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  • FIFA World Cup से पहले बढ़ा विवाद, इराक के दिग्गज फुटबॉलर के साथ एयरपोर्ट पर हुआ नाटकीय घटनाक्रम

    FIFA World Cup से पहले बढ़ा विवाद, इराक के दिग्गज फुटबॉलर के साथ एयरपोर्ट पर हुआ नाटकीय घटनाक्रम


    नई दिल्ली । FIFA विश्व कप 2026 के आगाज से पहले अमेरिका में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने खेल जगत में चर्चा छेड़ दी है। इराक की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के स्टार स्ट्राइकर आयमेन हुसैन को अमेरिका पहुंचने पर शिकागो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लगभग सात घंटे तक रोककर पूछताछ की गई। हालांकि लंबी जांच के बाद उन्हें देश में प्रवेश की अनुमति दे दी गई, लेकिन टीम के आधिकारिक फोटोग्राफर तलाल सलाह को अमेरिका में एंट्री नहीं मिली और उन्हें वापस भेज दिया गया।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयमेन हुसैन शनिवार तड़के अमेरिका पहुंचे थे, जहां इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। पूछताछ के दौरान उनके मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों की भी जांच की गई। करीब सात घंटे तक चली प्रक्रिया के बाद अधिकारियों ने उन्हें क्लियरेंस देते हुए अमेरिका में प्रवेश की अनुमति प्रदान कर दी।

    आयमेन हुसैन इराकी फुटबॉल के सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। 30 वर्षीय स्ट्राइकर ने विश्व कप क्वालिफायर में शानदार प्रदर्शन किया था और उनके अहम गोलों की बदौलत इराक ने चार दशकों बाद FIFA विश्व कप के लिए क्वालिफाई किया। ऐसे में टूर्नामेंट से ठीक पहले उनके साथ हुई इस घटना ने इराकी फुटबॉल प्रशंसकों की चिंता बढ़ा दी है।

    स्थिति और अधिक गंभीर तब हो गई जब इराकी राष्ट्रीय टीम के फोटोग्राफर तलाल सलाह को 10 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखने के बाद अमेरिका में प्रवेश देने से इनकार कर दिया गया। जानकारी के अनुसार, उनसे भी विस्तृत पूछताछ की गई और उनके मोबाइल फोन की जांच की गई। इसके बावजूद अधिकारियों ने उन्हें देश में प्रवेश की मंजूरी नहीं दी।

    इराकी ओलंपिक समिति से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि दोनों मामलों में सुरक्षा और इमिग्रेशन जांच काफी विस्तृत रही। हालांकि अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इतनी लंबी पूछताछ का कारण क्या था। दूसरी ओर, अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) और डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की ओर से भी इस मामले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

    गौरतलब है कि FIFA विश्व कप 2026 की मेजबानी संयुक्त रूप से अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको कर रहे हैं। यह टूर्नामेंट इतिहास का सबसे बड़ा विश्व कप माना जा रहा है, जिसमें रिकॉर्ड संख्या में टीमें हिस्सा ले रही हैं। इराक भी उन देशों में शामिल है जिसने लंबे इंतजार के बाद विश्व कप में जगह बनाई है।

    इराक की टीम को ग्रुप-1 में फ्रांस, सेनेगल और नॉर्वे जैसी मजबूत टीमों के साथ रखा गया है। आयमेन हुसैन के अलावा टीम में इप्सविच टाउन के फॉरवर्ड अली अल-हमादी, युवा प्रतिभा अली जसीम और यूसुफ अमीन जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं। ऐसे में टूर्नामेंट से पहले सामने आई यह घटना टीम की तैयारियों पर असर डाल सकती है।

    फिलहाल आयमेन हुसैन टीम के साथ जुड़ चुके हैं, लेकिन फोटोग्राफर तलाल सलाह को प्रवेश न मिलने का मामला इराकी फुटबॉल प्रशासन के लिए नई चुनौती बन गया है। विश्व कप के माहौल के बीच यह घटना सुरक्षा, इमिग्रेशन प्रक्रियाओं और खिलाड़ियों के साथ व्यवहार को लेकर कई सवाल भी खड़े कर रही है।

  • गरुड़ पुराण का रहस्य: मृत्यु के बाद गहनों और सामान को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र?

    गरुड़ पुराण का रहस्य: मृत्यु के बाद गहनों और सामान को लेकर क्या कहते हैं शास्त्र?


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में जीवन और मृत्यु दोनों को प्रकृति का शाश्वत सत्य माना गया है। जन्म लेने वाले प्रत्येक व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के बाद किए जाने वाले संस्कारों का भी धार्मिक ग्रंथों में विस्तार से वर्णन मिलता है। इन्हीं ग्रंथों में एक प्रमुख ग्रंथ गरुड़ पुराण है, जिसमें मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, कर्मों के फल और अंतिम संस्कार से जुड़े अनेक नियमों का उल्लेख किया गया है।

    जब किसी व्यक्ति का निधन होता है, तब उसके अंतिम संस्कार के दौरान उपयोग में आने वाले कपड़े, बिस्तर और अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं को प्रायः घर से बाहर कर दिया जाता है या दान कर दिया जाता है। हालांकि एक बात अक्सर लोगों के मन में सवाल पैदा करती है कि मृतक के गहनों को आमतौर पर सुरक्षित क्यों रखा जाता है। गरुड़ पुराण में इसके पीछे एक विशेष मान्यता का वर्णन मिलता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मृत्यु के बाद भी कुछ समय तक आत्मा का अपने जीवन से जुड़ी वस्तुओं और प्रिय लोगों के प्रति मोह बना रह सकता है। माना जाता है कि आभूषण ऐसी वस्तुएं होती हैं जिनसे व्यक्ति का भावनात्मक और व्यक्तिगत जुड़ाव अधिक होता है। इसी कारण गरुड़ पुराण में सलाह दी गई है कि मृतक के गहनों का तुरंत नियमित उपयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इससे आत्मा का उन वस्तुओं के प्रति मोह बढ़ सकता है, जो उसकी आगे की यात्रा में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

    इसी वजह से कई परिवार मृतक के गहनों को संभालकर रखते हैं और उनका उपयोग लंबे समय तक नहीं करते। कुछ लोग धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें शुद्धिकरण के बाद परिवार में सुरक्षित रखते हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें दान करना अधिक उचित मानते हैं। मान्यता है कि यदि किसी को इन गहनों को घर में रखने में असहजता महसूस हो, तो उनका दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है।

    गरुड़ पुराण में केवल गहनों ही नहीं, बल्कि मृतक द्वारा उपयोग की गई अन्य वस्तुओं के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं। इसमें कहा गया है कि मृत्यु के बाद व्यक्ति के कपड़े, चश्मा, हाथ की घड़ी, बिस्तर और दैनिक उपयोग की अन्य व्यक्तिगत वस्तुओं का उपयोग करने से बचना चाहिए। धार्मिक दृष्टि से इन वस्तुओं को दान करना या उचित तरीके से अलग कर देना बेहतर माना गया है।

    इसके अलावा सामान्य पुस्तकों को भी घर में न रखने की सलाह दी गई है, यदि उनका नियमित उपयोग मृतक द्वारा किया जाता था। हालांकि धार्मिक ग्रंथों के मामले में अलग व्यवस्था बताई गई है। मान्यता है कि धार्मिक पुस्तकों पर गंगाजल का छिड़काव कर उन्हें पुनः उपयोग में लाया जा सकता है। इसी प्रकार यदि मृतक की जन्म कुंडली मौजूद हो, तो उसे किसी पवित्र जल में प्रवाहित करने या पीपल के वृक्ष के नीचे मिट्टी में दबाने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है।

    धार्मिक विद्वानों का मानना है कि ये मान्यताएं केवल आध्यात्मिक दृष्टिकोण ही नहीं बल्कि परिवार को मानसिक रूप से शोक से उबरने का अवसर देने का भी एक माध्यम हैं। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों और परिवारों में परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं, इसलिए इन विषयों में स्थानीय रीति-रिवाजों और पारिवारिक परंपराओं का भी विशेष महत्व माना जाता है।

  • सूर्यकुमार यादव पर बड़ा खुलासा! पूर्व चयनकर्ता ने बताई पर्दे के पीछे की असली वजह

    सूर्यकुमार यादव पर बड़ा खुलासा! पूर्व चयनकर्ता ने बताई पर्दे के पीछे की असली वजह


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट में कप्तानी परिवर्तन के बाद सबसे अधिक चर्चा यदि किसी खिलाड़ी को लेकर हो रही है तो वह हैं सूर्यकुमार यादव। भारतीय टी20 टीम की कप्तानी से हटाए जाने और आयरलैंड, इंग्लैंड तथा एशियन गेम्स के लिए घोषित किसी भी टी20 स्क्वॉड में जगह नहीं मिलने के बाद यह माना जा रहा था कि चयनकर्ताओं ने उनसे आगे बढ़ने का फैसला कर लिया है। लेकिन अब टीम इंडिया के पूर्व मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने इस पूरे मुद्दे को नई दिशा दे दी है।

    एमएसके प्रसाद का दावा है कि सूर्यकुमार यादव को टीम से बाहर नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें आराम दिया गया है। उनके मुताबिक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और चयन समिति ने जसप्रीत बुमराह तथा हार्दिक पांड्या की तरह सूर्यकुमार को भी कुछ समय का ब्रेक दिया है, ताकि वह तरोताजा होकर टीम में वापसी कर सकें।

    प्रसाद ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि कोई भी बोर्ड या चयन समिति विश्व कप विजेता कप्तान को अगले ही अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में बाहर नहीं करती। उन्होंने कहा कि सूर्यकुमार यादव भारतीय क्रिकेट के बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ी हैं और उनकी गुणवत्ता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। उनके अनुसार इतने बड़े खिलाड़ी को केवल खराब फॉर्म के आधार पर पूरी तरह नजरअंदाज करना सही नहीं होगा।

    पूर्व चयनकर्ता ने कहा कि सूर्यकुमार, हार्दिक पांड्या और जसप्रीत बुमराह लंबे समय तक आईसीसी रैंकिंग में शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। बुमराह आज भी दुनिया के नंबर-1 गेंदबाजों में गिने जाते हैं। ऐसे में इन खिलाड़ियों को समय-समय पर आराम देना टीम प्रबंधन की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि तीनों खिलाड़ी जल्द ही भारतीय टीम में फिर दिखाई देंगे।

    हालांकि दूसरी ओर चयनकर्ताओं के फैसले ने कई सवाल भी खड़े किए हैं। बीसीसीआई द्वारा घोषित आयरलैंड दौरे, इंग्लैंड दौरे और 2026 एशियन गेम्स की टी20 टीमों में सूर्यकुमार यादव का नाम शामिल नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि जसप्रीत बुमराह को एशियन गेम्स की टीम में जगह दी गई है, जबकि सूर्यकुमार पूरी तरह बाहर हैं। इसी वजह से कई क्रिकेट विशेषज्ञ इसे केवल आराम नहीं, बल्कि चयन संबंधी बड़ा फैसला मान रहे हैं।

    सूर्यकुमार यादव की हालिया फॉर्म भी चर्चा का विषय रही है। आईपीएल 2026 में उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा और लगातार रन बनाने में उन्हें संघर्ष करना पड़ा। माना जा रहा है कि यही वजह चयनकर्ताओं के फैसले के पीछे प्रमुख कारण हो सकती है। वहीं उनकी बढ़ती उम्र भी भविष्य की योजनाओं को प्रभावित कर सकती है। 35 वर्षीय सूर्यकुमार के सामने अब युवा खिलाड़ियों की मजबूत चुनौती मौजूद है।

    इस बीच चयनकर्ताओं ने टी20 टीम की कमान श्रेयस अय्यर को सौंप दी है। अय्यर को भविष्य की टीम तैयार करने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि सूर्यकुमार के अनुभव और उपलब्धियों को देखते हुए उनकी वापसी की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

    फिलहाल भारतीय क्रिकेट में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सूर्यकुमार यादव वास्तव में केवल आराम पर हैं या फिर यह भारतीय टी20 टीम में एक नए युग की शुरुआत है। आने वाले महीनों में उनका प्रदर्शन और चयनकर्ताओं की रणनीति इस सवाल का जवाब देगी।

  • श्रेयस अय्यर का कप्तानी धमाका! बल्लेबाजी से दिया बड़ा संदेश, बढ़ी टी20 टीम की दावेदारी

    श्रेयस अय्यर का कप्तानी धमाका! बल्लेबाजी से दिया बड़ा संदेश, बढ़ी टी20 टीम की दावेदारी


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट में कप्तानी परिवर्तन के बीच श्रेयस अय्यर ने अपने बल्ले से ऐसा जवाब दिया है जिसने क्रिकेट जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भारतीय टी20 टीम का नया कप्तान घोषित किए जाने के कुछ ही घंटों बाद श्रेयस अय्यर ने मुंबई टी20 लीग में धमाकेदार अर्धशतक जड़कर यह संकेत दे दिया कि वह नई जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

    बीसीसीआई ने शनिवार को आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के साथ आगामी एशियाई खेलों के लिए भारतीय टी20 टीम की घोषणा की। इस टीम में श्रेयस अय्यर को कप्तान नियुक्त किया गया, जबकि पूर्व कप्तान सूर्यकुमार यादव को टीम में जगह नहीं मिली। इस बड़े फैसले के बाद सभी की नजरें दोनों खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर थीं और शाम को मुंबई टी20 लीग में दोनों आमने-सामने भी आ गए।

    मुंबई टी20 लीग का 12वां मुकाबला ट्रायम्फ्स नाइट्स एमएनई और सोबो मुंबई फाल्कन्स के बीच खेला गया। ट्रायम्फ्स नाइट्स की कप्तानी सूर्यकुमार यादव कर रहे थे, जबकि सोबो मुंबई फाल्कन्स की ओर से श्रेयस अय्यर बल्लेबाजी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। मुकाबला केवल दो टीमों के बीच नहीं, बल्कि भारतीय टी20 क्रिकेट के दो बड़े चेहरों के बीच भी माना जा रहा था।

    पहले बल्लेबाजी करते हुए ट्रायम्फ्स नाइट्स एमएनई ने निर्धारित 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 147 रन बनाए। टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने संघर्षपूर्ण पारी खेलते हुए 48 रन बनाए। अपनी इस पारी में उन्होंने 3 चौके और 4 शानदार छक्के लगाए। हालांकि उनका अर्धशतक पूरा नहीं हो सका, लेकिन उन्होंने टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

    148 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी सोबो मुंबई फाल्कन्स की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। शुरुआती विकेट जल्दी गिरने के बाद टीम दबाव में नजर आ रही थी। ऐसे समय में नंबर चार पर बल्लेबाजी करने उतरे श्रेयस अय्यर ने जिम्मेदारी संभाली और शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। उन्होंने सिर्फ 36 गेंदों में 61 रन बनाए, जिसमें 5 चौके और 4 छक्के शामिल रहे।

    अय्यर की यह पारी केवल तेज रन बनाने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने मैच की दिशा भी पूरी तरह बदल दी। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी के सामने विपक्षी गेंदबाज बेबस नजर आए। परिणामस्वरूप सोबो मुंबई फाल्कन्स ने 20 गेंदें शेष रहते ही पांच विकेट से मुकाबला अपने नाम कर लिया।

    श्रेयस अय्यर की इस शानदार पारी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। खास बात यह रही कि जिस दिन उन्हें भारतीय टी20 टीम की कप्तानी मिली, उसी दिन उन्होंने बल्ले से भी अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन कर दिया।

    दूसरी ओर, सूर्यकुमार यादव के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। टी20 विश्व कप विजेता कप्तान होने के बावजूद हालिया खराब फॉर्म के चलते उन्हें राष्ट्रीय टीम से बाहर किया गया है। आईपीएल 2026 में भी उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा था। हालांकि मुंबई टी20 लीग में उनकी 48 रन की पारी ने यह जरूर दिखाया कि वह अभी भी वापसी की क्षमता रखते हैं।

    फिलहाल क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें श्रेयस अय्यर पर टिकी हैं, जो अब भारतीय टी20 टीम को नई दिशा देने की जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं। कप्तानी की शुरुआत जिस अंदाज में हुई है, उसने उनके समर्थकों की उम्मीदों को और बढ़ा दिया है।

  • ऋषभ पंत के निशाने पर ऐतिहासिक रिकॉर्ड, टेस्ट क्रिकेट में रच सकते हैं नया विश्व कीर्तिमान

    ऋषभ पंत के निशाने पर ऐतिहासिक रिकॉर्ड, टेस्ट क्रिकेट में रच सकते हैं नया विश्व कीर्तिमान


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत एक ऐसे मुकाम के करीब पहुंच चुके हैं, जहां से इतिहास उनका इंतजार कर रहा है। अफगानिस्तान के खिलाफ मुल्लांपुर में खेले जा रहे एकमात्र टेस्ट मैच में पंत ने पहले दिन शानदार बल्लेबाजी करते हुए नाबाद अर्धशतक जमाया और साथ ही एक बड़े विश्व रिकॉर्ड की ओर भी कदम बढ़ा दिए। अब उन्हें टेस्ट क्रिकेट में 100 छक्कों का आंकड़ा छूने के लिए केवल तीन और छक्कों की जरूरत है।

    पहले दिन का खेल समाप्त होने तक भारतीय टीम मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी थी। कप्तान शुभमन गिल और उप-कप्तान केएल राहुल के शानदार शतकों के बीच ऋषभ पंत ने भी अपनी आक्रामक शैली का प्रदर्शन करते हुए अर्धशतक जड़ा। उनकी पारी में कई आकर्षक शॉट देखने को मिले, जिनमें तीन लंबे छक्के भी शामिल रहे। इन छक्कों के साथ पंत के टेस्ट करियर में कुल 97 छक्के हो गए हैं।

    अगर पंत मैच के दूसरे दिन तीन और छक्के लगाने में सफल रहते हैं, तो वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 100 छक्के पूरे करने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे। फिलहाल यह रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज विकेटकीपर एडम गिलक्रिस्ट के नाम दर्ज है, जिन्होंने 137 पारियों में 100 टेस्ट छक्के पूरे किए थे। वहीं न्यूजीलैंड के विस्फोटक बल्लेबाज ब्रेंडन मैक्कुलम ने यह उपलब्धि 176 पारियों में हासिल की थी, जबकि इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स ने 178 पारियों में यह आंकड़ा छुआ था।

    ऋषभ पंत की बात करें तो वह अभी अपने टेस्ट करियर की 87वीं पारी खेल रहे हैं। ऐसे में यदि वह इस मैच में 100 छक्कों का आंकड़ा छू लेते हैं तो न केवल गिलक्रिस्ट का रिकॉर्ड ध्वस्त होगा, बल्कि वह 100 से कम पारियों में यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज भी बन जाएंगे। यह उपलब्धि उनके 50वें टेस्ट मैच में दर्ज हो सकती है, जो इसे और भी खास बना देगी।

    टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने का रिकॉर्ड फिलहाल इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स के नाम है, जिन्होंने 136 छक्के लगाए हैं। उनके बाद ब्रेंडन मैक्कुलम 107 और एडम गिलक्रिस्ट 100 छक्कों के साथ सूची में शामिल हैं। न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज टिम साउदी और वेस्टइंडीज के धाकड़ बल्लेबाज क्रिस गेल भी 98-98 छक्कों के साथ शीर्ष खिलाड़ियों में गिने जाते हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि अफगानिस्तान टेस्ट से पहले टीम प्रबंधन ने ऋषभ पंत से उप-कप्तानी की जिम्मेदारी वापस लेकर केएल राहुल को यह भूमिका सौंपी है। चयनकर्ताओं का मानना है कि पंत को फिलहाल अपनी बल्लेबाजी पर अधिक ध्यान देना चाहिए। ऐसा लगता है कि पंत ने इस फैसले का जवाब अपने बल्ले से देना शुरू कर दिया है।

    क्रिकेट प्रेमियों की नजरें अब मैच के दूसरे दिन पर टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि पंत न केवल अपना शतक पूरा करेंगे, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज 100 छक्कों का नया विश्व रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज कर भारतीय क्रिकेट को एक और गौरवपूर्ण क्षण देंगे।

  • रोहित शर्मा की बड़ी भविष्यवाणी: भारतीय टी20 टीम की कप्तानी में नया अध्याय लिखेंगे श्रेयस अय्यर

    रोहित शर्मा की बड़ी भविष्यवाणी: भारतीय टी20 टीम की कप्तानी में नया अध्याय लिखेंगे श्रेयस अय्यर

     

    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट(Indian cricket) में एक नए दौर की शुरुआत हो चुकी है।(Board of Control for Cricket) भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा श्रेयस अय्यर को टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम का नया कप्तान नियुक्त किए जाने के बाद क्रिकेट जगत में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इस बीच टीम इंडिया के पूर्व कप्तान रोहित शर्मा(Rohit Sharma) ने श्रेयस अय्यर(Shreyas Iyer) को लेकर बड़ी भविष्यवाणी करते हुए कहा है कि वह भारतीय टीम की कप्तानी में सफल साबित होंगे और उनके पास इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए पर्याप्त अनुभव और नेतृत्व क्षमता मौजूद है।

    मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान रोहित शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में आईपीएल में श्रेयस अय्यर ने जिस तरह अपनी टीमों का नेतृत्व किया है, वह उनके नेतृत्व कौशल का सबसे बड़ा प्रमाण है। रोहित के अनुसार, आईपीएल जैसी प्रतिस्पर्धी लीग में दबाव के बीच टीम को संभालना आसान नहीं होता और श्रेयस ने यह काम लगातार प्रभावशाली ढंग से किया है।

    श्रेयस अय्यर ने आईपीएल 2024 में कोलकाता नाइट राइडर्स को चैंपियन बनाया था, जबकि 2025 में पंजाब किंग्स को फाइनल तक पहुंचाकर अपनी कप्तानी का लोहा मनवाया। यही वजह है कि चयनकर्ताओं ने आगामी एशिया कप, 2028 ओलंपिक और टी20 विश्व कप जैसे बड़े टूर्नामेंटों को ध्यान में रखते हुए उन्हें टीम की कमान सौंपने का फैसला किया।

    रोहित शर्मा ने कहा कि कप्तानी केवल एक पद नहीं बल्कि एक जिम्मेदारी है, जिसे मेहनत और प्रदर्शन के दम पर हासिल करना पड़ता है। उन्होंने मुंबई क्रिकेट संस्कृति का जिक्र करते हुए कहा कि यहां किसी खिलाड़ी को कुछ भी आसानी से नहीं मिलता। हर उपलब्धि के पीछे संघर्ष, अनुशासन और निरंतर प्रदर्शन होता है। रोहित का मानना है कि श्रेयस इस माहौल में पले-बढ़े हैं, इसलिए वे कप्तानी के महत्व और उससे जुड़ी चुनौतियों को अच्छी तरह समझते हैं।

    पूर्व भारतीय कप्तान ने यह भी कहा कि एक सफल कप्तान वही होता है जो अपने साथियों का सम्मान अर्जित करे और टीम को साथ लेकर चले। उनके मुताबिक श्रेयस में यह गुण मौजूद हैं और यही विशेषताएं उन्हें एक प्रभावशाली कप्तान बना सकती हैं।

    हालांकि कप्तानी में बदलाव के बीच रोहित शर्मा ने सूर्यकुमार यादव के योगदान को भी सराहा। उन्होंने कहा कि सूर्या का क्रिकेट सफर संघर्ष और धैर्य का बेहतरीन उदाहरण है। 30 वर्ष की उम्र के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और मिले हर अवसर का भरपूर लाभ उठाया। रोहित ने कहा कि सूर्यकुमार ने अपने प्रदर्शन और नेतृत्व से भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

    दूसरी ओर, सूर्यकुमार यादव ने भी बड़े दिल का परिचय देते हुए श्रेयस अय्यर को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए बेहद खुशी और गर्व की बात है कि मुंबई का एक और खिलाड़ी भारतीय टी20 टीम का कप्तान बना है। सूर्या ने कहा कि उन्होंने और श्रेयस ने वर्षों तक साथ क्रिकेट खेला है और उन्हें पूरा विश्वास है कि श्रेयस इस नई जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाएंगे।

    भारतीय क्रिकेट में यह बदलाव केवल कप्तान बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की टीम तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि श्रेयस अय्यर अपने नेतृत्व में भारतीय टी20 टीम को किस नई ऊंचाई तक पहुंचाते हैं।

  • 7 जून का राशिफल: मकर राशि वालों के लिए शुभ संकेत, मेष और सिंह को भी करियर में मिल सकती है बड़ी सफलता

    7 जून का राशिफल: मकर राशि वालों के लिए शुभ संकेत, मेष और सिंह को भी करियर में मिल सकती है बड़ी सफलता

    नई दिल्ली । 7 जून 2026 का दिन विभिन्न राशियों के लिए अलग-अलग संभावनाएं लेकर आ रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति कई जातकों को करियर, व्यापार और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिणाम दे सकती है, जबकि कुछ राशियों को धैर्य और सतर्कता के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता होगी। ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार दिनभर की गतिविधियों में संतुलन बनाए रखना अधिकांश लोगों के लिए लाभकारी रहेगा।

    मेष राशि के जातकों के लिए कार्यक्षेत्र में प्रगति के संकेत हैं। करियर और व्यापार से जुड़े मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। प्रभाव और प्रतिष्ठा में वृद्धि होने की संभावना है। महत्वपूर्ण कार्यों में मित्रों और सहयोगियों का सहयोग मिलेगा, जिससे योजनाओं को गति मिल सकती है।

    वृष राशि वालों के लिए प्रशासनिक और प्रबंधन से जुड़े कार्यों में सफलता मिलने के योग हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है। आर्थिक विषयों पर होने वाली चर्चाएं अनुकूल रह सकती हैं और पेशेवर जीवन में नई संभावनाएं सामने आ सकती हैं।

    मिथुन राशि के लोगों का ध्यान अपने लक्ष्यों पर केंद्रित रहेगा। कार्यक्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन के कारण सम्मान और उपलब्धियां प्राप्त हो सकती हैं। अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन लाभकारी सिद्ध होगा तथा आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहने की संभावना है।

    कर्क राशि के जातकों को जल्दबाजी से बचने की सलाह दी गई है। महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लेने होंगे। पारिवारिक सहयोग बना रहेगा, लेकिन कार्यों में निरंतरता बनाए रखना आवश्यक होगा। धैर्य और संयम के साथ आगे बढ़ने पर सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं।

    सिंह राशि वालों के लिए साझेदारी और व्यावसायिक गतिविधियों में सफलता के संकेत हैं। टीमवर्क और सहयोग की भावना मजबूत होगी। कार्यस्थल पर प्रभाव बढ़ सकता है और नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं। निजी संबंधों में भी सामंजस्य बना रहेगा।

    कन्या राशि के लोगों को कार्यों में अनुशासन और समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा। पेशेवर जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने से लाभ मिलेगा। आर्थिक मामलों में सावधानी रखना आवश्यक रहेगा और अनावश्यक जोखिम से बचना बेहतर होगा।

    तुला राशि के लिए दिन उत्साह और अवसरों से भरा रह सकता है। सामाजिक और पेशेवर संपर्कों से लाभ मिलने की संभावना है। जीवनशैली में सुधार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं और महत्वपूर्ण कार्यों में सफलता मिल सकती है।

    वृश्चिक राशि वालों का ध्यान परिवार और घरेलू जिम्मेदारियों पर अधिक रहेगा। घर में सुखद वातावरण बना रह सकता है। रिश्तों को मजबूत करने का अवसर मिलेगा, हालांकि कार्यक्षेत्र में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा।

    धनु राशि के जातकों के लिए संवाद और संपर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। साहस और आत्मविश्वास के बल पर कई कार्य पूरे हो सकते हैं। व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी बनी रहेगी और करीबी लोगों का सहयोग मिलेगा।

    मकर राशि वालों के लिए दिन विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। परिवार में किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति के आगमन की संभावना है। कार्यक्षेत्र में अपेक्षित सफलता मिल सकती है और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं। पारिवारिक आयोजन और उत्सव का माहौल भी बन सकता है।

    कुंभ राशि के जातकों के लिए रचनात्मकता और नवाचार सफलता की कुंजी बन सकते हैं। कार्ययोजनाओं में गति आएगी और जिम्मेदारियों का निर्वहन बेहतर ढंग से कर पाएंगे। आर्थिक गतिविधियों में सुधार देखने को मिल सकता है।

    मीन राशि वालों को खर्चों और वित्तीय निर्णयों में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। बजट का संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। विदेश या बाहरी संपर्कों से जुड़े कार्यों में प्रगति संभव है, लेकिन लेनदेन के मामलों में सतर्कता बनाए रखना लाभकारी रहेगा।

  • NFHS डेटा पर बढ़ा सियासी घमासान, नड्डा बोले- अधूरी जानकारी से नहीं, तथ्यों से होता है देश का भला

    NFHS डेटा पर बढ़ा सियासी घमासान, नड्डा बोले- अधूरी जानकारी से नहीं, तथ्यों से होता है देश का भला

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) के आंकड़ों को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों और चुनौतियों को लेकर दोनों दलों ने एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए हैं। इस विवाद का केंद्र स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों की व्याख्या और उनके सार्वजनिक प्रस्तुतीकरण को लेकर उठे सवाल हैं।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार पर महिलाओं और बच्चों से जुड़े स्वास्थ्य तथा पोषण संबंधी आंकड़ों को सार्वजनिक न करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि संबंधित आंकड़े सरकार की नीतिगत विफलताओं को उजागर करते हैं और इसी कारण उन्हें सार्वजनिक रूप से सामने नहीं लाया जा रहा है। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।

    खरगे के आरोपों के जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कड़ा प्रतिवाद किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। नड्डा ने कहा कि अधूरी जानकारी या चुनिंदा तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है और इससे वास्तविक स्थिति की सही तस्वीर सामने नहीं आती।

    स्वास्थ्य मंत्री ने अपने जवाब में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के विभिन्न आंकड़ों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पिछले वर्षों में देश के स्वास्थ्य ढांचे में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किए गए हैं। उनके अनुसार मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थागत प्रसव और प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की निगरानी में होने वाले प्रसव के मामलों में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। उन्होंने इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए व्यापक बदलावों और सरकारी प्रयासों का परिणाम बताया।

    नड्डा ने कहा कि गर्भावस्था के शुरुआती चरण में पंजीकरण कराने वाली महिलाओं की संख्या में वृद्धि हुई है, जबकि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाले प्रसव का प्रतिशत भी काफी बढ़ा है। उनके अनुसार इन बदलावों ने मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में योगदान दिया है।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधारों का मूल्यांकन व्यापक आंकड़ों और दीर्घकालिक परिणामों के आधार पर किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि देश की स्वास्थ्य यात्रा की वास्तविक कहानी प्रगति और सुधार की है, न कि केवल कमियों और चुनौतियों की। उन्होंने सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, टीकाकरण कार्यक्रमों और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने के प्रयासों का भी उल्लेख किया।

    दूसरी ओर कांग्रेस का आरोप है कि स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण संकेतकों में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है और सरकार इन पहलुओं पर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरत रही है। पार्टी का कहना है कि जनता को स्वास्थ्य संबंधी सभी आंकड़ों तक पूरी पहुंच मिलनी चाहिए ताकि नीतियों का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े किसी भी देश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति को मापने का महत्वपूर्ण आधार होते हैं। ऐसे में इन आंकड़ों की व्याख्या और प्रस्तुति को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है। हालांकि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक और संतुलित चर्चा को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

    फिलहाल एनएफएचएस के आंकड़ों को लेकर शुरू हुई यह बहस राजनीतिक स्तर पर जारी है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच और अधिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं, क्योंकि स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े विषय सीधे तौर पर करोड़ों नागरिकों के जीवन से जुड़े हुए हैं।

  • ‘विवाह’ की पूनम से बनीं करोड़ों दिलों की पसंद, अमृता राव की सादगी और अभिनय का आज भी कायम है जादू

    ‘विवाह’ की पूनम से बनीं करोड़ों दिलों की पसंद, अमृता राव की सादगी और अभिनय का आज भी कायम है जादू

    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार रहे हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा और सादगी के बल पर दर्शकों के दिलों में स्थायी जगह बनाई। अभिनेत्री अमृता राव भी उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिन्होंने बिना किसी बड़े विवाद या अत्यधिक प्रचार के अपने अभिनय और व्यक्तित्व के दम पर अलग पहचान स्थापित की। खासतौर पर फिल्म ‘विवाह’ में निभाया गया उनका ‘पूनम’ का किरदार आज भी दर्शकों की स्मृतियों में जीवंत है।

    7 जून 1981 को मुंबई में जन्मीं अमृता राव का पालन-पोषण एक पारंपरिक कोंकणी परिवार में हुआ। बचपन से ही पढ़ाई और सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि रखने वाली अमृता ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में पूरी की। बाद में उन्होंने मनोविज्ञान विषय के साथ स्नातक की पढ़ाई शुरू की, लेकिन मॉडलिंग और मनोरंजन जगत में बढ़ती संभावनाओं ने उन्हें एक अलग दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

    करियर की शुरुआत उन्होंने मॉडलिंग से की। कई विज्ञापनों में दिखाई देने के बाद उन्हें संगीत वीडियो में भी काम करने का अवसर मिला। कैमरे के सामने उनकी सहज उपस्थिति और आत्मविश्वास ने विज्ञापन जगत का ध्यान आकर्षित किया। धीरे-धीरे फिल्म निर्माताओं की नजर उन पर पड़ी और उन्हें फिल्मों में अवसर मिलने लगे।

    साल 2002 में रिलीज हुई फिल्म ‘अब के बरस’ से अमृता ने बॉलीवुड में कदम रखा। हालांकि उनकी वास्तविक पहचान वर्ष 2003 में आई फिल्म ‘इश्क विश्क’ से बनी। इस फिल्म में उनके अभिनय को सराहा गया और युवा दर्शकों के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी। फिल्म की सफलता ने उन्हें उद्योग में मजबूत स्थान दिलाया और उनके लिए नए अवसरों के द्वार खोले।

    इसके बाद अमृता ने ‘मस्ती’, ‘मैं हूं ना’, ‘वाह लाइफ हो तो ऐसी’, ‘शिखर’ और ‘प्यारे मोहन’ जैसी फिल्मों में काम किया। हालांकि उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में फिल्म ‘विवाह’ को विशेष स्थान प्राप्त है। इस पारिवारिक फिल्म में निभाए गए ‘पूनम’ के किरदार ने उन्हें देशभर के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया। उनके सरल, संस्कारी और संवेदनशील चरित्र को लोगों ने बेहद पसंद किया और यही भूमिका उनके करियर की पहचान बन गई।

    अमृता राव ने हिंदी फिल्मों के अलावा दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। उन्होंने तेलुगू फिल्म उद्योग में भी काम किया और कई चर्चित कलाकारों के साथ स्क्रीन साझा की। इसके बाद ‘वेलकम टू सज्जनपुर’, ‘जॉली एलएलबी’, ‘सत्याग्रह’, ‘सिंह साहब द ग्रेट’ और ‘ठाकरे’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया।

    निजी जीवन में अमृता ने लंबे समय तक रेडियो जॉकी अनमोल सूद के साथ संबंध में रहने के बाद वर्ष 2016 में विवाह किया। दोनों ने सादगीपूर्ण तरीके से शादी की और आज एक बेटे के माता-पिता हैं। विवाह के बाद अमृता ने परिवार को प्राथमिकता देते हुए फिल्मों में अपनी सक्रियता सीमित कर दी।

    वर्तमान समय में अमृता राव डिजिटल माध्यमों के जरिए अपने प्रशंसकों से जुड़ी हुई हैं। वह अपने पति के साथ एक लोकप्रिय यूट्यूब चैनल संचालित करती हैं, जहां जीवन से जुड़े अनुभव, पारिवारिक किस्से और विभिन्न चर्चित हस्तियों के साथ बातचीत साझा करती हैं। अभिनय, सादगी और संतुलित जीवनशैली के कारण अमृता राव आज भी भारतीय दर्शकों के बीच सम्मान और लोकप्रियता बनाए हुए हैं।

  • भतीजे अभिषेक बनर्जी के पर कतरे और खुद दिल्ली आ रहीं ममता, टीएमसी के नाराज सांसदों की दिल्ली में मौजूदगी से सियासी हलचल तेज

    भतीजे अभिषेक बनर्जी के पर कतरे और खुद दिल्ली आ रहीं ममता, टीएमसी के नाराज सांसदों की दिल्ली में मौजूदगी से सियासी हलचल तेज

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा आंतरिक असंतोष अब राज्य की भौगोलिक सीमाओं को पार कर देश की राजधानी दिल्ली तक पहुंच गया है। राज्य विधानसभा में 58 विधायकों की बड़ी बगावत का सामना कर रहीं मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को अब देश की संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में भी एक बड़े विद्रोह की आशंका सताने लगी है। तृणमूल कांग्रेस के कई असंतुष्ट और नाराज लोकसभा सांसदों द्वारा अचानक दिल्ली में डेरा डाल दिए जाने के बाद से कोलकाता से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार बेहद गर्म है।

    इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में दो-तिहाई बहुमत यानी ’19’ का एक ऐसा गणित है, जिसने तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की रातों की नींद उड़ा रखी है। दरअसल, वर्तमान लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के कुल 28 निर्वाचित सांसद हैं। देश के कड़े दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के तहत यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग गुट नहीं बनाते हैं, तो उनकी संसद सदस्यता रद्द हो सकती है। ऐसे में टीएमसी के संसदीय दल को वैधानिक रूप से तोड़ने और कार्रवाई से बचने के लिए कम से कम 19 सांसदों के एक साथ आने की आवश्यकता है। सूत्रों का दावा है कि बागी गुट इसी जादुई आंकड़े को छूने की कवायद में जुटा हुआ है।

    संसदीय दल में संभावित बिखराव को रोकने और डैमेज कंट्रोल के लिए ममता बनर्जी ने बेहद आक्रामक और रणनीतिक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आधिकारिक आवास पर राष्ट्रीय कार्यसमिति की एक आपात बैठक बुलाकर ममता बनर्जी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। इस बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के पर कतरने के साफ संकेत मिले हैं। ममता बनर्जी ने अभिषेक के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन को पार्टी का नया संयुक्त राष्ट्रीय सचिव नियुक्त कर दिया है, जिसे सीधे तौर पर अभिषेक के अधिकारों में कटौती के रूप में देखा जा रहा है।

    पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, सांसदों और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच उपजे इस असंतोष की सबसे बड़ी वजह डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली है। बागी गुट का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी का संगठन चलाने का तरीका बेहद एकाकी है और वे पुराने व वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर एक विशेष ‘सिंडिकेट’ के जरिए पार्टी पर नियंत्रण स्थापित करना चाहते हैं। इसी कार्यप्रणाली से नाराज होकर कूचबिहार के सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया समेत पार्टी के कुछ अन्य सांसद इस समय दिल्ली में मौजूद हैं, हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे निजी दौरा बताया जा रहा है। इसके साथ ही बंगाल के दो बड़े अभिनेता-सांसदों के भी अगले कुछ दिनों में दिल्ली पहुंचने की संभावना है।

    इस राजनीतिक घमासान के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने संगठन के साथ खड़े होने का दावा किया है। सांसद सौगत रॉय ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब कुछ ‘ऑपरेशन लोटस’ का हिस्सा है, जिसके तहत धनबल और केंद्रीय एजेंसियों के डर का इस्तेमाल कर क्षेत्रीय पार्टियों को तोड़ने का प्रयास किया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस चुनौती का मजबूती से सामना करेगी। वहीं दूसरी ओर, कृष्णानगर की सांसद महुआ मोइत्रा और बर्धमान-दुर्गापुर के सांसद कीर्ति आजाद ने भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त की है।

    इस बीच, अपनी पार्टी को बिखरने से बचाने और राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकजुटता का संदेश देने के लिए खुद ममता बनर्जी आठ जून को दिल्ली के दौरे पर आ रही हैं। वे यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होंगी, जहां उनके साथ अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन भी मौजूद रहेंगे। दिल्ली दौरे के दौरान ममता बनर्जी अपने नाराज सांसदों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनकी शिकायतों को दूर करने का प्रयास भी कर सकती हैं, ताकि लोकसभा में किसी भी तरह के संभावित विभाजन को समय रहते टाला जा सके।