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  • विसर्जन जुलूस में DJ बना विवाद की वजह दतिया में पहले चाचा-भतीजे को पीटा फिर पैरों में मारी गोली

    विसर्जन जुलूस में DJ बना विवाद की वजह दतिया में पहले चाचा-भतीजे को पीटा फिर पैरों में मारी गोली


    दतिया । दतिया के इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के मैथाना पाली गांव में गणेश विसर्जन के दौरान दो पक्षों के बीच विवाद के बाद फायरिंग की घटना सामने आई है। बुधवार शाम गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए जा रहे लोगों और गांव के दो लोगों के बीच DJ बजाने को लेकर कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच लाठी डंडों से मारपीट शुरू हो गई। इसके बाद फायरिंग होने की बात सामने आई जिसमें चाचा और भतीजे के पैर में गोली लगी।

    घटना में घायल चाचा भतीजे की पहचान अजय यादव उम्र 28 वर्ष और उनके चाचा वकील यादव उम्र 43 वर्ष के रूप में हुई है। दोनों को पहले इंदरगढ़ अस्पताल ले जाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें दतिया जिला अस्पताल रेफर किया गया। हालत और बेहतर इलाज की जरूरत को देखते हुए दोनों को ग्वालियर रेफर कर दिया गया। फिलहाल दोनों का इलाज जारी है।

    परिजनों के मुताबिक अजय यादव और वकील यादव गांव से नदी की ओर भैंस चराने गए थे। इसी दौरान चौकपुरा गांव के लोग गणेश प्रतिमा लेकर विसर्जन के लिए नदी की ओर जा रहे थे। जुलूस में DJ बजाया जा रहा था। बताया गया है कि भैंस लेकर वापस घर की ओर लौट रहे चाचा भतीजे ने DJ बजाने से मना किया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई।

    कहासुनी के बाद विवाद ने तेजी से गंभीर रूप ले लिया। घायल पक्ष के परिजनों का आरोप है कि पहले चाचा भतीजे के साथ लाठी डंडों से मारपीट की गई और इसके बाद फायरिंग कर दी गई। परिजनों ने मानवेंद्र उर्फ छुट्टी रोहित गजराज यादव श्रीकांत यादव हाकिम यादव ऋषभ यादव और रघुराज यादव समेत अन्य लोगों पर फायरिंग करने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि इन्हीं लोगों की ओर से गोली चलाई गई।

    ग्रामीणों के अनुसार चौकपुरा के लोगों ने गांव के खेरा पति मंदिर के पास गणेश प्रतिमा स्थापित की थी। बुधवार को प्रतिमा को विसर्जन के लिए नदी की ओर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान मैथाना पाली गांव के पास विवाद हो गया। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

    इस विवाद में दूसरे पक्ष के लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। हाकिम सिंह उम्र 50 वर्ष गजराज सिंह यादव उम्र 52 वर्ष और पंजाब सिंह यादव के घायल होने की सूचना है। इसके अलावा तीन से चार अन्य लोगों के घायल होने की भी जानकारी है। सभी घायलों का इलाज इंदरगढ़ अस्पताल में कराया जा रहा है।

    घटना की सूचना मिलते ही इंदरगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी गौरव शर्मा के मुताबिक पुलिस ने घटनास्थल की जानकारी जुटाई है और दोनों पक्षों से जुड़े लोगों तथा घायलों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस फायरिंग की परिस्थितियों और विवाद की वास्तविक वजह का पता लगाने में जुटी है।

    फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद किस तरह बढ़ा और फायरिंग की घटना किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस घायलों के उपचार के साथ मामले से जुड़े लोगों की जानकारी भी जुटा रही है।

  • साफ पानी की योजना में सेंसरों का खेल, ब्रांडेड स्टीकर के नीचे निकला लोकल माल जांच में सामने आई चौंकाने वाली गड़बड़ी

    साफ पानी की योजना में सेंसरों का खेल, ब्रांडेड स्टीकर के नीचे निकला लोकल माल जांच में सामने आई चौंकाने वाली गड़बड़ी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में लोगों तक साफ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए चलाई जा रही अमृत 2.0 योजना के तहत बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कई जलप्रदाय प्रोजेक्ट्स में SCADA सिस्टम के लिए अप्रूव्ड ब्रांड के उपकरणों की जगह दूसरे और कथित तौर पर लोकल उपकरण लगाए गए। कुछ उपकरणों पर नामी कंपनियों के स्टीकर भी चिपके मिले। एक मामले में सेंसर से स्टीकर हटाने पर उसके नीचे दूसरी कंपनी का नाम दिखाई दिया।

    अमृत 2.0 के तहत प्रदेश में 622 जलप्रदाय प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं। इनमें 416 प्रोजेक्ट के टेंडर वर्ष 2025 में जारी हुए थे। किसी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की कुल लागत का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा SCADA सिस्टम पर खर्च किया जाता है। प्लांट की क्षमता के हिसाब से इसकी लागत लगभग 50 से 80 लाख रुपए तक हो सकती है। SCADA सिस्टम पानी की गुणवत्ता और सप्लाई से जुड़े कई मानकों की निगरानी करता है इसलिए इसमें इस्तेमाल होने वाले सेंसर और नियंत्रण उपकरणों की गुणवत्ता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक सात जिलों के दस वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की मौके पर जांच की गई। इनमें तीन जगह उपकरणों और उनकी ब्रांडिंग को लेकर गड़बड़ी सामने आई। एक प्लांट में Siemens के स्थान पर Holisys का PLC लगा मिला जबकि फ्लो मीटर वॉल्व पर अपेक्षित SBEM ब्रांड नहीं था। दूसरे प्लांट में भी Siemens की जगह Holisys का PLC और SBEM की जगह दूसरी कंपनी का प्रेशर ट्रांसमीटर मिला।

    सबसे ज्यादा सवाल उस प्लांट में उठे जहां प्रेशर ट्रांसमीटर पर SBEM का स्टीकर लगा था। रिपोर्टर ने जब स्टीकर हटाया तो उसके नीचे ATC कंपनी का नाम दिखाई दिया। इसी प्लांट में PLC और pH तथा क्लोरीन सेंसर भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलने का दावा किया गया है। इससे उपकरणों की वास्तविक कंपनी और उनकी स्वीकृति को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

    मामले को लेकर SBEM से भी संपर्क किया गया। शहडोल की वीरानी इंजीनियरिंग ने प्लांट में लगे सेंसरों की तस्वीर और जानकारी QAP में अप्रूव्ड कंपनी SBEM को भेजी थी। जवाब में कंपनी ने लिखित रूप से कहा कि उसने इस प्रोजेक्ट के लिए कोई उपकरण या तकनीक सप्लाई नहीं की है। इसके बाद प्लांट में SBEM के नाम से लगाए गए स्टीकर की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठने लगे।

    वहीं संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों ने कहा कि प्रोजेक्ट अभी पूरा नहीं हुआ है और PDMC की निगरानी में काम चल रहा है। उनका कहना है कि किसी अमानक उपकरण को अंतिम रूप से स्वीकार नहीं किया गया है। एक ठेकेदार ने बताया कि SCADA का काम Orbit Engineering Solutions को दिया गया था।

    Orbit Engineering Solutions के मालिक विजय कुमार तिवारी ने कहा कि अप्रूव्ड कंपनियों से उपकरणों की सप्लाई में देरी हो रही थी इसलिए समय पर काम पूरा करने के लिए दूसरी कंपनियों के उपकरण लगाए गए। उन्होंने इन उपकरणों की गुणवत्ता को अच्छा बताया। हालांकि अप्रूव्ड ब्रांड की जगह दूसरे उपकरण लगाने के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

    इस पूरे मामले ने अमृत 2.0 योजना के तहत बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में निगरानी और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में मानकों के विपरीत उपकरण लगाने की पुष्टि होती है तो यह न केवल सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ा मामला होगा बल्कि पानी की गुणवत्ता और लोगों की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।

  • व्हाइट हाउस मीडिया बैन पर कोर्ट में सुनवाई, जज बोले- संस्थानों को पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला

    व्हाइट हाउस मीडिया बैन पर कोर्ट में सुनवाई, जज बोले- संस्थानों को पक्ष रखने का पर्याप्त मौका नहीं मिला


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से CNN, MS NOW और Politico को व्हाइट हाउस से बैन किए जाने का मामला अब अदालत पहुंच गया है। सुनवाई के दौरान अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट जज टिमोथी केली ने प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि मीडिया संस्थानों को बैन से पहले अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।

    जज केली ने फिलहाल इस मामले में कोई तत्काल आदेश जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वह जल्द फैसला सुनाएंगे। तीनों मीडिया संस्थानों ने अदालत से मांग की है कि उनकी व्हाइट हाउस प्रेस एक्सेस अंतिम कानूनी निर्णय आने तक तुरंत बहाल की जाए।

    जज ने पुराने अदालती फैसलों का किया उल्लेख

    सुनवाई के दौरान जज टिमोथी केली ने अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स के दो पुराने फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इन फैसलों के मुताबिक व्हाइट हाउस की प्रेस एक्सेस वापस लेने से पहले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को उचित प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।

    केली ने यह भी कहा कि भले ही सरकार इन पुराने अदालती फैसलों को गलत मानती हो, लेकिन डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज के तौर पर उन्हें फिलहाल इन्हीं कानूनी मिसालों का पालन करना होगा।

    उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि यदि मीडिया बैन पहले ही लागू कर दिया गया था, तो उसके बाद भेजे गए पत्र किस तरह संबंधित संस्थानों को पहले से नोटिस देने और अपना जवाब रखने का अवसर प्रदान कर सकते हैं।

    ट्रंप प्रशासन ने सुरक्षा को बनाया आधार

    ट्रंप प्रशासन की ओर से अदालत में दलील दी गई कि व्हाइट हाउस में मीडिया की पहुंच कोई कानूनी अधिकार नहीं, बल्कि एक सुविधा है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रपति को सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों से मीडिया संस्थानों की पहुंच सीमित करने का अधिकार है।

    सरकारी वकील ने यह भी दावा किया कि तीनों मीडिया संस्थानों की कुछ रिपोर्टों से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े हुए थे। प्रशासन ने अपनी दलील के समर्थन में मिसाइल भंडार, व्हाइट हाउस में बन रहे बॉलरूम और रिपब्लिकन पार्टी के मिडटर्म कन्वेंशन से जुड़ी रिपोर्टों का हवाला दिया।

    मीडिया संस्थानों ने फर्स्ट अमेंडमेंट का दिया हवाला

    CNN, MS NOW और Politico ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। तीनों संस्थानों का कहना है कि व्हाइट हाउस का बैन अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट में दिए गए प्रेस और अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार के साथ-साथ उचित कानूनी प्रक्रिया के अधिकार का उल्लंघन करता है।

    मीडिया संस्थानों ने आरोप लगाया है कि ट्रंप प्रशासन ने उन रिपोर्टों के चलते कार्रवाई की, जो राष्ट्रपति को पसंद नहीं थीं।

    यह विवाद ट्रंप और अमेरिकी मीडिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे टकराव के बीच सामने आया है। बैन के बाद कई बड़े अमेरिकी टीवी नेटवर्क ने इसके विरोध में व्हाइट हाउस की साझा वीडियो कवरेज रोकने का कदम भी उठाया था।

    2018 के जिम एकोस्टा मामले की भी चर्चा

    मौजूदा विवाद की तुलना 2018 में CNN के पत्रकार जिम एकोस्टा से जुड़े मामले से भी की जा रही है। उस समय भी जज टिमोथी केली ने व्हाइट हाउस को एकोस्टा का प्रेस पास बहाल करने का आदेश दिया था। अदालत ने उस मामले में माना था कि प्रेस पास वापस लेने से पहले उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।

    अब एक बार फिर व्हाइट हाउस और मीडिया से जुड़े मामले की सुनवाई जज केली के सामने है। फिलहाल अदालत ने CNN, MS NOW और Politico पर लगाया गया बैन हटाने का आदेश नहीं दिया है। मामले में जज केली के अगले फैसले का इंतजार है।

  • MP में UPI पेमेंट को लेकर बढ़ी हलचल, 2 हजार से ऊपर के भुगतान पर कई दुकानदारों ने किया इनकार, जानिए वजह

    MP में UPI पेमेंट को लेकर बढ़ी हलचल, 2 हजार से ऊपर के भुगतान पर कई दुकानदारों ने किया इनकार, जानिए वजह


    भोपाल। मध्य प्रदेश में UPI भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR के विरोध में 23 सितंबर को व्यापारियों ने नो UPI डे मनाया। भोपाल इंदौर जबलपुर ग्वालियर समेत प्रदेश के कई शहरों में व्यापारियों ने 2 हजार रुपए से ज्यादा के UPI भुगतान लेने से इनकार कर विरोध जताया। कई बाजारों में UPI स्कैनर और साउंड बॉक्स पर काले कपड़े डालकर व्यापारी विरोध करते नजर आए। इस दौरान UPI बंद करो और UPI पर चार्ज बंद करो जैसे नारे भी लगाए गए। व्यापारी संगठनों के अनुमान के मुताबिक इस विरोध के दौरान प्रदेश में करीब 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित हुआ।

    भोपाल और इंदौर में इस अभियान का असर बाजारों में देखने को मिला। भोपाल व्यापारी संगठन से जुड़े अनुपम अग्रवाल के मुताबिक शहर में करीब 80 प्रतिशत कारोबार UPI के जरिए होता है। नो UPI डे पर करीब 25 प्रतिशत कारोबार प्रभावित होने का दावा किया गया। ग्वालियर में CAT के प्रदेश उपाध्यक्ष मनोज चौरसिया के अनुसार शहर में रोज करीब 100 करोड़ रुपए का कारोबार UPI से होता है और विरोध के दौरान इसमें करीब 20 प्रतिशत का असर पड़ा। इंदौर में भी करीब 50 करोड़ रुपए के कारोबार पर असर पड़ने की बात सामने आई।

    विरोध की वजह 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्तावित UPI चार्ज को बताया जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2 हजार रुपए से अधिक के पर्सन टू मर्चेंट यानी P2M UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR लगाए जाने की बात कही गई है। प्रति ट्रांजैक्शन इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपए रखे जाने का उल्लेख किया गया है। व्यापारियों का कहना है कि इससे UPI के जरिए भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ सकती है और कम मार्जिन वाले कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

    मध्य प्रदेश में UPI के इस्तेमाल का आकार भी काफी बड़ा है। अगस्त में प्रदेश में कुल 50.79 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए जिनका कुल मूल्य 63 हजार 628.33 करोड़ रुपए रहा। जुलाई में 49.6 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन के जरिए 66 हजार 107 करोड़ रुपए का कारोबार हुआ था। अगस्त के आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में हर दिन औसतन 1.64 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन हुए और इनका औसत दैनिक कारोबार करीब 2 हजार 52 करोड़ रुपए रहा।

    प्रस्तावित चार्ज को लेकर व्यापारियों की चिंता खासतौर पर 2 हजार रुपए से अधिक के भुगतान को लेकर है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक P2M भुगतान का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा 2 हजार रुपए से ज्यादा की राशि वाला है। इस आधार पर करीब 12 हजार 788 करोड़ रुपए का मासिक कारोबार संभावित MDR दायरे में आ सकता है। यानी रोजाना करीब 4.13 लाख ट्रांजैक्शन और करीब 412 करोड़ रुपए के कारोबार पर इसका प्रभाव पड़ने की संभावना बताई जा रही है।

    नो UPI डे के दौरान भोपाल के सराफा बाजार में भी इसका असर दिखाई दिया। एक ग्राहक सोने की अंगूठी खरीदने पहुंचा लेकिन भुगतान 2 हजार रुपए से ज्यादा होने के कारण दुकानदार ने ऑनलाइन पेमेंट स्वीकार नहीं किया। ग्राहक के पास पर्याप्त नकद नहीं था और उसे बिना खरीदारी किए लौटना पड़ा। हालांकि कई दुकानदारों ने 2 हजार रुपए से कम के ऑनलाइन भुगतान स्वीकार किए। मेडिकल दुकानों पर भी UPI भुगतान जारी रहा और कुछ दुकानदारों ने 2 हजार रुपए से अधिक के भुगतान भी स्वीकार किए।

    व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी और शादी का सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे समय में यदि डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ती है तो इसका असर व्यापारियों के खर्च पर पड़ सकता है। कुछ कारोबारी संगठनों का तर्क है कि व्यापारी अतिरिक्त लागत अपनी जेब से वहन करने के बजाय इसे कारोबार की लागत में शामिल कर सकते हैं जिसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ने की आशंका है।

    हालांकि प्रस्तावित MDR व्यापारी पर लगाए जाने की व्यवस्था बताई गई है और ग्राहक से सीधे UPI शुल्क लेने का प्रावधान नहीं है। सरकार और NPCI की ओर से भी कहा गया है कि MDR का भार सीधे ग्राहक पर डालने की अनुमति नहीं होगी। इसके बावजूद व्यापारी और ग्राहक दोनों इस व्यवस्था को लेकर अपने अपने सवाल उठा रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित चार्ज को लेकर आगे क्या फैसला होता है और व्यापारियों की मांगों पर किस तरह विचार किया जाता है।

  • 27% OBC आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का CM मोहन यादव को पत्र, 2022 से नियुक्ति के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए उठाई आवाज

    27% OBC आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का CM मोहन यादव को पत्र, 2022 से नियुक्ति के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए उठाई आवाज


    भोपाल। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण और इससे जुड़ी रुकी नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की है। 22 सितंबर को लिखे गए पत्र को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी सार्वजनिक किया। उन्होंने यह मुद्दा इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान सामने आने के बाद उठाया है।

    राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि इंदौर के कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के कई छात्रों ने शिक्षा रोजगार और भविष्य से जुड़े सवाल उनके सामने रखे थे। इनमें OBC आरक्षण के तहत रुकी नियुक्तियों का मामला भी प्रमुखता से सामने आया। राहुल गांधी के अनुसार छात्रों ने बताया कि उन्होंने परीक्षाएं पास करने के साथ चयन प्रक्रिया भी पूरी कर ली है लेकिन 87:13 व्यवस्था के तहत OBC आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां लंबित हैं। उनके मुताबिक इन पदों पर चयनित अभ्यर्थी वर्ष 2022 से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने पत्र में यह भी कहा कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया था लेकिन इसके बावजूद मामला अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर रास्ता निकालने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे युवाओं का समय और अधिक नहीं बीतना चाहिए।

    यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के प्रावधान और इसके खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इसके बाद इस बढ़ोतरी को अदालत में चुनौती दी गई। इसी कानूनी विवाद के बीच भर्ती प्रक्रिया में 87:13 व्यवस्था अपनाई गई जिसमें 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां की जाती रहीं जबकि विवादित 13 प्रतिशत पदों को लंबित रखा गया।

    इंदौर के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में भी इसी मुद्दे को लेकर अभ्यर्थियों ने राहुल गांधी के सामने अपनी बात रखी थी। छात्रों ने बताया था कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नियुक्तियां लंबित रहने से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी बातचीत के बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले के समाधान की मांग की।

    दूसरी ओर इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि OBC आरक्षण से जुड़े विवाद को तथ्यों के साथ समझना चाहिए और सरकार की ओर से 13 प्रतिशत पदों को मनमाने तरीके से रोकने की बात सही नहीं है। वहीं मंत्री विश्वास सारंग ने राहुल गांधी के पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि OBC आरक्षण का विवाद पिछली कांग्रेस सरकार के फैसले से जुड़ा है और मौजूदा सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    इस बीच OBC आरक्षण से जुड़ा मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। भर्ती और आरक्षण से जुड़े अलग अलग मामलों में अदालत की कार्यवाही के कारण 27 प्रतिशत आरक्षण के विवादित हिस्से पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार बना हुआ है। अदालत में 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर पक्ष और विपक्ष में दलीलें पेश की जा चुकी हैं।

    राहुल गांधी की चिट्ठी के बाद अब 27 प्रतिशत OBC आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। एक ओर चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति और आरक्षण से जुड़े मामले के समाधान की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर सरकार इस विवाद की जिम्मेदारी को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठा रही है। ऐसे में आगे की स्थिति न्यायिक प्रक्रिया और सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर रहेगी।

  • राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर

    राहुल गांधी के लेटर में बड़ी चूक, दो पैराग्राफ दोहराए गए, पुराना पत्र हटाकर क्यों जारी करना पड़ा नया लेटर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों कई ऐसे मामले चर्चा में हैं जिनमें नेताओं के बयान कार्यक्रमों की व्यवस्थाएं और प्रशासनिक घटनाक्रम सुर्खियां बटोर रहे हैं। इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखी चिट्ठी से लेकर जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा की दिशा को लेकर सामने आए अलग अलग बयानों और बड़वानी में दिव्यांगों के उपकरण वितरण कार्यक्रम के टलने तक तीन मामले चर्चा में हैं।

    इंदौर में 19 सितंबर को हुए छात्रों की गूंज कार्यक्रम में ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा उठा था। इसके बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों की नियुक्तियों का रास्ता साफ करने की मांग की। राहुल गांधी ने 22 सितंबर को पत्र लिखा था और 23 सितंबर को इसे सार्वजनिक किया। उन्होंने पत्र में छात्रों की ओर से उठाए गए शिक्षा रोजगार और भविष्य से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया।

    हालांकि पत्र सार्वजनिक होने के बाद इसका एक संशोधित संस्करण सामने आया। शुरुआती पोस्ट में पत्र के अंतिम हिस्से के दो पैराग्राफ दोहराए गए थे। इसके बाद पुरानी पोस्ट हटाकर संशोधित पत्र साझा किया गया। इस वजह से पत्र में हुई टाइपिंग या संपादन संबंधी गलती भी चर्चा में आ गई। दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि 13 प्रतिशत पदों का मामला न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। ऐसे में इस मुद्दे पर कांग्रेस और सरकार के बीच राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप भी देखने को मिल रहे हैं।

    दूसरा मामला जबलपुर में सेवा संकल्प यात्रा के स्वागत से जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सेवा संकल्प अभियान के तहत यात्राएं निकाली जा रही हैं। जबलपुर में यात्रा के स्वागत के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों और यात्रा के साथ चल रहे कलश पर लिखी जानकारी में अंतर की बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक मंत्री राकेश सिंह और भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने यात्रा के वडनगर से वाराणसी जाने की जानकारी दी जबकि यात्रा के साथ मौजूद कलश पर वाराणसी से वडनगर की दिशा लिखी होने का उल्लेख किया गया। इसी वजह से स्वागत कार्यक्रम के दौरान यात्रा की दिशा को लेकर चर्चा शुरू हुई।

    तीसरा मामला बड़वानी के पानसेमल का है जहां करीब 200 दिव्यांग और उनके परिजन सहायक उपकरण लेने पहुंचे थे। 21 सितंबर को आयोजित सामाजिक सशक्तीकरण शिविर में व्हीलचेयर ट्राइसाइकिल और दूसरे उपकरण वितरित किए जाने थे। शिविर की तैयारियां पूरी थीं और लाभार्थी भी पहुंच चुके थे लेकिन कार्यक्रम अचानक स्थगित हो गया। रिपोर्टों के अनुसार निर्धारित कार्यक्रम में विधायक की मौजूदगी नहीं हो पाने के कारण वितरण टल गया और लाभार्थियों को बिना उपकरण लिए लौटना पड़ा।

    बाद में दोबारा कार्यक्रम आयोजित कर उपकरण वितरित किए गए। इस घटनाक्रम के बाद कार्यक्रमों की तैयारी और लाभार्थियों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने को लेकर सवाल उठे। रिपोर्ट में विधायक की ओर से कार्यक्रम की जानकारी नहीं होने की बात भी सामने आई है जबकि कार्यक्रम के बैनर पर उनका नाम मुख्य अतिथि के रूप में दर्ज था।

    इन तीनों घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से जुड़े अलग अलग पहलुओं को सामने रखा है। एक तरफ ओबीसी आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। दूसरी तरफ सेवा संकल्प यात्रा के दौरान सामने आया दिशा संबंधी अंतर चर्चा में रहा। वहीं पानसेमल में दिव्यांग लाभार्थियों को कार्यक्रम टलने के कारण दोबारा इंतजार करना पड़ा। इन घटनाओं के जरिए प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों के साथ साथ सार्वजनिक कार्यक्रमों की योजना और क्रियान्वयन भी चर्चा में आ गया है।

  • बीच सड़क बेरिकेड्स, दोनों तरफ गड्ढे, रायसेन रोड पर कैसे निकलें वाहन, मेट्रो काम के बीच बढ़ी परेशानी

    बीच सड़क बेरिकेड्स, दोनों तरफ गड्ढे, रायसेन रोड पर कैसे निकलें वाहन, मेट्रो काम के बीच बढ़ी परेशानी


    भोपाल। भोपाल में बारिश और मेट्रो प्रोजेक्ट के चलते कई इलाकों की सड़कों की हालत खराब हो गई है। रायसेन रोड पर स्थिति ज्यादा परेशानी वाली नजर आ रही है। सुभाषनगर चौराहे से रत्नागिरी तक सड़क जगह जगह से उखड़ गई है। कई हिस्सों में गड्ढे और कीचड़ के कारण वाहन चालकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश रुकने के बाद इन्हीं सड़कों से धूल के गुबार उठ रहे हैं। इस बीच सड़क के बीचोंबीच मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बेरिकेडिंग की गई है जिससे वाहनों के निकलने की जगह और कम हो गई है।

    कॅरियर कॉलेज से रत्नागिरी के बीच कई स्थानों पर सड़क की हालत इतनी खराब है कि वाहन चालकों को संभलकर निकलना पड़ रहा है। रायसेन रोड पर बस और लोडिंग वाहन भी फंसने की स्थिति सामने आ रही है। इससे कई बार यातायात प्रभावित हो जाता है। कांग्रेस नेता अभिनव बारोलिया ने सड़क की बदहाल स्थिति और फंसे वाहनों का वीडियो जारी किया है। वीडियो के जरिए उन्होंने सड़क की स्थिति को लेकर जिम्मेदार विभागों पर सवाल उठाए हैं।

    कांग्रेस नेता के अनुसार रायसेन रोड पर हर दिन करीब 15 से 20 वाहन फंस जाते हैं। इनमें लोडिंग वाहनों के पहिए गड्ढों में फंसने के साथ बसों के कारण भी यातायात प्रभावित होने की बात कही गई है। इस मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति का असर आम वाहन चालकों के साथ आसपास के रहवासियों और सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ रहा है।

    रायसेन रोड पर मेट्रो की ब्लू लाइन का काम भी चल रहा है। भदभदा से रत्नागिरी तक प्रस्तावित ब्लू लाइन का रूट करीब 14.16 किलोमीटर लंबा बताया गया है। भदभदा से जवाहर चौक के बीच मेट्रो निर्माण कार्य के चलते सड़क के बीच में बेरिकेडिंग की गई है। निर्माण कार्य के लिए की गई खुदाई और लगातार बारिश के कारण सड़क के दोनों ओर की सतह कई जगह खराब हो गई है। संकरी सड़क और जर्जर हिस्सों के कारण वाहन चालकों की परेशानी और बढ़ गई है।

    भोपाल के दूसरे इलाकों में भी बारिश के बाद सड़कों की स्थिति को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं। करोंद एमपी नगर पॉलीटेक्निक चौराहा अवधपुरी रोहित नगर और अयोध्या बायपास सहित कई क्षेत्रों में सड़कें जगह जगह से उखड़ने की बात सामने आई है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी और कीचड़ भरने से वाहन चालकों को परेशानी होती है जबकि मौसम साफ होने पर धूल की समस्या बढ़ जाती है।

    कोहेफिजा क्षेत्र में भी सड़क की खराब हालत के कारण हादसे की स्थिति सामने आई है। सड़क से उखड़ी गिट्टी के कारण एक टू व्हीलर फिसल गई और एक बुजुर्ग गिरकर घायल हो गए। इस घटना ने सड़क की सतह और यातायात सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। शहर में चल रहे निर्माण कार्यों के बीच सड़क की मरम्मत और यातायात व्यवस्था बनाए रखना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    रायसेन रोड पर मेट्रो निर्माण और जर्जर सड़क के बीच लोगों को रोजाना आवागमन करना पड़ रहा है। अब जरूरत इस बात की है कि निर्माण क्षेत्र में सुरक्षित आवाजाही के लिए पर्याप्त जगह और सड़क की स्थिति को बेहतर करने के इंतजाम किए जाएं ताकि मेट्रो प्रोजेक्ट का काम भी चलता रहे और आम लोगों को आवागमन में कम से कम परेशानी हो।

  • भोपाल में गणेश विसर्जन के लिए प्रशासन तैयार 13 क्रेन 12 पोकलेन और 184 गोताखोर तैनात घाटों पर भक्तों की सुरक्षा का खास प्लान

    भोपाल में गणेश विसर्जन के लिए प्रशासन तैयार 13 क्रेन 12 पोकलेन और 184 गोताखोर तैनात घाटों पर भक्तों की सुरक्षा का खास प्लान


    भोपाल। भोपाल में गणेश उत्सव के बाद अब प्रथम पूज्य भगवान गणेश की विदाई का सिलसिला शुरू हो गया है। डोल ग्यारस से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन का क्रम शुरू हो चुका है जो अनंत चतुर्दशी तक जारी रहेगा। शहर के अलग अलग इलाकों से गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन जुलूस निकलेंगे और बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रमुख घाटों तक पहुंचेंगे। इसे देखते हुए जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं। खासतौर पर विसर्जन घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर इंतजाम किए गए हैं।

    भोपाल के प्रमुख सात विसर्जन घाटों पर 13 क्रेन और 12 पोकलेन मशीनें तैनात की गई हैं। इनके जरिए गणेश प्रतिमाओं को सुरक्षित तरीके से पानी में विसर्जित करने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही 184 गोताखोरों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाई जा सके। घाटों पर श्रद्धालुओं के पानी में उतरने पर रोक रहेगी। नगर निगम के कर्मचारी लोगों को सुरक्षित दूरी पर रखने के साथ विसर्जन प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।

    विसर्जन के दौरान सुरक्षा के लिए घाटों पर लाइफ जैकेट लाइफ बॉय ट्यूब रस्सी बंडल और पीए सिस्टम जैसे संसाधन उपलब्ध रहेंगे। तैराकों की भी ड्यूटी लगाई गई है। पुलिस और प्रशासन की टीमें घाटों पर लगातार निगरानी रखेंगी। इसके अलावा पुलिस कंट्रोल रूम से भी प्रमुख घाटों की स्थिति पर नजर रखी जाएगी। खटलापुरा प्रेमपुरा संत हिरदाराम नगर बैरागढ़ हथाईखेड़ा डैम शाहपुरा और आर्च ब्रिज क्षेत्र के घाटों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इन घाटों पर पिछले दो दिनों में ही डेढ़ हजार से ज्यादा गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हो चुका है।

    नगर निगम ने प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए शहर के अलग अलग इलाकों में दो दर्जन से ज्यादा स्टॉल भी लगाए हैं। लालघाटी चौराहा गांधी नगर करोंद चौराहा कोलार रायसेन रोड और अवधपुरी समेत कई स्थानों पर श्रद्धालु पूजा के बाद गणेश प्रतिमाएं इन स्टॉल पर जमा कर सकेंगे। इसके बाद नगर निगम की टीम इन प्रतिमाओं का सामूहिक रूप से विसर्जन करेगी। इससे घाटों पर भीड़ और प्रत्यक्ष रूप से पानी में उतरने वाले लोगों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।

    विसर्जन जुलूस और चल समारोह को देखते हुए शहर के रास्तों पर प्रकाश व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। नगर निगम के अनुसार प्रेमपुरा रानी कमलापति शाहपुरा खटलापुरा हथाईखेड़ा मालीखेड़ी और बैरागढ़ विसर्जन घाटों पर 1090 एलईडी फ्लड लाइट लगाई गई हैं। इसके अलावा चल समारोह वाले मार्गों पर 575 अतिरिक्त फ्लड लाइट लगाई गई हैं। इस तरह घाटों और विसर्जन मार्गों पर कुल 1665 लाइटों की व्यवस्था की गई है।

    गणेश विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के सड़कों पर उतरने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के सामने भीड़ नियंत्रण यातायात व्यवस्था और घाटों पर सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती रहेगी। नगर निगम पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें मिलकर व्यवस्थाओं को संभालेंगी। प्रशासन का प्रयास है कि श्रद्धालु भगवान गणेश की प्रतिमाओं को श्रद्धा के साथ विदाई दें और विसर्जन प्रक्रिया सुरक्षित तरीके से पूरी हो।

  • फंक्शन से पहले चेहरे की थकान और रूखापन कैसे करें कम, घर की इन चीजों से तैयार करें आसान फेस पैक

    फंक्शन से पहले चेहरे की थकान और रूखापन कैसे करें कम, घर की इन चीजों से तैयार करें आसान फेस पैक


    नई दिल्ली ।पार्टी, फंक्शन या किसी खास मौके से पहले हर कोई अपने चेहरे को फ्रेश और ग्लोइंग देखना चाहता है। लेकिन कई बार लगातार व्यस्तता, थकान या मौसम के असर से त्वचा रूखी और बेजान नजर आने लगती है। ऐसे में आखिरी समय पर पार्लर जाने के बजाय घर पर उपलब्ध कुछ सामान्य चीजों से आसान फेस पैक तैयार किए जा सकते हैं।

    घरेलू स्किन केयर में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें चेहरे को साफ और तरोताजा महसूस कराने में मदद कर सकती हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और किसी भी नए मिश्रण को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है।

    बेसन और दही का फेस पैक एक आसान विकल्प है। इसके लिए बेसन और दही को मिलाकर गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाकर सूखने दें और फिर पानी से धीरे-धीरे साफ कर लें। चेहरे को साफ करते समय ज्यादा रगड़ने से बचना चाहिए।

    अगर त्वचा रूखी या बेजान महसूस हो रही है, तो एलोवेरा जेल और शहद का मिश्रण इस्तेमाल किया जा सकता है। दोनों को थोड़ी मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है। यह घरेलू पैक त्वचा को नमी देने वाले विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

    पका हुआ पपीता और शहद भी घर पर तैयार किए जाने वाले फेस पैक में शामिल किए जा सकते हैं। पपीते को अच्छी तरह मैश करके उसमें थोड़ी मात्रा में शहद मिलाएं। तैयार मिश्रण को कुछ देर चेहरे पर रखने के बाद पानी से धो लें। इसके बाद त्वचा के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है।

    हल्दी और दही से भी फेस पैक तैयार किया जा सकता है। इसके लिए दही में बहुत थोड़ी मात्रा में हल्दी मिलाकर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर पतली परत लगाएं। कुछ समय बाद इसे पानी से साफ कर लें। हल्दी की मात्रा ज्यादा रखने पर चेहरे पर पीला रंग दिखाई दे सकता है, इसलिए इसका इस्तेमाल सीमित मात्रा में करना चाहिए।

    रूखी या खिंची हुई त्वचा के लिए ओट्स और शहद का पैक भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ओट्स को हल्का पीसकर उसमें शहद मिलाएं और तैयार मिश्रण को चेहरे पर हल्के हाथ से लगाएं। इसे त्वचा पर जोर से रगड़ने से बचना चाहिए, खासकर अगर स्किन संवेदनशील हो।

    खीरे का पैक भी घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है। खीरे को पीसकर उसका पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं। इससे त्वचा को ठंडक और ताजगी महसूस हो सकती है। गर्म मौसम या लंबे दिन के बाद यह एक सरल घरेलू स्किन केयर विकल्प हो सकता है।

    इनमें से किसी भी फेस पैक को पहली बार इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर परीक्षण करना जरूरी है। अगर जलन, खुजली, चुभन या किसी तरह की असहजता महसूस हो तो इसे तुरंत पानी से धो देना चाहिए। बहुत अधिक फेस पैक लगाने या बार-बार त्वचा को एक्सफोलिएट करने से जलन और ड्राईनेस बढ़ सकती है। इसलिए फंक्शन से पहले स्किन केयर करते समय त्वचा की जरूरत और संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।

  • UP-बिहार समेत 4 राज्यों के पुरुषों को नौकरी नहीं देगा बेंगलुरु का CEO, इस घटना का दिया हवाला

    UP-बिहार समेत 4 राज्यों के पुरुषों को नौकरी नहीं देगा बेंगलुरु का CEO, इस घटना का दिया हवाला


    नई दिल्ली। बेंगलुरु की एक कंपनी के CEO के भर्ती संबंधी फैसले ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। एवन स्पोर्ट्स वर्ल्ड के फाउंडर और CEO कार्तिक एसजी ने कहा है कि उनकी कंपनी अब उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी नहीं देगी। CEO ने इस फैसले के पीछे कंपनी के एक पूर्व कर्मचारी के कथित व्यवहार से जुड़ी घटना को वजह बताया है।

    एक्स पर पोस्ट कर दी फैसले की जानकारी

    कार्तिक एसजी ने 22 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कंपनी के भीतर काफी चर्चा और बहस के बाद यह निर्णय लिया गया है। पोस्ट में उन्होंने उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश का स्पष्ट तौर पर उल्लेख करते हुए कहा कि इन राज्यों से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों को कंपनी में नियुक्त नहीं किया जाएगा।

    CEO ने यह भी बताया कि कंपनी में राजस्थान की एक महिला कर्मचारी पहले से काम कर रही हैं और उन्होंने इस फैसले का समर्थन किया है। पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भर्ती के लिए अपनाए गए इस तरीके और चार राज्यों के पुरुष उम्मीदवारों को एक साथ बाहर रखने के फैसले पर सवाल उठाए।

    पूर्व कर्मचारी के व्यवहार को बताया वजह

    सोशल मीडिया पर आलोचना के बीच कार्तिक ने एक अन्य पोस्ट में फैसले के पीछे की वजह बताई। उनके अनुसार, करीब दो सप्ताह पहले कंपनी के एक कर्मचारी को नौकरी से निकाला गया था। CEO ने दावा किया कि यह कर्मचारी उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश में से किसी एक राज्य का रहने वाला था।

    कार्तिक के मुताबिक, महिला कर्मचारियों के साथ कथित बदतमीजी को लेकर उक्त कर्मचारी को दो बार चेतावनी दी गई थी। उनका दावा है कि चेतावनी के बावजूद उसके व्यवहार में सुधार नहीं आया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारी ने एक महिला सहकर्मी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की थी। हालांकि, इस घटना को लेकर CEO की ओर से किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

    बोले- टीम की सुरक्षा सबसे अहम

    कार्तिक ने कहा कि उनकी कंपनी में काफी कम उम्र के कर्मचारी काम करते हैं, इसलिए टीम की सुरक्षा उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक, जिस कर्मचारी को नौकरी से निकाला गया, वह MBA ग्रेजुएट था। कंपनी में नियुक्ति से पहले उसका रिज्यूमे और बैकग्राउंड सामान्य और साफ दिखाई दे रहा था।

    CEO के अनुसार, कर्मचारी के कंपनी में शामिल होने के करीब दो महीने बाद उसके व्यवहार को लेकर शिकायतें आने लगी थीं। महिला कर्मचारियों के साथ कथित बदतमीजी के बाद उसे चेतावनी दी गई, लेकिन इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद कंपनी ने उसे नौकरी से निकाल दिया।

    कार्तिक ने कहा कि उनके लिए केवल बिजनेस चलाना ही प्राथमिकता नहीं है। कंपनी में काम करने वाली टीम और युवा कर्मचारियों की सुरक्षा भी उनके लिए उतनी ही महत्वपूर्ण है।

    32 कर्मचारियों में 14 महिलाएं

    CEO ने कंपनी के कर्मचारियों से जुड़ा आंकड़ा भी साझा किया। उनके मुताबिक, एवन स्पोर्ट्स वर्ल्ड में कुल 32 कर्मचारी हैं, जिनमें 14 महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी में अलग-अलग राज्यों और पृष्ठभूमि से आने वाले लोग काम करते हैं।

    कार्तिक के अनुसार, कंपनी के 20 कर्मचारी दूसरे राज्यों से हैं। इनमें 12 कर्मचारी ऐसे हैं, जो दक्षिण भारत के राज्यों से नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कंपनी अलग-अलग धर्मों और पृष्ठभूमि के लोगों के साथ काम करती है।

    सोशल मीडिया पर फैसले को लेकर बंटी राय

    CEO के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स का कहना है कि किसी एक कर्मचारी के कथित गलत व्यवहार की जिम्मेदारी उसी व्यक्ति की होनी चाहिए। उनके मुताबिक, एक कर्मचारी की घटना के आधार पर पूरे राज्य के पुरुष उम्मीदवारों को नौकरी से बाहर करना सवाल खड़े करता है। कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि किसी व्यक्ति के व्यवहार को उसके राज्य की पहचान से किस आधार पर जोड़ा जा सकता है।

    दूसरी ओर, कुछ यूजर्स ने CEO की ओर से बताई गई घटना और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता का समर्थन किया। इस फैसले के बाद भर्ती में क्षेत्रीय आधार पर लिए जाने वाले निर्णय, कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और किसी व्यक्ति के व्यवहार को उसकी क्षेत्रीय पहचान से जोड़ने जैसे मुद्दों पर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।