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  • आसमान से आफत मध्यप्रदेश में ओलावृष्टि से खेत तबाह किसान मुआवजे की राह तकते

    आसमान से आफत मध्यप्रदेश में ओलावृष्टि से खेत तबाह किसान मुआवजे की राह तकते

    मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक करवट बदलते हुए किसानों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है बीती रात कई जिलों में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है खासतौर पर डबरा और रायसेन जिलों में स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है जहां किसानों को अपनी मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है

    डबरा और भितरवार अंचल में अचानक तेज हवा गरज और बेर के आकार के ओलों के साथ हुई बारिश ने खेतों में खड़ी गेहूं सहित रबी सीजन की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है किसानों के अनुसार करीब 50 प्रतिशत तक फसलें बर्बाद हो चुकी हैं तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण फसलें जमीन पर गिर गई हैं जिससे उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा

    गांवों में किसानों की चिंता साफ तौर पर देखी जा सकती है सेकरा जागीर सहित कई क्षेत्रों के किसान अपनी फसलों का नुकसान देख मायूस हैं किसान दीपक आकाश अमर सिंह बृजमोहन सुघर सिंह और लक्ष्मण सिंह जैसे कई कृषक बताते हैं कि अब तक कोई सरकारी अमला सर्वे के लिए नहीं पहुंचा है ऐसे में वे सरकार से मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं यह प्राकृतिक आपदा उनके लिए आर्थिक संकट का कारण बनती जा रही है

    इधर रायसेन जिले के सुल्तानगंज तहसील क्षेत्र में भी मौसम का मिजाज अचानक बिगड़ गया नई गढ़िया गोपई उमरहारी और गुलवाड़ा जैसे गांवों में बारिश के साथ ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है यहां चने और बेर के आकार के ओले गिरने से खेतों में खड़ी गेहूं और चना फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है

    जिस समय किसान फसल की कटाई की तैयारी कर रहे थे उसी दौरान मौसम के इस बदलाव ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया तेज ठंडी हवाएं और काले बादलों ने पूरे इलाके का माहौल बदल दिया और खेतों में खड़ी तैयार फसलें अब बर्बादी की कगार पर पहुंच गई हैं

    बारिश का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहा बल्कि स्थानीय बाजारों पर भी इसका प्रभाव देखने को मिला सुल्तानगंज और बेगमगंज क्षेत्रों में चांद रात को लेकर सजी दुकानों पर भी बारिश ने खलल डाल दिया जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा

    बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों और व्यापारियों दोनों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं अब सभी की नजरें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं कि जल्द सर्वे कराकर नुकसान का आकलन किया जाए और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए ताकि वे इस संकट से उबर सकें

  • Israel ने ईरान के प्रमुख इलाकों में एयर स्ट्राइक की, तेहरान, करज और इस्फहान प्रभावित

    Israel ने ईरान के प्रमुख इलाकों में एयर स्ट्राइक की, तेहरान, करज और इस्फहान प्रभावित

     

    नई दिल्ली। ईरान और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। फार्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, शनिवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान में कम से कम दो धमाकों की आवाज सुनी गई। एयर स्ट्राइक का असर राजधानी के आसपास के इलाकों शहर-ए-रे और कर्ज पर भी पड़ा। साथ ही, दक्षिणी ईरान के ऐतिहासिक शहर इस्फहान में भी एयर स्ट्राइक की खबर है। जल्द ही, इन हमलों में किसी के हताहत होने या संपत्ति को नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने इन हमलों की पुष्टि की और कहा कि यह स्ट्राइक ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक सरकार के ठिकानों को असर बनाने के लिए की गई है।
    IDF ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी कि उनका हमला बेरूत के दक्षिणी उपनगरों के सात इलाकों को खाली करने के नोटिस के साथ जारी है। इन इलाकों में हिजबुल्लाह के इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से हमले होंगे। अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, 2 मार्च से इजरायल के हमलों में लेबनान में 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इस हफ़्ते की शुरुआत में, IDF ने दावा किया कि उसने ईरान के बासिज इंटेलिजेंस चीफ इस्माइल अहमदी और एक अन्य सीनियर अधिकारी को मार गिराया।
    इससे पहले केवल जांच चल रही थी, लेकिन अब इजरायल ने इस बात की पुष्टि कर दी है। IDF ने बताया कि तेहरान के बीचों-बीच बासिज यूनिट के सीनियर कमांडर गुलाम रेजा सुलेमानी सहित कई सीनियर अधिकारियों को भी हवाई हमले में फंसाया गया।

    इजरायली के अनुसार, अहमदी ने इस साल की शुरुआत में ईरान में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इन प्रदर्शनकारियों में हजारों लोगों की मौत हुई, और इजरायल का दावा है कि अहमदी इसमें शामिल था।

    आंकड़ों के अनुसार, इजरायली इन हमलों के माध्यम से ईरानी सत्ता पर अधिकारियों की पकड़ को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। हाल के हमलों में कई बड़े ईरानी अधिकारी मारे गए हैं, जिनमें सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई, सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी और इंटेलिजेंस मंत्री इस्माइल खतीब शामिल हैं।

    ईरानी अधिकारियों के खिलाफ इस तरह के एयर स्ट्राइक यह संकेत देते हैं कि इजरायल अब केवल सीमांत या मध्य पूर्व तक ही सीमित नहीं रहना चाहता है, बल्कि वह ईरान के आंतरिक सुरक्षा आयाम और इंटेलिजेंस नेटवर्क को भी प्रभावित बना रहा है।

    विश्लेषकों का कहना है कि यह कार्रवाई मध्य पूर्व की स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा के आंकड़ों से गंभीर है। यदि तनाव इसी तरह बढ़ता है, तो यह सीधे तौर पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और सैन्य रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है।

    इस बीच, ईरानी मीडिया ने केवल धमाकों की पुष्टि की है लेकिन हमले के प्रभाव और हताहतों की जानकारी साझा नहीं की है। इसका मतलब यह है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अभी भी स्थिति की पूरी संभावनाओं का आकलन कर रहा है।

    संक्षेप में, इजरायल के हमले यह दबाव हैं कि मध्य पूर्व में संघर्ष अब सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि ईरान के मुख्य शहरों और वरिष्ठ अधिकारियों तक फैल चुका है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक राजनीतिक संतुलन पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की 21 किमी गोवर्धन परिक्रमा भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की 21 किमी गोवर्धन परिक्रमा भक्ति और परंपरा का अद्भुत संगम


    नई दिल्ली: द्रौपदी मुर्मू का मथुरा प्रवास गहरी आस्था और भारतीय संस्कृति की झलक के रूप में सामने आया जहां उन्होंने शनिवार को गिरिराज गोवर्धन पर्वत की लगभग 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा पूरी की यह परिक्रमा न केवल धार्मिक महत्व रखती है बल्कि भारतीय परंपरा में श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक भी मानी जाती है राष्ट्रपति ने पूरे मार्ग में भक्तिभाव के साथ यात्रा की और इस दौरान आम श्रद्धालुओं के बीच विशेष उत्साह देखने को मिला

    परिक्रमा के बाद राष्ट्रपति दान घाटी मंदिर पहुंचीं जहां उन्होंने विधिवत पूजा अर्चना की इस दौरान उनके साथ आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहीं मंदिर परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे लेकिन इसके बावजूद वातावरण पूरी तरह श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत रहा

    राष्ट्रपति का यह दौरा तीन दिनों का है जिसमें उन्होंने आध्यात्मिक स्थलों का भ्रमण कर भारतीय संस्कृति की गहराई को अनुभव किया शुक्रवार को वे केली कुंज आश्रम पहुंचीं जहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और उनका सत्संग सुना इस दौरान राष्ट्रपति ने संत से एकांत में संवाद भी किया जिसमें अध्यात्म सेवा और जनकल्याण जैसे विषयों पर चर्चा हुई इस मुलाकात ने उनके प्रवास को और भी विशेष बना दिया राष्ट्रपति ने संत प्रेमानंद के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संत समाज देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है

    इससे पहले गुरुवार को राष्ट्रपति प्रेम मंदिर पहुंचीं जहां उन्होंने राधा कृष्ण के दर्शन कर पूजा अर्चना की मंदिर का भव्य वातावरण और लेजर शो उन्हें बेहद आकर्षक लगा उन्होंने इसकी सराहना भी की मंदिर परिसर में उनकी सुरक्षा को लेकर विशेष प्रबंध किए गए थे राष्ट्रपति ने मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गर्भगृह के सामने पहुंचकर दिव्य युगल विग्रह के दर्शन किए और विधिपूर्वक पूजा संपन्न की

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह मथुरा प्रवास केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा से उनका गहरा जुड़ाव दर्शाता है उनके इस दौरे ने यह संदेश दिया कि देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत आज भी उतनी ही जीवंत और प्रेरणादायक है जितनी सदियों पहले थी
  • ‘धुरंधर 2’ पर सियासी विवाद तेज, बैन की मांग; डायरेक्टर-प्रोड्यूसर पर कार्रवाई की उठी आवाज

    ‘धुरंधर 2’ पर सियासी विवाद तेज, बैन की मांग; डायरेक्टर-प्रोड्यूसर पर कार्रवाई की उठी आवाज


    मुंबई। बॉक्स ऑफिस पर तेजी से आगे बढ़ रही फिल्म धुरंधर 2 अब राजनीतिक विवादों में घिरती नजर आ रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने फिल्म पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने और निर्माताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    अल्वी का कहना है कि फिल्म में माफिया अतीक अहमद की सार्वजनिक हत्या को सही ठहराने का प्रयास किया गया है, जो समाज और न्याय व्यवस्था के लिए गलत संदेश देता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या फिल्मों के जरिए इस तरह की घटनाओं को उचित ठहराना सही है।

    “ऐसी फिल्मों से माहौल खराब होता है”

    राशिद अल्वी ने आरोप लगाया कि इस तरह की फिल्मों से देश का माहौल खराब होता है। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है ऐसी फिल्मों को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन या फंडिंग मिलती हो, हालांकि इस दावे के समर्थन में उन्होंने कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किया।

    उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि अगर फिल्मों के जरिए हत्याओं को जायज ठहराया जाएगा, तो क्या देश में अदालतों की जरूरत ही खत्म हो जाएगी?

    पाकिस्तान-चीन एंगल पर भी सवाल

    कांग्रेस नेता ने फिल्म की कहानी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें केवल पाकिस्तान के खिलाफ माहौल दिखाया गया है, जबकि चीन का जिक्र नहीं किया गया। उनके मुताबिक, यह एकतरफा सोच को दर्शाता है।

    नोटबंदी को लेकर भी उठे सवाल

    अल्वी ने दावा किया कि फिल्म में नोटबंदी जैसे मुद्दे को भी सही ठहराने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि इस तरह के चित्रण से उन लोगों की पीड़ा नजरअंदाज होती है, जो उस फैसले से प्रभावित हुए थे।

    बॉक्स ऑफिस पर मजबूत प्रदर्शन

    विवादों के बीच धुरंधर 2 की कमाई लगातार बढ़ रही है। फिल्म ने रिलीज के शुरुआती दो दिनों में ही 200 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन कर लिया है। इससे पहले इसके पहले भाग धुरंधर ने 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी।

    प्रोपेगैंडा बनाम एंटरटेनमेंट की बहस

    फिल्म को लेकर देश में दो धड़े बनते दिख रहे हैं। एक पक्ष इसे प्रोपेगैंडा करार दे रहा है, जबकि दूसरा इसे मनोरंजन और देशभक्ति से जुड़ी कहानी बता रहा है।

    फिलहाल, धुरंधर 2 पर बैन को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन इस विवाद ने फिल्म को लेकर राजनीतिक बहस जरूर तेज कर दी है।

  • “पत्नी नौकरानी नहीं, बराबर की साथी है” — सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

    “पत्नी नौकरानी नहीं, बराबर की साथी है” — सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी


    नई दिल्ली। वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पति को कड़ी फटकार लगाते हुए साफ कहा कि शादी किसी नौकरानी से नहीं, बल्कि जीवनसाथी से की जाती है। अदालत ने दो टूक कहा कि घर के कामों में पति को भी बराबरी से हाथ बंटाना होगा।

    कोर्ट ने टिप्पणी की कि खाना बनाना, कपड़े धोना या घर संभालना सिर्फ पत्नी की जिम्मेदारी नहीं है। समय बदल चुका है और पति-पत्नी दोनों को मिलकर जिम्मेदारियां निभानी चाहिए।

    तलाक की मांग पर कोर्ट सख्त

    मामले में पति ने ‘क्रूरता’ के आधार पर तलाक की मांग की थी। उसका आरोप था कि पत्नी घर का काम नहीं करती और उसके साथ दुर्व्यवहार करती है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि पत्नी घरेलू काम ठीक से नहीं करती, तो इसे क्रूरता नहीं माना जा सकता।

    अदालत ने कहा कि इस आधार पर तलाक देना उचित नहीं है और पति को अपने नजरिए में बदलाव लाना चाहिए।

    2017 में हुई थी शादी

    दोनों की शादी वर्ष 2017 में हुई थी और उनका एक आठ साल का बेटा भी है। पति का कहना था कि शादी के कुछ ही समय बाद पत्नी का व्यवहार बदल गया और वह उसके माता-पिता के प्रति भी अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करती है।

    हालांकि, कोर्ट ने इस विवाद को सुलझाने के लिए पहले मध्यस्थता (मेडिएशन) का रास्ता सुझाया था, लेकिन दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई। अब मामले की अगली सुनवाई तय की गई है।

    दूसरे मामले में भी दिलचस्प टिप्पणी

    इसी दिन एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक फरार जोड़े की सुरक्षा याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें सीधे राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि वे इसके लिए संबंधित दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करें।

    बताया गया कि यह जोड़ा सोशल मीडिया से प्रभावित होकर इस गलतफहमी में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया था कि वह परिसर में शादी कर सकता है और तुरंत सुरक्षा मिल जाएगी। अदालत ने इस पर अप्रत्यक्ष रूप से नाराजगी जताते हुए उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी।

  • अग्निपथ भर्ती में बड़ा बदलाव: नेपाली गोरखाओं की एंट्री बंद, केवल भारतीय गोरखा ही पात्र

    अग्निपथ भर्ती में बड़ा बदलाव: नेपाली गोरखाओं की एंट्री बंद, केवल भारतीय गोरखा ही पात्र

    आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन जून से शुरू होने वाली भर्ती के लिए जारी नोटिफिकेशन में ‘गोरखा’ की जगह केवल ‘भारतीय गोरखा’ का उल्लेख किया गया है। इससे स्पष्ट है कि अब सिर्फ भारत में रहने वाले गोरखा युवा ही आवेदन कर सकेंगे।

    नेपाल के रुख का असर

    इस बदलाव के पीछे नेपाल का पहले से चला आ रहा विरोध अहम माना जा रहा है। जब अग्निपथ योजना लागू की गई थी, तब नेपाल ने इसे भारत, ब्रिटेन और नेपाल के बीच हुए पुराने त्रिपक्षीय समझौते के खिलाफ बताया था।

    नेपाल के विरोध के बाद वहां स्थित भारतीय सेना के दो भर्ती केंद्र भी बंद हो गए थे, जहां से लंबे समय से गोरखा सैनिकों की भर्ती होती थी। भारत ने कई बार बातचीत के जरिए स्थिति सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।

    सुरक्षा और अवसर भी वजह

    सूत्रों के अनुसार, नेपाल में बढ़ते भारत-विरोधी माहौल और बदलते सुरक्षा परिदृश्य को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इसके अलावा नेपाली गोरखाओं के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निजी सुरक्षा एजेंसियों और विदेशी सेनाओं में काम करने के बेहतर अवसर भी मौजूद हैं।

    बताया जाता है कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी कई गोरखा सैनिकों को रूसी सेना में काम करने के मौके मिले। वहीं, ब्रिटेन की सेना में गोरखाओं की भर्ती पहले से जारी है।

    भारतीय सेना में पहले से बड़ी मौजूदगी

    फिलहाल भारतीय सेना की गोरखा राइफल्स में करीब 30 हजार से अधिक नेपाली गोरखा सैनिक सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा नेपाल में बड़ी संख्या में पूर्व गोरखा सैनिक भी हैं, जिन्हें भारत सरकार हर साल लगभग 500–600 करोड़ रुपये पेंशन के रूप में देती है।

    भारतीय गोरखा युवाओं को फायदा

    इस फैसले से भारत में रह रहे गोरखा युवाओं के लिए सेना में भर्ती के अवसर बढ़ने की संभावना है। अब वे सीमित प्रतिस्पर्धा के बीच ज्यादा मौके हासिल कर सकेंगे।

    कुल मिलाकर, अग्निपथ योजना के तहत यह बदलाव भारत-नेपाल सैन्य सहयोग के लंबे इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

  • गाजियाबाद में ISI जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, 5 नाबालिग समेत 9 और गिरफ्तार; 15 तक पहुंची संख्या

    गाजियाबाद में ISI जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, 5 नाबालिग समेत 9 और गिरफ्तार; 15 तक पहुंची संख्या


    गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा करते हुए पुलिस ने शुक्रवार को 9 और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं। इसके साथ ही इस मामले में अब तक कुल 15 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। नाबालिग आरोपियों को बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया है।

    पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह आईएसआई के इशारे पर देश के सैन्य ठिकानों और संवेदनशील स्थानों की जानकारी पाकिस्तान भेज रहा था। इतना ही नहीं, आरोपियों ने देश के बड़े उद्योगपतियों जैसे गौतम अडानी और मुकेश अंबानी के घरों की लोकेशन और वीडियो भी साझा किए थे।

    नाबालिग भी साजिश में शामिल

    गिरफ्तार नाबालिगों की उम्र 15 से 17 वर्ष के बीच बताई जा रही है।

    इनमें एक 9वीं कक्षा का छात्र भी शामिल है, जो संवेदनशील जगहों की रेकी और कैमरे लगाने के काम में लगा था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 9 मोबाइल फोन और 10 सिम कार्ड बरामद किए हैं।

    जांच में सामने आया है कि आरोपी पाकिस्तानी नंबरों के अलावा मलेशिया और यूके के वर्चुअल नंबर के जरिए अपने हैंडलर्स से संपर्क में थे।

    कई राज्यों से जुड़े साजिश के तार

    पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में मेरठ, कौशांबी और नवी मुंबई से जुड़े लोग शामिल हैं। वहीं, गिरोह के मुख्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। शुरुआती जांच में इस नेटवर्क के तार बिहार और अन्य राज्यों से भी जुड़े पाए गए हैं।

    बड़े आतंकी हमले की थी साजिश

    जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क देश के कई राज्यों—जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश—में सिलसिलेवार हमलों की साजिश रच रहा था। यह साजिश करीब दो साल से चल रही थी और दूसरे चरण में ही आरोपियों को पकड़ लिया गया।

    सूत्रों के मुताबिक, साजिश के तहत 50 से ज्यादा जगहों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले कैमरे लगाने की योजना थी, ताकि संवेदनशील गतिविधियों की निगरानी की जा सके।

    समुद्री रास्तों की भी रेकी

    एक आरोपी ने मुंबई पोर्ट की रेकी कर वहां की फोटो और वीडियो पाकिस्तान भेजे थे। जांच एजेंसियां इसे बेहद गंभीर मान रही हैं, क्योंकि पहले भी 26/11 जैसे आतंकी हमलों में समुद्री रास्ते का इस्तेमाल किया जा चुका है।

    अगला निशाना जालंधर था

    पूछताछ में सामने आया है कि दिल्ली के बाद जालंधर को निशाना बनाने की तैयारी थी। हालांकि, एक आरोपी निजी कारणों से तय समय पर वहां नहीं पहुंच सका, जिससे संभावित बड़ा हमला टल गया।

    फिलहाल, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और आरोपियों पर कड़े कानूनों के तहत कार्रवाई की तैयारी है।

  • 'सच दिखाया तो हो रही तकलीफ', 'धुरंधर 2' के विरोध पर पूर्व DGP एस.पी. वैद का पलटवार

    'सच दिखाया तो हो रही तकलीफ', 'धुरंधर 2' के विरोध पर पूर्व DGP एस.पी. वैद का पलटवार

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.पी. वैद ने फिल्म धुरंधर 2 का खुलकर समर्थन किया है और इसके आलोचकों पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि फिल्म में अतीक अहमद और दाऊद इब्राहिम जैसे गैंगस्टरों को लेकर जो दिखाया गया है, वह कड़वी लेकिन वास्तविक सच्चाई है।

    वैद ने कहा कि अतीक अहमद के पाकिस्तान से संबंध और अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़े मामले किसी से छिपे नहीं हैं। उनके मुताबिक, “अतीक अहमद भले ही सांसद रहा हो, लेकिन वह एक कुख्यात गैंगस्टर था। उसके पास अवैध हथियार कैसे पहुंचते थे और पाकिस्तान से उसके क्या रिश्ते थे, यह जगजाहिर है। फिल्म इसी हकीकत को सामने लाती है।”

    पूर्व डीजीपी ने यह भी आरोप लगाया कि देश में कुछ नेता जाली नोटों के रैकेट में शामिल रहे हैं और पाकिस्तान तक मशीनें पहुंचाने में उनकी भूमिका रही। उन्होंने कहा कि ऐसे हालातों के चलते ही नोटबंदी जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ा था।

    विपक्षी दलों द्वारा फिल्म को “सरकारी प्रोपेगेंडा” बताए जाने पर वैद ने पलटवार करते हुए कहा, “जब तक दाऊद इब्राहिम के पैसे से फिल्में बनती थीं, तब तक किसी को समस्या नहीं थी। अब जब सच्चाई दिखाई जा रही है, तो लोगों को मिर्ची लग रही है।” उन्होंने साफ किया कि इस फिल्म में किसी सरकारी फंड का इस्तेमाल नहीं हुआ है और यह वास्तविक घटनाओं से प्रेरित एक साहसिक प्रयास है।

    फिल्म को लेकर देश में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक तरफ इसे समर्थन मिल रहा है, वहीं कुछ राजनीतिक दल इसे प्रोपेगेंडा करार देकर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, एस.पी. वैद का मानना है कि फिल्म की कहानी वास्तविक तथ्यों के काफी करीब है और इसे उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।

  • MP में बदला मौसम, 72 घंटे से बारिश-ओले का कहर, 42 जिलों में असर, आज 14 जिलों में फिर अलर्ट

    MP में बदला मौसम, 72 घंटे से बारिश-ओले का कहर, 42 जिलों में असर, आज 14 जिलों में फिर अलर्ट


    भोपाल। मध्यप्रदेश में बीते 72 घंटों से मौसम लगातार बिगड़ा हुआ है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ सिस्टम के एक्टिव रहने से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन समेत 42 से अधिक जिलों में बारिश, ओले और तेज आंधी का असर देखने को मिला है।

    शनिवार को भी यह सिस्टम खासतौर पर पूर्वी हिस्से में सक्रिय रहेगा। रीवा और सिंगरौली सहित 14 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। तेज हवाएं (करीब 74 किमी प्रति घंटा) और ओलावृष्टि के कारण कई इलाकों में गेहूं, केला, पपीता और संतरे की फसलों को भारी नुकसान हुआ है।

    मौसम विभाग के अनुसार, 18 मार्च से प्रदेश में मजबूत वेदर सिस्टम सक्रिय है। मौसम विभाग के मुताबिक, तीन ट्रफ और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन की वजह से शुक्रवार को भी मौसम अस्थिर रहा। शनिवार को यह सिस्टम आगे बढ़ेगा और पूर्वी जिलों में असर दिखाएगा।

    पिछले 24 घंटों में 42 जिलों के करीब 112 शहरों और कस्बों में बारिश दर्ज की गई। इनमें इंदौर, धार, खरगोन, बड़वानी, आलीराजपुर, झाबुआ, बुरहानपुर, खंडवा, भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, उज्जैन, सागर, छतरपुर, जबलपुर, छिंदवाड़ा और सिवनी सहित कई जिले शामिल हैं। धार के बदनावर और बैतूल के घोड़ा डोंगरी में सबसे ज्यादा करीब पौन इंच बारिश हुई। वहीं, कई जगहों पर आधा इंच या उससे अधिक वर्षा दर्ज की गई।

    ओलावृष्टि की बात करें तो आलीराजपुर, बड़वानी, विदिशा, बैतूल, झाबुआ, खंडवा, आगर-मालवा, छिंदवाड़ा, जबलपुर, दमोह और सिवनी समेत कई जिलों में ओले गिरे, जिससे खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा।

    बारिश और बादलों के कारण प्रदेशभर में तापमान में गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में अधिकतम तापमान 23.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो एक दिन में 10.6 डिग्री तक गिर गया। यहां दिन और रात के तापमान में सिर्फ 4.7 डिग्री का अंतर रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री दर्ज किया गया।

    खजुराहो में सबसे ज्यादा 10.9 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई, जहां तापमान 38.3 से घटकर 27.4 डिग्री पर पहुंच गया। सतना और ग्वालियर में भी तापमान करीब 10 डिग्री तक गिरा। ग्वालियर, दतिया, सतना, रीवा, खजुराहो, पचमढ़ी, श्योपुर, उमरिया, भोपाल, सीधी और जबलपुर जैसे शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री से नीचे दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग के मुताबिक, मौजूदा सिस्टम 21 मार्च तक सक्रिय रहेगा। इसके बाद 22 मार्च से एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तर-पश्चिम भारत में असर दिखा सकता है, हालांकि इसका प्रभाव कमजोर रहने की संभावना है। वहीं, 26 मार्च को एक और नया सिस्टम सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश में फिर बारिश की स्थिति बन सकती है।

  • बिहार में सत्ता बदलाव के संकेत: BJP को CM पद, JDU के हिस्से दो डिप्टी CM की चर्चा तेज

    बिहार में सत्ता बदलाव के संकेत: BJP को CM पद, JDU के हिस्से दो डिप्टी CM की चर्चा तेज

    नई दिल्ली। बिहार की सियासत में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के बीच नई सत्ता व्यवस्था को लेकर सहमति बनती दिख रही है, जिसमें दोनों दलों की भूमिकाएं बदल सकती हैं।

    अब तक नीतीश कुमार के नेतृत्व में चल रही सरकार में BJP ‘बड़े भाई’ की भूमिका में आ सकती है और मुख्यमंत्री पद उसके खाते में जाने की चर्चा है। वहीं, JDU को दो उपमुख्यमंत्री पद मिलने की संभावना जताई जा रही है।

    जल्‍द हो सकता है सत्ता परिवर्तन
    सूत्रों के अनुसार, इस सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है, जिससे राज्य की राजनीतिक संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार 10 अप्रैल से राज्यसभा सदस्य के रूप में अपना नया कार्यकाल शुरू करेंगे। इससे पहले वे मुख्यमंत्री पद और विधान परिषद की सदस्यता छोड़ सकते हैं। JDU सूत्रों का कहना है कि वे केंद्र सरकार में शामिल होने के बजाय राज्यसभा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

    नई व्यवस्था के तहत मंत्रालयों का बंटवारा भी तय माना जा रहा है। BJP के पास मुख्यमंत्री पद के साथ 15 मंत्री पद होंगे, जबकि JDU को दो डिप्टी CM समेत 16 मंत्री पद मिल सकते हैं। गृह मंत्रालय और विधानसभा अध्यक्ष का पद BJP के पास रहेगा, जबकि विधान परिषद के सभापति का पद JDU को दिए जाने की संभावना है।

    निशांत कुमार की एंट्री
    इस राजनीतिक बदलाव में निशांत कुमार की एंट्री भी अहम मानी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि दूसरे डिप्टी CM के रूप में JDU के किसी वरिष्ठ नेता को जिम्मेदारी दी जाएगी।

    बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार सरकार को मार्गदर्शन देते रहेंगे और पार्टी संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने पर फोकस करेंगे। सहयोगी दलों के लिए भी पुराना फॉर्मूला जारी रहने की संभावना है, जिसमें लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को दो मंत्री पद, जबकि अन्य सहयोगियों को एक-एक पद मिल सकता है।

    नीतीश का सम्राट चौधरी की ओर इशारा
    इसी बीच, हाल ही में जमुई और सहारसा में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वे बिहार को आगे बढ़ाएंगे। इसके बाद राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं कि सम्राट चौधरी को भविष्य के मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि, JDU की ओर से इन अटकलों को खारिज किया गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी ने साफ कहा कि नीतीश कुमार ने किसी को अपना उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया है। इसके बावजूद बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं लगातार तेज बनी हुई हैं।