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  • एमपी पुलिस की नई सोशल मीडिया गाइडलाइन में वर्दी वाली रील और AI पर दस्तावेज अपलोड करने को लेकर सख्त निर्देश जारी

    एमपी पुलिस की नई सोशल मीडिया गाइडलाइन में वर्दी वाली रील और AI पर दस्तावेज अपलोड करने को लेकर सख्त निर्देश जारी

    मध्य प्रदेश: पुलिस मुख्यालय ने अधिकारियों और कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। 24 बिंदुओं वाली इस नीति में वर्दी में रील, संवेदनशील जानकारी साझा करने, सरकारी दस्तावेजों को AI टूल्स पर अपलोड करने और सोशल मीडिया से कमाई सहित कई गतिविधियों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उद्देश्य पुलिसकर्मियों के सोशल मीडिया उपयोग में अनुशासन, गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    नई गाइडलाइन के अनुसार पुलिस अधिकारी या कर्मचारी ड्यूटी के दौरान अथवा ड्यूटी के बाद वर्दी में रील, फोटो, वीडियो या ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं कर सकेंगे। अशोभनीय वेशभूषा में भी ऐसी सामग्री साझा करने पर रोक रहेगी। पहले से मौजूद अनुचित सामग्री को हटाने और भविष्य में निर्देशों का पालन करने के लिए भी कहा गया है।

    पुलिसकर्मियों को सरकारी दस्तावेजों की गोपनीयता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे दस्तावेजों को स्कैन, स्क्रीनशॉट या किसी अन्य माध्यम से सोशल मीडिया पर साझा नहीं किया जा सकेगा। खास तौर पर गोपनीय और सुरक्षा से जुड़ी सरकारी जानकारी को ChatGPT, Gemini जैसे AI टूल्स पर अपलोड करने से भी स्पष्ट रूप से मना किया गया है।

    संवेदनशील ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को अपनी जिम्मेदारी, काम की प्रकृति और तैनाती वाले स्थान की जानकारी सोशल मीडिया पर सार्वजनिक नहीं करने को कहा गया है। ऐसे स्थानों पर सोशल मीडिया इस्तेमाल करते समय लोकेशन और जियो टैगिंग जैसी सुविधाएं बंद रखने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि संवेदनशील जानकारी के दुरुपयोग की आशंका कम हो।

    नई नीति में सोशल मीडिया से होने वाली कमाई को लेकर भी नियम तय किए गए हैं। सरकार की पूर्व अनुमति के बिना पुलिसकर्मी अपने, आश्रितों या परिजनों के नाम से बनाए गए खातों के माध्यम से पेड प्रमोशन या मॉनेटाइजेशन नहीं करा सकेंगे। व्यक्तिगत व्यवसाय, कंपनी, उत्पाद या सेवा के प्रचार पर भी प्रतिबंध रहेगा। सोशल मीडिया से हुई किसी आय का विवरण निर्देश जारी होने की तारीख से 30 दिनों के भीतर विभाग को देना होगा।

    दुर्भावनापूर्ण, अश्लील या जाति, धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव दिखाने वाली सामग्री पोस्ट करने पर भी रोक लगाई गई है। ऐसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने से भी बचने को कहा गया है। विशिष्ट और अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा के दौरान महत्वपूर्ण स्थानों के फोटो या सेल्फी साझा करना प्रतिबंधित रहेगा। हथियारों के प्रशिक्षण, ड्रिल, चांदमारी, दबिश और अन्य संवेदनशील कार्रवाई के फोटो या वीडियो पोस्ट या लाइव नहीं किए जा सकेंगे।

    किसी शिकायत, जांच या विवेचना के दौरान पीड़ित, साक्षी, आवेदक, आरोपी अथवा अन्य संबंधित लोगों के फोटो और वीडियो साझा करने पर भी रोक है। आवश्यक परिस्थितियों में अनुमति के बाद और पहचान छिपाकर ही सामग्री साझा की जा सकेगी। जारी जांच या अदालत में लंबित मामलों से जुड़ी ऐसी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की जाएगी, जिससे जांच या अभियोजन प्रभावित हो।

    महिला और बालिका से जुड़े यौन अपराधों के पीड़ितों तथा कानून के संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों की पहचान उजागर करने वाली सामग्री साझा नहीं की जा सकेगी। न्यायालय के निर्देशों या फैसलों पर ऐसी टिप्पणी से भी बचना होगा, जिससे अवमानना की स्थिति उत्पन्न हो।

    गाइडलाइन में संदिग्ध या आपराधिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के साथ सोशल मीडिया पर मित्रता, फॉलो या सहयोग से बचने को कहा गया है। पुलिस यूनिफॉर्म, वाहन और सरकारी हथियारों का इस्तेमाल निजी प्रचार के लिए करने पर भी रोक रहेगी। सरकारी नीतियों, विभागीय कार्यप्रणाली या वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ पद की गरिमा के विपरीत टिप्पणियां करने की अनुमति नहीं होगी।

    पुलिसकर्मियों को ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया के अनावश्यक व्यक्तिगत इस्तेमाल से भी बचना होगा। पुलिस की रणनीति, फील्ड क्राफ्ट, जांच तकनीक और कार्यप्रणाली से जुड़ी जानकारी बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति साझा नहीं की जा सकेगी। सेवा संबंधी शिकायतों के लिए सोशल मीडिया को माध्यम बनाने के बजाय वरिष्ठ अधिकारी के समक्ष शिकायत रखने को कहा गया है।

    निर्देशों को थाना स्तर से लेकर पुलिस मुख्यालय, प्रशिक्षण संस्थानों और अन्य इकाइयों में कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से पढ़कर सुनाने के निर्देश दिए गए हैं। जानबूझकर नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

  • बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    मध्यप्रदेश: अब बिजली के मामले में सरप्लस राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी लगातार नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को भोपाल में आयोजित नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की किफायती विद्युत खरीद विषयक कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित किया और एसोसिएशन की पुस्तक का विमोचन भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में बिजली हर क्षेत्र की अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। राज्य सरकार बढ़ती खपत को ध्यान में रखते हुए बिजली उत्पादन, वितरण और संधारण की क्षमता पर लगातार काम कर रही है। नई तकनीक के साथ बिजली उत्पादन की नई इकाइयां भी शुरू की गई हैं।

    उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने बिजली संकट और लंबे समय तक पावर कट का दौर देखा है, लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। प्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है और अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, मध्यप्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता राज्य गठन से लेकर वर्ष 2002-03 तक लगभग 5 हजार मेगावॉट थी। वर्तमान में यह क्षमता बढ़कर करीब 32 हजार मेगावॉट हो चुकी है। इसमें लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रीन एनर्जी की है।

    नीमच-मंदसौर क्षेत्र में 2 हजार मेगावॉट क्षमता की परियोजना का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी परियोजनाओं को सामान्य तौर पर पूरा होने में चार से छह वर्ष तक लग सकते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे करीब दो से ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    प्रदेश में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ सौर, पवन और पंप स्टोरेज के माध्यम से बिजली उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पानी से ही नहीं, बल्कि पानी के ऊपर भी बिजली उत्पादन की दिशा में काम हो रहा है।

    ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के मुरैना में स्थापित सोलर इलेक्ट्रिसिटी स्टोरेज परियोजना से करीब 2.70 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली उपलब्ध होने की बात कही गई। सरकार का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को तेज गति से लागू करने के कारण उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि हुई है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 42 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बिजली कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ घाटा कम करने पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

    कार्यशाला में ऊर्जा भंडारण और किफायती विद्युत खरीद से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि कार्यशाला में होने वाला मंथन बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली और भविष्य की ऊर्जा योजनाओं के लिए उपयोगी साबित होगा।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि कार्यशाला से विद्युत वितरण कंपनियों को अधिक सक्षम और मजबूत बनाने के लिए उपयोगी निष्कर्ष सामने आएंगे। सरकार का जोर बिजली की बढ़ती जरूरत के साथ उत्पादन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर है।

  • कुणाल चौधरी ने छात्रों, किसानों और आम जनता के मुद्दों पर सरकार से मांगी जवाबदेही

    कुणाल चौधरी ने छात्रों, किसानों और आम जनता के मुद्दों पर सरकार से मांगी जवाबदेही

    मध्यप्रदेश: कांग्रेस के सचिव कुणाल चौधरी ने इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल हुए छात्र-छात्राओं का आभार जताते हुए युवाओं और किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठाए। उन्होंने कार्यक्रम की सफलता के लिए राहुल गांधी का भी आभार व्यक्त किया। चौधरी ने कहा कि युवाओं ने अपने भविष्य और अधिकारों से जुड़े सवाल मजबूती से सामने रखे हैं।

    उन्होंने कहा कि इंदौर की अर्थव्यवस्था में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन प्रदेश में पढ़े-लिखे युवा रोजगार, भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और वेतन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। उनका कहना था कि परीक्षा या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का सीधा असर मेहनत करने वाले विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ता है।

    चौधरी ने पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही तय करने के लिए बोर्ड बनाने और प्रभावित अभ्यर्थियों को मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि युवाओं को बार-बार परीक्षा शुल्क भरकर परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती है, लेकिन व्यवस्था की गलती सामने आने पर उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।

    उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने पर कार्रवाई का सामना करने के बजाय उनकी समस्याओं का नीतिगत समाधान मिलना चाहिए। रोजगार और वेतन से जुड़े मामलों में सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

    चौधरी ने भागीरथपुरा मामले और छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मुद्दे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने जिम्मेदारी तय करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। साथ ही ड्रग से जुड़े मामलों में पूरे नेटवर्क की जांच करने तथा किसी अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर जवाबदेही तय करने की बात कही।

    सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। प्रशासनिक लापरवाही या सरकारी तंत्र की विफलता सामने आने पर संबंधित अधिकारियों और राजनीतिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने सरकारी धन के नुकसान की स्थिति में जिम्मेदार लोगों से उसकी वसूली की मांग की।

    भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज से जुड़े मुद्दे पर भी चौधरी ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। उन्होंने कहा कि राजधानी से जुड़े महत्वपूर्ण अधोसंरचना संबंधी सवालों पर जनता को समयबद्ध जानकारी मिलनी चाहिए।

    किसानों के मुद्दे पर उन्होंने सोयाबीन की फसल में मौसम और बीमारी से हुए नुकसान का उल्लेख किया। चौधरी ने पीले मोजेक सहित फसल खराब होने की शिकायतों के बीच तत्काल सर्वे और प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग की।

    उन्होंने एक बीघा में 12 क्विंटल सोयाबीन उत्पादन के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति खेतों में जाकर देखी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई किसान कम उत्पादन और फसल खराब होने की शिकायत कर रहे हैं।

    सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर चौधरी ने कहा कि सरकार ने 5,700 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी की बात कही है, लेकिन किसानों को इससे कम कीमत पर उपज बेचने की स्थिति क्यों बन रही है। उन्होंने भावांतर योजना के पंजीयन, भुगतान और वास्तविक लाभ को लेकर भी स्पष्टता की मांग की।

    उन्होंने कहा कि सोयाबीन की कटाई शुरू होने से पहले प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे होना जरूरी है। फसल कट जाने के बाद सर्वे होने पर वास्तविक नुकसान का आकलन मुश्किल हो सकता है। चौधरी ने उचित एमएसपी, समय पर सर्वे, फसल नुकसान का मुआवजा और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित करने की मांग की।

    चौधरी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा पर भी आरोप लगाए और कहा कि नेताओं को विवाद और विभाजन के बजाय युवाओं, किसानों, रोजगार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जवाबदेही और कार्रवाई चाहती है।

  • नो कार डे पर ई-व्हीकल से निकले इंदौर कलेक्टर और अपर कलेक्टर, वीडियो हुआ वायरल

    नो कार डे पर ई-व्हीकल से निकले इंदौर कलेक्टर और अपर कलेक्टर, वीडियो हुआ वायरल

    मध्यप्रदेश: के इंदौर में नो कार डे के अवसर पर जिला कलेक्टर शिवम वर्मा और अपर कलेक्टर नवजीवन पवार ई-व्हीकल से फील्ड में नजर आए। दोनों अधिकारियों ने कार के बजाय इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल किया। ई-व्हीकल से सफर करते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    नो कार डे के मौके पर अधिकारियों की यह पहल शहर में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण कम करने के संदेश से जुड़ी रही। अधिकारियों ने ई-व्हीकल के जरिए लोगों को रोजमर्रा के आवागमन में पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधनों को अपनाने के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया।

    इंदौर में आयोजित इस पहल के दौरान जिला कलेक्टर शिवम वर्मा और अपर कलेक्टर नवजीवन पवार ने खुद ई-व्हीकल का इस्तेमाल किया। दोनों अधिकारियों के सड़क पर इलेक्ट्रिक वाहन से सफर करने का वीडियो सामने आने के बाद यह चर्चा का विषय बन गया।

    नो कार डे का उद्देश्य निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने और लोगों को वैकल्पिक परिवहन साधनों के प्रति जागरूक करना है। इस दौरान सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है।

    अधिकारियों की ओर से ई-व्हीकल का इस्तेमाल इसी संदेश को आगे बढ़ाने की पहल के तौर पर देखा गया। इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से पारंपरिक ईंधन से चलने वाले वाहनों की तुलना में प्रदूषण कम करने में मदद मिल सकती है।

    इंदौर में पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ परिवहन को लेकर समय-समय पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाती रही हैं। नो कार डे के दौरान लोगों से निजी कारों का इस्तेमाल कम करने और जरूरत के अनुसार वैकल्पिक परिवहन साधनों का उपयोग करने की अपील की गई।

    कलेक्टर और अपर कलेक्टर के ई-व्हीकल से फील्ड में पहुंचने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों का ध्यान इस पहल की ओर गया। अधिकारियों ने स्वयं इलेक्ट्रिक वाहन का इस्तेमाल कर ग्रीन ट्रांसपोर्ट को लेकर जागरूकता का संदेश दिया।

    नो कार डे जैसी पहल का फोकस शहर में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण के प्रति लोगों की जिम्मेदारी बढ़ाने पर रहता है। इसके साथ ही ऐसे प्रयासों के जरिए नागरिकों को परिवहन के अधिक टिकाऊ विकल्पों के बारे में जानकारी देने की कोशिश की जाती है।

    इंदौर में अधिकारियों की यह पहल लोगों को अपने दैनिक आवागमन के विकल्पों पर विचार करने का संदेश देती है। ई-व्हीकल का इस्तेमाल कर अधिकारियों ने पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने की जरूरत को रेखांकित किया।

  • राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की 72 साल की कहानी, सत्यजीत रे के 36 सम्मान से शबाना आजमी के रिकॉर्ड तक

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की 72 साल की कहानी, सत्यजीत रे के 36 सम्मान से शबाना आजमी के रिकॉर्ड तक

    नई दिल्ली ।राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सबसे महत्वपूर्ण सम्मानों में शामिल हैं। 1954 में शुरू हुई इस पुरस्कार व्यवस्था ने सात दशकों से अधिक समय में फिल्मों, कलाकारों, निर्देशकों और तकनीकी विशेषज्ञों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी है। 22 सितंबर 2026 को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन गुजरात के एकता नगर में हो रहा है। यह पहली बार है जब यह समारोह दिल्ली से बाहर आयोजित किया जा रहा है।

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की शुरुआत 1954 में हुई थी। उस समय 1953 में रिलीज हुई फिल्मों को सम्मान के लिए चुना गया था। देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे और सूचना एवं प्रसारण मंत्री बीवी केसकर थे। शुरुआत में इन पुरस्कारों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार नहीं, बल्कि स्टेट अवॉर्ड फॉर फिल्म के नाम से जाना जाता था।

    इससे पहले 1949 में भारत सरकार ने फिल्म जांच समिति का गठन किया था। समिति का उद्देश्य भारतीय फिल्म उद्योग की स्थिति, फिल्मों की गुणवत्ता और उनके सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव का अध्ययन करना था। समिति की सिफारिशों के बाद फिल्मों को सरकारी स्तर पर सम्मान देने की व्यवस्था शुरू की गई।

    शुरुआती दौर में पुरस्कार मुख्य रूप से फीचर फिल्म, डॉक्यूमेंट्री और बच्चों की फिल्मों पर केंद्रित थे। उस समय कलाकारों के लिए अलग-अलग पुरस्कार नहीं दिए जाते थे। शुरुआत से ही अलग-अलग भारतीय भाषाओं की फिल्मों को इसमें जगह देने की नीति अपनाई गई। यही व्यवस्था आगे चलकर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की प्रमुख विशेषता बनी।

    पहला पुरस्कार समारोह 10 अक्टूबर 1954 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में हुआ था। सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का सम्मान मराठी फिल्म श्यामची आई को मिला था। सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री फिल्म का पुरस्कार महाबलीपुरम को दिया गया। दो बीघा जमीन और भगवान श्रीकृष्ण चैतन्य को भी ऑल इंडिया सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया था। बच्चों की फिल्म खेला घर को भी सम्मान मिला था।

    कलाकारों और तकनीशियनों के लिए अलग पुरस्कारों की शुरुआत 1967 में रिलीज फिल्मों के लिए हुई और 1968 में विजेताओं को सम्मानित किया गया। उत्तम कुमार पहले सर्वश्रेष्ठ अभिनेता बने, जबकि नरगिस दत्त पहली सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री चुनी गईं। उस समय इन पुरस्कारों को भारत अवॉर्ड और उर्वशी अवॉर्ड कहा जाता था।

    1969 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार शुरू हुआ और देविका रानी इसकी पहली प्राप्तकर्ता बनीं। 1973 से राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के प्रशासन की जिम्मेदारी डायरेक्टरेट ऑफ फिल्म फेस्टिवल ने संभाली। 2022 में इसके पुनर्गठन के दौरान इसका राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम में विलय कर दिया गया।

    समय के साथ पुरस्कारों का दायरा भी बढ़ता गया। सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, संगीत, प्लेबैक सिंगिंग, स्क्रीनप्ले, कॉस्ट्यूम, मेकअप, साउंड, कोरियोग्राफी, स्टंट और विजुअल इफेक्ट्स जैसे क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया।

    अभिनय की श्रेणी में शबाना आजमी ने पांच बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार जीतकर रिकॉर्ड बनाया है। उन्हें अंकुर, अर्थ, खंडहर, पार और गॉडमदर के लिए सम्मान मिला। सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में अमिताभ बच्चन ने चार पुरस्कार जीते हैं, जबकि ममूटी ने ब्रमायुगम के लिए अपना चौथा राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल किया।

    प्लेबैक गायन में के. जे. येसुदास के नाम आठ राष्ट्रीय पुरस्कार हैं। संगीतकार ए. आर. रहमान ने सात राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीते हैं। महान फिल्मकार सत्यजीत रे के नाम भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में 36 सम्मानों का उल्लेख किया जाता है। उनके योगदान ने भारतीय सिनेमा को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अलग पहचान दिलाई।

    राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का उद्देश्य केवल फिल्मों को सम्मान देना नहीं रहा है। इनका लक्ष्य कलात्मक और तकनीकी उत्कृष्टता वाली फिल्मों को प्रोत्साहित करना तथा भारत की विविध संस्कृतियों और भाषाओं को राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना भी रहा है।

  • 24 सितंबर को पुष्य नक्षत्र में जाएंगे मंगल, चार राशियों के लिए बन रहे धन और करियर लाभ के योग

    24 सितंबर को पुष्य नक्षत्र में जाएंगे मंगल, चार राशियों के लिए बन रहे धन और करियर लाभ के योग

    नई दिल्ली ।वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की चाल और नक्षत्र परिवर्तन को विशेष महत्व दिया जाता है। सितंबर 2026 में मंगल अपनी स्थिति में बदलाव करते हुए पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करने वाले हैं। मंगल 24 सितंबर को पुनर्वसु नक्षत्र से निकलकर पुष्य नक्षत्र में पहुंचेंगे और 17 अक्टूबर तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस परिवर्तन का असर अलग-अलग राशियों पर अलग तरीके से पड़ सकता है।

    पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों में विशेष महत्व वाला माना जाता है। इसे नक्षत्रों का राजा भी कहा जाता है। इस नक्षत्र के स्वामी शनि माने जाते हैं, जबकि इसके देवता बृहस्पति हैं। मंगल ऊर्जा, साहस, पराक्रम, भूमि और शक्ति से संबंधित ग्रह माने जाते हैं। ऐसे में मंगल के पुष्य नक्षत्र में आने को ज्योतिष में मंगल, शनि और गुरु से जुड़े प्रभावों के मेल के तौर पर देखा जाता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए यह बदलाव आर्थिक और व्यक्तिगत मामलों में सकारात्मक संकेत देने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से प्रॉपर्टी, जमीन या वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए समय अनुकूल रह सकता है। कार्यक्षेत्र में साहस और तेजी से निर्णय लेने की क्षमता का लाभ मिलने की संभावना जताई गई है। परिवार से जुड़े पुराने विवादों में भी सुधार के संकेत हैं।

    कर्क राशि के लिए मंगल पहले से ही राशि में संचार कर रहे हैं। पुष्य नक्षत्र में प्रवेश के बाद ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मानसिक और व्यावहारिक क्षमता मजबूत हो सकती है। करियर और कारोबार में रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं। नेतृत्व क्षमता में सुधार के साथ नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। साझेदारी में कारोबार या नया व्यवसाय शुरू करने वालों के लिए भी यह अवधि महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए मंगल का यह परिवर्तन भाग्य और धार्मिक मामलों से जुड़ा प्रभाव डाल सकता है। लंबे समय से अटकी योजनाओं और सरकारी कामों में प्रगति के संकेत बताए गए हैं। नौकरीपेशा लोगों के लिए पदोन्नति या मनचाहे स्थान पर तबादले की संभावना जताई गई है। धार्मिक और व्यावसायिक यात्राओं से लाभ मिलने के साथ अचानक आर्थिक फायदा होने की बात भी कही गई है।

    मीन राशि के जातकों के लिए पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं, जो मीन राशि के स्वामी माने जाते हैं। इसलिए इस परिवर्तन को आय और बुद्धि से जुड़े मामलों में शुभ माना जा रहा है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना जताई गई है। पुराने निवेश से लाभ मिल सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी सफलता के संकेत बताए गए हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मंगल की इस अवधि में हनुमान जी की पूजा करना लाभकारी माना जाता है। मंगलवार को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करने, हनुमान चालीसा का पाठ करने तथा गुड़ और भुने चने का भोग लगाने जैसे उपाय बताए गए हैं। हालांकि, राशिफल और ज्योतिषीय भविष्यवाणियां धार्मिक मान्यताओं पर आधारित होती हैं और इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

  • IPL 2027 से पहले CSK ने जहीर खान को बनाया नया हेड कोच, स्टीफन फ्लेमिंग की जगह संभालेंगे कमान

    IPL 2027 से पहले CSK ने जहीर खान को बनाया नया हेड कोच, स्टीफन फ्लेमिंग की जगह संभालेंगे कमान

    नई दिल्ली ।चेन्नई सुपर किंग्स ने आईपीएल 2027 से पहले अपनी कोचिंग व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। टीम ने पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान को नया मुख्य कोच नियुक्त किया है। जहीर अब लंबे समय तक टीम की कमान संभालने वाले स्टीफन फ्लेमिंग की जगह जिम्मेदारी निभाएंगे। इस नियुक्ति के साथ चेन्नई की कोचिंग व्यवस्था में एक नए दौर की शुरुआत हो गई है।

    स्टीफन फ्लेमिंग का चेन्नई सुपर किंग्स के साथ करीब 18 साल का जुड़ाव रहा। उन्होंने 2008 में खिलाड़ी के रूप में टीम से जुड़ने के बाद 2009 से मुख्य कोच की भूमिका संभाली थी। उनके कार्यकाल में टीम ने पांच आईपीएल खिताब जीते। फ्लेमिंग ने 2026 के बाद चेन्नई से अलग होने का फैसला किया और अब इंग्लैंड की टेस्ट टीम के मुख्य कोच की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

    जहीर खान के लिए यह आईपीएल में किसी फ्रेंचाइजी के मुख्य कोच के रूप में पहला कार्यकाल होगा। हालांकि, वह कोचिंग और खिलाड़ी विकास से जुड़े पदों पर पहले भी काम कर चुके हैं। भारतीय टीम के साथ वह 2017 में गेंदबाजी सलाहकार की भूमिका निभा चुके हैं। इसके अलावा मुंबई इंडियंस के साथ उन्होंने क्रिकेट संचालन और खिलाड़ी विकास से जुड़े पदों पर काम किया।

    जहीर लखनऊ सुपर जायंट्स के साथ भी मेंटर की भूमिका निभा चुके हैं। इस अनुभव के कारण वह आईपीएल के माहौल और फ्रेंचाइजी क्रिकेट की जरूरतों से परिचित हैं। अब उन्हें चेन्नई की टीम के प्रदर्शन और खिलाड़ियों के विकास से जुड़ी जिम्मेदारी संभालनी होगी।

    जहीर का नाम चेन्नई की टीम के भीतर चर्चा के बाद तय किया गया। टीम के प्रबंधन से जुड़े फैसलों में महेंद्र सिंह धोनी, कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ और अन्य प्रमुख सदस्यों की राय भी शामिल रही। जहीर और धोनी भारतीय टीम के दौर से एक-दूसरे को जानते हैं और 2011 विश्व कप जीतने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं।

    जहीर का अंतरराष्ट्रीय करियर भी शानदार रहा है। उन्होंने भारत के लिए 92 टेस्ट, 200 वनडे और 17 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। तीनों प्रारूपों में उनके नाम कुल 610 विकेट हैं। 2011 विश्व कप में उन्होंने 21 विकेट हासिल किए थे और भारतीय टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

    आईपीएल में जहीर ने 100 मुकाबले खेले और 102 विकेट लिए। उन्होंने मुंबई इंडियंस, रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और दिल्ली की टीम का प्रतिनिधित्व किया। खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे क्रिकेट प्रशासन, मेंटरशिप और खिलाड़ी विकास की भूमिकाओं में कदम बढ़ाया।

    चेन्नई सुपर किंग्स के लिए जहीर की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब टीम लगातार तीन सत्रों से प्लेऑफ में जगह नहीं बना सकी है। 2025 और 2026 में टीम का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा। ऐसे में नई कोचिंग व्यवस्था के सामने टीम के प्रदर्शन में सुधार के साथ खिलाड़ियों के संयोजन और रणनीति को मजबूत करने की चुनौती होगी।

    आईपीएल 2027 में जहीर के सामने चेन्नई की टीम को नए सिरे से तैयार करने और उसके मौजूदा खिलाड़ियों की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने की जिम्मेदारी होगी। धोनी और टीम प्रबंधन के साथ उनका तालमेल भी चेन्नई की आगामी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा।

  • CID पूछताछ के बाद TMC विधायक परेश राम दास की तबीयत बिगड़ी, सीने में दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती

    CID पूछताछ के बाद TMC विधायक परेश राम दास की तबीयत बिगड़ी, सीने में दर्द के बाद अस्पताल में भर्ती

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में 2023 के पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए पहुंचे तृणमूल कांग्रेस विधायक परेश राम दास की सोमवार को अचानक तबीयत बिगड़ गई। करीब पांच घंटे तक चली पूछताछ के दौरान उन्होंने सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी की शिकायत की। इसके बाद उन्हें कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया।

    परेश राम दास दक्षिण 24 परगना जिले की कैनिंग पश्चिम विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्हें पंचायत चुनाव के दौरान हुई हिंसा से संबंधित मामले की जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। विधायक सोमवार सुबह करीब 11 बजे भवानी भवन स्थित जांच कार्यालय पहुंचे थे।

    पूछताछ के दौरान शाम करीब चार बजे उन्होंने अपनी तबीयत खराब होने की जानकारी दी। सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी की शिकायत के बाद उन्हें अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई। अस्पताल पहुंचने पर उनका इलाज शुरू किया गया और डॉक्टरों ने उन्हें निगरानी में रखा।

    इस मामले में विधायक को इससे पहले भी पूछताछ के लिए तलब किया जा चुका है। जांच 2023 के पंचायत चुनाव के दौरान कैनिंग इलाके में हुई हिंसा और उससे जुड़े आरोपों पर केंद्रित है। इसी सिलसिले में विधायक से मामले से संबंधित जानकारी और घटनाक्रम को लेकर सवाल किए जा रहे थे।

    पूछताछ के लिए पहुंचने से पहले विधायक ने सोशल मीडिया पर एक संदेश भी पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने कैनिंग को अलविदा कहने और दोबारा मिलने तथा बातचीत करने की बात कही थी। उनके इस संदेश को लेकर समर्थकों के बीच भी चर्चा हुई।

    परेश राम दास के करीबी लोगों के अनुसार, वह पहले स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण इलाज करा चुके हैं। हाल ही में वह इलाज के लिए चेन्नई भी गए थे। सोमवार को जांच के लिए पहुंचते समय उनके पास इनहेलर भी मौजूद था।

    पंचायत चुनाव के दौरान पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में हिंसा की घटनाएं सामने आई थीं। कैनिंग क्षेत्र से जुड़े मामले की जांच के दौरान कई लोगों से पूछताछ की गई है। विधायक से भी इसी जांच के तहत पूछताछ की जा रही थी।

    करीब पांच घंटे तक चली पूछताछ के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने से जांच की प्रक्रिया प्रभावित हुई। अब आगे की पूछताछ और जांच से संबंधित कार्रवाई विधायक की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए तय की जा सकती है।

    फिलहाल परेश राम दास अस्पताल में चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उनकी तबीयत को लेकर डॉक्टरों की निगरानी जारी है। मामले में जांच एजेंसी की ओर से आगे की कार्रवाई स्वास्थ्य स्थिति और जांच की जरूरत के अनुसार की जाएगी।

  • भोपाल के 5-स्टार होटल में लिफ्ट फंसने के बाद खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, तीन लिफ्टों पर लगा अस्थायी ताला

    भोपाल के 5-स्टार होटल में लिफ्ट फंसने के बाद खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, तीन लिफ्टों पर लगा अस्थायी ताला

    मध्य प्रदेश: की राजधानी भोपाल में एक पांच सितारा होटल की लिफ्ट में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की पत्नी समेत तीन लोग फंस गए। घटना के बाद नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद होटल की लिफ्ट और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई, जिसमें कई कमियां सामने आईं।

    यह घटना अरेरा हिल्स स्थित कोर्टयार्ड बाय मैरियट होटल में रविवार सुबह हुई। जानकारी के अनुसार, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की पत्नी एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए होटल पहुंची थीं। उनके साथ एक डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ का सदस्य भी था।

    करीब 10:40 बजे तीनों लिफ्ट में सवार हुए। इसी दौरान लिफ्ट बीच में रुक गई और सभी अंदर फंस गए। करीब 20 से 25 मिनट तक लिफ्ट में फंसे रहने के बाद मदद के लिए प्रयास किए गए। लिफ्ट में उपलब्ध संपर्क नंबर पर फोन किया गया, लेकिन तत्काल प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद महिला ने अपने पति को घटना की जानकारी दी।

    सूचना मिलने के बाद नगर निगम का फायर ब्रिगेड, विद्युत विभाग और स्वास्थ्य विभाग का संयुक्त अमला होटल पहुंचा। टीम ने लिफ्ट खोलकर अंदर फंसे तीनों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रेस्क्यू के बाद अधिकारियों ने केवल घटना की जांच तक सीमित न रहते हुए होटल में लिफ्ट और सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण शुरू किया।

    जांच में सामने आया कि संबंधित लिफ्ट में ऑटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस यानी ARD की व्यवस्था नहीं थी। यह उपकरण बिजली जाने या किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में लिफ्ट को सुरक्षित तरीके से नजदीकी मंजिल तक पहुंचाने में मदद करता है।

    लिफ्ट के नियमित रखरखाव को लेकर भी कमी मिली। दस्तावेजों की जांच में पता चला कि 31 अगस्त 2026 को निर्धारित मासिक मेंटेनेंस नहीं कराया गया था। जिस लिफ्ट में लोग फंसे थे, उसका पिछला निर्धारित निरीक्षण 29 मई 2026 को हुआ था।

    नगर निगम की टीम ने लिफ्ट के अलावा होटल की फायर सेफ्टी व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकासी व्यवस्था और एग्जिट गेट की स्थिति की जांच की गई। अधिकारियों के मुताबिक कुछ व्यवस्थाएं निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं मिलीं।

    इन कमियों के सामने आने के बाद नगर निगम ने होटल की तीन लिफ्टों को अस्थायी रूप से सील कर दिया। इसके साथ ही होटल के खाद्य सुरक्षा लाइसेंस और अन्य संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की गई।

    नगर निगम के अनुसार होटल का पहले भी निरीक्षण किया जा चुका है और सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए नोटिस दिए गए थे। इसके बावजूद लिफ्ट रखरखाव और फायर सेफ्टी से संबंधित कमियां मिलने के बाद कार्रवाई की गई।

    घटना के बाद भोपाल में अन्य बहुमंजिला इमारतों, होटलों और अस्पतालों की लिफ्टों की जांच कराने की तैयारी भी की गई है। इस अभियान में लिफ्टों के नियमित मेंटेनेंस, सुरक्षा उपकरणों और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी।

    नगर निगम प्रशासन ने संबंधित संस्थानों को लिफ्टों का समय पर रखरखाव कराने और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जहां सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मिलेगा, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • मनोज बाजपेयी पहुंचे दिल्ली हाई कोर्ट, एआई से आवाज और पहचान के इस्तेमाल को लेकर उठाया पर्सनैलिटी राइट्स का मुद्दा

    मनोज बाजपेयी पहुंचे दिल्ली हाई कोर्ट, एआई से आवाज और पहचान के इस्तेमाल को लेकर उठाया पर्सनैलिटी राइट्स का मुद्दा


    नई दिल्ली ।
    अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी पहचान, आवाज, छवि और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है। 57 वर्षीय अभिनेता ने सोमवार को अदालत में पर्सनैलिटी राइट्स यानी व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा की मांग की। उनका आरोप है कि उनकी पहचान से जुड़े पहलुओं का उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल किया जा रहा है।

    मामले में अभिनेता की ओर से यह भी आरोप लगाया गया है कि उनके जैसे दिखने वाले रूप का इस्तेमाल उत्पादों के प्रचार के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक के जरिए उनकी आवाज और व्यक्तित्व से जुड़े पहलुओं को दोबारा तैयार किए जाने का आरोप लगाया गया है।

    मामला दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति पुरुशेंद्र कुमार कौरव के सामने सुनवाई के लिए आया। अभिनेता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता स्वाति सुकुमार ने अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े कई पहलुओं पर ध्यान दिया गया।

    मामले में H2PG Designs Private Limited का नाम भी सामने आया। अभिनेता की ओर से आरोप लगाया गया कि कंपनी उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल इस तरह कर रही थी, जिससे यह प्रतीत होता है कि उन्होंने कंपनी द्वारा तैयार किए गए सूट पहने हैं। इस तरह उनकी छवि का व्यावसायिक इस्तेमाल किए जाने पर आपत्ति जताई गई है।

    एक अन्य मामले में कथित तौर पर एआई तकनीक के जरिए अभिनेता की आवाज तैयार किए जाने का मुद्दा उठाया गया। अभिनेता की ओर से कहा गया कि उनकी आवाज और व्यक्तित्व की पहचान से जुड़े पहलुओं को बिना अनुमति दोबारा तैयार कर इस्तेमाल किया जा रहा है।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने क्षेत्राधिकार यानी ज्यूरिस्डिक्शन का सवाल भी उठाया। न्यायमूर्ति कौरव ने पूछा कि जब मनोज बाजपेयी मुख्य रूप से मुंबई में रहते हैं, तो उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख क्यों किया। इस पर उनकी ओर से बताया गया कि मामले में कुछ आरोपी दिल्ली में मौजूद हैं। इसी आधार पर अदालत के समक्ष याचिका लाई गई है।

    पर्सनैलिटी राइट्स का संबंध किसी व्यक्ति की पहचान से जुड़े ऐसे पहलुओं से है, जिनमें उसकी तस्वीर, आवाज, नाम, पहचान और सार्वजनिक छवि शामिल हो सकती है। मशहूर हस्तियों के मामले में इन अधिकारों का व्यावसायिक इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण कानूनी मुद्दा बन चुका है।

    दिल्ली हाई कोर्ट पहले भी कई प्रमुख कलाकारों और सार्वजनिक हस्तियों से जुड़े पर्सनैलिटी राइट्स मामलों में आदेश पारित कर चुका है। इनमें तब्बू, पवन कल्याण, अल्लू अर्जुन, मोहनलाल, काजोल, आर. माधवन, जूनियर एनटीआर और गायक जुबिन नौटियाल जैसी हस्तियां शामिल हैं।

    इसके अलावा नागार्जुन, ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन और फिल्म निर्माता करण जौहर से जुड़े मामलों में भी व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा को लेकर अदालत का रुख सामने आ चुका है। इन मामलों में प्रमुख मुद्दा संबंधित हस्तियों की पहचान और छवि के अनधिकृत इस्तेमाल से जुड़ा रहा है।

    अभिनेता सलमान खान भी पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े एक मामले में अदालत का रुख कर चुके हैं। इससे स्पष्ट है कि मनोरंजन जगत की हस्तियों के नाम, आवाज, तस्वीर और पहचान के व्यावसायिक या डिजिटल इस्तेमाल को लेकर कानूनी विवाद बढ़ रहे हैं।

    मनोज बाजपेयी के मामले में अब अदालत के सामने यह मुद्दा है कि उनकी पहचान और व्यक्तित्व से जुड़े अधिकारों के कथित इस्तेमाल पर किस तरह की कानूनी सुरक्षा दी जा सकती है। विशेष रूप से एआई के जरिए आवाज और व्यक्तित्व की नकल से जुड़े आरोप इस मामले को तकनीक और सेलिब्रिटी अधिकारों के बीच उभरते कानूनी विवाद से जोड़ते हैं।