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  • रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    रिकॉर्ड 863.1 अरब डॉलर के निर्यात में एफटीए बने गेमचेंजर, नए वैश्विक बाजारों तक भारत की पहुंच मजबूत

    नई दिल्ली । भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 863.1 अरब डॉलर का अब तक का सर्वाधिक निर्यात दर्ज कर नया रिकॉर्ड बनाया है। सरकार ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इस उपलब्धि में विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन समझौतों के माध्यम से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिली, शुल्क रियायतों का लाभ बढ़ा और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हुए। सरकार का कहना है कि एफटीए की बदौलत भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत हुई है और निर्यात के नए क्षेत्रों में विस्तार संभव हुआ है।

    लोकसभा में लिखित उत्तर देते हुए वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में वस्तु निर्यात (मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट) 441.8 अरब डॉलर रहा, जबकि सेवा क्षेत्र का निर्यात बढ़कर 421.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दोनों क्षेत्रों के संयुक्त प्रदर्शन से देश का कुल निर्यात 863.1 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। उन्होंने कहा कि सरकार व्यापार समझौतों के तहत मिलने वाली शुल्क रियायतों के उपयोग की लगातार निगरानी कर रही है, ताकि भारतीय निर्यातकों को इनका अधिकतम लाभ मिल सके।

    सरकार के अनुसार भारत-यूएई व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू होने के बाद अब तक 4.45 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय निर्यातकों ने शुल्क रियायतों का व्यापक रूप से उपयोग किया है। यूएई को निर्यात होने वाली एचएस 8-डिजिट टैरिफ लाइनों की संख्या भी वित्त वर्ष 2021-22 के 7,546 से बढ़कर 2025-26 में 8,053 हो गई। इन टैरिफ लाइनों के तहत 37.3 अरब डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो भारतीय उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग का संकेत माना जा रहा है।

    भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग एवं व्यापार समझौते (ईसीटीए) के तहत भी भारतीय निर्यातकों को उल्लेखनीय लाभ मिला है। समझौते के बाद अब तक 2.73 लाख सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए गए हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया को निर्यात होने वाली टैरिफ लाइनों की संख्या बढ़कर 5,668 हो गई है, जिनके माध्यम से 7.2 अरब डॉलर का निर्यात हुआ। इसी प्रकार भारत-मॉरीशस व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौते (सीईसीपीए) के तहत भी टैरिफ लाइनों और निर्यात मूल्य दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे भारतीय उत्पादों की पहुंच नए क्षेत्रों तक विस्तारित हुई है।

    सरकार ने बताया कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत भारत के 99.38 प्रतिशत निर्यात को शुल्क मुक्त पहुंच प्राप्त हुई है। समझौता लागू होने के बाद ओमान को निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिली है। जून 2026 में ओमान को 622.8 मिलियन डॉलर का निर्यात दर्ज किया गया, जो मई 2026 की तुलना में 54.7 प्रतिशत और जून 2025 की तुलना में 189.6 प्रतिशत अधिक रहा। इसके अलावा यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के साथ लागू समझौते के बाद भी हजारों सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी किए जा चुके हैं, जिससे भारतीय निर्यातकों को शुल्क रियायतों का व्यापक लाभ मिला है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में किए गए एफटीए में टेक्सटाइल, चमड़ा और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड और ईएफटीए जैसे साझेदार देशों के साथ हुए समझौतों ने भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजारों के द्वार खोले हैं। सरकार का कहना है कि इन समझौतों में घरेलू उद्योगों के हितों की सुरक्षा के साथ संतुलित रणनीति अपनाई गई है, जिससे निर्यात बढ़ाने के साथ-साथ देश के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को भी नई गति मिली है।

  • इंदौर के सारांश जैन का टीम इंडिया में सपना हुआ साकार पहली बार टेस्ट टीम में मिली जगह श्रीलंका दौरे पर दिखाएंगे दम

    इंदौर के सारांश जैन का टीम इंडिया में सपना हुआ साकार पहली बार टेस्ट टीम में मिली जगह श्रीलंका दौरे पर दिखाएंगे दम


    इंदौर  इंदौर के लिए गर्व का पल सामने आया है। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने 15 अगस्त से श्रीलंका के खिलाफ शुरू होने वाली दो मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया है जिसमें मध्यप्रदेश के होनहार स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को पहली बार भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली है। वर्षों की मेहनत निरंतर प्रदर्शन और धैर्य के बाद आखिरकार सारांश का टीम इंडिया तक पहुंचने का सपना पूरा हो गया है। उनके चयन से न केवल इंदौर बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के क्रिकेट प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

    33 वर्षीय सारांश जैन लंबे समय से घरेलू क्रिकेट में मध्यप्रदेश की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने जाते रहे हैं। उन्होंने रणजी ट्रॉफी और अन्य घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा। हाल ही में श्रीलंका दौरे पर इंडिया ए टीम की ओर से दूसरे चार दिवसीय मुकाबले में उन्होंने नाबाद 70 रन बनाने के साथ छह विकेट लेकर अपनी ऑलराउंड क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। यही प्रदर्शन उनके लिए राष्ट्रीय टीम के दरवाजे खोलने में निर्णायक साबित हुआ।

    प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सारांश का रिकॉर्ड भी बेहद प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 54 प्रथम श्रेणी मुकाबलों में 2223 रन बनाए हैं और 188 विकेट अपने नाम किए हैं। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में लगातार योगदान देने की उनकी क्षमता उन्हें एक उपयोगी ऑलराउंडर बनाती है। यही वजह है कि चयनकर्ताओं ने श्रीलंका दौरे के लिए उन पर भरोसा जताया है।

    सारांश जैन का क्रिकेट सफर इंदौर के विजय क्लब से शुरू हुआ था। इसी मैदान पर उन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं और अपने खेल को निखारा। इसी क्लब में भारतीय बल्लेबाज रजत पाटीदार के साथ भी उन्होंने अभ्यास किया। वर्षों तक घरेलू क्रिकेट में मेहनत करने के बाद अब उन्हें देश की सर्वोच्च क्रिकेट टीम का हिस्सा बनने का अवसर मिला है।

    सारांश के चयन के पीछे उनके परिवार का संघर्ष भी प्रेरणादायक है। उनके पिता सुबोध जैन मध्यप्रदेश की ओर से रणजी ट्रॉफी खेल चुके हैं। उनका सपना भारत के लिए खेलना था लेकिन वह पूरा नहीं हो सका। अब बेटे सारांश के जरिए उनका सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। कठिन परिस्थितियों में भी पिता ने बेटे का मनोबल कभी टूटने नहीं दिया। वहीं बड़े भाई ने अपना क्रिकेट करियर छोड़कर सारांश के सपनों को पूरा करने में पूरा सहयोग दिया।

    भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में खेला जाएगा जबकि दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो के एसएससी मैदान पर होगा। इस दौरे पर सारांश के पास टेस्ट कैप हासिल कर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने करियर की शानदार शुरुआत करने का सुनहरा अवसर होगा।

    भारतीय टीम की कप्तानी शुभमन गिल करेंगे जबकि केएल राहुल उपकप्तान होंगे। बल्लेबाजी में यशस्वी जायसवाल ऋषभ पंत देवदत्त पडिक्कल और साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं। वहीं स्पिन विभाग में रविंद्र जडेजा कुलदीप यादव मानव सुथार और सारांश जैन पर बड़ी जिम्मेदारी रहेगी। यदि उन्हें अंतिम एकादश में मौका मिलता है तो यह उनके करियर का सबसे यादगार क्षण होगा और भारतीय क्रिकेट में एक नई शुरुआत भी।

  • लोकसभा में परीक्षा संशोधन विधेयक पर गरजे गौरव गोगोई, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से मांगा जवाब

    लोकसभा में परीक्षा संशोधन विधेयक पर गरजे गौरव गोगोई, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से मांगा जवाब

    नई दिल्ली । लोकसभा में ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरते हुए परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक मामलों और हालिया छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को केवल कानून में संशोधन करने के बजाय शिक्षा व्यवस्था की मूल समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही उन्होंने गृह मंत्री से सदन में उपस्थित होकर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के संबंध में जवाब देने की मांग की।

    विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए गौरव गोगोई ने दावा किया कि वर्ष 2024 में लागू किया गया कानून अपने उद्देश्य को पूरा करने में सफल नहीं रहा। उनका कहना था कि उस समय सरकार ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया था और पेपर लीक की घटनाओं पर रोक लगाने का दावा किया था, लेकिन बाद में सामने आए मामलों ने उन दावों पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नया संशोधन विधेयक भी उसी दिशा में एक औपचारिक कदम बनकर रह जाएगा और इससे मूल समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए केवल दंडात्मक प्रावधानों को कड़ा करना पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, यदि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया गया तो कानून में बदलाव का अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं देगा। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।

    गोगोई ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) से जुड़े पेपर लीक प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था और अनेक आरोपियों को जमानत भी मिल चुकी है। उन्होंने इसे उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने में प्रभावी साबित नहीं हुई। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि संस्था में सुधार की आवश्यकता महसूस की गई और उसके शीर्ष अधिकारियों में बदलाव किए गए, तो अन्य जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से एनटीए से जुड़े प्रशासनिक निर्णयों पर स्पष्टीकरण देने की मांग की।

    चर्चा के दौरान गौरव गोगोई ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा अपने भविष्य और परीक्षा प्रणाली को लेकर चिंता व्यक्त करने के लिए सड़कों पर उतरे थे। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

    कांग्रेस सांसद ने हालिया प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गृह मंत्री को सदन में आकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग के निर्णय किस स्तर पर लिए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों पर की गई कार्रवाई को लेकर सरकार को विस्तृत जानकारी संसद के समक्ष रखनी चाहिए, ताकि पूरे घटनाक्रम पर पारदर्शिता बनी रहे।

    इसके अलावा गोगोई ने असम में बाढ़ की स्थिति का भी उल्लेख किया और प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष सहायता पैकेज की मांग की। उनका कहना था कि शिक्षा, युवाओं और प्राकृतिक आपदाओं जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेने चाहिए। अब परीक्षा संशोधन विधेयक पर आगे की संसदीय चर्चा और सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर राजनीतिक दलों और छात्रों की निगाहें टिकी हुई हैं।

  • प्रदर्शनकारियों पर कंगना रनौत का तीखा हमला, बोलीं- "हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, अब रोने की जरूरत नहीं"

    प्रदर्शनकारियों पर कंगना रनौत का तीखा हमला, बोलीं- "हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है, अब रोने की जरूरत नहीं"

    नई दिल्ली। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुर्खियों में हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में अपनी बात रखने वाले लोगों को आलोचना और प्रतिक्रिया का सामना करने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। इंस्टाग्राम स्टोरी पर साझा किए गए अपने संदेश में कंगना ने प्रदर्शनकारियों के व्यवहार, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अभद्र भाषा के इस्तेमाल को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

    कंगना रनौत ने अपनी पोस्ट में लिखा कि सड़कों पर जिन प्रदर्शनकारियों को आम लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, उसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर उनकी अभद्र और आपत्तिजनक सामग्री के कारण जनता में नाराजगी बढ़ी है। कंगना ने कहा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखता है, तो उसे दूसरों की प्रतिक्रिया सुनने के लिए भी तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने आगे लिखा कि यदि कोई सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है, तो जनता भी उसके प्रति नाराजगी व्यक्त कर सकती है। कंगना के अनुसार यदि किसी को सरकार या देश की नीतियों से असहमति है और वह सार्वजनिक मंचों पर अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता है, तो उन लोगों को भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है जो देश और सरकार का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी राय रखने का समान अधिकार है।

    अपनी पोस्ट में कंगना ने न्यूटन के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए लिखा कि हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। उन्होंने कहा कि यदि अब तक लोग कारण और प्रभाव के सिद्धांत को नहीं समझ पाए हैं, तो मौजूदा परिस्थितियां उन्हें यह बात अच्छी तरह समझा देंगी। उनके इस बयान को सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिल रही है और समर्थक व आलोचक दोनों अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

    दरअसल, हाल के दिनों में छात्र आंदोलन और उससे जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं। इन्हीं घटनाओं के संदर्भ में कंगना लगातार अपनी प्रतिक्रिया देती रही हैं। इससे पहले भी उन्होंने प्रदर्शनकारियों की भाषा और विरोध के तरीके पर सवाल उठाते हुए कई पोस्ट साझा किए थे। उन्होंने कुछ वायरल वीडियो का उल्लेख करते हुए प्रदर्शनकारियों की भाषा और व्यवहार की आलोचना की थी।

    कंगना ने इससे पहले एक अन्य पोस्ट में प्रदर्शनकारी युवाओं को लेकर कड़ी टिप्पणी करते हुए लिखा था कि उन्होंने एक साथ इतनी अभद्रता पहले कभी नहीं देखी। उन्होंने कुछ वीडियो को परेशान करने वाला बताते हुए युवाओं की भाषा, व्यवहार और परवरिश पर भी सवाल उठाए थे। उनके इन बयानों ने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस को जन्म दिया था और विभिन्न वर्गों की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

    भाजपा सांसद होने के साथ-साथ कंगना रनौत सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए जानी जाती हैं। उनके कई बयान पहले भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुके हैं। इस बार भी उनका ताजा बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। हालांकि, इस मुद्दे पर प्रदर्शनकारियों या संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

  • भारत-चीन रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शीर्ष चीनी अधिकारियों से की कई महत्वपूर्ण बैठकें

    भारत-चीन रिश्तों को नई दिशा देने की कोशिश, विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शीर्ष चीनी अधिकारियों से की कई महत्वपूर्ण बैठकें

    नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई गति देने के उद्देश्य से विदेश सचिव विक्रम मिस्री इन दिनों चीन की आधिकारिक यात्रा पर हैं। यात्रा के दौरान उन्होंने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सेंट्रल पार्टी स्कूल (नेशनल एकेडमी ऑफ गवर्नेंस) के उपाध्यक्ष ली वेनतांग सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों से महत्वपूर्ण मुलाकातें कीं। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने, शैक्षणिक आदान-प्रदान, राजनीतिक संवाद, आर्थिक संबंधों और सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    भारतीय दूतावास की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मंगलवार को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सेंट्रल पार्टी स्कूल के उपाध्यक्ष ली वेनतांग से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें संस्थान के ऐतिहासिक महत्व, बौद्धिक योगदान और विभिन्न शैक्षणिक कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। दोनों पक्षों ने भविष्य में अकादमिक सहयोग, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और संस्थागत आदान-प्रदान की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया। इस बैठक को दोनों देशों के बीच ज्ञान, प्रशासनिक अनुभव और संस्थागत सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इससे पहले विदेश सचिव ने चीन की विदेश उप मंत्री हुआ चुनयिंग के साथ भी विस्तृत वार्ता की। दोनों पक्षों ने भारत-चीन संबंधों के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करते हुए इस बात पर सहमति जताई कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। बैठक में दोनों देशों के नेताओं की उस साझा सोच को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत भारत और चीन को एक-दूसरे के विकास में सहयोगी और साझेदार के रूप में देखा गया है।

    वार्ता के दौरान व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया गया। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि पारस्परिक हितों के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया जा सकता है। साथ ही संवाद और आपसी विश्वास को बढ़ाने के लिए नियमित संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता पर भी सहमति व्यक्त की गई।

    सोमवार को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने चीन की 14वीं राष्ट्रीय जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (सीपीपीसीसी) की समिति के उप महासचिव होंग लियांग से भी मुलाकात की। इस बैठक में राजनीतिक स्तर पर संवाद को मजबूत करने और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के विभिन्न उपायों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने माना कि जनसंपर्क, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से आपसी समझ और विश्वास को और बेहतर बनाया जा सकता है।

    चीन यात्रा के पहले दिन विदेश सचिव ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उप मंत्री सन हैयान से भी मुलाकात की। इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने, राजनीतिक संवाद को आगे बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसरों पर विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों के बीच हुई इन लगातार बैठकों को भारत और चीन के बीच संवाद प्रक्रिया को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के समय में दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिशें क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और आपसी विश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। विदेश सचिव विक्रम मिस्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संपर्क बनाए रखने, मतभेदों को बातचीत के माध्यम से सुलझाने और सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल मानी जा रही है।

  • राफेल सौदे पर तकनीकी अड़चनें बरकरार, सोर्स कोड और रडार तकनीक साझा करने पर फ्रांस अब भी सतर्क

    राफेल सौदे पर तकनीकी अड़चनें बरकरार, सोर्स कोड और रडार तकनीक साझा करने पर फ्रांस अब भी सतर्क

    नई दिल्ली । भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत होता रहा है, लेकिन राफेल लड़ाकू विमान से जुड़ी उन्नत तकनीकों के हस्तांतरण का मुद्दा अब भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। भारतीय वायुसेना के लिए 114 बहुउद्देश्यीय राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित खरीद को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है, हालांकि विमान के सोर्स कोड और रडार से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों के विषय पर सहमति बनने में अभी समय लग सकता है।

    भारत लंबे समय से ऐसी तकनीकी पहुंच चाहता है, जिससे भविष्य में राफेल विमानों में स्वदेशी हथियारों और नई प्रणालियों का एकीकरण स्वतंत्र रूप से किया जा सके। इसी उद्देश्य से रक्षा मंत्रालय विमान के इंटरफेस डेटा और आवश्यक तकनीकी जानकारी प्राप्त करने पर जोर दे रहा है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को घरेलू तकनीक के साथ राफेल प्लेटफॉर्म को बेहतर ढंग से अनुकूलित करने में मदद मिल सकती है।

    जानकारी के अनुसार, भारत ने इस वर्ष मई में 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए औपचारिक अनुरोध भेजा था। अब फ्रांस की ओर से उसके जवाब का इंतजार किया जा रहा है। जवाब मिलने के बाद दोनों पक्ष कीमत, तकनीकी सहयोग, उत्पादन व्यवस्था और अन्य व्यावसायिक शर्तों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। प्रस्तावित समझौते में देश के भीतर बड़े पैमाने पर विनिर्माण को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे रक्षा उत्पादन क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके।

    बताया जा रहा है कि प्रस्तावित परियोजना में अधिकांश निर्माण कार्य भारत में ही किए जाने की योजना है। इसके तहत स्थानीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। यह पहल रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को गति देने और आधुनिक तकनीक के साथ भारतीय उद्योग को जोड़ने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

    हालांकि तकनीकी स्तर पर दो प्रमुख चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। पहली चुनौती राफेल में इस्तेमाल होने वाले अत्याधुनिक एईएसए रडार से जुड़े बौद्धिक संपदा अधिकारों की है। इन अधिकारों के कारण भारत को रडार प्रणाली में स्वतंत्र बदलाव या नई क्षमताओं के समावेश में सीमाएं आ सकती हैं। दूसरी और अधिक महत्वपूर्ण चुनौती विमान के सोर्स कोड तक पहुंच की है, जिसे फ्रांस अत्यंत संवेदनशील रणनीतिक तकनीक मानता है।

    राफेल का सोर्स कोड विमान के मिशन कंप्यूटर, सेंसर फ्यूजन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और कई महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों का आधार माना जाता है। यही कारण है कि इस तकनीक को फ्रांस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण संपत्ति के रूप में देखता है और इसके पूर्ण हस्तांतरण को लेकर सावधानी बरत रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्तर की तकनीक साझा करने का निर्णय केवल व्यावसायिक नहीं बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा संबंधी पहलुओं से भी जुड़ा होता है।

    भारत के लिए यह मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में अस्त्र जैसी स्वदेशी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, रुद्रम जैसी एंटी-रेडिएशन मिसाइलों तथा अन्य घरेलू हथियार प्रणालियों को राफेल में आसानी से एकीकृत करने की आवश्यकता होगी। यदि आवश्यक तकनीकी पहुंच उपलब्ध नहीं होती है तो प्रत्येक बड़े उन्नयन या एकीकरण के लिए मूल निर्माता पर निर्भरता बनी रह सकती है।

    रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को देखते हुए बातचीत आगे बढ़ने की संभावना बनी हुई है। आने वाले दौर की वार्ताओं में तकनीकी सहयोग, उत्पादन साझेदारी और संचालन संबंधी आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती रहेगा। यदि इन मुद्दों पर सहमति बनती है तो यह समझौता भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी नई दिशा दे सकता है।

  • वैवाहिक जीवन की शुरुआत से पहले पार्टनर की इन आदतों पर जरूर करें गौर, विशेषज्ञ ने बताए अहम संकेत

    वैवाहिक जीवन की शुरुआत से पहले पार्टनर की इन आदतों पर जरूर करें गौर, विशेषज्ञ ने बताए अहम संकेत

    नई दिल्ली । शादी केवल दो लोगों का साथ नहीं, बल्कि विश्वास, जिम्मेदारी और आपसी समझ पर आधारित एक दीर्घकालिक रिश्ता होता है। ऐसे में विवाह से पहले केवल व्यक्तित्व, करियर या पारिवारिक पृष्ठभूमि पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं माना जाता। रिश्ते की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि दोनों साथी कठिन परिस्थितियों में किस तरह व्यवहार करते हैं और मतभेदों को किस तरह संभालते हैं। इसी संदर्भ में एक अनुभवी तलाक वकील ने शादी से पहले कुछ महत्वपूर्ण व्यवहारिक संकेतों पर ध्यान देने की सलाह दी है।

    न्यूयॉर्क के तलाक मामलों के विशेषज्ञ जेम्स जे. सेक्सटन का कहना है कि लंबे समय तक वैवाहिक विवादों को देखने के उनके अनुभव में कुछ ऐसे संकेत हैं, जिन्हें शुरुआती दौर में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि रिश्ते की शुरुआत में भावनात्मक लगाव के कारण कई लोग अपने साथी की कुछ गंभीर आदतों को सामान्य समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यही बातें आगे चलकर रिश्ते में तनाव का कारण बन सकती हैं।

    उन्होंने पहला महत्वपूर्ण संकेत किसी भी प्रकार की नशे की लत को बताया है। उनके अनुसार यदि कोई व्यक्ति शराब, मादक पदार्थों या अन्य किसी नशे का नियमित आदी है, तो इसे केवल एक सामान्य आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई मामलों में ऐसी आदतें मानसिक तनाव, भावनात्मक चुनौतियों या अन्य व्यक्तिगत समस्याओं से जुड़ी हो सकती हैं। यदि समय रहते इन पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो वैवाहिक जीवन में जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ यह स्थिति और जटिल हो सकती है।

    विशेषज्ञ का मानना है कि नशे की गंभीर आदत का प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर परिवार, आर्थिक स्थिरता, आपसी विश्वास और मानसिक शांति पर भी पड़ सकता है। इसलिए विवाह से पहले इस विषय पर खुलकर बातचीत करना और स्थिति को समझना आवश्यक माना जाता है।

    उन्होंने दूसरा महत्वपूर्ण संकेत गलती स्वीकार करने और माफी मांगने के तरीके को बताया है। उनके अनुसार किसी भी रिश्ते में मतभेद होना सामान्य बात है, लेकिन यह अधिक महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति अपनी गलती होने पर कैसी प्रतिक्रिया देता है। यदि कोई व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय हर बार सामने वाले को ही दोषी ठहराता है या केवल औपचारिक रूप से माफी मांगता है, तो यह भविष्य में रिश्ते के लिए चुनौती बन सकता है।

    जेम्स जे. सेक्सटन के अनुसार वास्तविक माफी वही होती है, जिसमें व्यक्ति अपनी गलती को स्पष्ट रूप से स्वीकार करे, उससे हुए नुकसान को समझे और भविष्य में उस व्यवहार को दोहराने से बचने की प्रतिबद्धता भी दिखाए। इसके विपरीत यदि कोई केवल यह कहे कि “तुम्हें बुरा लगा, इसका दुख है” या पूरी जिम्मेदारी दूसरे व्यक्ति पर डाल दे, तो इससे रिश्ते में भरोसा धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सफल वैवाहिक जीवन केवल प्रेम या आकर्षण पर नहीं, बल्कि ईमानदार संवाद, जिम्मेदारी और आपसी सम्मान पर आधारित होता है। यही कारण है कि शादी से पहले पार्टनर के व्यवहार, निर्णय लेने के तरीके और कठिन परिस्थितियों में उसके रवैये को समझना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए यह आवश्यक है कि दोनों साथी खुलकर बातचीत करें, एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करें और किसी भी समस्या का समाधान मिलकर खोजने का प्रयास करें। विशेषज्ञों के अनुसार यदि रिश्ते की शुरुआत में ही इन व्यवहारिक पहलुओं पर ध्यान दिया जाए, तो वैवाहिक जीवन अधिक संतुलित, भरोसेमंद और दीर्घकालिक बन सकता है।

  • बेकिंग सोडा और नींबू से मिनटों में साफ करें गैस स्टोव, जले निशान होंगे आसानी से दूर..

    बेकिंग सोडा और नींबू से मिनटों में साफ करें गैस स्टोव, जले निशान होंगे आसानी से दूर..

    नई दिल्ली । रसोई में चाय या दूध बनाते समय कई बार थोड़ी सी लापरवाही के कारण बर्तन से दूध या चाय उबलकर गैस स्टोव पर गिर जाती है। गर्म सतह पर गिरते ही यह जलकर चिपक जाती है और कुछ ही देर में जिद्दी दाग का रूप ले लेती है। सामान्य साबुन और पानी से कई बार ये निशान पूरी तरह साफ नहीं होते, जिससे गैस स्टोव की चमक भी प्रभावित होने लगती है। ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इन दागों को बिना अधिक मेहनत और बिना सतह को नुकसान पहुंचाए साफ किया जा सकता है।

    गैस स्टोव की सफाई शुरू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि स्टोव पूरी तरह ठंडा हो चुका हो। गर्म सतह पर सफाई करने से दुर्घटना की संभावना रहती है और सफाई भी प्रभावी नहीं होती। स्टोव ठंडा होने के बाद जले हुए हिस्से पर थोड़ा पानी छिड़कें और उस पर बेकिंग सोडा डाल दें। कुछ मिनट तक इसे ऐसे ही छोड़ने के बाद मुलायम स्पंज से हल्के हाथों से रगड़ें। इससे जमी हुई परत ढीली होने लगती है और दाग आसानी से हटने लगते हैं।

    यदि दूध या चाय का दाग काफी पुराना और जिद्दी हो गया है तो बेकिंग सोडा का गाढ़ा पेस्ट अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। इसके लिए बेकिंग सोडा में थोड़ा गर्म पानी या नींबू का रस मिलाकर पेस्ट तैयार करें और इसे दाग वाले हिस्से पर 15 से 20 मिनट तक लगा रहने दें। इसके बाद मुलायम ब्रश या स्पंज से धीरे-धीरे सफाई करें। इस प्रक्रिया से जली हुई परत नरम हो जाती है और बिना ज्यादा दबाव लगाए हटाई जा सकती है।

    अक्सर दूध या चाय बर्नर के आसपास और छोटे-छोटे कोनों में भी जम जाती है, जहां सामान्य स्पंज आसानी से नहीं पहुंच पाता। ऐसी जगहों की सफाई के लिए पुराने टूथब्रश का उपयोग किया जा सकता है। टूथब्रश के मुलायम ब्रिसल्स संकरी जगहों तक पहुंचकर जमा गंदगी को धीरे-धीरे हटाने में मदद करते हैं। सफाई करते समय ध्यान रखें कि गैस का बर्नर पूरी तरह बंद हो और उसमें अतिरिक्त पानी न जाए।

    हल्के दागों के लिए नींबू और बेकिंग सोडा का मिश्रण भी उपयोगी माना जाता है। बेकिंग सोडा छिड़कने के बाद उस पर नींबू का रस डालने से हल्की रासायनिक प्रतिक्रिया होती है, जो जमी हुई गंदगी को ढीला करने में सहायता करती है। कुछ मिनट बाद मुलायम कपड़े या स्पंज से पोंछने पर सतह साफ दिखाई देने लगती है। यदि गैस स्टोव ग्लास टॉप का है तो पहले इस उपाय को किसी छोटे हिस्से पर आजमाना बेहतर रहेगा।

    यदि घरेलू उपाय अपनाने के बाद भी दाग पूरी तरह साफ न हों, तो गैस स्टोव या कुकटॉप के लिए बने विशेष क्लीनर का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, किसी भी क्लीनर का उपयोग करने से पहले उसके निर्देशों को ध्यान से पढ़ना चाहिए, क्योंकि अलग-अलग सतहों के लिए अलग प्रकार के उत्पाद बनाए जाते हैं। गलत क्लीनर या कठोर स्क्रबर का उपयोग करने से स्टोव की सतह खराब हो सकती है।

    सफाई के दौरान चाकू, ब्लेड या किसी नुकीली वस्तु से दाग खुरचने से बचना चाहिए। इससे स्टेनलेस स्टील या ग्लास टॉप पर स्थायी खरोंच पड़ सकती है। सबसे अच्छा तरीका यही है कि दूध या चाय गिरने के बाद गैस ठंडी होते ही तुरंत सफाई कर दी जाए। समय पर सफाई करने से दाग जिद्दी नहीं बनते और गैस स्टोव लंबे समय तक साफ, चमकदार और सुरक्षित बना रहता है।

  • कैबिनेट: मप्र के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 2 हजार 480 करोड़ स्वीकृति

    कैबिनेट: मप्र के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए 2 हजार 480 करोड़ स्वीकृति


    भोपाल । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के सर्वांगीण विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार और जनकल्याण को गति देने के लिए लगभग 2 हजार 480 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति दी गई। बैठक में खेल गतिविधियों, सिंचाई, महिला सशक्तिकरण, सूचना प्रौद्योगिकी और किसान कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों पर मुहर लगाई गई।

    प्रमुख निर्णयों में अक्टूबर 2026 में भोपाल में ‘महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी’ के भव्य आयोजन के लिए 18 करोड़ 74 लाख रुपये की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई, जिससे राज्य की खेल अवसंरचना और पर्यटन को वैश्विक पहचान मिलेगी। कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए रिहन्द एवं मल्हारगढ़ सिंचाई परियोजनाओं और किसानों को समर्थन मूल्य पर बोनस भुगतान योजना की निरंतरता को मंजूरी मिली। प्रदेश को तकनीकी रूप से अग्रणी बनाने के उद्देश्य से आईआईएसईआर (IISER) भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी आधारित ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ और आईटी पार्कों के विकास के लिए 857 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। इन निर्णय में आई टी पार्क की स्थापना के वर्ष 2031 तक संचालन की निरंतरता की स्वीकृति महत्वपूर्ण है ,इसके तहत करीब 8000 युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण के लिए 198 करोड़ रुपये, कर्मचारी कल्याण एवं पेंशन योजनाओं के लिए 982 करोड़ रुपये और ग्वालियर में विद्युत सुरक्षा के निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय और नारायणगढ़ में 9 नए न्यायिक पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

    महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 के भोपाल में आयोजन के लिए 18 करोड़ 74 लाख रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने माह अक्टूबर 2026 में महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 के भोपाल के बरखेड़ा नाथू में स्थित अन्तर्राष्ट्रीय स्पोटर्स कॉम्पलेक्स में आयोजन के लिए संभावित व्यय राशि 18 करोड़ 74 लाख रूपये के व्यय की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है।

    हॉकी इण्डिया को अन्तर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ द्वारा देश में हॉकी खेल का संचालन, प्रोत्साहन और अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय हॉकी प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए अधिकृत किया गया है। प्रतियोगिता वर्ष 2010 से निरन्तर 2 वर्ष के अन्तराल में आयोजित की जा रही है। इस प्रतियोगिता को आयोजित करने का मुख्य उद्‌द्देश्य एशियाई महिला हॉकी टीमों की प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना है। महिला एशियन हॉकी चैम्पियन्स ट्रॉफी 2026 में एशिया की प्रमुख 6 महिला टीमों (भारत, चीन, जापान, मलेशिया, साउथ कोरिया, एवं थाईलैण्ड) के लगभग 200 खिलाडी व सपोर्ट स्टॉफ के सम्मिलित होने की संभावना है।

    यह अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता हॉकी इण्डिया और खेल और युवा कल्याण विभाग ‌द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की जायेगी। अनुबंध अनुसार हॉकी इण्डिया को खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा ‘पेजेंटिंग पार्टनर’ राईटस के लिए 11 करोड़ रूपये दिये जाएंगे। अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए विभाग दवारा 7 करोड़ 74 लाख रूपये का व्यय किया जायेगा। इस प्रकार आयोजन पर लगभग 18 करोड़ 74 लाख रूपये का व्यय होना संभावित है।

    भोपाल के बरखेड़ा नाथू में अन्तर्राष्ट्रीय स्पोटर्स कॉम्पलेक्स को नवीन एवं आधुनिक तकनीकों के अनुरूप अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए तैयार किया गया है। एशिया स्तर की अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता के आयोजन से वैश्विक स्तर पर मध्यप्रदेश में निर्मित खेल अधोसरंचना का प्रचार प्रसार होगा। इससे प्रदेश के हॉकी खिलाड़ियों के मनोबल में वृ‌द्धि होगी और एशिया के प्रमुख देशों से सम्मिलित हुई टीमों के खिलाड़ियों के भोपाल आगमन से प्रदेश में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

    रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना के संचालन के लिए 111 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने सिंगरौली की रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना को सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 111 करोड़ 4 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। रिहन्द माइक्रो सिंचाई परियोजना का मुख्य उद्देश्य गोविन्द वल्लभ पंत सागर रिजर्वायर (रिहन्द नदी पर स्थित) से संचित जल का उद्वहन कर सिंगरौली, माड़ा, वैढन और जावद तहसील के 119 गांवों में 38,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से सिंचाई के लिए जल प्रदान करना है।

    मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना के संचालन के लिए 184 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मंदसौर की मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 184 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। मल्हारगढ़ दाबयुक्त वृहद उद्वहन सिंचाई परियोजना लिफ्ट सिंचाई परियोजना है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मंदसौर जिले की 46,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करना है।

    ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना सहित विभिन्न योजनाओं के लिए 857 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने आईसर में ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना के लिए 85 करोड़ 51 लाख रूपये सहित विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग की विभिन्न योजनाओं के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 857 करोड़ 21 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की है।

    आई टी पार्क स्थापना की निरंतरता को मंजूरी: 8000 को मिलेगा रोजगार

    प्रदेश में आईटी पार्क की स्थापना’ संबंधी योजना के लिए 595 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना अंतर्गत प्रदेश में इन्दौर, भोपाल, जबलपुर एवं ग्वालियर में आई.टी. पार्को की स्थापना की गयी है। आई.टी. पार्क एवं आई.टी. टावर्स की स्थापना से प्रदेश में आधुनिक तकनीकी अधोसंरचना का विकास होगा जिससे देश-विदेश के निवेशकों को आकर्षित कर निवेश एवं औ‌द्योगिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा। परिणामस्वरुप प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के व्यापक अवसर सृजित होंगे तथा 8000 से अधिक स्थानीय युवाओं को कौशल आधारित रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उल्लेखनीय है कि अब तक लगभग 22000 युवाओ को रोजगार प्राप्त हो चुका है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के अंतर्गत संपादित एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से आई.टी. एवं ई.एस.डी.एम. क्षेत्र का विस्तार होगा जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था सुदृढ होगी। डिजिटल एवं तकनीकी दक्षता में वृद्धि होगी तथा मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उभरते तकनीकी एवं निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित होगा।

    मंत्रि-परिषद ने भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल में ड्रोन टेक्नोलॉजी पर आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) की स्थापना के लिए कुल लागत 85 करोड़ 51 लाख रूपये में से 17 करोड़ 90 लाख रूपये को आगामी तीन वर्षों तक प्रदाय किए जाने की स्वीकृति दी है। यह एक उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D) आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में कार्य करेगा, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन सिमुलेशन, डिजिटल ट्विन प्रौ‌द्योगिकी, UAV डिजाइन एवं निर्माण, स्वायत्त प्रणालियों तथा उन्नत अनुप्रयोगों पर अनुसंधान एवं नवाचार को बढावा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त केंद्र में स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (PoC), प्रोटोटाइप विकास एवं परीक्षण जैसी सुविधाएँ विकसित की जाएंगी, जिससे राज्य में ड्रोन प्रौ‌द्योगिकी का एक समग्र एवं आत्मनिर्भर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सकेगा।

    ‘नई तकनीक के लिए एम.पी.एस.ई.डी.सी. एवं अन्य संस्थाओं को सहायता’ योजना के लिए 110 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य शासन एवं उसके विभिन्न विभागों को नवीनतम सूचना प्रौ‌द्योगिकी एवं डिजिटल समाधान उपलब्ध कराकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को अधिक दक्ष, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना एवं नागरिकों को त्वरित, सरल और सुरक्षित ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करना है। इसमें AI/ML आधारित बिजनेस इंटेलिजेंस, व्हाट्‌सऐप चैटवॉट, ड्रोन सेवाएं, एसएमएस गेटवे, MP CODE, ई-साइन, राज्य ई-मेल नीति, लो-कोड/नो-कोड प्लेटफॉर्म और सिक्योरिटी ऑडिट लैब जैसी प्रमुख गतिविधियां शामिल हैं।

    ‘मध्यप्रदेश स्टेट स्पाटियल डेटा इन्फ्रास्ट्रक्चर (एम.पी. एस एस डी आई)’ योजना के लिए 40 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। योजना के उद्देश्य राज्य में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) तकनीक का उपयोग कर एकीकृत स्थानिक डाटा (Spatial Data) का निर्माण, संधारण एवं अद्‌यतन करते हुए विभिन्न विभागों, एजेसियों तथा योजनाओं को अद्‌यतन, विश्वसनीय एवं सुगम जीआइएस आधारित सेवाएँ उपलब्ध कराना है। इससे आपदा प्रबंधन, जल आपूर्ति, भूमि प्रबंधन, शहरी विकास एवं सड़क मरम्मत जैसे क्षेत्रों में रियल टाइम मॉनिटरिंग और निर्णय क्षमता में वृद्धि हुई है।

    इसी तरह ‘क्लाउड सेवाओं का प्रदाय व प्रबंधन’ के लिए 26 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। इसका उद्देश्य डिजिटल मध्यप्रदेश की परिकल्पना को साकार करने और शासन की सभी सेवाओं में डिजिटल परिवर्तन (डिटिटल ट्रांसफार्मेशन) को गति देना है। इस योजना के अंतर्गत, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPSEDC) ‌द्वारा तैयार क्लाउड अंगीकरण रूपरेखा (Cloud Adoption Framework) के आधार पर सभी शासकीय एवं अर्ध-शासकीय विभागों को सुरक्षित, लचीली, स्केलेवल एवं किफायती क्लाउड सेवाएं प्रदान की जा रही है। इसके माध्यम से शासन को अपने आईटी संसाधनों के निर्माण और रखरखाव पर भारी पूंजीगत निवेश की आवश्यकता नहीं होती है। आवश्यकतानुसार कम्प्यूटिंग संसाधन, स्टोरेज, नेटवर्किंग तथा सॉफ्टवेयर सेवाएँ क्लाउड प्लेटफॉर्म से प्राप्त कर सकते है।

    ग्वालियर में वि‌द्युत सुरक्षा निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय की स्थापना की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने ग्वालियर में वि‌द्युत सुरक्षा निरीक्षकालय के नवीन वृत्त कार्यालय और 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। सृजन संबंधी कार्यवाही के लिए ऊर्जा विभाग को अधिकृत किया गया है। उल्लेखनीय है कि सभी बड़े राजस्व संभागों (सागर, शहडोल, नर्मदापुरम को छोडकर) में विद्युत निरीक्षकालय के वृत्त कार्यालय स्थापित है। वर्तमान में ग्वालियर एवं चंबल संभाग के विद्युत सुरक्षा और राजस्व संग्रहण संबंधी कार्य भोपाल मुख्यालय से संपादित होते हैं। ग्वालियर में नवीन वृत्त कार्यालय प्रारंभ करने से विशेषत: मुरैना के बामौर और भिंड के मालनपुर औ‌द्योगिक क्षेत्र को लाभ प्राप्त हो सकेगा। इसके अतिरिक्त भविष्य में मुरैना में 600 मेगावाट का बैटरी स्टोरेज सोलर पॉवर प्लांट स्थापित किया जाना है जिसके लिए भी ग्वालियर में नवीन वृत्त कार्यालय स्थापित किया जाना आवश्यक है।

    नारायणगढ में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सहित 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मंदसौर के नारायणगढ़ में जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश का एक नवीन पद सहित 9 नवीन पदों के सृजन की स्वीकृति दी है। इससे वहां नियमित रूप से न्यायालय का संचालन हो सकेगा जिससे स्थानीय अधिवक्ताओं और लोगों की मांग के साथ प्रकरणों का निराकरण किया जा सकेगा और आम जन को सुलभ व त्वरित न्याय मिल सकेगा।

    प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के संचालन के लिए 129 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने सामान्य प्रशासन विभाग के अंतर्गत आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी की गतिविधियों से संबंधित योजनाओं के सोलहवें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 129 करोड़ 12 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति राशि से अकादमी के स्थापना एवं कार्यालयीन व्यय, मिशन कर्मयोगी, विभागीय परिसंपतियों का संधारण एवं प्रशासन अकादमी परिसर में प्रशिक्षण गतिविधियों के लिए भौतिक सुविधाओं का निर्माण संबंधित कार्य किए जायेंगे।

    संकल्प-हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वुमेन, शक्ति सदन और सखी निवास के लिए 198 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मिशन शक्ति- उपयोजना सामर्थ्य अंतर्गत संकल्प-हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ़ वुमेन, शक्ति सदन और सखी निवास योजना के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर क्रियान्वयन के लिए 198 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति दी है।

    संकल्प -हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वूमेन योजना का उद्देश्य जिला स्तर पर एक ऐसी इकाई के रूप में कार्य करना है जो महिलाओं को उनके कल्याण और सशक्तिकरण के लिए योजनाओं और नीतियों के बारे में जागरूकता के साथ-साथ पहुंच प्रदान करें। यह योजना पूर्व से सभी 52 जिलों में संचालित है और अब इसे 3 नवगठित जिलों में संचालित किया जायेगा।

    शक्ति सदन का उद्देश्य महिलाओं के लिए एक सुरक्षित और सक्षम वातावरण बनाना तथा अवैध व्यापार, संकट में फंसी महिलाओं को कठिन परिस्थितियों से उबार कर एक नई शुरुआत करवाना है। वर्तमान में प्रदेश में 14 शक्ति सदन अशासकीय संस्थाओं के माध्यम से संचालित है। भारत सरकार द्वारा 5 नये शक्ति सदन स्वीकृत किये गये हैं।

    शहरी/ग्रामीण कामकाजी महिलाओं को सुविधाजनक व सुरक्षित आवास प्रदान करने के लिए सखी निवास योजना को लागू किया गया है। पूर्व में इस योजना का नाम महिला विश्रामालय था। सखी निवास में सभी वर्ग की कामकाजी महिलाओं को प्रवेश दिया जाता है। सखी निवास में महिला कर्मचारियों के छोटे बच्चों के लिए डे-केयर सेंटर संचालन का भी प्रावधान है। प्रदेश में 3 शासकीय सखी निवास संचालित है।

    कर्मचारी कल्याण, पेंशन, भविष्य निधि और बीमा योजनाओं के लिए 982 करोड़ रूपये की स्वीकृति


    मंत्रि-परिषद ने वित्त विभाग के अंतर्गत कर्मचारी कल्याण, पेंशन, भविष्य निधि और बीमा की योजनाओं के 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से मार्च 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 982 करोड़ 49 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार संचालनालय पेंशन, भविष्य निधि एवं बीमा की योजनाओं, पेंशन तथा कर्मचारी कल्याण संचालनालय, जिला पेंशन कार्यालय, विभागीय परिसंपत्तियों का संधारण, पेंशनर कल्याण कोष, शासकीय सेवक परिवार कल्याण निधि पर ब्याज, शासकीय कर्मचारी समूह बीमा योजना, शासकीय कर्मचारी सह समूह बीमा योजना को संचालित किया जायेगा।

    समर्थन मूल्य पर उपार्जन पर किसानों को बोनस भुगतान योजना की निरंतरता की स्वीकृति
    मंत्रि-परिषद ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग अंतर्गत 500 करोड़ से अधिक की योजना अंतर्गत समर्थन मूल्य पर किसानों को उपार्जन पर बोनस भुगतान के 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक में निरंतर संचालन की स्वीकृति दी है।

    मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम 2011 में संशोधन की स्वीकृति


    मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश विधिक माप विज्ञान नियम, 2011 में संशोधन की स्वीकृति दी है। भारत सरकार द्वारा जनविश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2026 के माध्यम से विधिक मापविज्ञान अधिनियम, 2009 में किए गए संशोधनों को राज्य में प्रभावी रूप से लागू करने, Compliance Reduction and Deregulation के अंतर्गत की गई अनुशंसाओं का अनुपालन सुनिश्चित करने तथा नाप-तौल उपकरणों के सत्यापन शुल्क के पुनरीक्षण के उद्देश्य से यह संशोधन किया गया है।
  • मांगें पूरी होने तक नहीं लौटेंगे किसान भोपाल में पैदल मार्च के साथ सीएम हाउस घेराव की तैयारी सात दिन के राशन के साथ पहुंचे प्रदर्शनकारी

    मांगें पूरी होने तक नहीं लौटेंगे किसान भोपाल में पैदल मार्च के साथ सीएम हाउस घेराव की तैयारी सात दिन के राशन के साथ पहुंचे प्रदर्शनकारी

    भोपाल  मध्यप्रदेश में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। मूंग की शत प्रतिशत सरकारी खरीदी और खाद वितरण व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसानों ने भोपाल की ओर कूच कर दिया। मंगलवार को राजधानी की सीमा पर मंडीदीप स्थित कलियासोत नदी के पुल के पास पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाई थी लेकिन बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने उसे हटाते हुए भोपाल में प्रवेश कर लिया। इसके बाद किसानों का विशाल पैदल मार्च राजधानी की ओर बढ़ता गया और पूरे इलाके में जय जवान जय किसान के नारों से माहौल गूंज उठा।

    आंदोलन में शामिल किसानों का कहना है कि वे केवल प्रदर्शन करने नहीं बल्कि अपनी मांगों को पूरा करवाने के इरादे से आए हैं। उनका लक्ष्य मुख्यमंत्री आवास का घेराव करना है और जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती तब तक वे वापस नहीं लौटेंगे। आंदोलन को लंबा खींचने की तैयारी के तहत किसान अपने साथ सात दिन का राशन पानी और जरूरी सामान भी लेकर पहुंचे हैं। कई किसान अपने ट्रैक्टर ट्रॉली में पहले से तैयार भोजन और दाल बाटी जैसी खाद्य सामग्री भी साथ लाए हैं ताकि आंदोलन के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि सरकार को कई बार ज्ञापन और बातचीत के माध्यम से किसानों की समस्याओं से अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। किसानों का आरोप है कि मूंग की सरकारी खरीदी सीमित होने के कारण उन्हें अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसके अलावा खाद वितरण की ई टोकन व्यवस्था भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। उनका कहना है कि तकनीकी खामियों और अव्यवस्था के चलते समय पर खाद नहीं मिल रही जिससे खेती प्रभावित हो रही है।

    भोपाल सीमा पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसानों को राजधानी में प्रवेश से रोका जा सके लेकिन किसानों के भारी दबाव के आगे बैरिकेडिंग टिक नहीं सकी। किसानों के प्रवेश के बाद पुलिस और प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है तथा राजधानी के कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

    आंदोलन में शामिल किसान हाथों में तिरंगा लेकर आगे बढ़ रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने की बात कह रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन केवल एक फसल या एक जिले का नहीं बल्कि पूरे प्रदेश के किसानों के अधिकारों की लड़ाई है। यदि सरकार जल्द सकारात्मक पहल नहीं करती तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

    अब सभी की नजर सरकार और किसान संगठनों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी हुई है। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता तो राजधानी में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां भी प्रभावित होने की संभावना है।