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  • Nainital Trip: पहली बार जा रहे हैं नैनीताल तो जरूर घूमें ये खास जगहें झील पहाड़ और खूबसूरत नजारों से यादगार बनेगा सफर

    Nainital Trip: पहली बार जा रहे हैं नैनीताल तो जरूर घूमें ये खास जगहें झील पहाड़ और खूबसूरत नजारों से यादगार बनेगा सफर

    नई दिल्ली। अगर आप भागदौड़ भरी जिंदगी से कुछ दिनों के लिए दूर जाकर पहाड़ों की ठंडी हवा झीलों की खूबसूरती और शांत वातावरण का आनंद लेना चाहते हैं तो नैनीताल आपके लिए शानदार ट्रैवल डेस्टिनेशन हो सकता है। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में बसा नैनीताल अपनी खूबसूरत नैनी झील पहाड़ी वादियों और प्राकृतिक नजारों के कारण देशभर के पर्यटकों को आकर्षित करता है। यहां परिवार के साथ छुट्टियां बिताने से लेकर दोस्तों के साथ घूमने और कपल्स के लिए शांत समय बिताने तक कई तरह के अनुभव मिल सकते हैं। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार नैनीताल के आसपास झीलों के साथ कई व्यू प्वाइंट और प्राकृतिक आकर्षण मौजूद हैं।

    नैनीताल की यात्रा की शुरुआत नैनी झील से करना सबसे खास अनुभव हो सकता है। पहाड़ों से घिरी यह झील शहर की पहचान मानी जाती है। यहां बोटिंग करते हुए चारों तरफ फैली पहाड़ियों और शहर की खूबसूरती को करीब से देखा जा सकता है। इसके बाद माल रोड की सैर यात्रा को अलग रंग देती है। यहां स्थानीय बाजारों में घूमते हुए खरीदारी करने और पहाड़ी खानपान का स्वाद लेने का मौका मिलता है। शाम के समय माल रोड और नैनी झील के आसपास का माहौल खास तौर पर आकर्षक नजर आता है।

    अगर आपको ऊंचाई से पहाड़ों और शहर का नजारा देखना पसंद है तो स्नो व्यू प्वाइंट और नैना पीक की ओर जाना अच्छा अनुभव हो सकता है। उत्तराखंड पर्यटन की आधिकारिक गाइड में स्नो व्यू नैना पीक टिफिन टॉप लैंड्स एंड और इको केव गार्डन को नैनीताल के प्रमुख आकर्षणों में शामिल किया गया है। इको केव गार्डन में प्राकृतिक गुफाओं और पहाड़ी संरचनाओं को देखने का अलग अनुभव मिलता है।

    प्रकृति और वन्यजीव पसंद करने वाले पर्यटकों के लिए नैनीताल चिड़ियाघर भी आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा राजभवन और सेंट जॉन्स चर्च जैसे स्थान शहर की विरासत और इतिहास से परिचित कराते हैं। अगर आप शहर की भीड़ से थोड़ा दूर शांत माहौल चाहते हैं तो पंगोट और आसपास के क्षेत्रों की ओर रुख कर सकते हैं। यहां हरियाली पक्षियों और पहाड़ी वातावरण के बीच समय बिताना यात्रा को यादगार बना सकता है।

    नैनीताल के आसपास घूमने के लिए भी कई विकल्प मौजूद हैं। भीमताल सातताल और नौकुचियाताल जैसे स्थान प्राकृतिक सुंदरता और झीलों के लिए प्रसिद्ध हैं। सातताल घने ओक के जंगलों के बीच स्थित झीलों का समूह है जहां प्रकृति की शांति के साथ बर्ड वॉचिंग और बोटिंग जैसी गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है।

    नैनीताल पहुंचना भी काफी आसान है। उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार सड़क मार्ग से नैनीताल उत्तराखंड के प्रमुख शहरों से जुड़ा है। रेल से आने वाले यात्रियों के लिए काठगोदाम प्रमुख रेलवे स्टेशन है जो नैनीताल से करीब 23 किलोमीटर दूर है। हवाई यात्रा के लिए पंतनगर एयरपोर्ट एक विकल्प है जो करीब 69 किलोमीटर की दूरी पर है।

    नैनीताल की यात्रा पर निकलते समय मौसम के अनुसार गर्म कपड़े साथ रखना जरूरी है। पहाड़ी रास्तों पर सफर करते समय जल्दबाजी से बचना चाहिए और स्थानीय मौसम तथा सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना बेहतर रहता है। अगर आप झील पहाड़ हरियाली और शांत वातावरण को एक ही यात्रा में महसूस करना चाहते हैं तो नैनीताल का सफर आपके लिए यादगार बन सकता है।

  • 70 की उम्र में मौसमी चटर्जी की बेटी को खास सलाह, बोलीं- बॉयफ्रेंड रखो लेकिन शादी सोच-समझकर करना

    70 की उम्र में मौसमी चटर्जी की बेटी को खास सलाह, बोलीं- बॉयफ्रेंड रखो लेकिन शादी सोच-समझकर करना


    नई दिल्ली। दिग्गज अभिनेत्री मौसमी चटर्जी ने बेहद कम उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और देखते ही देखते अपनी अलग पहचान बना ली। बंगाली फिल्म बालिका वधू से किशोरावस्था में अभिनय की शुरुआत करने वाली मौसमी ने आगे चलकर हिंदी और बंगाली सिनेमा में कई यादगार फिल्मों में काम किया। हालांकि उनका निजी जीवन भी उनके फिल्मी सफर जितना ही दिलचस्प रहा है। कम उम्र में शादी करने वाली मौसमी अब अपनी बेटी और आज की युवा पीढ़ी को रिश्तों तथा शादी को लेकर जल्दबाजी नहीं करने की सलाह देती हैं

    जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 में बातचीत के दौरान मौसमी ने अपनी बेटी मेघा मुखर्जी को लेकर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वह अपनी बेटी से कहती हैं कि जीवन में किसी को पसंद करना या बॉयफ्रेंड होना अलग बात है लेकिन उससे शादी करना जरूरी नहीं है। मौसमी की इस सलाह में रिश्ते को समझने और अपने फैसले खुद लेने पर जोर दिखाई देता है। उन्होंने युवा महिलाओं को सतर्क रहने और परिस्थितियों के अनुसार अपने विवेक से निर्णय लेने की बात भी कही

    मौसमी ने आज की युवा पीढ़ी के तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि समय के साथ समाज काफी बदला है। उनके मुताबिक लड़कियों को बचपन से घर और ससुराल की जिम्मेदारियों के बारे में बताया जाता है लेकिन लड़कों को भी घरेलू जिम्मेदारियों के लिए तैयार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि जीवन में अपनी पसंद के काम करने चाहिए लेकिन किसी भी चीज की अति नहीं होनी चाहिए। गलती हो जाए तो उससे सीख लेकर उसे दोबारा नहीं दोहराना चाहिए

    अपनी शादी का किस्सा बताते हुए मौसमी ने एक बेहद भावुक घटना का जिक्र किया था। बालिका वधू की सफलता के बाद उनके लिए कई रिश्ते आने लगे थे। इसी दौरान उनकी एक बीमार बुआ की तबीयत बेहद खराब थी। बताया जाता है कि उनकी बुआ कैंसर की गंभीर अवस्था में थीं और उनकी इच्छा थी कि वह मौसमी की शादी देख सकें। बुआ ने मौसमी के होने वाले ससुर हेमंत कुमार का हाथ पकड़कर अपनी इच्छा जाहिर की थी। इसके बाद परिस्थितियां तेजी से बदलीं और करीब एक महीने के भीतर ही मौसमी की शादी जयंत मुखर्जी से हो गई

    मौसमी ने बहुत कम उम्र में शादी के साथ अपनी फिल्मी यात्रा भी जारी रखी। 1970 के दशक में वह हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल हुईं। अनुराग रोटी कपड़ा और मकान बेनाम स्वर्ग नरक मंजिल अंगूर और स्वयंवर जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों ने पसंद किया। उन्होंने अमिताभ बच्चन राजेश खन्ना धर्मेंद्र जितेंद्र विनोद खन्ना और संजीव कुमार जैसे बड़े कलाकारों के साथ भी काम किया

    आज 70 वर्ष की उम्र में मौसमी जब पीछे मुड़कर अपने जीवन को देखती हैं तो उनके अनुभवों में रिश्तों और स्वतंत्रता को लेकर एक अलग नजरिया दिखाई देता है। उनका कहना है कि नई पीढ़ी को अपनी जिंदगी को केवल दूसरों की अपेक्षाओं के हिसाब से नहीं चलाना चाहिए। उन्हें अपने फैसले सोच समझकर लेने चाहिए और हर अनुभव से सीखना चाहिए। मौसमी की बातों में उनकी अपनी जिंदगी के अनुभवों की झलक भी नजर आती है क्योंकि उन्होंने खुद बेहद कम उम्र में शादी और साथ ही लंबे फिल्मी करियर का दौर देखा है

  • बच्चों को पढ़ाई के साथ सिखाएं ये 10 जरूरी स्किल, मुश्किल हालात में समझदारी से फैसला लेने में आएंगी काम

    बच्चों को पढ़ाई के साथ सिखाएं ये 10 जरूरी स्किल, मुश्किल हालात में समझदारी से फैसला लेने में आएंगी काम


    नई दिल्ली ।
    बच्चों की परवरिश में पढ़ाई, होमवर्क और अच्छे व्यवहार के साथ उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी जरूरी स्किल सिखाना भी बेहद अहम है। कई बार ऐसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं, जहां किताबों का ज्ञान पर्याप्त नहीं होता और बच्चे को अपनी सुरक्षा के लिए व्यावहारिक समझ की जरूरत पड़ती है। उम्र के अनुसार कुछ जरूरी बातें सिखाकर बच्चों को मुश्किल समय में घबराने के बजाय समझदारी से कदम उठाने के लिए तैयार किया जा सकता है।

    सबसे पहले बच्चे को अपना पूरा नाम, माता-पिता का नाम और जरूरत के मुताबिक घर से जुड़ी जरूरी जानकारी याद करानी चाहिए। छोटी उम्र में इसे खेल-खेल में दोहराकर सिखाया जा सकता है, ताकि जरूरत पड़ने पर बच्चा बिना घबराए अपनी पहचान और जरूरी जानकारी बता सके।

    बच्चों को यह भी पता होना चाहिए कि आपात स्थिति में किससे मदद मांगनी है। परिवार के जरूरी फोन नंबर याद कराने के साथ उन्हें यह समझाना जरूरी है कि फोन पर अपनी स्थिति और परेशानी को साफ शब्दों में कैसे बताया जाए।

    अनजान लोगों से सावधानी बरतना भी बच्चों के लिए महत्वपूर्ण स्किल है। उन्हें समझाएं कि हर व्यक्ति पर तुरंत भरोसा करना जरूरी नहीं है। अगर कोई अनजान व्यक्ति कुछ देने, कहीं ले जाने या माता-पिता के बारे में गलत जानकारी देने की कोशिश करे, तो बच्चे को वहां से हटकर किसी भरोसेमंद बड़े से मदद मांगनी चाहिए।

    अगर बच्चा भीड़ या किसी सार्वजनिक स्थान पर परिवार से अलग हो जाए, तो उसे इधर-उधर भागने के बजाय सुरक्षित जगह पर रुकना चाहिए। पुलिसकर्मी या किसी जिम्मेदार कर्मचारी से मदद मांगने की आदत उसे ऐसी स्थिति में सुरक्षित रहने में मदद कर सकती है।

    घर में आग लगने जैसी स्थिति के लिए भी बच्चों को पहले से सामान्य सुरक्षा नियम समझाना जरूरी है। उन्हें बताया जाना चाहिए कि घबराने के बजाय सुरक्षित स्थान की ओर जाना है और आग या धुएं वाली जगह पर वापस जाकर सामान लेने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

    पानी के आसपास सुरक्षा को लेकर भी बच्चों को जागरूक करना जरूरी है। स्विमिंग पूल, तालाब या किसी जलाशय के पास अकेले नहीं जाने और जरूरत पड़ने पर तुरंत किसी बड़े को बुलाने की आदत डालनी चाहिए।

    उम्र के अनुसार बच्चों को बेसिक फर्स्ट एड की जानकारी भी दी जा सकती है। छोटी चोट या कट लगने पर क्या करना है, यह समझाने के साथ उन्हें यह भी बताना चाहिए कि गंभीर चोट की स्थिति में खुद इलाज करने के बजाय तुरंत किसी बड़े से मदद लें।

    बड़े बच्चों को धीरे-धीरे किचन सेफ्टी के नियम सिखाए जा सकते हैं। गैस, गर्म बर्तन, चाकू और बिजली के उपकरणों से जुड़ी सावधानियां उनकी उम्र और समझ के अनुसार बताना जरूरी है।

    बच्चों को जरूरत पड़ने पर साफ तौर पर ‘ना’ कहना भी सिखाएं। अगर कोई बात या स्थिति उन्हें असहज लगे, तो वे बिना डर अपनी बात कह सकें और तुरंत माता-पिता या किसी भरोसेमंद बड़े को जानकारी दें।

    सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चा परेशानी छिपाने के बजाय समय पर मदद मांगे। गलती होने या डर लगने पर सच बताना जरूरी है। इन स्किल्स को बच्चों पर दबाव डालकर नहीं, बल्कि रोजमर्रा के उदाहरणों, रोल-प्ले और छोटे अभ्यास के जरिए सहज तरीके से सिखाया जा सकता है।

  • दाह संस्कार के बाद अस्थियां कब और कैसे चुनें देरी हो जाए तो क्या करना चाहिए गंगा में विसर्जन से जुड़ी मान्यताएं जानिए

    दाह संस्कार के बाद अस्थियां कब और कैसे चुनें देरी हो जाए तो क्या करना चाहिए गंगा में विसर्जन से जुड़ी मान्यताएं जानिए


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद किए जाने वाले अंतिम संस्कार को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक परंपराओं में इसे जीवन के 16 संस्कारों में अंतिम संस्कार बताया गया है। किसी व्यक्ति के दाह संस्कार के बाद अस्थियों को एकत्र करना और फिर उनका विधि विधान से विसर्जन करना भी अंतिम संस्कार की महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है। अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में इसकी विधि तथा समय को लेकर कुछ अंतर जरूर देखने को मिलता है लेकिन धार्मिक मान्यताओं में अस्थि संचयन को मृतक के प्रति श्रद्धा और सम्मान से जोड़ा गया है

    अक्सर यह सवाल सामने आता है कि दाह संस्कार के बाद तीसरे या चौथे दिन ही अस्थियां क्यों चुनी जाती हैं। गरुड़ पुराण और हिंदू धार्मिक परंपराओं में इसके लिए अलग अलग मान्यताओं का उल्लेख मिलता है। कई परंपराओं में दाह संस्कार के दूसरे या तीसरे दिन अस्थियां एकत्र करने की बात कही गई है जबकि कुछ स्थानों पर मुखाग्नि देने वाले व्यक्ति से जुड़ी रस्म के अनुसार चौथे दिन अस्थि संचयन किया जाता है। इसे मृतक के प्रति परिवार का अंतिम कर्तव्य माना जाता है

    पुराने समय में श्मशान घाट अपेक्षाकृत शांत और कम भीड़ वाले होते थे। ऐसे में परिवार के लोग निर्धारित समय के अनुसार वहां जाकर अस्थियां एकत्र कर लेते थे। आज बड़े शहरों में स्थिति काफी बदल चुकी है। श्मशान घाटों पर लगातार अंतिम संस्कार होने के कारण राख और अस्थियों को लंबे समय तक उसी स्थान पर छोड़ना व्यावहारिक नहीं होता। इनके बिखरने या किसी दूसरी चिता की राख के साथ मिल जाने की आशंका भी रहती है। इसलिए कई परिवार वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए जल्द ही अस्थियां एकत्र कर लेते हैं

    अस्थियां चुनने के दौरान भी धार्मिक रीति का पालन किया जाता है। परिवार के सदस्य श्मशान स्थल पर जाकर प्रार्थना करते हैं और सावधानी से अस्थियों को एकत्र करते हैं। कई हिंदू परंपराओं में अस्थियों को दूध और पवित्र जल से स्नान कराने के बाद चंदन तथा फूल अर्पित करने की मान्यता है। इसके बाद अस्थियों को किसी पवित्र नदी में ले जाकर विधि विधान के साथ विसर्जित किया जाता है

    कई बार किसी कारण से परिवार निर्धारित तीसरे या चौथे दिन अस्थि विसर्जन नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घबराने की जरूरत नहीं मानी जाती। अस्थियों को सम्मानपूर्वक साफ और सुरक्षित स्थान पर रखा जा सकता है और बाद में परिवार की सुविधा तथा परंपरा के अनुसार किसी शुभ अवसर पर उनका विसर्जन किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में अपने परिवार के कुल पुरोहित या स्थानीय धार्मिक परंपरा के जानकार से सलाह लेना उचित माना जाता है क्योंकि अलग अलग क्षेत्रों में विधियां अलग हो सकती हैं

    हिंदू धर्म में गंगा नदी को विशेष रूप से पवित्र माना गया है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग हरिद्वार और वाराणसी जैसे तीर्थ स्थानों पर जाकर अस्थि विसर्जन करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गंगा में अस्थियों का विसर्जन करने से मृतक को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। हालांकि इन मान्यताओं का संबंध धार्मिक आस्था से है और इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए

    वर्तमान समय में धार्मिक परंपरा के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। अस्थि विसर्जन करते समय प्लास्टिक कपड़े या ऐसी अन्य सामग्री नदी में नहीं डालनी चाहिए जो जल को प्रदूषित करे। श्रद्धा और धार्मिक परंपरा का पालन करते हुए नदियों की स्वच्छता बनाए रखना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है

  • करोड़ों की दुनिया से दूर गांव में जिंदगी जी रही हैं कटरीना की मां सुजैन गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए छोड़ी लंदन की जिंदगी

    करोड़ों की दुनिया से दूर गांव में जिंदगी जी रही हैं कटरीना की मां सुजैन गरीब बच्चों को पढ़ाने के लिए छोड़ी लंदन की जिंदगी


    नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेत्री कटरीना कैफ की जिंदगी फिल्मों की चमक दमक और ग्लैमर से जुड़ी रही है। पिछले करीब दो दशक से ज्यादा समय से वह हिंदी सिनेमा में सक्रिय हैं और अभिनय के साथ अपना कारोबार भी संभाल चुकी हैं। हालांकि कटरीना की मां सुजैन टरक्वोट की जिंदगी इससे बिल्कुल अलग है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह लंदन की आरामदायक जिंदगी छोड़कर कई वर्षों से भारत के तमिलनाडु के मदुरई इलाके में रह रही हैं और अपना समय गरीब तथा जरूरतमंद बच्चों की मदद में लगा रही हैं

    सुजैन के भारत आने और यहां रहने की कहानी भी काफी अलग बताई जाती है। रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने वर्ष 2008 में लंदन छोड़ दिया था। इसके बाद वह मदुरई में रहकर बच्चों की शिक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए काम करने लगीं। शुरुआत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब बच्चों को मुफ्त ट्यूशन देने से हुई थी। धीरे धीरे उनका काम बढ़ता गया और शिक्षा के साथ स्वास्थ्य तथा बच्चों की सुरक्षा जैसे क्षेत्रों को भी इसमें शामिल किया गया

    सुजैन ने वर्ष 2015 में माउंटेन व्यू स्कूल की शुरुआत की थी। बताया जाता है कि शुरुआती दौर में यह एक छोटे नर्सरी स्कूल की तरह था जिसमें करीब 30 बच्चे पढ़ते थे। इनमें ज्यादातर बच्चे ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते थे। समय के साथ यह पहल आगे बढ़ी और बच्चों की संख्या भी बढ़ती गई। रिपोर्ट के मुताबिक अब करीब 300 बच्चे इस प्राइमरी स्कूल से जुड़े हुए हैं

    कटरीना भी कई मौकों पर अपनी मां के इस काम और समाजसेवा के प्रति उनके समर्पण के बारे में बात कर चुकी हैं। करीब एक दशक पहले अभिनेत्री ने बताया था कि उनकी मां मदुरई में स्कूल चलाती हैं और बच्चों को पढ़ाती हैं। कटरीना के अनुसार उनकी मां के भीतर जरूरतमंद लोगों की मदद करने की भावना कोई नई बात नहीं है बल्कि यह उनके स्वभाव का हिस्सा रही है

    सुजैन जिस जगह रहती हैं वहां सुविधाएं भी सीमित बताई जाती हैं। कटरीना ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि उनकी मां के पास हर समय बिजली की सुविधा नहीं रहती। कई बार इंटरनेट भी उपलब्ध नहीं होता जिसके कारण दोनों के लिए वीडियो कॉल पर बात करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मां बेटी को सामान्य फोन कॉल के जरिए बातचीत करनी पड़ती है। कटरीना ने यह भी बताया था कि उनकी मां गर्म मौसम में बिना एयर कंडीशनर जैसी सुविधाओं के रहती हैं

    कटरीना के मुताबिक उनकी मां ने लोगों की सेवा को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया है। अभिनेत्री खुद भी अपनी मां के काम में सहयोग करती रही हैं और बताया गया है कि उन्होंने स्कूल के लिए आर्थिक मदद भी की है। यह कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि एक तरफ कटरीना का जीवन फिल्म इंडस्ट्री की चमकदार दुनिया से जुड़ा है तो दूसरी तरफ उनकी मां ने लंबे समय से बेहद साधारण परिस्थितियों में रहकर बच्चों की शिक्षा के लिए काम करने का रास्ता चुना

    कटरीना की मां की यह पहल बताती है कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसकी आर्थिक स्थिति या सामाजिक प्रसिद्धि से नहीं होती। सुजैन ने अपने लिए अलग रास्ता चुना और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा को अपने काम का केंद्र बनाया। उनकी जिंदगी का यह पहलू लंबे समय तक बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर रहा लेकिन कटरीना के पुराने बयानों के जरिए समय समय पर सामने आता रहा है

  • छह महीने से इलाके में घूम रहे थे दो हाथी अचानक बिजली के तार ने ली एक की जान अब दूसरे गजराज को सुरक्षित बचाने की चुनौती

    छह महीने से इलाके में घूम रहे थे दो हाथी अचानक बिजली के तार ने ली एक की जान अब दूसरे गजराज को सुरक्षित बचाने की चुनौती


    मऊगंज । मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के मलकपुर इलाके में बिजली के तार की चपेट में आने से एक मखना हाथी की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि दो नर हाथियों की मौजूदगी पिछले कई महीनों से रीवा सीधी और मऊगंज क्षेत्र में बनी हुई थी। वन विभाग की टीम लगातार इनकी निगरानी कर रही थी। इसी दौरान मलकपुर गांव के पास एक हाथी बिजली के तार की चपेट में आ गया और उसकी जान चली गई। घटना के बाद वन विभाग ने मृत हाथी का पोस्टमार्टम कराया और प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसका अंतिम संस्कार किया गया

    स्थानीय लोगों के मुताबिक दोनों हाथी लंबे समय से क्षेत्र में घूम रहे थे। रात के समय उनके गांव के आसपास पहुंचने से ग्रामीणों में डर का माहौल बना रहता था। मलकपुर सरपंच सुरेंद्र गिरी ने दावा किया कि हाथियों की मौजूदगी को लेकर वन विभाग को लगातार सूचना दी जा रही थी। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों ने कई जगह फसलों को नुकसान पहुंचाया और कुछ ग्रामीणों के घर भी प्रभावित हुए। उनका आरोप है कि लगातार सूचना दिए जाने के बावजूद हाथियों को सुरक्षित तरीके से हटाने या रेस्क्यू करने के लिए पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई

    बताया गया कि घटना के समय मखना हाथी गांव के पास मौजूद था। इसी दौरान उसने अपनी सूंड ऊपर उठाई और वह बिजली के तार के संपर्क में आ गई। करंट लगने के बाद हाथी गंभीर रूप से झुलस गया और उसकी मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक गांव के आसपास बिजली के खंभे और तार हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्र के काफी नजदीक थे। यही स्थिति हादसे की वजह बनी

    वन विभाग के डीएफओ लोकेश निरापुरे के मुताबिक फरवरी से ही दोनों हाथियों की गतिविधियों को ट्रैक किया जा रहा था। इनमें से एक हाथी के गले में कॉलर आईडी लगी हुई थी जबकि दूसरे हाथी के पास कॉलर आईडी नहीं थी। विभाग के अनुसार दोनों नर हाथी आमतौर पर साथ रहते थे लेकिन घटना वाले दिन दोनों की लोकेशन में करीब दो से तीन किलोमीटर का अंतर सामने आया था। अधिकारियों के अनुसार कॉलर आईडी नहीं होने की वजह से दूसरे हाथी को लगातार ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण था

    मखना हाथी की मौत के बाद अब वन विभाग के सामने दूसरे हाथी को सुरक्षित रेस्क्यू करने की चुनौती है। सीधी के संजय टाइगर रिजर्व की रेस्क्यू टीम और रीवा मऊगंज वन अमले ने मौके पर पहुंचकर अभियान शुरू कर दिया है। कोशिश की जा रही है कि दूसरे हाथी को सुरक्षित तरीके से पकड़कर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में छोड़ा जाए ताकि वह आबादी वाले इलाकों से दूर रह सके और किसी अन्य हादसे की आशंका को कम किया जा सके

    इस घटना ने एक बार फिर वन्यजीवों के आवास और मानव बस्तियों के बीच बढ़ते टकराव को सामने ला दिया है। हाथियों की लगातार आवाजाही वाले इलाकों में बिजली के तार और अन्य मानव निर्मित ढांचे उनके लिए खतरा बन सकते हैं। फिलहाल वन विभाग की प्राथमिकता दूसरे हाथी को सुरक्षित रेस्क्यू करना है। साथ ही यह भी देखना होगा कि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था और निगरानी को किस तरह सुरक्षित बनाया जा सकता है

  • NPS Swasthya में पेंशन के साथ हेल्थ कवर का फायदा, ₹1,000 से शुरुआत और इलाज के लिए 25% निकासी की सुविधा

    NPS Swasthya में पेंशन के साथ हेल्थ कवर का फायदा, ₹1,000 से शुरुआत और इलाज के लिए 25% निकासी की सुविधा


    नई दिल्ली ।
    रिटायरमेंट के लिए बचत करने वालों के साथ अब स्वास्थ्य सुरक्षा को जोड़ने की दिशा में NPS Swasthya योजना महत्वपूर्ण है। इस योजना के तहत पेंशन अकाउंट के साथ सुपर टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस कवर जोड़ा गया है। योजना के नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू किए गए हैं। इसमें निवेश और हेल्थ इंश्योरेंस को दो अलग हिस्सों के तौर पर रखा गया है।

    NPS Swasthya में शामिल होने के लिए NPS में प्रवेश की पात्रता रखने वाले नागरिक आवेदन कर सकते हैं। योजना में फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस का विकल्प है, जिसके तहत खाताधारक के साथ पति या पत्नी और दो बच्चों को कवर किया जा सकता है। माता-पिता को इस स्टैंडर्ड पॉलिसी के तहत शामिल नहीं किया गया है।

    इस योजना की शुरुआत के लिए तीन तरह की राशि जरूरी होगी। इसमें पहले साल का इंश्योरेंस प्रीमियम, ₹200 का सालाना मेंटेनेंस चार्ज और NPS Swasthya खाते में कम से कम ₹1,000 का निवेश शामिल है। शुरुआती निवेश के बाद न्यूनतम ₹10 का योगदान भी किया जा सकता है।

    योजना में 18 से 70 वर्ष की उम्र के लोग प्रवेश ले सकते हैं। इसे 85 वर्ष की उम्र तक रिन्यू कराया जा सकता है। जमा राशि का निवेश केंद्र सरकार की पेंशन योजना से जुड़े निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा। इसके अलावा पेंशन फंड सालाना कॉर्पस पर 0.08 प्रतिशत तक चार्ज ले सकता है।

    हेल्थ इंश्योरेंस कवर के लिए अलग-अलग डिडक्टिबल विकल्प दिए गए हैं। ₹10,000 के डिडक्टिबल पर ₹1 लाख का सम इंश्योर्ड, ₹50,000 डिडक्टिबल पर ₹5 लाख का कवर और ₹1 लाख डिडक्टिबल पर ₹10 लाख का सम इंश्योर्ड उपलब्ध है। वहीं ₹3 लाख के डिडक्टिबल विकल्प के साथ फैमिली फ्लोटर के तहत ₹30 लाख तक का बीमा कवर मिल सकता है।

    डिडक्टिबल उस शुरुआती राशि को कहा जाता है, जिसे बीमा क्लेम से पहले खाताधारक को खुद या किसी दूसरी पॉलिसी के जरिए वहन करना होता है। इसके बाद की पात्र अस्पताल संबंधी लागत बीमा कवर के दायरे में आती है।

    योजना में इलाज और अस्पताल से जुड़े खर्च के लिए कुल जमा योगदान का 25 प्रतिशत तक निकालने की सुविधा भी दी गई है। इसके लिए किसी वेटिंग पीरियड की जरूरत नहीं बताई गई है और निकासी की संख्या पर भी कोई सीमा नहीं है। हालांकि निकाली जाने वाली राशि सीधे खाताधारक के बैंक खाते में देने के बजाय अस्पताल या हेल्थकेयर सेंटर को ट्रांसफर की जाएगी।

    इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान को लेकर भी व्यवस्था तय की गई है। रिन्यूअल के समय खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने पर पेंशन फंड की ओर से 90, 60 और 30 दिन पहले अलर्ट भेजे जाएंगे। अगर ग्रेस पीरियड समाप्त होने तक प्रीमियम का भुगतान नहीं किया जाता है, तो हेल्थ इंश्योरेंस बंद हो जाएगा और NPS Swasthya खाता सामान्य ऑल सिटिजन मॉडल में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

  • सिर्फ 5 मिनट में 70% चार्ज और 700 किमी तक रेंज! सनवोडा की नई EV बैटरी में क्या है खास जानिए पूरी डिटेल

    सिर्फ 5 मिनट में 70% चार्ज और 700 किमी तक रेंज! सनवोडा की नई EV बैटरी में क्या है खास जानिए पूरी डिटेल


    नई दिल्ली। इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है लेकिन चार्जिंग में लगने वाला समय अब भी ग्राहकों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी चुनौती के बीच चीन की बैटरी निर्माता कंपनी सनवोडा ईवीबी ने ऐसी नई बैटरी तकनीक पेश की है जिसे लेकर इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग में काफी चर्चा हो रही है। शानडोंग के झाओझुआंग में आयोजित एक बैटरी उद्योग सम्मेलन में कंपनी ने अपनी नई 15C LFP बैटरी तकनीक पेश की। कंपनी के मुताबिक यह बैटरी बेहद कम समय में बड़ी मात्रा में चार्ज हो सकती है और इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग को लेकर मौजूदा तस्वीर बदल सकती है

    सनवोडा के अनुसार नई 15C LFP बैटरी केवल 5 मिनट में 10 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक चार्ज हो सकती है। इतना ही नहीं कंपनी का दावा है कि करीब 9 मिनट में बैटरी 97 प्रतिशत तक चार्ज हो सकती है। कंपनी के मुताबिक चार्जिंग के दौरान वाहन को हर एक मिनट में लगभग 100 किलोमीटर की ड्राइविंग रेंज मिल सकती है। यही वजह है कि इस तकनीक को लेकर इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में काफी दिलचस्पी दिखाई जा रही है

    मौजूदा समय में कई प्रमुख कंपनियां भी तेज चार्जिंग तकनीक पर काम कर रही हैं। टेस्ला के सुपरचार्जर सिस्टम 250 किलोवाट तक की चार्जिंग क्षमता देने में सक्षम हैं जबकि कई आधुनिक बीएमडब्ल्यू इलेक्ट्रिक वाहन भी 250 किलोवाट तक की चार्जिंग स्पीड को सपोर्ट करते हैं। मर्सिडीज बेंज के कुछ मॉडल 200 से 330 किलोवाट तक की डीसी फास्ट चार्जिंग क्षमता के साथ आते हैं। ऐसे में सनवोडा का 15C बैटरी तकनीक को लेकर किया गया दावा खासा बड़ा माना जा रहा है

    हालांकि इतनी तेज चार्जिंग के साथ सबसे बड़ी चुनौती बैटरी का गर्म होना है। कम समय में बड़ी मात्रा में ऊर्जा बैटरी में पहुंचाने पर थर्मल स्ट्रेस बढ़ सकता है और इससे बैटरी की क्षमता तथा लंबे समय तक प्रदर्शन प्रभावित होने की आशंका रहती है। सनवोडा का कहना है कि उसकी नई तकनीक को इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। कंपनी के अनुसार अत्यधिक चार्जिंग लोड के दौरान भी बैटरी के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था की गई है

    ठंडे मौसम में भी इस बैटरी के प्रदर्शन को लेकर कंपनी ने बड़े दावे किए हैं। सनवोडा के मुताबिक माइनस 20 डिग्री सेल्सियस जैसे कम तापमान में भी बैटरी तेजी से चार्ज हो सकती है। कंपनी का दावा है कि ऐसे तापमान में 10 से 97 प्रतिशत तक चार्ज होने में करीब 15 मिनट लग सकते हैं और वाहन को लगभग 700 किलोमीटर तक की रेंज मिल सकती है

    तेज चार्जिंग के कारण बैटरी की उम्र कम होने की आम चिंता को लेकर भी सनवोडा ने अपनी तकनीक पर भरोसा जताया है। कंपनी ने नई बैटरी के लिए 10 साल या 3 लाख किलोमीटर की वारंटी देने की बात कही है। कंपनी के मुताबिक अल्ट्रा फास्ट चार्जिंग के इस्तेमाल पर भी इस वारंटी के लिए अलग प्रतिबंध नहीं लगाया गया है

    सनवोडा पहले से ही जीली डोंगफेंग और जीएसी जैसी चीनी वाहन कंपनियों को बैटरी सेल्स की आपूर्ति करती है। हालांकि 15C तकनीक के वास्तविक प्रदर्शन का आकलन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल और वास्तविक सड़क परिस्थितियों में होने के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल कंपनी के दावे अगर व्यावहारिक स्तर पर भी सफल साबित होते हैं तो ईवी चार्जिंग के क्षेत्र में यह तकनीक एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है

  • केतन हत्याकांड में अब परिवार की भूमिका पर उठे सवाल पिता बोले चार्जशीट पढ़ने के बाद ही बताऊंगा पूरी बात

    केतन हत्याकांड में अब परिवार की भूमिका पर उठे सवाल पिता बोले चार्जशीट पढ़ने के बाद ही बताऊंगा पूरी बात


    नई दिल्ली। पुणे के रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में अब उनकी मंगेतर सिया गोयल के परिवार के कुछ सदस्यों की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने सिया के परिवार के कई लोगों के मामले में शामिल होने का शक जताया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्होंने अभी पुलिस की ओर से दाखिल आरोपपत्र को नहीं पढ़ा है इसलिए वह आरोपपत्र की पूरी सामग्री देखने के बाद ही इस संबंध में विस्तार से अपनी बात रखेंगे। पुणे ग्रामीण पुलिस ने इस मामले में सिया गोयल उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी और चेतन के दोस्त रितेश हांगे के खिलाफ पांच हजार से अधिक पन्नों का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया है।

    मामला 18 जून की उस घटना से जुड़ा है जिसमें केतन अग्रवाल की लोहागढ़ किले से नीचे धकेले जाने के बाद मौत हो गई थी। पुलिस ने जांच के दौरान सिया गोयल चेतन चौधरी और रितेश हांगे को गिरफ्तार किया था। अब आरोपपत्र दाखिल होने के बाद केतन के परिवार की ओर से मामले में कई सवाल उठाए जा रहे हैं। केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने कहा है कि उन्हें सिया के परिवार के कुछ सदस्यों की कथित भूमिका पर भी संदेह है। उनके मुताबिक सिया के पिता मां भाई चाचा और चाची की भूमिका को लेकर उनके मन में सवाल हैं। हालांकि उन्होंने इन बातों को फिलहाल आरोपपत्र की जानकारी के आधार पर अंतिम रूप से नहीं कहा है।

    विशाल अग्रवाल ने आरोपपत्र की प्रति हासिल करने के लिए अदालत का रुख किया है। उनका कहना है कि जब तक वह पांच हजार से अधिक पन्नों वाले इस दस्तावेज को पढ़ नहीं लेते तब तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। वह आरोपपत्र में पुलिस ने किन लोगों के खिलाफ क्या तथ्य और सबूत रखे हैं यह जानने के बाद ही आगे टिप्पणी करना चाहते हैं। उन्होंने मामले की जांच को सही दिशा में आगे बढ़ने की बात भी कही है लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों की कथित भूमिका को लेकर उनका शक अभी बना हुआ है।

    इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी की कथित गुप्त शादी की खबर को लेकर भी केतन के पिता ने सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि दोनों की शादी पहले ही हो चुकी थी तो फिर सिया के परिवार की ओर से उनके बेटे के साथ उसकी शादी कराने की कोशिश क्यों की गई। इसी सवाल के आधार पर वह मामले की परिस्थितियों को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद कर रहे हैं। हालांकि कथित गुप्त शादी से जुड़े दावे और परिवार के सदस्यों की कथित भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति आरोपपत्र और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।

    केतन के पिता ने इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में कराने की मांग रखी थी। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को इस मामले में विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की मांग भी की है। उनका कहना है कि इन मांगों पर उन्हें अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है और वह सरकार से जरूरी अधिसूचना जारी करने का अनुरोध दोहरा रहे हैं।

    विशाल अग्रवाल ने अपने बेटे की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को मौत की सजा दिए जाने की मांग भी दोहराई है। फिलहाल मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हो चुका है और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में आरोपपत्र में दर्ज तथ्यों और सबूतों की जांच होगी। ऐसे में सिया के परिवार के अन्य सदस्यों की भूमिका को लेकर लगाए गए संदेह की वास्तविक स्थिति भी अदालत में सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगी।

  • इमरान खान की तीनों बहनें हिरासत में, PTI के इस्लामाबाद मार्च से पहले पाकिस्तान में बढ़ा सियासी तनाव

    इमरान खान की तीनों बहनें हिरासत में, PTI के इस्लामाबाद मार्च से पहले पाकिस्तान में बढ़ा सियासी तनाव


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की तीनों बहनों को हिरासत में लिए जाने के बाद देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उज्मा खान और नूरीन नियाजी को सोमवार को हिरासत में लिया गया, जबकि इससे एक दिन पहले उनकी तीसरी बहन अलीमा खान को 30 दिन की हिरासत में लिया गया था। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह कार्रवाई लाहौर के डिप्टी कमिश्नर के आदेश पर की गई है।

    यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर मार्च और प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया है।

    सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताकर कार्रवाई

    रिपोर्ट के मुताबिक, उज्मा खान और नूरीन नियाजी के खिलाफ पंजाब मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस, 1960 के तहत कार्रवाई की गई है। आदेश में उनकी गतिविधियों को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिहाज से नुकसानदेह बताया गया है।

    दोनों को कोट लखपत सेंट्रल जेल के अधीक्षक की निगरानी में रखे जाने की बात कही गई है। इससे पहले रविवार को PTI के अध्यक्ष गोहर अली खान ने अलीमा खान को हिरासत में लिए जाने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे हालात बिगाड़ने की दिशा में उठाया गया कदम बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की थी।

    बेटे ने कहा- सभी मामलों में जमानत मिली हुई है

    अलीमा खान को हिरासत में लिए जाने के बाद उनके बेटे शाहरेज खान ने आरोप लगाया कि रविवार सुबह घर से निकलने के बाद उनकी मां को हिरासत में ले लिया गया। शाहरेज के मुताबिक, लाहौर में अलीमा खान के खिलाफ चल रहे सभी मामलों में उन्हें जमानत मिली हुई है।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अधिकारियों से अलीमा खान की लोकेशन सार्वजनिक करने और उनकी सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करने की मांग की।

    पाकिस्तान के अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक, लाहौर के डिप्टी कमिश्नर ने अलीमा खान के ड्राइवर मुहम्मद आमिर को भी 30 दिनों के लिए हिरासत में लेने का आदेश दिया था।

    इमरान के बेटे कासिम ने भी लगाए आरोप

    इमरान खान के बेटे कासिम खान ने भी दावा किया कि पुलिस ने उनकी बुआ अलीमा खान को लाहौर में हिरासत में लिया है। उन्होंने अधिकारियों से अलीमा खान के परिवार और वकीलों को उनसे मिलने की अनुमति देने तथा उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।

    कासिम ने एक्स पर आरोप लगाया कि परिवार को यह जानकारी नहीं दी गई कि अलीमा खान को कहां रखा गया है और परिवार तथा वकील उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले उनके पिता को जेल भेजा गया और अब उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।

    तीनों बहनों की हिरासत और PTI के प्रस्तावित 27 सितंबर के इस्लामाबाद मार्च से पहले हुई कार्रवाई ने पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है।