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  • RBI का बड़ा फैसला…. 1 अक्‍टूबर से बदल जाएंगे FD के नियम, जानें ग्राहकों पर क्या होगा असर?

    RBI का बड़ा फैसला…. 1 अक्‍टूबर से बदल जाएंगे FD के नियम, जानें ग्राहकों पर क्या होगा असर?


    नई दिल्ली।
    हर महीने के शुरुआत की तरह अक्टूबर का महीना भी देश में कई बड़े बदलाव (Rule Change From 1st October) लेकर आ रहा है। ये चेंज बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट (Fixed Deposit) से जुड़े हुए हैं. दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India) एफडी के नियमों को बदलने (FD Rule Change) जा रहा है, जिसकी जगह पर नए फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट के नियम लागू होंगे. इनमें FD Interest Rates समेत कई अन्य अपडेट भी शामिल किए जा रहे हैं. फिक्स्ड डिपॉजिट के नए नियम 1 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होंगे।


    3 करोड़ से ज्यादा FD पर ब्याज

    FD New Rules, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने जा रहे हैं, ये सबसे ज्यादा बल्क डिपॉजिट से जुड़े हुए हैं. यहां जान लीजिए कि थोक जमा या Bulk FD Deposit का मतलब होता है कि 3 करोड़ रुपये या उससे ज्‍यादा की FD. आरबीआई की ओर से तय किए गए बदलावों के मुताबिक, बैंकों को एलसीआर ढांचे के तहत जमा या असुरक्षित थोक जमा पर लागू डिफरेंशियल रन-ऑफ रेट्स को ध्यान में रखते हुए थोक जमा पर डिफरेंशियल इंटरेस्‍ट रेट्स देने की स्वतंत्रता होगी।


    हर दिन ब्याज पर अपडेट

    भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़े ब्याज नियमों में जो बदलाव लागू किया जा रहा है, उसका उद्देश्‍य बैंकों को ब्‍याज दरें तय करने में ज्‍यादा लचीलापन देना है. अब अक्टूबर महीने की पहली तारीख से से बैंकों को अपनी वेबसाइट पर जमा राशि, जिसमें थोक जमा भी शामिल हैं, पर दी जा रहीं ब्याज दरें दिखानी होंगी. थोक जमा पर देय ब्याज दरें हर कार्य दिवस को सुबह 10:00 बजे बैंक की वेबसाइट पर अपडेट की जाएंगी, जिसमें 10 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा, और यह घोषणा अधिकतम 10:10 बजे तक की जानी अनिवार्य है।


    सभी शाखाओं में एक जैसी दरें

    RBI की ओर से बैंकों को ये निर्देश भी दिया गया है कि वे एक ही तारीख को स्‍वीकार की गई फिक्स्ड डिपॉजिट रकम पर एक समान ब्‍याज दर प्रदान करें. केंद्रीय बैंक के मुताबिक, किसी भी ब्रांच में एक ही तारीख को स्‍वीकार की गई समान अमाउंट की जमा राशियों पर दिए जाने वाले ब्‍याज के मामले में कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।


    निवेशकों पर क्या होगा चेंज का असर?

    अब सबसे बड़ा सवाल ये कि आखिर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से 1 अक्टूबर 2026 से लागू किए जाने वाले इन एफडी निवेश से जुड़े बदलावों का आम निवेशकों पर क्या और कितना असर होगा? तो बता दें कि ये बदले हुए नियम बड़ी जमा राशि (3 करोड़ रुपये और उससे अधिक) से संबंधित हैं, इसलिए सावधि जमा निवेशकों पर इसका प्रभाव सीमित रहने की संभावना है. हालांकि, ये दिशा-निर्देश बैंकों में अधिक पारदर्शिता और एकरूपता लाएंगे।


    ‘Zero Risk’, जोरदार रिटर्न

    गौरतलब है कि सुरक्षित निवेश और जोरदार रिटर्न की बात होती है, तो बीते कुछ समय में एफडी स्कीम्स खासी पॉपुलर हुई हैं. खासतौर पर सीनियर सिटीजंस के लिए, क्योंकि एफडी में निवेश पर आम ग्राहकों की तुलना में बैंक इन निवेशकों को ज्यादा ब्याज ऑफर करते हैं, जो 8 से 9 फीसदी तक पहुंच जाता है. इसके अलावा तमाम बैंक अलग-अलग टैन्योर के लिए चलाई जा रहीं स्पेशल एफडी स्कीम पर एक्स्ट्रा ब्याज से साथ अन्य सुविधाएं भी ऑफर कर रहे हैं।

  • ट्रंप नाकाबंदी हटाएंगे तो 7 दिन में खुल सकता है होर्मुज स्ट्रेट… ईरान ने दिए संकेत

    ट्रंप नाकाबंदी हटाएंगे तो 7 दिन में खुल सकता है होर्मुज स्ट्रेट… ईरान ने दिए संकेत


    न्यूयॉर्क।
    संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के दौरान ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच बातचीत की कोशिशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाता है तो ईरान 7 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल सकता है. ईरान ने यह प्रस्ताव अमेरिका तक मध्यस्थों के जरिए पहले ही पहुंचाया है।

    ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत में होर्मुज को लेकर तेहरान की शर्तें रखीं. ईरानी पक्ष के मुताबिक, इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियां जारी करना और सभी मोर्चों पर जंग खत्म करना शामिल है. ईरानी प्रतिनिधिमंडल को न्यूयॉर्क में बातचीत आगे बढ़ाने का अधिकार भी दिया गया है।


    गल्फ देशों ने भी बढ़ाई बातचीत की कोशिश

    होर्मुज को लेकर कूटनीतिक कोशिशें सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं हैं. कतर ने कहा है कि वह पाकिस्तान के साथ मिलकर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है. सऊदी अरब, मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की ने भी बातचीत और कूटनीति का समर्थन किया है।

    अराघची ने न्यूयॉर्क में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मुलाकात की. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गल्फ देशों के नेताओं के साथ बैठक की. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सभी पक्षों की बात सुन रहा है और ईरान के साथ समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ सकती है।


    बातचीत के बीच जारी है सैन्य दबाव

    हालांकि बातचीत की कोशिशों के साथ दोनों तरफ से सख्त बयान भी जारी हैं. ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान ईरान को लेकर दबाव बढ़ाने की अपील की और बाद में तेहरान से जल्द फैसला लेने को कहा।

    ईरान की तरफ से भी होर्मुज को लेकर साफ संकेत दिए गए हैं कि यह उसके लिए बातचीत में एक अहम मुद्दा है. ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर अली निकजाद ने कहा कि बातचीत अब होर्मुज से जुड़ गई है और ईरान स्ट्रेट को लेकर पीछे नहीं हटेगा।

    यानी न्यूयॉर्क में चल रही कूटनीतिक हलचल के बीच होर्मुज स्ट्रेट अब ईरान-अमेरिका बातचीत का सबसे अहम मुद्दा बनता दिख रहा है. ईरान ने इसे खोलने के लिए 7 दिन का संकेत दिया है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को पहले सैन्य दबाव कम करने और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाने जैसी शर्तें माननी होंगी।

  • राजस्थान निकाय चुनावों में कांग्रेस की करारी हार…. 7 में से एक पर निर्दलीय और 6 पर BJP का कब्जा

    राजस्थान निकाय चुनावों में कांग्रेस की करारी हार…. 7 में से एक पर निर्दलीय और 6 पर BJP का कब्जा


    जयपुर।
    राजस्थान (Rajasthan) में हाल ही में हुए चुनावों (Elections) में बीजेपी (BJP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 में से 6 निकायों में अपना कब्जा जमा लिया है. वहीं, एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार (Independent candidate) ने बाजी मारी है. इस तरह इन चुनावों में कांग्रेस (Congress) को करारी हार का सामना करना पड़ा है।

    निकायों से सामने आए चुनावी नतीजों के मुताबिक, उदयपुर में बीजेपी के दिनेश भट्ट को डिप्टी मेयर चुना गया है. इसके अलावा अजमेर में बीजेपी के हेमंत सांखला, अलवर में बीजेपी के अजय पुनिया और बीकानेर में बीजेपी के पंकज गहलोत को जीत मिली है।

    भीलवाड़ा में बीजेपी के राधेश्याम सोमानी, भरतपुर में बीजेपी की अंबिका सैनी और पाली में निर्दलीय प्रत्याशी महबूब टी को डिप्टी मेयर और उपाध्यक्ष पद की कुर्सी मिली है।

    अजमेर और पाली में मुकाबला इतना कड़ा था कि हार-जीत का फैसला पर्ची यानी लॉटरी सिस्टम से करना पड़ा. अजमेर में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही उम्मीदवारों को बराबर यानी 40-40 वोट मिले थे. वहीं इसके उलट, भीलवाड़ा में बीजेपी के राधेश्याम सोमानी ने निर्विरोध जीत हासिल की।


    बीकानेर में कांग्रेस के बहुमत को लगा झटका

    चुनावों के बीच सबसे बड़ा उलटफेर बीकानेर नगर निगम में देखने को मिला. यहां कांग्रेस पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत था, इसके बावजूद उसे हार का सामना करना पड़ा. कांग्रेस पार्षदों की ओर से की गई क्रॉस वोटिंग के कारण बीजेपी के पंकज गहलोत डिप्टी मेयर बने. खास बात ये है कि इसके ठीक एक दिन पहले ही चुनाव में कांग्रेस ने बीकानेर में अपना मेयर बनाया था, लेकिन उपमहापौर चुनाव में बाजी पलट गई।

    इसके अलावा, बारां नगर परिषद के उपसभापति चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ी जीत मिली. बारां में ‘आप’ के तेजस सुमन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 50 वोटों में से 31 वोट हासिल किए और कांग्रेस उम्मीदवार नवीन को 19 वोटों से हरा दिया. जोधपुर की मथानिया नगर पालिका में उपाध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस के जितेंद्र देवड़ा ने 18 वोट पाकर जीत दर्ज की। इस दौरान कांग्रेस नेत्री दिव्या मदेरणा भी खासी चर्चा में रहीं, जो सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए सिर पर हेलमेट पहनकर मतदान केंद्र पहुंची थीं।


    जीत की खुशी में दंडवत होकर मंदिर पहुंचे महेंद्र समरिया

    राजस्थान के इन चुनावों में हंगामे और रोमांच की कोई कमी नहीं थी. कोटा की रामगंज मंडी नगर पालिका में उपाध्यक्ष पद पर बीजेपी के महेंद्र समरिया निर्विरोध चुने गए, जिसके बाद वो अपनी जीत की खुशी में दंडवत करते हुए करीब 500 मीटर दूर गोवर्धन नाथ मंदिर पहुंच गए।

    वहीं, सवाई माधोपुर नगर परिषद में उपसभापति पद के नामांकन के दौरान बीजेपी चुनाव प्रभारी मदन प्रजापत और पुलिस के बीच तीखी नोकझोक और धक्का-मुक्की देखने को मिली. सीकर में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई, जहां पूर्व सभापति और कांग्रेस पार्षद ने बीजेपी प्रत्याशी रेखा विचारणीय के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया।

    बीकानेर में वोटिंग के दौरान विधायक जेठालाल विकास की गाड़ी रोके जाने पर हल्का विवाद हुआ, जिसे बाद में महापौर प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह ने बीच-बचाव कर शांत कराया. उदयपुर की फतेह नगर पालिका में बीजेपी के बागी पार्षद राजेश चपलोद को अध्यक्ष चुनाव के दौरान एससी-एसटी एक्ट के मामले में पुलिस कस्टडी में वोट डालने लाया गया।


    बीजेपी का जलवा

    भरतपुर संभाग के 32 निकायों में से 22 स्थानों पर बीजेपी समर्थित उम्मीदवार निर्वाचित हुए, जबकि कांग्रेस को 7 और निर्दलीयों को 3 सीटों पर संतोष करना पड़ा. भरतपुर नगर निगम में महापौर अनुराधा सिंह की जीत के बाद उपमहापौर पद पर अंबिका सैनी ने जीत दर्ज की. डीग जिले के सभी छह निकायों में पूरी तरह बीजेपी का दबदबा देखने को मिला, जहां डीग नगर परिषद में तो बीजेपी प्रत्याशी को शून्य वोट मिलने की भी चर्चा रही।

    दूसरी ओर, करौली जिले के 6 निकायों में समीकरण थोड़े अलग रहे, जहां बीजेपी को 1, कांग्रेस को 2 और निर्दलीयों को 3 पदों पर सफलता मिली. धौलपुर में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुकाबला बराबरी का रहा, जबकि सवाई माधोपुर के 6 निकायों में उपाध्यक्ष पद पर बीजेपी ने 4 और कांग्रेस ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की।

  • रूस ने यूक्रेन पर फिर किया बड़ा हमला… एक साथ दागे कई ड्रोन और मिलाइलें

    रूस ने यूक्रेन पर फिर किया बड़ा हमला… एक साथ दागे कई ड्रोन और मिलाइलें


    नई दिल्ली।
    रूस (Russia) ने यूक्रेन (Ukraine) के कई शहरों पर एक साथ कई तरह की मिसाइलों और ड्रोनों से हमला (Missiles and Drones Attack) किया. इस हमले में ओनिक्स-एम, जिरकॉन और इस्कंदर-एम जैसी मिसाइलों का इस्तेमाल बताया गया है. साथ ही सैकड़ों ड्रोन भी दागे गए. हमला 10 क्षेत्रों में हुआ जिसमें कीव, द्निप्रो और क्रिवी रीह शामिल हैं।

    यूक्रेनी बलों ने ज्यादातर खतरों को रोक लिया लेकिन कुछ हमले लक्ष्य तक पहुंच गए. इससे आग लगी, कारखाने क्षतिग्रस्त हुए और चेर्निहिव में 1 लाख लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ा. द्निप्रो में तीन या चार लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए।

    रूस ने इस हमले को मास्को के पास यूक्रेनी हमलों का जवाब बताया. दोनों पक्ष ऊर्जा और औद्योगिक ठिकानों पर हमले बढ़ा रहे हैं. यह घटना लंबे संघर्ष के बीच तनाव को और बढ़ाने वाली साबित हुई है. हमले में विभिन्न प्रकार की मिसाइलों का मिश्रण इस्तेमाल हुआ. ओनिक्स-एम सुपरसोनिक एंटी-शिप क्रूज मिसाइल है लेकिन जमीन के ठिकानों पर भी लगाई जा सकती है.

    जिरकॉन हाइपरसोनिक मिसाइल है जो तेज गति से लक्ष्य पर हमला करती है. इस्कंदर-एम बैलिस्टिक मिसाइल है जो सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. इनके अलावा कुछ क्रूज मिसाइलें भी दागी गईं. ड्रोन की संख्या सैकड़ों में बताई गई है जो विभिन्न दिशाओं से आए।

    यूक्रेनी वायु रक्षा ने इनमें से अधिकांश को मार गिराया. कुल 186 खतरों को रोकने का दावा किया गया. बावजूद इसके कुछ मिसाइल और ड्रोन लक्ष्य तक पहुंच गए. कीव और अन्य शहरों में विस्फोट की आवाजें सुनाई दीं. औद्योगिक क्षेत्रों और ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया गया जिससे बिजली व्यवस्था प्रभावित हुई।


    नुकसान और नागरिक प्रभाव

    द्निप्रो में सबसे ज्यादा नुकसान की खबरें आईं. वहां मौतें हुईं और कई लोग घायल हुए. चेर्निहिव में बिजली कटौती से एक लाख लोग प्रभावित हुए. आग बुझाने और मलबा हटाने का काम जारी रहा. कारखानों को नुकसान पहुंचने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है. नागरिक इलाकों में भी हमले की खबरों ने लोगों में भय पैदा किया।

    यूक्रेनी अधिकारियों ने नागरिक ठिकानों पर हमले की निंदा की. रूस ने सैन्य और ऊर्जा लक्ष्यों को निशाना बनाने का दावा किया. दोनों पक्षों के बयान अलग-अलग हैं लेकिन जमीनी हकीकत में नुकसान साफ दिख रहा है. यह हमला यूक्रेन द्वारा मास्को के आसपास किए गए हमलों के जवाब में बताया जा रहा है।

    दोनों देश एक-दूसरे के ऊर्जा और औद्योगिक ढांचे को निशाना बना रहे हैं. ड्रोन और मिसाइल हमलों की संख्या बढ़ने से वायु रक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ गया है. सर्दियों के करीब आने के साथ ऊर्जा सुविधाओं पर हमले नागरिकों के लिए और मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले की निंदा हुई है. संघर्ष के लंबे होते जाने से दोनों पक्ष नई रणनीति अपना रहे हैं. हाइपरसोनिक और सुपरसोनिक मिसाइलों का इस्तेमाल युद्ध की प्रकृति को बदल रहा है. बचाव और पुनर्निर्माण का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    यूक्रेन अपनी वायु रक्षा को मजबूत करने की कोशिश में लगा है. रूस लगातार हमलों से दबाव बनाए रखना चाहता है. आम नागरिकों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की बहाली सबसे बड़ी जरूरत है. यह हमला दिखाता है कि संघर्ष अभी भी तीव्र चरण में है और शांति की संभावनाएं फिलहाल कमजोर दिख रही हैं. दोनों पक्षों को संयम बरतने और राजनयिक समाधान तलाशने की सलाह दी जा रही है लेकिन मैदान में तनाव जारी है।

  • मरीज इलाज के लिए घर गहने बेचते हैं फिर दवा पर इतनी बड़ी कीमत क्यों सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों से पूछा सवाल

    मरीज इलाज के लिए घर गहने बेचते हैं फिर दवा पर इतनी बड़ी कीमत क्यों सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों से पूछा सवाल


    नई दिल्ली । कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज करा रहे मरीजों को महंगी दवाओं से राहत दिलाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने एक ऐसी दवा का उदाहरण सामने आने पर हैरानी जताई जिसकी रिटेल कीमत और एमआरपी में करीब दस गुना का अंतर बताया गया। कोर्ट के सामने कहा गया कि जिस दवा की कीमत रिटेलर्स को करीब 2700 रुपये में मिल रही है उसकी एमआरपी 27000 रुपये तक रखी गई है। इस पर पीठ ने सवाल उठाया कि मरीजों से इस तरह की कीमत कैसे वसूली जा सकती है।

    जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ जरूरी कैंसर दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि कैंसर के मरीज पहले ही बीमारी और इलाज के खर्च का सामना कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी दवाओं की कीमतों में इस तरह का अंतर बेहद गंभीर विषय है। कोर्ट ने यह भी कहा कि कई परिवार इलाज का खर्च जुटाने के लिए अपनी संपत्ति और गहने तक बेच देते हैं। ऐसे हालात में दवाओं की कीमत में अत्यधिक बढ़ोतरी मरीजों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालती है।

    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उन अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया जिनकी जिम्मेदारी दवाओं की कीमतों पर नजर रखने और अनुचित मूल्य वृद्धि के खिलाफ कार्रवाई करने की है। अदालत ने पूछा कि जब संबंधित अधिकारियों के पास दवाओं की कीमतों को लेकर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी है तो फिर इस तरह का अंतर कैसे बना हुआ है। पीठ ने अधिकारियों की निष्क्रियता पर भी नाराजगी जाहिर की।

    याचिका में केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों से जरूरी दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि दवा कंपनियों और खुदरा विक्रेताओं की ओर से आवश्यक दवाओं के लिए अत्यधिक कीमत वसूले जाने पर रोक लगनी चाहिए। उनका उद्देश्य यह है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को जरूरी दवाएं ऐसी कीमत पर उपलब्ध हों जिसे वे वहन कर सकें।

    सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि सरकार इस मामले को केवल दो पक्षों के बीच सामान्य मुकदमेबाजी के तौर पर नहीं देख रही है। इससे संकेत मिलता है कि केंद्र भी मामले से जुड़े व्यापक पहलुओं पर विचार कर रहा है। अदालत ने दवाओं की कीमत तय करने और मरीजों को उचित कीमत पर दवा उपलब्ध कराने के मुद्दे को महत्वपूर्ण माना है।

    मामले में जेनेरिक दवाओं का मुद्दा भी सामने आया। एक याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि पंजीकृत चिकित्सा पेशेवरों द्वारा जेनेरिक दवाएं नहीं लिखे जाने की समस्या के कारण भी गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को परेशानी होती है। अगर समान चिकित्सकीय उपयोग वाली कम कीमत की दवाएं उपलब्ध हैं तो उनके इस्तेमाल को लेकर भी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि जरूरी दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता और उचित मूल्य निर्धारण महत्वपूर्ण मुद्दा है। अदालत की सख्त टिप्पणियों के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार और संबंधित नियामक एजेंसियां दवाओं की कीमतों को लेकर क्या कदम उठाती हैं। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होनी है। उस सुनवाई में दवाओं की कीमतों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

  • बैंकों के पास है बंपर सरप्लस कैश…. RBI ने एक ही दिन में ले लिए ₹71971 करोड़

    बैंकों के पास है बंपर सरप्लस कैश…. RBI ने एक ही दिन में ले लिए ₹71971 करोड़


    नई दिल्ली।
    देश के बैंकों (Banks) के पास इस समय जरूरत से ज्यादा नकदी (Cash) है। इसे कंट्रोल करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (Reserve Bank of India- RBI) ने बैंकों से 71,971 करोड़ रुपये एक दिन के लिए अपने पास ले लिए हैं। RBI ने इसके लिए 75,000 करोड़ रुपये की नीलामी रखी थी, लेकिन बैंकों ने 71,971 करोड़ रुपये ही उपलब्ध कराए।


    आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?

    इसका सीधा मतलब यह नहीं है कि आपके बैंक खाते से पैसा निकल जाएगा। आपके खाते में जमा रकम पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ता। RBI का कदम मुख्य रूप से बैंकों के बीच मौजूद अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने से जुड़ा है। बाजार में पैसे की उपलब्धता और ब्याज दरों पर इसका असर पड़ सकता है। इसका अप्रत्यक्ष असर आगे चलकर होम लोन, कार लोन या दूसरे कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है, लेकिन केवल इस एक कदम से ब्याज दरों में तुरंत बदलाव जरूरी नहीं है।


    आखिर RBI ने ऐसा क्यों किया?

    इसे ऐसे समझें। अगर बैंकों के पास जरूरत से बहुत ज्यादा पैसा पड़ा रहता है तो वे उसे दूसरे बैंकों को उधार दे सकते हैं। इससे बाजार में कैश की मात्रा बढ़ती है और बहुत कम ब्याज पर पैसा उपलब्ध हो सकता है।

    RBI अतिरिक्त नकदी को कुछ समय के लिए अपने पास लेकर बाजार में पैसों की मात्रा को संतुलित करता है। इसके लिए VRRR यानी वैरिएबल रेट रिवर्स रेपो जैसी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता है।


    बैंकिंग सिस्टम में अभी भी खूब पैसा

    रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के आंकड़ों के मुताबिक 21 सितंबर तक बैंकिंग सिस्टम में करीब 4.92 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त कैश मौजूद था। इसका मतलब यह हुआ कि बैंकों के पास उनकी तत्काल जरूरत से काफी ज्यादा पैसा था। RBI पिछले कुछ समय से इस अतिरिक्त नकदी को धीरे-धीरे कम कर रहा है। इसके लिए उसने सरकारी बॉन्ड बेचकर भी बाजार से पैसा वापस खींचा है।


    RBI बार-बार पैसा क्यों खींच रहा है?

    बैंकिंग सिस्टम में अतिरिक्त नकदी आने के कई कारण हैं। इनमें विदेशी मुद्रा से जुड़े लेनदेन, बैंकों में विदेशी मुद्रा जमा बढ़ना और केंद्रीय बैंक की कुछ वित्तीय गतिविधियां शामिल हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का लक्ष्य है कि बाजार में न तो पैसे की बहुत ज्यादा कमी हो और न ही जरूरत से बहुत ज्यादा पैसा पड़ा रहे। इसी संतुलन को बनाए रखने के लिए वह जरूरत के हिसाब से कभी पैसा बाजार में डालता है और कभी अतिरिक्त पैसा वापस खींचता है।

  • BSP का सियासी आधार लगातार घटा अब संसद में भी नहीं रहेगा कोई सांसद राष्ट्रीय दर्जे पर भी सवाल BSP के सामने संसद से लेकर राष्ट्रीय दर्जे तक की चुनौती

    BSP का सियासी आधार लगातार घटा अब संसद में भी नहीं रहेगा कोई सांसद राष्ट्रीय दर्जे पर भी सवाल BSP के सामने संसद से लेकर राष्ट्रीय दर्जे तक की चुनौती


    नई दिल्ली । बहुजन समाज पार्टी यानी BSP के सामने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक के बाद एक बड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं। पार्टी का लोकसभा में पहले से कोई सांसद नहीं है और उत्तर प्रदेश विधानसभा में भी अब उसका कोई विधायक नहीं बचा है। अगस्त 2026 में रसड़ा सीट से BSP के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद 403 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व खत्म हो गया।

    अब राज्यसभा में भी BSP का प्रतिनिधित्व खत्म होने की स्थिति बन रही है। पार्टी के मौजूदा इकलौते राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल नवंबर में पूरा होना है। इसके बाद BSP के पास संसद के दोनों सदनों में कोई निर्वाचित सांसद नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा में पार्टी के पास राज्यसभा चुनाव के लिए पर्याप्त संख्या नहीं होने के कारण तत्काल वापसी की संभावना भी सीमित है।

    यह स्थिति BSP के राजनीतिक सफर में महत्वपूर्ण बदलाव को दिखाती है। पार्टी की स्थापना 1984 में कांशीराम ने की थी और बाद में मायावती ने इसे उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़े राजनीतिक संगठन के रूप में स्थापित किया। 2007 के विधानसभा चुनाव में BSP ने उत्तर प्रदेश की 403 सीटों में से 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया था। इसके बाद पार्टी का विधानसभा में प्रदर्शन लगातार कमजोर होता गया। 2012 में उसकी सीटें घटकर 80 रह गईं। 2017 में BSP 19 सीटों पर सिमट गई और 2022 में केवल एक सीट जीत सकी। वह एकमात्र सीट रसड़ा थी जहां से उमाशंकर सिंह निर्वाचित हुए थे। उनके निधन के बाद विधानसभा में BSP का खाता खाली हो गया।

    लोकसभा चुनावों में भी पार्टी को लगातार चुनौती मिली है। 2009 के लोकसभा चुनाव में BSP ने 21 सीटें जीती थीं। लेकिन 2014 में पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी। 2019 में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल के साथ गठबंधन में BSP ने 10 सीटें जीतीं। 2024 में पार्टी फिर कोई लोकसभा सीट नहीं जीत सकी। इस तरह राष्ट्रीय स्तर पर BSP का संसदीय प्रतिनिधित्व लगातार कमजोर हुआ है।

    अब चर्चा पार्टी के राष्ट्रीय दर्जे को लेकर भी हो रही है। चुनाव आयोग के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार BSP अभी राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त दलों में शामिल है। आयोग की मौजूदा सूची में BSP को राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर दर्ज किया गया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि उसका राष्ट्रीय दर्जा अभी खत्म हो गया है। हालांकि भविष्य में चुनावी प्रदर्शन के आधार पर मान्यता की समीक्षा महत्वपूर्ण हो सकती है।

    चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता के लिए अलग अलग रास्ते तय हैं। इनमें किसी पार्टी का कम से कम चार राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनाव में छह प्रतिशत वैध वोट हासिल करना और कम से कम चार लोकसभा सदस्य चुनकर लाना शामिल है। दूसरा रास्ता लोकसभा की कुल सीटों के कम से कम दो प्रतिशत पर जीत हासिल करना है और ये सांसद कम से कम तीन राज्यों से होने चाहिए। इसके अलावा किसी दल का कम से कम चार राज्यों में राज्य पार्टी के रूप में मान्यता प्राप्त होना भी राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता का एक आधार है।

    BSP के लिए आने वाला समय इसलिए अहम है क्योंकि उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है। पार्टी को जहां अपने संगठन और चुनावी आधार को मजबूत करने की चुनौती है वहीं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक पहचान बनाए रखना भी उसके लिए महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल राष्ट्रीय दर्जा खत्म होना कोई घोषित फैसला नहीं है लेकिन संसद और विधानसभा में प्रतिनिधित्व खत्म होने की स्थिति ने BSP की राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है।

  • 23 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा हलचल के बीच Sensex Nifty पर रहेगी नजर जानें किन संकेतों से तय होगी बाजार की चाल

    23 सितंबर को शेयर बाजार में क्या होगा हलचल के बीच Sensex Nifty पर रहेगी नजर जानें किन संकेतों से तय होगी बाजार की चाल


    नई दिल्ली। 23 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की नजर कई अहम संकेतों पर रहने वाली है। मंगलवार 22 सितंबर को घरेलू बाजार में दबाव देखने को मिला और कारोबार के अंत में निफ्टी 50 करीब 0.36 प्रतिशत गिरकर 23329 के स्तर पर बंद हुआ जबकि सेंसेक्स 0.44 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 74529.08 पर रहा। आईटी शेयरों में दबाव बाजार की कमजोरी की प्रमुख वजहों में शामिल रहा। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

    अब 23 सितंबर के कारोबार में निवेशकों की नजर ग्लोबल मार्केट के संकेतों के साथ कच्चे तेल की कीमतों पर भी रहेगी। हाल के सत्रों में क्रूड की कीमतों में उतार चढ़ाव भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत बनकर सामने आया है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है इसलिए तेल की कीमतों में तेज बदलाव का असर महंगाई और कंपनियों की लागत से लेकर निवेशकों की धारणा तक दिखाई दे सकता है। मंगलवार को भी बाजार पर क्रूड और भू राजनीतिक घटनाक्रम का असर नजर आया।

    निफ्टी के स्तरों की बात करें तो 23 सितंबर को कारोबार के दौरान 23300 के आसपास का स्तर बाजार की नजर में रह सकता है। इसके ऊपर टिकाव बाजार में स्थिरता का संकेत दे सकता है जबकि कमजोरी बढ़ने पर निवेशकों की नजर अगले सपोर्ट स्तरों पर जा सकती है। इससे पहले 21 सितंबर को निफ्टी 23414.30 पर बंद हुआ था और बाजार में खरीदारी का रुख देखने को मिला था। उस सत्र में सेंसेक्स 564 अंक चढ़कर 74858.99 पर बंद हुआ था।

    बाजार की दिशा तय करने में विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी महत्वपूर्ण रहेंगी। विदेशी पूंजी का प्रवाह बाजार में उतार चढ़ाव बढ़ा सकता है जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी कई बार गिरावट के दौरान सहारा देने का काम करती है। ऐसे में 23 सितंबर को निवेशकों की नजर एफआईआई और डीआईआई के आंकड़ों पर भी रहेगी।

    सेक्टोरल स्तर पर आईटी शेयरों की गतिविधि खास तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है। मंगलवार को आईटी इंडेक्स में कमजोरी दर्ज की गई थी। इसके अलावा बैंकिंग ऑटो फार्मा मेटल और एनर्जी शेयरों में भी स्टॉक आधारित गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। बाजार में किसी एक सेक्टर की चाल पूरे इंडेक्स की दिशा को प्रभावित कर सकती है।

    इस समय निवेशकों के लिए केवल सेंसेक्स और निफ्टी की चाल देखना पर्याप्त नहीं होगा। अमेरिकी बाजारों की स्थिति एशियाई बाजारों का रुख डॉलर की चाल बॉन्ड यील्ड कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां सभी बाजार के लिए अहम संकेत दे सकती हैं। सोमवार को वैश्विक संकेतों और तेल की कीमतों में नरमी के बीच भारतीय बाजार में खरीदारी देखने को मिली थी लेकिन मंगलवार को बाजार फिर दबाव में आ गया। इससे साफ है कि मौजूदा दौर में बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है।

    23 सितंबर को निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार की शुरुआती चाल के साथ प्रमुख स्तरों और सेक्टरवार गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। शेयर बाजार में किसी भी दिशा की गारंटी नहीं होती इसलिए निवेश का फैसला अपने जोखिम और वित्तीय लक्ष्य के अनुसार करना जरूरी है। आने वाले कारोबार में वैश्विक संकेत और घरेलू घटनाक्रम मिलकर बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।

  • भारत-पाक तनाव पर UN में फिर बोले ट्रंप शहबाज शरीफ ने मुझे बताया 3 करोड़ लोगों का जीवन बचाया

    भारत-पाक तनाव पर UN में फिर बोले ट्रंप शहबाज शरीफ ने मुझे बताया 3 करोड़ लोगों का जीवन बचाया


    नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए सैन्य तनाव को लेकर एक बार फिर बड़ा दावा किया है। 22 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को बढ़ने से रोकने में भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल में आठ संघर्षों को खत्म कराने में मदद करने का दावा भी किया। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उन्हें पत्र लिखकर आभार जताया था और कहा था कि उनके हस्तक्षेप से करीब 3 करोड़ लोगों की जान बची।

    ट्रंप के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव जिस स्तर तक पहुंच गया था उससे हालात और गंभीर हो सकते थे। उन्होंने अपने संबोधन में इस पूरे घटनाक्रम को अपने उन प्रयासों से जोड़कर पेश किया जिनके जरिए वह विभिन्न देशों के बीच संघर्ष को रोकने का दावा करते रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उन्हें युद्ध रोकने और बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाने के लिए धन्यवाद दिया था। हालांकि 3 करोड़ लोगों की जान बचाने का आंकड़ा ट्रंप द्वारा किया गया दावा है और इसे स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं बताया गया है।

    भारत और पाकिस्तान के बीच मई 2025 में तनाव उस समय बढ़ा था जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बनी और कई दिनों तक तनाव जारी रहा। बाद में दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम हुआ। ट्रंप लंबे समय से इस घटनाक्रम को अपनी कूटनीतिक भूमिका से जोड़ते रहे हैं और अब संयुक्त राष्ट्र के मंच से उन्होंने एक बार फिर इसी दावे को दोहराया है।

    हालांकि इस घटनाक्रम को लेकर भारत का पक्ष ट्रंप के दावे से अलग रहा है। भारत ने लगातार कहा है कि सैन्य कार्रवाई रोकने का फैसला दोनों देशों के बीच सीधे संपर्क और आपसी समझ के तहत हुआ था। भारत तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावे को स्वीकार नहीं करता। भारत की विदेश नीति में भारत पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय तरीके से मुद्दों को सुलझाने की बात लंबे समय से कही जाती रही है। इसलिए ट्रंप के दावे और भारत के आधिकारिक रुख के बीच स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

    पाकिस्तान की ओर से हालांकि ट्रंप की भूमिका को लेकर सकारात्मक बयान सामने आते रहे हैं। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले भी भारत के साथ हुए संघर्ष विराम में ट्रंप के हस्तक्षेप की सराहना की थी। पाकिस्तान की तरफ से ट्रंप को शांति स्थापित करने की कोशिशों के लिए धन्यवाद दिए जाने की बात ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में भी दोहराई।

    संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र 22 सितंबर से शुरू हुआ है और इसमें दुनिया के विभिन्न देशों के नेता अंतरराष्ट्रीय शांति सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर अपने विचार रख रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का भारत पाकिस्तान संघर्ष को लेकर यह बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है। खास बात यह है कि ट्रंप ने इस दावे को अपने व्यापक शांति प्रयासों के हिस्से के तौर पर पेश किया जबकि भारत की ओर से संघर्ष विराम में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की भूमिका को स्वीकार नहीं किया गया है।

  • UP में एक और बड़ा चुनाव: 5 स्नातक और 6 शिक्षक सीटों पर होगा मतदान, 27 अक्टूबर को आएगा MLC चुनाव का रिजल्ट

    UP में एक और बड़ा चुनाव: 5 स्नातक और 6 शिक्षक सीटों पर होगा मतदान, 27 अक्टूबर को आएगा MLC चुनाव का रिजल्ट


    उत्तर प्रदेश  । उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक और महत्वपूर्ण चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य की 11 विधान परिषद सीटों के लिए अक्टूबर में चुनाव होना है। इन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी की तैयारियां तेज हो गई हैं। भाजपा पांच सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नाम पहले ही घोषित कर चुकी है जबकि छह सीटों पर उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया जारी है। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी सभी 11 सीटों के लिए अपने प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। विधान परिषद की इन सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होगा जबकि 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के अनुसार विधान परिषद की पांच खंड स्नातक और छह खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव कराया जाएगा। इन निर्वाचन क्षेत्रों से निर्वाचित मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर को पूरा हो रहा है। चुनाव की अधिसूचना 29 सितंबर को जारी होगी और उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर निर्धारित की गई है। इसके बाद 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी।

    जिन 11 सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है उनमें लखनऊ खंड स्नातक से अवनीश कुमार सिंह वाराणसी से आशुतोष सिन्हा आगरा से डॉक्टर मानवेंद्र प्रताप सिंह मेरठ से दिनेश कुमार गोयल और इलाहाबाद झांसी से डॉक्टर मान सिंह यादव शामिल हैं। इनके अलावा शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों से उमेश द्विवेदी लाल बिहारी यादव डॉक्टर आकाश अग्रवाल श्रीचंद शर्मा हरि सिंह ढिल्लों और ध्रुव कुमार त्रिपाठी का कार्यकाल भी समाप्त होने जा रहा है।

    भाजपा ने फिलहाल पांच सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा की है। पार्टी ने लखनऊ सीतापुर स्नातक सीट से अवनीश कुमार सिंह लखनऊ सीतापुर शिक्षक सीट से उमेश द्विवेदी बरेली मुरादाबाद सीट से हरि सिंह ढिल्लों आगरा स्नातक सीट से डॉक्टर मानवेंद्र सिंह और मेरठ सहारनपुर सीट से श्रीचंद शर्मा को फिर मौका दिया है। बाकी छह सीटों पर उम्मीदवारों के नाम सामने आने बाकी हैं। पार्टी स्तर पर इन सीटों को लेकर कई दौर की चर्चा हो चुकी है और संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन जारी है।

    भाजपा को गोरखपुर शिक्षक सीट इलाहाबाद स्नातक सीट वाराणसी शिक्षक और स्नातक सीट आगरा शिक्षक सीट तथा मेरठ स्नातक सीट पर उम्मीदवार घोषित करने हैं। संभावित नामों को लेकर राजनीतिक और शिक्षक संगठनों से जुड़े कई चेहरे चर्चा में हैं। गोरखपुर शिक्षक सीट से ध्रुव कुमार त्रिपाठी और प्रयागराज स्नातक सीट से सुरेश त्रिपाठी के नाम की चर्चा है। वहीं आगरा स्नातक सीट पर पिछले चुनाव में निर्दलीय जीत हासिल करने वाले आकाश अग्रवाल और कर्मचारी नेता हरिकिशोर तिवारी भी दावेदारी से जुड़े बताए जा रहे हैं।

    दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने सभी 11 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। ऐसे में अब दोनों प्रमुख दलों की चुनावी तैयारियां तेज हो गई हैं। विधान परिषद की इन सीटों का चुनाव विधानसभा चुनाव से अलग निर्वाचन प्रक्रिया के तहत होगा और इसमें संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाता मतदान करेंगे।

    चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही प्रदेश के अधिकांश जिलों में आदर्श आचार संहिता के प्रावधान लागू हो गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार कानपुर कानपुर देहात और उन्नाव को छोड़कर उत्तर प्रदेश के बाकी जिलों में विधान परिषद निर्वाचन के संबंध में आचार संहिता के संबंधित प्रावधान प्रभावी हैं। अब 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू होगी और अक्टूबर के अंत तक सभी 11 सीटों पर नए सदस्यों की तस्वीर साफ हो जाएगी।