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  • नागपुर में उपराष्ट्रपति का पहला कदम संघ की प्रेरणा और निस्वार्थ सेवा पर जोर

    नागपुर में उपराष्ट्रपति का पहला कदम संघ की प्रेरणा और निस्वार्थ सेवा पर जोर


    महाराष्ट्र उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का महाराष्ट्र दौरा कई मायनों में विशेष रहा जहां उन्होंने नागपुर में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेते हुए देश और समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा के महत्व को प्रमुखता से रेखांकित किया यह दौरा उनके उपराष्ट्रपति बनने के बाद राज्य का पहला आधिकारिक दौरा था जिससे इसे और अधिक महत्व मिला

    नागपुर पहुंचने पर उपराष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया गया डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और नागपुर नगर निगम की मेयर नीता राजेंद्र ठाकरे सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने उनका अभिनंदन किया इस स्वागत ने उनके दौरे को गरिमामय शुरुआत दी

    अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने विक्रम संवत 2083 के शुभ अवसर पर देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं और सभी के सुख समृद्धि की कामना की उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराएं और सांस्कृतिक मूल्य हमें निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं और समाज को एकजुट रखते हैं

    उन्होंने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्य कर चुके होने के कारण नागपुर आना उनके लिए घर वापसी जैसा अनुभव है यह शहर केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि वैचारिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी देश में विशेष स्थान रखता है

    उपराष्ट्रपति ने नागपुर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जन्मभूमि बताते हुए कहा कि वर्ष 1925 में विजयादशमी के पावन अवसर पर डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने यहां संघ की स्थापना की थी उन्होंने कहा कि संघ ने समाज में सेवा समर्पण और अनुशासन की भावना को मजबूत किया है और उनका स्वयं का जुड़ाव भी इस विचारधारा से रहा है जिससे उन्हें निस्वार्थ सेवा का संस्कार मिला

    दौरे के दौरान उपराष्ट्रपति ने डॉ हेडगेवार स्मृति भवन पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को स्मरण किया उन्होंने कहा कि ऐसे महान व्यक्तित्वों के विचार आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रहे हैं

    अपने भाषण की शुरुआत में उन्होंने मंच पर उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथियों का अभिवादन किया जिनमें केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवासु वरेकेडी भारतीय युवा संसद के राष्ट्रीय संयोजक वासुदेव जोशी और अन्य प्रमुख लोग शामिल थे

    उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि उन्हें जीवन में जो भी जिम्मेदारियां मिली हैं उन्होंने हमेशा उन्हें निस्वार्थ भाव से निभाने का प्रयास किया है और यही भावना राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है उनका यह संदेश स्पष्ट करता है कि सेवा और समर्पण ही समाज को आगे ले जाने की सबसे बड़ी शक्ति है

  • चैत्र नवरात्रि अष्टमी कब है? जानें कन्या पूजन की सारी जानकारी

    चैत्र नवरात्रि अष्टमी कब है? जानें कन्या पूजन की सारी जानकारी


    नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) हिन्दू धार्मिक कैलेंडर के अनुसार नौ दिनों तक चलने वाला पावन त्योहार है, जिसमें मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इस नौ दिवसीय पूजा में अष्टमी का दिन यानी आठवां दिन और भी ज्यादा महत्पूर्ण माना जाता है। इस दिन लोग माता के आठवें रूप की पूजा करते हैं साथ ही कन्या पूजन भी करते हैं। लेकिन इस नवरात्रि अष्टमी कब पड़ेगी चलिए उसके बारे में जानते हैं।

    चैत्र अष्ठमी कब?
    चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 26 मार्च 2026 को पड़ रही है। इस दिन को दुर्गा अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है और इसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है। अष्टमी के दिन भक्त खास पूजा, कन्या पूजन और सांधी पूजा जैसे धार्मिक अनुष्ठान करते हैं तथा मां दुर्गा से अपने घर-परिवार में सुख, समृद्धि और रक्षा की कामना करते हैं।

    अच्छा मुहूर्त
    25 मार्च को दोपहर में 1 बजकर 51 मिनट पर होगा और 26 तारीख को अष्टमी तिथि सुबह में 11 बजकर 49 मिनट तक रहेगी।11 बजकर 49 मिनट के बाद से ही नवमी तिथि का आरंभ हो जाएगा और 27 मार्च को सुबह में 10 बजकर 8 मिनट पर समाप्त होगी। वहीं, नवरात्रि दशमी तिथि 28 मार्च को सुबह में 8 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन नवरात्रि व्रत पारण भी किया जाएगा।


    जानें पूजा विधि

    इस दिन सुबह स्नान करके सफेद या लाल वस्त्र पहनें।घर या मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित करें।
    दीपक जलाएं और माँ को लाल चावल, फूल, मिठाई, फल आदि अर्पित करें।दुर्गा सप्तशती के अष्टम अध्याय का पाठ या देवी मंत्र का जाप करें।पूजा के अंत में प्रसाद और फूल कन्याओं को अर्पित करें।इसके बाद उन्हें भोजन कराएं और उनका आशीर्वाद लें। माता रानी प्रसन्न होकर अपनी कृपा आप पर बनाएं रखती हैं।

  • बिल्ली पालने की जिद और पिता से तकरार: हैदराबाद में 23 साल की एमबीबीएस छात्रा ने की आत्महत्या, टूट गया डॉक्टर बनने का सपना!

    बिल्ली पालने की जिद और पिता से तकरार: हैदराबाद में 23 साल की एमबीबीएस छात्रा ने की आत्महत्या, टूट गया डॉक्टर बनने का सपना!

    ई दिल्ली: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के अलवाल इलाके से एक बेहद दुखद और विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक 23 वर्षीय युवती, जिसने हाल ही में अपनी एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई पूरी की थी और डॉक्टर बनने की दहलीज पर खड़ी थी, उसने आत्महत्या कर अपनी जान दे दी। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, इस खौफनाक कदम के पीछे की वजह घर में ‘बिल्ली पालने’ को लेकर हुआ पारिवारिक विवाद बताया जा रहा है। युवती ने करीब तीन महीने पहले एक बिल्ली पाली थी, जिसे लेकर उसके माता-पिता खुश नहीं थे और इसी बात को लेकर घर में अक्सर बहस होती थी।

    घटना वाले दिन भी बिल्ली को रखने या न रखने के मुद्दे पर युवती का अपने माता-पिता से कड़ा विरोध हुआ। विवाद इतना बढ़ गया कि मानसिक रूप से आहत होकर युवती ने सुसाइड कर लिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या विवाद के पीछे कोई और गंभीर कारण था या महज पालतू जानवर का मुद्दा ही इस चरम कदम की वजह बना। एक होनहार डॉक्टर की इस तरह अचानक मौत से इलाके में शोक की लहर है और यह घटना मानसिक स्वास्थ्य और छोटी-छोटी बातों पर बढ़ते तनाव की ओर इशारा करती है।

    हैरानी की बात यह है कि हैदराबाद में पालतू जानवरों से जुड़ी खुदकुशी का यह पिछले कुछ दिनों में दूसरा मामला है। इससे पहले 18 मार्च को भी शहर के मीरपेट इलाके से ऐसी ही एक घटना सामने आई थी, जहाँ एक 20 वर्षीय युवती ने अपनी पालतू बिल्ली की मौत से दुखी होकर आत्महत्या कर ली थी। पालतू जानवरों के प्रति अत्यधिक लगाव और फिर परिवार के साथ उपजे संघर्ष के कारण होने वाली ये मौतें समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

  • कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट, डॉलर मजबूत होने से सोना 5.89% तक फिसला

    कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट, डॉलर मजबूत होने से सोना 5.89% तक फिसला


    नई दिल्ली। इस हफ्ते अनमोल बाजार में बड़ी हलचल देखने को मिली, जहां कॉन्स्टैंट रिवाइवसूली (प्रोफिट शो) और डॉलर की कमाई के साथ सोने और चांदी की कीमत में तेज गिरावट दर्ज की गई। पूरे सप्ताह के दौरान सोने का भाव करीब 5.89 प्रतिशत तक टूट गया, जिससे उपभोक्ताओं के बीच स्थिरता बढ़ गई। हालांकि सप्ताह के अंतिम दिन के शेयरों की संख्या भी देखने को मिली, लेकिन कुल बाजार दबाव में ही कमी आ रही है।

    सप्ताहभर में सोना-रेवेअर में बड़ी गिरावट

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी के भाव में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जबकि जोशक्स गोल्ड अमेरीका की शुक्रवार को बढ़त के साथ 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गयी, जबकि जनाबेक्स गोल्ड अमेरीका में 3,990 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट के साथ 2,27,470 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गयी।

    वहीं इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, 999 पाउंड वाला सोना 1,56,436 रुपये से लेकर 1,47,218 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। चांदी भी 2,48,711 रुपए टूटकर 2,32,364 रुपए प्रति लुढ़क गई, यानी इसमें 16,000 रुपए से ज्यादा की गिरावट आई।

    डॉलर की दोस्ती और रुचि का असर

    सिद्धांतों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की इज़ाजत और सरकारी अधिकारियों की समीक्षा नीति ने सोना-असलीयत पर दबाव डाला है। फ़ेडरल रिज़र्व, बैंक ऑफ़ जापान, बैंक ऑफ़ कनाडा और बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के सख्त रुख के कारण ब्याज परिसंपत्ति जारी रह सकती है।

    ऐसे में मराठा में सोने से पैसा इन्वेस्टमेंट (सेफ हेवन) जैसे सोने से पैसा वाले निवेशकों की ओर से निवेश किया जाता है, जहां पर निवेशकों का दबाव बना रहता है।

    मध्य पूर्व तनाव का मिलाप-जुला असर

    मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष का असर बाजार पर भी दिख रहा है। पहले इस तनाव के कारण सोना-रेयाला की झील में तेजी आई थी, लेकिन अब अनिश्चितता और उत्कट-अवस्था से अविश्वास का घाटा हो गया है।

    तेल और गैस के उत्पाद में स्टॉक का खतरा बढ़ गया है, जिससे बाजार में स्टॉक बना हुआ है।

    सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल क्या कहते हैं?

    विशेषज्ञ के मुताबिक, सोना इस समय अपने अहम सपोर्ट लेवल के करीब है।

    रेजिस्टेंस: 1,50,000 – 1,52,000 रुपये
    सपोर्ट: 1,35,000 – 1,40,000 रुपये

    चांदी की बात करें तो यह 2,20,000 – 2,15,000 रुपये के डिजायन जोन के करीब पहुंच गया है। अगर बाजार में खरीदारी बहुतायत है, तो इसमें फिर से 2,40,000 रुपये तक की छूट संभव है।

    विदेशी मुद्रा भंडार और आरबीआई का हस्तक्षेप

    भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 13 मार्च को समाप्त सप्ताह में भारत के स्वर्ण भंडार में 664 करोड़ डॉलर की उछाल आई और यह 130.68 डॉलर तक पहुंच गई। हालाँकि कुल विदेशी मुद्रा भंडार 7.05 अरब डॉलर 709.76 अरब डॉलर रह गया। इसकी बड़ी वैल्यू आरबीआई का मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप है, जहां रुपये को सहारा देने के लिए डॉलर पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

    डॉलर की साख, वैश्विक हित हितैषी का दबाव और भू-राजनीतिक साख ने सोना-ए-कीमत को झटका दिया है। निकट भविष्य में बाजार में जारी की जा सकती है, इसलिए आवेदकों को रणनीति निषेध की आवश्यकता है।

  • सलकनपुर मंदिर परिसर में सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं सभी व्यवस्थाएं

    सलकनपुर मंदिर परिसर में सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं सभी व्यवस्थाएं

    सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित विजयासन देवी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का सलकनपुर आगमन हो रहा है। श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना एवं दर्शन में किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसके लिए कलेक्टर बालागुरू के. के निर्देशानुसार प्रशासन द्वारा सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।

    मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त पार्किंग, पेयजल, साफ-सफाई तथा पर्याप्त बिजली की व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के सुगम आगमन एवं निर्गमन के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसके साथ ही मेला स्थल पर दुकानों को व्यवस्थित ढंग से लगाया गया है, जिससे किसी प्रकार की असुविधा न हो। ट्रैफिक नियंत्रण के लिए भी पर्याप्त संख्या में पुलिस एवं जिला प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।

    जनसम्पर्क अधिकारी देवेन्द्र ओगारे ने शुक्रवार को बताया कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए हेल्थ कैंप लगाया गया हैं। जिससे श्रद्धालुओं को चिकित्सा की आवश्यकता पड़ने पर तत्काल रूप से मेडिकल सहायता प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही इमरजेंसी सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण स्थानों पर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई है। बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर में कोई परेशानी न हो, इसके लिए मुख्य स्थानों पर हेल्प डेस्क बनाए गए हैं। इसके साथ ही मंदिर परिसर में कन्ट्रोल रूम भी बनाए गए हैं, जिससे ड्यूटी के दौरान सभी अधिकारी-कर्मचारी सतत संपर्क में हैं और पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी कर रहे हैं।

  • 1 अप्रैल से बदलेगा इनकम टैक्स सिस्टम, जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

    1 अप्रैल से बदलेगा इनकम टैक्स सिस्टम, जानिए आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर


    नई दिल्ली  1 अप्रैल 2026 से देश में नया सीआरएचआर सिस्टम लागू होने जा रहा है, जो 64 साल पुराने सीआरएचआर एक्ट 1961 की जगह है। सेंट्रल कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा अधिसूचित नए जोखिम नियम 2026 का उद्देश्य प्रणाली को सबसे सरल, संयमित और विवाद-मुक्त बनाना है। हालांकि टैक्स ढांचे और नामांकन में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन पुराने में कई बड़े बदलाव किए गए हैं, एकसमान प्रभाव वाली नौकरी पेशा, स्नातक और छूट पर।

    ‘टैक्स वर्ष’ समाप्त हो जाएगा

    नए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘फाइनेंशियल ईयर’ और ‘एसेसमेंट ईयर’ की जगह सिर्फ एक ही “टैक्स ईयर” होगा। इस टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया आसान होगी और लोगों को अलग-अलग टर्म सिग्नल की जरूरत नहीं होगी।

    साथ ही, रिटर्न्स फाइलिंग की नई समयसीमा भी तय कर दी गई है

    सामान्य करदाता: 31 जुलाई
    व्यवसाय/प्रोफेशन: 31 अगस्त
    इंजेक्शन केस: 31 अक्टूबर (विशेष मामला 30 नवंबर तक)
    अब कर वर्ष समाप्त होने के 12 महीने बाद तक संवैधानिक रिटर्न का भी भुगतान किया जा रहा है।

    एचआरए और नई पीढ़ी पर ध्यान

    हाउस रेंटलाउंस (एचआरए) को लेकर नियम सख्त किए गए हैं। अब छूट पाने के लिए मकान मालिक और किरायेदार के बिजनेस की जानकारी देना जरूरी होगा।

    राहत की बात यह है कि मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई के साथ अब रेजिडेंट, पुणे, पुणे और सुपरमार्केट जैसे शहरों में रहने वालों को 50% तक HRA की छूट मिलेगी। अन्य शहरों में यह सीमा 40% ही रहेगी।

    यदि एलएलसी व्यवसाय 1 लाख रुपये से अधिक है तो मकान मालिक के लिए पैन कार्ड अनिवार्य होगा।

    जॉबपेशा को राहत: परक्विजिट और अलाउंस में बदलाव

    होम होम (परक्विजिट) के टैक्स वैल्यू में कटौती की गई है, जिससे कर्मचारियों को दी गई कंपनी को छूट मिल जाएगी।

    बड़ा शहर: 10% दर
    मध्यम शहर: 7.5%
    छोटा शहर: 5%

    कंपनी की कार पर टैक्स भी तय किया गया है:

    1.6 लीटर तक: ₹5,000/माह
    इससे अधिक: ₹7,000/माह
    ड्राइवर होने पर: ₹3,000 अतिरिक्त

    इसके अलावा-

    फ़ार्सी: ₹200 प्रति मील (पहले ₹50)
    उपहार/वाउचर: ₹15,000 तक कर-मुक्त
    शिक्षा अलाउंस: ₹3,000/माह (2 बच्चे तक)
    कॉर्पोरेट अलाउंस: ₹9,000/मह
    बड़ी राहत के लिए

    नए के तहत 10 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाले को विस्तृत विवरण पुस्तिका और रेटिंग से छूट दी जा सकती है (कुछ प्रतिशत के साथ)। इससे छोटे बच्चों का सामान खर्च कम होगा और बिजनेस करना आसान होगा।

    नवजात शिशु के लिए साफ नियम

    अब यह साफ हो गया है कि किसी निवेश की अवधि कितनी होगी। विशेष रूप से कन्वर्टिबल नताशा (जैसे बॉन्ड से शेयर) में पुराने स्टॉक अवधि भी जोड़ी जाएगी। इससे शॉर्ट टर्म और लार्गे टर्म कैपिटल को हासिल करना आसान होगा। नए सिस्टम को कम करना, जगह देना और टैक्सपेयर्स को राहत की दिशा में बड़ा कदम देना है। जहां कुछ नियम सख्त किए गए हैं, वहीं कई जगहों पर राहत भी दी गई है, जिससे टैक्सिंग और स्टाफ स्टाफ आसान हो जाएगा।

  • भोजशाला विवाद में तीन पक्षों की जंग, हिंदू मुस्लिम के बाद जैन समाज की एंट्री, हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को सुनवाई

    भोजशाला विवाद में तीन पक्षों की जंग, हिंदू मुस्लिम के बाद जैन समाज की एंट्री, हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को सुनवाई


    मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर चल रहा विवाद एक नए और अहम मोड़ पर पहुंच गया है। इस मामले में अब जैन समुदाय की एंट्री ने पूरे प्रकरण को और अधिक जटिल बना दिया है। इंदौर स्थित हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर एक नई जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार समेत सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को निर्धारित की गई है।

    इस नई याचिका में दावा किया गया है कि भोजशाला परिसर के भीतर प्राचीन जैन मंदिर और गुरुकुल के अवशेष मौजूद हैं। याचिकाकर्ता दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता सलेक चंद जैन हैं, जिन्होंने मांग की है कि जैन समुदाय को भी इस स्थान पर पूजा-अर्चना का अधिकार दिया जाए। उनका कहना है कि ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर इस स्थल का जैन धर्म से भी गहरा संबंध हो सकता है।

    यह पूरा परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई द्वारा संरक्षित है, और इसके धार्मिक स्वरूप को लेकर पहले से ही हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। अब जैन समुदाय के इस दावे के जुड़ने से मामला और अधिक संवेदनशील और बहुस्तरीय हो गया है।

    भोजशाला विवाद नया नहीं है। हिंदू पक्ष इसे देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है और यहां पूजा-अर्चना के अधिकार की मांग करता है। वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है और अपने धार्मिक अधिकारों की रक्षा की बात करता है। यह स्थल 11वीं शताब्दी का बताया जाता है, जिसके ऐतिहासिक स्वरूप को लेकर विभिन्न मत मौजूद हैं। अब तक इस मामले से जुड़ी कई याचिकाएं पहले से ही हाईकोर्ट में लंबित हैं।

    अब जैन समुदाय के दावे के बाद इस विवाद में एक और आयाम जुड़ गया है, जिससे यह मामला और भी जटिल हो गया है। अदालत के समक्ष अब तीन अलग-अलग पक्ष अपने-अपने दावे प्रस्तुत कर रहे हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया की अहमियत और बढ़ गई है।

    हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए उनसे विस्तृत जवाब मांगा है। आने वाली सुनवाई में यह तय करने की कोशिश की जाएगी कि इस ऐतिहासिक स्थल का वास्तविक स्वरूप क्या है और किन-किन समुदायों को यहां धार्मिक गतिविधियां करने का अधिकार मिल सकता है।

    यह मामला केवल एक स्थल का विवाद नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा संवेदनशील विषय बन चुका है। अब सभी की नजरें 2 अप्रैल को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले में आगे की दिशा तय हो सकती है

  • राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस पर फार्मा अन्वेषण 2026 में दिखी नवाचार की दमदार झलक

    राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस पर फार्मा अन्वेषण 2026 में दिखी नवाचार की दमदार झलक

    इंदौर में सेज यूनिवर्सिटी के इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज द्वारा फार्मा अन्वेषण 2026 का भव्य और सफल आयोजन किया गया। यह आयोजन फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अनुदान से 20 मार्च 2026 को संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने शिक्षा अनुसंधान और उद्योग के बीच समन्वय को एक नई दिशा प्रदान की। इस अवसर पर मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए विद्यार्थियों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने इसे एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण आयोजन बना दिया।

    इस कार्यक्रम में चार सौ से अधिक विद्यार्थियों और लगभग दो सौ शिक्षकों ने भाग लिया। प्रतिभागियों की भारी उपस्थिति ने यह दर्शाया कि फार्मेसी शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को लेकर गहरी रुचि और उत्साह है। पूरे आयोजन में सीखने और सृजन की ऊर्जा का वातावरण बना रहा।

    कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ मोंटू पटेल उपस्थित रहे। उनके साथ फाइनेंस चेयरमैन डॉ विभु साहनी। मध्यप्रदेश स्टेट फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष डॉ संजय जैन। सेंट्रल मेंबर डॉ नीरज उपमन्यु। सेंट्रल मेंबर डॉ शैलेश जैन। तथा सेज यूनिवर्सिटी के प्रो चांसलर डॉ प्रशांत जैन की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को और भी विशेष बना दिया।

    राष्ट्रीय फार्मेसी शिक्षा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के लिए कई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इनोवेटिव प्रोडक्ट प्रस्तुतियाँ। रिसर्च पोस्टर प्रदर्शन। और पेटेंट आधारित प्रोजेक्ट्स ने छात्रों की प्रतिभा को उजागर करने का अवसर दिया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन की समस्याओं पर काम करने और उनके समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया गया।

    कार्यक्रम के दौरान पैनल चर्चा और विशेषज्ञों के मुख्य वक्तव्यों ने सभी प्रतिभागियों को गहराई से सोचने और नए विचारों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उद्योग और अकादमिक क्षेत्र के बीच संवाद सत्रों ने विद्यार्थियों को यह समझने में मदद की कि तकनीकी हस्तांतरण कैसे किया जाता है और नियामक प्रक्रियाएँ किस प्रकार कार्य करती हैं। साथ ही कौशल विकास और उभरते करियर अवसरों पर भी विस्तृत चर्चा हुई।

    कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण उद्घाटन सत्र में प्राप्त वर्चुअल संदेश रहा। जिसमें मध्यप्रदेश शासन के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री का संदेश शामिल था। इस संदेश ने विद्यार्थियों और आयोजकों का उत्साह और बढ़ा दिया।

    समापन समारोह में सभी विजेताओं को सम्मानित किया गया। उनके नवाचार और प्रयासों की सराहना की गई। इस अवसर पर आयोजन से जुड़े सभी लोगों ने कार्यक्रम की सफलता पर संतोष और प्रसन्नता व्यक्त की। चांसलर इंजीनियर संजीव अग्रवाल ने भी इस आयोजन पर हर्ष व्यक्त किया और इसे शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

    फार्मा अन्वेषण 2026 ने यह सिद्ध किया कि यदि शिक्षा संस्थान और उद्योग मिलकर कार्य करें तो नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति संभव है। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए सीखने का मंच बना बल्कि फार्मेसी शिक्षा के भविष्य के लिए एक मजबूत आधार भी साबित हुआ।

  • कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने केरल विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर जताया दुख

    कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने केरल विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर जताया दुख

    नई दिल्ली। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद ने केरल विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर दुख प्रकट करते हुए कहा कि पार्टी ने सिर्फ नौ महिला उम्मीदवारो को टिकट दिया है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से महिला सीटें बढाने की अपील की।

    कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शमा मोहम्मद ने नाराजगी व्यक्त करते हुए शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि, हमें नकारा गया है, लेकिन हम हारे नहीं हैं। मैं अपने नेता राहुल गांधी से आग्रह करती हूं कि केरल की कांग्रेस महिलाओं की मदद करें। 92 टिकटों में से सिर्फ 9 महिलाओं को ही टिकट दिए गए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी 16 टिकटों में सिर्फ एक महिला को मौका मिला था। अगर कोई महिला प्रतिभाशाली हो, तब भी हालात बेहद खराब हैं। यह बहुत दुखद है।

    डॉ. शमा मोहम्मद ने कहा कि महिलाओं के प्रतिभाशाली होने के बावजूद भी उनको नाकारा जा रहा है, यह बहुत ही दुख की बात है। उन्होंने अपने नेता राहुल गांधी से अपील की है कि इस पर ध्यान दिया जाए ताकि कांग्रेस की प्रतिभाशाली महिलाओं को भी अवसर मिले।

    उल्लेखनीय है कि, डॉ. शमा मोहम्मद कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की सदस्य हैं। केरल में जन्मी और पेशे से दंत चिकित्सक है, शमा मोहम्मद 2015 में कांग्रेस में शामिल हुईं और पार्टी के मीडिया पैनल में सक्रिय भूमिका निभाती हैं, साथ ही महिला शिक्षा व सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाती हैं।

  • भारत की फार्मा इंडस्ट्री का जलवा, उत्पादन में दुनिया में तीसरे और मूल्य में 11वें स्थान पर

    भारत की फार्मा इंडस्ट्री का जलवा, उत्पादन में दुनिया में तीसरे और मूल्य में 11वें स्थान पर


    नई दिल्ली भारत की मेडिसिनल इंडस्ट्री आज वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और भरोसेमंद पहचान बनी है। प्रोडक्ट (वॉल्यूम) के आधार पर भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादन उत्पादक देश है, जबकि मूल्य (वॉल्यूम) के खाते से 11वें स्थान पर है। देश में 3,000 से ज्यादा दवा निर्माता और 10,500 से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां काम कर रही हैं, जो इस सेक्टर की विशालता और कारोबार को खत्म कर रही हैं। तेजी से मजबूत मांग, मजबूत उत्पादन क्षमता और कम्युनिस्ट पार्टी में उछाल ने भारत को “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” के रूप में स्थापित किया है।

    तेजी से बढ़ता घरेलू बाज़ार और भागीदार

    भारत का घरेलू दवा बाजार करीब 60 अरब डॉलर का है और अनुमान है कि 2030 तक यह उछाल 130 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में इस सेक्टर का कुल कारोबार 4.72 करोड़ लाख रुपये तक पहुंच गया। पिछले एक दशक में दवाओं में सामान्यतः 7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। खास बात यह है कि भारत का ड्रग कंट्रोलर 2000-01 के 1.9 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 30.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो लगभग 16 गुना बढ़ गया है।

    जेनेरिक औषधियों में भारत का बाज़ार

    भारत दुनिया में जेनेरिक केरीज़ का सबसे बड़ा सप्लायर है और ग्लोबल स्टॉकहोम में उसका स्टॉक 20 प्रतिशत के करीब है। देश में करीब 60 अलग-अलग मेडिकल स्टोर्स में 60,000 से ज्यादा जेनेरिक दवाइयां बनाई जाती हैं। न केवल भारत में स्वास्थ्य सेवाएँ बेहतर हैं, बल्कि दुनिया भर के देशों के लिए भी भारत एक प्रतिष्ठित बाज़ार बन गया है।

    मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और गुणवत्ता पर भरोसा

    भारत में अमेरिका के सबसे अधिक ऐसे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जिनमें अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (यूएसएफडीए) के अनुमोदन शामिल हैं। यह भारतीय औषधियों की गुणवत्ता और सुरक्षा पर वैश्विक मान्यता का बड़ा प्रमाण है। देश में करीब 500 एक्टिवेशन प्रोडक्शन रॉ माल (एपीआई) का उत्पादन होता है, जो ग्लोबल ग्लोबल मार्केट का करीब 8 प्रतिशत हिस्सा है।

    वैक्सीन पॉडकास्ट में भी भारत अग्रणी

    भारत वैक्सीन उत्पादन में दुनिया के प्रमुख देशों में भी शामिल है। डिप्थीरिया, टिटनस, काली खांसी (डीपीटी), बीसीजी और खसरा जैस वैक्सीन की भारत में बड़ी भूमिका है। यूनिसेफ भारत को लगभग 60 प्रतिशत वैक्सीन पोस्ट करता है, जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन की खसरा वैक्सीन की मांग का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा भारत पूरा करता है। यह वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली में भारत की अहम भूमिका शामिल है।

    व्यापार घटनाक्रम और भविष्य की डेट

    यूरोपीय संघ, यूनाइटेड किंगडम और न्यूजीलैंड जैसे देशों के प्रस्तावित और औद्योगिक व्यापार भारतीय दवा सेक्टर को और प्लेसमेंट देंगे। इससे बाजार नए खुलेंगे, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। सरकार की शुरूआत, विदेशी निवेश और इनोवेशन पर बड़ा फोकस इस सेक्टर को नई ऊंचाई तक ले जा रहा है।

    भारत की औषधि उद्योग न केवल देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन गया है, बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आने वाले वर्षों में इसका विस्तार और प्रभाव और भी बढ़ने की पूरी संभावना है।