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  • बॉलीवुड में शोक की लहर देव आनंद के बेटे सुनील आनंद ने दुनिया को कहा अलविदा नवकेतन परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

    बॉलीवुड में शोक की लहर देव आनंद के बेटे सुनील आनंद ने दुनिया को कहा अलविदा नवकेतन परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़


    नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के महान अभिनेता और सदाबहार स्टार देव आनंद के बेटे सुनील आनंद का 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सामने आते ही फिल्म जगत और उनके चाहने वालों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। बताया जा रहा है कि लंदन में हार्ट अटैक आने के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। परिवार ने इस दुखद समाचार की पुष्टि करते हुए सभी से इस कठिन समय में उनकी निजता का सम्मान करने की अपील की है।

    सुनील आनंद के निधन की जानकारी उनकी भतीजी और देव आनंद की पोती जीना नारंग ने एक भावुक बयान के माध्यम से साझा की। उन्होंने कहा कि भारी मन से परिवार यह दुखद सूचना दे रहा है। साथ ही उन्होंने लोगों से मिली संवेदनाओं और प्रार्थनाओं के लिए आभार व्यक्त किया और परिवार को इस कठिन समय में एकांत देने की अपील की।

    सुनील आनंद हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री कल्पना कार्तिक के पुत्र थे। उनका जन्म स्विट्जरलैंड में हुआ था। फिल्मी परिवार से होने के बावजूद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की। वर्ष 1984 में उन्होंने फिल्म आनंद और आनंद से बॉलीवुड में कदम रखा। इस फिल्म में उनके पिता देव आनंद भी नजर आए थे। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो सकी और सुनील को अपेक्षित पहचान नहीं मिली।

    इसके बाद उन्होंने कार थीफ और मैं तेरे लिए जैसी फिल्मों में भी काम किया लेकिन ये फिल्में भी दर्शकों का दिल जीतने में सफल नहीं रहीं। लगातार असफलताओं के बाद उन्होंने अभिनय से दूरी बना ली और निर्देशन के क्षेत्र में भी हाथ आजमाया। वर्ष 2001 में उन्होंने मास्टर नामक फिल्म का निर्देशन किया लेकिन यह फिल्म भी खास सफलता हासिल नहीं कर सकी।

    फिल्मों में अपेक्षित सफलता नहीं मिलने के बाद सुनील आनंद ने अपने पिता के प्रतिष्ठित प्रोडक्शन हाउस नवकेतन फिल्म्स की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने लंबे समय तक इस बैनर की विरासत को आगे बढ़ाने का काम किया। वर्ष 2008 में उन्होंने देव आनंद की क्लासिक फिल्म गाइड को कान फिल्म फेस्टिवल तक पहुंचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह उनके पिता की सिनेमाई विरासत को दुनिया तक पहुंचाने की एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।

    पिछले कई वर्षों से सुनील आनंद सार्वजनिक जीवन से दूर रह रहे थे और मीडिया की चकाचौंध से भी दूरी बनाए हुए थे। उनके निधन से न केवल परिवार बल्कि हिंदी फिल्म उद्योग ने भी एक ऐसा चेहरा खो दिया है जो भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा हुआ था।

    देव आनंद भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने लंबे करियर में अनेक यादगार फिल्में दीं और नवकेतन फिल्म्स के जरिए हिंदी सिनेमा को नई दिशा दी। अब उनके बेटे सुनील आनंद के निधन के साथ इस प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार पर एक और बड़ा दुख आ गया है।

    सोशल मीडिया पर फिल्म जगत की कई हस्तियों और प्रशंसकों ने सुनील आनंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उनकी सादगी और अपने पिता की विरासत के प्रति समर्पण को हमेशा याद किया जाएगा।

  • PoK हिंसा पर पाक रक्षा मंत्री का विवादित बयान, बोले- 'प्रदर्शनकारी भी भारत की तरह हमारे दुश्मन'

    PoK हिंसा पर पाक रक्षा मंत्री का विवादित बयान, बोले- 'प्रदर्शनकारी भी भारत की तरह हमारे दुश्मन'


    नई दिल्ली। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई के बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का विवादित बयान सामने आया है। उन्होंने इस्लामाबाद के खिलाफ आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों की तुलना भारत से करते हुए उन्हें भी पाकिस्तान का “दुश्मन” बताया। साथ ही उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ किसी भी तरह की बातचीत की संभावना से भी इनकार कर दिया।

    एक स्थानीय टीवी चैनल से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि जो लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर रहे हैं, उन्हें वह भारत की तरह ही पाकिस्तान का विरोधी मानते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब पीओके में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव को लेकर तनाव बना हुआ है।

    गोलीबारी में 14 लोगों की मौत का दावा
    हाल ही में प्रतिबंधित ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में निकाले गए विरोध मार्च के दौरान सुरक्षा बलों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया गया है। संगठन का दावा है कि इस कार्रवाई में कम से कम 14 कार्यकर्ताओं की मौत हुई, जबकि दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए।

    मंगलवार को रावलकोट से मुजफ्फराबाद की ओर निकाले गए मार्च में हजारों लोग शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारी पीओके विधानसभा में कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करने की मांग कर रहे थे। JAAC का कहना है कि यह व्यवस्था स्थानीय लोगों के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करती है और इस्लामाबाद समर्थित दलों को अनुचित लाभ पहुंचाती है।

    सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के अलग-अलग दावे
    JAAC के मुताबिक, लगभग 5,000 लोग शांतिपूर्ण मार्च में शामिल थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के गोलीबारी कर दी। संगठन का दावा है कि मृतकों में उसके संस्थापक सदस्य उमर नजीर के छोटे भाई उस्मान नजीर भी शामिल हैं।

    वहीं, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के पास आधुनिक हथियार थे और उन्होंने पहले सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई की गई। दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

    कई सप्ताह से जारी है विरोध प्रदर्शन
    पीओके में कई सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, 5 जून से शुरू हुए आंदोलन और उसके बाद हुई हिंसा तथा सुरक्षा कार्रवाई में अब तक 80 से अधिक लोगों की मौत होने का दावा किया जा चुका है। इससे पहले 40 लोगों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं, जिनमें 34 प्रदर्शनकारी और छह सुरक्षाकर्मी शामिल बताए गए थे।

    भारत ने चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
    इस घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने पीओके में तथाकथित विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई है। कई क्षेत्रों में झड़पों और मतपेटियां लूटे जाने जैसी घटनाओं की खबरें सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने चुनाव में धांधली और भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदान कराने पर सवाल उठाए हैं।

    भारत ने इन चुनावों को पाकिस्तान के अवैध कब्जे को वैध ठहराने की कोशिश बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि यह पूरी चुनावी प्रक्रिया केवल दिखावटी कवायद है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में मानवाधिकार उल्लंघनों और अवैध कब्जे को छिपाना है।

    उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा केंद्र शासित प्रदेश, जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। साथ ही उन्होंने कहा कि पीओके में जारी विरोध प्रदर्शन वहां के लोगों के आर्थिक शोषण, अधिकारों से वंचित किए जाने और प्रशासनिक दमन का परिणाम हैं।

  • 30 जुलाई से होगी सावन की शुरुआत, जानें शिव पूजा, उपवास और सोमवार व्रत के जरूरी नियम

    30 जुलाई से होगी सावन की शुरुआत, जानें शिव पूजा, उपवास और सोमवार व्रत के जरूरी नियम


    नई दिल्ली। भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण मास का शुभारंभ 30 जुलाई, गुरुवार से आयुष्मान योग और श्रवण नक्षत्र में होगा। इस दिन चंद्रमा मकर राशि और सूर्य कर्क राशि में रहेंगे। श्रावण कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि रात 9:30 बजे तक रहेगी। इस वर्ष सावन 31 दिनों का होगा और इसका समापन 28 अगस्त को होगा। पूरे माह में श्रद्धालु शिव कृपा प्राप्त करने के लिए सोमवार व्रत, प्रदोष व्रत, सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत का पालन करेंगे।

    पहली बार व्रत रखने वालों के लिए शुरुआत कैसे करें?
    जो श्रद्धालु पहली बार सावन का व्रत रखना चाहते हैं, वे 3 अगस्त से पहले सावन सोमवार व्रत का संकल्प ले सकते हैं। इस वर्ष कुल चार सावन सोमवार और चार मंगला गौरी व्रत पड़ेंगे।

    सावन सोमवार की तिथियां
    3 अगस्त – पहला सोमवार
    10 अगस्त – दूसरा सोमवार
    17 अगस्त – तीसरा सोमवार
    24 अगस्त – चौथा सोमवार

    मंगला गौरी व्रत
    4 अगस्त
    11 अगस्त
    18 अगस्त
    25 अगस्त

    अन्य प्रमुख व्रत
    10 अगस्त – प्रदोष व्रत
    11 अगस्त – सावन शिवरात्रि
    25 अगस्त – प्रदोष व्रत

    व्रत का संकल्प और उद्यापन जरूरी
    यदि आप सावन सोमवार व्रत शुरू कर रहे हैं तो 3 अगस्त से संकल्प लेकर चारों सोमवार व्रत करें और 24 अगस्त को विधि-विधान से उद्यापन करें। कुछ परंपराओं में भाद्रपद के पहले सोमवार को पांचवां व्रत रखकर उद्यापन करने की भी मान्यता है। वहीं 16 सोमवार व्रत करने वाले श्रद्धालु भी इसकी शुरुआत पहले सावन सोमवार से करते हैं।

    व्रत के दौरान रखें इन नियमों का ध्यान
    सावन शुरू होने से पहले ही यह संकल्प लें कि पूरे महीने मांस, मदिरा, धूम्रपान और अन्य तामसिक पदार्थों से दूरी बनाए रखेंगे। इस दौरान ब्रह्मचर्य और संयम का पालन करना भी शुभ माना गया है। व्रत वाले दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और जल हाथ में लेकर भगवान शिव की पूजा तथा व्रत का संकल्प लें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत तभी फलदायी होता है जब व्यक्ति मन, वचन और कर्म से पवित्र रहे। छल, कपट, क्रोध और घृणा जैसे भावों से दूर रहकर शिव भक्ति करना अधिक महत्वपूर्ण माना गया है।

    ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
    हर सोमवार या व्रत वाले दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करें। पूजन में बेलपत्र, अक्षत, कच्चा दूध, शहद, चंदन, पुष्प, भांग, धतूरा और शमी के पत्ते अर्पित किए जा सकते हैं। पुरुष श्रद्धालु ‘ॐ नमः शिवाय’ तथा महिलाएं ‘नमः शिवाय’ मंत्र का जप करें। इसके साथ शिव चालीसा का पाठ और आरती करें। शाम के समय शिवलिंग के समीप दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।

    पूरे सावन में करें शिव आराधना
    जिन दिनों व्रत न हो, उन दिनों भी भगवान शिव का जलाभिषेक और नियमित पूजा करना शुभ माना गया है। यदि संभव हो तो किसी एक व्रत के दिन रुद्राभिषेक भी कराया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई शिव उपासना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

  • ब्रिटेन के 21 पोर्ट पर अडानी की नजर! ABP में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, वैश्विक विस्तार को मिलेगी रफ्तार

    ब्रिटेन के 21 पोर्ट पर अडानी की नजर! ABP में हिस्सेदारी खरीदने की तैयारी, वैश्विक विस्तार को मिलेगी रफ्तार


    नई दिल्ली। अडानी समूह की प्रमुख कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (APSEZ) ब्रिटेन के सबसे बड़े पोर्ट ऑपरेटर एसोसिएटेड ब्रिटिश पोर्ट्स (ABP) में हिस्सेदारी खरीदने की संभावनाएं तलाश रही है। यदि यह सौदा सफल होता है, तो अडानी समूह का बंदरगाह कारोबार भारत से आगे बढ़कर ब्रिटेन तक पहुंच जाएगा और वैश्विक स्तर पर उसकी मौजूदगी और मजबूत होगी।

    63.9% हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध
    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ABP की 63.9% नियंत्रक हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध है। यह हिस्सेदारी कनाडा के दो प्रमुख पेंशन फंड—कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) और ओंटारियो म्युनिसिपल एम्प्लॉइज़ रिटायरमेंट सिस्टम (OMERS)—के पास है। दोनों निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया के लिए बैंकर नियुक्त किए हैं।

    21 बंदरगाहों का संचालन करती है ABP
    ABP इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में फैले 21 प्रमुख बंदरगाहों का संचालन करती है। इनमें इमिंघम, जो ब्रिटेन का सबसे बड़ा बंदरगाह है, और साउथेम्प्टन, जो देश का प्रमुख आयात केंद्र माना जाता है, शामिल हैं। कंपनी के पोर्ट ब्रिटेन के कुल समुद्री व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत संभालते हैं।

    वर्ष 2025 में ABP ने 42.5 मिलियन टन बल्क कार्गो और 3.1 मिलियन कंटेनर एवं रोल-ऑन/रोल-ऑफ यूनिट्स का संचालन किया। इस दौरान कंपनी का राजस्व 819.8 मिलियन पाउंड और परिचालन लाभ 586.5 मिलियन पाउंड रहा।

    अडानी के लिए क्यों अहम है यह सौदा?
    विशेषज्ञों के अनुसार, ABP की आय का बड़ा हिस्सा दीर्घकालिक ग्राहक अनुबंधों और पायलटेज सेवाओं से आता है, जिससे कंपनी को स्थिर राजस्व मिलता है। यही वजह है कि इसे अडानी पोर्ट्स के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण निवेश माना जा रहा है।

    पहले से कई देशों में मौजूद है अडानी पोर्ट्स
    अडानी पोर्ट्स फिलहाल भारत में 15 बंदरगाहों का संचालन करती है, जिनकी कुल क्षमता 653 मिलियन टन है। इसके अलावा कंपनी इज़रायल, तंजानिया, श्रीलंका और ऑस्ट्रेलिया में भी पोर्ट कारोबार से जुड़ी हुई है।

    वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने 501 मिलियन टन कार्गो का संचालन किया। अडानी पोर्ट्स का लक्ष्य 2030 तक अपनी कार्गो हैंडलिंग क्षमता 1 अरब टन तक पहुंचाने का है। इसके लिए अगले पांच वर्षों में ₹1 लाख करोड़ तक निवेश की योजना बनाई गई है, जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर विस्तार पर जोर रहेगा।

    कंपनी ने क्या कहा?
    अडानी पोर्ट्स के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी अपनी दीर्घकालिक रणनीति के अनुरूप नए निवेश अवसरों का लगातार मूल्यांकन करती रहती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाजार में चल रही अटकलों या संभावित सौदों पर कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की जाएगी।

  • सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर रहें नजर बाजार में उतार चढ़ाव के बीच जानिए किन सेक्टरों में दिख सकते हैं बेहतर अवसर

    सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर रहें नजर बाजार में उतार चढ़ाव के बीच जानिए किन सेक्टरों में दिख सकते हैं बेहतर अवसर


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में आज निवेशकों की नजर घरेलू आर्थिक संकेतों के साथ साथ वैश्विक बाजारों की चाल पर बनी रहेगी। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव का दौर देखने को मिला है और विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में भी यही रुख जारी रह सकता है। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय सोच समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है। मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि का निवेश अब भी बेहतर रणनीति माना जा रहा है।

    बाजार की दिशा तय करने में विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीद बिक्री महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि विदेशी निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहता है तो सेंसेक्स और निफ्टी को मजबूती मिल सकती है। वहीं यदि वैश्विक बाजारों में कमजोरी रहती है या विदेशी निवेशक बिकवाली करते हैं तो घरेलू बाजार पर भी दबाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें अमेरिकी डॉलर की चाल और रुपये की स्थिति भी बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर के शेयरों पर निवेशकों की खास नजर रहेगी। यदि कंपनियों के तिमाही नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो इन क्षेत्रों में खरीदारी बढ़ सकती है। वहीं कमजोर परिणाम आने पर मुनाफावसूली का दबाव भी देखने को मिल सकता है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गतिविधि बनी रह सकती है लेकिन इनमें निवेश करते समय जोखिम का आकलन करना जरूरी है।

    बाजार विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि केवल सोशल मीडिया या अफवाहों के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए। किसी भी कंपनी में निवेश से पहले उसके वित्तीय प्रदर्शन कारोबार की स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का मूल्यांकन करना आवश्यक है। जिन निवेशकों का लक्ष्य लंबी अवधि का है उन्हें बाजार में आने वाले छोटे उतार चढ़ाव से घबराने की जरूरत नहीं है। अच्छी कंपनियों में नियमित और अनुशासित निवेश भविष्य में बेहतर रिटर्न देने की संभावना रखता है।

    अगर आप नए निवेशक हैं तो एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाना अधिक सुरक्षित माना जाता है। इससे बाजार में गिरावट आने की स्थिति में जोखिम कम हो सकता है। साथ ही अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखना भी जरूरी है ताकि किसी एक सेक्टर में कमजोरी आने पर पूरे निवेश पर बड़ा असर न पड़े।

    विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बाजार में हर दिन तेजी या गिरावट आना सामान्य प्रक्रिया है। इसलिए भावनाओं में आकर खरीदारी या बिकवाली करने से बचना चाहिए। निवेश का निर्णय हमेशा अपनी वित्तीय क्षमता निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए। सही जानकारी धैर्य और अनुशासित रणनीति के साथ किया गया निवेश लंबे समय में बेहतर परिणाम दे सकता है।

    कुल मिलाकर आज शेयर बाजार में उतार चढ़ाव के बीच चुनिंदा सेक्टरों में अवसर बन सकते हैं। ऐसे में निवेशकों को वैश्विक संकेतों कंपनियों के तिमाही नतीजों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए। समझदारी और धैर्य के साथ लिया गया निवेश निर्णय ही भविष्य में बेहतर लाभ का आधार बन सकता है।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामला: इस्तीफे में चंपत राय का बड़ा खुलासा, 81 लाख रुपये लौटाने की बात स्वीकारी

    राम मंदिर चढ़ावा मामला: इस्तीफे में चंपत राय का बड़ा खुलासा, 81 लाख रुपये लौटाने की बात स्वीकारी


    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के संयुक्त इस्तीफा पत्र से चढ़ावा चोरी मामले में अहम जानकारी सामने आई है। पहली बार सार्वजनिक हुए इस पत्र में दोनों ने स्वीकार किया है कि चोरी की घटना के बाद संबंधित लोगों से 81 लाख रुपये ट्रस्ट को वापस मिले थे। साथ ही, उन्होंने एसआईटी जांच की सिफारिश करने और निष्पक्ष जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के कामकाज से स्वयं को अलग करने का भी उल्लेख किया है।

    इस्तीफा पत्र के मुताबिक, 8 जून से दानपात्र की राशि को लेकर मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने लगीं, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो गई। पत्र में कहा गया है कि 4 जून की रात दानराशि की गणना के दौरान कुछ युवकों द्वारा कथित चोरी किए जाने की जानकारी एक ट्रस्टी को मिली थी।

    सीसीटीवी फुटेज से हुई पहचान
    पत्र के अनुसार, 5 जून की सुबह सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, जिसमें कुछ युवकों की पहचान हुई। ट्रस्ट ने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बजाय पहले संबंधित युवकों से पूछताछ करने का फैसला किया। इस्तीफा पत्र में दावा किया गया है कि 5 जून की रात से 8 जून के बीच संबंधित युवकों और उनके परिजनों ने कुल 81 लाख रुपये ट्रस्ट को लौटा दिए। साथ ही उन्होंने लिखित रूप में चोरी स्वीकार करते हुए स्वीकृति पत्र भी सौंपे।

    विवाद बढ़ने पर कराई गई एसआईटी जांच
    चंपत राय और अनिल मिश्रा ने पत्र में बताया कि जब यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बनने लगा, तब ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल (SIT) गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और संबंधित सभी लोगों की प्रतिष्ठा बनी रहे। पत्र के अनुसार, राज्य सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध को स्वीकार करते हुए 15 जून से एसआईटी जांच शुरू करा दी।

    जांच पूरी होने तक खुद को किया अलग
    इस्तीफे के अंतिम हिस्से में दोनों पदाधिकारियों ने लिखा कि जब तक पूरे मामले में सत्य स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक वे ट्रस्ट के सभी दायित्वों से स्वयं को अलग रखना उचित समझते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपना त्यागपत्र सौंपा, जिसे ट्रस्ट की 6 जुलाई को आयोजित बैठक में स्वीकार कर लिया गया।

  • बुधवार को ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा तो दूर होंगे सभी विघ्न हर कार्य में मिलेगी सफलता और घर में बनी रहेगी सुख समृद्धि

    बुधवार को ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा तो दूर होंगे सभी विघ्न हर कार्य में मिलेगी सफलता और घर में बनी रहेगी सुख समृद्धि


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से गणपति बप्पा की पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता कहा जाता है। इसलिए किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे आशीर्वाद लेकर ही की जाती है। यदि बुधवार के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करते हुए श्रद्धा और सच्चे मन से गणेश जी की पूजा की जाए तो परिवार में सुख शांति समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    बुधवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई कर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को लाल या पीले रंग के स्वच्छ आसन पर स्थापित करें। पूजा से पहले दीपक जलाएं और शुद्ध जल से आचमन कर मन को शांत करते हुए गणेश जी का ध्यान करें। इसके बाद भगवान को गंगाजल अर्पित करें और सिंदूर चढ़ाएं। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश जी को सिंदूर अत्यंत प्रिय है और इससे पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।

    भगवान गणेश को दूर्वा घास अर्पित करना बेहद शुभ माना गया है। ध्यान रखें कि दूर्वा तीन या पांच गांठ वाली हो और उसे श्रद्धापूर्वक भगवान को अर्पित किया जाए। इसके साथ लाल फूल भी चढ़ाएं। नैवेद्य में मोदक लड्डू गुड़ और बेसन के लड्डू अर्पित करना शुभ माना जाता है। यदि संभव हो तो इक्कीस मोदक या इक्कीस दूर्वा अर्पित करें क्योंकि यह संख्या गणेश पूजा में विशेष महत्व रखती है।

    पूजा के दौरान गणेश अथर्वशीर्ष गणपति स्तोत्र या गणेश चालीसा का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यदि समय कम हो तो कम से कम ऊँ गं गणपतये नमः मंत्र का 108 बार जाप अवश्य करें। मान्यता है कि इस मंत्र के नियमित जाप से बुद्धि तेज होती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होने लगती हैं। पूजा के अंत में कपूर या घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।

    बुधवार के दिन कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है। इस दिन क्रोध विवाद और कटु वचन से बचना चाहिए। किसी का अपमान न करें और जरूरतमंद लोगों की सहायता करें। गौ माता को हरा चारा खिलाना और गरीबों को हरी मूंग या गुड़ का दान करना भी शुभ माना जाता है। इससे भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है और ग्रह दोषों का प्रभाव भी कम होता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई व्यक्ति लगातार कई बुधवार तक श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान गणेश की पूजा करता है तो उसके जीवन में आ रही आर्थिक परेशानियां दूर होने लगती हैं। करियर व्यापार शिक्षा और पारिवारिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगते हैं। साथ ही घर में सुख शांति समृद्धि और सौभाग्य का वास बना रहता है। सच्ची श्रद्धा और निष्काम भाव से की गई गणेश आराधना व्यक्ति के जीवन में सफलता आत्मविश्वास और खुशहाली का मार्ग खोलने वाली मानी जाती है।

  • सावन के त्योहारों में साड़ी के साथ ट्रेंडिंग बिंदी डिज़ाइन अपनाकर बनाएं अपना लुक और खास

    सावन के त्योहारों में साड़ी के साथ ट्रेंडिंग बिंदी डिज़ाइन अपनाकर बनाएं अपना लुक और खास

    नई दिल्ली । सावन का महीना भारतीय संस्कृति और पारंपरिक परिधानों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दौरान महिलाएं और युवतियां पूजा, व्रत, पारिवारिक आयोजनों और त्योहारों में साड़ी पहनना पसंद करती हैं। हालांकि खूबसूरत साड़ी के साथ सही बिंदी का चयन भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। चेहरे के अनुरूप चुनी गई बिंदी न केवल पारंपरिक लुक को पूरा करती है, बल्कि पूरे व्यक्तित्व को भी अधिक आकर्षक और संतुलित बना देती है। इस सावन कई ऐसे बिंदी डिज़ाइन ट्रेंड में हैं, जिन्हें अलग-अलग तरह की साड़ियों के साथ आसानी से अपनाया जा सकता है।

    अगर आप सादगी और पारंपरिक अंदाज पसंद करती हैं तो गोल लाल बिंदी सबसे उपयुक्त विकल्प मानी जाती है। यह डिज़ाइन वर्षों से फैशन का हिस्सा रही है और लगभग हर रंग की साड़ी के साथ सहज रूप से मेल खाती है। विशेष रूप से हरे, पीले और लाल रंग की साड़ियों के साथ इसका संयोजन पारंपरिक सौंदर्य को और अधिक निखार देता है।

    सावन में हरे रंग का विशेष महत्व होने के कारण ग्रीन स्टोन बिंदी भी महिलाओं की पसंद बन रही है। यह डिज़ाइन सिल्क, कॉटन और जॉर्जेट जैसी विभिन्न प्रकार की साड़ियों के साथ आकर्षक दिखाई देता है। हल्के मेकअप और पारंपरिक आभूषणों के साथ इसका संयोजन संतुलित और सुरुचिपूर्ण लुक देता है।

    जो महिलाएं पारंपरिक पहनावे में थोड़ा अलग अंदाज चाहती हैं, उनके लिए लॉन्ग बिंदी एक अच्छा विकल्प हो सकती है। यह विशेष रूप से बनारसी और प्लेन साड़ियों के साथ बेहद आकर्षक लगती है। इसके साथ हल्के आभूषण पहनने से पूरा लुक संतुलित बना रहता है और चेहरे की खूबसूरती भी उभरकर सामने आती है।

    ब्लैक बिंदी को भी अब केवल आधुनिक परिधानों तक सीमित नहीं माना जाता। हल्के रंग की साड़ियों के साथ छोटी काली बिंदी एक अलग और स्टाइलिश प्रभाव पैदा करती है। वहीं यदि किसी धार्मिक आयोजन, पूजा या पारिवारिक समारोह में शामिल होना हो तो स्टोन वर्क बिंदी बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। इसकी चमक चेहरे पर अलग ही आकर्षण जोड़ती है और पारंपरिक परिधान को उत्सव के अनुरूप बनाती है।

    इन दिनों लीफ शेप बिंदी भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। सावन के प्राकृतिक और हरियाली से जुड़े माहौल के कारण यह डिज़ाइन काफी पसंद किया जा रहा है। हरे या सुनहरे बॉर्डर वाली साड़ियों के साथ इसका मेल बेहद आकर्षक दिखाई देता है। इसके अलावा मल्टीकलर बिंदी भी उन महिलाओं के लिए उपयुक्त है, जिनकी साड़ी में एक से अधिक रंग शामिल हों। यह पारंपरिक लुक में आधुनिकता का हल्का स्पर्श जोड़ती है।

    फैशन विशेषज्ञों का मानना है कि बिंदी का चुनाव केवल ट्रेंड देखकर नहीं, बल्कि चेहरे के आकार, साड़ी के रंग और आभूषणों के अनुसार करना चाहिए। यदि आभूषण भारी हों तो साधारण बिंदी अधिक संतुलित लगती है, जबकि हल्की ज्वेलरी के साथ स्टोन या डिजाइनर बिंदी पूरे लुक को अधिक प्रभावशाली बना सकती है। सही आकार, रंग और डिज़ाइन की बिंदी न केवल चेहरे की सुंदरता बढ़ाती है, बल्कि पारंपरिक पहनावे को भी संपूर्ण और आकर्षक रूप प्रदान करती है। इस सावन यदि साड़ी के साथ बिंदी का चयन सोच-समझकर किया जाए, तो बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के भी आपका उत्सवी लुक और अधिक निखर सकता है।

  • MP में फिर IAS अफसरों के तबादले, 3 जिलों को मिले नए कलेक्टर

    MP में फिर IAS अफसरों के तबादले, 3 जिलों को मिले नए कलेक्टर


    भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 8 अधिकारियों के तबादले किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत तीन जिलों के कलेक्टर बदले गए हैं, जबकि कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां और अतिरिक्त प्रभार सौंपे गए हैं। इस फेरबदल का सबसे ज्यादा असर छतरपुर, बालाघाट और रतलाम जिलों में देखने को मिला है।

    नई नियुक्तियों के तहत पार्थ जायसवाल (2015 बैच) को छतरपुर कलेक्टर पद से हटाकर शहडोल का कलेक्टर बनाया गया है। वहीं, मृणाल मीणा (2015 बैच) को बालाघाट से स्थानांतरित कर छतरपुर का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। कुमार सत्यम (2017 बैच), जो अब तक ग्वालियर में अपर कलेक्टर थे, उन्हें बालाघाट जिले की कमान सौंपी गई है।

    रतलाम कलेक्टर को मिली नई जिम्मेदारी
    मिशा सिंह (2016 बैच) को रतलाम कलेक्टर पद से हटाकर भोपाल में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में अपर आयुक्त बनाया गया है। इससे पहले जारी तबादला सूची में उनकी जगह अजय काटेसरिया को रतलाम कलेक्टर नियुक्त किया जा चुका है।

    अदिति गर्ग को स्किल डेवलपमेंट की जिम्मेदारी
    अदिति गर्ग (2015 बैच) को मंदसौर कलेक्टर पद से भोपाल बुलाकर मध्य प्रदेश स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की परियोजना संचालक और मध्य प्रदेश राज्य कौशल विकास एवं रोजगार निर्माण बोर्ड की मुख्य कार्यपालन अधिकारी नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही उन्हें एसएसआर ग्लोबल स्किल पार्क का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

    अन्य अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां
    तबादला आदेश के अनुसार दिनेश जैन (2011 बैच) को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग में आयुक्त-सह-संचालक बनाया गया है। वहीं, गिरीश शर्मा (2011 बैच) को तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग में अपर सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि अंकित अस्थाना (2014 बैच) को कर्मचारी चयन मंडल, मध्य प्रदेश का संचालक नियुक्त किया गया है।

    स्वरोचिष सोमवंशी को मिला अतिरिक्त प्रभार
    राज्य सरकार ने स्वरोचिष सोमवंशी (2012 बैच) को उनके मौजूदा दायित्वों के साथ राज्य योजना आयोग के सदस्य सचिव तथा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान, भोपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि 24 जुलाई 2026 को जारी पूर्व पदस्थापन आदेशों में संशोधन करते हुए यह नई तबादला सूची तत्काल प्रभाव से लागू की गई है।

  • बार बार आ रही हैं परेशानियां तो कहीं घर में वास्तु दोष तो नहीं इन संकेतों को पहचानें और अपनाएं शुभ उपाय

    बार बार आ रही हैं परेशानियां तो कहीं घर में वास्तु दोष तो नहीं इन संकेतों को पहचानें और अपनाएं शुभ उपाय


    नई दिल्ली । भारतीय वास्तु शास्त्र में घर को केवल रहने का स्थान नहीं बल्कि सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र माना गया है। मान्यता है कि यदि घर का निर्माण दिशा और ऊर्जा के संतुलन के अनुसार हो तो परिवार में सुख समृद्धि और खुशहाली बनी रहती है। वहीं वास्तु दोष होने पर व्यक्ति को बार बार आर्थिक परेशानियों स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं मानसिक तनाव और पारिवारिक कलह का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए घर की व्यवस्था और दिशाओं का संतुलन बनाए रखना बेहद आवश्यक माना गया है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घर में बिना किसी कारण लगातार विवाद होते हों धन आने के बाद भी टिकता न हो नौकरी या व्यापार में बार बार रुकावट आ रही हो या परिवार के सदस्य बार बार बीमार पड़ रहे हों तो यह वास्तु दोष का संकेत माना जाता है। ऐसे में घबराने के बजाय घर की दिशा और व्यवस्था का सावधानी से निरीक्षण करना चाहिए। कई बार छोटी सी गलती भी नकारात्मक प्रभाव का कारण बन जाती है।

    घर का मुख्य द्वार वास्तु में सबसे महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। मुख्य प्रवेश द्वार हमेशा साफ स्वच्छ और व्यवस्थित होना चाहिए। दरवाजे के सामने कूड़ा कबाड़ या टूटी फूटी वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए क्योंकि इससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बाधित होता है। मुख्य द्वार पर शुभ चिन्ह स्वस्तिक या शुभ लाभ का प्रतीक लगाने से सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

    ईशान कोण यानी उत्तर पूर्व दिशा को सबसे पवित्र माना गया है। इस दिशा में पूजा घर रखना शुभ माना जाता है जबकि भारी सामान या अनुपयोगी वस्तुएं रखने से बचना चाहिए। रसोईघर के लिए दक्षिण पूर्व दिशा उपयुक्त मानी जाती है। रसोई में गैस चूल्हा इस प्रकार रखें कि भोजन बनाते समय मुख पूर्व दिशा की ओर रहे। इससे घर में सुख समृद्धि और स्वास्थ्य का संतुलन बना रहता है।

    शयनकक्ष में भी कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोने से बचने की सलाह दी जाती है। बिस्तर के सामने टूटा हुआ शीशा या अव्यवस्थित सामान नहीं होना चाहिए। इससे मानसिक तनाव और नकारात्मकता बढ़ सकती है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में नियमित रूप से सफाई करना और बेकार वस्तुओं को हटाना भी अत्यंत आवश्यक है। टूटे हुए बर्तन बंद घड़ियां खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान या सूखे पौधे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ा सकते हैं। घर में तुलसी का पौधा लगाना सुबह शाम दीपक जलाना और समय समय पर पूजा पाठ करना सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में सहायक माना जाता है।

    यदि घर में किसी प्रकार का वास्तु दोष हो और तुरंत निर्माण संबंधी बदलाव संभव न हो तो कुछ सरल उपाय भी अपनाए जा सकते हैं। नियमित रूप से भगवान गणेश की पूजा करें क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता माना जाता है। घर में कपूर या गुग्गुल की धूप जलाने से वातावरण शुद्ध होता है। नमक मिले पानी से सप्ताह में एक बार पोछा लगाने और घर में प्राकृतिक रोशनी व ताजी हवा का पर्याप्त प्रवेश सुनिश्चित करने से भी सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वास्तु शास्त्र का उद्देश्य केवल दिशाओं का पालन कराना नहीं बल्कि जीवन में संतुलन अनुशासन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना है। यदि घर की व्यवस्था स्वच्छ संतुलित और ऊर्जा के अनुकूल हो तो परिवार में सुख शांति समृद्धि और सफलता के अवसर भी बढ़ते हैं।