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  • आईपीएल में दिग्गज गेंदबाजों पर बरसे वैभव अब न्यूजीलैंड की उछाल वाली पिच पर होगी परीक्षा

    आईपीएल में दिग्गज गेंदबाजों पर बरसे वैभव अब न्यूजीलैंड की उछाल वाली पिच पर होगी परीक्षा


    नई दिल्ली । भारतीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने बेहद कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है। आईपीएल से लेकर भारत ए और भारतीय अंडर 19 टीम तक अपने प्रदर्शन से प्रभावित करने वाले वैभव अब न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में खुद को साबित करते नजर आ सकते हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच 22 अक्टूबर से 1 नवंबर तक पांच टी20 मैचों की सीरीज खेली जानी है और इस सीरीज को लेकर न्यूजीलैंड के कोच रॉब वॉल्टर की नजर भी इस युवा बल्लेबाज पर है। वॉल्टर ने वैभव को रोमांचक खिलाड़ी बताते हुए कहा है कि वह उन्हें तेज और उछाल वाली पिचों पर बल्लेबाजी करते हुए देखना चाहते हैं।

    न्यूजीलैंड की पिचों पर अक्सर तेज गेंदबाजों को अतिरिक्त उछाल और गति मिलने की संभावना रहती है। ऐसे में वैभव के लिए यह परिस्थितियां एक अलग तरह की चुनौती हो सकती हैं। रॉब वॉल्टर का कहना है कि उन्होंने वैभव को आईपीएल में दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए देखा है। अब वह यह देखना चाहते हैं कि अलग परिस्थितियों में वैभव का खेल किस तरह सामने आता है और न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में उनके गेंदबाज इस युवा बल्लेबाज के सामने किस तरह की रणनीति अपनाते हैं।

    वॉल्टर ने यह भी कहा कि एक कोच के तौर पर वह अपने खिलाड़ियों को दबाव वाली परिस्थितियों में प्रदर्शन करते हुए देखना चाहते हैं। इसी नजरिए से वह वैभव की बल्लेबाजी का इंतजार कर रहे हैं। उनके बयान से यह भी संकेत मिलता है कि न्यूजीलैंड टीम इस युवा भारतीय बल्लेबाज को लेकर पूरी तरह सतर्क है और उसकी बल्लेबाजी को गंभीरता से देख रही है।

    वैभव के लिए भारतीय टीम तक पहुंचने का सफर भी बेहद खास रहा है। कम उम्र में आईपीएल में धमाकेदार बल्लेबाजी के बाद उन्होंने भारत ए और भारत अंडर 19 टीम के लिए भी अपनी क्षमता दिखाई। इसके बाद उन्हें भारतीय टी20 टीम में जगह मिली। वह भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के लिए खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में शामिल हैं। इसी साल उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ टी20 मुकाबले से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था।

    डेब्यू सीरीज वैभव के लिए उम्मीद के मुताबिक नहीं रही लेकिन इसके बाद जिम्बाब्वे दौरे पर उन्होंने शानदार वापसी की। वहां उनके प्रदर्शन ने उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार दिलाया। अब तक वह छह टी20 मैचों की छह पारियों में 193 रन बना चुके हैं। उनके नाम दो अर्धशतक हैं और उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 81 रन है। इन आंकड़ों से साफ है कि कम उम्र के बावजूद वैभव ने टी20 क्रिकेट में तेजी से अपनी जगह बनाई है।

    वैभव फिलहाल एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम का भी हिस्सा हैं। हालांकि जापान के खिलाफ मुकाबले में उन्हें प्लेइंग इलेवन में शामिल नहीं किया गया था। ऐसे में आने वाले मुकाबलों में उन्हें कितने मौके मिलते हैं यह भी देखने वाली बात होगी। इसके बाद न्यूजीलैंड दौरा उनके लिए एक और महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है।

    न्यूजीलैंड में तेज गति और उछाल वाली पिचों पर वैभव का प्रदर्शन इसलिए भी खास होगा क्योंकि वहां की परिस्थितियां भारतीय उपमहाद्वीप की पिचों से अलग होती हैं। रॉब वॉल्टर की नजरें भी इसी बात पर हैं कि आईपीएल में बड़े गेंदबाजों के खिलाफ बेखौफ बल्लेबाजी करने वाला यह युवा खिलाड़ी न्यूजीलैंड की परिस्थितियों और दबाव में किस तरह अपनी बल्लेबाजी को ढालता है। भारत और न्यूजीलैंड की टी20 सीरीज में वैभव को मौका मिलता है तो उनके प्रदर्शन पर क्रिकेट प्रशंसकों के साथ न्यूजीलैंड टीम की भी नजर रहने की उम्मीद है।

  • SIR को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद के दावे, दो आयुक्तों की आपत्तियों पर विपक्ष का हमला..

    SIR को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद के दावे, दो आयुक्तों की आपत्तियों पर विपक्ष का हमला..

    नई दिल्ली । मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों ने राजनीतिक विवाद को तेज कर दिया है। सामने आई जानकारी के अनुसार चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर आपत्ति दर्ज की। इनमें Form-6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस तक पहुंच और SIR से जुड़े फैसलों सहित कई मुद्दे शामिल बताए गए हैं।

    विपक्षी दलों ने इन जानकारियों को आधार बनाकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने SIR और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वोट चोरी भारतीय नागरिकों के खिलाफ अपराध और संविधान पर हमला है। उन्होंने इस मामले में न्याय मिलने की बात भी कही।

    तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए राज्यसभा में प्रस्ताव लाने की मांग की। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने आयोग में फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी संवैधानिक संस्था के फैसले अकेले कैसे लिए जा सकते हैं। वहीं कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

    विवाद का एक प्रमुख मुद्दा Form-6 में किया गया बदलाव है। यह फॉर्म नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें SIR से संबंधित एक अतिरिक्त सवाल शामिल किया गया था। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने इस बदलाव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वैधानिक मतदाता पंजीकरण फॉर्म में बदलाव करने के लिए संबंधित नियमों में संशोधन की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

    मतदाता सूची के डिजिटल डेटाबेस और उसके सॉफ्टवेयर के नियंत्रण को लेकर भी चिंता सामने आई है। दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से कुछ ऐसे फैसलों और आदेशों पर आपत्ति दर्ज किए जाने की जानकारी है, जिनके बारे में कहा गया कि उन्हें निर्णय प्रक्रिया में पूरी जानकारी या सहमति के बिना आगे बढ़ाया गया।

    SIR से जुड़ी अपील प्रक्रिया और कुछ राज्यों में मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इन घटनाक्रमों के बीच चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर सामने आए मतभेद के दावों को अलग तरीके से स्पष्ट किया है। आयोग का कहना है कि SIR समेत उसके सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से हुए हैं।

    चुनाव आयोग तीन सदस्यीय संस्था है, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं। किसी मुद्दे पर सदस्यों के बीच मतभेद होने की स्थिति में बहुमत के आधार पर फैसला किए जाने का प्रावधान है। ऐसे में SIR को लेकर सामने आई आपत्तियों और आयोग के स्पष्टीकरण के बीच विवाद का केंद्र चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और निर्णय लेने की प्रक्रिया की पारदर्शिता बन गया है।

  • बिजली कटौती से परेशान ग्रामीण पहुंचे विधायक के घर बातचीत में बढ़ा विवाद दादागिरी वाले बयान पर चर्चा

    बिजली कटौती से परेशान ग्रामीण पहुंचे विधायक के घर बातचीत में बढ़ा विवाद दादागिरी वाले बयान पर चर्चा


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के करैरा क्षेत्र में बिजली कटौती की समस्या को लेकर ग्रामीणों और विधायक रमेश प्रसाद खटीक के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। बताया जा रहा है कि वायरल वीडियो रात के समय मंगरौनी स्थित विधायक के घर का है। बिलौनी गांव के ग्रामीण सरपंच बालकिशन जाटव के साथ बिजली की समस्या को लेकर विधायक के घर पहुंचे थे। ग्रामीणों का कहना था कि गांव में लगातार बिजली की समस्या के कारण पानी की सप्लाई प्रभावित हो रही है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    सरपंच बालकिशन जाटव के मुताबिक गांव में बिजली कनेक्शन कटने के कारण पंचायत की पानी व्यवस्था भी प्रभावित हो रही थी। उनका कहना है कि पंचायत की ओर से बिजली कंपनी में करीब 50 हजार रुपये की राशि जमा की गई थी इसके बावजूद कनेक्शन काट दिया गया। इसी समस्या के समाधान के लिए ग्रामीण रात में विधायक के घर पहुंचे। ग्रामीणों के अचानक घर पहुंचने पर विधायक ने रात के समय आने को लेकर नाराजगी जताई। इसके बाद बिजली कनेक्शन और गांव की समस्या को लेकर बातचीत शुरू हुई जो कुछ ही देर में बहस में बदल गई।

    वायरल वीडियो में विधायक और ग्रामीणों के बीच तीखी बातचीत सुनाई दे रही है। वीडियो में एक ग्रामीण वापस जाने की बात करता नजर आता है। इसी दौरान विधायक उसे अपने पास बुलाते हुए कहते सुनाई देते हैं कि इधर आ तू यहां दादागिरी बता रहा है क्या। बातचीत का यह हिस्सा वीडियो में रिकॉर्ड हो गया और सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों का ध्यान इस पूरे मामले की ओर गया। वीडियो बनाने वाला व्यक्ति भी घटनाक्रम के दौरान मौके पर मौजूद दिखाई दे रहा है।

    ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी तरह का विवाद खड़ा करना नहीं था बल्कि गांव में बिजली की समस्या को लेकर समाधान मांगना था। उनके अनुसार बिजली कटौती का सीधा असर पानी की व्यवस्था पर पड़ रहा था जिसके कारण ग्रामीण परेशान थे। इसी वजह से सरपंच के साथ ग्रामीण विधायक से मदद मांगने पहुंचे थे।

    दूसरी ओर विधायक रमेश प्रसाद खटीक ने कहा कि ग्रामीणों की समस्या सामने आने के बाद उन्होंने बिजली विभाग के जेई से बात की। इसके बाद रात में ही बिलौनी गांव का बिजली कनेक्शन जोड़ दिया गया। यानी जिस समस्या को लेकर ग्रामीण विधायक के घर पहुंचे थे उसका समाधान बातचीत के बाद उसी रात कराए जाने की बात विधायक और सरपंच दोनों ने कही है।

    विधायक ने घर में लगे सीसीटीवी कैमरों का भी जिक्र किया है। उनका कहना है कि रात के समय हुई पूरी घटना घर में लगे कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। उन्होंने चौकी प्रभारी को बुलाकर सीसीटीवी फुटेज निकलवाने की बात भी कही है। विधायक की ओर से यह आरोप भी लगाया गया कि ग्रामीणों में कुछ लोग शराब के नशे में थे और कुछ लोग राजनीतिक साजिश के तहत उनके घर पहुंचे थे। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

    फिलहाल इस मामले में वायरल वीडियो के सामने आने के बाद बिजली समस्या से ज्यादा ग्रामीणों और विधायक के बीच हुई बातचीत चर्चा का विषय बनी हुई है। एक तरफ ग्रामीण बिजली कटौती और पानी की परेशानी का मुद्दा उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ विधायक ने रात में घर पहुंचने और घटनाक्रम को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। अब सीसीटीवी फुटेज सामने आने और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियां स्पष्ट होने के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

  • NSE IPO में 20 निवेश बैंकरों की बड़ी कमाई, फीस और कमीशन से मिले 186 करोड़ रुपये

    NSE IPO में 20 निवेश बैंकरों की बड़ी कमाई, फीस और कमीशन से मिले 186 करोड़ रुपये

    नई दिल्ली । नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के बहुप्रतीक्षित आईपीओ को पूरा कराने में शामिल 20 निवेश बैंकरों ने फीस और कमीशन के रूप में कुल 186.20 करोड़ रुपये कमाए हैं। एक्सचेंज से जुड़ी हालिया फाइलिंग में आईपीओ की प्रक्रिया पर हुए खर्च और अलग-अलग मदों में भुगतान की जानकारी सामने आई है।

    NSE का 22,561.5 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल यानी OFS 17 सितंबर से 21 सितंबर 2026 तक निवेशकों के लिए खुला था। इस आईपीओ की लिस्टिंग 24 सितंबर 2026 को निर्धारित है। पूरे ऑफर को पूरा करने में कुल अनुमानित खर्च 392.12 करोड़ रुपये रहा, जो इश्यू के कुल आकार का करीब 1.74 प्रतिशत है।

    आईपीओ प्रक्रिया से जुड़े कुल खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा निवेश बैंकरों की फीस का रहा। 20 मर्चेंट बैंकर्स को कुल 186.20 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह रकम आईपीओ से जुड़े कुल खर्च का 47.49 प्रतिशत है। वहीं, पूरे 22,561.5 करोड़ रुपये के इश्यू आकार के मुकाबले यह खर्च करीब 0.82 प्रतिशत बैठता है।

    आईपीओ की पूरी प्रक्रिया में कई तरह के खर्च शामिल होते हैं। इनमें सेबी के पास जमा किए जाने वाले ड्राफ्ट पेपर तैयार करने से लेकर निवेशकों तक आईपीओ की जानकारी पहुंचाने, आवेदन प्रक्रिया को संभालने और विभिन्न पेशेवर सेवाओं के भुगतान तक की लागत शामिल होती है।

    कुल 392.12 करोड़ रुपये के खर्च में बैंकरों की फीस निकालने के बाद 205.92 करोड़ रुपये अन्य मदों में खर्च हुए। यह कुल खर्च का लगभग 52.51 प्रतिशत हिस्सा है। इसमें नियामकीय शुल्क, स्टॉक एक्सचेंजों से जुड़े खर्च, विज्ञापन और मार्केटिंग, कानूनी सलाहकारों की फीस, रजिस्ट्रार का खर्च और स्टांप ड्यूटी जैसी लागत शामिल है।

    NSE के आईपीओ के लिए नियुक्त 20 मर्चेंट बैंकर्स में कोटक महिंद्रा कैपिटल, जेएम फाइनेंशियल, मॉर्गन स्टेनली इंडिया, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स और एचएसबीसी सिक्योरिटीज शामिल हैं। इनके अलावा जेपी मॉर्गन इंडिया, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस कैपिटल भी इस सिंडिकेट का हिस्सा रहे।

    इस सूची में मोतीलाल ओसवाल इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स, एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज, नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट, एवेन्डस कैपिटल और आईडीबीआई कैपिटल मार्केट्स भी शामिल हैं। 360 वन वैम, आनंद राठी एडवाइजर्स, डैम कैपिटल एडवाइजर्स, पंतोमथ कैपिटल और एक्विरेस कैपिटल भी आईपीओ प्रक्रिया में नियुक्त मर्चेंट बैंकर्स में शामिल रहे।

    मेनबोर्ड सेगमेंट के किसी आईपीओ के लिए 20 मर्चेंट बैंकर्स का इतना बड़ा सिंडिकेट भारतीय कॉर्पोरेट बाजार में एक उल्लेखनीय व्यवस्था रही। इतने बड़े नेटवर्क के जरिए अलग-अलग श्रेणी के संस्थागत निवेशकों तक पहुंच बनाने की कोशिश की गई।

    इसमें सॉवरेन वेल्थ फंड्स, वैश्विक पेंशन फंड्स और बड़े म्यूचुअल फंड्स जैसे संस्थागत निवेशक शामिल रहे। आईपीओ की पूरी प्रक्रिया में बैंकरों की भूमिका निवेशकों तक पहुंच, इश्यू प्रबंधन और अन्य संबंधित गतिविधियों को संभालने से जुड़ी रही।

    NSE के इस आईपीओ में कुल 392.12 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत में से करीब आधा हिस्सा अकेले 20 निवेश बैंकरों की फीस और कमीशन पर खर्च हुआ। बाकी राशि नियामकीय शुल्क, मार्केटिंग, कानूनी सेवाओं और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं से जुड़े खर्चों में गई।

  • इंटरनेट बंद होने पर भी पेमेंट की तैयारी, RBI की HaRBInger पहल में e₹ के लिए खोजा जा रहा नया रास्ता

    इंटरनेट बंद होने पर भी पेमेंट की तैयारी, RBI की HaRBInger पहल में e₹ के लिए खोजा जा रहा नया रास्ता

    नई दिल्ली ।डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इंटरनेट कनेक्टिविटी पर निर्भरता कम करने की दिशा में नई तकनीकों पर काम किया जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक की HaRBInger Innovation Challenge पहल में ऑफलाइन डिजिटल भुगतान से जुड़े समाधान को भी शामिल किया गया है। इसके तहत डिजिटल रुपये यानी e₹ का इस्तेमाल इंटरनेट के बिना करने की संभावनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

    फिलहाल ज्यादातर डिजिटल भुगतान के लिए मोबाइल इंटरनेट और नेटवर्क कनेक्टिविटी की जरूरत होती है। ऐसे में कमजोर नेटवर्क वाले इलाकों, यात्रा के दौरान या इंटरनेट सेवा बाधित होने की स्थिति में डिजिटल भुगतान करना मुश्किल हो सकता है। ऑफलाइन भुगतान से जुड़ी तकनीक इसी समस्या का समाधान तलाशने की दिशा में एक प्रयास है।

    HaRBInger के तहत ऑफलाइन डिजिटल भुगतान के लिए Bluetooth और NFC जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की संभावनाएं देखी जा रही हैं। इन तकनीकों के जरिए आसपास मौजूद दो डिवाइस के बीच सीधे कनेक्शन स्थापित करके भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने के विकल्प तलाशे जा रहे हैं।

    NFC यानी Near Field Communication ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए पास रखे दो संगत डिवाइस के बीच डेटा का आदान-प्रदान किया जा सकता है। वहीं Bluetooth के माध्यम से भी आसपास मौजूद डिवाइस को कनेक्ट किया जा सकता है। ऑफलाइन भुगतान के संभावित मॉडल में इन तकनीकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

    इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य डिजिटल भुगतान के लिए हर बार मोबाइल इंटरनेट पर निर्भरता को कम करना है। खास तौर पर ऐसे स्थानों पर इसका इस्तेमाल उपयोगी हो सकता है, जहां नेटवर्क कमजोर रहता है या इंटरनेट कनेक्टिविटी लगातार उपलब्ध नहीं होती।

    e₹ यानी डिजिटल रुपया केंद्रीय बैंक की ओर से जारी डिजिटल मुद्रा है। HaRBInger Innovation Challenge में Offline CBDC यानी ऑफलाइन e₹ को एक प्रमुख तकनीकी चुनौती के तौर पर शामिल किया गया है। यदि इससे जुड़े समाधान सफल होते हैं, तो इंटरनेट कनेक्टिविटी के बिना डिजिटल रुपये के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

    कमजोर नेटवर्क वाले ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इस तरह की तकनीक उपयोगी हो सकती है। इसके अलावा यात्रा के दौरान नेटवर्क नहीं मिलने या किसी क्षेत्र में अस्थायी रूप से इंटरनेट सेवा बाधित होने जैसी परिस्थितियों में भी ऑफलाइन डिजिटल भुगतान का विकल्प महत्वपूर्ण हो सकता है।

    हालांकि, अभी यह समझना जरूरी है कि ऑफलाइन e₹ भुगतान पर तकनीकी समाधान तलाशे जाने का अर्थ यह नहीं है कि हर व्यक्ति वर्तमान समय में तुरंत बिना इंटरनेट डिजिटल रुपये से भुगतान कर सकता है। यह पहल मुख्य रूप से ऐसी तकनीक विकसित करने और संभावित समाधान तलाशने से जुड़ी है।

    HaRBInger RBI का ग्लोबल हैकेथॉन है, जिसका उद्देश्य फिनटेक और डिजिटल भुगतान से जुड़ी नई तकनीकों तथा समाधान को बढ़ावा देना है। इसके माध्यम से अलग-अलग तकनीकी चुनौतियों के समाधान के लिए नए विचारों और नवाचारों को सामने लाने का प्रयास किया जाता है।

    वर्ष 2025 में शुरू की गई इस पहल में Tokenised KYC, Offline CBDC यानी e₹ और Enhancing Trust जैसी तीन प्रमुख चुनौतियों पर नवाचार के लिए ध्यान केंद्रित किया गया था। ऑफलाइन e₹ से जुड़ी तकनीक पर काम इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

    अगर भविष्य में सुरक्षित और प्रभावी ऑफलाइन भुगतान प्रणाली विकसित होती है, तो डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल उन परिस्थितियों में भी संभव हो सकता है, जहां सामान्य इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं रहती। हालांकि, इसके वास्तविक उपयोग, उपलब्धता और तकनीकी सीमाएं समाधान के सफल विकास तथा लागू होने के बाद ही स्पष्ट होंगी।

  • अगस्त में घरेलू हवाई यातायात 6.34 प्रतिशत घटा, इंडिगो और स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में आई कमी

    अगस्त में घरेलू हवाई यातायात 6.34 प्रतिशत घटा, इंडिगो और स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में आई कमी

    नई दिल्ली ।भारत में घरेलू हवाई यात्री यातायात में अगस्त के दौरान सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई। इस महीने घरेलू एयरलाइनों से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या 6.34 प्रतिशत घटकर करीब 1.21 करोड़ रह गई। विमानन क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान प्रमुख एयरलाइनों की बाजार हिस्सेदारी में भी बदलाव देखने को मिला।

    अगस्त में इंडिगो घरेलू विमानन बाजार में सबसे बड़ी एयरलाइन बनी रही, हालांकि उसकी बाजार हिस्सेदारी जुलाई के मुकाबले कम हुई। जुलाई में इंडिगो की हिस्सेदारी 67.4 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 65 प्रतिशत रह गई। इसके बावजूद कंपनी घरेलू हवाई यातायात में सबसे आगे रही।

    अगस्त के दौरान इंडिगो से 78.87 लाख यात्रियों ने हवाई सफर किया। घरेलू बाजार में उसकी हिस्सेदारी घटने के बावजूद यात्रियों की संख्या के लिहाज से वह अन्य प्रमुख एयरलाइनों से आगे रही।

    एयर इंडिया समूह की बाजार हिस्सेदारी में इस दौरान बढ़ोतरी दर्ज की गई। जुलाई में समूह की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी, जो अगस्त में बढ़कर 26.7 प्रतिशत हो गई। अगस्त में एयर इंडिया समूह के विमानों से 32.32 लाख यात्रियों ने यात्रा की।

    अकासा एयर की बाजार हिस्सेदारी अगस्त में 5.5 प्रतिशत पर स्थिर रही। एयरलाइन ने इस महीने 6.68 लाख यात्रियों को यात्रा कराई। इस तरह बाजार हिस्सेदारी के मामले में अकासा एयर ने तीसरा स्थान बरकरार रखा।

    स्पाइसजेट के प्रदर्शन में अगस्त के दौरान गिरावट देखने को मिली। जुलाई में उसकी बाजार हिस्सेदारी 1.6 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 1.2 प्रतिशत रह गई। एयरलाइन ने इस महीने करीब 1.40 लाख यात्रियों को यात्रा कराई।

    स्पाइसजेट को अगस्त में कई परिचालन संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इन परिस्थितियों का असर उसकी उड़ानों पर भी पड़ा और कई उड़ानों में देरी दर्ज की गई। बाजार हिस्सेदारी में कमी के बीच एयरलाइन के परिचालन प्रदर्शन पर भी निगरानी बनी रही।

    उड़ानों के समय पर संचालन के मामले में अगस्त के दौरान इंडिगो का प्रदर्शन प्रमुख एयरलाइनों में सबसे बेहतर रहा। एयरलाइन का ऑन-टाइम परफॉरमेंस 91 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसके बाद अकासा एयर का प्रदर्शन 90.5 प्रतिशत रहा।

    एयर इंडिया समूह का ऑन-टाइम परफॉरमेंस अगस्त में 83.9 प्रतिशत रहा। वहीं, अलायंस एयर का प्रदर्शन 71.8 प्रतिशत दर्ज किया गया। इन आंकड़ों से अलग-अलग एयरलाइनों के समय पर उड़ान संचालन में अंतर का पता चलता है।

    स्पाइसजेट से जुड़ी परिचालन और वित्तीय स्थिति को लेकर भी निगरानी जारी है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि विमानन नियामक डीजीसीए एयरलाइन की मौजूदा चुनौतियों के बीच उसके वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन पर करीबी नजर रख रहा है।

    मंत्री के अनुसार, डीजीसीए को एयरलाइन की परिचालन और वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एयरलाइन की मौजूदा परिस्थितियों के बीच विमानन सुरक्षा से किसी तरह का समझौता न हो।

    अगस्त के आंकड़ों में जहां घरेलू हवाई यातायात में सालाना गिरावट सामने आई, वहीं एयरलाइनों की बाजार हिस्सेदारी में अलग-अलग बदलाव दर्ज हुए। इंडिगो अभी भी बाजार में सबसे आगे रही, जबकि एयर इंडिया समूह की हिस्सेदारी बढ़ी और स्पाइसजेट की हिस्सेदारी में कमी आई।

  • सितंबर में भारत की निजी अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 56.5 पर पहुंचा

    सितंबर में भारत की निजी अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 56.5 पर पहुंचा

    नई दिल्ली ।भारत के निजी क्षेत्र में सितंबर के दौरान आर्थिक गतिविधियों में मजबूती देखने को मिली है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में बेहतर प्रदर्शन के चलते कंपोजिट पीएमआई बढ़कर 56.5 पर पहुंच गया। अगस्त में यह आंकड़ा 54.3 था। सितंबर का स्तर जून के बाद निजी क्षेत्र की गतिविधियों में सबसे तेज विस्तार को दर्शाता है।

    एचएसबीसी फ्लैश इंडिया कंपोजिट पीएमआई में देश के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों की गतिविधियों को शामिल किया जाता है। सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, दोनों क्षेत्रों की कंपनियों ने कारोबार में विस्तार दर्ज किया। नए ऑर्डर और रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई, जबकि महंगाई का दबाव कम होने और कारोबारी भरोसे में सुधार के संकेत मिले।

    आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में निजी क्षेत्र की कारोबारी गतिविधियां अपने दीर्घकालिक औसत से ऊपर पहुंच गईं। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की मजबूती ने संयुक्त गतिविधियों की रफ्तार बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान उत्पादन और घरेलू नए ऑर्डर में तेज वृद्धि दर्ज की गई।

    सितंबर में कंपनियों के कुल नए कारोबार में भी मजबूत बढ़ोतरी हुई। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में मांग बढ़ी, लेकिन सामान बनाने वाली कंपनियों में इसका असर ज्यादा स्पष्ट रहा। मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की बिक्री में वृद्धि सात महीनों के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई।

    सर्विस सेक्टर की कंपनियों ने नए ऑर्डर हासिल करने में मार्केटिंग गतिविधियों को उपयोगी बताया। सर्वेक्षण के गुणात्मक हिस्से में प्रॉपर्टी सेवाओं, परिवहन सेवाओं और नई यात्रा बुकिंग से जुड़ी मांग में बढ़ोतरी का उल्लेख किया गया।

    मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में भी कई उत्पादों की मांग बढ़ने की जानकारी सामने आई। कंपनियों ने एल्युमीनियम उत्पादों, इलेक्ट्रॉनिक सामान, खाद्य एवं पेय पदार्थों और फार्मास्युटिकल उत्पादों के साथ नए मॉडलों की मांग में बढ़ोतरी दर्ज की।

    सितंबर के दौरान रोजगार के मोर्चे पर भी सकारात्मक गतिविधि देखने को मिली। कंपनियों ने उत्पादन और नए ऑर्डर में लगातार वृद्धि के बीच अपनी स्टाफिंग क्षमता बढ़ाई। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों में नई नौकरियां पैदा हुईं। दोनों क्षेत्रों में रोजगार विस्तार की दर लगभग समान रही।

    आर्थिक गतिविधियों में तेजी के साथ कंपनियों ने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इनपुट खरीद भी बढ़ाई। तैयार माल के स्टॉक से जुड़े सूचकांक में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह सूचकांक करीब साढ़े 11 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

    हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए लागत से जुड़ा दबाव बढ़ने के संकेत भी मिले। इनपुट कीमतों में बढ़ोतरी के बीच कंपनियों ने अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए आउटपुट की कीमतों में भी वृद्धि की। इससे उत्पादों की कीमतों पर महंगाई का दबाव बढ़ने की स्थिति बनी।

    आर्थिक गतिविधियों के मजबूत रहने के बावजूद कंपनियों ने वैश्विक स्तर पर मौजूद अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियां बढ़ाईं। मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के बीच कंपनियों ने संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए बफर तैयार करने पर ध्यान दिया।

    सितंबर के पीएमआई आंकड़ों से निजी क्षेत्र में उत्पादन, नए कारोबार और रोजगार के स्तर पर व्यापक सुधार के संकेत मिले हैं। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों क्षेत्रों की गतिविधियों में विस्तार के चलते संयुक्त पीएमआई अगस्त के मुकाबले काफी ऊपर रहा और जून के बाद सबसे मजबूत स्तर दर्ज किया गया।

  • आयुष्मान भारत के आठ साल पूरे, 60 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिला पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर, जानें बड़े आंकड़े

    आयुष्मान भारत के आठ साल पूरे, 60 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिला पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर, जानें बड़े आंकड़े

    नई दिल्ली । आयुष्मान भारत योजना के बुधवार को आठ साल पूरे हो गए। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना से जुड़े लाभार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए इसके अब तक के सफर और उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि योजना के तहत देश के 60 करोड़ से अधिक लोगों को सालाना पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिल रहा है।

    प्रधानमंत्री के अनुसार आयुष्मान भारत की शुरुआत आठ साल पहले इस उद्देश्य के साथ की गई थी कि देश के प्रत्येक नागरिक को बेहतर और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें। योजना के विस्तार के साथ बड़ी संख्या में लोगों को अस्पताल में इलाज कराने के दौरान आर्थिक सहायता मिली है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत के तहत 60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को सालाना पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिल रहा है। उनके अनुसार, इस वजह से यह योजना दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजनाओं में शामिल हो गई है।

    उन्होंने यह भी कहा कि योजना की वजह से इलाज पर होने वाले खर्च में बड़ी बचत संभव हुई है। इसका लाभ विशेष रूप से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को मिलने की बात कही गई। स्वास्थ्य सेवाओं को लोगों के घरों के करीब पहुंचाने की दिशा में भी योजना के तहत काम किए जाने का उल्लेख किया गया।

    आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का भी इस अवसर पर उल्लेख किया गया। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन केंद्रों पर अब तक 500 करोड़ से अधिक बार लोगों की विजिट दर्ज की जा चुकी है। इन केंद्रों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर पर मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी योजना के आठ वर्ष पूरे होने पर इसके विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को लेकर जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि आठ साल पहले स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बदलने के उद्देश्य से शुरू की गई पहल ने बड़ी संख्या में लोगों को लाभ पहुंचाया है।

    योजना के तहत अब तक 48.54 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा 13 करोड़ से अधिक लोगों को इलाज का लाभ मिलने की बात कही गई। योजना के दायरे में आने वाले लाभार्थियों को देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

    आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 39 हजार से अधिक सरकारी और निजी अस्पताल योजना के तहत सूचीबद्ध हैं। इन अस्पतालों के माध्यम से दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के अस्पताल में भर्ती और इलाज संबंधी लाभ का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है।

    केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी आयुष्मान भारत योजना के आठ वर्ष पूरे होने पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि योजना ने करोड़ों परिवारों के लिए बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने में मदद की है।

    उन्होंने यह भी कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए इलाज के खर्च की चिंता कम करने में योजना सहायक रही है। उनके अनुसार, स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ी इस पहल ने बड़ी संख्या में परिवारों को आर्थिक सहारा उपलब्ध कराया है।

    आयुष्मान भारत योजना के आठ वर्ष पूरे होने के मौके पर सामने आए आंकड़े इसके विस्तार को दर्शाते हैं। 60 करोड़ से अधिक लाभार्थियों का स्वास्थ्य कवर, 48.54 करोड़ से अधिक कार्ड और 13 करोड़ से अधिक लोगों को उपचार का लाभ योजना के अब तक के क्रियान्वयन से जुड़े प्रमुख आंकड़े हैं।

  • सायोनी घोष की संभावित नई भूमिका, नंदीग्राम और रेजीनगर में भाजपा के लिए प्रचार की चर्चा

    सायोनी घोष की संभावित नई भूमिका, नंदीग्राम और रेजीनगर में भाजपा के लिए प्रचार की चर्चा

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI ने दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करने का फैसला किया है। हालांकि, पार्टी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रचार अभियान में कौन-कौन से नेता शामिल होंगे। इसी वजह से सांसद सायोनी घोष की संभावित भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

    सायोनी घोष उन सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होने के बाद NCPI में विलय किया था। इससे पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में वह भाजपा की मुखर विरोधी रही हैं। अब NCPI के भाजपा समर्थित प्रचार अभियान के फैसले के बाद उनकी संभावित भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक पार्टी की ओर से सायोनी घोष के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    NCPI ने दोनों विधानसभा सीटों पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। पार्टी का कहना है कि इसी वजह से उसने भाजपा के समर्थन में प्रचार करने का निर्णय लिया है। पार्टी ने खुद को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में भाजपा के बाद सबसे बड़ा साझेदार भी बताया है। NCPI के अनुसार, उसके साथ कुल 20 सांसद हैं।

    पार्टी नेतृत्व ने पश्चिम बंगाल में लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक टकराव को कम करने और मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया है। NCPI की ओर से आने वाले समय में गठबंधन नेतृत्व के साथ एक बड़ी बैठक किए जाने की बात भी कही गई है। इसमें राज्य से जुड़े राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

    हालांकि, भाजपा ने NCPI के इस समर्थन को औपचारिक चुनावी गठबंधन नहीं माना है। भाजपा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि दोनों सीटों पर समर्थन में प्रचार करने का अर्थ भविष्य में सीटों के बंटवारे या किसी औपचारिक चुनावी समझौते से नहीं है। यानी फिलहाल NCPI का समर्थन प्रचार तक सीमित बताया गया है।

    उधर, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए नेताओं का एक गुट भी उपचुनाव को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। इस गुट ने नंदीग्राम सीट से मोहम्मद एतेशामुल हक को उम्मीदवार बनाया है। गुट की ओर से चुनाव को तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे राजनीतिक मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। रेजीनगर सीट भी रिक्त होने के बाद उपचुनाव के लिए निर्धारित की गई है।

    उपचुनाव से पहले दोनों सीटों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। NCPI के भाजपा समर्थन वाले फैसले ने इन चुनावों में एक नया राजनीतिक समीकरण जरूर सामने रखा है। वहीं, सायोनी घोष की भूमिका अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यदि पार्टी उन्हें प्रचार अभियान में शामिल करती है, तो उनकी सार्वजनिक भूमिका में बदलाव को लेकर चर्चा और बढ़ सकती है।

    फिलहाल आधिकारिक तौर पर इतना ही स्पष्ट है कि NCPI नंदीग्राम और रेजीनगर में भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेगी। सायोनी घोष समेत किन नेताओं को प्रचार अभियान में उतारा जाएगा, इसकी तस्वीर पार्टी की अंतिम घोषणा के बाद ही साफ होगी।

  • आजमगढ़ में पत्नी, दो पुजारियों और बेटे की हत्या, आठ घंटे बाद पुलिस मुठभेड़ में आरोपी ढेर

    आजमगढ़ में पत्नी, दो पुजारियों और बेटे की हत्या, आठ घंटे बाद पुलिस मुठभेड़ में आरोपी ढेर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में मंगलवार शाम एक गंभीर घटना के बाद करीब आठ घंटे तक बंधक संकट की स्थिति बनी रही। शंभूपुर गांव में अरविंद सिंह ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और दो पुजारियों को गोली मार दी। इसके बाद वह अपने बच्चों को लेकर एक कमरे में बंद हो गया। पुलिस ने काफी देर तक बातचीत के जरिए उसे आत्मसमर्पण के लिए तैयार करने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति नियंत्रण में नहीं आई।

    बताया गया कि अरविंद शाम के समय अपने घर पहुंचा था। उस समय घर में पूजा-पाठ चल रहा था। वहां उसकी पत्नी बबीता सिंह के अलावा पुजारी महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा मौजूद थे। पूजा को लेकर जानकारी लेने के दौरान अरविंद ने पुजारियों से आधार कार्ड दिखाने के लिए कहा। इसी बात को लेकर पत्नी के साथ उसकी बहस हो गई।

    विवाद बढ़ने के बाद अरविंद ने कथित तौर पर लाइसेंसी हथियार से फायरिंग कर दी। गोली लगने से उसकी पत्नी बबीता और दोनों पुजारियों की मौत हो गई। घटना के बाद अरविंद अपने बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

    तीन लोगों की हत्या की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने आरोपी से लगातार बातचीत करने की कोशिश की। उसके परिवार के लोगों के माध्यम से भी उसे समझाने का प्रयास किया गया। पुलिस का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था।

    करीब सात घंटे तक बातचीत और समझाने का सिलसिला चलता रहा। आरोपी आत्मसमर्पण के लिए तैयार नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार, वह बच्चों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहा था। इसी बीच कमरे के भीतर से अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने 10 वर्षीय बेटे को गोली मार दी। बच्चे को गोली लगने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई का फैसला किया। कमरे में प्रवेश के दौरान स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

    पुलिस के अनुसार, टीम के कमरे में पहुंचने पर आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की। इस कार्रवाई में अरविंद सिंह घायल हो गया।

    घायल आरोपी और उसके बेटे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई। वहीं, कमरे में मौजूद दो अन्य बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना के बाद मौके पर पुलिस बल, विशेष जांच टीम और फॉरेंसिक टीम को तैनात किया गया।

    पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और गोलीबारी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। शुरुआती जानकारी में पूजा के दौरान हुए विवाद को घटना की शुरुआत से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    करीब आठ घंटे तक चले इस घटनाक्रम में आरोपी की पत्नी, दो पुजारियों और उसके बेटे की जान चली गई। पुलिस कार्रवाई के बाद बाकी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और बंधक संकट समाप्त हुआ