा है। इसी वजह से देश का कुल भुगतान संतुलन सामान्य तौर पर सकारात्मक रहा है। समय के साथ सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के मुकाबले चालू खाते का घाटा कम हुआ है, जिससे बाहरी क्षेत्र की स्थिति को मजबूती मिली है।

    पूनम गुप्ता के मुताबिक, भारत का चालू खाता घाटा उन स्तरों से काफी नीचे रहा है, जिन्हें आमतौर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए उचित माना जाता है। देश के शुद्ध सेवा निर्यात और विदेशों से आने वाला धन यानी प्रेषण भारतीय अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण संरचनात्मक ताकत बने हुए हैं। इन दोनों के मजबूत होने से वस्तुओं के व्यापार घाटे की भरपाई करने में मदद मिलती है और चालू खाता घाटे को जीडीपी के एक प्रतिशत से नीचे बनाए रखने में सहायता मिलती है।

    हालांकि, हाल में तेल और सोने की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव के कारण चालू खाते का घाटा अस्थायी रूप से बढ़ा है। इसके अलावा पिछले दो वर्षों के दौरान पूंजी खाते का अधिशेष भी चालू खाते के घाटे की तुलना में कम रहा। इसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 5 अरब डॉलर और वित्त वर्ष 2025-26 में 23.6 अरब डॉलर का नकारात्मक भुगतान संतुलन दर्ज हुआ।

    उन्होंने कहा कि भविष्य में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते इस्तेमाल और देश में तेल भंडार खोजने के प्रयासों से आयातित तेल पर भारत की निर्भरता कम होने की उम्मीद है। इससे जीडीपी के मुकाबले तेल की मांग में लंबे समय से जारी गिरावट की प्रवृत्ति और मजबूत हो सकती है।

    पूनम गुप्ता ने यह भी कहा कि यदि संघर्ष समाप्त होने के बाद तेल की कीमतों में स्थिरता आती है, तो बाहरी क्षेत्र को अतिरिक्त राहत मिल सकती है। इसके साथ हाल के मुक्त व्यापार समझौतों के सकारात्मक प्रभाव सामने आने और अनुकूल विनिमय दर की स्थिति बने रहने से आने वाले वर्षों में रुपये को मजबूती मिलने की संभावना बढ़ सकती है।