Blog

  • धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म अभी बाकी, अग्नियुग में लाला लाजपत राय के किरदार में आएंगे नजर

    धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म अभी बाकी, अग्नियुग में लाला लाजपत राय के किरदार में आएंगे नजर

    नई दिल्ली । धर्मेंद्र की फिल्मों को पसंद करने वाले दर्शकों के लिए उनकी आखिरी फिल्म को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है। उनके निधन के बाद रिलीज हुई फिल्म इक्कीस को उनकी अंतिम फिल्म माना जा रहा था, लेकिन अब पता चला है कि उनकी एक और फिल्म रिलीज होना बाकी है। इस फिल्म का नाम अग्नियुग: द फायर बताया गया है। फिल्म का निर्देशन बिस्वजीत चटर्जी कर रहे हैं और इसमें धर्मेंद्र स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय की भूमिका निभाते नजर आएंगे।

    फिल्म के निर्देशक बिस्वजीत चटर्जी करीब चार दशक बाद निर्देशन की दुनिया में वापसी करने जा रहे हैं। उन्होंने फिल्म से जुड़ी जानकारी साझा करते हुए बताया कि अग्नियुग: द फायर में धर्मेंद्र महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देंगे। फिल्म में उन्हें पंजाब केसरी के नाम से प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय के किरदार में प्रस्तुत किया जाएगा।

    बिस्वजीत के अनुसार फिल्म में धर्मेंद्र को इस भूमिका के लिए तैयार करने की कहानी भी काफी खास रही। उन्होंने बताया कि शुरुआत में धर्मेंद्र फिल्म में काम करने के लिए तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि वह फिलहाल फिल्म नहीं करना चाहते। उस समय उन्हें यह भी जानकारी नहीं थी कि उनके लिए कौन सा किरदार सोचा गया है।

    निर्देशक ने जब उन्हें बताया कि वह लाला लाजपत राय की भूमिका के लिए उनके पास आए हैं और इस किरदार के लिए उनके अलावा किसी और को लेकर उन्होंने विचार नहीं किया, तो धर्मेंद्र ने इस बारे में विस्तार से जानना चाहा। बिस्वजीत ने उन्हें बताया कि यह किरदार एक बड़े देशभक्त का है और लाला लाजपत राय के जीवन से जुड़ा है।

    भूमिका के बारे में सुनने के बाद धर्मेंद्र की दिलचस्पी बढ़ गई। उन्होंने फिल्म करने को लेकर विचार किया और आखिरकार इसके लिए हामी भर दी। निर्देशक के मुताबिक, किरदार के बारे में जानने के बाद धर्मेंद्र फिल्म को लेकर काफी उत्साहित हो गए थे। उन्होंने यहां तक कहा था कि फिल्म में अपने स्टंट खुद करने की कोशिश करेंगे और इसके लिए बॉडी डबल का सहारा नहीं लेना चाहते।

    बिस्वजीत चटर्जी ने धर्मेंद्र के परिवार के साथ हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, धर्मेंद्र के निधन के बाद उन्होंने परिवार के सदस्यों को फिल्म में उनके किरदार से जुड़ी तस्वीर दिखाई थी। तस्वीर में धर्मेंद्र लाला लाजपत राय के रूप में नजर आ रहे थे। इसी दौरान उन्होंने बताया कि यह धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म होगी।

    धर्मेंद्र के बेटे बॉबी देओल को भी फिल्म के बारे में जानकारी थी। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि फिल्म की कहानी सुनाए जाने के समय उन्हें भी इस प्रोजेक्ट के बारे में पता चला था। इस तरह फिल्म में धर्मेंद्र की मौजूदगी उनकी फिल्मी यात्रा का एक और महत्वपूर्ण अध्याय बन गई है।

    अग्नियुग: द फायर की रिलीज डेट अभी घोषित नहीं की गई है। फिल्म में जैकी श्रॉफ के भी शामिल होने की संभावना बताई जा रही है। धर्मेंद्र ने अपने लंबे फिल्मी करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदारों के जरिए हिंदी सिनेमा में अपनी खास पहचान बनाई। अब अग्नियुग: द फायर में उनका लाला लाजपत राय के रूप में नजर आना दर्शकों के लिए उनकी फिल्मी यात्रा से जुड़ा एक अहम अध्याय होगा।

  • हुरुन रिच लिस्ट में बॉलीवुड का जलवा शाहरुख 10 हजार करोड़ पर सलमान 3 हजार करोड़ के साथ शामिल

    हुरुन रिच लिस्ट में बॉलीवुड का जलवा शाहरुख 10 हजार करोड़ पर सलमान 3 हजार करोड़ के साथ शामिल


    नई दिल्ली। हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 जारी हो चुकी है और इस बार भी बॉलीवुड के सबसे अमीर सितारों को लेकर तस्वीर काफी दिलचस्प है। इस सूची में शाहरुख खान लगातार दूसरे साल सबसे अमीर भारतीय एक्टर बने हुए हैं। उनकी अनुमानित नेट वर्थ 10 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले शाहरुख खान की संपत्ति में 2490 करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। साल 2025 में उनकी अनुमानित संपत्ति 12490 करोड़ रुपये थी जो अब घटकर 10 हजार करोड़ रुपये रह गई है।

    शाहरुख खान की संपत्ति के आकलन में उनके फिल्म और कारोबारी हितों को भी शामिल किया गया है। इसमें रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और नाइट राइडर्स स्पोर्ट्स जैसे बिजनेस शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि संपत्ति में कमी आने के बावजूद शाहरुख खान सबसे अमीर भारतीय एक्टर की सूची में अपनी पहली जगह बरकरार रखने में सफल रहे हैं। इसी साल की शुरुआत में जारी हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट में भी उनकी संपत्ति का अनुमान करीब 10800 करोड़ रुपये लगाया गया था।

    इस सूची में महानायक अमिताभ बच्चन 4 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित नेट वर्थ के साथ दूसरे स्थान पर हैं। अमिताभ बच्चन की संपत्ति पिछले साल के मुकाबले काफी बढ़ी है। 2025 में उनकी अनुमानित संपत्ति करीब 1630 करोड़ रुपये बताई गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक अमिताभ बच्चन खुद कोई बड़ा कारोबार सक्रिय रूप से संचालित नहीं करते हैं लेकिन उनके फैमिली ऑफिस के कई कंपनियों और रियल एस्टेट में निवेश हैं। यही निवेश उनकी कुल संपत्ति के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    इस बार हुरुन इंडिया रिच लिस्ट में सलमान खान की एंट्री भी खास चर्चा में है। सलमान खान करीब 3 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित नेट वर्थ के साथ बॉलीवुड के अमीर एक्टर्स की सूची में तीसरे स्थान पर हैं। यह उनकी इस लिस्ट में नई एंट्री है। फिल्मों के अलावा विज्ञापन ब्रांड और अन्य कारोबारी गतिविधियां भी सलमान खान की कमाई के प्रमुख माध्यम रहे हैं।

    ऋतिक रोशन 2500 करोड़ रुपये की अनुमानित संपत्ति के साथ चौथे स्थान पर हैं। उनकी संपत्ति पिछले साल के 2160 करोड़ रुपये के अनुमान से बढ़ी है। ऋतिक रोशन के कारोबार और उनके ब्रांड HRX को भी उनकी संपत्ति में योगदान देने वाले प्रमुख हितों में शामिल किया गया है।

    हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 में बॉलीवुड के कुछ पुराने नाम इस बार नजर नहीं आए। जुही चावला और करण जौहर पिछले साल की सूची में शामिल थे लेकिन इस बार उनकी एंट्री नहीं हुई है। 2025 में जुही चावला की अनुमानित नेट वर्थ 7790 करोड़ रुपये और करण जौहर की करीब 1880 करोड़ रुपये बताई गई थी।

    वहीं रामायण से जुड़े प्रोडक्शन काम के लिए चर्चा में रहे नमित मल्होत्रा के पिता नरेश मल्होत्रा भी इस साल की सूची में शामिल हैं। उनकी अनुमानित नेट वर्थ 16 हजार करोड़ रुपये बताई गई है। कुल मिलाकर हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2026 ने एक बार फिर दिखाया है कि बॉलीवुड सितारों की संपत्ति का दायरा सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है बल्कि प्रोडक्शन कारोबार ब्रांड निवेश और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों का भी इसमें बड़ा योगदान है। इस बार भारत की रिच लिस्ट में कुल 391 डॉलर बिलियनपति शामिल हुए हैं जो एक नया रिकॉर्ड बताया गया है।

  • गोंधल की ऑस्कर एंट्री पर अनुराग कश्यप की टिप्पणी के बाद डायरेक्टर संतोष डावखर ने दिया जवाब

    गोंधल की ऑस्कर एंट्री पर अनुराग कश्यप की टिप्पणी के बाद डायरेक्टर संतोष डावखर ने दिया जवाब

    नई दिल्ली ।गोंधल फिल्म के भारत की ओर से ऑस्कर 2027 के लिए आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद फिल्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिल्मकार अनुराग कश्यप ने गोंधल के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि भारत कई बड़े अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में इसलिए पीछे रह जाता है क्योंकि कई बार फिल्मों के चयन में सही विकल्प नहीं चुने जाते। अब गोंधल के निर्देशक संतोष डावखर ने इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि किसी भी फिल्म पर फैसला सुनाने से पहले उसे देखना जरूरी है।

    संतोष डावखर के मुताबिक उन्होंने गोंधल के बारे में अनुराग कश्यप से पहले भी बातचीत की थी। उन्होंने बताया कि एक फ्लाइट के दौरान उन्होंने अनुराग को अपनी फिल्म के बारे में जानकारी दी थी। उस समय अनुराग ने फिल्म देखने की बात कही थी। हालांकि, संतोष का दावा है कि इसके बाद फिल्म उन्हें दिखाई नहीं गई और मुंबई में भी फिल्म उपलब्ध नहीं है।

    फिल्म के चयन और उस पर हो रही चर्चाओं के बीच संतोष ने लोगों से अपील की कि वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले गोंधल को जरूर देखें। उनका कहना है कि फिल्म को लेकर राय बनाने से पहले उसे समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि एक फिल्मकार के तौर पर वह इस जिम्मेदारी को समझते हैं कि उनकी फिल्म अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही है।

    संतोष डावखर ने कहा कि गोंधल एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है, जिसमें मराठी संस्कृति के साथ वैश्विक दर्शकों को ध्यान में रखकर कहानी और प्रस्तुति तैयार की गई है। उनके अनुसार फिल्म को बड़े पर्दे के लिए बनाया गया है और इसका उद्देश्य केवल ओटीटी दर्शकों तक सीमित रहना नहीं है।

    उन्होंने दर्शकों से फिल्म को थिएटर में देखने की अपील करते हुए कहा कि दोबारा रिलीज होने पर लोग इसे बड़े पर्दे पर देखें और इसके बाद अपना फैसला सुनाएं। संतोष ने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना एक बड़ी जिम्मेदारी है और वह अपने देश को निराश नहीं करना चाहते।

    वहीं, अनुराग कश्यप ने अपनी पिछली टिप्पणी में कहा था कि भारत कई बड़े पुरस्कारों में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाता, क्योंकि कई बार फिल्मों का चयन सही तरीके से नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कुछ ऐसी भारतीय फिल्मों का भी उल्लेख किया था, जिन्हें उनके मुताबिक सही चयन के बावजूद अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में सफलता नहीं मिली।

    अनुराग ने यह भी कहा था कि किसी फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजने से पहले उसे विदेशों के प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में ले जाना और अमेरिकी वितरण की संभावनाओं को देखना महत्वपूर्ण होना चाहिए। उनके अनुसार गोंधल को पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी चाहिए थी।

    गोंधल साल 2025 में रिलीज हुई मराठी भाषा की ड्रामा थ्रिलर फिल्म है। इसका लेखन और निर्देशन संतोष डावखर ने किया है। फिल्म को 99वें अकादमी पुरस्कार यानी ऑस्कर 2027 में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में चुना गया है। अब फिल्म को लेकर उठी बहस के बीच निर्देशक ने दर्शकों से अपील की है कि वे पहले फिल्म देखें और उसके बाद ही उसके चयन या कहानी को लेकर अपनी राय बनाएं।

  • खाद्य तेल होगा सस्ता…! केन्द्र ने घटाया मूल सीमा शुल्क…. नई दरें आज से लागू

    खाद्य तेल होगा सस्ता…! केन्द्र ने घटाया मूल सीमा शुल्क…. नई दरें आज से लागू


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने खाद्य तेलों (Edible Oil) पर मूल सीमा शुल्क घटाया है। कच्चे सोयाबीन (Raw Soybeans) और पाम तेल पर शुल्क 10 से 5 फीसदी, जबकि रिफाइंड पर 32.5 से 27.5 फीसदी हुआ। कच्चे सूरजमुखी तेल पर शुल्क 10 फीसदी से शून्य, और रिफाइंड पर 32.5 से 22.5 फीसदी किया गया। ये बदलाव आज यानी 24 सितंबर से प्रभावी हो गए हैं।

    केंद्र सरकार की अधिसूचना के मुताबिक सोयाबीन, पाम और सूरजमुखी तेल सहित विभिन्न खाद्य तेलों पर मूल सीमा शुल्क (BCD) में कटौती की गई है। सरकार का लक्ष्य खाद्य तेलों की कीमतों को कम करके उपभोक्ताओं को राहत देना है। इससे समग्र मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।

    अधिसूचना के अनुसार, कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल पर BCD 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है। रिफाइंड सोयाबीन तेल और रिफाइंड पाम तेल पर शुल्क 32.5 फीसदी से घटाकर 27.5 फीसदी किया गया है। कच्चे सूरजमुखी तेल पर BCD 10 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया गया है। वहीं, रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर शुल्क 32.5 फीसदी से घटाकर 22.5 फीसदी किया गया है।


    क्या है सरकार का उद्देश्य?

    उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने बताया कि आयात शुल्क में कमी से खाद्य तेलों की लैंडेड लागत और खुदरा कीमतें घटेंगी। इससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और कुल मुद्रास्फीति कम होगी। यह कदम घरेलू रिफाइनिंग को भी बढ़ावा देगा। साथ ही, किसानों के लिए उचित मुआवजा बनाए रखने में मदद करेगा। 2025 में भी केंद्र ने कच्चे खाद्य तेलों, जैसे सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम तेल पर BCD 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी किया था। उस समय कच्चे और रिफाइंड खाद्य तेलों के बीच आयात शुल्क अंतर 8.75 फीसदी से 19.25 फीसदी था।


    क्या महंगाई पर पड़ेगा असर?

    वित्त मंत्रालय की अगस्त 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खाद्य मुद्रास्फीति में बदलाव आया है। प्रोटीन युक्त वस्तुएं, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ और खाद्य तेल मूल्य दबाव के प्रमुख कारण बने हैं। जुलाई 2026 में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) आधारित मुद्रास्फीति 5.52 फीसदी तक बढ़ गई थी, जो जून के 5.32 फीसदी से अधिक थी। वैश्विक वनस्पति तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए लगातार मुद्रास्फीति दबाव का स्रोत हैं। देश कच्चे पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात पर निर्भर है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि वैश्विक वनस्पति तेल आपूर्ति में कमी का एक कारण पाम, सोयाबीन और रेपसीड तेलों का बायोफ्यूल उत्पादन की ओर मोड़ना है। एल नीनो की स्थिति फसल उपज और खाद्य कीमतों के लिए जोखिम बढ़ाती है।

  • पहाड़ों की खूबसूरती और झील का सुकून एक ही जगह दिल्ली के पास मौजूद है ये शानदार डेस्टिनेशन

    पहाड़ों की खूबसूरती और झील का सुकून एक ही जगह दिल्ली के पास मौजूद है ये शानदार डेस्टिनेशन


    नई दिल्ली। दिल्ली एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए वीकेंड पर घूमने के लिए ऐसी जगह तलाशना अक्सर मुश्किल होता है जहां शहर की भीड़भाड़ से दूर प्रकृति का सुकून भी मिले और सफर बहुत लंबा भी न हो। अगर आप भी कुछ घंटों की दूरी पर किसी शांत और खूबसूरत जगह जाने का प्लान बना रहे हैं तो गुरुग्राम के पास मौजूद दमदमा झील आपके लिए एक अच्छा विकल्प हो सकती है। यहां आपको एक ही जगह पर अरावली की पहाड़ियां झील और हरियाली से घिरा प्राकृतिक वातावरण देखने को मिलता है।

    दमदमा झील अरावली पर्वतमाला की तलहटी में स्थित है और यही इसकी सबसे खास खूबसूरती है। एक तरफ ऊंची नीची अरावली की पहाड़ियां दिखाई देती हैं तो दूसरी तरफ झील का शांत पानी पूरे वातावरण को आकर्षक बना देता है। आसपास मौजूद हरियाली और प्राकृतिक इलाका इस जगह को दिल्ली की भागदौड़ से अलग एक सुकून भरा अनुभव देता है। यही वजह है कि यह जगह उन लोगों को खास तौर पर पसंद आ सकती है जो कुछ समय शहर की भीड़ से दूर प्रकृति के बीच बिताना चाहते हैं।

    दमदमा झील का माहौल खासतौर पर उन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है जिन्हें प्रकृति और आउटडोर गतिविधियां पसंद हैं। यहां पहुंचने के बाद पहाड़ियों और झील का एक साथ दिखाई देने वाला नजारा सफर की थकान कम कर सकता है। शांत वातावरण में बैठकर आसपास के प्राकृतिक दृश्य देखना अपने आप में एक अलग अनुभव देता है। फोटो खींचने के शौकीनों के लिए भी यहां का लैंडस्केप काफी आकर्षक हो सकता है क्योंकि झील के पानी के साथ पीछे दिखाई देती अरावली की पहाड़ियां तस्वीरों को खूबसूरत बैकग्राउंड देती हैं।

    दिल्ली एनसीआर से इस जगह की कनेक्टिविटी भी इसे वीकेंड ट्रिप के लिए सुविधाजनक बनाती है। बहुत लंबी छुट्टी लिए बिना भी यहां घूमने का प्लान बनाया जा सकता है। परिवार के साथ समय बिताने वाले लोगों से लेकर दोस्तों के साथ छोटा ट्रिप प्लान करने वालों तक के लिए यह जगह अलग तरह का अनुभव दे सकती है। खासकर उन लोगों के लिए जो हर बार मॉल और बाजार जाने के बजाय खुले वातावरण में कुछ घंटे बिताना चाहते हैं उनके लिए दमदमा झील एक अलग विकल्प बन सकती है।

    यहां जाने से पहले मौसम और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी लेना बेहतर रहेगा। आरामदायक कपड़े और जरूरी सामान साथ रखने से यात्रा ज्यादा सुविधाजनक हो सकती है। प्रकृति के बीच समय बिताते हुए साफ सफाई का ध्यान रखना भी जरूरी है ताकि इस तरह के प्राकृतिक स्थलों की खूबसूरती बनी रहे।

    कुल मिलाकर दमदमा झील दिल्ली एनसीआर के आसपास मौजूद उन जगहों में शामिल है जहां कम समय में प्रकृति के करीब पहुंचने का मौका मिल सकता है। अरावली की पहाड़ियों के बीच शांत झील और आसपास की हरियाली का मेल इसे वीकेंड पर कुछ अलग देखने वालों के लिए आकर्षक बना सकता है। अगर आप दिल्ली के आसपास किसी ऐसे ठिकाने की तलाश में हैं जहां पहाड़ झील और जंगल जैसा प्राकृतिक माहौल एक साथ महसूस हो तो दमदमा झील को अपनी ट्रैवल लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।

  • MP में फिर OBC आरक्षण की गूंज… राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर की ये मांग

    MP में फिर OBC आरक्षण की गूंज… राहुल गांधी ने CM मोहन यादव को पत्र लिखकर की ये मांग


    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में एक बार फिर ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) का मुद्दा गर्मा गया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) को चिट्ठी लिखकर राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और इसके तहत रुकी हुई नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की है।

    22 सितंबर को लिखी चिट्ठी राहुल गांधी ने कहा कि शनिवार को इंदौर में हुए ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के कई छात्रों ने शिक्षा, रोजगार और अपने भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दे उनके सामने रखे थे. इनमें OBC आरक्षण से जुड़ी नियुक्तियों के रुके होने का मुद्दा प्रमुख था।

    राहुल गांधी ने चिट्ठी में कहा कि छात्रों ने बताया कि नियुक्तियों में लंबे समय से हो रही देरी के कारण वे अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं. इन युवाओं ने परीक्षाएं पास कर ली हैं और चयन प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है, लेकिन ’87:13′ फॉर्मूले के कारण OBC आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत पदों को होल्ड पर रखा गया है. इसके चलते चयनित अभ्यर्थी 2022 से अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का सर्वसम्मति से समर्थन किया था, इसके बावजूद यह मामला अब तक नहीं सुलझ पाया है. उन्होंने कहा कि नियुक्तियों में हो रही देरी के कारण अभ्यर्थियों को OBC आरक्षण लागू कराने और नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग को लेकर बार-बार सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।

    राहुल गांधी ने अपना पत्र सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी साझा किया. उन्होंने लिखा कि इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान OBC वर्ग के छात्रों ने बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के तहत 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां वर्षों से रुकी हुई हैं. राहुल ने कहा कि छात्र बेहद परेशान हैं और चार साल से अधिक समय से इंतजार कर रहे इन युवाओं का कीमती समय अब और बर्बाद नहीं होना चाहिए।

    उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से छात्रों की मांग सुनने की अपील करते हुए कहा कि सभी दलों की सर्वसम्मति से पारित 27 प्रतिशत OBC आरक्षण को लागू किया जाए और सभी चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्तियां दी जाएं।

  • MP: उज्जैन पहुंचे संत बम-बम भोला, खड़े हनुमान जी के दर्शन किए, प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग की

    MP: उज्जैन पहुंचे संत बम-बम भोला, खड़े हनुमान जी के दर्शन किए, प्रतिमा को नहीं हटाने की मांग की


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) स्थित खड़े हनुमान मंदिर (Khade Hanuman Temple) इन दिनों आस्था और चर्चा का केंद्र बना हुआ है। प्रतिमा को लेकर चल रही प्रक्रिया के बीच मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही लगातार बढ़ रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में साधु-संतों की मौजूदगी भी लगातार देखी जा रही है। इसी क्रम में संत ‘बम-बम भोला’ (Saint ‘Bam-Bam Bhola’) खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर में हनुमान चालीसा का पाठ किया और भगवान हनुमान के दर्शन किए।


    बोले- धर्म की तुलना विज्ञान से न करें
    दर्शन के बाद मीडिया से बातचीत में संत ‘बम-बम भोला’ ने कहा कि धर्म और विज्ञान की तुलना नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में AI और ड्रोन जैसी तकनीकें आ चुकी हैं, लेकिन उनके अनुसार धर्म और सनातन परंपरा को विकास की बहस से अलग समझना चाहिए। उन्होंने खड़े हनुमान की प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग की और कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े स्थानों को लेकर संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए।


    मंदिर के आसपास कथित अतिक्रमण का मुद्दा उठाया

    संत ने मंदिर के सामने मस्जिद की ओर से कथित अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए इसे हटाने की मांग भी उठाई। उन्होंने मुस्लिम समाज से भाईचारे का परिचय देते हुए इस कथित अतिक्रमण को हटाने की अपील की। यह आरोप संत के बयान के रूप में सामने आया है। ऐसे दावे की प्रशासनिक पुष्टि या अतिक्रमण की कानूनी स्थिति को स्वतंत्र रूप से स्थापित करने वाली जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।


    मंदिर में बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

    खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रही चर्चा के बीच यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। रिपोर्टों के मुताबिक देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग मंदिर पहुंच रहे हैं और हनुमान चालीसा, सुंदरकांड तथा धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं।

    खड़े हनुमान की प्रतिमा को सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया से जोड़कर विवाद सामने आया था। प्रशासन ने बाद में कहा कि प्रतिमा को लेकर विशेषज्ञों की जांच और संत समाज व स्थानीय प्रतिनिधियों से सहमति के बाद ही आगे फैसला लिया जाएगा। फिलहाल खड़े हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़, संतों की मौजूदगी और प्रतिमा को लेकर जारी चर्चा ने इसे उज्जैन के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में ला दिया है।

  • गणपति बप्पा की विदाई का समय आ गया 25 सितंबर को होगा विसर्जन नोट कर लें शुभ मुहूर्त और जरूरी नियम

    गणपति बप्पा की विदाई का समय आ गया 25 सितंबर को होगा विसर्जन नोट कर लें शुभ मुहूर्त और जरूरी नियम


    नई दिल्ली। गणेश उत्सव के बाद अब गणपति बप्पा की विदाई का समय आ गया है। इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर 2026 को मनाया गया था और इसके साथ ही घरों तथा पंडालों में गणपति प्रतिमाओं की स्थापना हुई थी। अब अनंत चतुर्दशी के अवसर पर भगवान गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा। गणेश विसर्जन की तारीख को लेकर कई लोगों के मन में 24 और 25 सितंबर को लेकर असमंजस है। ऐसे में जानना जरूरी है कि बप्पा की विदाई किस दिन की जाएगी और इसके लिए कौन से शुभ मुहूर्त बताए गए हैं।

    द्रिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 25 सितंबर की रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा। तिथि के आधार पर इस साल गणेश विसर्जन 25 सितंबर 2026 शुक्रवार को किया जाएगा। इस दिन भक्त विधि विधान से गणपति की पूजा करने के बाद उन्हें श्रद्धापूर्वक विदाई देंगे।

    गणेश विसर्जन के लिए दिनभर में कई शुभ चौघड़िया मुहूर्त बताए गए हैं। सुबह का चर लाभ अमृत मुहूर्त 6 बजकर 11 मिनट से 10 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। दोपहर में शुभ मुहूर्त 12 बजकर 13 मिनट से 1 बजकर 43 मिनट तक बताया गया है। इसके बाद शाम का चर मुहूर्त 4 बजकर 44 मिनट से 6 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। रात में लाभ का मुहूर्त 9 बजकर 14 मिनट से 10 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा रात 12 बजकर 13 मिनट से 26 सितंबर की सुबह 4 बजकर 42 मिनट तक शुभ अमृत चर मुहूर्त रहेगा।

    विसर्जन के दिन सबसे पहले घर में स्थापित गणपति की विधिवत पूजा करनी चाहिए। श्रद्धालु भगवान गणेश को नारियल शमी पत्र धूप और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं। पूजा के बाद गणपति की आरती की जाती है और परिवार की सुख शांति स्वास्थ्य तथा मंगल की कामना की जाती है। इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाया जाता है।

    धार्मिक परंपराओं में विसर्जन के दौरान श्रद्धा और शुद्धता का विशेष ध्यान रखने की बात कही गई है। कई स्थानों पर भक्त नंगे पैर गणपति को विसर्जन के लिए ले जाने की परंपरा का पालन करते हैं। चमड़े से बनी वस्तुओं से भी परहेज किया जाता है। वहीं पर्यावरण की दृष्टि से मिट्टी और प्राकृतिक सामग्री से बनी प्रतिमाओं का इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है। ऐसी प्रतिमाओं का विसर्जन भी निर्धारित स्थानों पर ही किया जाना चाहिए।

    25 सितंबर को गणेश विसर्जन के साथ अनंत चतुर्दशी का पर्व भी मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धालु व्रत रखते हैं और अनंत सूत्र बांधते हैं। अलग-अलग परिवारों में व्रत और पूजा की परंपराएं अलग हो सकती हैं इसलिए इन्हें अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार करना उचित माना जाता है।

    इस तरह 25 सितंबर को गणपति बप्पा की विदाई के साथ गणेश उत्सव का समापन होगा। भक्त इस अवसर पर प्रार्थना करेंगे कि गणपति के साथ उनके जीवन के दुख संकट और बाधाएं भी दूर हों और परिवार में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहे।

  • इमरान खान की रिहाई की मांग…. 27 सितंबर को PTI का बड़ा आंदोलन… 20 हजार कंटेनरों से इस्लामाबाद सील

    इमरान खान की रिहाई की मांग…. 27 सितंबर को PTI का बड़ा आंदोलन… 20 हजार कंटेनरों से इस्लामाबाद सील


    इस्लामाबाद।
    पड़ोसी देश पाकिस्तान (Pakistan) की राजधानी इस्लामाबाद (Islamabad) में एक अजीब सा खौफ साया है। आलम ये है कि राजधानी को कम से कम 20,000 शिपिंग कंटेनरों (Shipping Containers) से घेर दिया गया है। इतना ही नहीं, इन कंटेनरों को वेल्डिंग करके आपस में जोड़ा गया है और उन पर बाहर की तरफ नुकीले धातु (Sharp metal) के कांटे लगाए गए हैं। पाक मीडिया की खबरों के मुताबिक, शहबाज शरीफ सरकार (Shehbaz Sharif Government) और उनका प्रशासन घबराया हुआ है। अस्पतालों में जगह बनाई जा रही है और अतिरिक्त ब्लड बैग तैयार रखे जा रहे हैं।

    दरअसल, जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) की रिहाई की मांग को लेकर उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए इंसाफ (PTI) के कार्यकर्ता और समर्थक 27 सितंबर को राजधानी में विरोध-प्रदर्शन और मार्च करने वाले हैं। इस मार्च को जमात-ए-इस्लामी और किसान संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। लिहाजा, प्रशासन ने PTI के इस प्रस्तावित मार्च और विरोध प्रदर्शन से पहले राजधानी इस्लामाबाद में प्रवेश करने वाली प्रमुख सड़कों को बंद करना शुरू कर दिया है।


    अस्पतालों को क्या-क्या निर्देश?

    पाक मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद के अस्पतालों को संभावित मानवीय संकट और बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की घटना से निपटने के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। अस्पतालों में गैर-जरूरी सर्जरी टाली जा रही हैं और स्थिर हालत वाले मरीजों को छुट्टी दी जा रही है ताकि घायलों के आने पर जगह मिल सके। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ के अनुसार, इस्लामाबाद के अस्पतालों से कहा गया है कि वे कम से कम 100 बैग ब्लड रिजर्व रखें और सभी एम्बुलेंस और उनके ड्राइवरों को चालू हालत में और आपात स्थिति के लिए तैयार रखें।


    दो प्रांतों से बुलाए गए 20,000 पुलिसकर्मी

    राजधानी में सुरक्षा घेरा मजबूत करने के लिए 27 सितंबर के मार्च से पहले पंजाब और सिंध प्रांत से 20,000 से ज़्यादा पुलिसकर्मियों को इस्लामाबाद बुलाया जा रहा है। बीबीसी उर्दू की बुधवार की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब सरकार ने रावलपिंडी, अटक, झेलम और मियांवाली में संघीय अर्धसैनिक बल ‘पाकिस्तान रेंजर्स’ को बुलाया है। यह लामबंदी ऐसे समय में हो रही है जब जमात-ए-इस्लामी ने ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किया है और PTI के मार्च का समर्थन किया है। किसानों ने भी इमरान खान के समर्थकों के साथ मिलकर राजधानी की ओर मार्च करने की योजना की घोषणा की है। कम से कम दो ऐसे संगठन – ‘किसान इत्तेहाद पाकिस्तान’ और PTI का किसान विंग – विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे हैं।


    ऐसा लग रहा कि किसी हमले की तैयारी हो रही है

    अल जज़ीरा के पाकिस्तान संवाददाता कमाल हैदर के अनुसार, कई पाकिस्तानियों का मानना ​​है कि शहबाज शरीफ सरकार इससे घबरा गई है क्योंकि उसे पक्का नहीं पता कि इस्लामाबाद में इकट्ठा होने वाले विरोध प्रदर्शन कितने बड़े हो सकते हैं। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ ने 22 सितंबर के एक संपादकीय में कहा, “जिस रफ़्तार से कंटेनर लगाए जा रहे हैं, खाइयां खोदी जा रही हैं और अतिरिक्त सुरक्षा बल बुलाए जा रहे हैं, उसे देखकर लगता है कि सरकार किसी राजनीतिक कार्यक्रम की नहीं, बल्कि किसी हमले की तैयारी कर रही है।”


    PTI का मार्च

    बता दें कि PTI का 27 सितंबर का मार्च इमरान खान की जेल से रिहाई की मांग के लिए बुलाया गया है। खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और अभी अल-कादिर ट्रस्ट जमीन भ्रष्टाचार मामले में 14 साल की सजा काट रहे हैं। यह उन 100 से ज्यादा मामलों में से एक है जो 2022 में सत्ता से हटाए जाने के बाद उन पर दर्ज किए गए थे। खान की रिहाई के अलावा, PTI ने पाकिस्तान में संवैधानिक अधिकारों और कानून के शासन को लेकर चिंता जताई है। वहां आसिम मुनीर ने बेमिसाल ताकतें हासिल कर ली हैं, जिसमें तीनों सशस्त्र बलों की कमान और जीवन भर के लिए कानूनी छूट शामिल है, जिससे वे असल में पाकिस्तान के शासक बन गए हैं।

    इस बीच, इस्लामाबाद पुलिस ने बुधवार को बताया कि इस्लामाबाद-पेशावर मोटरवे, इस्लामाबाद-डेरा इस्माइल खान मोटरवे और ग्रैंड ट्रंक रोड को बुधवार शाम से कई स्थानों पर बंद किया जाएगा। पुलिस ने लोगों से यात्रा की योजना उसी के अनुरूप बनाने का आग्रह किया है। पाकिस्तान के स्थानीय मीडिया के अनुसार, सड़क बंदी अनिश्चितकालीन है और इसका उद्देश्य खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थकों को 27 सितंबर को राजधानी में मार्च करने से रोकना है। खान की सेहत, विशेषकर उनकी दायीं आंख की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। उनकी आंख के उपचार के लिए कई महीनों से विशेषज्ञ चिकित्सा की आवश्यकता बताई गई है। पीटीआई ने उनकी रिहाई के लिए अभियान तेज किया है।


    दूर-दूर से आएंगे खान के समर्थक

    प्रस्तावित मार्च में लोगों के पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची से करीब 1,150 किलोमीटर और लाहौर से करीब 270 किलोमीटर की दूरी तय कर इस्लामाबाद पहुंचने की योजना है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, अधिकारियों ने राजधानी और उत्तर-पश्चिमी प्रांत खैबर पख्तूनख्वा से आने वाले प्रमुख मार्ग अटक पुल पर करीब 2,000 मालवाहक कंटेनर तैनात किए हैं। खैबर पख्तूनख्वा और पंजाब के बीच एक अन्य महत्वपूर्ण मार्ग हारून पुल पर भी कंटेनर और रेत की बोरियां रखी गई हैं। अटक जिले में करीब 30,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।

  • मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का मुद्दा फिर गरमाया…. पहले ही नोटिस दे चुके हैं सांसद

    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का मुद्दा फिर गरमाया…. पहले ही नोटिस दे चुके हैं सांसद


    नई दिल्ली।
    कई राज्यों में चल रहे मतदाता सूची (Voter List) के SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण (Special In-depth Review) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) पर एकतरफा फैसला लेने के आरोपों के बाद राज्यसभा में उनके खिलाफ लंबित महाभियोग का मुद्दा फिर गरमा गया है। विपक्षी दलों ने फिर से इस मुद्दे को उठाया है। विपक्ष के 73 सदस्यों ने गत 24 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ महाभियोग का नोटिस सौंपा था।

    कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष की कई अन्य पार्टियों की तरफ से दिए गए महाभियोग के नोटिस में सीईसी के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। इनमें सबसे गंभीर पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण के आरोप शामिल हैं। साथ ही बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाना, चुनाव आचार संहिता के क्रियान्वयन में अनियमिता, दस्तावेजी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करना सहित नौ आरोप लगाए गए हैं।


    नोटिस लंबित, पर खारिज नहीं

    एसआईआर को लेकर दो चुनाव आयुक्त सुखबीर संधू (Sukhbir Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi) के पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की खबरों के बाद विपक्ष ने फिर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग के नोटिस को लेकर सरकार को घेरा है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राज्यसभा के सभापति के पास 24 अप्रैल से यह नोटिस लंबित है, इसे खारिज नहीं किया गया है।

    माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने एक पोस्ट कर कहा कि संसद को ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों ने इस संबंध में नोटिस दिया था। उसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नौ आरोप लगाए गए थे।


    SIR पर बड़ा विवाद

    SIR पर दो चुनाव आयुक्तों की असहमति के मीडिया दावे के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्षी दलों ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनका इस्तीफा मांगा। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से संज्ञान लेने और एसआईआर तुरंत रोकने की मांग की है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भाजपा, आरएसएस, निर्वाचन आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने इसे किया है, उन्होंने देशद्रोह का कृत्य किया है।

    सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर मामला करार देते हुए कहा कि चुनाव आयोग जैसे संवैधानिक संस्थान के भीतर ही अधिकारियों की तरफ से आपत्ति दर्ज की जा रही है। ऐसे में सवाल लाजमी है कि आयोग किसके हित में काम कर रहा है। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त अकेले चुनाव आयोग को चला रहे हैं। उन्होंने एसआईआर को तत्काल रद्द किए जाने की मांग की।


    चुनाव आयोग ने तोड़ी चुप्पी

    चुनाव आयोग ने दो चुनाव आयुक्तों की असहमतियों से जुड़े विवाद पर स्पष्ट किया कि आयोग के अंदर सभी फैसले सर्वसम्मति से हो रहे हैं। आयोग ने कहा कि वैचारिक मतभेद का मतलब टकराव नहीं समझा जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि न केवल तीनों आयुक्त बल्कि आयोग का हर अधिकारी व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुझाव देने को अधिकृत है। आयोग ने एक बयान में कहा कि दस महीनों के दौरान की कुछ खास आंतरिक टिप्पणियों, अवलोकनों को उजागर करना, जबकि बड़ी संख्या में मंजूरियों, फैसलों, निर्देशों और पहलों को नजरअंदाज करना, तस्वीर का केवल एक हिस्सा दिखाता है।

    आयोग के मुताबिक ईसीआई नेट जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म सख्त डाटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का काम निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों जैसे अधिकारी निर्धारित अधिकारों के अनुसार करते हैं।


    सीईसी-ईसी नियुक्ति का मुद्दा संविधान पीठ सुनेगी

    सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को संविधान पीठ को भेज दिया। दो जजों की पीठ का बंटा फैसला आने पर यह कदम उठाया गया।