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  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए फार्मा क्षेत्र में अनुसंधान और निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन : पीयूष गोयल

    वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए फार्मा क्षेत्र में अनुसंधान और निवेश को मिलेगा प्रोत्साहन : पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश के फार्मास्युटिकल क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी और नवाचार आधारित बनाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार ऐसा वातावरण तैयार करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, जहां अनुसंधान, नई तकनीक और उन्नत चिकित्सा समाधानों को बढ़ावा मिले। इसके साथ ही आम लोगों तक किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

    हाल ही में इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में फार्मा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के अध्यक्ष डॉ. शारविल पटेल ने किया। बैठक में सरकार और उद्योग जगत के बीच बेहतर सहयोग स्थापित करने तथा भारतीय फार्मा उद्योग को वैश्विक स्तर पर अधिक मजबूत बनाने के उपायों पर विचार किया गया।

    बैठक के दौरान अनुसंधान एवं विकास, क्लीनिकल रिसर्च और उन्नत उपचार तकनीकों में निवेश बढ़ाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। चर्चा में यह भी माना गया कि यदि इन क्षेत्रों में अधिक निवेश आकर्षित किया जाता है तो भारत का फार्मा इनोवेशन इकोसिस्टम और मजबूत होगा तथा नई दवाओं और उपचार पद्धतियों के विकास को गति मिलेगी। इससे देश की वैज्ञानिक क्षमता बढ़ने के साथ-साथ वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति भी मजबूत होगी।

    पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार उद्योग के साथ मिलकर ऐसा अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहती है, जहां नवाचार को प्रोत्साहन मिले और निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़े। उनका मानना है कि अनुसंधान आधारित विकास ही भविष्य में भारतीय फार्मा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विकास की इस प्रक्रिया में आम नागरिकों के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना समान रूप से महत्वपूर्ण रहेगा।

    भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग पहले से ही दुनिया के प्रमुख दवा उद्योगों में गिना जाता है। विशेष रूप से कम लागत वाली जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दुनिया के अनेक देशों में भारतीय दवाओं की मांग लगातार बनी हुई है, जिससे यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसी कारण सरकार घरेलू विनिर्माण क्षमता, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर लगातार पहल कर रही है।

    फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र के हालिया कारोबारी आंकड़े भी इस उद्योग की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाते हैं। वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में इस क्षेत्र में 13.9 अरब डॉलर मूल्य के 65 सौदे दर्ज किए गए। बड़े विदेशी अधिग्रहण को अलग रखने के बाद भी कुल सौदों का मूल्य पिछली तिमाही की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक रहा, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत माना जा रहा है।

    इसी अवधि में विलय एवं अधिग्रहण गतिविधियों में भी उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। कुल 35 एमएंडए सौदों का मूल्य 13.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया। लेनदेन की संख्या में तिमाही आधार पर 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि कुल सौदों का मूल्य अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। उल्लेखनीय है कि कुल एमएंडए मूल्य में लगभग 96 प्रतिशत योगदान विदेशी अधिग्रहणों का रहा, जिससे स्पष्ट होता है कि भारतीय फार्मा कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मौजूदगी लगातार मजबूत कर रही हैं।

  • अवैध बैनर-होर्डिंग पर हाई कोर्ट सख्त: शिकायत मिलते ही 24 घंटे में कार्रवाई, जिम्मेदारों पर एफआईआर के निर्देश

    अवैध बैनर-होर्डिंग पर हाई कोर्ट सख्त: शिकायत मिलते ही 24 घंटे में कार्रवाई, जिम्मेदारों पर एफआईआर के निर्देश


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में अब अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर-होर्डिंग लगाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस मामले में अहम आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायत मिलने के 24 घंटे के भीतर अवैध बैनर और होर्डिंग हटाए जाएं। इतना ही नहीं, नियमों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।

    न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने यह आदेश वैध होर्डिंग पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगाए जाने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिया। अदालत ने कहा कि जबलपुर हाई कोर्ट द्वारा वर्ष 2022 में दिए गए निर्देशों और 1 नवंबर 2019 के शासन परिपत्र का अक्षरशः पालन किया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि सार्वजनिक स्थानों पर नियमों के विपरीत लगाए गए विज्ञापन और बैनर किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं।

    इस फैसले का प्रभाव भोपाल सहित पूरे मध्य प्रदेश में देखने को मिलेगा। भोपाल नगर निगम के अधिकारियों ने भी संकेत दिए हैं कि अदालत के आदेश के अनुरूप विशेष अभियान चलाकर अवैध राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक होर्डिंग हटाए जाएंगे। नगर निगम के अनुसार पहले चरण में सर्वे कराया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले सभी स्ट्रक्चर चिन्हित किए जाएंगे। अयोध्या बायपास क्षेत्र में पहले ही पांच अवैध यूनिपोल हटाए जा चुके हैं। साथ ही संबंधित संस्था की बैंक गारंटी जब्त करने और बकाया शुल्क वसूलने जैसी कार्रवाई भी की गई है।

    आउटडोर मीडिया नियम-2017 के अनुसार बिना अनुमति लगाए गए फ्लेक्स, पोस्टर, कटआउट, सुरक्षा प्रमाणपत्र के बिना स्थापित विज्ञापन संरचनाएं, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के प्रतिबंधित दायरे में लगे होर्डिंग, ट्रैफिक संकेतों को ढंकने वाले विज्ञापन, फुटपाथ और सर्विस रोड पर लगाए गए यूनिपोल तथा निर्धारित मानकों से बड़े या असुरक्षित स्ट्रक्चर पूरी तरह अवैध माने जाते हैं।

    भोपाल में वीआईपी रोड, एमपी नगर, लिंक रोड, होशंगाबाद रोड, रायसेन रोड, अयोध्या बायपास, बैरसिया रोड, लालघाटी और गांधी नगर सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में बड़ी संख्या में ऐसे होर्डिंग लगे होने की बात सामने आई है जो नियमों के अनुरूप नहीं हैं। अनुमान है कि शहर में लगभग 20 प्रतिशत होर्डिंग किसी न किसी रूप में नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।

    दरअसल, यह मामला इंदौर की एक विज्ञापन कंपनी द्वारा दायर याचिका के बाद अदालत पहुंचा था। कंपनी का कहना था कि उसने नगर निगम से विधिवत अनुमति लेकर विज्ञापन संरचनाएं स्थापित की हैं, लेकिन उन पर बिना अनुमति राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक बैनर लगा दिए जाते हैं। इससे न केवल संरचनाओं को नुकसान पहुंचता है बल्कि कंपनी को आर्थिक हानि भी होती है।

    अदालत के इस आदेश के बाद उम्मीद की जा रही है कि शहरों में अवैध बैनर और होर्डिंग पर प्रभावी अंकुश लगेगा। इससे यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, सार्वजनिक स्थानों की सुंदरता बढ़ेगी, वैध विज्ञापन एजेंसियों के हित सुरक्षित रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी साफ होगा

  • भोजशाला विवाद: चालीस पीर वाले प्रस्ताव पर आपत्ति के बाद प्रशासन ने तलाशे दो नए स्थान, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अहम

    भोजशाला विवाद: चालीस पीर वाले प्रस्ताव पर आपत्ति के बाद प्रशासन ने तलाशे दो नए स्थान, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अहम


    धार । धार स्थित भोजशाला परिसर में जुम्मे की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान तय करने को लेकर प्रशासन ने अपनी कवायद तेज कर दी है। मुस्लिम समाज की ओर से पहले प्रस्तावित स्थान पर आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद अब जिला प्रशासन ने नए विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है। इसी क्रम में सोमवार को अधिकारियों ने डिसलरी रोड क्षेत्र में दो अलग-अलग भूखंडों का निरीक्षण किया, जिन्हें संभावित वैकल्पिक स्थल के रूप में देखा जा रहा है।

    प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार डिसलरी रोड स्थित सर्वे नंबर 509 और सर्वे नंबर 639 की लगभग एक-एक एकड़ जमीन का निरीक्षण किया गया है। इन स्थानों को इसलिए देखा जा रहा है ताकि भविष्य में जुम्मे की नमाज के लिए एक उपयुक्त और व्यवस्थित वैकल्पिक व्यवस्था की जा सके। दोनों स्थल भोजशाला परिसर से लगभग 500 मीटर की दूरी पर बताए जा रहे हैं।

    इससे पहले चालीस पीर के समीप प्रस्तावित स्थान को लेकर मुस्लिम समाज ने आपत्ति जताई थी। इसके बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया और अब इस संबंध में दायर याचिका पर 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। माना जा रहा है कि शीर्ष अदालत के निर्देशों के बाद ही जुम्मे की नमाज के लिए अंतिम वैकल्पिक स्थान तय किया जाएगा।

    कमाल मौलाना सोसायटी के सदर अब्दुल समद का कहना है कि प्रशासन द्वारा जिन नए स्थानों का निरीक्षण किया गया है, उनकी जानकारी अभी समाज को औपचारिक रूप से नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए अदालत के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

    वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि संभावित विकल्पों का निरीक्षण केवल वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारियों के तहत किया गया है। अधिकारियों के अनुसार डिसलरी रोड स्थित सर्वे नंबर 509 और 639 की जमीन का मौके पर जाकर निरीक्षण किया गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन के पास उपयुक्त विकल्प उपलब्ध रहे।

    अब पूरे मामले में 29 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई अहम मानी जा रही है। अदालत के निर्देशों के बाद ही आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और जुम्मे की नमाज के लिए अंतिम स्थान को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

  • एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा वित्त वर्ष 26 में 22,238 करोड़ रुपये पहुंचा, सुधार प्रक्रिया लंबी रहने के संकेत

    एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा वित्त वर्ष 26 में 22,238 करोड़ रुपये पहुंचा, सुधार प्रक्रिया लंबी रहने के संकेत

    नई दिल्ली । टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया और उसकी सहायक बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस को वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त रूप से 22,238 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। यह पिछले वित्त वर्ष के 10,859 करोड़ रुपये के घाटे की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इसी अवधि में दोनों एयरलाइंस की संयुक्त आय में भी लगभग 9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी का पुनर्गठन अभी चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है।

    वार्षिक वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों एयरलाइंस की कुल संयुक्त आय 71,870 करोड़ रुपये रही। परिचालन गतिविधियों के बावजूद बढ़ते खर्च, आधुनिकीकरण की प्रक्रिया और अन्य परिचालन चुनौतियों का असर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर दिखाई दिया। हालांकि प्रबंधन का कहना है कि वर्तमान चरण को लंबे समय तक चलने वाली परिवर्तन प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।

    एयर इंडिया ने इस दौरान 51,452 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि उसका शुद्ध घाटा 15,368 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर एयर इंडिया एक्सप्रेस का राजस्व 19,088 करोड़ रुपये दर्ज किया गया और कंपनी को 6,767 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। दोनों कंपनियों के संयुक्त परिणाम बताते हैं कि एयरलाइन समूह अभी भी व्यापक पुनर्गठन और निवेश के दौर में है।

    वर्तमान शेयरधारिता संरचना के अनुसार एयर इंडिया में 73.82 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा संस के पास है, जबकि 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी सिंगापुर एयरलाइंस के स्वामित्व में है। इसके अलावा 1.08 प्रतिशत हिस्सेदारी कर्मचारियों के पास है, जो वर्ष 2022 में निजीकरण के बाद लागू की गई कर्मचारी शेयर लाभ योजना के तहत प्रदान की गई थी।

    एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शेयरधारकों के नाम अपने संदेश में कहा कि किसी वैश्विक स्तर की एयरलाइन का निर्माण अल्प अवधि में संभव नहीं होता। उनके अनुसार एयर इंडिया के व्यापक परिवर्तन को कुछ तिमाहियों के प्रदर्शन से नहीं आंका जाना चाहिए, क्योंकि ऐसी संस्थाओं का विकास वर्षों की निरंतर प्रक्रिया का परिणाम होता है।

    उन्होंने कहा कि एयर इंडिया का पुनरुद्धार लगभग पांच से दस वर्षों की यात्रा है। जब टाटा समूह ने वर्ष 2022 में एयरलाइन का अधिग्रहण किया था, तब कंपनी कई परिचालन और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही थी। इन चुनौतियों में पुराने सिस्टम और प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण, विमान बेड़े का नवीनीकरण, तकनीकी विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाना, संगठनात्मक संस्कृति में सुधार और वैश्विक स्तर की परिचालन क्षमता विकसित करना शामिल है।

    चेयरमैन ने यह भी संकेत दिया कि विमानों के पुर्जों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में लंबे समय से बनी हुई बाधाओं ने भी सुधार प्रक्रिया की गति को प्रभावित किया है। इसके बावजूद कंपनी अपने बेड़े के विस्तार, सेवा गुणवत्ता में सुधार और परिचालन दक्षता बढ़ाने की दिशा में लगातार निवेश कर रही है।

    वित्तीय परिणाम यह दर्शाते हैं कि एयर इंडिया का पुनर्गठन अभी शुरुआती चरणों से आगे बढ़ते हुए एक लंबी रणनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। टाटा समूह एयरलाइन को प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से लगातार निवेश कर रहा है। आने वाले वर्षों में आधुनिकीकरण, परिचालन सुधार और सेवा विस्तार की योजनाओं का प्रभाव कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर दिखाई देने की उम्मीद की जा रही है।

  • बारिश में जानलेवा रोमांच! प्रतिबंध के बावजूद झरनों तक पहुंच रहे लोग, पांच साल में 70 मौतों के बाद भी नहीं सबक

    बारिश में जानलेवा रोमांच! प्रतिबंध के बावजूद झरनों तक पहुंच रहे लोग, पांच साल में 70 मौतों के बाद भी नहीं सबक


    इंदौर । बारिश का मौसम आते ही इंदौर और आसपास के झरने व प्राकृतिक पर्यटन स्थल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने लगते हैं। हालांकि यह रोमांच कई बार जानलेवा साबित हो रहा है। प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की बार-बार चेतावनी के बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही थमने का नाम नहीं ले रही है। नतीजा यह है कि पिछले पांच वर्षों में इंदौर और महू क्षेत्र के 13 प्रमुख पिकनिक स्पॉट पर 70 युवाओं की जान जा चुकी है। इसके बावजूद लोग बैरिकेड्स पार कर और जंगल के रास्तों से प्रतिबंधित इलाकों तक पहुंच रहे हैं।

    बीते दो दिनों में ही इंदौर के तीन लोगों की अलग-अलग हादसों में मौत हो चुकी है। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लगातार हादसों और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बावजूद लोग अपनी जान जोखिम में डालने से क्यों नहीं बच रहे हैं। सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो बनाने की चाहत भी इस लापरवाही की बड़ी वजह मानी जा रही है।

    महू और उसके आसपास स्थित कई पर्यटन स्थलों पर मानसून के दौरान प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। इनमें तिंछा फॉल, चोरल फॉल, चोरल डैम, शीतला माता फॉल, कजलीगढ़, गेंदी कुंड, जामन्या कुंड, मोहदी फॉल, रतवी फॉल, लोधिया कुंड, जूनापानी, चिड़िया भड़क, बामनिया कुंड, जोगी भड़क और हत्यारी खो जैसे स्थान शामिल हैं। इन जगहों पर तेज जलधारा, फिसलन, गहरी खाई और अचानक बढ़ते जलस्तर के कारण हर साल हादसे होते हैं। इसके बावजूद कई पर्यटक चेतावनी बोर्ड और बैरिकेड्स को नजरअंदाज कर खतरनाक इलाकों तक पहुंच जाते हैं।

    हाल ही में महेश्वर के सहस्त्रधारा घाट पर हुआ हादसा भी ऐसी ही लापरवाही का उदाहरण है। इंदौर निवासी अजीत हाड़ा अपने परिवार और दोस्तों के साथ घूमने पहुंचे थे। नर्मदा की तेज धारा में बहने के बाद उनका शव करीब 200 मीटर दूर एक खोह में फंसा मिला। यह घटना उनके परिजनों की आंखों के सामने हुई और पूरे परिवार को गहरा सदमा दे गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के दौरान झरनों और नदियों का जलस्तर कुछ ही मिनटों में तेजी से बढ़ सकता है। ऊपर के इलाकों में हुई बारिश का असर नीचे अचानक दिखाई देता है, जिससे सुरक्षित दिखने वाली जगह भी पलभर में खतरनाक बन जाती है। ऐसे में बैरिकेड्स और प्रतिबंध केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं।

    प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि मानसून के दौरान प्रतिबंधित पिकनिक स्पॉट और झरनों के मुहानों तक जाने से बचें। थोड़ी सी लापरवाही न केवल अपनी बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल सकती है। रोमांच का आनंद तभी तक अच्छा है, जब तक वह सुरक्षित हो। चेतावनियों को नजरअंदाज करना साहस नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही है।

  • सोना और चांदी कमजोर रुख के साथ खुले, निवेशकों की सतर्कता के बीच दोनों धातुओं के भाव लुढ़के

    सोना और चांदी कमजोर रुख के साथ खुले, निवेशकों की सतर्कता के बीच दोनों धातुओं के भाव लुढ़के

    नई दिल्ली । मंगलवार को घरेलू सर्राफा और वायदा बाजार में सोना तथा चांदी दोनों कीमती धातुओं की कीमतों की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिकी केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति बैठक से पहले निवेशकों के सतर्क रुख का असर भारतीय बाजार पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। कारोबार की शुरुआत से ही दोनों धातुओं में बिकवाली का दबाव बना रहा, जिसके कारण कीमतों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने के 5 अगस्त 2026 डिलीवरी वाले वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछले कारोबारी सत्र के बंद भाव 1,43,063 रुपये प्रति 10 ग्राम की तुलना में 1,42,353 रुपये प्रति 10 ग्राम पर हुई। शुरुआती कारोबार के दौरान सोने की कीमतों में लगातार दबाव बना रहा और सुबह लगभग 10 बजे तक यह 1,129 रुपये यानी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,41,934 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।

    कारोबार के दौरान सोने ने 1,41,808 रुपये प्रति 10 ग्राम का निचला स्तर भी छुआ, जबकि दिन का उच्चतम स्तर 1,42,353 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। यह संकेत देता है कि बाजार में खरीदारी की तुलना में बिकवाली का दबाव अधिक बना रहा और निवेशकों ने फिलहाल सतर्क रणनीति अपनाई।

    चांदी की कीमतों में भी इसी तरह की कमजोरी देखने को मिली। एमसीएक्स पर 4 सितंबर 2026 डिलीवरी वाले चांदी के वायदा अनुबंध की शुरुआत पिछले बंद भाव 2,21,173 रुपये प्रति किलोग्राम के मुकाबले 2,20,555 रुपये प्रति किलोग्राम पर हुई। शुरुआती कारोबार में गिरावट और तेज हुई तथा सुबह तक चांदी का भाव 3,940 रुपये यानी करीब 1.78 प्रतिशत टूटकर 2,17,233 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।

    दिन के शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी ने 2,16,592 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम स्तर दर्ज किया, जबकि इसका उच्चतम स्तर 2,20,555 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों की सतर्कता का असर चांदी के बाजार पर भी समान रूप से दिखाई दिया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं का रुख कमजोर रहा। वैश्विक कारोबार के दौरान सोने की कीमत लगभग 0.76 प्रतिशत गिरकर 4,045 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई, जबकि चांदी में 2.06 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव लगभग 57.53 डॉलर प्रति औंस रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार की यह कमजोरी भारतीय बाजार के लिए भी दबाव का प्रमुख कारण बनी।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय बैठक शुरू होने से पहले निवेशक किसी बड़े निवेश निर्णय से बच रहे हैं। बैठक के नतीजे और ब्याज दरों पर आने वाला फैसला वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी वजह से सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों में फिलहाल सीमित गतिविधि देखने को मिल रही है।

    विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने तथा हालिया महंगाई और रोजगार से जुड़े आर्थिक आंकड़ों ने यह संभावना मजबूत की है कि फेडरल रिजर्व अपनी जुलाई बैठक में ब्याज दरों को यथावत रख सकता है। हालांकि तेल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी भविष्य में महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है, लेकिन फिलहाल बाजार की नजर पूरी तरह फेड के फैसले पर टिकी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में सोना और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

  • 1000 करोड़ की धोखाधड़ी केस में बड़ा खुलासा: हवाला से भोपाल पहुंचता था करोड़ों का कैश, कोडवर्ड था '100 दाने'

    1000 करोड़ की धोखाधड़ी केस में बड़ा खुलासा: हवाला से भोपाल पहुंचता था करोड़ों का कैश, कोडवर्ड था '100 दाने'


    कटनी  कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों से जुड़े लगभग 1000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार रायपुर के खनन कारोबारी महेंद्र गोयनका को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि गोयनका का एक संगठित हवाला नेटवर्क भोपाल तक फैला हुआ था, जिसके जरिए करोड़ों रुपये की नकदी रियल एस्टेट कारोबार में खपाई जाती थी। इस मामले में कोलकाता पुलिस पहले ही महेंद्र गोयनका को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि जांच एजेंसियां अब उसके आर्थिक नेटवर्क की परतें खोल रही हैं।

    जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि भोपाल के रियल एस्टेट कारोबारी राजेश शर्मा और महेंद्र गोयनका के बीच लंबे समय से कारोबारी संबंध थे। दिसंबर 2024 में हुई छापेमारी के दौरान जब्त रिकॉर्ड, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और वित्तीय दस्तावेजों से यह संकेत मिले कि भोपाल के नीलबड़, रातीबड़, चंदनपुरा, फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी क्षेत्र में जमीन खरीदने के लिए हवाला के जरिए बड़ी मात्रा में नकदी पहुंचाई गई।

    जांच एजेंसियों के अनुसार जमीन खरीदने का पूरा मॉडल दो हिस्सों में बांटा गया था। पहला भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया जाता था, जिसे रजिस्ट्री में दर्ज किया जाता था। दूसरा बड़ा हिस्सा नकद के रूप में हवाला चैनल के जरिए जमीन विक्रेताओं तक पहुंचाया जाता था। इसी प्रक्रिया के जरिए टैक्स चोरी के साथ-साथ करोड़ों रुपये का काला धन भी रियल एस्टेट में लगाया गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि रायपुर से भोपाल तक नकदी पहुंचाने की जिम्मेदारी महेंद्र गोयनका के कर्मचारी अशोक रैकवार के पास थी, जबकि भोपाल में रकम प्राप्त करने और आगे जमीन मालिकों तक पहुंचाने का काम राजेश शर्मा के कर्मचारी राजेश तिवारी संभालते थे। पूरे लेनदेन का रिकॉर्ड एक अन्य कर्मचारी दीपक तुलसानी रखता था। अधिकारियों के मुताबिक एक बार में करीब 8 करोड़ रुपये तक की नकदी हवाला के जरिए भेजी गई।

    सबसे चौंकाने वाला खुलासा लेनदेन के तरीके को लेकर हुआ है। जांच में पता चला कि हवाला नेटवर्क में पहचान सुनिश्चित करने के लिए व्हाट्सएप पर 10 और 20 रुपये के नोट की तस्वीरें भेजी जाती थीं। जब दोनों पक्षों के पास एक जैसी तस्वीर होती थी, तभी नकदी की डिलीवरी की जाती थी। इसके अलावा बातचीत में “दाने” शब्द का इस्तेमाल कोडवर्ड के रूप में किया जाता था। “100 दाने” का मतलब एक करोड़ रुपये माना जाता था। राजेश शर्मा ने अपने मोबाइल में महेंद्र गोयनका का नंबर “एमजी भाई वन” नाम से सेव कर रखा था और लेनदेन का पूरा हिसाब भी इसी नाम से दर्ज मिलता है।

    जांच में यह भी सामने आया कि चंदनपुरा क्षेत्र में गोयनका की कंपनियों निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड, यूरो प्रतीक और यूरा पेलेट्स के नाम पर करीब 54 एकड़ जमीन खरीदी गई। इस सौदे की वास्तविक कीमत करीब 110 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि रजिस्ट्री में केवल 65.10 करोड़ रुपये का भुगतान दर्ज किया गया। बाकी लगभग 45 करोड़ रुपये हवाला के जरिए नकद पहुंचाए गए। इसी तरह फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी गांव में भी कई जमीनों की खरीद में बैंकिंग और नकद भुगतान का मिश्रित मॉडल अपनाने के आरोप सामने आए हैं।

    अब 10 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद महेंद्र गोयनका को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां उसकी जमानत याचिका पर भी सुनवाई हो सकती है। वहीं इस कथित 1000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में गोयनका की पत्नी, भाई सहित छह आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां पूरे हवाला नेटवर्क, काले धन के प्रवाह और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

    Tags: भोपाल, महेंद्र गोयनका, हवाला नेटवर्क, संजय पाठक, रियल एस्टेट, काला धन, मध्य प्रदेशजिले के विजयराघवगढ़ से विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों से जुड़े लगभग 1000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार रायपुर के खनन कारोबारी महेंद्र गोयनका को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि गोयनका का एक संगठित हवाला नेटवर्क भोपाल तक फैला हुआ था, जिसके जरिए करोड़ों रुपये की नकदी रियल एस्टेट कारोबार में खपाई जाती थी। इस मामले में कोलकाता पुलिस पहले ही महेंद्र गोयनका को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि जांच एजेंसियां अब उसके आर्थिक नेटवर्क की परतें खोल रही हैं।

    जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि भोपाल के रियल एस्टेट कारोबारी राजेश शर्मा और महेंद्र गोयनका के बीच लंबे समय से कारोबारी संबंध थे। दिसंबर 2024 में हुई छापेमारी के दौरान जब्त रिकॉर्ड, मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और वित्तीय दस्तावेजों से यह संकेत मिले कि भोपाल के नीलबड़, रातीबड़, चंदनपुरा, फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी क्षेत्र में जमीन खरीदने के लिए हवाला के जरिए बड़ी मात्रा में नकदी पहुंचाई गई।

    जांच एजेंसियों के अनुसार जमीन खरीदने का पूरा मॉडल दो हिस्सों में बांटा गया था। पहला भुगतान बैंकिंग माध्यम से किया जाता था, जिसे रजिस्ट्री में दर्ज किया जाता था। दूसरा बड़ा हिस्सा नकद के रूप में हवाला चैनल के जरिए जमीन विक्रेताओं तक पहुंचाया जाता था। इसी प्रक्रिया के जरिए टैक्स चोरी के साथ-साथ करोड़ों रुपये का काला धन भी रियल एस्टेट में लगाया गया।

    जांच में यह भी सामने आया कि रायपुर से भोपाल तक नकदी पहुंचाने की जिम्मेदारी महेंद्र गोयनका के कर्मचारी अशोक रैकवार के पास थी, जबकि भोपाल में रकम प्राप्त करने और आगे जमीन मालिकों तक पहुंचाने का काम राजेश शर्मा के कर्मचारी राजेश तिवारी संभालते थे। पूरे लेनदेन का रिकॉर्ड एक अन्य कर्मचारी दीपक तुलसानी रखता था। अधिकारियों के मुताबिक एक बार में करीब 8 करोड़ रुपये तक की नकदी हवाला के जरिए भेजी गई।

    सबसे चौंकाने वाला खुलासा लेनदेन के तरीके को लेकर हुआ है। जांच में पता चला कि हवाला नेटवर्क में पहचान सुनिश्चित करने के लिए व्हाट्सएप पर 10 और 20 रुपये के नोट की तस्वीरें भेजी जाती थीं। जब दोनों पक्षों के पास एक जैसी तस्वीर होती थी, तभी नकदी की डिलीवरी की जाती थी। इसके अलावा बातचीत में “दाने” शब्द का इस्तेमाल कोडवर्ड के रूप में किया जाता था। “100 दाने” का मतलब एक करोड़ रुपये माना जाता था। राजेश शर्मा ने अपने मोबाइल में महेंद्र गोयनका का नंबर “एमजी भाई वन” नाम से सेव कर रखा था और लेनदेन का पूरा हिसाब भी इसी नाम से दर्ज मिलता है।

    जांच में यह भी सामने आया कि चंदनपुरा क्षेत्र में गोयनका की कंपनियों निसर्ग इस्पात प्राइवेट लिमिटेड, यूरो प्रतीक और यूरा पेलेट्स के नाम पर करीब 54 एकड़ जमीन खरीदी गई। इस सौदे की वास्तविक कीमत करीब 110 करोड़ रुपये बताई गई, जबकि रजिस्ट्री में केवल 65.10 करोड़ रुपये का भुगतान दर्ज किया गया। बाकी लगभग 45 करोड़ रुपये हवाला के जरिए नकद पहुंचाए गए। इसी तरह फतेहपुर डोबरा, महुआखेड़ा और सेमरी गांव में भी कई जमीनों की खरीद में बैंकिंग और नकद भुगतान का मिश्रित मॉडल अपनाने के आरोप सामने आए हैं।

    अब 10 दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद महेंद्र गोयनका को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां उसकी जमानत याचिका पर भी सुनवाई हो सकती है। वहीं इस कथित 1000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी मामले में गोयनका की पत्नी, भाई सहित छह आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां पूरे हवाला नेटवर्क, काले धन के प्रवाह और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

  • भारतीय शेयर बाजार ने सपाट रुख के साथ की शुरुआत, आईटी सेक्टर में खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

    भारतीय शेयर बाजार ने सपाट रुख के साथ की शुरुआत, आईटी सेक्टर में खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

    नई दिल्ली । सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने लगभग सपाट रुख के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी सीमित बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार में निवेशकों का रुझान संतुलित रहा, जबकि आईटी क्षेत्र के शेयरों में अच्छी खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को शुरुआती समर्थन प्रदान किया। दूसरी ओर, ऊर्जा, रक्षा और सार्वजनिक क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रमुख सेक्टरों में दबाव भी देखने को मिला।

    कारोबार की शुरुआत में सेंसेक्स करीब 32 अंकों की मामूली बढ़त के साथ 76,861 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 6 अंकों की बढ़त के साथ 24,002 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार से संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल बड़े फैसले लेने के बजाय चुनिंदा सेक्टरों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं और बाजार सीमित दायरे में बना हुआ है।

    आईटी सेक्टर ने शुरुआती कारोबार में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया। निफ्टी आईटी सूचकांक दो प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ सबसे अधिक लाभ दर्ज करने वाला सेक्टर रहा। इसके अलावा रियल्टी, एफएमसीजी, मीडिया, सर्विसेज, हेल्थकेयर और फार्मा से जुड़े शेयरों में भी सकारात्मक रुख दिखाई दिया। इन क्षेत्रों में खरीदारी से बाजार को स्थिरता मिली और प्रमुख सूचकांक शुरुआती बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।

    इसके विपरीत रक्षा, ऊर्जा, सार्वजनिक उपक्रम, पीएसयू बैंक, मैन्युफैक्चरिंग, कमोडिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन क्षेत्रों में बिकवाली के कारण बाजार की तेजी सीमित रही और निवेशकों ने सतर्कता के साथ कारोबार किया। इससे स्पष्ट हुआ कि विभिन्न सेक्टरों में निवेशकों का रुख फिलहाल एक समान नहीं है।

    लार्जकैप कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता रहा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में हल्की कमजोरी दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों की गतिविधि संतुलित बनी हुई है और फिलहाल बड़े उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिल रहे हैं।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में टीसीएस, टेक महिंद्रा, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एशियन पेंट्स, सन फार्मा, इंडिगो, आईटीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी और बजाज फिनसर्व के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। वहीं भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, एसबीआई, टाटा स्टील, टाइटन, भारती एयरटेल, ट्रेंट, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में शुरुआती कमजोरी देखी गई।

    वैश्विक बाजारों का रुख भी मिश्रित रहा। एशियाई बाजारों में टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और सोल के प्रमुख सूचकांक दबाव में कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार पिछले कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए थे। अंतरराष्ट्रीय संकेतों का असर भारतीय बाजार पर सीमित रूप से दिखाई दिया और निवेशकों ने घरेलू कारकों पर अधिक ध्यान दिया।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है, लेकिन बीच-बीच में मुनाफावसूली और सीमित दायरे का कारोबार जारी रह सकता है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भी निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बाद ब्रेंट क्रूड 85 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना हुआ है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 82 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। कम होती तेल कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था और बाजार की धारणा को आगे भी समर्थन दे सकती हैं।

  • वजन घटाने का शॉर्टकट पड़ सकता है भारी सस्ता हुआ सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन बिना डॉक्टर सलाह इस्तेमाल से बढ़ीं स्वास्थ्य समस्याएं

    वजन घटाने का शॉर्टकट पड़ सकता है भारी सस्ता हुआ सेमाग्लूटाइड इंजेक्शन बिना डॉक्टर सलाह इस्तेमाल से बढ़ीं स्वास्थ्य समस्याएं


    नई दिल्ली । वजन कम करने की बढ़ती होड़ और सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे फिटनेस ट्रेंड के बीच डायबिटीज और मोटापे के इलाज में इस्तेमाल होने वाला सेमाग्लूटाइड आधारित इंजेक्शन अब नई चिंता का कारण बन गया है। पहले यह इंजेक्शन केवल विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में गंभीर मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों को दिया जाता था लेकिन इसकी कीमत कम होने के बाद अब बड़ी संख्या में लोग केवल पतला दिखने की चाह में बिना चिकित्सकीय सलाह इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रवृत्ति भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है।

    मार्च 2026 में सेमाग्लूटाइड का पेटेंट समाप्त होने के बाद इसके जेनेरिक संस्करण बाजार में उपलब्ध होने लगे। पहले जहां इसका प्री फिल्ड पेन लगभग 20 हजार रुपए में मिलता था वहीं अब इसकी कीमत घटकर करीब 1500 रुपए रह गई है। कीमत में आई इस बड़ी गिरावट के बाद इसकी मांग में अचानक कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। एमपी फार्मासिस्ट एसोसिएशन के अनुसार पहले जहां हर महीने लगभग 4 हजार इंजेक्शन की मांग रहती थी वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 19 हजार प्रति माह तक पहुंच गई है।

    चिकित्सकों का कहना है कि सेमाग्लूटाइड मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज के इलाज में प्रभावी दवा है लेकिन इसका उपयोग केवल विशेषज्ञ की सलाह और नियमित चिकित्सकीय निगरानी में ही किया जाना चाहिए। एंडोक्राइन विशेषज्ञ डॉ. मनुज शर्मा के अनुसार यह दवा मरीज की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए धीरे धीरे निर्धारित खुराक में शुरू की जाती है। बिना जांच और सही डोज के इसका उपयोग गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस इंजेक्शन के शुरुआती दुष्प्रभावों में मतली उल्टी पेट भरा भरा महसूस होना कब्ज दस्त और कमजोरी जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। कुछ मामलों में शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन पित्ताशय में पथरी पित्ताशय की सूजन और अग्न्याशय में सूजन जैसी गंभीर जटिलताएं भी सामने आ सकती हैं। यही कारण है कि डॉक्टर लगातार लोगों से बिना चिकित्सकीय सलाह इस दवा का उपयोग नहीं करने की अपील कर रहे हैं।

    भोपाल के अस्पतालों में भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां लोग केवल जल्दी वजन कम करने की इच्छा से यह इंजेक्शन लेने लगे। एक 27 वर्षीय युवती ने शादी से पहले तेजी से वजन घटाने के लिए इसका उपयोग शुरू किया लेकिन कुछ ही सप्ताह बाद तेज पेट दर्द उल्टी और गंभीर डिहाइड्रेशन के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। जांच में पित्ताशय में पथरी और शरीर में पानी की गंभीर कमी पाई गई जिसके बाद लंबे इलाज से उसकी स्थिति सामान्य हो सकी।

    इसी तरह 34 वर्षीय एक महिला ने सोशल मीडिया से प्रभावित होकर बिना डॉक्टर की सलाह तीन महीने तक यह इंजेक्शन लिया। इस दौरान उसका वजन लगभग 14 किलो कम हो गया लेकिन लगातार कमजोरी और उल्टी की शिकायत शुरू हो गई। चिकित्सकीय जांच के बाद डॉक्टरों ने तुरंत इंजेक्शन बंद कराया और उपचार शुरू किया।

    सीनियर गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. प्रणव रघुवंशी का कहना है कि सेमाग्लूटाइड हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त दवा नहीं है। इसे शुरू करने से पहले मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री मोटापे की गंभीरता अन्य बीमारियों और संभावित जोखिमों का विस्तृत मूल्यांकन आवश्यक होता है। केवल वजन घटाने या आकर्षक दिखने के उद्देश्य से इसका उपयोग करना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ जीवनशैली संतुलित आहार नियमित व्यायाम और चिकित्सकीय सलाह के साथ किया गया उपचार ही सुरक्षित और स्थायी तरीके से वजन नियंत्रित करने का सबसे बेहतर विकल्प है। किसी भी दवा को सोशल मीडिया के ट्रेंड या दूसरों की सलाह पर लेने के बजाय हमेशा योग्य चिकित्सक से परामर्श करना जरूरी है।

  • उज्जैन में भोर होते ही गूंजा हर हर महादेव पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए दिव्य दर्शन

    उज्जैन में भोर होते ही गूंजा हर हर महादेव पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए दिव्य दर्शन


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान आध्यात्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा मंदिर परिसर हर हर महादेव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। गर्भगृह में विराजमान भगवान महाकाल सहित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद बाबा महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष स्नान कराया गया। इस दिव्य अनुष्ठान के बाद भगवान महाकाल को राजाधिराज स्वरूप में अलंकृत कर भक्तों को दिव्य दर्शन कराए गए।

    भस्म आरती की शुरुआत प्रथम घंटानाद के साथ हुई। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच भगवान महाकाल का ध्यान कर हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया। इसके पश्चात कपूर आरती संपन्न हुई और भगवान के मस्तक पर भांग चंदन तथा त्रिपुंड का तिलक लगाया गया। जटाधारी बाबा महाकाल का श्रृंगार अत्यंत आकर्षक और भव्य स्वरूप में किया गया जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को परंपरा के अनुसार वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से संपन्न इस विशेष अनुष्ठान का सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं और उन पर विशेष कृपा बरसाते हैं।

    भस्म अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल को रजत निर्मित शेषनाग का मुकुट रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और आकर्षक आभूषणों से सजाया गया। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाओं से भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया। अंत में फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर विश्व कल्याण और सुख समृद्धि की कामना की गई।

    भस्म आरती के दौरान देश और विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा दिखाई दिया। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर परिवार की सुख समृद्धि उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में मंगल की कामना की।

    महाकाल मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन आस्था की जीवंत परंपरा है। प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली यह आरती भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की महिमा का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि इस दिव्य आरती के दर्शन करने के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।