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  • Mohammad Azharuddin को भारतीय टीम में डेब्यू का इंतजार, चयन पर टिकी नजरें

    Mohammad Azharuddin को भारतीय टीम में डेब्यू का इंतजार, चयन पर टिकी नजरें


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट में मोहम्मद अख्तरुद्दीन के नाम पर एक दिग्गज कैप्टन की छवि सामने आती है, लेकिन इस कहानी के नायक कोई और नहीं हैं। ये है 31 साल की कहानी-बल्लेबाज़ मोहम्मद बबाज़ुद्दीन की, जिसकी अब भी टीम इंडिया में डेब्यू का इंतज़ार कर रहे हैं।

    नाम से शुरू हुआ क्रिकेट का सफर

    22 मार्च 1994 को केरल के थलंगारा में सऊदी अरब-उद्दीन के परिवार वाले पूर्व भारतीय कैप्टन के बड़े प्रशंसक थे। यही वजह रही कि बेटे का नाम भी उसी दिग्गज के नाम पर रखा गया। नाम का असर ऐसा हो रहा है कि बड़े स्टार्स ने भी क्रिकेट में अपना करियर चुना और बल्ले-बल्लेबाज के रूप में अपनी पहचान बनाई।

    घरेलू क्रिकेट में लगातार मेहनत

    बैज़ुद्दीन ने 2015 में प्रथम श्रेणी और लिस्ट-ए क्रिकेट में शुरुआत की, जबकि 2016 में टी20 क्रिकेट में कदम रखा। पिछले एक दशक से वह घरेलू क्रिकेट में लगातार खेल रहे हैं और केरल क्रिकेट टीम का अहम हिस्सा बने हुए हैं।

    आंकड़े क्या कहते हैं?

    उनके प्रदर्शन पर नजर डाली तो-

    प्रथम श्रेणी (प्रथम श्रेणी): 43 मैच, 1932 रन, 2 शतक, 11 रन (सर्वश्रेष्ठ 177*)
    लिस्ट-ए: 55 मैच, 1163 रन, 1 शतक, 8 शतक
    टी20: 51 मैच, 878 रन, स्ट्राइक रेट 129.68, 1 शतक (सर्वश्रेष्ठ 137*)

    नौकरानी भी उनका रिकॉर्ड मजबूत है—

    एफसी: 109 कैच, 16 आर्किटेक्चर
    सूची-ए: 42 कैच, 6 आर्किटेक्चर
    टी20: 29 कैच, 1 कैच

    टीम इंडिया में जगह की कड़ी टक्कर

    भारतीय टीम में रिले-बल्लेबाज की जगह बनाना आसान नहीं है। संजू सैमसन, ईशान किशन, केएल राहुल, जितेश शर्मा, ऋषभ पंत और ध्रुव ज्यूरेल जैसे खिलाड़ी पहले से ही इस रेस में शामिल हैं।
    ऐसे में बांग्लादेश के लिए टीम इंडिया में जगह बनाना एक बड़ी चुनौती है।

    आगे का रास्ता क्या है?

    बज़्ज़ुद्दीन के पास अनुभव और प्रदर्शन दोनों हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जगह बनाने के लिए उन्हें लगातार बेहतर प्रदर्शन करना होगा-खासतौर पर बड़े टूर्नामेंट और हाई-प्रेशर मैच में। अगर वह घरेलू और आईपीएल जैसे मंचों पर खुद को साबित करते हैं, तो उनकी टीम इंडिया का सपना जरूर पूरा हो सकता है।

  • ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी उपलब्धि, भारत ने फिर पार किया 1 अरब टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा

    ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी उपलब्धि, भारत ने फिर पार किया 1 अरब टन कोयला उत्पादन का आंकड़ा


    नई दिल्ली देश की ऊर्जा ऊर्जा को पूरा करने की दिशा में भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। लगातार दूसरे वर्ष भारत ने 1 अरब टन (बिलियन टन) कोयला उत्पादन का लक्ष्य पार कर लिया है, जो आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम उठाने पर विचार कर रहा है।

    20 मार्च को ऐतिहासिक लक्ष्य प्राप्त हुआ

    कोयला मंत्रालय के अनुसार, 20 मार्च को यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई। मंत्रालय ने इसे ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता और औद्योगिक विकास के लिए बेहद अहम बताया है। यह सफलता न केवल प्लाज्मा बिजली की मांग को पूरा करने में मदद करेगी, बल्कि प्लांट को प्लांटेशन की आपूर्ति भी सुनिश्चित करेगी।

    सहयोग और रणनीति से मिली सफलता

    मंत्रालय का कहना है, इस उपलब्धि के पीछे बेहतर योजना, प्रभावशाली इंजीनियर और मजबूत शक्तिशाली चेन शेयरों की अहम भूमिका है। कोयला उत्पादन एवं वितरण में सभी हितधारकों के बीच इस लक्ष्य को संभव बनाया गया।

    सेक्टर सेक्टर में भी सुधार

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में देश के आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की संयुक्त यूनिट 2.3% बढ़ी है।

    कोयला उत्पादन: 2.3% वृद्धि
    बिजली उत्पादन: 0.5% वृद्धि
    ये दस्तावेज हैं कि देश की दृष्टि मजबूत संरचना मजबूत हो रही है।

    थर्मल पावर प्लांट्स के पास ऑटोमोबाइल स्टॉक

    पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बावजूद देश के ताप विद्युत संयंत्रों के पास करीब 53.41 मिलियन टन कोयला भंडार मौजूद है, जिसकी करीब 23 दिन की जरूरत है। इसके अलावा, खदानों के पास भी अतिरिक्त भंडार रखा जा रहा है, ताकि भविष्य की मांग को आसानी से पूरा किया जा सके।

    जमाकर्ता की भूमिका सुनिश्चित करने में

    कोल इंडिया लिमिटेड भी छोटे, मध्यम और सभी बड़े उद्योगों के लिए मजबूत कोयला खदानों के लिए सक्रिय कदम उठा रही है।

    आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम

    इस उपलब्धि में यह शामिल है कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्थिर आपूर्ति, बेहतर प्रबंधन और व्यापक उत्पादन क्षमता देश की आर्थिक प्रगति को भी नई गति दे रही है।

  • गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने का मंत्र ताजे जूस से शरीर को रखें ठंडा और एक्टिव

    गर्मियों में डिहाइड्रेशन से बचने का मंत्र ताजे जूस से शरीर को रखें ठंडा और एक्टिव


    नई दिल्ली: भारत में गर्मियों का असर तेज होते ही स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को खानपान में सावधानी बरतने और शरीर को हाइड्रेट रखने पर जोर दिया है तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी तेजी से होने लगती है जिससे थकान चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आती हैं ऐसे में ताजे और ठंडे प्राकृतिक जूस शरीर को राहत देने का सबसे आसान और प्रभावी उपाय बनकर सामने आए हैं

    विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में ऐसे पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए जो शरीर को तुरंत ठंडक पहुंचाने के साथ साथ ऊर्जा भी दें इस लिहाज से तरबूज का रस सबसे लोकप्रिय विकल्प माना जाता है इसमें लगभग 90 प्रतिशत पानी होता है जो शरीर को तुरंत हाइड्रेट करता है और गर्मी से राहत दिलाता है

    इसी तरह नारियल पानी को प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक कहा जाता है इसमें मौजूद पोटेशियम और मिनरल्स शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं और थकान को दूर करते हैं गर्मियों में नियमित रूप से इसका सेवन शरीर को तरोताजा बनाए रखता है

    नींबू और पुदीना से बना जूस भी बेहद फायदेमंद माना जाता है यह न केवल शरीर का तापमान नियंत्रित करता है बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाता है खीरे का जूस शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है और पेट को ठंडक पहुंचाता है जिससे गर्मी में होने वाली जलन और एसिडिटी से राहत मिलती है

    पारंपरिक भारतीय पेय जैसे आम पन्ना और कोकम शर्बत भी लू से बचाने में काफी कारगर हैं ये शरीर को ठंडा रखने के साथ साथ ऊर्जा प्रदान करते हैं और हीट स्ट्रोक के खतरे को कम करते हैं वहीं अनानास और संतरे का जूस विटामिन सी से भरपूर होता है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दिन के किसी भी समय इन जूसों का सेवन किया जा सकता है चाहे सुबह की शुरुआत करनी हो दोपहर की गर्मी से राहत चाहिए या शाम को थकान दूर करनी हो ये सभी विकल्प हर समय लाभकारी हैं खास बात यह है कि इन्हें घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और इसमें किसी प्रकार के प्रिजर्वेटिव या अतिरिक्त चीनी की जरूरत नहीं होती

    विशेषज्ञ पैकेज्ड और डिब्बाबंद जूस से बचने की सलाह देते हैं क्योंकि इनमें अक्सर अतिरिक्त शुगर और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं इसके मुकाबले ताजे फल और सब्जियों से बने जूस अधिक पोषक और सुरक्षित होते हैं

    गर्मियों में स्वस्थ रहने का सबसे सरल तरीका यही है कि शरीर को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ मिलते रहें और इसके लिए प्राकृतिक जूस एक बेहतरीन विकल्प हैं जो न केवल हाइड्रेशन बनाए रखते हैं बल्कि शरीर को ठंडा और ऊर्जावान भी रखते हैं

  • ग्रीन एनर्जी और पावर ग्रिड पर बढ़ेगा सहयोग, Manohar Lal Khattar ने गिनाए अहम क्षेत्र

    ग्रीन एनर्जी और पावर ग्रिड पर बढ़ेगा सहयोग, Manohar Lal Khattar ने गिनाए अहम क्षेत्र


    नई दिल्ली देश में छोटे उद्यमियों और वित्तीय संस्थानों को मजबूत करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार की नई योजना ‘क्रेडिट सोसाइटी फॉर माइक्रोफाइनेंस इंस्टीट्यूट्स-2.0’ के तहत करीब 36 लाख लोगों को सीधे मिलने का फायदा मिलने का अनुमान है।

    यह योजना क्या है?

    इस स्कॉबी के तहत बैंकों और वित्तीय ग्राहकों को मफाइनेंस के लिए नीचे दिए गए ऋण पर ऋण कवर दिया जाएगा। यह सोसाइटी नेशनल क्रेडिट ट्रस्ट ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड के माध्यम से प्रदान की जाएगी, जिससे लोन डिफॉल्ट की स्थिति में जोखिम कम होगा।

    सरकार का मकसद साफ है- बैंकों को गैर-लाभकारी बनाना ताकि वे एनबीएफसी-एमएफआई और अन्य माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को भारी कर्ज दे सकें, जिससे यह संस्थान आसानी से लोन की सुविधा तक पहुंच सके।

    20,000 करोड़ रुपए तक कर्ज बढ़ाने का लक्ष्य

    इस योजना के तहत सरकार ने करीब 20,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इससे ग्रामीण और फ़्रैंचाइज़ी के लोगों को सस्ती और आसान ऋण मिलें मिलें, जिससे छोटे और उद्यमियों को बढ़ावा मिले।

    कितना उत्पादक कवर?

    सरकार ने अलग-अलग स्थानों के लिए डेमोक्रेट कवर तय किया है-

    छोटे अपलोड के लिए: 80% तक
    मध्यम दर्जे के लिए: 75% तक
    बड़े अपलोड के लिए: 70% तक

    इस कर्ज़ के रिलीज़ वाले प्रोजेक्ट रिस्क का काफी हद तक कम हो जाएगा और वे ज्यादातर संपत्तियों के साथ लोन दे देंगे।

    यह जरूरी क्यों था स्काइप?

    हाल के समय में मैकिनेंस सेक्टर पर वित्तीय दबाव बढ़ा है, जिसके तहत बैंकों ने कर्ज लेने की सलाह दी थी। इसका सीधा असर छोटे बैंकों पर पड़ा, जिसमें लोन मिलना मुश्किल हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा तय के अनुसार यह योजना नए और पुराने दोनों तरह के ऋण बैंकों को कवर करने के लिए है, जिससे सेक्टर में स्थिरता आएगी।

    वित्तीय समावेशन को बढ़ावा

    माइक्रोफाइनेंस सर्विसेज सेक्टर के लिए लोगों की जीवन रेखा है, जो पारंपरिक उपकरणों से दूर हैं। यह योजना न केवल छोटे पैमाने पर निवेशकों को आकर्षित करने के लिए है, बल्कि देश में वित्तीय समावेशन को भी नई नजर रखने के लिए।

    कब तक लागू रहेगी योजना?

    यह योजना 30 जून 2026 तक लागू होगी या तब तक, जब तक 20,000 करोड़ रुपये तक का कर्ज़ कवर नहीं दिया जाएगा-जो भी पहले हो।

  • भारत-अफ्रीका साझेदारी में ऊर्जा सेक्टर पर फोकस, Manohar Lal Khattar का बयान

    भारत-अफ्रीका साझेदारी में ऊर्जा सेक्टर पर फोकस, Manohar Lal Khattar का बयान


    नई दिल्ली भारत और अफ्रीकी देशों के बीच ऊर्जा सहयोग अब नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। विद्युत मंत्री मनोहर और लाल रॉकेट ने स्पष्ट किया है कि सामुदायिक ऊर्जा, वन्यजीव आधुनिकीकरण ऊर्जा भंडार जैसे क्षेत्र दोनों के बीच केंद्रीय नामित के केंद्र में हैं।

    साझा लक्ष्य: समावेशी और स्थिर विकास

    भारत इलेक्ट्रिक समिति 2026 में प्रदर्शन करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत और अफ्रीका सामूहिक दुनिया की लगभग एक-तिहाई आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में दोनों का लक्ष्य समावेशी, न्यायसंगत और भविष्य के लिए विकास मॉडल तैयार करना है। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली सिर्फ एक सुविधा नहीं है, बल्कि आर्थिक विकास को गति देना और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना और मजबूत आधार बनाना है।

    ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन वलय’ से वैश्विक बातचीत

    मंत्री ने वन सन, वन वर्ल्ड, वन मित्र पहल को वैश्विक ऊर्जा महत्व के लिए गेमचेंजर के बारे में बताया। इस योजना के तहत सौर ऊर्जा को जोड़े से लेकर दुनिया भर में ऊर्जा की दृष्टि से पर्यटन की कोशिश की जा रही है।

    बुनियादी ढांचे में सहायता का उदाहरण

    भारत और अफ्रीका के बीच सहयोग अब जमीन पर भी दिख रहा है। असोसिएट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और अफ्रीका पावर50 के बीच साझेदारी के तहत केन्या में मिक्सिंग प्रोजेक्ट पर काम हो रहा है, जिससे मजबूत पावर प्लांट तैयार किया जा रहा है।

    सौर ऊर्जा से सशक्त कम्पनियाँ

    अंतर्राष्ट्रीय सूर्य एलायंस सबसे पहले भारत-अफ्रीका देशों के साथ मिलकर अपना सहयोग और मजबूती प्रदान कर रहा है। यह साझेदारी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि चमत्कारिक विकास और तकनीकी सहायता पर आधारित है।

    जमीन पर खोदाई पर जोर

    राज्य मंत्री श्रीपाद येसो नाइक ने कहा कि अब इस साझेदारी को केवल विशेष दृष्टिकोण तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि केंद्रीय स्तर पर इसे जमीनी स्तर पर लागू करना जरूरी है, ताकि सभी को आयुर्विज्ञान और पर्यटन ऊर्जा मिल सके। वहीं, सोयालिनी ने स्थिरता विकास और जल प्रबंधन को प्रगति का आधार बताया।

    ‘मदद नहीं, निवेश करना चाहिए’ – अफ्रीका का संदेश

    एलेन एबोबिन ने साफा से कहा कि अफ्रीका को मदद की नहीं, बल्कि निवेश की जरूरत है। उन्होंने बताया कि अब निवेश पर ध्यान केंद्रित करने, निवेश नेटवर्क के विस्तार और निजी निवेश को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • मध्य पूर्व तनाव के बीच यूएन महासचिव का बड़ा बयान अकेले अमेरिका से नहीं सुलझेगा संकट

    मध्य पूर्व तनाव के बीच यूएन महासचिव का बड़ा बयान अकेले अमेरिका से नहीं सुलझेगा संकट


    नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक शांति और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है उन्होंने खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट में जारी संकट और डोनाल्ड ट्रंप की बोर्ड ऑफ पीस पहल पर सवाल उठाते हुए इसे मौजूदा हालात के लिए पर्याप्त नहीं बताया

    ब्रुसेल्स में यूरोपीय काउंसिल की एक अहम बैठक के दौरान गुटेरेस ने कहा कि ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को गंभीर खतरे में डाल दिया है उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे जटिल संकटों का समाधान किसी एक देश या व्यक्ति के प्रयासों से नहीं बल्कि बहुपक्षीय सहयोग से ही संभव है

    गुटेरेस ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हालिया तनाव के बाद ट्रंप से सीधे बातचीत नहीं की है हालांकि उनकी चर्चा अमेरिकी प्रशासन के अन्य अधिकारियों से जरूर हुई है उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र लगातार खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के संपर्क में है ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके

    होर्मुज स्ट्रेट के महत्व को रेखांकित करते हुए गुटेरेस ने कहा कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है और यहां किसी भी तरह का व्यवधान पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र इस समुद्री मार्ग को फिर से सुरक्षित और सुचारु बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार है

    उन्होंने अतीत का उदाहरण देते हुए ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव का जिक्र किया जिसके तहत रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के दौरान खाद्यान्न और उर्वरकों के निर्यात को संभव बनाया गया था हालांकि बाद में यह समझौता ज्यादा समय तक टिक नहीं सका फिर भी यह बहुपक्षीय प्रयासों की प्रभावशीलता का एक उदाहरण माना जाता है

    ट्रंप की बोर्ड ऑफ पीस पहल पर टिप्पणी करते हुए गुटेरेस ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र इस पहल के साथ सहयोग कर रहा है लेकिन केवल एकतरफा दृष्टिकोण इतने बड़े और जटिल संकट का समाधान नहीं कर सकता उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन किसी भी शांति प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है

    उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में यह पहल काफी हद तक एक व्यक्तिगत परियोजना के रूप में दिखाई दे रही है जिसमें व्यापक वैश्विक भागीदारी की कमी है ऐसे में स्थायी शांति के लिए जरूरी है कि सभी संबंधित पक्षों को साथ लाया जाए और संवाद के जरिए समाधान खोजा जाए

  • बॉलीवुड की सबसे चर्चित दुश्मनी दोस्ती में बदली कैटरीना की पार्टी से ईद तक का सफर

    बॉलीवुड की सबसे चर्चित दुश्मनी दोस्ती में बदली कैटरीना की पार्टी से ईद तक का सफर


    नई दिल्ली: मायानगरी मुंबई में रिश्तों का बदलता रंग अक्सर सुर्खियां बनता रहा है और ऐसा ही एक चर्चित किस्सा जुड़ा है सलमान खान और शाहरुख खान के बीच हुई उस कड़वाहट से जिसने एक समय पूरे बॉलीवुड को दो हिस्सों में बांट दिया था यह विवाद साल 2008 में कैटरीना कैफ की बर्थडे पार्टी के दौरान शुरू हुआ था

    कहा जाता है कि उस रात एक मामूली मजाक और तकरार ने अचानक गंभीर रूप ले लिया और दोनों सुपरस्टार्स के बीच तीखी बहस हो गई हालात इतने बिगड़ गए कि बात हाथापाई तक पहुंचने की चर्चा भी सामने आई हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने स्थिति को संभाल लिया इस घटना के बाद दोनों के रिश्तों में ऐसी दरार आई जो अगले पांच साल तक बनी रही

    इस विवाद के पीछे कई वजहें बताई जाती हैं कुछ लोग इसे ईगो क्लैश मानते हैं तो कुछ इसे उस समय के टीवी शोज की प्रतिस्पर्धा से जोड़कर देखते हैं दरअसल उस दौर में सलमान खान का शो दस का दम काफी सफल रहा था वहीं शाहरुख खान क्या आप पांचवी पास से तेज हैं होस्ट कर रहे थे जो टीआरपी की रेस में पीछे था बताया जाता है कि इसी बात को लेकर मजाक में शुरू हुई छींटाकशी धीरे धीरे गंभीर विवाद में बदल गई

    इस झगड़े का असर सिर्फ दोनों कलाकारों तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर पड़ा बॉलीवुड मानो दो खेमों में बंट गया था निर्माता और निर्देशकों के बीच भी असमंजस की स्थिति बन गई थी कि किसके साथ काम किया जाए क्योंकि एक के साथ काम करने पर दूसरे की नाराजगी का डर बना रहता था अवॉर्ड शो और सार्वजनिक मंचों पर भी दोनों एक दूसरे से दूरी बनाकर रखते थे

    लेकिन वक्त के साथ हालात बदले और साल 2013 में एक खास मौके ने इस जमी बर्फ को पिघला दिया बाबा सिद्दिकी की ईद पार्टी में दोनों खान आमने सामने आए इस मुलाकात को खास बनाने में सलीम खान की भी अहम भूमिका रही बताया जाता है कि जानबूझकर ऐसी बैठने की व्यवस्था की गई जिससे बातचीत की शुरुआत हो सके

    जब सलमान वहां पहुंचे और उन्होंने अपने पिता के पास शाहरुख को बैठे देखा तो उन्होंने पहल करते हुए बातचीत शुरू की इस मुलाकात ने पांच साल पुरानी कड़वाहट को खत्म कर दिया और दोनों ने गिले शिकवे भुलाकर दोस्ती का हाथ बढ़ाया

    बाद में खुद सलमान खान ने भी माना कि वह विवाद बेहद बचकाना था और समय के साथ यह समझ आ गया कि ऐसी बातों का कोई मतलब नहीं होता इस सुलह के बाद न केवल उनके फैंस बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री ने राहत की सांस ली क्योंकि लंबे समय से बंटी हुई बॉलीवुड की दुनिया एक बार फिर एकजुट हो गई

  • समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा 3 अप्रैल को नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी

    समुद्री ताकत में बड़ा इजाफा 3 अप्रैल को नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी


    नई दिल्ली: भारतीय नौसेना अपनी समुद्री ताकत को लगातार मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है और इसी क्रम में स्वदेशी तकनीक से तैयार एक और अत्याधुनिक युद्धपोत को बेड़े में शामिल किया जा रहा है गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट तारागिरी को आगामी 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम में औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया जाएगा इस अवसर पर राजनाथ सिंह स्वयं इस युद्धपोत को राष्ट्र को समर्पित करेंगे

    यह युद्धपोत प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे नीलगिरी क्लास फ्रिगेट्स का हिस्सा है जो भारतीय नौसेना को वर्ष 2047 तक पूर्ण आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है इससे पहले इसी श्रृंखला के तहत आईएनएस नीलगिरी को जनवरी 2025 में शामिल किया गया था जबकि हिमगिरी और उदयगिरी भी नौसेना के बेड़े में शामिल हो चुके हैं अब तारागिरी इस श्रृंखला का चौथा फ्रिगेट बनकर तैयार है

    तारागिरी को अत्याधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों से लैस किया गया है इसमें सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस मिसाइल लगी है जो दुश्मन के जहाजों और सतही लक्ष्यों को सटीकता से निशाना बनाने में सक्षम है इसके अलावा इसमें लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली बराक 8 मिसाइल प्रणाली भी है जो हवाई हमलों से रक्षा प्रदान करती है

    पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इसमें स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं साथ ही यह आधुनिक सोनार कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और मल्टी फंक्शन डिजिटल रडार से लैस है जो लंबी दूरी से आने वाले खतरों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने में सक्षम बनाते हैं इस युद्धपोत में हेलिकॉप्टर हैंगर भी मौजूद है जिसमें दो हेलिकॉप्टर एक साथ संचालन कर सकते हैं

    करीब 6700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की गति से चल सकता है और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका स्टेल्थ डिजाइन है जो इसे दुश्मन के रडार से बचाने में मदद करता है प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे इन युद्धपोतों में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से लिए गए हैं जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल रहा है

    इन फ्रिगेट्स का डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है जबकि इनके निर्माण में मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स की महत्वपूर्ण भूमिका रही है प्रोजेक्ट 17ए के तहत कुल सात युद्धपोत बनाए जा रहे हैं जिनमें से अधिकांश को 2019 से 2022 के बीच लॉन्च किया जा चुका है और शेष के समुद्री परीक्षण जारी हैं

    तारागिरी के नौसेना में शामिल होने से न केवल भारत की समुद्री सुरक्षा और युद्ध क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी बल्कि यह देश के स्वदेशी रक्षा निर्माण के बढ़ते सामर्थ्य का भी प्रतीक है आने वाले समय में जब सभी नीलगिरी क्लास फ्रिगेट पूरी तरह सेवा में आ जाएंगे तब भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में और अधिक सशक्त और प्रभावी उपस्थिति दर्ज कराएगी

  • कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड कायम भारत ने फिर रचा इतिहास ऊर्जा सुरक्षा को मिली नई मजबूती

    कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड कायम भारत ने फिर रचा इतिहास ऊर्जा सुरक्षा को मिली नई मजबूती


    नई दिल्ली: भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य पूरा कर लिया है यह उपलब्धि देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत संकेत मानी जा रही है कोयला मंत्रालय के अनुसार यह लक्ष्य 20 मार्च को हासिल किया गया जो देश के औद्योगिक और ऊर्जा ढांचे के लिए बेहद अहम है

    इस उपलब्धि के पीछे कोयला क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों का समन्वित प्रयास और निरंतर मेहनत रही है बेहतर योजना प्रभावी कार्यान्वयन और आपूर्ति शृंखला में मजबूत तालमेल ने इस लक्ष्य को संभव बनाया है इससे न केवल बिजली उत्पादन में स्थिरता आई है बल्कि उद्योगों को भी निरंतर ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित हुई है

    देश के कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स में रिकॉर्ड स्तर का कोयला स्टॉक बनाए रखने में भी इस उपलब्धि ने अहम भूमिका निभाई है मंत्रालय के अनुसार यह स्थिति बिजली आपूर्ति को सुचारु बनाए रखने और संभावित संकटों से निपटने में सहायक साबित हो रही है

    वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों खासकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत की यह उपलब्धि और भी महत्वपूर्ण हो जाती है इसके बावजूद देश के थर्मल पावर प्लांट्स के पास लगभग 53.41 मिलियन टन कोयला स्टॉक उपलब्ध है जो मौजूदा खपत के अनुसार करीब 23 दिनों के लिए पर्याप्त माना जा रहा है इसके साथ ही भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कोयला खदानों के पास भी अतिरिक्त भंडारण किया जा रहा है

    आर्थिक दृष्टि से भी यह उपलब्धि सकारात्मक संकेत देती है वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार फरवरी में देश के आठ प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का संयुक्त इंडेक्स 2.3 प्रतिशत बढ़ा है इसी अवधि में कोयला उत्पादन में भी 2.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई जबकि बिजली उत्पादन में 0.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है

    कोयला मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह एक स्थिर पारदर्शी और प्रदर्शन आधारित प्रणाली विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है इसके तहत नीतिगत सुधार नियमित निगरानी और सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर तालमेल पर लगातार जोर दिया जा रहा है

    इस बीच कोल इंडिया लिमिटेड भी छोटे मध्यम और बड़े सभी उपभोक्ताओं को पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रही है कंपनी की भूमिका देश में ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण मानी जाती है

    लगातार दूसरे वर्ष 1 अरब टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है जो यह दर्शाता है कि देश न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो रहा है बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी अपने ऊर्जा ढांचे को मजबूत बनाए रखने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है

  • विदेश में UPI का विस्तार, India-Bhutan के बीच जल्द शुरू होगी क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर सेवा

    विदेश में UPI का विस्तार, India-Bhutan के बीच जल्द शुरू होगी क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर सेवा


    नई दिल्ली। भारत की डिजिटल क्रांति अब सीमा से बाहर कदम रखने जा रही है। भारत और भूटान के बीच जल्द ही UPI आधारित क्रॉस-बॉर्डर मनी ट्रांसफर सेवा शुरू होने जा रही है। यह पहल दोनों देशों के बीच आर्थिक और डिजिटल क्रांति को नई बढ़त देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

    UPI से आसान होगा विदेश में पैसा खुशनुमा

    इस नई व्यवस्था के तहत यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) के पोस्टल ट्रांसफर सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इसके जरिए लोग डाक नेटवर्क का इस्तेमाल कर बेहद आसान, तेज और सस्ते तरीकों से एक देश से दूसरे देश में पैसे भेज और हासिल कर सकेंगे। यह सुविधा जरूरी पर उन लोगों के लिए फायदेमंद होगी, जो छोटे ट्रांजैक्शन करते हैं या जिनके पास पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच सीमित है।

    डाक सेवाओं के जरिए मजबूत होगा सहयोग

    इस पहल को सफल बनाने के लिए इंडिया पोस्ट और भूटान पोस्ट के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया गया है। यह समझौता केवल मनी ट्रांसफर तक सीमित नहीं है, बल्कि डाक सेवाओं के कई क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाएगा। इसमें लॉजिस्टिक्स, टेक्निकल डेवलपमेंट, डाक टिकट (फिलेटली), और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इससे दोनों देशों के बीच सेवा गुणवत्ता और दक्षता में सुधार होगा।

    ट्रेनिंग और टेक्नीक पर खास फोकस

    समझौते के तहत भूटान के डाक अधिकारियों को भारत में ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए रफी अहमद किदवई राष्ट्रीय डाक अकादमी जैसे विद्यार्थियों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
    इन ट्रेनिंग प्रोग्राम में आधुनिक टेक्नीक, ऑपरेशन मैनेजमेंट और डिजिटल सेवाओं की जानकारी दी जाएगी, जिससे भूटान की डाक सेवाएं और अधिक उन्नत हो सकें।

    डिजिटल और लॉजिस्टिक्स सिस्टम मजबूत होगा

    भारत अपने डिजिटल पोस्टल सिस्टम और डिजिटल एड्रेस कोड जैसी तकनीकों का अनुभव भूटान के साथ साझा करेगा। इससे लॉजिस्टिक्स नेटवर्क मजबूत होगा और सेवाओं की गति व सेवाएं जहां।
    साथ ही, यह सहयोग फाइनेंशियल इन्क्लूजन (वित्तीय समावेशन) को भी बढ़ावा देगा, जिससे दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी आसानी से बैंकिंग और पेमेंट सेवाएं मिल सकेंगी।

    वैश्विक स्तर पर बढ़ेगा भारत का डिजिटल प्रभाव

    यूपीआई का यह विस्तार भारत की डिजिटल ताकत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में अहम कदम है। इससे न सिर्फ दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ेगा, बल्कि भारत के डिजिटल पेमेंट मॉडल को वैश्विक पहचान भी मिलेगी।