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  • सायोनी घोष की संभावित नई भूमिका, नंदीग्राम और रेजीनगर में भाजपा के लिए प्रचार की चर्चा

    सायोनी घोष की संभावित नई भूमिका, नंदीग्राम और रेजीनगर में भाजपा के लिए प्रचार की चर्चा

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI ने दोनों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करने का फैसला किया है। हालांकि, पार्टी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रचार अभियान में कौन-कौन से नेता शामिल होंगे। इसी वजह से सांसद सायोनी घोष की संभावित भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।

    सायोनी घोष उन सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस से अलग होने के बाद NCPI में विलय किया था। इससे पहले पश्चिम बंगाल की राजनीति में वह भाजपा की मुखर विरोधी रही हैं। अब NCPI के भाजपा समर्थित प्रचार अभियान के फैसले के बाद उनकी संभावित भूमिका को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, अभी तक पार्टी की ओर से सायोनी घोष के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

    NCPI ने दोनों विधानसभा सीटों पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। पार्टी का कहना है कि इसी वजह से उसने भाजपा के समर्थन में प्रचार करने का निर्णय लिया है। पार्टी ने खुद को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में भाजपा के बाद सबसे बड़ा साझेदार भी बताया है। NCPI के अनुसार, उसके साथ कुल 20 सांसद हैं।

    पार्टी नेतृत्व ने पश्चिम बंगाल में लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक टकराव को कम करने और मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया है। NCPI की ओर से आने वाले समय में गठबंधन नेतृत्व के साथ एक बड़ी बैठक किए जाने की बात भी कही गई है। इसमें राज्य से जुड़े राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

    हालांकि, भाजपा ने NCPI के इस समर्थन को औपचारिक चुनावी गठबंधन नहीं माना है। भाजपा की ओर से स्पष्ट किया गया है कि दोनों सीटों पर समर्थन में प्रचार करने का अर्थ भविष्य में सीटों के बंटवारे या किसी औपचारिक चुनावी समझौते से नहीं है। यानी फिलहाल NCPI का समर्थन प्रचार तक सीमित बताया गया है।

    उधर, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए नेताओं का एक गुट भी उपचुनाव को लेकर अपनी रणनीति तैयार कर रहा है। इस गुट ने नंदीग्राम सीट से मोहम्मद एतेशामुल हक को उम्मीदवार बनाया है। गुट की ओर से चुनाव को तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे राजनीतिक मतभेदों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होना है, जबकि 9 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के विधानसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई है। रेजीनगर सीट भी रिक्त होने के बाद उपचुनाव के लिए निर्धारित की गई है।

    उपचुनाव से पहले दोनों सीटों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। NCPI के भाजपा समर्थन वाले फैसले ने इन चुनावों में एक नया राजनीतिक समीकरण जरूर सामने रखा है। वहीं, सायोनी घोष की भूमिका अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यदि पार्टी उन्हें प्रचार अभियान में शामिल करती है, तो उनकी सार्वजनिक भूमिका में बदलाव को लेकर चर्चा और बढ़ सकती है।

    फिलहाल आधिकारिक तौर पर इतना ही स्पष्ट है कि NCPI नंदीग्राम और रेजीनगर में भाजपा उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेगी। सायोनी घोष समेत किन नेताओं को प्रचार अभियान में उतारा जाएगा, इसकी तस्वीर पार्टी की अंतिम घोषणा के बाद ही साफ होगी।

  • आजमगढ़ में पत्नी, दो पुजारियों और बेटे की हत्या, आठ घंटे बाद पुलिस मुठभेड़ में आरोपी ढेर

    आजमगढ़ में पत्नी, दो पुजारियों और बेटे की हत्या, आठ घंटे बाद पुलिस मुठभेड़ में आरोपी ढेर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में मंगलवार शाम एक गंभीर घटना के बाद करीब आठ घंटे तक बंधक संकट की स्थिति बनी रही। शंभूपुर गांव में अरविंद सिंह ने कथित तौर पर अपनी पत्नी और दो पुजारियों को गोली मार दी। इसके बाद वह अपने बच्चों को लेकर एक कमरे में बंद हो गया। पुलिस ने काफी देर तक बातचीत के जरिए उसे आत्मसमर्पण के लिए तैयार करने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति नियंत्रण में नहीं आई।

    बताया गया कि अरविंद शाम के समय अपने घर पहुंचा था। उस समय घर में पूजा-पाठ चल रहा था। वहां उसकी पत्नी बबीता सिंह के अलावा पुजारी महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा मौजूद थे। पूजा को लेकर जानकारी लेने के दौरान अरविंद ने पुजारियों से आधार कार्ड दिखाने के लिए कहा। इसी बात को लेकर पत्नी के साथ उसकी बहस हो गई।

    विवाद बढ़ने के बाद अरविंद ने कथित तौर पर लाइसेंसी हथियार से फायरिंग कर दी। गोली लगने से उसकी पत्नी बबीता और दोनों पुजारियों की मौत हो गई। घटना के बाद अरविंद अपने बच्चों को लेकर घर के एक कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया।

    तीन लोगों की हत्या की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने आरोपी से लगातार बातचीत करने की कोशिश की। उसके परिवार के लोगों के माध्यम से भी उसे समझाने का प्रयास किया गया। पुलिस का मुख्य उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना था।

    करीब सात घंटे तक बातचीत और समझाने का सिलसिला चलता रहा। आरोपी आत्मसमर्पण के लिए तैयार नहीं हुआ। पुलिस के अनुसार, वह बच्चों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दे रहा था। इसी बीच कमरे के भीतर से अचानक गोली चलने की आवाज सुनाई दी।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने 10 वर्षीय बेटे को गोली मार दी। बच्चे को गोली लगने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई का फैसला किया। कमरे में प्रवेश के दौरान स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया।

    पुलिस के अनुसार, टीम के कमरे में पहुंचने पर आरोपी ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद बच्चों की सुरक्षा और आत्मरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने जवाबी फायरिंग की। इस कार्रवाई में अरविंद सिंह घायल हो गया।

    घायल आरोपी और उसके बेटे को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। उपचार के दौरान दोनों की मौत हो गई। वहीं, कमरे में मौजूद दो अन्य बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना के बाद मौके पर पुलिस बल, विशेष जांच टीम और फॉरेंसिक टीम को तैनात किया गया।

    पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और गोलीबारी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। शुरुआती जानकारी में पूजा के दौरान हुए विवाद को घटना की शुरुआत से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    करीब आठ घंटे तक चले इस घटनाक्रम में आरोपी की पत्नी, दो पुजारियों और उसके बेटे की जान चली गई। पुलिस कार्रवाई के बाद बाकी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया और बंधक संकट समाप्त हुआ

  • टॉप एक्ट्रेस की लोकप्रियता सूची में बड़ा बदलाव, सामंथा रूथ प्रभु ने दीपिका और आलिया को पीछे छोड़ा

    टॉप एक्ट्रेस की लोकप्रियता सूची में बड़ा बदलाव, सामंथा रूथ प्रभु ने दीपिका और आलिया को पीछे छोड़ा

    नई दिल्ली:  पिछले महीने की लोकप्रियता के आधार पर जारी टॉप 10 एक्ट्रेस की सूची में दक्षिण भारतीय अभिनेत्री सामंथा रूथ प्रभु ने पहला स्थान हासिल किया है। इस सूची में बॉलीवुड और दक्षिण भारतीय सिनेमा की कई चर्चित अभिनेत्रियों को शामिल किया गया है। खास बात यह रही कि सामंथा ने दीपिका पादुकोण और आलिया भट्ट जैसी लोकप्रिय अभिनेत्रियों को पीछे छोड़ते हुए शीर्ष स्थान बनाया।

    लोकप्रियता की इस रैंकिंग में सामंथा रूथ प्रभु के बाद आलिया भट्ट दूसरे और दीपिका पादुकोण तीसरे स्थान पर रहीं। यानी टॉप तीन में दक्षिण भारतीय सिनेमा की एक और बॉलीवुड की दो प्रमुख अभिनेत्रियों ने जगह बनाई।

    सामंथा के लिए पिछला दौर चर्चा में रहा है। उनकी पिछली फिल्म ‘मां इंटी बंगारम’ में उनका अलग और काफी दमदार अंदाज देखने को मिला था। फिल्म में उनका किरदार पहले की भूमिकाओं से अलग नजर आया। आने वाले समय में भी सामंथा की कई परियोजनाएं दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

    दूसरे स्थान पर रहने वाली आलिया भट्ट लगातार हिंदी सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में बनी हुई हैं। उनकी लोकप्रियता के चलते उन्हें इस रैंकिंग में दूसरा स्थान मिला। वहीं दीपिका पादुकोण तीसरे पायदान पर रहीं। पिछले कुछ समय से दीपिका बड़े पर्दे पर कम नजर आई हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी लोकप्रियता सूची में मजबूत बनी हुई है।

    टॉप तीन से ठीक बाहर सई पल्लवी रहीं। उन्हें चौथा स्थान मिला। वह अपनी आगामी फिल्म ‘रामायण’ में सीता की भूमिका को लेकर भी चर्चा में हैं। इसके बाद नयनतारा ने पांचवां स्थान हासिल किया। नयनतारा दक्षिण भारतीय सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हैं और हिंदी दर्शकों के बीच भी उनकी पहचान मजबूत हुई है।

    छठे स्थान पर काजल अग्रवाल रहीं, जबकि रश्मिका मंदाना को सातवां स्थान मिला। दोनों अभिनेत्रियां दक्षिण भारतीय फिल्मों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी लोकप्रिय हैं। रश्मिका की कई फिल्मों और उनके अभिनय को लेकर दर्शकों के बीच लगातार चर्चा बनी रहती है।

    आठवें स्थान पर कृति सैनन का नाम रहा। कृति हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल हैं और अलग-अलग तरह की भूमिकाओं के जरिए अपनी पहचान बना चुकी हैं। सूची में उनसे ऊपर दक्षिण भारतीय सिनेमा की कई अभिनेत्रियां रहीं।

    नौवें स्थान पर त्रिशा रहीं। दक्षिण भारतीय फिल्मों में लंबे समय से सक्रिय त्रिशा अब भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय हैं। वहीं श्रद्धा कपूर को सूची में दसवां स्थान मिला। आगामी फिल्म ‘ईठा’ को लेकर भी श्रद्धा चर्चा में हैं।

    इस पूरी सूची में दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों की मौजूदगी उल्लेखनीय रही। टॉप 10 में सामंथा, सई पल्लवी, नयनतारा, काजल अग्रवाल, रश्मिका मंदाना और त्रिशा जैसे नाम शामिल रहे। दूसरी ओर बॉलीवुड से आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण, कृति सैनन और श्रद्धा कपूर ने जगह बनाई।

    रैंकिंग पिछले महीने की लोकप्रियता को आधार बनाकर तैयार की गई है। इसलिए इसमें अलग-अलग समय पर फिल्मों, भूमिकाओं और सार्वजनिक चर्चा के कारण अभिनेत्रियों की स्थिति बदल सकती है। इस सूची में सामंथा का शीर्ष स्थान हासिल करना और दीपिका तथा आलिया का टॉप तीन में बने रहना सबसे प्रमुख बातें रहीं।

  • डीजल निर्यात पर रोक के पक्ष में ट्रंप, अमेरिका में रिकॉर्ड कीमतों के बीच फैसला; वैश्विक बाजार पर भी असर की आशंका

    डीजल निर्यात पर रोक के पक्ष में ट्रंप, अमेरिका में रिकॉर्ड कीमतों के बीच फैसला; वैश्विक बाजार पर भी असर की आशंका


    वाशिंगटन।
    अमेरिका में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी डीजल के निर्यात पर रोक लगाने के विचार का समर्थन किया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका बड़ी मात्रा में डीजल का उत्पादन करता है और यदि इसका अधिक हिस्सा घरेलू बाजार में उपलब्ध कराया जाए तो ईंधन की बढ़ती कीमतों से अमेरिकी उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी कहा है कि प्रशासन पूर्ण या आंशिक निर्यात प्रतिबंध की व्यवहार्यता का आकलन कर रहा है। हालांकि अभी इस संबंध में कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

    अमेरिका में 6.52 डॉलर प्रति गैलन पहुंचा डीजल

    अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के अनुसार 22 सितंबर को अमेरिका में डीजल की राष्ट्रीय औसत खुदरा कीमत 6.5276 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई। यह अब तक का रिकॉर्ड स्तर है। एक साल पहले यही कीमत 3.6880 डॉलर प्रति गैलन थी। यानी एक साल में डीजल की कीमत में करीब 77 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

    डीजल की कीमत बढ़ने का असर केवल निजी वाहनों तक सीमित नहीं है। अमेरिका में ट्रक, कृषि मशीनरी, निर्माण उपकरण और माल ढुलाई में डीजल का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। इसलिए ईंधन महंगा होने पर परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ सकती है, जिसका असर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।

    ट्रंप ने क्या कहा?

    संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने पहले भी अमेरिकी डीजल को विदेश भेजने के बजाय घरेलू बाजार में रखने की बात कही है। उनके मुताबिक इससे अमेरिकी बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सकती है और डीजल के साथ पेट्रोल की कीमतों पर भी कुछ असर पड़ सकता है। बेसेंट ने कहा कि प्रशासन यह देख रहा है कि पूर्ण या आंशिक निर्यात रोक व्यावहारिक होगी या नहीं और इससे अमेरिकी रिफाइनरियों के संचालन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

    यह मुद्दा नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले भी महत्वपूर्ण हो गया है। कई रिपब्लिकन सांसद और चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए निर्यात प्रतिबंध की मांग कर रहे हैं।

    रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य-पूर्व संकट का असर

    वैश्विक डीजल बाजार पहले से ही आपूर्ति दबाव का सामना कर रहा है। रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी ड्रोन हमलों, मध्य-पूर्व में संघर्ष और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की उपलब्धता प्रभावित हुई है। रॉयटर्स के अनुसार रूस, मध्य-पूर्व और प्रमुख एशियाई आपूर्तिकर्ताओं से डीजल निर्यात जुलाई में पिछले साल की तुलना में करीब 13 लाख बैरल प्रतिदिन कम रहा।

    ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ बैठक से पहले रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन हमलों से रूस को नुकसान हुआ है, लेकिन इसका असर डीजल की कीमतों पर भी पड़ रहा है।

    अमेरिका निर्यात रोकता है तो वैश्विक बाजार पर क्या असर?

    अमेरिका दुनिया के प्रमुख रिफाइंड ईंधन आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। अमेरिकी डीजल का एक बड़ा हिस्सा विदेशों में जाता है। ऐसे में यदि अमेरिका निर्यात पर पूर्ण या बड़ी आंशिक रोक लगाता है तो घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी ईंधन की कमी पैदा हो सकती है।

    इसका असर खास तौर पर यूरोप पर पड़ सकता है, जहां रूस से ऊर्जा आयात पर प्रतिबंधों के बाद अमेरिकी ईंधन की भूमिका बढ़ी है। वैश्विक बाजार पहले से ही तंग है, इसलिए अमेरिकी निर्यात घटने पर अन्य क्षेत्रों में डीजल की कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।

    हालांकि निर्यात रोकने से अमेरिकी घरेलू कीमतों में कितनी कमी आएगी, यह भी निश्चित नहीं है। रिफाइनरियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के बीच कीमतों के अंतर के आधार पर उत्पादन और बिक्री के फैसले लेती हैं। लंबे समय में निर्यात पर रोक का असर उत्पादन, रिफाइनिंग मार्जिन और आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

    पेट्रोल की कीमतों पर असर कितना?

    ट्रंप ने संकेत दिया है कि डीजल को घरेलू बाजार में रखने से पेट्रोल की कीमतों पर भी कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि डीजल और पेट्रोल के बाजार अलग-अलग हैं और दोनों की कीमतों पर कच्चे तेल की कीमत, रिफाइनिंग क्षमता, क्षेत्रीय मांग तथा वैश्विक आपूर्ति जैसे कई कारकों का असर पड़ता है। इसलिए केवल डीजल निर्यात रोकने से पेट्रोल की कीमत कितनी घटेगी, इसका अभी कोई निश्चित अनुमान नहीं है।

    भारत पर भी पड़ सकता है अप्रत्यक्ष असर

    अमेरिकी डीजल निर्यात पर रोक का भारत पर सीधा असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इससे वैश्विक ईंधन बाजार में आपूर्ति कितनी प्रभावित होती है। यदि अमेरिकी निर्यात में बड़ी कमी आती है और अन्य उत्पादक इसकी भरपाई नहीं कर पाते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय डीजल और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।

    भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आयात बिल और परिवहन लागत पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारत पर वास्तविक प्रभाव कच्चे तेल की कीमत, रुपये की विनिमय दर, घरेलू ईंधन मूल्य नीति और दुनिया भर में उपलब्ध वैकल्पिक आपूर्ति पर निर्भर करेगा।

    फिलहाल अंतिम फैसला नहीं

    ट्रंप के समर्थन के बावजूद अमेरिकी प्रशासन ने डीजल निर्यात पर रोक लगाने का अंतिम फैसला नहीं किया है। सरकार पूर्ण या आंशिक प्रतिबंध के संभावित लाभ और अमेरिकी रिफाइनिंग उद्योग तथा वैश्विक ईंधन बाजार पर उसके प्रभाव का आकलन कर रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन का फैसला अमेरिका के साथ-साथ वैश्विक डीजल बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण रहेगा।

  • कुमार सानू के 69वें जन्मदिन पर याद आए उनके सदाबहार रोमांटिक गाने, आज भी कायम है आवाज का जादू

    कुमार सानू के 69वें जन्मदिन पर याद आए उनके सदाबहार रोमांटिक गाने, आज भी कायम है आवाज का जादू

    नई दिल्ली ।कुमार सानू हिंदी फिल्म संगीत के उन लोकप्रिय गायकों में शामिल हैं, जिनकी आवाज ने 1990 के दशक के रोमांटिक गीतों को एक अलग पहचान दी। 20 अक्टूबर 1957 को कोलकाता में जन्मे कुमार सानू का वास्तविक नाम केदारनाथ भट्टाचार्य है। उनके पिता पशुपतिनाथ भट्टाचार्य भी संगीत से जुड़े हुए थे और शुरुआती संगीत शिक्षा कुमार सानू ने उन्हीं से प्राप्त की।

    प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में उन्होंने 1984 में फिल्म ‘ये देश’ से शुरुआत की। उनके करियर को आगे बढ़ाने में गजल गायक जगजीत सिंह की भूमिका भी बताई जाती है। 1989 में जगजीत सिंह ने उनकी मुलाकात संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी से कराई। इसी दौरान केदारनाथ भट्टाचार्य को कुमार सानू नाम अपनाने की सलाह दी गई।

    इसके बाद वर्ष 1990 में आई फिल्म ‘आशिकी’ ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। फिल्म के संगीत ने दर्शकों के बीच खास जगह बनाई और कुमार सानू की आवाज घर-घर तक पहुंच गई। ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’, ‘अब तेरे बिन’, ‘नजर के सामने’ और ‘बस एक सनम चाहिए’ जैसे गीतों ने उनकी रोमांटिक गायकी को लोकप्रिय बनाया।

    ‘आशिकी’ के बाद 1990 के दशक में कुमार सानू ने कई चर्चित फिल्मों के लिए गीत गाए। ‘साजन’, ‘दीवाना’, ‘बाजीगर’, ‘परदेस’ और ‘1942: ए लव स्टोरी’ जैसी फिल्मों के गीतों ने उनकी लोकप्रियता को लगातार मजबूत किया।

    उनके चर्चित गीतों में ‘धीरे-धीरे से मेरी जिंदगी में आना’ आज भी विशेष रूप से याद किया जाता है। यह गीत ‘आशिकी’ में राहुल रॉय और अनु अग्रवाल पर फिल्माया गया था और फिल्म के लोकप्रिय संगीत का अहम हिस्सा रहा।

    ‘बाजीगर’ का ‘ये काली काली आंखें’ भी कुमार सानू के लोकप्रिय गीतों में शामिल है। शाहरुख खान और काजोल पर फिल्माए गए इस गाने में उनकी आवाज के साथ अनु मलिक की आवाज भी सुनाई दी थी।

    फिल्म ‘दीवाना’ का ‘सोचेंगे तुम्हें प्यार करें के नहीं’ भी 1990 के दशक में खूब लोकप्रिय हुआ। ऋषि कपूर और दिव्या भारती पर फिल्माए गए इस गीत को नदीम-श्रवण ने संगीत दिया था।

    ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ का ‘चुरा के दिल मेरा’ कुमार सानू और अलका याग्निक की आवाज में रिकॉर्ड किया गया था। अक्षय कुमार और शिल्पा शेट्टी पर फिल्माया गया यह गीत भी लंबे समय तक लोकप्रिय रहा।

    ‘साजन’ का ‘मेरा दिल भी कितना पागल है’, ‘1942: ए लव स्टोरी’ का ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’, ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ का ‘तुझे देखा तो ये जाना सनम’ और ‘कुछ कुछ होता है’ का ‘लड़की बड़ी अंजानी है’ भी उनकी यादगार प्रस्तुतियों में गिने जाते हैं।

    ‘हम दिल दे चुके सनम’ का ‘आंखों की गुस्ताखियां’ भी कुमार सानू की लोकप्रिय गायकी का हिस्सा रहा। कविता कृष्णमूर्ति के साथ उनकी आवाज ने इस गीत को खास पहचान दी।

    कुमार सानू को संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया। 1993 में एक ही दिन में 28 गाने रिकॉर्ड करने का रिकॉर्ड भी उनके करियर की चर्चित उपलब्धियों में शामिल है। 2015 की फिल्म ‘दम लगा के हईशा’ के ‘दर्द करारा’ से उन्होंने नई पीढ़ी के श्रोताओं के बीच भी अपनी आवाज की पहचान बनाए रखी।

  • एक्सप्लेनर: शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के बीच AI की जंग, मॉडल में अंतर सिर्फ 2.7%, चिप्स में कौन आगे?

    एक्सप्लेनर: शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के बीच AI की जंग, मॉडल में अंतर सिर्फ 2.7%, चिप्स में कौन आगे?

    नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 23 से 25 सितंबर तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर हैं। यह एक दशक से ज्यादा समय बाद उनकी वॉशिंगटन यात्रा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और शी के बीच होने वाली बातचीत में व्यापार, दुर्लभ खनिज, ताइवान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे मुद्दे अहम रहने वाले हैं। दोनों देशों के बीच AI को लेकर प्रतिस्पर्धा अब केवल सॉफ्टवेयर या चैटबॉट तक सीमित नहीं है। इसमें अत्याधुनिक चिप्स, डेटा सेंटर, बिजली, मॉडल और पूरे तकनीकी इकोसिस्टम की भूमिका है।

    ऐसे में सवाल है कि AI की दौड़ में अमेरिका और चीन में फिलहाल किसकी स्थिति कैसी है? इसका जवाब एक ही आंकड़े से नहीं दिया जा सकता। कुछ क्षेत्रों में अमेरिका आगे है, जबकि चीन ने मॉडल, रिसर्च, पेटेंट और औद्योगिक इस्तेमाल में बड़ी बढ़त बनाई है।

    AI मॉडल में अंतर कितना रह गया?

    स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की 2026 AI Index Report के मुताबिक अमेरिका और चीन के शीर्ष AI मॉडलों के बीच प्रदर्शन का अंतर काफी कम हो चुका है। मार्च 2026 तक शीर्ष अमेरिकी मॉडल चीनी मॉडल से केवल 2.7 प्रतिशत आगे था। रिपोर्ट यह भी बताती है कि 2025 की शुरुआत से दोनों देशों के मॉडल कई बार प्रदर्शन रैंकिंग में एक-दूसरे से आगे-पीछे होते रहे हैं।

    हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि दोनों देशों की AI क्षमता हर क्षेत्र में बराबर हो गई है। अमेरिका अभी भी शीर्ष स्तर के अधिक AI मॉडल विकसित कर रहा है। 2025 में अमेरिका ने 59 उल्लेखनीय AI मॉडल विकसित किए, जबकि चीन की संख्या 35 रही। दूसरी ओर, चीन AI शोध प्रकाशनों, उद्धरणों और पेटेंट की संख्या में आगे है।

    अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

    अमेरिका की ताकत केवल AI मॉडल में नहीं है। उसके पास अत्याधुनिक AI चिप्स, विशाल कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर तकनीक की मजबूत श्रृंखला है।

    स्टैनफोर्ड AI Index के अनुसार अमेरिका में 5,427 डेटा सेंटर हैं, जो किसी भी दूसरे देश की तुलना में 10 गुना से ज्यादा हैं। दुनिया के सबसे उन्नत AI चिप्स के निर्माण में ताइवान की TSMC की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण है। यानी अमेरिका की AI बढ़त के पीछे मॉडल के साथ-साथ कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और हार्डवेयर का पूरा नेटवर्क मौजूद है।

    AI में निजी निवेश के मामले में भी अमेरिका की बढ़त बड़ी है। स्टैनफोर्ड के अनुसार 2025 में अमेरिका का निजी AI निवेश चीन से करीब 23 गुना ज्यादा रहा। हालांकि चीन में सरकारी फंड और रणनीतिक निवेश का बड़ा हिस्सा निजी निवेश के आंकड़ों में पूरी तरह दिखाई नहीं देता।

    चीन की रणनीति क्या है?

    चीन की रणनीति AI के पूरे इकोसिस्टम को घरेलू स्तर पर विकसित करने की है। इसका मतलब केवल बड़े AI मॉडल बनाना नहीं, बल्कि उन मॉडलों को चलाने के लिए चिप्स, सर्वर, डेटा सेंटर और सॉफ्टवेयर का विकल्प तैयार करना भी है।

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद चीन की कंपनियां घरेलू AI चिप्स पर ज्यादा जोर दे रही हैं। Huawei अपनी Ascend श्रृंखला को आगे बढ़ा रही है, जबकि Alibaba ने Zhenwu M890 जैसे AI चिप विकसित किए हैं। मई 2026 में Alibaba ने M890 पेश करते हुए इसे Nvidia के विकल्प के तौर पर विकसित किए जा रहे घरेलू AI हार्डवेयर का हिस्सा बताया था।

    सितंबर 2026 में Alibaba ने इससे भी आगे बढ़ते हुए Zhenwu V900 चिप पेश की, जिसके बारे में कंपनी ने कहा है कि यह उसके पिछले चिप की तुलना में तीन गुना प्रदर्शन देती है। कंपनी ने 5 से 10 ट्रिलियन पैरामीटर वाला नया AI मॉडल विकसित करने की योजना भी बताई है।

    असली मुकाबला चिप्स का है

    AI मॉडल कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसे प्रशिक्षित करने और चलाने के लिए भारी कंप्यूटिंग क्षमता चाहिए। यही वजह है कि AI की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में Nvidia जैसे चिप निर्माताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

    चीन की बड़ी समस्या यह है कि उसे सबसे उन्नत AI चिप्स और उन्हें बनाने वाली अत्याधुनिक तकनीक तक अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों के कारण सीमित पहुंच है। Huawei घरेलू विकल्प विकसित कर रही है, लेकिन उसकी चिप तकनीक अभी Nvidia के सबसे उन्नत उत्पादों से पीछे मानी जाती है। Huawei ने 2027 में नए Ascend 960DT और 960PR चिप लॉन्च करने की योजना भी घोषित की है।

    फिर चीन पीछे है या तेजी से बराबरी कर रहा है?

    दोनों बातें अलग-अलग क्षेत्रों में सही हो सकती हैं। फ्रंटियर मॉडल और अत्याधुनिक AI कंप्यूटिंग में अमेरिका की बढ़त अभी मौजूद है, लेकिन चीन ने AI मॉडल की गुणवत्ता और घरेलू तकनीकी इकोसिस्टम में अंतर तेजी से कम किया है।

    स्टैनफोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि चीन शोध प्रकाशनों, उद्धरणों और पेटेंट की संख्या में आगे है, जबकि अमेरिका ज्यादा उल्लेखनीय मॉडल और ज्यादा प्रभावशाली पेटेंट तैयार कर रहा है। चीन औद्योगिक रोबोटों की तैनाती में भी काफी आगे है। 2024 में दुनिया भर में लगाए गए औद्योगिक रोबोटों में चीन की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत थी।

    एडवांस्ड चिप में चीन कितनी दूरी तय कर सकता है?

    Goldman Sachs के एक अनुमान के मुताबिक 7 नैनोमीटर और उससे छोटे प्रोसेस पर बनने वाले चीन के एडवांस्ड चिप्स की घरेलू सप्लाई 2025 से 2035 के बीच सालाना औसतन 46 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। इससे घरेलू आपूर्ति और मांग के बीच का अंतर 2025 के 92 प्रतिशत से घटकर 2035 तक 34 प्रतिशत रह सकता है।

    लेकिन यह एक अनुमान है, उपलब्धि नहीं। इस अनुमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती लिथोग्राफी तकनीक है। Goldman के मॉडल में चीन की घरेलू चिप उत्पादन क्षमता और उत्पादन दक्षता में बहुत तेज सुधार की जरूरत मानी गई है। इसलिए 2035 का अनुमान यह साबित नहीं करता कि चीन तब तक पूरी तरह से सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भर हो जाएगा।

    AI की दौड़ में बिजली भी बड़ा हथियार

    AI की प्रतिस्पर्धा में चिप और मॉडल के साथ बिजली भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। बड़े AI मॉडल के प्रशिक्षण और संचालन के लिए विशाल डेटा सेंटर चाहिए, जिन्हें लगातार भारी मात्रा में बिजली की जरूरत होती है।

    स्टैनफोर्ड AI Index के अनुसार AI डेटा सेंटर की बिजली क्षमता तेजी से बढ़ रही है और AI कंप्यूटिंग का ऊर्जा इस्तेमाल अब एक महत्वपूर्ण रणनीतिक मुद्दा बन चुका है। अमेरिका के पास बड़े डेटा सेंटर नेटवर्क की बढ़त है, जबकि चीन के पास विशाल औद्योगिक आधार और बड़ी स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता है।

    तो फिलहाल कौन कितना आगे?

    मॉडल: अंतर बेहद कम हो चुका है। मार्च 2026 में शीर्ष अमेरिकी मॉडल की बढ़त 2.7 प्रतिशत थी।

    फ्रंटियर AI: अमेरिका अभी ज्यादा शीर्ष-स्तरीय मॉडल विकसित कर रहा है।

    AI रिसर्च और पेटेंट: चीन प्रकाशनों, उद्धरणों और पेटेंट संख्या में मजबूत है, जबकि अमेरिका उच्च-प्रभाव वाले पेटेंट में आगे है।

    AI चिप्स: सबसे उन्नत चिप और कंप्यूटिंग इकोसिस्टम में अमेरिका की बढ़त बनी हुई है; चीन घरेलू विकल्प तेजी से विकसित कर रहा है।

    डेटा सेंटर: अमेरिका के पास सबसे बड़ा डेटा सेंटर आधार है।

    औद्योगिक इस्तेमाल: चीन औद्योगिक रोबोटों की तैनाती में स्पष्ट रूप से आगे है।

    यानी AI की यह रेस केवल यह तय करने की नहीं है कि सबसे अच्छा चैटबॉट किस देश के पास है। असली मुकाबला मॉडल + चिप + डेटा सेंटर + बिजली + रिसर्च + मैन्युफैक्चरिंग के पूरे इकोसिस्टम का है। इसी वजह से शी जिनपिंग और ट्रंप की मौजूदा मुलाकात में AI केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

  • कुंभ राशि में राहु-चंद्रमा की युति से बनेगा ग्रहण योग, तीन राशियों को रहना होगा सतर्क

    कुंभ राशि में राहु-चंद्रमा की युति से बनेगा ग्रहण योग, तीन राशियों को रहना होगा सतर्क

    नई दिल्ली ।ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार 23 सितंबर को चंद्रमा कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। इस राशि में पहले से राहु की स्थिति बताई गई है। ऐसे में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग बनने की बात कही जा रही है। ज्योतिष में राहु और चंद्रमा की युति को सामान्य तौर पर शुभ नहीं माना जाता है।

    मान्यता है कि इस तरह के ग्रह योग का प्रभाव अलग-अलग राशियों पर उनकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। कुंभ राशि में बनने वाले इस योग के कारण कुछ राशि वालों को आर्थिक, करियर और कार्यक्षेत्र से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक कर्क राशि के जातकों के लिए आने वाले कुछ दिन विशेष सावधानी वाले हो सकते हैं। चंद्रमा इस राशि से आठवें भाव में जाकर राहु के साथ युति बनाएगा। आठवें भाव में बनने वाली इस स्थिति को कई तरह के उतार-चढ़ाव से जोड़कर देखा जाता है।

    कर्क राशि वालों के खर्चों में अचानक वृद्धि होने की संभावना बताई गई है। साथ ही सामाजिक या पेशेवर स्तर पर छवि प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में करियर से जुड़े फैसलों में जल्दबाजी से बचने और अपने काम पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है।

    कन्या राशि के जातकों के लिए ग्रहण योग छठे भाव में बनने की बात कही गई है। ज्योतिष में छठे भाव का संबंध शत्रु, रोग, प्रतिस्पर्धा और विभिन्न प्रकार की बाधाओं से माना जाता है। इसलिए इस अवधि में विरोधियों और प्रतिस्पर्धियों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    कार्यस्थल पर कन्या राशि वालों को अपने फैसलों और जिम्मेदारियों को लेकर सावधानी बरतनी होगी। आर्थिक मामलों में भी किसी तरह की लापरवाही से बचने की जरूरत बताई गई है। विशेष रूप से लेनदेन से जुड़े मामलों में बिना पूरी जानकारी के किसी दूसरे व्यक्ति पर भरोसा करने से बचने की सलाह दी गई है।

    मीन राशि के जातकों के लिए भी इस ग्रह स्थिति को सावधानी से जोड़कर देखा जा रहा है। बताया गया है कि ग्रहण योग मीन राशि से बारहवें भाव में बनेगा। ज्योतिषीय मान्यता में बारहवें भाव का संबंध खर्च और आर्थिक नुकसान से माना जाता है।

    इसी वजह से मीन राशि वालों को इस अवधि में अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखने और आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। करियर के क्षेत्र में भी काम को लेकर लापरवाही से बचना जरूरी बताया गया है। कार्यक्षेत्र में छोटी-सी असावधानी भी परेशानी बढ़ा सकती है, ऐसी ज्योतिषीय मान्यता है।

    ग्रहण योग को लेकर बताई गई ये बातें ज्योतिषीय मान्यताओं और कुंडली की व्याख्या पर आधारित हैं। किसी व्यक्ति पर इसका प्रभाव उसकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार अलग-अलग माना जाता है। इसलिए केवल राशि के आधार पर किसी निश्चित घटना की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

    23 सितंबर से बनने वाली राहु-चंद्रमा की युति के दौरान कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों को विशेष रूप से आर्थिक लेनदेन, करियर और खर्चों से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

  • 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में किसने जीते बड़े सम्मान, यामी गौतम से ममूटी तक इन सितारों का रहा जलवा

    72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में किसने जीते बड़े सम्मान, यामी गौतम से ममूटी तक इन सितारों का रहा जलवा

    नई दिल्ली । गुजरात के एकता नगर में मंगलवार को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन किया गया। वर्ष 2024 के लिए भारतीय सिनेमा में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कलाकारों, निर्देशकों और तकनीकी प्रतिभाओं को इस समारोह में सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।

    इस अवसर पर भारतीय सिनेमा की उपलब्धियों के साथ फिल्म कलाकारों और पूरी फिल्म इंडस्ट्री की सामाजिक जिम्मेदारियों पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में लोकप्रिय कलाकारों के व्यापक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि खासकर बच्चों और युवाओं पर फिल्म सितारों की बातों और व्यवहार का गहरा असर पड़ता है।

    राष्ट्रपति ने फिल्म कलाकारों से ऐसे उत्पादों के प्रचार से बचने की अपील की, जो लोगों के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि सफल कलाकार जब स्वस्थ और अनुशासित जीवनशैली के फायदे बताते हैं, तो बड़ी संख्या में बच्चे और युवा उनसे प्रेरणा लेते हैं।

    उन्होंने यह भी कहा कि लोकप्रियता के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उनके मुताबिक सच्चा सितारा वही है जो समाज में सकारात्मक रोशनी फैलाए। राष्ट्रपति ने किसी विशेष कलाकार या ब्रांड का नाम नहीं लिया, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री से अपने प्रभाव का जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करने का आग्रह किया।

    समारोह के दौरान राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की जूरी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्तर की प्रत्येक जूरी में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनके अनुसार निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं के दृष्टिकोण को शामिल करने से उसका दायरा और व्यापक हो सकता है।

    राष्ट्रपति ने सिनेमा के पर्दे के पीछे काम करने वाले लोगों के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने छोटे कलाकारों, सहायकों, तकनीशियनों और अन्य कर्मचारियों के सम्मान तथा सामाजिक सुरक्षा पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण केवल पर्दे पर दिखाई देने वाले कलाकारों की मेहनत से संभव नहीं होता, बल्कि बड़ी संख्या में लोग इसमें योगदान देते हैं।

    पुरस्कारों की बात करें तो ‘आर्टिकल 370’ को वर्ष 2024 के लिए सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म चुना गया। इसी फिल्म में अभिनय के लिए यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार प्रदान किया गया। फिल्म की कहानी और प्रस्तुति के साथ यामी के अभिनय को भी इस सम्मान के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

    सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में ममूटी और कार्तिक आर्यन को सम्मानित किया गया। ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ के लिए जबकि कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। दोनों कलाकारों को मुख्य भूमिका में उनके अभिनय के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।

    समारोह में दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके लंबे योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान वर्ष 2024 के लिए प्रदान किया गया।

    72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का समापन ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ हुआ। समारोह में पुरस्कारों के साथ भारतीय सिनेमा की विविधता, कलाकारों की भूमिका और फिल्म निर्माण से जुड़े हर व्यक्ति के योगदान को भी प्रमुखता दी गई।

  • पांच बार बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड जीत चुकीं शबाना आजमी, कभी 30 रुपये में बेचती थीं कॉफी

    पांच बार बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड जीत चुकीं शबाना आजमी, कभी 30 रुपये में बेचती थीं कॉफी

    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा में शबाना आजमी का नाम दमदार अभिनय और शानदार फिल्मी सफर के लिए जाना जाता है। उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में पांच बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतना शामिल है। यह उपलब्धि उन्हें अलग पहचान देती है। उन्होंने अलग-अलग फिल्मों में चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाईं और हर बार अपने अभिनय की अलग छाप छोड़ी।

    शबाना आजमी ने जिन फिल्मों के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया, उनमें ‘अंकुर’, ‘अर्थ’, ‘खंडहर’, ‘पार’ और ‘गॉडमदर’ शामिल हैं। उनकी पहली ही फिल्म ‘अंकुर’ ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इसके बाद उनके अभिनय का सिलसिला लगातार मजबूत होता गया।

    वर्ष 1974 में रिलीज हुई ‘अंकुर’ से शबाना ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। फिल्म में उन्होंने एक ग्रामीण महिला की भूमिका निभाई थी। अपने शुरुआती ही काम में उन्होंने किरदार को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया और इसी फिल्म के लिए उन्हें पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।

    इसके बाद ‘अर्थ’ में उन्होंने शादीशुदा जिंदगी से जुड़े भावनात्मक संघर्षों को पर्दे पर उतारा। इस भूमिका के लिए उन्हें दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके अगले वर्ष ‘खंडहर’ में उनके गंभीर अभिनय को भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला।

    ‘पार’ में निभाया गया रामा का किरदार उनके पुरस्कारों की सूची में चौथी उपलब्धि लेकर आया। इसके बाद लंबे अंतराल के बाद 1998 में आई ‘गॉडमदर’ में उन्होंने रामबाई का किरदार निभाया। इस भूमिका में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली और उन्हें पांचवीं बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

    शबाना आजमी का सफर इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि फिल्मी परिवार से आने के बावजूद उनके शुरुआती जीवन में मेहनत और आत्मनिर्भरता का अनुभव रहा। वह प्रसिद्ध कवि कैफी आजमी और रंगमंच से जुड़ी शौकत आजमी की बेटी हैं। कॉलेज के दिनों में उन्होंने अपनी पॉकेट मनी के लिए काम किया था।

    बताया जाता है कि उन्होंने मुंबई के एक पेट्रोल पंप पर कॉफी प्रमोटर के तौर पर काम किया। वहां वह आने वाले लोगों को कॉफी बेचती थीं और इस काम के बदले उन्हें रोजाना 30 रुपये मिलते थे। उस दौर का यह अनुभव उनके जीवन के संघर्ष और मेहनत से जुड़े अध्यायों में शामिल है।

    अभिनय को पेशे के तौर पर चुनने के लिए शबाना ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से प्रशिक्षण लिया। वहां उन्होंने अभिनय का कोर्स किया और गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद ‘अंकुर’ से उनके फिल्मी करियर की शुरुआत हुई और उन्होंने जल्द ही गंभीर भूमिकाओं के लिए अपनी अलग पहचान बना ली।

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के अलावा शबाना आजमी को भारत सरकार की ओर से पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं। उनका करियर कई दशकों में फैला हुआ है और उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ रंगमंच में भी काम किया है।

    सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय पुरस्कार की बात करें तो शबाना आजमी की पांच जीत एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड है। वहीं सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में अमिताभ बच्चन और ममूटी चार-चार बार यह सम्मान हासिल कर चुके हैं। शबाना की उपलब्धियां उनके लंबे और विविधतापूर्ण फिल्मी सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

  • चेहरे की चमक के लिए गुलाब से करें स्किन केयर गुलाब जल से लेकर फेस पैक तक जानें त्वचा को निखारने के आसान तरीके

    चेहरे की चमक के लिए गुलाब से करें स्किन केयर गुलाब जल से लेकर फेस पैक तक जानें त्वचा को निखारने के आसान तरीके


    नई दिल्ली। गुलाब को खूबसूरती और ताजगी का प्रतीक माना जाता है। इसकी पंखुड़ियों और गुलाब जल का इस्तेमाल लंबे समय से त्वचा की देखभाल के लिए किया जाता रहा है। गुलाब की खुशबू मन को सुकून देने के साथ स्किन केयर रूटीन को भी तरोताजा महसूस करा सकती है। खासतौर पर गुलाब जल को चेहरे पर इस्तेमाल करने की परंपरा काफी पुरानी है। इसमें मौजूद प्राकृतिक यौगिक त्वचा को हाइड्रेटेड महसूस कराने में मदद कर सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर माना जाता है।

    गुलाब जल का इस्तेमाल चेहरे को साफ करने के बाद किया जा सकता है। इसके लिए कॉटन की मदद से गुलाब जल को चेहरे पर हल्के हाथों से लगाया जा सकता है। कुछ लोगों को इससे त्वचा पर ठंडक और ताजगी महसूस होती है। अगर त्वचा संवेदनशील है तो किसी भी नए प्रोडक्ट या घरेलू नुस्खे को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले कान के पीछे या हाथ की त्वचा पर थोड़ी मात्रा लगाकर प्रतिक्रिया देखना जरूरी है। जलन लालिमा या खुजली महसूस होने पर इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    गुलाब की पंखुड़ियों से तैयार फेस पैक भी पारंपरिक स्किन केयर में इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए साफ गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर उसमें एलोवेरा जेल या दही मिलाया जा सकता है। तैयार मिश्रण को चेहरे पर हल्की परत के रूप में लगाया जा सकता है। कुछ समय बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लेना चाहिए। इस तरह के घरेलू फेस पैक से त्वचा मुलायम और तरोताजा महसूस हो सकती है। लेकिन नींबू या दूसरे तेज अम्लीय पदार्थों को चेहरे पर सीधे लगाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे कुछ लोगों की त्वचा में जलन हो सकती है।

    गुलाब जल को मॉइस्चराइजर का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। चेहरे को साफ करने के बाद त्वचा की जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाना जरूरी है। दिन में बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का इस्तेमाल भी स्किन केयर रूटीन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गुलाब जल को अतिरिक्त देखभाल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन इससे त्वचा की सभी समस्याओं का इलाज होने का दावा सही नहीं माना जाना चाहिए।

    गुलाब की पंखुड़ियों से बना ठंडा पानी भी चेहरे को ताजगी देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए साफ पानी में गुलाब की पंखुड़ियों को कुछ समय भिगोकर रखा जा सकता है। हालांकि इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के बजाय ताजा तैयार करके इस्तेमाल करना बेहतर है। बाजार में मिलने वाले गुलाब जल का इस्तेमाल करते समय उसके लेबल पर दिए गए ingredients और उपयोग संबंधी निर्देश जरूर पढ़ने चाहिए।

    गुलाब आधारित स्किन केयर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे सरल रूटीन में शामिल किया जा सकता है। चेहरे की सफाई मॉइस्चराइजिंग और सनस्क्रीन के साथ गुलाब जल का इस्तेमाल त्वचा को ताजगी देने वाला अतिरिक्त कदम हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति को लगातार मुंहासे खुजली लालिमा दाने या दूसरी त्वचा संबंधी परेशानी है तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। सही स्किन केयर वही है जो त्वचा की जरूरत के अनुसार हो और नियमित रूप से सुरक्षित तरीके से अपनाया जाए।