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  • यूपी चुनाव से पहले 'जयंती राजनीति' तेज, भाजपा-सपा महापुरुषों के जरिए साध रहीं जातीय समीकरण

    यूपी चुनाव से पहले 'जयंती राजनीति' तेज, भाजपा-सपा महापुरुषों के जरिए साध रहीं जातीय समीकरण

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने जातीय और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) अपने-अपने परंपरागत वोट बैंक को साधने के लिए संतों, समाज सुधारकों और महापुरुषों की जयंती व पुण्यतिथि पर बड़े पैमाने पर कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं। इसके लिए दोनों दलों ने प्रदेशभर में लंबे अभियान और आयोजनों की रूपरेखा तैयार की है।

    भाजपा ने संत रविदास महाराज की जयंती को केंद्र में रखकर करीब सात महीने तक चलने वाला ‘समरसता संकल्प अभियान’ शुरू करने का फैसला किया है। वहीं, पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रणनीति पर आगे बढ़ रही सपा बुधवार को पूरे प्रदेश में महाराजा दक्ष प्रजापति की जयंती पर जिला और महानगर स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है।

    महापुरुषों के जरिए सामाजिक संदेश देने की तैयारी
    हाल के महीनों में डॉ. भीमराव आंबेडकर और लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर भी सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने व्यापक स्तर पर आयोजन किए थे। अब भाजपा ने संत रविदास महाराज के जीवन और विचारों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) से 20 फरवरी 2027 (संत रविदास जयंती) तक विशेष अभियान चलाने की घोषणा की है।

    इस अभियान के दौरान धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से समता, सामाजिक न्याय, सेवा और मानवता के संदेश का प्रचार किया जाएगा।

    सपा भी जयंती आयोजनों पर दे रही जोर
    समाजवादी पार्टी भी विभिन्न समाजों के महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित कर अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी क्रम में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर महाराजा दक्ष प्रजापति जयंती मनाई जा रही है। इसके बाद 5 अगस्त को पार्टी संस्थापक नेताओं में शामिल जनेश्वर मिश्र की जयंती पर भी परंपरागत कार्यक्रम होंगे।

    भाजपा करेगी पुजारियों का सम्मान
    गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भाजपा महानगर इकाई शहर के सभी दस मंडलों में कार्यक्रम आयोजित करेगी। महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला के अनुसार, इस दौरान शहर के 100 मंदिरों के पुजारियों का सम्मान किया जाएगा। इसके लिए पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    पांच महीनों में सपा के कई आयोजन
    मार्च से जुलाई के बीच सपा ने विभिन्न महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर करीब 11 कार्यक्रम आयोजित किए। इनमें कांशीराम, सम्राट अशोक, महर्षि कश्यप, महाराजा निषादराज गुहा, महात्मा ज्योतिराव फुले, डॉ. भीमराव आंबेडकर, अहिल्याबाई होल्कर, महारानी दुर्गावती, छत्रपति साहूजी महाराज, बाबा लक्खी शाह बंजारा और फूलन देवी से जुड़े आयोजन शामिल रहे।

    भाजपा के प्रमुख आयोजन
    भाजपा ने भी इस वर्ष नेताजी सुभाष चंद्र बोस, डॉ. भीमराव आंबेडकर, अहिल्याबाई होल्कर और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सहित कई महापुरुषों की जयंती और स्मृति कार्यक्रमों का आयोजन किया। आंबेडकर जयंती के अवसर पर दीपोत्सव, प्रतिमा स्वच्छता अभियान और सम्मान कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

    कार्यकर्ताओं से जुड़ाव पर भी जोर
    चुनावी तैयारियों के बीच जनप्रतिनिधि और पार्टी पदाधिकारी संगठन के कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ाव बढ़ाने की भी कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं के जन्मदिन और वैवाहिक वर्षगांठ की शुभकामनाओं के साथ-साथ उनके कार्यक्रमों में व्यक्तिगत उपस्थिति दर्ज कराकर संगठनात्मक संबंध मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

  • भोपाल में तीसरे दिन गरमाया किसान आंदोलन: पुलिस से टकराव, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

    भोपाल में तीसरे दिन गरमाया किसान आंदोलन: पुलिस से टकराव, बैरिकेडिंग पर चढ़े प्रदर्शनकारी, सरकार और विपक्ष आमने-सामने


    भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में किसानों का आंदोलन लगातार तीसरे दिन भी तेज बना रहा। मूंग की सरकारी खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था में सुधार, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और अन्य मांगों को लेकर बड़ी संख्या में किसान मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने के लिए जुटे। हालांकि पुलिस ने एम्प्री के पास वीर सावरकर सेतु पर भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें रोक दिया। प्रशासन ने बसों की चार परतों वाली बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों का रास्ता बंद कर दिया, लेकिन कुछ किसान बैरिकेड पर चढ़ गए और बाद में बसों पर भी चढ़कर विरोध जताया। पुलिस ने समझाइश देकर उन्हें नीचे उतारा जिसके बाद किसान वहीं धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

    प्रदर्शन के दौरान कई किसानों ने अर्धनग्न होकर विरोध दर्ज कराया और अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाया। कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर लेट गए तो कई किसानों ने सरकार की सद्बुद्धि के लिए हवन और यज्ञ किया। आंदोलन स्थल पर किसानों ने सड़क किनारे ही दाल-बाटी बनाकर भोजन किया। रातभर आंदोलन में डटे रहने के बाद कई किसान वहीं खुले आसमान के नीचे आराम करते भी नजर आए। आंदोलन में युवाओं की भागीदारी भी देखने को मिली और बड़ी संख्या में Gen Z युवाओं ने किसानों के समर्थन में प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

    किसानों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और महंगाई के बावजूद उन्हें उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि मूंग खरीदी की मौजूदा व्यवस्था और ई-टोकन प्रणाली के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह जाते हैं। प्रदर्शनकारी सरकार से इन समस्याओं का स्थायी समाधान और एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग कर रहे हैं।

    आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग कर यातायात रोक दिया। इसका असर होशंगाबाद रोड, नर्मदापुरम रोड और आसपास के इलाकों में देखने को मिला जहां लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने नर्मदापुरम रोड स्थित सभी सरकारी और निजी स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने बताया कि किसानों से संवाद के लिए मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है जो आंदोलनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों पर चर्चा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सकारात्मक सुझावों का स्वागत करती है लेकिन यह भी जरूरी है कि आंदोलन के कारण आम जनता को अनावश्यक परेशानी न हो।

    वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हजारों किसान अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें रोकने में लगी हुई है। उन्होंने किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।

    राजधानी में जारी यह आंदोलन अब केवल किसानों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि प्रदेश की राजनीति का भी प्रमुख मुद्दा बन गया है। अब सभी की नजर सरकार और किसान नेताओं के बीच होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी है, जिससे इस गतिरोध का समाधान निकलने की उम्मीद की जा रही है।

  • पलक तिवारी पर राजा चौधरी का बड़ा बयान, बोले- मैं सिर्फ बायोलॉजिकल पिता, उनकी निजी जिंदगी से मुझे कोई फर्क नहीं

    पलक तिवारी पर राजा चौधरी का बड़ा बयान, बोले- मैं सिर्फ बायोलॉजिकल पिता, उनकी निजी जिंदगी से मुझे कोई फर्क नहीं

    नई दिल्ली। अभिनेता राजा चौधरी ने अपनी बेटी पलक तिवारी को लेकर लंबे समय बाद खुलकर बात की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि श्वेता तिवारी से अलग होने के बाद उनका पलक की निजी जिंदगी से कोई सीधा संबंध नहीं रहा। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद को केवल पलक का जैविक पिता मानते हैं और जब तक उनकी बेटी खुद उनसे संपर्क नहीं करती, तब तक वह उसकी जिंदगी में हस्तक्षेप करना उचित नहीं समझते। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है।

    एक इंटरव्यू के दौरान जब राजा चौधरी से पूछा गया कि क्या उन्हें पलक तिवारी की फिल्मी सफलता और बड़े सितारों के साथ काम करने पर गर्व महसूस होता है, तो उन्होंने कहा कि वह इस बारे में कोई स्पष्ट राय नहीं दे सकते। उनका कहना था कि उन्हें यह तक नहीं पता कि पलक इस समय कहां हैं, क्या कर रही हैं, किन परियोजनाओं पर काम कर रही हैं या उनकी निजी जिंदगी में क्या चल रहा है। उन्होंने कहा कि यदि पलक स्वयं आकर अपने जीवन की बातें साझा करेंगी, तभी वह उस पर प्रतिक्रिया देना उचित समझेंगे।

    राजा चौधरी ने यह भी दोहराया कि यदि कभी पलक को उनकी जरूरत होगी तो वह हर समय उसके साथ खड़े रहेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि फिलहाल उनकी बेटी की जिंदगी में उनकी कोई भूमिका नहीं है। उनके अनुसार, किसी भी रिश्ते को दोनों तरफ से निभाया जाता है और जब तक सामने वाला व्यक्ति जुड़ना नहीं चाहता, तब तक जबरदस्ती संबंध नहीं बनाए जा सकते।

    इंटरव्यू के दौरान पलक तिवारी और अभिनेता इब्राहिम अली खान के बीच डेटिंग की चर्चाओं पर भी उनसे सवाल किया गया। इस पर राजा चौधरी ने कहा कि उन्हें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि पलक किसके साथ हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी अपनी बेटी पर अधिकार जताने का अवसर ही नहीं मिला, इसलिए वह उसकी निजी पसंद या रिश्तों पर टिप्पणी करना उचित नहीं समझते। उनके अनुसार, यह पूरी तरह पलक का व्यक्तिगत फैसला है और वह उसमें दखल नहीं देना चाहते।

    राजा चौधरी ने बातचीत में यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को परिवार में महत्व नहीं दिया जाता, तो वह उस स्थिति को बदलने के लिए कुछ नहीं कर सकता। उन्होंने अपने पिता का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके पिता उनसे इसलिए बातें साझा करते हैं क्योंकि दोनों के बीच संवाद बना हुआ है। लेकिन पलक के साथ ऐसा रिश्ता नहीं बन पाया, इसलिए वह उनकी निजी जिंदगी को लेकर कोई अपेक्षा भी नहीं रखते।

    उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उन्हें हमेशा यही महसूस कराया गया कि वह केवल पलक के जैविक पिता हैं और उनकी जिंदगी में उनकी कोई भूमिका नहीं है। ऐसे में लोगों को उनसे यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि वह उनकी निजी जिंदगी या रिश्तों को लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया दें। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में पलक को कभी उनकी जरूरत पड़ेगी तो वह बिना किसी शर्त के उनके साथ खड़े रहेंगे।

    राजा चौधरी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब पलक तिवारी लगातार अपने फिल्मी करियर को आगे बढ़ा रही हैं और उनकी निजी जिंदगी को लेकर भी चर्चा होती रहती है। दूसरी ओर, श्वेता तिवारी और राजा चौधरी के रिश्ते तथा उनके अलगाव की कहानी पहले भी कई बार सुर्खियों में रही है। अब राजा के इस स्पष्ट और बेबाक बयान ने एक बार फिर उनके परिवार से जुड़े रिश्तों को चर्चा का विषय बना दिया है।

  • PoK में चुनावी विवाद बना खूनी संघर्ष: प्रदर्शनकारियों पर चली गोलियां, रक्षा मंत्री के बयान से और गरमाया मामला

    PoK में चुनावी विवाद बना खूनी संघर्ष: प्रदर्शनकारियों पर चली गोलियां, रक्षा मंत्री के बयान से और गरमाया मामला


    नई दिल्ली । पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में चुनावी व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विरोध अब गंभीर राजनीतिक और सुरक्षा संकट में बदल गया है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि प्रदर्शन कर रहे लोगों को वह भारत की तरह पाकिस्तान का दुश्मन मानते हैं और ऐसे लोगों से किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं की जाएगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प में 30 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 50 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।

    पीओके में यह प्रदर्शन विधानसभा की 12 शरणार्थी सीटों को समाप्त करने की मांग को लेकर किया जा रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के बैनर तले हजारों लोग रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च निकाल रहे थे। संगठन का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान बिना किसी उकसावे के गोलीबारी कर दी जिससे बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए। दूसरी ओर पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारी आधुनिक हथियारों से लैस थे और उन्होंने पहले सुरक्षाबलों पर हमला किया जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई।

    हिंसा के बाद पूरे पीओके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त सेना पैरामिलिट्री बल और आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी की तैनाती की गई है। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी है और इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

    दरअसल पीओके विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं जिनमें 45 सीटों पर सीधे चुनाव होते हैं जबकि 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो 1947 और उसके बाद जम्मू कश्मीर से पाकिस्तान चले गए थे। इन सीटों के मतदाता पीओके में नहीं बल्कि पाकिस्तान के विभिन्न प्रांतों में रहते हैं। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए इस्लामाबाद की राजनीतिक पार्टियां पीओके की सरकार के गठन में हस्तक्षेप करती हैं और कई बार इन्हीं सीटों के कारण विधानसभा का बहुमत बदल जाता है।

    जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी की मांग है कि पीओके की विधानसभा चुनने का अधिकार केवल वहां रहने वाले लोगों के पास होना चाहिए और शरणार्थी सीटों की मौजूदा व्यवस्था समाप्त की जाए। विपक्षी दलों का भी आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ सहित कई दल पहले भी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठा चुके हैं।

    रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान ने पहले से तनावपूर्ण माहौल को और अधिक गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच संवाद स्थापित नहीं हुआ तो हालात और बिगड़ सकते हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

  • मिडिल ईस्ट में युद्ध का नया मोर्चा: अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, ईरान समर्थक ठिकानों पर हमला, तनाव चरम पर

    मिडिल ईस्ट में युद्ध का नया मोर्चा: अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, ईरान समर्थक ठिकानों पर हमला, तनाव चरम पर


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक नए और अधिक संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और सऊदी अरब ने संयुक्त सैन्य अभियान चलाते हुए इराक में ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स यानी पीएमएफ के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 20 लड़ाकों की मौत हुई है जबकि 32 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा युद्ध के व्यापक रूप लेने की आशंका गहरा गई है।

    अमेरिकी सेना का दावा है कि जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया वहां से अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों की तैयारी की जा रही थी। सुरक्षा एजेंसियों को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर यह संयुक्त कार्रवाई की गई। हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान की ओर से जवाबी कदम उठाया गया और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। हालांकि अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया।

    इस घटनाक्रम के बीच व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की महत्वपूर्ण बैठक भी चर्चा का केंद्र रही। बैठक के बाद नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देशों के बीच इस बात पर स्पष्ट सहमति बनी है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि यह बैठक मिडिल ईस्ट की भविष्य की रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद अहम रही।

    इसी दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी ट्रंप से मुलाकात कर एयर डिफेंस सिस्टम रक्षा सहयोग और रूस यूक्रेन युद्ध पर विस्तार से चर्चा की। दूसरी ओर ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर नया प्रस्ताव रखा है जिसमें इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का संचालन क्षेत्र के सभी देशों की साझेदारी से करने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव को खाड़ी क्षेत्र के कई देशों का समर्थन मिलने की खबर है।

    बढ़ते तनाव के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की खबरों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

    उधर यमन के हूती विद्रोहियों की चेतावनी के बाद रेड सी में जहाजों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन गई है। रिपोर्टों के अनुसार चीन ने अपने तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हूती प्रतिनिधियों से सीधे संपर्क किया है ताकि समुद्री व्यापार प्रभावित न हो।

    संयुक्त राष्ट्र में भी इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई गई है। पाकिस्तान ने कहा कि सऊदी अरब को इस संघर्ष में घसीटने की कोशिश हो रही है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। वहीं गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने सऊदी अरब पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए उसकी सुरक्षा और संप्रभुता के समर्थन का भरोसा दोहराया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संघर्ष केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डाल सकता है।

  • बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट

    बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट


    नई दिल्ली । देशभर में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश आम जनजीवन पर भारी पड़ रही है। उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को एहतियातन दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। वहीं चंपावत बागेश्वर और टिहरी जिलों में खराब मौसम के चलते कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    राजस्थान में भी तेज बारिश ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। धौलपुर सहित कई शहरों के बाजारों और निचले इलाकों में पानी भर गया जिससे यातायात प्रभावित हुआ और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित रहीं। चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद प्रसिद्ध मेनाल जलप्रपात पूरे वेग से बहने लगा जबकि रणथंभौर क्षेत्र में कई स्थानों पर जलस्तर बढ़ने से रास्तों पर पानी बहता दिखाई दिया।

    छत्तीसगढ़ में बारिश के साथ आकाशीय बिजली ने कहर बरपाया। राज्य के अलग अलग हिस्सों में बिजली गिरने की तीन घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि ग्यारह लोग घायल हो गए। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

    गुजरात में भी लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति का असर औद्योगिक गतिविधियों पर देखने को मिला। साणंद स्थित टाटा मोटर्स प्लांट और उसके आसपास स्थित कई सप्लायर इकाइयों का संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। वहीं महिसागर जिले का प्रसिद्ध सात कुंड जलप्रपात भी बारिश के बाद पूरे उफान पर पहुंच गया।

    उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित कई शहरों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई जिससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिहार के कई जिलों में भी लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और निचले इलाकों में पानी भरने लगा है।

    भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस समय देश के ऊपर दो मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा झारखंड और छत्तीसगढ़ से आगे बढ़ते हुए मध्य एवं उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर रहा है। इसी कारण मध्य भारत उत्तर पश्चिम भारत और पूर्वी राज्यों में अगले चार से पांच दिनों तक सामान्य से अधिक तथा कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।

    दिल्ली में भी मंगलवार को 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। राजधानी के कई इलाकों में जलभराव हुआ मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया तथा कई पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग ने लोगों से नदी नालों के पास जाने से बचने सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने की अपील की है क्योंकि आने वाले दिनों में मानसून का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।

  • E20 पेट्रोल को लेकर AAP का विरोध तेज, केजरीवाल बोले- सरकार नीति नहीं बदलेगी तो होगा राष्ट्रीय आंदोलन

    E20 पेट्रोल को लेकर AAP का विरोध तेज, केजरीवाल बोले- सरकार नीति नहीं बदलेगी तो होगा राष्ट्रीय आंदोलन

    नई दिल्ली । पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी ई20 ईंधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने की मांग करते हुए कहा है कि यदि फैसला वापस नहीं लिया गया तो देशभर में आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने वाहनों में ई20 पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर लोगों की चिंताओं का अब तक स्पष्ट समाधान नहीं किया गया है।

    एक प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने दावा किया कि उन्होंने देश की 29 ऑटोमोबाइल कंपनियों से यह पूछा था कि क्या वर्ष 2023 से पहले निर्मित वाहनों में ई20 पेट्रोल का उपयोग पूरी तरह सुरक्षित है। उनका कहना था कि इस संबंध में किसी भी कंपनी ने उन्हें लिखित जवाब नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनियां इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट रुख अपनाने से बच रही हैं।

    उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों के मन में कई व्यावहारिक सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना जरूरी है। यदि ई20 पेट्रोल के उपयोग से किसी वाहन में तकनीकी खराबी आती है या माइलेज प्रभावित होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, इस पर सरकार और वाहन निर्माता कंपनियों को स्पष्ट स्थिति बतानी चाहिए। उनके अनुसार लाखों उपभोक्ताओं को अपने वाहनों के लिए उपयुक्त ईंधन की जानकारी पाने का अधिकार है।

    केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि कई ऑटोमोबाइल कंपनियों के अधिकारियों से उनकी फोन पर बातचीत हुई, जिसमें ई20 ईंधन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर चर्चा हुई। हालांकि उन्होंने किसी कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया। उनका आरोप था कि कंपनियां इस विषय पर खुलकर अपनी राय रखने से बच रही हैं।

    आम आदमी पार्टी प्रमुख ने ई20 नीति को लेकर व्यापक सार्वजनिक चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों की राय जानने और विशेषज्ञों के विचार सामने लाने के लिए एक टाउनहॉल कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्यक्रम के आयोजन में प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।

    प्रेस वार्ता के दौरान केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे अपील करते हुए कहा कि सरकार को जनता की चिंताओं को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों को अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखने का अधिकार है और किसी भी नीति पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ई20 नीति पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को लेकर देशव्यापी जनआंदोलन शुरू करेगी।

    ई20 नीति का उद्देश्य पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना और वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना है। हालांकि इसके प्रभाव को लेकर विभिन्न पक्षों की ओर से अलग-अलग राय सामने आती रही है। इसी बीच केजरीवाल के बयान के बाद इस विषय पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

    अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार, ऑटोमोबाइल कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ई20 नीति को लेकर उठाए गए सवालों और आंदोलन की चेतावनी का आगे क्या असर पड़ता है।

  • पेपर लीक कानून को मिली मंजूरी, राहुल गांधी के आरोपों और विवादित शब्दों पर लोकसभा में जोरदार हंगामा

    पेपर लीक कानून को मिली मंजूरी, राहुल गांधी के आरोपों और विवादित शब्दों पर लोकसभा में जोरदार हंगामा


    नई दिल्ली । लोकसभा ने बुधवार को सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों पर रोक लगाने से जुड़े पब्लिक एग्जामिनेशन अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन विधेयक 2026 को विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित कर दिया। हालांकि सदन में सबसे ज्यादा चर्चा बिल से अधिक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण और उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ शब्दों को लेकर रही। करीब पचास मिनट के भाषण के दौरान कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने सामने आ गए जिससे सदन का माहौल बेहद गर्म हो गया।

    राहुल गांधी ने परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को युवाओं के भविष्य के साथ बड़ा अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र मेहनत के बावजूद परीक्षा प्रक्रिया की खामियों का खामियाजा भुगत रहे हैं। उनके अनुसार यह केवल परीक्षा व्यवस्था की नहीं बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में सरकार असफल रही है और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    भाषण के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से हुई बातचीत का हवाला देते हुए कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिन पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत खड़े हो गए और कहा कि नेता प्रतिपक्ष को संसदीय मर्यादा का पालन करना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से अपने शब्द वापस लेने और सदन से माफी मांगने की मांग की। इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी कई बार हस्तक्षेप करते हुए असंसदीय शब्दों के प्रयोग पर आपत्ति जताई और उन्हें कार्यवाही से हटाने के निर्देश दिए।

    राहुल गांधी ने अपने संबोधन में यह भी आरोप लगाया कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान गृह मंत्री की ओर से पुलिस कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इस दावे का सरकार ने कड़ा विरोध किया। किरेन रिजिजू ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि गोली चलाने जैसे आदेश किसी मंत्री द्वारा नहीं बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत सक्षम अधिकारी देते हैं। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर आरोप बिना किसी प्रमाण के लगाना उचित नहीं है और नेता प्रतिपक्ष को सदन से माफी मांगनी चाहिए।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अध्यक्ष से अनुरोध किया कि विवादित शब्दों को कार्यवाही से हटाया जाए। हंगामे के बीच कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने नारेबाजी की जिससे सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई। बाद में कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

    राहुल गांधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि देश का भविष्य सड़कों पर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है और प्रदर्शन कर रहे छात्र किसी राजनीतिक एजेंडे से नहीं बल्कि अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को केवल औपचारिक कदम बताते हुए कहा कि इससे समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की जरूरत है।

    उधर सरकार ने संशोधन विधेयक को परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम बताया। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता और मजबूत होगा। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल कानून बनाने से समस्या खत्म नहीं होगी बल्कि उसे प्रभावी तरीके से लागू करना भी उतना ही जरूरी है।

  • केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने के बाद भी ओडिशा भाजपा में मजबूत पकड़, धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत से मिले राजनीतिक संकेत

    केंद्रीय मंत्री पद छोड़ने के बाद भी ओडिशा भाजपा में मजबूत पकड़, धर्मेंद्र प्रधान के स्वागत से मिले राजनीतिक संकेत

    नई दिल्ली । केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार ओडिशा पहुंचे वरिष्ठ भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रधान का पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने जोरदार स्वागत किया। नीट पेपर लीक विवाद के बीच मंत्री पद से उनके इस्तीफे के बाद राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका और भविष्य को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि ओडिशा में उनके स्वागत और पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने संकेत दिया कि संगठन के भीतर उनकी राजनीतिक पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है।

    धर्मेंद्र प्रधान लंबे समय तक केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और ओडिशा भाजपा के प्रमुख रणनीतिकारों में उनकी पहचान रही है। उनके इस्तीफे के बाद भाजपा के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन व्यक्त किया था। संसद में भी एनडीए के कई सांसदों ने उनका स्वागत कर उनके प्रति सम्मान और समर्थन का संदेश दिया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम संगठन में उनके प्रभाव को दर्शाता है।

    राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि मंत्री पद से हटने के बाद उनकी प्रशासनिक भूमिका भले बदल गई हो, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर उनका अनुभव और नेटवर्क भाजपा के लिए अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। पार्टी के भीतर लंबे समय से सक्रिय रहने के कारण उनकी पकड़ संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत मानी जाती है।

    धर्मेंद्र प्रधान का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। उनकी सक्रियता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और संघ परिवार से जुड़ी रही है। उनके पिता देवेंद्र प्रधान भी राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहे और केंद्रीय मंत्री का दायित्व निभा चुके थे। वर्ष 2014 के बाद केंद्र में भाजपा सरकार बनने के साथ धर्मेंद्र प्रधान राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख नेताओं में शामिल हुए और विभिन्न मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

    ओडिशा में भाजपा के विस्तार में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। पिछले एक दशक में उन्होंने संगठन को मजबूत करने और राज्य में पार्टी का जनाधार बढ़ाने के लिए लगातार काम किया। वर्ष 2017 के स्थानीय निकाय चुनावों तथा 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रदर्शन को मजबूत करने में उनकी रणनीतिक भूमिका की चर्चा होती रही है। राज्य में लंबे समय तक सत्तारूढ़ रहे राजनीतिक दल के मुकाबले भाजपा को मजबूत विकल्प बनाने के प्रयासों में भी उनका योगदान माना जाता है।

    हालांकि हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहे हैं कि ओडिशा भाजपा में नेतृत्व की भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ेगी। राज्य में मौजूदा सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर भी राजनीतिक विश्लेषक नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकाय चुनाव पार्टी के लिए महत्वपूर्ण होंगे और इन चुनावों में संगठनात्मक रणनीति के लिहाज से धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका पर भी ध्यान रहेगा।

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि किसी नेता का प्रभाव केवल सरकारी पद से नहीं, बल्कि संगठन में उसकी स्वीकार्यता, कार्यकर्ताओं से जुड़ाव और नेतृत्व क्षमता से भी तय होता है। ओडिशा दौरे के दौरान मिले स्वागत ने यह संकेत दिया है कि धर्मेंद्र प्रधान अभी भी राज्य की भाजपा राजनीति के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम यह तय करेंगे कि भविष्य में उनकी संगठनात्मक और राजनीतिक भूमिका किस रूप में आगे बढ़ती है।

  • शादी से मना करना पड़ा भारी: दतिया से इंदौर पहुंचा प्रेमी, बैंककर्मी युवती की हत्या कर आग लगाकर हादसा दिखाने की साजिश

    शादी से मना करना पड़ा भारी: दतिया से इंदौर पहुंचा प्रेमी, बैंककर्मी युवती की हत्या कर आग लगाकर हादसा दिखाने की साजिश


    इंदौर । इंदौर में बैंककर्मी युवती की हत्या के मामले में पुलिस ने ऐसा खुलासा किया है जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया है। पांच साल पुराने प्रेम संबंध का अंत बेहद दर्दनाक तरीके से हुआ जब शादी से इनकार करने पर प्रेमी ने अपनी ही प्रेमिका की गला घोंटकर हत्या कर दी और बाद में सबूत मिटाने के लिए शव पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। पुलिस ने आरोपी को दतिया से गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।

    मामला इंदौर के खजराना थाना क्षेत्र के तपेश्वरी बाग का है जहां 26 वर्षीय पलक केशव किराए के कमरे में रहती थीं और एक निजी बैंक में कार्यरत थीं। शनिवार रात उनके कमरे से जला हुआ शव बरामद होने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। शुरुआती जांच में घटना को हादसा मानने की आशंका जताई जा रही थी लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरे मामले की दिशा बदल दी। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि युवती की मौत आग से नहीं बल्कि दम घुटने के कारण हुई थी जिसके बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच तेज कर दी।

    जांच के दौरान पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली और मोबाइल कॉल डिटेल्स का विश्लेषण किया। इससे पता चला कि घटना से एक दिन पहले दतिया निवासी मयंक शाक्य पलक से मिलने उसके कमरे पर आया था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को दतिया से हिरासत में लिया और पूछताछ में उसने हत्या की बात स्वीकार कर ली।

    पुलिस के अनुसार मयंक और पलक पिछले करीब पांच वर्षों से एक-दूसरे के संपर्क में थे। दोनों के बीच प्रेम संबंध था और मयंक शादी करना चाहता था लेकिन पलक इसके लिए तैयार नहीं थीं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। घटना वाले दिन भी दोनों के बीच इसी मुद्दे पर कहासुनी हुई जो देखते ही देखते हिंसक रूप ले गई। गुस्से में आरोपी ने पलक का गला घोंट दिया जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

    हत्या के बाद आरोपी ने अपराध को छिपाने की पूरी कोशिश की। उसने कमरे में पेट्रोल छिड़ककर शव को आग लगा दी ताकि मामला दुर्घटना या आग लगने की घटना जैसा दिखाई दे। इतना ही नहीं उसने किचन का गैस बर्नर भी खुला छोड़ दिया जिससे पुलिस को भ्रमित किया जा सके। हालांकि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने उसकी पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।

    जब दो दिन तक कमरे का दरवाजा नहीं खुला और आसपास के लोगों को संदेह हुआ तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर अंदर देखा। कमरे के भीतर जला हुआ शव मिलने के बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए और जांच के बाद हत्या की पुष्टि हुई।

    फिलहाल आरोपी को इंदौर लाकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए यह भी पता लगाने में जुटी है कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी या विवाद के दौरान अचानक वारदात को अंजाम दिया गया। इस घटना ने एक बार फिर रिश्तों में बढ़ती हिंसा और अस्वीकार किए जाने की मानसिकता से उपजने वाले गंभीर अपराधों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।