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  • मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को बनाया बसपा का राष्ट्रीय संयोजक, लखनऊ की बैठक में किया ऐलान

    मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को बनाया बसपा का राष्ट्रीय संयोजक, लखनऊ की बैठक में किया ऐलान


    लखनऊ।
    बहुजन समाज पार्टी में संगठन स्तर पर एक और बड़ा बदलाव हुआ है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को लखनऊ में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाने का ऐलान किया। बैठक में ईशान आनंद ने मायावती के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया।

    ईशान आनंद को यह जिम्मेदारी उनके बड़े भाई आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटाए जाने के बाद मिली है। मायावती ने कुछ दिन पहले ही ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देने की बात कही थी। इसके बाद से ही उनकी नई भूमिका को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। बुधवार को बैठक में इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त करने की घोषणा कर दी।

    संगठन और चुनावी तैयारियों पर हुआ मंथन

    लखनऊ में आयोजित इस बैठक में बसपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ सभी राज्यों के पार्टी अध्यक्ष भी शामिल हुए। बैठक में संगठन को मजबूत करने के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। मायावती ने चुनाव की जमीनी तैयारियों और प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी पार्टी नेताओं से जानकारी ली।

    इसके अलावा विभिन्न राज्यों में संगठन से जुड़े कामकाज की प्रगति रिपोर्ट भी ली गई। राज्यों से मिली रिपोर्ट के आधार पर संगठन को लेकर आगे की रणनीति और आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। बैठक में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भी पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा की गई और उन्हें संगठनात्मक स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए।

    ईशान को मिली अहम जिम्मेदारी

    ईशान आनंद, मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। उन्होंने एलएलएम और कानून की पढ़ाई की है। हाल के दिनों में बसपा के भीतर हुए संगठनात्मक बदलावों के बीच उनका नाम लगातार चर्चा में था। मायावती ने पहले ही संकेत दिया था कि वह ईशान को पार्टी में आगे बढ़ाएंगी। अब उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी देकर संगठन में उनकी भूमिका औपचारिक रूप से तय कर दी गई है।

    पार्टी की बैठक के दौरान ईशान आनंद के नई जिम्मेदारी संभालने को लेकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह भी देखने को मिला। बसपा अब आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

  • IIT बॉम्बे ने प्रोफेसर डूला को छुट्टी पर भेजा, साहिल केस की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित

    IIT बॉम्बे ने प्रोफेसर डूला को छुट्टी पर भेजा, साहिल केस की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित

    नई दिल्ली ।आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वोकाडे की मौत का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संस्थान ने 10 सदस्यों वाली एक समिति गठित की है। समिति को मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने और एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।

    इसी के साथ संस्थान ने मामले में नामजद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेज दिया है। यह कदम जांच प्रक्रिया के दौरान निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    साहिल वोकाडे की मौत को लेकर उनके परिवार की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। साहिल के पिता रवींद्र वोकाडे और उनकी मां सोनाली वोकाडे मंगलवार को मुंबई क्राइम ब्रांच पहुंचे। परिवार ने मामले में नामजद फैकल्टी सदस्यों प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला और शिरीष केदारे की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की।

    साहिल के पिता का कहना है कि मामले में सिर्फ आंतरिक समिति बनाना पर्याप्त नहीं है। परिवार ने आरोपों में नामजद लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि उन्हें निष्पक्ष जांच और अपने बेटे के मामले में न्याय चाहिए।

    परिवार ने आगे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की बात भी कही है। इससे मामले को लेकर संस्थान और परिवार के बीच विवाद का एक और पहलू सामने आया है।

    जानकारी के मुताबिक साहिल वोकाडे 18 सितंबर की शाम हॉस्टल के अपने कमरे में फंदे से लटके मिले थे। घटना के बाद मामले की जांच मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। पुलिस की जांच के साथ-साथ संस्थान ने भी अपने स्तर पर घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पड़ताल शुरू की है।

    इस मामले में संस्थान की ओर से 19 सितंबर को कहा गया था कि मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान साहिल को मोबाइल फोन के जरिए नकल करते हुए पकड़ा गया था। इसके बाद से ही साहिल की मौत से जुड़े घटनाक्रम और संस्थान में उसके साथ हुई घटनाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    साहिल के पिता ने इससे पहले दोनों नामजद प्रोफेसरों के इस्तीफे की मांग भी की थी। अब परिवार की ओर से उनकी गिरफ्तारी की मांग किए जाने के बाद मामला और संवेदनशील हो गया है।

    दूसरी ओर, 10 सदस्यीय समिति को पूरे घटनाक्रम की आंतरिक जांच की जिम्मेदारी दी गई है। समिति मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर संस्थान को सौंपेगी।

    प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अब मामले में पुलिस जांच और संस्थान की आंतरिक जांच दोनों के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

    फिलहाल साहिल वोकाडे की मौत के मामले में परिवार की ओर से गिरफ्तारी की मांग की जा रही है, जबकि संस्थान ने जांच के लिए समिति गठित कर दी है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही आरोपों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • मेघालय में अचानक बदला सियासी गणित, UDP के 8 विधायक बीजेपी में शामिल, विधानसभा में अब इतनी हुई ताकत

    मेघालय में अचानक बदला सियासी गणित, UDP के 8 विधायक बीजेपी में शामिल, विधानसभा में अब इतनी हुई ताकत

    नई दिल्ली ।मेघालय की राजनीति में बुधवार को बड़ा बदलाव हुआ है। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी यानी UDP के 12 में से आठ विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इन विधायकों ने औपचारिक रूप से बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की। इस घटनाक्रम के बाद 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में बीजेपी की संख्या दो से बढ़कर 10 हो गई है।

    बीजेपी में शामिल होने वाले आठ विधायकों का नेतृत्व खलीह्रियात से विधायक किर्मेन श्याला कर रहे थे। इन विधायकों के पार्टी बदलने की चर्चा पिछले कुछ दिनों से चल रही थी। इससे पहले UDP के पूर्व विधायक डॉ. जेमिनो मावथोह भी 12 सितंबर को बीजेपी में शामिल हो चुके हैं।

    आठ विधायकों के बीजेपी में जाने के बाद विधानसभा के मौजूदा राजनीतिक समीकरण में बदलाव आया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, UDP के पास अब चार विधायक रह गए हैं, जबकि बीजेपी के सदस्यों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।

    बीजेपी में शामिल होने से पहले इन विधायकों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। बातचीत के दौरान मेघालय से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए। इनमें कोयला खनन से संबंधित विषय और खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग प्रमुख रही।

    विधायकों की ओर से मेघालय के कुछ अन्य स्थानीय मुद्दे भी केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखे गए थे। खासी भाषा को संवैधानिक मान्यता देने की मांग राज्य में लंबे समय से उठती रही है। विधायकों ने इन मुद्दों पर आगे कार्रवाई को लेकर आश्वासन मिलने की बात कही थी।

    नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा की मौजूदगी में आठों विधायकों के पार्टी में शामिल होने की औपचारिक घोषणा हुई। इस मौके पर रिजिजू ने सभी नए सदस्यों का स्वागत किया और इसे पूर्वोत्तर तथा देश की राजनीति से जुड़ा महत्वपूर्ण घटनाक्रम बताया।

    रिजिजू ने कहा कि इन विधायकों ने पिछले 12 वर्षों के दौरान पूर्वोत्तर में हुए बदलाव और विकास कार्यों को देखा है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार की नीतियों और पूर्वोत्तर के विकास को लेकर किए गए कामों से प्रभावित होकर इन विधायकों ने बीजेपी के साथ जुड़ने का फैसला किया है।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर में हुए विकास कार्यों और क्षेत्र के लोगों के साथ संपर्क को भी इस बदलाव से जोड़कर बताया। बीजेपी का कहना है कि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, विकास योजनाओं और केंद्र की नीतियों का असर राजनीतिक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है।

    आठ विधायकों के बीजेपी में शामिल होने का घटनाक्रम 2028 में होने वाले मेघालय विधानसभा चुनाव से पहले सामने आया है। इस बदलाव से राज्य विधानसभा में दलों की संख्या और राजनीतिक ताकत का समीकरण बदला है।

    किर्मेन श्याला सहित इन विधायकों की बीजेपी में एंट्री के बाद पार्टी अब मेघालय विधानसभा में 10 सदस्यों के साथ पहले की तुलना में मजबूत स्थिति में है। वहीं UDP के 12 में से आठ विधायकों के अलग होने से क्षेत्रीय दल के सामने अपनी विधानसभा स्थिति को लेकर नई चुनौती खड़ी हुई है।

    यह घटनाक्रम मेघालय की आगामी राजनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी से जुड़े राजनीतिक समीकरण धीरे-धीरे आकार ले रहे हैं।

  • यूपी विधान परिषद में सपा का नेतृत्व बदला, मो. जासमीर अंसारी होंगे नेता प्रतिपक्ष, अखिलेश यादव ने दी मंजूरी

    यूपी विधान परिषद में सपा का नेतृत्व बदला, मो. जासमीर अंसारी होंगे नेता प्रतिपक्ष, अखिलेश यादव ने दी मंजूरी

    लखनऊ। समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश विधान परिषद में अपने नेतृत्व में बदलाव किया गया है। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मो. जासमीर अंसारी को विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बनाए जाने को मंजूरी दे दी है। जासमीर अंसारी मौजूदा नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव की जगह जिम्मेदारी संभालेंगे।

    जासमीर अंसारी मूल रूप से सीतापुर के रहने वाले हैं। वह वर्तमान में विधान परिषद में सपा के उपनेता की भूमिका में हैं। विधान परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें सपा के उपनेता के तौर पर दर्ज किया गया है।

    पार्टी के इस फैसले के बाद विधान परिषद में सपा के नेतृत्व की जिम्मेदारी जासमीर अंसारी के पास आने की बात कही जा रही है। उनके नाम पर अखिलेश यादव की मंजूरी के बाद अब औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है।

    जासमीर अंसारी को नई जिम्मेदारी दिए जाने की खबर से सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। पार्टी के भीतर इसे आगामी राजनीतिक परिस्थितियों और संगठनात्मक रणनीति में बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

  • SIR विवाद में 14 आपत्तियों का दावा सामने आने के बाद बढ़ी हलचल, मतदाता सूची और आयोग की प्रक्रिया पर सवाल

    SIR विवाद में 14 आपत्तियों का दावा सामने आने के बाद बढ़ी हलचल, मतदाता सूची और आयोग की प्रक्रिया पर सवाल


    नई दिल्ली ।
    स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी इस प्रक्रिया में नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा शामिल करने के साथ चुनावी डेटा के प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठे हैं। इसी बीच चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और दोबारा जोड़ने, चुनावी डेटा तक पहुंच तथा डिजिटल सिस्टम से जुड़े फैसले शामिल हैं। दोनों आयुक्तों ने कुछ मामलों में फैसलों और आदेशों की जानकारी उन्हें नहीं होने तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया से जुड़े सवाल भी उठाए।

    विवाद का एक प्रमुख मुद्दा फॉर्म-6 में किया गया बदलाव है। नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले इस फॉर्म में SIR से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी शामिल की गई। आवेदकों से यह जानकारी मांगी गई कि उनका या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पिछली SIR वाली मतदाता सूची में मौजूद था या नहीं।

    विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि वैधानिक फॉर्म में इस तरह का परिवर्तन करने के लिए नियमों में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए। इसके बाद सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई। दोनों आयुक्तों की ओर से कुछ बदलावों और प्रक्रियाओं पर असहमति दर्ज किए जाने की बात सामने आई है।

    मतदाता डेटा के केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल उठाए गए। आपत्तियों में चुनावी रोल से जुड़े डिजिटल डेटाबेस तक राज्य स्तर के अधिकारियों की पहुंच और रिकॉर्ड में बदलाव करने की व्यवस्था पर चिंता जताई गई। अधिकारियों की वैधानिक भूमिका और तकनीकी सिस्टम के बीच अधिकारों को लेकर भी सवाल सामने आए।

    पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामलों में दाखिल अपीलों को लेकर भी आपत्ति दर्ज की गई। सुखबीर सिंह संधू ने सवाल उठाया कि मतदाता सूची से संबंधित मामलों में अपील दाखिल करने की अनुमति किसने दी और इस प्रक्रिया की जानकारी संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं थी।

    गोवा में तकनीकी समस्या से जुड़ा एक मामला भी सामने आया। सॉफ्टवेयर से संबंधित परेशानी के कारण 97 ऐसे मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो पाए, जिन्हें संबंधित प्रक्रिया के तहत पात्र माना गया था। इस घटनाक्रम ने चुनावी प्रक्रिया में तकनीकी व्यवस्था की भूमिका को लेकर भी चर्चा बढ़ाई।

    इसी बीच अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए SIR को लेकर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बड़े स्तर पर मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव कराने के बजाय चुनाव की स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है। इन दावों को राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

    आशुतोष रांका ने भी चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत सभी प्रमुख फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए और निर्णयों पर सहमति थी। आयोग ने अंदरूनी असहमति की उस तस्वीर को स्वीकार नहीं किया है जो आपत्तियों के आधार पर चर्चा में आई है।

    इस तरह SIR विवाद अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है। फॉर्म-6 में बदलाव, चुनावी डेटा की व्यवस्था, अधिकारियों की पहुंच और निर्णय लेने की प्रक्रिया भी बहस के केंद्र में आ गई है। एक तरफ दो आयुक्तों की आपत्तियां चर्चा में हैं, जबकि दूसरी तरफ आयोग सभी प्रमुख फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया बता रहा है।

  • 14 साल की उम्र में जापान पहुंचे थे जय मीणा अब एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला सॉफ्ट टेनिस मेडल

    14 साल की उम्र में जापान पहुंचे थे जय मीणा अब एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला सॉफ्ट टेनिस मेडल


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ी जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में इतिहास रच दिया है। पुरुष सिंगल्स स्पर्धा में मीणा ने भारत के लिए इस खेल का पहला एशियन गेम्स पदक अपने नाम किया। सेमीफाइनल में उन्हें जापान के ताकुया कुरोसाका के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचने के कारण उनका ब्रॉन्ज मेडल पक्का हो गया। इस उपलब्धि के साथ जय मीणा ने सॉफ्ट टेनिस में भारत का नाम एशियन गेम्स के पदक विजेताओं में दर्ज करा दिया।

    मीणा का यह सफर आसान नहीं रहा। क्वार्टर फाइनल में उन्होंने शेरविन नुगुइट के खिलाफ बेहद रोमांचक मुकाबला खेला। निर्णायक गेम में एक समय वह पीछे चल रहे थे लेकिन उन्होंने शानदार वापसी करते हुए लगातार चार अंक हासिल किए। इस वापसी ने उन्हें 4-3 से जीत दिलाई और इसी के साथ उन्होंने सेमीफाइनल में जगह बना ली। क्वार्टर फाइनल की इस जीत के साथ ही भारत का सॉफ्ट टेनिस में पहला एशियन गेम्स पदक भी सुनिश्चित हो गया था। सेमीफाइनल में जापानी खिलाड़ी के खिलाफ हार के बाद मीणा का अभियान ब्रॉन्ज मेडल के साथ समाप्त हुआ।

    जय मीणा की सॉफ्ट टेनिस तक पहुंचने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। शुरुआत में उनकी दिलचस्पी क्रिकेट में थी और वह क्रिकेटर बनना चाहते थे। देवास के पायनियर पब्लिक स्कूल में दाखिले के बाद उनका ध्यान स्कूल में बने सॉफ्ट टेनिस कोर्ट की तरफ गया। शुरुआत में वह खिलाड़ियों को खेलते हुए देखते थे और बाद में बॉल बॉय के तौर पर उनकी मदद करने लगे। इसी दौरान इस खेल के प्रति उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने खुद सॉफ्ट टेनिस खेलना शुरू कर दिया।

    स्कूल और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं से शुरुआत करने वाले जय मीणा ने जल्द ही राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। महज 14 साल की उम्र में उन्होंने जापान जाकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। वर्ष 2022 में गुजरात में आयोजित 36वें नेशनल गेम्स में उन्होंने पुरुष सिंगल्स का गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने पुरुष टीम और डबल्स स्पर्धा में भी मध्य प्रदेश के लिए पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई।

    इसके बाद जय मीणा की उपलब्धियों का सिलसिला लगातार आगे बढ़ता रहा। वर्ष 2025 में वह पुरुष सिंगल्स के नेशनल चैंपियन बने। एशियन गेम्स 2022 में भी उन्होंने पुरुष सिंगल्स में क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। इसके साथ ही पुरुष टीम स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई।

    वर्ष 2024 में जय मीणा ने आध्या तिवारी के साथ वर्ल्ड सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप के मिक्स्ड डबल्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने भारत को इस प्रतियोगिता में पहला पदक दिलाया। इसके बाद 2025 की एशियन सॉफ्ट टेनिस चैंपियनशिप में भी उन्होंने पुरुष सिंगल्स में सेमीफाइनल तक पहुंचकर ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया और इस प्रतियोगिता में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बने।

    जय मीणा के लिए एशियन गेम्स 2026 का ब्रॉन्ज मेडल उनके लंबे सफर की एक और बड़ी उपलब्धि है। टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप के एथलीट के रूप में यह उनका तीसरा एशियन गेम्स है। इससे पहले वह जकार्ता 2018 और हांगझोऊ 2022 में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अब नागोया में सॉफ्ट टेनिस का पहला भारतीय एशियन गेम्स पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है।

  • एशियन गेम्स में भारत का कबड्डी में दबदबा लगातार तीसरी जीत के साथ सेमीफाइनल का टिकट पक्का

    एशियन गेम्स में भारत का कबड्डी में दबदबा लगातार तीसरी जीत के साथ सेमीफाइनल का टिकट पक्का


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय पुरुष कबड्डी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। बुधवार को टोकाई सिटिजन्स जिम्नेजियम में खेले गए ग्रुप ए के मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को 48-25 से हराया। इस जीत के साथ भारतीय टीम ने ग्रुप चरण में लगातार तीसरी जीत दर्ज की और सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ अपना पदक भी सुनिश्चित कर लिया।

    सुनील कुमार की कप्तानी में भारतीय टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत जापान के खिलाफ जीत के साथ की थी। इसके बाद दक्षिण कोरिया को भी भारत ने 63-31 के बड़े अंतर से हराया। बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया और विरोधी टीम को दबाव में रखा। रेडिंग में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार अंक जुटाए जबकि डिफेंस ने बांग्लादेश के रेडर्स को ज्यादा मौके नहीं दिए।

    पहले हाफ में भारत का दबदबा पूरी तरह नजर आया। टीम ने सफल रेड से 18 अंक हासिल किए और सात बोनस अंक अपने खाते में जोड़े। भारतीय डिफेंस ने बांग्लादेश को दो बार ऑलआउट भी किया। इसके चलते भारत ने हाफ टाइम तक 29-9 की मजबूत बढ़त बना ली। दूसरी तरफ बांग्लादेश की टीम भारतीय डिफेंस के सामने लगातार संघर्ष करती नजर आई। पहले हाफ में उसे पांच आउट अंक और तीन बोनस अंक ही मिल सके। एक सुपर टैकल से भी बांग्लादेश को अंक मिला लेकिन भारतीय टीम की बड़ी बढ़त पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा।

    दूसरे हाफ की शुरुआत में भारतीय टीम ने अपनी रणनीति में बदलाव किया। अर्जुन देशवाल को देवांक दलाल की जगह मैदान पर उतारा गया। इसके बाद बांग्लादेश ने अपने खेल में सुधार किया और भारतीय टीम पर दबाव बनाने की कोशिश की। बांग्लादेश ने दूसरे हाफ में आठ आउट अंक और आठ बोनस अंक हासिल किए। इसके बावजूद भारत ने अपनी लय नहीं टूटने दी। भारतीय टीम ने दूसरे हाफ में 19 अंक जुटाए और एक बार फिर बांग्लादेश को ऑलआउट किया।

    भारत ने पूरे मुकाबले के दौरान अपनी बढ़त को बनाए रखा और अंत में 48-25 से मुकाबला अपने नाम कर लिया। यह जीत इसलिए भी अहम रही क्योंकि इसके साथ भारतीय टीम ने ग्रुप ए में लगातार तीसरी जीत दर्ज की और नॉकआउट चरण में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली।

    भारतीय टीम का ग्रुप चरण का आखिरी मुकाबला गुरुवार को चीनी ताइपे के खिलाफ होगा। सेमीफाइनल में जगह पहले ही पक्की होने के बाद इस मुकाबले में भी टीम की नजर अपनी जीत की लय बरकरार रखने पर होगी। कबड्डी प्रतियोगिता में सेमीफाइनल मुकाबले 25 सितंबर को खेले जाएंगे जबकि पुरुष वर्ग का स्वर्ण पदक मुकाबला 26 सितंबर को होगा।

    भारतीय पुरुष कबड्डी टीम एशियन गेम्स में अपने अभियान को खिताबी जीत तक पहुंचाने के इरादे से मैदान में है। बांग्लादेश के खिलाफ मिली जीत ने टीम को नॉकआउट चरण से पहले एक और मजबूत आधार दिया है। अब सेमीफाइनल में भारत का सामना किस टीम से होगा यह ग्रुप चरण के बाकी मुकाबलों के परिणाम के बाद तय होगा।

  • राइजा ढिल्लों चौथे और परिनाज धालीवाल आठवें स्थान पर व्यक्तिगत स्कीट में मेडल से रह गईं दूर

    राइजा ढिल्लों चौथे और परिनाज धालीवाल आठवें स्थान पर व्यक्तिगत स्कीट में मेडल से रह गईं दूर


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाज राइजा ढिल्लों और परिनाज धालीवाल ने टीम स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया लेकिन व्यक्तिगत स्कीट स्पर्धा में दोनों निशानेबाज मेडल जीतने से चूक गईं। आइची नागोया में आयोजित प्रतियोगिता में राइजा ढिल्लों चौथे स्थान पर रहीं जबकि परिनाज धालीवाल को आठवें स्थान से संतोष करना पड़ा। दोनों खिलाड़ियों ने क्वालिफिकेशन में 125 में से 111 शॉट का स्कोर हासिल करके फाइनल में जगह बनाई थी लेकिन पदक मुकाबले में उनका प्रदर्शन टीम स्पर्धा जैसा नहीं रहा।

    तीन दिनों तक चले क्वालिफिकेशन राउंड के बाद राइजा और परिनाज ने समान 111 का स्कोर बनाया। क्वालिफिकेशन में राइजा आठवें स्थान पर और परिनाज नौवें स्थान पर रहते हुए फाइनल के लिए पहुंचीं। फाइनल में भारतीय खिलाड़ियों के पास पदक जीतने का मौका था लेकिन मुकाबला आगे बढ़ने के साथ दोनों निशानेबाज पोडियम की दौड़ से बाहर हो गईं। राइजा चौथे स्थान तक पहुंचीं जबकि परिनाज आठवें स्थान पर रहीं।

    इससे पहले महिला स्कीट टीम स्पर्धा में राइजा ढिल्लों परिनाज धालीवाल और माहेश्वरी चौहान की भारतीय टीम ने कांस्य पदक जीता था। भारतीय टीम ने क्वालिफिकेशन में कुल 331 का स्कोर हासिल किया था। चीन की टीम ने 347 के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि कजाकिस्तान ने 336 के स्कोर के साथ रजत पदक अपने नाम किया। इस तरह महिला स्कीट टीम स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने पोडियम पर जगह बनाकर देश के खाते में एक और पदक जोड़ा।

    शूटिंग में भारत का प्रदर्शन केवल महिला स्कीट टीम स्पर्धा तक सीमित नहीं रहा। पुरुषों की स्कीट टीम स्पर्धा में भी भारतीय निशानेबाजों ने कांस्य पदक हासिल किया। ओलंपियन अनंतजीत सिंह नरुका मैराज अहमद खान और भवतेघ सिंह की भारतीय टीम ने कुल 346 का स्कोर बनाया और तीसरा स्थान हासिल किया। इस स्पर्धा में कतर ने स्वर्ण पदक जबकि कुवैत ने रजत पदक जीता। इस पदक के साथ आइची नागोया में शूटिंग में भारत के पदकों की संख्या सात तक पहुंच गई।

    पुरुषों की व्यक्तिगत स्कीट स्पर्धा के क्वालिफिकेशन में अनंतजीत सिंह नरुका भारतीय चुनौती को फाइनल तक पहुंचाने वाले एकमात्र निशानेबाज रहे। उन्होंने 125 में से 119 का स्कोर किया। वहीं मैराज अहमद खान ने 116 और भवतेघ सिंह ने 111 का स्कोर बनाया। दोनों निशानेबाज फाइनल में जगह नहीं बना सके।

    शूटिंग के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में भी भारतीय खिलाड़ियों को पदक के लिए इंतजार करना पड़ा। ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर महिलाओं की व्यक्तिगत 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल में पांचवें स्थान पर रहीं। उन्होंने फाइनल में 181.1 का स्कोर किया लेकिन पोडियम तक नहीं पहुंच सकीं।

    महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल टीम स्पर्धा में भी भारत चौथे स्थान पर रहा। भारतीय टीम ने 1719 के स्कोर के साथ 44 एक्स दर्ज किए। वियतनाम ने समान 1719 के स्कोर के साथ 46 एक्स दर्ज करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। चीन ने 1735 और 56 एक्स के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि दक्षिण कोरिया ने 1730 और 55 एक्स के साथ रजत पदक अपने नाम किया।

    भारतीय शूटिंग दल ने एशियन गेम्स में अलग अलग स्पर्धाओं में लगातार चुनौती पेश की है। राइजा और परिनाज के लिए टीम स्पर्धा का कांस्य पदक उपलब्धि रहा लेकिन व्यक्तिगत मुकाबले में पदक से चूकना निराशाजनक रहा। अब भारतीय निशानेबाजों की नजर बाकी स्पर्धाओं पर होगी जहां टीम पदकों की संख्या को और बढ़ाने की कोशिश करेगी।

  • पाकिस्तान टीम का साथ छोड़ नीदरलैंड्स पहुंचे एशले नोफके दो साल के करार के साथ संभाली बड़ी जिम्मेदारी

    पाकिस्तान टीम का साथ छोड़ नीदरलैंड्स पहुंचे एशले नोफके दो साल के करार के साथ संभाली बड़ी जिम्मेदारी


    नई दिल्ली । नीदरलैंड्स क्रिकेट टीम को नया हेड कोच मिल गया है। रॉयल डच क्रिकेट एसोसिएशन ने ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज एशले नोफके को पुरुष क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया है। नोफके के साथ शुरुआती तौर पर दो साल का करार किया गया है जो 2028 तक चलेगा। वह रयान कुक की जगह लेंगे। रयान कुक ने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताने के लिए अपने पद से हटने का फैसला किया था। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद नोफके के सामने नीदरलैंड्स टीम को 2027 वनडे वर्ल्ड कप और 2028 टी20 वर्ल्ड कप के क्वालिफिकेशन अभियान में आगे ले जाने की चुनौती होगी।

    49 वर्षीय एशले नोफके को अंतरराष्ट्रीय और फ्रेंचाइजी क्रिकेट दोनों का लंबा अनुभव है। वह हाल तक पाकिस्तान पुरुष क्रिकेट टीम के साथ सहायक कोच और बॉलिंग कोच की भूमिका निभा रहे थे। पाकिस्तान टीम के साथ उनके कार्यकाल में उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने का महत्वपूर्ण अनुभव मिला। अब नीदरलैंड्स क्रिकेट ने उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें टीम की कमान सौंपी है।

    नई जिम्मेदारी पर नोफके ने नीदरलैंड्स पुरुष टीम के साथ काम करने को लेकर उत्साह जताया है। उन्होंने टीम को प्रतिभाशाली और प्रेरित खिलाड़ियों का समूह बताया। उनका कहना है कि वह खिलाड़ियों के विकास को आगे बढ़ाने के साथ पूरे क्रिकेट प्रोग्राम को मजबूत करने पर ध्यान देंगे। नोफके के अनुसार उनकी कार्यशैली रणनीति या योजना से पहले खिलाड़ियों के साथ जुड़ाव बनाने से शुरू होती है। वह जल्द ही टीम के साथ काम शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं।

    खिलाड़ी के तौर पर भी नोफके का करियर काफी लंबा रहा है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए एक वनडे और दो टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले। घरेलू क्रिकेट में उन्होंने क्वींसलैंड और वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया का प्रतिनिधित्व किया। इंग्लैंड में उन्होंने डरहम मिडलसेक्स ग्लूसेस्टरशायर और वॉर्सेस्टरशायर जैसी काउंटी टीमों के लिए भी क्रिकेट खेला। वह 2008 में आयोजित पहले आईपीएल मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की टीम का हिस्सा भी रहे थे। उस मुकाबले में आरसीबी का सामना कोलकाता नाइट राइडर्स से हुआ था।

    दाएं हाथ के तेज गेंदबाज के रूप में नोफके ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 386 विकेट हासिल किए और 3766 रन भी बनाए। उनके करियर की खास उपलब्धियों में एक घरेलू सीजन में 500 से ज्यादा रन और 50 विकेट हासिल करना भी शामिल है। वह ऐसा करने वाले चुनिंदा ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों में रहे हैं।

    खेल से संन्यास के बाद कोचिंग में आने पर भी नोफके ने लगातार अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ब्रिस्बेन हीट को महिला बिग बैश लीग का खिताब दिलाने में भूमिका निभाई। इसके अलावा क्वींसलैंड फायर के साथ डब्ल्यूएनसीएल ट्रॉफी जीती और द हंड्रेड में लंदन स्पिरिट को उसका पहला खिताब दिलाने वाले कोचिंग स्टाफ का हिस्सा रहे। भारत में आयोजित महिला प्रीमियर लीग में भी वह यूपी वॉरियर्स के सहायक कोच और गेंदबाजी कोच की भूमिका निभा चुके हैं।

    नोफके ने न्यूजीलैंड में ओटागो के पुरुष क्रिकेट प्रोग्राम के साथ भी काम किया। इसके बाद वह पाकिस्तान की पुरुष टीम से जुड़े जहां उन्होंने माइक हेसन के साथ सहायक कोच और बॉलिंग लीड के तौर पर जिम्मेदारी संभाली। पाकिस्तान टीम के साथ रहते हुए टीम ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप में सुपर 8 चरण और 2025 एशिया कप के फाइनल तक का सफर तय किया।

    अब नीदरलैंड्स के साथ नोफके के सामने एक नई चुनौती है। टीम को अगले कुछ वर्षों में बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए क्वालिफाई करने की दिशा में आगे बढ़ाना उनका प्रमुख लक्ष्य होगा। उनके अंतरराष्ट्रीय अनुभव और विभिन्न क्रिकेट परिस्थितियों में काम करने की क्षमता को देखते हुए नीदरलैंड्स क्रिकेट को उनसे टीम के विकास में महत्वपूर्ण योगदान की उम्मीद होगी।

  • 19-0 फिर 17-1 और अब 20-1 भारतीय महिला हॉकी टीम का एशियन गेम्स में गोलों का तूफान

    19-0 फिर 17-1 और अब 20-1 भारतीय महिला हॉकी टीम का एशियन गेम्स में गोलों का तूफान


    नई दिल्ली । एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला हॉकी टीम का शानदार अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। बुधवार को पूल बी के मुकाबले में भारत ने थाईलैंड को 20-1 के बड़े अंतर से हराकर टूर्नामेंट में लगातार तीसरी जीत दर्ज की। गिफू प्रीफेक्चुरल ग्रीन स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में भारतीय खिलाड़ियों ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और पूरे मैच के दौरान थाईलैंड की टीम पर दबाव बनाए रखा। इस जीत के साथ भारतीय टीम पूल बी में शीर्ष स्थान पर बनी हुई है।

    भारत की इस बड़ी जीत की सबसे बड़ी स्टार दीपिका रहीं जिन्होंने अकेले नौ गोल दागे। ड्रैग फ्लिक विशेषज्ञ दीपिका ने अपने सभी नौ गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए किए। उन्होंने लगातार भारतीय हमलों को गोल में बदलकर थाईलैंड की रक्षापंक्ति को मुश्किल में डाल दिया। दीपिका का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास रहा क्योंकि इससे पहले उज्बेकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने आठ गोल किए थे। थाईलैंड के खिलाफ नौ गोल के साथ उन्होंने अपना ही रिकॉर्ड बेहतर कर दिया। टूर्नामेंट में तीन मैचों के बाद दीपिका के नाम 20 गोल हो चुके हैं।

    भारत के लिए नवनीत कौर ने भी शानदार प्रदर्शन किया और चार गोल किए। रुतुजा पिसल ने हैट्रिक पूरी की। इसके अलावा नेहा लालरेम्सियामी साक्षी राणा और कप्तान सलीमा टेटे ने भी गोल कर टीम की जीत में योगदान दिया। भारतीय टीम के हमलों में लगातार तेजी और तालमेल नजर आया। पेनल्टी कॉर्नर के मौकों को भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार तरीके से भुनाया और थाईलैंड को वापसी का कोई बड़ा अवसर नहीं दिया।

    थाईलैंड की टीम पूरे मुकाबले में भारतीय डिफेंस पर ज्यादा दबाव नहीं बना सकी। उसे मैच का एकमात्र गोल चौथे क्वार्टर के अंतिम हिस्से में मिला। सुपांसा समंसो ने पेनल्टी कॉर्नर के जरिए गोल किया। उनके ड्रैग फ्लिक में हल्का डिफ्लेक्शन हुआ और गेंद भारतीय गोल में पहुंच गई। इसके बावजूद भारत की बढ़त इतनी बड़ी थी कि इस गोल से मुकाबले की दिशा पर कोई असर नहीं पड़ा।

    भारतीय टीम ने इससे पहले टूर्नामेंट की शुरुआत उज्बेकिस्तान के खिलाफ 19-0 की बड़ी जीत से की थी। इसके बाद भारत ने इंडोनेशिया को 17-1 से हराया। अब थाईलैंड के खिलाफ 20-1 की जीत के साथ भारत ने लगातार तीसरी बार बड़े अंतर से मुकाबला अपने नाम किया है। शुरुआती तीन मुकाबलों में भारतीय टीम ने कुल 56 गोल किए हैं जबकि उसके खिलाफ केवल दो गोल हुए हैं।

    भारतीय महिला हॉकी टीम का अगला मुकाबला शुक्रवार को जापान से होना है। यह मैच नॉकआउट चरण से पहले टीम के लिए अहम होगा। भारत की टीम 2023 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में जीते गए कांस्य पदक से बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश में है। महिला हॉकी में भारत ने आखिरी बार 1982 में एशियन गेम्स का स्वर्ण पदक जीता था। इस बार टीम की नजर लंबे अंतराल के बाद फिर से स्वर्ण पदक हासिल करने पर है।

    लगातार तीन मुकाबलों में जिस तरह भारतीय टीम ने गोल किए हैं उससे उसका आक्रामक खेल बेहद प्रभावशाली नजर आया है। खासतौर पर दीपिका की पेनल्टी कॉर्नर पर शानदार फिनिशिंग टीम के लिए बड़ा हथियार बनी हुई है। अब जापान के खिलाफ मुकाबले में भारतीय टीम इसी लय को बरकरार रखना चाहेगी और नॉकआउट चरण से पहले अपनी स्थिति और मजबूत करने की कोशिश करेगी।