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  • वर्चस्व की रंजिश में 50 वर्षीय व्यक्ति पर लाठी बरसाईं,  रहम की गुहार के बावजूद नहीं रुके हमलावर

    वर्चस्व की रंजिश में 50 वर्षीय व्यक्ति पर लाठी बरसाईं, रहम की गुहार के बावजूद नहीं रुके हमलावर


    भिंड मध्य प्रदेश के भिंड जिले के मालनपुर थाना क्षेत्र में एक 50 वर्षीय व्यक्ति पर कथित तौर पर बेरहमी से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और जांच शुरू की। वीडियो में कुछ लोग एक व्यक्ति को जमीन पर गिराकर लाठियों से लगातार पीटते दिखाई दे रहे हैं। पीड़ित रहम की गुहार लगाता नजर आता है, लेकिन हमलावर उस पर हमला जारी रखते हैं।

    पुलिस के अनुसार, घटना शनिवार की है और घिरोंगी गांव में हुई। घायल की पहचान 50 वर्षीय करतार सिंह बघेल के रूप में हुई है। बताया गया कि करतार सिंह अपने एक साथी के साथ बाइक से गांव लौट रहे थे। इसी दौरान गांव के ही जयसिंह गुर्जर और उसके साथियों ने उन्हें रास्ते में रोक लिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के आधार पर सामने आया है कि करतार सिंह बाइक से पूरी तरह उतर भी नहीं पाए थे कि आरोपियों ने उन पर लाठियों से हमला शुरू कर दिया। वीडियो में एक व्यक्ति पीड़ित का पैर पकड़े दिखाई देता है, जबकि अन्य लोग लगातार लाठियों से वार करते हैं। हमले के दौरान एक आरोपी यह कहते हुए भी सुनाई देता है कि सिर पर नहीं, पीठ पर मारो।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस हमले के पीछे गांव में वर्चस्व और पुरानी रंजिश को वजह माना जा रहा है। आरोप है कि हमलावर गांव में अपना दबदबा बनाए रखना चाहते थे और इसी विवाद के चलते उन्होंने करतार सिंह को निशाना बनाया।

    घटना के बाद किसी स्थानीय व्यक्ति ने हमले का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी।

    मालनपुर थाना पुलिस ने बताया कि पीड़ित की शिकायत पर नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। घायल का अस्पताल में इलाज जारी है। पुलिस की टीमें वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। मामले की जांच जारी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में भोजन व्यवस्था संभालने वाले जुनैद की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, परिवार को परेशान करने का लगाया आरोप

    जंतर-मंतर प्रदर्शन में भोजन व्यवस्था संभालने वाले जुनैद की सुप्रीम कोर्ट में याचिका, परिवार को परेशान करने का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । जंतर-मंतर पर आयोजित CJP प्रदर्शन से जुड़े मोहम्मद जुनैद ने पुलिस द्वारा कथित उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने शीर्ष अदालत में दायर अपनी याचिका में दावा किया है कि उन्हें और उनके परिवार को लगातार परेशान किया जा रहा है। याचिका में न्यायालय से हस्तक्षेप कर उचित संरक्षण और राहत देने की मांग की गई है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब प्रदर्शन से जुड़े कई पहलुओं को लेकर अलग-अलग स्तर पर चर्चा जारी है।

    याचिका के अनुसार, जुनैद का आरोप है कि पुलिस उन्हें दिल्ली से अपने साथ ले गई और कई घंटे तक अपने कब्जे में रखने के बाद हरिद्वार के पास छोड़ दिया। उनका कहना है कि इस दौरान उन्हें कथित रूप से धमकाया भी गया। उन्होंने अदालत को बताया कि इस पूरी घटना के कारण वे मानसिक दबाव में हैं और उन्हें अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

    जुनैद ने अपनी याचिका में यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस की कार्रवाई केवल उनके तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी परेशान किया जा रहा है। उनके अनुसार, उनके पिता से पूछताछ की गई और उनकी बहन के ससुराल पक्ष के लोगों को भी अनावश्यक रूप से परेशान किया गया। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कराई जाए और उनके परिवार को किसी भी प्रकार के कथित उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान की जाए।

    मोहम्मद जुनैद उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के नाहल गांव के निवासी हैं। CJP प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका मुख्य रूप से आंदोलन में शामिल लोगों के लिए भोजन और पीने के पानी जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने की रही। शुरुआत में वे सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देते थे और पर्दे के पीछे रहकर व्यवस्थाएं संभालते थे, लेकिन प्रदर्शन के अंतिम चरण में उनकी पहचान प्रतिभागियों के बीच एक प्रमुख सहयोगी के रूप में बनने लगी।

    बताया गया है कि उन्होंने आंदोलन के भीतर कोई औपचारिक पद नहीं संभाला था। उनकी जिम्मेदारी प्रदर्शन स्थल पर आने वाले लोगों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखना थी। इसी भूमिका के कारण उनका नाम उस समय चर्चा में आया, जब पुलिस उनके घर पहुंची और तलाशी की कार्रवाई की गई।

    परिवार का कहना है कि तलाशी के दौरान कुछ दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए गए। उनके अनुसार, पुलिस उनके पिता को पूछताछ के लिए थाने भी लेकर गई थी। परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि उनके रिश्तेदारों को भी अलग-अलग स्थानों पर परेशान किया गया, जिससे पूरे परिवार में चिंता का माहौल बना हुआ है।

    दूसरी ओर, संबंधित पुलिस अधिकारियों की ओर से पहले इन आरोपों का खंडन किया जा चुका है। विशेष रूप से मेरठ में रिश्तेदारों को हिरासत में लेने या उनके खिलाफ किसी कार्रवाई के दावों को पुलिस ने अस्वीकार करते हुए कहा था कि संबंधित थानों में ऐसी किसी कार्रवाई का रिकॉर्ड नहीं मिला। इस कारण मामले में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।

    अब इस पूरे प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और उसके निर्देश महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अदालत याचिका में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध तथ्यों और संबंधित पक्षों के जवाब पर विचार करने के बाद आगे की प्रक्रिया तय करेगी। ऐसे में इस मामले की अगली सुनवाई और न्यायालय की टिप्पणी पर सभी की नजर बनी हुई है।

  • 2027 के विधानसभा चुनावों में कितना असर दिखाएंगे Gen Z, युवाओं की बढ़ती ताकत पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर

    2027 के विधानसभा चुनावों में कितना असर दिखाएंगे Gen Z, युवाओं की बढ़ती ताकत पर टिकी राजनीतिक दलों की नजर

    नई दिल्ली । हाल के वर्षों में देश में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी और सामाजिक मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने नई बहस को जन्म दिया है। विशेष रूप से हालिया छात्र आंदोलनों और सोशल मीडिया अभियानों के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनावों में Gen Z मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। राजनीतिक दल भी इस वर्ग को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए अलग-अलग स्तर पर युवाओं तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

    Gen Z में वर्ष 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवाओं को शामिल किया जाता है। वर्ष 2026 के हिसाब से इस वर्ग की उम्र लगभग 14 से 29 वर्ष के बीच है। देश में इनकी आबादी करीब 37 करोड़ बताई जाती है, जबकि 18 वर्ष से अधिक आयु वाले मतदाताओं में भी इस वर्ग की हिस्सेदारी उल्लेखनीय है। यही कारण है कि आने वाले चुनावों में युवा मतदाता राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण समूह बनकर उभरे हैं।

    उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गुजरात और गोवा जैसे राज्यों में वर्ष 2027 के दौरान विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में युवा मतदाता चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा होंगे। उत्तर प्रदेश में 18 से 29 वर्ष आयु वर्ग के लगभग चार करोड़ मतदाता हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 30 प्रतिशत माने जा रहे हैं। इसके अलावा पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    पंजाब में भी बड़ी संख्या में युवा मतदाताओं की मौजूदगी को देखते हुए राजनीतिक दल उन्हें साधने की तैयारी में हैं। कई दल युवा उम्मीदवारों को अधिक अवसर देने और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। वहीं उत्तराखंड में भी युवा मतदाता कुल मतदाताओं का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिससे चुनावी मुकाबले में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है।

    गुजरात में भी युवा मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य में 20 से 29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए विभिन्न राजनीतिक दल संगठन और नेतृत्व स्तर पर युवाओं को अधिक जिम्मेदारियां देने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। वहीं गोवा में भी नए मतदाताओं की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे युवा वर्ग का चुनावी महत्व और बढ़ गया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि Gen Z की कार्यशैली पारंपरिक राजनीति से अलग है। यह वर्ग सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन संवाद के माध्यम से अपनी राय व्यक्त करने में अधिक सक्रिय रहता है। कई सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों पर डिजिटल अभियानों में युवाओं की भागीदारी ने यह संकेत दिया है कि वे केवल ऑनलाइन चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि सार्वजनिक विमर्श में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं।

    विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि युवा मतदाता किसी एक राजनीतिक दल का स्थायी समर्थन आधार नहीं माने जा सकते। यह वर्ग रोजगार, शिक्षा, पारदर्शिता, अवसर और शासन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देता है तथा परिस्थितियों के अनुसार अपना चुनावी निर्णय बदल सकता है। इसी कारण अधिकांश राजनीतिक दल युवाओं से जुड़े विषयों को अपने चुनावी एजेंडे में प्रमुख स्थान देने की तैयारी कर रहे हैं।

    हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि Gen Z अकेले चुनावी परिणाम तय कर देगा, लेकिन इतना स्पष्ट है कि कई राज्यों में युवा मतदाता मुकाबले को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव इस बात की महत्वपूर्ण परीक्षा होंगे कि युवाओं की बढ़ती राजनीतिक भागीदारी किस हद तक चुनावी नतीजों और राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित करती है।

  • 10वीं-12वीं पास युवक रात में बन जाते थे 'फ्रैंक' और 'ब्रूस', अमेरिकन एक्सेंट में करते थे करोड़ों की ठगी

    10वीं-12वीं पास युवक रात में बन जाते थे 'फ्रैंक' और 'ब्रूस', अमेरिकन एक्सेंट में करते थे करोड़ों की ठगी


    ग्वालियर । ग्वालियर के मोहना स्थित होटल जैनपथ में संचालित एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि महज 10वीं और 12वीं तक पढ़े चार युवक रात होते ही अपनी पहचान बदल लेते थे। वे खुद को फ्रैंक, लुईस, ब्रूस और माइकल जैसे विदेशी नामों से परिचित कराते और अमेरिकन एक्सेंट में धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलकर अमेरिकी नागरिकों को अपने जाल में फंसाते थे। शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह ने महज पांच महीने में एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी को अंजाम दिया।

    पुलिस के अनुसार, आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे स्थित होटल जैनपथ के एक कमरे से यह फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा था। यहां से चारों आरोपी अमेरिकी समय के अनुसार रात करीब 9 बजे काम शुरू करते थे और सुबह तक विदेशी नागरिकों को कॉल करते थे। दिन में वे आराम करते थे, जबकि रातभर ठगी का नेटवर्क सक्रिय रहता था।

    जांच में पता चला कि आरोपियों को कॉल करने के लिए पहले से तैयार स्क्रिप्ट दी जाती थी। लैपटॉप स्क्रीन पर मौजूद उसी स्क्रिप्ट को पढ़कर वे खुद को विदेशी कंपनी का प्रतिनिधि बताते और लोगों का भरोसा जीतते थे। कॉलिंग के लिए आवश्यक डेटा और स्क्रिप्ट कथित मास्टरमाइंड प्रबल प्रताप सिंह परिहार उपलब्ध कराता था। आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि विदेशी नागरिकों का डेटा कथित तौर पर डार्क वेब से हासिल किया जाता था।

    पुलिस के मुताबिक, प्रत्येक कॉलर को 10 घंटे की शिफ्ट में करीब 150 कॉल करना अनिवार्य था। चारों आरोपी मिलकर प्रतिदिन 400 से 500 अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करते थे। इनमें से औसतन 12 से 15 लोग उनके झांसे में आ जाते थे। इसके बाद उनसे गिफ्ट कार्ड, प्रोसेसिंग फीस और अन्य बहानों से पैसे वसूले जाते थे।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह रोजाना लगभग 50 से 70 हजार रुपये की ठगी करता था। इस हिसाब से हर महीने करीब 20 लाख रुपये की अवैध कमाई हो रही थी। पुलिस का अनुमान है कि पिछले पांच महीनों में गिरोह ने एक करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है। हालांकि जांच अभी जारी है और यह रकम आगे बढ़ सकती है।

    पूछताछ में आरोपियों ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिकन एक्सेंट बोलना सीखा था। इसके बाद वे दी गई स्क्रिप्ट का अभ्यास करते थे और उसी के आधार पर विदेशी नागरिकों से बातचीत कर उन्हें ठगी का शिकार बनाते थे। पुलिस अब गिरोह के मास्टरमाइंड, डिजिटल नेटवर्क, वित्तीय लेनदेन और इस साइबर ठगी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

  • 15 दिन बाद सामने आया ग्वालियर की शर्मनाक घटना का वीडियो, युवती से सरेराह बदसलूकी

    15 दिन बाद सामने आया ग्वालियर की शर्मनाक घटना का वीडियो, युवती से सरेराह बदसलूकी


    ग्वालियर । ग्वालियर के सिटी सेंटर क्षेत्र में एक युवती के साथ सार्वजनिक स्थान पर कथित बदसलूकी का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है। वायरल वीडियो में एक युवक युवती का हाथ पकड़कर खींचतान करता दिखाई दे रहा है। इस दौरान युवती के कपड़े फट जाते हैं और वह खुद को संभालने की कोशिश करती नजर आती है। बताया जा रहा है कि यह घटना 12 जुलाई की है, लेकिन इसका वीडियो करीब 15 दिन बाद सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सामने आया।

    जानकारी के अनुसार, युवती कैलाश विहार स्थित एक होटल से ट्रॉली बैग और हैंड बैग लेकर बाहर निकल रही थी। वीडियो में उसके पीछे होटल से तीन-चार युवक भी बाहर आते दिखाई देते हैं। इनमें से एक युवक युवती का हाथ पकड़कर उसे रोकने और खींचने की कोशिश करता है। इसके बाद दोनों के बीच सड़क पर काफी देर तक बहस और धक्का-मुक्की होती है।

    वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि खींचतान के दौरान युवती सड़क पर गिर जाती है। इसी दौरान युवक कथित तौर पर उसकी टी-शर्ट जोर से खींच देता है, जिससे वह फट जाती है। युवती तुरंत अपने कपड़े संभालने की कोशिश करती है, जबकि आसपास मौजूद लोग मूकदर्शक बने रहते हैं और कोई हस्तक्षेप करता नजर नहीं आता।

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई है। यूनिवर्सिटी थाना प्रभारी रवीन्द्र कुमार ने बताया कि वीडियो पुलिस के संज्ञान में आया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह घटना 12 जुलाई की बताई जा रही है। हालांकि अब तक किसी भी पक्ष की ओर से थाने में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।

    पुलिस का कहना है कि वीडियो की सत्यता और घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी संज्ञेय अपराध के तथ्य सामने आते हैं या पीड़िता शिकायत दर्ज कराती है, तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • भागवत कथा से लौट रही बुजुर्ग महिला को तेज रफ्तार बाइक ने मारी टक्कर, 20 फीट तक घसीटा; हालत नाजुक

    भागवत कथा से लौट रही बुजुर्ग महिला को तेज रफ्तार बाइक ने मारी टक्कर, 20 फीट तक घसीटा; हालत नाजुक


    ग्वालियर । ग्वालियर के गिरवाई थाना क्षेत्र में सोमवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे में भागवत कथा सुनकर घर लौट रही बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। तेज रफ्तार और लापरवाही से बाइक चला रहे युवक ने पीछे से महिला को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि महिला करीब 20 फीट तक सड़क पर घिसटती चली गई, जिससे उनके सिर, कंधे, हाथ और कान के पास गंभीर चोटें आईं। फिलहाल महिला की हालत नाजुक बनी हुई है और उनका निजी अस्पताल में इलाज जारी है।

    जानकारी के अनुसार, सरवटे की पहाड़िया निवासी बृजेश कुशवाह ने गिरवाई थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उनकी ताई रामवती कुशवाह और मोहल्ले की ऊषा कुशवाह सोमवार को गिरवाई थाना क्षेत्र स्थित बाबा गार्डन में आयोजित भागवत कथा सुनने गई थीं। शाम करीब 5:45 बजे कथा समाप्त होने के बाद दोनों महिलाएं पैदल अपने घर लौट रही थीं।

    इसी दौरान गिरवाई नाका स्थित गोपाल कुशवाह मैरिज गार्डन के पास पीछे से तेज गति से आ रही मोटरसाइकिल क्रमांक MP07 ND 4307 के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए रामवती कुशवाह को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही वह सड़क पर गिर गईं और काफी दूर तक घिसटती चली गईं। हादसे में उनके सिर, दाहिने हाथ, दाहिने कंधे, दाहिने कान के पास सहित शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोटें आईं।

    घटना के तुरंत बाद मौके पर मौजूद परिजन और स्थानीय लोगों ने घायल महिला को संभाला और तत्काल जयारोग्य अस्पताल (JAH) पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए उन्हें एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार महिला की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।

    हादसे की सूचना मिलने के बाद गिरवाई थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायत के आधार पर बाइक चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने और दुर्घटना करने के संबंध में मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हादसे की भयावहता साफ दिखाई दे रही है।

  • सीएम से मुलाकात क्यों नहीं हो पा रही? किसानों का गुस्सा क्यों भड़का? 5 सवाल-जवाब में समझिए पूरा मामला

    सीएम से मुलाकात क्यों नहीं हो पा रही? किसानों का गुस्सा क्यों भड़का? 5 सवाल-जवाब में समझिए पूरा मामला

    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन एक बार फिर सुर्खियों में है। नर्मदापुरम में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसानों ने प्रदर्शन किया और भोपाल कूच की तैयारी की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। 40 से अधिक किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। किसानों का आरोप है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने का समय तीन बार तय हुआ, लेकिन हर बार अंतिम समय में मुलाकात टाल दी गई। इससे किसानों में नाराजगी और बढ़ गई। आखिर यह आंदोलन क्यों भड़का और इसकी वजह क्या है? आइए 5 सवाल-जवाब में समझते हैं।

    1. किसान अचानक आंदोलन पर क्यों उतर आए?

    इस आंदोलन के पीछे दो बड़े मुद्दे हैं। पहला मुद्दा मूंग की समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी का है। केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार मूंग की खरीद अनुमानित उत्पादन के केवल 25 प्रतिशत तक ही की जा सकती है। जबकि इस वर्ष मूंग का समर्थन मूल्य 8,768 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। किसानों का कहना है कि उनकी अधिकांश उपज खुले बाजार में 6,000 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रही है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    दूसरा बड़ा मुद्दा खाद वितरण के लिए लागू किया गया ई-टोकन सिस्टम है। किसानों का आरोप है कि पोर्टल में तकनीकी खामियां हैं। कई बार सर्वर काम नहीं करता और कई किसानों का टोकन दूसरे जिलों के डिपो के नाम पर जारी हो जाता है, जिससे उन्हें खाद लेने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

    2. मुख्यमंत्री से मुलाकात तीन बार क्यों टली?

    संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि उन्होंने 20 जुलाई को मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से मुलाकात कराने की मांग की थी। पहले 23 जुलाई तक मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया, लेकिन बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद 26 जुलाई की तारीख तय हुई, फिर समय बदलता रहा और आखिर में किसानों को बताया गया कि मुख्यमंत्री दिल्ली रवाना हो गए हैं। इससे किसानों में यह संदेश गया कि सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। हालांकि सरकार की ओर से अब तक मुलाकात टलने की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।

    3. केंद्र और राज्य सरकार का पक्ष क्या है?

    केंद्र सरकार का कहना है कि मध्य प्रदेश को जितना मूंग खरीदने का कोटा मिला है, उसका भी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि स्वीकृत कोटे का बहुत कम हिस्सा ही खरीदा गया है। इसलिए फिलहाल कोटा बढ़ाने का औचित्य नहीं बनता। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से किसानों की शिकायतों पर विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

    4. पुलिस कार्रवाई पर किसानों की आपत्ति क्यों है?

    किसानों का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से भोपाल जाकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें नर्मदापुरम में ही रोक दिया। 40 से ज्यादा नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार बातचीत के बजाय आंदोलन दबाने की कोशिश कर रही है।

    5. अब आगे क्या हो सकता है?

    संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ कर दिया है कि जब तक हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई नहीं होती और सरकार किसानों से औपचारिक बातचीत नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यदि सरकार और किसान संगठनों के बीच जल्द संवाद नहीं हुआ तो आंदोलन प्रदेश के अन्य जिलों तक भी फैल सकता है।

    किसानों की नाराजगी केवल समर्थन मूल्य या खाद वितरण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब यह संवादहीनता का मुद्दा भी बन चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली बातचीत ही तय करेगी कि यह आंदोलन शांत होगा या और व्यापक रूप लेगा।

  • महाकाल की दिव्य भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक, भांग-चंदन का श्रृंगार और राजाधिराज स्वरूप के दर्शन से धन्य हुए श्रद्धालु

    महाकाल की दिव्य भस्म आरती: पंचामृत अभिषेक, भांग-चंदन का श्रृंगार और राजाधिराज स्वरूप के दर्शन से धन्य हुए श्रद्धालु


    उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल ने राजाधिराज स्वरूप में भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। ब्रह्ममुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरे मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार, घंटानाद और हर-हर महादेव के जयघोष से भक्तिमय वातावरण बन गया। बड़ी संख्या में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

    भस्म आरती की शुरुआत गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं के विधिवत पूजन से हुई। इसके बाद भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। फिर दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का विशेष अभिषेक और पूजन संपन्न हुआ। पूरे अनुष्ठान के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे मंदिर का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

    प्रथम घंटानाद के साथ पुजारियों ने भगवान का ध्यान कर हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया। कपूर आरती के बाद भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड का तिलक लगाया गया। इसके बाद उन्हें आभूषणों से अलंकृत कर राजाधिराज स्वरूप में आकर्षक श्रृंगार किया गया। जटाधारी महाकाल के इस दिव्य स्वरूप ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित कर परंपरा के अनुसार भस्म अर्पित की गई। इसके पश्चात भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और मोगरा तथा गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। अंत में फल और मिष्ठान का भोग लगाकर विशेष आरती संपन्न हुई।

    महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल की भस्म आरती को सनातन परंपरा की सबसे विशिष्ट और दिव्य आरतियों में से एक माना जाता है।

    भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर सुख, समृद्धि और मंगल जीवन की कामना की। सावन के पावन माह में महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं और भस्म आरती के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं।

  • वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचयूएल की आय बढ़ी, लेकिन मुनाफे में कमी से शेयर 5 प्रतिशत से अधिक फिसले

    वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही में एचयूएल की आय बढ़ी, लेकिन मुनाफे में कमी से शेयर 5 प्रतिशत से अधिक फिसले


    नई दिल्ली । देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी किए हैं। अप्रैल से जून 2026 की अवधि में कंपनी के स्टैंडअलोन मुनाफे में सालाना आधार पर लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती लागत का असर कंपनी की लाभप्रदता पर साफ दिखाई दिया, जबकि कुल आय में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया भी नकारात्मक रही और शेयर बाजार में कंपनी के शेयरों में पांच प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखने को मिली।

    कंपनी के अनुसार, पहली तिमाही में उसका स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ घटकर 2,631 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 2,732 करोड़ रुपये था। इसी प्रकार कंसोलिडेटेड आधार पर भी कंपनी का मुनाफा करीब 3.17 प्रतिशत घटकर 2,680 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो एक वर्ष पहले इसी अवधि में 2,741 करोड़ रुपये था। इससे स्पष्ट है कि आय में वृद्धि के बावजूद बढ़ते खर्च ने कंपनी के मुनाफे को प्रभावित किया।

    वित्तीय परिणामों में यह भी सामने आया कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान कंपनी की कुल आय में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। इस अवधि में कुल आय सालाना आधार पर लगभग 9.8 प्रतिशत बढ़कर 17,529 करोड़ रुपये पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 15,958 करोड़ रुपये थी। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के उत्पादों की मांग और कारोबार का विस्तार जारी रहा, लेकिन बढ़ी हुई लागत ने आय में हुई वृद्धि का पूरा लाभ मुनाफे में नहीं बदलने दिया।

    कंपनी का कुल खर्च भी इसी अवधि में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा। पहली तिमाही में कुल व्यय करीब 10 प्रतिशत बढ़कर 13,822 करोड़ रुपये हो गया, जबकि एक वर्ष पहले समान अवधि में यह 12,565 करोड़ रुपये था। कंपनी का मानना है कि मध्य पूर्व क्षेत्र में बढ़ी भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण लागत पर अतिरिक्त दबाव बना, जिसका सीधा असर लाभ पर पड़ा।

    कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक प्रिया नायर ने कहा कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती बनाए रखी है। उन्होंने बताया कि सरकार और केंद्रीय बैंक की सक्रिय नीतियों ने आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया, जिससे बाजार में मांग स्थिर बनी रही। उनके अनुसार कंपनी का प्रदर्शन उसके मजबूत ब्रांड पोर्टफोलियो, प्रतिस्पर्धी उत्पादों और रणनीतिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी लगातार बाजार विस्तार, वितरण नेटवर्क को मजबूत करने और अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में निवेश कर रही है। इन पहलों का उद्देश्य दीर्घकालिक विकास को गति देना और बदलते बाजार माहौल में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखना है। कंपनी का विश्वास है कि ये निवेश आने वाले समय में बेहतर व्यावसायिक प्रदर्शन की नींव तैयार करेंगे।

    हालांकि, तिमाही नतीजों के तुरंत बाद शेयर बाजार में निवेशकों की प्रतिक्रिया कमजोर रही। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में दोपहर के कारोबार के दौरान एचयूएल का शेयर लगभग 5.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,052 रुपये पर कारोबार करता दिखाई दिया। इससे यह संकेत मिला कि बाजार ने मुनाफे में आई गिरावट और बढ़ती लागत को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। आने वाली तिमाहियों में कंपनी के लिए लागत नियंत्रण, मांग में निरंतरता और लाभप्रदता में सुधार प्रमुख चुनौतियां और प्राथमिकताएं बनी रहेंगी।

  • इंदौर नगर निगम घोटाला: 103.42 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट

    इंदौर नगर निगम घोटाला: 103.42 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने पेश की 20 हजार पन्नों की चार्जशीट


    इंदौर । इंदौर नगर निगम के बहुचर्चित 103.42 करोड़ रुपये के फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच को आगे बढ़ाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने 32 आरोपियों के खिलाफ करीब 20 हजार पन्नों की विस्तृत चार्जशीट विशेष पीएमएलए अदालत, इंदौर में दाखिल की है। इस मामले में ठेकेदारों के अलावा नगर निगम, लोकल फंड ऑडिट और रेजिडेंट ऑडिट कार्यालय के कई अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया है।

    ईडी ने यह शिकायत 24 जुलाई को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष अदालत में प्रस्तुत की। अदालत ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं और मामले की अगली सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित कर दी है।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत फर्जी बिल, नकली वर्क ऑर्डर, फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज तैयार कर सरकारी धन की निकासी की। जांच में यह भी सामने आया कि रिकॉर्ड में हेरफेर कर नगर निगम से लगभग 103.42 करोड़ रुपये का भुगतान कराया गया, जिसे बाद में विभिन्न माध्यमों से इस्तेमाल किया गया। ईडी इस पूरे लेनदेन को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला मानते हुए इसकी वित्तीय परतों की भी जांच कर रही है।

    चार्जशीट में शामिल दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने आरोप लगाया है कि सरकारी धन की निकासी के लिए व्यवस्थित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और भुगतान प्रक्रिया में अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की जांच की गई और उन्हें आरोपी बनाया गया।

    अब विशेष पीएमएलए अदालत में इस मामले की सुनवाई के दौरान आरोपियों के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों और दस्तावेजों की कानूनी समीक्षा होगी। मामले को इंदौर नगर निगम से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है और आगे की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।