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  • शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ

    शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 299 अंक चढ़ा और निफ्टी 0.50 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट से उबरते हुए बुधवार को बढ़त के साथ कारोबार समाप्त किया। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी-ईरान वार्ता की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतों के करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहने से बाजार धारणा को कुछ सहारा मिला। इसके साथ ही घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेतों ने भी निवेशकों के रुख को सकारात्मक बनाए रखा।

    कारोबार के अंत में सेंसेक्स 299.17 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,828.25 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह निफ्टी50 में 117.80 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 23,446.80 के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह दोनों प्रमुख सूचकांकों ने पिछले सत्र की कमजोरी के बाद अच्छी वापसी की।

    व्यापक बाजार में भी खरीदारी का माहौल देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.70 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.89 प्रतिशत चढ़कर बंद हुआ। इससे संकेत मिला कि तेजी का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की सक्रियता बनी रही।

    सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.4 प्रतिशत की तेजी के साथ सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में रहा। इसके अलावा एफएमसीजी, पीएसयू बैंक, रियल्टी और सीमेंट से जुड़े शेयरों में भी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग और मेटल शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई।

    दूसरी ओर, आईटी और मीडिया क्षेत्र दबाव में रहे। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी मीडिया 0.50 प्रतिशत कमजोर होकर बंद हुआ। आईटी शेयरों में सुस्ती के कारण बाजार की कुल बढ़त ऊपरी स्तरों पर कुछ सीमित रही।

    निफ्टी50 के प्रमुख तेजी वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, हिंडाल्को, टाटा स्टील, अपोलो हॉस्पिटल्स और जेएसडब्ल्यू स्टील शामिल रहे। इनके अलावा ग्रासिम, नेस्ले इंडिया, आईटीसी, एलएंडटी, पावर ग्रिड और अदाणी पोर्ट्स में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं एचसीएल टेक, टाइटन, इंफोसिस, कोल इंडिया, टीसीएस, विप्रो, एनटीपीसी, बीईएल और ट्रेंट जैसे शेयरों में कमजोरी रही।

    बाजार की चाल पर नजर डालें तो कारोबारी सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का असर बना रहा। मजबूत अमेरिकी डॉलर के बीच भारतीय रुपये पर भी दबाव देखने को मिला। हालांकि, सितंबर के फ्लैश पीएमआई के उम्मीद से बेहतर आंकड़ों ने घरेलू आर्थिक गतिविधियों को लेकर सकारात्मक संकेत दिए।

    महंगाई का दबाव बढ़े बिना आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार मजबूत रहने की उम्मीद ने निवेशकों के भरोसे को सहारा दिया। व्यापक बाजार में खरीदारी और एशियाई बाजारों की मजबूती के बीच घरेलू शेयरों में भी सकारात्मक रुख बना रहा। हालांकि, आईटी क्षेत्र की कमजोरी के कारण प्रमुख सूचकांकों की बढ़त दिन के ऊपरी स्तरों तक पूरी तरह कायम नहीं रह सकी।

  • कार्तिक आर्यन की उपलब्धि पर भावुक हुए मुरलीकांत पेटकर, मेहनत और अभिनय की जमकर सराहना

    कार्तिक आर्यन की उपलब्धि पर भावुक हुए मुरलीकांत पेटकर, मेहनत और अभिनय की जमकर सराहना

    नई दिल्ली ।कार्तिक आर्यन के लिए 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट एक्टर का सम्मान हासिल करना बेहद खास उपलब्धि रही। फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाने के लिए उन्हें यह पुरस्कार मिला। सम्मान मिलने के बाद कार्तिक को फिल्म जगत से लगातार बधाइयां मिल रही हैं। इनमें सबसे खास बधाई उस वास्तविक शख्स की रही, जिसकी जिंदगी को उन्होंने पर्दे पर जीवंत किया।

    पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट मुरलीकांत पेटकर ने कार्तिक आर्यन को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कार्तिक की मेहनत और फिल्म में उनके अभिनय की सराहना करते हुए इसे गर्व का क्षण बताया। मुरलीकांत ने कहा कि कार्तिक ने जिस समर्पण के साथ उनके किरदार को निभाया, वह प्रशंसा के योग्य है।

    मुरलीकांत पेटकर ने कार्तिक की उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि ‘चंदू चैंपियन’ के लिए बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिलना गर्व की बात है। उन्होंने फिल्म में किरदार को निभाने के लिए कार्तिक द्वारा की गई मेहनत को भी विशेष रूप से सराहा।

    उन्होंने फिल्म के निर्देशक कबीर खान और निर्माता साजिद नाडियाडवाला के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उनके अनुसार, मुरलीकांत पेटकर की कहानी को बड़े पर्दे पर संवेदनशीलता और ईमानदारी के साथ प्रस्तुत किया गया। फिल्म की पूरी टीम ने मिलकर उनकी जीवन यात्रा और संघर्ष को दर्शकों तक पहुंचाने का काम किया।

    ‘चंदू चैंपियन’ 14 जून 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। फिल्म का निर्देशन कबीर खान ने किया था और कार्तिक आर्यन ने इसमें मुरलीकांत पेटकर की भूमिका निभाई थी। कहानी एक ऐसे व्यक्ति के जीवन पर आधारित है, जिसने कई कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बाद भी अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा।

    मुरलीकांत पेटकर भारतीय सेना में रह चुके हैं। एक हादसे के बाद उन्हें शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के सामने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने खेल को अपनी नई दिशा बनाया और पैरालिंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल हासिल किया।

    फिल्म में कार्तिक आर्यन के साथ विजय राज, राजपाल यादव और भाग्यश्री भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए। मुरलीकांत पेटकर के जीवन के अलग-अलग चरणों को पर्दे पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए कार्तिक ने अपनी फिटनेस और शारीरिक क्षमता पर काफी काम किया था।

    कार्तिक ने फिल्म के लिए बॉक्सिंग और तैराकी की ट्रेनिंग ली। उन्होंने अपने शरीर में भी बड़ा बदलाव किया, ताकि किरदार के अलग-अलग दौर को वास्तविक रूप में प्रस्तुत किया जा सके। उनके अभिनय और तैयारी को मिली राष्ट्रीय स्तर की मान्यता के बाद खुद मुरलीकांत पेटकर की ओर से मिली बधाई ने इस उपलब्धि को और खास बना दिया है।

    फिल्म की कहानी संघर्ष, मेहनत, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति दृढ़ता पर केंद्रित है। मुरलीकांत पेटकर की वास्तविक जीवन यात्रा को पर्दे पर निभाने वाले कार्तिक आर्यन को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना उनके अभिनय सफर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया है।

  • BJP ने बदली राष्ट्रीय मीडिया टीम आशीष उषा अग्रवाल बने मीडिया सह-संयोजक MP में निभा चुके हैं अहम भूमिका

    BJP ने बदली राष्ट्रीय मीडिया टीम आशीष उषा अग्रवाल बने मीडिया सह-संयोजक MP में निभा चुके हैं अहम भूमिका


    भोपाल । भारतीय जनता पार्टी ने अगस्त 2026 में अपनी नई राष्ट्रीय संगठनात्मक टीम का ऐलान किया था जिसमें मीडिया विभाग में भी बदलाव किए गए। पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में घोषित टीम में अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया संयोजक बनाया गया जबकि मध्यप्रदेश के आशीष उषा अग्रवाल प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। इससे मध्यप्रदेश BJP के मीडिया संगठन से जुड़े आशीष अग्रवाल की भूमिका प्रदेश स्तर से बढ़कर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई है।

    आशीष उषा अग्रवाल लंबे समय से BJP के मीडिया विभाग से जुड़े रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने मध्यप्रदेश BJP में मीडिया पैनलिस्ट के तौर पर काम किया और इसके बाद प्रदेश प्रवक्ता तथा प्रदेश मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारियां संभालीं। इस दौरान उनका काम पार्टी के राजनीतिक मुद्दों को मीडिया के सामने रखने और प्रदेश संगठन तथा मीडिया के बीच समन्वय से जुड़ा रहा। 2023 के मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान भी वे पार्टी की प्रदेश मीडिया व्यवस्था से जुड़े प्रमुख पद पर रहे।

    अब राष्ट्रीय मीडिया टीम में सह-संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनका कार्यक्षेत्र मध्यप्रदेश से आगे बढ़कर पार्टी के राष्ट्रीय संगठन तक हो गया है। BJP की घोषित राष्ट्रीय टीम में मीडिया विभाग की कमान अनिल बलूनी को दी गई है जबकि आशीष अग्रवाल के साथ प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को सह-संयोजक बनाया गया है।

    राष्ट्रीय मीडिया टीम में बदलाव ऐसे समय हुआ है जब BJP ने अपने संगठन में कई स्तरों पर नई जिम्मेदारियां तय की हैं। पार्टी ने मीडिया के साथ सोशल मीडिया संगठन में भी नियुक्तियां की हैं। दीपक म्हस्के को सोशल मीडिया संयोजक बनाया गया जबकि प्रीति गांधी शिवानंद द्विवेदी आलोक भट्ट और अरुण यादव को सोशल मीडिया सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई। इस तरह पार्टी के पारंपरिक मीडिया और डिजिटल संचार दोनों क्षेत्रों के लिए नई टीम सामने आई है।

    आशीष अग्रवाल के राजनीतिक और संगठनात्मक सफर की शुरुआत ग्वालियर से जुड़ी रही है। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार वे छात्र जीवन से सामाजिक धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे। इसके बाद BJP की संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रियता बढ़ी और धीरे धीरे मीडिया विभाग में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती गई। पार्टी के प्रदेश मीडिया संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने के बाद अब उन्हें राष्ट्रीय टीम में स्थान मिला है।

    राजनीति में सक्रिय होने से पहले उनका पेशेवर अनुभव कॉरपोरेट क्षेत्र में भी रहा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने ICICI Bank और उसके समूह में काम किया। उन्होंने Great Lakes Institute of Management Chennai से MBA की पढ़ाई की है जबकि Jiwaji University Gwalior से MA और B.Com की डिग्री हासिल की है।

    BJP की नई राष्ट्रीय मीडिया टीम में आशीष अग्रवाल की नियुक्ति के साथ मध्यप्रदेश के एक और पार्टी पदाधिकारी को राष्ट्रीय संगठन में भूमिका मिली है। अगस्त में घोषित टीम के अनुसार अनिल बलूनी राष्ट्रीय मीडिया संयोजक हैं और आशीष अग्रवाल प्रदीप भंडारी तथा सिद्धार्थ यादव उनके साथ मीडिया सह-संयोजक के रूप में काम करेंगे।

    इस नियुक्ति के बाद आशीष अग्रवाल की जिम्मेदारी अब केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी। राष्ट्रीय मीडिया विभाग में उनकी भूमिका पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के मीडिया समन्वय और संगठनात्मक संचार से जुड़े कामों में होगी। वहीं अलग अलग राज्यों और क्षेत्रों में पार्टी की मीडिया गतिविधियों को राष्ट्रीय संगठन से जोड़ना नई टीम की जिम्मेदारियों का हिस्सा रहेगा।

  • बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, हड़ताल से पहले रविवार को खुलेगा बैंक, जानिए 27 सितंबर के फैसले का पूरा असर

    बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर, हड़ताल से पहले रविवार को खुलेगा बैंक, जानिए 27 सितंबर के फैसले का पूरा असर

    नई दिल्ली ।सरकारी बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को देखते हुए केंद्र सरकार ने ग्राहकों को राहत देने के लिए 27 सितंबर 2026, रविवार को बैंक शाखाएं खुली रखने का फैसला किया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य लगातार छुट्टियों और हड़ताल के कारण बैंकिंग सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित असर को कम करना है।

    सरकार के इस निर्णय के तहत सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक 27 सितंबर को सामान्य कार्यदिवस की तरह काम करेंगे। इससे उन ग्राहकों को बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेने का अवसर मिलेगा, जिन्हें नकद लेनदेन, दस्तावेजी कामकाज या अन्य जरूरी शाखा संबंधी सेवाओं की आवश्यकता है।

    बैंक कर्मचारियों के संयुक्त संगठन ने 28 से 30 सितंबर 2026 तक तीन दिन की देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। प्रस्तावित हड़ताल से ठीक पहले 26 सितंबर को शनिवार और 27 सितंबर को रविवार है। ऐसे में लगातार छुट्टियों के साथ हड़ताल होने पर बैंकिंग सेवाओं में कई दिनों तक व्यवधान की स्थिति बन सकती थी।

    इसी संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए रविवार को बैंक खोलने का फैसला किया गया है। सरकार का कहना है कि आम नागरिकों की जरूरी बैंकिंग जरूरतें लंबे समय तक प्रभावित न हों और सेवाओं में निरंतरता बनी रहे, इसके लिए पहले से आवश्यक कदम उठाए गए हैं।

    27 सितंबर को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में भी कामकाज होगा। बैंक शाखाओं के अलावा संबंधित बैंकिंग ढांचे को भी सक्रिय रखने की व्यवस्था की गई है। इसका मकसद ग्राहकों को जरूरी सेवाओं के लिए अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराना है।

    हड़ताल का मुख्य मुद्दा बैंकों में सप्ताह के दौरान पांच कार्यदिवस लागू करने की मांग है। बैंक कर्मचारी संगठनों का कहना है कि मार्च 2024 में हुए द्विपक्षीय वेतन संशोधन समझौते के दौरान पांच कार्यदिवस की व्यवस्था को लेकर सहमति बनी थी, लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया है।

    बैंक कर्मचारी संगठन इसी मांग को लेकर सरकार और बैंक प्रबंधन के समक्ष अपनी बात रखते रहे हैं। प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल भी इसी मुद्दे को लेकर बुलाई गई है। सरकार की ओर से कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की गई है।

    बैंकिंग सेवाएं आम नागरिकों, कारोबारियों और विभिन्न संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। लगातार छुट्टियों के बाद हड़ताल होने की स्थिति में शाखाओं पर काम का दबाव बढ़ सकता है। रविवार को बैंक खोलने का फैसला इसी संभावित व्यवधान को कम करने की दिशा में उठाया गया कदम है।

    ग्राहकों के लिए 27 सितंबर का दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहेगा क्योंकि यह सामान्य रविवार होने के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में बैंकिंग कार्य उपलब्ध रहेगा। इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल के कारण शाखाओं के नियमित कामकाज पर असर पड़ सकता है।

    सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से सेवाओं को सुचारु बनाए रखने पर जोर दिया गया है। वहीं कर्मचारी संगठन अपनी पांच दिवसीय कार्यसप्ताह की मांग को लेकर हड़ताल के कार्यक्रम पर कायम हैं। ऐसे में सितंबर के अंतिम सप्ताह में बैंकिंग सेवाओं की स्थिति पर ग्राहकों और कारोबारियों की नजर रहेगी।

  • बीजेपी ने राज्यों के नए प्रभारी घोषित किए, विनोद तावड़े को यूपी और बैजयंत पांडा को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी

    बीजेपी ने राज्यों के नए प्रभारी घोषित किए, विनोद तावड़े को यूपी और बैजयंत पांडा को महाराष्ट्र की जिम्मेदारी

    नई दिल्ली । भारतीय जनता पार्टी ने 23 सितंबर 2026 को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई नियुक्तियों का ऐलान किया है। संगठन में किए गए इस बदलाव के तहत कई वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कुछ नेताओं को एक से अधिक राज्यों का प्रभार भी दिया गया है।

    उत्तर प्रदेश का प्रभारी विनोद तावड़े को बनाया गया है। उनके साथ जगदीश पटेल, मेघा कुलकर्णी, डॉ. प्रदीप वर्मा और अनंत ओझा को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। महाराष्ट्र में बैजयंत जय पांडा को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया है। उनके साथ अमित मालवीय, सदानंद शेट तनवाड़े और कमलजीत सहरावत सह-प्रभारी होंगे।

    राम माधव को तमिलनाडु और उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया है। तमिलनाडु में उनके साथ निर्मल कुमार सुराना और डीके अरुणा को सह-प्रभारी बनाया गया है। उत्तराखंड में अरविंद मेनन और बांसुरी स्वराज सह-प्रभारी होंगी।

    स्मृति ईरानी को छत्तीसगढ़ और हरियाणा की जिम्मेदारी दी गई है। छत्तीसगढ़ में सिद्धार्थ शंभू और हरियाणा में डॉ. भोला सिंह सह-प्रभारी होंगे। गुजरात का प्रभार तरुण चुघ को मिला है। जम्मू-कश्मीर और पंजाब की जिम्मेदारी सतीश पूनिया को दी गई है। पंजाब में वीरेंद्र सचदेवा और डॉ. अलका गुर्जर सह-प्रभारी होंगे।

    बिहार और कर्नाटक का प्रभार हरीश द्विवेदी को सौंपा गया है। बिहार में संगीता यादव और रोहन गुप्ता सह-प्रभारी होंगे, जबकि कर्नाटक में डॉ. कासम वेंकटेश्वरलू को सह-प्रभारी बनाया गया है। मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी बिप्लब कुमार देब को मिली है और रेखा वर्मा सह-प्रभारी होंगी। राजस्थान में संजय भाटिया प्रभारी तथा कविता पाटीदार और कुलजीत चहल सह-प्रभारी बनाए गए हैं।

    दिल्ली में डॉ. विनय सहस्रबुद्धे को प्रभारी नियुक्त किया गया है। जामयांग त्सेरिंग नामग्याल और दर्शनाबेन जरदोश सह-प्रभारी होंगी। झारखंड में गजेंद्र पटेल को प्रभारी बनाया गया है, जबकि सौरभ सिंह और निवेदिता सिंह सह-प्रभारी होंगे।

    पश्चिम बंगाल और तेलंगाना का प्रभार सुनील बंसल को दिया गया है। पश्चिम बंगाल में लाल सिंह आर्य, राजेंद्र सिंह और पिंकी कुशवाहा सह-प्रभारी होंगे। तेलंगाना में अभय पाटिल और रेखा शर्मा को सह-प्रभारी बनाया गया है। असम में मंगल पांडे प्रभारी होंगे और फांगनोन कोन्याक सह-प्रभारी होंगी।

    मणिपुर की जिम्मेदारी डॉ. राजदीप रॉय को दी गई है। मेघालय में कनाद पुरकायस्थ प्रभारी और डॉ. नुमल मोमिन सह-प्रभारी होंगे। मिजोरम में डॉ. भगवत कराड़ और नगालैंड में अनिल एंटनी को प्रभारी बनाया गया है। गोवा में डॉ. भारती प्रवीण पवार प्रभारी और अनिल एंटनी सह-प्रभारी होंगे।

    इसके अलावा आंध्र प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों में भी प्रभारी और सह-प्रभारियों की नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं। सभी नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू की गई हैं।

  • चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर दो जजों की राय अलग, बड़ी बेंच करेगी मामले पर फैसला

    चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर दो जजों की राय अलग, बड़ी बेंच करेगी मामले पर फैसला

    नई दिल्ली । मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में 23 सितंबर को महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। 2023 में बनाए गए कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही दो सदस्यीय पीठ के दोनों न्यायाधीशों की राय अलग-अलग रही। इसके बाद मामले को बड़ी पीठ के सामने भेजने का आदेश दिया गया।

    मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग की गई है। याचिकाओं में 2023 के उस कानून को चुनौती दी गई है, जिसके तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए नई चयन व्यवस्था निर्धारित की गई है।

    सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एससी शर्मा की राय में अंतर सामने आया। दोनों न्यायाधीशों के बीच मतभेद के कारण यह तय किया गया कि मामले से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक और कानूनी सवालों पर बड़ी पीठ विचार करेगी।

    कार्यवाही के दौरान सॉलिसिटर जनरल की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर एक दलील दी गई, जिसमें इस व्यवस्था की तुलना जजों द्वारा जजों की नियुक्ति से की गई। इस तर्क पर न्यायमूर्ति दत्ता ने असहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस तरह की दलील को स्पष्ट रूप से खारिज किया जाना जरूरी है।

    न्यायमूर्ति दत्ता ने कहा कि याचिकाओं पर पांच दिनों से अधिक समय तक सुनवाई हुई। उन्होंने यह भी कहा कि यदि दोनों न्यायाधीश एकमत होकर फैसला देते तो संस्थागत एकता को मजबूती मिलती, लेकिन इस मामले में दोनों की राय अलग रही। उन्होंने संवैधानिक व्यवस्था के उस सिद्धांत का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार शासन कानून के अधीन होता है और कानून से ऊपर नहीं।

    वहीं, न्यायमूर्ति शर्मा ने न्यायमूर्ति दत्ता की बातों से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में कानून से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रश्न मौजूद है और इसका निर्णय बड़ी पीठ द्वारा किया जाना चाहिए। दोनों न्यायाधीशों की अलग राय सामने आने के बाद मामले को मुख्य न्यायाधीश के पास भेजने का आदेश दिया गया।

    मामले की पृष्ठभूमि 2023 में बनाए गए चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी कानून से जुड़ी है। इससे पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा सरकार की सिफारिश पर की जाती थी। अगस्त 2023 में नई व्यवस्था से संबंधित विधेयक पेश किया गया। इसमें नियुक्ति से जुड़ी समिति की संरचना में बदलाव किया गया और भारत के मुख्य न्यायाधीश की जगह एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल करने का प्रावधान किया गया।

    दिसंबर 2023 में यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ और उसी महीने इसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई। इसके बाद जनवरी 2024 में जया ठाकुर ने नए कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उस समय अदालत ने कानून पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

    मार्च 2024 में चुनाव आयुक्तों की नई नियुक्तियों को रोकने की मांग भी अदालत के सामने रखी गई थी, लेकिन उस मांग को स्वीकार नहीं किया गया। इसी प्रक्रिया के दौरान ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू को नए चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था।

    अब दो न्यायाधीशों की अलग-अलग राय के बाद इस मामले का अगला चरण बड़ी पीठ के सामने होगा। बड़ी पीठ चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून और उसके संवैधानिक पहलुओं पर आगे विचार करेगी।

  • जबलपुर में शराब दुकान के बाहर धरना और 60 हजार की मांग का आरोप कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पर केस दर्ज

    जबलपुर में शराब दुकान के बाहर धरना और 60 हजार की मांग का आरोप कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पर केस दर्ज


    जबलपुर । जबलपुर में शराब दुकान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस तक पहुंच गया है। धनवंतरी नगर क्षेत्रJabalpur News, Congress Leader FIR, Liquor Shop Dispute, Abhishek Pathak, Madhya Pradesh News की शराब दुकानों के संचालक की शिकायत पर गढ़ा पुलिस ने कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष अभिषेक पाठक के खिलाफ FIR दर्ज की है। शिकायतकर्ता निखिल सोनी ने आरोप लगाया है कि उनसे तीन शराब दुकानों के लिए कुल 60 हजार रुपए प्रतिमाह मांगे जा रहे थे। रकम देने से इनकार करने के बाद दुकान के सामने धरना प्रदर्शन किया गया और दुकान बंद कराने की धमकी देने का आरोप भी लगाया गया है। पुलिस ने 22 सितंबर को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    शराब दुकान संचालक का आरोप है कि पिछले करीब तीन वर्षों से अलग अलग मौकों पर प्रतिमाह 20 हजार रुपए दिए जाते थे। शिकायत के मुताबिक अब तीनों दुकानों के लिए अलग अलग 20 हजार रुपए मांगे गए जिससे कुल रकम 60 हजार रुपए हो जाती है। संचालक का कहना है कि जब उन्होंने यह रकम देने से इनकार किया तो अभिषेक पाठक अपने साथियों के साथ शराब दुकान के सामने पहुंच गए और धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान दुकानों से अवैध और नकली शराब बिक्री किए जाने जैसे आरोप भी लगाए गए।

    शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि रकम नहीं देने पर दुकान बंद कराने और कारोबार को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई। इसी विवाद के बीच सोशल मीडिया पर एक कथित AI वीडियो भी वायरल होने की बात सामने आई है। दुकान संचालक का आरोप है कि रकम की मांग पूरी नहीं होने पर शराब की गलत बिक्री से जुड़ा आरोप लगाते हुए यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। पुलिस अब वीडियो के स्रोत और उसकी वास्तविकता की जांच करेगी।

    मामले में करीब एक मिनट 32 सेकेंड का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा में है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस ऑडियो में प्रति दुकान 20 हजार रुपए की रकम को लेकर बातचीत सुनाई देती है। इसमें 40 हजार रुपए भेजने और बाकी रकम बाद में देने की बात होने का भी दावा किया जा रहा है। हालांकि ऑडियो असली है या उसमें किसी तरह की काट छांट या एडिटिंग की गई है इसकी पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

    वहीं कांग्रेस नेता अभिषेक पाठक ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वायरल ऑडियो को काट छांटकर पेश किया गया है। पाठक के मुताबिक ऑडियो में 40 हजार रुपए की जो चर्चा है वह शराब दुकान के किराए को लेकर थी और इसका किसी तरह की अवैध वसूली से संबंध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि दुकान संचालक किराए की पूरी रकम नहीं दे रहे थे और इसी को लेकर बातचीत हुई थी।

    पुलिस ने अभिषेक पाठक के खिलाफ BNS की धारा 308(2) और 351(2) के तहत FIR दर्ज की है। FIR में घटना की अवधि 25 अप्रैल से 22 सितंबर 2026 तक बताई गई है। अब पुलिस शिकायतकर्ता के बयान के साथ कथित ऑडियो और वीडियो तथा दूसरे डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेगी। फिलहाल FIR दर्ज होना आरोपों के साबित होने के बराबर नहीं है। मामले में आरोपों की वास्तविकता और घटनाक्रम से जुड़े तथ्य पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

  • अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- यूपी चुनाव 2027 ज्ञानेश कुमार की देखरेख में न हों

    अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर हमला, बोले- यूपी चुनाव 2027 ज्ञानेश कुमार की देखरेख में न हों


    लखनऊ। चुनाव आयोग में कथित तौर पर सामने आई अंदरूनी असहमति की रिपोर्ट के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की देखरेख में नहीं कराए जाएं। अखिलेश ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का मौजूदा रवैया लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    दरअसल, द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

    अखिलेश बोले- यूपी चुनाव की निगरानी पर उठ रहे सवाल
    अखिलेश यादव ने कहा कि जब आयोग के भीतर ही फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं तो आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की निगरानी को लेकर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि 2027 का विधानसभा चुनाव ऐसे माहौल में नहीं होना चाहिए, जहां चुनाव आयोग की भूमिका पर ही राजनीतिक दल सवाल उठा रहे हों।

    उन्होंने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। अखिलेश का आरोप है कि जिन इलाकों में समाजवादी पार्टी के समर्थक मतदाता थे, वहां वोटर लिस्ट से नाम हटाए गए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इस संबंध में एफिडेविट के साथ शिकायत भी की थी, लेकिन किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

    उपचुनावों को लेकर भी लगाए आरोप
    सपा अध्यक्ष ने यूपी में हुए उपचुनावों का जिक्र करते हुए भी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इन चुनावों के दौरान भी उनकी पार्टी ने अनियमितताओं की शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

    अखिलेश ने दावा किया कि कुछ लोगों के हस्ताक्षर तक बनाए गए और उनके आधार पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे गए। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी गंभीर शिकायतों के बावजूद किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

    ‘सत्ता की कठपुतली बनकर काम कर रहा आयोग’
    अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर सत्ता के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सत्ता की कठपुतली बनकर काम कर रहे हैं, ताकि सत्ता में बैठे लोगों का प्रभाव बना रहे। उनके मुताबिक, यह स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

    उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है और आने वाले समय में जनता भी इसका जवाब देगी। अखिलेश ने कहा कि यूपी के चुनाव और उपचुनाव में पार्टी ने जिन मुद्दों को उठाया, उन पर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।

    आयोग ने रिपोर्ट पर दिया अलग पक्ष
    इस पूरे विवाद के बीच चुनाव आयोग के सूत्रों ने द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सामने आए मतभेद के दावे को खारिज किया है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

    वहीं, रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने तथा मतदाता डेटा के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया है। ऐसे में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

  • ज्ञानेश कुमार पर सिंघवी के गंभीर आरोप, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर बढ़ा सियासी विवाद

    ज्ञानेश कुमार पर सिंघवी के गंभीर आरोप, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर बढ़ा सियासी विवाद

    नई दिल्ली ।मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया और SIR से जुड़े कुछ मुद्दों पर कथित मतभेद सामने आने के बाद कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया प्रभावित हुई है। उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने सहयोगी चुनाव आयुक्तों को पर्याप्त जानकारी दिए बिना कई महत्वपूर्ण फैसले लिए।

    सिंघवी ने आरोप लगाया कि SIR और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर देश को भ्रमित करने का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस ने दिल्ली और हरियाणा में हुए विधानसभा चुनावों को रद्द करने की मांग भी उठाई।

    कांग्रेस नेता ने Form 6 में किए गए बदलाव का मुद्दा भी उठाया। Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सामने आई जानकारी के अनुसार, इसमें नए आवेदकों से उनके या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी के पुराने SIR रिकॉर्ड में मौजूद होने से संबंधित जानकारी मांगी गई थी।

    इस बदलाव को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति दर्ज की थी। दोनों चुनाव आयुक्तों ने SIR की प्रक्रिया, नए मतदाताओं के पंजीकरण और मतदाता सूची से नाम हटाने जैसे मुद्दों पर अपनी चिंताएं सामने रखीं।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में अलग-अलग मामलों को लेकर 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील और चुनावी डेटा की सुरक्षा जैसे विषय शामिल थे।

    मतदाता सूची से संबंधित डिजिटल व्यवस्था और अधिकारियों की सिस्टम तक पहुंच को लेकर भी सवाल उठाए गए। आपत्तियों में यह चिंता सामने आई कि मतदाता डेटा और उससे जुड़े निर्णयों की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और विकेंद्रीकृत है।

    पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़े मामलों ने भी विवाद को और बढ़ाया है। वहां बड़ी संख्या में मतदाताओं ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या बहाल करने से संबंधित मामलों में अपील की है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ऐसे मामलों की संख्या 38 लाख से अधिक बताई गई है।

    सिंघवी ने चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है। उनके मुताबिक, महत्वपूर्ण निर्णयों में सभी चुनाव आयुक्तों की भूमिका और सहमति का महत्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

    दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से एक व्यक्ति के नियंत्रण में संस्था के काम करने के आरोपों को खारिज किया गया है। आयोग के पक्ष के अनुसार, महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की व्यवस्था के तहत लिए जाते हैं और SIR से संबंधित निर्णय सामूहिक प्रक्रिया के अनुसार किए गए हैं।

    इस पूरे विवाद का केंद्र मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया के साथ-साथ चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की व्यवस्था बनी हुई है। कांग्रेस इन मुद्दों को चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़ रही है, जबकि आयोग की ओर से निर्णय प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बताया गया है।

  • मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को बनाया बसपा का राष्ट्रीय संयोजक, लखनऊ की बैठक में किया ऐलान

    मायावती ने भतीजे ईशान आनंद को बनाया बसपा का राष्ट्रीय संयोजक, लखनऊ की बैठक में किया ऐलान


    लखनऊ।
    बहुजन समाज पार्टी में संगठन स्तर पर एक और बड़ा बदलाव हुआ है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को लखनऊ में हुई पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाने का ऐलान किया। बैठक में ईशान आनंद ने मायावती के पैर छूकर उनका आशीर्वाद भी लिया।

    ईशान आनंद को यह जिम्मेदारी उनके बड़े भाई आकाश आनंद को पार्टी की सभी जिम्मेदारियों से हटाए जाने के बाद मिली है। मायावती ने कुछ दिन पहले ही ईशान आनंद को पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देने की बात कही थी। इसके बाद से ही उनकी नई भूमिका को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। बुधवार को बैठक में इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए मायावती ने उन्हें राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त करने की घोषणा कर दी।

    संगठन और चुनावी तैयारियों पर हुआ मंथन

    लखनऊ में आयोजित इस बैठक में बसपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ सभी राज्यों के पार्टी अध्यक्ष भी शामिल हुए। बैठक में संगठन को मजबूत करने के साथ आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा हुई। मायावती ने चुनाव की जमीनी तैयारियों और प्रत्याशियों के चयन को लेकर भी पार्टी नेताओं से जानकारी ली।

    इसके अलावा विभिन्न राज्यों में संगठन से जुड़े कामकाज की प्रगति रिपोर्ट भी ली गई। राज्यों से मिली रिपोर्ट के आधार पर संगठन को लेकर आगे की रणनीति और आवश्यक दिशा-निर्देश तय किए जाएंगे। बैठक में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर भी पार्टी पदाधिकारियों से चर्चा की गई और उन्हें संगठनात्मक स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए।

    ईशान को मिली अहम जिम्मेदारी

    ईशान आनंद, मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। उन्होंने एलएलएम और कानून की पढ़ाई की है। हाल के दिनों में बसपा के भीतर हुए संगठनात्मक बदलावों के बीच उनका नाम लगातार चर्चा में था। मायावती ने पहले ही संकेत दिया था कि वह ईशान को पार्टी में आगे बढ़ाएंगी। अब उन्हें राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी देकर संगठन में उनकी भूमिका औपचारिक रूप से तय कर दी गई है।

    पार्टी की बैठक के दौरान ईशान आनंद के नई जिम्मेदारी संभालने को लेकर कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह भी देखने को मिला। बसपा अब आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर तैयारियां तेज करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।