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  • दुबई की निजी पार्टी में प्रस्तुति का अनुभव साझा कर भावुक हुए कुमार सानू, बोले- उस दौर का माहौल बेहद चुनौतीपूर्ण था

    दुबई की निजी पार्टी में प्रस्तुति का अनुभव साझा कर भावुक हुए कुमार सानू, बोले- उस दौर का माहौल बेहद चुनौतीपूर्ण था


    नई दिल्ली ।
    हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध पार्श्व गायक कुमार सानू ने अपने लंबे संगीत करियर से जुड़ा एक ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसने एक बार फिर 1990 के दशक के फिल्म उद्योग के माहौल को चर्चा में ला दिया है। उन्होंने बताया कि अपने करियर के दौरान उन्हें दुबई में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए बुलाया गया था, जहां कथित तौर पर अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोग मौजूद थे। गायक ने स्वीकार किया कि उस समय इस तरह की परिस्थितियां उनके लिए बेहद असहज और डर पैदा करने वाली थीं।

    हाल ही में एक पॉडकास्ट बातचीत के दौरान कुमार सानू ने उस दौर की कई यादों को साझा किया। उन्होंने कहा कि आज की तुलना में उस समय फिल्म उद्योग का वातावरण काफी अलग था। उनके अनुसार, कई बार कलाकारों को ऐसे हालात का सामना करना पड़ता था, जहां व्यक्तिगत इच्छा से अधिक परिस्थितियां निर्णय लेने के लिए मजबूर कर देती थीं। उन्होंने बताया कि जिस कार्यक्रम में उन्हें बुलाया गया था, वहां जाने को लेकर उनके मन में स्वाभाविक रूप से भय और असमंजस था।

    गायक ने कहा कि उस समय किसी ऐसे निमंत्रण को ठुकराना आसान नहीं माना जाता था। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उस दौर में कलाकार अपने काम के साथ-साथ सुरक्षा और अन्य व्यावहारिक चुनौतियों को भी ध्यान में रखकर फैसले लेते थे। उनके मुताबिक, कई बार परिस्थितियां ऐसी होती थीं कि किसी टकराव से बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प समझा जाता था।

    बातचीत के दौरान कुमार सानू ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने करियर में फिल्म उद्योग के बदलते दौर को बहुत करीब से देखा है। उनके अनुसार, उस समय कई कलाकार अनावश्यक विवादों या जोखिम से दूर रहने की कोशिश करते थे। यही वजह थी कि कई फैसले व्यक्तिगत पसंद के बजाय उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए लिए जाते थे। उन्होंने माना कि उस दौर का माहौल आज की तुलना में कहीं अधिक संवेदनशील था।

    कुमार सानू ने यह भी बताया कि समय बीतने के साथ अंडरवर्ल्ड से जुड़े कुछ लोगों की ओर से उन्हें सुरक्षा देने जैसी बातें भी कही गई थीं। हालांकि उन्होंने हमेशा ऐसे किसी भी प्रस्ताव से दूरी बनाए रखी। उनका कहना था कि उन्होंने स्पष्ट रूप से यह रुख अपनाया कि वे अपनी सुरक्षा और अपने निजी मामलों को स्वयं संभालना पसंद करेंगे तथा किसी भी बाहरी सहयोग पर निर्भर नहीं रहना चाहते।

    गायक की इस बातचीत ने एक बार फिर उस दौर की फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी पुरानी चर्चाओं को सामने ला दिया है। हालांकि उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए किसी नए आरोप या कानूनी दावे की बजाय केवल अपने व्यक्तिगत अनुभव और उस समय के माहौल का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समय के साथ फिल्म उद्योग में काफी बदलाव आया है और आज काम करने का वातावरण पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित माना जाता है।

    कुमार सानू हिंदी फिल्म संगीत के सबसे लोकप्रिय पार्श्व गायकों में गिने जाते हैं। 1990 के दशक में उनकी आवाज ने कई फिल्मों को यादगार बनाया और उन्होंने अनेक सुपरहिट गीतों को अपनी आवाज दी। दशकों बाद भी उनके गीत संगीत प्रेमियों के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं और नई पीढ़ी भी उनके सदाबहार गीतों को पसंद करती है। उनके हालिया खुलासे ने एक बार फिर उनके लंबे करियर और उस दौर के फिल्म उद्योग के अनुभवों को चर्चा का विषय बना दिया है।

  • लॉक अप 2 में राम कपूर का भावुक खुलासा, पिता की आखिरी इच्छा पूरी करने के फैसले ने बदल दिए पारिवारिक रिश्ते

    लॉक अप 2 में राम कपूर का भावुक खुलासा, पिता की आखिरी इच्छा पूरी करने के फैसले ने बदल दिए पारिवारिक रिश्ते

    नई दिल्ली । अभिनेता राम कपूर ने रियलिटी शो ‘लॉक अप 2’ में अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक बेहद भावुक और संवेदनशील अनुभव साझा किया, जिसने शो के अन्य प्रतिभागियों के साथ दर्शकों को भी भावुक कर दिया। उन्होंने अपने पिता के अंतिम दिनों को याद करते हुए बताया कि जीवन के सबसे कठिन फैसलों में से एक में उन्होंने अपने पिता का साथ दिया। इस अनुभव ने न केवल उन्हें भावनात्मक रूप से प्रभावित किया, बल्कि परिवार के कुछ रिश्तों पर भी गहरा असर डाला।

    शो के दौरान एक विशेष टास्क में प्रतिभागियों को अपने जीवन से जुड़ा ऐसा राज साझा करना था, जिसे अब तक बहुत कम लोग जानते थे। इसी दौरान राम कपूर ने बताया कि उन्होंने अपने पिता की आखिरी इच्छा को पूरा करने में उनकी मदद की थी। उनका यह बयान सुनकर वहां मौजूद सभी लोग कुछ देर के लिए भावुक हो गए और पूरे माहौल में गंभीरता छा गई।

    राम कपूर ने बताया कि उनके पिता को 63 वर्ष की उम्र में पैंक्रियाटिक कैंसर का पता चला था। उस समय डॉक्टरों ने बीमारी को गंभीर बताया था और शल्य चिकित्सा की संभावना भी बहुत कम थी। इसके बाद उन्होंने इलाज और कीमोथेरेपी के कई चरण पूरे किए, जिससे उनकी सेहत में कुछ समय के लिए सुधार भी आया। परिवार को लगा कि स्थिति पहले से बेहतर हो रही है और उन्होंने कई साल सामान्य जीवन भी बिताया।

    हालांकि कुछ समय बाद बीमारी फिर से लौट आई। राम कपूर के अनुसार, यह दौर पूरे परिवार के लिए बेहद कठिन था। उस समय उनके पिता विदेश में रह रहे थे और लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति से मानसिक रूप से भी परेशान थे। इसी दौरान उन्होंने अपने बेटे से अपनी भावनाएं साझा कीं और जीवन के अंतिम चरण को लेकर अपनी इच्छा बताई।

    अभिनेता ने बताया कि पिता नहीं चाहते थे कि वे अपने अंतिम समय में अकेले रहें। उन्होंने अपने बेटे से साथ रहने की इच्छा जताई थी। राम कपूर ने कहा कि उनके लिए यह फैसला बेहद भावनात्मक और कठिन था, लेकिन उन्होंने अपने पिता का साथ निभाने का निर्णय लिया। उन्होंने आखिरी समय तक उनके साथ रहकर उनकी इच्छाओं का सम्मान किया और उन्हें भावनात्मक सहारा दिया।

    राम कपूर ने यह भी बताया कि उनके पिता ने अपनी विदाई को लेकर कुछ व्यक्तिगत इच्छाएं व्यक्त की थीं। उनका मानना था कि परिवार को उनके जाने के बाद लंबे समय तक दुख में नहीं डूबना चाहिए। अभिनेता ने कहा कि उन्होंने परिस्थितियों को समझते हुए वही किया, जो उन्हें उस समय अपने पिता के लिए सही और मानवीय लगा।

    इस पूरे घटनाक्रम का असर उनके पारिवारिक रिश्तों पर भी पड़ा। राम कपूर ने खुलासा किया कि इस निर्णय के बाद उनकी मां और बहन के साथ संबंधों में दूरी आ गई। उन्होंने बताया कि पिछले कई वर्षों से दोनों के बीच बातचीत नहीं हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने फैसले को लेकर कभी पछतावा महसूस नहीं किया, क्योंकि उस समय उनका उद्देश्य केवल अपने पिता की इच्छा और सम्मान को प्राथमिकता देना था।

    राम कपूर का यह भावुक अनुभव दर्शाता है कि गंभीर बीमारी और जीवन के अंतिम दौर से जुड़े निर्णय अक्सर पूरे परिवार के लिए बेहद कठिन होते हैं। ऐसे समय में भावनाएं, रिश्ते और व्यक्तिगत विश्वास एक साथ सामने आते हैं। अभिनेता ने अपने अनुभव के माध्यम से यह बताया कि कई बार जीवन में ऐसे फैसले लेने पड़ते हैं, जिनका प्रभाव लंबे समय तक रिश्तों पर बना रहता है, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार लिया गया निर्णय व्यक्ति के लिए सही भी हो सकता है।

  • झांसी-मानिकपुर रूट पर 6 ट्रेनें रद्द, 2 एक्सप्रेस बदले रूट से चलेंगी

    झांसी-मानिकपुर रूट पर 6 ट्रेनें रद्द, 2 एक्सप्रेस बदले रूट से चलेंगी


    झांसी। मऊरानीपुर-रोरा रेलखंड पर दोहरीकरण कार्य के तहत होने वाले नॉन-इंटरलॉकिंग कार्य की तिथि में बदलाव किया गया है। अब रेल संरक्षा आयुक्त का निरीक्षण 28 जुलाई की बजाय 29 जुलाई को होगा। इसके चलते झांसी मंडल से गुजरने वाली कई ट्रेनों के संचालन में संशोधन किया गया है।

    मंडल जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि झांसी-बांदा, झांसी-मानिकपुर और ग्वालियर-प्रयागराज रेलखंड पर चलने वाली छह ट्रेनें अलग-अलग तारीखों में निरस्त रहेंगी। वहीं, खजुराहो-उदयपुर सिटी एक्सप्रेस और उदयपुर सिटी-खजुराहो एक्सप्रेस को परिवर्तित मार्ग से चलाया जाएगा। इसके अलावा हावड़ा-आगरा कैंट एक्सप्रेस को भी निर्धारित अवधि के लिए नियंत्रित किया जाएगा।

    इन ट्रेनों का संचालन रहेगा प्रभावित
    11801 ग्वालियर-प्रयागराज एक्सप्रेस – 28 और 29 जुलाई को रद्द।
    11802 प्रयागराज-ग्वालियर एक्सप्रेस – 29 और 30 जुलाई को रद्द।
    64613 झांसी-बांदा मेमू – 28 और 29 जुलाई को रद्द।
    64614 बांदा-झांसी मेमू – 28 और 29 जुलाई को रद्द।
    64611 झांसी-मानिकपुर मेमू – 29 जुलाई को रद्द।
    64612 मानिकपुर-झांसी मेमू – 30 जुलाई को रद्द।

    दो एक्सप्रेस ट्रेनों का बदला जाएगा मार्ग
    19666 उदयपुर सिटी-खजुराहो एक्सप्रेस 28 जुलाई को अपने सामान्य झांसी–महोबा–खजुराहो मार्ग की बजाय झांसी–दैलवारा–बिरारी–खजुराहो रूट से संचालित होगी। इसी तरह 19665 खजुराहो-उदयपुर सिटी एक्सप्रेस 29 जुलाई को खजुराहो–महोबा–झांसी के स्थान पर खजुराहो–बिरारी–दैलवारा–झांसी मार्ग से चलेगी।

    हावड़ा-आगरा कैंट एक्सप्रेस होगी लेट
    20975 हावड़ा-आगरा कैंट एक्सप्रेस को 28 जुलाई को एक फेरे के दौरान प्रयागराज मंडल में 150 मिनट और झांसी मंडल में 60 मिनट, यानी कुल 210 मिनट तक नियंत्रित किया जाएगा।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले अपनी ट्रेन की ताजा स्थिति NTES, रेल कनेक्ट ऐप या रेलवे हेल्पलाइन 139 के माध्यम से अवश्य जांच लें, ताकि किसी भी असुविधा से बचा जा सके।

  • यात्रियों को राहत: रेलवे ने शुरू कीं 3 स्पेशल ट्रेनें, झांसी स्टेशन पर मिलेगा ठहराव

    यात्रियों को राहत: रेलवे ने शुरू कीं 3 स्पेशल ट्रेनें, झांसी स्टेशन पर मिलेगा ठहराव


    झांसी। यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेलवे ने तीन विशेष ट्रेनों के संचालन का फैसला किया है। ये सभी स्पेशल ट्रेनें वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन पर निर्धारित ठहराव के साथ अपने गंतव्य तक जाएंगी।

    मुंबई सेंट्रल-कटिहार स्पेशल (09189) का संचालन प्रत्येक शनिवार 29 अगस्त तक किया जाएगा। यह ट्रेन झांसी स्टेशन पर सुबह 8:09 बजे पहुंचेगी। वापसी में कटिहार-मुंबई सेंट्रल स्पेशल (09190) 28 जुलाई से प्रत्येक मंगलवार 1 सितंबर तक चलेगी और झांसी स्टेशन पर रात 10:40 बजे (22:40 बजे) रुकेगी। दोनों दिशाओं में यह ट्रेन कुल पांच-पांच फेरे लगाएगी।

    इसके अलावा सूरत-छपरा स्पेशल (09065) का संचालन 28 जुलाई से प्रत्येक मंगलवार 29 सितंबर तक किया जाएगा। यह ट्रेन झांसी स्टेशन पर रात 1:30 बजे पहुंचेगी। वापसी में छपरा-सूरत स्पेशल (09066) 29 जुलाई से प्रत्येक बुधवार 30 सितंबर तक चलेगी और झांसी स्टेशन पर शाम 5:25 बजे (17:25 बजे) ठहरेगी। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में नौ-नौ फेरे लगाएगी।

    वहीं अहमदाबाद-दरभंगा स्पेशल (09465) 31 जुलाई से प्रत्येक शुक्रवार 11 सितंबर तक संचालित होगी। यह ट्रेन झांसी स्टेशन पर दोपहर 12:30 बजे पहुंचेगी। वापसी में दरभंगा-अहमदाबाद स्पेशल (09466) 3 अगस्त से प्रत्येक सोमवार 14 सितंबर तक चलेगी और झांसी स्टेशन पर रात 12:05 बजे (00:05 बजे) ठहराव करेगी। इस स्पेशल ट्रेन के भी दोनों दिशाओं में छह-छह फेरे निर्धारित किए गए हैं।

    रेलवे का कहना है कि इन विशेष ट्रेनों के संचालन से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को राहत मिलेगी और त्योहार व अवकाश के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

  • कांवड़ यात्रा: कल रात से NH-58 पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा लागू, दिल्ली-देहरादून और गंगा एक्सप्रेसवे से गुजरेंगे वाहन

    कांवड़ यात्रा: कल रात से NH-58 पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा लागू, दिल्ली-देहरादून और गंगा एक्सप्रेसवे से गुजरेंगे वाहन


    मेरठ। कांवड़ यात्रा को लेकर मेरठ पुलिस ने विस्तृत ट्रैफिक डायवर्जन प्लान जारी कर दिया है। इसके तहत 29 जुलाई की रात 12 बजे से एनएच-58 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। वहीं, 4 अगस्त की आधी रात से हल्के और मध्यम वाहनों पर भी डायवर्जन लागू कर दिया जाएगा। यह व्यवस्था 12 अगस्त तक प्रभावी रहेगी।

    इस दौरान केवल पासधारक वाहनों को तय समय में कांवड़ मार्गों को छोड़कर आवाजाही की अनुमति मिलेगी। हालांकि, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे पर सामान्य यातायात पूर्ववत जारी रहेगा। एसपी ट्रैफिक राजेश श्रीवास्तव ने बताया कि डायवर्जन प्लान पड़ोसी जिलों और अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय के बाद तैयार किया गया है। जरूरत पड़ने पर यातायात व्यवस्था में बदलाव भी किया जा सकता है।

    शहर में शुरू होंगी तैयारियां
    नगर निगम मंगलवार से कांवड़ यात्रा मार्गों पर बल्लियां लगाने और स्ट्रीट लाइटों की व्यवस्था शुरू करेगा। नगर आयुक्त सौरभ गंगवार ने अधिकारियों को इसी सप्ताह सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही मुख्य मार्गों के गड्ढे भरने और नालियों की सफाई का कार्य भी तेज कर दिया गया है।

    दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर ये रहेगा प्लान
    4 अगस्त से दिल्ली, गाजियाबाद और नोएडा की ओर से आने वाले हल्के और मध्यम वाहनों का भी डायवर्जन लागू होगा। भारी वाहनों को डासना से मोड़ दिया जाएगा, जबकि अन्य वाहनों को भोजपुर चौराहे से निवाड़ी और हापुड़ की ओर भेजा जाएगा। एनएच-58 की बाईं लेन पर दोनों दिशाओं का ट्रैफिक चलेगा, जबकि दाईं लेन हरिद्वार से लौटने वाले कांवड़ियों के लिए आरक्षित रहेगी।

    NH-58 पर भारी वाहनों की एंट्री बंद
    29 जुलाई से जलाभिषेक तक राधाना से पूरा महादेव और चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग (गंग नहर पटरी) पर सभी प्रकार के भारी, हल्के और मध्यम वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। गाजियाबाद से आने वाले भारी वाहनों को दुहाई मोड़ से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर डायवर्ट किया जाएगा। अन्य वाहनों को मोदीनगर से डीएमई होते हुए भोजपुर और पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर भेजा जाएगा।

    दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे रहेगा विकल्प
    दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और राजस्थान से उत्तराखंड व सहारनपुर जाने वाले वाहनों को एनएच-09 से डासना, फिर पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और खेकड़ा इंटरचेंज के जरिए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भेजा जाएगा। हरिद्वार, रुड़की और मुजफ्फरनगर से आने वाले वाहनों को भी संबंधित जिलों से ही एक्सप्रेसवे की ओर डायवर्ट किया जाएगा।

    गंगा एक्सप्रेसवे से आने वाले वाहनों के लिए व्यवस्था
    गंगा एक्सप्रेसवे से दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, हरियाणा, बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, हरिद्वार और देहरादून जाने वाले वाहनों को सिंभावली कट से उतारकर एनएच-09, डासना और पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर भेजा जाएगा।

    मेरठ, मुजफ्फरनगर और बिजनौर की ओर जाने वाले वाहनों को सिंभावली कट से एनएच-09, ततारपुर, हापुड़ बाईपास, टियाला अंडरपास, किठौर, परीक्षितगढ़, मवाना, बहसूमा, रामराज, मीरापुर और जानसठ मार्ग से भेजा जाएगा। बिजौली कट से उतरने वाले वाहनों के लिए भी अलग रूट निर्धारित किया गया है।

    प्रमुख वैकल्पिक मार्ग
    दिल्ली से देहरादून/हरिद्वार: गाजीपुर बॉर्डर–यूपी गेट–एनएच-09–डासना–पिलखुवा–हापुड़ बाईपास–टियाला–किठौर–परीक्षितगढ़–बहसूमा–रामराज–मीरापुर–देवबंद–आशारोड़ी।
    गाजियाबाद से बिजनौर: डासना–पिलखुवा–टियाला–किठौर–परीक्षितगढ़–बहसूमा–रामराज–मीरापुर–गंगा बैराज।
    बुलंदशहर से हरिद्वार/देहरादून: जोखाबाद–ईस्टर्न पेरिफेरल–डासना–पिलखुवा–किठौर–देवबंद–छुटमलपुर–मोहंड–आशारोड़ी।
    मेरठ से शामली: नानू नहर पुल–भूनी चौराहा–फुगाना मार्ग।

    हेल्पलाइन नंबर
    केंद्रीय कमांड एवं कंट्रोल सेंटर: 0121-2667080
    सिटी कंट्रोल रूम: 9454401587
    ग्रामीण कंट्रोल रूम: 9454417431
    यातायात कंट्रोल रूम: 9454404000

  • जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, मायावती बोलीं- ध्वस्तीकरण नहीं, नियमों के तहत निकले समाधान

    जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई पर रोक, मायावती बोलीं- ध्वस्तीकरण नहीं, नियमों के तहत निकले समाधान


    लखनऊ। रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगने के बाद बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में तोड़फोड़ की कार्रवाई के बजाय संस्थानों को नियमानुसार नियमित करने और व्यावहारिक समाधान तलाशने पर जोर देना चाहिए।

    मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी अपने संदेश में मायावती ने कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण का हवाला देकर भवनों को गिराने की प्रक्रिया पर रोक लगाना उचित कदम है। उनका कहना था कि ऐसे मामलों में जनहित और शिक्षा दोनों को ध्यान में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए।

    छात्रों के भविष्य का भी रखें ध्यान
    बसपा सुप्रीमो ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय का मामला केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अध्ययन कर रहे छात्रों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए सरकार को पहले नियमों के अनुरूप समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रदेश के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी निर्माण संबंधी नियमों का पालन नहीं हुआ है, तो उन्हें ध्वस्त करने के बजाय आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर नियमित करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए। मायावती ने उम्मीद जताई कि सरकार जनहित को प्राथमिकता देते हुए इस सुझाव पर सकारात्मक विचार करेगी।

    अंतरिम राहत के बाद अंतिम सुनवाई बाकी
    उल्लेखनीय है कि मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने सोमवार को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को अंतरिम राहत देते हुए 38 भवनों को गिराने की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय तक रोक लगा दी थी। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के अनुसार, यूनिवर्सिटी की ओर से दायर याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया गया है। मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड की जांच के बाद अंतिम फैसला सुनाया जाएगा।

  • यूपी पुलिस में 15 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के तबादले, तरुण गाबा बने लखनऊ के नए पुलिस कमिश्नर

    यूपी पुलिस में 15 वरिष्ठ IPS अधिकारियों के तबादले, तरुण गाबा बने लखनऊ के नए पुलिस कमिश्नर


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 15 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। इस बदलाव में तरुण गाबा को लखनऊ का नया पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है, जबकि अशोक मुथा को पुलिस महानिदेशक (डीजी) अग्निशमन एवं आपात सेवाएं की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार का कहना है कि यह बदलाव पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और सुचारु बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

    तबादला सूची के अनुसार, मधुर अशोक जैन को पुलिस महानिदेशक मुख्यालय से स्थानांतरित कर पुलिस महानिदेशक अग्निशमन एवं आपात सेवाएं बनाया गया है। वहीं, लखनऊ के पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर को पुलिस महानिरीक्षक (अभिसूचना) मुख्यालय भेजा गया है।

    राम कुमार को लखनऊ रेंज से गोरखपुर जोन का अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) नियुक्त किया गया है। नवीन अरोरा को तकनीकी सेवाओं से हटाकर वाराणसी जोन की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि पीयूष मोर्डिया को वाराणसी जोन से प्रयागराज का पुलिस आयुक्त बनाया गया है।

    इसी क्रम में संजय गुप्ता को पुलिस मुख्यालय से एडीजी कानून-व्यवस्था, धर्मेंद्र सिंह को प्रयागराज रेंज का पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) नियुक्त किया गया है। इसके अलावा मोहित गुप्ता, विनीत कुमार सिंह, राजेंद्र कुमार, आनंद प्रकाश तिवारी, अरुण कुमार सिंह और आनंद कुमार समेत अन्य अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

    सरकार ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को जल्द से जल्द नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए हैं। इस फेरबदल को प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • नांदेड़ डिवीजन में 163 करोड़ रुपये की ट्रैक्शन अपग्रेड परियोजना को मंजूरी, रेल संचालन क्षमता होगी मजबूत

    नांदेड़ डिवीजन में 163 करोड़ रुपये की ट्रैक्शन अपग्रेड परियोजना को मंजूरी, रेल संचालन क्षमता होगी मजबूत

    नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने देश के रेल बुनियादी ढांचे को अधिक आधुनिक और सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए दक्षिण मध्य रेलवे के नांदेड़ डिवीजन के परभणी-मुदखेड़ डबल लाइन रेलखंड में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के उन्नयन को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस परियोजना पर लगभग 163 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका उद्देश्य रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने, विद्युत आपूर्ति को अधिक मजबूत बनाना और यात्री तथा मालगाड़ियों के संचालन को अधिक कुशल बनाना है।

    इस परियोजना के तहत मौजूदा 1×25 केवी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को आधुनिक 2×25 केवी ट्रैक्शन सिस्टम में परिवर्तित किया जाएगा। यह अपग्रेडेशन लगभग 164 ट्रैक किलोमीटर के दायरे में किया जाएगा। इसके साथ ही बढ़ते विद्युत भार को ध्यान में रखते हुए पावर सप्लाई से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी आधुनिक तकनीक के अनुरूप विकसित किया जाएगा, जिससे भविष्य की बढ़ती परिचालन आवश्यकताओं को आसानी से पूरा किया जा सके।

    परभणी-मुदखेड़ रेलखंड दक्षिण मध्य रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में शामिल है। यह रणनीतिक रूप से हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (एचयूएन) रूट-9 का हिस्सा है, जो अजमेर, इंदौर, खंडवा, अकोला, पूर्णा, मुदखेड़, सिकंदराबाद, महबूबनगर और धोन जैसे प्रमुख शहरों और रेल मार्गों को जोड़ता है। इस कॉरिडोर का उपयोग बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों के संचालन के लिए भी किया जाता है, इसलिए इसकी क्षमता बढ़ाना रेलवे की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    रेल मंत्रालय का मानना है कि नए ट्रैक्शन सिस्टम के लागू होने से ट्रेनों को अधिक स्थिर और मजबूत विद्युत आपूर्ति मिलेगी। इससे इस रेलखंड पर माल ढुलाई की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और तेज गति से चलने वाली ट्रेनों, विशेषकर वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी आधुनिक ट्रेनों के संचालन को भी बेहतर तकनीकी समर्थन प्राप्त होगा। इसके परिणामस्वरूप ट्रेनों की समयबद्धता, परिचालन दक्षता और ऊर्जा उपयोग में भी सुधार आने की संभावना है।

    यह परियोजना भारतीय रेलवे के दीर्घकालिक विकास कार्यक्रम का हिस्सा है। रेलवे का लक्ष्य वर्ष 2029-30 तक देशभर में 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई का है। मंत्रालय का मानना है कि ट्रैक्शन प्रणाली के आधुनिकीकरण और विद्युत क्षमता में वृद्धि से इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। साथ ही व्यस्त रेल मार्गों पर बढ़ते ट्रैफिक को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करना भी संभव होगा।

    भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों में विद्युत बुनियादी ढांचे के विस्तार और आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दे रहा है। इसी क्रम में देश के विभिन्न महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को उन्नत बनाने का कार्य तेज गति से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे डीजल पर निर्भरता कम होने के साथ-साथ ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

    हाल ही में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, भारत आज दुनिया के सबसे बड़े विद्युतीकृत रेलवे नेटवर्क वाले देशों में शामिल हो चुका है। देश के ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क का लगभग 99.6 प्रतिशत हिस्सा विद्युतीकृत हो चुका है। इस मामले में भारत केवल स्विट्जरलैंड से पीछे है, जबकि नेटवर्क के आकार के लिहाज से भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में शामिल है।

    रेलवे के अनुसार, वर्ष 2014 से 2026 के बीच मिशन मोड में 48,072 रूट किलोमीटर रेल मार्ग का विद्युतीकरण किया गया, जो पिछले कई दशकों की तुलना में कहीं अधिक तेज गति से पूरा हुआ है। नांदेड़ डिवीजन की यह नई परियोजना भी इसी व्यापक आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है, जिससे भविष्य में भारतीय रेलवे की क्षमता, विश्वसनीयता और परिचालन दक्षता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • भारत के टेक्सटाइल और परिधान निर्यात ने पार किया ₹3.25 लाख करोड़ का आंकड़ा, वैश्विक बाजारों में बढ़ी मांग

    भारत के टेक्सटाइल और परिधान निर्यात ने पार किया ₹3.25 लाख करोड़ का आंकड़ा, वैश्विक बाजारों में बढ़ी मांग

    नई दिल्ली । भारत का कपड़ा और परिधान उद्योग वैश्विक बाजार में लगातार अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी कि वर्ष 2025-26 के दौरान देश का कपड़ा और परिधान निर्यात, जिसमें हस्तशिल्प भी शामिल है, बढ़कर ₹3,25,339 करोड़ तक पहुंच गया। यह आंकड़ा वर्ष 2023-24 के ₹2,97,004 करोड़ के मुकाबले उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। इस अवधि में निर्यात में 4.7 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की गई, जो भारतीय टेक्सटाइल उद्योग की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और वैश्विक मांग का संकेत है।

    सरकार के अनुसार भारतीय कपड़ा और परिधान उत्पादों के प्रमुख निर्यात बाजारों में अमेरिका, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, ब्रिटेन और जर्मनी शामिल रहे। इन देशों में भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बनी रही, जिससे निर्यात को गति मिली। इसके अलावा वर्ष 2025-26 के दौरान 2024-25 की तुलना में 100 से अधिक देशों को होने वाले निर्यात में भी वृद्धि दर्ज की गई, जो भारतीय उद्योग के लिए नए अवसरों का संकेत माना जा रहा है।

    केंद्र सरकार ने कहा कि टेक्सटाइल और परिधान क्षेत्र के निर्यात की नियमित निगरानी की जा रही है। सरकार उद्योग जगत, निर्यातकों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर ऐसी रणनीतियों पर काम कर रही है, जिनसे वैश्विक चुनौतियों का प्रभाव कम किया जा सके और भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मकता को और मजबूत बनाया जा सके। इसका उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय वस्त्र उद्योग की हिस्सेदारी को विस्तार देना है।

    सरकार ने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं। इनमें पीएम मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल पार्क योजना, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन, समर्थ योजना, सिल्क समग्र-2, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम, राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम और अन्य निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं शामिल हैं। इन पहलों का सकारात्मक प्रभाव उत्पादन, निवेश और निर्यात वृद्धि के रूप में सामने आया है।

    निर्यात बढ़ाने के लिए सरकार ने 40 प्राथमिकता वाले देशों को ध्यान में रखते हुए बाजार विविधीकरण की रणनीति भी अपनाई है। साथ ही भारत के विभिन्न मुक्त व्यापार समझौते भी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार का मानना है कि ब्रिटेन के साथ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते के अलावा यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ होने वाले मुक्त व्यापार समझौते भारतीय टेक्सटाइल उद्योग के लिए नए निर्यात अवसर पैदा करेंगे और वैश्विक बाजारों तक पहुंच को और आसान बनाएंगे।

    सरकार ने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री परिवहन से जुड़ी चुनौतियों का असर कम करने के लिए विशेष राहत पहल शुरू की गई है, ताकि निर्यातकों को किसी प्रकार की अतिरिक्त कठिनाई का सामना न करना पड़े। इसके अलावा घरेलू उद्योग को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 1 जून से 31 अक्टूबर 2026 तक कपास के आयात पर सीमा शुल्क अस्थायी रूप से माफ किया गया है। इससे उत्पादन लागत को नियंत्रित रखने और निर्यात क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    आगे की रणनीति के तहत सरकार ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक के लिए ‘मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी’ को भी मंजूरी दी है। इस मिशन का उद्देश्य कपास उत्पादन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों को दूर करना, उत्पादकता बढ़ाना और गुणवत्ता में सुधार लाना है। सरकार का मानना है कि बेहतर गुणवत्ता वाला कच्चा माल उपलब्ध होने से भारतीय टेक्सटाइल उद्योग वैश्विक बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा तथा आने वाले वर्षों में निर्यात में नई ऊंचाइयों को हासिल करने में सफल रहेगा।

  • देश में जल्द शुरू होगा प्लास्टिक करेंसी नोटों का परीक्षण, सरकार ने स्पष्ट किया- कागजी नोट नहीं होंगे बंद

    देश में जल्द शुरू होगा प्लास्टिक करेंसी नोटों का परीक्षण, सरकार ने स्पष्ट किया- कागजी नोट नहीं होंगे बंद

    नई दिल्ली । देश में करेंसी व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के पॉलिमर यानी प्लास्टिक नोटों के परीक्षण को मंजूरी दे दी है। इन नोटों को शुरुआत में सीमित स्तर पर फील्ड ट्रायल के रूप में जारी किया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य नए प्रकार की करेंसी की उपयोगिता, टिकाऊपन और व्यवहारिक प्रभाव का आकलन करना है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि मौजूदा कागजी नोटों का चलन जारी रहेगा और उन्हें तत्काल बंद करने की कोई योजना नहीं है।

    सरकार के अनुसार भारतीय रिजर्व बैंक के प्रस्ताव पर सहमति देते हुए पहले चरण में ₹10 और ₹20 के 100-100 करोड़ पॉलिमर नोट परीक्षण के लिए जारी किए जाएंगे। इन नोटों का विभिन्न भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में उपयोग कर उनकी गुणवत्ता, मजबूती और संचालन क्षमता का अध्ययन किया जाएगा। ट्रायल के परिणाम संतोषजनक रहने पर आगे इन नोटों के नियमित उपयोग को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में पहले से प्रचलित कागजी नोट पूरी तरह वैध बने रहेंगे। नागरिकों को किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि प्लास्टिक नोटों के आने से कागजी नोट अमान्य नहीं होंगे। दोनों प्रकार की करेंसी एक साथ चलन में रह सकती हैं। फिलहाल पूरे देश में कागजी नोटों को पॉलिमर नोटों से बदलने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

    पॉलिमर नोटों को पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ माना जाता है। इनकी उम्र सामान्य नोटों से अधिक होती है और ये नमी, धूल तथा बार-बार इस्तेमाल के बावजूद लंबे समय तक सुरक्षित रह सकते हैं। इसके अलावा इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल करना अपेक्षाकृत आसान होता है, जिससे नकली नोट तैयार करना कठिन हो जाता है। लंबे समय तक उपयोग योग्य होने के कारण इनकी बार-बार छपाई की आवश्यकता भी कम पड़ती है।

    दुनिया के कई देशों में पॉलिमर करेंसी का सफल उपयोग किया जा रहा है। सबसे पहले ऑस्ट्रेलिया ने वर्ष 1988 में इस तकनीक को अपनाया था। इसके बाद अनेक देशों ने भी अपने कुछ या सभी मूल्यवर्ग के नोट पॉलिमर सामग्री पर छापने शुरू किए। इन देशों के अनुभवों के आधार पर पॉलिमर नोटों को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प माना गया है।

    भारत में यह परियोजना अभी शुरुआती चरण में है। परीक्षण के दौरान यह भी देखा जाएगा कि आम लोगों, बैंकों, एटीएम नेटवर्क और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए इन नोटों का उपयोग कितना व्यावहारिक रहता है। इसके साथ ही परिवहन, रखरखाव और दीर्घकालिक लागत पर भी विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि भविष्य में बड़े स्तर पर निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं का अध्ययन किया जा सके।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परीक्षण सफल रहता है तो इससे करेंसी प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि सरकार ने फिलहाल यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल परीक्षण चरण है और इसका उद्देश्य नई तकनीक की उपयोगिता को परखना है। इसलिए आम लोगों को अपने पास मौजूद कागजी नोटों को लेकर किसी तरह की भ्रम की स्थिति में आने की आवश्यकता नहीं है। आने वाले समय में ट्रायल के नतीजों के आधार पर ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।